पत्रकारों के सीट पर बैठने की टाइमिंग नोट करने वाले डिवाइस को लेकर द डेली टेलीग्राफ में बवाल

लन्दन के ‘द डेली टेलीग्राफ’  के पत्रकारों ने उनके डेस्क पर लगाए गए OccupEye नामक मोशन सेंसर एक ही दिन में हटाने पर मज़बूर कर दिया। ये सेंसर इस बात को रेकॉर्ड करते थे कि पत्रकार अपनी डेस्क पर कितने घंटे, मिनट और सेकण्ड्स बैठे। अख़बार प्रबंधन ने यह हिमाक़त कार्यालय में एसी / बिजली की खपत का अंदाज़ लगाने  के बहाने की थी। भारी विरोध के चलते सोमवार की सुबह लगाये गए मोशन सेंसर एक ही दिन में हटा लिए गए। 1855 में शुरू हुआ था लन्दन का  ‘द डेली टेलीग्राफ एंड कोरियर’, लेकिन उसके ‘मालिकों’ की मानसिकता आज भी 1855 की ही है।  अखबार के नाम, मालिक और सदियाँ बदल गईं, पर मानसिकता नहीं।

मां की महायात्रा पर पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने आठ पेज का अखबार छाप कर दी अनोखी विदाई

विजय मनोहर तिवारी ने अपनी मां श्रीमती सावित्री तिवारी को अलग तरीके से विदाई दी। उन्होंने अपनी मां की स्मृति में 8 पेज का वर्ल्ड क्लास का अखबार छापा है, जो केवल परिजनों के लिए है। इस अखबार में श्रीमती सावित्री तिवारी के जीवन से जुड़ी लगभग सभी बातों को पिरोने की कोशिश की गई है। विजय जी का कहना है कि जमींदार और राजे-महाराजे छत्रियां बनवाते थे, लेखक लोग किताब लिखते है, मूर्तिकार मूर्तियां बनाते है तो मैंने सोचा कि मैं अपनी मां के लिए अखबार निकाल दूं। इस अखबार में उनकी मां का लिखा हुआ दुनिया का सबसे संक्षिप्त सम्पादकीय भी है- ‘‘काए खों लिख रए हो? कौन पढ़ेगो? पप्पू तुम फालतू में दिमाग-पच्ची कर रए।’’

वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिन्दुस्तानी न्यू जर्सी के अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में इंटरनेट की भाषा पर व्याख्यान देंगे

इन्दौर। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिन्दुस्तानी 3 से 5 अप्रैल 2015 को न्यू जर्सी में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में वक्ता के रूप में आमंत्रित किए गए है। वे हिन्दी इंटरनेट की भाषा विषय पर व्याख्यान और उपस्थित श्रोताओं के सवालों के जवाब देंगे। इस अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन का आयोजन न्यूू जर्सी की रटगर्स यूनिवर्सिटी में होगा। इस सम्मेलन में रटगर्स यूनिवर्सिटी, भारतीय दूतावास और हिन्दी संगम नामक संस्था मिलकर कर रही है।

रजत शर्मा और सुभाष चंद्रा : पत्रकार का मालिक और मालिक का पत्रकार होना

अखबारों और केबल की दुनिया में यह बात आम है, लेकिन सेटेलाइट चैनलों की दुनिया में इसे अजूबा ही कहा जाएगा कि मालिक पत्रकार की तरह बनना चाहे और मालिक पत्रकार की तरह। रजत शर्मा का करियर पत्रकार के रूप में शुरू हुआ और आज वे इंडिया टीवी के सर्वेसर्वा है। दूसरी तरफ सुभाष चंद्रा है जिन्होंने बहुुत छोटे से स्तर पर कारोबार शुरू किया और पैकेजिंग की दुनिया से टीवी की दुनिया में आए। रजत शर्मा कभी इनके चैनल पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया करते थे। इतने बरसों में यह अंतर आया है कि रजत शर्मा सुभाष चंद्रा की तरह मालिक बन गए और सुभाष चंद्रा रजत शर्मा की तरह टीवी प्रेजेंटर बनने की कोशिश कर रहे है। चैनलों का मालिक होने का फायदा सुभाष चंद्रा को जरूर है, लेकिन इससे वे रजत शर्मा की बराबरी नहीं कर सकते।

दृष्टिहीन युवा बेटे की मौत के बाद समीर जैन कुछ-कुछ आध्यात्मिक हो गए!

: लेकिन हरिद्वार छोड़ते ही वे एकदम हार्डकोर बिजनेसमैन बन जाते हैं : देश की सबसे ज्यादा कमाऊ मीडिया कंपनी है – बैनेट, कोलमैन एंड कंपनी। यह कंपनी टाइम्स ऑफ इंडिया, इकॉनोमिक्स टाइम्स, महाराष्ट्र टाइम्स, नवभारत टाइम्स, फेमिना, फिल्मफेयर जैसे अनेक प्रकाशनों के अलावा भी कई धंधों में है। टाइम्स ऑफ इंडिया जो काम करता है, उसी की नकल देश के दूसरे प्रमुख प्रकाशन समूह भी करते है। यह कंपनी अनेक भाषाओं के दैनिक अखबार छापना शुरू करती है, तो दूसरे अखबार मालिक भी नकल शुरू कर देते है। दैनिक भास्कर समूह, दैनिक जागरण समूह, अमर उजाला समूह, राजस्थान पत्रिका समूह जैसे ग्रुप ‘फॉलो द लीडर’ फॉर्मूले के तहत चलते है। टाइम्स ने मुंबई टाइम्स शुरू किया, भास्कर ने सिटी भास्कर चालू कर दिया।

विदेश से आनेवाले ब्लैकमनी में से मुझे भी सवा सौ करोड़ भारतीयों की तरह 15 लाख रुपये मिलने की आशा है

मेरे तमाम लेनदार कृपया तत्काल तकादा लिखित में बासबूत पेश करें.  विदेश से आनेवाले ब्लैकमनी में से मुझे भी सवा सौ करोड़ भारतीयों की तरह 15 लाख रुपये मिलने की आशा है. 15 लाख मिलते ही सबकी पाई पाई चुका देने का वादा रहा.  एक साल से 15 लाख रुपए की प्लॉनिंग कर रहा हूं। 15 लाख कहां-कहां खर्च हो सकते है, इससे किस-किस का कर्जा पटाया जा सकता है, घर में क्या सामान आ सकता है, बीवी को कितने गहने दिला सकता हूं, बच्चों को कौन-सी गाड़ी सूट करेगी, बुढ़ापे के लिए कितने पैसे बचाकर रखना मुनासिब होगा आदि-आदि में उलझा हुआ हूं। मुझ जैसे मध्यवर्गीय आदमी के लिए 15 लाख बहुत मायने रखते हैं। कभी 15 लाख रुपए इकट्ठे देखे नहीं। हां, बैंक में जरूर देखे है, लेकिन वो अपने कहां। अने १५ लाख नगद हो तो बात ही क्या। कुछ न करो 15 लाख रुए खाते में ही रखे रहने दो, तो 12 – 13  हजार रुपए के आसपास ब्याज ही आ जाएगा। एक तरह से पेंशन समझो और मूल धन तो अपना है ही। यह पंद्रह लाख रुपए तो मेरे अपने है। बीवी, बच्चों सबके अपने-अपने पंद्रह लाख होंगे पर बीवी बच्चों के पैसे पर मैं निगाह क्यों डालूं। मेरा अपना भी तो स्वाभिमान है।

गंभीर बीमारी को मात देकर लौटे सुधीर तैलंग ने कार्टून प्रदर्शनी के जरिए फिर शुरू की सक्रियता

Prakash Hindustani : वाह ‎सुधीर तैलंग. ‬नई दिल्ली के इण्डिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल आर्ट गैलरी में कार्टूनिस्ट मित्र सुधीर तैलंग के कार्टूनों की प्रदर्शनी का शानदार आगाज़. श्रीमती सुमित्रा महाजन, लालकृष्ण आडवाणी, सीताराम येचुरी, अरविन्द केजरीवाल, शीला दीक्षित, अलका लाम्बा, बिशनसिंह बेदी और सुधीर का पूरा परिवार एकत्र था. इतने अच्छे कार्टून! और उनकी इतनी सुसंयोजित प्रदर्शनी देखकर लगा कि इंदौर से आना सार्थक रहा. बेहद अनूठा अनुभव.

आने वाले हैं कुछ नए न्यूज चैनल… बिड़ला टाइम, लाइव लूट, वोटशॉप18, चोरी ओके… (देखें पूरी लिस्ट)

दो कारणों से न्यूज़ चैनलों के नाम बदलने की ज़रूरत है : 1. चैनलों के मालिक नियमित रूप से बदलने लगे हैं और 2. न्यूज़ चैनलों पर न्यूज़ के नाम पर जो तमाशा दिखाया जा रहा है, उस कारण भी नाम बदल दिए जाने चाहिए. अगर आप नियमित न्यूज़ चैनल देखते हों तो यह बताने और समझाने की कोई ज़रूरत नहीं है कि किस तरह की खबरों को कौन सा चैनल किस तरह से दिखाएगा. पुरानी फिल्मों में जैसे जगदीश राज और ए के हंगल इंस्पेक्टर के रोल में ‘टाइप्ड’ हो गये थे, वैसे ही हमारे पत्रकार और मीडिया के पंच लोग भी ‘टाइप्ड’ हो गये हैं, और उनके मुँह खोलने से पहले ही बताया जा सकता है कि किस मुद्दे पर कौन सा व्यक्ति क्या बोलेगा।