यादव सिंह प्रकरण : यूपी में ‘ठाकुर’ और ‘सिंह’ दहाड़ रहे, मीडिया समेत बाकी बने घुग्घू,!

लखनऊ (उ.प्र.) : आईपीएस अमिताभ ठाकुर हों या आईएएस सूर्य प्रताप सिंह, इन दोनो जुझारू वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों ने उत्तर प्रदेश में वो कर दिखाया है, जो उम्मीद मीडिया और राजनीतिक विपक्ष से, कथित ईमानदार संगठनों से, जुझारू लेखकों और पत्रकारों से की जानी चाहिए थी। उनके साथ साथ इन वर्गों के लोग हैं जरूर, लेकिन पीछे-पीछे, चुप-चुप। उनमें न उतना साहस दिख रहा है, न उतनी इच्छा शक्ति कि वे सत्ता के कोप का सामना कर सकें। मीडिया तो अपनी गंदी आदत के अनुसार हर उसके साथ हो ले रहा है, जो उसे विज्ञापन दे दे। ये कैसी नीचता की पराकाष्ठा है। सीबीआई के शिकंजे में फंसे यादव सिंह प्रकरण में इन सबकी भूमिका ने उनके चेहरे से पर्दा हटा दिया है। खुल्लमखुल्ला ललकार रहे, दहाड़ रहे हैं तो सिर्फ ठाकुर और सिंह…

वरिष्ठ आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर के खिलाफ अब सतर्कता जांच भी शुरू हो गयी है. आईजी कार्मिक बी पी जोगदंड की ओर से श्री ठाकुर को भेजे पत्र में कहा गया है कि वे अपना और अपने पर आधारित व्यक्तियों के सम्पूर्ण चल-अचल संपत्ति का विवरण 19 जुलाई 2015 तक प्रस्तुत करें. 

 फाइल फोटो 

मुलायम-अमिताभ प्रकरण पर चुनी हुई चुप्पियां क्यों?

राजनीति से ही हमारी मीडिया की लाइन तय होती है। जिस विचारधारा का प्रभुत्व होता है वही राज करती है मीडिया के प्राइम टाइम के कार्यक्रमों में! दरअसल हाल ही के एक प्रकरण से यह बिल्कुल साफ हो गया! हाल ही में चर्चित आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के आडियो टेप के मामले का खुलासा हुआ है जिसमें कि मुलायम सिंह यादव एक आईपीएस अधिकारी को सुधर जाने की ‘सलाह’ देते हुए सुन जा सकते हैं। इस टेप का खुलासा तो फक्कड़ पत्रकार भड़ासी यशवंत सिंह ने किया। पर इसके ब्रेक होने के बाद भी लगभग 20 मिनट तक किसी भी न्यूज चैनल ने इस टेप को नहीं चलाया और ना ही हो हल्ला मचा। 

कमान्डेंट जी, कुक पद पर नियुक्त कर दें- राम नरेश यादव

मध्य प्रदेश में शायद राज्यपाल के स्तर से सीधे नियुक्ति कराने की परंपरा सी थी. व्यापम घोटाले में फंसे मध्य प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव द्वारा यूपी के आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को लिखे एक पत्र से ऐसा ही दिखता है.

पांडे, तिवारी और बोधिसत्व का बाभनावतार… तीनों एकसाथ गालियां बक रहे हैं : अनिल कुमार सिंह

Anil Kumar Singh : उदय प्रकाश जी को गरियाते -गरियाते खूंखार जातिवादी और सांप्रदायिक भेडियों का झुण्ड मुझ पर टूट पड़ा है. ये दुष्प्रचारक अपने झूठ की गटर में मुझे भी घसीट लेना चाहते हैं. दो कौड़ी के साम्प्रदायिकता और अन्धविश्वास फ़ैलाने वाले टी वी सीरियलों का घटिया लेखक मुझे गुंडा बता रहा है. ये परम दर्जे का झूठा है और अपने घटिया कारनामों के लिए शिवमूर्ति जैसे सरल और निश्छल लेखक को ढाल बनाता रहा है. इसे मेरी भाषा पर आपत्ति है. कोई बताओ कि ऐसे गिरे व्यक्ति के लिए किस भाषा का प्रयोग किया जाय. और, आमना -सामना होने पर इससे कैसा व्यवहार किया जाय.

वाह रे भिखारी ठाकुर का बिहार ! गया में भिखारियों ने खोला ‘मंगला बैक’ और पटना में बनाई नाटक मंडली

बिहार तो बिहार है, हर फन में अलखनिरंजन। वहीं के थे भिखारी ठाकुर। वहां जेपी जैसे आंदोलनकारी और लालू जैसे नेता ही नहीं हुए, आज भी आला-निराला कुछ न कुछ आए दिन वहां सुनने-देखने को मिल ही जाता है। गया जिले में भिखारियों ने अपना ‘मंगला बैंक’ खोल लिया है तो पटना में खुद की नाटक मंडली बनाकर जगह जगह भिखारी नुक्कड़ मंचन कर रहे हैं।

अस्थायी सभी पत्रकारों का दर्द एक समान

समाचार पत्रों याने छापा समाचार पत्रों के कर्मचारियों और पत्रकारों के वेतन आदि निर्धारण के संबंध में भारत सरकार ने न्यायमूर्ति जी. आर. मजीठिया को ”वेज बोर्ड”  नियुक्त किया था। इस ”वेज बोर्ड”  की सिफारिशें लंबे समय से सरकार के पास लंबित हैं और अभी तक न तो सरकार ने इनके क्रियान्वयन के लिये कोई पहल की है और न ही प्रिन्ट मीडिया के मालिकों ने। इसके विपरीत प्रिन्ट मीडिया के मालिकों ने ”मजीठिया वेज बोर्ड”  के खिलाफ अभियान शुरू किया है।

कैलाश चौरसिया को मंत्री पद से न हटाने पर याचिका दायर

लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश चौरसिया के तीन साल की सजा पाने के बाद कानूनन मंत्री नहीं रहने के कारण पद से हटाने की रिट याचिका दायर कर दी। याची के अधिवक्ता अशोक पाण्डेय हैं।