सीनियर कापी एडिटर राजेश्वर ने भी हिंदुस्तान बरेली पर ठोंका श्रम न्यायालय में क्लेम

बरेली से बड़ी खबर आ रही है कि हिंदुस्तान की बरेली यूनिट में मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक वेतनमान और बकाया एरियर को लेकर चीफ कॉपी एडिटर सुनील मिश्रा की अगुवाई में शुरू हुई लड़ाई दिनोंदिन तेज होती जा रही है। हालाँकि सुनील ने प्रबंधन के मनाने पर भले ही अपने कदम पीछे खींच लिए मगर मजीठिया की लड़ाई उनके अन्य साथी पूरी ताकत से लड़कर हिंदुस्तान प्रबंधन की नींद हराम किये हैं।

गुरुवार को हिंदुस्तान बरेली के सीनियर कॉपी एडिटर राजेश्वर विश्वकर्मा ने अपने हक़ की आवाज उठाते हुए बरेली के उप श्रमायुक्त रोशन लाल के समक्ष मजीठिया वेज बोर्ड के मुतबिक वेतनमान न मिलने की शिकायत के साथ ही कंपनी पर 26,13,945  रूपये बकाया एरियर का क्लेम दाखिल कर दिया। राजेश्वर ने डीएलसी से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके निर्देशों के क्रम में उनको मजीठिया वेज बोर्ड के वेतनमान के मुताबिक एरियर का हिंदुस्तान प्रबंधन बार-बार मांगने पर भी भुगतान नहीं कर रहा है। लिहाजा उनको दाखिल एरियर क्लेम का भुगतान दिलाया जाय। अगर कंपनी उनके आदेश पर भी क्लेम अदा न करे तो प्रबंधन की आरसी जारी कर वसूली कराके एरियर का भुगतान दिलाया जाय।

हिंदुस्तान बरेली में राजेश्वर विश्वकर्मा की छवि बेहद सीधे और मेहनती कर्मचारी की है। उनका मजीठिया की लड़ाई में अचानक उतारना इस बात का संकेत है कि बरेली हिंदुस्तान में कर्मचारियों ने मजीठिया को लेकर जंग का एलान कर दिया है। प्रबंधन न चेता तो स्थिति आने वाले दिनों में और विस्फोटक होगी। काफी लोग क्लेम बनवाकर श्रम न्यायालय में खड़े होने की पूरी तैयारी में हैं।

दरअसल 7 सितंबर को यूपी के श्रमायुक्त को मजीठिया के अनुसार वेतन न मिलने की बरेली हिंदुस्तान से चीफ कॉपी एडिटर सुनील कुमार मिश्रा की अगुवाई में सीनियर सब एडिटर रवि श्रीवास्तव, सीनियर सब एडिटर निर्मल कान्त शुक्ला, चीफ रिपोर्टर पंकज मिश्रा, पेजिनेटर अजय कौशिक ने शिकायत भेजी थी। श्रमायुक्त ने बरेली डीएलसी को प्रकरण निस्तारित करने का आदेश दिया, जिस पर डीएलसी बरेली सुनवाई कर रहे हैं।

17 मार्च शुक्रवार को डीएलसी बरेली सीनियर कॉपी एडिटर मनोज शर्मा के 33,35,623 रुपये, सीनियर सब एडिटर निर्मल कान्त शुक्ला के 32,51,135 रुपये, चीफ रिपोर्टर डॉ. पंकज मिश्रा के 25,64,976 रुपये के मजीठिया वेज बोर्ड के वेतनमान के अनुसार एरियर के दाखिल क्लेम पर सुनवाई करेंगे। पिछली तिथि पर डीएलसी रोशन लाल हिंदुस्तान प्रबंधन के विधिक सलाहकार श्रीवास्तव व बरेली के एचआर प्रभारी सत्येंद्र अवस्थी को चेतावनी के साथ तत्काल तीनो क्लेमकर्ताओं को उनके एरियर का भुगतान देने को कह चुके हैं। बरेली श्रम न्यायालय में 17 मार्च को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें हैं कि हिंदुस्तान तीनों क्लेमकर्ताओं का भुगतान करता है या फिर उपश्रमायुक्त बरेली हिंदुस्तान बरेली प्रबंधन की आरसी जारी करते हैं।

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मजीठिया क्रान्ति : लोकमत के पांच और मीडिया कर्मियों ने लगाया क्लेम

मुंबई : महाराष्ट्र में इन दिनों मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और प्रमोशन मांगने वाले मीडियाकर्मियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मीडियाकर्मी जोश खरोश के साथ अखबार मालिकों के खिलाफ अपने हक़ के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। यहाँ लोकमत के 5 और मीडियाकर्मियों ने रिकवरी क्लेम लगाया है।ये सभी कर्मचारी लोकमत की अकोला यूनिट में कार्यरत हैं। इन पांच कर्मचारियों ने असिस्टेंट लेबर कमिश्नर अकोला के यहाँ 17(1) के तहत रिकवरी क्लेम लगाया है।

इस बीच समान कार्य के लिए समान वेतन अस्थायी कर्मचारियों पर लागू संबंधी उच्चतम न्यायालय के फैसले का महाराष्ट्र के चर्चित पत्रकार नेता और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह ने स्वागत किया है. ज्ञात हो कि उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ का सिद्धांत उन सभी पर लागू किया जाना चाहिए जो दैनिक वेतनभोगी, अस्थायी और अनुबंधित कर्मचारियों के तौर पर नियमित कर्मचारियों की तरह ही ड्यूटी करते हैं. उच्चतम न्यायालय ने समान कार्य के लिए समान वेतन से इनकार को ‘‘शोषणकारी गुलामी,’’ ‘‘अत्याचारी, दमनकारी और जबर्दस्ती’’ करार दिया.

न्यायालय ने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य में सिद्धांत अस्थायी कर्मचारियों तक भी विस्तारित किया जाना चाहिए. न्यायमूर्ति जेएस खेहर और न्यायमूर्ति एस ए बोबड़े की एक पीठ ने कहा, ‘‘हमारी दृष्टि से श्रम के फल से वंचित करने के लिए कृत्रिम मानदंड बनाना गलत है. एक ही काम के लिए संलग्न किसी भी कर्मचारी को उस कर्मचारी से कम वेतन का भुगतान नहीं किया जा सकता जो वही कार्य और जिम्मेदारियां वहन करता है. निश्चित रूप से किसी भी कल्याणकारी राज्य में नहीं. ऐसा कदम अपमानजनक होने के साथ ही मानव गरिमा के आधार पर चोट करता है.’’ पीठ ने यह भी कहा कि ‘‘जिस किसी को भी कम वेतन पर काम करने के लिए बाध्य किया जाता है वह ऐसा स्वैच्छिक तौर पर नहीं करता. वह ऐसा अपने परिवार को भोजन और आश्रय मुहैया कराने के लिए अपने आत्मसम्मान और गरिमा की कीमत पर, अपने स्वाभिमान और ईमानदारी की कीमत पर करता है.’’

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‘हिन्दुस्तान’ और ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के साथियों से एक पत्रकार की अपील

“हिन्दुस्तान” और “हिन्दुस्तान टाइम्स” से पूरे देश में जुड़े साथियों से खुली अपील है कि आप मजीठिया वेज बोर्ड अवार्ड के लिये 17(1) के तहत जमकर क्लेम करें। अगर 11 नवम्बर 2011 के बाद कभी भी रिटायर हुये हैं या जबरन रिजाइन ली गई है तब भी आपका एरियर बनता है। एरियर बनवाने में कोई दिक्कत हो तो मुझसे सम्पर्क करें। अगर आप काम कर रहे हैं तो डरने की जरूरत नहीं है। कंपनी आपको ट्रांसफर करेगी, सस्पेंड कर सकती है, टर्मिनेट करेगी और इनके लोग धमकियां भी देंगे, जैसा कि इन दिनों पूरे देश में हो रहा है। लेकिन भरोसा रखें, ये बिगाड़ कुछ नहीं पाएंगे।

ये वही लोग हैं जो किसी खबर पर एक नोटिस (नाजायज नोटिस पर भी) पर सिर पकड़ लेते हैं। माफीनामा तक छापते हैं। ये लोग सिर्फ आपके डर का फायदा उठा रहे हैं। आप को भरोसा दिला रहा हूं कि अगर न्यूनतम वेतन (मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार) मांगने के बाद ये उत्पीड़न करते हैं, तो कोर्ट का ऐसा डंडा गिरेगा कि अक्ल ठिकाने आ जाएगी। अगर कोई धमकी देता है तो मुकदमे की तहरीर दें। पुलिस प्रभाव में मुकदमा नहीं लिखेगी, लेकिन कोर्ट से 156/3 में मुकदमा / परिवाद जरूर दर्ज होगा।

भरोसा रखिये, जब आप आंखों में विश्वास के साथ मैदान में होंगे तो इनकी रूह कांप जाएगी। रोजी-रोटी का भय मन से निकाल दें। कचहरी के बाहर चिट्ठी टाइप करेंगे तब भी हजार रूपया रोज लेकर जाएंगे। मंदिर के बाहर शादी-ब्याह की फोटो बनाएंगे तब भी बच्चे भूखे नहीं मरेंगे। कुछ नहीं कर सकते तो मुझसे मिलियेगा, आपके साथ आपके लिये भीख मांगेंगे। चाय भी बेच लेंगे। विश्वास करें, यह सब ज्यादा दिन नहीं करना पड़ेगा।

हमारे डर का लाभ कंपनी को नहीं मिलना चाहिये। हम कटोरा लेकर घूमेंगे लेकिन उन कथित नये नजरिये का दावा करने वाले क्रूर लोगों से लड़ेंगे, जो कद-पद में हमसे बहुत बड़े हैं, लेकिन कलेजा बहुत छोटा है। हमारे हक पर कुंडली मारकर बेठे हैं। ये वही लोग हैं जो योग्यतम पत्रकार और प्रोफेशनल्स की बात करते हैं और तनख्वाह देते हैं नगर निगम कर्मचारी के चतुर्थ श्रेणी के साथी से भी कम। ये चाहते हैं कि पत्रकार हमेशा समाज की सहानुभूति पर पलें और इनकी अपनी जेबें भरती रहें।

कुछ साथी यह भी सोच रहे हैं कि वे मीडिया में जो सम्मान पा रहे हैं, वह बाहर आने पर नहीं पाएंगे। आपकी सोच आंशिक सत्य हो सकती है। पूरा सच नहीं है। एक बात का विश्वास दिलाता हूं कि अगर आप मजीठिया की जंग लड़े तो भले ही कुछ दिनों के लिये अखबार से बाहर जाना पड़ेगा लेकिन आपकी कई पीढ़ियां सम्मान पाएंगी। समाज में लोग आपकी मिशाल देंगे और आपके बच्चों की तरफ हाथ दिखाकर कहेंगे कि इसके बाप/दादा हक के लिये बिड़ला जी की कंपनी से भिड़े थे।

अब डरिये मत। थोड़ा हिम्मत जुटाइये। क्लेम करिये। अगर क्लेम के बाद कार्रवाई हो तो साक्ष्य जुटाइये। हम सभी कोर्ट से बहाली पाएंगे। अगले विजयादशमी के पहले सारे रावण जलेंगे। अब तक एचएमवीएल और एचटी मीडिया के जिन साथियों ने क्लेम किया है और कार्रवाई हुई है, वे मुझसे सम्पर्क करें। हम उनका साथ देंगे।

दोस्त, जो साथी यह सोच रहे कि उन्हें घर बैठे लाभ मिल जाएगा, वे पूरी तरह सही नहीं हैं। ऐसा कोई चमत्कार नहीं होगा। अभी भी वक्त है, देर न करें। क्लेम लगाएं। दिक्कत हो तो फोन करें या कभी भी ई-मेल करें।

आपका साथी
वेद प्रकाश पाठक
पूर्व सीनियर स्टाफ रिपोर्टर
हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड (गोरखपुर यूनिट)
मोबाइल-8004606554
cmdsewa@gmail.com

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मजीठिया : एडवोकेट उमेश शर्मा जी ने जारी किया क्लेम फार्मेट, जो साथी बाकी हैं वो जरूर भरें

सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर के पत्रकारों का केस लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने एक मैसेज के साथ 17(1) का क्लेम फार्मेट जारी किया है। एडवोकेट उमेश शर्मा ने कहा कि देश भर के सभी साथी इस क्लेम फ़ार्म को भरकर जरूर लेबर कमिश्नर कार्यालय में जमा कर दें। ये सिर्फ वही साथी भरेंगे जिन्होंने 17(1) के तहत अब तक लेबर विभाग में क्लेम नहीं लगाया है। इस क्लेम फार्मेट को लेबर कमिश्नर के कार्यालय में भरकर जमा करना है और रिसीव कराकर एक प्रति अपने पास रखना है।

एडवोकेट उमेश शर्मा का मैसेज…

उच्चतम न्यायालय में २३ / ८ / 2016  की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आ है कि १७(१) दायर करना जरूरी है. सभी लोग निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें :

१. यह एप्लीकेशन कोई कर्मचारी अपने हस्ताक्षर द्वारा या कोई यूनियन सभी कर्मचारियों की तरफ से लगा सकती है जिस पर कर्मचारी के हस्ताक्षर जरूरी नहीं हैं। यह जरूरी है कि उस कर्मचारी को मिल रहा वेतनमान और मजीठिया वेज बोर्ड के तहत मिलने वाले वेतनमान की तालिका लगी हो जिसमें कुल बकाया स्पष्ट रूप से दिखाया गया हो।

२. कर्मचारी और यूनियन इस बात की भी शिकायत कर सकती हैं कि प्रबंधकों ने उनसे जबदस्ती 20(जे) पर दस्तखत करवाया है और इसे अमान्य समझा जाये और प्रबंधकों के खिलाफ कार्यवाही की जाये क्योंकि कर्मचारी को लाभ से वंचित रखा गया है।

३. प्रबंधन का पूरा नाम पता स्पष्ट रूप से लिखा जाये, जैसा कि आपकी नियुक्ति पत्र में दिया गया है।

४. जो लोग सेवानिवृत हो चुके हैं, त्यागपत्र दे चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है उनके बच्चे इस लाभ के हक़दार हैं और उनसे भी संपर्क कर उन्हें साथ लिया जाना चाहिए। ध्यान रहे कि ऐसे लोगों को प्रबंधन न तो डरा सकती है न ही उनसे कुछ जबरदस्ती लिखवा कर ले सकती है।

५. श्रम अधिकारियों द्वारा कार्यवाही नहीं करने पर उनको नोटिस दिया जाना चाहिए और उनकी शिकायत उच्च अधिकारियों को करना चाहिए।

क्लेम फार्मेट ये है….

BEFORE THE DESIGNATED AUTHORITY  UNDER THE WORKING JOURNALISTS AND OTHER NEWSPAPER EMPLOYEES (CONDITIONS OF SERVICE) AND MISCELLANEOUS PROVISIONS ACT, 1955.

SUB: ISSUANCE OF RECOVERY CERTIFICATE IN COMPLIANCE OF THE ORDERS DATED 28/4/2015, 12/1/2016, 14/3/2016, 23/8/2016  PASSED BY THE HON’BLE SUPREME COURT OF INDIA IN CCP NO. 128/2015 & 129/2015 AND WP (C) 246/2011 DATED 7/2/2014.

NAME & ADDRESS OF THE MANAGEMENT:

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Sir,

1. The management named above is a newspaper establishment,  the employees of the establishment are  entitled to the  benefits of the Majithia Wage Board notification w.e.f. 11/11/11  as notified by the Central Government .

2. The management alongwith several other newspapers challenged the Majithia Notification before Supreme Court of India instead of implementing the same. The Hon’ble Supreme Court of India finally dismissed the petitions filed against Majithia Notification and issued specific directions for the release of the benefits of Majithia Wage Board notification vide its orders dated 7/2/2014 within  a period of one year w.e.f. 7/2/2014 alongwith arrears, the operative part of the directions of Supreme Court are reproduced hereunder for ready reference and compliance:

“71) Accordingly, we hold that the recommendations of  the Boards are valid in law, based on genuine and acceptable considerations and there is no valid ground for interference under Article 32 of the Constitution of India.

72) Consequently, all the writ petitions are dismissed with no order as to costs.

73) In view of our conclusion and dismissal of all the writ petitions, the wages as revised/determined shall be payable from 11.11.2011 when the Government of India notified the recommendations of the Majithia Wage Boards. All the arrears up to March, 2014 shall be paid to all eligible persons in four equal installments within a period of one year from today and continue to pay the revised wages from April, 2014 onwards.

74) In view of the disposal of the writ petitions, the contempt petition is closed.”

3. The management named above did not implement the aforesaid wage board notification and started extracting the signatures of the employees on pre-typed formats forcibly on threats of their jobs and started claiming that the recommendations of the wage board are not applicable on it. The aforesaid act of the management is in gross violation of Section 13 of the Working Journalists (C&S) and Misc. Provisions Act, 1955 as the working journalists are entitled to wages at rates not less than those specified in order.

4. Several Contempt of Court Petition has been filed by the deprived employees and their unions which are pending before the Honb’le Supreme Court of India and the court has reiterated that the newspaper establishments are under obligation to pay the dues to the employees in terms of its directions . The court vide its orders dated 23/8/2016 has now directed the adjudication of the claim of the employees under Section 17 of the WJ Act by the labour commissioner. The operative part of the said order is reproduced hereunder for ready reference and compliance:

“We elaborate the aforesaid directions in the following manner :-

(a) In respect of such of the establishments which have been reported by the Labour Commissioner in his affidavit/report not to have implemented the recommendations of Majithia Wage Board the detailed facts which had led the Labour Commissioner to arrive at the said conclusion be laid before the Court after giving the affected party an opportunity of hearing.

(b) The management of each of the establishments will be bound under the

present order to furnish to the Labour Commissioner all such records, reports, documents and information that the Labour Commissioner deems it necessary to consider before passing apprppriate orders in terms of direction (a).

(c) The Labour Commissioner may, if he considers it necessary, in an appropriate case, himself visit the premises of an establishment to satisfy himself as to the implementation of the recommendations of the Majithia Wage Board.

(d) It will be open for each affected employee to lay before the State Government/Labour Commissioner, the details of the amount that he/she claims to be due under the recommendations of the Majithia Wage Board over and above the emoluments drawn by him.

If such a resort is made to the State Government/Labour Commissioner the

concerned authority would be fully empowered to carry out necessary adjudication and pass consequential orders in terms of Section 17 of the Act.”

6. That the scheme of the Working Journalists Act is very clear and Section 17(1) of the said Act provides mechanism for recovery of the dues from an employer. A combined reading of all these provisions make it crystal clear that the management of the newspaper establishments have no choice then to pay the benefits recommended by the Wage Board which has a statutory force and the employer cannot escape the same under any circumstances. Section 17 (1) of the Act is being reproduced hereunder for ready reference;

“17. Recovery of  money due from an employer- (1) Where any amount is due under this Act to a newspaper employee from an employer, the newspaper employee himself or any person authorized by him in writing in this behalf , or in the case of death of the employee, any member of his family may, without prejudice to any other mode of recovery, make an application to the State Government, for the recovery of the amount due to him, and if the State Government , or such authority, as the State Government may specify in this behalf , is satisfied that any amount is so due, it shall issue a certificate for that amount to the Collector, and the Collector shall proceed to recover that amount in the same manner as an arrears of land revenue.”

1.            That the claimant was not paid his dues accruing under the Wage Board Notification which ultimately merged with the directions dated 7/2/2014 passed by the Hon’ble Supreme Court quoted here. The management even did not comply with the same and remained making excuses one after the other in the meanwhile the claimant retired from the services. The disputes being created by the management are worth rejection as such disputes can not be raised under Section 17 (1) of the WJ Act as the claim of the employee is based on statutory wage boards.

2. That the dues of the claimant are due under the Majithia Wage Board and the directions dated 7/2/2014 hence the same can be recovered under Section 17 (1) of the Act hence this application.

3. That the claimant has been demanding the said dues since the notification issued by the Central Government however, the management has been making excuses one after the other and has now refused to pay the same to the claimant out rightly.  The claimant is thus entitled to the entire dues besides the interest @ 24% on the due amount with the cost of present proceedings.
4. That the management is also liable for prosecution for its act of violation of the WJ Act, the workman reserves his rights to initiated proceedings against the management in this regard besides imitating the contempt of court proceedings against the management.
5.  That the management be directed to submit entire details regarding the implementation of the wage board recommendations before the labour authorities in compliance of the orders of the Supreme Court dated 23/8/2016, stated above failing which prosecution proceedings under Section 18 of the WJ Act be initiated against the management.
6.  That the dues of the claimant detailing his entitlement under the Majithia Wag Board and the difference of the amount being paid to the claimant  are given in ANNEXURE-A.
7.  It may please be noted that the present application has been filed under Section 17 (1) of the WJ Act and the Labour Commissioner is directed to adjudicate the same in terms of the directions of the Supreme Court dated 23/8/2016 hence the same be done at the earliest. Since the employee has not preferred the application under Section 17 (2), the same can not be referred for adjudication under the misguided pressure of the management as the same would attract contempt of court against the labour commissioner.

PRAYER

It is therefore prayed that orders of Supreme Court be complied with a recovery certificate of the dues of the workman be issued and a status report to this effect be filed before the Supreme Court of India as directed.
EMPLOYEE

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Zee News की HR policy की तारीफ़ करनी होगी, बीमा के जरिए रिपोर्टर शिवम की जान की कीमत 25 लाख आंकी गई

Vinod Kapri : शिवम् भट्ट। इस बच्चे को मैं जानता नहीं हूँ। ना कभी मिला। पर जब से शिवम् की मृत्यु का समाचार पढ़ा और सुना-मन बेहद उदास है। शिवम् का ज़िक्र आते ही टीवी के वो सैकड़ों शिवम् आँखो के सामने से गुज़रने लगते हैं जो दिन रात , सूखा बरसात , गर्मी सर्दी देखे बिना ख़बर की खोज में लग जाते हैं। मुंबई हमला हो , केदारनाथ त्रासदी हो या कश्मीर की बाढ़ हो – हर मैदान में रिपोर्टर या कैमरामैन बस बिना कुछ परवाह किए कूद पड़ते हैं। ऐसी हर कवरेज के दौरान मुझे इन लोगों की हमेशा सबसे ज़्यादा फ़िक्र रही। ना जाने कितने लोग इसके गवाह होंगे।

शिवम् के बहाने आज फिर अपने दोस्तों से अपील करना चाहूँगा। कवरेज कितनी ही ज़रूरी क्यों ना हो , ड्राइवर पर बिलकुल दबाव मत डालो कि वो तेज़ चलाए। दफ़्तर से दबाव कितना ही हो – कवरेज के दौरान रिस्क मत लो। मैं जानता हूँ कि बीसियों बार अपने रिपोर्टर से कुछ ख़ास करने के लिए मैंने भी कहा होगा पर साथ ही आख़िरी में एक बात हमेशा जोड़ी कि किसी भी क़ीमत मे रिस्क नहीं। खाने पाने का ख़्याल रखो। बीमार हो जाओ तो तुरंत इलाज कराओ। हो सकता है कुछ लोगों को अजीब लग रहा हो पर आज शिवम् के बहाने इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि ज़्यादातर न्यूज़ चैनलों में आपके जाने के बाद आपके परिवार को पूछने वाला एक व्यक्ति भी नहीं होता।

Zee News की HR policy की तारीफ़ करनी होगी कि बीमा के ज़रिए एक रिपोर्टर की जान की क़ीमत 25 लाख तो आँकी गई पर दुर्भाग्य ये है कि ज़्यादातर संस्थानों , नब्बे फ़ीसदी चैनलों मे एक रिपोर्टर की जान की क़ीमत 2 लाख भी नहीं है। साथी-दोस्त उसके बाद अपनी एक एक दिन की सैलरी देकर कुछ कर दें तो ठीक है वर्ना संस्थान से उम्मीद बेमानी है।

इसलिए दोस्तों !! ख़ासतौर पर फ़ील्ड मे जाने वाले सभी दोस्तों – फ़ील्ड मे आप लोग सबसे पहले अपना ख़्याल रखिए। ख़बर अहम होती है , होनी भी चाहिए पर जान की क़ीमत पर नहीं। शोले का वो संवाद याद आ रहा है – जानते हो दुनिया का सबसे बड़ा दुख क्या होता है ? बाप के कंधे पर जवान बेटे का जनाजा। आप सब भी जवान हो। माता पिता की उम्मीदें हो। सपने हो। सबकुछ करो पर जान की क़ीमत पर कुछ नहीं !!

शिवम् भी सिर्फ़ 24 साल का था। बताया गया कि अभी 3 या 4 दिसंबर को वो 25 का हो जाता। उसके परिवार का दर्द हम समझ ही नहीं सकते। ये भी सुना है कि उसने अपनी आख़िरी स्टोरी का स्लग दिया था – Shivam Final input !!! तब कौन जानता था कि उसके लिखे को हम आज इस रूप में पढ़ रहे होंगे। शिवम् को मेरी श्रद्धांजलि और आप सबसे फिर अपील- अपना ख़्याल रखिएगा।

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हिसार लाठीचार्ज में घायल पत्रकार मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

नई दिल्ली: हिसार के बरवाला में सतलोक आश्रम से रामपाल की गिरफ्तारी से जुड़ी पुलिसिया कार्रवाई में घायल हुए पत्रकार विकास चंद्रा की हालत इतनी खराब हो गई है कि उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इस घटना में घायल अन्य चार पत्रकार ने घटना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। पत्रकारों ने मामले की जांच कराने और मुआवजे देने के लिए यह अपील की है।

अपनी अपील में पत्रकारों ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंत्र मीडिया पर पुलिस द्वारा हमला किया गया है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान एक टीवी पत्रकार को गोली मार दी गई। हिसार में बिना किसी वजह के पुलिस ने मीडियावालों पर लाठी चार्ज किया जिसमें कई पत्रकार घायल हो गए और कई कैमरे और कीमती सामान टूट गए। अपील में कोर्ट से अपेक्षा की गई है कि मीडिया गाइड लाइंस तैयार हों जिससे मीडिया ऐसी घटनाओं में निशाना न बनें।

इसी मामले पर Ayush Kumar कुमार अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं: ” …अब मुद्दे की बात, हल्ला बोल जरूरी है। तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति विकाश चन्द्रा सर हैं। ये लाइव इंडिया से जुड़े हैं। बेवजह नपुंसकों द्वारा पिटाई किये जाने की वजह से अस्पताल मे हैं। क्या अब यह मुद्दा उठाना सही नहीं होगा कि कौन से लोकतंत्र में उसके चौथे स्तम्भ के पहरेदार को 20-20 पुलिस वाले डंडों की बरसात करते हैं? कुछ तो करना होगा हमें… यदि चुप रहे तो कायरता होगी… क्या सोशल मीडिया में हल्ला बोल किया जाये या कुछ और? इन सबके बीच सही मीडिया के पक्ष में हमेशा खड़े होने वाले Yashwant Singh सर से मीडिया जगत को बहुत उम्मीद है… उम्मीद है भड़ास4मीडिया के द्वारा हम-सब के गुस्से को सबके सामने रखेंगे…

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