ये मीडिया को ‘विलेन बनाने’ का दौर है

Dilnawaz Pasha : ये मीडिया को ‘विलेन बनाने’ का दौर है. भारत में ‘प्रेस्टीट्यूट’ शब्द को स्वीकार कर लिया गया है और एक धड़ा जमकर इसका इस्तेमाल कर रहा है. सरकार ने मंत्रालयों में पत्रकारों की पहुंच कम कर दी है. यहां तक कि प्रधानमंत्री अपनी यात्राओं में पत्रकारों को साथ नहीं ले जा रहे हैं, जैसा कि पहले होता था.

अमरीका में ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वो ‘मीडिया को ही विपक्ष’ बना लेंगे. डोनल्ड ट्रंप कई बार मीडिया संस्थानों के लिए भद्दी भाषा का प्रयोग कर चुके हैं और कई स्थापित चैनलों को फ़र्ज़ी तक कह चुके हैं. ऐसा करके वो अपने एक ख़ास समर्थक वर्ग को ख़ुश भी कर देते हैं.

दुनिया में नया ऑर्डर स्थापित हो रहा है. इसमें पत्रकारों को भी अपनी नई भूमिका तय करनी होगी. जब अपनी बात पहुँचाने के लिए नेताओं के पास ‘सोशल मीडिया’ है तो वो ‘स्थापित मीडिया’ से दूरी बनाने में परहेज़ क्यों करेंगे?

मुझे लगता है कि ऐसे बदलते परिवेश में वो ही पत्रकार कामयाब होंगे और पहचान पाएंगे जो संस्थानों के समकक्ष स्वयं को स्थापित कर लेंगे. ‘बाइट-जर्नलिस्टों’ की जगह ‘विषय विशेषज्ञों’ की पूछ होगी.

जिस दौर में स्थापित मीडिया को विलेन बनाया जा रहा है उस दौर में पत्रकारों के पास ज़मीनी रिपोर्टिंग करके ‘हीरो’ बनने का मौक़ा भी है.

पत्रकार दिलनवाज पाशा की एफबी वॉल से.

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कुछ ईसाइयों ने कुछ कुत्सित हिंदुओं के साथ मिल कर दुर्गा को ‘वेश्या’ साबित करने की कोशिश की है

( File Photo Samarendra Singh )

Samarendra Singh : इन दिनों मेरे पास कुछ ई-मेल आ रहे हैं महिसासुर के बलिदान को लेकर। यह किसी दंगाई की सोच रही होगी जिसे लगता होगा कि वह इतिहास दुरुस्त कर देगा। ठीक वैसे ही जैसे कुछ लोग अयोध्या में इतिहास दुरुस्त करना चाहते हैं। अरे भई अब तक कोई ऐसा क्रांतिकारी पैदा ही नहीं हुआ जो अतीत को करेक्ट कर सके। फिर यह तो अतीत भी नहीं … अतीत का एक धार्मिक मिथक है। मैं इस दंगाई सोच का विरोध करता हूं और उन तमाम क्रांतिकारियों से अपील करता हूं कि मुझे ई-मेल नहीं भेजा करें। मुझे शांति से जीने दें। इस ई-मेल में संविधान का हवाला दिया गया है। तो क्या संविधान यह इजाजत देता है कि कोई मूर्ख किसी के भगवान या खुदा का अपमान करे? क्या यह अधिकार मुझे है कि किसी दिन मैं किसी भी धर्म के नायक को अपराधी करार देते हुए उसके विरोधियों को खुदा घोषित कर दूं?

Samarendra Singh : इस देश में छिछोरों की कोई कमी नहीं है. दंगाई की भी कोई कमी नहीं है. लेकिन यहां एक तबका ऐसा है जो दंगाइयों से भी ज्यादा घिनौना है. यह तबका बौद्धिक खोल में छिपा रहता है. इसका काम है वह आधार तैयार करना जिससे दंगा हो. यह तबका बडे़ ही महीन तरीके से धर्मनिरपेक्षता का खून करता है और अपनी अय्याशियों का सामान इकट्ठा करता है. ऐसा ही एक तबका इन दिनों फॉरवर्ड प्रेस नाम की किसी कुत्सित संस्था से जुड़ा हुआ है. यह फॉरवर्ड प्रेस किसका है? यह फॉरवर्ड प्रेस एक ईसाई का है. एक ईसाई व्यक्ति और संस्था का हिंदू देवी देवताओं से क्या लगाव हो सकता है? यह सवाल करने पर सारी तस्वीर साफ हो जाती है.

इस संस्था के पास कुछ खास किस्म के बुद्धिजीवियों ने (जो दरअसल बेहद क्रूर और शातिर किस्म के व्यक्ति हैं) अपना जमीर गिरवी रख दिया है. लेकिन जमीर गिरवी रखना और निजी लाभ के लिए दंगा भड़काने की साजिश रचना दोनों दो बाते हैं. इन बुद्धिजीवियों ने जमीर गिरवी रखने के साथ दंगा भड़काना भी शुरू कर दिया है. मतलब यह सारे बुद्धिजीवी जिन्होंने उस ई-मेल पर अपने हस्ताक्षर किया है या फिर अपना समर्थन दिया है वह सब मेरी नजर में गुजरात के दंगाइयों की तरह ही घृणित, क्रूर और वहशी हैं. और जिस तरह का वह लेख है, जिसमें हिंदू धर्म की “शक्ति” को अपमानित किया है और महिषासुर के जांघों पर बैठा दिखाया गया है और “वेश्या” बताया गया है … उससे यह जाहिर होता कि यह सब बीमार मानसिकता वाले व्यक्ति हैं… जिन्हें संविधान का जरा भी इल्म नहीं है. इन्हें तो यह भी इल्म नहीं कि यह इतिहास और धार्मिक मिथकों को बदलने की जिस परंपरा की नींव डाल रहे हैं उसके कितने खतरनाक नतीजे निकलेंगे.

जिस तरह कुछ ईसाइयों ने कुछ कुत्सित हिंदुओं के साथ मिल कर दुर्गा को “वेश्या” साबित करने की कोशिश की है और उस प्रकरण के समर्थन वाले पत्र पर कुछ मुसलमानों ने भी दस्तखत किए हैं… उसी तरह भविष्य में कोई हिंदू या मुसलमान ईसा मसीह या फिर कोई हिंदू और ईसाई पैगंबर मोहम्मद के बारे में इसी तरह ओछी और घृणित बातें लिख सकता है!! तब भी क्या वह संविधान के दायरे में लिखी गई बात होगी?? इसलिए आज जो कोई भी इस प्रकरण में फॉरवर्ड प्रेस का समर्थन कर रहा है, वह मेरी नजर में दंगाइयों से ज्यादा घृणित है. मैं उन सब पर लानत भेजता हूं. और उनमें से कुछ जो मेरी फ्रेंड लिस्ट में थे आज उन्हें इस हक से बेदखल करता हूं.

एनडीटीवी में काम कर चुके पत्रकार समरेंद्र सिंह के फेसबुक वॉल से.

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‘मूर्खों ये क्या कर रहे हो’ कहते हुए माराडोना ने पत्रकार को मारा थप्‍पड़

अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में एक कार्यक्रम में सपरिवार हिस्सा लेने गए भूतपूर्व फ़ुटबॉल खिलाड़ी डिएगो माराडोना ने एक पत्रकार को थप्पड़ लगा दिया. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़ माराडोना की कार को देखते ही वहां मौजूद प्रशंसकों और पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया. वे कार से उतरे, एक पत्रकार की तरफ बढ़े और अचानक उसे चांटा रसीद कर दिया.

उन्होंने उस पत्रकार को अपशब्द भी कहे. विश्व के सर्वश्रेष्ठ फ़ुटबॉल खिलाड़ियों में शुमार माराडोना का विवादों से लंबा नाता रहा है और मीडिया से भी उनके संबंध मधुर नहीं रहे हैं. अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान दो बार उन्हें प्रतिबंधित दवाओं के सेवन की वजह से बैन झेलना पड़ा था.

अपने छोटे बेटे डिएगो फर्नांडो और पत्नी वेरोनिका ओजेदा के साथ एक कार्यक्रम में पहुंचे माराडोना की कार के चारो ओर पत्रकारों का जमावड़ा लग गया. कार्यक्रम से बाहर निकलने के बाद मारोडोना ने कार में बैठे-बैठे पत्रकारों से कहा, यह ‘मेरे बेटे के लिए मेरी तरफ से उपहार है, आज पहली बार मैं अपने बेटे के साथ पूरा दिन गुजारूंगा’

लेकिन इसके बाद अचानक किसी बात को लेकर माराडोना को गुस्सा आ गया और उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मूर्खों, क्या कर रहे हो? मेरी पत्नी को परेशान क्यों कर रहे हो…?’ कहते हुए अपनी कार से उतरकर एक पत्रकार की तरफ बढ़े और उसे तमाचा जड़ दिया.

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मोरक्‍को की पत्रकार ने चुराया बहरीन के मंत्री का फोन

मोरक्को की एक महिला पत्रकार ने बहरीन की संस्कृति मंत्री का एक सेल फोन चुरा लिया। यह ख़बर संयुक्त अरब अमीरात के ऑनलाइन समाचारपत्र Emirates247 ने प्रकाशित की है। बहरीन की संस्कृति मंत्री, शेख माई बिन्त मोहम्मद अल-ख़लीफ़ा मोरक्को के टंगेर शहर की यात्रा कर रही थीं। जब वह एक पत्रकार सम्मेलन में बोल रही थीं तो उन्होंने पाया कि उनका सेल फोन ग़ायब हो गया है। उन्होंने तुरंत पुलिस को बुला लिया।

पुलिस ने जब निग़रानी वीडियो कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी तो पाया कि मंत्री का सेल फोन एक मेज़ पर पड़ा हुआ था जिसे एक स्थानीय पत्रकार ने उठाकर अपने पर्स में डाल लिया था। संदिग्ध को जल्द ही उसके घर में गिरफ्तार कर लिया गया और उसने चोरी की बात कबूल कर ली। पुलिस ने इस महिला को पूछताछ के लिए हिरासत में रखने का फैसला किया है।

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