पंजाब केसरी के मालिक विजय चोपड़ा को जज ने दिखाई औकात, कोर्ट रूम से बाहर निकाला

मीडिया के मालिकों की ऐंठन को ठीक करने का काम कई ईमानदार किस्म के न्यायाधीश कर डालते हैं. ऐसा ही एक मामला पंजाब के होशियारपुर का है. यहां गलत खबर छापने के एक मामले में निजी पेशी हेतु आए पंजाब केसरी के मालिक विजय चोपड़ा सीधे कोर्ट रूम में घुस गए. तब जज ने उन्हें फटकारते हुए कोर्ट रूम के बाहर जाने को कहा और आवाज लगने पर ही अंदर आने के आदेश दिए.

बेचारे विजय चोपड़ा. मीडिया मालिक की ऐंठ धरी की धरी रह गई. वे पहले कोर्ट रूप के अंदर गए, डांट खाकर बाहर आए. और, लास्ट में आवाज लगने पर फिर अंदर आए. इस पूरे मामले की खबर पंजाब के एक अखबार दैनिक सवेरा ने विस्तार से प्रकाशित की है. असल में पंजाब केसरी की ब्लैकमेलिंग पत्रकारिता के खिलाफ ही दैनिक सवेरा अखबार अस्तित्व में आया और यह अखबार पंजाब केसरी से संबंधित कोई भी खबर प्रमुखता से प्रकाशित करने से चूकता नहीं है.

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ट्विटर : मोदी पर मजाकिया मैटर साझा करने वाले पत्रकारों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग

न्यूज एजेंसी एएनआई उस व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई करेगी, जिसने उसके ट्विटर हैंडल का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाने के लिए किया है। ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है, जिसमें नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाता हुआ ट्वीट किया गया है। इस बीच ट्विटर पर इस तस्वीर को शेयर करने वाले एक पार्टी के नेता और कई पत्रकारों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।

इस तस्वीर में ऐसा लगता है कि ट्वीट न्यूज एजेंसी एएनआई ने किया है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी के नाम से एक बयान दिया गया है, जिसका हिंदी अनुवाद कुछ ऐसा होगा, ‘जर्मनी के प्रति मेरा प्यार दशकों पुराना है। जब मैं गुजरात में रहने वाला एक छोटा बच्चा था तो मेरा एकमात्र दोस्त एक जर्मन शेपर्ड था: PM’. जर्मन शेपर्ड कुत्ते की एक नस्ल का नाम है।

एएनआई ने सफाई दी है कि यह ट्वीट उसकी तरफ से नहीं किया गया। साथ ही एजेंसी ने कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है। एजेंसी ने कहा है, ‘यह ट्वीट फोटोशॉप से तैयार किया गया है। एएनआई का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’ इश बीच पता चला है कि उन पत्रकारों पर भी कार्रवाई करने की मांग उठने लगी है, जिन्होंने उस मजाकिया तस्वीर को साझा किया है।

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दैनिक भास्कर होशंगाबाद के 25 कर्मचारी मजीठिया के लिए गए हाईकोर्ट, नोटिस जारी

दैनिक भास्कर से सबसे ज्यादा मीडियाकर्मी मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी एरियर पाने के लिए कोर्ट की शरण में गए हैं. ये संख्या हजारों में हो सकती है. ताजी सूचना होशंगाबाद यूनिट से है. यहां के करीब 25 मीडियाकर्मियों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है. जब इसकी खबर भास्कर के वरिष्ठ पदाधिकारियों को मिली तो इन्होंने हाईकोर्ट जाने वालों कर्मियों को एक एक कर अलग अलग केबिन में बुलाया और धमकाना शुरू कर दिया. इन्हें नौकरी से निकाल दिए जाने की धमकी भी दी गई है. कर्मचारियों से कहा गया कि उन्हें सात दिन गैर-हाजिर दिखाकर नौकरी से टर्मिनेट कर दिया जाएगा.

इन सभी कर्मियों को एक प्रोफार्मा पर साइन करने को कहा गया जो पचास रुपये के स्टैंप पेपर पर बना हुआ है. कर्मचारियों ने इस कागज पर साइन करने से इनकार कर दिया. कर्मचारी इस तरह की गीदड़भभकियों से डर नहीं रहे हैं और कोर्ट के जरिए प्रबंधन को सबक सिखाने का मूड बनाए हुए हैं. सभी कर्मचारी जोश के साथ प्रबंधन से दो दो हाथ करने को आतुर हैं. सभी कर्मियों का उत्साह बराबर बना हुआ है. कई कर्मचारियों ने भास्कर के अधिकारियों से उनकी सेलरी तक पूछ ली और अपनी खुद की सेलरी बताई. साथ ही यह भी कहा कि हम लोग कितनी कम सेलरी में अपना जीवन चलाते हैं. जब सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी देने को कह दिया है तो प्रबंधन क्यों नया वेतनमान न देकर गैर-कानूनी काम कर रहा है.

भास्कर होशंगाबाद के कर्मियों को बहलाने फुसाने धमकाने में जिन आला अधिकारियों की भूमिका बेहद घटिया रही, उनके नाम हैं- एमपी प्रोडक्शन हेड विनय शुक्ला, भोपाल के हेड ललित जैन, एचआर हेड जया आजाद, अतुल छावड़ा, अविनाश कोठारी, नवनीत गुर्जर आदि. इस बीच, गुजरात हाईकोर्ट ने याचिका को संज्ञान लेते हुए भास्कर के मालिकों को नोटिस जारी कर दिया है. गुजरात हाईकोर्ट में यह मामला केस नंबर 2384 पर दर्ज है. ज्ञात हो कि दैनिक भास्कर का रजिस्टर्ड आफिस अहमदाबाद में है. इस कारण भास्कर के मालिकों के खिलाफ केस गुजरात हाईकोर्ट में किया गया है.

इस बीच, दैनिक भास्कर होशंगाबाद के एक कर्मचारी ने भड़ास को मेल कर अंदर की स्थिति के बारे में यह जानकारी भेजी है: ”Hoshangabad bhaskar ke karmchariyo ko milne Lagi barkhast karne ki dhamki, stamp pr jabran karva rhe sign. Dainik bhaskar hoshangabad unit me karmchariyo dvyara majithiya ko lekar lagaye gaye case ko wapas lene ke liye bhaskar prabandhan har tarike apna rha hai. Budhwar ko dainik bhaskar ke state head navneet gujar, hr head jaya aazad, atul chabda sahit anya adhikarion ne hoshangabad me apna dera dal liye hai. Or we ek niji hotal me sabhi ko ek-ek karke bulakar case wapas lene ka kaha rhe hai sath hi eo stamp paper par singnacher le rhe hai. Jisme likha hai ki hamara samjhota ho gya hai or ham apna case wapas le rhe hai. Karmchariyo ke nhi manne par unko naokri se barkhast karne ka dawab banaya ja rha hai.”’

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मजीठिया वेज बोर्ड : खुलकर और गोपनीय रूप से लड़ने का रास्ता अब भी है खुला

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा का कहना है कि मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर ढेर सारे मीडियाकर्मियों को फोन और सवाल आ रहे हैं. सभी ये जानना चाहते हैं कि क्या अब खुलकर या गोपनीय रूप से लड़ने का रास्ता बंद हो चुका है या कोई विकल्प है. ऐसे में सबको बताया जाना चाहिए कि अब भी रास्ता खुला हुआ है. जो लोग खुलकर लड़ना चाहते हैं उनकी लड़ाई हाईकोर्ट के जरिए लड़ी जाएगी. जो लोग गोपनीय रूप से लड़ना चाहते हैं, उसके लिए भड़ास पर दुबारा मुहिम शुरू किया जा रहा है.

एडवोकेट उमेश शर्मा ने बताया कि मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सैकड़ों गोपनीय मीडियाकर्मियों की तरफ से भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह ने जो याचिका फाइल करवाई है, उस याचिका के सहारे सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मिल सकता है. बस करना ये होगा कि आप अथारिटी लेटर भरकर और छह हजार रुपये फीस जमा करके संबंधित डिटेल भिजवा दें. उधर, जो लोग खुलकर लड़ना चाहते हैं उनके लिए रास्ता है कि उनका मुकदमा हाईकोर्ट के जरिए लड़ा जाएगा. चंडीगढ़, दिल्ली, भोपाल, इलाहाबाद, जयपुर आदि जगहों पर स्थित हाईकोर्ट के वकीलों की एक टीम के बीच कोआर्डिनेशन कायम किया जा रहा है ताकि खुलकर लड़ने वालों का पक्ष मजबूती से रखा जा सके और उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिलाया जा सके.

क्या करें…. 

मजीठिया वेज बोर्ड पाने के लिए भड़ास की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की गई है, उसके साथ गोपनीय रूप से जुड़कर मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ पाने के लिए आपको करना सिर्फ इतना है कि नीचे दिए गए अथारिटी लेटर को डाउनलोड कर / सेव एज करके प्रिंट निकाल लें. इस अथारिटी लेटर में अपने इंप्लायमेंट डिटेल विस्तार से लिखें. 2010 से कब-कब कहां-कहां किन-किन पदों पर रहे हैं, इसका साफ-साफ उल्लेख करें. अपने मालिकों के नाम और कंपनी का रजिस्टर्ड व हेड आफिस का पता लिख भेजें.

अथारिटी लेटर में ‘डिटेल्स आफ इंप्लायमेंट’ कालम में आप वर्तमान संस्थान में कार्य करने की तारीख और इसके पहले (2010 तक) के संस्थानों में काम करने की अवधि का विवरण दें, साथ ही उन संस्थानों के रजिस्टर्ड और मुख्य आफिस का पता लिखें. अथारिटी लेटर भरने, साइन करने के बाद उसे दुबारा स्कैन करा लें और उस स्कैन अथारिटी लेटर को मेल से अटैच करके भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह yashwant@bhadas4media.com को मेल कर दें. ओरीजनल अथारिटी लेटर को कूरियर या स्पीड पोस्ट के जरिए नीचे दिए गए पते पर भेज दीजिए.

Yashwant c/o Advocate Umesh Sharma
112, New Delhi House
27, Barakhambha Road
Connaught Place
New Delhi-110001

इसके बाद बतौर फीस 6600 रुपये एडवोकेट उमेश शर्मा के निजी एकाउंट में जमा करा दें. एकाउंट नंबर है-

Umesh Sharma
Account no. 07081840000060
Bank HDFC
Branch Ground Floor, DCM Building, Barakhamba Road, New Delhi-110001
MICR No. 110240096
IFSC Code HDFC0000708

बैंक डिपोजिट स्लिप को अटैच करके भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के पास yashwant@bhadas4media.com मेल से भेज दें ताकि यह गारंटी हो सके कि आपने फीस जमा करा दिया है.

ये तो रही उनकी बात जो गोपनीय रूप से लड़ना चाहते हैं.

जो लोग खुलकर लड़ना चाहते हैं वे नौ हजार रुपये उपरोक्त एकाउंट में जमा करने के बाद अथारिटी लेटर भरें और इसे yashwant@bhadas4media.com पर खुलकर लड़ने के अनुरोध के साथ भेज दें. मेल आने के 24 घंटे के भीतर आपको जवाब भेज दिया जाएगा. फिर आपकी सुविधा-सहमति के हिसाब से वकील साहब से मिलवाया जाएगा ताकि आपके केस पर पूरा डिस्कस हो सके और आपकी याचिका तैयार कराई जा सके. आपको अपने समस्त डाक्यूमेंट्स को लेकर आना होगा.

अगर कोई सवाल है या कोई कनफ्यूजन है तो आप yashwant@bhadas4media.com पर मेल करें.

ध्यान दें. पहले गोपनीय और खुलकर लड़ने वालों के लिए एक ही फीस थी, छह हजार रुपये. इसे बढ़ाकर क्रम: 6600 और 9000 रुपये कर दिया गया है. यानि गोपनीय रूप से लड़ने वालों से अब 6600 रुपये लिए जाएंगे और खुलकर लड़ने वालों से 9000 रुपये. देर से जगने वालों से जुर्माना वसूलना बनता है. पहले जगने वालों को लाभ मिलना बनता है.


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रेप-उत्पीड़न की शिकार मेडिकल छात्रा का केस सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा लड़ेंगे, पीड़िता ने जारी की रेपिस्ट की तस्वीरें

(पीड़ित मेडिकल छात्रा द्वारा न्याय के लिए बनाए गए फेसबुक पेज के लैटेस्ट स्टेटस का स्क्रीनशाट जिसमें उसने रेपिस्ट की तस्वीरें जारी की हैं.)


भड़ास पर प्रकाशित दिल्ली की एक मेडिकल छात्रा के रेप-उत्पीड़न की खबर पढ़कर सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा ने अपनी तरफ से पहल करते हुए पूरे मामले की कानूनी लड़ाई को अपने हाथ में ले लिया है. इस सार्थक पहल से न्याय के लिए दर-दर भटक रही छात्रा के मन में उत्साह का संचार हुआ है और अब उसे यकीन है कि रेपिस्ट और चीटर मनोज कुमार को दंड मिलेगा.

एडवोकेट उमेश शर्मा ने पूरे मामले के कागजात देखे और पीड़िता को आश्वस्त किया कि अब उसके साथ अन्याय नहीं होगा. पूरे मामले की छानबीन में पुलिस की लापरवाही साफ दिख रही है. सबूत इकट्ठा करने से लेकर कोर्ट में पैरवी तक में हीलाहवाली बरती गई जो गंभीर मामला है. एडवोकेट उमेश शर्मा ने भड़ास4मीडिया से बातचीत में कहा कि वह पीड़ित मेडिकल छात्रा के दोषी को दंड दिलाकर रहेंगे. उन्होंने बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के ही मामले देखते हैं. लेकिन सामाजिक दायित्व के तहत उन्होंने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चल रहे इस मामले को अपने हाथ में लिया है और वह खुद हर तारीख पर संबंधित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट जाकर पीड़िता छात्रा के वकील के बतौर मजबूत पैरवी करेंगे.

(सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा. भड़ास पर पीड़ित मेडिकल छात्रा की आपबीती पढ़ने के बाद एडवोकेट उमेश शर्मा ने अंतरात्मा की आवाज पर पूरे केस को अपने हाथ में लेने का फैसला किया ताकि दोषी को दंड दिलाया जा सके.)


इस बीच पीड़ित मेडिकल छात्रा ने रेपिस्ट मनोज कुमार की तस्वीर अपने जस्टिस वाले फेसबुक पेज पर सार्वजनिक की है. उसने लिखा है कि यही वो शख्स है जो अध्यात्म के नाम पर बहला-फुसला कर लड़कियों से रेप करता है. फिर शादी का झांसा देकर शोषण जारी रखता है. अंत में वह कानूनी तैयारी करके लड़की को पूरी तरह अलगाव में डाल देता है ताकि वह या तो आत्महत्या कर ले या फिर टूट कर डिप्रेशन में चली जाए. पीड़ित छात्रा ने अपील की है कि रेपिस्ट की तस्वीर को सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा शेयर किया जाए ताकि उसकी असलियत और उसका चेहरा सभी जान देख सकें.

पीड़ित मेडिकल छात्रा को सपोर्ट देने के लिए आप उसके द्वारा न्याय हेतु बनाए गए फेसबुक पेज को लाइक कर सकते हैं, इस लिंक पर क्लिक करके : Justice for victim of FIR No.947u/s376 IPC

पूरे मामले को जानने-समझने के लिए इन शीर्षकों पर क्लिक करें…

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7 फरवरी के बाद मजीठिया के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकेंगे, भड़ास आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार

जी हां. ये सच है. जो लोग चुप्पी साध कर बैठे हैं वे जान लें कि सात फरवरी के बाद आप मजीठिया के लिए अपने प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जा पाएंगे. सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक साल पूरे हो जाएंगे और एक साल के भीतर पीड़ित पक्ष आदेश के अनुपालन को लेकर याचिका दायर कर सकता है. उसके बाद नहीं. इसलिए दोस्तों अब तैयार होइए. भड़ास4मीडिया ने मजीठिया को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए कमर कस ली है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील उमेश शर्मा की सेवाएं भड़ास ने ली है.

( File Photo Umesh Sharma Advocate )

इस अदभुत आर-पार की लड़ाई में मीडियाकर्मी अपनी पहचान छुपाकर और नौकरी करते हुए शामिल हो सकते हैं व मजीठिया का लाभ पा सकते हैं. बस उन्हें करना इतना होगा कि एक अथारिटी लेटर, जिसे भड़ास शीघ्र जारी करने वाला है, पर साइन करके भड़ास के पास भेज देना है. ये अथारिटी लेटर न तो सुप्रीम कोर्ट में जमा होगा और न ही कहीं बाहर किसी को दिया या दिखाया जाएगा. यह भड़ास के वकील उमेश शर्मा के पास गोपनीय रूप से सुरक्षित रहेगा. इस अथारिटी लेटर से होगा यह कि भड़ास के यशवंत सिंह आपके बिहाफ पर आपकी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ सकेंगे. इस पूरी प्रक्रिया में आपका नाम कहीं न खुलेगा न कोई जान सकेगा. दूसरी बात. जो लोग अपने नाम पहचान के साथ लड़ना चाहते हैं, उससे अच्छा कोई विकल्प नहीं है. उनका तहे दिल से स्वागत है. ऐसे ही मजबूत इरादे वाले साथियों के साथ मिलकर भड़ास मजीठिया की आखिरी और निर्णायक जंग सुप्रीम कोर्ट में मीडिया हाउसों से लड़ेगा.

बतौर फीस, हर एक को सिर्फ छह हजार रुपये शुरुआती फीस के रूप में वकील उमेश शर्मा के एकाउंट में जमा कराने होंगे. बाकी पैसे जंग जीतने के बाद आपकी इच्छा पर निर्भर होगा कि आप चाहें भड़ास को डोनेशन के रूप में दें या न दें और वकील को उनकी शेष बकाया फीस के रूप में दें या न दें. यह वैकल्पिक होगा. लेकिन शुरुआती छह हजार रुपये इसलिए अनिवार्य है कि सुप्रीम कोर्ट में कोई लड़ाई लड़ने के लिए लाखों रुपये लगते हैं, लेकिन एक सामूहिक लड़ाई के लिए मात्र छह छह हजार रुपये लिए जा रहे हैं और छह हजार रुपये के अतिरिक्त कोई पैसा कभी नहीं मांगा जाएगा. हां, जीत जाने पर आप जो चाहें दे सकते हैं, यह आप पर निर्भर है. बाकी बातें शीघ्र लिखी जाएगी.

आपको अभी बस इतना करना है कि अपना नाम, अपना पद, अपने अखबार का नाम, अपना एड्रेस, अपना मोबाइल नंबर और लड़ाई का फार्मेट (नाम पहचान के साथ खुलकर लड़ेंगे या नाम पहचान छिपाकर गोपनीय रहकर लड़ेंगे) लिखकर मेरे निजी मेल आईडी yashwant@bhadas4media.com पर भेज दें ताकि यह पता लग सके कि कुल कितने लोग लड़ना चाहते हैं. यह काम 15 जनवरी तक होगा. पंद्रह जनवरी के बाद आए मेल पर विचार नहीं किया जाएगा. इसके बाद सभी से अथारिटी लेटर मंगाया जाएगा. जो लोग पहचान छिपाकर गोपनीय रहकर लड़ना चाहेंगे उन्हें अथारिटी लेटर भेजना पड़ेगा. जो लोग पहचान उजागर कर लड़ना चाहेंगे उन्हें अथारिटी लेटर देने की जरूरत नहीं है. उन्हें केवल याचिका फाइल करते समय उस पर हस्ताक्षर करने आना होगा.

हम लोगों की कोशिश है कि 15 जनवरी को संबंधित संस्थानों के प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा की तरफ से लीगल नोटिस भेजा जाए कि आपके संस्थान के ढेर सारे लोगों (किसी का भी नाम नहीं दिया जाएगा) को मजीठिया नहीं मिला है और उन लोगों ने संपर्क किया है सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिए. हफ्ते भर में जिन-जिन लोगों को मजीठिया नहीं मिला है, उन्हें मजीठिया के हिसाब से वेतनमान देने की सूचना दें अन्यथा वे सब लोग सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने को मजबूर होंगे.

हफ्ते भर बाद यानि एक या दो फरवरी को उन संस्थानों के खिलाफ याचिका दायर कर दी जाएगी, सुप्रीम कोर्ट से इस अनुरोध के साथ कि संबंधित संस्थानों को लीगल नोटिस भेजकर मजीठिया देने को कहा गया लेकिन उन्होंने नहीं दिया इसलिए मजबूरन कोर्ट की शरण में उसके आदेश का पालन न हो पाने के चलते आना पड़ा है.

और, फिर ये लड़ाई चल पड़ेगी. चूंकि कई साथी लोग सुप्रीम कोर्ट में जाकर जीत चुके हैं, इसलिए इस लड़ाई में हारने का सवाल ही नहीं पैदा होता.

मुझसे निजी तौर पर दर्जनों पत्रकारों, गैर-पत्रकारों ने मजीठिया की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ने के तरीके के बारे में पूछा. इतने सारे सवालों, जिज्ञासाओं, उत्सुकताओं के कारण मुझे मजबूरन सीनियर एडवोकेट उमेश शर्मा जी से मिलना पड़ा और लड़ाई के एक सामूहिक तरीके के बारे में सोचना पड़ा. अंततः लंबे विचार विमर्श के बाद ये रास्ता निकला है, जिसमें आपको न अपना शहर छोड़ना पड़ेगा और न आपको कोई वकील करना होगा, और न ही आपको वकील के फीस के रूप में लाखों रुपये देना पड़ेगा. सारा काम आपके घर बैठे बैठे सिर्फ छह हजार रुपये में हो जाएगा, वह भी पहचान छिपाकर, अगर आप चाहेंगे तो.

दोस्तों, मैं कतई नहीं कहूंगा कि भड़ास पर यकीन करिए. हम लोगों ने जेल जाकर और मुकदमे झेलकर भी भड़ास चलाते रहने की जिद पालकर यह साबित कर दिया है कि भड़ास टूट सकता है, झुक नहीं सकता है. ऐसा कोई प्रबंधन नहीं है जिसके खिलाफ खबर होने पर हम लोगों ने भड़ास पर प्रकाशित न किया हो. ऐसे दौर में जब ट्रेड यूनियन और मीडिया संगठन दलाली के औजार बन चुके हों, भड़ास को मजबूर पत्रकारों के वेतनमान की आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए एक सरल फार्मेट लेकर सामने आना पड़ा है. आप लोग एडवोकेट उमेश शर्मा पर आंख बंद कर भरोसा करिए. उमेश शर्मा जांचे परखे वकील हैं और बेहद भरोसेमंद हैं. मीडिया और ट्रेड यूनियन के दर्जनों मामले लड़ चुके हैं और जीत चुके हैं.

दुनिया की हर बड़ी लड़ाई भरोसे पर लड़ी गई है. ये लड़ाई भी भड़ास के तेवर और आपके भरोसे की अग्निपरीक्षा है. हम जीतेंगे, हमें ये यकीन है.

आप के सवालों और सुझावों का स्वागत है.

यशवंत सिंह
एडिटर
भड़ास4मीडिया
+91 9999330099
+91 9999966466
yashwant@bhadas4media.com


मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर एडवोकेट उमेश शर्मा द्वारा लिखित और भड़ास पर प्रकाशित एक पुराना आर्टकिल यूं है…

Majithia Wage Board Recommendations : legal issues and remedies

 

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देहरादून में आज तक और आईबीएन7 के रिपोर्टरों दिलीप सिंह राठौर व संजीव शर्मा पर मुकदमा दर्ज

देहरादून से एक बड़ी खबर आ रही है. दो न्यूज चैनलों के स्थानीय रिपोर्टरों पर मुकदमा दर्ज हो गया है. ये दो हैं आजतक के रिपोर्टर दिलीप राठौर और आईबीएन7 के रिपोर्टर संजीव शर्मा. आरोप है कि आज तक के रिपोर्टर ने बीते दिनों मीडिया सेंटर में एक-दूसरे व्यक्ति के साथ मार-पीट व गाली-गलोच कर दी थी.  बीच-बचाव करने आये दूसरे पत्रकारों को भी नहीं बख्शा. इस कारण कई लोग दिलीप से नाराज हो गए. पीड़ित विरेंदर सिंह द्वारा दी गई शिकायत पर धारा चौकी में पुलिस ने आजतक और आईबीएन7 के रिपोर्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है.  

पीड़ित विरेंदर सिंह ने भड़ास4मीडिया को बताया कि 10 नवंबर को दिए गए पार्थना पत्र पर आज तक के रिपोर्टर दिलीप सिंह राठौर और आईबीएन7 के संजीव शर्मा के दबावों के बावजूद पुलिस अधिकारियों ने घटना को सच मानते हुए मेरी रिपोर्ट दर्ज कर ली है. एफआईआर की कापी भड़ास को मेल से भेजी जा रही है.  विरेंदर ने बताया कि आजतक के राज्य संवाददाता दिलीप सिंह राठौर और आईबीएन7 के संजीव शर्मा  ने मुझे प्रताड़ित किया.  मेरे जमीन के मसले में मुझसे बार-बार पैसे मांगते हैं. पैसे न देने पर बंद करा देने की धमकी देते हैं. इन्ह लोगों ने मेरे साथ मारपीट और गाली गलौच की. जान से मरने की धमकी भी दी. विरेंदर ने आरोप लगाया कि आजतक और आईबीएन7 के दोनों रिपोर्टरों ने दो साल में बहुत से लोगों से पैसे ले रखे है और जब उनसे कोई वापस मांगता है तो उसे चैनल की धमकी देते हैं.  

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