बिहार के एक पत्रकार को दैनिक जागरण देगा साठ लाख बयालीस हजार रुपये, आरसी जारी

बिहार के गया जिले के पत्रकार पंकज कुमारका सपना सच हो गया. वे सुप्रीम कोर्ट से लेकर बिहार हाईकोर्ट और गया जिले की अदालतों के चक्कर काटने के बाद अंतत: दैनिक जागरण को मात देने में कामयाब हो गए. इस सफलता में उनके साथ कदम से कदम मिला कर खड़े रहे जाने माने वकील मदन तिवारी.

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संयुक्त आयुक्त श्रम ने जागरण के मालिक मोहन गुप्त को नोटिस भेजा, शेल कम्पनी ‘कंचन प्रकाशन’ का मुद्दा भी उठा

दैनिक जागरण के एचआर एजीएम विनोद शुक्ला की हुई फजीहत…  पटना : दैनिक जागरण के मालिक महेंद्र मोहन गुप्त को श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त डा. वीरेंद्र कुमार ने नोटिस जारी कर जागरण कर्मियों द्वारा दायर किए गए जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा को लेकर वाद में पक्ष रखने के लिए तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होनी है। वहीं दैनिक जागरण पटना के एजीएम एचआर विनोद शुक्ला के जागरण प्रबंधन के पक्ष में उपस्थिति पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए अधिवक्ता मदन तिवारी ने संबंधित बोर्ड के प्रस्ताव की अधिकृत कागजात की मांग कर एजीएम शुक्ला की बोलती बंद कर दी। दैनिक जागरण के हजारों कर्मियों को अपना कर्मचारी न मानने के दावे एजीएम शुक्ला के दावे की भी श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डा.  वीरेंद्र कुमार के सामने हवा निकल गई।

दैनिक जागरण, गया के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुमार को प्रबंधन ने गया जिले से जम्मू तबादला कर दिया। पंकज कुमार की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा के आलोक में वेतन और अन्य सुविधाओं की मांग की थी। पंकज कुमार गम्भीर रूप से बीमार पिछले साल हुए थे। मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर प्रबंधन इतना खफा हो गया कि 92 दिनों की उपार्जित अवकाश शेष रहने के बाद भी अक्टूबर और नवंबर 2016 के वेतन में 21 दिनों की वेतन कटौती कर दी।

पंकज कुमार ने प्रबंधन के फैसले के खिलाफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय की शरण में न्याय की गुहार लगाई। एरियर का बकाया 32.90 लाख रुपए के भुगतान की मांग की। साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय से गया से जम्मू तबादला को रद्द करने की गुहार लगाई। सर्वोच्च न्यायालय ने पंकज कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में छह महीने का टाइम बांड कर दिया। यानि छह माह में फैसला हो जाना है।  पंकज कुमार सहित दैनिक जागरण के कई कर्मियों के वाद की सुनवाई 5 December को पटना के श्रम संसाधन विभाग के संयुक्त आयुक्त डा.वीरेंद्र कुमार के समक्ष हुई।

पंकज कुमार की तरफ से अधिवक्ता मदन तिवारी ने जागरण की ओर से उपस्थित एजीएम विनोद शुक्ला की उपस्थिति पर सवाल उठाया। अधिवक्ता मदन तिवारी का कहना था कि किस हैसियत से विनोद शुक्ला जागरण के अध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता, सीईओ संजय गुप्ता, सुनील गुप्ता एवं अन्य की ओर से उपस्थिति दर्ज कराई है। एजीएम शुक्ला ने कम्पनी सेक्रेटरी द्वारा प्रदत्त एक पत्र की फोटो कापी दिखाई। फोटो कापी पर विनोद शुक्ला को अधिकृत होने की बात कही गई थी।

इस पर अधिवक्ता मदन तिवारी ने कहा कि कम्पनी द्वारा पारित किसी भी प्रस्ताव की अभिप्रमाणित प्रति जो बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करने वाले चैयरमेन या निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित रहेगी, वही प्रति न्यायालय में कम्पनी द्वारा अधिकृत व्यक्ति के शपथ पत्र के साथ दायर की जानी चाहिए। अधिवक्ता मदन तिवारी ने लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराई। उसके बाद न्यायालय ने विनोद शुक्ला को निर्देश दिया कि वे बोर्ड के प्रस्ताव की अधिकृत प्रति हलफनामा के साथ दायर करें।

अधिवक्ता मदन तिवारी ने श्रम विभाग द्वारा जागरण के अध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता सहित अन्य निदेशकों के स्थान पर प्रबंधन जागरण को नोटिस जारी करने के मामले को उठाया।  संयुक्त आयुक्त डा. वीरेंद्र कुमार ने आपत्ति उठाए जाने पर कहा कि पूर्व में नोटिस जारी की गई थी। लेकिन अब जागरण समूह के अध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता को नोटिस जारी किया गया है।

जागरण के कई कर्मियों ने श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र कुमार को बताया कि एजीएम विनोद शुक्ला को ओर से दायर जवाब में कहा गया है कि गोपेश कुमार एवं अन्य कंचन प्रकाशन के कर्मी हैं…  कंचन प्रकाशन के साथ जागरण प्रकाशन का कांट्रैक्ट प्रिंटिंग के जाब वर्क का है… इसलिए ये सभी दैनिक जागरण के कर्मचारी नहीं है।

अधिवक्ता मदन तिवारी ने संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र कुमार के सामने न्यूज पेपर रजिस्ट्रेशन एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी अखबार एवं पत्रिका को अपने अखबार में अनिवार्य अधिघोषणा में उस प्रेस का नाम पता देना जरूरी है जहां अखबार प्रिन्ट होता है। लेकिन जागरण के किसी भी एडिशन में कंचन प्रकाशन को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई या की जा रही है। ऐसे में न्यूज पेपर रजिस्ट्रेशन एक्ट का उल्लघंन जागरण प्रकाशन कर रहा है। ऐसे में अनिवार्य अधिघोषणा न करने  के नियम का न पालन करने के कारण अखबार का निबंधन भी रद्द हो सकता है।

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राजद नेता की गुंडागर्दी का वीडियो देखें

Gundagardi of RJD leader whose wife is block pramukh in Vaishali District… Bihar Do not Need Smart face, We need criminal free Bihar… lalu yadav ji, smart chehra nahi, apraadhmukt bihar chahiye… aapke dal ki gundagardi chalu hai… Sudhaar kar len anytha fir 22 seat par simat jayenge… 

यह वीडियो वैशाली जिले के एक ब्लॉक के राज्य खाद्य निगम के गोदाम का है… यहाँ राजद का नेता रामाशीष राय जिसकी पत्नी ब्लाक प्रमुख है, गोदाम के प्रबंधक को भयभीत कर रहा है.. आरोप है कि यह रंगदारी मांगने गया है… गोदाम प्रबंधक उससे कह रहा है जो भी सूचना चाहिए लिखकर मांगिये, हम लिखित रूप में दे देंगे… लेकिन राजद का यह नेता रॉमाशीष रॉय कुछ भी लिखकर नहीं माँगना चाहता… वस्तुतः उसकी पत्नी ब्लाक प्रमुख है इसलिए यह गुंडई से वसूली करते चलता है… इस नेता ने उस युवा प्रबंधक को थप्पड़ भी मारा है…

Tejashwi Yadav जी, आपको लालू यादव जी का वह भाषण याद होगा, ”अब राजद भी बदल गया है और लालू भी”. मतलब था कि राजद में गुंडे तत्व को जगह नहीं मिलेगी… जो गुंडई करेंगे उन्हें निकाला जाएगा… लेकिन हुआ क्या? सता में आते इस तरह के लोगों को तरजीह मिलने लगी… आज भी गुंडागर्दी को प्रश्रय देने के कारण ही बिहार की जनता सशंकित है और नितीश के विरोध में रहने के बावजूद भी राजद से नहीं जुड़ना चाहती है… बेहतर है सुधार करें अन्यथा हमारे जैसे लोग राजद की गुंडागर्दी के खिलाफ सड़क पर उतरने, आम आवम के बीच जाने में भी नही हिचकेंगे।

संबंधित वीडियो देखें :

Madan Kumar Tiwary

Senior Advocate and Senior Journalist
Shamir Takiya, Gaya
Bihar
tiwarygaya@gmail.com

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जांच करने पहुंचे श्रम अधीक्षक को दैनिक जागरण के मैनेजर ने गेट के अंदर ही नहीं घुसने दिया

कानून और नियम को ठेंगे पर रखता है दैनिक जागरण प्रबन्धक… गया के श्रम अधीक्षक के साथ दैनिक जागरण प्रबंधक ने की गुंडागर्दी… नहीं करने दिया प्रेस की जांच… पंकज कुमार दैनिक जागरण गया के वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं. इन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड मांगा तो प्रबंधन ने इन्हें परेशान करना शुरू कर दिया… पंकज ने बिहार के श्रम आयुक्त गोपाल मीणा के यहां एक आवेदन दिनांक 26.07.2017 को दिया था.. इसमें पंकज कुमार ने आरोप लगाया था कि गया सहित दैनिक जागरण बिहार के सभी चार प्रकाशन केंद्र में श्रम कानून के तहत मीडियाकर्मियों और गैर मीडियाकर्मियों को लाभ नहीं दिया जा रहा है. 90 प्रतिशत से अधिक पत्रकारों एवं गैर-पत्रकारों का प्राविडेंट फंड, स्वास्थ्य बीमा, सर्विस बुक समेत कई सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. साथ ही माननीय सर्वोच्च्य न्यायालय द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के तहत ग्रेड की घोषणा भी नहीं की गई है.

श्रम आयुक्त गोपाल मीणा ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अपने ज्ञापांक 3/डी-96/2015 श्र० स० 4142 दिनांक 04-08-17 के माध्यम से दैनिक जागरण की नियमानुकूल आवश्यक जांच करने का आदेश निर्गत किया था तथा कृत कारवाई से संबंधित प्रतिवेदन विभाग को तुरंत उपलब्ध कराने का आदेश मगध प्रमंडल के उप श्रमायुक्त को दिया था.  श्रम आयुक्त गोपाल मीणा के उक्त आदेश के अनुपालन हेतु कल दिनांक 19 सितम्बर को श्रम अधीक्षक, गया जुबेर अहमद दैनिक जागरण प्रेस की जांच करने के लिए गए थे. परन्तु उन्हें प्रेस के मुख्य द्वार के अंदर प्रवेश करने की ईजाजत दैनिक जागरण के प्रबन्धक द्वारा नहीं दी गई.

यह घटना प्रबन्धक की गुंडागर्दी और कानून की अवहेलना को दर्शाता है.  पंकज कुमार ने इसके पूर्व माननीय उच्चतम न्यायालय में अवमानना वाद दायर किया था. अपने गया से जम्मू तबादले को स्टे करने तथा मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के आलोक में वेतन सहित अन्य सुविधा की मांग की थी. माननीय उच्चतम न्यायालय ने सभी आवेदकों को श्रम आयुक्त के पास इंडस्ट्रियल डिस्पुट एक्ट के तहत आवेदन दायर करने का आदेश दिया है. पंकज कुमार द्वारा दायर अवमानना वाद की खबर भड़ास ने प्रमुखता से एक मई को प्रकाशित किया था.

बिहार से एडवोकेट मदन तिवारी की रिपोर्ट. संपर्क : tiwarygaya@gmail.com

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बिहार में दैनिक जागरण कर रहा अपने कर्मियों का शोषण, श्रम आयुक्त ने जांच के आदेश दिए

दैनिक जागरण, गया (बिहार) के पत्रकार पंकज कुमार ने श्रम आयुक्त बिहार गोपाल मीणा के यहाँ एक आवेदन दिनांक लगाया था. पिछले महीने 26 जुलाई को दिए गए इस आवेदन में पंकज ने आरोप लगाया था कि गया जिले सहित जागरण के बिहार के सभी चार प्रकाशन केंद्र में श्रम कानून के तहत मीडियाकर्मियों और गैर-मीडियाकर्मियों को कई किस्म का लाभ नहीं दिया जा रहा है. यहां 90 प्रतिशत से अधिक पत्रकार एवं गैर पत्रकारों का प्राविडेंट फंड, स्वास्थ्य बीमा, सर्विस बुक सहित कई सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. साथ ही माननीय सर्वोच्च्य न्यायालय द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के तहत सेलरी, पद और ग्रेड की जो घोषणा की जानी थी, उसे भी नहीं नहीं किया गया है.

श्रम आयुक्त गोपाल मीणा ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एक आदेश (3 / डी-96 / 2015 श्र० स० 4142 दिनांक 04-08-17) जारी कर दिया है. आदेश के माध्यम से कहा गया है कि दैनिक जागरण में कार्य के माहौल, श्रम नियमों और मजीठिया वेज बोर्ड आदि के अनुपालन की नियमानुकूल आवश्यक जांच की जाए तथा कृत कार्रवाई से संबंधित प्रतिवेदन विभाग को तुरंत उपलब्ध कराया जाए. ये आदेश मगध प्रमंडल के उप श्रमायुक्त को दिया गया है.

पंकज कुमार ने इसके पूर्व माननीय उच्चतम न्यायालय में अवमानना वाद दायर किया था. पंकज का गया से जम्मू विद्वेष के कारण तबादला कर दिया गया था. इस तबादला को स्टे करने तथा मजीठिया वेज बोर्ड की अनुसंशा के आलोक में वेतन सहित अन्य सुविधा देने की मांग पंकज ने की थी. माननीय उच्चतम न्यायालय ने सभी आवेदकों को श्रम आयुक्त के पास इंडस्ट्रियल डिस्पुट एक्ट के तहत आवेदन दायर करने का आदेश दिया है. पंकज कुमार द्वारा दायर अवमानना वाद की खबर भड़ास ने प्रमुखता से एक मई को प्रकाशित किया था. श्रम आयुक्त गोपाल मीणा के ताजे आदेश का लाभ हजारों मीडियाकर्मियों और गैर-मीडियाकर्मियों को मिलेगा जो दैनिक जागरण सहित अन्य प्रकाशन संस्थानों में काम कर रहे हैं.

गया से जाने माने वकील और पत्रकार मदन तिवारी की रिपोर्ट. संपर्क : 8797006594

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देशभक्त यह दूसरा वाला रेलमंत्री है!

Madan Tiwary : एक रेल मंत्री थे। उन्होंने देखा स्लीपर में वेटिंग लिस्ट लंबी है और एसी की सीट खाली जा रही है। रेलमंत्री ने बिना कोई एक्स्ट्रा चार्ज लिए अपग्रेड सिस्टम लागू कर दिया। इससे हुआ ये कि अगर आपका टिकट वेटिंग है और एसी कोच में सीट खाली है तब आपका वेटिंग टिकट एसी में अपने आप अपग्रेड हो जाएगा।

इसके बाद दूसरा रेल मंत्री आया। उसने नियम लागू किया कि जैसे जैसे सीट फुल होती जायेगी, भाड़ा भी बढ़ता जाएगा। मतलब यह कि ट्रेन में सीट की संख्या कम होती जायेगी तो आपको ज्यादा भाड़ा देना पड़ेगा। देशभक्त यह दूसरा वाला रेलमंत्री है।

बिहार के गया जिले के वकील और सोशल एक्टिविस्ट मदन तिवारी की एफबी वॉल से.

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आतंकी संगठनों से भी खतरनाक है इंडियन मेडिकल एसोशियेशन!

तीन दिन पहले गया मेडिकल कालेज के जूनियर डाक्टर और अस्पताल के पास के दुकानदारो के बीच जमकर मारपीट हुई, डाक्टरों ने दुकानों में घुसकर तोड़फोड़ की और उसके बाद दुकानदारो ने भी हॉस्टल में तोड़फोड़ करके अस्पताल की संपति को क्षति पहुचाई फिर जुनियर डाक्टरों ने चिकित्सा सेवा ठप्प कर दी। घटना का कारण कुछ जूनियर डाक्टरों द्वारा शराब पीकर एक दुकानदार के साथ मारपीट है। पूर्व में भी ऐसी अनेको घटनाये हो चुकी हैं जब किसी मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने पर हुई नोकझोक के कारण जूनियर डाक्टरों ने हंगामा किया और चिकित्सा सेवा ठप्प कर दी। इस तरह की जब भी स्थिति पैदा हुई है डाक्टरों के संगठन IMA ने यथार्थ से हटकर जूनियर डाक्टरों की तरफदारी की है पुरी तरफ असंवेदनशील है यह संगठन अगर आमजन की भाषा में कहें तो यह अपराधियो का, माफियाओ के संगठन की तरह कार्य करता है।

इस संगठन को प्रसन्न रखने के लिए नीतीश कुमार के जदयू और भाजपा गठबंधन की सरकार ने एक कानून भी बना दिया जिसके तहत अस्पताल, नर्सिंग होम, डाक्टरों के साथ किसी तरह के दुर्व्यवहार को संज्ञेय अपराध माना गया है अब इसी कानून की आड़ में खुद तोड़फोड़ कर के डाक्टर झूठा मुकदमा कर देते है और उलटा बीमार के परिवार वाले ही परेशान होते है। गया में मेयर विभा देवी पर भी पीलग्रिम अस्पताल के डाक्टरों ने तीन तीन गलत मुक़दमे किये थे तथा धरना प्रदर्शन किया था और चिकित्सा सेवा ठप्प कर दी थी। उस घटना का कारण मात्र यह था कि विभा देवी ने एक गरीब महिला की इलाज के दौरान लापरवाही में हुई मौत का मुक़दमा दर्ज करने की मांग की थी। जदयू-भाजपा- राजद-कांग्रेस सभी डाक्टरों के साथ थे। पूर्व में भी ये जूनियर डाक्टर पुलिस थाने की जीप फूंकने, एस डी ओ के बॉडीगार्ड पर जानलेवा हमला करने, बेला विधायक सुरेन्द्र यादव पर जानलेवा हमला करने तथा गिरफतारी की मांग को लेकर चिकित्सा सेवा ठप्प करने जैसे अपराधिक कृत्य कर चुके हैं।

पुलिस एवं न्यायपालिका भी इन्हीं अपराधियों का पक्ष लेती रही है तथा IMA के दबाव में कार्य किया है हालाँकि इस बार एसएसपी मनु महाराज ने कड़ा रुख अपनाया है। डाक्टरों की हड़ताल का एकमात्र ईलाज है इनकी संपति की जांच। सरकारी/निजी सभी डाक्टरों के पास काला धन अकूत भरा पड़ा है। इनकी हड़ताल के कारण चिकित्सा के अभाव में होने वाली प्रत्येक मौत के लिए अस्पताल के डाक्टर सहित उनके संगठन IMA के सभी पदाधिकारी जिम्मेवार है। सरकार का दायित्व है कि IMA के बिहार चैप्टर को बैन करे तथा पूर्व से आजतक इनके द्वारा किये गए हड़ताल एंव चिकित्सा सेवा ठप्प करने के औचित्य की जांच करा कर मुकदमा करे। IMA का नियंत्रण उच्च जाती के डाक्टरों के हाथ में है जिसके कारण इन्हें न्यायपालिका में बैठे लोगों का समर्थन आसानी से मिल जाता है।

बिहार के गया जिले के वरिष्ठ वकील और पत्रकार मदन तिवारी के फेसबुक वॉल से. संपर्क: 09431267027

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सतीश उपाध्याय, उमेश उपाध्याय और बिजली कंपनियों का खेल

Madan Tiwary : सतीश उपाध्याय पर अरविन्द केजरीवाल ने आरोप लगाये है बिजली के मीटर को लेकर सतीश उपाध्याय बीजेपी के दिल्ली अध्यक्ष हैं। उन्होंने मानहानि का मुकदमा करने की धमकी दी है और आरोपों से इंकार किया है। सतीश जी, शायद केजरीवाल के हाथ बहुत छोटी सी जानकारी लगी है। आप जेल चले जायेंगे सतीश जी। आपके ऊपर करीब चार सौ करोड़ बिजली कंपनी से लेने का मुद्दा बहुत पहले से गरमाया हुआ है और आपके भाई उमेश उपाध्याय की सहभागिता का भी आरोप है। यह दीगर बात है कि पत्रकार बिरादरी भी यह सबकुछ जानते हुए खुलकर नहीं बोल रही है। दिल्ली की जनता को दुह कर दिल्ली की सत्ता को दूध पिलाने का काम करती आ रही हैं बिजली कंपनियां। खैर मुद्दा चाहे जो हो लेकिन एक साल के अंदर बिजली की दर 2:80 प्रति यूनिट से 4:00 प्रति यूनिट करने की दोषी तो भाजपा है ही। देश है, सब मिलकर बेच खाइये। जनता है, किसी न किसी को वोट देगी ही। काश! देश की जनता सही लोगों को चुन पाती या चुनाव बहिष्कार कर पाती। अपने नेताओं से सवाल कर पाती। काश।

Awadhesh Kumar : तो अरविन्द केजरीवाल ने पहला आरोप बम पटका… दीजिए जवाब… तो अरविंद केजरीवाल ने यह आरोप लगा दिया है कि दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वालीं कंपनियों और भाजपा के प्रदेश नेताओं के बीच कारोबारी रिश्ते व सांठगांठ के आरोपों का बम पटक दिया है। अरविन्द का आरोप देखिए, ‘ जिस कंपनी में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय और उनकी पत्नी की हिस्सेदारी है, वह बिजली कंपनी बीएसईएस के लिए मीटर लगाने और बदलने का काम करती है। दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष आशीष सूद भी इस कंपनी में डायरेक्टर रह चुके हैं।’ जरा सोचिए, यह कितना बड़ा आरोप है। अरविन्द ने सतीश उपाध्याय की जिन छह कंपनियांे के नाम लिए उनमें से एक एनसीएनएल इंफो मीडिया प्राइवेट लिमिटेड बीएसईएस के लिए मीटर लगाने और बदलने का काम करती है। दिल्ली में बिजली के मीटर हर व्यक्ति के लिए आज भी खलनायक है। लोगों ने मजबूरी में आत्मसमर्पण किया है, पर मेरे सहित तमाम दिल्लीवासी मानते हैं कि ये मीटर बिजली शुल्क के नाम पर जबरन लूटने के वैधानिक मशीन है। अभी मेरे पास विस्तृत जानकारी नहीं है। जानने की कोशिश कर रहा हूं। हालांकि व्यवसाय करना कोई अपराध नहीं है। सतीश उपाध्याय या आशीष सूद स्वयं मीटर उत्पादन नहीं करते हैं। केवल इसे लगाने और बदलने का काम करते हैं। यानी यह एक ठेका है जो किसी न किसी कंपनी को तो मिलना ही था। पर चुनाव के लिए यह तो एक मुद्दा है ही। हमें भी भाजपा के जवाब की प्रतीक्षा है।

तो सतीश उपाध्याय का जवाब भी आ गया… केजरीवाल पर एक और मुकदमा तय…

तो केजरीवाल के आरोप बम का जवाब मिल गया। अगर सतीश उपाध्याय और आशीष सूद की बातें मानें तो उन पर लगा पूरा आरोप ही झूठा है, बेबुनियाद है। सतीश उपाध्याय ने साफ कह दिया है कि उनने जो आरोप लगाया है उसे साबित कर दें अन्यथा राजनीति छोड़ दें। अगर उनने साबित कर दिया तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूुगा। उन्होंने कहा कि जिन दो कंपनियों का उनने नाम लिया उनके बारे में मुझे कुछ पता ही नहीं है। सतीश उपाध्याय की बात मानें तो अरविन्द केजरीवाल पर आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर होना निश्चित है। उपाध्याय एवं आशीष सूद दोनों की बातों को मानें तो उनकी कंपनी है, जिसके माध्यम से वे मिलकर ठेकेदारी का काम करते थे। केबल डालने का मीटर लगाने का, पर उनने कभी कोई मीटर खरीदकर नहीं लगाया। सतीश के अनुसार उनकी मीडिया कंपनी है जो 1996 की है जिसमें किसी कंपनी से कोई लेनदेन नहीं हुआ। उन्होंने यह भी साफ किया जब मैं राजनीति में आ गया तो सभी कंपनियों से त्यागपत्र दे दिया। दोनों का कहना है कि मैं परिवार को पालने के लिए व्यवसाय करता हूं, लेकिन साफ सुथरा करता हूं। उनके अनुसार राजनीति में इतना स्तर नीचे नहीं गिरना चाहिए कि हम व्यक्तिगत स्तर पर उतरकर हमला करें।

Dayanand Pandey : दिल्ली विधानसभा चुनाव में मौलाना लोग बहुत तेज़ी से लामबंद हो रहे हैं । इन के पास ज़रा भी अकल नहीं है । अगर खुदा न खास्ता भाजपा के खिलाफ मुसलामानों से आम आदमी पार्टी को वोट देने का फतवा जारी कर दिया इन मौलाना लोगों ने तो जो अरविंद केजरीवाल अभी तक बढ़त बनाए दिख रहे हैं , औंधे मुंह गिरेंगे। यह मौलाना लोग कहीं हिंदू वोटों को पोलराइज करने के लिए नरेंद्र मोदी के ट्रैप में तो नहीं फंस गए हैं ? इस लिए भी कि भाजपा दिल्ली में पांच से अधिक मुसलमानों को उम्मीदवार बनाने जा रही है । इन में से कुछ पूर्व आपिये भी हैं। नरेंद्र मोदी जैसा बहेलिया अभी तक भारतीय राजनीति में तो नहीं देखा गया। मुसलमानों की खिलाफत ने ही इस बहेलिये को इतना ताकतवर बनाया है यह मौलाना लोग अभी तक नहीं समझ पाए , यह तो हद्द है!

पत्रकार मदन तिवारी, अवधेश कुमार और दयानंद पांडेय के फेसबुक वॉल से.

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कश्मीर में बाढ़ की रिपोर्टिंग का सच : ‘हिन्दुस्तानी कुतिया’ ‘रंडी’ की वो गाली सिर्फ मेरे लिए नहीं थी, सारे मीडिया समाज के लिए था

मैं चारों तरफ से बाढ़ से घिरी हुई थी। रिपोर्टिंग करनी थी। अपने आठ साल की पत्रकारिता में अच्छे बुरे सभी तरह के लोगों से पाला पड़ा लेकिन कभी भी ऐसा अवसर नहीं आया जब महिला पत्रकार होने के नाते खुद पर शर्मिंदगी महसूस हुई हो। छह सितंबर को आई बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित थे और मैं अकेली महिला पत्रकार थी जो वहां से रिपोर्टिंग कर रही थी। मेरा घर श्रीनगर के पहाड़ी क्षेत्र निशात में स्थित था जो बाढ़ से प्रत्यक्ष प्रभावित नहीं था। एक तरफ पत्रकारिता का जुनून, दूसरी तरफ परिवार की चिंता। मुझे खीज महसूस हो रही थी। 7 सितंबर को मैंने अंतिम रिपोर्ट अपने मुख्यालय तेहरान भेजा था। अगले पांच दिनों तक मैं यह सोचती रही कि क्या करूं।

किसी तरह मैंने हौसला पैदा किया। दुनिया को कश्मीर की बाढ़ और सरकार द्वारा किये जा रहे राहत कार्यों की वास्तविकता से अवगत कराने का। मैं घर से निकली तो मेरी सुरक्षा को लेकर चिंतित पापा भी मेरे साथ हो लिए। पापा गाड़ी चला रहे थे और मैं तस्वीरें लेने में व्यस्त थी। एक ही पहाड़ी रास्ता था जो थोड़ा सुरक्षित था परन्तु व्यस्त एवं खतरों से भरा था।

लाल चौक सिटी सेंटर के रास्ते में बहुत जाम था। उससे निकलना मुश्किल था। मैंने हिम्मत पैदा की और हब्बा कडाल पर ट्रैफिक पुलिस बन गई। यातायात को नियंत्रित करते वक्त मैं आराम से यह महसूस कर सकती थी कि पुरुष मुझे ऐसे देख रहे हैं जैसे मै सड़क पर खड़ी कोई पागल या मूर्ख महिला हूं। खैर, हब्बा कदाल में इस मुसीबत से छुटकारा मिला। कुछ किलोमीटर चलने के बाद फिर मैं जाम में फंस गई जिससे निकलना नामुमकिन था। हमने गाड़ी पार्क कर के पैदल ही आगे बढ़ने का निश्चय किया। तकरीबन तीन किलोमीटर चलने के बाद हम डलगेट चौक पहुचे। इस समय तक मेरे फोन की बैटरी समाप्त हो चुकी थी। वहां एक सहृदय व्यक्ति थे जिनकी बेकरी थी। उन्होंने मेरे गैजेट को चार्ज करने की व्यवस्था की। मैं ताजन्म उनकी शुक्रगुजार रहूंगी। जब मेरा गैजेट चार्ज हो गया तो हमने सिटी के हालात, बाढ़ से हुई मौतें तथा पहले भी कभी ऐसा हुआ था या नहीं, इस पर चर्चा की।

मेरा कैमरामैन सुबह से डलगेट पर इंतज़ार कर रहा था लेकिन जब लोगों ने हमें कैमरा के साथ देखा तो आक्रोशित हो गए क्योंकि वे राष्ट्रीय मीडिया द्वारा की जा रही झूठी रिपोर्टिंग से बहुत खफा थे। मैंने एक बुजुर्ग का साक्षात्कार लेने के लिए सोचा जो कश्मीर के बाढ़ के इतिहास और इस बार क्यों इतनी ज्यादा क्षति हुई, इससे संबंधित अपना अनुभव साझा करना चाहते थे। जैसे ही कैमरा शुरू हुआ, आसपास के लोग मशरूम की तरह इकट्ठे हो गए और चिल्लाने लगे- पत्रकार झूठे हैं और मीडिया हालात का गलत चित्रण कर रही है। मैंने उनके गुस्से को शांत करने का भरपूर प्रयास किया। उन्हें बताया मैं कोई विदेशी पत्रकार नहीं हूं, स्थानीय हूं, उनकी ही तरह मैं भी प्रभावित हूं, मुझे काम करने दें ताकि दुनिया को यह पता चले कि कश्मीर में क्या चल रहा है।

अचानक एक चुभती आवाज मेरे कान में आई- हिन्दुस्तानी कुतिया, रंडी, बंद करो यह ड्रामा। इन्ही शब्दों के साथ भीड़ उग्र हो गई और मेरे कैमरामैन को लात घूंसों से मारना शुरू किया। कुछ युवको ने हमें बचाया और हमारी टीम को बाहर निकाला। उन बचाने वालों में से एक का नाम मुझे याद है। शुक्रिया, मिर्ज़ा आबिद।

उस समय मुझे पत्रकार होने पर शर्मिंदगी का अहसास हुआ। इसलिए नहीं कि हताश पुरुषों की भीड़ ने मुझे गाली दी बल्कि इसलिए कि बड़े बड़े मीडिया संस्थान और पत्रकार कश्मीर की बाढ़ और बचाव के सिर्फ पांच प्रतिशत की ही रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

मुझे अपने महिला होने पर भी अफसोस हुआ इसलिए नहीं कि मेरे साथ जो हुआ उससे मैं भयभीत थी बल्कि मैं दुखी थी कि अकेले रिपोर्टिंग नहीं कर सकती थी और न ही बचाव टीम का हिस्सा हो सकती थी। कश्मीर की बाढ़ की वास्तविकता का सच अभी तक सामने नहीं आया है और न उसकी रिपोर्टिंग हुई है। यह सिर्फ तबाही का मंजर नहीं है, यह एक अहसास है और इस अवधारणा की पुन: पुष्टि है कि भारत सरकार के लिए कश्मीर के लोग दोयम दर्जे के निवासी हैं। सबसे पहले पर्यटकों को बाहर निकाला गया। यहाँ तक कि वहां कार्यरत भारतीय मजदूरों का बचाव प्राथमिकता थी। बचाव टीम के लिए कश्मीरियों का कोई महत्व नहीं था।

वह देश जो कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, एक बार फिर कश्मीरियो का दिल जीतने में हार गया। हां, वह विशेष शब्द “” रंडी “” जिसे किसी भी सभ्य समाज में फूहड़ माना जाता है, वह एक पत्रकार के रूप में सिर्फ मेरे लिए नहीं था बल्कि सारे मीडिया समाज के लिए था।

इरान के न्यूज चैनल प्रेस टीवी की भारतीय पत्रकार शहाना बट्ट के अनुभव का हिंदी रुपान्तारण. शहाना बट्ट से संपर्क shahana.butt@gmail.com के जरिए किया जा सकता है. हिंदी अनुवाद का काम किया बिहार के गया जिले के जाने माने वकील, पत्रकार और एक्टिविस्ट मदन तिवारी ने.

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मदन ने कविता कृष्णन से चैट को एफबी पर डाला तो भड़क उठी पाखंडी नारीवादी, किया ब्लॉक

मदन तिवारी

Madan Tiwary : “”इश्किया कैंडिल लाईट”” आन्दोलनों का सच। तहलका हिंदी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर “इश्किया कैंडिल लाईट” टाइप आन्दोलनो की असलियत को उजागर किया है। यह लेख अतुल चौरसिया का है। इसमें खुर्शीद अनवर मामले में कविता कृष्णन की भूमिका का भी उल्लेख है। लेकिन इसके पहले कविता कृष्णन के साथ हुई बातचीत को मेरे द्वारा जो फेसबुक पर प्रकाशित किया गया तो उस पर उसकी (कविता कृष्णन की) प्रतिक्रिया को नीचे दे रहा हूं। इस प्रतिक्रिया के बाद ही कविता ने मुझे ब्लाक कर दिया।

कविता : You do not have my permission to make any conversation with me public. I consider my emails and inboxed conversations private and expect privacy from my correspondents.

मदन : i informed you but you didn’t respond moreover i didn’t publish anything that cause harm your reputation . what we talked was common and even we could have been discuss that openly . . you are a public figure you shouldn’t afraid of such things. better maintain complete transparency ,that is important for a political person.

कविता: That is a highly unethical thing for you to do – share one-to-one conversations.

मदन : kavita i told you,after informing you ,i made it public moreover we did not discuss anything personal .what we discussed was common. if we had discussed something personal ,certainly publishing that was not ethical but here situation is quite different . it was one to one conversation but subject of discussion was public not personal .

अब पढें तहलका ने क्या लिखा है… क्लिक करें इस शीर्षक पर…

‘तहलका’ में पेशेवर आंदोलनकारियों पर निशाना, पढ़िए कविता कृष्णन की दास्तान

उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ कमेंट इस प्रकार हैं…

Rajesh Rai Madan Tiwary बेचारों को जीने – खाने दीजिए । आप तो पेट पर लात मारने पर तुले हुए हैं ।

Samar Anarya हा हा, आदत से मजबूर इस मुखबिर ने इस चैट में भी कुछ नए आरोप जो जड़ दिए थे. घबराना स्वाभाविक है.

Ajit Harshe किस पर विश्वास किया जाए किस पर नहीं, समझना मुश्किल है।

Samar Anarya इतना भी मुश्किल नहीं है Ajit Harshe भाई. इसकी पिछली चैट चेक कर लीजिये मदन भाई वाली, जिसमे इसने छूटते ही मुझ पर और यशवंत सिंह पर आरोप लगा दिए हैं. पेशेवर आरोपबाज है ये.

Ajit Harshe अरे भई, मैं तो इन आंदोलनों की बात कर रहा हूँ। इतने आंदोलन हुए। भाग तो नहीं ले सके, मगर हमेशा दिल में समर्थन रहा। अब इस आलेख से यह लगता है कि भविष्य में आंदोलन हों तो उन्हें शक की निगाह से देखा जाए।

Ajit Harshe हाँ, वो चैट मैंने देखी थी। मुझे इतनी गलतफहमी भी नहीं है। आपका नाम भी देखा था…

Ajit Harshe चैट क्या वह तो इंटरव्यू ही था।

Samar Anarya हा हा हा Ajit भाई

पूरे मामले को समझने के लिए इस शीर्षक पर भी क्लिक करें…

यशवंत पर लड़की छेड़ने का एफआईआर कराया इसीलिए वह मेरा विरोधी बन गया है : कविता कृष्णन

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यशवंत पर लड़की छेड़ने का एफआईआर कराया इसीलिए वह मेरा विरोधी बन गया है : कविता कृष्णन

विवादित नारीवादी कविता कृष्णन से बिहार के गया जिले के चर्चित वकील मदन तिवारी ने फोन पर लंबी बात की.  कविता कृष्णन पर उठ रहे ढेर सारे सवालों, लग रहे ढेर सारे आरोपों को लेकर मदन तिवारी ने उनसे एक-एक कर विस्तार से बात की. पर अपने पाखंडी स्वभाव के अनुरूप कविता बात करते-करते मदन पर ही भड़क गई और उन्हें नानसेंस तक कह डाला. मतलब ये कि बातचीत करने तक का धैर्य नहीं दिखा सकी. यही हड़बड़ी वह राजनीति और नारीवाद में भी करती है जिसके कारण कई जेनुइन लोग बुरी तरह फंस गए, आत्महत्या करने को मजबूर हुए या उनकी इज्जत तार-तार कर दी गई. कविता की ओछी मानसिकता और टीआरपी खोर महिलावादी सक्रियता को लेकर एक बड़ा खेमा विरोध में खड़ा हो चुका है. इसी सबको लेकर मदन ने कविता से बातचीत की और उनका पक्ष जानना चाहा.

Kavita Krishnan

पूरी बातचीत को मदन तिवारी ने फेसबुक पर डाला है. इस बातचीत में जब मदन तिवारी ने कविता कृष्णन से पूछा कि आखिर यशवंत और अविनाश पांडेय समर आपका विरोध क्यों करते हैं तो कविता ने यशवंत के बारे में बताया कि कुछ साल पहले लड़की छेड़ने का मुकदमा यशवंत पर मेरी मदद से संभव हुआ, जिसके कारण वह मेरे खिलाफ है. मदन तिवारी के स्टेटस पर यशवंत ने भी कमेंट कर अपना पक्ष रखा है. पूरे प्रकरण को विस्तार से आप नीचे पढ़ सकते हैं और कविता कृष्णन जैसी कथित नारीवादियों की सोच, हकीकत जान सकते हैं.

कविता कृष्णन से मदन तिवारी की बातचीत यानि कविता कृष्णन के पक्ष को भड़ास पर यहां इसलिए प्रकाशित किया जा रहा है ताकि यह कतई न कहा जा सके कि भड़ास किसी के खिलाफ एकतरफा अभियान चलाता है. अगर भड़ास के एडिटर यशवंत यानी मेरे खिलाफ भी कोई कुछ कहता है, कोई आरोप लगाता है, कोई नकारात्मक कमेंट करता है तो उसको भी भड़ास पर प्रमुखता से प्रकाशित होना चाहिए. अगर कोई संपादक या कोई पत्रकार खुद का चीरफाड़, पोस्टमार्टम, इंट्रोस्पेक्शन अपने हाथों अपने मीडिया माध्यम पर नहीं कर सकता तो वह दूसरों के खिलाफ किस नैतिकता से लिख सकता है. पत्रकारिता को अंततः पारदर्शिता ही बचाएगी अन्यथा कारपोरेट की मदद से मीडिया मालिकों और मीडिया दल्लों ने पूरे सत्कर्म-जनकर्म को धत्कर्म-एलीटकर्म में तब्दील कर दिया है.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


मदन तिवारी, वरिष्ठ वकील, गया (बिहार)

Madan Tiwary : नीचे मैं कविता कृष्णन के साथ हुई बातचीत को दे रहा हूं। एक बात तो ये स्पष्ट है यह शार्ट टेंपर लड़की है और अहंकारी भी। बातचीत के अंत में उसका यह पूछना कि मैं कौन होता हूं यह सब पूछने वाला, इसके अहंकार को प्रदर्शित करता है। हालांकि किस्मत अच्छी थी हट गई अन्यथा आज उसको अपने अहं का पता चला जाता।

madan :what is the truth behind khurshid anwar case and what you know . this issue has brought storm over facebook.

kavita : Please read the statement by feminists including me in Nov, posted on Kafila. Anyway why are the ISD members asking me about it, why not question those inside ISD who initiated the enquiry against Khursheed? They are targeting me mainly because I present a political target.

madan: No other reason. actually in beginning my view was different and mayank had admitted but now few social activist are blaming you and mayank to conspire that is why i am asking. i am not member of any group or organisation but want to know the truth. have you ever interviewed that north east girl and if so whats your opinion about her version .

kavita: I have never even met Mayank in my life. I can assure you the Manipuri complainant is not a BJP person or even a political person. Beyond that no one can know the truth. Truth might have been known had Khursheed not committed suicide and instead faced enquiry. I never appeared in India TV studio, only gave brief byte saying it’s good that the girl has filed FIR, now enquiry can proceed. Isnt that what Khursheed’s friends say he himself was wanting? If so why attack me?! Can they dare make public minutes of ISD meetings on this topic? So that we can know who, including Khursheed etc, said what in there? You should ask them these questions. Pl dont quote me. Just look at the feminists statement and share that please.Yes I have spoken to the girl. I believe her to be most genuine. But I can’t prove that she is right since Khursheed is no more and no enquiry is possible. In fact the girl herself has faced hell and has needed a lot of help and support in coming back to normal. And yet these people are openly calling her a liar. Why? I NEVER called Khursheed a rapist.

madan: yes i know it now no enquiry is possible becoz even law prohibits proceeding if accused expire . i had used the word rapist for khurshid and had made posting about him but many of his supporter tried to convince me about a conspiracy hatched by mayank, ila and you in order to get command of boond and to stop enquiry regarding some misappropriation of fund.if you dont mind may i ask few questions ?

kavita: All questions are answered.in two Kafila posts – one by me & Kalyani Menon Sen and one by many feminists together. Oh and also one by Sucheta De and Shivani Nag. I neither know nor am interested in Mayank Ela etc. I just know that the girl herself has spoken against Mayank and Ela also. So she can hardly be their conspiracy.

madan: yes and when i countered mayank he admitted many things thereafter i advised him to go to police. but why samar and yashwant are against you ? perhaps they not associated with ISD.

kavita: Yashwant molested daughter of a comrade in his house some years ago and she filed FIR with my help. And Samar himself was thrown out of PSU in jnu because he beat up his girlfriend badly. These 2 hate women and feminists. And I told you Kafila website! Not answered.in! That is typo.

madan : ok i check that website kafila. one more thing why these ISD people are defending khurshid . what lust they have ? those two girls made posting about your rude behaviour which, after conversation with you ,i think is baseless. difficult to search that article can you provide link or category

kavita:What rude behaviour?! Is it not rude of them to phone me to call me names?!Why should I respond to their kangaroo court?! They have questions they haven’t answered yet. Read http://kafila.org/2014/02/17/feminist-reflections-on-the-tragic-suicide-of-khurshid-anwar/ Also read this brief response by Ranjana who was a friend of Khurshid’s for much longer than Samar etc who actually did not know him that well. https://groups.google.com/forum/m/#!msg/humanrights-movement/OGHUwffaiAI/5Bz4M-Wb6j0J

madan:ok right now i was busy with my client kavita ji even hardcore communist and sympathisers are against of your rigidity and stand to support JNU molestation accused. why double yardstick ? better introspect ,rectify and tender apology.

kavita : I have not supported any molestation in jnu. please don’t talk nonsense. Who are you by the way? Please prove that I supported molestation.

madan : kavita krishnan mind your language . what the word nonsense denotes? so far your question about my locus standi is concerned, i am a nameless, identity less common people .whether raising common issue required authority ?why die hard communist sympathiser are critising you one more thing kavita i believe in transparency so i may make this whole conversation public. i least bother consequence once decide to fight against wrong.

बिहार के गया जिले के जाने-माने वकील, पत्रकार और एक्टिविस्ट मदन तिवारी के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ कमेंट यूं हैं…

Sheeba Aslam Fehmi Mujtahida hmmm… Madan ji in this case we can not Club Mayank-Ila with Kavita. And Kavita entered into this at much later stage. Mayank-Ila had the proof of Khurshid sahab’s innocence in Ila’s mobile msg box (Ila herself told me all this in my office), and he himself requested them both to provide their evidence to the internal investigation committee of ISD, but they were having vicarious pleasures at the cost of his extreme humiliation and victimization on social media and in ISD.
 
Samar Anarya मधु किश्वर की जरखरीद गुलाम है ये, पैसा लेती है इतना तो साफ़ हो गया. कितना, ये पता लगाना बाकी है.
 
Asad Jafar arre band kro isko kyu mre ko aur marte ho bhai
 
Anand Kumar अरे रिलैक्स.. cool down Samar Anarya भाई.. ये सब आपके कल परसों वाले शादी के पोस्ट को देख के लिख रही होगी.. उनकी इर्ष्या जायज है.. कोई ढंग का मिला नहीं मिस किलर को.. कहीं तो खुन्नस निकलेंगी और कुत्ता (and कुतिया) दोनों वफ़ादार प्राणी हैं आपने इनके नाम के साथ उनका नाम जोड़ के जो पाप किया है इसके लिए भी आपकी मेनका गाँधी से शिकायत होनी चाहिए.. थोड़े बेहतर शब्द आते हैं.. लेकिन अब वो public फोरम पे टाइप न करें cool down..

Samar Anarya Sheeba Aslam Fehmi सही कह रही हैं Madan Tiwary भाई. कविता कृष्णन के रिश्ते मयंक इला से नहीं हैं. वैसे भी मयंक लखनऊ में कुछ वक़्त एसएफआई में रहा है सो आइसा के लिए अछूत हुआ. कविता बूँद पर कब्जे के के लिए लड़ रहे जहरीला तपन (उर्फ़ तपन कुमार) की करीबी है. इस तपन कुमार का दिल्ली सर्कल से परिचय उसके गुर्गे, दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रोफ और वीडिओ वितरक जहरीले प्रोफ़ेसर आशुतोष कुमार ने करवाया था, 2012 में आइसा की छात्र युवा कन्वेंशन में हिस्सा लेने बहुत त्याग करके ‘जनरल’ डिब्बे में बैठ के चला आया था 

Madan Tiwary Samar Anarya Sheeba Aslam Fehmi Mujtahida Asad Jafar what i gathered ,she does not know anything worthwhile and perhaps she was not even approached but the name of khurshid ,a social activist ,was reason to get involve and she did so just to exploit the incidence for own gain. without going into depth of consequences. her role is limited to defame khurshid anwar . Asad saheb if there was a conspiracy then avoiding discussion or dropping issue will only create confusion and doubt. both side don’t have expert to investigate or enquire the matter and solve mystery . best way is that get it solved.
 
Sheeba Aslam Fehmi Mujtahida I spoke to Kavita in person to request that she first ascertain the genuineness of the case. I suggested her to listen to both parties as KA had very different version of turn of events. Kavita refused to pay any heed to my suggestion. KA told me several times that her involvement denotes some greater game plan.  as the narration of the case in social media was grossly fudged up.
 
Samar Anarya She definitely had designs. She refused to listen to you, Mohit, Shakil bhai and many others while maintaining that she ‘knew’ that the allegations were correct.
 
Sheeba Aslam Fehmi Mujtahida I still feel that its some kind of ego-trap she is caught in. Wish she overcome it herself soon and make some just contribution to the case.
 
Samar Anarya I don’t think it’s about ego Sheeba. See Kranti bhai’s comment… he was a national level leader when I had just joined in. All of them slowly left the party, terming it a giroh! And it definitely has something to do with this super elite gang’s efforts to keep the Bihar based party in tight control.
 
Madan Tiwary Samar Anarya I not a common people, i know procedure to investigate and to find the facts. we teach others so i cant buy kavita’s version. we cross examine witnesses ,even experts and derive the things we required. i quoted two factor in my another posting. we believe in evidence and just one hour with any witness or victim is enough to reach on conclusion. we even cross examine doctors . in a case, hairline fracture was shown to make injury grievous and in support , ultrasonography of head was produced but when i asked the question about suture that gentleman doctor admitted the similarity and even mal positioning of injured reason for wrong finding. so it is easy . unfortunately i dont have any link to talk with that north east girl.
 
Samar Anarya Unfortunately, that will be pointless with one party lynched by the other. However, those who played dirty role in lynching must be punished.
 
Samar Anarya बाकी इसकी हरक़त यहीं देख लीजिये- Yashwant भाई और मुझ पर दोनों पे आरोप लगा गयी! और मेरे केस में तो इसे वो पता है जो मेरी गर्लफ्रेंड को नहीं है! बाकी उसी जेएन यू में खड़े होकर एक आरोपी को बचाया था, अब दूसरे को बचा रही है. वजह? पार्टी के हैं.
 
Madan Tiwary Samar Anarya भाई सच के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है इन्हें। मेरे केस में इनको अपनी औकात पता चल गई थी जब गया का हर राजनीतिक दल, पत्रकार, नेता मेरे पक्ष में आ खड़े हुए थे । मेरी पत्नी तो मेरे जेल में रहने के दौरान ही जिसकी हत्या हुई थी उसके घर और माले के आफिस में पहुंच गई पूछने की क्यों फंसाया। आज मुझे भी वह समय याद आ रहा है शायद मैं भी आत्महत्या कर लेता या जेल तोड़कर भाग जाता और इनके खिलाफ हथियार उठा लेता… वह तो अच्छा हुआ जमानत हो गई। इन्होने स्वीकार किया था कि मुझे जानबुझकर गलत फसाया है..
 
Samar Anarya हाँ कल ही बताया आपने। कितनों पर आरोप लगाये हैं इन्होने कितनों पे लगायेंगे। इसीलिए उखड़ रहे हैं जमीन से।

Ravi Sinha Madan Tiwary Bhai we may differ with each other on many issues but I admire you for stuff like this. My only assessment is that once again Left Brigade will start calling you Sanghi and Brahmanical…
 
Madan Tiwary Ravi Sinha sir difference of opinion should not be turned into character assassination or to settle score. a biased and pre judgmental person doesn’t deserve to be a public figure and if he or she is rigid, required condemnation .
 
Rahul Anand मदन सर, आज मैं ख़ुद को भाग्यशाली मानने को तत्पर हूँ कि आपने मुझे अपने मित्र सूचि में स्थान दिया है, एक सच्चे सामाजिक कार्यकर्ता का साथ अद्भुत आभास कराता है ।
 
Madan Tiwary Rahul Anand जी हम सब इंसान है और एक बराबर है । दोस्ती दो तरफा होती है आपने भी तो मुझे अपना दोस्त बनाया..
 
Rahul Anand सर आप द्वारा बिना किसी पूर्वाग्रह के और बिना लाग लपेट के वैसे सामाजिक विषयों पर जो प्रबुद्ध लड़ाई लड़ी जाती है जिसे कोई दूसरा सोशल मीडिया में छूना भी पसंद नहीं करता , मैं इसका कायल हूँ …….. खुर्शीद अनवर और उस मणिपुरी लड़की से सम्बंधित घटना की बस मुझे सुनी सुनाई जानकारी है, आज कुछ जानने का प्रयास करूंगा और कुछ आपके इस पोस्ट ने बता ही दिया है …….. आपके जुझारूपन को सलाम !

Praveen Shekhar बाबा को सलाम… कभी समझ नहीं पाता आपको… एक पोस्ट पर आपका विरोध करता हूं कि अगले में निरुतर… आप बहुत साहसी हैं… काश मैं भी इतना साहसी होता…
 
Yashwant Singh कई दिनों से लगातार यात्रा के कारण चैन से बैठ नहीं पाया ताकि इस पोस्ट को पूरा पढ़ कर इत्मीनान से कमेंट कर सकूं. आज फुर्सत में हूं. पहले आपके आरोपों पर मैं अपनी सफाई दे दूं. कविता जी, मालेस्टेशन में आपने एफआईआर कराके बड़ा अच्छा काम किया. लेकिन कम से कम पीड़िता और आपको इसका फालोअप तो करना चाहिए था. न तो आप गवाही देने पहुंची और न ही पीड़िता कोर्ट आई. नतीजा हुआ ये कि मेरे जैसा छेड़छाड़कारी, सांड़, रेपिस्ट, बलात्कारी छुट्टा बाहर घूम रहा है. हां, उन दिनों जब मेरे खिलाफ आपने अविनाश दास को कहकर मोहल्ला ब्लाग पर मीडिया ट्रायल चलवाया था, ”दुनिया के सबसे शैतान आदमी यशवंत” के खिलाफ, तो वो सब पढ़-सुन-देख कर मेरा दिल अक्सर सुसाइड करने का करता था, लेकिन जाने क्यों रुक गया. लगा, ये मुश्किल वक्त मुझे मजबूत बनाने के लिए आया है, टूटने, हराने या मारने के लिए नहीं. बस, तभी से जुट गया, मुकदमा झेलने और भड़ास चलाने में. लड़की को चूमने की कोशिश करने के आरोप में आप की मदद से कराई गई एफआईआर के मुकदमें में अगर एक बार भी कोर्ट जाना भूल जाउं तो मेरे खिलाफ गैर जमानती वारंट निकल जाते. चार-पांच गैर जमानती वारंट झेला. लेकिन कोर्ट ने आप जैसे गवाहों और पीड़िता को दर्जनों बार सम्मन नोटिस सूचना भेजकर बुलाया, कहा कि आप लोग आकर कोर्ट में अपनी बात रखिए, लेकिन आपमें से कोई भी एक लोग एक बार भी कोर्ट नहीं आए, और चूंकि आप लोग पीड़ित पक्ष के थे, इसलिए आप लोगों को कोर्ट न आने पर जमानती या गैर-जमानती वारंट भी नहीं झेलना पड़ता. शायद आप लोग किन्हीं दूसरे लोगों के खिलाफ एफआईआर कराने या बाइट देने या मीडिया ट्रायल चलाने में व्यस्त रहे होंगे. इस कारण आप सभी की गैर-मौजूदगी, बयान न देने आने के कारण कोर्ट को मजबूरन मुझे बरी कर देना पड़ा. कविता जी, आपकी सारी सक्रियता शुरुआती कंगारू कोर्ट ट्रायल तक ही क्यों सीमित रहती है. शायद इसलिए कि आपको तात्कालिक वाहवाही मिल जाए और आप महान नारीवादी के रूप में संसार में इस्टैबलिश हो सकें. अगर आप आरोपियों को दंड भी दिलातीं तो शायद सही किस्म का नारीवाद होता और इससे बाकी लोग भी सबक लेते. मैं यहां कतई सफाई नहीं दे रहा कि मैंने छेड़छाड़ की या नहीं और यह कि पीड़िता गलत थी या नहीं. मैं सिर्फ आपकी वे आफ वर्किंग पर सवाल खड़ा कर रहा हूं कि आपने मेरे कुकृत्य को एफआईआर कराने लायक माना लेकिन उसके बाद अचानक से पूरी तरह विस्मृति लोप की शिकार होकर मामले को भूल गईं. ऐसा नहीं है कि मैं अपने उपर लगे आरोपों को छिपाता फिरता हूं या इससे दूर भागता हूं. अगर हम धरती पर हैं तो हमारे सामने अच्छे बुरे दोनों तरह के दिन, हालात आते हैं और दोनों को झेलना ही पड़ता है, वो चाहे आप हों या मैं हूं. देखिए न. समय का पहिया ऐसा चला कि आपको भी सफाई देते घूमना पड़ रहा है कि आप सच्ची, अच्छी है, बुरी या घटिया बिलकुल नहीं. खैर, आपकी आप जानो, मैं तो अपनी जानता हूं. जिस दिन मैं कोर्ट से आपके द्वारा पहल से कराए गए छेड़छाड़ के मुकदमे से बरी हुआ, तो उस दिन मैंने भड़ास पर एक पोस्ट लिखकर प्रकाशित किया था, पढ़ लीजिएगा. उसमें कोर्ट के बाहर की वो तस्वीर भी है जिसमें मैं खड़ा हूं और कोर्ट का एक सिपाही मेरे बरी होने के पत्र को जज साहिबा की कोर्ट के बाहर लगे बोर्ड पर चिपका रहा है. लिंक ये है…

छेड़छाड़, अदालत, आदेश, आटो, उम्र, जीवन और दर्शन…. ओ भोला भाई!

http://old1.bhadas4media.com/vividh/16130-y.html

अगर दंडित भी हुआ होता तो उसको भी भड़ास पर लिखता छापता. असल मसला ट्रांसपैरेंसी का है. आपकी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि आप ट्रांसपैरेंट बिलकुल नहीं हो. अपने पार्टी के साथियों के लिए कोई दूसरा नियम-कानून रखती हो और पार्टी के दायरे से बाहर निकल गए लोगों के लिए बिलकुल दूसरा स्टैंड. अविनाश पांडेय समर ने आपके दोगले चरित्र को बड़े अच्छे ढंग से दुनिया के सामने खोल दिया है. बात-बात पर उखड़ने, गुस्सा करने और दूसरों को बेवजह फंसाने-परेशान करने की जगह आपको अब खुद के भीतर झांकना चाहिए और आगे का जीवन ज्यादा डेमोक्रेटिक व ट्रांसपैरेंट तरीके से जीना चाहिए. खैर, भला मैं कौन होता हूं आप जैसी महान क्रांतिकारी कामरेड नारीवादी को सलाह समझाइश देने वाला… बाबा रे बाबा… हां, यह कह सकता हूं खुद को लेकर कि मेरी सेहत पर बिलकुल असर नहीं पड़ता है कि आप या आप जैसे पाखंडी, हिप्पोक्रेट किस्म के कामरेड लोग मुझे अच्छा आदमी मानते हैं या नहीं. अपने पास वक्त नहीं कि इगनोर किए जाने लायक लोगों की चर्चाओं, प्रतिक्रियाओं पर सोचूं और रिएक्ट करूं… आज यह सब इसलिए लिख दिया ताकि दुनिया कविता कृष्णन की ‘महान’ मानसिकता और यशवंत सिंह की ‘ओछी’ सोच को जान सके. बाकी फैसला जनता जनार्दन को करना है कि कौन गलत है कौन सही है.

Bhaskar Agrawal People here need to introspect themselves ego and self praising raised up to extent which vanishes the border of humanity and natural justice . One thing shall always be remembered that everything is fatal in this world.

Madan Tiwary Yashwant Singh जी ये परले दर्जे के पूर्वाग्रह वाले लोग हैं। मेरे केस में तो इन लोगों ने एडमिट किया कि मुझे हत्या के झूठे मुकदमे में फंसाया क्योंकि इनके गैरकानूनी कार्यालय को बंद करवाने का आदेश पारित करवा चुका था। बाद में सफाई दी कि इनके आफिस का झंडा पताका उखाड़ने फेंकने के कारण फंसाया। इनमें नैतिकता नहीं है। दीपांकर खुद को सच्चा मानते हैं न, बुलाये अपने गया की टीम को। पूछे कि गलत फंसाया था या नहीं। वैसे भी फुर्सत मिली तो खुद इनके पटना कार्यालय पहुँच जाउंगा। मैं भी आत्महत्या के लिए सोचने लगा था। इन्हें हिसाब तो देना होगा गलत फंसाने का।

पढ़िए क्या हुआ जब मदन तिवारी ने कविता से बातचीत को फेसबुक पर डाल दिया…

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