राजा निरबंसिया

देशभटक पांड़े का माइंड सुन्न होने लगा है… दशहरा सिर पर है और तैयारी पांव पर.. नाटक के रिहर्सल के लिए एक्टर लोग टाइम पर पहुंचते ही नहीं हैं… पिछली तीन बार से परोरहां की टोली सारी ताली बटोर ले जा रही है..बटोरेगी काहे नहीं…पूरा एक महीना रिहर्सल करते हैं वहां के एक्टर .. और अमवा मझार के एक्टर..बाप रे बाप…कोई चार दिन के लिए ससुराल चला जाएगा तो किसी की भैंस बथान से खुला जाएगी… आ बेतिया के मेला में जा के जगहंसाई कराके लौट आएंगे सबलोग…लेकिन इस बार देशभटक पांड़े साफ बोल दिए हैं कौनो झोलझाल नहीं चलेगा.. रिहर्सल होगा तो पूरा होगा नहीं तो बेतिया मेले में अमवा मझार का नाटक कैंसिल..

प्रिय प्राणनाथ, तुम्हारा हर सर्जिकल मुझे फर्जिकल-सा क्यों लगता है : जशोदा

प्रिय प्राणनाथ,

तुम्हारा हर सर्जीकल मुझे फर्जीकल सा क्यों लगता है? तुम बिल्कुल भी नहीं बदले, वही चालबाजियां …वही गलतबयानियां ! बरसों पहले तुम अचानक घर छोड़ कर हिमालय चले गये, मेरे लिये यह किसी सर्जीकल स्ट्राईक सी घटना थी. बाद में पता चला कि तुम हिमालय कभी नहीं गये, बल्कि उस रात भी गृहत्याग कर संघ कार्यालय जा छिपे थे. प्राणनाथ, तुम प्रारम्भ से ही काफी फर्जीकल रहे हो!

हे पाकिस्तान, एक मिसाइल फिल्म सिटी में भी दाग़ दे… आत्मा तृप्त हो जाएगी

एक सपना… पत्रकारों का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, भारत की जीत!…. रात के क़रीब आठ बजे से कुछ मिनट ज़्यादा हो रहे हैं… पाकिस्तान के हमले का सबसे ज़्यादा गुस्सा हमारे पत्रकारों पर दिखाई दे रहा… प्राइम टाइम पर चीखें सुनाई दे रही हैं… मानो अभी जाकर लेफ्टिनेंट कर्नल सुधीर चौधरी पाकिस्तान पर हमला कर देंगे… ऐसा लग रहा है जैसे लांस नायक रोहित सरदाना अब युद्ध के लिए एक क्षण भी इंतज़ार नहीं करना चाहते… रजनीगंधा चौराहे के पीछे वाले इलाके(फिल्म सिटी) से गोलियों की तड़तड़ाहट बंद होने का नाम नहीं ले रही… नायब सूबेदार दीपक चौरसिया के हर एक ज़ुबानी हमले में कम से कम 35-40 पाकिस्तानी सैनिक घायल हो रहे हैं… ग्रेनेडियर अरनब गोस्वामी मुंबई से ही हमला कर रहे हैं…

तू यूँ ही चाटते, खुजाते रह

(नोट : जिसे दिनकर की बात का बुरा लगे वो डूब मरे।) अशोक की लाट तुझे पहनने को मिलती है, सलामी तू तिरंगे की लेता है, कसम तिरंगे के नीचे लेके आता है, फिर तू कुर्सी पे आता है, तेरी कुर्सी और तेरी तशरीफ़ के नीचे तौलिया भी होता है। अरे तुझे इज्जत से जीने के लिए कितने पैसे चाहिए होते हैं?