विज्ञापन घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने शोभना भरतिया और बिहार सरकार को पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया

नई दिल्ली। अठारह जनवरी 2018 को बहस की निर्धारित तिथि पर पीटिशनर शोभना भरतिया और बिहार सरकार के विद्वान अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति को सुप्रीम कोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया है और कोर्ट ने अपनी गहरी नाराजगी प्रकट की है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 जनवरी, 2018 को पारित अपने आदेश में अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए  निम्नलिखित आदेश पारित किया है:- ‘‘न्याय का तकाजा है कि कोर्ट दोनों पार्टियों पीटिशनर शोभना भरतिया और रेसपोन्डेन्ट नंबर एक बिहार सरकार को अगली तारीख 14 मार्च, 2018 को अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका प्रदान करता है। पीटिशनर के विद्वान अधिवक्ता की अनुपलब्धता की स्थिति में आज बहस स्थगित की जाती है।”

सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर-02 में न्यायमूर्ति श्री जे. चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति श्री संजय किशन कौल की खण्डपीठ दैनिक हिन्दुस्तान अखबार की मालकिन शोभना भरतिया की अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस मुकदमे में रेसपोन्डेन्ट नंबर दो मुंगेर के मन्टू शर्मा हैं. इनकी ओर से बहस में हिस्सा ले रहे बिहार के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने बहस में पीटिशनर शोभना भरतिया के विद्वान अधिवक्ता के बहस में हिस्सा न लेने पर न्यायालय से पीटिशनर शोभना भरतिया पर बड़ा जुर्माना लगाने की प्रार्थना की और न्यायालय को बताया कि वे लगभग पांच वर्षों  से कोर्ट की कार्यवाही में नियमित भाग ले रहे हैं, परन्तु पीटिशनर शोभना भरतिया और बिहार सरकार के विद्वान अधिवक्तागण बहस से कतरा रहे हैं।

विद्वान न्यायाधीश द्वय ने काफी समय तक विचार-विमर्श के बाद उपरोक्त लिखित आदेश पारित किया और पीटिशनर और बिहार सरकार को अगली तिथि को बहस में हिस्सा लेने और अपना-अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका प्रदान किया । स्मरणीय है कि पिछली तिथि को बिहार सरकार के विद्वान अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष इस मुकदमे से जुड़ी संचिकाओं की चोरी होने की स्थिति में बहस में हिस्सा लेने में असमर्थता प्रकट की थीं और अगली तिथि को बहस में हिस्सा लेने की बात न्यायालय से कही थी।

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हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के प्रधान संपादक बॉबी घोष ने इस्तीफा दिया

हिंदुस्तान टाइम्स समूह से बड़ी खबर आ रही है। एचटी अखबार के प्रधान संपादक बॉबी घोष ने इस्तीफा दे दिया है। प्रबंधन ने उनका त्यागपत्र कुबूल कर लिया है। इस बात की जानकारी ग्रुप की चेयरपर्सन शोभना भरतिया ने एक आंतरिक ई-मेल के जरिए अपने सभी मीडियाकर्मियों को दी। वैसे कहा ये जा रहा है कि घोष कुछ निजी कार्यों की वजह से न्यूयॉर्क वापस लौट रहे हैं। लेकिन बताया जाता है कि घोष के सत्ता विरोधी पत्रकारीय तेवर को एचटी मैनेजमेंट पचा न पाया और उन्हें अलविदा कह दिया। फिलहाल शोभना भरतिया का आंतरिक ई-मेल पढ़िए…

Dear All,

I am deeply disappointed to share the news that Bobby Ghosh will be returning to New York, for personal reasons. 

Bobby has only been with HT Digital Streams Ltd. for 14 months, but in that time he has engineered a dramatic transformation of our various news products. This is reflected not only in our traffic numbers, but in the sheer ambition of our journalism. Under his leadership, HT Newsroom has pursued bold ideas and has addressed some of the most pressing issues of our time. We have come to be recognized as the place for journalistic innovation and enterprise. 

We will miss him, but I am confident that the newsroom leadership team he has nurtured will more than live up to the challenge. 

At my request, Bobby has agreed to stay on for a while, to help in the transition and complete some projects he has already launched. 

There will be time for proper farewells. For now, please join me in wishing Bobby the best in his next adventures. 

Shobhana Bhartia

Chairperson

HT Media 

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महाभ्रष्टाचारी अरुण मिश्रा ने हिंदुस्तान टाइम्स की मालकिन शोभना भरतिया को भेज दिया लीगल नोटिस!

उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (यूपीएसआईडीसी) के विवादित चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा ने हिंदुस्तान टाइम्स अखबार को लीगल नोटिस भेज दिया है. हिंदुस्तान टाइम्स में कानपुर डेटलाइन से रिपोर्टर हैदर नकवी ने एक रिपोर्ट छापी कि कैसे एक लाख रुपये महीने तनख्वाह पाने वाला एक बाबू (यानि अरुण मिश्रा) देश के शीर्षस्थ वकीलों को अपना मुकदमा लड़ने के लिए हायर करने की क्षमता रखता है. ये शीर्षस्थ वकील हैं सोली सोराबजी, हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी और अन्य.

एचटी में प्रकाशित खबर का शीर्षक यूं है : ”UP babu accused of corruption has Rs 1L pay, hires top lawyers Rohatgi, Sorabjee”

ज्ञात हो कि अरुण मिश्रा को सीबीआई ने 2011 में गिरफ्तार किया था. उस पर 65 से ज्यादा फर्जी बैंक एकाउंट संचालित करने का आरोप था. ऐसा माना जा रहा है कि उसने ब्लैक मनी को ह्वाइट करने के मकसद से विभिन्न शहरों के कई बैंकों में फर्जी बैंक एकाउंट खुलवा रखे थे. आय से अधिक संपत्ति के आरोपी अरुण मिश्रा जब तनख्वाह ही महीने का एक लाख रुपये पाता है तो वह कैसे इतने महंगे वकीलों को फीस देता होगा. इन वकीलों के बारे में सब जानते हैं कि ये एक एक सुनवाई के दौरान उपस्थित होने के लाखों रुपये लेते हैं.  अरुण मिश्रा के खिलाफ ढेर सारे केस हाई कोर्ट और सु्पीम कोर्ट में चल रहे हैं.

अरुण मिश्रा अपने को बचाने के लिए इन टाप वकीलों की सेवाएं ले रहा है. लेकिन इस सेवा लेने से एक सवाल खड़ा हो गया है कि वह इन्हें पैसा कहां से देता होगा? क्या अरुण मिश्रा से केंद्रीय एजेंसियों को यह नहीं पूछना चाहिए कि आखिर वह इतने बड़े बड़े वकीलों को प्रत्येक पेशी पर लाखों रुपये कहां से देता है? ज्ञात हो कि 2011 में सीबीआई ने अरुण मिश्रा को दिल्ली के पृथ्वीराज रोड और देहरादून में संपत्तियों को जब्त किया था. पृथ्वीराज रोड वाली लुटियन जोन इलाके की अकेली प्रापर्टी की कीमत करीब 300 करोड़ रुपये से ज्यादा है. ऐसे में यह समझा जा सकता है कि यह महाभ्रष्टाचारी अरुण मिश्रा कहां से अपने टाप लेवल के वकीलों को फीस देता होगा. पहले हिंदुस्तान टाइम्स में छपी पूरी खबर पढ़िए… उसके ठीक बाद अरुण मिश्रा द्वारा अखबार को भेजे गए लीगल नोटिस को बांचिए…


एचटी में छपी मूल खबर….

UP babu accused of corruption has Rs 1L pay, hires top lawyers Rohatgi, Sorabjee

A bevy of legal luminaries have appeared multiple times in the Supreme Court and the Allahabad high court individually over the past three years to defend Arun Mishra, chief engineer with the UPSIDC.

Haidar Naqvi

Kanpur, Hindustan Times

What do India’s top lawyers — Soli Sorabjee, Harish Salve, Mukul Rohatgi and others — have in common? They have all defended a mid-level bureaucrat in Uttar Pradesh who is accused of amassing disproportionate assets worth crores and running scores of fake bank accounts.

A bevy of legal luminaries have appeared multiple times in the Supreme Court and the Allahabad high court individually over the past three years to defend Arun Mishra, chief engineer with the UP State Industrial Development Corporation (UPSIDC).

The unusual part — Mishra draws a monthly salary of just over Rs 1 lakh while it is understood that the lawyers often charge a fee ranging between five and twenty lakh per day. Despite repeated attempts, Mishra was not available for comment. A peon at his office said he wasn’t available and it wasn’t clear when he would arrive. The CBI arrested him in 2011 for allegedly operating 65 fake bank accounts with the Punjab National Bank, Dehradun, where he is supposed to have parked black money.

In 2011 also, the Enforcement Directorate (ED) seized his properties on Prithviraj Road in Delhi’s Lutyens Zone, and Dehradun. The Prithviraj Road property, apparently bought in the name of a company called Ajanta Merchants, where his wife and father are listed as directors, is alone worth an estimated Rs 300 crore.

Among his other alleged properties the ED is investigating, are 60 acres of land in UPSIDC Industrial Park on Kursi Road in Barabanki and the Asia School of Engineering and Management on another 52 acres of land. Court records show he and his family have two palatial houses in upscale Gomti Nagar of Lucknow, five properties in Dehradun and 100 acres of land in Barabanki. After the CBI investigation into the Dehradun fake accounts case, the SIT filed an FIR against Mishra over his alleged disproportionate assets in 2011 and the probe is ongoing.

The bureaucrat also faced charges in the 2007 Tronica City scam in Ghaziabad, where officers allegedly gave away more than 400 plots at throwaway prices. Mishra had joined UPSIDC as assistant engineer in 1986 and became chief engineer in 2002 — superseding many others — at a time he held the coveted charge of managing director of the corporation.

In the high court, he was defended by Shanti Bhushan, who apparently would fly down to Allahabad whenever there was a hearing, sources said. Soli Sorabjee, Harish Salve, Abhishek Manu Singhvi, Gopal Subramaniam, Nageshwar Rao, Shanti Bhushan argued against his dismissal, at different stages, in the Supreme Court, which stayed the high court’s order. Mishra rejoined as UPSIDC chief engineer within a month, in September 2014.

Rohatgi, now the country’s attorney general, appeared for Mishra in the SC in the case related to the CBI probe against him. In 2016 Mishra was deprived of his powers as UPSIDC chief engineer and was restricted to oversee development work in nine revenue divisions. He then hired Kapil Sibal to fight his case in the SC.

Salman Khurshid appeared for Mishra in the SC in a case wherein the Allahabad HC had passed different orders relating to his alleged forged mark sheets and engineering degrees.

TAINTED TRACK RECORD

-Arun Mishra, chief engineer with the UP State Industrial Development Corporation, was arrested by the CBI in 2011 for allegedly operating 65 fake bank accounts with the Punjab National Bank, Dehradun, where he is supposed to have parked black money.

-The same year, the Enforcement Directorate seized his properties on Prithviraj Road in Delhi’s Lutyens Zone and Dehradun.

-After the CBI investigation into the Dehradun fake accounts case, the SIT filed an FIR against Mishra over his alleged disproportionate assets in 2011 and the probe is ongoing. The bureaucrat also faced charges in the 2007 Tronica City scam in Ghaziabad where officers allegedly gave away more than 400 plots at throwaway prices.

-In August 2014, Mishra was dismissed from UPSIDC on the orders of Allahabad high court for getting his job on forged degrees. But he moved the Supreme Court challenging the high court’s decision.


अरुण मिश्रा की तरफ से एचटी की मालकिन शोभना भरतिया को संबोधित कर भेजा गया लीगल नोटिस यूं है….

Dated May 13th 2017

Ms Shobhana Bhartia

Chairperson Editorial Director

HT Media Limited

Hindustand Times House

18-20, Kasturba Gandhi Marg

New Delhi 110001, India


अरुण मिश्र की पूरी कुंडली जानने पहचानने के लिए नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें :

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हिन्दुस्तान टाईम्स के बिकने की खबर राज्यसभा में भी गूंजी

शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले अखबार हिन्दुस्तान टाईम्स के रिलायंस के मुकेश अंबानी द्वारा खरीदे जाने का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में भी गूंजा। हालांकि अभी तक हिन्दुस्तान टाईम्स के बिकने की खबर पर न तो हिन्दुस्तान टाईम्स प्रबंधन ने अपना पक्ष रख रहा है और ना ही रिलायंस की ओर से आधिकारिक बयान आया है।

बुधवार को राज्यसभा में जदयू नेता शरद यादव ने कहा- ”हिन्दुस्तान टाईम्स बिक गया और ये उद्योगपति पत्रकारिता को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। इस देश का क्या होगा? अब हिंदुस्तान टाइम्स भी बिक गया? कैसे चलेगा यह देश? यह चुनाव सुधार, यह बहस, ये सारी चीजें कहां आएंगी? कोई यहां पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। निश्चित तौर पर मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जो मीडिया है, लोकशाही में, लोकतंत्र में, यह आपके हाथ में है, इस पार्लियामेंट के हाथ में है. कोई रास्ता निकलेगा या नहीं निकलेगा? ये जो पत्रकार है, ये चौथा खंभा है, उसके मालिक नहीं हैं और हिंदुस्तान में जब से बाजार आया है, तब से तो लोगों की पूंजी इतने बड़े पैमाने पर बढ़ी है। मैं आज बोल रहा हूं, तो यह मीडिया मेरे खिलाफ तंज कसेगा, वह बुरा लिखेगा। लेकिन मेरे जैसा आदमी, जब चार-साढ़े चार साल जेल में बंद रहकर आजाद भारत में आया, तो अगर अब मैं रुक जाऊंगा तो मैं समझता हूं कि मैं हिंदुस्तान की जनता के साथ विश्वासघात कर के जाऊंगा।”

शरद यादव ने राज्यसभा में आगे कहा कि हिन्दुस्तान टाईम्स बिकने वाला है। तभी राज्यसभा के दूसरे सदस्यों ने श्री शरद यादव का ध्यान इस ओर दिलाया कि बिकने वाला नहीं बल्कि हिन्दुस्तान टाईम्स बिक गया है और इसे मुकेश अंबानी ने खरीदा है। इसके बाद श्री शरद यादव ने भी राज्यसभा में कहा कि हिन्दुस्तान टाईम्स बिक गया। श्री यादव ने कहा कि हमारे लोकतंत्र में बाजार आया, खूब आए लेकिन यह जो मीडिया है, इसको हमने किनके हाथों में सौंप दिया है? यह किन-किन लोगों के पास चला गया है? एक पूंजीपति है इस देश का, उसने 40 से 60 फीसदी मीडिया खरीद लिया है। ये अखबार के पूंजीपति मालिक कई धंधे कर रहे हैं। इन्होंने बड़ी-बड़ी जमीनें ले ली हैं और कई तरह के धंधे कर रहे हैं। वे यहां भी घुस आते हैं। इनको सब लोग टिकट दे देते हैं। मैं आपसे कह रहा हूं इस तरह यह लोकतंत्र कभी नहीं बचेगा।

श्री शरद यादव ने कहा कि इसके लिए एक कानून बनाना चाहिए कि अगर कोई मीडिया हाउस चलाता है या अखबार चलाता है, तो वह कोई दूसरा धंधा नहीं कर सकता है। हिंदुस्तान में अघोषित आपातकाल लगा हुआ है। यह जो पत्रकार ऊपर बैठा हुआ है, वह कुछ नहीं लिख सकता है क्योंकि उसके हाथ में कुछ नहीं है। यही जब सूबे में जाता है तो मीडिया वहां की सरकार की मुट्ठी में चला जाता है। जो पत्रकार सच लिखते हैं उसे निकालकर बाहर कर दिया जाता है। फिर यह देश कैसे बनेगा, आप कैसे सुधार कर लोगे। जदयू नेता ने कहा कि मैं सबसे पूछना चाहता हूं कि सुधार कैसे होगा। इस देश में मीडिया के बारे में बहस क्यों नहीं होती। इस देश में ऐसा कानून क्यों नहीं बनता कि कोई भी व्यापार या किसी तरह की क्रास होल्डिंग नहीं कर सकता? तब हिंदुस्तान बनेगा।

शरद यादव का पूरा बयान देखने के लिये इस वीडियो लिंक पर क्लिक करें

 

https://www.youtube.com/watch?v=L_cGrOGKhWY

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन रिलायंस से डील को लेकर अपना पक्ष क्यों नहीं रख रहा?

शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले हिंदुस्तान टाइम्स के मिंट और दिल्ली एडिशन के रिलायंस के मुकेश अम्बानी को बेचे जाने से सम्बंधित डील को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं. हर कोई ये जानना चाहता है कि क्या वाकई हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन और रिलायंस के बीच कोई डील हुयी है? हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन इस पर कुछ बोल नहीं रहा है और ना ही अपना पक्ष रख रहा है। ना ही इस खबर का खंडन किया जा रहा है। यानि कुछ न कुछ तो शोभना भरतिया और रिलायंस के बीच खिचड़ी पकी है।

हिंदुस्तान के एक संपादक ने अपना पक्ष एक ह्वाट्स ग्रुप में रखा भी लेकिन सिर्फ इस मुद्दे पर कि पांच हजार करोड़ में नहीं बिका यह समूह। आप भी पढ़िए इनका पक्ष…

”हिंदुस्तान टाइम्स मीडिया ग्रुप (एचटी मीडिया और एचएमवीएल) दोनों करीब 65 हजार करोड़ की कंपनियां हैं। इसकी ब्रांड वैल्यु देश के किसी भी मीडिया हाउस के मुकाबले सबसे ज्यादा है। इंटरनेशनल मार्केट में भी एचटी ग्रुप की अच्छी पकड़ है हर साल का रेवेन्यू भी बेहतरीन है। शेयर वैल्यु भी अच्छी है। एचटी मीडिया में मार्केट कैपिटल 1972.54 करोड़ और सालाना रेवेन्यु 2497.73 करोड़ तथा शेयर 85.25 रुपये है। एचएमवीएल में मार्केट कैपिटल 2,007.32 करोड़, रेवेन्यु 926.48 करोड़ सालाना और शेयर 276.90 रुपये है। ऐसी कंपनी क्या 5 हजार करोड़ रुपये में बेची जा सकती है? झूठा प्रचार करने वालों पर तरस आती है।”

धन्यवाद संपादकजी, आपने अपनी बात तो रखी। ये सही बात हो सकती है तो हिंदुस्तान टाइम्स या आप साफ़ साफ़ क्यों नहीं लिखते कि हिंदुस्तान टाइम्स नहीं बिका है और ये खबर पूरी तरह गलत है। या ये क्यों नहीं बताते कि हिंदुस्तान टाइम्स अगर बिका है तो कितने में बिका है। क्या क्या बेचा गया है। सिर्फ प्रिंट राइट्स बिके हैं या कैपिटल भी बिका है। साथ ही हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन अगर अपना ये भी पक्ष रख देता कि हिंदुस्तान टाइम्स बिका है या हिंदुस्तान हिंदी भी और कितने एडिशन बेचे गए हैं तो बात साफ हो जाती।

अगर कुछ एडिशन बेचे गए हैं तो कहां कहां के एडिशन बेचे गये हैं। ये सारी सच्चाई तो हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन ही जानता है और देश के अपने करोड़ो पाठकों और हजारों कर्मियों तक ये सच्चाई हिंदुस्तान टाइम्स ही पहुंचा पायेगा। उम्मीद है हिंदुस्तान टाइम्स इस पर अपना पक्ष रखेगा ताकि भ्रम की स्थिति दूर हो।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
मुंबई
9322411335
shashikantsingh2@gmail.com

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प्रिंट मीडिया की अब तक की सबसे बड़ी डील : रिलायंस ने हजारों करोड़ रुपये में खरीदा हिंदुस्तान टाइम्स

मुकेश अंबानी होंगे एक अप्रैल से हिंदुस्तान टाइम्स के नए मालिक : शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले हिंदुस्तान टाइम्स के बारे में चर्चा है कि इस अखबार को हजारों करोड़ रुपये में देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस के मुकेश अंबानी को बेच दिया गया है। कुल डील कितने में हुई है, इसका पता नहीं चल पाया है। चर्चा है कि प्रिंट मीडिया की इस सबसे बड़ी डील के बाद शोभना भरतिया 31 मार्च को अपना मालिकाना हक रिलायंस को सौंप देंगी और एक अप्रैल 2017 से हिंदुस्तान टाइम्स रिलायंस का अखबार हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो एक अप्रैल 2017 से रिलायंस प्रिंट मीडिया पर अपना कब्जा जमाने के लिए मुफ्त में ग्राहकों को हिंदुस्तान टाइम्स बांटेगा।

ये मुफ्त की स्कीम कहां कहाँ चलेगी, इसका पता नहीं चल पाया है और इस हजारों करोड़ की डील में कौन-कौन से हिंदुस्तान टाइम्स के एडिशन है और क्या हिंदुस्तान हिंदी अखबार भी शामिल है, इसका पता नहीं चल पाया है लेकिन ये हिंदुस्तान टाइम्स में चर्चा तेजी से उभरी है कि हिंदुस्तान टाइम्स को रिलायंस ने हजारों करोड़ रुपये में ख़रीदा है। अगर ये खबर सच है तो हिंदुस्तान टाइम्स के कर्मचारी 1 अप्रैल से रिलायंस के कर्मचारी हो जाएंगे।

फिलहाल रिलायंस द्वारा प्रिंट मीडिया में उतरने और हिंदुस्तान टाइम्स को खरीदने तथा मुफ्त में अखबार बाटने की खबर से देश भर के अखबार मॉलिकों में हड़कंप का माहौल है। सबसे ज्यादा टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। शोभना भरतिया और रिलायंस के बीच यह डील कोलकाता में कुछ हुयी। फिलहाल इस डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

शशिकान्त सिंह

पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट

9322411335

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यह शख्स जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया!

Deshpal Singh Panwar : अगर ये खबर सच है कि हिंदुस्तान टाइम्स समूह को मुकेश अंबानी खरीद रहे हैं तो तय है कि अच्छे दिन (स्टाफ के लिए पीएम के वादे जैसे) आने वाले हैं। वैसे इतिहास खुद को दोहराता है… कानाफूसी के मुताबिक एक शख्स जो इस समूह के हिंदी अखबार में चोटी पर है वो जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया।

बनारस के ‘आज’ से लेकर जागरण के आगरा संस्करण का किस्सा हो या फिर वो अखबार जिसके मालिकों की एकता की मिसाल दी जाती थी और एक दिन ऐसा आया कि भाई-भाई अलग हो गए, बंटवारा हो गया, पत्रकारिता के लिए सबसे दुखद दिन था वो, कम से कम हम जैसों के लिए। अगर ये बात सच है तो इतने पर भी इनको चैन पड़ जाता तो खैरियत थी, एक भाई को केस तक में उलझवा दिया, उसके बाद जो हुआ वो भगवान ना करे किसी के साथ हो, वो सब जानते हैं…लिखते हुए भी दुख होता है..

अब अगर हिंदुस्तान समूह के बिकने की बात है तो कानाफूसी के मुताबिक इस हाऊस को भी लगा ही दिया ठिकाने। अगला नंबर मुकेश अंबानी का होगा अगर उन्होंने इन्हें रखा तो, वैसे ये जुगाड़ कर लेंगे, पीएम की तरह बोलने की ही तो खाते हैं.दुख किसी के बिकने और खुशी किसी के खरीदने की नहीं है हां स्टाफ का कुछ बुरा ना हो बस यही ख्वाहिश है। वेज बोरड की वजह से बिक रहा है ये मैं मानने को तैयार नहीं हूं। जो हो अच्छा हो..

कई अखबारों में संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार देशपाल सिंह पंवार की फेसबुक वॉल से.

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मुंबई के बाद अब दिल्ली एचटी को भी रिलायंस को बेचे जाने की चर्चा

देश भर के मीडियामालिकों में हड़कंप, कहीं मुफ्त में ना अखबार बांटने लगे रिलायंस…

देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस वाले मुकेश अंबानी द्वारा मुंबई में एचटी ग्रुप के अखबार मिन्ट और फ्लैगशिप हिन्दुस्तान टाईम्स खरीदने की चर्चा के बाद अब यह चर्चा भी आज तेजी से देश भर के मीडियाजगत में फैली है कि मुकेश अंबानी ने दिल्ली में भी हिन्दुस्तान टाईम्स के संस्करण को खरीद लिया है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पायी है। हिन्दुस्तान टाईम्स के दिल्ली संस्करण में कर्मचारियों के बीच आज इस बात की चर्चा तेजी से फैली कि रिलायंस प्रबंधन और हिन्दुस्तान टाईम्स प्रबंधन के बीच कोलकाता में इस खरीदारी को लेकर बातचीत हुयी जो लगभग सफल रही और जल्द ही हिन्दुस्तान टाईम्स पर रिलायंस का कब्जा होगा।

रिलायंस के प्रिंट मीडिया में आने और हिन्दुस्तान टाईम्स को खरीदने की चर्चा के बाद आज देश भर के नामी गिरामी अखबार मालिकों में हड़कंप मच गया। सभी बड़े अखबार मालिकों में इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं जिस तरह रिलायंस ने जियो को लांच कर लोगों को मुफ्त में मोबाईल सेवा प्रदान कर दिया या रिलायंस के आने के बाद जिस तरह मोबाईल फोन जगत में रिलायंस का सस्ते दर का मोबाईल छा गया कहीं इसी तरह प्रिंट मीडिया में भी आने के बाद रिलायंस लोगों को मुफ्त अखबार ना बांटने लगे। ऐसे में तो पूरा प्रिंट मीडिया का बाजार उसके कब्जे में चला जायेगा।

यही नहीं सबसे ज्यादा खौफजदा टाईम्स समूह है। उसे लग रहा है कि अगर रिलायंस हिन्दुस्तान टाईम्स को मुफ्त में बांटने लगेगा या कोई लुभावना स्कीम लेकर आ गया तो उसके सबसे ज्यादा ग्राहक टूटेंगे और उसके व्यापार पर जबरदस्त असर पड़ेगा। आज देश भर के मीडियाकर्मियों में रिलायंस द्वारा मुंबई में मिंट तथा फ्लैगशिप हिन्दुस्तान टाईम्स को खरीदने की खबर पर जमकर चर्चा हुयी।

कुछ लोगों ने जहां इस फैसले को खुशी भरा बताया वहीं कुछ इस बात से भी परेशान थे कि इस खरीदारी में क्या हिंदी वाले हिन्दुस्तान समाचार पत्र के संस्करण भी खरीदे गये हैं। फिलहाल हिन्दुस्तान के किसी भी संस्करण के रिलायंस द्वारा खरीदे जाने की कोई जानकारी नहीं मिली है। रिलायंस के प्रिंट मीडिया जगत में आने से छोटे और मझोले अखबार मालिकों में भी भय का माहौल है। उनको लग रहा है कि रिलायंस उनके बाजार को भी नुकसान पहुंचायेगा। फिलहाल माना जा रहा है कि रिलायंस जल्द ही अपना पूरा पत्ता हिन्दुस्तान टाईम्स को लेकर खोलेगा।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्स्पर्ट
मुंबई
९३२२४११३३५


पत्रकार Praveen Dixit ने इस प्रकरण के बारे में एफबी पर जो कमेंट किया है, वह इस प्रकार है…

”The silent deal… Last week, HT chairperson Shobhana Bhartiya met up with Reliance supreme Mukesh Ambani. The idea was to sell Mint and eventually, the flagship, Hindustan Times. The second meeting between the merchant bankers in faraway Kolkata and the deal further cemented for Mint. Mint staffers in Mumbai have already moved into the office of CNBCNews18, some fired. This budget, the First Post and CNBC feeds went to Mint Live, an indication that things were working out to mutual benefit.”


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शोभना भरतिया ने एचटी ग्रुप को मुकेश अंबानी को बेचा!

मुंबई से एक बड़ी खबर आ रही है. हिंदुस्तान टाइम्स समूह को इसकी मालकिन शोभना भरतिया ने भारत के सबसे बड़े व्यापारी मुकेश अंबानी को बेच दिया है. हालांकि यह चर्चा कई दिनों से थी कि शोभना भरतिया एचटी समूह को बेच रही हैं लेकिन इस सूचना की पुष्टि नहीं हो पा रही थी. अब यह बात लगभग कनफर्म हो गई है कि मुकेश अंबानी सबसे बड़ा टीवी नेटवर्क खरीदने के बाद सबसे बड़ा प्रिंट नेटवर्क भी तैयार करने में लग गए हैं और इस कड़ी में एचटी ग्रुप को खरीद लिया है.

मुंबई से मीडिया एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह ने भड़ास4मीडिया को सूचना दी है कि शोभना भरतिया मिंट व हिंदुस्तान टाइम्स मुकेश अंबानी को बेच रही हैं. हिंदुस्तान टाइम्स से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक इसकी मालकिन शोभना भरतिया और रिलायंस कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी के बीच एक बड़ी डील हो गई है जिसके तहत मुकेश अंबानी अखबार मिंट और फ्लैगशिप हिंदुस्तान टाइम्स को खरीद रहे हैं. इन दोनों अखबारों के मुम्बई के कर्मचारी अब रिलायंस के कर्मचारी होंगे और मुंबई के सीएनबीसी न्यूज़ 18 के कार्यालय में बैठेंगे.

सीएनबीसी न्यूज़18 पर रिलायंस का कब्जा है. आपको बता दूँ कि हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान के सैकड़ों कर्मचारियों ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर की मांग को लेकर क्लेम भी लगा रखा है. कई मामलों में शोभना भरतिया को पार्टी भी बनाया गया है. बाजार में चर्चा है कि इस बड़ी डील में हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान अखबार समेत पूरे ग्रुप को खरीदने को लेकर भी मुकेश अंबानी और शोभना भरतिया के बीच बातचीत हुई है लेकिन फाइनल नतीजा क्या रहा, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

इनपुट : मुंबई से पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकान्त सिंह. संपर्क  : 9322411335

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शोभना भरतिया ने कोई कार्यवाही न की तो हिंदुस्तान के पत्रकार ने पत्र किया सार्वजनिक, आप भी पढ़ें

मैंने एचएमवीएल की मुखिया और बिड़ला जी की उत्तराधिकारी श्रीमती शोभना भरतिया को यह रजिस्ट्री से भेजा गया पत्र और ई-मेल है। पत्र इस भरोसे से लिखा कि वह अपने प्रबंधतंत्र पर नकेल कसेंगी। लेकिन शोभना भरतिया भी अपने तंत्र के चंगुल में हैं और सभी अत्याचार और अनाचार को मौन सहमति दे रखा है। मैंने उन्हें तय समय देते हुये कहा था कि अगर उस अवधि में ठोस एक्शन नहीं हुआ तो मैं पत्र सार्वजनिक करने के लिये बाध्य होउंगा।

वायदे के मुताबिक पत्र सार्वजनिक कर रहा हूं, आप सभी पढ़ें। “हिन्दुस्तान” अखबार प्रबन्धन के अत्याचार की कहानी। टार्गेट पर मैं भी हूं। कभी भी मेरे खिलाफ झूठे मुकदमे, जेल भिजवाने की साजिश, संदिग्ध तरीके से हत्या और वाहन दुर्घटना के जरिये मेरी हत्या का प्रयास हो सकता है। हालांकि मुझ पर राहु ग्रह की छाया है और ये लोग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। इनके सारे प्रयास विफल होंगे और जीत मेरी ही होगी।

-वेद प्रकाश पाठक, पूर्व वरिष्ठ संवाददाता, हिंदुस्तान गोरखपुर यूनिट, उत्तर प्रदेश


ये है पूरा पत्र…

आदरणीय शोभना मैडम,

हमारे पूर्वांचल (पूर्वी उत्तर प्रदेश में) जब भी किसी के उदारता या दानशीलता का उदाहरण देना होता है तो एक लोकोक्ति प्रचलित है। वह कुछ इस प्रकार है-‘‘टाटा बिरला भईल बाटा का’’ यानी आप टाटा या बिड़ला हैं क्या? यह आपका सौभाग्य है कि आप उस बिड़ला खानदान की वंशज हैं। रुपये-पैसे में अंबानी परिवार बहुत आगे है लेकिन कोई अंबानी परिवार को उस सम्मान के साथ नहीं बुलाता है जिस सम्मान के साथ बिड़ला खानदान को याद किया जाता है।

बिड़ला परिवार से जुड़े हिन्दुस्तान टाइम्स और हिन्दुस्तान हिन्दी अखबार के कंपनी का चेयरपर्सन होने का गौरव भी  आपको हासिल है। इन कंपनियों का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। सरकार की तरफ कभी भी किसी वेज बोर्ड की सिफारिश आई तो उसे सबसे आगे बढ़कर लागू करने का काम आपकी कंपनी और बिड़ला परिवार ने किया। मुझे लगता है कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में आपका प्रबंधतंत्र आपको सही सलाह नहीं दे रहा है या फिर गुमराह कर रहा है। ऐसा करके प्रबंधतंत्र के लोग न केवल आपकी, आपके कंपनी की बल्कि बिड़ला जी के सम्मानित नाम को धक्का पहुंचा रहे हैं। ऐसा वे इसलिये कर रहे हैं क्योंकि समूह की कुल बंटने वाली तनख्वाह में से आधे पर उनका एकाधिकार है। इन हालात में आपको पत्र लिखने की जरूरत महसूस हुई लिहाजा लिख रहा हूं।

मैडम, मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अखबारकर्मियों के हित में स्पष्ट फैसला दे रखा है। उसको लागू न करना सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना है और अपने ही कर्मचारियों के हक पर डांका डालने जैसा है। उससे भी ज्यादा गंदा काम यह है कि वेज बोर्ड के हिसाब से सैलरी मांगने पर कर्मचारियों को तरह-तरह से उत्पीड़ित करना। आपके प्रबंधतंत्र के लोग कर्मचारियों को वेज बोर्ड से वंचित रखने के लिए निम्नतम स्तर पर आ चुके हैं और आपके सम्मानित बिड़ला परिवार की साख खराब कर रहे हैं। ऐसे कई वाकये हैं लेकिन कुछ चुनिंदा मामलों का जिक्र कर रहा हूं।

सबसे चर्चित मामला लखनऊ के हिन्दुस्तान हिन्दी अखबार का है। वहां 13 कर्मचारियों ने मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ पाने के लिए लेबर डिपार्टमेंट में प्रार्थना पत्र दिया। आपके एचआर हेड राकेश गौतम फौरन लखनऊ पहुंच गए। वहां के सम्पादक केके उपाध्याय और राकेश गौतम ने कर्मचारियों को प्रेशर में लिया। 8 कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए डंटे रहे। उन्हें कैंपस से बाहर करवा दिया गया और गेट पर उनकी फोटो लगाकर एंट्री बैन कर दी गई। इन 8 में शामिल एक चीफ रिपोर्टर आलोक उपाध्याय के खिलाफ संस्थान की एक महिला कर्मचारी से यूपी की महिला हेल्पलाइन 1090 पर छेड़खानी की शिकायत करवाई गई और संस्थान के भीतर विशाखा कमेटी की जांच बिठा दी गई। आलोक पर दबाव बनाया जा रहा है कि अगर उन्होंने मजीठिया का क्लेम वापस नहीं लिया तो कमेटी के रिपोर्ट के आधार पर उनकी नौकरी भी जाएगी और उन्हें जेल भी जाना पड़ेगा। आप चाहें तो इस घटिया स्तर के कार्य की खुद के स्तर से जांच करा लें। अगर आलोक दोषी हैं तो उन्हें जेल जाना चाहिए लेकिन अगर निर्दोष हैं तो उन लोगों पर कार्रवाई करिये जो लोग इतने घटिया स्तर के प्रबंधन में शामिल होकर आपकी, आपके कंपनी और बिड़ला जी के सम्मान को धूल में मिला रहे हैं।

अब बात अपनी करता हूं। 6 सितम्बर 2010 को मैंने एचएमवीएल गोरखपुर यूनिट ज्वाइन किया। नितान्त कम तनख्वाह पर मुझे इस प्रकार से उत्पीड़ित किया गया कि छह महीने की नौकरी में लीवर, हाई बीपी की बीमारी हो गई। दो साल बाद तक अस्थमा के भी चपेट में आ गया। मेरी लास्ट डेजिगनेशन सीनियर स्टाफ रिपोर्टर की थी। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत बढ़ने पर 31 दिसम्बर 2012 को मैंने स्थानीय सम्पादक से डेस्क पर काम करने का अनुरोध किया। फौरन मुझे डराकर इस्तीफे की नोटिस लिखवा ली गई। नोटिस पीरियड 28 फरवरी 2013 तक के लिए थी और मुझे 10 जनवरी 2013 को ही रीलिव कर दिया गया। बड़ी मिन्नतें करने पर सिर्फ 10 दिन की तनख्वाह 29 अप्रैल 2013 को मुझे मिल पाई। मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से अंतरिम राहत राशि और एरियर आज तक न मिल पाया। पिछले साल 18 फरवरी 2015 को एचआर हेड और प्रधान संपादक को रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर मैंने मजीठिया वेज बोर्ड का क्लेम और नौकरी वापसी की मांग की थी। पूर्व सम्मानित कर्मचारी से प्रबंधतंत्र से जुड़े लोगों ने कोई संवाद नहीं किया। विवश होकर मैंने भी उपश्रमायुक्त कार्यालय गोरखपुर में हाल ही में शिकायत दर्ज कराई है। मुझे भी प्रबंधतंत्र के लोगों से खतरा महसूस हो रहा है। ये लोग अखबारी शक्तियों का दुरूपयोग कर मुझे फर्जी मामले में फंसाने से लेकर जान से मरवाने तक का काम कर सकते हैं। ऐसा हुआ तब भी आपके सम्मानित परिवार की ही छवि खराब होगी।

आप एक गौरवशाली परंपरा को निभाने वाले परिवार की बेटी हैं। हमारी मुखिया हैं। लिहाजा यह पत्र आपको इस भावना के साथ भेज रहा हूं कि सबसे पहले प्रबंधतंत्र से जुड़े ऐसे लोगों पर नकेल कसी जाए जो आपको व आपके परिवार को कलंकित कर रहे हैं। मजीठिया वेज बोर्ड को लागू किया जाए। सभी कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद हो और मेरे साथ भी सम्मानित व्यवहार करते हुए गोरखपुर यूनिट में मुझे वापस लिया जाए। अगर मुझ बीमार आदमी को आपकी कंपनी नहीं ढोना चाहती तो कम से कम 58 लाख का एकमुश्त मुआवजा, एरियर व अंतरिम राहत राशि का मुझे लाभ दिया जाए ताकि मैं जीवनयापन कर सकूं।मुझे उम्मीद है कि इस ई-मेल और इसी पत्र के रजिस्टर्ड प्रति पाने के दस दिन के भीतर आप महत्वपूर्ण फैसला लेंगी। 04 अक्टूबर 2016 को मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। अगर इससे पहले आपने कर्मचारियों की दीवाली मनवा दी तो यह एक नजीर होगी। रहा कंपनी पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का सवाल तो प्रबंधतंत्र से कहिये की पूरा दिमाग इस बोझ को कम करने और आय बढ़ाने में लगाएं न कि नकारात्मक अभियान में। आपकी संदेशात्मक कार्रवाई, उत्तर और निर्णय की प्रतीक्षा रहेगी।

वेद प्रकाश पाठक
पूर्व वरिष्ठ संवाददाता
हिंदुस्तान, गोरखपुर
यूपी
कंपनी नेम- एचएमवीएल
मो.न.-8004606554, 8953002955
पूरा पता-ग्राम-रिठिया, टोला-पटखौली, पोस्ट-पिपराईच
जिला-गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, पिन कोड-273152

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Rs 200 cr ADVT Scam : Supreme court will hear Shobhana Bhartia’s SLP No.1603 on 14 July 2015

New Delhi, June 25. In the globally talked Rs.200 crore Dainik Hindustan Government Advertisement Scandal, the Supreme Court of India on June 24,2015, has notified  through its website  that it is likely that the Supreme Court of India (New Delhi) will list ”the Special Leave Petition(Criminal) No-1603 of 2013 for hearing on July 14, 2015 next.

“It is Smt. Shobhana Bhartia, w/o Shri Shyam Sunder Bhartia, a resident of 19, Friends Colony(West), New Delhi -110065, who has filed the S.L.P(Criminal) No-1603 of 2013 in the Supreme Court of India,praying the supreme court to quash the Munger(Bihar) Kotwali P.S case No.445 of 2011,dated 18-11-2011).

It is important to note that Smt. Shobhana Bharatia is the  Chairperson of Mess. Hindustan Media Ventures Limited(New Delhi).Smt.Shobhana Bhartia’s company  prints, publishes and  distributes the popular Hindi daily ‘Dainik Hindustan’. What is in the Munger (Bihar) Kotwali P.S CaseNo.445 /20111(dated 18 Nov.2011) ? In the F.I.R No.445/2011, dt 18 Nov.2011,one social worker, Mantoo Sharma, a resident of Puraniganj locality of the Munger town has accused (1) the Principal accused Shobhana Bhartia (Chairperson, Hindustan Publication Group-Mess. Hindustan Media Ventres Limited, Head Office- 18-20, Kasturba Gandhi Marg, New Delhi, (2) Shashi Shekhar(Chief Editor, Dainik Hindustan, New Delhi, (3)Aakku Srivastawa(Acting Editor, Dainik Hindustan, Patna Edition), (4) Binod Bandhu(Regional Editor, Dainik Hindustan,Bhagalpur edititon,Bhagalpur) and (5) Amit Chopra, Printer & Publisher , Mess. Hindustan Media Ventures Limited,Lower Nathnagar Road, Parbatti,Bhagalpur of violating different provisions of the Press & Registration of Books Act, 1867 and the IPC,printing  and publishing the Bhagalpur and Munger editions of Dainik Hindustan (A Hindi daily) using the wrong registration No. and obtaining the govt. advertisements of the Union and the State governments upto Rs. 200 crore  approximately in the advertisement head by presenting the forged documents of registration before the Bihar and the Union governments.

The Munger(Bihar)Kotwali police have lodged a criminal case(F.I.R No.445/2011) u/s  8(B),14 &15 of the Press and Registration of Books Act, 1867 and sections 420,471 & 476 of the Indian Penal Code against (1) Shobhana Bhartia,(2) Shashi Shekhar,(3) Aakku Srivastawa,(4) Binod Bandhu and (5) Amit Chopra on Nov, 18,2011 .All five are named accused persons in this criminal case of forgery and cheatings.

The present status of the police investigation in this case:  The Deputy Police Superintendent(Munger) ,A.K.Panchlar and the Police Superintendent(Munger) ,P.Kannan have submitted the ” Supervision Report No.01 ” and ” the Supervision Report No.02” in this criminal case.In the Supervision Report No.01 & 02,the Dy.S.P and the S.P  have concluded the following facts:

“On the basis of facts, coming in course of investigation and supervisions , and available documents, the Kotwali P.S case No.445/2011 is prima-facie true.”

Patna High Court Order: It is worth mentioning that the Hon’ble Justice, Smt. Anjana Prakash , in the Criminal Miscellaneous No. 2951 of 2012( Smt. Shobhana Bhartia, Petitioner Vs (1) State of Bihar,(2) Mantoo Sharma,Munger & others)  on Dec, 17, 2012, has passed an order and has directed the Munger Investigating Police officer to expedite the investigation and  conclude the  same within a period of three months from the date of receipt of this order.

By ShriKrishna Prasad, Munger, Bihar

M-09470400813

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शोभना भरतिया की धोखाधड़ी जायज बताने के लिए राजीव वर्मा ने ‘प्रोजेक्ट बटरफ्लाई’ के नाम पर कर्मियों का किया ब्रेन वॉश

मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से अच्छी खासी सेलरी न देनी पड़े, कम पैसे में मीडियाकर्मियों का शोषण जारी रहे, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मनमर्जी-मनमानी चलाई जा सके, इस उद्देश्य से अंग्रेजी और हिंदी अखबारों हिदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान की मालकिन शोभना भरतिया ने अपने अखबारों के मीडियाकर्मियों को रातोंरात इंटरनेट कंपनी का इंप्लाई बना दिया और जबरन साइन करने के लिए मजबूर किया गया. मरता क्या न करता की तर्ज पर सभी ने साइन तो कर दिए लेकिन हर एक मीडियाकर्मी के दिल में यह सवाल उठने लगा कि आखिर हमारी मालकिन इतनी चीटर, फ्रॉड और बेशर्म क्यों है… आखिर हमारे संपादक इतने बेजुबान क्यों हैं… आखिर हमारे देश में कानून और न्याय की इज्जत क्यों नहीं है?

ऐसे सवालों से दो-चार हो रहे हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स के मीडियाकर्मियों को पिछले दिनों एक आंतरिक मेल मिला. यह मेल सीईओ राजीव वर्मा की तरफ से भेजा गया. मेल हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में था ताकि हर एक का ब्रेन वाश ठीक से किया जा सके. पूरी मेल में कहीं भी मजीठिया वेज बोर्ड का हवाला नहीं था. कहीं भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने को लेकर जिक्र नहीं था, कहीं भी कर्मियों से जबरन नई कंपनी में शिफ्ट कराए जाने के लिए कराए गए हस्ताक्षर को लेकर उल्लेख नहीं था. बस, सुहाने सपने दिखाए गए, प्रोजेक्ट बटरफ्लाई का हवाला दिया गया और सबको बातों में उलझाने की कोशिश की गई है. नीचे राजीव वर्मा के हिंदी अंग्रेजी के मेल के पहले वो दस्तावेज दे रहे हैं जिसके जरिए एचटी व हिंदुस्तान के मैनेजमेंट ने अपने कर्मियों को नए टर्म कंडीशन के पेपर पर साइन कराकर रातोंरात नई कंपनी में ट्रांसफर कर डाला ताकि मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी देने की स्थिति ही न आए.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

प्रोजेक्ट बटरफ्लाई

People Communication

प्रिय साथियों

साल 2015 एचटी मीडिया के लिए बहुत अहम है और मैं आपको बताना चाहूंगा कि ऐसा क्यों है। हम आए दिन सुनते हैं कि मीडिया जगत तेजी से बदल रहा है। स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन की संख्या पूरे भारत में बढ़ रही है। सोशल मीडिया वेबसाइट और तेजी से उभरते ऑनलाइन ब्रांड खबरों केपारंपरिक स्रोतों की जगह ले रहे हैं। पाठक खबरें पढ़ने और सूचनाएं साझा करने के लिए नए मंच कीओर रुख कर रहे हैं।
 
कई प्रकाशन कंपनियां इन बदलावों को लेकर चिंतित हैं। वे इन्हें सालों से चले आ रहे काम के तौर-तरीकों और आय के स्त्रोतों के लिए खतरा मान रही हैं। लेकिन एचटी मीडिया में हम इन बदलावों कोखतरे नहीं, मौके के तौर पर देख रहे हैं। आसपास हो रहे बदलावों को समझते हुए और उनके हिसाब सेढलते हुए हमने खबर, मनोरंजन व शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत कारोबार खड़ा किया है। आने वाले दिनों मेंमीडिया जगत में संभावित अन्य बड़े बदलावों को देखते हुए हमने न्यूज तंत्र में बेहद अहम औरमहत्वाकांक्षी परिवर्तन लाने की भी पहल की है। इसके तहत डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म, पाठकों कीपसंद, खबरों के बदलते अंदाज और आय के स्रोत को हमारे काम में शामिल किया जाएगा। हम अपनेपाठकों को हर उस मंच पर न्यूज सामग्री उपलब्ध कराएंगे, जो उनके लिए मायने रखती है।
 
इस दिशा में ‘प्रोजेक्ट बटरफ्लाई’ के रूप में हमने पहला कदम बढ़ा दिया है। जैसा कि आप में से कईलोग जानते हैं कि यह प्रोजेक्ट ‘न्यूजरूम’ पर केंद्रित है। इसका मकसद एचटी हाउस की पहली मंजिलका पुनर्निमाण है, जिससे हमारी तीनों संपादकीय टीमें (हिन्दुस्तान टाइम्स, मिंट और हिन्दुस्तान)एक छत के नीचे आ जाएंगी। उन्हें बेहतर तकनीकी सेवाओं और वीडियो सुविधाओं के अलावाकामकाज का ज्यादा मुखर व पारदर्शी माहौल भी मिलेगा। हम उम्मीद करते हैं कि यह न्यूजरूमअपनी तरह का सबसे आधुनिक और सुविधाजनक न्यूजरूम होगा। इससे उन बदलावों को गतिमिलेगी, जिनके लिए हम पिछले एक दशक से प्रयासरत हैं।
 
‘प्रोजेक्ट बटरफ्लाई’ के तहत हम एचटी मीडिया को इटली के आईडॉस मीडिया की ओर से विकसितमजबूत कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम ‘मेथॉड’ में ढालने जा रहे हैं। हम अपनी तीनों संपादकीय टीमों (हिन्दुस्तान टाइम्स, हिन्दुस्तान और मिंट) के डिजिटल ढांचे को नया कलेवर देने जा रहे हैं। हम जोबदलाव कर रहे हैं, उससे हमारी प्रिंट और ऑनलाइन टीमें समग्र रूप से काम कर सकेंगी। इससे हमेंरियल टाइम में खबरें मुहैया कराने की पाठकों की बढ़ती मांग पर खरा उतरने में मदद मिलेगी।
 
नए सिस्टम का प्रभावशाली इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए एचटी मीडिया अपनी कार्य प्रणाली मेंमूलभूत बदलाव करेगा। इसके लिए एक ओर जहां नए पद गठित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफपुराने पदों के लिए नई जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। सभी बदलावों को अमल में लाने के लिएव्यापक ट्रेनिंग कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
 
एक मजबूत और प्रभावशाली न्यूज सिस्टम से न सिर्फ हमारी वेबसाइट और तेजी से उभरते मोबाइलउत्पादों के प्रदर्शन में सुधार आएगा, बल्कि पाठक संख्या व आय में इजाफे के नए मौके भी मिलेंगे।साथ ही डिजिटल उपभोक्ताओं की पसंद-नापसंद को देखते हुए हमें अपने प्रिंट संस्करणों के कंटेंट औरडिजाइन को बेहतर बनाने में भी आसानी होगी।
 
यकीनन, हम सब जानते हैं कि तितलियों के जीवन की शुरुआत छोटे से कैटरपिलर के संघर्ष से होतीहै। यह प्रोजेक्ट भी पूरे संस्थान के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा, क्योंकि इसके तहत हम अतीत केसर्वश्रेष्ठ और भविष्य की नई संभावनों को संजोने का प्रयास करेंगे। लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि हमइसके नतीजों पर बेहद गौरवांवित महसूस करेंगे।
 
मैं एचटी मीडिया को ज्यादा आकर्षक, प्रासंगिक और समृद्ध बनाने के इस सफर से जुड़ने के लिए आपसभी का आह्वान करता हूं। समय के साथ तकनीक, मंच, चैनल, पाठक और हमारे प्रतिद्वंद्वी बदलसकते हैं। लेकिन हमारे पांच मूल्य-मंत्र : साहस, सतत सुधार, जनप्रतिबद्धता, जिम्मेदारी और सशक्तिकरण कभी नहीं बदलेंगे। इन्हीं मूल्यों के साथ हम रोज हमारे पाठकों को सर्वश्रेष्ठ सामग्री देनेऔर कुछ नया परोसने के इरादे से काम पर आते हैं। यह एक जुनून है, जो कभी नहीं बदलेगा।
 
आइए, तेजी से डिजिटल होती दुनिया ने हमें जो मौके दिए हैं, उन्हें अपनाकर 2015 को एचटी मीडियाके लिए बदलाव का साल बनाएं।
 
शुभकामनाओं के साथ
 
राजीव वर्मा​

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Project Butterfly

People Communication

Dear Colleagues,

2015 is a very big year for HT Media, and I want to tell you why. We all hear the drumbeat, louder and louder each day: the world of media is changing. Smartphones and data connections are proliferating across India; social media platforms and upstart brands are displacing storied mastheads; audiences are demanding radically different ways of interacting with news and information. Many publishers are deeply anxious about these changes, seeing them as a threat to long established ways of working, and to revenue streams that they view as theirs by right.
 
At HT Media, we are looking at these changes as an opportunity, rather than a threat. We have already built strong news, entertainment and education businesses by understanding and adapting to the shifting landscape around us. As a more profound set of changes confronts, we plan to do the same — starting with an ambitious and aggressive transformation of our news operations to put digital platforms, audience habits, content and revenue at the heart of everything we do. We will serve our audience on every platform that matters to them.
 
The first major step is already underway, in the form of Project Butterfly. As many of you are aware, this is a project focused on the newsroom. Its outward expression is the renovation of the first floor at HT House, which will now become the integrated hub of our editorial operations — with Hindustan Times, Mint, and Hindustan sharing one space, with state-of-the-art networks and video facilities, and with a much more transparent, open working environment. We expect it to be the finest facility of its kind in the region, and that it will catalyse the changes we have been seeking for almost a decade.
 
To that end, we are moving Hindustan Times onto a powerful content management system built by Milan, Italy-based Eidos Media – Methode. We are overhauling our digital infrastructure across all news operations – Hindustan Times, Hindustan and Mint. The capabilities we are building will enable us to adopt a fully integrated print and digital approach to our work, instead of keeping our legacy and online teams separate. This approach will prepare us properly to face the accelerated demands of real-time news consumption.
 
And to make sure the technology is effectively used, HT will be undertaking a fundamental realignment of its working practices. New roles are being created, old ones are being redesigned and a massive training programme is being put in place to support these changes.
 
A stronger, more efficient news operation won’t just boost the performance of our website and fast-improving mobile products – although those are very important goals.  It will enable us to take advantage of emerging opportunities to grow revenue and deepen our relationship with the audiences that matter most to us. It will also underpin a more rigorously designed and managed print portfolio, with content that is more dynamic and more responsive to the insights that we are able to gather by understanding the behaviour of our digital audiences.
 
Of course, as everyone knows, butterflies begin life as caterpillars.
 
This project will challenge the whole organisation deeply, as we seek to preserve the best of the past and embrace the possibilities of the future, but I am confident that we will all be proud of the results. I am counting on each one of you to join me in the journey, and the creation of a more vibrant, relevant, prosperous HT Media.
 
Technology, platforms, channels, people and our competitors may change with time, as they must. However, what will not change are our enduring values of courage, continuous self renewal, people centricity, responsibility and empowerment. With these enduring values we come to work each day to help our audience and try and make a difference. This is one quest that will never change.
 
Let’s make 2015 a year of transformation of our enterprise by embracing the opportunities brought to us by a fast-digitalising world.
 
With Best Wishes
 
Rajiv Verma  


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शोभना भरतिया और शशि शेखर को शर्म मगर आती

नहीं… देखिए इनका कुकर्म…

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मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : शोभना भरतिया और शशि शेखर को शर्म मगर नहीं आती… देखिए इनका कुकर्म…

हिंदुस्तान अखबार और हिंदुस्तान टाइम्स अखबार की मालकिन हैं शोभना भरतिया. सांसद भी हैं. बिड़ला खानदान की हैं. पैसे के प्रति इनकी भूख ऐसी है कि नियम-कानून तोड़कर और सुप्रीम कोर्ट को धता बताकर कमाने पर उतारू हैं. उनके इस काम में सहयोगी बने हैं स्वनामधन्य संपादक शशि शेखर. उनकी चुप्पी देखने लायक हैं. लंबी लंबी नैतिक बातें लिखने वाले शशि शेखर अपने घर में लगी आग पर चुप्पी क्यों साधे हैं और आंख क्यों बंद किए हुए हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए. आखिर वो कौन सी मजबूरी है जिसके कारण वह अपने संस्थान के मीडियाकर्मियों का रातोंरात पद व कंपनी जबरन बदले जाने पर शांत बने हुए हैं.

शोभना भरतिया अपने इंप्लाइज की पद व कंपनी इसलिए बदल रही हैं ताकि मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से उन्हें सेलरी न देनी पड़े. पर कुछ हिंदुस्तानियों ने तय किया है कि वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएंगे. इन लोगों ने इस दिशा में पहला कदम भड़ास को सारे डाक्यूमेंट्स भेजकर उठाया है. जो दस्तावेज यहां दिए गए हैं, उसे आप ध्यान से देखिए और पढ़िए. दूसरों की आवाज उठाने वाले पत्रकारों के साथ रातोंरात कितना बड़ा छल हो जाता है लेकिन वे चुप्पी साधे रहने को मजबूर रहते हैं.

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि हिन्दुस्तान अखबार ने अपने एडिटोरियल के लोगों के पदनाम और कंपनी के नाम बदल दिए हैं. सूत्रों के मुताबिक ये संपादकीयकर्मी 28 अप्रैल 2015 को समस्त गलत व झूठे दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में दे देंगे. बताते चलें कि शोभना भरतिया और शशि शेखर दस्तावेजों में हेरफेर करके फर्जी तरीके से सैकड़ों करोड़ रुपये का सरकारी विज्ञापन छापने और इसका पेमेंट लेने के मामले के आरोपी भी हैं जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.  

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