वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को साठ दिन बाद मिली जमानत

Urmilesh Urmil : दो महीने जेल में रखने के बाद वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को आज जमानत पर रिहा करने का आदेश आया। छत्तीसगढ़ सरकार ने उन पर सीडी कांड के मामले में अवैध उगाही सहित और कई संगीन आरोप लगाये थे। मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है। एडिटर्स गिल्ड आफ़ इंडिया की कार्यकारिणी के सदस्य और बीबीसी में लंबे समय तक काम कर चुके वर्मा को जिस तरह रातों-रात उनके घर से हिरासत में लिया गया, दिल्ली से रायपुर सड़क मार्ग से ले जाया गया और जिस तरह लगातार दो महीने पड़ताल के नाम पर जेल में रखा गया, वह सब हमारे ‘जनतंत्र’ के वास्तविक चरित्र को उजागर करने के लिए पर्याप्त है!

क्या इस पड़ताल के लिए उनको इतने लंबे समय तक जेल में रखना जरूरी था? इतने लंबे समय तक जेल में रखने और तरह तरह के संगीन मामले थोपने के बावजूद सरकारी एजेंसियां विनोद के खिलाफ आरोप पत्र भी नहीं दाखिल कर सकीं! फिर वह किस बात के लिए जेल में रखे गये थे? आश्चर्य कि एक वरिष्ठ और संजीदा पत्रकार पर Extortion जैसे फर्जी आरोप मढ़े गये, पर ‘गिल्ड’ सहित मीडिया के बड़े हिस्से में ख़ामोशी रही! यह सब कुछ कम विस्मयकारी नहीं!

Pankaj Chaturvedi : विनोद वर्मा याद हैं क्या? पत्रकार विनोद वर्मा, जिन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस ने राजेश मुनत नामक मंत्री की कथित सेक्स सी डी के मामले में आधी रात को गिरफ्तार किया गया था, वे दो महीने से रायपुर जेल में हैं . आज उनकी गिरफ्तारी को पूरे साठ दिन हो गए, पन्द्रह दिन पहले इस मामले में सी बी आई ने भी मुकदमा दायर किया. साठ दिन हो जाने के बावजूद अभी तक जांच एजेंसी विनोद वर्मा के खिलाफ चार्ज शीट नहीं दायर कर पायी है और इन हालात में वैधानिक रूप से अब विनोद वर्मा जमानत के हक़दार हो गए हैं. गिरफ्तारी कि इतनी जल्दी थी, अभी तक आरोप पत्र तक तैयार नहीं. यही है हकीकत.

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश उर्मिल और पंकज चतुर्वेदी की एफबी वॉल से.

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा पर हमला करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

रायपुर से खबर है कि कथित सीडी कांड में आरोपी बनाए गए वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा की गाड़ी पर हमला करने के आरोप में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. माना थाने की पुलिस द्वारा पकड़े गये इन आरोपियों के नाम दिनेश चौधरी और राजेश विश्वास है. ये दोनों माना कैम्प के रहने वाले हैं.

वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को कथित सीडी कांड मामले में रायपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर माना थाने में रखा था. वहां से 29 अक्टूबर की सुबह जब विनोद वर्मा को कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था, तभी थाने के पास ही कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी पर हमला कर दिया था. इसी मामले में पुलिस को हमलावरों की तलाश थी. के बाद पुलिस विभाग में हड़कम्प मच गया. हमले के दौरान की दो तस्वीरें देखें…

संबंधित वीडियो देखें…

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ओम थानवी बोले- सौ करोड़ मांगने वाले सुधीर चौधरी को सरकारी सुरक्षा और फर्जी आरोपों में विनोद वर्मा को जेल! (देखें वीडियो)

प्रेस क्लब आफ इंडिया में विनोद वर्मा गिरफ्तारी प्रकरण पर हुई सभा में वरिष्ठ पत्रकार ने जो कुछ कहा, उसे इस वीडियो में देख-सुन सकते हैं :

ओम थानवी से ठीक पहले वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने क्या कुछ कहा, उसे भी सुनें :

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मोदी के राज में पत्रकारों की आवाज की जा रही बंद, फिर भी चाटुकार बजा रहे बीन

मोदी सरकार के राज में पत्रकारों के खिलाफ हिंसक घटनाएं बढ गई हैं। राज्य सरकारें भी पत्रकारों पर अंकुश लगाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं। हों भी क्यों न केंद्र में अपनी सरकार और राज्य तो अपना है ही। ताजा उदाहरण बीजेपी शासित राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ में देखने को मिल रहा है। लेकिन कुछ चाटुकार पत्रकार इसका विरोध करने के बजाए अभी भी मोदी धुन की बीन बजा रहे हैं। सच्ची पत्रकारिता के खिलाफ रहने वाले पत्रकारों की वाट लग रही है और चाटुकारिता करने वाले पत्रकारों को सम्मान दिया जा रहा है। ऐसे ही कुछ पत्रकारों के कारण मीडिया की छवि दिन ब दिन गिरती जा रही है।

अभी गुरूवार को एक ताजा घटना सामने आई जिसमें वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को अरेस्ट कर लिया गया। विनोद वर्मा का कहना है कि उनके पास बीजेपी के एक मंत्री की अश्लील सीडी है जो सोशल मीडिया में भी है। इसके चक्कर में उनको अरेस्ट किया गया है। वहीं राजस्थान में तो वसुंधरा सरकार ने ब्यूरो रिपोर्टिंग ही खत्म कर दी। जो ब्यूरो पंचायत का बंदरबांट दिखाते थे वो अब खबर नहीं छाप सकते। जनता पत्रकारों से शिकायत करती है कि हमारे यहां ये समस्या हैं। लेकिन पत्रकार अब मजबूर हो गया है राजस्थान में सब कुछ गलत देखकर कुछ नहीं छाप सकता। क्योंकि उसे उसके लिए उसी विभाग के अधिकारी से परमिशन लेनी पडेगी, जिस विभाग के खिलाफ वह खबर छापना चाहता है। अंधेर नगरी में ऐसा बिल भी केवल कुछ चाटुकार पत्रकारों के चलते ही आया है।

संबंधित वीडियो देखें : 

शैलेश दीक्षित

पत्रकार

news.shailesh@gmail.com

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क्या हिंदी पत्रकारों के मुद्दे पर प्रेस क्लब में कम भीड़ आती है?

पत्रकार विनोद वर्मा की फर्जी आरोपों में गिरफ्तारी के मामले में प्रेस क्लब आफ इंडिया में बुलाई गई बैठक में एक सवाल यह उठा कि क्या हिंदी पत्रकारों के मुद्दे पर होने वाली प्रतिरोध सभाओ में अंग्रेजी के पत्रकार नहीं आते हैं? देखें-सुनें वीडियो :

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मोदी पर मिमिक्री दिखाने में क्यों फटती है टीवी चैनलों की?

वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त ने प्रेस क्लब आफ इंडिया में पत्रकार विनोद वर्मा की छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा की गई अवैधानिक गिरफ्तारी के खिलाफ बोलते हुए खुलासा किया कि टीवी चैनलों पर मोदी की मिमिक्री दिखाने पर पाबंदी है. इस वीडियो को सुनिए विस्तार से, जानिए पूरा प्रकरण क्या है…

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सोचता हूं, बंद कर दूं, लिखना पूरी तरह…

कुछ दिन पहले बस यूं ही लिख दिया था, आज बस यूं ही सोचा कि आप सबसे ये शेयर भी कर लिया जाए. नहीं तो कल आप कहेंगे – पहले क्यों नहीं बताया?

डरते डरते लिख रहा हूं
लिखते लिखते डर रहा हूं

डर ये मेरा बेनींव नहीं है
सौदागरों ने डाली हैं ये नींवें

सौदागर वो सपनों के हैं कपड़ों के
या मौत के
याकि कोयले या तेल के
पता नहीं.

जानना चाहता हूं

कौन पढ़ता है
कौन छिपता है
कौन बचता है
कौन डरता है
मेरे लिखने से.
कौन डराता है
मेरे लिखने को.

वो आम है या खास
पेशेवर या मज़दूर
पानवाला, चायवाला या परचूनवाला
या हैं वो सौदागर, पढे लिखे पेशेवर
राजा या रानी
इंजीनियर या डॉक्टर

या है ये सब एक साथ

डराने को निकले हैं
जानवरों सा झुंड बनाकर
झूठ का परचम लहराकर
नफरत का बक्सा उठाकर

पूछता हूं जब कभी भी
जब किसी से
दौड़ जाता है वो पल भर
डर की उस गली में.

फिर निकल कर
पूछ लेता है केबीसी के कुछ सवाल
या बिगबॉस के कंटेस्टेट्स के नाम
और बिला जाता है
मेरा सवाल.

डर रहे हैं सब
जवाब देने से भी.
इसीलिए
डर लगने लगा है
लिखने में अब
सोचता हूं बंद कर दूं
लिखना पूरी तरह

पर कोई सांस लेना
कैसे बंद कर सकता है भला.

अरुण अस्थाना, वरिष्ठ पत्रकार, दिल्ली


20 अक्टूबर को अभी केंद्र सरकार ने सभी राज्यो को एक सर्कुलर भेज कर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिचित करने के लिए निर्देश दिए थे कि बीती रात झारखंड पुलिस ने उत्तर प्रदेश पुलिस के सहयोग से ग़ज़िआबाद में वरिष्ठ पत्रकार एवं एडिटर गिल्ड के सदस्य श्री विनोद वर्मा को जिस अंदाज में हिरासत में लिया वो लोक तंत्र पर सीधा हमला है, जिसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ। वर्मा की गिरफतारी से अधिनायक वाद की बू आ रही है, और किसी भी सरकार को यह नही भूलना चाहिए कि कांग्रेस शाशन द्वारा मीडिया का गाला घोटने की कुचेस्टा की गई थी, जिसके परिणाम का इतिहास गवाह है।

-प्रमोद गोस्वामी
वरिष्ठ पत्रकार
लखनऊ


विनोद वर्मा पत्रकार है कोई आतंकी नहीं जो छतीसगढ़ की पुलिस ने मात्र एक सीडी के लिए गिरफ्तार कर लिया… बीबीसी और अमर उजाला में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे पत्रकार विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ पुलिस ने देर रात उनके घर से गिरफ्तार कर लिया है… उन्हें ‘रंगदारी मांगने’ और ‘जान से मारने की धमकी देने’ के बेजां आरोपों में गाज़ियाबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया…  पत्रकार वर्मा का इस तरह से गिरफ्तार किया जाना निंदा योग्य विषय है… हम सभी के लिए यह जानना जरूरी है कि ये कार्रवाई छतीसगढ़ सरकार के इशारे पर हुई है… अखिल भारतीय पत्रकार मोर्चा  सरकार के इस कृत्य की निंदा करता है… पत्रकार वर्मा को रिहा नहीं किया तो सभी पत्रकार छतीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ देंगे… उन्होंने कहा कि आज के इस दौर में जो पत्रकार सही में सच्ची पत्रकारिता कर रहे हैं, उनकी कलम को दबाया जा रहा है… उनको मीडिया संस्थानों से निकाला जा रहा है… उन पर हमला हो रहा है… यह राष्ट्रहित के लिए घातक है क्योकि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है..

-प्रदीप महाजन
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारतीय पत्रकार मोर्चा     
दिल्ली

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विनोद वर्मा को बोलने से रोकने के लिए पुलिस वाले ने उनके मुंह को अपने हाथ से बंद कर दिया (देखें तस्वीर)

वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को जब पुलिस हिरासत में कोर्ट ले जाया गया तो एक जगह उन्होंने मीडिया से बातचीत की कोशिश में कुछ कहने लगे तो एक पुलिस वाले ने फौरन पीछे से उनके मुंह पर अपना हाथ लगा दिया और कसकर मुंह दबा दिया ताकि उनकी आवाज बाहर तक न जा सके. इस मौके की तस्वीर कुछ मीडियाकर्मियों ने उतार ली. फर्जी आरोपों में आनन-फानन वरिष्ठ पत्रकार की रात में गिरफ्तारी और फिर उनको बोलने से रोकने के लिए मुंह को हाथ से दबाकर बंद कर देना… ये सारा घटनाक्रम मीडियाकर्मियों के लिए स्तब्धकारी है. देखें तस्वीर :

ये कुछ तस्वीरें उस वक्त की हैं जब विनोद वर्मा को गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने के हवालात में रखा गया था… तब बाहर ढेर सारे मीडियाकर्मी उनके समर्थन में खड़े थे…

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विनोद वर्मा ने यह ट्वीट पुलिस हिरासत से किया है, पढ़ें

Om Thanvi :  भाई विनोद वर्मा ने यह ट्वीट पुलिस हिरासत से किया है। उनके जज़्बे को सलाम। मीडिया भाजपा के निशाने पर है, पर दिमाग़-चले नेताओं को पता नहीं कि इस तरह वे ख़ुद ही अपने निशाने पर हैं। और न सही, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के मीडिया-विरोधी क़दमों से ही कुछ सीख लिया होता!

Dilip Khan : छत्तीसगढ़ सरकार ने वहां से पुलिस भेजकर इंदिरापुरम से Vinod Verma को उठा लिया. अगर किसी मंत्री की सीडी किसी के पास हो तो मंत्री से सफाई मांगने से आसान है पत्रकार को उठा लेना. अभिषेक मनु सिंघवी और संदीप कुमार का मामला होता तो बीजेपी सड़कों पर उतर आती. बाय द वे, मंत्री कौन है?

Chanchal Bhu : बेशर्मी भी हद से बाहर है। रात में तीन बजे छत्तीसगढ़ पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस प्रतिष्ठित पत्रकार विनोद वर्मा के घर के घर छापा मार कर विनोद वर्मा को गिरफ्तार कर लेती है। इंदिरा पुरम थाने की हवालात में बंद हैं विनोद। बाहर भीड़ जुटी हुई है। फोन मिलाइए थाने के नंबर 0120-2881000 पर।

किस जुर्म में गिरफ्तारी है?
IPC 384

किससे फिरौती मांगी गई है?
एक मंत्री हैं छत्तीसगढ़ के।

किस आधार पर?
मंत्री की नंगी सीडी है।

अकेले हैं मंत्री?
नहीं जी, बता रहे हैं लोग, कोई और है।

तुमको क्या लगता है, मंत्री सही है?
हम नौकरी पर हैं साब, नहीं तो सच हम भी जानते हैं ।

अच्छे दिन का नियमित आख्यान है।

Satyendra PS : छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार करा लिया है। उन्हें कल रात में 2 बजे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम मोहल्ले में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। विनोद वर्मा 2001 के आसपास देशबन्धु अखबार के ब्यूरो प्रमुख थे और आईएनएस बिल्डिंग में बैठते थे तब से उनके बारे में जानता हूँ। फिर वह बीबीसी गए, फिर अमर उजाला डिजिटल के हेड बने और सम्भवतः इस समय tv 18 समूह से जुड़े थे। लम्बे समय से उनसे मुलाकात या उनके बारे में जानकारी नहीं थी कि कहां हैं। Ranjeet Bhonsle ने गिरफ्तारी की खबर पोस्ट की तब भी मैं कनेक्ट न कर पाया कि वह किसके बारे में लिख रहे हैं। उन पर आरोप है कि उनके पास छत्तीसगढ़ के मंत्री की सेक्स सीडी है। वह सेक्स सीडी ऐसी है जो कई मीडिया समूहों/ कर्मियों के पास है, यह भी सुनने में आ रहा है। कांग्रेस के छतीसगढ़ प्रमुख ने प्रेस कांफ्रेंस करके वह सीडी सार्वजनिक कर दी है, यह भी सूचना मिल रही है। भाजपा के लोग सत्ता के मद में पागल हो गए हैं।

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी, दिलीप खान, चंचल और सत्येंद्र पी सिंह की एफबी वॉल से.

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा छत्तीसगढ़ कांग्रेस का सोशल मीडिया देखते हैं, उनकी गिरफ्तारी सियासी!

Nadim S. Akhter : वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा की हिरासत पे मेरा स्टैंड क्लियर है। कहीं कोई confusion नहीं। अगर वर्मा साहब छत्तीसगढ़ कांग्रेस से किसी भी रूप में जुड़ गए हैं और उनका सोशल मीडिया वगैरह देखते हैं, तो उनकी गिरफ्तारी सियासी है। राजनीति के अपने रंग होते हैं विरोधियों को चुप कराने को। और अगर वो अभी भी विशुद्ध पत्रकार हैं, किसी राजनीतिक दल के हित के लिए वो काम नहीं करते, तो वर्मा जी की गिरफ्तारी ना सिर्फ निंदनीय है बल्कि सभी पत्रकारों को मिलकर इसका विरोध करना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को हिरासत में लिए जाने की मैं भर्त्सना करता हूँ। उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस ने यूपी पुलिस की मदद से तड़के तीन बजे घर से हिरासत में लिया। बहाना बना कि छत्तीसगढ़ के किसी मंत्री की कोई सीडी उनके पास है। मुझे इंदिरा गांधी की इमरजेंसी याद आ रही है। लेकिन इंदिरा तो बापू की इंदु थीं, सो जनता ने फिर सिर माथे बिठा लिया।
आप का क्या होगा?? बीजेपी जिस इमरजेंसी के ऑक्सीजन पे सवार होकर देश में लोकतंत्र का डंका पीटती रही और सत्ता में आई, आज उसका रवैय्या भी इमरजेंसी वाला ही है। के पत्रकार को डरा दो। पत्रकार किसी भी खेमे का हो, राज्य सत्ता को उसे डराने धमकाने का कोई हक नहीं। बीजेपी को ये बहुत महंगा पड़ेगा। पता नहीं, पार्टी के नई पीढ़ी वाले नेता इमरजेंसी को कैसे भूल गए??!! Power corrupts and absolute power corrupts absolutely.

Rakesh Kayasth : पत्रकार के तौर पर मैं विनोद वर्मा को लंबे समय से जानता हूं। मेरे परिचय उस वक्त से है, जब वर्माजी दिल्ली में मध्य प्रदेश से निकलने वाले अखबार देशबंधु अखबार के ब्यूरो चीफ हुआ करते थे। मैने उन्हे हमेशा एक संजीदा, संवेदनशील और गहरी साहित्यिक अभिरूचि वाले व्यक्ति के तौर पर जाना है। आज सुबह-सुबह उन्हे हिरासत में लिये जाने की ख़बर आई तो मैं हतप्रभ रह गया।

विनोद वर्मा हिंदी के कई बड़े संस्थानों में संपादक रह चुके हैं। बीबीसी लंदन से भी वे लंबे समय तक जुड़े रहे हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक सवालों के साथ मानवाधिकार संबंधित मुद्धों में भी उनकी गहरी रुचि रही है। ख़बर है कि छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम विशेष रूप से गाजियाबाद आई और यूपी पुलिस की मदद से उन्हे हिरासत में लिया गया। उनके पास छत्तीसगढ़ के किसी नेता की आपत्तिजनक सीडी होने की बात कही जा रही है। आपत्तिजनक शब्द एक बहुत ही रिलेटिव टर्म है। अंग्रेजी के मशहूर लेखक जॉर्ज ऑरवेल ने कहा है- ख़बर वह नहीं होती है, जो हर कोई बताना चाहता है। ख़बर वह होती है, जिसे छिपाने की कोशिश की जाती है।

सीडी में क्या था, नेता कौन है, छत्तीसगढ़ पुलिस का आरोप क्या है। इन बातों की मुझे कोई जानकारी नहीं है। इसलिए मैं इन बातों पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। लेकिन पहली नज़र में यह एक सम्मानित पत्रकार के उत्पीड़न का मामला लगता है, इसलिए मैं खुलकर अपना विरोध दर्ज करना चाहता हूं। छत्तीसगढ़ सरकार को इस मामले पारदर्शिता दिखाते हुए बताना चाहिए उसका पक्ष क्या है और सुबह चार बजे असंदिग्ध ट्रैक रिकॉर्ड वाले एक पत्रकार के घर छापा मारकर उसे हिरासत में क्यों लिया गया। यह ठीक है कि पत्रकार बिरादरी अब पूरी तरह बंट चुकी है। लेकिन सरकारी तंत्र के हावी होने का समर्थन किसी भी आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। सरकारे आती और जाती रहेंगी लेकिन इंस्टीट्यूशन के तौर पर मीडिया हमेशा रहेगा। मैं उम्मीद करता हूं कि पत्रकार समुदाय इस घटना पर एकजुटता दिखाएगा।

पत्रकार नदीम अख्तर और राकेश कायस्थ की एफबी वॉल से.

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सेक्स सीडी वाले मंत्री जी बाहर मौज में, ख़बर करने वाला पत्रकार अंदर!

Azad Khalid

भई वाह…किसी ने सच कहा कि देश बदल रहा है…छत्तीसगढ़ के एक मंत्री जी कथिततौर पर अपने रुतबे और ताक़त के दम पर लड़कियों से रेप करते रहे…जब पानी सिरे से ऊपर चला गया और कथिततौर पर एक पत्रकार को उनके काले कारनामों का सबूत मिल गया…लेकिन हमारी तेज़ तर्रार पुलिस ने मंत्री जी के ख़िलाफ भले ही कोई कार्रवाई न की हो…लेकिन पत्रकार को गिरफ्तरा करके जेल भेज दिया है।

दरअसल छत्तीसगढ़ पुलिस ने गाजियाबाद के इंदिरापुरम से सीनियर जर्नलिस्ट विनोद वर्मा को हिरासत में ले लिया है। ख़बरो के मुताबिक़ छत्तीसगढ़ पुलिस ने ये गिरफ्तारी  गाजियाबाद पुलिस के साथ मिल कर की है। हांलाकि यूपी पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

जबकि छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किये गये विनोद वर्मा के खिलाफ छत्तीसगढ़ में मामला दर्ज है। उधर विनोद वर्मा ने अपनी सफाई में कहा है कि उन्हें फंसाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार पर फंसाने का आरोप लगाते हुए विनोद ने कहा है कि मेरे पास सिर्फ पैन ड्राइव मिला है। पत्रकार विनोद वर्मा ने मीडिया से कहा कि उनके पास छत्तीसगढ़ के मंत्री राजेश मूणत की एक सेक्स सीडी है। जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार उनसे नाराज है। इस मामले पर छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग के मंत्री राजेश मूणत ने एक पत्रकार वार्ता में कहा कि यह सीडी पूरी तरह से फर्जी है, जिसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

सुनिए, पुलिस हिरासत में पत्रकार विनोद वर्मा क्या कह रहे हैं :

लेखक आज़ाद ख़ालिद टीवी पत्रकार है डीडी आंखो देखीं, सहारा समय, इंडिया टीवी, इंडिया न्यूज़ समेत कई राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों पर महत्पूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। संपर्क:  azad_khalid2003@yahoo.co.in

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ पुलिस ने हिरासत में लिया

गाजियाबाद के इंदिरापुरम से खबर है कि बीबीसी समेत कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ की पुलिस ने हिरासत में लिया है. विनोद फिलहाल हरिभूमि समेत कई अखबारों के लिए बतौर सलाहकार अपनी सेवाएं दे रहे थे. चर्चा यह है कि वह छत्तीसगढ़ में आदिवासी मसलों पर भी काम कर रहे थे और इसको लेकर कई इनवेस्टिगेटिव खबरें तैयार की थीं. वहीं यह भी कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के किसी मंत्री की पोर्न सीडी उनके हाथ लगी थी जिसको लेकर पुलिस ने यह कार्रवाई की है.

हिरासत में लिए गए विनोद वर्मा को गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में रखा गया है. उन्हें रात में ही हिरासत में ले लिया गया था. सूचना मिलते ही कई वरिष्ठ पत्रकार थाने पर पहुंचने लगे हैं. बताया जा रहा है कि कानूनी औपचारिकता पूरी करने के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस विनोद वर्मा को रायपुर ले जाएगी और कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी. जानकार कहते हैं कि छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा निर्दोष पत्रकारों को जेल भेजने की यह कोई पहली घटना नहीं है. दर्जनों पत्रकार इसी तरह जेल भेजे जा चुके हैं और कोई अपराध न साबित होने के कारण छूट चुके हैं.

इस घटनाक्रम के बारे में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश उर्मिल फेसबुक पर लिखते हैं : Urmilesh Urmil : गुरुवार-शुक्रवार की रात को तकरीबन तीन बजे छत्तीसगढ़ पुलिस ने यूपी पुलिस के सहयोग से BBC और अमर उजाला के पूर्व वरिषठ पत्रकार और लेखक विनोद वर्मा को उनके इंदिरापुरम (गाजियाबाद, यूपी) स्थित घर से हिरासत में ले लिया। वर्मा एडिटर्स गिल्ड आफ़ इंडिया के सदस्य भी हैं। इस वक्त उन्हें इंदिरापुरम थाने में बैठाकर रखा गया है। उन्हें एक पोर्न सीडी रखने का आरोपी बनाया जा रहा है। वह सीडी किसी प्रांतीय मंत्री की बताई जा रही है! पत्रकार को हिरासत में लेने की यह शैली मुझे इमरजेंसी की याद दिला रही है। मैं यहीं थाने में एक शीशे की दीवार के पार विनोद से हो रही पुलिसिया पूछताछ को देख रहा हूं। वकील ओमवीर सिंह और अमित यादव थाने पहुंच चुके हैं।

पुलिस हिरासत में विनोद वर्मा ने मीडिया वालों से बातचीत में क्या कहा, सुनिए :

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