दैनिक भास्कर और पीपुल्स समाचार एक दूसरे के काले कारनामों की पोल खोलने में जुटे

व्यापम घोटाले में सीबीआई द्वारा पेश चालान में चौकसे समूह, पीपुल्स ग्रुप और चिरायु के मेडिकल कालेजों मे दाखिले को लेकर उनके मालिकों पर शिकंजा कसा गया है. इनमें चौकसे और पीपुल्स के दैनिक अखबार निकलते हैं. दैनिक भास्कर ने इन ग्रुपों की कारगुजारियों पर विस्तार से लगातार खबर का प्रकाशन किया.

इससे कुपित होकर पीपुल्स समाचार ने भास्कर ग्रुप के खिलाफ मुहिम में देर नहीं की. दोनों अखबारों द्वारा एक दूसरे के काले कारनामों की पोल खोले जाने से आनंद में पाठक वर्ग है. सरकार के लोग चुपचाप तमाशा देख रहे हैं. देखिए पीपुल्स समाचार अखबार में छपी भास्कर समूह के खिलाफ दो खबरें…

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कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष ने की एसपी से शिकायत- ”दैनिक भास्कर का पत्रकार डाल रहा दबाव”

बिलासपुर : रायपुर, राजनांदगांव के बाद अब बिलासपुर शहर से दैनिक भास्कर के पत्रकार की करतूत सामने आ रही है। इस बार कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष ने एसपी को लिखित शिकायत दी है कि एक पत्रकार आशीष दुबे जो खुद को दैनिक भास्कर में कार्यरत बताता है, उसके द्वारा किसी केस में फैसला अपने परिचित के हक में करवाने दबाव डाला जा रहा है। वायरल हुई इस शिकायत का असर इतना जोरदार हुआ कि खुद प्रेस क्लब के एक बंदे को मामला दबाने तुगलकी फरमान जारी करना पड़ा कि इस खबर को जो भी चैनल या अखबार लगायेगा तो उस पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जायेगी। हालांकि मिली जानकारी के मुताबिक प्रेस क्लब अध्यक्ष ने ऐसे किसी फरमान से पल्ला झाड़ लिया है।
खबर की भाषा बता रही है इरादे..

1 नवम्बर को डीबी स्टार में फोरम से सम्बंधित खबर छपी है। वायरल हुये शिकायत पत्र में इस खबर का भी जिक्र है कि ऐसी निराधार खबरें दबाव डालने बनाई जा रही हैं। बहरहाल खबर कुछ केसेज का हवाला देकर बनाई गई है। जिसमें पहला केस ही उन महोदय का है जिनके पक्ष में तथाकथित पत्रकार फैसला करवाना चाहते हैं। यही नहीं अगर हम ध्यान दें तो सीधी बात का जो वर्जन फोरम के अध्यक्ष का लिया गया है। वह भी केवल उसी केस से जुड़ा है। खबर की भाषा, केसेज और लिए गए वर्जन को अगर एक सूत्र पिरोएं तो समझ आयेगा की यह खबरें किसी विशेष इरादे से ही लगाई जा रहीं है।

आशीष चौकसे
एसोसिएट एडिटर
भड़ास4मीडिया

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मजीठिया मांगने वाले को फंसाने वाला दैनिक भास्कर का मैनेजर अपने ही बुने जाल में फंसने जा रहा!

खबर जालंधर से है. दैनिक भास्कर के मैनेजर को एक पत्रकार के लिए जाल बुनना महंगा पड़ने जा रहा है. यह खबर दूसरे अखबारों और अन्य मैनेजरों के लिए भी चेतावनी है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड मांगने के लिए लड़ रहे साहसी मीडियाकर्मियों से टक्कर न लें वरना उन्हें एक न एक दिन ऐसे जाल में फंसना पड़ेगा जिससे वे निकल न सकेंगे और उनके अखबार मालिक भी उनकी कोई मदद न कर पाएंगे.

जालंधर में दैनिक भास्कर के पत्रकार राजेश को फंसाने के लिए एचआर मैनेजर इंद्र सूजी, मैनेजर नरेश दुआ और झूठी गवाही देने वाले एक पत्रकार को कोर्ट ने सम्मन जारी किया है. इन तीनों ने पत्रकार राजेश के खिलाफ साल 2011 में साजिशन झूठी एफआईआर दर्ज करवाई थी. कोर्ट से सम्मन जारी होने के बाद अब तीनों को अपने अपने बेल बांड भरकर ट्रायल फेस करना होगा. पूरी खबर जालंधर के एक अखबार ‘जय हिंद’ ने विस्तार से प्रकाशित की है, जो इस प्रकार है…

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मजीठिया की जंग : झूठ लिख कर बुरा फंसा डीबी कॉर्प!

‘जिद करो दुनिया बदलो’ का नारा देने वाला डीबी कॉर्प अब ‘झूठ बोलो और बुरे फंसो’ के पैटर्न पर काम कर रहा है। मंगलवार को मुंबई के श्रम आयुक्त कार्यालय में डी बी कॉर्प की महिला रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया शेख के मजीठिया वेज बोर्ड बोर्ड मामले की सुनवाई थी। लतिका और आलिया ने मजीठिया वेजबोर्ड के तहत वेतन और एरियर न मिलने पर 17 (1) के तहत रिकवरी का क्लेम श्रम आयुक्त कार्यालय में किया था।

आज कंपनी ने अपने वकील के जरिये सुनवाई में जवाब दिया कि ये दोनों महिला कर्मचारी मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में नहीं आती हैं जिस पर इन महिला कर्मचारियों के साथ गए पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकान्त सिंह ने तुरंत भारत सरकार की 11 नवंबर 2011 को जारी अधिसूचना की कॉपी का संबंधित पेज खोल कर इस मामले की सुनवाई कर रही असिस्टेंट लेबर कमिश्नर के सामने रख दिया जिसमें ये साफ लिखा है कि रिसेप्शनिस्ट भी मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में आती हैं।

इसके बाद डीबी कॉर्प और वकील की बोलती बंद हो गयी। उन्होंने अगला डेट लेने का प्रयास किया मगर उस समय मौजूद शशिकान्त सिंह और धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कड़ा एतराज जताया और साफ़ कह दिया कि हमारे दिए गए तथ्य को रिकार्ड में लाया जाए और डीबी कॉर्प को इस मामले को साबित करने के लिए कहा जाय क्योंकि उन्ह लोगों ने लिखित रूप से कहा है कि ये कर्मचारी मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में नहीं आतीं। इसके बाद नीलांबरी भोसले ने इसे स्टेटमेंट में नोट किया और डीबी कॉर्प को 48 घंटे बाद का 27 अक्टूबर का डेट दिया और कहा कि आप प्रूफ लेकर आइये कि रिसेप्शनिस्ट मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में नहीं आतीं।

शशिकान्त सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
9322411335

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