देश के 80 प्रतिशत पत्रकारों के पास दृष्टि नहीं, संपादक भी दृष्टिहीन : विमल कुमार

कविताओं के जरिए मोदी को लगातार एक्सपोज करने में जुटे हैं कवि और पत्रकार विमल कुमार : हिन्दी के वरिष्ठ कवि एवं पत्रकार विमल कुमार पिछले दो सालों से लगातार सोशल मीडिया पर मोदी शासन के खिलाफ कवितायें लिखते रहे हैं. उनकी यह रचनाशीलता भवानी प्रसाद मिश्र की याद दिलाती है जब वे रोज तीन कवितायें आपातकाल के विरुद्ध लिखते रहे और बाद में उनकी पुस्तक ‘त्रिकाल संध्या’ भी आयी. 56 वर्षीय विमल कुमार की गत दो सालों में लिखी गयी कविताओं की पुस्तक ‘हत्या से आत्महत्या’ छपकर आयी है. उनकी इन कविताओं ने फेसबुक पर सबका ध्यान खींचा है. आखिर विमल कुमार को किन परिस्थितियों ने इन कविताओं को लिखने के लिए मजबूर किया, इस भेंटवार्ता में जानिए यह खुलासा –

मोदी के इंटरव्यू में अर्णब गोस्वामी खुद एक्सपोज हो गए, सोशल मीडिया पर हो रही थू थू

Mukesh Kumar : बहुत बेरहम मीडियम है टीवी। आप कभी किसी को एक्सपोज़ कर रहे होते हैं तो कभी खुद भी एक्सपोज़ हो रहे होते हैं। राहुल गाँधी को आपने एक्सपोज़ किया मगर मोदी को इंटरव्यू करते हुए खुद देश के सामने। प्रधानमंत्री का पहला इंटरव्यू लेते समय न्यूज़ ऑवर के आक्रामक, दूसरों की बोलती बंद कर देने वाले या दूसरों को बोलने ही न देने वाले, बड़बोले, तर्कों और रिसर्च से लैस अर्नब गोस्वामी को क्या हो गया था? वे इतने नरम क्यों थे, बार-बार नवनीत लेपन क्यों कर रहे थे? क्या उन्होंने ये इंटरव्यू कुछ शर्तों के साथ किया? क्या प्रश्न पहले से तय थे? क्या ये पीआर एक्सरसाइज थी? और हाँ, इतना बड़ा चैनल प्रधानमंत्री का इंटरव्यू करे और तकनीकी स्तर पर इतनी बड़ी चूक करे अच्छा नहीं लगता। ऑडियो बहुत खराब था भाई।

गलती आउटलुक ने की है, बदनाम मुझे कर रहा है : अनिल पांडेय

Anil Pandey : पिछले दिनों आउटलुक पत्रिका में छपे एक इंटरव्यू पर विवाद गहराया है। आउटलुक ने दावा किया कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय का यह पहला इंटरव्यू है। रामबहादुर राय ने इस मसले पर यथावत पत्रिका के अपने अनायास स्तंभ में विस्तार से पूरे घटनाक्रम की चर्चा की है। अब जो सवाल उठ रहे हैं, उससे आउटलुक पीछे हट रहा है। चुप है। आखिर क्यों?

अंजना ओम कश्यप के लिए राजनाथ सिंह का चरणस्पर्श कर आशीर्वाद लेना ही बाकी रह गया था

तमाम शहरों और सूबों की राजधानियों में ऐसे कुछ पत्रकार पाये जाते हैं जिनका काम डीएम से लेकर सीएम तक की प्रेसकान्फ्रेंस को हल्का-फुल्का बनाना होता है। मसलन वे बड़ी मासूमियत से कुछ इस तरह के सवाल पूछते हैं-

“सर, आप पर इतना बोझ है, आखिर आपमें इतना स्टैमिना कहाँ से आता है?”
“आप पर ऐसे-ऐसे आरोप लगते हैं, लेकिन आप हमेशा मुस्कराते कैसे रहते हैं?”
“आपको लगता नहीं कि आपको जानबूझकर परेशान किया जाता है ? आप विरोधियों के प्रति इतने उदार कैसे हैं?”

पानी की कमी से जैसे हड़प्पा का नाश हुआ, वैसे ही आधुनिक शहरी-औद्योगिक सभ्यता का सत्यानाश होगा : अनिंद्य सरकार

Pushya Mitra : हड़प्पा में हाल के दिनों में हुए एक्सकेवेशन करने वाली टीम के मुखिया अनिंद्य सरकार से रंजीत और अखिलेश्वर पांडे ने लम्बी बातचीत की है। यह बातचीत प्रभात खबर में प्रकाशित हुई है। यह काफी महत्वपूर्ण बातचीत है। इसका विषय शहरी जीवन और पर्यावरण है। उत्खनन से यह पता चला है कि आठ हजार साल पहले अस्तित्व में आई इस महान सभ्यता का पतन पर्यावरण सम्बन्धी कारणों से हुआ। मानसून कमजोर पड़ने लगा और सरस्वती नदी सूख गयी।

ऊर्जा के क्षेत्र में यूपी ने किया शानदार काम, जल्द ही देंगे 24 घंटे बिजली : आलोक रंजन

लखनऊ : यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने अपने दो साल के कार्यकाल में विकास के नये कीर्तिमान स्थापित किये। जब उन्होंने कार्यभार संभाला तो नौकरशाहों की लापरवाही के चलते विकास कार्य बहुत प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में उन्होंने खुद कमान संभाली और जिले के दौरे शुरू किये।  गांव-गांव जाकर विकास कार्यों की हालत उन्होंने खुद देखा। यही कारण था कि दो साल के भीतर विकास कार्यों में खासी तेजी आयी। श्री रंजन ने आईआईएम अहमदाबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से एमबीए की डिग्री लेने के बाद 1978 में उन्होंने आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने बेहद लोकप्रिय दो किताबें भी लिखीं। श्री रंजन अपने विनम्र स्वभाव के लिए बेहद लोकप्रिय हैं। श्री रंजन की कार्य कुशलता का ही परिणाम था कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके रिटायर होने के बाद उन्हें तीन महीने का सेवा विस्तार दिया। श्री रंजन ने अपनी जिन्दगी के कई पहलुओं पर 4पीएम के संपादक संजय शर्मा से विस्तार से बातचीत की। पेश हैं उसके अंश…

अगर अराजक होने से सच सामने आता है तो मैं हूं अराजक : यशवंत

भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह पिछले दिनों लखनऊ में थे. इस दौरान उनकी वीकेंड टाइम्स और 4पीएम अखबारों के संपादक संजय शर्मा से मुलाकात हुई. संजय ने यशवंत के लखनऊ में होने का फायदा उठाते हुए उनका विस्तृत इंटरव्यू कराया. 4पीएम की स्थानीय संपादक प्रीति सिंह ने यशवंत से ढेर सारे सवाल पूछे और यशवंत ने पूरी बेबाकी से जवाब दिया.

JC Show : INTERVIEW WITH UNION MINISTER NITIN GADKARI BY ETV NEWS NETWORK HEAD JAGDEESH CHANDRA

Q: Welcome to ETV’s JC Show. Though there’s a lot of debate on whether Good Days of Modi has come or not, one thing is for sure that Nitin Gadkari is doing very good works. What are those?

 

A: People can better judge my work. I feel that we are a rich nation with poor population. We can change this situation. I have a budget of 3.5 lakh crore for five years combining the two ministries that is under me. But, I have targeted to complete 25 lakh crore worth projects by the completion of my five year tenure. At least five crore youths will get jobs through the projects that we have under taken in roads, ports, shipping, waterways sectors. We want to build dry ports in Rajasthan. If we compare the cost of transporting, then what costs 1.5 rupees by road, will cost one rupee by train and by waterways it costs only 20 paise. At international market, our logistic cost is 18 per cent, where as that of China is 8 per cent. 47 per cent of China’s passengers and goods traffic depend on water ways. It’s 43 to 44 per cent in Korea and Japan. In UK, European countries and Germany, it’s more than 40 Per cent. But, in India it was earlier only 3.5 per cent. In two years, we increased it to 6 Per Cent. I want to run ships in Indira Canal. Through this, one will not only get water to drink, but also for irrigation for agriculture, fisheries, as well as goods and passengers can be transported. We want to build water grid and want to link to ocean. Our parliament has passed the bill to make inland water ways in 111 rivers. We have started the work on Ganga River worth 4 thousand crore rupees. We also want to work in Rajasthan. Chief Minister of Rajasthan, Vasundhara Raje has given a report in this regard. We will make a canal from Gujarat Boarder, between Kandla and Mundra Port. The canal will go 350 Kilometers through Jhalore district. People will get water from this, and waterways can also be helpful for transport. This will increase the export and also create jobs for the people.

फारवर्ड प्रेस के संपादक प्रमोद रंजन से हरि नारायण की बातचीत

फारवर्ड प्रेस ने दिया वंचित बहुसंख्यकों को स्वर

अप्रैल का महीना देश के दलित बहुजन समाज के लिए मायने रखता है क्योंकि इस महीने दो महापुरुषों की जयंती पड़ती है। पहले ज्योतिबा फुले और दूसरे डॉ. बी आर आंबेडकर। बहरहाल अप्रैल 2016 हिंदी प्रदेश में रहने वाले तमाम वंचित बहुजनों के लिए निराशा का सबब बनकर आया है। फुले और आंबेडकर की विचारधारा के विभिन्न आयामों को सामने लाने वाली देश की पहले द्विभाषी पत्रिका फॉरवर्ड प्रेस जून से अपना प्रिंट संस्करण बंद करने जा रही है। अब यह प्रकाशन केवल वेब पर उपलब्ध होगा।

जेएनयू से निकला एक संत, प्रत्यूष पुष्कर को सलाम करो (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : जेएनयू से लोग अफसर बनकर निकलते हैं, नेता बनकर निकलते हैं, इतिहासकार बनकर निकलते हैं, शिक्षक बन जाते हैं, पर बहुत कम लोग संत बनते हैं. प्रत्यूष पुष्कर उनमें से एक हैं. ये शुरुआती दिनों में मीडिया में रहे हैं. आशीष खेतान के साथ काम कर चुके हैं. फ्रीलांस फोटो जर्नलिस्ट के बतौर पूरा देश घूम चुके हैं. इन दिनों वे आर्ट और अध्यात्म पर काम कर रहे हैं. 

मजीठिया केस पर Advo Umesh Sharma का वीडियो इंटरव्यू : सुप्रीम कोर्ट ने सबको दे दिया आखिरी सुनहरा मौका, अब नहीं तो कभी नहीं

प्रिंट मीडिया कर्मियों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अवमानना मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जो जो बातें कहीं, जो जो आदेश दिए, उसको लेकर एडवोकेट उमेश शर्मा से भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह ने विस्तार से बातचीत की. पूरी बातचीत से दो बातें सामने आई. एक तो ये कि अब ये आखिरी मौका सभी मीडियाकर्मियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया है कि वे अपना क्लेम यानि मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से उनका कितना वेतन और बकाया आदि बनता है, उसकी लिखित अप्लीकेशन बनाकर संबंधित इलाके के श्रम अधिकारियों / श्रम आफिसों के यहां वाद दायर करें.

Watch an exclusive interview of Sudarshan Shetty- a contemporary Indian artist on DD Bharati this weekend

New Delhi, 17 March 2016: ‘The pieces earth took away’, ‘Between the tea cup and a sinking constellation’, ‘This too shall pass’, ‘The more I die the lighter I get’ are some of the solo shows the great Indian contemporary artist, Sudarshan Shetty has to its credit. DD Bharati channel will air an exclusive interview with the artist on 18 March 2016, Friday at 8:30 pm.

हे पुरुष, तुम अपनी सहूलियत के लिए ये ड्रामा बंद कर दो कि हम बेचारी हैं : डा. रूपा जैन

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर एटा जिले की जानी मानी गाइनेकोलॉजिस्ट, भ्रूण हत्या के विरोध में और महिलाओं-बच्चियों की शिक्षा-स्वास्थ्य के लिए लंबे समय से काम कर रहीं चर्चित डॉक्टर रूपा जैन ने साक्षात्कार में जो कुछ कहा है, उसे उनके शब्दों में यहां रख रहा हूं…

सन्नी लियोन के पूरे इंटरव्यू में सबसे ज्यादा अश्लील भूपेंद्र चौबे के सवाल हैं

वरिष्ठ पत्रकार और ब्लागर मनीषा पांडेय ने फेसबुक पर लिखा है : ”सन्नी लियोन के पूरे इंटरव्यू में सबसे ज्यादा अश्लील भूपेंद्र चौबे के सवाल हैं. Chaubey’s questions were so disgusting and disgraceful and Sunny’s answers were so graceful. You are a brave woman.’ मनीषा की ये बात लगभग हर उस दर्शक की बात है जिसने सन्नी लियोन का सीएनएन आईबीएन पर प्रसारित इंटरव्यू देखा.

भास्कर डाट काम ने नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजित डोभाल का झूठा इंटरव्यू छापा

भास्कर डाट काम की जिस खबर पर बवाल मचा है, उसके बारे में कुछ तथ्य साझा करना चाहता हूं. भास्कर डाट काम ने नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजित डोभाल का झूठा इंटरव्यू छापा था. जिसका डोभाल ने तत्काल  खंडन कर दिया लेकिन भास्कर बेशर्मी से इंटरव्यू को अभी तक चलाये जा रहा है. कोई भी हिंदी मीडिया को गंभीरता से नहीं लेता उसका ये फायदा उठाते हैं. अगर यह इंटरव्यू किसी अंग्रेजी अखबार की साइट पर होता तो अब तक बवाल मच गया होता.

आज है कमलेश्वर का जन्मदिन : तेरह साल पहले मोहम्मद जाकिर हुसैन ने जो इंटरव्यू लिया था, उसे आज फिर पढ़ें

12 जनवरी 2003 को प्रख्यात कथाकार कमलेश्वर भिलाई गए थे। तब पत्रकार मोहम्मद जाकिर हुसैन ने उनका एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू लिया था। वह तब ”हरिभूमि” में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था। आज 6 जनवरी को स्व. कमलेश्वर जी का जन्मदिन है। पूरा इंटरव्यू आज की परिस्थिति में भी बेहद प्रासंगिक है। जो पढ़ चुके हैं वो दुबारा पढ़ें और जो नए हैं वो जरूर पढ़ें।

योग शरीर की यात्रा करके समाधि तक जाता है… (साक्षात्कार : योगी अरुण तिवारी)

यूं तो भारत और योग का संबंध हज़ारों साल से भी ज़्यादा पुराना है। लेकिन हाल के कुछ दशकों में इसकी लोकप्रियता तथा स्‍वीकार्यता तेज़ी से बढ़ी है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही है कि पुरातन प्रयासों के समानान्तर आज भी भारतीय ज्ञान की वर्षा सम्पूर्ण विश्व-जगत में हो रही है, भले ही औसतन उसका प्रतिशत कम हो किन्तु निःसंदेह रूप से हमारे योगियों, ज्ञानियों, ऋषियों और महात्माओं के द्वारा आज भी उसके पोषण के प्रयास निरन्तर जारी रहते हैं। ऐसे ही प्रयासों में लगातार ख़ुद को समर्पित करने वाले हैं योग व समाज-सेवा के क्षेत्र में भारत के राष्ट्रपति व देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित योगी अरुण तिवारी जिन्होने भारत के अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ सहित दुनिया के अनेक देशों जैसे श्रीलंका, यूरोप, स्वीडन, नार्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, लुथवेनिया, अमेरिका और कनाडा आदि में योग-सुधार कार्यक्रम के माध्यम से हज़ारों लोगों तक योग को सही रूप में पहुँचाया है। योग को लेकर दुनिया भर में उनके प्रयासों की पड़ताल कर रहे हैं अमित राजपूत

वेब न्यूज चैनल लांच करने जा रहे संपादक अशोक दास का इंटरव्यू

अशोक दास ने कम उम्र में कई पड़ाव पार कर लिए हैं. आईआईएमसी से पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद अमर उजाला अलीगढ़ में नौकरी की. उसके बाद एक लंबी पद यात्रा. फिर भड़ास4मीडिया के साथ. इसके बाद दलितमत डाट काम नाम से वेबसाइट. दलित दस्तक नाम से पत्रिका की लांचिंग. अब अशोक दास नेशनल दस्तक नाम से एक वेब न्यूज चैनल लांच करने जा रहे हैं, 20 दिसंबर को. आप सभी आमंत्रित हैं. 20 दिसंबर को दिन में दो बजे, FCCI आडिटोरियम. लांचिंग समारोह में रवीश कुमार, मुनव्वर राणा, स्टालिन समेत ढेर सारे जाने-माने लोग शिरकत करेंगे.

‘न्यूज वर्ल्ड इंडिया’ के सीईओ और एडिटर इन चीफ शैलेश का इंटरव्यू

शैलेश ने ‘न्यूज वर्ल्ड इंडिया’ चैनल की कमान संभाल कर चैनल को दिशा देना शुरू कर दिया है. ये वही शैलेश हैं जिन्होंने आजतक से हटने के बाद न्यूज नेशन चैनल की शुरुआत की और इसे टीआरपी में टॉप फोर तक पहुंचा दिया. शैलेश अपना जादू फिर दुहराने की तैयारी में हैं. नए चैनल को जमाने के लिए उन्होंने अपनी स्टाइल में प्रोग्राम व शोज बनवाने शुरू कर दिए हैं.

अब हिन्दू भी खतरे में है, हर आजादी पहरे में है : निदा फाज़ली

ग्वालियर। प्रख्यात शायर एवं फिल्मी गीतकार निदा फाज़ली देश के वर्तमान हालात पर व्यथित और चिंतित हैं। उनका कहना है कि आज देश के हालात ऐसे हो गए हैं कि यहां ‘अब हिन्दू भी खतरे में है, हर आजादी पहरे में है। असहिष्णुता के मुद्दे पर पूरे देश में हंगामा मचने की बात पर वे कहते हैं कि देश के हालात पहले भी खराब रहे हैं, लेकिन पहले खराब करने वालों को डर रहता था, उन्हें दण्डित किए जाने का, लेकिन अब डर नहीं रहा, यही बात ज्यादा चिंता जनक है।

राज्यसभा टीवी के इंटरव्यू में एक महिला प्रतिभागी पर अपना नाम वापस लेने का दबाव डाला गया!

इसी साल सितंबर महीने में राज्यसभी टीवी में हुए Consultant Anchor के वॉक इन इंटरव्यू के लिए मैं पहुंचा राज्यसभी टीवी के दफ्तर। कई दूसरे प्रतिभागी भी वहां पहुंचे। सभी मीडिया जगत के ही साथी थे। एक-एक कर हमारे सीवी को छांटा गया। फिर जो सभी पैमानों पर उनके विज्ञापन पर खरे उतरे, उन्हें रुकने को कहा गया। बाकी सबको धन्यवाद कह दिया गया। मेरी भी सीवी सिलेक्ट हो गई। मैं काफी समय से मेनस्ट्रीम मीडिया में नौकरी करता आया हूं और अभी भी करता हूं।

मजीठिया वेज बोर्ड लागू कराने के लिए की गई सख्ती से घबराए कुछ मीडिया हाउस दिल्ली छोड़कर भागे : गोपाल राय

(दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय और भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह)


दिल्ली सरकार के श्रम और परिवहन मंत्री गोपाल राय ने भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह से बातचीत में बताया कि मीडियाकर्मियों के वेतन मसले पर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू कराने की दिल्ली सरकार की सख्ती के चलते कुछ मीडिया हाउस दिल्ली छोड़कर भाग गए हैं और दिल्ली प्रदेश के बाहर से अपना संचालन करने लगे हैं. गोपाल राय ने कहा कि वे हर हाल में दिल्ली के मीडिया वालों को उनका हक दिलाएंगे.

ये बात बर्दाश्त नहीं की जा सकती कि हम मेहनत से, बिना किसी से प्रभावित हुए काम करें और आप हमें दलाल बताएं : रवीश कुमार

Vineet Kumar : मैं तो प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को सुझाव देना चाहता हूं कि आप ये बिल्कुल स्पष्ट कर दो कि कौन बीजेपी का पत्रकार है, उसके लिए काम कर रहा है, कौन कांग्रेस के लिए या किसी दूसरी पार्टी के लिए. सारा झंझट ही खत्म हो जाएगा. कम से कम लोगों के सामने चीजें स्पष्ट तो होंगी… लेकिन ये बात बर्दाश्त नहीं की जा सकती कि हम मेहनत से, बिना किसी से प्रभावित हुए काम करें और आप हमें दलाल बताएं.

सांप्रदायिकता की वजह ये राजनीति के ठेकेदार हैं, जिनमें बीजेपी सबसे ऊपर है : असीम त्रिवेदी

युवा कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी अपने कार्टून्स के जरिए भारत की स्थिति को उकेरते रहे हैं. कुछ कार्टून्स को विवादित माना गया और इसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा. इस पूरी परिघटना के कारण असीम त्रिवेदी काफी चर्चित हुए. यूपी में शुक्लागंज के रहने वाले असीम राजनीति और समाज के बारे में किस तरह से सोचते हैं, इसको लेकर उनसे युवा पत्रकार हिमांशु तिवारी ‘आत्मीय’ ने बातचीत की.

पहले पत्रकारिता में सिर्फ चार पेपर पढ़ाया जाता था, अब 16 पेपर पढ़ना पड़ता है : डॉ. अर्जुन तिवारी

भारत में पत्रकारिता शिक्षा की नींव और पत्रकारिता शिक्षा को दिशा देने में डॉ. अर्जुन तिवारी की भूमिका महत्वपर्ण रही है। सही मायने में इन्हें पत्रकारिता गुरु कहा जाय तो गलत नहीं होगा। ‘‘हिन्दी पत्रकारिता का उदभव और विकास’’ पर पीएच.डी. करने के बाद इन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक पत्रकारिता की 20 से ज्यादा पुस्तकें लिखने वाले डॉ. तिवारी को नामित पुरस्कार, सम्पादन पदक, बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार और पत्रकारिता-भूषण साहित्य गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हाल में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने उन्हें तीन अगस्त 2015 को लोक साहित्य में महापंडित राहुल सांकृत्यान’’ पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह पुरस्कार 14 सितंबर को दिया जाएगा। डॉ. अर्जुन तिवारी भाटपाररानी, देवरिया के मूल निवासी हैं। 1965 में भाटपाररानी से शैक्षणिक कार्य की शुरुआत की। इसके बाद 1994 में काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष हुए और 2002 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद हिन्दी प्रोत्साहन समिति के अध्यक्ष के रूप में दक्षिण भारत के 16 विश्वविद्यालयों में हिन्दी विभाग की स्थापना कराई। साथ ही इन्होंने रांची, चित्रकूट, मुजफ्फरपुर और गोरखपुर में पत्रकारिता संस्थान शुरू किया जो आज भी अनवरत चल रहा है। वर्तमान में भोजपुरी-हिन्दी-अंगेजी शब्दकोश पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में कार्य कर रहे हैं।

संपादक ने ना ढूंढा तिन पाइयां, इंटरव्यू में रिपोर्टर फेल

बहुत सोचा कि इस पोस्ट को लिखूं या न लिखूं। पर दिल नहीं माना, शेयर करता हूं। वाकया हमारे एक पत्रकार मित्र से जुड़ा है। इंटरव्यू देने गए थे, एक नामचीन संस्था में। एक नामी गिरामी संपादक ने इंटरव्यू लिया। भाई रिजेक्ट हो गए। वजह उनमें वह बात नहीं थी जो संपादक ढूढ़ रहे थे। अब वह संपादक तलाश क्या रहे थे सुनिए, इधर उधर के सवालों के बाद मुख्य सवाल-राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय एक ब़ड़े नेता के संदर्भ में –

दैनिक जागरण में जिस भी नेता का आधा पेज इंटरव्यू छपा, उसकी सरकार चली गई

यह महज एक दुर्योग है या कुछ और। पर बात तथ्‍य पर आधारित है। दैनिक जागरण में जब भी किसी मुख्‍यमंत्री का इंटरव्‍यू आधे पेज से अधिक स्‍थान में छपा, उसकी सरकार चली गई। इसी प्रकार का एक और दुर्योग प्रचलित है कि जो भी मुख्‍यमंत्री नोएडा आया, उसकी सरकार चली गई। आखिर ऐसा क्‍यों होता आया है, बात समझ से परे है। फिर भी मैं सोचता हूं कि जो काम जनहित से परे स्‍वार्थ के लिए किया जाता है, उसमें ये दुर्योग जरूर आते हैं।

अवकाश के दिन सूचना प्रसारण मंत्रालय ने रखा इंटरव्यू

देवरिया : लोकसभा टीवी चैनल के 17 से 20 जुलाई को होने वाले इंटरव्यू पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के कैलेंडर के मुताबिक 17 जुलाई को जमात-उल-विदा, 18 को ईद और 19 जुलाई को रविवार है। ऐसे में इस इंटव्यू में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है, क्योंकि कुछ अभ्यर्थी ईद के चलते अपने घर जा चुके हैं।

पत्रकार जगेन्द्र की मौत की जांच रिपोर्ट जल्द, दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी : अखिलेश

समाजवादी पार्टी का युवा चेहरा अखिलेश यादव दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव पार्टी अखिलेश को आगे करके ही लड़ने का मन बना रही है। प्रदेश में कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। उनके मंत्रियों पर भी भ्रष्टाचार-दबंगई के आरोप लग रहे हैं। इन मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार …

अरविन्द केजरीवाल से बरखा दत्त का ये इंटरव्यू देखने सुनने लायक है

Sanjaya Kumar Singh : अरविन्द केजरीवाल और बरखा दत्त ने इस इंटरव्यू में भाजपा की राजनीति से लेकर मैगी तक की चर्चा की है। एलजी की तो ऐसी तैसी कर दी – यह कहते हुए कि ये तो कांग्रेस के नियुक्त किए हुए हैं। अपनी नौकरी बचाने के लिए काम कर रहे हैं और अमित शाह का चपरासी बुलाएगा तो रेंगते हुए जाएंगे। उपराज्यपाल के पद की गरिमा खराब कर रहे हैं आदि। दिल्ली सरकार के सौ दिन पूरे होने पर कनॉट प्लेस में पूरे मंत्रिमंडल ने आम जनता से बात की थी और अब करीब 52 मिनट का यह विस्तृत इंटरव्यू।