खेती-बाड़ी के लिए खाद का काम करेगा किसान टीवी : नरेश सिरोही

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान टीवी लांच किया है। अन्य तमाम चैनल सेवाओं के बीच इसकी क्या जरूत थी, इससे किसानों का कितना भला होगा आदि प्रश्नों पर पत्रकार रमेश ठाकुर ने किसान टीवी के एडवाइजर नरेश सिरोही से बातचीत की-

राष्ट्रपति का गलत इंटरव्यू छापने पर दैनिक ‘दाजेन नेतर’ से भारत ने जताया कड़ा विरोध

नई दिल्ली : भारत ने स्वीडिश दैनिक ‘दाजेन नेतर’ में प्रकाशित राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के एक विवादित बयान वाले साक्षात्कार कड़ा विरोध जताया है। आपत्तिजनक बातें साक्षात्कार में दिए जाने पर भारत का कहना है कि ‘सामने वाले को नीचा दिखाने के लिए की गयी यह गैर पेशेवर और अनैतिक’ कार्रवाई है।

किसी बिल्ली का इंटरव्यू लेने वाले पहले पत्रकार बने राहुल पांडेय!

Yashwant Singh : दिल्ली के युवा, प्रतिभावान और तेजतर्रार पत्रकार राहुल पांडेय अपने घर पर रोज आने वाली बिल्ली से कुछ यूं दोस्ती गांठ चुके हैं कि वे अब उसके सुख-दुख को लेकर इंटरव्यू करने लगे हैं. जरा देखिए तो ये इस मीनू का इंटरव्यू. मीनू इन बिल्ली महोदया का नाम है. राहुल जी बिल्ली को बिल्ली नहीं कहते, मीनू जी कहकर पुकारते हैं. उसके लिए दूध हरवक्त तैयार रखते हैं. कब मीनू जा आ जाएं और खाने-पीने को लेकर आवाज लगा दें. सो, उनके लिए खाना-पीना सब तैयार रखते हैं. अकेले रहने वाले पत्रकार राहुल अपने लिए भले न कुछ पकाएं, लेकिन मीनू का मेनू तैयार रखते हैं.

(पत्रकार राहुल पांडेय के घर पर नए मेनू के लिए चिंतन करतीं मीनू जी की एक मुद्रा)

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए अब भी कोई सुप्रीम कोर्ट में केस करना चाहता है तो स्वागत है : एडवोकेट उमेश शर्मा

(File Photo Advocate Umesh Sharma)

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा से भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने वो सवाल पूछा जिसे देश भर के कई मीडियाकर्मी आपस में एक दूसरे से पूछ रहे हैं. सवाल यह कि क्या सुप्रीम कोर्ट में कोई मीडियाकर्मी अब भी मजीठिया वेज बोर्ड का अपना हक पाने के लिए केस कर सकता है? एडवोकेट उमेश शर्मा ने बताया कि बड़े आराम से केस कर सकता है. चलते हुए केस में पार्टी बना जा सकता है, चाहें खुलकर या गोपनीय रहकर. इसके लिए वनटाइम फीस सात हजार रुपये देने होंगे.

मजीठिया वेज बोर्ड, 28 अप्रैल और सुप्रीम कोर्ट : क्या हुआ, क्या करें… सुनिए वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा की जुबानी

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा से भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने बातचीत की. विषय था 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड मसले पर हुई सुनवाई. बातचीक के दौरान सुप्रीम कोर्ट में वाकई क्या क्या हुआ, इसके बारे में एडवोकेट उमेश शर्मा ने बताया. साथ ही कोर्ट के फैसले के निहितार्थ को व्याख्यायित किया. मीडियाकर्मियों को आगे क्या करना चाहिए, इसको लेकर भी चर्चा हुई.

डाक्टर को बाउंसरों ने घसीटते हुए कहा था- ”स्टेज पर चलो, तुम्हारा बाप (मिका) तुम्हें बुला रहा है” (देखें इंटरव्यू)

पहले राखी सावंत और फिर सनी लियोनी की ‘किस’ करके साफ-साफ बच निकले सिंगर मिका सिंह इस बार बुरी तरह फंस गये हैं. 11 अप्रेल 2015 को दिल्ली स्थित पूसा इंस्टीट्यूट के मेला ग्राउंड में आयोजित रंगारंग नाइट में मिका सिंह ने एक प्रशिक्षु डॉक्टर को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया. इस नाइट का आयोजन DELHI OPHTHALMOLOGICAL SOCIETY (DOS) द्वारा कराया गया था.

किरण बेदी पर शुरू से संदेह था : मेधा पाटकर

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर अन्ना हजारे के 2011 के उस आंदोलन का भी हिस्सा थीं, जिसमें अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी भी जुड़े हुए थे. उन्होंने आम आदमी पार्टी से मुंबई से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन नाकाम रहीं. वह कहती हैं कि कुछ लोगों को शुरू से किरण बेदी के भाजपा में जाने का संदेह था. वह वैकल्पिक राजनीति के रूप में जनांदोलन को आज भी जरूरी मानती हैं. ऐसे समय जब अरविंद केजरीवाल की दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी हो रही है, वह अन्ना हजारे के साथ 24 फरवरी को भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी कर रही हैं. इन सभी मुद्दों पर अमर उजाला के स्थानीय संपादक सुदीप ठाकुर ने बात कीः

‘न्यूज इंडिया’ के मालिक ने मुझे इंटीमेट लेडी कॉन्फीडेंशियल लेडी बनने के लिए कहा… (देखें पीड़िता का इंटरव्यू)

‘न्यूज इंडिया’ चैनल के मालिक और निम्स विवि के चेयरमैन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली लड़की का विशेष इंटरव्यू खोजी पत्रकार संजीव चौहान के यूट्यूब चैनल Crimes Warrior पर उपलब्ध है जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है. इस इंटरव्यू की कुछ खास बात यहां पढ़ सकते हैं:

किरण बेदी का पुलिसिया अंदाज़ देखकर मैं हैरान था : रवीश कुमार

सुबह के 5 बज रहे थे तभी सुशील का फोन आया कि बैकअप प्लान किया है आपने। सुशील मेरे शो के इंचार्ज हैं। बैक अप प्लान? हो सकता है कि आधा घंटा न मिले। इंटरव्यू के लिए तैयार होकर चाय पी ही रहा था कि सुशील के इस सवाल ने डरा दिया। प्राइम टाइम एक घंटे का होता है और अगर पूरा वक्त न मिला तो बाकी के हिस्से में क्या चलाऊंगा। हल्की धुंध और सर्द भरी हवाओं के बीच मेरी कार इन आशंकाओं को लिए दफ्तर की तरफ दौड़ने लगी।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह का एक पुराना इंटरव्यू

मीडियासाथी डॉट कॉम नामक एक पोर्टल के कर्ताधर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने 10 मार्च 2011 को भड़ास के संपादक यशवंत सिंह का एक इंटरव्यू अपने पोर्टल पर प्रकाशित किया था. अब यह पोर्टल पाकिस्तानी हैकरों द्वारा हैक किया जा चुका है. पोर्टल पर प्रकाशित इंटरव्यू को हू-ब-हू नीचे दिया जा रहा है ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और यशवंत के भले-बुरे विचारों से सभी अवगत-परिचित हो सकें.

यशवंत सिंह

 

अजीत अंजुम की बिटिया जिया ने मोदी की बजाय केजरी पर मुहर मारा (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : अजीत अंजुम ‘इंडिया टीवी’ चैनल में मैनेजिंग एडिटर हैं. इनकी एक प्यारी सी बिटिया है. नाम है- जिया. लगभग साढ़े आठ साल की होंगी. एक रोज यूं ही जिया ने अपने पापा से बातचीत के दौरान केजरीवाल और मोदी को लेकर जिक्र किया. अजीत अंजुम के भीतर का पत्रकार जगा और उन्होंने जिया से सहज भाव से बातचीत करते हुए सब कुछ मोबाइल में रिकार्ड कर लिया. जिया की मम्मी हैं गीताश्री जो खुद जानी-मानी महिला पत्रकार हैं. पत्रकार मां-पिता की बिटिया होने से उन्हें घर में बहस और विचार का माहौल मिलेगा ही. और, इस माहौल में अगर बच्चा अपनी कोई ओपीनियन बनाए तो वह सुनने जानने लायक होगा.

राज्यसभा टीवी में नौकरी की ख्वाहिश रखने वाले बहुत लोगों को मायूस होना पड़ा…

नौकरी पाने की ख्वाहिश थी. राज्यसभा टीवी में काम करने की सपना था. इन्टरव्यू में खुद को साबित करने की चुनौती थी. हिन्दी और अंग्रेजी के लिए कुल जमा 4 पोस्ट थी. इंटरव्यू देने पहुंचा. कॉफी की चुस्कियों के बीच कुछ पुराने दोस्तों का भरत-मिलाप हुआ और इसके साथ मीडिया का वर्ग विभेद भी मिटता दिख रहा था. किसी चैनल के इनपुट एडिटर भी प्रोड्यूसर बनने के लिए सूट पहनकर आए थे. ऐसे में सीनियर प्रोड्यूसर के प्रोड्यूसर बनने पर सवाल उठाना गलत होगा.

राज्यसभा टीवी में नौकरी की ख्वाहिश रखने वाले बहुत लोगों को मायूस होना पड़ा…

नौकरी पाने की ख्वाहिश थी. राज्यसभा टीवी में काम करने की सपना था. इन्टरव्यू में खुद को साबित करने की चुनौती थी. हिन्दी और अंग्रेजी के लिए कुल जमा 4 पोस्ट थी. इंटरव्यू देने पहुंचा. कॉफी की चुस्कियों के बीच कुछ पुराने दोस्तों का भरत-मिलाप हुआ और इसके साथ मीडिया का वर्ग विभेद भी मिटता दिख रहा था. किसी चैनल के इनपुट एडिटर भी प्रोड्यूसर बनने के लिए सूट पहनकर आए थे. ऐसे में सीनियर प्रोड्यूसर के प्रोड्यूसर बनने पर सवाल उठाना गलत होगा.

इंटरव्यू सिर्फ बहाना था, लोकसभा में पहले से काम कर रहे धीरज सिंह की नियुक्ति तय थी

अमर उजाला और स्टार न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके व कई वर्षों से मुंबई में रहकर अर्थकाम डाट काम का संचालन कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह 10 से 13 अक्टूबर तक दिल्ली में थे. वे लोकसभा टीवी के लिए निकली वैकेंसी के लिए इंटरव्यू देने आए थे. इस पद के लिए कई जेनुइन जर्नलिस्टों ने इंटरव्यू दिया लेकिन यह पद पहले से फिक्स था. अनिल सिंह ने इंटरव्यू के अनुभव और सवाल जवाब को अपने फेसबुक वॉल पर डाला है. वे लिखते हैं-

लोकसभा टीवी का हाल : 100 नंबर का इंटरव्यू पांच मिनट में, केवल तीन सवाल पूछे

लोकसभा टीवी के लिए डॉयरेक्टर प्रोग्रामिंग की पोस्ट के लिए मैंने आवेदन दिया था। अक्तूबर महीने में 11 तारीख को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। मेरा रोल नंबर 8 था लेकिन 8 तक के रोल नंबर में से केवल चार लोग ही आए थे। इंटरव्यू बोर्ड में तीन लोग थे जिनमें से दो सरकारी अफसर और एक पत्रकार थे जिन्हें मैंने नहीं देखा कभी और उनका नाम भी पता नहीं है। पत्रकारिता जगत में कोई जाना-पहचाना नाम भी नहीं है उनका। तीन में से दो सरकारी अफसर चुप रहे। एक व्यक्ति ने ही तीन सवाल पूछे….

मेरे रिमार्क ‘हबीब ने थिएटर में वो काम किया जो रामायण में हनुमान ने किया था’ को सर्वेश्वर ने दिनमान में छापा तो वो नाराज हो गए

: इप्टा के अध्यक्ष रणबीर सिंह से दिनेश चौधरी की बातचीत :

-थियेटर में आपकी भूमिका प्रमुखतः क्या है? अपने लिखे नाटकों और उनके निर्देशकों के बारे में कुछ बतायें।

–मेरी थिएटर में भूमिका प्रमुखतः क्या है, यह कहना मुश्किल है क्यों की जब मैंने थिएटर में काम करने की सोची तो मेरे सामने सवाल था थिएटर से रोटी-रोज़ी जुटाने का। उस वक्त शायद यह फैसला बेवकूफी भरा था या कोई कहे की हिम्मत भरा, मगर मेरे लिए यह दोनों ही नहीं। बस मेरी मज़बूरी थी। पहली नौकरी जो मिली वो भारतीय नाट्य संघ के कार्यवाहक मंत्री (एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी) की मिली। भारतीय नाट्य संघ यूनेस्को का इंडियन सेंटर था। मेरी क़िस्मत की वहां मुझे श्रीमती कमलादेवी चट्टोपाध्याय के नेतृत्व में काम करने का मौक़ा मिला। वहीँ मेरी मुलाक़ात कपिला वात्स्यायन, मृणालिनी साराभाई, प्रोफेसर एन. सी. मेहता, अल्काजी, हबीब तनवीर, इन्दर राज़दान, तरुण रॉय, नेमीचंद जैन, विश्णु प्रभाकर, जसवंत ठक्कर, शांता गांधी, अनिल बिस्वास , चार्ल्स फेब्री, शीला वत्स, कैलाश पाण्डेय जैसे महान लोगों से हुई और उनसे थिएटर के बारे में जानने-समझने का मौक़ा मिला। सारे भारत के थिएटर की जानकारी हासिल हुईय अच्छाइयाँ, बुराइयाँ, मुश्किलात, सरकार की नीयत और नीतियां, कामकाज का तरीकाय ये सब बहुत नज़दीक से देखने का मौक़ा मिला। उस वक्त मेरी भूमिका सिर्फ एक एडमिनिस्ट्रेटर की थी, जो आज मेरे काम आ रही है।

‘हैदर’ जैसी फिल्में भारतीय लोकतंत्र में ही संभव है : आशीष विद्यार्थी (इंटरव्यू)

आशीष विद्यार्थी आला दर्जे के कलाकार होने के साथ-साथ सबसे घुल-मिल कर रहने वाले एक आम इंसान भी हैं। बीते 12 दिनों से आशीष इस्पात नगरी भिलाई में यहीं के पले-बढ़े युवा निर्देशक केडी सत्यम की फिल्म ‘बॉलीवुड डायरी’ की शूटिंग में व्यस्त थे। शूटिंग कभी सुबह 10 बजे से रात 12 बजे तक चली तो कभी अगली सुबह 6 बजे तक। शूटिंग के बीच-बीच में जब भी वक्त मिला, आशीष ने टुकड़ों-टुकड़ों में बातचीत की। इस बीच वह सबसे खुल कर मिलते भी रहे। इसके बाद मुंबई रवाना होने से पहले उनके साथ बातचीत का फाइनल दौर चला। आशीष विद्यार्थी मानते हैं कि बीते तीन दशक के मुकाबले आज ज्यादा बेहतर फिल्में बन रही हैं। फिल्मों की व्यस्तता के बीच उन्हें थियेटर को कम वक्त देने का मलाल भी है। हाल की अपनी फिल्म ‘हैदर’ को लेकर वह खुल कर प्रतिक्रिया देते हैं। उनका मानना है कि ‘हैदर’ जैसी फिल्में भारतीय लोकतंत्र में ही संभव है। आशीष विद्यार्थी से हुई पूरी बातचीत सवाल-जवाब की शक्ल में-

तो क्या लोकसभा चैनल के संपादक का पद फिक्स था?

एक बात सच है कि सफेदपोश पॉवर के सामने मौजूदा समय में अनुभव, हुनर व ज्ञान की कीमत बहुत कम आंकी जा रही है। लोकसभा सभा चैनल के संपादक का पद पिछले कुछ माह से रिक्त है उसको भरने के लिए सरकार द्वारा आवेदन मांगे गए। मीडिया के कई धुरंधरों ने इसके लिए आवेदन भी किया। लेकिन उसके बाद अंदरखाने जो खेल खेला गया, वह किसी तमाशे से कम नहीं था।

भड़ास की खबर सच हुई, सीमा गुप्ता बन गईं लोकसभा टीवी की सीईओ और एडिटर इन चीफ (देखें किस पत्रकार को कितना नंबर मिला)

भड़ास ने बहुत पहले बता दिया था कि पीएमओ की तरफ से अघोषित आदेश सीमा गुप्ता को लोकसभा टीवी का सीईओ और एडिटर इन चीफ बनाने का है. वही हुआ भी. इसके लिए इंटरव्यू बोर्ड में ऐसे लोगों को रखा गया जिनका टीवी का कोई अनुभव नहीं था. खासकर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने अपने खासमखास अभिलाष खांडेकर को चयन बोर्ड का काम निपटाने के लिए तैयार कर रखा था. ढेर सारे वरिष्ठ लोगों में अनजाने से नाम सीमा गुप्ता को सीईओ और एडिटर इन चीफ चुना गया. पारदर्शिता के नाम पर जीत कर आई मोदी सरकार की इस करनी से लोगों को कांग्रेस के दिनों की याद आ गई.

लोकसभा चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ पद के लिए इंटरव्यू लेने वाले पैनल में किसी का बैकग्राउंड टीवी का नहीं!

अजीब समय है. जो लोग इंटरव्यू लेने के लिए बैठे मिले, उनके पास टीवी का कोई ज्ञान नहीं है. पर वे एक टीवी चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ की तलाश में दर्जनों लोगों का इंटरव्यू लेते रहे. जी हां. पिछले दिनों लोकसभा टीवी के नए सीईओ और एडिटर इन चीफ पद के लिए जो इंटरव्यू बोर्ड बैठा उसमें प्रिंट मीडिया में लंबे समय से कार्यरत अभिलाष खांडेकर (जो इंदौर की सांसद और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के काफी करीबी माने जाते हैं) और भाजपा सांसद व फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना भी शामिल थे. जो तीसरा शख्स था वह नौकरशाह था और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़ा हुआ था.