दो दिनी अलीगढ़ यात्रा : जिया, मनोज, प्रतीक जैसे दोस्तों से मुलाकात और विनय ओसवाल के घर हर्ष देव जी का साक्षात्कार

पिछले दिनों अलीगढ़ जाना हुआ. वहां के छात्रनेता और पत्रकार ज़ियाउर्रहमान ने अपनी पत्रिका ‘व्यवस्था दर्पण’ के एक साल पूरे होने पर आईटीएम कालेज में मीडिया की दशा दिशा पर एक सेमिनार रखा था. सेमिनार में सैकड़ों इंजीनियरिंग और एमबीए छात्रों समेत शहर के विशिष्ट जन मौजूद थे. आयोजन में शिरकत कर और युवाओं से बातचीत कर समझ में आया कि आज का युवा देश और मीडिया की वर्तमान हालत से खुश नहीं है. हर तरफ जो स्वार्थ और पैसे का खेल चल रहा है, वह सबके लिए दुखदायी है. इससे आम जन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. सेमिनार में मैंने खासतौर पर मीडिया में आए भयंकर पतन और न्यू मीडिया के चलते आ रहे सकारात्मक बदलावों पर चर्चा की. बड़े मीडिया घरानों के कारपोरेटीकरण, मीडिया में काले धन, मीडिया में करप्शन जैसे कई मामलों का जिक्र उदाहरण सहित किया. 

मीडिया का फोकस बदल गया है, सामाजिक दायित्व से ज्यादा उसके लिए आर्थिक लाभ जरूरी हो चला है

ईटीवी, लखनऊ के पत्रकार मनीष सिंह का फ्रीडम आफ स्पीच पर दिया गया पूरा भाषण पढ़ें… बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विवि), लखनऊ में “FREEDOM OF SPEECH AND EXPRESSION – CONTEMPORARY ISSUES AND CHALLENGES” पर आयोजित नेशनल सेमिनार में ईटीवी, लखनऊ के पत्रकार मनीष सिंह ने जो भाषण दिया, वह अविकल नीचे प्रस्तुत है.. सेमिनार में हिन्दुस्तान टाइम्स की सम्पादक सुनीता ऐरन, वरिष्ठ पत्रकार रामेश्वर पाण्डेय के साथ लखनऊ विवि के विधि विभाग के विभागाध्यक्ष रहे अवस्थी जी आदि मौजूद थे…

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के स्टेट ऑफ़ द यूनियन के अंतिम भाषण से संकटग्रस्त पूंजीवाद का चीत्कार सुनाई दे रहा!

Arun Maheshwari : अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का स्टेट ऑफ़ द यूनियन का अंतिम भाषण सुना। अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित अट्ठावन मिनट का यह भाषण ओबामा के ख़ास प्रकार के आवेग, ओज और आकर्षक वाग्मिता के साथ ही कई मायनों में विचारोत्तेजक और पूरी दुनिया के मौजूदा परिदृश्य और उसमें अमेरिका की एक नेतृत्वकारी और निर्णायक भूमिका के बारे एक समग्र दृष्टिकोण को पेश करने वाला भाषण था। इस पर अलग से धीरज के साथ लिखने की ज़रूरत है।

इंसाफ का पलड़ा अमीरों के पक्ष में, वक्त को और भी शाहिद आजमियों की जरूरत : आनन्द स्वरूप वर्मा

लखनऊ । आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को इंसाफ दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाले मुम्बई के वकील शाहिद आजमी की शहादत की पांचवी बरसी पर रिहाई मंच ने ‘लोकतंत्र, हिंसा और न्यायपालिका’ विषय पर सेमिनार किया। यूपी प्रेस क्लब में आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता के बतौर बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार आनंद स्वरूप वर्मा ने कहा कि हमारे लोकतंत्र के सामने कई बार चुनौतियां पेश हुई हैं। उन्होंने कहा कि जब भी लोकतंत्र पर खतरे बढ़ते हैं उस खतरे के खिलाफ हिंसा भी बढ़ जाती है।