महिला पत्रकार ने अपने स्टेट हेड पर लगाए कई गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ में चैनल और अखबार बने उगाही का जरिया… न्यूज चैनल /अखबारों के रिपोर्टर व पत्रकार हो रहे शोषण के शिकार… पत्रकार संगठनों की भूमिका पर भी उठे सवाल..

स्टेट हेड/ एडिटर की आड़ में न्यूज चैनल करते हैं उगाही… छत्तीसगढ़ बना चारागाह… छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के जनसम्पर्क विभाग से डीपीआर लेने के फेर में छत्तीसगढ़ में कुकुरमुत्ते की तरह न्यूज चैनलों की बाढ़ आ गई है. न तो अधिकतर चैनल प्रदेश में सभी जगह दिखाई देते हैं न ही चैनल में कार्य करने वाले जिला रिपोर्टरों एवं ब्लॉक के स्ट्रिंगरों को मानदेय मिलता है. ये रिपोर्टर और स्ट्रिंगर प्रदेश की पल-पल की घटनाओं को ब्रेकिंग, स्क्रॉल, एंकर विसुसल, बाइट के माध्यम से भेजते हैं. विभिन्न ब्रेकिंग न्यूज के ग्रुपों एवं एफटीपी के माध्यम से चैनल के इनपुट तक पहुंचाते हैं. मेल से खबरों को भेजते हैं. लेकिन क्या वो सभी खबरे चलती हैं? नहीं. आखिर क्यों नहीं चलती हैं?

ब्लॉक एवं जिला स्तर पर कार्य करने वाले रिपोर्टरों एवं स्ट्रिंगरों को चैनल दुर्घटना बीमा का लाभ तक नहीं देते हैं. स्ट्रिंगरों और रिपोर्टरों को खबरों के बदले कोई पारिश्रमिक सैलरी नहीं दिया जाता है. एक-दो चैनलों को छोड़ दें तो बाकी सभी चैनल शोषण, उत्पीड़न और उगाही का अड्डा हैं. ये लोग न रिपोर्टरों को मोबाईल एलाउंस देते हैं न ही पेट्रोल एलाउंस, न ही वीडियो कैमरा, न ही किसी प्रकार की कोई सैलरी. लेकिन जब उन रिपोर्टरों से कोई खबर चूक जाये या किसी कारण से कोई फोन अटेंड नही कर पाए तो तुरंत चैनल हेड / एडिटरों का फोन आते ही रिपोर्टरों एवं स्ट्रिंगरों से ऐसे बात किया करते हैं जैसे वो उनके बंधुआ मजदूर हों। यदि कोई खबर किसी बड़े नेता / मंत्री या उद्योगपतियों से जुडी हो तो फिर पूछिए मत. आपसे फोनों के लिए सम्बंधित व्यक्ति अथवा नेता / अधिकारी का नम्बर मंगाया जायेगा. फिर आप टीवी के स्क्रीन पर समाचार का इंतिजार करते हुए बैठे रहिये. आपका समाचार चलेगा ही नहीं. लेकिन दिनभर मेहनत करके आपके द्वारा भेजे गई खबर को नहीं चलने का कारण आप पूछ भी नहीं सकते. यदि आपने पूछ भी लिया तो आपको कोई सन्तुष्टिजनक जवाब नहीं मिलेगा.

स्टेट हेड एवं एडिटर रायपुर में बैठ के लगा रहे आईडी की बोली… हालाँकि सुनने में ये बात थोड़ी अजीबो गरीब लगेगी लेकिन रायपुर में बैठे चैनल के ठेकेदार आपके जिला में स्थित उद्योगों एवं आर्थिक स्थिति के अनुसार आपसे आईडी का सौदा करेंगे. जिला रिपोर्टर बनना है तो 50 हजार… ब्लॉक रिपोर्टर बनना है तो 20 से 30 हजार रुपया… ये पैसे बाकायदा आपसे डोनेशन के तौर पर लिया जायेगा… पहले तो आपको यह राशि कार्य छोड़ने के वक्त वापसी की बात की जायेगी… लेकिन भला अख़बार या चैनल से किसी को पैसा वापस मिला है किसी को… इतना ही नहीं, आई डी एवं पीआरओ लेटर जारी करते ही आपका शोषण प्रारम्भ हो जाता है.. फिर शुरू होता है टारगेट का खेल…. 26 जनवरी, 15 अगस्त, दीपावली, नेताओं की जयंती, पुण्य तिथि, मंन्त्री मिनिस्टरों के आगमन… इन सभी अवसर पर उन्हें चाहिए विज्ञापन. भले ही आपका समाचार चले न चले, चैनल दिखे न दिखे, लेकिन आपको विज्ञापन देना ही पड़ेगा.

रायपुर से बैठ के होता है खबरों का सौदा… जी हां सुनने में थोड़ा अजीब लगे लेकिन रायपुर में बैठे चैनल हेड/ एडिटर खबरों के ठेकेदार अपने नफा नुकसान के आधार पर खबरों का चयन एवं सौदेबाजी करते हैं… यदि खबर मंत्री जी से जुडी कुनकुनी 300 एकड़ आदिवासी भूमि घोटाले की हो, खनन माफियाओं से जुडी खबर हो, भ्रष्ट अधिकारियो से जुडी खबर हो या फिर देश के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया ग्रुप डी बी पॉवर से जुडी आदिवासी भूमि घोटाला की खबर जिस पर प्रधानमंत्री कार्यलय से कार्यवाही का आदेश हो… इसे रोक करके उल्टे दलाली की जाती है… ऐसे ही मामले में एक जिले की महिला रिपोर्टर आरती वैष्णव को धमकी देते हुए चैनल से निकाले जाने एवं आईडी जमा करने की बात कहता है साधना चैनल का स्टेट हेड आरके गांधी. साधना न्यूज छत्तीसगढ़ के स्टेट एडिटर आरके गांधी की पोल जब महिला पत्रकार ने खोल दी तो महिला पत्रकार को बदनाम करने के लिए खनिज माफियाओं से कर लिया सांठगांठ.

श्री माँ प्रकाशन की आड़ में पूरे छत्तीसगढ़ को लूटा… जी हां अपने आपको स्टेट हेड बताने वाले दलाल श्री आर के गांधी ने श्री माँ प्रकाशन के नाम से मुझसे लिया विज्ञापन… 25 हजार नगद एवं 25 हजार का स्टेट बैंक खरसिया का चेक लिया… अंबिकापुर, बिलासपुर, भिलाई, दुर्ग, जाजंगिर, कोरिया सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से जिला रिपोर्टर के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपये लिए. संभाग हेड के लिए 1 लाख से 5 लाख तक लिए… ब्लॉक स्तर के लिए 30 हजार की राशि स्ट्रिंगरों से वसूल किया गया… बदले में श्री माँ प्रकाशन का आईडी एवँ पीआरओ जारी किया गया… अब जबकि श्री माँ प्रकाशन का अनुबंध साधना न्यूज से समाप्त हो गया है तो लोगों को उनका डिपॉजिट वापस करने में आनाकानी किया जा रहा है…

डीबी पावर प्रिंट मीडिया समूह द्वारा खरसिया तहसील जिला रायगढ के विभिन्न ग्रामों में गरीब आदिवासियों की जमीन कब्जाने की खबर का प्रसारण करने के बजाय उल्टे डीबी पॉवर के जीएम धनंजय सिंह के साथ सांठ गांठ करके मुझे मोबाईल में तत्काल चैनल छोड़ने एवं आईडी जमा करने की धमकी आर के गांधी द्वारा दी गई. मेरे द्वारा जमा डिपॉजिट वापस मांगने पर बदनाम करने एवं कैरियर खराब करने की धमकी दिया गया है. आर के गांधी द्वारा आज भी श्री माँ प्रकाशन के नाम से आईडी एवं पीआरओ को बेचा जा रहा है.

विज्ञापन प्रसारित किये बिना बिल की मांग एवं प्रत्येक महीना वसूली करके कभी 30 हजार कभी 50 हजार देने का दबाव बनाया जाता है. ऐसे में भला कोई व्यक्ति कैसे कार्य करेगा… आर के गांधी के इस अपमान जनक बातों एवं अवैध उगाही के कारण छत्तीसगढ़ में साधना न्यूज अपनी पहचान खो चुका है…

अब एक बार फिर से नई नियुक्ति के नाम से रिपोर्टरों से वसूली की तैयारी आर के गांधी द्वारा की जा रही है. किसी भी रिपोर्टर को सैलरी तो दूर, साल भर कार्य करने के बाद भी प्रेस कार्ड तक जारी नहीं किया गया है… आज छत्तीसगढ़ में साधना न्यूज के पतन का मुख्य जिम्मेदार आर के गांधी ही है… ऐसा दलाल जो रायपुर में बैठकर आई डी बेच रहा है और रिपोर्टरों को धमकाता है… हर माह पैसे देने को कहता है…. रिपोर्टर को बंधुवा मजदूर की तरह समझता है…  ऐसा व्यक्ति है ये दलाल आर के गांधी… कई प्रताड़ित पत्रकार उक्त मामले में जल्द ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की शरण में जाने को तैयार हैं…

सुनिए दलाल आरके गांधी से मेरी बातचीत… इस टेप से समझ में आ जाएगा कि जो मैंने आरोप लगाए हैं वो निराधार नहीं हैं…

आरती वैष्णव
जिला रिपोर्टर
साधना न्यूज
रायगढ़

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छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की आड़ में कैसा खेल, बिना वेतन जिलों में काम कर रहे पत्रकार

चैनल की माइक आईडी की लग रही बोली, वसूली और धमकी का चल रहा खेल, अनशन-शिकायतों का लगा अंबार, सोशल नेटवर्क का बेजोड़ इस्तेमाल, पीएमओ तक हो रही शिकायत

2016 का साल बीत चला। अगर आपका यह साल खराब बीता हो। तो आप नए साल की बेहतरी के लिए कई तरीकों का इजाद करेंगे। इन तरीकों में चैनल की माइक आईडी सबसे बेहतर और कारगर उपाय है। आप माइक आईडी लीजिए और आप हो गए पावरफुल। चाहे आपको पत्रकारिता के मापदंड मालूम हो या नहीं। इस माइक आईडी के साथ वाट्सग्रुप, फेसबुक, ट्वीटर जैसे सोशल नेटवर्क आपके पास हथियार हैं। इन सबके बावजूद आपको और पावरफुल होना है तो आप सामाजिक कार्यकर्ता, भ्रस्टाचार उन्मूलन संगठन, मानवाधिकार संगठन से अपना नाता जोड़ लें। समाज के लिए आप कुछ करें या ना करें। लेकिन आप अपने एशो-आराम के लिए तमाम वो उपाय करेंगे जिससे आपकी जिंदगी लग्जरी हो जाए। कुछ इसी तरह का रास्ता इन दिनों छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की आर में चल रहा है। कोई आवाज उठाता है। तो उसको मिलती है धमकी। रूसवाई। अपमान। मानसिक प्रताड़ना। शिकायतों का अंबार। ऊँची पहुँच की धौंस। और क्या न क्या।

ऐसे बहुत सारे मामलों का अंबार है। नक्सल प्रभावित इस राज्य में। ठीक है। आप मुद्दों को उठाओ, उसकी गहराई तक पहुँचो। जो माध्यम है। उन माध्यमों के जरिए पीड़ितों को हक दिलाओ न कि अपनी रोटी सेंको। पैसा बनाओ। लग्जरी जीवन-यापन करो। कुल मिलाकर आप जिस पर दलाली का आरोप लगाते नजर आते हो। वो खुद अपना गिरबां देख लें। वो क्या कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला का खरसिया का क्षेत्र। जहां 2015 में एक वैष्णव परिवार काफी सुर्खियों में रहा। एफआईआर हुआ। जेल की सलाखों के बीच पहुँचा परिवार। कई सारी अफवाहें भी आई। इन अफवाहों में जून 2015 में एक रायगढ़ जिला जेल में खरसिया के वैष्णव दंपत्ति के अनशन की खबर भी थी। जो सिर्फ और सिर्फ अफवाह निकली थी। अजाक पुलिस ने एक पुराने मामले मेंं खरसिया निवासी भूपेंद्र किशोर वैष्णव एवं उसकी पत्नी आरती वैष्णव को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के पूर्व वैष्णव दंपत्ति खरसिया एसडीएम आफिस के बाहर आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। ऐसे में, उनकी गिरफ्तार व जेल दाखिले की पुलिसिया कार्रवाई के बाद भी जेल अंदर उनके अनशन की खबर फैलाई जा रही थी। जिसे जेल प्रशासन ने खारिज किया था।

2015 का साल जैसे-तैसे इस परिवार के लिए बीता। 2016 की शुरूआत में श्री मां प्रकाशन कंपनी के तहत साधना न्यूज के लिए आरती वैष्णव ने 25 हजार रूपए चेक एवं 25 हजार चेक के जरिए अपनी नियुक्ति पत्र ले ली। जिस व्यक्ति ने इस नियुक्ति की मध्यस्थता की। उसने 10 हजार रूपए का कमीशन भी लिया। आरती वैष्णव ने साल में चैनल के लिए विज्ञापन भी किया। एक स्कूल में धमकी-चमकी का मामला भी आया। ऐसी शिकायतों की अंबार लग गई। लेकिन चूंकि चैनल दो कंपनियों की आपसी द्वंद में फंसा था। ऐसे में छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले पर किसी की नजर नहीं गई। श्री मां प्रकाशन से साधना न्यूज का एग्रीमेंट खत्म हुआ। लेकिन संस्थान ने पिछली कंपनी द्वारा नियुक्त किसी भी व्यक्ति को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया।

आरती वैष्णव साधना न्यूज रायगढ़ के लिए नियुक्त थी। लेकिन वो अपने पति को संस्थान से जुड़ने के लिए दबाव बनाती रही। जिस पर प्रबंधन ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसी बीच खरसिया के कुनकुनी जमीन घोटाला सुर्खियों में आया। इसको लेकर आरती वैष्णव ने संस्थान प्रमुख को खबरों को हो रही अपडेट में कोई जानकारी नहीं दी। इसके अलावाा आरती वैष्णव तो संस्थान के लिए नियुक्त थी। लेकिन काम करते नजर आते थे भूपेन्द्र वैष्णव। कुनकुनी जमीन घोटाला में शिकायतों का दौर शुरू हो चुका। जो गलत है। वो गलत है। पीएमओ तक यह मामला पहुँचा है। आरती वैष्णव से बात करने की कोशिश की तो पहले उन्होंने फोन नहीं उठाया। और बाद में जिस फोन से रिकार्डिंग होती है, उससे फोन कर स्टेट हेड पर ही उलटा आरोप जड़ दिया गया। फिलहाल इस मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। पुलिस में शिकायत हो चुकी है। आरती वैष्णव सामाजिक कार्यकर्ता हैं। मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन संगठन में छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव नियुक्त हैं। राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा मंच मानवाधिकार की जन सूचना अधिकारी भी है। इस लेख के साथ ऑडियो भी है। कुछ वॉटसअप क्लिप भी हैं। इस लेख की अगली किस्त का इंतजार कीजिए जिसमें कुछ अहम कड़ियां और भी सामने आने वाली हैं।

लेखक आरके गाँधी साधना न्यूज में बतौर स्टेट हेड नियुक्त हैं। संपर्क : gandhirajeevrohan@gmail.com

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उफ्फ… कोई क्यों करे न्यूज चैनलों में नौकरी… सुन लीजिए ये टेप…

Sadhna PRIME News ke HR, input Prashant Aur Assignment desk se assistant producer Ajay Saxena ke beech jo kaha suni huyi hai wo es es audio clip mei hai. Notebandi ke dauran ki recording hai ye. Job to gayi hi sath hi dhmki bhi di ja rahi hai.

टेप सुनने के लिए नीचे क्लिक करें :

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साधना न्यूज वाले ब्लैकमार्केटियर गुप्ताओं के घरों-आफिसों पर इनकम टैक्स छापे पड़े

साधना न्यूज नामक एक बहुधंधी चैनल से खबर आ रही है कि इसके मालिकों के घरों और आफिसों पर छापे पड़े हैं. इनकम टैक्स की कई टीमों ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक में साधना न्यूज के सभी तीन गुप्ताज मालिकों के यहां छापे डाले हैं. सूत्रों का कहना है कि इनकम टैक्स को नोटबंदी के दिनों में काफी रकम इधर से उधर किए जाने की सूचना मिली थी और इसकी पुष्टि कई संदिग्ध बैंक एकाउंट्स के जरिए हुई.

साथ में यह भी पता चला कि यह समूह कई किस्म के धंधे करके ढेर सारा मुनाफा कमाता है लेकिन रकम को इनकम टैक्स विभाग से छिपाकर बेहद कम टैक्स अदा करता है. बहुत सारी प्रामाणिक सूचनाओं के मिलने के बाद इनकम टैक्स ने कई टीमों का गठन किया. सभी को एक साथ लक्ष्य की तरफ रवाना किया गया. साधना न्यूज के तीन-चार मालिक हैं जो आपस में भाई-भाई हैं, और सभी गुप्ताज हैं. इनके नाम हैं- राकेश गुप्ता, दिनेश गुप्ता और मुकेश गुप्ता. इनके कुछ पुत्र लोग भी विदेश से डिग्री लेकर देश में फर्जीवाड़े के धंधों में लिप्त हैं. साधना न्यूज चैनल के नोएडा स्थित सेक्टर 10 के आफिस में भी आयकर टीम ने छापेमारी की है. बताया जा रहा है कि दिल्ली की इनकम टैक्स की टीमों ने छापा मारा है.

इनके यहां एक साथ छापा पड़ा तो इनके तोते उड़ गए. इन्होंने अपने मीडिया मालिक होने के रसूख का इस्तेमाल करना चाहा लेकिन कोई तरकीब काम नहीं आई. ऐसा लगता है कि इनकम टैक्स की टीमों ने उपर से पहले ही हरी झंडी ले लिया था ताकि बाद में कोई झमेला न हो. शुरुआती जानकारी के मुताबिक साधना न्यूज समूह के यहां अरबों रुपये की ब्लैकमनी पता चली है जिसका विभिन्न नामी-बेनामी संपत्ति में इस्तेमाल किया गया है. आयकर अधिकारी फिलहाल सारी जानकारी नोट कर रहे हैं और नकद मिले नोटों की गिनती कर रहे हैं.

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चैनल खरीदना है या किराए पर लेना है तो ‘साधना’ वालों से दूर रहिएगा, कई लोग रो रहे हैं

जी हां. कई लोग साधना वालों से चैनल किराए पर लेकर या खरीद कर रो रहे हैं. सूचना और प्रसारण मंत्रालय भी साधना वालों के इस खेल को जानता है लेकिन जाने क्या है कि सब मिल जुल कर चुप्पी साधे हैं और नए लोगों को फंसने फंसाने का खेल जारी है. श्री न्यूज नामक जो चैनल चलता है, वह साधना वालों से खरीदा गया है लेकिन आज तक श्रीन्यूज वाले बतौर डायरेक्टर चैनल के मालिकान के रूप में अपना नाम नहीं दर्ज करवा सके हैं.

इसी तरह साधना प्राइम नामक चैनल को जिन लोगों ने खरीदा है, वो भी अब फंस चुके हैं. इनका भी नाम डायरेक्टर्स की लिस्ट में नहीं चढ़ पा रहा है. इसी तरह कई लोग साधना वालों के चैनल किराए पर लेकर करोड़ों रुपए खर्च कर खून के आंसू बहा चुके हैं. इस पूरे गोरखधंधे के बारे में भड़ास जल्द विस्तार से खुलासा करेगा. यह शुरुआती पोस्ट सिर्फ इसलिए है कि अगर आप भी साधना वालों से किसी तरह से पीड़ित रहे हों तो हमें पूरी कहानी विस्तार से लिख भेजिए. आप अगर अनुरोध करेंगे तो आपका नाम गोपनीय रखा जाएगा.

साधना में काम कर चुके कर्मियों से लेकर साधना के चैनल खरीदने के नाम पर करोड़ों स्वाहा कर चुके उद्यमियों या चैनल किराए पर लेकर धोखाधड़ी के शिकार हो चुके कारोबारियों तक से अनुरोध है कि वह अपनी कहानी खुलकर लिखें ताकि साधना की सच्चाई को सामने लाया जा सके और आगे से कोई दूसरा शख्स इनके जाल में फंसकर करोड़ों अरबों रुपये लुटाकर कंगाल न हो सके. अगर आप साधना से पीड़ित नहीं रहे हैं लेकिन साधना के खेल से पूरी तरह वाकिफ हैं तो भी आप दूसरों को जागरूक करने के वास्ते गोपनीयता की शर्त पर इनकी कारस्तानी लिख भेज सकते हैं. हमारा पता है: bhadas4media@gmail.com


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साधना न्यूज (एमपी-सीजी) के ठग संचालकों से बच कर रहिए, पढ़िए एक पीड़ित स्ट्रिंगर की दास्तान

संपादक
भड़ास4मीडिया
महोदय

मुझसे साधना न्यूज (मध्यप्रदेश छत्तीसगढ) के नाम पर 8 माह पूर्व विनोद राय के निजी खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर कराए गए थे. इस रकम को खुद मैंने अपने खाते से भेजा था. परन्तु साधना न्यूज ने एक माह बाद ही किसी दूसरे को नियुक्त कर दिया. विनोद राय (इन्दौर, डायरेक्टर, साधना न्यूज) से रुपये वापस मांगने पर वे नये नये तरीके से टालते रहते हैं और आज कल करके कई प्रकार के बहाने से मुझे राशि लौटने से इनकार कर रहे हैं. मैं इसके लिए कई बार इन्दौर का चक्कर काट चुका हूं.

इस विषय में आदित्य तिवारी और एमके तिवारी को सूचित कर चुका हूं जो कि लोकायत पत्रिका एवं साधना न्यूज़ मध्य प्रदेश छत्तीसग़ढ के संचालक हैं. परन्तु मुझे राशि नहीं लौटाई जा रही है. मेरे द्वारा मोबाइल से फोन किए जाने पर फोन नहीं उठाया जाता और अब मेरा नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया है. इसके पहले शिवराज सिंह के भोपाल कार्यक्रम के लिए मैंने 80 हजार रुपये साधना न्यूज में दिया था, वह भी मैंने विज्ञापनदाता को वापस किया था, उसका भी कुछ निर्णय नहीं हो रहा.

विनोद राय के कहे अनुसार मैंने किसी को चेक दे दिया था परन्तु अब मेरे उपर वह व्यापारी चेक बाउन्स का केस कर देगा. बडी मुश्किल से शुक्रवार को विनोद राय से मेरी बात हुई थी  जिसमें उन्होंने सोमवार को राशि डालने का वादा किया था परन्तु आज भी समय निकल गया है. फोन नम्बर रिजेक्शन लिस्ट में डाल दिया है. मेरे पास तमाम सबूत हैं जिसके सहारे मैं इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने जा रहा हू. साथ ही पूरे मामले की जानकारी मीडिया जगत को भड़ास4मीडिया के माध्यम से देने जा रहा हूं.

धन्यवाद
आपका
राजेंद्र अग्रवाल
छिन्दवाडा, मध्य प्रदेश
मोबाइल नंबर : 9479906598, 810972555 , मेल : raj.agrawal011@gmail.com


ठगी का सुबूत यह आडियो है जिसमें विनोद राय पैसे लौटाने की बात तो करता है लेकिन लौटाता नहीं है… इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करके सुनिए… https://www.youtube.com/watch?v=BoTbx28diNg

ये हैं कुछ चैट जिससे साफ पता चलता है कि विनोद राय पैसे हड़पने का आरोपी है और पैसे लौटाने से इनकार कर रहा है….

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साधना न्यूज में 20,000 पाने वाले कर्मी के खाते में आते हैं 20 लाख रुपये!

यदि किसी 20,000 रुपए का वेतन पाने वाले पत्रकार के खाते में लगातार 20 लाख की राशि नियमित रूप से जमा होती रहे, वह भी प्रबंधन की तरफ से, तो आप समझ सकते हैं, उस पत्रकार की क्या हालत होगी। उस पर तुर्रा यह कि वह उस रकम की सूचना अपने मोबाइल पर देखकर खुश तो हो सकता है, लेकिन उसे निकाल नहीं सकता। यह कारनामा किया है साधना न्यूज के प्रबंधन ने, जो कि पहले भी कई तरह के कारनामों के लिए कुख्यात रहा है। न जाने कितने लाइसेंस कबाड़ कर रखे हैं, जाने कितने चैनल उनके लाइसेंस पर चल रहे हैं, या चल रहे थे, इसकी जानकारी केवल प्रबंधन को ही है। चाहे न्यूज, मनोरंजन, धर्म, सभी तरह के अनेकों लाइसेंस इनके पास हैं।

साधना न्यूज में कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के न केवल एकाउंट नंबर का विवरण लिया गया बल्कि उनसे ब्लैंक चेक भी रखवा लिए गए। ये एकाउंट मुकेश, प्रकाश (साधना से हटाए जाने के पश्चात एकाउंट में अब धन नहीं आता) आदि के नाम बताए जाते हैं। हालांकि कुछ कर्मचारियों ने विरोध किया, लेकिन नौकरी बचाने के लिए फिर शरणागत हो गए।  इनके खातों में डिमेट एकाउंट की सुविधा लेकर नियमित लाखों रुपए जाना करवाए जाते हैं, जो कि कुछ दिन, या घंटों के बाद ही शेयर बाजार में डाल दिए जाते हैं। ये कर्मी, इस धन को निकाल नहीं सकते, केवल एसएमएस पर संदेश देखकर खुश हो सकते हैं क्योंकि धन सेविंग में नहीं डिमेट खाते में जमा होता है।

यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। अब तक कितना पैसा शेयर बाजार में डाला गया है, इसका कोई हिसाब नहीं है। अब इन कर्मचारियों में भय है कि यदि कभी कोई सरकारी एजेंसी इस मुद्दे पर सक्रिय हुई, तो उनकी गर्दन भी नपेगी। साधना न्यूज के नोएडा स्थित दफ्तर पर पहले भी कुछ सरकारी एजेंसियों का छापा पड़ चुका है।

एक पत्रकार की चिट्ठी पर आधारित खबर।

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साधना न्यूज पर रात 11 बजते ही शुरू हो जाता है सेक्स रोग, सेक्स और दवा के नाम पर भद्दा मार्केटिंग खेल।

रांची : साधना न्यूज की हालत इन दिनों बड़ी अजीब हो गई है। बिहार- झारखंड को बेस्ड करके यह चैनल जिस तरीके से शुरू हुआ था, उसने अपने खबरों के माध्यम से हलचल मचा दी थी। तभी इसके टीआरपी भी बढ़े थे। अच्छे समाचार और समाचारों के प्रति ईमानदारी से लगे इसके पत्रकार ने अपने बलबूते कई खबरों को ब्रेक कराया। चैनल हिट होने लगा तो पत्रकारों का ग्रुप मालिक और चैनल को फायदा दिलाने की बजाए खुद मुद्रा मोचन और डील में लग गए। इसका अहसास होते ही चैनल संचालक ने पत्रकारों को भी झटका देना, जो शुरू किया, वह भी जारी है।

चैनल को अपने तौर- तरीकों से चलाना, किसी को हटाना तो किसी को लाना, यह सारा कुछ चल रहा है। हाल यह हो गया है कि चैनल पर अब दर्शकों को बेशर्मी भरे विज्ञापन भी देखने को मिल रहे हैं। रात ग्यारह बजे शुरू होते ही यह चालू हो जाता है। सेक्स रोग, सेक्स और दवा के नाम पर भद्दा मार्केटिंग का खेल। समाचार पर ध्यान हटने से पत्रकार किसी को हटाना तो चैनल को चैनल शुरू करनेवाले उद्यमी को इससे मतलब कहां। इसके पत्रकार अब समझ नहीं पा रहे हैं कि वे किसी न्यूज चैनल के पत्रकार हैं।

एक तरह से मालिक के अजीबोगरीब निर्णय से भले चैनल का रेवेन्यू जेनरेट हो रहा हो, पर साधना न्यूज उसमें कहीं खो चुका है और विभिन्न जिला मुख्यालयों के इसके पत्रकार अब बेरोजगर हो गए हैं। चैनल के स्टेट दफ्तर का हाल यह है कि वहां कब कौन प्रभारी बना दिया जाएगा, वाली स्थिति आ गयी है। हरियाणा के चुनाव हुए, तो बिहार-झारखंड का यह चैनल, पैसे के लिए साधना हरियाणा बना दिया गया। वहां बहाली की गयी, काम लिया माल बनाया और अब पैकअप। कर्मचारियों की छुट्टी करके पूरा फोकस झारखंड चुनाव पर। एकबार फिर झारखंड के अपने रिपोर्टरों को सक्रिय होने को कह दिया गया है। उनके माध्यम से प्रत्याशियों से वसूलने की तैयारी है। झारखंड का रांची ब्यूरो दफ्तर को नए वायदों के साथ दुरूस्त कर दिया गया है। (साभार- मीडिया फॉर झारखंड डाट काम)

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चुनाव ख़त्म तो काम और धंधा ख़त्म, तैयारी साधना-हरियाणा न्यूज़ चैनल को बंद करने की

न्यूज़ चैनल मालिकों के लिए ये कोई नइ बात नहीं है। मन आया तो कभी भी न्यूज़ चैनल खोल लिया और जब मन हुआ चैनल बंद करके कर्मचारियों को रस्ते पर ला कर खड़ा कर दिया। जब साधना को जरुरत थी साधना-हरियाणा की तो साधना-बिहार बंद कर के रिपोर्टर्स को रस्ते पर ला खड़ा किया। और अब जब जरुरत पूरी हो गइ तो साधना-हरियाणा को भी इलेक्शन के बाद बंद करने की तयारी चल रही है। बेचारे रिपोर्टर और चैनल के सारे लोग फिर रस्ते पर आ जाएंगे। मालिको ने चैनल में काम करने वाले लोगो का मजाक बना कर रख दिया है।

साधना-हरियाणा के एक अधिकारी का अपने खास लोगों से कहना है कि हमारा कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ इलेक्शन तक के लिए था। इलेक्शन के बाद चैनल बंद करना ही पड़ेगा और हमने जो वर्कर साधना-बिहार से लिया था हम उन्हें वापस कर देंगे। कोई पूछे, जब साधना-बिहार चैनल है ही नहीं, चैनल बंद हो चुका है तो साधना वाले अपने पुराने वर्कर को वापस ले कर क्या करेंगे। बात यहीं पर अटकी हुइ है।  20 अक्टूबर से चैनल ऑफ एयर होने के बात चल रही है। इधर सारे वर्कर्स का ऑफ कैंसल कर दिया गया है और कहा गया है के इलेक्शन के बाद सब को ऑफ दे दिया जायेगा।

भाई साहब इलेक्शन के बाद चैनल ही नहीं रहेगा तो ऑफ किस बात का?

भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित।

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