द टेलीग्राफ में छपी ये खबर- ‘जेटली चुप, टीवी चैनल बचाव में’

Sanjaya Kumar Singh गोदी मीडिया जेटली के बचाव में कूदा… अरुण जेटली-विजय माल्या विवाद में टीवी चैनलों (और अखबारों और सोशल मीडिया पर भक्त पत्रकारों) ने जेटली का बचाव शुरू कर दिया है। माल्या के आरोपों के बाद एक तरफ जेटली ने उनसे मिलना स्वीकार कर लिया दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद पीएल पूनिया ने कहा …

माल्या और जेटली : टेलीग्राफ के दो शब्दों के शीर्षक “द जेटलैग” का जवाब नहीं…

Sanjaya Kumar Singh  हिन्दी के सारे अखबार पढ़ जाइए और अंग्रेजी में एक टेलीग्राफ… टेलीग्राफ से आपको सूचना ज्यादा मिलेगी… शीर्षक से लेकर तस्वीर तक अनूठी होगी… कल भी पहली खबर आई कि माल्या ने भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री से मुलाकात की थी… अरुण जेटली ने मुलाकात स्वीकार तो की पर कहा मैंने …

किसी पीएम के लिए ऐसी हेडिंग किसी अखबार में नहीं छपी होगी, देखें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़बोलापन अब उन पर भारी पड़ने लगा है. नोटबंदी के दिनों में बोल गए थे कि अगर वो गलत करेंगे तो चौराहे पर लाकर जिंदा जला दिया जाए. कुछ इसी टाइप उनकी टिप्पणी थी. तब भक्तों और गोदी मीडिया ने जमकर इसे हाईलाइट किया था और मोदीजी की नीयत को सही …

मैं कोलकाता के The Telegraph का फैन हूं… काश, हिन्दी में कोई ऐसा अखबार होता!

Sanjaya Kumar Singh : ऐसे कितने दिन और किसलिए चलेंगे ये अखबार? मैं कोलकाता के अंग्रेजी दैनिक दि टेलीग्राफ का फैन हूं। शुरू से। भाजपा सांसद एमजे अकबर इसके संस्थापक संपादक हैं और मैं स्थापना के समय से पढ़ रहा हूं। वो कांग्रेस होते हुए भाजपा में पहुंचे हैं। दिल्ली आने के बाद यह अखबार …

स्मृति ईरानी के बारे में अंग्रेज़ी अखबार The Telegraph में प्रकाशित संपादकीय का हिंदी अनुवाद पढ़िए

Vishwa Deepak : मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के बारे में अंग्रेज़ी अखबार The Telegraph में प्रकाशित संपादकीय का हिंदी अनुवाद –

(आपको) लंबी कहानियों से क्या शिक्षा मिलती है?

(मशहूर अंग्रेजी नाटककार) ऑस्कर वाइल्ड को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है. घटने के बजाय झूठ बोलने की कला आज अपने चरम पर है. कम से कम भारतीय संसद में तो है ही. यहां नेता सचाई के लिए नहीं जाने जाते लेकिन केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने जब सांसदों को ‘राष्ट्रवाद’ का पाठ पढ़ाया तो खुल्मखुल्ला झूठ का ऐसा मानक तैयार कर दिया जिससे आपको ईर्ष्या हो सकती है.

सेल्फीमार पत्रकारों को आज के टेलीग्राफ अखबार का पहला पन्ना जरूर पढ़ना चाहिए

Sanjaya Kumar Singh : मेरा पसंदीदा अखबार। इसी को पढ़कर पत्रकारिता का चस्का लगा था और जब इसमें अपनी रिपोर्ट छप गई तो लगा अंग्रेजी में भी छप गया। उस समय सभी पत्रिकाओं में कम से कम एक रिपोर्ट छपवा लेने का रिकार्ड बना रहा था। बाद में प्रभाष जी को बताया कि टेलीग्राफ में भी छप चुका हूं तो उन्होंने कहा कि उसकी अंग्रेजी तो हिन्दी जैसी ही (आसान) है। तब समझ में आया था कि घर में स्टेट्समैन आने के बावजूद मुझे टेलीग्राफ क्यों अच्छा लगता था। पर अब भी अच्छा लग रहा है तो उसका कारण कुछ और है। इसके संस्थापक संपादक कांग्रेस से होते हुए भाजपा में पहुंच गए हैं पर अखबार के तेवर लगभग वैसे ही है। सेल्फी पत्रकारों के इस दौर में भी।