केंद्रीय मंत्री का घटिया बयान और गुलाम मीडिया की चुप्पी

बेंगलुरु में केंद्रीय सरकार में कौशल विकास राज्यमंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने भारत के संविधान की धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे बेहद घटिया और असंवैधानिक टिप्पणी की है। इसे गुलाम मीडिया द्वारा मात्र विवादास्पद बयान बताकर मंत्री को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। राज्यमंत्री हेगड़े ने कहा कि ”धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील होने का दावा वे लोग करते हैं, जिन्हें अपने मां-बाप के खून का पता नहीं होता। लोगों को अपनी पहचान सेक्युलर के बजाय धर्म और जाति के आधार पर बतानी चाहिए। हम संविधान में संशोधन कर सेक्युलर शब्द हटा सकते हैं।”

रवीश कुमार ने पूछा- मीडिया क्यों सरकार से दलाली खा रहा है?

Ravish Kumar : नागरिक निहत्था होता जा रहा है…. राजस्थान के डॉक्टरों की हड़ताल की ख़बर पर देर से नज़र पड़ी। सरकार ने वादा पूरा नहीं किया है।हमने प्रयास भी किया कि किसी तरह से प्राइम टाइम का हिस्सा बना सकें। मगर हम सब ख़ुद ही अपने साथियों से बिछड़ने की उदासी से घिरे हुए थे। हर दूसरे दिन संसाधन कम होते जा रहे हैं। हम कम तो हुए ही हैं, ख़ाली भी हो गए हैं। साथियों को जाते देखना आसान नहीं था। वर्ना डॉक्टरों को इनबाक्स और व्हाट्स अप में इतने संदेश भेजने की ज़रूरत नहीं होती। आगरा से आलू किसान और दुग्ध उत्पादक भी इसी तरह परेशान हैं। दूध का दाम गिर गया है और आलू का मूल्य शून्य हो गया है। इन ख़बरों को न कर पाना गहरे अफसोस से भर देता है। कोई इंदौर से लगातार फोन कर रहा है।

बड़े मीडिया हाउसों के पास है बड़े कारपोरेट घरानों का निवेश और सरकार का समर्थन : सिद्धार्थ वरदराजन

DUJ SEMINAR ON ‘DEMOCRACY IN DANGER : UNETHICAL REPORTING / ATTACKS ON INDEPENDENT JOURNALISM AND JOURNALISTS’

In a sharp counter to the BJP Sangh Parivar’s campaign, Kerala Chief Minister Pinarayi Vijayan said the state has been targeted as it champions the values of secularism, socialism and democracy. He was speaking at a function organized by the Delhi Union of Journalists in the national capital on ‘Democracy in Danger : Unethical Reporting/ Attacks on Independent Journalism and Journalists’ on 15 October at Kerala House. The Chief Minister said slogans like ‘Love Jehad’ have been used to disrupt the state’s centuries old communal harmony but the RSS will not succeed in its game plan. He slammed several media houses for ferociously targeting Kerala and congratulated those journalists who are standing up for the truth despite pressure from employers.

हे टीवी संपादकों, तुम लोग ही इन हरामी बाबाओं को प्रमोट करते हो… प्रसाद में थप्पड़ मिला तो हल्ला क्यों?

Shaitan Singh Bishnoi : कल ये देख के मुझे बेहद ताज्जुब हुआ कि ओबी वैन जलाने पर और मीडिया कर्मियों की पिटाई पर प्रलाप मचा कर गुरमीत सिंह को फर्जी बाबा घोषित कर उन्हें अन्धविश्वास फैलाने का आरोपी ठहराने वाला एक चैनल मात्र आधे घण्टे के बाद “समुद्र में मायावी मंदिर” नामक कवर स्टोरी दिखा रहा था।

बाबा की गुफा से आ रहे पैसों से अब तक मीडिया की आंख पर पट्टी बंधी हुई थी!

..पत्रकार कर रहे दो जून की रोटी का संघर्ष… लेकिन उनका दर्द किसी को नहीं दिख रहा… अगर न्यूज चैनलों के नाम ‘आया राम‘ और ‘गया राम‘ हो जाये और इनकी टैग लाइन भ्रष्टाचार, अनियमितता, ‘ब्लैक मेलिंग के बादशाह‘ या फिर ‘लूटने के लिए ही बैठे हैं’…. हो जाये तो आश्चर्य मत कीजियेगा… क्योंकि न्यूज़ चैनल इस रूप में सामने आने भी लगे हैं.. वो भी बिल्कुल कम कपड़ों के साथ, जिसमें उसका काला तन साफ नजर आ रहा है… कोई चैनल बीजेपी समर्थित तो कोई कांग्रेस, तो कोई बाबाओं की चरणों की धूल खाकर जिंदा है। सभी चैनल लगभग अपने उद्योगपति आकावों की जी हुजरी में लगे हैं।

दो मीडिया हाउसों के एचआर की कहानी- ”किसी की पैरवी है आपके पास?”

Hi all,

Although I didn’t want to share with you but now I feel it is must to share that how people from Hr Department waste job seeker candidates time. I guess they believe that they are equal to God and all job seekers are beggars.

मीडिया से सावधान रहने का वक्त आ गया है!

Dinesh Choudhary : कथित पत्रकारों के साथ लालू यादव की क्या झड़प हुई है, मुझे नहीं मालूम। लालू बहुत डिप्लोमेटिक हैं और प्रेस से भागते भी नहीं। भागने वाले तो 3 साल से भाग रहे हैं। लालू मुलायम की तरह ढुलमुल भी नहीं रहे और उनका स्टैंड हमेशा बहुत साफ़ रहा। पर थोड़ी बात आज की पत्रकारिता पर करनी है, जो बहुत थोड़ी बची हुई है।

छत्तीसगढ़ में ‘देशबंधु’ के अलावा बाकी सभी अखबार हुए नपुंसक, सरकार विरोधी विज्ञापन छापने से किया इनकार, कांग्रेस ने की शिकायत

मीडिया वाले खुद भक्ति में इतने ली हो गए हैं कि उन्हें यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि वे कितने पतित होंगे. छत्तीसगढ़ में अखबार वालों ने कांग्रेस के उस विज्ञापन को ही छापने से मना कर दिया जिसमें भाजपा सरकार के शासनकाल को लेकर सवाल उठाए गए थे. सिर्फ देशबंधु अखबार ने विज्ञापन छापा. बाकी सभी अखबार नपुसंक साबित हो गए. इस प्रकरण से ये भी पता चलता है कि भाजपा सरकारें किस तरह मीडिया का मुंह बंद करते हुए गला दबाए रहती हैं. छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर अखबारों की इस भक्तिपूर्ण हरकत की शिकायत की है.

बाबा रामदेव द्वारा सेना को घटिया आंवला जूस सप्लाई करने की खबर को न्यूज चैनलों ने दबा दिया

पतंजलि और बाबा रामदेव के अरबों-खरबों के विज्ञापन तले दबे मीडिया हाउसेज ने एक बड़ी खबर को दबा दिया. भारतीय सेना ने बाबा रामदेव द्वारा सप्लाई किए जा रहे आंवला को घटिया पाया है और इसकी बिक्री पर फौरन रोक लगा दी है. यह खबर दो दिन पुरानी है लेकिन इस मुद्दे पर किसी न्यूज चैनल में कोई चीखमचिल्ली नहीं है. सब बड़े आराम से चूं चूं के मुरब्बा की तरह इस बड़ी खबर को पी गए और देश को बांटने वाले विषयों पर हो-हल्ला जारी रखे हुए हैं.

पेशेवर लठैत बन चुका है मीडिया

बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि अंग्रेज तो चले गए लेकिन चाय छोड़ गये। इसी तरह सामंतवाद समाप्त हो गया लेकिन लठैत छोड़ गया है। ये लठैत अपने सामंत के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे। आज भी लठैत हैं। बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि, मीडिया से बड़ा लठैत कौन है। हालांकि तब (1988 के आस पास) मुझे भी खराब लगता था। अब भी खराब लगता है जब मीडिया को बिकाऊ, बाजारू या दलाल कहा जाता है। माना कि देश की आजादी में मीडिया का योगदान सबसे अधिक नहीं तो सबसे कम भी नहीं था। तब अखबार से जुड़ने का मतलब आजादी की लड़ाई से जुड़ना होता था। अब देश आजाद है। मीडिया की भूमिका भी बदल गई। पहले मिशन था अब व्यवसाय हो गया है। पहले साहित्यकार व समाजसेवक अखबार निकालते थे अब बिल्डर और शराब व्यवसायी (भी) अखबार निकाल रहे हैं।