स्वर्गीय पत्रकार विनोद मिश्रा के पत्नी-बच्चों को मदद की तुरंत जरूरत

हिंदुस्तान गाजीपुर के ब्यूरो चीफ विनोद मिश्रा के कैंसर से निधन के बाद उनके पत्नी-बच्चों पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है.  इन्हें अभी तक किसी किस्म की कोई मदद नहीं मिल पाई है. फिलहाल विनोद जी की पत्नी निधि मिश्रा अपने तीनों बच्चे के साथ कानपुर से गाजीपुर पहुंच गई हैं और अपने पहले वाले किराए के मकान में रह रही हैं. इसकी एक बड़ी वजह बच्चों की पढ़ाई है. उनका अभी एक्जाम वगैरह होना बाकी है. कुछ शुभचिंतक कोशिश में हैं कि निधि मिश्रा की कहीं नौकरी का इंतजाम हो जाए. साथ ही बच्चों की आगे की पढ़ाई का फ्री में इंतजाम कराया जाए.

जब तक ऐसा नहीं हो पाता, निधि जी जीवन यापन के लिए अपने करीबियों और पत्रकार समुदाय पर ही निर्भर हैं. निधि के एकाउंट में हर महीने कुछ पैसे भेजे जाने की जरूरत है ताकि खर्च चलता रहे. अगर आप अगले कुछ महीनों तक न्यूनतम सौ रुपये भी निधि के एकाउंट में भेज पाते हैं तो आप एक मुश्किल में पड़े परिवार की तत्काल मदद कर सकेंगे. निधि मिश्रा के एकाउंट का डिटेल ये है–

Nidhi Mishra
STATE BANK OF INDIA
A/c 37556700904
Branch : GT ROAD KANPUR
IFSC Code SBIN 0001782

भड़ास एडिटर यशवंत की एफबी वॉल से.

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जौनपुर के फोटोजर्नलिस्ट अनिल विश्वकर्मा को हुआ कैंसर, मदद की अपील

अनिल विश्वकर्मा
साथियों, तरुणमित्र अखबार के जौनपुर के फ़ोटो ग्राफ़र अनिल विश्वकर्मा कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी के ईलाज के लिये आज मुम्बई के लिये रवाना हो गये. उनकी अभी कच्ची गृहस्थी है. पत्नी व तीन बेटियों का भरा पूरा परिवार है. ईलाज के साथ साथ परिवार के भरण पोषण की भी जिम्मेदारी अनिल जी के ही कन्धों पर है. उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. हमेशा मुस्कुराने वाले अनिल जी कर्मठ, ईमानदार एवं व्यवहार कुशल रहे हैंं. इस संकट की घड़ी में उन्हें आप सभी के सहयोग और आशीर्वाद की आवश्यकता है. उन्हें ईलाज के लिये काफ़ी पैसों की जरूरत है. कल से आज सुबह तक कई संस्थाओं के लोगों ने उनके घर पर पहुंचकर मदद के साथ साथ सान्त्वना भी दिया. ईश्वर की कृपा व आशीर्वाद वे शीघ्र ही स्वस्थ होकर हम लोगों के बीच वापस आयेंगे. आप सभी से भी अनुरोध है कि अपने सामर्थ्य के अनुसार अनिल जी की पुत्री प्रीती विश्वकर्मा के बैंक एकाउंट में सहायता राशि जमा करके सहयोग करने की कृपा करें! बैंक खाते का विवरण 
 
PRITI  VISHWKARMA 
यूनियन बैंक आफ़ इंडिया 
शाखा –  जौनपुर मुख्य शाखा 
खाता संख्या -303302010861901 
IFSC -UBIN0530336
 
पत्रकार राजकुमार सिंह की फेसबुक वॉल से.

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एम्स दिल्ली में एडमिट झारखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार फैसल अनुराग को मानसिक और आर्थिक मदद की जरूरत

झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार फैसल अनुराग

झारखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार फैसल अनुराग जी, दिल्ली के एम्स अस्पताल में किडनी रोग से पीड़ित अपने इलाज के लिए अकेले ज़िन्दगी की जंग लड़ रहे है। ये जानकारी मुझे संतोष मानव जी (पूर्व संपादक – हरिभूम एवं दैनिक भास्कर) के फेसबुक वाल से प्राप्त हुई। संतोष सर के द्वारा ये जानकारी पोस्ट करने के बाद हालाँकि कुछ ही देर बाद में देश के कई मीडियाकर्मियों तक पहुँच गयी लेकिन फिर भी शायद अभी तक यह खबर सही रूप से मीडियाकर्मियों उनके आन्दोलन के दिनों के साथियों तक नहीं पहुँच पाई है।

फैसल जी को  इस समय जहां अपने इलाज के लिए आर्थिक सहायता की ज़रूरत है। वहीं हजारों की भीड़ को संबोधित करने वाले क्रन्तिकारी कलमकार आज स्वयं को अकेला महसूस कर रहे हैं।  फैसल जी को जानने वाले जानते हैं कि उन्होंने हमेशा आदिवासी एवं अल्पसंख्यकों की आवाज़ को अपनी कलम के ज़रिये बल दिया है। आज उन्हें अपने नए पुराने साथियों की ज़रूरत है।  उनका मोबाइल नंबर यहाँ नीचे दे रहा हूं। अगर संभव हो सके तो एक बार उनसे संपर्क ज़रूर कीजिये। साथ ही एक तस्वीर में उनके बैंक अकाउंट की डिटेल भी है। कुछ बन सके तो ज़रूर मदद कीजिए। 

फैसल अनुराग जी का मोबाइल नंबर- 9431171442

नीचे वो पोस्ट भी जस की तस कॉपी पेस्ट कर रहा हूँ जो संतोष सर ने अपने फेसबुक वाल पर कल लिखी थी। साथ ही रांची के एक अन्य पत्रकार आलोक के द्वारा लिखी मार्मिक पोस्ट भी जस की तस हीं कॉपी पेस्ट कर रहा हूँ  

संतोष मानव : Sri रघुवर दास ; Sri CPSingh ; Sri सरयू राय Sri Arjun Munda Sri हेमंत सोरेन ; Sri सुबोधकांत सहाय और झारखंड के तमाम मंतरी-संतरी ; नेता -अभिनेता। मीडिया के लोग। ढाई करोड़ जनता जनारदन। Sri फैसल अनुराग झारखंड की शान हैं। मेहनतकशों की आवाज हैं। सौ फीसदी सच्चे और अच्छे कलमकार हैं। मैंने अब तक के जीवन में ऐसे सच्चे लोग कम देखे हैं। वे एम्स दिल्ली में एडमिट हैं। जीवन के लिए लड़ रहे हैं। इस लड़ाई में उनको जीतना ही चाहिए। यह हम सब की जिम्मेदारी हैं। देखिए कौन क्या कर सकता है? फैसल जी सचेत हैं। उन्हें लग रहा है कि वे भरी दुनिया में अकेले हैं। यह सोच हमारे लिए ठीक नहीं है। आप सभी कम से कम फोन करके कहिये कि आप उनके साथ हैं। आप उनसे नहीं मिलें, तब भी कहिए कि आप अकेले नहीं है। यह भी असरकारी दवा होगी उनके लिए। 

आलोक रांची : फैसल जी को डर है कि लोग उन्हें छोड़ कर चले गये हैं. वो बार बार ये बात कह रहे हैं. ये सब कुछ उनके मानसिक पटल पर समा गया है. मैं फैसल जी के सभी साथियों, आंदोलनकारी, क्रांतिकारी, बुद्धिजीवी, पुराने पत्रकार साथी सामाजिक संगठन, राजनीतिक दोस्त, जेपी आन्दोलन के साथियों से विशेष आग्रह कर रही हूँ  कि आप उनसे सम्पर्क करें और आंदोलनों के बारे में बाते करें. यही उनका इलाज है. उनसे खूब बात करें, मैसेज करें, ताकि वो अपने संतुलन में आ सके.

लेखक विकास से संपर्क vikash.makkar@yahoo.com या 9818868890 के जरिए किया जा सकता है.

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कैंसर पीड़ित देवघर के वरिष्ठ पत्रकार आलोक संतोषी को मदद की जरूरत

झारखण्ड के देवघर जिला के एक वरिष्ठ पत्रकार आलोक संतोषी गंभीर रूप से बीमार हैं। कैंसर से पीड़ित हैं। साल भर पहले पैंक्रियाज कैंसर की सर्जरी हुई थी। उसके बाद रिकवर कर रहे थे। फिर यकायक बीमार ही गए। लखनऊ के पीजीआई में साल भर से ईलाज करा रहे आलोक संतोषी अब टूटने लगे हैं, हारने लगे है। अपनी उदासी और बेबसी को उन्होंने अपने फेसबुक के माध्यम से उकेरा है। साथ ही इस बुरे दौर में पत्रकारों के साथ नहीं देने का दुःख भी प्रकट किया है।

आलोक संतोषी की इस पीड़ा से किसी भी संवेदनशील आदमी की रूह कांप उठेगी। आलोक अपने परिवार के साथ अकेले संघर्ष कर रहे है। कैंसर के दर्द के कांटो के चुभन सिर्फ वो और उनके परिवार को पीड़ा दे रहा है। माहौल बिलकुल निराशाजनक है। देवघर के चंद लोगों ने उनका साथ दिया है, पर पत्रकारों ने उनका हाल पूछने की जहमत तक नहीं उठायी। आलोक की इस पीड़ा से उठे तकलीफ पर उन्हें अकेले छोड़ा नहीं जा सकता है।

आलोक जी हम पत्रकार भड़वे हैं, दलाल हैं, सत्ताधारियों के पिछलग्गू है। हमें आपकी पीड़ा नहीं दिख रही है। हमने अपने इमोशन पर तेजाब डाल लिया है। हमें आपकी परेशानी से क्या? आप ना सांसद हैं, ना विधायक हैं और ना ही कोई धन्नासेठ सो हमें आपकी बीमारी से क्या? आलोक जी, आप तो अख़बार में पूरे पन्ने का विज्ञापन भी नहीं दे सकते और ना ही किसी चैनल का टाइम स्लॉट खरीद सकते हैं। आप तो पत्रकार ठहरे वो भी छोटी जगह के।

आप रांची और दिल्ली के भी तो पत्रकार नहीं हैं जो सत्ता के बैकडोर का फायदा किसी को दिला देंगे। आपकी बीमारी किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया जाने वाला गिफ्ट नहीं है और ना ही किसी अधिकारी द्वारा दिया जाने वाला गिफ्ट, जिसे लेने के लिए हम लोहालोट हुए जायेंगे। रही बात प्रेस क्लब और पत्रकारों के संगठन की तो प्रेस क्लब के नाम पर की जाने वाली वसूली शराबखोरी के लिए होती है। आपको मदद करने से पत्रकार को क्या फायदा? आलोक जी हमें माफ़ कर दीजिए। सत्ता के सुख भोगने के आदी हम पत्रकारों को आपकी पीड़ा नहीं दिख रही है। आलोक जी आप तो बहादुर हैं, अकेले इस पीड़ा से लड़ रहे हैं। भगवान से प्रार्थना है कि आप जल्द स्वस्थ होकर वापस लौटें ताकि हम अपनी सच्चाई को देख सकें।

अगर आप में से कोई आलोक संतोषी से, जो अभी पीजीआई लखनऊ में जीवन से संघर्ष कर रहे है, बात करना चाहते हैं या किसी प्रकार की मदद पहुंचाना चाहते हैं तो उनसे उनके मोबाइल नंबर +919431157961 पर सीधे संपर्क कर सकते हैं.

आपका भाई
अनंत झा
पत्रकार
anantkumarjha@gmail.com

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