गलत वकालतनामा लगाने पर एमजे अकबर की लॉ फर्म को लीगल नोटिस

पूर्व केन्द्रीय मंत्री एम जे अकबर द्वारा दिल्ली के पटियाला हाई कोर्ट में दायर मानहानि के मुकदमे में खुद उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. 27 अक्टूबर को दिल्ली बार कौंसिल ने उनके वकील को नोटिस जारी करते हुए गलत वकालतनामे के लिए दो सप्ताह में जवाब माँगा है. गौरतलब है कि पूर्व विदेश मंत्री …

एमजे अकबर को आखिरकार इस्तीफा देना ही पड़ा

तो आखिरकार ‘मी टू’ के विवाद में घिरे विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर का इस्तीफा हो गया। अदालत में 97 वकीलों से लैश होकर मुकदमे की धौंस काम नहीं आ सकी। हालांकि वह अपनी बेगुनाही के दावे पर कायम है जिसका फैसला अब अदालत में ही होगा।  कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद …

चड्ढी पहने खड़ा था अकबर, जबरन जकड़ कर चूम लिया!

पत्रकार तुशिता पटेल बोलीं- तुझसे अदालत में भी निपट लेंगे अकबर! प्रिया रमानी ने लिखा है कि अकबर ने कुछ “किया” नहीं। इसी आधार पर अकबर कह रहे हैं कि कुछ किया नहीं तो यह सब (मीटू) काहे का। अवमानना हो गई। प्रिया रमानी के खिलाफ अदालत में अवमानना का मामला दाखिल किए जाने से …

विशेष संपादकीय : अब तुम्हें घर तो कोई नहीं बुलाएगा अकबर…

Hemant Sharma तो वही हुआ जिसकी आशंका जताई जा रही थी। एक के बाद एक चौदह महिलाओं द्वारा मोबाशर जावेद अकबर (एमजे अकबर) पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाए जाने के बावजूद देश के कई प्रतिष्ठित अखबारों का संपादक रहा यह व्यक्ति भारत सरकार के विदेश राज्यमंत्री के पद पर काबिज़ रहेगा। इन महिलाओं में …

‘गोदी मीडिया’ छाप अखबारों ने अकबर के बचाव में लिखना जारी रखा, देखें आज का कवरेज

मोदी सरकार के लिए छवि निर्माण और ‘ब्रांडिंग’ में हिन्दी अखबारों की भूमिका… मीटू अभियान के तहत लगाए जाने वाले आरोपों पर कई दिनों तक चुप रहने वाले हिन्दी अखबारों ने विदेश मंत्री एमजे अकबर के स्वदेश लौटने पर उनके बचाव और उनकी कार्रवाइयों को प्रमुखता से छापना शुरू कर दिया है। कल अदालत जाने …

अकबर असल में अवमानना कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं!

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री का खंडन पढ़ रहा था और यह समझने की कोशिश कर रहा हूं कि 97 वकीलों की लॉ-फर्म की ताकत एक महिला पर क्यों? या बाकी पर क्यों नहीं? हिन्दी अखबारों में छपा नहीं और शिकायत अंग्रेजी में है तो शायद आपने पढ़ा न हो या ध्यान नहीं दिया हो – …

97 वकील लेकर कोर्ट पहुंचे अकबर ने मानहानि का मुकदमा उस लॉ फ़र्म से कराया जो ख़ुद metoo आरोपी है!

Samar Anarya : विडंबना: 11 स्त्रियों द्वारा यौन हिंसा के आरोपी मोदी के छुटभैये मंत्री एम जे अकबर ने बस एक के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मामला दाखिल किया- प्रिया रमानी के जो पहली थीं। बड़ी विडंबना: यह उसने उस राजन करंजवाला की लॉ फ़र्म द्वारा किया जो ख़ुद मी टू में फँसा है! कृपया …

ये है मोदी राज : आरोपी अकबर लड़ेगा ‘Metoo महिलाओं’ से युद्ध!

लगता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर को खुल्ला छोड़ दिया है. इससे उत्साहित एमजे अकबर ने आरोप लगाने वाली पत्रकार प्रिया रमानी पर मानहानि का केस करर दिया है. अकबर ने अपने वकील कंजरवाला एंड कंपनी के माध्यम से दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में रमाणी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा …

अकबर पर लगे आरोप न बताने वाले अखबारों ने उनका जवाब छाप ‘गोदी मीडिया’ का धर्म निभाया

केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर के खिलाफ आरोप नहीं छापने वाले हिन्दी अखबारों ने आज उनका जवाब पूरे विस्तार से और पूरी प्रमुखता से छापा है। नवभारत टाइम्स में आज पहला पेज पूरा विज्ञापन है पर मास्टहेड के बगल में ईयर पैनल में अकबर की फोटो के साथ लिखा है, दरबार में बने रहेंगे अकबर, जवाब …

अकबर की लपलपाती जीभ पर एक युवती ने यूं मिर्च पाउडर उड़ेल दिया!

Swatantra Mishra : अकबर की लपलपाती जीभ पर मिर्च पाउडर उड़ेला… सेंट स्टीफंस कॉलेज में ग्रेजुएशन में मेरे साथ पढ़ने वाली एक लड़की जर्नलिज्म में कैरियर बनाना चाहती थी तब वह एशियन ऐज में एम जे अकबर के पास नौकरी के लिए गई. अकबर ने इंटरव्यू के लिए उसे कमरे में बुलाया और दो—एक बातचीत …

सीरियल मालेस्टर को बचा लिया छप्पन इंच सीने वाले ने!

वो कहता है कि छप्पन इंच का सीना है उसका. लेकिन उसकी हरकतें बता रही हैं कि वह अब नंगा हो चुका है. उसके हर झूठ का पर्दाफाश हो चुका है. सीरियल मालेस्टर एमजे अकबर को क्लीन चिट मिल गई है. वह केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा नहीं देगा. एमजे अकबर अब उन महिलाओं से लड़ेगा …

रवीश कुमार ने पूछा- हिंदी अख़बारों और न्यूज चैनलों से ग़ायब क्यों है अकबर पर लगे आरोपों के डिटेल?

Ravish Kumar 14 महिला पत्रकारों ने मुबशिर जावेद अकबर पर संपादक रहते हुए शारीरिक छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं। ये सारे लेख अंग्रेज़ी में लिखे गए हैं और अंग्रेज़ी की वेबसाइट पर आए हैं। हफिंग्टन पोस्ट, मीडियम, दि वायर, वोग, फर्स्टपोस्ट, इंडियन एक्सप्रेस। ग़ज़ाला वहाब, कनिका गहलौत, प्रिया रमानी, प्रेरणा बिंद्रा सिंह, शुमा राहा, प्रेम …

रवीश कुमार ने पूछा- ‘प्रधानमंत्रीजी जवाब दीजिए, एमजे अकबर अभी तक क्यों आपके साथ है?’

Ravish Kumar मेरा अकबर महान ! कारनामा ऐसा कि कायनात शर्मा जाए… सवाल अकबर के इस्तीफ़े का नहीं है। इस्तीफ़ा लेकर कोई महान नहीं बन जाएगा। वो तो होगा ही। मगर जवाब देना पडेगा कि इस अकबर में क्या ख़ूबी थी कि राज्य सभा का सदस्य बनाया, बीजेपी का सदस्य बनाया और मंत्री बनाया। इसके …

एमजे अकबर तो महा ठरकी आदमी निकला, पढ़िए उसके बारे में 7 महिला पत्रकारों का #metoo

मोदी सरकार के विदेश राज्य मंत्री और पूर्व संपादक एमजे अकबर के ठरकीपने के किस्से इन दिनों पूरे देश में गूंज रहे हैं. आधा दर्जन महिला पत्रकारों ने इस महा बदमाश आदमी की हकीकत को उजागर किया है. अब तक 6 महिला पत्रकारों ने #metoo लिखकर पत्रकारिता करने के दौरान एमजे अकबर को सीरियल यौन …

‘टेलीग्राफ’ ने अपने संस्थापक संपादक एमजे अकबर पर यौन शोषण के आरोपों को प्रमुखता से छापा

मीटू का असर मुंबई, मीडिया से मंत्रिमंडल तक… मीटू के तहत केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर पर उंगली उठने के बाद सवाल था कि अंग्रेजी दैनिक दि टेलीग्राफ इस खबर को कैसे पेश करेगा। आम अखबारों की तरह प्रतिकूल खबर को पी जाएगा या एक अच्छे मीडिया संस्थान के रूप में पूरी खबर विस्तार से देगा। …

अरसे बाद कोई पढ़ा-लिखा और समझदार पत्रकार केंद्रीय मंत्रिमंडल में आया है

Dayanand Pandey : अरसे बाद कोई पढ़ा-लिखा और समझदार पत्रकार केंद्रीय मंत्रिमंडल में आया है। नाम है एम जे अकबर। इस के पहले मेरी याद में पढ़े-लिखे पत्रकारों में से केंद्रीय मंत्रिमंडल में कमलापति त्रिपाठी थे। अटल बिहारी वाजपेयी थे। लालकृष्ण आडवाणी थे। अरुण शौरी थे। अटल बिहारी वाजपेयी तो प्रधान मंत्री भी रहे। बीच-बीच में कुछ दलाल पत्रकार भी मंत्री बने हैं। लेकिन उन दलालों का यहां ज़िक्र कर काहे को ज़ायका ख़राब किया जाए।

एक अदद राज्यमंत्री का पद हासिल करने को कोई कितना गिर सकता है, एमजे अकबर इसकी मिसाल हैं

 अनिल जैन

अनिल जैन

दोयम दर्जे का एक अदद राज्यमंत्री का पद हासिल करने के लिए कोई व्यक्ति किस हद तक अपने आत्म सम्मान से समझौता कर सकता है, जाने-माने पत्रकार और संपादक एमजे अकबर इसकी मिसाल हैं। वर्षों तक पत्रकारिता में रहते हुए जो कुछ प्रतिष्ठा और पुण्याई अर्जित की थी वह तो दांव पर लगाई ही, साथ ही जिस शख्स को उन्होंने एक समय कांग्रेस में रहते हुए मौत का सौदागर कहा था, उसी की बल्कि उसके दूसरे कारिंदों की भी चापलूसी करनी पडी।

एमजे अकबर के इस अधोपतन को कैसे देखा जाए

(मुकेश कुमार)


Mukesh Kumar : एक अच्छा खासा पत्रकार और लेखक सिर्फ सत्ता प्रतिष्ठान का अंग बनने के प्रलोभन में किस तरह प्रतिक्रियावादी हो जाता है इसकी मिसाल हैं एमजे अकबर। आज टाइम्स ऑफ इंडिया में उनका लेख इसे साबित करता है। उन्होंने इस्लामी पुनरुत्थानवाद को आटोमन और मुग़ल साम्राज्य से जोड़कर प्रस्तुत किया है, लेकिन कहीं भी ज़िक्र नहीं किया है कि तमाम पुनरूत्थानवादी शक्तियाँ दरअसल ऐसे ही कथित गौरवशाली अतीत को वर्तमान में तब्दील करने की कोशिश करते नफरत और हिंसा का अभियान चलाती हैं।

रजत शर्मा को मोदी सरकार ने दिया दीपावली से पहले ही तोहफा

मोदी सरकार ने देश के पहले प्रधानमंत्री पं0 जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती को सरकारी जयंती मनाने का निर्णय किया है। इसके लिए एक आयोजन समिति का गठन किया है। समिति में इंडिया टीवी के प्रमुख रजत शर्मा को भी शामिल किया गया है। उनका चैनल लोकसभा चुनावों से ही मोदी की खबरें प्रमुखता से दिखा रहा था। उसका ही उनको इनाम दिया गया है। रजत शर्मा द्वारा संचालित इंडिया टीवी को लोग मोदीमय न्यूज चैनल भी कहने लगे थे।