संयुक्त आयुक्त श्रम ने जागरण के मालिक मोहन गुप्त को नोटिस भेजा, शेल कम्पनी ‘कंचन प्रकाशन’ का मुद्दा भी उठा

दैनिक जागरण के एचआर एजीएम विनोद शुक्ला की हुई फजीहत…  पटना : दैनिक जागरण के मालिक महेंद्र मोहन गुप्त को श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त डा. वीरेंद्र कुमार ने नोटिस जारी कर जागरण कर्मियों द्वारा दायर किए गए जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा को लेकर वाद में पक्ष रखने के लिए तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होनी है। वहीं दैनिक जागरण पटना के एजीएम एचआर विनोद शुक्ला के जागरण प्रबंधन के पक्ष में उपस्थिति पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए अधिवक्ता मदन तिवारी ने संबंधित बोर्ड के प्रस्ताव की अधिकृत कागजात की मांग कर एजीएम शुक्ला की बोलती बंद कर दी। दैनिक जागरण के हजारों कर्मियों को अपना कर्मचारी न मानने के दावे एजीएम शुक्ला के दावे की भी श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डा.  वीरेंद्र कुमार के सामने हवा निकल गई।

दैनिक जागरण, गया के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुमार को प्रबंधन ने गया जिले से जम्मू तबादला कर दिया। पंकज कुमार की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा के आलोक में वेतन और अन्य सुविधाओं की मांग की थी। पंकज कुमार गम्भीर रूप से बीमार पिछले साल हुए थे। मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर प्रबंधन इतना खफा हो गया कि 92 दिनों की उपार्जित अवकाश शेष रहने के बाद भी अक्टूबर और नवंबर 2016 के वेतन में 21 दिनों की वेतन कटौती कर दी।

पंकज कुमार ने प्रबंधन के फैसले के खिलाफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय की शरण में न्याय की गुहार लगाई। एरियर का बकाया 32.90 लाख रुपए के भुगतान की मांग की। साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय से गया से जम्मू तबादला को रद्द करने की गुहार लगाई। सर्वोच्च न्यायालय ने पंकज कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में छह महीने का टाइम बांड कर दिया। यानि छह माह में फैसला हो जाना है।  पंकज कुमार सहित दैनिक जागरण के कई कर्मियों के वाद की सुनवाई 5 December को पटना के श्रम संसाधन विभाग के संयुक्त आयुक्त डा.वीरेंद्र कुमार के समक्ष हुई।

पंकज कुमार की तरफ से अधिवक्ता मदन तिवारी ने जागरण की ओर से उपस्थित एजीएम विनोद शुक्ला की उपस्थिति पर सवाल उठाया। अधिवक्ता मदन तिवारी का कहना था कि किस हैसियत से विनोद शुक्ला जागरण के अध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता, सीईओ संजय गुप्ता, सुनील गुप्ता एवं अन्य की ओर से उपस्थिति दर्ज कराई है। एजीएम शुक्ला ने कम्पनी सेक्रेटरी द्वारा प्रदत्त एक पत्र की फोटो कापी दिखाई। फोटो कापी पर विनोद शुक्ला को अधिकृत होने की बात कही गई थी।

इस पर अधिवक्ता मदन तिवारी ने कहा कि कम्पनी द्वारा पारित किसी भी प्रस्ताव की अभिप्रमाणित प्रति जो बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करने वाले चैयरमेन या निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित रहेगी, वही प्रति न्यायालय में कम्पनी द्वारा अधिकृत व्यक्ति के शपथ पत्र के साथ दायर की जानी चाहिए। अधिवक्ता मदन तिवारी ने लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराई। उसके बाद न्यायालय ने विनोद शुक्ला को निर्देश दिया कि वे बोर्ड के प्रस्ताव की अधिकृत प्रति हलफनामा के साथ दायर करें।

अधिवक्ता मदन तिवारी ने श्रम विभाग द्वारा जागरण के अध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता सहित अन्य निदेशकों के स्थान पर प्रबंधन जागरण को नोटिस जारी करने के मामले को उठाया।  संयुक्त आयुक्त डा. वीरेंद्र कुमार ने आपत्ति उठाए जाने पर कहा कि पूर्व में नोटिस जारी की गई थी। लेकिन अब जागरण समूह के अध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता को नोटिस जारी किया गया है।

जागरण के कई कर्मियों ने श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र कुमार को बताया कि एजीएम विनोद शुक्ला को ओर से दायर जवाब में कहा गया है कि गोपेश कुमार एवं अन्य कंचन प्रकाशन के कर्मी हैं…  कंचन प्रकाशन के साथ जागरण प्रकाशन का कांट्रैक्ट प्रिंटिंग के जाब वर्क का है… इसलिए ये सभी दैनिक जागरण के कर्मचारी नहीं है।

अधिवक्ता मदन तिवारी ने संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र कुमार के सामने न्यूज पेपर रजिस्ट्रेशन एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी अखबार एवं पत्रिका को अपने अखबार में अनिवार्य अधिघोषणा में उस प्रेस का नाम पता देना जरूरी है जहां अखबार प्रिन्ट होता है। लेकिन जागरण के किसी भी एडिशन में कंचन प्रकाशन को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई या की जा रही है। ऐसे में न्यूज पेपर रजिस्ट्रेशन एक्ट का उल्लघंन जागरण प्रकाशन कर रहा है। ऐसे में अनिवार्य अधिघोषणा न करने  के नियम का न पालन करने के कारण अखबार का निबंधन भी रद्द हो सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता को तलब किया

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न करने और सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानून, न्याय, संविधान तक की भावनाओं की अनदेखी करने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने आज दैनिक जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन गुप्ता और संजय गुप्ता को अगली सुनवाई पर, जो कि 25 अक्टूबर को होगी, कोर्ट में तलब किया है. आज सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न किए जाने को लेकर सैकड़ों मीडियाकर्मियों द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई हुई.

कोर्ट ने आज के दिन कई प्रदेशों के लेबर कमिश्नरों को बुला रखा था. कोर्ट ने सभी लेबर कमिश्नरों से कहा कि जिन जिन मीडियाकर्मी ने क्लेम लगाया है, उसमें वे लोग रिकवरी लगाएं और संबंधित व्यक्ति को न्याय दिलाएं. कोर्ट के इस आदेश के बाद अब श्रम विभाग का रुख बेहद सख्त होने वाला है क्योंकि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लापरवाही बरतने पर उत्तराखंड के श्रमायुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था.

सैकड़ों मीडियाकर्मियों की याचिका का प्रतिनिधित्व करते हुए एडवोकेट उमेश शर्मा ने आज सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दैनिक जागरण की किसी भी यूनिट में किसी भी व्यक्ति को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से न तो एरियर दिया गया है और न ही सेलरी दी जा रही है.

साथ ही दैनिक भास्कर समूह के बारे में भी विस्तार से बताया गया. आज सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों को कोर्ट में आने के लिए आदेश कर दिया है ताकि उनसे पूछा जा सके कि आखिर वो लोग क्यों नहीं कानून को मानते हैं. चर्चा है कि अगली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भास्कर के मालिकों को तलब कर सकता है. फिलहाल इस सख्त आदेश से मीडियाकर्मियों में खुशी की लहर है.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुंबई के पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह भी मौजूद थे. उन्होंने फोन करके बताया कि आज सुप्रीम कोर्ट ने जो सख्ती दिखाई है उससे वे लोग बहुत प्रसन्न है और उम्मीद करते हैं कि मालिकों की मोटी चर्बी अब पिघलेगी. सैकड़ों मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड से संबंधित अपने हक के लिए गाइड करने वाले पत्रकार शशिकांत सुप्रीम कोर्ट में हुई आज की सुनवाई की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं जिसे जल्द भड़ास पर प्रकाशित किया जाएगा.

अपडेटेड न्यूज (7-10-2016 को दिन में डेढ़ बजे प्रकाशित) ये है….

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दैनिक जागरण के मालिकों ने नरेंद्र मोदी से की मुलाकात, जागरणकर्मियों का चेहरा हुआ उदास

खबर है कि दैनिक जागरण के मालिकों की टीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें पीएम राहत कोष के लिए चार करोड़ रुपये का चेक सौंपा. साथ ही सबने प्रधानमंत्री के साथ फोटो खिंचवाई. दैनिक जागरण के CMD महेंद मोहन गुप्त, प्रधान संपादक और CEO संजय गुप्त समेत कई गुप्ताज और इनके वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत मिश्र तस्वीर में दिख रहे हैं, मुस्कराते. पर निराशा जागरण कर्मियों के चेहरे पर छा गई है.

इस तस्वीर के पीछे की असली खबर ये है कि दैनिक जागरण में कार्यरत पत्रकारों और गैर-पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन दिलाने की मुहिम को झटका लगेगा और सरकारी अफसर डर के मारे प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से हिचकेंगे. भला उन मालिकों के खिलाफ कौन अफसर एक्शन लेगा जो पीएम के साथ फोटो खिंचवाए हों. अब सारा दारोमदार सुप्रीम कोर्ट पर है. अगर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से जागरण प्रबंधन को रगड़ा तो मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन देंगे अन्यथा जागरण के कर्मी रोते रहेंगे.

दैनिक जागरण में कार्यरत एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र और तस्वीर पर आधारित.

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कैसे-कैसे अखबार मालिक बन गए ऐसे-वैसे सांसद, पढ़िए इनकी कुंडली

आप सबको यह जानकर अवश्य आश्चर्य होगा कि अपने अखबारों के पत्रकारों और संपादकों के जरिये सांसदों और नेताओं के चरित्र और उनके कथित आपराधिक रिकार्ड की बखिया उधेड़ने वाले सांसद (पूर्व सांसद) सह अखबार मालिक संसद में क्या कहते हैं और अपने अखबार में क्या करते हैं। इस सीरिज के तहत हम राज्य‍सभा के तीन पूर्व सांसदों की संसद की गतिविधियों का जिक्र करेंगे। संसद में उनका क्या कहना है और जब वही बात उन्हें अपनी कंपनी पर लागू करनी होती है तो वे क्या करते हैं।

इन तीन पूर्व राज्यसभा सांसद सह अखबार मालिकों में हिन्दुस्तान टाइम्स और हिन्दुस्तान की मालकिन श्रीमती शोभना भरतिया, दैनिक जागरण के सीएमडी श्री महेंद्र मोहन (इसी अखबार के एक और मालिक दिवंगत नरेंद्र मोहन भी राज्ससभा में रहे हैं।) और लोकमत समाचारपत्र समूह के श्री विजय जवाहरलाल दर्डा शामिल हैं। इन तीनों समूहों की गणना बड़े समाचारपत्र समूहों में होती है। शायद यही कारण है कि इनके मालिक पार्टियों की पूंछ पकड़कर या चोर दरवाजे से राज्य सभा में पहुंच जाते हैं। यह प्रक्रिया पहले से जारी है और आनेवाले दिनों में रुकने वाली नहीं है।

इन तीनों समूहों की गणना बड़े समाचार पत्र समूहों में होती है। शायद यही कारण है कि इनके मालिक पार्टियों की पूंछ पकड़कर या चोर दरवाजे से राज्य सभा में पहुंच जाते हैं। यह प्रक्रिया पहले से जारी है और आनेवाले दिनों में रुकने वाली नहीं है। राज्यसभा में हिन्दुस्तान टाइम्स और हिन्दुस्तान की मालकिन श्रीमती शोभना भरतिया छह साल तक राज्यसभा में रहीं। वैसे, श्रीमती भरतिया कांग्रेस के काफी करीब मानी जाती रहीं हैं, लेकिन उन्हें राज्यसभा में केंद्र सरकार ने नामांकित किया था। आप सबको पता है कि उनके अखबार में कानून का क्या‍ हाल है। कर्मचारियों की क्या दशा है और एक समय ईमानदारी और समझदारी के लिए प्रसिद्ध इनके अखबारों के संपादक राडिया टेप प्रकरण जैसे मामले में लिप्त पाए गए। एक साथ 350 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और जब वे अदालत से जीत कर आए तो उन्हें श्रीमती भरतिया के लोग वाजिब हक तो देना दूर, प्रदर्शन करने की जमीन भी छीन ली। पता नहीं एक समय कर्मचारियों को अपने ही परिवार का सदस्य मानने वाले श्रीमती भरतिया के दिवगंत पिता पर, कर्मचारियों की दशा देखकर क्या गुजर रही होगी।

लेकिन आश्चर्य की बात ये कतई नहीं है। आश्चर्य तो यह है कि राज्यसभा में इन छह वर्षों के दौरान श्रीमती भरतिया कर्मचारियों, मजदूरों, महिलाओं, किसानों के लिए तरह–तरह के सवाल सरकार से पूछती रहीं। हम यहां छह वर्षों में श्रीमती भरतिया द्वारा पूछे गए 1348 सवालों में से कर्मचारियों, मजदूरों, महिलाओं, किसानों से संबंधित उनके द्वारा पूछे गए सवालों का जिक्र, उनकी कंपनी द्वारा उठाए गए कदमों के संदर्भ में करेंगे। ऐसा इसलिए कि पता चले कि श्रीमती भरतिया की कंपनी सचमुच वही कर रही है, जिस पर वह राज्यसभा में चिंता व्‍यक्‍त कर चुकी हैं।

इसी तरह दुनिया में सबसे अधिक पढ़े जाने वाले हिंदी अखबार दैनिक जागरण के मालिक महेंद्र मोहन भी राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सदस्य रह चुके हैं। वैसे, इनका और इनके अखबार का दूर–दूर तक समाजवाद से कोई रिश्ता. नहीं है। हम आपको बताने में यहां शर्म महसूस करते हैं कि पत्रकारिता जगत में लोग इनकी कंपनी को किस दृष्टि से देखते हैं। संसद में बढ़-चढ़कर सवाल पूछने वाले इन पूर्व सांसद महोदय की कंपनी में तो कर्मचारियों का हाल बंधुआ मजदूरों से भी बुरा है। हम आपको इनके द्वारा पूछे गए 805 सवालों में कुछ का जिक्र इस सीरिज में करना चाहेंगे ताकि आप सब के सामने इनकी जो कलई खुली हुई है, उसमें और चार-चांद लग जाए। इस सीरिज के तीसरे और बड़े हीरो हैं – श्री विजय जवाहरलाल दर्डा। आपसे इनका परिचय करना जरूरी नहीं है। पिछले दिनों इन्होंने समाचारों की काफी सुर्खियां बटोरी थी। कोयले की लूट में हाथ-मुंह सब काला कर चुके हैं, लेकिन सफेदी इनकी गई नहीं है। राज्यसभा में छह साल में इन्होंने ही इन सब में सबसे अधिक सवाल पूछे हैं- 2319। सभी की तरह इनके सवालों का भी रेंज काफी है। किसान, मजदूर, पत्रकार, गरीब, महिला और सूचना व प्रसारण मंत्रालय इनके खास प्रिय विषय रहे हैं। इनकी भी कथनी का जायजा हम उनकी करनी के आधार पर लेना चाहेंगे। 

दैनिक जागरण, नोएडा में वरिष्ठ पद पर काम कर चुके एक पत्रकार द्वारा संचालित ‘मजीठिया मंच‘ नामक फेसबुक पेज से.

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सांसद शोभना भरतिया के संसद में पूछे गए सवाल और उनकी कंपनी के अंदरखाने का बुरा हाल

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