सेक्स स्कैंडल में फंसे बीजेपी के बड़े नेता, देखें इस महिला के वीडियो

बॉबी नामक महिला के दो वीडियो वायरल हुए हैं जिसमें वह बीजेपी के कई नेताओं के नाम लेकर उन पर गंभीर आरोप लगा रही है. वीडियो देखने पर ऐसा लगता है, महिला को यह बिलकुल पता नहीं था कि वह जो कुछ बोल रही है उसे रिकार्ड भी किया जा रहा है. यह वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया और वेबसाइटों पर छाया हुआ है. कुछ लोगों का कहना है कि पीएनबी स्कैम से ध्यान बंटाने के लिए जानबूझ कर सत्ताधारी दल के नेताओं की ओर से इस वीडियो को लीक कराया गया है ताकि सबका ध्यान इस सेक्स स्कैंडल की तरफ चला जाएगा.

वरिष्ठ पत्रकार और आम आदमी पार्टी के नेता शीतल पी सिंह इस बारे में फेसबुक पर लिखते हैं :

‘बाबी’ नाम हमेशा भारत में चर्चित बना रहा है। राजकपूर की मशहूर फ़िल्म से शुरू हुआ यह नाम दशकों पहले हुए पटना के सेक्स स्कैंडल के बाद लगता है अब दिल्ली हिलाएगा। बाबी अब नये अवतार में बीजेपी है और यह चुनाव वर्ष है! छोटी वेबसाइटों ने इस मामले को दहका दिया है और ट्विटर / फेसबुक में यह शब्द अंधड़ में बदल रहा है! मोदी कैंप भी नीरव मोदी की गलफांस से सटकने के लिये इसका इस्तेमाल कर सकता है! कुल मिलाकर देश का सबसे बड़ा सेक्स स्कैंडल खुल सकता है जिसमे BJP के बड़े-बड़े नेता जैसे नितिन गडकरी, विजय गोयल समेत कई बड़े नेता फंसेंगे… 

देखें वीडियो…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मोदी सरकार विजय माल्या, ललित मोदी और नीरव मोदी को भाग जाने देने की दोषी!

Surya Pratap Singh : सरकार के पास सीबीआई, ईडी व अन्य एजेंसियां हैं, तो नीरव मोदी द्वारा किए गए घोटाले में जो भी राजनीतिज्ञ-नेता सम्मिलित है वह चाहे कोंग्रेस का हो या भाजपा का नाम क्यों नहीं उजागर हो रहे? आरोप-प्रत्यारोप से लोगों को मूर्ख क्यों बनाया जा रहा. तीनों ‘चिरैयाँ’ यानि विजय माल्य, ललित मोदी और नीरव मोदी इसी सरकार के कार्यकाल में देश का ग़रीब का पैसा लेकर फुर्र हो गयी और अब हो रहा है छापेमारी का ड्रामा. यदि मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी , चिदम्बरम या राहुल गांधी आदि कोई भी कोंग्रेसी ज़िम्मेदार हो, उसे पकड़ो. क्यों नहीं पकड़ रहे हैं. जनता के समक्ष नाम उजागर करो, जेल भेजो. यदि आप यह नहीं करते तो वर्तमान सरकार ही नीरव मोदी, ललित मोदी व माल्या को भागने की दोषी कहलाएगी. जनता सब समझती है. मूर्ख न समझा जाए. न भूलो, मित्रों! अंध श्रद्धा भक्ति है खतरा-ए-जान!!

Gurdeep Singh Sappal : कमाल है, कल पूरा दिन सुनते रहे कि नीरव मोदी का मामला 2011 का है।  लेकिन जब FIR की कॉपी देखी तो पाया कि सभी मामले 9 फ़रवरी, 2017 और 14 फ़रवरी, 2017 के बीच के हैं!  जो दस्तावेज़ पब्लिक स्पेस में हैं, वो यही हैं। इनके अलावा अब तक कोई और दस्तावेज़ औपचारिक या अनौपचारिक रूप से कहीं नहीं दिखे। फिर मीडिया किस आधार पर 2011 की बात कहता रहा। अगर उनके पास कोई अधिकृत सूचना थी तो वो किसी ने सामने क्यों नहीं रखी। बात कांग्रिस या भाजपा की है ही नहीं। जो सरकार में है, जवाबदेही उसी की है। विपक्ष से जवाबदेही माँगने की नई परम्परा आजकल देखने को मिल रही है। सिस्टम तो ये है कि सरकार जाँच करवाती है और न्यायपालिका के सामने रखती है। लेकिन आज कल सिर्फ़ आरोप हैं, और जाँच के नाम पर अफ़वाहें मीडिया की मार्फ़त परोसी जाती हैं। मीडिया आजकल प्रापगैंडा मीडिया हो गया है, कुछ भी चला दो। परसों 5100 करोड़ के हीरे ज़ब्त बता दिए, कल 549 करोड़ राह गए। चार्जशीट आते आते देखेंगे कितना राह जाता है। सिर्फ़ headline management कर रहे हैं.

Mridul Tyagi : मेरे एक मित्र हैं. उन्होंने बैंक से एक करोड़ 25 लाख का लोन लिया. घर गिरवी था. लोन एनपीए हो गया. उन्होंने वन टाइम सेटलमेंट के लिए बैंक को एक करोड़ 42 लाख का प्रस्ताव दिया. बैंक आफ महाराष्ट्र के अधिकारियों की नजर जनकपुरी के उनके मकान पर थी. अधिकारियों ने बिना कारण बताए प्रपोजल रिजेक्ट कर दिया. फिर इस मकान की नीलामी की बैंक ने सूचना निकाली. बैंक आफ महाराष्ट्र की आसतियां वसूली शाखा, करोलबाग के सहायक महाप्रबंधक के साले की कंपनी की इकलौती बिड एक करोड़ 32 लाख की आई. इकलौती बिड पर मकान नीलाम कर दिया गया. इस पूरे मामले की शिकायत पीएमओ से की गई. जांच चल रही है, लेकिन आसतियां वसूली शाखा के अधिकारी इसी तरीके से भूमाफिया बन गए हैं. ये तो एक उदाहरण है. बैंक अधिकारियों की लूट के तरीके बहुत हैं. लगभग हर बैंक में इसी तरह लूट चल रही है. पहले कर्ज बांटने में लूट, फिर एनपीए में डकैती. अरुण जेटली ने टेक्स पेयर को टेररराइज करने में जितनी मेहनत की, उतनी मेहनत अगर नोटबंदी में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की जांच में की होती, तो पता नहीं कितने नप चुके होते.

Navin Kumar : फिर कहता हूँ, नरेंद्र मोदी इतिहास के सबसे कायर और निकम्मे प्रधानमंत्री साबित होंगे। भारत को रसातल में भेजने वाला प्रधानमंत्री। गरीबों को चूसो और अमीरों का खज़ाना भरो। इतना कुंठित प्रधानमंत्री? नहीं मांगता।

Pushkar Singh Thakur : दिप्ती सलगांवकर धीरू अम्बानी की बेटी है और उनकी बेटी इशिता से निशाल मोदी की शादी हुई है जो 11000 करोड़ PNB घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी के भाई हैं और सहआरोपी भी। अब मीडिया की क्या हिम्मत की इसे बड़ी न्यूज बनाये और मोदी ने तो चुनाव जीतते ही अम्बानी के प्रति कृतज्ञता जाहिर की सम्बोधन मे। नोटबन्दी, 4 साल में 4 गुना NPA, FRDI बिल प्रस्ताव और अब खुल्लमखुल्ला लूट!! बैंकिंग व्यवस्था इतनी अविश्वनीय कभी नही रही।

वरिष्ठ आईएएस रहे सूर्य प्रताप सिंह, हिंद किसान वेब चैनल के एडिटर इन चीफ गुरदीप सप्पल, प्रिंट पत्रकार मृदुल त्यागी, टीवी पत्रकार नवीन कुमार और पुष्कर सिंह ठाकुर की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

राष्ट्रपति जुमा के पतन का कारण सहारनपुर का एक खुदरा दुकानदार अतुल गुप्ता है

यदि पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) का पांच खरब रूपयों वाला घोटाला आज न उजागर हुआ होता, तो असली खबर होती कि सुदूर दक्षिण अफ्रिका के भ्रष्टतम राष्ट्रपति जेकब जुमा के पतन का कारण पश्चिम उत्तर प्रदेश के शहर सहारनपुर का एक खुदरा दुकानदार अतुल गुप्ता है। बासमती, आम और काठ की कृत्तियां के लिये जानाजाने वाला यह शहर देवबंद के दारुल उलूम (Darul Uloom Deoband) का केन्द्र है। आज से यह समूचे अफ्रीकी महाद्धीप में कुख्यात हो गया।

इस गाथा का खलनायक है 47-वर्षीय अतुल गुप्ता जिसने स्थानीय रानी बाजार के एक खस्ता दुमंजिले मकान में बचपन गुजारा। वह केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका) दो दशक पूर्व गया, व्यापार किया और देश का सातवां सबसे धनी व्यक्ति बना। राष्ट्रपति जुमा की अफ्रीका नेशनल कांग्रेस की आर्थिक सहायता कर के वह खरबपति बन गया। कभी “जीवित शहीद” नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) अफ्रीका कांग्रेस के पुरोधा और राष्ट्रपति थे।

 

फिर उत्तर प्रदेश का प्रसंग ले। इतनी उत्तुंग शिखरों पर सवार होकर भी इन गुप्त बंधु (अजय-अतुल-राजेश) ने अपने गृह प्रदेश का पूरा ख्याल रखा। ये लोग 30 अप्रैल 2013 को दक्षिण अफ्रीका की वायुसेना की आरक्षित पट्टी पर भारतीय जेट एयरवेस के ए-330 नामक विशाल वायुयान में नई दिल्ली से अपने अतिथि समूह को लाये थे। इसमें नामी गिरामी राजनेता, सांसद, व्यापारी, खिलाड़ी, फिल्मीजन आदि थे। गुप्त-बंधु के पारिवारिक पाणिग्रहण समारोह में वे बराती बनकर आये थे। उस वक्त की आखिलेश यादव-नीत समाजवादी सरकार के गणमान्य जन भी इसमें शामिल थे। राष्ट्रपति जुमा ने दिलखोल कर शासकीय मददी इस समारोह को दी। भ्रष्टाचार का यह चरम था।

फिलहाल जुमा के उत्तराधिकारी नवनिर्वाचित राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने पद संभालते ही घोषणा की कि वे जैकब जुमा के शासनकाल के घपले तथा घोटालों की जांच करायेंगे और दण्ड दिलवायेंगे। सूची में यूपी के गुप्त-बंधु शीर्ष पर शोभित हैं।

K Vikram Rao
Mob: 9415000909
Email: k.vikramrao@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

PNB फ्रॉड पर एक सर्राफा कारोबारी ने दो साल पहले PM मोदी को पत्र भेजा था पर हुआ कुछ नहीं

Anil Singh : सारी सज़ा कांग्रेस को, सारा मज़ा इन बेशर्मों का! कितन बेशर्म हैं ये लोग! पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंध निदेशक सुनील मेहता खुद कह रहे हैं कि 11,360 करोड़ रुपए का घोटाला इसी जनवरी माह के तीसरे हफ्ते में उजागर हुआ। जो लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी किए गए और जिनके आधार पर ये सारा फ्रॉड हुआ, वो पिछले दो साल में जारी किए गए। लेकिन ये कह रहे हैं कि यह घोटाला यूपीए के शासनकाल का है।

पहले वित्त मंत्रालय के अधिकारी से कहलवाया कि यह सिलसिला 2011 से चल रहा है और फिर पीएनबी के एमडी ने वही बात दोहरा दी। अब उसी की आड़ में अपनी जवाबदेही से बच रहे हैं। इनकी जुबान को तब लकवा मार जाता है जब पूछा जाता है कि सर्राफा कारोबारी हरिप्रसाद ने जुलाई 2016 में ही मेहुल चौकसी की कंपनी में हो रहे फ्रॉड के बारे में सीधे प्रधानमंत्री को जो पत्र लिखा था, उस पर कुछ क्यों नहीं किया गया। असल में हरिप्रसाद ने कंपनी की बैलेंस शीट में आस्तियों, देनदारियों व बैंक ऋण के मिलान के बाद प्रधानमंत्री के पास विस्तृत शिकायत भेजी थी।

पहले प्रसाद ने बेशर्मी दिखाई, अब सीतारमण की बचकानी सफाई!

पीएनबी घोटाले में अपना दामन पाक-साफ दिखाने में भाजपा के छक्के छूट रहे हैं। पहले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूछा कि आखिर गीतांजलि जेम्स का बिजनेस 2011 से 2013 के बीच दोगुना कैसे हो गया? सीधे-सीधे उनका आरोप था कि कांग्रेस की कृपा से ऐसा हुआ है। लेकिन प्रसाद बाबू, गीतांजलि जेम्स लिस्टेड कंपनी है। उसकी बिक्री वित्त वर्ष 2010-11 में 5122.47 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 224.60 करोड़ रुपए था। सच है कि वित्त वर्ष 2012-13 में उसकी बिक्री 10,380.67 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 265.16 करोड़ रुपए हो गया। इस तरह दो सालों में उसकी 42.36 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ी, लेकिन शुद्ध लाभ में सालाना वृद्धि दर मात्र 8.65 प्रतिशत रही। इसलिए इस पर आंखें चमकाने की कोई ज़रूरत नहीं है। अगर आपको लगता है कि गीतांजलि जेम्स ने इस दौरान कुछ घोटाला किया था, तब तो सत्यम जैसा मामला बनता है। इससे तो शेयर बाज़ार में हज़ारों लिस्टेड कंपनियां संदेह के घेरे में आ जाएंगी। इसलिए आपसे विनम्र आग्रह है कि अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश की उभरती इक्विटी संस्कृति को खतरे में मत डालिए।

आगे के आंकड़े यह हैं कि यूपीए शासन के आखिरी साल वित्त वर्ष 2013-14 में गीतांजलि जेम्स को 7343.04 करोड़ रुपए की बिक्री पर 22.65 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा लगा था। लेकिन उसके बाद एनडीए का शासन शुरू होते ही उसके सितारे बुलंद हो गए और उसने 2016-17 में 10,464.77 करोड़ रुपए की बिक्री पर 39.72 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमा लिया। अगर आपका ही तर्क लगाया जाए तो क्या आप बताएंगे कि ऐसी क्या कृपा आप लोगों ने कर दी कि गीतांजलि का धंधा ही नहीं बढ़ा, बल्कि वह 22.65 करोड़ रुपए के घाटे से 39.72 करोड़ रुपए के मुनाफे में आ गई! इसलिए महोदय, उल्लू बनाना बंद कीजिए। जनता उतनी नासमझ नहीं है जितनी आप लोग समझते हैं।

अब रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी टेढ़ी मुस्कान के साथ मैदान में उतरी हैं। बेशर्मी इतनी कि दावा कर रही हैं कि उनकी ही सरकार ने यह घोटाला उजागर किया है। अगर ऐसा है तो फिर आपके वित्त मंत्रालय ने क्यों नहीं इसकी जानकारी दी? पीएनबी ने सीबीआई के पास एफआईआर कराने के 15वें दिन जब स्टॉक एक्सचेंज को सूचना दी, तब सारे देश को इसकी जानकारी मिली। पीएनबी को भी यह घोटाला तब पता चला कि जब उसके एक सामान्य कर्मचारी ने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलआईयू) के लिए नीरव मोदी के लोगों से 100% कैश मार्जिन देने की मांग कर दी तो पहले की करतूतों का भंडाफोड़ होता गया। निर्मला जी, क्यों ऐसी हरकत कर रही हैं जैसे ज़मीन पर मुंह के बल पर गिरने पर बच्चे को खुश किया जाता है कि तूने तो धरती को पटककर गिरा दिया।

आप कह रही हैं कि यह घोटाला 2011 से चल रहा था। अच्छी बात है। लेकिन सीबीआई यह क्यों कहे जा रही है कि 2017-18 के दौरान ही अधिकांश एलआईयू जारी किए गए या रिन्यू किए गए। उसने छापों के बाद दर्ज नई एफआईआर में कहा है कि सारा का सारा पीएनबी घोटाला 2017-18 के दौरान हुआ है। यानी, नीरव मोदी जब वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की बैठक में शिरकत करने के बाद देश वापस लौटे, तब से। आप कहती हैं कि ये सब पहले से हो रहा था, लेकिन आपने अब पकड़कर सामने रखा है। कमाल है! महोदया, पब्लिक इतनी मूर्ख नहीं है। आप बस एक बात बताइए कि अगर सारा मामला आपकी सरकार ने उजागर किया है तो 31 जनवरी को पीएनबी द्वारा शुरुआती एफआईआर दर्ज कराने के बाद 14 फरवरी तक के पंद्रह दिनों तक सीबीआई और ईडी हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे रहे?

साथ ही यह भी बताइए कि मेहुल चौकसी और नीरव मोदी के ठिकानों पर जनवरी 2017 में आयकर छापों से बरामद 4900 करोड़ रुपए के कालेधन पर वित्त मंत्रालय ने क्यों आखें मूंद लीं? जब आभूषणों की 50,000 रुपए या उससे ज्यादा की खरीद पर पैन कार्ड दिखाना जरूरी था, तब आपकी सरकार ने वह सीमा बढ़ाकर फिर से दो लाख रुपए क्यों कर दी? सवाल बहुत सारे हैं। आप अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनेंगी तो ये वहां से भी ललकार रहे होंगे। लेकिन अगर अंतरात्मा ही मर गई हो तब तो आपकी जमात को सत्ता से बाहर निकालने का काम भारतीय अवाम को ही करना होगा।

मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार और अर्थकाम डाट काम के संस्थापक अनिल सिंह की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

रवीश कुमार ने विनोद राय से पूछा- PNB घोटाले पर क्यों नहीं बोल रहे हैं आप?

Ravish Kumar : आदरणीय विनोद राय जी, विदित हो कि पंजाब नेशनल बैंक में साढ़े ग्यारह हज़ार करोड़ का घोटाला हुआ है। आप शून्य प्रेमी हैं इसलिए इसमें ग्यारह के बाद शून्य ही शून्य है। लेखक जानना चाहता है कि आप इसी फरवरी माह की 26 तारीख़ 2016 को बैंक बोर्ड ब्यूरो के प्रमुख बने थे। प्रधानमंत्री ने आपको गवर्नर या मंत्री वगैरह न बनाते हुए एक बड़ा काम सौंपा कि आप बैंकों की गवर्नेंस में सुधार लाएँ और चेयरमैन से लेकर सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को ठीक करें।

दो दिन से नीरव मोदी की योग्यता का मारा पंजाब नेशनल बैंक क़राह रहा है और आप बोल ही नहीं रहे हैं। दो साल में आपने पंजाब नेशनल बैंक को लेकर कितनी बैठक की है, क्या सुधार किए हैं, ये सब आपको बताना चाहिए। क्या वाक़ई किसी रिपोर्टर ने इतने बड़े मामले में संपर्क नहीं किया? आप तो ऑडिटर रहे हैं, यही बताते कि मासिक, तिमाही और सालाना ऑडिट के बाद भी कैसे नीरव मोदी ने बिना कलरव किए ग्यारह हज़ार करोड़ का चूना लगा दिया।

आप बोल ही नहीं रहे हैं? फिर कोई किताब लिख रहे हैं क्या सर? टू जी पर आपकी किताब आई, उसके कुछ समय बाद ए राजा ही बाहर आ गए। राजा साहब भी किताब लिख लाए हैं। फिर भी आप चुप हैं । कपिल सिब्बल ने तो आपको चुनौती दी है। फिर भी आप चुप हैं। टू जी मामले में सबूत न मिलने और आरोपियों के बरी होने पर कैसे चुप रह गए? एक लेख तो लिखते, टीवी डिबेट में आते या राजा से माफी ही मांग लेते।

अब बैंक का घोटाला है, आप चुप हैं। कहीं आपका बैंक बोर्ड ब्यूरो सरकार के कॉफी बोर्ड या टी बोर्ड की तरह तो नहीं है? आप तो शून्य अधिपति हैं, आप क्यों नहीं बोल रहे हैं? कम से कम 11000 में दस बीस ज़ीरो ही जोड़ देते। है न सर।

पत्र मिलने पर जवाब दीजिएगा। आप देश की अंतरात्मा की दूसरी डायरी तो नहीं लिख रहे हैं।

सबका,

रवीश कुमार

एनडीटीवी के चर्चित और बेबाक पत्रकार रवीश कुमार की एफबी वॉल से.

रवीश का लिखा ये भी पढ़ें :

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पीएम मोदी का पीएनबी घोटाले के एक आरोपी मेहुल भाई से कनेक्शन! देखें वीडियो

Ravish Kumar : प्रधानमंत्री के हमारे मेहुल भाई और रविशंकर प्रसाद की जेंटलमैन चौकसी… ये शब्द प्रधानमंत्री के हैं- ”कितना ही बड़ा शो रूम होगा, हमारे मेहुल भाई यहां बैठे हैं लेकिन वो जाएगा अपने सुनार के पास ज़रा चेक करो।” ये वाक्य यूट्यूब पर हैं। यूट्यूब पर ”PM Narendra Modi at the launch of Indian Gold Coin and Gold Related Schemes” नाम से टाइप कीजिए, प्रधानमंत्री का भाषण निकलेगा। इस वीडियो के 27वें मिनट से सुनना शुरू कीजिए। प्रधानमंत्री हमारे मेहुल भाई का ज़िक्र कर रहे हैं। ये वही मेहुल भाई हैं जिन पर नीरव बैंक के साथ पंजाब नेशनल बैंक को 11 हज़ार करोड़ का चूना लगाने का आरोप लगा है। उनके पार्टनर हैं।

संबंधित वीडियो यहां देखें:

रविशंकर प्रसाद काफी गुस्से में प्रेस कांफ्रेंस करने आए थे। उन्हें लगा कि वे जो बोलेंगे वे जज की तरह फैसला होगा। पत्रकार भी सवाल जवाब नहीं कर सके। आज कल चुप रहने वाले लोग पोलिटिकल एडिटर बन रहे हैं, बोलने वाले निकलवा दिए जा रहे हैं। बहरहार रविशंकर प्रसाद दोबारा अपना प्रेस कांफ्रेंस देख सकते हैं। कितने गुस्से में मेहुल चौकसी का नाम लेते हैं जैसे उनकी हैसियत से नीचे की बात हो उस शख्स का नाम लेना। जबकि प्रधानमंत्री उसी मेहुल भाई को कितना आदर से पुकार रहे हैं। हमारे मेहुल आई। अहा। आनंद आ गया। इन्हीं के बारे में रविशंकर प्रसाद कह रहे थे कि इनके साथ कांग्रेसी नेताओं की तस्वीरें हैं मगर वो जारी नहीं करेंगे। क्योंकि ये उनकी राजनीति का स्तर नहीं है। दुनिया भर के विरोधी नेताओं की तस्वीरों और सीडी जारी करने की राजनीति के बाद उनके इस आत्मज्ञान पर हंसी आई। गोदी मीडिया की हालत बहुत बुरी है।

13 जनवरी 2016 को पीटीआई की खबर कई अखबारों में छपी है कि अरुण जेटली 100 उद्योगपतियों को लेकर जा रहे हैं। यह ख़बर फाइनेंशियल एक्सप्रेस में भी छपी है। आप ख़ुद भी देख सकते हैं कि उसमें नीरव मोदी का नाम है। किसी भी बिजनेस अख़बार की ख़बर देखिए, उसमें यही लिखा होता है कि प्रधानमंत्री मोदी इन बिजनेसमैन की टोली का नेतृत्व कर रहे हैं। ज़ाहिर है उन्हें पता था कि भारत से कौन कौन वहां जा रहा है। इसलिए रविशंकर प्रसाद को सही बात बतानी चाहिए थी न कि इसे सी आई आई पर टाल देना चाहिए था। नीरव मोदी 1 जनवरी 2018 को भारत से रवाना हो जाते हैं। उसके एक दिन बाद सीबीआई की जांच शुरू होती है। क्या यह महज़ संयोग था? जांच के दौरान यह शख्स 23 जनवरी को स्वीट्ज़रलैंड के दावोस में प्रधानमंत्री के करीब पहुंचता है, क्या यह भी संयोग था? इतने छापे पड़े, एफ आई आर हुई मगर यह तो मकाऊ में शो रूम का उद्घाटन कर रहा है। क्या ऐसी छूट किसी और को मिल सकती है? 2014 के पहले मिलती होगी लेकिन 2014 के बाद क्यों मिल रही है?

एनडीटीवी की नम्रता बरार की रिपोर्ट है कि नीरव मोदी इस वक्त न्यूयार्क के महंगे होटल में है। सरकार ने कहा है कि पासपोर्ट रद्द कर दिया जाएगा मगर अभी तक तो नहीं हुआ है। इतने दिनों तक उन्हें भागने की छूट क्यों मिली? हंगामा होने के बाद ही सरकार ने ये क्यों कहा जबकि पंजाब नेशनल बैंक ने एफ आई आर में कहा है कि इनके ख़िलाफ़ लुक आउट नोटिस जारी किया जाए। क्यों नहीं तभी का तभी किया? अब ख़बर आई है कि इंटरपोल के ज़रिए डिफ्यूज़न नोटिस जारी किया गया है। इसका मतलब है कि पुलिस जांच के लिए गिरफ्तारी ज़रूरी है। हंगामे के बाद तो सब होता है मगर लुकआउट नोटिस उस दिन क्यों नहीं जारी हुआ जब एफ आई आर हुई, छापे पड़े। 15 फरवरी को नीरव मोदी के कई ठिकानों पर छापे पड़े हैं जिनमें 5100 करोड़ की संपत्ति के काग़ज़ात ज़ब्त हुए हैं। सभी जगह इसे बड़ा कर छापा गया है जिससे लगे कि बड़ी भारी कार्रवाई हो रही है। इस पर मनी कंट्रोल की सुचेता दलाल ने सख़्त ट्वीट किया है। उनका कहना है कि ख़बर है कि सीबीआई और डीआरई ने 5100 करोड़ के जवाहरात ज़ब्त किया है। अगर नीरव मोदी के पास इतनी संपत्ति होती तो उसे फर्ज़ी लेटर आफ अंडर टेकिंग लेकर घोटाला करने की ज़रूरत नहीं होती। दूसरा प्रक्रिया की बात होती है जो इन छापों से जुड़े अधिकारी बता सकते हैं। इतनी जल्दी संपत्ति का मूल्यांकन नहीं होता है। यह सब ख़बरों का मोल बढ़ाने के लिए किया गया है।

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि घोटाला 2011 से शुरु हुआ। लेकिन यह 2017 तक कैसे चलता रहा? क्यों फरवरी 2017 में आठ फर्ज़ी लेटर ऑफ अंडर टेकिंग जारी किए गए? रविशंकर प्रसाद ने यह तथ्य प्रेस कांफ्रेंस में क्यों नहीं कहा? इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि यह घोटाला 17 बैंकों तक भी गया है। 11,300 करोड़ के अलावा भी 3000 करोड़ का घोटाला हुआ है। नीरव मोदी की कई कंपनियां हैं, इन कंपनियों को 17 बैंकों ने 3000 करोड़ रुपये के लोन दिए हैं। एक्सप्रेस ने लिखा है कि नीरव मोदी और उनके रिश्तेदारों की कंपनी को 2011 से 2017 के बीच 150 लेटर आफ अंटरटेकिंग दिए गए हैं। नियम है कि लेटर आफ अंडर टेकिंग से पैसा लेने पर 90 दिनों के अंदर चुका देना होता है। मगर बिना चुकाए भी इन्हें LOU मिलता रहा है। इतनी मेहरबानी किसके इशारे से हुई? इस मामले में बैंक मैनेजर को क्यों फंसाया जा रहा है? LOU की मंज़ूरी बैंक के बोर्ड से मिलती है, बैंक के मैनेजर से नहीं। मगर एफ आई आर बैंक के मैनेजर और क्लर्कों के खिलाफ हुई है। बोर्ड के सदस्यों और चेयरमैन के ख़िलाफ़ क्यों नहीं एफ आई आर हुई?

एक दो LOU बैंक के खाते में दर्ज नहीं हो सकते हैं मगर उसके आधार पर जब दूसरे बैंक ने नीरव मोदी को पैसे दिए तो उस बैंक ने पंजाब नेशनल बैंक को तो बताया होगा। अपने पैसे पंजाब नेशनल बैंक से तो मांगे होंगे। कहीं ऐसा तो नहीं कि उन बैंकों से भी पैसे ले लिए गए और वहां भी हिसाब किताब में एंट्री नहीं हुई? इसका जवाब मिलना चाहिए कि पंजाब नेशनल बैंक के बोर्ड ने कैसे LOU को मंज़ूरी दी, बैंक की आडिट होती है क्या उस आडिट में भी 11,000 करोड़ का घपला नहीं पकड़ा गया तो फिर आडिट किस बात की हो रही थी? इसलिए नौटंकी कम हो ज़रा इस पर, जांच जल्दी हो। 2 जी में भी सारे आरोपी बरी हो गए। एक नेता को बचा कर कितने कारपोरेट को बचाया गया आप खुद भी अध्ययन करें। आदर्श घोटाले में भी अशोक चव्हाण बरी हो गए। इटली की कंपनी अगुस्ता वेस्टलैंड से हेलिकाप्टर खरीदने के घोटाले को लेकर कितना बवाल हुआ। पूर्व वायु सेनाध्यक्ष को गिरफ्तार किया गया मगर इटली की अदालत में सीबीआई सबूत तक पेश नहीं कर पाई। ये सारी मेहरबानियां किस पर की गईं हैं?

बैंक कर्मचारी बताते हैं कि ऊपर के अधिकारी उन पर दबाव डालते हैं। नौकरी बचाने या कहीं दूर तबादले से बचने के लिए वे दबाव में आ जाते हैं। इन ऊपर वाले डकैतों के कारण बैंक डूब रहे हैं और लाखों बैंक कर्मचारी डर कर काम कर रहे हैं। उनकी सैलरी नहीं बढ़ रही है, बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। बैंको पर भीतर से गहरी मार पड़ी है। आप किसी भी बैंक कर्मचारी से पूछिए वो बता देंगे अपना बुरा हाल। उनकी मानसिक पीड़ा समझने वाला कोई नहीं। आप उस महंगी होती राजनीति की तरफ देखिए जहां पैसे से भव्य रैलियां हो रही हैं। वो जब तक होती रहेंगी तब तक बैंक ही डूबते रहेंगे। आखिर बिजनेसमैन भी पैसा कहां से लाकर देगा। इन्हीं रास्तों से लाकर देगा ताकि हुज़ूर रैलियों में लुटा सकें। यह पैटर्न आज का नहीं है मगर इसके लाभार्थी सब हैं।

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में देश के सबसे अमीर अम्बानी परिवार का दामाद शामिल

यह घोटाला भी अच्छे दिनों की गिनती में आ जायेगा…. 

Girish Malviya : देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में देश के सबसे अमीर अम्बानी परिवार का दामाद शामिल… यदि यह हेडलाइन आपको आज के अखबारों में, न्यूज़ चैनलों की ब्रेकिंग न्यूज़ में नहीं दिखाई दे रही है इसका मतलब है कि मीडिया पूरा बिक चुका है जो ऊपर लिखा है वह 100 प्रतिशत सत्य है लेकिन कोई बताएगा नहीं! कल जिस नीरव मोदी का नाम पीएनबी घोटाले में सामने आ रहा है उसके सगे भाई निशाल मोदी से, धीरूभाई अंबानी की बेटी, मुकेश ओर अनिल अंबानी की बहन दीप्ति सलगांवकर की बेटी इशिता की शादी हुई है. सीबीआई ने एफआईआर में निशाल का भी नाम लिया है.  कल पीएनबी बैंक में जो घोटाला सामने आया है उसने पूरे विश्व मे भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की इज्जत की धज्जियाँ बिखेर दी है. पोस्ट लम्बी है पर पूरी जरूर पढियेगा. वैसे पता नहीं मीडिया इसे किस तरह से दिखाएगा. पर वास्तव में यह घोटाला बताता है कि हमारी बैंकिंग व्यवस्था की चाबी किस तरह के भ्रष्ट लोगों के हाथ में आ गयी है.

आपकी जानकारी के लिए बता दूं पंजाब नेशनल बैंक देश में एसबीआई के बाद सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है. जो रकम घोटाले की बताई जा रही है वह 11,330 करोड़ रुपए (1.8 अरब डॉलर) है. पंजाब नेशनल बैंक की 2017 में 1320 करोड़ नेट इनकम थी. यानि घोटाला सालभर की नेट इनकम का आठ गुना है. घोटाले के सामने आने के बाद शेयर बाजार में पीएनबी के शेयरों की कीमत 10 फीसद गिर गई हैं. दूसरे बैंकों के शेयरों ने भी खूब गोता लगाया है। अब पीएनबी तो अपना दामन बचाते हुए कह रहा है कि इस रकम से हुए लेन-देन अनिश्चित स्वरूप के हैं. लेकिन यदि लेन-देन की वैधता साबित हो जाती है तो बैंक को इतनी रकम का प्रावधान अपने बैलेंसशीट में करना होगा. यानि जिसकी आय 1320 करोड़ रुपये वार्षिक हो उसे 11330 करोड़ रुपये भरने ही होंगे. यह रक़म बैंक के मार्केट कैप का एक तिहाई है.

अब जिसके बारे में मीडिया चुप होकर बैठ गया है वह भी सुन लीजिए कि यह घोटाला किया किसने है? दरअसल भारत मे डायमंड ओर डायमंड ज्वेलरी से जुड़ा व्यापार 70 हजार करोड़ रुपए का है. इस व्यापार का मुख्य गढ़ सूरत और मुम्बई है. कहते हैं कि इस इंडस्ट्री के छह बड़े बिजनेस टाइकून हैं जिनके आसपास यह सारा व्यापार घूमता है. उसमें से दो टाइकून इस घोटाले में संलिप्त पाए गए हैं. पहले हैं नीरव मोदी और दूसरे हैं मेहुल चोकसी.  नीरव मोदी ज्वेलरी डिजाइनर कहे जाते हैं और 2.3 अरब डॉलर के फ़ायरस्टार डायमंड के संस्थापक हैं. यह साल 2013 में फ़ोर्ब्स लिस्ट ऑफ़ इंडियन बिलिनेयर में आए थे और तब से अपनी जगह बनाए हुए हैं. नीरव देश के सबसे रईस लोगों की गिनती में 46वें पायदान पर खड़े हैं. इनके खिलाफ एक हफ्ते पहले भी 280 करोड़ की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ. नीरव की पत्नी एमी और भाई निशाल मोदी भी इस घोटाले में शामिल हैं.

दूसरे आरोपी हैं मेहुल चोकसी. आपने नक्षत्र, संगिनी और अश्मि जैसे ब्रांड का नाम सुना होगा. मेहुल चोकसी इसे बनाने वाली कम्पनी गीतांजलि जेम्स के मालिक हैं और नीरव मोदी के चाचा हैं. पर ऐसा नही है कि गीतांजली जेम्स इससे पहले बिल्कुल साफ सुथरी कम्पनी रही हो. 2013 में ही सेबी ने इसके खिलाफ कुछ एक्शन लिया था. उन पर आरोप थे कि गीतांजलि में ट्रेड करने के लिए चोकसी 25 शैल कंपनियों को फाइनैंस करते थे.  लेकिन 2013 भी छोड़िए. आरोपी नीरव मोदी के यहाँ जनवरी 2017 में आयकर विभाग ने घर समेत 50 दफ्तरों पर छापेमारी की थी. उसी वक़्त इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने गीतांजली ग्रुप के दफ्तरों पर भी रेड मारी थी. यह मामला तभी खुल सकता था लेकिन कुछ नहीं किया गया.

अब आते हैं उस पक्ष की ओर जिसे समझना बहुत आवश्यक है कि यह घोटाला किया कैसे गया? आपने कुछ दिन पहले यह सुना होगा कि अमित शाह के बेटे को एक प्राइवेट वित्तीय कम्पनी ने लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किया था. यहाँ भी कुछ ऐसा ही मामला है.  दरअसल नीरव मोदी पीएनबी की मुम्बई कारपोरेट ब्रांच से हासिल एलओयू के आधार पर दूसरे देशों में कर्ज हासिल करता था. यह काम वर्ष 2010 से ही चल रहा था. एल ओ यू का अर्थ है “लेटर ऑफ अंडरटेकिंग”. यह एक बैंक शाखा की तरफ से, दूसरे बैंक शाखा को जारी एक ऐसा प्रपत्र है जो निश्चित खाताधारकों के पक्ष में दी गई एक गारंटी होती है। इसके आधार पर दूसरे जगह स्थित बैंक शाखा उस ग्राहक को कर्ज की सुविधा देती हैं.

नीरव मोदी पीएनबी की उक्त शाखा से हासिल एलओयू के आधार पर दूसरे देशों में कर्ज हासिल करता था. मोदी इस कर्ज को समय पर चुका देता था और बात दबी रहती थी. लेकिन हाल ही में नीरव मोदी ने कर्ज का भुगतान नहीं किया. हुआ यूं कि गड़बड़ी में शामिल पीएनबी के अधिकारियों ने अधिक रिश्वत की मांग की। मोदी ने इसे देने से मना कर दिया. इसके जवाब में उसे पीएनबी ने भी एलओयू जारी नहीं किया और वर्षों से चल रहा यह चक्र टूट गया. ऐसे में एक विदेशी बैंक ने हांगकांग की नियामक एजेंसी के साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक को सूचना भेज दी. आरबीआई ने जब पीएनबी से जबाव तलब किया तो उसके पास इसे सार्वजनिक करने और मामले की जांच करवाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा.  लेकिन यह मामला अब सिर्फ पीएनबी तक ही सीमित नहीं रह गया है. पता चला है कि यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक और निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक ने भी पीएनबी की तरफ से गड़बडी करने वाले खाताधारकों को जारी एलओयू के आधार पर कर्ज दिए हैं.

सबसे अधिक शर्मिंदगी की बात तो यह है कि विदेशी बैंकों को भी एक तरह से धोखा दिया गया है. यह मामला भारतीय बैंकिंग पर लग चुका बदनुमा दाग है. यह मामला टिप ऑफ द आइसबर्ग भी साबित हो सकता है क्योंकि जानकारों की मानें तो बैंक एलओयू जारी करने का यह धंधा अनाधिकृत तौर पर आयातकों के साथ मिल कर खूब करते हैं और इसे परोक्ष तौर पर उन्हें शीर्ष अधिकारियों से अनुमति होती है. अब इस केस में अम्बानी के दामाद शामिल हैं, इसीलिए मोदी सरकार के वित्त मंत्रालय के बैंकिंग विभाग में संयुक्त सचिव लोक रंजन जी कह रहे है कि ‘यह एक बड़ा मामला नहीं है और ऐसी स्थिति नहीं है जिसे कहा जाए कि हालात काबू में नहीं है।’

अम्बानी के दामाद का मामला हो तो हालात क्यो न काबू में बताए जाएंगे, शायद यह घोटाला भी अच्छे दिनों की गिनती में आ जायेगा. 

xxx

आपको याद होगा जून 2017 में रिजर्व बैंक ने 12 डिफॉल्टरों की पहली सूची जारी की थी इन 12 कंपनियों में बैंकिंग क्षेत्र का लगभग 25 फीसदी का बैड लोन हैं यह रकम लगभग 2 लाख करोड़ रुपये बताई गई थी. इन कम्पनियों में एस्सार स्टील, भूषण स्टील, एबीजी शिपयार्ड, इलेक्ट्रोस्टील और अलोक इंडस्ट्रीज बड़े लोन डिफॉल्टर के तौर पर शामिल थी. दीवालिया कानून के बाद इसे सबसे बड़ी कार्यवाही कहा जा रहा था.  अब जाकर पता चला है कि भारतीय रिजर्व बैंक की एनपीए की पहली सूची में शामिल 12 कंपनियों में से 9 मामलों के निपटान में बैंकों को अपने कुल बकाया कर्ज में औसतन 50 से 80 फीसदी की चपत लग सकती है। यह आकलन इन कंपनियों की बोली प्रक्रिया और पांच मामलों में लगाई गई बोली के आधार पर किया गया है.  इस 12 कम्पनियों की सूची के बाद 55 कम्पनियों की एक ओर सूची जारी की गयी है.  आरबीआई की इस नई सूची में वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और जयप्रकाश एसोसिएट बड़े डिफॉल्टरों के तौर पर शामिल हैं। इन दोनों कंपनियों पर 1 ट्रिलियन रुपये से अधिक का नॉन परफोर्मिंग असेट (बैड लोन) है.  यानी इस आधार पर देखा जाए भारतीय बैंकिंग व्यवस्था गहरे संकट में नजर आ रही है एसबीआई के तिमाही परिणाम इसी तथ्य की पुष्टि कर रहे हैं.

इंदौर के पत्रकार गिरीश मालवीय की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मोदी बैंक लूटकर भाग गया, भाजपाई ‘रामराज्य रथ यात्रा’ निकालने में जुटे

Parmod Pahwa : मोदी बैंक लूटकर भाग गया। असलियत कोई नहीं बता रहा लेकिन रथ यात्रा देश के लिए जरूरी बताई जा रही हैं जिससे 1992 की तरह धर्म के नाम को बदनाम किया जा सके। सनातन संस्कृति और भगवान की मूर्तियों का अपमान करने से भी नही चुकने वाले धर्म ध्रोहियो ने प्रभु विग्रह ड्राइवर के पैरों में स्थापित की है। कोई भी एक कारण जिसके लिए रथ यात्रा चलाई जा रही हैं? यदि सीमा पर शत्रुयों की चुनोती है तो वो वीरता और युद्ध से हटेगी नाटक बाज़ी से नहीं। सोमनाथ मंदिर को जब लूटा गया था तब भी पंडितों ने शत्रु मारक यज्ञ किये थे क्योकि तलवार लेकर सामना करने से तो कायरता सामने आ जाती। आज बैंक रूपी मन्दिर लुट रहे है और हम राम यात्रा निकाल कर सन्देश देंगे कि हिंदुस्तान में रहना होगा जय श्री राम कहना होगा।  बेशुमार लानत है देश द्रोहियों पर।

Ravish Kumar : पंजाब नेशनल बैंक में 11,500 करोड़ का घोटाला…. पंजाब नेशनल बैंक ने मई 2016 में 5,370 करोड़ का घाटा रिपोर्ट किया था। भारतीय बैंकिंग इतिहास में यह सबसे बड़ा घाटा है। अब उसी पंजाब नेशनल बैंक से 11, 500 करोड़ के घोटाले की ख़बर आई है। घोटाला बैंक ने ही पकड़ा है। मामला 2011 का है और मुंबई की ब्रीच कैंडी ब्रांच शाखा में घोटाला हुआ है। हीरा व्यापारी नीरव मोदी और इनके परिवार के लोगों का नाम आया है। आशंका है कि दूसरे बैंकों को भी चपत लगाई गई होगी। नीरव मोदी कौन है, इसके पैसे से किस किस ने हेलिकाप्टर में ऐश किया है, बैंक के अधिकारी कौन हैं, उनके किस किस से तार हैं, और किस किस को लाभ पहुंचाएं गए हैं, यह सब डिटेल आना बाकी है। वैसे जब सीबीआई 2 जी में किसी को पकड़ नहीं सकी तो इन सबमें क्या करेगी। 19 जनवरी 2018 को भोपाल से नई दुनिया में ख़बर छपी थी कि कोयला व्यापारी ने पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों से मिलकर 80 करोड़ का घोटाला किया है। मामला 2011 से 2016 का है। सीबीआई ने 47 जगहों पर छापे मारे थे। 30 मार्च 2016 के नई दुनिया में ही ख़बर छपी है कि पंजाब नेशनल बैंक ने इंदौर के 27 व्यापारियों को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है जिन पर 217 करोड़ का लोन था। एसोचैम ने एक अध्ययन कराया है। मार्च 2018 में बैंकों का एन पी ए 9.5 लाख करोड़ का हो जाएगा। 2017 में यह 8 लाख करोड़ का था। यानी एक साल में बैंकों का डेढ़ लाख करोड़ लोन डूब गया। यह ख़बर सारे अख़बारों में छपी है। वायर में 13 फरवरी को हेमिंद्र हज़ारी की रिपोर्ट पढ़ सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक ने रिज़र्व बैंक को बताया है कि बैंक ने 31 मार्च 2017 को समाप्त अपने वित्तीय वर्ष के लिए मुनाफे और एन पी ए की रक़म के बारे में ग़लत सूचना दी है।

बैंक ने नॉन प्रोफिट एसेट के बारे में 21 फीसदी राशि कम बताई है। यानी लोन डूबा 50 रुपये का तो बता कि 39 रुपया ही डूबा है। यही नहीं मुनाफे को 36 फीसदी बढ़ा चढ़ा कर बताया है। भारत का सबसे बड़ा बैंक है एस बी आई। उसके सालाना रिपोर्ट में घाटे और मुनाफे की रकम में इतना अंतर आ सकता है? न्यूज़ एंकरों ने रिपोर्ट बनाई या बैकरों ने। इसके सीईओ को चलता कर देना चाहिए मगर वो सरकार का जयगान कर जीवनदान पा लेगा। जबकि 2017 की रिपोर्ट जमा करने के वक्त अरुंधति भट्टाचार्य सीईओ थीं जिन्हें मिडिया में बैंकिंग सेक्टर का बड़ा भारी विद्वान समझा जाता था। जब तब कोई न कोई अवार्ड मिलता रहता था। नोटबंदी के समय इतना कुछ बर्बाद हुआ, मगर उन्होंने कुछ नहीं बोला, चुपचाप अपना टाइम काट कर चली गईं। इतनी ग़लती की छूट होती तो मैं ख़ुद स्टेट बैंक आफ इंडिया चला कर दिखा देता। जबकि मैं गणित में ज़ीरो हूं। इन बड़े बैंकरों का एक ही काम है। मीडिया में फोटो खींचवाना और सरकार की जयकार कर उसकी ग़लतियों पर पर्दा डालना। इसका नतीजा भुगतते हैं बैंकों के लाखों कर्मचारी। जिनका काम बढ़ जाता है, तनाव बढ़ जाता है मगर सैलरी नहीं बढ़ती है। हाल ही मैंने पोस्ट डाला था कि बैंकिंग सेक्टर के लोग अपनी समस्या बताएं और शपथ पत्र लिखकर भेजें कि हिन्दू मुस्लिम नहीं करेंगे, युद्ध के उन्माद की राजनीति से अलग रहेंगे। मुझे लगा था कि मेरे दफ्तर दस बीस हज़ार लिफाफे पहुंच जाएंगे जिनमें शपथ पत्र होगा और एक से एक जानकारियां होंगी। मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। सौ दो सौ चिट्ठियों को देखने के बाद मुझे लगता है कि यह समस्या कोई बड़ी नहीं है। वरना लोग सारा काम छोड़ कर शपथ ले रहे होते। मगर ऐसा नहीं हुआ। इसलिए इस मुद्दे से टाटा।

अगर बैंकिंग सेक्टर में लाखों कर्मचारी है तो मेरे पास कम से कम तीस चालीस हज़ार पोस्ट कार्ड पहुंचने चाहिए। उसमें तीन चार बातें लिखी हों। मैं हिन्दू मुस्लिम राजनीति नहीं करूंगा। टीवी पर इसका डिबेट आएगा तो नहीं देखूंगा। मैं पहले हिन्दू मुस्लिम राजनीति करता था मगर अब नहीं करूंगा। ये उनके लिए है जो करते रहे हैं। सच बोलिए तभी आपके साथ कोई ईमानदारी से खड़ा रहेगा। अगर आप इस राजनीति से सहमत रहेंगे तो फिर आपको फ्री में काम करना चाहिए। सैलरी में वृद्धि की कोई ज़रूरत नहीं है। इस हिन्दू मुस्लिम को जब तक ख़त्म नहीं करेंगे तब तक कोई आपकी समस्या पर ध्यान नहीं देगा। आप आज़मा कर देख लीजिए। बेशक, कुछ सौ लोगों ने ही विस्तार से जानकारी भेजी है। काफी कुछ सीखने को मिला है। उसमें भी एक बेईमानी है। कोई रवि धाकड़ के नाम पर मेसेज बना है जिसे सारे भेजे जा रहे हैं और मैं डिलिट किए जा रहा हूं। मेरा कहना है कि आप अपने व्यक्तिगत अनुभव लिखें। बताएं। तब समझ आएगा कि क्या है, क्या होना चाहिए। हमारे पास न समय है न संसाधन कि किसी भी नए विषय में रातों रात एक्सपर्ट हो जाएंगे। जब आप ही अपनी कहानी ठीक से नहीं बताएंगे तो दुनिया कैसे जानेगी।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार और प्रमोद पाहवा की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: