BJP is expected to lose to Congress in Madhya Pradesh, Rajasthan and Chhattisgarh

ABP News-C Voter Opinion Poll for Madhya Pradesh, Rajasthan and Chhattisgarh

Madhya Pradesh

Incumbent Chief Minister of Madhya Pradesh Shivraj Singh Chauhan is set to face a humiliating defeat against Congress in upcoming elections according to the survey conducted by ABP News and C Voter. Continue reading

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भड़ास सर्वे : आपका पसंदीदा नेशनल हिंदी न्यूज चैनल कौन है?

Yashwant Singh : आपका पसंदीदा नेशनल हिंदी न्यूज चैनल कैटगरी में अभी जो शुरुआती सर्वे के नतीजे आए हैं, 200 लोगों के वोट करने के बाद, उसके टाप 4 परिणाम यूं हैं.

1- एनडीटीवी

2- जी न्यूज

3- कोई नहीं

4- आजतक

इसका आशय ये हुआ कि दर्शक अब विचारधारा के आधार पर बंट चुके हैं. एक तबका एनडीटीवी देखता है, जिसे शुद्ध भाजपा विरोधी चैनल कहा जाता है. दूसरा तबका जी न्यूज देखता है जो शुद्ध भाजपा समर्थक चैनल है. राजनीतिक विचारधारा के आधार पर हो रही टीवी पत्रकारिता से बहुत सारे दर्शक नाराज हैं और इन्होंने ‘कोई चैनल पसंद नहीं’ वाला आप्शन चुना है. आजतक चौथे नंबर पर है. ये वही आजतक है जिसे रहस्यमय टीआरपी मीटर्स नंबर वन चैनल बताते हैं लेकिन भड़ास के सर्वे में यह चौथे नंबर पर आ गया है.

यह सर्वे अभी जारी है और एक हजार वोटों के बाद ही बंद होगा. इस सर्वे में शामिल होने के लिए मेल आईडी डालना अनिवार्य है. एक मेल आईडी से एक ही वोट डाला जा सकता है. ये सर्वे एक कोशिश है बाजारू टीआरपी मीटर्स से इतर, जनता के बीच जाकर उनकी पसंद नापसंद जानने का, इसलिए जरूर अपना वोट दीजिए. फाइनल नतीजे एक हजार वोटों के बाद आएगा. यह सर्वे सोशल मीडिया, मेल के अलावा मोबाइल के जरिए भी संचालित किया जा रहा है ताकि हर प्रकृति, तबके, सोच, उम्र, संसाधन के लोग इसमें शिरकत कर सकें.

वोट डालने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :

https://goo.gl/forms/Fo5e6oQtVLVcR4zj2

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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ABP न्यूज ने ‘तर्क’ से जिताया मोदी को

पाठकों की राय को दरकिनार कर ABP न्यूज ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साल 2014 का व्यक्ति विशेष बना डाला। ABP न्यूज ने अपनी वेबसाइट ABP live पर साल 2014 के व्यक्ति विशेष का पोल करवाया। इस पोल में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुरी तरह पछाड़ दिया। मगर, ABP न्यूज ने निम्न तर्क देते हुए अरविंद केजरीवाल को हरा दिया।

”दर्शकों की राय में अरविंद केजरीवाल व्यक्ति विशेष हैं. लेकिन देश को पिछले 30 साल में पहली बार 2014 में पूर्ण बहुमत की सरकार नरेंद्र मोदी ने दी है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ABP न्यूज के 2014 के व्यक्ति विशेष हैं।”

लगता है कि ABP न्यूज ने अपनी छवि को बचाने के लिए इस तरह का हथकंडा अपनाया है। कहीं, उस पर आम आदमी पार्टी का पक्षपाती होने का आरोप न लग जाए। इस पोल में अरविंद केजरीवाल को 52.63 फीसदी मत मिले, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 34.12 फीसदी। इस तरह लोगों की पसंद में केजरीवाल आगे रहे।

Kulwant Happy
sharma.kulwant84@gmail.com

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विश्व मीडिया के 90 प्रतिशत भाग पर 6 यहूदी कंपनियो का नियंत्रण

पिछले दिनों ‘विश्व मीडिया पर नियंत्रण किसका’ ‘शीर्षक नामक एक सर्वेक्षण सामने आया था। जो दुनिया भर में मीडिया पर प्रत्यक्ष नियंत्रण करने वाली कंपनियों और उनके मालिकों के संबंध में जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट में पेश किए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व मीडिया के 90 प्रतिशत भाग पर इस समय यहूदीयो का नियंत्रण हैं जो समाचार एजेंसी, समाचार पत्र, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के मालेकाना अधिकार यहूदियों के पास है और यह संस्था दुनिया भर को सामग्री प्रदान कराती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के 90 प्रतिशत मीडिया पर केवल 6 कंपनियों के अधिकार है और यह सभी कंपनिया यहूदियों की हैं। सबसे बड़ी कंपनी वॉल्ट डिज्नी है, इस कंपनी के अमेरिका में सबसे अधिक प्रोडक्शन हाउस हैं। कंपनी के पास सात बड़े समाचार पत्र, तीन पत्रिकाए और एक बड़ा केबल नेटवर्क है, जिसके चौदह मिलियन उपयोगकर्ता हैं। दूसरी बड़ी कंपनी टाइम वार्नर जिस की स्वामित्व एच बी ओ अमेरिका का सबसे बड़ा पे टीवी केबल नेटवर्क है।

इसके अलावा अमेरिका की सबसे बड़ी पत्रिका टाइम पत्रिका भी इसी की मिल्कियक है। यह पत्रिका अमेरिका में सबसे अधिक प्रकाशित होने वाली पत्रिका है। यह कंपनी विशुद्ध यहूदियों की है। तीसरी कंपनी वाई काम है। पैरा तिोनट पिक्चर्स और एमटीवी इस की मालिक है। यह लोग न केवल मीडिया को नियंत्रित कर रहे हैं बल्कि मानव के दिमाग को बदलने का प्रयास कर रहे है। बच्चों के कार्टून चैनल के माध्यम से अपने विशिष्ट अंदाज में हर घर में प्रवेश कर चुके हैं। बच्चों, बड़ों, महिलाओं, प्रत्येक को अपनी चपेट में ले लिया है।

अर्थात अब उन्हें किसी से सीधे लड़ने की आवश्यकत शेष नहीं रह गई है। चौथी कंपनी समाचार निगम है जिसका मालेकाना अधिकार फॉक्स टीवी चैनल के पास है। जो अपनी राय अपने दर्शकों पर थोपने का काम करता है। ड्रीम वर्क्स यह मीडिया कंपनी यहूदियों को वर्चस्व बनाने का काम करती है, एक अमेरिकी फिल्म निर्माता मेल गिब्सन ने पिछले दिनों एक फिल्म पैशन ऑफ़ द क्राइस्ट बनाई थी जिसमें उसने यहूदियों को आईना दिखाने की कोशिश की थी, इस फिल्म के खिलाफ यहूदियों ने मोर्चा खोल दिया और अब वह परदे से गायब हो चुका है।

प्रिंट मीडिया का आलम यह है कि अमेरिका में 90 प्रतिशत प्रकाशन संस्थान यहूदी चला रहे हैं। दैनिक 6 करोड़ अखबारों बिकते हैं, जो कि 75 प्रतिशत यहूदियों का है। अमेरिका के तीन बड़े समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल और वाशिंगटन पोस्ट पर यहूदियों का अधिकार है। इसके अलावा टाइम पत्रिका और न्यूज़वीक यह दोनों भी उन्हीं के अधिकार मे है। यह तो रहा उनका हाल। इन संस्थाओ से दुनिया भर की मीडिया उद्योग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े है। और इस तरह ये लोग पूरी दुनिया की मीडिया पर सीधे काबिज हो चुके हैं।

इसके उत्तर में मुस्लिम दुनिया के पास क्या है? जबकि उनके पास यहूदियों से दस गुना अधिक धन है, यह धनी राजनेता अपना सारा निवेश व्यर्थ में एक दूसरे से आगे निकलने में जोर आजमाने मे कर रहे हैं। उच्चतम क्लॉक टॉवर, मध्य पूर्व का सबसे बड़ा होटल सऊदी अरब में है, सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा दुबई में है और यहीं पर सबसे बड़ा सात किलोमीटर लंबी शॉपिंग मॉल का निर्माण हो रहा है। अर्थात अनावश्यक चीजों पर धन की बर्बादी हो रही है और दूसरी ओर एक छोटी राष्ट्र रात दिन अपनी योजनाओं को लागू करने मे प्रतिबद्ध है। भारतीय मीडिया का व्यवहार भी हमारे सामने है। यहां के मीडिया संस्थान भी यहूदी तौर तरीको पर काम कर रहे हैं।

बल्कि दुनिया भर में सामग्री की आपूर्ति का एकमात्र स्रोत यहूदी संस्थान हैं और हम उनसे यह आशा करते हैं कि तथ्यात्मक समाचार और विश्लेषण हम तक पहुंचाएं, ऐसा सोचना व्यर्थ के अतिरक्त कुछ भी नहीं है। जो लोग रात दिन यहूदी साजिश की रट लगाते हैं, उन्हें होश कब आएगा। विरोधी तो व्यावहारिक कदम में अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं और उनका मुकाबला करने वाले केवल यहूदी षडयंत्रो के शब्दों दोहराए जा रहे हैं।

प्रिंट मीडिया का आलम यह है कि अमेरिका में 90 प्रतिशत प्रकाशन संस्थान यहूदी चला रहे हैं। दैनिक 6 करोड़ अखबारों बिकते हैं, जो कि 75 प्रतिशत यहूदियों का है। अमेरिका के तीन बड़े समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल और वाशिंगटन पोस्ट पर यहूदियों का अधिकार है। इसके अलावा टाइम पत्रिका और न्यूज़वीक यह दोनों भी उन्हीं के अधिकार मे है। यह तो रहा उनका हाल। इन संस्थाओ से दुनिया भर की मीडिया उद्योग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े है। और इस तरह ये लोग पूरी दुनिया की मीडिया पर सीधे काबिज हो चुके हैं।

सच टाइम्स में प्रकाशित अशरफ अली बस्तवी की रिपोर्ट.

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बुढ़ापे में पैसे के लिए पगलाया अरुण पुरी अब ‘पत्रकारीय वेश्यावृत्ति’ पर उतर आया है…

Yashwant Singh : फेसबुक पर लिखने वालों, ब्लाग लिखने वालों, भड़ास जैसा पोर्टल चलाने वालों को अक्सर पत्रकारिता और तमीज की दुहाई देने वाले बड़े-बड़े लेकिन परम चिरकुट पत्रकार इस मुद्दे पर पक्का कुछ न बोलेंगे क्योंकि मामला कथित बड़े मीडिया समूह इंडिया टुडे से जुड़ा है. बुढ़ापे में पैसे के लिए पगलाए अरुण पुरी क्या यह बता सकेगा कि वह इस फर्जी सर्वे के लिए बीजेपी या किसी अन्य दल या कार्पोरेट से कितने रुपये हासिल किए हैं… इंडिया टुडे वाले तो सर्वे कराने वाली साइट के पेजेज को खुलेआम अपने एफबी और ट्विटर पेजों पर शेयर कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि मामला सच है और इंडिया टुडे वालों ने केजरीवाल को हराने के लिए किसी बड़े धनपशु से अच्छे खासे पैसे हासिल किए हैं.

बिकाउ मीडिया और कार्पोरेट-करप्ट मीडिया से वैसे तो मुझे कई वर्षों से कोई उम्मीद नहीं रही लेकिन अब भी ढेर सारे लोग हैं जो मीडिया हाउसों के चैनलों, अखबारों पर चलाई जा रही खबरों, सर्वे आदि को सच मानते हैं. आप भड़ास की इस खबर https://bhadas4media.com/print/2557-india-today-kejri-tweet को एक बार पढ़ लें और इस खबर में दिए गए वीडियो लिंक को क्लिक करके देख लें तो पक्का आप सनक जाएंगे और गरियाएंगे कि साला ऐसा भी कहीं होता है क्या…

ये बड़े बड़े मीडिया मालिक और बड़े बड़े पत्रकार अगर कभी आपको या हमको पत्रकारिता की तमीज सिखाते मिल जाएं तो तड़ाक से इनके मुंह पर अपना जूता या चप्पल निकाल कर मार दीजिए, बिना कोई जवाब या सफाई दिए…

छोटे मोटे मैग्जीन प्रकाशकों, लघु अखबार संचालकों, ब्लागरों, पोर्टल संचालकों आदि को ब्लैकमेलर बताकर खुद को चरित्रवान बताने वाले बड़े मीडिया हाउसों के मालिक दरअसल सबसे खूंखार और सबसे बड़े ब्लैकमेलर हैं जो पैसे लेकर सुपारी पत्रकारिता करते हैं. ऐसे सुपारी पत्रकारिता करने वाले बड़े मीडिया हाउसों के बड़े व्यभिचारी मालिकों और बड़े मीडिया हाउसों के बड़े दलाल संपादकों-पत्रकारों ने पूरी पत्रकारिता की साख गिरा कर खत्म कर दी है. यही कारण है कि अब मीडिया की बात आते ही हर कोई कहने लगा है कि इनकी तरफ पैसे फेंकिए, ये तत्काल मैनेज हो जाएंगे. पुलिस और नेताओं की तरह महाभ्रष्ट कैटगरी में आ चुका है मीडिया. अरुण पुरी की इस करतूत ने इंडिया टुडे ग्रुप की रही सही साख खत्म कर दी है और इसे भी चोरों ब्लैकमेलरों सुपारी पत्रकारों सुधीर चौधरियों, दीपक चौरसियाओं की कैटगरी वाला पत्रकारिता करने वाला मीडिया हाउस बना दिया है. शेम शेम इंडिया टुडे. शेम शेम अरुण पुरी.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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इंडिया टुडे वालों के फर्जी सर्वे की खुली पोल, केजरीवाल ने पूछा- क्या यही है पत्रकारिता?

इंडिया टुडे समूह के फर्जी सर्वे और घटिया पत्रकारिता से अरविंद केजरीवाल नाराज हैं. अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ट्टवीट करके लोगों से पूछा है कि क्या इसे ही पत्रकारिता कहते हैं? साथ ही केजरीवाल ने एक वीडियो लिंक दिया है जिसमें इंडिया टुडे के फर्जी सर्वे की असलियत बताई गई है. अरविंद केजरीवाल के पेज पर शेयर किए गए लिंक से यू-ट्यूब पेज पर जाने पर एक वीडियो मिलता है. इस वीडियो में दिखाया गया है ‌कि देश का नामी इंडिया टुडे ग्रुप द्वारा न्यूजफिल्क्स डाट काम नामक एक वेबसाइट के जरिए एक सर्वे कराया रहा है जिसमें लोगों से पूछा गया है कि वह केजरीवाल को कितना नापसंद करते हैं और ये कि क्या आप केजरीवाल को दोबारा मौका देंगे?

चौंकाने वाली बात ये है जैसे ही इस सर्वे में आप भाग लेते हैं आपसे एक एक कर सात सवाल पूछे जाते हैं लेकिन कोई भी सवाल केजरीवाल से जुड़ा हुआ नहीं होता. लेकिन जब रिजल्ट बताया जाता है तो कहा जाता है कि आपने केजरीवाल को नापसंद कर दिया है. सवालों का जवाब देते हुए जब आप आगे बढ़ते हैं तो आपको शाहरूख खान की पसंदीदा फिल्म से लेकर आपके फेवरेट स्वतंत्रता सेनानी के बारे में पूछा जाता है. अंत में सर्वे आपको बताता है कि आप केजरीवाल को पसंद नहीं करते हैं.

शेयर किए गए वीडियो में दिखाया गया है कि देश का नामी मीडिया ग्रुप इंडिया टुडे फर्जी सर्वे कराकर अरविंद केजरीवाल को नापसंद करने वालों की संख्या के बारे में बता रहा है. साथ ही इस वीडियो के अंत में बताया गया है कि कैसे केजरीवाल पर भरोसा करने पर दिल्ली की जनता को निराशा हाथ लगी. इस वीडियो में बताया गया है कि सर्वे में शामिल होने वाले से कुल सात सवाल पूछे जाते हैं लेकिन उनमें से कोई भी सवाल न तो केजरीवाल से संबंधित हैं और न ही उनका कोई संबंध देश या दिल्ली की राजनीतिक व्यवस्‍था से है.

अरविंद केजरीवाल का ट्वीट और सर्वे के डिटेल के बारे में वीडियो लिंक यूं है….

Arvind Kejriwal       

✔ @ArvindKejriwal

Is this journalism? I am shocked:

https://www.youtube.com/watch?v=trx4YevdcpE

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