सूर्या समाचार से सुधीर सुधारकर फायर, राष्ट्रीय सहारा में विनय गप्ता को प्रमोशन

दो खबरें हैं. एक नोएडा से और दूसरी कानपुर से. नोएडा स्थित सूर्या समाचार न्यूज चैनल के इनपुट हेड सुधीर सुधाकर को चैनल से बाहर कर दिया गया है. हालांकि सुधीर सुधाकर ने जो एक्जिट नोट लिखा है, उसमें उन्होंने खुद इस्तीफा देने की बात कही है और कारण पुत्र-पुत्री के विवाह जैसे महत्वपूर्ण दायित्व को निभाना बताया है. Continue reading

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बीपी अग्रवाल के इशारे पर यशवंत को धमकाने वाले वकील का लाइसेंस निरस्त कराने की तैयारी

Yashwant Singh : बार काउंसिल का अड्रेस पता करिए जहां फोन कर उगाही के लिए धमकाने वाले वकील की शिकायत की जाए जो खुद को थानेदार का बाप बताता फिरता है। इनकी काली कोट उतरवानी है। Continue reading

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प्रियागोल्ड बिस्किट के मालिक के इशारे पर यशवंत से उलझे वकील को देश भर के पत्रकारों ने किया फोन!

Yashwant Singh : पचासों फोन चले गए वकील के पास। ग़ाज़ीपुर के प्रिंस भाई बताए कि अब वकील कह रहा है कि “मुझे पत्रकारों से नहीं लड़ना, गलती हो गई, मुझे वकालत ही करनी है।” लोग उसे काल कर रहे हैं पर वह उठा नहीं रहा। Continue reading

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तुम्हारे पास रॉबर्ट वाड्रा है, हमारे पास जय शाह!

Atul Chaurasia : जिनको लगता है कि मोदीजी ने भ्रष्टाचार मुक्त, स्वच्छ सरकार दे रखी है देश को उसे अमित शाह के बेटे जय शाह का प्रकरण जानना चाहिए. साथ ही आनंदी बेन पटेल के बेटे और बेटी का भी मामला जोड़ लीजियेगा। पिछली सरकार में दामादों की चांदी थी इस बार गुजरातियों के हाथ सोना-चांदी है।

Thakur Gautam Katyayn :  तुम्हारे पास रॉबर्ट वाड्रा है तो हमारे पास जय शाह है। दोनों इतने प्रतिभावान हैं कि अपने -अपने सरकार के दौरान एक -दो साल में हीं इनकी कंपनी ने कई हज़ार गुना कमाई कर ली। रॉबर्ट वाड्रा को DLF ने unsecured लोन दिया था और अमित भाई शाह जी के बेटे जय शाह को रिलायंस के करीबी सांसद परिमल नाथवानी के समधी ने 15 करोड़ का लोन दिया। दोनों उद्योगपतियों ( रॉबर्ट और जय ) को प्राकृतिक संसाधनों से बहुत प्यार है। रॉबर्ट वाड्रा जमीन के धंधे में थे और जय शाह अनाज की खरीद- बिक्री और अक्षय ऊर्जा के कारोबार में। दोनों को खुद सामने आकर सफाई देने की कोई जरूरत नहीं है , उनके बिना कहे हजारों- लाखों लोग उनके वकील और चार्टर्ड एकॉउंटेंड बन कर उन्हें सही ठहराने में जुटे मिलेंगे। (नोट- संविधान के मुताबिक जब तक दोषसिद्ध नहीं हो जाता , व्यक्ति निर्दोष माना जायेगा। उपरोक्त विचार वरिष्ठ पत्रकार श्री मनीष झा जी के हैं। मुझे व्यक्तिगत रूप से अच्छा लगा तो साझा कर रहा हूँ।)

Mayank Saxena : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे के पक्ष में देश का रेलमंत्री प्रेस कांफ्रेंस कर के, उनकी कम्पनी की आय और काम के तरीके के आंकड़े समझा रहा है…आपको और अच्छे दिन चाहिए तो इस बार अमित शाह को ही प्रधानमंत्री बनाने की मांग कीजिए क्योंकि दाउद तो पीएम बनने भारत आने से रहा….

Rohini Gupte : अमि‍त शाह के सुपुत्र की कारस्‍तानी देख ली ना? शि‍वराज सिंह के सुपुत्र पर भी ध्‍यान रखि‍एगा। इसी साल से पट्ठे ने भोपाल में खोमचा खोलकर ‘फूल’ बेचना शुरू कि‍या है, र्स्‍टाटअप के नाम से…

पत्रकार अतुल चौरसिया, ठाकुर गौतम कात्यायन, मयंक सक्सेना और रोहिणी गुप्ते की एफबी वॉल से.

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एनडीटीवी के ग्रुप सीईओ विक्रम चंद्रा पर गिरी गाज, कई अन्य भी निपटाए जाएंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टेबल पर पड़ी ब्लैकमनी को ह्वाइट करने वाली एनडीटीवी के मालिक प्रणय राय की फाइल ने करामात दिखाना शुरू कर दिया है. मोदी खांटी नेता हैं. वे किसी चीज का देर तक और दूर तक इस्तेमाल करते हैं. कांग्रेसी, वामपंथी और आपाइयों का पसंदीदा चैनल कहे जाने वाला एनडीटीवी इन दिनों चोला बदल रहा है. इसके पीछे कारण चिदंबरम-प्रणय राय वाली फाइल है जिसमें इन लागों के कारनामों का डिटेल है.

मनमोहन राज में चिदंबरम और प्रणय राय ने मिलकर उस आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव को हद से ज्यादा टार्चर किया था जिसने इनकी पोल खोली थी. मोदी सरकार आने के बाद एनडीटीवी के मालिकों की काली कमाई वाली फाइल तेजी से आगे बढ़ने लगी और अब मोदी के पास है. एनडीटीवी वाले बड़े बड़े पत्रकार अरुण जेटली के जरिए लॉबिंग में लगे हैं कि मोदी इस फाइल को ठंढे बस्ते में डाल दें लेकिन मोदी इतनी आसानी से कहां मानने वाले. वे पूरा हिसाब करना चाहते हैं. प्रणय राय ने घुटने टेकते हुए अब मोदी के रंग में चैनल को रंगने का काम शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में चैनल के बड़े पदों से पुराने लोगों को हटाया जा रहा है ताकि ये ट्रांजीशन-ट्रांसफारमेशन का काम तेजी से आगे बढ़ सके और किसी को सैद्धांतिक दिक्कत पेश न आए.

एनडीटीवी के ग्रुप सीईओ विक्रम चंद्रा को चैनल ने पद से हटा दिया है. हालांकि विक्रम चंद्रा ने खुद ट्वीट करते हुए कहा है कि वे ग्रुप सीईओ के पद से हट गए हैं और कंसल्टिंग एडिटर बने रहेंगे. पढ़िए विक्रम चंद्रा का ट्वीट : Vikram Chandra @vikramchandra : Change is good and change is here! Stepping down as Group CEO of NDTV. Will now be Consulting Editor, so can focus on my TV shows and other areas of interest. ज्ञात हो कि चंद्रा के पास बिजनेस और एडिटोरियल दोनों की संयुक्त जिम्मेदारियां थीं. एनडीटीवी में ग्रुप सीईओ के पद पर एनडीटीवी के एक्जीक्यूटिव वाइस चेयरपर्सन के.वी.एल. नारायण राव आसीन होंगे. सूत्रों का कहना है कि आगे आने वाले दिनों में चैनल के कुछ चर्चित चेहरों को किनारे लगाया जा सकता है और कुछ नए एंकर्स को तवज्जो दी जा सकती है.

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न्यूज लांड्री डॉट कॉम की शर्मनाक, एकपक्षीय और निहित स्वार्थी पत्रकारिता

मधु त्रेहन नामक एक बुजुर्ग महिला जो एक जमाने में ठीकठाक पत्रकार थीं और आजतक चैनल वाले मालिकों के खानदान की हैं, कुछ बरसों से न्यूज लांड्री डाट काम नामक वेबसाइट चलाती हैं. अंग्रेजी की इस वेबसाइट में अच्छे अच्छे चमकते लोगों की अच्छी अच्छी बातें छपती रहती हैं. इस किस्म की ढेरों पीआर वेबसाइट्स अंग्रेजी में हैं जो निहित स्वार्थी पत्रकारिता के तय एजेंडे के तहत किन्हीं कंपनियों और व्यक्तियों की महिमा मंडन या गरिमा खंडन करके पैसे बनाती कमाती हैं. इनसे पत्रकारिता की उम्मीद नहीं की जाती. लेकिन मधु त्रेहन की न्यूज लांड्री डाट काम ने एक समय तक अपनी अच्छी खासी पत्रकारीय छवि बना ली थी. वह प्रतिमा अब ध्वस्त होने लगी है.

कई किस्म के संगीन विवादों से घिरे अभिसार शर्मा ने पिछले दिनों न्यूज लांड्री डाट काम पर एक आर्टकिल लिखा. इस आर्टकिल में आईआरएस अफसर एसके श्रीवास्तव समेत सीबीआई आदि को गरियाया. भड़ास के यशवंत सिंह को अबकी तिहाड़ जेल भिजवाने की धमकी दे डाली. प्रणय राय और चिदंबरम की मिलीभगत से 2जी स्कैम का पैसा मनी लांड्रिंग के जरिए विदेश भेजने के चर्चित गड़बड़-घोटाले को पकड़ने वाले आईआरएस अफसर एसके श्रीवास्तव ने जब न्यूज लांड्री डाट काम पर अभिसार शर्मा द्वारा उनके बारे में लिखे गए एकतरफा प्रलाप को पढ़ा तो तत्काल मधु त्रेहन और उनकी कंपनी के लोगों को फोन किया. उन लोगों ने एसके श्रीवास्तव का कई घंटे इंटरव्यू कराया और उसे नहीं अपलोड किया.

बाद में एसके श्रीवास्तव ने लंबा चौड़ा लिखित जवाब भेजा अभिसार शर्मा के आर्टकिल के जवाब में तो उसे भी नहीं छापा. ये कहां की पत्रकारिता है कि आप किसी के खिलाफ अनाप शनाप छापते जाओ और जब वह दूसरा पक्ष अपनी बात लिखित रूप में भेजे, इंटरव्यू दे डाले तो उसे प्रकाशित अपलोड न करो. यह भी एक किस्म का यलो जर्नलिज्म, पेड न्यूज पत्रकारिता है. सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर अभिसार शर्मा ने मधु त्रेहन और उनकी कंपनी को कितना व किस तरह से ओबलाइज कर दिया है कि ये लोग एसके श्रीवास्तव का पक्ष नहीं छाप रहे हैं?

इसी पूरे मामले में भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह ने एसके श्रीवास्तव से विस्तार से बात की ताकि असलियत दुनिया के सामने आए. साथ ही यह भी जानने की कोशिश की कि आखिर ये अभिसार शर्मा नामक जीव इतना बेचैन क्यो हैं और क्यों आत्मुग्धता की चरम या आत्मविक्षिप्तता के परम पर जाकर खुद को खुद के हाथों पाक-साफ घोषित कर रहा है. एसके श्रीवास्ताव ने न्यूज लांड्री और अभिसार शर्मा की जमकर धुलाई की है. देखें ये वीडियो : https://www.youtube.com/watch?v=AmmbpgiB53I

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जब सोनिया गांधी सत्ता की सर्वेसर्वा थीं तो उनके कालेधन के बारे में उसी दौर में भड़ास पर स्टोरी छापी गई थी

Yashwant Singh : मूर्ख भाजपाइयों और भक्तों को बता दें कि जब वो चुप्पी मारे बिल में थे तब भी हम लोग सत्ता के खिलाफ लिखते थे और सीना ठोक कर लिखते थे. ये स्टोरी भड़ास के तब कंटेंट एडिटर रहे Anil Singh ने तैयार की थी और जून 2011 में तब प्रकाशित किया था भड़ास पर जब कांग्रेस की सरकार केंद्र में थी और आदरणीया सोनिया जी सर्वेसर्वा हुआ करती थीं. मीडिया का काम ही सत्ता में बैठे लोगों की कुनीतियों और कदाचारों का खुलासा होता है.

अब ये और बात है कि आजकल चलन बदलने लगा है और मीडिया का मतलब सत्ता की दलाली हो गया है. सच्चा पत्रकार वही जो सत्ता के खिलाफ ताल ठोक के, बिना डरे सब कुछ लिख डाले, सच सच, बिना अंजाम की परवाह किए. मरना तो सबको एक बार है. बार बार मर मर कर जीना क्या. पुरानी स्टोरी का लिंक इसलिए शेयर कराया ताकि भक्तों, चापूलसों, मूर्खों को यह बता सकूं कि तुम जब दुम दबाए बैठे थे, तब भी हम लोग सत्ता प्रतिष्ठानों और दलाल मीडिया घरानों से टकराते थे और उसके नतीजे में थाना पुलिस जेल तक गए, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ, बल्कि और बढ़ गया.

अगर सोनिया गांधी के विदेशी बैंक में काला धन के बारे में उनके सत्ता में रहते लिखने का हौसला है तो सत्ता में रहते नरेंद्र मोदी और केजरीवाल के खिलाफ भी लिखने का उतना ही दम है और लगातार लिख भी रहे हैं. कम अक्ल वाले अपढ़ और गालीबाज भक्तों को स्मृति दोष व दूरदृष्टि की बामारी हो तो हम क्या करें.

भड़ास पर छपी स्टोरी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :

http://news.bhadas4media.com/yeduniya/49-swiss-magzine-swiss-bank-report

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही बाबा रामदेव और बालकृष्ण की ये तस्वीर, जानें क्यों…

 

जब तक कांग्रेस की सरकार केंद्र में थी, बाबा रामदेव रोज काला धन की हुंकार भरते थे. काला धन का हिसाब अपने भक्तों और देशवासियों को बताते थे कि अगर वो काला धन आ गया तो देश की सारी समस्याएं हल हो जाएंगी. काला धन के मुद्दे को नरेंद्र मोदी ने भी लपका और बाबा रामदेव की मुहिम को समर्थन किया. माना जाने लगा कि रामदेव और नरेंद्र मोदी की जोड़ी अगर जीतकर केंद्र में सरकार बनाने में सफल हो गई तो यह तो तय है कि देश में काला धन वापस आ जाएगा. लेकिन जोड़ी के जीतने और सरकार बनाने के बावजूद काला धन देश वापस नहीं आया.

मोदी के आदमियों ने तो अपने वोटरों को औकात बताने के लिए यहां तक कह दिया कि काला धन वाला नारा केवल नारा था यानि जुमला था, जनता को भरमाने, वोट खींचने के लिए. खैर, बेचारी जनता, वो तो अब पांच साल के लिए झेलने को मजबूर है. पर बाबा रामदेव ने गजब की चुप्पी साध रखी है. कुछ बोलते ही नहीं. काला धन को लेकर उनका अभियान भी शांत हो गया है.

इसी बीच सोशल मीडिया पर ढेर सारे लोग बाबा रामदेव से सवाल करने लगे कि आखिर वे काला धन के मसले पर केंद्र सरकार को घेरते क्यों नहीं, काला धन के लिए अब वो अभियान चलाते क्यों नहीं. वे काला धन पर अब कुछ बोलते क्यों नहीं? इसी बीच, कुछ लोगों ने बाबा रामदेव और उनके प्रधान शिष्य बालकृष्ण की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर यह कहते हुए शेयर कर दी कि देखिए, बाबा और उनके चेले काला धन खोजने में लगे हैं. इस मजेदार तस्वीर को काला धन खोज से जोड़ देने के बाद लोगों की हंसी रोके नहीं रुक रही है. जो भी इसे देख रहा है, अपने वाल पर शेयर कर रहा है.

तस्वीर में बाबा रामदेव और बालकृष्ण एक टीले नुमा पहाड़ी या पहाड़ी नुमा टीले, जो कह लीजिए, पर कुछ तलाश रहे हैं. जाहिर है, वह कोई जड़ी बूटी तलाश रहे होंगे, लेकिन काला धन तलाशने का जो जुमला सोशल मीडिया वालों ने इस तस्वीर के कैप्शन के रूप में फिट किया है, वह खूब हिट जा रहा है. लोग बाबा रामदेव से उम्मीद तो करते ही हैं कि संत होने के नाते वो अपनी चुप्पी का राज सच सच बताएंगे.

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बीजेपी के चंदे का काला धंधा देखिए… ऐसे में मोदी जी क्यों नहीं पूंजीपतियों के हित में काम करेंगे….

दिल्‍ली विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी को चंदे के मुद्दे पर घेरने वाली बीजेपी के चंदे का खेल देखकर आप हैरान रह जाएंगे। खबरों के अनुसार भाजपा के खजाने में 92 फीसदी चंदा 2014 में लोकसभा चुनावों के ठीक पहले आया। बीजेपी को 20 हजार रुपए से अधिक 92 फीसदी चंदा बड़े कॉर्पोरेट घरानों ने दिया। उन घरानों में भारती समूह की सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और केयर्न इंडिया ने 2014 में ही भाजपा को चंदा दिया। संयोग से 2014 से पहले इन घरानों ने भाजपा को चंदा दिया भी नहीं था। ये जानकारियां भाजपा द्वारा चुनाव आयोग में को दिए गए वर्ष 2013-14 के चंदो के आंकड़ों में सामने आई है। एसोशिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (ADR) ने आंकड़ों के विश्लेषण के बाद बताया है कि लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा को 157.84 करोड़ रुपए चंदा बड़े कॉर्पोरेट घराने ने ही दिया।

एडीआर के मुताबिक, 20 हजार रुपए से अधिक देने वालों में महज 8 फीसदी चंदा किसी व्यक्ति के नाम से आया। लगभग 772 व्यक्तियों ने भाजपा को 12.99 करोड़ रुपए चंदा दिया। उल्लेखनीय है कि 20 हजार रुपए या उससे अधिक चंदा देने पर ही व्यक्ति या संस्‍थान को पैन नंबर देना पड़ता है और चंदा देने वाले की पहचान ज‌ाहिर हो पाती है। मोबाइल कंपनी एयरटेल के मालिक भारती समूह के सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भाजपा को सबसे अधिक 41.37 करोड़ चंदा दिया। उसके बाद स्टरलाइट इंडस्ट्रीज ने 15 करोड़ और केयर्न इंडिया 7.50 करोड़ की रकम दो चंदों के रूप में दी।

रोचक बात यह है कि सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 2013-14 में कांग्रेस को 36.50 करोड़ रुपए चंदा दिया। कांग्रेस को सबसे ज्यादा चंदा देने वालों में ये ट्रस्ट भी था। भारती समूह का यही ट्रस्‍ट शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को चंदा देने में भी आगे रहा। उसने एनसीपी को चार करोड़ का चंदा दिया, जो उस पार्टी का सबसे बड़ा चंदा दिया। 2013-14 में भाजपा, कांग्रेस, एनसीपी और सीपीआई के चंदों में 2012-13 की तुलना में 158 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2012-13 में भाजपा का चंदा 83.19 करोड़ रुपए था, अगले ही वर्ष यह 105 फीसदी की वृद्घि की साथ 170.86 करोड़ रुपए हो गया।

भाजपा ने 2013-14 में जो चंदा जुटाया, वह उसी साल में कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई और सीपीएम द्वारा ज़ुटाए गए कुल चंदे के दोगुने से भी ज्यादा था। सभी पार्टियों ने 20 हजार के चंदे से अधिक की जो रकम घोषित की उसका कुल योग 247.79 करोड़ रुपए है। कुल 2361 व्यक्तियों या संस्थानों के चंदों की घोषणा की गई है। बसपा का कहना है कि उसे 20 हजार से अधिक का एक भी चंदा नहीं मिला, इसलिए उसने अपने चंदे की घोषणा भी नहीं की। लोकसभा चुनावों में भाजपा को जो चंदा मिला, वह राष्‍ट्रीय पार्टियों को मिले कुल चंदे का 69 फीसदी था। भाजपा को औसतन हर एक चंदेदार से 13.19 लाख रुपए मिले, जबकि कांग्रेस के लिए यही आंकड़ा 11.‍70 लाख रुपए का है और एनसीपी एक करोड़ रुपए है। सीपीआई को औसतन हर चंदेदार से 3.23 लाख रुपए मिला, सीपीएम के लिए यह रकम 4.‍03 लाख रुपए थी दिल्‍ली वालों ने लोकसभा चुनावों में सर्वाधिक चंदा दिया। दिल्‍ली के 119 चंदेदारों ने भाजपा को 45.21 करोड़ रुपए दिए। कांग्रेस को भी दिल्‍ली से 39.05 करोड़ का चंदा मिला, जबकि सीपीआई को दिल्‍ली से 54.6 लाख और सीपीएम 1.88 करोड़ रुपए का चंदा मिला। सभी आंकड़े वित्त वर्ष 2013-14 के हैं। (साभार- न्यूज24आनलाइन)

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मीडिया ने देश का मुंह काला कर दिया, माफी मांगे : आजम खां

लखनऊ के पत्रकार तो जैसे ढोलक हो गए हों. जब चाहे जो चाहे, बजा दे रहा है. कभी अखिलेश तो कभी आजम. ये जुगलबंदी जमकर मीडिया को फुटबाल की तरह यहां से वहां पीट दौड़ा रही है. आजम खान ने फिर मीडिया पर विष वमन किया है. यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खां ने लखनऊ में मीडिया को जमकर लताड़ते हुए आरोप लगाया कि मीडिया ने अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए देश की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर देश का मुंह काला कर दिया है, इसके लिए मीडिया देश से माफी मांगे.

आजम के मुताबिक मीडिया के कारण देश को बहुत घाटा पहुंचेगा, मीडिया ने अनर्थ किया है. टीआरपी बढ़ाने के लिए मीडिया महीनों तक मुजफ्फनगर दंगे लाशें दिखाता रहा. मीडिया का तो यह हाल है कि खुद जांच करेंगे, रिपोर्ट लिखेंगे और फैसला भी खुद ही करेंगे. मीडिया को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए. मुजफ्फरनगर दंगे पर आजम ने कहा कि मीडिया ने जलते हुए घर एवं बलात्कारियों को नहीं दिखाया, क्योंकि इसमें उनकी टीआरपी नहीं बढ़नी थी. मीडिया में यह बड़ी गलतफहमी है कि सरकारें पलट देते हैं. मीडिया ने सरकार बनाना व खत्म करना शुरू कर दिया है. वह जो चाहें करें या लिखें.

आजम खान ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग चाहे राज्यपाल हों या राष्ट्रपति उनको अपनी सीमा में रहना चाहिए. उनकी सीमाएं होती हैं. बेहतर होता राज्यपाल राम नाईक अयोध्या के राम मंदिर मामले में अपने वकार के ऐतबार से बात करते. उन्होंने कहा कि राज्यपाल राम नाईक को सूबे की कानून-व्यवस्था तथा विकास के बारे में बोलना चाहिए. महामहिम की जिम्मेदारी सरकार से ज्यादा है.

आजम ने खुद की तारीफ करते हुए कहा कि लोग मुझे जितना बुरा समझते हैं, हम उतने बुरे नहीं हैं. बोले- मैं पाखंडी नहीं हूं, झूठ नहीं बोलता, हराम का एक पैसा मेरे शरीर में नहीं है. देश लूटने वाले, काले धन जमा करने वाले अगर देशभक्त हैं तो मैं ऐसे लोगों को सैल्यूट करता हूं.  आजम ने मुलायम के जन्मदिन कार्यक्रम के रामपुर में आयोजन के खर्च पर तालिबानी रुपये लगे होने के विवादित बयान पर सफाई दी. उन्होंने कहा लगातार 20 दिनों से मीडिया ने तंग कर दिया था,  इस कारण ऐसा करारा जवाब देना ही पड़ा.

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एक ‘नेशनल न्यूज’ चैनल में भी लगा है यादव सिंह का पैसा!

एक बड़ी खबर एक नेशनल न्यूज चैनल को लेकर आ रही है. पता चला है कि एक नए लांच हुए नेशनल न्यूज चैनल में यादव सिंह का पैसा लगा है. यादव सिंह ने अपनी पत्नी के माध्यम से अपनी काली कमाई के एक हिस्से को रियल स्टेट में लगाया तो कुछ हिस्सा इस नए नेशनल न्यूज चैनल में इनवेस्ट किया. कहा जा रहा है कि यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता इस चैनल में निदेशक या किसी अन्य भूमिका में हैं. चर्चा है कि यादव सिंह ने जानबूझ कर इस चैनल में अपनी पत्नी को सक्रिय किया ताकि वह खुद मीडिया की नजरों से बचा रहे. यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता से पूछताछ चल रही है. आरोपी नेशनल न्यूज चैनल पर भी छापा पड़ सकता है और यहां के एसेट जब्त किए जा सकते हैं.

यादव सिंह ने अपनी अरबों की काली कमाई से यूपी सरकार और नौकरशाही को अपनी जेब में कर रखा था. यादव सिंह के खिलाफत करने की हैसियत यूपी सरकार के किसी मंत्री से लेकर नौकरशाह तक की नहीं थी. यादव सिंह ने मीडिया की नजरों से स्वयं को दूर बनाए रखने के लिए एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल में करोड़ों रूपए का निवेश किया. पिछले वर्ष शुरू हुआ यह चैनल राष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश में प्रादेशिक स्तर पर शीर्ष निजी समाचार चैनलों में स्थान रखता है. इस चैनल के संचालकों की टीम में यादव सिंह की पत्नी भी सक्रिय हैं. इस चैनल के कर्ताधर्ता कौन हैं, इसको लेकर लंबे समय तक मीडिया जगत में रहस्य बना रहा क्योंकि जो लोग फ्रंट पर दिखते रहे, वह असली चैनल मालिक नहीं बताए गए. ऐसे में मीडिया का एक हिस्सा इस नेशनल न्यूज चैनल को काले धन की उपज भी शुरू से मानता रहा है. पर सच्चाई पर से परदा अब हटना शुरू हुआ है. कहा जा रहा है कि देर सबेर इस चैनल पर भी गाज गिरेगी और इसे जब्त किया जा सकता है.

उधर, आयकर विभाग की छापेमारी के बाद सुर्खियों में आए उत्तर प्रदेश की नोएडा अथॉरिटी के इंजीनियर इन चीफ यादव सिंह और उसकी अरबों की काली संपत्ति पर यूपी सरकार का रवैया भले ही अभी तक नरम रहा हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ब्लैकमनी पर बनी एसआईटी ने शनिवार को इस मामले में दखल दे दिया है. एसआईटी के निर्देश पर आईटी और सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) यादव सिंह और उसके करीबियों के खिलाफ जांच में मिल रहे तथ्यों को प्रवर्तन निदेशालय के साथ साझा करेगी.

ब्लैकमनी एसआईटी के चेयरमैन रिटार्यड जस्टिस एमबी शाह और वाइस चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिस अरजित पसायत ने लखनऊ में यादव सिंह के खिलाफ जांच का नेतृत्व कर रही सीबीडीटी की चेयरमैन अनीता कपूर और आईटी डीजी कृष्णा सैनी को निर्देश दिया है कि वह जांच में सामने आ रहे तथ्यों की जानकारी को प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के साथ साझा करें जिससे प्रवर्तन निदेशालय यादव सिंह व उसके सहयोगियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत पूछताछ कर कार्रवाई कर सके. इस पूरे मामले में ब्लैक मनी एसआईटी की दखलंदाजी ने यूपी में सियासी गरमी एकबार फिर बढ़ा दी है. अब तक यादव सिंह मामले से ईडी की दूरी को लेकर सुरक्षित महसूस कर रहे यूपी के कई राजनेताओं और नौकरशाहों को एसआईटी की सक्रियता से झटका लगा है.

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Suspected money laundering by the Adani Group!

Yogendra Yadav : Here is a letter written by former IAS officer (former secretary to government of India) and noted anti-corruption crusader Mr EAS Sarma to various central investigating agencies about the suspected money laundering by the Adani Group. Mr Sarma has pointed out that the Supreme Court appointed Special Investigation Team on black money is investigating the matter and the State Bank of India should not have signed the MoU with the group under investigation for money laundering. Read the letter for yourself and please give a thought on what our Modi Sarkar is up to.

 

From: EAS Sarma <eassarma@gmail.com>
Date: 24 November 2014 7:37:57 am IST
To: rsecy@nic.in, jmg.vc@nic.in, r.sri_kumar@nic.in, cvc <cvc@nic.in>, dcbi@cbi.gov.in, ed-del-rev@nic.in, bjp <ajaitley@sansad.nic.in>, secy-dea <secy-dea@nic.in>, secy-fs@nic.in, cabinetsy@nic.in, drihqrs@nic.in, dridzu@rediffmail.com,adgri@yahoo.com, driazu@nic.in, drikzu@nic.in, driczu@nic.in, ratanpw@yahoo.com, nmisra@rediffmail.com

Subject: Ongoing investigation into suspected money-laundering by Adani Group

To

The CVC,
Directorate of Revenue Intelligence
Govt of India
Director, Enforcement Directorate
Director, CBI

Sir,

Subject:- Ongoing investigation into suspected money-laundering by Adani Group

The enclosed news reporst (Indian Express dated 23-11-2014: “Business SIT, CBI to look into Adani Group case”) indicates that SIT is conducting an investigation into Adani Group’s suspected money laundering case. It appears that the company has over-invoiced imports to the tune of Rs.5,468 Crores and “siphoned off” the amount, apparently to some unknown account.

From the ICIJ website (http://offshoreleaks.icij.org/search country=&q=adani&ppl=on&ent=on&adr=on), it appears that some of the sharehoders of the Adani Group have offshore accounts which could have been in existence without RBI’s knowledge. I enclose extracts of the relevant pages of that website for your information. Also, I enclose an extract of the shareholding pattern of Adani Group to show the link between the holders of the offshore accounts and the group.

I request Directorate of Revenue Intelligence (DRI) to investigate these accounts as a part of the main investigation.

It is ironic that SBI should impromptu announce a huge loan of $1 billion to Adanis in the presence of the Prime Minister for the Group’s Carmichael coal mining project in Australia, without looking at the implications of the ongoing investigation. The loan amount committed approximately equals the amount laundered according to the news reports!

I am confident that you will take these circumstances into account and place all the facts before the apex court appointed SIT.

I request you to inform the Finance Minister and the PMO urgently of the status of the investigation. I hope that each one of you will carry out the investigation expeditiously and fearlessly so that the the facts of the case may be established and the culprits, if any, brought to book.

I am marking a copy of this mail to MOF and the Cabinet Secretary for their information.

Yours sincerely,

E A S Sarma

14-40-4/1 Gokhale Road
Maharanipeta
Visakhapatnam 530002

आम आदमी पार्टी के नेता योगेंद्र यादव के फेसबुक वॉल से.

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यूएनआई चेयरमैन प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी के खिलाफ विजिलेंस जांच, ब्लैकमनी को ह्वाइट करने के आरोप में भी फंसे

समाचार एजेंसी यूएनआई घोटाला प्रकरण में यूएनआई बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर तीन हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है. विजिलेंस ने जिन मुद्दों को जांच के दायरे में रखा है उनमें प्रफुल्ल माहेश्वरी द्वारा एनबी प्लांटेशन के नाम पर किया घोटाला प्रमुख है. क्या प्रफुल्ल माहेश्वरी कुछ बड़े बिल्डर और रिएल स्टेट की कंपनियों की ब्लैक मनी को व्हाइट करने के धंधे में भी शामिल है? इस विषय पर भी जांच हो सकती है.

इस समय मोदी सरकार काले धन के पर्दाफाश पर जोर दे रही है. यह माना जा रहा है कि प्रफुल्ल माहेश्वरी पर अब संकट के बादल गहरा रहे हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ ब्लैक बनी को व्हाइट करने के कुछ दस्तावेजी सुबूत भी हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी अब इस प्रकरण को येन-केन निपटाना चाहते हैं लेकिन परिस्थितियां दिन ब दिन गंभीर होती जा रही हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी ने किसी विश्वास त्रिपाठी नाम के गैर पत्रकार को यूएनआई का डायरेक्टर नियुक्त किया है. ऐसी भी जानकारी है कि विश्वास त्रिपाठी से क्रमश: 50  लाख, 15 लाख और 10 लाख रुपये भी लिए गए थे. प्रफुल्ल माहेश्वरी ने इसके अलावा यूएनआई के पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारियों का पीएफ का पैसा भी हड़प लिया है. पीएफ अधिकारियों ने इस संबंध में प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ मुकदमा  भी पंजीकृत करवाया है.

भड़ास के एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) राजीव शर्मा की रिपोर्ट. संपर्क: 09968329365

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सहारा समूह ने 17,000 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग के लिए फर्जी इनवेस्टर बनाए!

एक बड़ी सूचना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सूत्रों के हवाले से आ रही है कि सहारा समूह ने मनी लांड्रिंग के लिए ढेर सारे फर्जी निवेशक बनाए. इस आशंका / आरोप की जांच के लिए सेबी ने कहा था जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय सक्रिय हो गया है. सेबी ने ईडी को फर्जी निवेशकों के बारे में अपने पास मौजूद समस्त जानकारी दे दी है. सेबी ने सहारा मामले में जांच की रिपोर्ट भी ईडी को सौंप दी है. सेबी रिपोर्ट के आधार पर पीएमएलए कानून के उल्लघंन का मामला बनाएगी.  ईडी जानबूझ कर बनाए गए फर्जी निवेशकों की जांच कर रहा है.

सहारा समूह ने अपनी तरफ से सेबी को निवेशकों के बारे में जो जानकारी दी थी, वह गलत निकली है. सेबी को 20,000 करोड़ रुपये में से करीब 17,000 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग का शक है. इस मामले में उत्तरप्रदेश के एक बड़े राजनेता की भूमिका की भी जांच होगी. पूरे खेल के खुलासे के लिए प्रवर्तन निदेशालय की एक टीम जल्द ही सुब्रत रॉय से तिहाड़ जेल में पूछताछ कर सकती है.  ईडी ने सहारा के खिलाफ ईसीआईआर (एनफोर्समेंट केस इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट) दाखिल कर दिया है. उधर, सहारा का कहना है प्रवर्तन निदेशालय इस मामले की जांच नहीं कर सकता क्योंकि सेबी की जांच फिलहाल जारी है.

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विदेश से आनेवाले ब्लैकमनी में से मुझे भी सवा सौ करोड़ भारतीयों की तरह 15 लाख रुपये मिलने की आशा है

मेरे तमाम लेनदार कृपया तत्काल तकादा लिखित में बासबूत पेश करें.  विदेश से आनेवाले ब्लैकमनी में से मुझे भी सवा सौ करोड़ भारतीयों की तरह 15 लाख रुपये मिलने की आशा है. 15 लाख मिलते ही सबकी पाई पाई चुका देने का वादा रहा.  एक साल से 15 लाख रुपए की प्लॉनिंग कर रहा हूं। 15 लाख कहां-कहां खर्च हो सकते है, इससे किस-किस का कर्जा पटाया जा सकता है, घर में क्या सामान आ सकता है, बीवी को कितने गहने दिला सकता हूं, बच्चों को कौन-सी गाड़ी सूट करेगी, बुढ़ापे के लिए कितने पैसे बचाकर रखना मुनासिब होगा आदि-आदि में उलझा हुआ हूं। मुझ जैसे मध्यवर्गीय आदमी के लिए 15 लाख बहुत मायने रखते हैं। कभी 15 लाख रुपए इकट्ठे देखे नहीं। हां, बैंक में जरूर देखे है, लेकिन वो अपने कहां। अने १५ लाख नगद हो तो बात ही क्या। कुछ न करो 15 लाख रुए खाते में ही रखे रहने दो, तो 12 – 13  हजार रुपए के आसपास ब्याज ही आ जाएगा। एक तरह से पेंशन समझो और मूल धन तो अपना है ही। यह पंद्रह लाख रुपए तो मेरे अपने है। बीवी, बच्चों सबके अपने-अपने पंद्रह लाख होंगे पर बीवी बच्चों के पैसे पर मैं निगाह क्यों डालूं। मेरा अपना भी तो स्वाभिमान है।

लोकसभा चुनाव के पहले जब यह पता चला कि विदेश में भारत का इतना काला धन जमा है कि अगर वह भारत लाया जाए तो हर आदमी को 15 लाख रुपए मिल सकते है। मेरे घर में कुल 5 सदस्य है, तो इस हिसाब से मेरे घर के लोगों को मिलाकर 75 लाख रुपए होते है। पर मैं ठहरा लोकतांत्रिक आदमी। बीवी, बच्चों को करने दो उनका हिसाब-किताब। मैं तो अपने 15 लाख पर ही अडीग रहूंगा। न किसी को पैसा दूंगा, न किसी से पैसा लूंगा। हिसाब लगा-लगाकर कई रजिस्टर फाड़ चुका हूं। 3-4 लाख रुपए की एक कार आ जाएगी। 1 लाख रुपए से घर का सामान खरीद लूंगा। 50 हजार रुपए में अपने लिए शानदार वार्ड रोब बनवाउंगा। डिजाइनर घड़ी 20-25 हजार की। 50 हजार रुपए का शानदार मोबाइल। 1 लाख रुपए घर की रंगाई-पुताई पर खर्च। इस सब के बाद भी अच्छा खासा पैसा बचा रहेगा। बचे हुए पैसे को अगर में बैंक में रख दूं और उसके ब्याज से काम चलाऊं, तो भी ज्यादा तकलीफ नहीं होने वाली। बीवी से इन सब बातों पर चर्चा करने का कोई मतलब है नहीं क्योंकि वह ठहरी बचत की प्रवृत्ति वाली। जिंदगी जीना उसे कहां आता है? पाई-पाई का हिसाब तो पूछती रहती है। पर मैं उससे उसके पंद्रह लाख रुपए के बारे में कुछ भी नहीं पूछुंगा। लोकतंत्र है सबको अपने पैसे खर्च करने का हक है और मैं कोई इतना गयागुजरा नहीं कि दूसरे के पैसे पर नजर डालूं। इतना डरपोक भी नहीं कि अपने पैसे किसी और को उड़ाने दूं।

रजिस्टर पर रजिस्टर, डायरी पर डायरी भरी पड़ी है। कईयों को तो फाड़-फाड़कर पेंâक चुका हूं। रोज रात को सपने में 15 लाख रुपए दिखाई देते है। सुबह पंद्रह लाख रुपए की कल्पना में बीत जाती है। आते-जाते सोते-उठते गरीबी दूर होने का विचार ही जिंदगी को नई ऊर्जा से भर देता है। जिंदगी में इतनी खुशियां पहले कभी नहीं देखी। अब जाकर जीवन धन्य हुआ है। कई नासमिटे कहते है कि पंद्रह लाख तो मिलेंगे, पर उसमें से टीडीएस कट जाएगा। भई आपको इतने पैसे मिलेंगे, तो सरकार का भी हक है कि उससे इनकम टैक्स काट लें। अधिकतम इनकम टैक्स है 30 प्रतिशत। अब अगर सरकार ये मानें कि हम ३० प्रतिशत के ब्रेकेट में है, तो भी 4.50 लाख काटकर 10 लाख 50 हजार रुपए तो बनते ही है। वैसे अपन 30 प्रतिशत के ब्रेकेट में नहीं है, पर अगर सरकार चाहें तो देश के लिए साढ़े चार लाख रुपए का सहयोग करने के लिए भी तैयार है। एक जागरुक नागरिक होने के नाते हमें पता है कि हमारे पैसे से ही सरकार चलती है। मंत्रियों के हवाईजहाज हमारे टैक्स के पैसे से उड़ते है। करोड़ों के शपथ समारोह में हमारे खून-पसीने की कमाई उड़ाई जाती है। सब ठीक है। खूब घूमो हवाईजहाज में, ताजपोशी के शानदार प्रोग्राम करो, महंगी-महंगी कारों में घूमो, सेवन स्टार होटलों में ऐश करो, कोई बात नहीं। बस हमारे15 लाख रुपए हमें लौटा दो। चाहो तो उसमें से भी टैक्स काट लो।

हिसाब बनाते-बनाते काफी वक्त बीत गया है। एक सीए कह रहे है कि यह 15 लाख रुपए सरकारी खजाने में जमा हो जाएंगे। आपको एक पैसा भी मिलेगा नहीं। आपने जब कमाया ही नहीं है, तो सरकार आपको यह पंद्रह लाख रुपए क्यों दें। राहु लगे ऐसे सीए को। हमारे पैसे हमको देने में उसकी नानी मर रही है। सीए न हुआ, अरुण जेटली हो गया। हमारा पूरा पैसा ही खाने के मूड में है। पर वह खा नहीं पाएंगे। हमारी बद्दुआ लगेगी। चुनाव के पहले इतना ज्ञान देते थे कि भैया हमारा इतना पैसा विदेश के बैंकों में है कि हरेक को पंद्रह लाख रुपए मिल सकते है। 5-10 प्रतिशत कम ज्यादा कर लो, पर पैसे तो लौटाओ। भरोसा है कि अगले चुनाव तक मेरे 15 लाख रुपए का हिसाब हो जाएगा।

लेखक प्रकाश हिन्दुस्तानी मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनका यह लिखा ‘वीकेंड पोस्ट’ में प्रकाशित हो चुका है.

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आइये, काले धन को वैध बनाएं

जैसा कि सर्वविदित है भारत में काले धन को वैध बनाने की हाल की गतिविधियां राजनीतिक दलों, कॉरपोरेट कंपनियों और शेयर बाजार के माध्यम से हुई हैं। काले धन को वैध बनाने को रोकने के लिए मनी-लॉन्ड्रिंग निरोध अधिनियम  2002, 1 जुलाई 2005 को प्रभाव में आया था। धारा 12 (1) बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और बिचौलियों पर निम्नांकित दायित्व निर्धारित करता है (क) निर्देशित किये जाने वाले लेनदेनों की प्रकृति और मूल्य का विवरण देने वाले रिकॉर्डों को कायम रखना, चाहे इस तरह के लेनदेनों में एक एकल लेनदेन या एकीकृत रूप से एक दूसरे से जुड़े हुए लेनदेनों की एक श्रृंखला शामिल हो और जहां लेनदेनों की ऐसी श्रृंखला एक महीने के भीतर देखी गयी हो; (ख) खंड (क) में संदर्भित लेनदेनों की जानकारी और अपने सभी ग्राहकों की पहचान के रिकॉर्ड्स निर्धारित की जाने वाली अवधि के भीतर निदेशक के समक्ष प्रस्तुत करना. धारा 12 (2) में यह प्रावधान है कि उपरोक्त उल्लिखित उप-खंड (1) में संदर्भित रिकॉर्डों को लेनदेन पूरा होने के बाद दस साल तक बनाए रखा जाना चाहिए। अधिनियम के प्रावधानों की अक्सर समीक्षा की जाती है और समय-समय पर विभिन्न संशोधन पारित किये गए हैं।

काले धन को वैध बनाना (मनी लॉन्डरिंग) अवैध रूप से प्राप्त धन के स्रोतों को छिपाने की कला है। अंततः यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा आपराधिक आय को वैध बनाकर दिखाया जाता है। इसमें शामिल धन को नशीली दवाओं की सौदेबाजी, भ्रष्टाचार, लेखांकन और अन्य प्रकार की धोखाधड़ी और कर चोरी सहित अनेक प्रकार की आपराधिक गतिविधियों के जरिये प्राप्त किया जा सकता है। काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया अक्सर तीन चरणों में पूरी होती है: पहला, कुछ माध्यमों से वित्तीय प्रणाली में नगदी को डाला जाता है (“प्लेसमेंट”), दूसरे चरण में अवैध स्रोत के छलावरण के क्रम में जटिल वित्तीय लेनदेनों को निष्पादित करना (“लेयरिंग”) शामिल है और अंतिम चरण अवैध राशियों के लेनदेनों से उत्पन्न धन को प्राप्त करना अपरिहार्य बना देता (“इंटीग्रेशन”) है। इनमें से कुछ चरणों को परिस्थितियों के आधार पर छोड़ा जा सकता है; उदाहरण के लिए, वित्तीय प्रणाली में पहले से मौजूद गैर-नकदी आय के प्लेसमेंट की कोई आवश्यकता नहीं होगी। काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया कई अलग-अलग रूपों में संपन्न होती है हालांकि अधिकांश तरीकों को इनमें से कुछ प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है। इनमें “बैंक की विधियां, स्मर्फिंग [जिसे स्ट्रक्चरिंग के रूप में भी जाना जाता है], मुद्रा विनिमय और दोहरा-चालान बनाना” शामिल हैं। यह प्लेसमेंट की एक विधि है जिसके द्वारा नगदी को छोटी-छोटी जमा राशियों में बाँट दिया जाता है, इस विधि का प्रयोग काले धन को वैध बनाए जाने के संदेह को मात देने और काले धन को वैध बनाने के खिलाफ सूचना की आवश्यकताओं से बचने के लिए किया जाता है। इसका एक उप-घटक है नगदी की छोटी-छोटी राशियों का प्रयोग धारक के लेखपत्रों, जैसे कि मनी ऑर्डर को खरीदने में करना और उसके बाद अंततः उन्हें फिर से छोटी-छोटी राशियों में जमा करना। किसी अन्य अधिकार क्षेत्र में नगदी की प्रत्यक्ष रूप से तस्करी जहां इसे एक वित्तीय संस्थान में जमा कर दिया जाता है, जैसे कि एक ऑफशोर बैंक जहां बैंक में काफी गोपनीयता बरती जाती है या काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया कम जटिल होती है। ऐसा व्यवसाय जो आम तौर पर नकदी जमा प्राप्त प्राप्त करता है वह अपने खातों का इस्तेमाल वैध और आपराधिक दोनों तरह से उत्पन्न नगदी के संपूर्ण हिस्से को अपनी वैध आय बताकर जमा करने में करेगा. अक्सर, व्यापार की कोई वैध गतिविधि नहीं होगी। धन के आवागमन को छिपाने के लिए चालानों को कम या अधिक करके तैयार करना। न्यास और मोहरा कंपनियां धन के असली मालिक को छिपा देती हैं। न्यास और कॉरपोरेट साधनों को अपने अधिकार क्षेत्र के आधार पर अपने असली हितकारी, मालिक के बारे में खुलासा करने की जरूरत नहीं होती है। काले धन को वैध बनाने वाले व्यक्ति या अपराधी ख़ास तौर पर एक ऐसे अधिकार क्षेत्र में जहां काले धन को वैध बनाने वालों पर नियंत्रण की प्रणाली कमजोर होती है, किसी बैंक में एक नियंत्रक हित खरीद लेते हैं और उसके बाद बैंक के माध्यम से जांच के बिना धन का आदान-प्रदान करते हैं।

कोई व्यक्ति नगदी के साथ एक कैसीनो या एक घुड़दौड़ ट्रैक में प्रवेश करेगा और चिप्स खरीदेगा, कुछ देर के लिए खेलेगा और उसके बाद अपने चिप्स को नगदी में बदल लेगा जिसके लिए उसे एक चेक जारी किया जाएगा। उसके बाद काले धन को वैध बनाने वाला व्यक्ति चेक को उसके बैंक में जमा करने में सक्षम होगा और इसके जुए में जीती गयी राशि होने का दावा करेगा। अगर कैसीनो संगठित अपराध के नियंत्रण में है और काले धन को अवैध बनाने वाला व्यक्ति उनके लिए काम करता है तो वह व्यक्ति अवैध रूप से प्राप्त राशि को कसीने में किसी उद्देश्य के लिए छोड़ देगा और आपराधिक संगठन द्वारा उसका भुगतान अन्य निधि के जरिये किया जाएगा। रियल एस्टेट (अचल संपत्ति) को अवैध आय के जरिये खरीदा और बेचा जा सकता है। बिक्री से प्राप्त आय बाहरी लोगों के सामने वैध आय प्रतीत होता है। वैकल्पिक रूप से, संपत्ति के मूल्य में हेरफेर की जाती है; विक्रेता एक ऐसे अनुबंध पर सहमत होगा जिसमें संपत्ति के मूल्य को कम करके आंका जाता है और इस अंतर को पाटने के लिए वह आपराधिक आय प्राप्त करेगा। तकनीकी रूप से यह काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया बिलकुल भी नहीं है; जबकि काले धन को वैध बनाने में आम तौर पर धन के स्रोत को छिपाना शामिल होता है जो अवैध है, आतंकवादी वित्तपोषण संबंधी मामलों में स्वयं धन के गंतव्य को छिपाया जाता है जो कि अवैध है। कंपनियों के पास ऐसे अपंजीकृत कर्मचारी हो सकते हैं जिनके पास कोई लिखित अनुबंध नहीं होता है और जिन्हें नगद वेतन दिया जाता है। उन्हें भुगतान करने के लिए काली नकदी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

काले धन को वैध बनाने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं और इसका विस्तार सरल से लेकर जटिल आधुनिकतम तकनीकों के रूप में हो सकता है। कई विनियामक और सरकारी प्राधिकरण दुनिया भर में या अपनी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के भीतर वैध बनाए गए काले धन की मात्रा के लिए हर साल अनुमान जारी करते हैं। 1996 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अनुमान लगाया था कि दुनिया भर में वैश्विक अर्थव्यवस्था के दो से पाँच प्रतिशत हिस्से में काले धन को वैध बनाने का मामला शामिल था। हालांकि, काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया का मुकाबला करने के लिए एक अंतःसरकारी निकाय, एफएटीएफ का गठन किया गया था जिसने यह स्वीकार किया कि “कुल मिलाकर वैध बनाए गए काले धन की मात्रा का एक विश्वसनीय अनुमान प्रस्तुत करना पूरी तरह से असंभव है और इसलिए एफएटीएफ द्वारा इस संदर्भ में कोई आंकड़ा प्रकाशित नहीं किया जाता है। इसी प्रकार शैक्षिक टिप्पणीकार भी स्वीकृति के किसी भी स्तर तक इस धन की मात्रा का अनुमान लगाने में असमर्थ रहे हैं।

लेखक शैलेन्द्र चौहान जयपुर के निवासी हैं. उनसे संपर्क 07838897877 के जरिए किया जा सकता है.

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एनडीटीवी की काली कथा को ईटी में विज्ञापन के रूप में छपवाया, आप भी पढ़ें

एनडीटीवी वाले खुद को साफ पाक और दूध का धुला की तरह पेश करते हैं लेकिन इनके दामन पर भी दाग कम नहीं हैं. एनडीटीवी के एक शेयरहोल्डर ने एनडीटीवी की पूरी कहानी बाकी शेयर होल्डर्स को सुनाई है, दी इकानामिक टाइम्स में विज्ञापन छपवाकर. आइए हम आपको भी पढ़ाते हैं इकानामिक टाइम्स में प्रकाशित एनडीटीवी की काली कथा…. इसे पढ़कर आप खुद दंग हो जाएंगे कि आखिर प्रणय राय, राधिका राय सरीखे ईमानदार कहे जाने वाले मीडिया मालिकान भी इतने बड़े चोर हैं….

इस कहानी में एनडीटीवी मनी लांड्रिंग स्कैम का भी उल्लेख है. 30 अक्टूबर 2014 के दी इकानामिक टाइम्स के अंक में एनडीटीवी  के एक माइनारिटी शेयरहोल्डर ने एनडीटीवी द्वारा छिपाई गई कई बातों को उजागर कर बाकी शेयर होल्डर्स को आगाह किया है ताकि वे सारे तथ्यों के आधार पर पूरी तरह सोच समझ कर कंपनी के बारे में राय बनाएं और आगे का निर्णय लें.

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मोदी सरकार ब्लैकमनी वालों को बचाने के लिए हर (गैर)कानूनी हथकंडा इस्तेमाल कर रही है!

 

Vinod Sharma : The NDA seems to be be running it’s black money narrative as a television serial. It cannot script a single shot show for the climax it promised the people is a long distance away. In communication terms, it is called the teasing effect. But can boomerang if overused. The downside of it is that you keep reminding people of your inability to meet your own deadlines.

वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा के फेसबुक वॉल से.

Mukesh Yadav : मोदी सरकार ब्लैकमनी वालों को बचाने के लिए हर (गैर)कानूनी हथकंडा इस्तेमाल कर रही है! आज तो उसने कोर्ट में दिए गए हलफनामे में यहाँ तक कह दिया कि किसी भारतीय के विदेशों में खता होने का मतलब यह नहीं की वह गैर कानूनी ही हो!  “Every foreign account held by an Indian may not be illegal and names cannot be disclosed unless there is prima facie evidence of wrongdoing…” फिर 136 नाम देने का हल्ला बीजेपी/मोदी सरकार ने मचा रखा था दिए सिर्फ तीन! यह सब तब हो रहा है जब बीजेपी के ही रामजेठ मलानी और सुब्रमण्यम स्वामी लगातार कह रहे हैं कि कोई कानूनी अड़चन नहीं है, सरकार को तुरंत सभी 800 नाम बता देने चाहिए। ये रामदेव कहा भूमिगत हो गए? खोजो भई, इसी बहाने उनके साथ भी सेल्फी वेल्फी ले लेना! ये अन्ना वन्ना कहाँ हैं? ये मोदी अडवाणी की सहानुभूति की बाट झोने वाली किरण विरण बेदी कहाँ हैं? खोजो भई! आपके लिए ग्रुप सेल्फी का एक बढ़िया मौका हो सकता है! काले धन ने मोदी को एक्सपोज कर दिया और मोदी ने मीडिया को…है कोई उम्मीद?

पत्रकार मुकेश यादव के फेसबुक वॉल से.

Badrinath Verma : विदेशों में जमा कालाधन को 100 दिनों में वापस लाने का वादा कर सत्ता शिखर पर पहुंचे नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लिए पांच महीने से भी अधिक हो गये। कालाधन वापस आना तो दूर, नाम तक का खुलासा नहीं कर पाये। जी हां, खोदा पहाड़ और निकली चुहिया वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए सरकार की तरफ से आज सुप्रीम कोर्ट में महज तीन नामों का खुलासा कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई। जबकि अगस्त 2011 में विकिलीक्स ने लगभग एक हजार नामों का खुलासा बाकायदा एकाउंट नंबर व उसमें जमा ब्लैक मनी के साथ किया था। इसमें राजीव गांधी, लालू प्रसाद यादव, शरद पवार से लेकर नीरा राडिया तक के नाम हैं। ऐसे में सवाल है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली के उस बयान का क्या हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि नाम उजागर होने पर कांग्रेस को शर्मिंदा होना पड़ेगा। फिर आखिर ऐसा क्या हो गया कि कांग्रेस को शर्मिंदगी से बचा लिया गया, कहीं ऐसा तो नहीं कि नाम उजागर होने पर भाजपा के मुंह पर भी कालिख पुत जाएगी। इसीलिए कुत्ता कुत्ते का मांस नहीं खाता कहावत को दृष्टिगत रखते हुए नामों को उजागर करने से परहेज किया गया है। आप मित्रों का क्या ख्याल है….

पत्रकार बद्रीनाथ वर्मा के फेसबुक वॉल से.

Nitish Kumar : काले धन को लाने वालों के काले मन .. देश की जनता मांगेगी हिसाब ! काले धन पर भाजपा सरकार का रुख उनके नेताओं के काले मन को दिखाता है | भ्रष्टाचार और काले धन को मुद्दा बना कर वोट मांगने वाली सरकार पांच महीने के कार्यकाल के बाद केवल तीन लोगों के नाम जारी कर सकी और वो नाम भी पुष्ट नहीं कर पार रही | क्या इस देश में केवल तीन लोगों के पास कालाधन है ? हर रोज़ भाजपा की धोखाधड़ी और झूठ का नया मामला सामने आता है ! BJP पर्याय बन रही है Bhrasht Jhoothi Partyका!

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नितीश कुमार के फेसबुक वॉल से.

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इत्ता सारा सफ़ेद धन आवे कहाँ से जो हर अख़बार टीवी ख़रीद लेवे?

Om Thanvi : इसके बावजूद समर्थन के लिए दोस्तों और दुश्मनों के सामने याचक बने बैठे हैं? … और मितरो, इतना (सफेद) धन आवे कहाँ से है?

Sheetal P Singh : कहानी तो यहाँ है! इत्ता सारा सफ़ेद धन आवे कहाँ से जो हर अख़बार टीवी ख़रीद लेवे?

Manoj Dash : Manufacturing consent and opinion with in home black money. How can I trust the intent? This is the reason why black money issue is bound to stay in cold storage till next election.

Vandan Kumar : इसीलिए तो स्विस बैंक से वापस लाने लायक कुछ बचा ही नहीं… ‘पाई – पाई’ में से कुछ पाईयाँ ही मिलेंगी!

Zafar Ali : जब तक अम्बानी की मेहर है? कालाधन विदेश से आएगा नहीं चुनाव सामाग्री पे खर्च होगा बस

Kamal Joshi : क्या दादा आप भी….रिलायंस के गैस के दाम ऐसे ही बढ़ गए क्या ? कुछ एक अखबारों में विज्ञापन तो मित्र लोग दे ही सकते है…

फेसबुक से.

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एनडीटीवी मनी लांड्रिंग केस : सीबीआई जांच के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश समेत कइयों ने नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा

A committee led by former Chief Justice of India R.C. Lahoti asks Prime Minister Narendra Modi for a CBI probe into the NDTV money laundering case.

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