नेचरोपैथी के मेडिकल टूल- भूखे रहना सीख गए तो समझो स्वस्थ हो गए! : (पार्ट-5)

अनिल शुक्ल- महाकवि रवींद्रनाथ टैगोर समाज के बुनियादी ढांचे में वैकल्पिक बदलाव के पक्षधर थे। शिक्षा के संसार में भी उनकी दृष्टि शिक्षा के ऐसे वैकल्पिक सांचे को गढ़ने की थी जो अंग्रेजी शिक्षा पद्धति के बिलकुल बरख़िलाफ़ हो। उनका बनाया शिक्षा मंदिर ‘शांतिनिकेतन’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। चिकित्सा के क्षेत्र में भी वह …

नेचरोपैथी का हेडक्वार्टर भागलपुर : (पार्ट-4)

अनिल शुक्ल- अब फिर गंभीर रूप से बीमार हूँ। डायलिसिस शुरू हो गयी है लेकिन साथ ही नेचरोपैथी भी चालू करवाई है ताकि निकट भविष्य में डायलिसिस से मुक्ति मिल सके। बीच के 8-9 साल यद्यपि सुखमय गुज़रे। सन 2012 में ‘तपोवर्द्धन चिकित्सा केंद्र’ में 3 महीना रहकर अपनी किडनी का प्राकृतिक इलाज करवाना जैसा …

भारत में प्राकृतिक चिकित्सा का एक अनूठा केंद्र : (पार्ट-3)

अनिल शुक्ल- यह पता चलने पर कि मुझे किडनी का रोग है और आगरा का ‘एसएन मेडिकल कॉलेज’ का नेफ्रॉलॉजी विभाग बिना किसी प्राध्यापक की नियुक्ति के सूना पड़ा है, मैंने नवेंदु (अपने बड़े बेटे) से ‘एम्स’ में दिखाने का इंतज़ाम करने को कहा। उसने उसी शाम मुझे बताया कि आने वाली बृहस्पतिवार को मेरा …

नेचरोपैथी की दास्तान : (पार्ट-2)

अनिल शुक्ल- यूरोप में वह 18वीं सदी दौर था जब सामंतवाद को ठिकाने लगाता पूंजीवाद अपने व्यापारिक स्वरूप को तिलंजलि देकर तेजी से औद्योगिक पूंजीवाद की सीढ़ियों चढ़ रहा था। भाप की उर्जा का आविष्कार उसका सबसे बड़ा हथियार था और इसी हथियार के दम पर उसने अपने ख़ज़ाने को ‘पूंजी’ के बड़े स्टॉक से …

नेचरोपैथी ने वरिष्ठ पत्रकार अनिल शुक्ल के जीवन में कर दिया कमाल : (पार्ट-1)

आगरा के निवासी वरिष्ठ पत्रकार, रंगकर्मी और सोशल एक्टिविस्ट अनिल शुक्ल ने अपनी पूरी कहानी सिलसिलेवार ढंग से फेसबुक पर बयां की है. किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे अनिल शुक्ला ने डायलिसिस कराने के डाक्टर के निर्देश को कुबूल करने के साथ साथ नेचरोपैथी भी शुरू कर दी ताकि आने वाले दिनों में …