वेबसाइट और एप्प की तकनीकी दुनिया : बहुत कठिन है डगर पनघट की…

आजकल इन्टरनेट का ज़माना है. जिसे देखो वो वेबसाइट खोल रहा है. एप्प लांच कर रहा है. बड़ी और कारपोरेट कंपनियों की बात अलग रखिए जिनके पास खूब पैसा है और वो मार्केट के ब्रेस्ट ब्रेन और बेस्ट टेक कंपनी को अपने पोर्टल व एप्प के लिए हायर करते हैं. मैं बात कर रहा हूं उन साथियों की जो कम पूंजी में वेबसाइट, एप्प आदि लांच तो कर देते हैं लेकिन उनके टेक्निकल सपोर्टर ऐसे नहीं होते जो एक लेवल के बाद वेंचर को नई उंचाई पर ले जा सकें. वेबसाइट बना देना, चला देना बिलकुल अलग बात है. इसे मेनटेन रखना, इसे हैक से बचाना, इसे ज्यादा ट्रैफिक के दौरान संयत रखना, इसे लगातार सर्च इंजन फ्रेंडली बनाए रखना, इसे मजबूत सर्वर से जोड़े रखना दूसरी बात होती है.

वो चार कारण जिसके चलते हिंदी वेब मीडिया अपनी चमक खो रहा है…

हिंदी न्यूज वेब मीडिया का बिजनेस जिस एनर्जी के साथ आगे बढ़ रहा था, वह फिलहाल मुझे कम होता दिख रहा है। इस इंडस्ट्री में मेरी शुरुआत 2012 के जनवरी में हुई थी और 2015 के मार्च में मैंने इंडस्ट्री छोड़ दी। इन तीन सालों में कभी ऐसा नहीं लगा कि हिंदी न्यूज वेब का बिजनेस मंदा होगा। ऐसा लग रहा था कि इसमें ही पत्रकारिता और पत्रकारों का भविष्य है। लेकिन 2015 के आखिरी महीनों में मामला उल्टा नजर आ रहा है। मैंने यह जानने की कोशिश की आखिर क्यों मुझे लग रहा है कि हिंदी वेब मीडिया अपनी चमक खो रहा है। कुछ वजह नजर आए –

मीडिया बहस में नेट निष्पक्षता, अलग-अलग चार्ज मंजूर नहीं

नेट निष्पक्षता का प्रश्न आजकल मीडिया की गंभीर चर्चाओं में है। फेसबुक, ट्विटर आदि पर लगातार टिप्पणियां पोस्ट हो रही हैं। पिछले दिनो दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (डीजेए) के तत्वधान में आयोजित परिचर्चा में भी यह मुद्दा छाया रहा। आज भी सोशल माध्यमों, लेखों, टिप्पणियों, वार्ताओं में ये मुद्दा छाया हुआ है। अब तो वरिष्ठ पत्रकार तरुण विजय ने भी 28 अप्रैल को राज्यसभा में नेट न्यूट्रैलिटी का मुद्दा उठा दिया। 

The problem is that if the ISP restricts or obstructs my access to sites which dont pay the ISP

Sushant Sareen : Can someone explain this whole ‎netneutrality‬ issue to me? from the cacophony on TV and web all I have been able to figure out is this: I currently pay a certain sum to use an X amount of data. Now I could browse news sites, porn sites, religious sites or whatever else but for ever site I access i expend some of the data I have bought. if however, say a newspaper or a TV channel pays my ISP a sum of money, then I could browse their site, download or whatever else without paying anything. Up to this point I dont see a problem. If all the big shots pay the ISP money so I can browse their sites for free, I would imagine thats good for me.

दो मीडियाकर्मियों सुधीर सिंह उजाला और राजेंद्र सिंह जादौन ने अपनी-अपनी वेबसाइट शुरू की

पत्रकार सुधीर सिंह उजाला ने ‘न्यूज फास्ट इंडिया’ नाम से वेबसाइट शुरू की है. सुधीर गाजीपुर जिला के पहराजपुर के मूल निवासी हैं. टीडी कॅालेज, बलिया से उच्च शिक्षा ली. फिर दैनिक जागरण और अमर उजाला में काम किया.  ईटीवी में फोल्क जलवा कार्यक्रम से जुड़े रहे. मैजिक टीवी में प्रोडक्शन और मार्केटिंग का काम देखा. लाइफस्टाइल टीवी पटना के भी हिस्से रहे. अब इन्होंने NewsFastIndia.com नाम से न्यूज पोर्टल की शुरुआत की है.