उर्दू अख़बारों का फर्ज़ीवाड़ा

डीएवीपी में अपने अख़बार को इम्पैनल कराने के लिए उर्दू अख़बार वाले तबियत से झूठ का सहारा लेते हैं

डीएवीपी में फर्ज़ीवाड़ा करने वालों पर शिकंजा कैसे जाने की ख़बर से बहुत खलबली है. काग़ज़ों पर चलने वाले अख़बारों और अपने समाचारपत्र का सर्कुलेशन दसों हज़ार में बताने वालों में बैचेनी है. अगर ईमानदारी से कार्रवाई हुई तो दर्जनों अख़बारी घपलेबाज़ों को रिकवरी के नाम पर अपने मकान बेचने पड़ जायेंगे. वेसे तो फर्ज़ीवाड़ा करके सरकारी विज्ञापन का पैसा हड़पने में सभी भाषाओँ के अख़बारों का हिस्सा है लेकिन इसमें उर्दू अख़बार किसी से काम नहीं हैं.

‘तहफ़्फ़ुज़े उर्दू’ का स्लोगन जो आप लगा रहे, मुझे पता है इसके लिए भी मोटा फंड जारी होता है

भाषा (ज़ुबान) की हैसियत मात्र एक माध्यम की होती है इससे अधिक कुछ नहीं। ये जो आप लोग उर्दू उर्दू और हिंदी हिंदी लगा रखे हैं ना, मुझे तनिक सा नहीं सुहाता है। आइए इस बात को दुसरे तरीके से समझते हैं।  आप को तो मालूम ही होगा कि तौरात, ज़बूर, इंजील और क़ुरआन मजीद विभिन्न भाषाओँ में उतरी हैं, और वो वेद भी एक अलग भाषा में है जिन्हें हिन्दू भाई ईश्वर की वाणी मानते हैं आखिर अल्लाह/ईश्वर ने किसी एक भाषा को आसमानी भाषा घोषित करके ये सभी किताबें उसी एक भाषा में नाज़िल क्यों नहीं की? हमेशा, हर दौर की सब से बड़ी और दूरगामी भाषा को ही अपना माध्यम क्यों बनाया ? इसलिए ना कि अल्लाह का उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक अपना संदेश पहुँचाना होता है न कि हमारी और आप की तरह किसी एक भाषा को मुक़द्दस (पवित्र) क़रार दे कर उसे अपनी मजबूरी बना लेना ! ध्यान रखिए, अधिक महत्त्व आप की बात और आप के सन्देश का होता है न कि उस माध्यम का जिससे आप अपना सन्देश पहुंचा रहे हैं। इसलिए कृपा करके “तहफ़्फ़ुज़े उर्दू” की राग अलापना बंद कीजिए, आप को किस ने रोका है अपनी तहज़ीब व सक़ाफ़त (संस्कृति) के साथ अपने दौर बड़े माध्यमों में शिफ्ट होने से?

विवाद के बाद बंद हुए ‘उर्दू टाइम्स मुंबई’ अखबार को ‘मुम्बई उर्दू न्यूज़’ नाम से लाने की तैयारी!

मुम्बई । उर्दू टाइम्स मुंबई का पिछले 3 महीने से प्रकाशन बन्द हो गया है। इसकी वजह चाचा भतीजे के बीच पारिवारिक सम्पत्ति का बटवारा बताया जा रहा है। सईद अहमद और इम्तेयाज के बीच चल रहे विवाद में मुम्बई का एक पुराना उर्दू अखबार लगभग 3 महीना पहले से पूरी तरह बन्द हो गया है। अभी तक दोनों फरीक किसी नतीजे पर नही पहुँचे है। अब उर्दू टाइम्स के पार्टनर सईद अहमद के भतीजे इम्तेयाज मुम्बई उर्दू न्यूज़ नामक अखबार लाने की जुगत में हैं।

ज़्यादातर उर्दू अख़बारों की माली हालत

‘सब मेरे चाहने वाले हैं, मेरा कोई नहीं, मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूं’…. मशहूर शायर हसन काज़मी साहब का यह शेअर देश में उर्दू की हालत को बयान करने के लिए काफ़ी है. हालांकि इस मुल्क में उर्दू के कई अख़बार हैं, लेकिन ज़्यादातर अख़बारों की माली हालत अच्छी नहीं है. उर्दू के पाठक कम होने की वजह से अख़बारों की प्रसार संख्या भी सीमित है. उर्दू अख़बारों को अमूमन ईद-बक़रीद, 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही विज्ञापन मिल पाते हैं. उर्दू अख़बारों को यह भी शिकायत रहती है कि सरकारी विज्ञापन भी उन्हें बहुत कम मिलते हैं. इसके अलावा क़ाग़ज़ की बढ़ती क़ीमतें अख़बारों के लिए परेशानी का सबब बनी रहती हैं. 

‘जश्न-ए-रेख्ता’ में होगा उर्दू का जश्न

नयी दिल्ली : यहां 14 मार्च से शुरू हो रहे दो दिन के समारोह ‘जश्न ए रेख्ता’ में उर्दू के बेहतरीन शायरों, अफसानानिगारों और फनकारों का जमावड़ा होने जा रहा है। उर्दू के इस जश्न में भारत, पाकिस्तान, अमेरिका और कनाडा से उर्दू के बेहतरीन शायर, अफसानानिगार, अदाकार और फनकार शिरकत करेंगे। जश्न में शिरकत …