गुरदीप सिंह सप्पल ला रहे हैं नया न्यूज चैनल- ‘न्यूज प्लेटफार्म’

राज्यसभा टीवी के संस्थापक गुरदीप सिंह सप्पल एक नया न्यूज चैनल लांच करने जा रहे हैं. नाम है ‘न्यूज प्लेटफार्म’. चर्चा है कि यह न्यूज चैनल इस महीने के आखिर या अगले महीने के पहले सप्ताह तक लांच हो जाएगा.

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राज्यसभा टीवी के बाद गुरदीप सिंह सप्पल ने लांच किया नया वेंचर- ‘हिंद किसान’

गुरदीप सिंह सप्पल

आज के दौर में जब मुख्यधारा की मीडिया नान-इशूज पर फोकस कर जनता का ध्यान बुनियादी मुद्दों से हटाने के सत्ता-तंत्र के खेल में पूरी तरह लिप्त हो गया है, कुछ साहसी किस्म के लोग आम जन के प्रति मीडिया की प्रतिबद्धता को जीने में लगे हुए हैं. गुरदीप सिंह सप्पल के नेतृत्व में राज्यसभा टीवी लांच हुआ और देखते ही देखते यह चैनल पत्रकारिता के असल मानकों का प्रतीक बन गया. इंटरव्यूज हों या ग्राउंड रिपोर्टिंग… आदिवासियों का मसला हो या किसानों का जीवन हो… सब कुछ को बेहद संजीदगी और सरोकार के साथ चैनल पर प्रसारित किया गया. कई आईएएस सेलेक्ट हुए छात्रों ने कुबूल किया कि वे सिविल सर्विस की तैयारी के दिनों में न्यूज चैनलों में केवल राज्यसभा टीवी देखते थे.

कई पत्रकार तो राज्यसभा के अपने शोज के जरिए मीडिया के चर्चित चेहरे बन गए.  सीईओ और एडिटर इन चीफ के रूप में गुरदीप सिंह सप्पल ने राज्यसभा टीवी में जो संपादकीय आजादी दी और बहस-विमर्श का जो लोकतांत्रिक माहौल कायम किया, उसकी आज भी मिसाल दी जाती है. फिलहाल नए उप राष्ट्रपति के शपथ लेने के साथ ही गुरदीप सिंह सप्पल ने राज्यसभा टीवी को गुडबॉय बोल दिया और चुपचाप अपने नए वेंचर की तैयारी में लग गए.

गुरदीप सिंह सप्पल कहते हैं-

”ये भारत देश गांवों का देश है. किसानों का देश है. यह डायलाग बोलता तो हर कोई है लेकिन ज्यादातर लोग / संस्थाएं / मीडिया हाउसेज इमानदारी से गांव-किसान की बात नहीं करते. किसान की असल समस्या क्या है. उनकी जमीनी पीड़ा-मुश्किलें-दिक्कतें क्या हैं. इन सब पर आज कोई मीडिया हाउस फोकस नहीं करता. यही कारण है कि हम लोगों ने ‘हिंद किसान’ वेब टीवी शुरू किया है. यह वेब टीवी भविष्य में सैटेलाइट चैनल के रूप में भी लांच हो सकने की संभावना से भरा है. लेकिन अभी हम लोगों का ध्यान सोशल मीडिया पर है. फेसबुक, ट्विटर से लेकर ह्वाट्सअप, यूट्यूब आदि माध्यमों के जरिए हम गांव-गांव तक ‘हिंद किसान’ को पहुंचाएंगे. इस ‘हिंद किसान’ वेब चैनल को सभी का प्यार चाहिए. ये किसी एक व्यक्ति का चैनल नहीं है. यह हर उस शख्स का चैनल है जो दिल से चाहता है कि मीडिया अब बुनियादी मुद्दों पर बात करे, ग्रामीण भारत की बात करे, देश के किसानों-मजदूरों की बात करे. ऐसे में हम सभी का कर्तव्य है कि ‘हिंद किसान’ चैनल के प्रचार-प्रसार में जुट जाएं. इसके फेसबुक पेज, इसके वीडियोज को लाइक शेयर करें. अगले कुछ महीने में हम लोग चैनल को एक ठोस रूप दे पाएंगे, यह विश्वास है.”


‘हिंद किसान’ वेब चैनल को छब्बीस जनवरी यानि गणतंत्र दिवस के दिन लांच करते हुए इसके एडिटर इन चीफ गुरदीप सिंह सप्पल ने सोशल मीडिया पर हिंदी-अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जो प्रेस रिलीज जारी की है, वह इस प्रकार है…

दोस्तों,

आज हमारा 69वां गणतंत्र दिवस हैं और इस शुभ दिन हम अपना नया मीडिया मंच शुरू कर रहे हैं। राज्य सभा टीवी के बाद आज हम खबरों की दुनिया में एक नया सफर शुरू कर रहे हैं। महानगर केंद्रित खबरों तक खुद को सीमित रखने वाले मेनस्ट्रीम मीडिया से अलग… हमारा इरादा ग्रामीण और कस्बाई भारत के धूल-धक्कड़ भरे रास्तों पर चलने और देश के दूर-दराज की खबरों को आप तक पहुंचाने का है। हमारा उद्देश्य है ग्रामीण भारत की खूबसूरती और चुनौतियों को समझना और उसके संकट, सम्भावनाओँ, पीड़ा एवं आकांक्षाओं को सामने लाना है। हमारी योजना मीडिया के बुनियादी सिद्धांतों का पालन करते हुए खबर देने, मुद्दों पर चर्चा एवं बहस करने और सरकारों को जवाबदेह बनाने की है। हम उस लोकतांत्रिक मान्यता का अनुकरण करना चाहते हैं, जिसके तहत मीडिया को लोकतंत्र का एक मज़बूत स्तम्भ माना जाता है। हमारा सपना तटस्थ, जिम्मेदार और निडर पत्रकारिता करने का है।

यह हमारे प्रयास का पहला चरण है। इसमें हम सोशल मीडिया की शक्ति और संभावनाओं का इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे। आज हम फेसबुक पेज और यू-ट्यूब चैनल शुरू कर रहे हैं। हमारी वेबसाइट का बीटा वर्जन एक फरवरी 2018 को आपके सामने आएगा। अगले कुछ महीनों में हम एक पूर्ण न्यूज वेब टीवी के रूपमें आपके सामने होंगे।
खबरों के इच्छुक सभी भारतवासियों से संवाद करने की आकांक्षा रखते हुए हमने अपनी पहल का नाम – ‘हिंद किसान’ रखा है। यह ग्रामीण भारत से हमारे लगाव और उससे जुड़ी हमारी चिंताओं का संकेत है। आप हमें निम्नलिखित लिंक्स पर फॉलो कर सकते हैं…

Facebook: https://Facebook.com/HindKisan

Twitter: https://twitter.com/hindkisan_in

Dear Friends,

As we celebrate the 69th Republic Day, I want to share the news of our new media venture. After RSTV, we embark upon a new journey in world of news. Unlike the mainstream media, which is largely confined to metro centric issues and narratives, our journey would progress on the dusty pathways and landscapes of rural India and mufassil towns. Our aim is to capture the beauty and the challenges; the distress and the resilience; the pains and the aspirations of rural India.

Abiding by the classical tenets of media, we plan to look for news, discuss & debate issues and work to hold governments accountable. We wish to follow the democratic scheme that defines media as one of the pillars. Neutral, responsible, fearless journalism is our cherished dream.

In phase one of our venture, we will try to harness the power and potential of social media to reach out to people. Today we launch our Facebook page and YouTube Channel. The beta version of website will be up on February 1, 2018 and in another few months, we plan to become fully functional News WebTV. Aspiring to communicate with all news lovers in India, we have named our initiative as ‘Hind Kisan’, symbolising our affinity and our concern for rural India. I would like to welcome you all to follow us on:

Facebook: https://Facebook.com/HindKisan

Twitter: https://twitter.com/hindkisan_in

Gurdeep Singh Sappal

एडिटर-इन-चीफ

हिंद किसान


ट्विटर पर ‘हिंद किसान’ वेब टीवी को इंट्रोड्यूस कुछ यूं किया गया है :

Hind Kisan @hindkisan_in : Former Rajya Sabha TV CEO and Editor-in-Chief @gurdeepsappal introduces his new venture. Read his message.


हिंद किसान वेब चैनल के शुरुआती दो वीडियोज देखें….

गणतंत्र के धूमधड़ाके में कहां खड़ा किसान..देखिए हिंद किसान की पहली डिबेट…. नीचे क्लिक करें

https://www.facebook.com/hindkisan/videos/895228003992420/

भारी पड़ा भावान्तर… क्यों फिर से ठगा महसूस कर रहा है मध्य प्रदेश का किसान? क्यों खेती बन चुकी है घाटे का सौदा? क्यों पड़ गया भवान्तर भारी? देखिये इस रिपोर्ट मैं, सीधे प्रदेश के खेतों और मंडियों से ज़मीनी हक़ीक़त…

https://www.facebook.com/hindkisan/videos/895177620664125/

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RSTV का वार्षिक बजट 62.50 करोड़ था, इसमें से 25 करोड़ रुपये एनडीएमसी को किराया जाता था

Gurdeep Singh Sappal : अब जब ये साफ़ कर दिया गया है कि RSTV का वार्षिक बजट केवल ₹62.50 करोड़ था और उसमें भी ₹25 करोड़ केवल NDMC को जाता था, मुझे उम्मीद है कि ₹1700 करोड़ -₹ 3000 करोड़ ख़र्च का झूठा प्रचार अब थम जाएगा। राज्य सभा टीवी ईमानदार नीयत और निष्ठा से एक असरकारक पब्लिक broadcaster के रूप में स्थापित किया गया था। मैं आशा करता हूँ कि इसकी दूसरी पारी भी शानदार रहेगी।

Now that it has been officially made clear that RSTV’s expenditure is just ₹62.5 crore a year, out of which ₹25 crore goes to NDMC, the fake news campaign of ₹1700 crore or ₹3000 crore spent stands exposed. RSTV was created as robust public broadcaster and with good intentions. I wish it great second innings now.

राज्यसभा टीवी के संस्थापक, सीईओ और एडिटर इन चीफ रहे गुरदीप सप्पल की एफबी वॉल से.

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”RSTV wasn’t possible without you, All the very best Gurdeep sir”

राज्यसभा टीवी के संस्थापक प्रधान संपादक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुरदीप सिंह सप्पल ने अपना लंबा-चौड़ा इस्तीफानामा अपने एफबी वॉल पर पोस्ट किया है, जिस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. ज्यादातर लोगों ने गुरदीप सिंह सप्पल को राज्यसभा टीवी जैसा एक चैनल खड़ा करने के लिए बधाई दी और आगे के करियर की लिए शुभकामनाएं. पढ़िए सैकड़ों कमेंट्स में से कुछ चुनिंदा…

Amit Ahluwalia The way you and your team managed, sourced and shaped the RS TV … really showed which rather looked unachievable a few years back … Having a News /info/knowledge Channel of our very own …. Indian in spirit … Sir you did beautifully and admirably …. You left a vast media library invaluable in content and incomparable in quality …. Hats off to you and your team …. Your able stewardships will be missed …. Hats off to you. Jai Hind !

Mahendra Mishra आप और आपकी टीम ने इतिहास रचा है। आपने न केवल एक संस्था खड़ी की बल्कि उसने मीडिया के अंधकार युग में उजाला फैलाने का काम किया। उसकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। आप ने दिखाया है एक हिमालयी, उम्दा, और सफल संस्थान खड़ा किया जा सकता है। बशर्ते इच्छा शक्ति और विजन हो। बहुत-बहुत शुभकामनाएं भविष्य के लिए।

Fuzail Ahmad Saddened to know about your move..nodoubt you people made this channel amongst the few best in india…now doubt what will happen to this public broadcaster.. All the best sir

Yuvraj Shekhar सर निश्चित तौर पर आपके महत्वपूर्ण व सफल प्रयासों से राज्यसभा टीवी को आज वो पहचान मिली है, जिसकी राह पर अब देश के अन्य मीडिया संस्थान भी चलना चाहते हैं… मेरा ये सौभाग्य रहा कि मुझे भी आपके सानिध्य में काम करने का अवसर मिला.. मैं, भविष्य में आपके और सफल होने की कामना करता हूं…

Shavez Ahmed RSTV wasn’t possible without you… All the very best Gurdeep sir.

Mohan Chauhan बहुत खूब। आपका 6 वर्षों का कार्यकाल सराहनीय रहा। इस दौर में चैनल ने जिन मापदण्डों को गढा है, उम्मीद की जानी चाहिए कि वे आगे भी बरकरार रहेंगे। आपके जज्बे और चीजों को देखने के नजरिए के साथ ही रिश्तों के प्रति संवेदनशीलता और समर्पण से आपका हम सभी मित्रों के बीच एक खास मुकाम हमेशा रहेगा। मुझे आशा है आपने भविष्य के लिए जो भी भूमिका अपने लिए तय की है, उसे भी आप हमेशा की तरह एक नया आयाम देंगे। ढेर सारी शुभकामनायें।

Yogesh Dabra Yes, I agree you changed the face of RS TV. Best of luck for your future assignment.

Vivekanand Singh राज्यसभा टीवी मेरे लिए घर की तरह रहा है। मैं कई चैनल ट्यून करते हुए अक्सर राज्यसभा टीवी पर ठहर जाता हूं। शायद अब ऐसा न हो पाए। सबसे पहले गिरीश सर के जाने का दुख हुआ, फिर अमृता मैम और अब आप भी छोड़ रहे हैं। सरोकार में कई मर्तबा ऑडिएंस में बैठ कर भी आपको सुना। आप सरल और सहज लगे। आपको ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं। हां अभी इरफ़ान सर गुफ्तगू देखने जरूर आऊंगा।

Sumedha Verma Sir u hv been a true inspiration. We had a great learning experience wth you. I wish u all the best for your future.

Virender Singh Khurana Advocate यह अन्त नही शुरूआत है एक नया कदम एक नये मुकाम की ओर। वाहेगुरू जी सदैव आप पर कृपा बनाये रखे और हमेशा ही हम कहते रहे कि गुरदीप सप्पल जी हमारे शहर देहरादून से है। आप देहरादून की शान है। भविष्य मे नयी ऊचाईया इन्तजार मे है छू लो उन मंजिलो को जो सिर्फ आपके इन्तजार में है।
Anand Pandey Sir you have made a brilliant institution, I always get inspired by the contents of RSTV programs…thank you very much. And one last thing, I hope RSTV will grow in the right direction. We’ll miss you sir…

Asif Jah U established RSTV as one of the reputed channel with limited resources tht u have …

Vijay Bhatt मैं स्वयं राज्यसभा टीवी का दर्शक रहा हूँ। आज गोदी मीडिया के ज़माने में तुम्हारे और तुम्हारी टीम के कुशल नेतृत्व में राज्यसभा टीवी ने मेरे जैसे दर्शकों के मन में एक ख़ास जगह बनाई है। अब आगे क्या होगा पता नहीं। ख़ैर नई पारी की शुरूआत के लिये शुभकामनायें।

Babita Dogra U did wonderful things till date now my best wishes for your new journey

Ashutosh Deshmukh एक शानदार पारी खेलने के बाद एक शतकवीर बल्लेबाज़ के चेहरे पर जो संतुष्टि नज़र आती है, वो आपके विदाई संदेश में है। सारे मिथक तोड़ते हुए भारतीय टेलिविज़न में एक नयी कहानी रचने के लिए धन्यवाद। आशा है, विश्वास है और प्रार्थना है कि नए हाथों में भी राज्यसभा टीवी की ऊर्जा और मूल्य बरक़रार रहे। आपके लिए अनन्य शुभकामनाएँ।

Amitaabh Srivastava Good luck for the future Gurdeep Singh Sappal . You are leaving a proud legacy behind.

Yashpal Jagotta RSTV से आपके प्रस्थान का पढ़ कर दुख तो हुआ लेकिन RSTV का regular viewer होने के नाते आपके सफल एवं सुखद भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामना।

Lotty Alaric I just want to say one thing dat it will be difficult for RSTV to fill your shoes. Best wishes for your journey ahead.

Ameeque Jamei हकूमत के हाथ रहते हुये भी आपने फ्री फेयर बनाया, डीडी के सच से आपने इसे आगे निकाला, आपको याद किया जाएगा आईएनए पर आपकी बनवाई फिल्म के लिये भी जो शायद हकूमत के हाथो इतिहास पर आधारित आखरी फिल्म होगी… आगे क्या बनेगा… क्या होगा राज्यसभा टीवी का… हम नहीं जानते… लेकिन नस्लें आप जैसों को याद करेंगी!

Vinod Sharma “दो-दो रुख हैं दोगली है जिंदगी….” one of the line written by Gulzar Sahib for my produced serial दाने अनार के about 25 years ago is still relevant- you are an inspiration to today generation, I have been your silent observer since long, I wish u all the very best, regards Always.

Yogesh Ranta स्टेट फंडिंड चैनल के बारे में हमेशा ये धारणा रही है कि वो सरकार के भोंपू की तरह काम करता है लेकिन आपके नेतृत्व में अब तक के सफर में राज्यसभा चैनल ने आम लोगों की आवाज़ उठाई और संविधान में निहित वैज्ञानिक तर्कशीलता को बढ़ावा देने काम किया। आगे सफर के लिए आपको शुभकामनाएं।

Sohail Hashmi Well done, you built an institution that set several examples, unfortunately the calibans who will be brought in, as they are being brought in everywhere will besmirch this hard earned reputation.

Arun Khare एक ईमानदार फैसला। Gurdeep Singh Sappal जी आपके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं। आप राज्यसभा टीवी के इतिहास का “सुनहरा पन्ना” के रूप में याद रखे जाएंगे।

Onkar Singh I presume Waheguru has sth better for you in the times ahead. and lets not forget the most important goal of the life is to merge with truth. may Guru Nana bless you Sir.

Rajesh Ranjan वाकई राज्यसभा टीवी का कंटेट देखने लायक था। सम्पूर्ण खबर और डिबेट के मामले में पारदर्शिता ही राज्यसभा टीवी की पहचान है। आगे देखते हैं क्या होता है। आपका धन्यवाद सर।

Om Dundy The services you have rendered by you to RSTV will be a foot mark for the followers in coming future….

Jagmohan Bangani मैं आपको अपने अगले उद्यम के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मैं जानता हूँ कि आप एक निशान बना रहे होंगे, जहां आप नेतृत्व करेंगे… मेरी सहृदय शुभकामनायें।

Syed Mohd Irfan Thanks for your guidance and also putting faith in all my little efforts. Will always love to work with you. Goodluck.

Subhash Gupta आप इतने सक्षम और योग्य हैं …जिधर चलेंगे मंजिल खुद रास्ता बना देगी।


उपरोक्त कमेंट्स गुरदीप सिंह सप्पल के जिस इस्तीफानामा पर आया है, उसे पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें…

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इतिहास रचने के बाद राज्यसभा के सीईओ और एडिटर इन चीफ पद से गुरदीप सिंह सप्पल ने दिया इस्तीफा

गुरदीप सिंह सप्पल भारतीय मीडिया में एक इतिहास रच चुके हैं. राज्यसभा टीवी के माध्यम से वे सरकारी और निजी, दोनों ब्राडकास्टर्स के लिए एक रोल माडल पेश कर गए हैं कि देखो, ऐसा होता है कोई चैनल. एडिटर इन चीफ और सीईओ के रूप में राज्यसभा टीवी की नींव रखकर उसे प्रतिष्ठा की बुलंदियों तक गुरदीप सिंह सप्पल ने पहुंचाया. उप राष्ट्रपति पद से हामिद अंसारी के इस्तीफा के बाद राज्यसभा टीवी के सीईओ और एडिटर इन चीफ पद से जीएस सप्पल को जाना ही था.

नए उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू एडिटर इन चीफ और सीईओ के लिए नई नियुक्ति करेंगे. लेकिन जीएस सप्पल ने जो लकीर खींच दी है, उसके पार जा पाना किसी भी दूसरे एडिटर इन चीफ और सीईओ के लिए संभव न होगा. आईएएस में चयनित होने वाले प्रतिभागी जब कहते हैं कि वे राज्यसभा टीवी का ‘बिग पिक्चर’ डिबेट शो देखकर सम-सामयिक मामलों में अपनी सोच-समझ को निर्मित करते हैं, तो समझा जा सकता है कि इस चैनल पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम कितनी गहराई और प्रामाणिकता लिए हुए होते हैं.

गुरदीप सिंह सप्पल की सबसे बड़ी बात, जो उनके साथ काम करने वाले बताते हैं, कि ये आदमी बेहद डेमोक्रेटिक है. वे क्रिएटविटी और एडिटोरियल फ्रीडम को पूरी तरह जीने देते हैं. यही कारण है कि उन्होंने राज्यसभा टीवी के लिए ऐेसे मीडियाकर्मियों का चयन किया जिनके लिए पत्रकारिता जनसरोकार और एक मिशन रही है. गुरदीप सिंह सप्पल का अंदाज और तेवर उनके इस्तीफानामा में भी देखा जा सकता है, जो उन्होंने अपने एफबी वॉल पर पोस्ट किया है. उनका इस्तीफानामा नीचे पढ़ा जा सकता है.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


Gurdeep Singh Sappal : राज्यसभा टीवी से मेरा इस्तीफ़ा….

‘चलो कि इक उम्र तमाम हुई
उठो कि महफ़िल की शाम हुई
जुड़ेंगे नए रिंद, अब नए साज़ सजेंगे
मिलेंगे उस पार, कि नए ख़्वाब बुनेंगे।’

राज्यसभा टीवी के साथ मेरा रिश्ता आज ख़त्म होता है। लेकिन संतोष है कि जो चैनल हमने सजाया है, उसकी चमक दूर से भी दिखायी देती रहेगी। आज मुड़ कर देखूँ तो एक सुखद अहसास ज़रूर है कि जो ज़िम्मेदारी मजबूरी में स्वीकार की थी, वो कुछ हद तक पूरी हुई। सच कहूँ तो ये काम मुश्किल ज़रूर था, लेकिन विश्वास था कि ‘अगर अतीत ब्लैकमेल योग्य न हो, आज कोई भय न हो और भविष्य से कोई आरज़ू न हो’, तो जीवंत संस्थाएँ बनाना सम्भव है।

जब हमने ये चैनल डिज़ाइन किया तो दो टैग लाइन चुनी: Knowledge Channel of India और Democracy at Work. आज छः साल बाद ये एक निर्विवाद सच है कि देशभर में छात्र, प्रशासक, बुद्धिजीवी RSTV देखते हैं। तथ्य तो गूगल सभी दे देता है, लेकिन विश्लेषण, अंत:दृष्टि और हाशिए पर रहे विषयों के लिए राज्य सभा टीवी ने अपनी अलग जगह बनायी है।इसकी डिबेट में सभी राजनैतिक रंग, सभी विचारधाराएँ बराबर खिली हैं। शायद, कुछ हद तक ही सही, हम अपनी दोनों टैग लाइन पर खरे ज़रूर उतरे हैं।

मैं जानता हूँ कि हमारे कुछ आलोचक, या कहूँ कि निंदक भी रहे हैं। लेकिन शायद उनमें से ज़्यादातर हमारा चैनल देखते नहीं थे, क्योंकि उनकी आलोचना के बारे सोचते ही एक शेर बेसाख़्ता याद हो आता था :

‘वो बात जिसका सारे फ़साने में ज़िक्र न था,
वो बात उनको बहुत ही नागवार गुज़री।’

हाँ, इन्फ़ॉर्म्ड आलोचना को हमने हमेशा स्वीकारा और उस पर अमल किया।

ख़ैर, ये दास्ताँ बस इतनी ही। मैं शुक्रगुज़ार हूँ माननीय उपराष्ट्रपति श्री वेंकैय्या नायडू जी का, जिन्होंने मेरा आग्रह मान कर मेरा इस्तीफ़ा स्वीकार किया।

लोग संस्था को गढ़ते हैं और संस्था लोगों को गढ़ती है। मैं चैनल के अपने सभी साथियों का धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने मेरे साथ मिल कर ये चैनल गढ़ा और उसे ऊँचाइयों तक पहुँचाया। और अंत में, धन्यवाद उस शख़्सियत का, जिसकी निस्वार्थ मौजूदगी, बौद्धिक विश्वास और स्वायत्ता में नैसर्गिक यक़ीन RSTV की बुनियाद रहा। शुक्रिया श्री हामिद अंसारी, भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति का। सम्पादक के पद को वे हमेशा एक महत्वपूर्ण संस्था मानते आए हैं और मुझे ख़ुशी है कि मैं उनके विश्वास पर खरा उतर सका। मेरी कामना है कि आने वाले दिनों में RSTV यूँ ही उत्तरोत्तर तरक़्क़ी के पथ पर आगे बढ़ता रहे।

Resignation from RSTV

Today, as I stand relieved from the posts of CEO and Editor-in-Chief of Rajya Sabha Television, I thank Hon’ble Sh. Venkaiah Naidu, the Vice President of India for accepting my request relieving me from the responsibility. I have always held a principled view that if one has been nominated, rather than having been elected in polls or selected through exams, one must move out with the principal.

As I move ahead in life, I look back in satisfaction at the success we had in creating a vibrant public broadcaster. RSTV, indeed, has made its mark. Having nurtured it since its conception, developing a free and fair public broadcaster was indeed a difficult task. But there was a certain belief that ‘if the past cannot be blackmailed, the present doesn’t scare and there are no expectations from the future’, then it is possible to build robust institutions.

We conceptualised RSTV with two tag lines, viz. ‘Knowledge Channel of India’ and ‘Democracy at Work’. Today, it’s an undisputed fact that students preparing for competitive exams, intellectuals, administrators and thinking population watch the channel. In today’s day and age, facts can all be googled, but RSTV carved a special place for itself by featuring comprehensive analysis & insights and giving space to marginalised, yet significant, subjects. It’s debates gave equal place to views and ideologies of all hues. I believe that we have been able to justify our both tag lines.

I know that we have our share of critics and castigators. But after going through their objections for so many years, I can surely say that most of them don’t watch RSTV regularly. I can only say to them: ‘वो बात सारे फ़साने में जिसका ज़िक्र न था, वो बात उनको बहुत नागवार गुज़री है।’

Whenever we received constructive criticism, we always took its cognizance and strived to accommodate it. Friends, institutions are crafted by people and then institutions craft them back. I was backed by a wonderful set of professionals, who made RSTV what it is today. I thank them all for being my co-passengers on this roller-coaster ride. I thank my Editorial Team for believing in an idea and delivering it.

I also thank my team in administration, who minimized the lethargy and constraints of our public funded systems and delivered a vibrant institution. And above all, I would like to thank one person whose selfless presence, intellectually driven sense of security and innate faith in autonomy was the foundation of Rajya Sabha Television. I profusely thank Sh. Hamid Ansari, the former Vice President of India. He believed in the institution of the Editor and allowed me to live up to it. I wish the channel a bright future, always 🙂

गुरदीप सिंह सप्पल की एफबी वॉल से.

उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए सैकड़ों कमेंट्स में से कुछ चुनिंदा पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें…


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आज रिलीज ‘राग-देश’ और ‘इंदु सरकार’ क्यों हैं मस्ट वॉच फिल्में, बता रहे हैं यशवंत

Yashwant Singh : ऐसा बहुत कम होता है कि एक ही दिन दो अलग-अलग सच्ची घटनाओं पर आधारित, दो अलग-अलग ऐताहासिक कालखंडों पर केंद्रित फिल्में रिलीज हो जाएं. आज ऐसा हुआ है. ‘राग देश’ और ‘इंदु सरकार’ नामक दो फिल्में आज शुक्रवार के दिन रिलीज हुई हैं. दोनों सच्ची घटनाओं पर आधारित हैं और दोनों ही घटनाएं इतिहास के चर्चित अध्याय हैं.

‘राग देश’ सुभाष चंद्र बोष और उनकी सेना आईएनए के जवानों पर केंद्रित है. मेरे जैसे लोग जो गांधी जी के साथ-साथ भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और सुभाष चंद्र बोस आदि के प्रति समान श्रद्धा और प्रेम रखते हैं, इस फिल्म को जरूर देखेंगे क्योंकि सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना के बारे में इतिहासकार कई एंगल से देखते लिखते बताते हैं. सुभाष चंद्र बोस की सेना आईएनए के जांबाज जवानों के द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ट्रायल को फिल्म का मुख्य सब्जेक्ट बनाया गया है. सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना पर पूरी तरह केंद्रित इस नई फिल्म से बहुत उम्मीदें हैं.

फिल्म रागदेश के निर्माता गुरदीप सिंह सप्पल

इस फिल्म की खास बात यह भी है कि इसे अपने बड़े भाई और राज्यसभा टीवी के सीईओ व एडिटर इन चीफ Gurdeep Singh Sappal जी ने प्रोड्यूस किया है. जाने माने फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया ने इसे डायरेक्ट किया है. यह फिल्म चुनिंदा फिल्म क्रिटिक्स को दिखाई जा चुकी है और उन सभी ने इसे मस्ट वाच कैटगरी की फिल्म करार दिया है. यानि रिव्यू के लेवल पर फिल्म को ढेर सारे स्टार मिल रहे हैं. फिल्म का ये स्लोगन काफी फेमस हो रहा- ”जो देश से करते हैं प्यार, वो राग-देश से कैसे करें इनकार!” तो बंधु, चलिए चला जाए देखने. अपने सभी मित्रों से अपील है कि वे ‘राग देश’ देखें और इसको लेकर रिव्यू प्रकाशित करें. मैं आज शाम का शो बुक कर चुका हूं.

इंदु सरकार फिल्म पहले ही विवादों के कारण चर्चा में आ चुकी है. इंदिरा गांधी, संजय गांधी और आपातकाल पर केंद्रित इस फिल्म के जरिए हम जैसे आपातकाल के समय या बाद पैदा हुए लोग जान सकेंगे कि उस दौर की क्या भयावहता थी, उस दौर के घटनाक्रम कैसे कैसे घटित हुए. इस फिल्म को मधुर भंडारकर ने बनाया है जो पेज थ्री, फैशन, कारपोरेट जैसी फिल्में बना चुके हैं. इंदु सरकार को को कल देखूंगा. फिर दोनों ही फिल्मों का रिव्यू परसों लिखूंगा, वादा है.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी उर्फ आईएनए और इसके जांबाजों पर आधारित है फिल्म ‘रागदेश’

The much awaited Tigmanshu Dhulia film ‘Raagdesh’ is all set to release on July 28th, 2017. Expected to be a crossover film, the film marries the historical authenticity with entertaining cinema, a genre much missed in Bollywood. Set in the backdrop of the famous ‘Red Fort Trials’, the film recreates the era of last days of freedom struggle in India, where the battles were being fought on borders, on streets, in media and curiously enough, in the court room.

The film captures the courtroom drama of the trials conducted by the British government in 1945 against the top brass of the Indian National Army, established by Netaji Subhash Chandra Bose. The trials that were observed with great curiosity by the world forces who had won the World War II, as also by the nation who now witnessed another streak of patriotism which was valiant, violent, vociferous and quite different from non-violence practiced by the Congress.

The trials made India aware of the heroic deeds and struggles of the INA, which was till then suppressed by the British authorities through strong armed press censorship. As the trial progressed, the entire nation was galvanized into the final call for independence, leading to Mumbai Naval Mutiny and crumbling of British Empire. The film poignantly portrays the battle travails, border sacrifices and trial of three heroes of INA who changed the course of freedom struggle.

The film is produced by Rajya Sabha Television, who has joined hands with UFO Moviez as its strategic partner for a pan-India release. The film marks the debut of RSTV, which has started an ambitious programme of bringing the exciting events of contemporary history on to the cinema screens.

“India today is a leading nation of the world. There have been people, events and processes that have led to the success of India. RSTV feels that people must know their history in order to preserve their growth. It is the duty of the state and the governments to promote it. Being a public broadcaster, RSTV felt its duty to take history to the people in an entertaining format. We always felt that history has so many fascinating stories to tell and films have been the most powerful and entertaining medium to tell stories”, said Gurdeep Sappal, CEO and Editor-in-Chief of Rajya Sabha Television.

Commenting on the association director Tigmanshu Dhulia said, “This was a great opportunity to showcase a very important chapter of independence struggle. It’s a film about real life heroes, who fought armed war against the mighty British government. It captures the valour, the camaraderie and the heroic struggles of young men who fought and lost the battle, but won the war of independence for India.  It is a one of the most passionate films I have done because I really feel that the nation and the young generation must know about sacrifices of people achieve India’s independence. It’s a film which will certainly make every Indian proud of their legacy.”

Starring Kunal Kapoor, Amit Sadh and Mohit Marwah in the lead roles, Raag Desh is the story of three leading officers of the INA namely Colonel Prem Sehgal, Colonel Gurbaksh Singh Dhillon, and Major General Shah Nawaz Khan, who were captured and imprisoned in the Lal Quila (Red Fort). British wanted to sentence them and hang them in the Red Fort, precisely where Netaji Subhash Chandra Bose wanted to unfurl the Tricolour flag. A trial that the world watched and the nation prayed, eventually turned up as the last message to the British that they would now have to Quit India. The Tricolour flies on the Red Fort since then!

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राज्यसभा टीवी के सीईओ गुरदीप सिंह सप्पल निर्मित फिल्म ‘रागदेश’ का पोस्टर जारी, रिलीज 28 जुलाई को

राज्यसभा टीवी के सीईओ और एडिटर इन चीफ गुरदीप सिंह सप्पल के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है. उन्होंने फिल्म निर्माण जैसा बड़ा काम कर दिखाया है. बतौर प्रोड्यूसर सप्पल ने जो फिल्म ‘रागदेश’ बनाई है, उसका निर्देशन जाने माने फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया ने किया. फिल्म का पोस्टर जारी कर दिया गया है. फिल्म सिनेमाघरों में 28 जुलाई को पहुंचेगी.

The film is on Lal Quila Trial of officers of INA.

फिल्म के पोस्टर को जीएस सप्पल ने अपने एफबी वॉल पर जारी करते हुए जो लिखा है, वह इस प्रकार है :

Gurdeep Singh Sappal : First look of the poster of our film RaagDesh, releasing all over India in cinema halls near you on July 28, 2017. Presented by: Rajya Sabha Television , Director: Tigmanshu Dhulia , Producer : Gurdeep Sappal, Cinematography: Rishi Punjabi, Featuring: Kunal Kapoor, Amit Sadh, Mohit Marwah, Kenneth Desai, Mridula Murali #raagdeshthefilm

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मोदी सरकार का यह मास्टर स्ट्रोक है : गुरदीप सिंह सप्पल

Gurdeep Singh Sappal : मोदी सरकार का यह मास्टर स्ट्रोक है। जिन भी बड़ी कम्पनी, राजनीतिक दल, भ्रष्ट अधिकारियों, बड़े व्यापारियों के पास बड़ा कैश जमा है, वे दिक़्क़त में आ गए हैं। बड़ी रक़म बैंक में जमा नहीं करा सकते, क्यूँकि सवाल उठेगा कि उस धन को पिछली Income Decleration Scheme में घोषित क्यूँ नहीं किया। साथ ही, अब केस भी चल सकेगा।

छोटे और मध्यम वर्गीय लोगों का काला धन आम तौर पर कैश में नहीं, प्रॉपर्टी और सोने में लगा होता है। उस काले धन पर कोई सीधा ख़तरा नहीं है।हाँ, प्रॉपर्टी की क़ीमतें ज़रूर गिर जाएँगी। अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा, ये अनिश्चित है। हालाँकि कुछ समय के लिये तो सब हिल जाएगा।

काला धन सिर्फ़ सरकारी या राजनीतिक भ्रष्टाचार से नहीं उपज रहा था। आम आदमी भी जो भी लेन देन बिना टैक्स अदा किए कर रहा था, वह भी काला धन पैदा कर रहा था। मार्केट से कैश का गायब होना और GST का कुछ ही महीनों में आना, ये मिल कर क्या दिशा देंगे, ये देखना मज़ेदार रहेगा।

वैसे ये वक़्त फिर से इतिहास के पन्ने पलटने का भी है। एक बार पहले भी, जनवरी 1978 में ₹1000, ₹ 5000 और ₹ 10000 के नोट यूँ ही रातों रात अमान्य कर दिए गए थे। तब भी वजह काले धन को नियंत्रित करना ही थी। मोरारजी देसाई प्रधान मंत्री थे। पहले वित्त मंत्री भी रहे थे। कठोर निर्णय लेने के लिए जाने जाते थे। तब उनके इस क़दम का अर्थव्यवस्था पर तात्कालिक और दीर्घकालिक क्या असर पड़ा था, ये फिर से समझने का वक़्त है।

राज्यसभा टीवी के सीईओ और एडिटर इन चीफ गुरदीप सिंह सप्पल की एफबी वॉल से.

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