हिंदी के इस दौर के महानतम लेखक उदय प्रकाश के दुख-दर्द को कौन समझेगा!

जाने-माने साहित्यकार उदय प्रकाश के साथ दाएं हैं इस पोस्ट के लेखक सत्येंद्र पीएस. Satyendra PS : जाति बहिष्कृत होने के मायने… भारत में जाति की अपनी भूमिका है। उच्च से लेकर निम्न तक एक पदानुक्रम बना हुआ है और उसी के मुताबिक भारतीय समाज में लोगों का सम्मान तय है। अगर कोई व्यक्ति जाति …

‘हिंदी मीडियम’ देखते हुए आप पॉपकार्न चबाना तक भूल जाते हैं

Uday Prakash : अभी ‘हिंदी Medium’ देख के लौटा। जो भूमिका पहले प्रतिबद्ध साहित्य निभाता था, वह अब ऐसी फिल्म निभा रही है. बाहुबली जैसी मध्यकालीन चित्रकथा फिल्म देखने की जगह, हिंदी मीडियम जैसी फ़िल्में देखने की आदत डालनी चाहिए। इवान इलिच की मशहूर किताब ‘डिस्कूलिंग सोसायटी’ बार-बार याद आती रही. लेकिन यह फिल्म शिक्षा के धंधे में बदलने के विषय से बाहर भी जाती हुई, बहुत बड़ा और ज़रूरी सन्देश इस तरीके से देती है कि आप पॉपकार्न चबाना तक भूल जाते हैं. पूरा हाल भरा हुआ था और ऑडियंस लगातार फिल्म के साथ बोलता, हँसता, सोचता, तालियां बजाता, भावुक होता देखता जा रहा था। आज का दिन ही नहीं यह पूरा महीना हिंदी मीडियम के नाम. (वह महीना जिसमें बाहुबली और Guardians of Galaxie जैसी ब्लॉक बस्टर फ़िल्में भी शामिल है.  🙂

यशवंत की कुछ एफबी पोस्ट्स : चींटी-केंचुआ युद्ध, दक्षिण का पंथ, मार्क्स का बर्थडे और उदय प्रकाश से पहली मुलाकात

Yashwant Singh : आज मैं और Pratyush Pushkar जी दिल्ली के हौज खास विलेज इलाके में स्थित डिअर पार्क में यूं ही दोपहर के वक्त टहल रहे थे. बाद में एक बेंच पर बैठकर सुस्ताते हुए आपस में प्रकृति अध्यात्म ब्रह्मांड आदि की बातें कर रहे थे. तभी नीचे अपने पैर के पास देखा तो एक बिल में से निकल रहे केंचुए को चींटियों ने दौड़ा दौड़ा कर काटना शुरू किया और केंचुआ दर्द के मारे बिलबिलाता हुआ लगा.

योगी आदित्यनाथ को उदय प्रकाश की कई कहानियां और कविताएं याद हैं!

Satyendra PS : महंत आदित्यनाथ। शपथ ग्रहण के बाद यूपी के मुख्यमंत्री हो जाएंगे। यूपी के मुख्यमंत्री से मतलब मिनी प्रधानमंत्री। नरेंद्र मोदी द्वारा महंत को मुख्यमंत्री बनाना वास्तव में बहुत साहसिक कार्य है। इस साहस के लिए कॉमरेड मोदी को लाल सलाम। आदित्यनाथ उस दौर के हैं जो पीढ़ी Uday Prakash की पीली छतरी वाली लड़की पढ़कर बढ़ रही थी। मेरे लिए तो खुशी की बात है कि आदित्यनाथ भी उदय प्रकाश के न सिर्फ अच्छे पाठक रहे हैं, बल्कि उनको कई कहानियां और कविताएं याद थीं। साथ ही यह भी खुशी है कि लंबे समय से शीर्ष राजनीति से वंचित गोरखपुर को फिर एक शीर्ष नेता मिला है। उम्मीद की जाए कि उस इलाके की तकदीर और तस्वीर बदलेगी।

मोदी का रोड शो और प्रसारण के अड्डों पर कब्जा

Uday Prakash : अभी सारे चैनलों में बनारस के रोड शो की कवरेज़ देख रहा था. जैसा इतालो काल्विनो ने कहा था कि सत्ताधारी हमेशा इस भ्रम में रहते हैं कि अगर उन्होंने सूचना-संचार माध्यमों के ‘प्रसारण के अड्डे’ (ट्रांसमिटिंग पॉइंट) पर कब्ज़ा जमा लिया है और अपने मन मुताबिक़ समाचार या सूचनाएं अपने जरखरीद मीडिया कर्मचारियों से प्रसारित-प्रचारित करवा रहे हैं, तो इससे ‘प्रसारण के लक्ष्य समूहों (यानी दर्शक, श्रोता) के दिमाग को प्रभावित और नियंत्रित कर रहे हैं।

जब उदय प्रकाश के इस ‘खेल’ को नंदन जी ने कवर पेज पर जाने दिया!

Uday Prakash : आज से लगभग सत्ताईस साल पहले. ‘संडेमेल’ का जब सहायक सम्पादक हुआ करता था और इस फीचर पत्रिका का सम्पादक. तब एक बार रंगीन पेन्सिल से मकबूल फ़िदा हुसैन का ये चित्र इसलिए तुरत बनाया क्योंकि लाइब्रेरी में था नहीं और तब तक गूगल का आगमन नहीं हुआ था. एक छोटा-सा चित्र मिला भी तो उसके रिज़ोल्यूशन ऐसे नहीं थे कि उसे पत्रिका के कवर पर प्रिंट किया जा सकता. स्व. कन्हैयालाल नंदन तब ‘संडेमेल’ के प्रधान सम्पादक थे.

बैंक-एटीएम की क़तार में मरने वाले भारतीयों में से 91 वरिष्ठ नागरिक थे

Uday Prakash : अभी जानकारी मिली कि नोटबंदी के बाद एटीएम और बैंकों के सामने क़तार में खड़े लोगों में से जो १२०-१५० की मौत हुई है, उनमें से ९१ वरिष्ठ नागरिक थे। यानी वे नागरिक जिनकी उम्र ६० वर्ष से ऊपर थी। मैं और मेरी पत्नी, दोनों, वरिष्ठ नागरिक हैं। क्या प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, वित्तमंत्री वग़ैरह और उनकी पार्टी कभी इस देश के वृद्धजनों के लिए भी कभी सोचती है?

शेखर गुप्ता मज़ेदार निरर्थक शख़्सियत हैं!

Uday Prakash : शेखर गुप्ता मज़ेदार निरर्थक शख़्सियत हैं। अभी उन्होंने नोटबंदी की तुलना होमियोपैथी के साथ की। होमियोपैथी जिस रोग को ख़त्म करना चाहता है, पहले उसी रोग को बढ़ाता है। मरीज़ को इंतज़ार करना पड़ता है। 🙂 तो भाई साहेब! एलियोपैथी में क्या बुराई है ? आख़िर ‘सर्जिकल ऑपरेशन’ जैसा शब्द तो यहीं पाया जाता है। 🙂 पलट क्यों रहे हैं अब?

अर्णब गोस्वामी और रवीश कुमार पत्रकारिता के दो विपरीत छोर हैं : उदय प्रकाश

Uday Prakash : There have been two striking popular and leading poles in TV journalism spirited these days. One in English and the other in Hindi. I’m always skeptical about Hindi as it’s always characterized by the people who represent it, in politics, culture and media. My friends here on Facebook know about my views through my posts time and again. One of the poles, in English was Times Now, anchored by Arnab Goswami and the other, in Hindi is NDTV, with its anchor Ravish Kumar. 

हमारा इशारा हंसी-कोप के स्थायी भाव में रहने वाले सुधीश पचौरी और विष्णु खरे की टिप्पणियों की ओर है

Arun Maheshwari : लेखकों और विवेकवान बुद्धिजीवियों पर लगातार जानलेवा हमलों के प्रतिवाद में उदयप्रकाश ने साहित्य अकादमी का पुरस्कार लौटा दिया। इसका हिंदी के व्यापक लेखक समुदाय को जहां गर्व है तो वहीं कुछ बुरी तरह आहत। उनकी प्रतिक्रियाओं से लगता है जैसे किसी सुंदर औरत को देखकर अचानक ही कोई चीखने लगे – देखो वह कितनी बेशर्म है, अपने कपड़ों के पीछे पूरी नंगी है! इस बारे में हमारा इशारा खास तौर हंसी और कोप के स्थायी भाव में रहने वाले क्रमश: सुधीश पचौरी और विष्णु खरे की टिप्पणियों की ओर है।

कलबुर्गी के हत्यारे से कम नहीं दैनिक भास्कर का जुर्म

Vineet Kumar :  वैसे तो न्यूज वेबसाइट के नाम पर पार्शियल पोर्न वेबसाइट चला रहे भास्कर समूह के लिए हिट्स के खेल में नीचता की हद तक उतर आना आम बात है. इसे हम रूटीन के तौर पर देखते आए हैं. फैशन शो के दौरान मॉडल के कपड़े खिसक जाते हैं तो वो उस हिस्से को ब्लर करने के बजाय लाल रंग का दिल बनाना ज्यादा बेहतर समझता है. लेकिन अब इस हद तक उतर आएगा कि ये अश्लीलता शब्दों को बेधकर घुस आएगी और वो भी उस संदर्भ में जहां असहमति में खड़े होना आसान नहीं है.

प्रो. कलबुर्गी की हत्‍या के विरोध में उदय प्रकाश ने साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार लौटाया

Uday Prakash : पिछले समय से हमारे देश में लेखकों, कलाकारों, चिंतकों और बौद्धिकों के प्रति जिस तरह का हिंसक, अपमानजनक, अवमानना पूर्ण व्यवहार लगातार हो रहा है, जिसकी ताज़ा कड़ी प्रख्यात लेखक और विचारक तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ साहित्यकार श्री कलबुर्गी की मतांध हिंदुत्ववादी अपराधियों द्वारा की गई कायराना और दहशतनाक हत्या है, उसने मेरे जैसे अकेले लेखक को भीतर से हिला दिया है।

उदय प्रकाश ने नाराज होकर मुझे अपनी फ्रेंड लिस्ट से निकाल दिया!

Roshan Premyogi : उदय प्रकाश और प्रभात रंजन में एफ़बी पर बहस चल रही थी, बहस में उदय प्रकाश हिंदी को भी गाली दे रहे थे. उन्होंने हिंदी के एक महान साहित्यकार के नाम पर मिले सम्मान के प्रमाणपत्र को शौचालय में फ़्लश करने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि हिंदी ने मुझे क्या दिया? जब दोनों के बीच यह चल रहा था तो उनके कुकुर झौं-२ को पढ़ते हुए मैं यह सोच रहा था कि जिस हिंदी लेखक उदय प्रकाश को पढ़ते हुए मैं बड़ा हुआ क्या यह वही व्यक्ति है. जिसकी हर कहानी पर हिंदी में गली-गली चर्चा होती थी, क्या यह वही लेखक है?