जागरण कर्मचारी लड़ाई जीते, इंक्रिमेंट-प्रमोशन समेत ज्यादातर मांगें प्रबंधन को मंजूर

नोएडा : अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत दैनिक जागरण के कर्मचारियों का प्रबंधन से समझौता हो गया। उनके ज्यादा से ज्यादा मान लेने के लिए प्रबंधन मजबूर हो गया। आंदोलन की दो-तीन खास कामयाबियां रहीं। एक तो काम के घंटे छह सुनिश्चित हो गए, ओवर टाइम ड्यूटी का डबल भुगतान मिलेगा, साथ ही वेतन में दस प्रतिशत तक इंक्रिमेंट होगा। 

 

वेतन नहीं तो काम नहीं, बारिश में भीगकर भी सहारा कर्मी धरने पर अडिग, हड़ताल जारी

राष्ट्रीय सहारा के नोएडा स्थित मुख्यालय पर कल रात से बारिश में भीगते हुए प्रबंधन से सात महीने के बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर धरना दे रहे सहारा कर्मचारी दूसरे दिन भी डटे हुए हैं। सहारा समूह के प्रिंट और इलेक्ट्रानिक दोनो के काम-काज ठप कर मीडियाकर्मी अब बिना वेतन के काम के मूड में नही हैं। उन्होंने ‘वेतन नहीं तो काम नहीं’ का पंफलेट चिपका दिया है और प्रबंधन से पूरे वेतन के भुगतान की तारीख़ तय करने की मांग कर रहे हैं । पूरी रात धरने पर जमे रहे सौ से अधिक सहाराकर्मियों में फूट डालने के मकसद से प्रबंधन ने उर्दू सहारा कर्मियों को सैलरी का आश्वासन दिया लेकिन एकता बरकरार रखते हुए उन्होंने प्रस्ताव ठुकरा दिया। आंदोलनकारियों ने प्रबंधन द्वारा दिए गए खाद्य पदार्थ भी लेने से मना कर दिया। 

बारिश के बावजूद धरने पर जमे हुए सहारा के कर्मचारी

जागरण में जुनून को मिसाल बना दो, तभी मशाल रोशन होगी

दैनिक जागरण पत्र ही नहीं मित्र की भाषा को दरकिनार कर जिन कर्मचारियों की मेहनत, लगन, कर्मठता, ईमानदारी के बलबूते आसमान की ऊंचाइयों को हिंदी भाषा का सर्वाधिक पठनीय अखबार कहलाने का तमगा अपने पास सुरक्षित रखने में कामयाब रहने वाला, आज अपने कर्मचारियों को ध्वस्त करने की हरसंभव कोशिश कर रहा है। यही कर्मचारी दैनिक जागरण को अपना मित्र मानने की भूल पिछले 25 सालों से करते आ रहे हैं।

कर्मचारियों से निपटने के लिए दमन की रणनीति बनाने में जुटा जागरण प्रबंधन, कोई भी कार्रवाई भारी पड़ना भी तय

दैनिक जागरण नोएडा का प्रबंधन अब आंदोलन की धमक से सहम चुका है। अब वह बड़ी कार्रवाई पर मंत्रणा में मशगूल हो गया है। कर्मचारी बहादुरी से अपनी मांगों पर अटल रहते हुए पूरी तरह आरपार की लड़ाई के लिए कमर कस चुके हैं। ताजा सूचना ये मिल रही है कि जागरण मालिक और प्रबंधक अब संस्थान के आंदोलित पुराने कर्मचारियों को हटा कर नई भर्ती करने की योजना बना रहे हैं। नई भर्ती के लिए इंटरव्यू लिए जा रहे हैं। जो लोग यूनियन में शामिल हैं,  उनको हटाने की तैयारी की जा रही है। हालाँकि ये भी कहा जा रहा है की यह चर्चा यूनियन की एकता तोड़ने के लिए प्रबंधन द्वारा फैलाई जा रही है।

दैनिक जागरण नोएडा में काली पट्टियां बांधकर प्रबंधन की नीतियों का विरोध जताते कर्मचारी

जागरण दफ्तर पहुंचे लेबर इंस्पेक्टर तो उमड़ पड़े फरियादी

नोएडा : मोदी जी, देखिए क्‍या सीन है…..आपके बल पर दैनिक जागरण अपने कर्मचारियों से दादागीरी कर रहा है। आप सिर्फ एक बार डपट दें तो उसकी क्‍या मजाल। जब जागरण कर्मचारियों का हुजूम भरी दोपहरी में कार्यालय परिसर से बाहर निकल आया। मौका था- 30 मई को लेबर इंस्‍पेक्‍टर के नोएडा के सेक्‍टर 63 स्थित दैनिक जागरण कार्यालय के दौरे का। 

अपराध करा रहे दैनिक जागरण के कई अधिकारी, कर्मचारियों के विरोध पर लौट गए पुलिस वाले

दैनिक जागरण प्रबंधन एक ऐसी आग को हवा दे रहा है, जिससे आमतौर पर इतिहास बदल जाया करते हैं। हम आपको बता चुके हैं कि सोमवार को सर्बर बैठने के बाद हड़ताल की आशंका से दैनिक जागरण की नोएडा यूनिट के परिसर में पुलिस बुला ली गई थी। इसका कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया और …

लाइव इंडिया से 32 और को बाहर करने का फरमान, कर्मियों में गुस्सा, फोर्स तैनात

नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों की जुबान में कहें तो ‘लाइव इंडिया कंपनी’ अब चोर बन गई है, जो मीडिया कर्मियों का पैसा खाने पर लगी है। बसंत झा ने फिर से एकदम एचआर में 32 लोगों को निकालने का आदेश दे दिया है, जिनमें 13 लोग संपादकीय विभाग के और 19 कर्मी ग्राफिक्स व सर्कुलेशन के हैं। सर्कुलेशन से आठ और एडिटोरियल से दो लोगों को पहले ही निकाल बाहर किया जा चुका है। गौरतलब है कि ‘समृद्ध जीवन’ चिटफंड कंपनी के स्वामित्व में ‘लाइव इंडिया’ न्यूज चैनल, ‘लाइव इंडिया’ और ‘प्रजातंत्र लाइव’ नाम से अखबार प्रकाशित किए जाते हैं। बसंत झा इस मीडिया तंत्र के नए संपादक हैं, जिनकी हरकतों से इन दिनो मीडिया कर्मियों में भारी रोष है।

मजीठिया मामला : नियोक्ता पक्ष को तीन माह की मोहलत, गौरतलब अंदेशे और कई बड़े सवाल !

लाखों मीडिया कर्मियों के आर्थिक भविष्य से जुड़े मजीठिया वेतनमान के मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद न्यायाधीश रंजन गोगोई की खंडपीठ का राज्य सरकारों को आदेश बार बार एक चिंताजनक अंदेशे से रू-ब-रू कराता है। न्यायाधीश का आदेश है कि राज्य सरकारें विशेष श्रम अधिकारी नियुक्त करें और वे अधिकारी तीन महीने के भीतर मजीठिया वेज क्रियान्वयन की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करें। उसके बाद इस मामले पर अगली सुनवाई होगी। यानी साफ है कि अब मामला लंबा खिंचेगा।