कर्मचारियों की लिस्ट में अपना नाम न पाकर राष्ट्रीय सहारा देहरादून के संवादसूत्र भड़के

इस बीच, ताजी सूचना ये है कि राष्ट्रीय सहारा देहरादून के कर्मचारियों की लिस्ट जो श्रम आयुक्त को प्रबंधन द्वारा सौंपी गई है, उस सूची में अपना नाम न पाकर संवादसूत्र भड़क उठे हैं। आठ-आठ साल से नियमित कर्मचारी की तरह काम कर रहे संवादसूत्रों का कहीं नाम ही नहीं है।

संवादसूत्र के रूप में काम कर रहीं समीना मलिक, राजकिशोर तिवारी, प्रदीप फर्सवाण, भगवती प्रसाद कुकरेती, भूपेंद्र कंडारी, ललित कुमार, दीपक बडथ्वाल (फोटोग्राफर) और अंकित (फोटोग्राफर) आदि में काफी नाराजगी है। समाचार लिखे जाने तक (यानि शाम सात बजे तक) कामकाज नहीं हुआ। सभी संवादसूत्र संपादक के चैंबर में डटे रहे। दो बजे से शुरू होने वाली शिफ्ट भी प्रभावित रही। उन्होंने काम रोक दिया।

मूल खबर…

सहारा प्रबंधन से आए लोग सुनवाई से पहले ही श्रमायुक्त कार्यालय देहरादून को कागजात रिसीव कराकर रफूचक्कर हुए (देखें दस्तावेज)

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दैनिक जागरण नोएडा के 18 मीडियाकर्मी टर्मिनेट, प्रबंधन ने बाउंसर बुलाया, पुलिस फोर्स तैनात

दैनिक जागरण नोएडा की हालत बेहद खराब है. यहां मीडियाकर्मियों का जमकर उत्पीड़न किया जा रहा है और कानून, पुलिस, प्रशासन, श्रम विभाग, श्रम कानून जैसी चीजें धन्नासेठों के कदमों में नतमस्तक हैं. बिना किसी वजह 18 लोगों को टर्मिनेट कर उनका टर्मिनेशन लेटर गेट पर रख दिया गया. साथ ही प्रबंधन ने बाउंसर बुलाकर गेट पर तैनात करा दिया है. भारी पुलिस फोर्स भी गेट पर तैनात है ताकि मीडियाकर्मियों के अंदर घुसने के प्रयास को विफल किया जा सके. टर्मिनेट किए गए लोग कई विभागों के हैं. संपादकीय, पीटीएस से लेकर मशीन, प्रोडक्शन, मार्केटिंग आदि विभागों के लोग टर्मिनेट किए हुए लोगों में शामिल हैं.

 दरअसल पूरा मामला मार्केटिंग की दो लड़कियों को टर्मिनेट किए जाने से शुरू हुआ. बिना कारण बताए जब दो लड़कियों को टर्मिनेट कर दिया गया तो विभिन्न विभागों के करीब दो दर्जन लोग एकजुट होकर सीजीएम नीतेंद्र श्रीवास्तव के पास गए और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया पूरी किए टर्मिनेट किए जाने को अनुचित बताया. कर्मियों के दबाव में लड़कियों को आफिस में आने और काम करने की अनुमति तो दी गई लेकिन जैसे ही सब लोग अपने अपने काम पर लौटे, प्रबंधन ने इन दो दर्जन लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा करा दिया.

उधर, मार्केटिंग की लड़कियों ने साफ साफ बताया कि दरअसल उन्हें टर्मिनेट परफारमेंट से कारण नहीं किया गया है बल्कि वे बासेज की कई अनुचित मांगों को पूरा नहीं कर रहीं थी, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया. लड़कियों ने भी छेड़छाड़ समेत कई धाराओं में प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा लिखाया. इससे परेशान प्रबंधन ने खुद को वजनदार और दमदार दिखाने की कोशिश करते हुए 18 मीडियाकर्मियों को टर्मिनेट कर दिया. फिलहाल नोएडा स्थित दैनिक जागरण के गेट पर भारी तनाव पसरा हुआ है.

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सहारा मीडिया : हड़ताल से अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे, कर्मियों से अपील

पहले तो राष्ट्रीय सहारा नोएडा और वाराणसी सहित उन सभी यूनिटों के बहादुर साथियों को सलाम, जिन्होंने कार्य बहिष्कार कर ऐतिहासिक एकजुटता का परिचय दिया। देहरादून यूनिट के लोग कब जगेंगे, यह कहा नहीं जा सकता। लेकिन बाकी तीन यूनिटों के बहादुर साथियों ने सहारा प्रबंधन की हेकड़ी निकाल दी, जो सीना ठोंक कर कहते थे कि हम विश्व सबसे बड़े और एकमात्र संस्थान हैं जहां यूनियन नहीं है। हमारा संस्थान विश्व का सबसे बडा भावनात्मक परिवार है।

नोएडा के बहादुर साथियों ने जेल की हवा खा रहे सुब्रतो राय की सारी हेकडी निकाल कर रख दी। इसमें वाराणसी के साथियों का योगदान भी नहीं भुलाया जा सकता । काशी के साथियों ने वहां के चापलूस संपादक स्नेह रंजन की उस ऐंठ को धूल चटा दिया कि हिंदी दैनिक आज के कर्मचारियों को बुलाकर अखबार निकलवा लेंगे। लखनऊ के साथियों पर वहां के स्थानीय संपादक रहे रणविजय सिंह अनुनय विनय काम कर गया। सूचना है कि यहां से छपने वाला डाक संस्करण नहीं छपा। सभी संस्करणों में सबसे गंदी भूमिका गणेश शंकर पुरस्कार से सम्मानित दिलीप कुमार चौबे के नेतृत्व में छपने वाले देहरादून संस्करण की रही है। न केवल यहां सभी संस्करण निकले बल्कि इसने अन्य संस्करणों मसलन मुख्यालय नोएडा की अपने सारे पेज भेज कर मदद भी की। हाँ हर हालत में रात ११ बजे तक आफिस छोड देने वाले संपादक चौबे जी रात दो बजे तक डटे रहे और उनके साथ यूनिट हेड भी।

सहारा के साथियों से अपील

पहले तो उन बहादुर साथियों को क्रांतिकारी अभिनंदन जिन्होंने कार्य बहिष्कार कर अखबार का प्रकाशन ठप/बाधित किया । जिस भी यूनिट के साथी अपना विरोध दर्ज करा पाए, उनके सामने भी सुनहरा मौका है।  मित्रों, धर्म संकट में न पड़ें। जब लोहा गरम हो तभी चोट करना चाहिए। आखिरकार, एक साल आप इसी धर्म संकट में थे कि मालिक जेल में है ऐसे में विरोध उचित नहीं। मालिक हमारी आपकी वजह से जेल में नहीं है फिर वो वहाँ भी ऐश कर रहा है। बच्चे हमारे भूखों मर रहे हैं। अखबार के सारे खर्चे पूरे करने के लिए संस्थान के पास पैसे हैं कर्मचारियों को वेतन देने के लिए नहीं है।

अब आप खुद ही सोचिए लगभग तीन साल से डीए शून्य है, सालाना बढोत्तरी भी खा गए, बोनस नहीं दिया। १० / १२साल से प्रमोशन नहीं हुआ है। मजीठिया और मजीठिया का एरियर छोडिए आज छोटे से छोटे कर्मचारी का लाख डेढ़ लाख सिर्फ और सिर्फ वेतन के मद का बाकी है। मित्रों डरे नहीं, अपने हक के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें। लडाई को अंजाम तक पहुंचाने के लिए हर हथियार का इस्तेमाल करें। वकीलों से मिलें, लेबर कोर्ट भी जाएं। हां, अधिकारियों की चिकनी चुपडी बातों में न आएं।

यशवंत भाई यह अपील सहारा के कर्मचारियों के व्यापक हित में है। आपने हर आंदोलन का आंदोलनकारियों का हर तरह से सहयोग किया है। हमें याद है पी ७ में आपका योगदान, मजीठिया के लिए अपनी बिरादरी का सहयोग और जागरण के साथियों के लिए अलख जगाने का कार्य। हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप हमारा नैतिक बल हमेशा की तरह बढाते रहेंगे। इस अपील यदि आप भडास में स्थान देंगे तो अगले आंदोलन को बल मिलेगा। सहारा के लोगों को छह माह का वेतन नहीं मिला है वे पर्चे आदि नहीं छपवा सकते बस भड़ास का ही सहारा है।

राष्ट्रीय सहारा, देहरादून में कार्यरत रहे पत्रकार अरुण श्रीवास्तव द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित.

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विवादित चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन के अखबार ‘प्रजातंत्र लाइव’ में बवाल, पुलिस पहुंची, मालिक से शिकायत

खबर है कि विवादित चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन के अखबार प्रजातंत्र लाइव में अचानक की गई छंटनी के खिलाफ बवाल हो गया है. छंटनी के शिकार मीडियाकर्मी आफिस पहुंचे. ये लोग संपादक बसंत झा से मिलना चाहते थे. बसंत झा ने मिलने से इनकार कर दिया. इसके बाद सभी छंटनी के शिकार कर्मचारी जबरन बसंत झा की केबिन में घुस गए. इससे नाराज संपादक बसंत झा ने सेक्यूरिटी गार्ड्स को बुलाकर सबको बाहर करने का आदेश दिया. इससे नाराज कर्मियों ने 100 नंबर पर पुलिस को काल कर दिया. पुलिस आफिस आई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की.

पुलिस ने लिखित कंप्लेन देने को कहा. इसके बाद कर्मियों ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई. उधर कुछ कर्मियों ने समृद्ध जीवन चिटफंड कंपनी के मालिक को मेल कर अपनी बात कही है. चर्चा है कि ये मीडियाकर्मी जल्द ही लेबर विभाग जाकर कंपनी के मालिकों के खिलाफ कंप्लेन दर्ज कराएंगे. मालिकों को भेजा गया शिकायती मेल इस प्रकार है….

To-Supriya.svk@gmail.com
Cc:- Basantzha@gmail.com

DEAR SIR/Mam

WE REQUEST YOU TO PLEASE MANAGE TIME TO MEET WITH US. YOU TERMINATED OUR SERVICES WITH OUT ANY PRIOR INFORMATION WHICH IS NOT ONLY AGAINST THE EMPLOYEE’S POLICY BUT ALSO THE EXPLOITATION OF OUR RIGHTS. WE REQUEST YOU TO MEET AND EXPLAIN US AUTHENTIC REASON AND ALSO TAKE CARE OF OUR IMMEDIATE COMPANSATIONS. EE HAVE FAMILY AND UNAVOIDABLE DAILY OVERHEADS FOR LIVELIHOOD. WE RRQUEST TO NEGOTIOTE OUR OPPORTUNITIES WITH IN THE COMPANY OTHERWISE WE HAVE TO SEEK HELP OF GOVT. ADMINISTRATIONS AND AGENCIES AND POLICE.WE WOULD HAVE TO LOUDGE COMPLAINTS AGAINST YOUR UNLAWFULL BEHAVIOUR TOWARDS EMOLOYEES AND INVESTORS IN THE COMPONY. KINDLY REPLY ME & SUGGEST ME ALSO

REGARDS

NEWSPAPER & MAGAZINE CIRCULATION STAFF

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दैनिक भास्कर जयपुर में भी हड़ताल, मीडियाकर्मी आफिस से बाहर आए

एक बड़ी खबर जयपुर से आ रही है. कल शाम दर्जनों मीडियाकर्मी दैनिक भास्कर आफिस से बाहर आ गए. ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड मांगने और सुप्रीम कोर्ट में मानहानि का मुकदमा करने के कारण प्रबंधन की रोज-रोज की प्रताड़ना से परेशान थे. कल जब फिर प्रबंधन के लोगों ने मीडियाकर्मियों को धमकाया और परेशान करना शुरू किया तो सभी ने एक साथ हड़ताल का ऐलान करके आफिस से बाहर निकल गए.

यह देखते ही प्रबंधन के हाथ पांव फूल गए. बाद में प्रबंधन के लोगों ने गुस्साए मीडियाकर्मियों को मनाने की कोशिश की लेकिन मीडियाकर्मियों ने थाने और लेबर आफिस को सूचित कर दिया है कि उन्हें प्रबंधन की तरफ से धमकाया जा रहा है व झूठे मामलों में फंसाने की बात कहकर डराया जा रहा है.

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मजीठिया की आग दैनिक भास्कर रतलाम पहुंची, कर्मचारी हुए एकजुट

: यहां भी हो सकती है होशंगाबाद, कोटा, भीलवाड़ा, हिसार और नोएडा जैसी हड़ताल : मजीठिया की आग मध्य प्रदेश के रतलाम जिले तक भी पहुंच गई है। यहां भी दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका के सभी विभागों के कर्मचारी (पत्रकार और गैर पत्रकार) ने अलग-अलग माध्यमों से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अखबारों के मालिकों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का केस दायर कर दिया है। अखबार प्रबंधनों को इसकी भनक भी लग गई है। उन्होंने समझाने, दबाने और प्रताड़ित करने की तैयारी भी कर ली है।

पता चला है कि होशंगाबाद में हुई हड़ताल के बाद वहां पहुंची दैनिक भास्कर के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम सीधे रतलाम जाने वाली थी। आखिरी समय में कार्यक्रम रद्द हो गया। इसके बाद उज्जैन से एक बड़े अधिकारी को “अकेला” ही रतलाम भेजा गया। उसने मीटिंग के नाम पर कर्मचारियों को इशाारों इशारों में मजीठिया के भूत से दूर रहने के लिए कहा। जरा सी बात पर आग बबूला हो जाने वाला यह अधिकारी इस बार हड़ताल के डर से कड़वे घूंट पीकर रह गया। पता चला है कि इस अधिकारी ने कुछ कर्मचारियों से अलग-अलग बात की और उनसे मजठिया की लड़ाई लड़ रहे लोगों के नाम जानने का प्रयास किया। लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।

चिंटुओं ने लिया चुगलखोरी का ठेका…
उन्होंने केेस दायर करने वाले कर्मचारियों के नाम पताकर बताने का ठेका भी ले लिया है। ये चिंटू टाइप लोग खुद ही केस दायर करने वाले कर्मचारियों को मजीठिया के चक्कर में नहीं फंसने की सलाह दे रहे हैं। खासकर दैनिक भास्कर में ऐसे चिंटू टाइप लोग ज्याद सक्रिय दिख रहे हैं। इनमें से एक तो खुद को  रतलाम के मौजूदा संपादक की मूंछ का बाल ही समझता है। जबकि एक अवसरवादी है जो मौका पड़ने पर गधे को भी बाप बनाने के लिए हरदम तैयार रहता है। इन दलाल रूपी संजय के कारण संपादक ने धृतराष्ट्र का चोला ओढ़ रखा है।

कर्मचारी हुए एकजुट…
दलालों और संपादक के रवैये के कारण मजीठिया के लिए केस दायर करने वाले कर्मचारियों में और एकजुटता आई है। सभी ने तय किया है कि अगर किसी भी कर्मचारी पर प्रबंधन ने जरा सा भी दबाव बनाया तो वे काम रोक कर हड़ताल पर उतर जाएंगे। कर्मचारियों ने प्रताड़ित करने स्थानीय अधिकारियों और उनका सहयोग करने वाले दलालों के खिलाफ स्थानीय न्यायालय में वाद दायर करने की तैयारी भी कर ली है।

अधिकारियों के रवैये पर ज्यादा गुस्सा…
पता चला है कि रतलाम से केस दायर करने वालों मे वे कर्मचारी ज्यादा हैं, जो काफी समय से दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया स्थानीय संपादक और वरिष्ठ पदाधिकारियों की प्रताड़ना झेल रहे हैं। नईदुनिया और दैनिक भास्कर में तो प्रताड़ना से तंग आकर कई लोगों ने तो नौकरी ही छोड़ दी। कुछ लोगों से बेवजह इस्तीफे ले लिए गए ताकि अधिकारी अपने एजेंटों और चरणदासों को ज्यादा वेतन पर ऊंचे पद पर रख सकें। दैनिक भास्कर में साढ़े तीन साल के भीतर ऐसे नौकरी छोड़ने वाले या निकाले जाने वालों की संख्या 38 तक पहुंच चुकी है।

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कोटा के बाद दैनिक भास्कर भीलवाड़ा में भी बगावत, प्रबंधन पीछे हटा

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने वाले कर्मियों को लगातार परेशान करने के कारण भास्कर ग्रुप में जगह-जगह विद्रोह शुरू हो गया है. अब तक प्रबंधन की मनमानी और शोषण चुपचाप सहने वाले कर्मियों ने आंखे दिखाना और प्रबंधन को औकात पर लाना शुरू कर दिया है. दैनिक भास्कर कोटा में कई कर्मियों को काम से रोके जाने के बाद लगभग चार दर्जन भास्कर कर्मियों ने एकजुटता दिखाते हुए हड़ताल कर दिया और आफिस से बाहर निकल गए.

बाएं से दाएं : आंदोलनकारी मीडियाकर्मियों के साथ बात करते भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह, अजमेर के वरिष्ठ पत्रकार रजनीश रोहिल्ला और जर्नलिस्ट एसोसिएशन आफ राजस्थान (जार) के जिलाध्यक्ष हरि बल्लभ मेघवाल.

यह सब कोटा में चल ही रहा था कि बगल के भीलवाड़ा एडिशन से खबर आई कि वहां भी प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट जाने के कारण दो लोगों को काम पर जाने से रोका तो दर्जनों मीडियाकर्मियों ने एकजुट होकर आफिस जाने से मना कर दिया. इससे प्रबंधन के हाथ पांव फूल गए. इन्हें अंदाजा नहीं था कि किसी एक को रोकने से दर्जनों लोग काम पर न जाने का ऐलान कर देंगे. ऐसे में कोटा एडिशन की बगावत से निपट रहे भास्कर प्रबंधन ने फौरन पांव पीछे खींचना ही बेहतर समझा और सभी को काम पर जाने की अनुमति दे दी. इस तरह भास्कर प्रबंधन की रणनीति भीलवाड़ा में फेल हो गई.

भीलवाड़ा एडिशन में बगावत की खबर सुनकर कोटा पहुंचे भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह ने भीलवाड़ा का रुख कर लिया और वहां पहुंचकर आंदोलित मीडियाकर्मियों के साथ बैठक की. उन्हें आगे की रणनीति और प्रबंधन से लड़ने-भिड़ने के तरीके समझाए. साथ ही स्थानीय लेबर आफिस में प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ शिकायत करने के लिए फार्मेट दिया. भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के साथ दैनिक भास्कर अजमेर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत रहे और सुप्रीम कोर्ट जाकर मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से अपना हिस्सा भास्कर प्रबंधन से छीन लेने में सफल रहे पत्रकार रजनीश रोहिल्ला भी दैनिक भास्कर कोटा और भीलवाड़ा के कर्मियों से मिलते जुलते रहे और लड़ने पर ही हक मिलने की बात समझाते रहे. उन्होंने बताया कि मीडिया के मालिकान सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से ही डरते हैं. वे लेबर आफिस से लेकर निचली अदालतों तक को मैनेज कर पाने में कामयाब हो चुके हैं. ये मालिकान डरा धमका कर किसी तरह सुप्रीम कोर्ट से केस वापस कराना चाहते हैं. जो इस वक्त डर गया, साइन कर गया, झुक गया, वह जीवन भर पछताएगा. यही वक्त है डटे रहने का. ये प्रबंधन आप का कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

इस बीच, भास्कर प्रबंधन की तरफ से तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं. भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह ने भास्कर कर्मियों से अपील की कि वे प्रबंधन की बातों पर भरोसा न करें क्योंकि प्रबंधन की अंतिम कोशिश यही होगी कि किसी तरह झूठ बोलकर, बरगला कर, अफवाह फैला कर, डरा कर, धमका कर सुप्रीम कोर्ट जाने वालों से फर्जी कागजातों पर साइन करा लें. साथ ही मीडियाकर्मियों की एकजुटता को खत्म कर दें. यशवंत ने कहा कि एकजुटता और संगठन ही वो ताकत है जो मालिकों को घुटनों पर बिठाने में सफल हो सकेगा.

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बगावत की आग दैनिक भास्कर तक पहुंची, कोटा में हड़ताल

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भास्कर प्रबंधन नीचता पर उतारू, आंदोलनकारी कर्मियों के खिलाफ थाने में झूठी शिकायत

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बगावत की आग दैनिक भास्कर तक पहुंची, कोटा में हड़ताल

मजीठिया वेज बोर्ड पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने वाले मीडियाकर्मियों के प्रताड़ना का सिलसिला तेज हो गया है. दैनिक जागरण नोएडा के कर्मियों ने पिछले दिनों इसी तरह के प्रताड़ना के खिलाफ एकजुट होकर हड़ताल कर दिया था और मैनेजमेंट को झुकाने में सफलता हासिल की थी. ताजी खबर दैनिक भास्कर से है. यहां भी मीडियाकर्मियों को सुप्रीम कोर्ट जाने पर परेशान किया जाना जारी है. इसके जवाब में दैनिक भास्कर के कोटा के दर्जनों कर्मियों ने एकजुट होकर हड़ताल शुरू कर दिया है.

सूत्रों ने बताया कि भास्कर प्रबंधन ने कोटा संस्करण के कर्मियों को सुप्रीम कोर्ट जाने की बात पता चलने पर चार पांच लोगों को आफिस आने से रोक दिया. इसकी जानकारी मिलते ही हर विभाग के दर्जनों कर्मचारी भड़क गए और एकजुट होकर काम रोको हड़ताल शुरू कर दिया. आईटी, प्रोडक्शन, संपादकीय, मार्केटिंग, एकाउंट समेत सभी विभागों के करीब पचास-साठ कर्मियों ने आफिस का बायकाट कर नारेबाजी शुरू कर दी. हड़ताल की खबर भास्कर प्रबंधन के पास पहुंचते ही हाथ पांव फूल गए. हर विभाग के स्टेट हेड को कोटा की ओर रवाना किया गया. उधर, संपादक और मैनेजर ने अपने अपने खास चिंटूओं को बहला-फुसला कर काम पर लगा लिया और किसी तरह अखबार छापने में सफल रहे. कर्मचारियों ने श्रम विभाग में लिखित तौर पर काम से रोके जाने की शिकायत की है और इसकी एक कॉापी थाने को भी दी है.

इस बीच, कोटा में कर्मचारियों के शोषण-उत्पीड़न और कार्य बहिष्कार की जानकारी मिलते ही भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह दिल्ली से मेवाड़ एक्सप्रेस से कोटा के लिए रवाना हो गए. उन्होंने कर्मचारियों की टीम भावना और प्रबंधन से जूझने की क्षमता की सराहना की और पूरे भास्कर समूह के कर्मचारियों से अपील की कि वे किसी भी तरह के शोषण उत्पीड़न और अन्याय का न झेलें. जब तक गलत का विरोध नहीं किया जाएगा, तब तक मालिकों की मनमानी पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता.

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मीडियाकर्मियों को अपनी कमर कसकर रहना होगा, मालिकान के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का समय करीब आ रहा है…

Abhishek Srivastava : रात साढ़े दस बजे जब मैं शनि बाज़ार में सब्‍ज़ी खरीद रहा था, कि अचानक मोबाइल पर Yashwant Singh का नाम चमका। हलो बोलने के बाद बिना किसी औपचारिकता के उधर से आवाज़ आई, ”जागरण में हड़ताल हो गई है। दो सौ लोग सड़क पर हैं। पहुंचिए।” मैंने Sandeep Rauzi को फोन मिलाया, तो वे दफ्तर में थे। वे बोले कि घर पहुंचकर और बाइक लेकर मेरे यहां कुछ देर में पहुंच रहे हैं। फिर मैंने Pankaj भाई को एसएमएस किया। संयोग देखिए कि आंदोलन के बीचोबीच हम सभी मौके पर घंटे भर बाद मौजूद थे। पंकज भाई के साथ वरिष्‍ठ पत्रकार प्रशांत टंडन भी आंदोलनरत कर्मचारियों को समर्थन देने रात एक बजे पहुंचे। तीन चैनलों के पत्रकारों के वहां कैमरा टीम के साथ पहुंचने से आंदोलन को और बल मिला।

(दैनिक जागरण के महाप्रबंधक का घेराव और कर्मचारियों के साथ सड़क पर समझौते की वार्ता.)

(दैनिक जागरण गेट के सामने खड़े हड़ताली मीडियाकर्मी)

(मीडियाकर्मियों के आंदोलन को कैमरे में कैप्चर करते पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव)

यह सब हालांकि उतना अप्रत्‍याशित नहीं था, जितना सुखद आश्‍चर्य रहा वहां एक बुजुर्ग से मिलना। नाम राजू मंडल, उम्र 70 पार, निवासी सुपौल (बिहार), 14 साल पहले टाइम्‍स ऑफ इंडिया की प्रेस से रिटायर, एक ज़माने में टाइम्‍स ऑफ इंडिया में छह माह की ऐतिहासिक हड़ताल के सूत्रधार और जागरण के एक कर्मचारी के पिता। एक पिता अपने बेटे को आंदोलन में समर्थन देने आया था। मुझे गोर्की की ”मां” याद आ गई। मंडल बोले, ”नोएडा की धरती पर मैंने पहली बार कदम रखा है। बेटे ने बताया कि सब लोग सड़क पर हैं तो मैंने उससे कहा कि मुझे भी ले चल। आप लोग सिर्फ दो बात याद रखो- ईमानदारी और हिम्‍मत। लड़ाई जीत जाओगे।” महाप्रबंधक के साथ समझौते के बाद दो बजे जब अधिकतर कर्मचारी भीतर चले गए, तो मंडलजी ने वहां मौजूद हम चार-पांच नौजवानों को गले लगाया और हमारा सिर चूमते हुए बोले, ”मेरे बेटे का खयाल रखना।”

जब आंदोलन का पानी चढ़ता है, तो कैसे-कैसे पुराने चावल उसमें उबलने लगते हैं, यह घटना इसकी एक मिसाल भर है। दैनिक जागरण में कल रात एक साथ नोएडा और हिसार में हुई हड़ताल इस बात का प्राथमिक संकेत है कि आने वाले दिनों में मीडियाकर्मियों को अपनी कमर कसकर रहना होगा। मालिकान के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का समय करीब आ रहा है। मुझे लगता है कि अपने आपसी मतभेद भुलाकर पत्रकारों को अपने मजदूर वेश में आ जाना चाहिए। अगले महीने 9 मार्च की तारीख अहम है जब मजीठिया से जुड़े सारे मुकदमों को एक साथ क्‍लब कर के सुनवाई होगी। उम्‍मीद की जाए कि विजय अपनी होगी और मालिक हमारा हक़ देने को मजबूर होंगे।

पत्रकार और एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

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संजय गुप्ता को रात भर नींद नहीं आई, जागरण कर्मियों में खुशी की लहर

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संजय गुप्ता को रात भर नींद नहीं आई, जागरण कर्मियों में खुशी की लहर

बहुत दिनों बाद ऐसा हुआ. इसे पहले ही हो जाना चाहिए था. डिपार्टमेंट का कोई भेद नहीं था. सब एक थे. सब मीडियाकर्मी थे. सब सड़क पर थे. सबकी एक मांग थी. मजीठिया वेज बोर्ड खुलकर मांगने और सुप्रीम कोर्ट जाने वाले जिन-जिन साथियों को दैनिक जागरण प्रबंधन ने परेशान किया, ट्रांसफर किया, धमकाया, इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया, उन-उन साथियों के खिलाफ हुई दंडात्मक कार्रवाई तुरंत वापस लो और आगे ऐसा न करने का लिखित आश्वासन दो.

अखबार छपने का वक्त हो चुका था लेकिन दैनिक जागरण नोएडा के कर्मी सड़क पर थे. आफिस से बाहर. सारा कामकाज ठप था. पांच-दस चिंटू टाइप लोग काम पर लगे थे, जो खुद को स्वाभिमानी मनुष्य कम, दास प्रथा वाले समय का दास ज्यादा समझते हैं. करीब तीन-चार सौ कर्मियों के सड़क पर आ जाने से दैनिक जागरण नोएडा के मालिक संजय गुप्ता के आंखों की नींद चली गई. वे जहां थे, वहीं चौकन्ने हो गए. आफिस से हाटलाइन से जुड़ गए. मैनेजरों को तुरंत हड़ताल खत्म कराने के लिए कहने लगे. मैनेजर अंदर बाहर यानि कभी हड़ताली कर्मियों से बात करने आते तो कभी अंदर जाकर संजय गुप्ता को रिपोर्ट बताते. देखते ही देखते कई न्यूज पोर्टलों, न्यूज चैनलों और अखबारों के लोग इस हड़ताल को कवर करने पहुंच गए. यह नई परिघटना थी. अखबार के हड़ताली कर्मियों की खबर को भी कवर किया जाने लगा है. यह न्यू मीडिया का प्रताप है. यह बदलते दौर और बदलती तकनीक का कमाल है. भड़ास पर खबर फ्लैश होते ही देश भर के लोगों के फोन दैनिक जागरण नोएडा में काम करने वालों के मोबाइल पर घनघनाने लगे.

मैनेजरों की एक न चली. साले लालीपाप वापस कर दिए गए. मीडियाकर्मी अपनी मांग पर अड़े रहे. नोएडा के हड़ताल की आग हिसार यूनिट तक पहुंच गई. वहां भी मीडियाकर्मी काम ठप कर चुके थे. संजय गुप्ता के हाथ-पांव फूलने लगे. खुद को बहुत काबिल, विद्वान और बड़ा आदमी समझने वाला संजय गुप्ता इस रात लाचार था. दिल्ली चुनाव और नतीजों को लेकर अनुमान संबंधी खबरें छापी जानी थी. रविवार का एडिशन था. इस रोज बहुत ज्यादा अखबार बिकता है. अगर अखबार मार्केट में न आया तो जागरण की थूथू होने लगेगी, दूसरे अखबारों की चांदी हो जाएगी. ऐसे में किसी भी तरह हड़ताल को खत्म करना था. परम कंजूस और शोषक किस्म का आदमी संजय गुप्ता अंतत: समर्पण की मुद्रा में आ गया. दैनिक जागरण का मालिक संजय गुप्ता मीडियाकर्मियों की ताकत के आगे झुक गया. सभी तबादले और दंडात्मक कार्रवाई वापस करने की बात मान ली. आगे भी परेशान ना करने का वादा किया. मजीठिया वेज बोर्ड के लिए जो लोग सुप्रीम कोर्ट गए हैं, उनको भी नहीं छेड़ने का आश्वासन दिया. यह सब लिखित रूप में किया.

यह बात जब हड़ताली कर्मियों को बताई गई तो उन्होंने आपस में विचार विमर्श किया और इस वादे के साथ हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया कि अगर मालिकों ने फिर कभी किसी को परेशान किया तो ऐसे ही सभी साथी हड़ताल कर आफिस से बाहर आ जाएंगे. यह बहुत बड़ी परिघटना थी. बहुत दिनों बाद ऐसी एकजुटता दिखी. अगर यही एकजुटता शुरू से रही होती तो इन मालिकों की औकात न होती कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी न दें. देर आए दुरुस्त आए साथियों. यही भावना बनाए रखिए. मालिकों, मैनेजरों और संपादकों के लग्गू-भग्गू व चिंटू दस-पांच ही होते हैं और इनकी कोई औकात नहीं होती कि वे आप लोगों की एकजुटता में फूट डाल दें. ये हड़ताल बाकी मीडिया हाउसों के कर्मियों के लिए भी नजीर है. आप सब एक हो गए तो आप लोगों का खून पी पी कर मोटे बड़े हो गए इन मीडिया मालिकों को औकात में आना पड़ेगा. जिस तरह संजय गुप्ता को उनके मीडियाकर्मियों की हड़ताल के कारण रात भर नींद नहीं आई और अपने एकजुट व गुस्साए कर्मियों के आगे सरेंडर करना पड़ा, उसी तरह दूसरे मीडिया हाउसों के मालिकों के साथ भी यही होना है.

हड़ताल स्थल पर मोबाइल कैमरे के जरिए शूट किया गया वीडियो देखें: https://www.youtube.com/watch?v=EA32dSYnbgY

हड़ताल स्थल से लौटे भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की रिपोर्ट.

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संजय गुप्‍ता के लिखित आश्‍वासन पर काम पर लौटे हड़ताली जागरणकर्मी

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लिखित आश्‍वासन के बाद काम पर लौटे हड़ताली जागरणकर्मी

(दैनिक जागरण, नोएडा के कर्मियों द्वारा हड़ताल की जानकारी मिलने पर जनपक्षधर पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव कैमरे समेत मौके पर पहुंचे और फोटोग्राफी में जुट गए)


अरसे से अपने पत्रकारों, कर्मचारियों को अपना दास समझने वाले दैनिक जागरण समूह के मालिकों पहली बार सामूहिक शक्ति के सामने झुकना पड़ा है. दैनिक जागरण के मीडिया कर्मचारी इस मीडिया हाउस के समूह संपादक व सीर्इओ संजय गुप्‍ता के लिखित आश्‍वासन के बाद ही हड़ताल समाप्‍त करने को राजी हुए और काम पर वापस लौटे. मैनेजर टाइप लोगों के लालीपाप थमाकर हड़ताल खत्म कराने के तमाम प्रयास फेल होने के बाद संजय गुप्‍ता को मजबूरी में लिखित आश्‍वासन देकर मामला सुलझाना पड़ा. बताया जा रहा है कि दिल्‍ली चुनाव के चलते गुप्‍ता एंड कंपनी ने तात्‍कालिक तौर पर यह रास्‍ता अपनाया है और किसी को परेशान न करने का लिखित वादा किया है.  

संजय गुप्‍ता ने लिखित तौर पर आश्‍वासन दिया है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर दूसरे यूनिटों में ट्रांसफर किए गए लोगों को उनकी मंशा के अनुरूप यूनिटों में भेजा जाएगा. हड़ताल में शामिल किसी कर्मचारी को किसी भी कीमत पर परेशान नहीं किया जाएगा. साथ ही मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर जो कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट या अन्‍य कोर्ट गए हैं, उनके साथ कोई दुर्व्‍यवहार नहीं होगा, उन्‍हें निकाला नहीं जाएगा. संजय गुप्‍ता के इन तमाम आश्‍वासनों के बाद नोएडा समेत हिसार के कर्मचारी भी काम पर लौट गए हैं. 

बताया जा रहा है कि कर्मचारियों ने ऐसे मौके पर हड़ताल कर दिया था कि प्रबंधन को न तो उगलते बन रहा था और न निगलते. दिल्‍ली चुनाव होने के चलते मालिकों की सांस फूलने लगी थी. वे किसी भी कीमत पर हड़ताल खत्‍म कराकर अखबार प्रकाशित करवाने में जुटे हुए थे. संजय गुप्‍ता के आश्‍वासन तथा वरिष्‍ठों के हाथ-पांव जोड़ने के बाद कर्मचारी काम पर वापस लौटे हैं. हालांकि संभावना जताई जा रही है कि कर्मचारियों की एकता से डरा प्रबंधन अभी भले ही कुछ ना करे, लेकिन धीरे-धीरे वाले इन्‍हें प्रताडि़त कर सकता है. 

हड़ताल स्थल पर मोबाइल कैमरे के जरिए शूट किया गया वीडियो देखें: https://www.youtube.com/watch?v=EA32dSYnbgY

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दैनिक जागरण, नोएडा के हड़ताल की आंच हिसार तक पहुंची

दैनिक जागरण, नोएडा में कर्मचारी सड़कों पर उतर गए हैं. प्रबंधन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के खिलाफ कर्मचारियों का सालों से दबा गुस्‍सा अब छलक कर बाहर आ गया है. मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर एक संपादकीय कर्मचारी का तबादला किए जाने के बाद सारे विभागों के कर्मचारी एकजुट होकर हड़ताल पर चले गए हैं. मौके पर प्रबंधन के लोग भी पहुंच गए हैं, लेकिन कर्मचारी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं. प्रबंधन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल को बुला लिया है, लेकिन प्रबंधन के शह पर सही गलत करने वाली नोएडा पुलिस की हिम्‍मत भी कर्मचारियों से उलझने की नहीं हो रही है. 

कई सौ कर्मचारी सड़कों पर उतर गए हैं. ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन नहीं दिए जाने और कर्मचारियों को प्रताडि़त करने के लिए तमाम तरह के प्रयास किए जाने से नाराज थे. प्रबंधन के कुछ एक खास लोगों को छोड़कर सभी कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए हैं. नोएडा की हड़ताल का असर हरियाणा की हिसार यूनिट तक भी पहुंच गया है. हिसार यूनिट के जागरण कर्मचारी भी प्रबंधन के खिलाफ हड़ताल पर उतर गए हैं. माना जा रहा है कि सूचना मिलने के साथ जागरण समूह के अन्‍य यूनिटों के कर्मचारी भी प्रबंधन की हरामखोरी के खिलाफ सड़कों पर उतर जाएंगे. 

हड़ताल की सूचना मिलते ही दैनिक जागरण के मालिक और संपादक संजय गुप्ता के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी हैं. वे हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद सारे कार्यक्रम स्थगित कर किसी तरह हड़ताल तुड़वाने की कोशिशों में जुट गए हैं और कर्मचारियों में फूट डलवाने के लिए अपने चेले टाइप के मैनेजर नीतेंद्र को लगा दिया है. इस मैनेजर की सारी कोशिशें बेकार हो रही हैं. कर्मचारी प्रबंधन की कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं. उनकी मांग है कि मजीठिया मांगने वालों का तबादला रद्द करने के साथ सभी को वेज बोर्ड के हिसाब से सैलरी देने की लिखित घो‍षणा की जाए. साथ ही कर्मचारियों को हटाने या अन्‍यत्र भेजे जाने की कोशिश ना की जाए. 

कर्मचारियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनकी मेहनत से प्रबंधन अरबों रूपए कमाता है और जब उनका हक देने की बारी आती है तो उन्‍हें तरह तरह से प्रताड़ित किया जाने लगता है. वैसे भी जागरण कर्मचारियों की सैलरी अन्‍य बड़े अखबारों की सैलरी से काफी कम है. संभावना जताई जा रही है कि कर्मचारी बिना अपनी मांगों के हड़ताल किसी भी कीमत पर खत्‍म नहीं करने वाले हैं. कई अन्य पत्रकार भी मौके पर मौजूद हैं. भड़ास के संपादक यशवंत सिंह समेत पत्रकार राजीव शर्मा, अभिषेक श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, प्रशांत टंडन आदि हड़ताली जागरण कर्मियों के समर्थन में मौके पर डटे हुए हैं.

हड़ताल स्थल पर मोबाइल कैमरे के जरिए शूट किया गया वीडियो देखें: https://www.youtube.com/watch?v=EA32dSYnbgY

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दैनिक जागरण, नोएडा में हड़ताल, सैकड़ों मीडियाकर्मी काम बंद कर आफिस से बाहर निकले

मीडिया जगत की एक बहुत बड़ी खबर भड़ास के पास आई है. दैनिक जागरण नोएडा के करीब तीन सौ कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दिया है और आफिस से बाहर आ गए हैं. ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन नहीं दिए जाने और सेलरी को लेकर दैनिक जागरण के मालिकों की मनमानी का विरोध कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक हड़ताल की शुरुआत मशीन यानि प्रिंटिंग विभाग से जुड़े लोगों ने की और धीरे-धीरे इसमें सारे विभागों के लोग शामिल होते गए. सिर्फ संपादक विष्णु त्रिपाठी और इनके शिष्यों को छोड़कर बाकी सारे लोग हड़ताल के हिस्से बन गए हैं.

हड़ताल की सूचना मिलते ही दैनिक जागरण के मालिक और संपादक संजय गुप्ता के पांव तले से जमीन खिसक गई. वह हांफते दौड़ते नोएडा आफिस पहुंच रहे हैं, ऐसी अपुष्ट सूचना है. उधर, दैनिक जागरण नोएडा के मैनेजर लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह गुस्साए हड़तालियों को टैकल कैसे करें. खबर है कि जागरण प्रबंधन ने हड़ताल को देखते हुए दिन के शिफ्ट के लोगों को काम करने के लिए आफिस बुलाया है.

प्रबंधन की कोशिश है कि किसी तरह अखबार छप जाए ताकि हड़ताल को फ्लॉप साबित किया जा सके. लेकिन हड़ताली कर्मियों ने अपने यहां के बाकी सभी कर्मियों को कह दिया है कि जो भी काम करेगा, वह अपने साथियों के स्वाभिमान से खिलवाड़ करेगा क्योंकि जागरण के मालिक हर तिमाही सैकड़ों करोड़ का मुनाफा कमाते हैं लेकिन जब नियम-कानून के हिसाब से कर्मियों को सेलरी देने की बारी आती है तो एक पैसा नहीं बढ़ाकर देते, उल्टे सादे कागज पर मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी मिलने और सेलरी से संतुष्ट होने की फर्जी बात लिखवा कर उस पर साइन करवा लेते हैं.

बताया जा रहा है कि हड़ताल की तात्कालिक वजह एक मीडियाकर्मी रतन भूषण का तबादला किया जाना है. तबादले के पीछे मकसद दंडात्मक कार्रवाई करना है. दैनिक जागरण नोएडा के सैकड़ों कर्मियों ने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है. जागरण प्रबंधन को जिन-जिन पर कोर्ट जाने का शक होता है, उन-उन को प्रताड़ित परेशान करता रहता है. इसी क्रम में कई लोगों का तबादला किया गया और कई लोगों को डराया-धमकाया गया. इसी के खिलाफ ये सारे मीडियाकर्मी गुस्से में काम बंद कर सड़क पर आ गए.

हड़ताल स्थल पर मोबाइल कैमरे के जरिए शूट किया गया वीडियो देखें: https://www.youtube.com/watch?v=EA32dSYnbgY

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पी7 के आंदोलनकारी पत्रकारों की इस छिपी प्रतिभा को देखिए

Yashwant Singh : आंदोलन अपने आप में एक बड़ा स्कूल होता है. इसमें शरीक होने वाले विभिन्न किस्म की ट्रेनिंग लर्निंग पाते हैं. सामूहिकता का एक महोत्सव-सा लगने लगता है आंदोलन. अलग-अलग घरों के लोग, अलग-अलग परिवेश के लोग कामन कॉज के तहत एकजुट एकसाथ होकर दिन-रात साथ-साथ गुजारते हैं और इस प्रक्रिया में बहुत कुछ नया सीखते सिखाते हैं. पी7 न्यूज चैनल के आफिस पर कब्जा जमाए युवा और प्रतिभावान मीडियाकर्मियों के धड़कते दिलों को देखना हो तो किसी दिन रात को बारह बजे के आसपास वहां पहुंच जाइए. संगीत का अखिल भारतीय कार्यक्रम शुरू मिलेगा.

सब अपने अपने अंदाज में सुर लहरी बिखेरते मिलेंगे. पत्रकार आनंद दुबे समेत कई साथियों ने जी खोलकर गाया बजाया. पूरा माहौल कभी बेहद संजीदा होता तो कभी खिलंदड़पना से भरपूर. पत्रकारों के भीतर कैसी-कैसी प्रतिभा छिपी है, ये सब इस आंदोलन के दौरान उदघाटित हो रहा है. कोई घर से तबला ले आया तो किसी ने नग्मा सुनाते हुए टेबल को ही तबला में तब्दील कर दिया.  

इस पूरे आंदोलन की खासबात ये है कि सब कुछ बेहद सहज भाव से घटित हो रहा है, बनावटी कुछ नहीं है, प्रायोजित कुछ नहीं है. ये पत्रकार जानते हैं कि उनकी लड़ाई लंबी हो सकती है इसलिए वे महीनों तक दो-दो हाथ करने के लिए तैयार बैठे हैं. इन पत्रकारों के गायन-वादन के कुछ अद्भुत वीडियो यहां दिया जा रहा है. देखिए और आनंदित होइए. वक्त लगे तो इनका समर्थन करने इन तक (C-55, Sector-57, Noida) पहुंच भी जाइए.

https://www.youtube.com/watch?v=RKF5r_M8pkU

https://www.youtube.com/watch?v=lH11jjT9-Vs

https://www.youtube.com/watch?v=Zl_DN-Sq_fg

https://www.youtube.com/watch?v=i170E_sH0C0

https://www.youtube.com/watch?v=19_OSS7xd5A

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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‘जिया न्यूज’ चैनल में हड़ताल, एसएन विनोद बता रहे मालिक को महान

जिया न्यूज़ में पिछले काफी समय से बड़े संपादकों और मालिक के चाटुकारों ने इस चैनल से जमकर मलाई खाई… और निकल लिये… पर जब चैनल के नोएडा आफिस बंद कर कर्मचारियों की सेटलमेंट की बात आई तो उंट के मुंह में जीरा आया….. ये चैनल न्यूज चैनल कम, मज़ाक ज्यादा था… हर बार आए नए अधिकारियों ने इसे जमकर लूटा और बेचारे कर्मचारी हाथ मलते रह गये…. पहले जाय सेबस्टियन फिर एसएन विनोद फिर जेपी दीवान फिर एसएन विनोद और आखिर में चैनल का बंटाधार… बस यही कहानी है इस चैनल की….

पिछले कई महीनों से चैनल के शिफ्ट होने की खबर ने कर्मचारियों को बेचैन कर रखा था…. वहां मौजूद तथाकथित चाटुकारों की कलाबाज़ियां देखने और चाय पीकर वक्त निकालने के अलावा कोई रास्ता न था…. बार बार hr से पूछने पर चैनल के भविष्य के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई…. बस कुछ लोग एसएन विनोद के प्राईम टाईम शो को लेकर उत्साहित रहते…. दिन भर में चैनल बस रात को 8 से 9 बीच सक्रिय रहता बाकी समय चने मूंगफली खाकर निकाला जाता…

दिवाली के कुछ दिन पहले सेलरी को लेकर कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया… निराश और गुस्से में कर्मचारियों ने वरिष्ठ पत्रकार और सीईओ एसएन विनोद का रुख किया… विनोद साहब ने सभी से दो टूक कह दिया कि सेलरी के लेनदेन में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं… वे सिर्फ जिया इंडिया मैग्जीन के संपादक भर हैं…. और हाथ जोड़ लिये…. हालांकि चैनल में उनका शो इस दौरान रोज आन एयर हो रहा था…. काम बंद करने की धमकी पर दिवाली के एक दिन पहले सेलरी का इंतज़ाम किया गया… इसमें कईयों की दीवाली काली भी हुई क्योंकि सेलेरी आते आते महीना खत्म हो चुका था…. नवंबर महीने के दौरान भी यही कहानी चलती रही…. एक बार फिर परेशान कर्मचारियों ने 26 तारीख को काम बंद कर दिया… लेकिन उसके एक दिन बाद जो हुआ उससे सबके होश फाख्ता हो गये…..

बिल्कुल तय रणनीति के तहत रोहन जगदाले के सिपाही कानूनी किताब और अपने हुक्मरान की महानता के कसीदे गढते सेटलमेंट के नाम पर आ धमके…. निचले कर्मचारियों को भयाक्रांत करने और मालिक की महानता बताने के साथ चेक बंटने शुरू हुए….. ये ठीक वैसा ही था जैसे कि भूखों में रोटी फेंकी जाती है…. या फिर किसी प्राकृतिक आपदा के बाद हेलीकाप्टर से राहत सामग्री…. चेक लीजिये नहीं तो कोर्ट जाईये… यही कुछ मिज़ाज था महान संपादक एसएन विनोद का…. ये वही साहब हैं जो दिवाली के एक दिन पहले पैसे देने की बात से कन्नी काट गये थे….. पर आज वे मध्यस्थ कम मसीहा की भूमिका में थे…. उन्होंने कर्मचारियों को बताया कि कानून की पूरी किताब छान लीजिये, इससे ज्यादा पैसा नहीं मिलेगा… और तो और, सालों तक कोर्ट में केस लड़ना पड़ेगा सो अलग…. कोई भी इतना नहीं देता जितना रोहन जगदाले दे रहे हैं… रोहन जगदाले की यशगाथा गाते हुए विनोद जी दो कदम और आगे निकले… और कहा कि आप लोगों को पता चले कि मालिक कहां से पैसा अरेंज कर रहा है तो आप उसे फूल माला पहनाएंगे और आपके आंखों से आंसू निकल जाएंगे…. वो तो चैनल के बाहर close का बोर्ड लगा रहा था… मैंने उसे मनाया….

ये सुनकर तो लगने लगा कि कर्मचारी सेलेरी मांगकर ही गलती कर रहा है….. कईयों को अपराधबोध होने लगा…… मालिक रोहन जगदाले जिसने कभी बोनस नहीं दिया… टाईम पर सेलेरी नहीं दी…. साल भर में एक रुपये का अप्रेज़ल नहीं किया…. फर्जी संपादकों और दलालों से कर्मचारियों का शोषण कराया…. बाकी इसी बीच कईयों को सड़क पर कर दिया गया….. उसके पास पाखंडियों को देने के लिये लाखों रुपये की सेलेरी है….. 2 दिसंबर को लान्च होने वाली मैग्ज़ीन जिसमें नितिन गडकरी को बुलाया जा रहा है, उस भव्य आयोजन पर खर्चा करने के लिये माल है….. लेकिन कर्मचारियों के लिये कुछ नहीं….. वाकई सौदा हो तो ऐसा हो…..

कर्मचारियों को उन्हीं की मेहनत का पैसा देकर एहसान कर रहा था…. यानी एक महान पत्रकार अपनी अगली पीढी को चिटफंडियों की महानता करूणा और न्यायप्रियता का हवाला देकर सेट करने में लगा रहा… लगा कि मालिक के चरणों में गिरे रहो, वहीं स्वर्ग है….. कर्मचारी बेचारे मरते क्या न करते….

फिलहाल स्थिति ये है कि जिया न्यूज में कर्मचारियों ने काम बंद किया हुआ है… हड़ताल जारी है… कुछ लोग चेक लेकर घर जा चुके हैं लेकिन ज्यादातर लोग अड़े डंटे हुए हैं… बकाया पुरानी सेलरी और तीन महीने का एडवांस वेतन देने की मांग कर रहे हैं…

…जारी…

जिया न्यूज में कार्यरत एक कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर उपरोक्त राइटअप / रिपोर्ट / विश्लेषण पर किसी पक्ष को कुछ कहना है तो अपनी बात bhadas4media@gmail.com पर मेल कर सकते हैं.

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‘पी7 न्यूज’ के निदेशक केसर सिंह को हड़ताली कर्मियों ने बंधक बनाया, चैनल पर चला दी सेलरी संकट की खबर

कई महीनों से सेलरी के लिए लड़ाई लड़ रहे पीएसीएल / पर्ल समूह के न्यूज चैनल पी7 न्यूज के हड़ताली कर्मचारियों के सब्र का बांध आज टूट गया. इन कर्मियों ने अपने ही चैनल पर सेलरी संकट की खबर चलाlते हुए चैनल का प्रसारण रोक दिया. साथ ही कई महीनों की बकाया सेलरी देने की मांग करते हुए चैनल के निदेशक केसर सिंह को उनके केबिन में ही बंधक बना लिया. कर्मचारियों का आरोप है कि केसर सिंह गुपचुप तरीके से चैनल बंद कर भागने और बकाया सेलरी हड़पने की फिराक में थे.

हड़ताली कर्मियों ने सेलरी दिए बिना अपने चैनल निदेशक को आफिस से न जाने देने का ऐलान कर दिया. इस तरह केसर सिंह को उनके ही कक्ष में बंधक बना कर बिठा दिया. उग्र कर्मचारियों ने निदेशक कक्ष के दरवाजे को घेर लिया और वहीं खड़े होकर निदेशक से सेलरी देने की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे. देर तक चले हंगामे के बाद प्रबंधन की तरफ से किसी ने नोएडा पुलिस को सूचित किया तो पुलिस मौके पर पहुंची और केसर सिंह को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही है. वहीं नाराज कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी अपने अफसरों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन जी जान से काम करने वाले कर्मचारियों को पैसे नहीं दे रही है. चैनल के आफिस नोएडा सेक्टर 57 में हड़ताली कर्मचारियों का हंगामा जारी है. सूचना है कि पुलिस मौके पर पहुंच गई है.

मूल खबर….

चैनल बंद कर भाग रहे निदेशकों को पी7 न्यूज कर्मचारियों ने घेरा, आफिस में बवाल

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