‘सहारा समय’ न्यूज चैनल छोड़कर प्रीति पहुंचीं ‘समाचार प्लस’

‘सहारा समय’ उत्तर प्रदेश /उत्तराखंड की न्यूज़ एंकर प्रीति बिष्ट ने चैनल को बॉय बॉय कह दिया  है। खबर है कि सहारा के अंदरूनी हालात से परेशान होकर प्रीति बिष्ट ने यहाँ से काम छोड़ा है। उन्होंने अब ‘समाचार प्लस’ ज्वॉइन कर लिया है।

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अपना न्यूज चैनल शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही कांग्रेस

दिल्ली : पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी ने संकेत दिया है कि कांग्रेस पार्टी जनता तक सीधी पहुंच बनाने के लिए एक राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एके एंटनी ने कहा है कि जयहिंद टीवी को एक राष्ट्रीय चैनल में तब्दील करने को लेकर चर्चा जारी है। गौरतलब है कि जयहिंद टीवी को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से कुछ समय पहले शुरू किया गया था। 

एंटनी ने दिल्ली में जयहिंद टीवी के राष्ट्रीय ब्यूरो के नये कार्यालय के उदघाटन के बाद बोलते हुए नये जमाने की संचार प्रणालियों के इस्तेमाल में पीछे रह जाने की बात स्वीकार की। उनका मानना है कि टीवी चैनल के माध्यम से लोगों तक कांग्रेस की विचारधारा कारगर तरीके से पहुंचाई जा सकती है। 

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न्यूज चैनलों के जमाने में सिर्फ बयानों पर ही पत्रकारिता और राजनीति

आज-कल एक नई किस्म की राजनीति देश में नजर आ रही है। हालांकि पहले भी होती थी, लेकिन अब मीडिया और खासकर न्यूज चैनलों के जमाने में सिर्फ बयानों और आरोपों पर ही पत्रकारिता के साथ-साथ ये राजनीति भी चल रही है। कांग्रेस के राज में भाजपा भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए संसद से सड़क तक हल्ला मचाती रही और तबकी नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज से लेकर अरुण जेटली प्रधानमंत्री के साथ-साथ आरोपों में घिरे मंत्रियों से इस्तीफा मांगते रहे और सदन की कार्रवाई चलने ही नहीं दी और तब ये भी कहा था कि सदन को चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की ही है। 

अब ये बयान देने वाले सत्ता में बैठ गए, तो कह रहे हैं कि सदन चलाने की जिम्मेदारी विपक्ष की है और हमारा कोई भी मंत्री या मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देगा। सिर्फ बहस कर लो। ललित गेट और व्यापमं महाघोटाले में फंसी भाजपा इतना बेशर्म रुख अख्तियार करेगी इसकी कल्पना इसलिए नहीं थी, क्योंकि वह खुद को ‘पार्टी विथ डिफरेंसÓ बताती आई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो इन घोटालों पर मौनी बाबा बने ही हुए हैं और मीडिया द्वारा पूछे गए तमाम सवालों पर वे ऐसे खामोश रहे मानों उन्हें कुछ पता ही ना हो। चुनाव प्रचार अभियानों और उसके बाद पद संभालने पर भी मोदीजी ने खुद को देश का ऐसा चौकीदार बताया  जो छोटे से लेकर बड़े चोरों पर ना सिर्फ निगाह रखेगा, बल्कि चोरी पकड़े जाने पर सख्त से सख्त सजा भी देगा। 

ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा जैसा लोक-लुभावना नारा भी दिया मगर अब जब ललित मोदी का प्रकरण उजागर हुआ, जिसमें आरोप नहीं बल्कि राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधराराजे सिंधिया और केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की सीधी-सीधी संलिप्तता पकड़ा गई, उसके बाद भी पूरी भाजपा बेशर्मी से इसे घोटाला मानने को ही तैयार नहीं है और मध्यप्रदेश का व्यापमं महाघोटाला भी दस्तावेजों के साथ साबित हो चुका है, जिसके चलते दो साल से एसटीएफ-एसआईटी और अब सीबीआई उसकी जांच कर रही है और दो हजार गिरफ्तारियां अभी तक हो चुकी है और साथ ही कई संदिग्ध मौतें भी। 

इस महाघोटाले की जिम्मेदारी सीधे-सीधे मुख्यमंत्री की बनती है और ऐसी ही जिम्मेदारियों को तय करवाते हुए भाजपा विपक्ष में रहते प्रधानमंत्री और मंत्रियों से इस्तीफे मांगती रही है। आज सुषमा स्वराज ट्वीट करके यह खुलासा करती है कि कोयला घोटाले के एक आरोपी के डिप्लोमेटिक पासपोर्ट के लिए कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने उन पर दबाव डाला। अब सवाल यह है कि सुषमा स्वराज अभी तक इस राज को क्यों छुपाए हुए थी और क्या वे महाभ्रष्ट कांग्रेस के ऐसे उदाहरणों को देकर खुद के साथ-साथ भाजपा के अन्य नेताओं द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को सही ठहराना चाहती है? दूसरों के पाप गिनाने से खुद के पाप भला कैसे स्वीकार्य हो सकते हैं, क्योंकि भाजपा तो ईमानदारी, पारदर्शिता, राष्ट्रभक्ति, नैतिकता से लेकर स्वच्छ शासन-प्रशासन और शुचिता के ढोल पीटती आई है। 

कांग्रेस अगर महाभ्रष्ट नहीं होती तो जनता भाजपा को सत्ता सौंपती ही नहीं। कांग्रेस के पाप तो जनता के सामने आ गए और जो बचे हैं उसे भी भाजपा उजागर करे और दोषियों को जेल भिजवाए, उसे किसने रोका है? मगर सवाल यह है कि भाजपा खुद भी तो आइना देखे और अपने जो दागी चेहरे हैं उनको हटाए या देश की जनता के सामने यह स्वीकार कर ले कि हम भी सभी दलों की तरह देश को लूटने के लिए ही कुर्सी पर बैठे हैं।

लेखक-पत्रकार राजेश ज्वेल से संपर्क 9827020830, jwellrajesh@yahoo.co.in

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‘समाचार प्लस’ प्रबंधन भड़ास पर मुकदमे की तैयारी कर रहा, देखें कंप्लेन फारमेट जिस पर इंप्लाइज से जबरन साइन कराया जा रहा है

{jcomments off}नोएडा के सेक्टर 63 स्थित न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ के वॉश रूम में पिछले दिनो संस्थान की ही एक लड़की का एमएमएस बनाने का समाचार भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित हो जाने के बाद चैनल प्रबंधन अपनी व्यवस्था दुरुस्त करने की बजाय भड़ास4मीडिया के ही खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। चैनल प्रबंधन इसके लिए पेशबंदी करते हुए अपने कर्माचरियों से एक रेडीमेट कंप्लेन फार्म पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बना रहा है।

पता चला है कि संस्थान में काम करने वाली लड़कियां प्रबंधन की इस हरकत से गुस्से में हैं। चैनल प्रबंधन अपनी गंदगी ढंकने की बजाय पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी के तहत जिस फार्म पर अपने स्टॉफ से साइन करा रहा है, उसमें शीर्ष पर लिखा है- ‘मानहानि एवं ब्लैकमेलिंग के उद्देश्य से भ्रामक खबरों के प्रसारण के संबंध में’। फार्म में इसके नीचे रिक्त स्थानों सहित वह ब्योरा दर्ज है, जिसे कर्मचारियों को भरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पूरा प्रोफार्मा उपर दिया गया है।  भड़ास पर ‘फीमेल बाथरूम में खुफिया कैमरा’ शीर्षक से खबर छपने के अगले दिन अमर उजाला अखबार में भी यह खबर सविस्तार प्रकाशित हुई, जो इस प्रकार है… 

 

युवा लेखिका प्रियंका सिंह ने अपने एफबी वाल चैनल में खुफिया कैमरा मिलने को लेकर एक पोस्ट लिखी, जिसके कमेंट बाक्स में एक लड़की ने भड़ास को फंसाए जाने की साजिश का खुलासा करते हुए पूरा प्रोफार्मा पोस्ट किया है. इस कमेंट में कहा गया है कि समाचार प्लस प्रबंधन द्वारा भड़ास के खिलाफ पेशबंदी-फार्म भरवाने के दबाव से स्टॉफ में भारी रोष है. स्क्रीनशाट इस प्रकार है–

   

भड़ास पर प्रकाशित अन्य संबंधित खबरें सविस्तार इन दोनो लिंक्स पर पढ़ सकते हैं –

https://bhadas4media.com/tv/6597-mms-newschannal-bhadas

https://bhadas4media.com/tv/6599-samacharplus-girls-broker

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डेढ़ साल पहले लांच हुआ जिंदल का चैनल ‘फोकस हरियाणा’ बंद, मीडिया कर्मियों ने विरोध जताया

नोएडा : आखिरकार, हरियाणा का एक और चैनल तालाबंदी का शिकार हो गया है। उद्योगपति एवं कांग्रेसी नवीन जिंदल के ‘फोकस हरियाणा’ पर ताला लटक गया है। कल से यह चैनल ऑफ एयर हो गया है। इसके बाद चैनल के कर्मी स्टूडियो में विरोध पर बैठ गए। बिना पूर्व सूचना के नोटिस दिए बगैर काम काज बंद कर दिए जाने से कर्मियों में भारी रोष है।  

चैनल में तालाबंदी के खिलाफ स्टूडियो में जमा होकर विरोध जताते मीडिया कर्मी

दरअसल काफी समय से इस चैनल के भविष्य को लेकर कयास ही लगाए जा रहे थे, लेकिन अब सब कुछ सामने आ गया है। प्रबंधन अब इस चैनल को और आगे चलाने के मूड में नहीं था। इसलिए चैनल को बंद करने का निर्णय ले लिया गया है। चैनल के एडिटर इन चीफ रितेश लक्खी ने भी फेसबुक पर इसकी जानकारी दे दी है। 

जी समूह के मालिक सुभाष चंद्रा से विवाद के बाद ही नवीन जिंदल ने न्यूज चैनल के कारोबार में उतरने का मन बनाया था। तब पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह के फोकस समूह के चैनल्स से सौदेबाजी हुई और जिंदल न्यूज चैनल के कारोबार में उतर गए। हालांकि मतंग सिंह का अपनी पत्नी मनोरंजना सिंह से चैनल को लेकर विवाद चल ही रहा था। शुरूआत से ही रितेश लक्खी को चैनल की कमान सौंपी गई। इस दौरान डेस्क और फील्ड पर भी मजबूत टीम का गठन हुआ। मेरे भी कुछ नजदीकी मित्र चैनल के साथ जुड़े और इसे आगे बढ़ाने के लिए मजबूती से काम किया। हरियाणा में एक अलग पहचान भी इस चैनल ने बनाई।  

हालांकि कुप्रबंधन का शिकार यह चैनल लगातार रहा। जिस तरह की खबरें अब निकलकर सामने आ रही हैं, उनसे तो यही लगता है। कुछ सो काल्ड लोगों ने चैनल को जमकर लूटा, चाहे वह चुनाव का समय रहा हो या बाद का। ऐसे में चैनल को तो बंद होना ही था। बीच में एक और कांग्रेसी नेता का भी नाम सामने आया था कि वे फोकस चैनल को खरीदने जा रहे हैं, लेकिन यह बात सच नहीं निकली। दरअसल सबने सोचा होगा जब जिंदल जैसा उद्योगपति इसे नहीं चला पाया तो फिर उनकी क्या औकात। 

मीडिया बाजार में काफी समय से फोकस हरियाणा के भविष्य को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। वह चर्चाएं आज सच साबित हुई। बताते हैं कि आज शाम प्रबंधन के आला अधिकारियों की मालिकान के साथ बैठक हुई। जिसमें चैनल को बंद करने का निर्णय लिया गया। रितेश लक्खी ने तो बाकायदा फेसबुक पर चैनल पर ताला लगने की घोषणा कर दी है। लक्खी की भी किस्मत देखिए, एक बार फोकस हरियाणा को छोड़कर ई टीवी चले गए थे, लेकिन वहां दाल नहीं गली तो फिर वापस फोकस में आ गए थे। अब देखते हैं कौन सा नया ठिकाना ढूंढते हैं। खैर चैनल बंद होने से जिन साथियों का रोजगार छिना है, उसके लिए दुख है। हालांकि यह सबके लिए नहीं है क्योंकि कुछ ने इसे लूटा भी है।

लेखक दीपक खोखर से संपर्क : 09991680040

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न्यूज चैनल की हरकत से टॉपर छात्रा पहुंची अस्पताल, पिता ने की पुलिस से शिकायत

आखिर मीडिया राजस्थान बोर्ड की इस टॉपर छा़त्रा की मार्कशीट पर लाल घेरा फेर कर क्या साबित करना चाहता है?

जांच में जो रिपोर्ट आएगी, वो सब के सामने होगी, फिर पत्रकारों.. आप उस नादान की मार्कशीट को यूं लाल घेरे में पब्लिस कर क्या साबित करना चाहते हैं? आप की इन हरकतों ने टॉपर छात्रा एकता अग्रवाल को अस्पताल तक तो पहुंचा ही दिया है।

आप रिपोर्टिंग कीजिए। आपका काम है, लेकिन इंसानियत और पत्रकारितों के मापदंडों को भी ध्यान में रखिए, फिर कहीं आत्मा मर तो नहीं गई है पत्रकारों की? माना कि खबर में मसाला नहीं लगाएंगे तो हमारे आका यही कहेंगे कि बिना मसाले की खबर को देखेगा या पढ़ेगा कौन? 

लेकिन ये भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी की मार्कशीट को लालघेरे में करने का हक मीडिया का नहीं है, कम से कम जांच रिपोर्ट आने से पहले तक तो बिल्कुल नहीं। 

जानकारी के अनुसार छात्रा के पिता ने छात्रा को अवसाद में बताया है और इसकी शिकायत पुलिस थाने में की है। पिता का आरोप है कि एक न्यूज चैनल पत्रकार ने मेरी बच्ची को बहला फुसलाकर बयान दर्ज जारी कर दिया।

मनीष शुक्ला के एफबी वाल से

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न्यूज चैनलों का फर्जी प्रचार और दोगुना बढ़ी महंगाई की मार

टी वी चैनलों पर लाये गये फ़र्ज़ी प्रचार, एकदम झूठे लगने वाले सर्वेक्षणों और चीख़ते एंकरों से जो समवेत शोर पैदा हो रहा है, उससे लगता है कि लोग मंहगाई दो गुना हो जाने से ख़ुश हैं।

लोग रेल भाड़ा बढ़ाये जाने, तत्काल टिकट पर लगभग लूट लिये जाने और रेल-प्लेटफ़ार्म के गंधाने से ख़ुश हैं। लोग क्रूड के पिछले साल के आधे दाम पर होने के बावजूद पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ाये जाने से तो बहुत बहुत ख़ुश हैं। कश्मीर में पाकिस्तानी झंडा लहराने और लश्करे तैयबा का बैनर लेकर घूमने की वारदातें बढ़ने से तो और ज़्यादा ख़ुश हैं।

परिधान मंत्री के दसलखी सूट और ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र सिंह की नौ लाख की घड़ी की नुमाइश पर तो लोगों का सीना चौड़ा हो गया । ओबामा तक के पास है ऐसा सूट?लोकपाल, सीवीसी, सीआईसी के न होने से तो लोग पूरे साल ख़ुश रहे। 

जब से मंगोलिया से ….. ले आये तो इधर वाले “भक्त” तो इतने ख़ुश हैं कि पूछो मत । बिछड़ा भाई ! और सब से ज़्यादा तो इस बात से खुश हैं कि ” केजरीवाल ” के पर क़तर डाले।” कह दो ना खुश हो ना

शीतल पी सिंह के एफबी वॉल से

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बज्र अनपढ़ हैं ये मीडिया के माइकवीर, मैंने सिर पीट लिया

कुछ साल पहले मैं एक फैक्‍ट फाइंडिंग में दीमापुर गया था। वहां से लौटा, तो अंग्रेज़ी की एक महिला पत्रकार ने मुझसे संबंधित खबर के बारे में फोन पर बात की। उसने पूछा- आप कहां गए थे? मैंने कहा- नगालैंड। उसका अगला सवाल था- इज़ इट अब्रॉड? मैंने सिर पीट लिया। 

नेपाल में जन आंदोलन अपने चरम पर था। पूरी दुनिया की निगाह इस पर थी। नारायणहिति पैलेस घेरा जा चुका था। इसी सिलसिले में मंडी हाउस पर एक प्रदर्शन था। हम लोगों को तिलक मार्ग थाने ले जाया गया और वहां से बस में भरकर जंतर-मंतर पर गिरा दिया गया। वहां भारी जमावड़ा हुआ। एनडीटीवी 24*7 की एक लंबी सी महिला ने आकर मुंह के सामने माइक लगा दिया और पूछा- ”नेपाल में क्‍या हुआ है कि आप लोग प्रदर्शन कर रहे हैं?” मैंने सिर पीट लिया। 

इसी दौरान हिंदी के एक पत्रकार ने फोन कर के कहा, ”बॉस, नॉर्थ ईस्‍ट के किसी जानकार का नंबर दीजिए न!” मैंने पूछा, ”क्‍या हो गया नॉर्थ ईस्‍ट में?” वे बोले, ”अरे, वो नेपाल में बवाल चल रहा है न, उसी पर प्रतिक्रिया लेनी है।” मैंने सिर पीट लिया। 

इस बार मैं कतई सिर नहीं पीटूंगा। एकाध भारतीय माइकवीर अपनी बला से पिटकर आ जाएं, तब शायद उनका भूगोल दुरुस्‍त हो। बज्र अनपढ़ हैं सब… मूर्खता की भी एक सीमा होनी चाहिए। 

अभिषेक श्रीवास्तव के एफबी वाल से

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फर्स्ट इण्डिया न्यूज चैनल में इस्तीफे देने की होड़

जयपुर : पिछले दिनों फर्स्ट इण्डिया न्यूज टीवी चैनल से चार सम्भाग प्रमुखों के इस्तीफे देने के बाद इस चैनल में शुरू हुआ कर्मचारियों के इस्तीफे का दौर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इन्हीं हालात के चलते अब तक लगभग एक दर्जन लोगों ने अपने इस्तीफे चैनल प्रशासन का थमा दिए हैं और बाकी लोग भी इसी मूड में लग रहे हैं। इस तरह चैनल एक बारगा खाली-सा हो गया है। 

जोधपुर ब्यूरो हैड डॉ. मोईनुल हक, उदयपुर ब्यूरो हैड मनु राव, नागौर ब्यूरो हैड डा. के.आर. गोदारा और बीकानेर के अरविन्द व्यास ने पिछले दिनों चैनल प्रशासन के एक शर्मनाक प्रस्ताव को ठुकराते हुए अपने इस्तीफे प्रशासन को दे दिए थे। इसी से प्रेरित होकर पिछले एक सप्ताह से चैनल के कर्मचारियों ने इस्तीफे देने की प्रतिस्पर्द्धा सी कर दी है। सूत्रों के अनुसार, चैनल से अब तक एक दर्जन लोग इस्तीफे दे चुके हैं और शेष लोग भी इस्तीफे देने वालों की कतार में हैं। 

यहां यह उल्लेखनीय है कि चैनल प्रशासन ब्यूरो हैड्स को जहां मात्र 6,000 रुपये तनख्वाह और शेष स्टोरी के हिसाब से पैसे देने की पेशकश कर रहा था, वहीं मुख्यालय जयपुर में कार्यरत स्टाफ को 25 प्रतिशत तनख्वाह कम देने का प्रस्ताव दे रहा था। इन्हीं हालात में चैनल के कर्मचारियों ने अपने दिल की बात सुनी और इस शर्मनाक प्रस्ताव को सिरे से नकार कर इस्तीफे देने शुरू कर दिये। वैसे भी चैनल में तनख्वाह के लिए निर्धारित तिथि 10 से 12 तारीख है लेकिन चैनल 25-30 तारीख तक बड़ी मुश्किल से तनख्वाह दे पाता है, वो भी टुकड़ों में। इसलिए चैनल में नारकीय जीवन जीने से बेहतर कर्मचारियों ने बाहर जाना समझा।

इस बीच चैनल प्रशासन बचाव की मुद्रा में आ गया है और ब्यूरो हैड्स को दिया प्रस्ताव वापस लेकर उन्हें पुराने फॉरमेट में ही काम करने का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत उन्हें प्रतिमाह 25-30 हजार रुपये तनख्वाह दी जा रही थी, लेकिन ब्यूरो हैड्स ने इस प्रस्ताव को भी यह कह कर मानने से इंकार कर दिया कि चैनल की कोई नीति नहीं है और वो कभी भी पलटी मार सकता है इसलिए उन्हें अब ये प्रस्ताव भी मंजूर नहीं।

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अलवर में केबल ऑपरेटर धड़ल्ले से चला रहे फर्जी न्यूज़ चैनल

अलवर : राजस्थान के कई शहरों की तरह इस जिले में भी एटीएल न्यूज़, ए24 न्यूज़, एसटीवी, सीटीवी न्यूज़, माध्यम टीवी न्यूज़ ,सरीखे अवैध न्यूज टीवी चैनल पिछले कई सालों से बेरोकटोक चल रहे हैं। भारत सरकार द्वारा इन नामों से कोई लाइसेंस कभी जारी नहीं किया हुआ है, इसके बावजूद इन चैनलों के मालिकों और फर्जी पत्रकारों की पूरे अलवर में चांदी कट रही है। इसी की आड़ में ब्लैकमेलिंग और हफ्तावसूली का भी बोलबाला है। यहां के फर्जी पत्रकारों और केबल ऑपरेटर्स के पास सैन्य छावनी तक के कई महत्वपूर्ण वीडियो फुटेज होना देश की सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ है। प्रशासन इस ओर से भी आंखें मूंदे हुए है। 

दरअसल, इन सभी चैनलों ने एक केबल ऑपरेटर का लायसेंस महज दिखावे के लिए ले रखा है। इसी की आड़ में इन्होंने अवैध पत्रकारिता की अपनी दुकान खोल रखी है। ये पत्रकारिता के नाम पर कहीं भी पहुंच जाते हैं और वहीं से शुरू हो जाता है ब्लेकमेलिंग और हफ्तावसूली का खेल। कोई इनके खिलाफ आवाज उठाता है तो उसको बदनाम कर दिया जाता है। चैनल की आड़ में इनके मालिकों की राजनेताओं, सरकारी अफसरों और बिल्डरों से गाढ़ी छन रही है। कहीं से कार्रवाई की सुगबुगाहट पर ये पुलिस अधिकारियों और प्रशासन पर भी दबाव बना लेते हैं।

अलवर के एक वकील ने कुछ जागरूक नागरिकों के सहयोग से कितनी ही बार शासन स्तर तक पत्राचार किया लेकिन किसी भी उच्चाधिकारी ने राजनेताओं के दबाव में संज्ञान नहीं लिया। जब भी पुलिस इन्क्वारी करती है, तो चैनल चलाने वाले खुद को केबल ऑपरेटर बताने लगते हैं। केबल टीवी एक्ट की धारा 2जी के अंतर्गत यह स्थानीय टीवी चैनल चलाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि केबल ऑपरेटर को उपभोक्ताओं की लिस्ट पोस्ट आफिस को देनी पड़ती है। ये तो उस व्यवस्था का भी अनुपालन नहीं कर रहे हैं। 

नियमतः केबल ऑपरेटर स्थानीय स्तर पर केवल फिल्म, चित्रहार, विज्ञापन आदि का प्रसारण कर सकता है और यह सब भी प्रोग्रामिंग कोड के हिसाब से होना चाहिए। साथ ही, इस प्रकार के प्रोग्राम चलाने के लिए कॉपी राइट होना चाहिए। इस प्रकार के समस्त प्रोग्राम सिनेमेटोग्राफी एक्ट के तहत सीबीएफसी यानी सेंसर र्बोड से अधिकृत होने चाहिए। कोई अगर सिनेमाघरो में राष्ट्रगीत भी प्रसारित करता है तो सबसे पहले सेंसर र्बोड का सर्टिफिकेट लेना होता है। केबल एक्ट की धारा 2 जी में साफ तौर पर लिखा है क़ि केबल ऑपरेटर द्वारा चलाये गये सारे प्रोग्राम प्रोग्रामिंग एवं एडवर्टायजिंग कोड का पालन करेंगे।

न्यूज चैनल चलाने के लिए भी 20 करोड़ से ज्यादा की नेट वर्थ होनी चाहिए। इतना ही नहीं, इसके लिये विभिन्न सरकारी डिपार्टमेंट्स जलसेना, थलसेना, वायुसेना, रक्षा मंत्रालय, सीबीआई, विजिलेंस डिपार्टमेंट, पुलिस विभाग से कई तरह की एनओसी यानि अनापत्ति प्रमाणपत्र भी लेना पड़ता है। इतने महत्वपूर्ण मंत्रालयों, विभागों और सैन्य प्रतिष्ठानों की हदें भी शायद अलवर के बाहर खत्म हो जाती हैं। तभी तो यहां किसी को भी टीवी चैनल चलाने की छूट मिली हुई है। मात्र 500 रुपये भरकर केबल टीवी ऑपरेटर का लायसेंस पोस्ट ऑफिस से लेना पड़ता है। फिर किसी एमएसओ को सालाना कुछ रिश्वत देकर इस प्रकार के फर्जी टीवी न्यूज चैनल धड़ल्ले से शुरु कर दिये जाते हैं। 

भारत सरकार के एक आदेश नम्बर एफ/1/2007-बीसी.ईई, जो कि दिंनाक 19 फरवरी 2008 को जारी किया गया था, में साफ लिखा गया है कि केबल ऑपरेटर अगर न्यूज चलाते हैं तो सिर्फ अपने एरिया की इर्न्फोमेशन दे सकते हैं। इन चैनलो को स्थानीय स्तर पर संरक्षण जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी से मिला हुआ है। सूचना अधिकारी मुख्यमंत्री तक की मीटिंग में इन फर्जी पत्रकारों को तजरीह देने से नहीं चूकते हैं। इनको सरकारी खर्चे पर विजिट कराते हैं। डिफेंस जैसे प्रतिष्ठानों में इन अवैध चैनलों के कैमरामैन व पत्रकार जाते रहते हैं। ये मंत्रियों एवं अधिकारियों का इन्टरव्यू लेते हैं। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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नंबर वन के पायदान पर न्यूज चैनल ‘आज तक’ की एक और सेंचुरी

हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ ने एक और सेंचुरी लगाई है. वह विगत 100 हफ्तों से लगातार नंबर वन रहा है. आजतक के मैनेजिंग एडिटर सुप्रिय प्रसाद कहते हैं – इस मुकाम पर पहुंचने का क्रेडिट टीम आजतक को है. ये टीम टीआरपी बढ़ने पर खुश होती है तो डाउन होने पर उसे फिर से बढ़ाने में जुट जाती है। इस मुकाम पर पहुंचने में हमारे कई इनोवेशंस का भी अच्छा सहयोग रहा है। हमारे कई इवेंट्स के चलते भी पब्लिक हमारे साथ लगातार जुड़ी रही है. एजेंडा आजतक, पंचायत आजतक जैसे इवेंट्स बहुत पसंद किए गए हैं. 

आजतक प्रबंधन का कहना है – भूमि अधिग्रहण के मसले पर ग्रेटर नोएडा में हमने किसानों के बीच जाकर कार्यक्रम किया. गर्मी शुरू होते ही हमने ‘बिजली-पानी की मार, कहां हो सरकार’ का कैंपेन देश की ग्राउंड रियल्टीज के बारे में बात कर रहा है. बात न्यूज की हो या व्यूज की या फिर करंट अफेयर्स की. हर तरफ जलवा है आज तक का. दर्शकों के भरोसे पर देश का नंबर वन चैनल लगातार खरा उतरता रहा है और उतरता रहेगा. और यकीनन देश का पसंदीदा चैनल बना रहेगा क्योंकि आज तक की खबरों में वो धार, वो रफ्तार है, जो देश के बाकी चैनलों में कहां. फिर चाहे बात आज तक के प्रोग्राम की हो. 

आजतक का कहना है कि न्यूज शो की हो. खबरें पेश करने के अंदाज की हो. आज तक के मैनेजिंग एडिटर्स ले लेकर एंकर्स तक, प्रोड्यूसर्स से लेकर वीडियो एडिटर्स तक, आज तक का कोई सानी नहीं है. इसीलिए आज तक हर अवॉर्ड पर अपना कब्जा जमाता आया है. पब्लिक का चहेता बनता आया है. न्यूज टेलीविजन को दिए जाने वाले हर अवॉर्ड्स में आज तक सबसे आगे सबसे तेज नजर आया है. लगातार 100 हफ्तों में आज तक ने बुलंदी का जो झंडा गाड़ा है, 100 में 100 हफ्ते… नंबर वन बनने रहने का ताज पाया है. 

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