रवीश ने ‘हिंदुस्तान’ की आज कर दी तगड़ी समीक्षा, शशिजी आप भी पढ़ लें!

Ravish Kumar : रफाल पर ख़बर तो पढ़ी लेकिन क्या हिन्दुस्तान के पाठकों को सूचनाएँ मिलीं… हिन्दुस्तान अख़बार ने रफाल मामले को लेकर पहली ख़बर बनाई है। ख़बर को जगह भी काफी दी है। क्या आप इस पहली ख़बर को पढ़ते हुए विवाद के बारे में ठीक-ठीक जान पाते हैं? मैं चाहता हूं कि आप …

क्या खनन घोटाले में हिंदुस्तान अखबार के संपादक शशिशेखर का भी नाम है?

खनन घोटाले में एक बड़े संपादक का नाम होने की चर्चाएं तो काफी दिनों से हैं लेकिन ये संपादक महोदय कोई और नहीं बल्कि दैनिक हिंदुस्तान अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर जी हैं, इसको लेकर बातें-चर्चाएं बस चंद घंटों पहले शुरू हुई हैं. इंडिया स्पीक्स डेली डॉट कॉम नामक वेबसाइट ने तो खुलकर छाप …

हिन्दुस्तान अखबार के घोटाले की पुलिस जांच शुरू, शोभना भरतिया और शशिशेखर हो सकते हैं गिरफ्तार

मुंगेर (बिहार) : पत्रकारिता के छात्रों को ‘सत्य के संधान’ का लेक्चर देने वाले शशि शेखर अपने अखबार के ही एक घोटाल में आरोपी हैं. सुप्रीम कोर्ट के 11 जुलाई 2018 के आदेश के आलोक में मुंगेर के पुलिस अधीक्षक गौरव मंगला ने दैनिक हिन्दुस्तान के फर्जी संस्करण और 200 करोड़ रुपए के सरकारी विज्ञापन …

पत्रकारिता के नए छात्रों को ‘सत्य के संधान’ का लेक्चर दे आए शशिशेखर!

आजकल के दौर में मुख्यधारा के संपादक, अखबार और चैनल सत्य की कतई पत्रकारिता नहीं कर रहे हैं. वे झूठ की, सत्ता की, कारपोरेट की, लालच की, अवसरवादिता की, जन विरोध की पत्रकारिता कर रहे हैं. बिड़ला खानदान के अखबार हिंदुस्तान के समूह संपादक हैं शशि शेखर. अंबानी के चैनल न्यूज18इंडिया के एंकर हैं सुमित …

बहुत बड़े ‘खिलाड़ी’ शशि शेखर को पत्रकार नवीन कुमार ने दिखाया भरपूर आइना! (पढ़िए पत्र)

आदरणीय शशि शेखर जी,

नमस्कार,

बहुत तकलीफ के साथ यह पत्र लिख रहा हूं। पता नहीं यह आपतक पहुंचेगा या नहीं। पहुंचेगा तो तवज्जो देंगे या नहीं। बड़े संपादक तुच्छ बातों को महत्त्व नहीं दे। तब भी लिख रहा हूं क्योंकि यह वर्ग सत्ता का नहीं विचार सत्ता का प्रश्न है। एक जिम्मेदार पाठक के तौर पर यह लिखना मेरा दायित्व है। जब संपादक अपने अखबारों को डेरे में बदलने लगें और तथ्यों के साथ डेरा प्रमुख की तरह खेलने लगें तो पत्रकारिता की हालत पंचकुला जैसी हो जाती है और पाठक प्रमुख के पालित सेवादारों के पैरों के नीचे पड़ा होता है।

यह शख्स जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया!

Deshpal Singh Panwar : अगर ये खबर सच है कि हिंदुस्तान टाइम्स समूह को मुकेश अंबानी खरीद रहे हैं तो तय है कि अच्छे दिन (स्टाफ के लिए पीएम के वादे जैसे) आने वाले हैं। वैसे इतिहास खुद को दोहराता है… कानाफूसी के मुताबिक एक शख्स जो इस समूह के हिंदी अखबार में चोटी पर है वो जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया।

दगे हुए सांड़ों की दिलचस्प दास्तान : शशि शेखर महोदय के लेखों में थरथराहट काफी होती है…

अनेहस शाश्वत

आज यशवंत सिंह के इस भड़ास बक्से में आप सबके लिए कुछ हास्य का आइटम पेश करूंगा। पेशेवर पत्रकारिता को जब एक तरह से तिलांजलि दी थी तो सोचा था कि इस बाबत कभी कुछ लिखूं पढ़ूंगा नहीं, और न ही इस बाबत किसी से कुछ शिकायत करूंगा। क्योंकि इस पेशे में आने का निर्णय और फिर इसे छोड़ने का निर्णय भी मेरा ही था। इस पेश से जुड़े किसी भी आदमी ने कभी मुझसे यह नहीं कहा कि आओ और न ही यह कहा कि इसे छोड़ दो, लेकिन बीस वर्ष की अवधि कम नहीं होती और इस अवधि में मुझे भी कुछ मजेदार अनुभव हुए। कई साथियों ने कहा कि इस बाबत भी कुछ लिख दो। कड़वे अनुभवों का जिक्र बेकार है क्योंकि वे निरर्थक हैं और एकाध कमीने सम्पादकों के सम्पादनकाल में ही हुए। मजेदार अनुभव काफी हैं जिनमें से कुछ का जिक्र मैं करूंगा।

लड़ाई ऐसे नहीं लड़ी जाती शशि शेखर जी

पटना में अपने संवाददाता की हत्या के बाद दैनिक हिन्दुस्तान अपने संवाददाता के साथ है, यह बड़ी बात है। मुझे नहीं पता पीड़ित संवादादाता हिन्दुस्तान के पेरॉल पर थे या स्ट्रिंगर। लेकिन इतिहास गवाह है, हिन्दी अखबार का संवाददाता मरता है तो वह स्ट्रिंगर ही होता है। मरने के बाद उसका संस्थान उससे पल्ला झाड़ लेता है। हिन्दुस्तान ने ऐसा नहीं किया बहुत बड़ी बात बात है। इसके लिए पूरे संस्थान की प्रशंसा की जानी चाहिए। पर संपादक जी एक दिन बाद जगे और लिख रहे हैं हम लड़ेंगे क्योंकि जरूरत है। बहुत ही लिजलिजा है।

प्रधान संपादक शशिशेखर चतुर्वेदी जी, आपका रिपोर्टर दरअसल निकम्मा और मुफ्तखोर है

Dilip C Mandal : शशिशेखर चतुर्वेदी जी, आप दैनिक हिंदुस्तान अखबार के प्रधान संपादक हैं. आपके अखबार में यह खबर छपी है कि रोहित वेमुला से जुड़े दस्तावेज आंदोलनकारी बेच रहे हैं. एजेंसी की इस खबर को आपके संपादकों ने छापा है. BHU के प्रोफेसर Chauthi Ram Yadav ने इस ओर ध्यान दिलाया.

आप खबर देखिए. एक रिपोर्टर हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी जाता है. उसे रोहित से संबंधित दस्तावेज चाहिए. उससे 70 पेज की फोटोकॉपी के 70 रुपये लिए जाते हैं. रिपोर्टर की आदत दक्षिणा लेने की रही होगी. मुफ्तखोरी संस्कार में रही होगी. फोटोकॉपी के पैसे लेने पर नाराज होकर खबर लिख दी और आपने मजे लेकर छाप दी. मुफ्त में क्यों चाहिए दस्तावेज?

अपनी नौकरी बचाने के लिए शशि शेखर नीचता पर उतर आये हैं

रमन सिंह : हिन्दुस्तान में साइन कराने का सिलसिला शुरू… अपनी नौकरी बचाने के लिए शशि शेखर नीचता पर उतार आये है. इसी का नतीजा है कि इन दिनों हिन्दुस्तान अखबार में कर्मचारियों से दूसरे विभाग में तबादले के कागज पर साइन कराने का दौर शुरू हो गया है. दिल्ली में तो खुद शशि शेखर जी साइन करा रहे हैं. साइन नहीँ करने वालों को निकालने की धमकी भी दी जा रही है.  मजीठिया से घबराया हिन्दुस्तान फिलहाल जिस कागज पर साइन करा रहा है उसमें भी कई फर्जीवाड़ा है. इसलिए नीचे के फोटो को आप ध्यान से पढ़िए. दो फोटो हैं, दोनों को ध्यान से देखिए. कई फर्जीवाड़े समझ में आएंगे. 

हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स में हाहाकार, वेज बोर्ड नहीं चाहिए वाले फार्म पर प्रबंधन जबरन करा रहा हस्ताक्षर

इस वक्त हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान अखबार के दफ्तरों में हाहाकार मचा हुआ है. नोएडा और दिल्ली से आ रही खबरों के मुताबिक दोनों अखबारों के कर्मियों से एक फार्म पर जबरन साइन कराया जा रहा है जिस पर लिखा हुआ है कि हमें मजीठिया वेज बोर्ड से अधिक वेतन मिलता है इसलिए हम मजीठिया वेज बोर्ड के लाभ नहीं लेना चाहते. सूत्रों के मुताबिक जो लोग फार्म पर साइन करने से मना कर रहे हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है.

शोभना भरतिया की धोखाधड़ी जायज बताने के लिए राजीव वर्मा ने ‘प्रोजेक्ट बटरफ्लाई’ के नाम पर कर्मियों का किया ब्रेन वॉश

मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से अच्छी खासी सेलरी न देनी पड़े, कम पैसे में मीडियाकर्मियों का शोषण जारी रहे, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मनमर्जी-मनमानी चलाई जा सके, इस उद्देश्य से अंग्रेजी और हिंदी अखबारों हिदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान की मालकिन शोभना भरतिया ने अपने अखबारों के मीडियाकर्मियों को रातोंरात इंटरनेट कंपनी का इंप्लाई बना दिया और जबरन साइन करने के लिए मजबूर किया गया. मरता क्या न करता की तर्ज पर सभी ने साइन तो कर दिए लेकिन हर एक मीडियाकर्मी के दिल में यह सवाल उठने लगा कि आखिर हमारी मालकिन इतनी चीटर, फ्रॉड और बेशर्म क्यों है… आखिर हमारे संपादक इतने बेजुबान क्यों हैं… आखिर हमारे देश में कानून और न्याय की इज्जत क्यों नहीं है?

ऐसे सवालों से दो-चार हो रहे हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स के मीडियाकर्मियों को पिछले दिनों एक आंतरिक मेल मिला. यह मेल सीईओ राजीव वर्मा की तरफ से भेजा गया. मेल हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में था ताकि हर एक का ब्रेन वाश ठीक से किया जा सके. पूरी मेल में कहीं भी मजीठिया वेज बोर्ड का हवाला नहीं था. कहीं भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने को लेकर जिक्र नहीं था, कहीं भी कर्मियों से जबरन नई कंपनी में शिफ्ट कराए जाने के लिए कराए गए हस्ताक्षर को लेकर उल्लेख नहीं था. बस, सुहाने सपने दिखाए गए, प्रोजेक्ट बटरफ्लाई का हवाला दिया गया और सबको बातों में उलझाने की कोशिश की गई है. नीचे राजीव वर्मा के हिंदी अंग्रेजी के मेल के पहले वो दस्तावेज दे रहे हैं जिसके जरिए एचटी व हिंदुस्तान के मैनेजमेंट ने अपने कर्मियों को नए टर्म कंडीशन के पेपर पर साइन कराकर रातोंरात नई कंपनी में ट्रांसफर कर डाला ताकि मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी देने की स्थिति ही न आए.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : शोभना भरतिया और शशि शेखर को शर्म मगर नहीं आती… देखिए इनका कुकर्म…

हिंदुस्तान अखबार और हिंदुस्तान टाइम्स अखबार की मालकिन हैं शोभना भरतिया. सांसद भी हैं. बिड़ला खानदान की हैं. पैसे के प्रति इनकी भूख ऐसी है कि नियम-कानून तोड़कर और सुप्रीम कोर्ट को धता बताकर कमाने पर उतारू हैं. उनके इस काम में सहयोगी बने हैं स्वनामधन्य संपादक शशि शेखर. उनकी चुप्पी देखने लायक हैं. लंबी लंबी नैतिक बातें लिखने वाले शशि शेखर अपने घर में लगी आग पर चुप्पी क्यों साधे हैं और आंख क्यों बंद किए हुए हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए. आखिर वो कौन सी मजबूरी है जिसके कारण वह अपने संस्थान के मीडियाकर्मियों का रातोंरात पद व कंपनी जबरन बदले जाने पर शांत बने हुए हैं.

हिंदी का ये कौन बड़ा अखबार है जो पहले कांग्रेस का चाटुकार था, आज भाजपा का चाटुकार है

Umesh Chaturvedi : हिंदी पत्रकारिता का वैचारिक बदलाव का दौर चल रहा है..यह बदलाव अंदर से है या सिर्फ दिखावे का..इसे तय पाठक ही करेंगे..हिंदी का एक बड़ा अखबार है..16 मई 2014 से पहले तक पूरे दस साल तक उसके बीजेपी बीट रिपोर्टर का एक ही काम होता था..बीजेपी की आलोचना करना..बीजेपी से जुड़ी रूटीन खबरें नहीं करना..

शशि शेखर ने हिंदी हिंदुस्तान के बेजुबान कर्मियों को जानवरों की तरह हांककर नोएडा ले जाने का ठेका लिया था!

शशि शेखर ने हिंदुस्तान को गर्त में डुबोने के एक बडे़ रोडमैप के तहत हिंदुस्तान का कार्यालय एचटी बिल्डिंग कनाट प्लेस से नोएडा के सैक्टर 63 में सूनसान तबेले जैसे इलाके में पहुंचा दिया। यहां आकर शशिशेखर व उनके दो- तीन तलवे चाटने वालों को छोड़कर सभी परेशान हैं।  कुछ ही माह पहले हिंदुस्तान के साथ ही एचटी अंग्रेजी के पूरी संपादकीय टीम को नोएडा भेजने का फरमान जारी हुआ था लेकिन  एचटी इंग्लिश स्टाफ ने एक जुट होकर शोभना भरतिया के मैनेजरों को आंखे दिखाई और सामूहिक इस्तीफों की चेतावनी दी तो उन्हे नोएडा भेजने का फैसला वापस ले लिया गया।