सैकड़ों करोड़ रुपये देख कल्ली पुरी ‘इंडिया टुडे’ समेत सभी प्लेटफार्म्स पर ‘एजेंडा’ पत्रकारिता के लिए तैयार हो गईं, देखें वीडियो

टीवी टुडे नेटवर्क हिन्दी और न्यूज़ टेलिविजन नेटवर्क इंग्लिश है। बीएसई और एनएसई में लिस्टेड टीवी टुडे नेटवर्क के आजतक, इंडिया टुडे टेलीविजन, तेज़ और दिल्ली आजतक जैसे कई न्यूज़ चैनल है। व्यापक रूप से टीवी टुडे नेटवर्क का स्वामित्व अरुण पुरी नियंत्रित लिविंग मीडिया इंक के पास है जो इंडिया टुडे, बिज़नस टुडे मैगज़ीन भी पब्लिश करती है। मैग्जीन, अखबार, किताब, टीवी, प्रिंटिंग और इंटरनेट जैसे कई क्षेत्रों में ये कंपनी व्यापार कर रही है। इसके अलावा कास्मोपोलिटन और मेल टुडे में भी कंपनी का ज्वाइंट वेंचर है। Continue reading

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संबित पात्रा ‘आजतक’ न्यूज चैनल में एंकर बन गए… मुझे तो शर्म आई… आपको?

आजतक के मालिक साहब अरुण पुरी जी कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में हैं और मीडिया पर हमले हो रहे हैं… दूसरी तरफ वे अपने ही चैनल में एंकर की कुर्सी पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को बिठा देते हैं. कैसा दौर आ गया है जब मीडिया वालों को टीआरपी के कारण सिर के बल चलना पड़ रहा है. टीवी वाले तो वैसे भी सत्ताधारियों और नेताओं के रहमोकरम पर जीते-खाते हैं लेकिन वे शर्म हया बेच कर नेताओं-प्रवक्ताओं को ही एंकर बनाने लगेंगे, भले ही गेस्ट एंकर के नाम पर तो, इनकी बची-खुची साख वैसे ही खत्म हो जाएगी.

गेस्ट एंकर बनाना ही था तो किसी आर्टिस्ट को बनाते, किसी डाक्टर को बनाते, किसी बेरोजगार युवक को बनाते, किसी स्त्री को बनाते, किसी ग्रामीण को बनाते… किसी खिलाड़ी को बनाते… किसी संगीतकार को बनाते… किसी साहित्यकार को बनाते… किसी रंगकर्मी को बनाते…. अपनी रचनात्मकता और बौद्धिकता के बल पर दुनिया में नाम रोशन करने वाले किसी भी भारतीय को बना लेते… नासिक से मुंबई मार्च कर रहे किसानों में से किसी एक को बना लेते… जनांदोलनों से जुड़े किसी शख्स को बना लेते…

लंबा चौड़ा स्कोप था गेस्ट एंकर बनाने के लिए… लेकिन मोदी भक्ति में लीन न्यूज चैनलों को असल में कुछ भी दिखना बंद हो गया है… उनकी सारी रचनात्मकता अब किसी भी तरह भाजपा को ओबलाइज करते रहने की हो गई है… वे जज लोया कांड पर विशेष स्टोरी नहीं बनाएंगे… कोई सिरीज नहीं चलाएंगे… वे पीएनबी बैंक स्कैम के आरोपियों से मोदी जी के रिश्ते को लेकर पड़ताल नहीं करेंगे…

वे इन सब पर बुरी तरह चुप्पी साध जाएंगे लेकिन जब अगर तेल लगाने की बात आएगी तो भांति भांति तरीके से बीजेपी वालों को तेल लगाते रहेंगे… गाना गा गा के तेल लगाएंगे… अपना मंच उनके हवाले करके तेल लगाएंगे… जियो मेरे न्यूज चैनलों के छम्मकछल्लो….

किसी भी नेता को गेस्ट एंकर बनाने की इस खतरनाक प्रथा का मैं कड़ी निंदा करते हुए अपना विरोध दर्ज कराता हूं….

वैसे, आजतक को मेरी एडवांस सलाह है कि अपने दिवालियापन को विस्तार देते हुए अगले गेस्ट एंकर के तौर पर वह मोदी जी के दो खास उद्योगपतियों में मुकेश अंबानी जी या गौतम अडानी जी में से किसी एक को बुला लें… या चाहें तो क्रमश: दोनों को मौका दे दें…  पत्रकारिता सदा अरुण पुरी एंड कंपनी की एहसानमंद रहेगी…

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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नफरत फैलाने वाले एंकरों पर मुक़दमा चलाने की मांग करने वाली महिला पत्रकार को अरुण पुरी ने नौकरी से निकाला

Shweta R Rashmi : शर्मनाक और घटिया शुरुआत है ये… टीवी टुडे की पत्रकार को इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि उसने पत्रकारिता में सिखाये ऊसूल को याद रखते हुए आस पास देख कर सच लिखा और ट्वीट किया। प्रबंधन ने उस पर दवाब डाला कि वो ट्वीट डिलीट करे। ऐसा न करने पर नौकरी से टर्मिनेट कर दिया गया। टीवी टुडे ग्रुप में घटी इस घटना से पहले बॉबी घोष को भी नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि एक खबर पर सत्ता पक्ष को ऐतराज़ था। अब सवाल ये है कि टीवी टुडे के, या अन्य मीडिया संस्थानों के मैनेजमेंट को दंगा करवाने पर आमादा, बिक़े और गलत सूचना फ़ैलाने वाले झींगुर क्यों नहीं दिखते।

ये है टीवी टुडे समूह का आधिकारिक बयान…

ये

Samar Anarya :  इंडिया टुडे ने झूठी ख़बरें और नफ़रत फैलाने वाले ऐंकरों, पत्रकारों को न रोकने वाले मीडिया मालिकों पर वैमनस्य फैलाने के लिए मुक़दमा चलाने की माँग करने वाली अंगशुकांता चक्रबर्ती को नौकरी से निकाला। ठीक ही किया, भले अंगशुकांता ने किसी समूह का नाम न लिया हो, इंडिया टुडे जानता है कि उसने रोहित सरदानाओं और राहुल कँवलों को नौकरी पे रखा ही हुआ है! नए भारत में स्वागत है।

India Today fires journalist for asking for prosecution of promoters (read owners of channels) allowing hate-mongering, fake news spreading news anchors, as hate speech enablers-profiteers. She hadn’t named anyone but then owners know that they have Rohit RSS Sardanas and Rahul RSS Kanwals doing exactly that! Welcome to New India.

भारतीय मीडिया आज: यूएई दूतावास टाइम्स काऊ, जी न्यूज़ और अन्य मीडिया समूहों को अबू धाबी के राजकुमार के बारे में ‘जय सिया राम’ बोलने की फ़र्ज़ी ख़बर चलाने पर भड़का, चेतावनी दी कि ऐसी हरकतें डालेंगी संबंधों पर असर। इंडिया टुडे ने फ़र्ज़ी न्यूज़ चलाने वाले, नफ़रत फैलाने वाले मीडिया समूहों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की माँग करने वाली पत्रकार को बर्खास्त किया। नए भारत में स्वागत है।

Indian Media Today: UAE embassy slams Times Cow, Zee News, others for faking news about crown prince of Abu Dhabi chanting Jai Siya Ram, warns that such fake news will affect relationships. India Today fires journalist who sought action against media houses mongering hate, promoting fake news.

पत्रकार श्वेता आर रश्मि और अविनाश समर की एफबी वॉल से.

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अरुण पुरी की बेटी कोयल पुरी ने डायरेक्टर पद से दिया इस्तीफा

इंडिया टुडे ग्रुप और टीवी टुडे ग्रुप में पिछले कुछ दिनों से शीर्ष स्तर पर उथल पुथल चल रहा है. इन कंपनियों के चेयरमैन अरुण पुरी अब धीरे धीरे कमान अपनी बेटियों के हाथों सौंपते जा रहे हैं. इंडिया टुडे ग्रुप के सीईओ आशीष बग्गा के इस्तीफा देने के बाद कली पुरी कंपनी के रोजना के कामकाज को देखने लगी हैं. वहीं दूसरी बेटी कोयल पुरी के बारे में खबर आ रही है कि उन्होंने डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया है. ऐसा माना जा रहा है कि अरुण पुरी ने अपनी दोनों बेटियों में अपनी दोनों कंपनियों को बांट दिया है. इसी संयोजन के तहत नए कई सारे बदलाव घटित हो रहे हैं.

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‘लल्लनटॉप’ वाले हिटलर का लिंग नाप आए, अब अरुण पुरी का नापेंगे!

Wasim Akram Tyagi : टीवी टुडे ग्रुप का एक न्यूज पोर्टल है लल्लनटाप. इसकी एक ‘स्पेशल स्टोरी’ का स्क्रीन शॉट सोशल मीडिया पर घूम रहा है. इसकी हेडिंग कुछ यूं हैं ‘छोटा लिंग, निराश क्यों? हिटलर का भी छोटा था’. पत्रकारित का स्तर देख लीजिये साहब, कहां पहुंच गया है? ‘लल्लनटाप’ वाले से मेरा एक सवाल है कि हिटलर का लिंग छोटा था या बड़ा, लेकिन यह बताईये कि उसके लिंग को इंच टेप लेकर नापा किसने था?

Yashwant Singh : अरुण पुरी के लिंग का साइज क्या है? यानि हिटलर टाइप है या नहीं… ‘लल्लनटॉप’ वाले इस एंगल पर काम करें और अगली फालोअप स्टोरी प्रकाशित करें. यकीन मानें, खबर खूब पढ़ी जाएगी, साइट की हिट्स जबरदस्त बढ़ जाएगी.

सवाल है कि किसी के लिंग का साइज कैसा है, छोटा है या बड़ा है, ये न्यूज कैसे हो गई. ये तो नितांत निजी मामला होता है. और, अगर ये न्यूज नहीं, मनोरंजन के बतौर है तो फिर हिटलर का नाम क्यों. बड़े लोगों को लेकर ढेर सारी गासिप जनता के बीच फैली रहती है. पर उसे मीडिया उठाने से बचता है क्योंकि उसका कोई स्रोत नहीं होता, कोई आथेंटिसिटी नहीं होती. पर जब इस तरह की गासिप को खबर बनाकर छापने लगे हैं तो फिर हर बड़े आदमी के लिंग के साइज की सच्चाई को सामने लाने का महान काम भी कर देना चाहिए और शुरुआत क्यों न खुद के संस्थान के मुखिया के लिंग साइज को सार्वजनिक करके किया जाए…

(नोट : जिन्हें नहीं मालूम, उन्हें बता देते हैं कि लल्लनटाप नामक वेबसाइट इंडिया टुडे समूह से संबद्ध है जिसके मालिक अरुण पुरी हैं. कभी जुझारू पत्रकार कहे जाने वाले अरुण पुरी बुढ़ापे में लगता है सठिया गए हैं. उनका चैनल, मैग्जीन, वेबसाइट सब के सब अब अंड बंड संड दिखाने छापने पढ़ाने में लगे हैं.)

सोशल मीडिया के चर्चित लेखक और पत्रकार वसीम अकरम त्यागी व भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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71 साल की उम्र में अरुण पुरी शायद अपनी ही कही बातों को भुला चुके हैं!

Deepak Sharma : १३-१४ साल पहले जब मै प्रिंट से टीवी पत्रकारिता में आया, तो आजतक के मुख्य संपादक अरुण पुरी कहा करते थे कि नेताओं के बयान नही खबर दिखाईये. उनका मानना था कि जिनके पास समस्या का हल नहीं है, उन नेताओं की फालतू बहस दर्शक को सुनाने का क्या फायदा. पुरी साहब का तर्क था कि दर्शक खबर देखना चाहते हैं. खबर जिसकी अहमियत हो. वो चाहे कोई बड़ा घपला हो या कोई बड़ी समस्या या कोई अहम घटना. फोकस खबर पर होना चाहिए. रिपोर्टर का कैमरा खबर के पीछे दौड़े, उसकी पड़ताल करे, उसे खंगाले और स्क्रीन पर दिखाए.

वो कहते थे कि पुख्ता सवाल अगर किये जाएँ तो उन ताकतवर नेताओं या नौकरशाहों से किये जाएँ जो सत्ता में बैठकर अहम फैसले ले रहे हैं. जिन्होंने फैसला नहीं लिया, फाइल नहीं देखी, जो मुद्दे को जड़ से नहीं जानते, उनसे बात करके खबर के साथ छल मत कीजिये. उनकी बातें सही थी. पता नही आज 71 साल की उम्र में वो टीवी की न्यूज़ को किस पैमाने से देखते हैं. लेकिन पुरी साहब की बातों से उदय शंकर या कमर वाहिद नकवी जैसे न्यूज़ चैनल के महारथी इत्तेफाक रखते थे. बहरहाल टीवी पत्रकारिता के उस दौर पर शायद अब विराम लग चुका है.

आज तो कैमरा दिनभर संबित पात्रा के आगे जमा हुआ है. आज कैमरा सुधांशु त्रिवेदी पर फोकसड है. आज स्क्रीन पर राघव चड्ढा, संजय झा, शाईनी और ना जाने कौन कौन दिन रात दीखते है? ये बिना बात बोलते हैं और देश बेवजह सुनता है.

देश से संवाद करने वाले संवादाताओं की जगह आज स्टूडियो में रमे हुए चेहरों ने ले ली है. सच तो ये है कि उपन्यास लिखने और पढ़ने वाले एंकर इनसे सवाल पूछते हैं और जो न कभी सांसद रहे, ना कभी विधायक रहे ना कभी पार्षद रहे वो जवाब देते हैं. मेरा संबित पात्रा या राघव चड्ढा से कोई दुराव नही है लेकिन मे आप लोगों से पूछना चाहता हूँ की रोज़ रात में आप इन्हें सुनते देखते क्यूँ है? और हाँ अगर इनकी बहस से देश का भला हो रहा है तो बताईयेगा ज़रूर.

आजतक न्यूज चैनल में लंबे समय से कार्यरत रहे पत्रकार दीपक शर्मा के फेसबुक वॉल से.

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अरुण पुरी के खिलाफ विहिप नेता द्वारा दायर मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई

बिजनेस टुडे मैग्जीन के कवर फोटो पर महेंद्र सिंह धोनी को भगवान विष्णु के रूप में प्रकाशित करने के खिलाफ बेंगलुरु में एक विहिप नेता ने इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन अरुण पुरी के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमें पर रोक के लिए अरुण पुरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने अरुण पुरी को राहत दे दी है. पढ़िए इस संबंध में रिलीज हुई खबर….

SC stays proceedings against Aroon Purie

NEW DELHI: The Supreme Court stayed criminal proceedings against India Today group head Aroon Purie, which was initiated against him for publishing a cover photo in Business Today in 2013 showing Indian cricket team captain M S Dhoni as Lord Vishnu. Agreeing to hear Purie’s plea, a bench of Justices J S Khehar and N V Ramana directed additional chief metropolitan magistrate of Bengaluru not to proceed in the case filed by a VHP leader for allegedly hurting religious sentiments.

Senior advocate Amrendra Sharan and Sanchit Guru, appearing for Purie, contended that the entire complaint against him was false and baseless and it was filed merely to harass the petitioner. They also pointed out that a similar complaint was filed in Pune which was dismissed by the lower court. Purie approached SC after Karnataka HC refused to quash the proceedings against him. VHP leader Yerraguntla Shyam Sunder had filed a complaint objecting to the picture in which Dhoni — in the garb of the deity — holds various products including a shoe in his hands. The sub title read “God of Big Deals”.

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Will India Today’s gamble to rebrand its Headlines Today television channel pay off?

Media watchers and market analysts are observing the recent rebranding of Headlines Today as India Today TV with keen interest. As rebrandings go, this exercise is undoubtedly bold, running many risks. Is India Today a strong enough brand to work magic in the visual and print media together? Can a print brand’s appeal be superimposed on a television network to get better TRPs? Will core readers of India Today, the flagship 30-year-old magazine, switch to watching the India Today TV channel, snubbing NDTV and Times Now or News X?

 

Marketing mandarins believe that a brand provides the pull and the marketing the push. In this case, there seems to be some confusion between the branding and marketing strategy. The rebranding is the brainwave of Kalli Purie, the new group editorial director, who has said the main intention behind the exercise is to serve as a “credibility booster” for the 12-year-old channel Headlines Today. She said India Today would bring a web philosophy to the television screen as well as “snappy headlines”. What this means is native advertising, shorter advertisement breaks, etc. It is difficult to imagine viewers being won over with snappy headlines, which has been a long-running philosophy of the India Today group.

In media, we know that a print publication develops a readership that does not necessarily render into TV viewership of a TV channel. Brands in each segment are viewed separately. As Hector Pottie of the branding company Prophet London said in the Guardian: “In today’s world brands live or die on what they do. If the experience is poor then loyalty won’t last long. There’s a lot of choice and if the minute a brand isn’t giving me what I need I’m not likely to stick around.”

So the question really here is what will India Today TV give what Headlines Today couldn’t? What does India Today stand for that Headlines Today didn’t? Rajdeep Sardesai’s stint as an anchor of a prime time show and Karan Thapar’s show has given the channel some heft and viewership. But will this be enough?

Already, the channel has plunged headlong into a battle for TRPs with Times Now. It claimed to have toppled Times Now (on the back of its coverage of the Lalit Modi story and interview), while its editor Rahul Kanwal accused Times Now of trying to reclaim the top spot by “hook or by crook”.

According to BARC India, an industry body that measures television audiences, India Today TV became the top channel in the last week of May, with a viewership of 354 (000’s sum, a unit used to calculate reach) to Times Now’s 264. Till late last year, NewsX was the top channel based on TRPs in the six metros. Ratings by different agencies differ and are based on different parameters.

It is debatable whether the India Today print brand has grown additional sinews in the last decade to pass on excess pulling muscle to its TV network. The magazine and the group began to lose prominence in the last decade when the digital churn started. This was because the group chairman Aroon Purie believed there was “no point sending the good money after the bad”, as he often said about digital investments. Still, India Today tried several digital strategies, most of which didn’t work too well. The main portal was once put behind a pay wall, then a website with “snappy headlines” was launched, and then a commerce website only for invitees was set up – all with lukewarm success.

Connecting brand identities

Cross-connecting brand identities is a risky business. Times Now takes its brand equity from its print variant but that was no rebranding. Today, the channel and the newspaper travel different paths. Times Now today is a big brand in its own right and does not need rebranding as Times of India TV. Zee’s newspaper is DNA, where no effort is made to link the brands as one family. It is what you provide that matters and not the branding.

Aaj Tak has done well without the India Today logo hanging anywhere near it. At the same time, some regional editions of India Today with the same branding have shut down, showing that in regional languages the brand pull doesn’t work. So where does this brand equity work?

In the case of the TV channel rebranding, many will argue that the magazine was the weaker brand among the two and actually the magazine should have been renamed as Headlines Today, with the bright future of TV and the dismal future of print in mind. Both the television channel and the magazine need to rejuvenate in the coming years. That anxiety has set in in the group is evidenced by the fact that India Today magazine has had four editors in the last two-three years. The TV rebranding too can be seen as part of this struggle to regain its pre-eminence.

साभार- स्कॉल डॉट इन

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अरुण पुरी ने बेटी कली पुरी को बना दिया ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर

अरुण पुरी यानि आजतक, इंडिया टुडे समेत कई चैनलों पत्रिकाओं के मालिक ने अब अपनी बेटी कली पुरी को ग्रुप का एडिटोरियल डायरेक्टर बना दिया है. इंडिया टुडे ग्रुप में कली पुरी अब ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्‍टर के बतौर ब्रॉडकास्‍ट और न्‍यू मीडिया का काम देखेंगी. इससे पहले कली पुरी ग्रुप सिनर्जी और क्रिएटिव ऑफिसर पद पर थीं.

खुद अरुण पुरी इंडिया टुडे ग्रुप के अध्‍यक्ष और एडिटर इन चीफ हैं. अरुण पुरी ने ग्रुप के कर्मचारियों को कली पुरी को नई जिम्‍मेदारी दिए जाने के बाबत मेल किया है. कली पुरी 1996 से मीडिया में सक्रिय हैं. सबसे पहले वह इंडिया टुडे मैग्जीन में मार्केटिंग एग्जिक्‍यूविट और रिपोर्टर बनीं. बाद में प्रिंट, टेलिविजन और डिजिटल में विभिन्‍न पदों पर काम किया. वर्ष 2011 से वह इंडिया टुडे कॉन्क्‍लेव के डायरेक्‍टर की भूमिका निभा रही हैं.

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prize money received by Aroon Purie is not taxable : Delhi HC

In a significant decision, the Delhi High Court has held that prize money received by India Today Editor Aroon Purie was not directly relatable to his carrying on vocation as a journalist, but linked with his personality and it would be a capital receipt and hence not taxable under the Income Tax (I-T) Act. The HC explained that every receipt, which is not explicitly exempt would not be an income and its taxability would depend on particular situation, says Taxsutra.com a website that provides, on a real-time basis, updates and analysis of all income tax rulings.

The HC held in favour of the assessee (Mr Purie) and observed that in the present case the income would be in the nature of capital receipt and would be purely in the nature of testimonial, hence not taxable. “It being a payment of a personal nature, it should be treated as capital payment, being akin to or like a gift, which does not have any element of quid pro quo,” the Court said.
 
The case is related with the India Today Editor receiving an award, including a prize money of Rs1 lakh, for excellence in journalism by BD Goenka Foundation. While filing income tax (I-T) returns for AY1991-92, Mr Purie, claimed an exemption of Rs1 lakh received by him as BD Goenka Award. He claimed that the Award received by him was not in the nature of income as the same was not for any services rendered but was in the nature of testimonial or personal gift received as a token of appreciation. Mr Purie claimed that any such award in the nature of testimonial paid to any professional and is token of esteem, regard for his ability, and cannot be considered as an income under Section 2 (24) of the I-T Act.
 
The India Today Editor also claimed that as the receipt itself cannot be considered as income, there can be no question of claiming exemption u/s 10(17A) and thus claimed exemption of Rs1 lakh received as prize money for award.
 
Section 10(17A) provides that if any payment is made in cash or kind in nature of award or reward instituted in public interest by the central or state government, than such award money is exempted.
 
However, the Assessing officer (AO) disallowed the amount to tune of Rs1 lakh and added back the same to the income of the assessee. The AO observed that any money received or earned in nature of awards should be exempted only if it is covered by the provisions of section 10(17A) and found that award given to asseseee, was not covered by exemption provisions of 10(17A). 
 
Hearing an appeal, the Commissioner of Income tax (Appeals) (CIT-A) reversed the order passed by the AO. The CIT (A) allowed the amount of Rs1 lakh received as prize money by holding that the same is not income within section 2(24) and thus there is no question of its taxability.
 
Aggrieved by the decision, the I-T department then filed an appeal before the Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) at Delhi. The ITAT reversed order passed by the CIT(A) and held that Rs1 lakh received by Mr Purie from BD Goenka Foundation was not exempt under section 10(17A) of the I-T Act, and added back the amount.
 
Mr Purie then filed an appeal before the Delhi High Court. The HC analysed the provisions contained in section 10(3), section 10(17A) and section 2(24) and went through the widest possible scopes of the term income explained in section 2(24). After analysing facts, the HC noticed that the prime question to be considered is whether the award or prize money received by the asseseee by BD Goenka Foundation is revenue or capital receipt and secondly whether the prize money is taxable under income from other sources.
 
The Court also referred to several decisions given by the Supreme Court. The HC observed, “The causa causans in the present case is not directly relatable to the carrying on of vocation as a journalist or as a publisher. It is directly connected and linked with the personal achievements and personality of the person i.e. the appellant (Mr Purie). Further, it is to be noted that the payment in this case was not of a periodical or repetitive nature. The payment was also not made by an employer; or by a person associated with the “vocation” being carried on by the appellant; or by a client of his. A third person, who was not concerned with the activities or associated with the “vocation” of the appellant, has paid the prize money in the instant case. It being a payment of a personal nature, it should be treated as capital payment, being akin to or like a gift, which does not have any element of quid pro quo. The aforesaid prize money was paid to the assessee on a voluntary basis and was purely gratis…”
 
While rejecting the I-T department’s contention that all prizes or awards in cash or kind would be income except those specifically covered and exempted under sub- section (17A) to Section 10, the Delhi HC opined, “that question of exemption would not arise where the receipt itself does not fall within the ambit of income”.

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भारतीय टीवी न्यूज इंडस्ट्री में बड़ा और नया प्रयोग करने जा रहे हैं दीपक शर्मा समेत दस बड़े पत्रकार

(आजतक न्यूज चैनल को अलविदा कहने के बाद एक नए प्रयोग में जुटे हैं दीपक शर्मा)


भारतीय मीडिया ओवरआल पूंजी की रखैल है, इसीलिए इसे अब कारपोरेट और करप्ट मीडिया कहते हैं. जन सरोकार और सत्ता पर अंकुश के नाम संचालित होने वाली मीडिया असलियत में जन विरोधी और सत्ता के दलाल के रूप में पतित हो जाती है. यही कारण है कि रजत शर्मा हों या अरुण पुरी, अवीक सरकार हों या सुभाष चंद्रा, संजय गुप्ता हों या रमेश चंद्र अग्रवाल, टीओआई वाले जैन बंधु हों या एचटी वाली शोभना भरतिया, ये सब या इनके पिता-दादा देखते ही देखते खाकपति से खरबपति बन गए हैं, क्योंकि इन लोगों ने और इनके पुरखों ने मीडिया को मनी मेकिंग मीडियम में तब्दील कर दिया है. इन लोगों ने अंबानी और अडानी से डील कर लिया. इन लोगों ने सत्ता के सुप्रीम खलनायकों को बचाते हुए उन्हें संरक्षित करना शुरू कर दिया.

इन लोगों ने जनता के हितों को पूंजी, सत्ता और ताकत के आगे नीलाम कर दिया. नतीजा, परिणति, अंततः कुछ ऐसा हुआ कि देश में करप्शन, लूटमार, झूठ, दलाली का बोलबाला हो गया और बेसिक मोरल वैल्यूज खत्म हो गए. इसी सबको लेकर कुछ पत्रकारों ने सोचा कि जनता का कोई ऐसा मीडिया हाउस क्यों न बनाया जाए जो अंबानी और अडानी के लूटमार पर खुलासा तो करे ही, करप्ट और कार्पोरेट मीडिया के खलनायकों के चेहरे को भी सामने लाए. ऐसा सपना बहुतों ने बहुत बार देखा लेकिन कभी इस पर अमल नहीं हो पाया क्योंकि मीडिया को संचालित करने के लिए जिस न्यूनतम पूंजी की जरूरत पड़ती है, वह पू्ंजी लगाए कौन. पर सपने मरते नहीं. दौर बदलता है, तकनीक बदलती है तो सपने देखने के तौर-तरीके और स्वप्नदर्शी भी बदल जाते हैं.

इस बदले और परम बाजारू दौर में अब फिर कुछ अच्छे और सच्चे पत्रकारों के मन में पुराने सपने नए रूप में अंखुवाए हैं. इनने मिलकर एक जनता का मीडिया हाउस बनाने का फैसला लिया है. दस बड़े टीवी और प्रिंट पत्रकारों ने मिलकर जो सपना देखा है, उसे मूर्त रूप देने का काम बहुत तेजी से किया जा रहा है. आजतक न्यूज चैनल से इस्तीफा देने वाले चर्चित पत्रकार दीपक शर्मा इस काम में जोर शोर से लगे हैं. अमिताभ श्रीवास्तव भी इसके हिस्से हैं. एक तरफ चिटफंडियों और बिल्डरों के न्यूज चैनल हैं जो विशुद्ध रूप से सत्ता पर दबाव और दलाली के लिए लांच किए गए हैं तो दूसरी तरफ जनता की मीडिया के नाम पर धन बनाने की मशीन तैयार कर देने वाले मीडिया मालिक हैं. इनके बीच में जो एक बड़ा स्पेश जनपक्षधर मीडिया हाउस का है, वह लगातार खाली ही रहा है.

हां, इस बदले नए दौर में न्यू मीडिया ने काफी हद तक जन मीडिया का रूप धरा है लेकिन इसकी अपनी सीमाएं हैं. इन सीमाओं को लांघने का तय किया है दस पत्रकारों ने. एक नेशनल सैटेलाइट न्यूज चैनल जल्द लांच होने जा रहा है. यह चैनल मुनाफे के दर्शन पर आधारित नहीं होगा. यह सहकारिता के मॉडल पर होगा. नो प्राफिट नो लॉस. काम तेजी से चल रहा है. लग रहा है कि मीडिया में भी एक क्रांति की शुरुआत होने वाली है. लग रहा है मीडिया के जरिए मालामाल और दलाल हो चुके लोगों के चेहरों से नकाब खींचने का दौर शुरू होने वाला है. आइए, इस नए प्रयोग का स्वागत करें. आइए, भड़ास के सैटेलाइट वर्जन का स्वागत करें. आइए, बेबाकी और साहस की असली पत्रकारिता का स्वागत करें.

लेखक यशवंत भड़ास4मीडिया डॉट कॉम के संपादक हैं. संपर्क: 09999966466


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अरुण पुरी को पत्रकारिता से प्रेम होता तो इंडिया टुडे के दक्षिण भारत के तीन एडिशन्स क्यों बंद करते!

एक बुरी खबर इंडिया टुडे ग्रुप से है. इंडिया टुडे पत्रिका के दक्षिण भारत के तीन एडिशन्स बंद कर दिए गए हैं. अब इंडिया टुडे को तमिल, तेलगु और मलायलम भाषी लोग नहीं पढ़ सकेंगे. इन तीन एडिशन्स के बंद होने के बाद इंडिया टुडे सिर्फ अंग्रेजी और हिंदी में बची है. लोग कहने लगे हैं कि अगर अरुण पुरी को सच में पत्रकारिता से प्रेम होता या मीडिया के सरोकार से कोई लेना-देना होता तो वह दक्षिण भारत के तीन एडिशन्स बंद नहीं करता.

आखिर पूरे देश को एक स्तरीय पत्रिका को पढ़ने का हक है. अगर ये तीन दक्षिण भारतीय एडिशन्स घाटे में चल रहे थे तो इसे लाभ में लाने की कवायद की जानी चाहिए थी. पर तीन दक्षिण भारतीय भाषाओं में पत्रिका को बंद करके अरुण पुरी ने अपने धंधेबाज चेहरे का ही खुलासा किया है. जिस तरह दूसरे धंधेबाज मीडिया मालिक लाभ हानि के गणित से अपने मीडिया हाउस को चलाने बंद करने या विस्तारित करने पर ध्यान जोर देते हैं, वही काम अरुण पुरी भी कर रहे हैं.

वैसे, एक अच्छी बात ये है कि अरुण पुरी ने बंद किए जाने वाले तीनों एडिशन्स के कर्मियों को आश्वस्त किया है कि उन्हें समुचित मुआवजा मिलेगा. चेन्नई में अब इंडिया टुडे का आफिस बंद करके अब छोटा सा ब्यूरो रखा गया है. अरुण पुरी ने आंतरिक मेल जारी कर सभी को तीनों एडिशन्स बंद किए जाने की सूचना दी है. अपने पत्र में एक जगह अरुण पुरी लिखते हैं:

“The India Today weekly editions of Tamil, Telugu, and Malayalam have been incurring loss for over two decades. We have been absorbing the losses so far in the hope that they will turnaround. After great deal of deliberation we have come to the conclusion that we don’t see the viability of these editions in the foreseeable future. It is, therefore, with a heavy heart that we have decided to discontinue these editions.”

“The office in Chennai will now be a smaller Bureau. Some colleagues who are already contributing to the English edition will be retained in ITE and be a part of this Bureau.”

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एक करोड़ का मानहानि प्रकरण : अरुण पुरी और सलमान खुर्शीद में समझौता, हफ्ते भर तक माफीनामा चलेगा ‘आजतक’ वेबसाइट पर

India Today, Aroon Purie settle Salman Khurshid defamation claim

The India Today group’s TV channel Aaj Tak has published a small note of mutual regret on the bottom right-hand corner of its website, in its settlement of a Rs 1 crore defamation suit brought in 2012 by Louise Khurshid, the wife of Salman Khurshid, who was then law minister.

Both the media group and the former minister expressed “regret”, respectively for “any distress caused” and the “harsh words used against Mr. Aroon Purie”.

The couple had filed the defamation case in Louise’s name in the Delhi high court in October 2012 against the India Today group and 13 other defendants, including Aaj Tak, Headlines Today, the Mail Today newspaper, two news anchors and then the group’s executive editor Aroon Purie.

The Khurshids had claimed that they had been defamed by the defendants’ broadcast of allegations that they were skimming money out of a charity that Louise was associated with.

In a settlement agreement dated 8 November 2014, the parties jointly agreed to the following statement that would be published on the Aaj Tak website for seven days:

“We stand by the fact that TV Today’s story on the ZM Trust was based on certain documents of UP Government on the file of the Ministry of Social Justice in New Delhi. We understand some contents of those have been contested by the Trust and a fresh inquiry is being done by the State Government.

“It was never the Channel’s intention to question the personal integrity of the then Hon’ble External Affairs Minister, Mr. Salman Khurshid or Mrs. Khurshid who runs the Trust activities for the disabled, or charge them with any personal malfeasance and if the story has been perceived as such and any distress caused is sincerely regretted.

“In view of the above, Mr. Salman Khurshid regrets & withdraws harsh words used against Mr. Aroon Purie.

“It has now been agreed that all Civil and Criminal action initiated against the India Today Group in various courts across the country by the then Hon’ble External Affairs Minister, his wife and the Dr. Zakir Husain Memorial Trust shall be withdrawn forthwith.”

The English-language statement was published in a scrollable box, roughly 300 by 200 pixels in size, in the bottom-right-hand corner of aajtak.intoday.in’s Hindi-language homepage. The notice was visible from 27 January for seven days, said Abhimanyu Bhandari, the co-founding partner at Axon Partners, who represented the Khurshids with senior advocate Parag Tripathy.

Bhandari commented by email: “Extremely satisfying result as both parties have amicably resolved this.” The India Today group was represented by senior advocate C.A. Sundaram. India Today Group CEO Ashish Bagga and managing editor Supriya Prasad did not respond to an email seeking comment earlier this evening.

(लाइव मिंट डॉट कॉम)

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‘आजतक’ और ‘हेडलाइंस टुडे’ में क्या दलित विरोधी मानसिकता वाले सवर्ण भरे पड़े हैं?

Ajitesh Mridul : This is how Headlines Today depicted Bihar’s CM Jiten Manjhi. I just want to tell them that sucking up to Bhajappa and all is OK, but at least hire people who understand the social construct. Mushars, don’t eat rats just for the heck of it. Read and learn about their sufferings.

Mayank Saxena : ‘आज तक’ चैनल ने अपनी एनीमेशन श्रृंखला में जिस तरह बिहार के मुख्यमंत्री की जाति का उपहास किया है, उसे आजतक व हेडलाइंस टुडे पर चलाए गए विडियो में देखा जा सकता है. इसे देखकर समझिये की समाचार चैनल में काम करने वालों की मानसिकता और समझ क्या है! मैं बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू का समर्थक नहीं लेकिन किसी की भी जाति का इस प्रकार उपहास करना संविधान और समरसता पूर्ण राज्य के सिद्धांत के खिलाफ़ है… ‘आज तक’ क्या आप को पता है कि मुसहर चूहा शौक में नहीं खाते…थूकता हूं आप पर और खुद पर भी कि मैं कभी इस मीडिया का हिस्सा था! आप को क्या लगता है कि इस एनीमेशन को लेकर आज तक और टीवी टुडे पर एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए कि नहीं? कृपया आज तक की इस शर्मनाक हरक़त के खिलाफ व्यापक अभियान को गति दें!

अजीतेश मृदुल और मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.

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Aroon Purie को शर्म मगर आती नहीं….

जिस रोज पेशावर में मासूमों का कत्लेआम किया जा रहा था, जिस शाम पूरी दुनिया इस जघन्यतम बाल संहार से स्तब्ध होकर आंसू बहा रही थी, उसी रोज और उसी शाम अरुण पुरी अपनी पूरी टीम के साथ नोएडा फिल्म सिटी में पार्टी इंज्वाय कर रहे थे. बैंड बाजा लाइंटिंग डांस खाना पीना मस्ती.. फुल टाइट व्यवस्था थी और सबने जी भर कर इंज्वाय किया.. पार्टी India Today मैग्जीन की वर्षगांठ के मौके पर तय थी और हुई भी. एक बार भी अरुण पुरी का दिल पेशावर के बच्चों के लिए दर्द से नहीं भरा. सरोकारी पत्रकारिता और संवेदनशील पत्रकारिता का दावा करने वाले टीवी टुडे ग्रुप और लीविंग मीडिया कंपनी के मालिक अरुण पुरी से कम से कम ये उम्मीद तो हम सभी कर सकते हैं कि वह देश दुनिया की नब्ज, संवेदना, सरोकार को पकड़ेंगे, समझेंगे और उसके हिसाब से बिहैव करेंगे. फिल्म सिटी में काम करने वाले दर्जनों पत्रकारों ने भड़ास को फोन कर इस जघन्य पार्टी के बारे में जानकारी दी.

सोशल मीडिया पर बाल संहार वाले दिन ही कई मीडिया के साथियों ने अपना प्रोफाइल पिक्चर हटाकर वहां दुख स्वरूप ब्लैक ब्लैंक तस्वीर लगा दी ताकि शोक प्रकट किया जा सके, दुख अभिव्यक्त किया जा सके. नर पिशाचों के हाथों मारे गए मासूमों के परिजनों के मातम और बचे हुए बच्चों की चीखों दुखों ने हर एक को बेध दिया. पूरी दुनिया अब तक इस ग़म दुख से उबर न सकी है. ये किसी पाकिस्तान का मामला नहीं है. दुनिया के किसी हिस्से में इतने सारे मासूम एक साथ स्कूल में मार दिए जाएं तो वह राष्ट्रीय नहीं बल्कि ग्लोबल शोक का विषय है. हम सभ्यता के हजारों लाखों साल के विकास क्रम में आज यहां तक पहुंचे हैं कि अपने ही बच्चों को लाइन में लगाकर गोली मार देते हैं.

इस न भूले जाने वाली घटना ने छोटे बड़े हर मीडियाकर्मी से लेकर आम आदमियों तक को अंदर से हिला कर रख दिया. रातों की नींद छीन लिया. सबने उन बच्चों में अपने-अपने बच्चों, भाइयों का चेहरा देखा. बच्चे भगवान का रूप माने जाते हैं. बच्चे धर्म मजहब सबसे परे होते हैं क्योंकि वे सहज सरल सच्चे भोले होते हैं. इन बच्चों ने किसी का क्या बिगाड़ा था. सो, इनके कत्लेआम पर पूरी दुनिया रोई और रो रही है. लेकिन अरुण पुरी को लाज शरम नहीं आई. सोलह दिसंबर की काली शाम अरुण पुरी ने इंडिया टुडे मैग्जीन की वर्षगांठ मनाई और इस मौके पर जमकर पार्टी करवाई. उसी सोलह दिसंबर की शाम ‘दलित दस्तक’ मैग्जीन के संपादक और आईआईएमसी से पासआउट अशोक दास अपने फेसबुक वॉल पर कुछ यूं लिखते हैं:

Ashok Das : 17 दिसंबर को मेरा जन्मदिन होता है। जाहिर है फेसबुक यह संदेश आपलोगो तक पहुंचाएगा औऱ आप शुभकामनाएं देंगे। लेकिन प्लीज, इस बार रहने दीजिएगा। मैं शुभकामनाएं ले नहीं पाऊंगा। मेरी आंखों के सामने पाकिस्तान के वह 130 बच्चे हैं, जिन्हें मार दिया गया है। यह इतनी जल्दी नहीं भूला जा सकता।

अशोक दास के लिखे को बतौर उदाहरण पेश किया. हर किसी ने अपने अपने तरीके से इस बड़े दुख को अभिव्यक्त किया. किसी ने जन्मदिन न मनाकर. किसी ने ब्लैक प्रोफाइल पिक्चर लगाकर. किसी ने लिखकर. किसी ने एकांत धारण करके. एक और उदाहरण दे देता हूं. ‘समाचार प्लस’ न्यूज चैनल के निदेशक और संपादक उमेश कुमार ने भी अपना बर्थडे नहीं मनाया. उन्होंने फेसबुक पर लिखा है…

Umesh Kumar : Sorry Friends Pls Dont Wish Me….I’m not celebrating My bday… I’m not Able To come Out From Yesterday’s Incident happened In Pakistan…. Small Kids Were lying on the Floor…. Bloody So Called Talibaani Hijde Shot Them many times… Still I have tears In my eyes…. They Were Not Pakistani… They Were Kids…Meri Sharadhanjali Un Pyare Aur Masoom Bachcho Ke Liye…Jo Un Talibaani Hijde Haramjaado Se Kah Rahe Honge Ki Uncle Hume Mat Maaro…. Un Masoom Bachcho Ki Yaad Sone Nahi De Rahi…

लेकिन अरुण पुरी को कोई शर्म नहीं. कम से कम इस अरुण पुरी को टीवी टुडे समूह को अब खुद को सरोकारी पत्रकारिता करने वाला मीडिया समूह कहना छोड़ देना चाहिए. मान लेना चाहिए कि अब ये मीडिया घराने जनता के प्रतिनिधि नहीं बल्कि पूंजीपतियों के यार-रिश्तेदार हो गए हैं. इसी कारण इनका दिल सैकड़ों बच्चों के मारे जाने से नहीं दुखता… हां, कोई परिचित मोटा सेठ ज्यादा खाकर हार्ट अटैक से मर जाए तो जरूर कई दिन तक इनके घर में शोक मातम मनेगा. फिलहाल तो यही कहूंगा.. शेम शेम अरुण पुरी… थोड़ी भी संवेदना होती तो बच्चों के संहार के दुख में तुम अपनी इनहाउस पार्टी कैंसल कर दिए होते. पार्टी कैंसल करना ‘इंडिया टुडे’ की वर्षगांठ के लिए ज्यादा सम्मानजनक रहा होता. लेकिन पहले से तय पार्टी करके ‘इंडिया टुडे’ की छवि और तेवर को धक्का दिया है. पूरे कुकृत्य को छिछोरापन ही कहा जाएगा.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com


अरुण पुरी के छिछोरेपन के कुछ अन्य किस्से इन लिंक्स goo.gl/XMLj5v , goo.gl/LvW876  और goo.gl/0N9jJO पर भी क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

 

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बुढ़ापे में पैसे के लिए पगलाया अरुण पुरी अब ‘पत्रकारीय वेश्यावृत्ति’ पर उतर आया है…

Yashwant Singh : फेसबुक पर लिखने वालों, ब्लाग लिखने वालों, भड़ास जैसा पोर्टल चलाने वालों को अक्सर पत्रकारिता और तमीज की दुहाई देने वाले बड़े-बड़े लेकिन परम चिरकुट पत्रकार इस मुद्दे पर पक्का कुछ न बोलेंगे क्योंकि मामला कथित बड़े मीडिया समूह इंडिया टुडे से जुड़ा है. बुढ़ापे में पैसे के लिए पगलाए अरुण पुरी क्या यह बता सकेगा कि वह इस फर्जी सर्वे के लिए बीजेपी या किसी अन्य दल या कार्पोरेट से कितने रुपये हासिल किए हैं… इंडिया टुडे वाले तो सर्वे कराने वाली साइट के पेजेज को खुलेआम अपने एफबी और ट्विटर पेजों पर शेयर कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि मामला सच है और इंडिया टुडे वालों ने केजरीवाल को हराने के लिए किसी बड़े धनपशु से अच्छे खासे पैसे हासिल किए हैं.

बिकाउ मीडिया और कार्पोरेट-करप्ट मीडिया से वैसे तो मुझे कई वर्षों से कोई उम्मीद नहीं रही लेकिन अब भी ढेर सारे लोग हैं जो मीडिया हाउसों के चैनलों, अखबारों पर चलाई जा रही खबरों, सर्वे आदि को सच मानते हैं. आप भड़ास की इस खबर https://bhadas4media.com/print/2557-india-today-kejri-tweet को एक बार पढ़ लें और इस खबर में दिए गए वीडियो लिंक को क्लिक करके देख लें तो पक्का आप सनक जाएंगे और गरियाएंगे कि साला ऐसा भी कहीं होता है क्या…

ये बड़े बड़े मीडिया मालिक और बड़े बड़े पत्रकार अगर कभी आपको या हमको पत्रकारिता की तमीज सिखाते मिल जाएं तो तड़ाक से इनके मुंह पर अपना जूता या चप्पल निकाल कर मार दीजिए, बिना कोई जवाब या सफाई दिए…

छोटे मोटे मैग्जीन प्रकाशकों, लघु अखबार संचालकों, ब्लागरों, पोर्टल संचालकों आदि को ब्लैकमेलर बताकर खुद को चरित्रवान बताने वाले बड़े मीडिया हाउसों के मालिक दरअसल सबसे खूंखार और सबसे बड़े ब्लैकमेलर हैं जो पैसे लेकर सुपारी पत्रकारिता करते हैं. ऐसे सुपारी पत्रकारिता करने वाले बड़े मीडिया हाउसों के बड़े व्यभिचारी मालिकों और बड़े मीडिया हाउसों के बड़े दलाल संपादकों-पत्रकारों ने पूरी पत्रकारिता की साख गिरा कर खत्म कर दी है. यही कारण है कि अब मीडिया की बात आते ही हर कोई कहने लगा है कि इनकी तरफ पैसे फेंकिए, ये तत्काल मैनेज हो जाएंगे. पुलिस और नेताओं की तरह महाभ्रष्ट कैटगरी में आ चुका है मीडिया. अरुण पुरी की इस करतूत ने इंडिया टुडे ग्रुप की रही सही साख खत्म कर दी है और इसे भी चोरों ब्लैकमेलरों सुपारी पत्रकारों सुधीर चौधरियों, दीपक चौरसियाओं की कैटगरी वाला पत्रकारिता करने वाला मीडिया हाउस बना दिया है. शेम शेम इंडिया टुडे. शेम शेम अरुण पुरी.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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राजदीप सरदेसाई टीवी टुडे समूह के साथ जुड़े, पढ़िए अरुण पुरी का वेलकम लेटर

Dear all,

I am pleased to welcome Rajdeep Sardesai to the India Today Group. He will join us in the capacity of Consulting Editor. Rajdeep needs no introduction: he has been an asset to whichever team he has belonged to, including the cricketing ones. Oxford and St. Xavier’s educated, Rajdeep started his television career in 1994 and was a founding member of NDTV and, subsequently, CNN-IBN. Prior to TV, he worked with TOI for 6 years and was the city editor of its Mumbai edition. Rajdeep has served as the Editor-in-Chief of IBN18 Network, including CNN-IBN, IBN-7 and IBN-Lokmat for the last 9 years.

He has just finished his first book based on the historic 2014 elections; its release is much awaited. Rajdeep has won several national and international awards for journalism, including the Padma Shri in 2008. As a start, Rajdeep will be doing a marquee show for Headlines Today and contributing to the revamp of the Channel and its alignment with digital. Rajdeep, welcome. Great to have you with us. I know you will hit the ball out of the park for Team India Today. All the best in your new innings.

Aroon Purie

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इंडिया टुडे में बस दो महीने ही रह पाए शेखर गुप्ता

बड़ी खबर इंडिया टुडे से आ रही है. शेखर गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया है. वे इंडिया टुडे के एडिटर इन चीफ थे. शेखर दो महीने पहले ही इंडियन एक्सप्रेस छोड़कर इंडिया टुडे के हिस्से बने थे. जब शेखर ने इंडिया टुडे ज्वाइन किया था तब अरुण पुरी ने लंबा चौड़ा मेल करके शेखर गुप्ता का स्वागत किया था और शेखर की तारीफ में बहुत कुछ लिखा था.

#ShekharGupta

बताया जा रहा है कि शेखर गुप्ता की अरुण पुरी से निभ नहीं पाई इसलिए उन्हें जाना पड़ा. चर्चा है कि शेखर गुप्ता इंडिया टुडे ग्रुप के संपादकीय सलाहकार बने रहेंगे और उनका वीकली कालम ‘नेशनल इंटरेस्ट’ छपता रहेगा. कहा जा रहा है कि अब इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटर इन चीफ का काम इसके मालिक अरुण पुरी ही संभालेंगे.

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