इंडिया न्यूज़ से इस्तीफों का दौर जारी, पढ़िए कौन-कौन गया!

जो बचे, उनके बुरे हालात… कभी भी नौकरी जाने का डर सबको सता रहा…. कभी नंबर 2 और 3 तक पहुंच चुका इंडिया न्यूज़ अपने बुरे दौर से गुजर रहा है। जिस चैनल में लोग काम करने के लिए इच्छुक हुआ करते थे, अब उस चैनल को लोग नहीं मिल रहे। दीपक चौरसिया और राणा यशवंत जैसे चेहरों के साथ रिलांच हुआ इंडिया न्यूज़ पुराने दौर में पहुंच गया है। यहां काम करने वाले कर्मचारी प्रबंधन के रैवेय और मनमाने फैसलों की वजह से त्रस्त हैं। Continue reading

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‘इंडिया न्यूज’ चैनल वाले तीस हजार रुपये में बेचते हैं माइक आईडी?

इंडिया न्यूज एमपी सीजी के वाट्सएप ग्रुप में आरोप-प्रत्यारोप के दौरान हुआ खुलासा… चैनल हेड दीप्ति चौरसिया को एक स्ट्रिंगर ने सुनाई खरी-खोटी… दीप्ति चौरसिया वाले इंडिया न्यूज एमपी/सीजी चैनल का वाट्सएप ग्रुप बन्द कर दिया गया है. दरअसल इस बार बवाल एक स्ट्रिंगर के फेसबुक कमेंट से शुरू हुआ. इसके बाद स्ट्रिंगर को तत्काल माईक आईडी जमा करने के निर्देश चैनल की हेड ने वाट्सएप ग्रुप पर ही दे दिए.

इसके बाद ग्रुप में स्ट्रिंगर ने जमकर मैनेजमेंट को कोसा. इस स्ट्रिंगर ने लिखा-

“मैडम जी आप ने माईक आईडी दिया है, अलादीन का चिराग नहीं जो रगड़ दो तो जिन्न पैदा हो जाये और हमारी सभी मनोकामना पूरा कर दे. हमने संस्थान के एक नुमाइंदे को 30 हजार रुपये देकर आईडी खरीदा है”.

पढ़िए सारे आरोप-प्रत्यारोप… देखें स्क्रीनशाट का वीडियो…

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ऋचा अनिरुद्ध, इंडिया न्यूज, ये खुला ख़त और पूर्ण सत्य

यशवंत सिंह जी
भड़ास4मीडिया

नमस्कार.

आपसे कहा था कि ३ जनवरी को वो पूरी कहानी लिखूंगी जो इंडिया न्यूज़ के मेरे चार महिने के कार्यकाल में और उसके बाद  मेरे साथ घटित हुई।

३ जनवरी इसलिए क्योंकि ३ अक्टूबर वो तारीख थी जिस दिन इंडिया न्यूज़ के एच आर डिपार्टमेंट के किसी ऐसे शख्स ने मुझे फोन किया था जिसे मैं जानती तक नहीं और कहा कि ‘बेटियां’ शो को एंकर करने का आपका कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट किया जा रहा है।

अफसोस, करार खत्म होने का कतई नहीं था क्योंकि ये उस तकलीफ से बहुत कम था जो मैं हर दिन चैनल में काम करते हुए सह रही थी…कभी कैमरे में चिप नहीं तो कभी चिप करप्ट। मैंने अपनी तकलीफें बयां करती एक मेल चैनल के संपादक को भेजी भी थी। अफसोस इस बात का था कि लॉक-इन पीरियड के बावजूद करार तोड़ने का गैर-कानूनी काम करना ही था तो कम से कम चैनल के संपादक, राणा यशवंत एक बार मुझसे बात करने की ज़हमत तो उठा लेते, इतना सम्मान तो देते मुझे कि एचआर के किसी शख्स से फोन न करवाते। मैं बिना कोई लड़ाई झगड़ा किये या मुआवज़ा मांगे चैनल छोड़ देती।

लेकिन इस चैनल में यही रिवाज़ है ऐसा मुझे बाद में बताया गया…

खैर, टर्मिनेशन को मेल पर मंगाने और सितंबर की तनख्वाह लेने के लिए तक मुझे संघर्ष करना पड़ा। अपमानित हुई… गुस्सा भी आया…और आखिरकार डेढ़ महीने बाद जो टर्मिनेशन मेल आई, उसमें मुझ पर जो इल्ज़ाम लगे वो पढ़ने के बाद तो समझ ही नहीं आया कि मैं हंसूं या रोऊं…बहरहाल मेरे वकील ने नोटिस का जवाब तो भेज ही दिया…और ये स्पष्ट कर दिया कि मेरे पास हर इल्ज़ाम के जवाब में पुख्ता सबूत हैं और मैं चाहूं तो कोर्ट जा सकती हूं।

लेकिन कहते हैं न कि गुस्से या पीड़ा में कभी अपने विचार व्यक्त नहीं करने चाहिए सो मैंने ३ महीने इंतज़ार किया….

इस दौरान अपनों का भी पता चला… बहुत फोन आए, लोग मिले…सबने अपने अपने हिसाब से सलाह दी और मैंने सबको ध्यान से सुना। कुछ ने तो ये तक कहा कि तुम कानूनी केस लड़ो, हम सब मिल कर पैसे जुटाएंगे क्योंकि बहुत लोग इस चैनल की कारगुज़ारियों के भुग्तभोगी हैं। लीगल एक्सपर्ट्स ने कहा कि आपको ये केस लड़ना चाहिए क्योंकि ये पूरी तरह से आपके पक्ष में है। कुछ साथियों ने कहा चुप रहो, भूल जाओ, क्यों इस नकारात्मकता में पड़ना, जबकि कुछ ने कहा कि तुमको विस्तार से लिखना चाहिए। मैं ३ महिने तक इन दोनों सलाहों के बीच झूलती रही। बहुत लोगों ने ये भी समझाया कि एक चैनल के खिलाफ लिखोगी तो कहीं और नौकरी नहीं मिलेगी… ये डर तो हम सबके मन में होता ही है…इसी डर के चलते कई तथाकथित दोस्त भी चुप रहे कि क्या पता कल उन्हें इसी चैनल में नौकरी मांगने जाना पड़े।

लेकिन बीते दिनों में जब जब लैपटॉप उठाया पूरी कहानी लिखने के लिए, तो सिर्फ और सिर्फ दुख हुआ, अफसोस हुआ कि कैसे कैसे लोग एक चैनल के अहम पदों पर बैठे हैं, कई ज़ख्म दोबारा हरे होने लगे….कड़वी यादें ताज़ा हो गईं….

इसलिए अब नए साल में बीते साल के गढ़े मुर्दे उखाड़ने को जी नहीं कर रहा..जिसने जो किया, वो उसको भी पता है…चाहे चैनल के बेहद मीठा ,पर झूठ बोलने वाले संपादक हों, लोगों के साथ धोखे करने वाली एचआर हेड हों , तथाकथित टीवी रेटिंग एक्सपर्ट कंसल्टेंट मैडम हों, या वो सीईओ जिनके एक अवॉर्ड फंक्शन में जब लोग नहीं आए तो उन्होंने कार्यक्रम की नाकामी का ठीकरा मेरे सर मढ़ दिया…ये वो लोग हैं जो दूसरों की, खासकर एंकरों की नौकरियां खाकर अपनी चला रहे है….इनकी असलियत पहले ही दुनिया के सामने है, आगे इनके और सच सामने आएंगे….

आज बस इतना कह सकती हूं कि एक अच्छा शो, जो एक सामाजिक सरोकार से जुड़ा था, वो रेटिंग की मारामारी , संपादक की नाकामी, दीपक चौरसिया और राणा यशवंत के खेमों में बंटे लोगों की लड़ाइयों, खुद को बहुत समझदार समझने वाली लेकिन बेहद चालाक दो महिलाओं की साज़िशों और मैंनेजमेंट के लोगों के षड्यंत्रों और झूठे अहंकारों की भेंट चढ़ गया….

एक और बात मैं आज ज़रूर कहना चाहती हूं जिसकी वजह से मैं  ये मेल आपको लिख रही हूं…मुझसे कुछ लोगों ने कहा कि भड़ास वाले यशवंत, चैनल के संपादक  राणा यशवंत के अच्छे दोस्त हैं इसलिए तुम्हारी बात कभी नहीं छापेंगे। लेकिन मुझे हैरानी हुई जब आपने ३-४ बार कहा कि मैं पूरी बात लिखूं और आप ज़रूर छापेंगे। सो शुक्रिया आपका….पर अब उस कहानी को वहीं छोड़ देते हैं। क्या हुआ, क्यों हुआ, कैसे हुआ….ये सब लिखना मेरे लिए बहुत पीड़ादायक है। वक्त हम सबसे बलवान होता है…उसी पर छोड़ देते हैं इस कहानी का अंत…

शुभकामनाएं….

ऋचा अनिरुद्ध

info@richaanirudh.in

https://www.facebook.com/richaanirudh


भड़ास के इस नए खुलासे को भी जानें-पढ़ें-देखें :

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‘गौ आतंकी’ शीर्षक से कार्यक्रम प्रसारित करने पर इंडिया टुडे ग्रुप को विहिप ने लीगल नोटिस भिजवाया

विश्व हिंदू परिषद ने इंडिया टुडे ग्रुप को एक लीगल नोटिस भिजवाया है. यह नोटिस ‘गौ आतंकी’ नाम से एक कार्यक्रम ‘इंडिया टुडे’ पर प्रसारित करने को लेकर था. लीगल नोटिस में कहा गया है कि इस कार्यक्रम के जरिए विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल की छवि को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया गया है. लीगल नोटिस की एक कापी सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भी भेज दिया गया है.

लीगल नोटिस की एक प्रति भड़ास के पास भी है, जिसे नीचे दिया जा रहा है….

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‘इंडिया न्यूज़ पंजाब’ चैनल कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों हुआ लांच

चंडीगढ़ : इंडिया न्यूज़ पंजाब चैनल की कल चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों लांचिंग हुई। इंडिया न्यूज़ पंजाबी भाषा में आईटीवी नेटवर्क का पहला समाचार चैनल है। आईटीवी नेटवर्क के संस्थापक और प्रमोटर कार्तिकेय शर्मा ने लॉन्च के अवसर पर कहा, “यह पंजाब क्षेत्र में हमारी पहली शुरुआत है. हम पंजाब के क्षेत्रीय समाचारों को व्यवस्थित करके पंजाबी न्यूज़ जगत में क्रांति लाएंगे. हम पंजाबी में प्रासंगिक और प्रभावपूर्ण क्षेत्रीय सामग्री को प्रसारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
आईटीवी नेटवर्क के तीन राष्ट्रीय समाचार चैनल, चार क्षेत्रीय समाचार चैनल, दो अखबार और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स हैं.

India News Punjab channel launched by  Capt. Amarinder Singh

Chandigarh : India News Punjab channel was launched today in Chandigarh by Capt. Amarinder Singh, Hon’ble Chief Minister of Punjab. India News Punjab is iTV Network’s first news channel in the regional language. Channel will be aired in Punjabi language. India News Punjab will showcase the current events, news, happenings, sports, art, culture, heritage of Punjab and special programming for the farmers.

Kartikeya Sharma, Founder & Promoter, iTV Network said at the launch, “Its our first foray into the Punjab region, market is highly cluttered, we will bring revolution by streamlining regional news in Punjabi. We are committed to airing relevant and impactful regional content in Punjabi, allowing us to reach out to Punjabi Diaspora settled across the globe. The channel will showcase the true spirit of Punjabiyat in all its myriad moods.”

iTV Network is India’s fastest growing news network. With three national news channels, four regional news channels, two newspapers and various digital assets.  India News the leading national Hindi News Channel of the network has emerged as a leader in the most competitive genre, winning the trust of the Hindi News viewers. NewsX, the National English News Channel of the network, has been a trend setter in the English news genre with its crisp format, direct reportage, pointed debates, trending hash tags and engaging mix of stories. NewsX HD is India’s first News Channel in HD. This is a commercial free news channel and is built for delivering a multiscreen experience on a single screen to the multitasking high profile urban viewers of India.

On NewsX HD viewers get to watch non-stop commercial-free news content, including what’s happening on social media like Twitter, Facebook, Youtube, pinterest, Instagram, while getting additional feeds like weather, stock indices, etc all in a seamless experience on one screen.  In a short span of time, India News UP & Uttarakhand, India News Rajasthan, India News Madhya Pradesh & Chhattisgarh and India News Haryana have further strengthened the channel’s dominance in these Hindi speaking regions.

The Sunday Guardian is the finest Sunday Newspaper by the network that is sought after by country’s discerning readers for its engaging content and innovative format.

The group also publishes Aaj Samaj, a popular Hindi newspaper that caters to the informed readers in Delhi National Capital Region and the state of Haryana. With its innovative approach, extensive research and unbiased outlook, it has managed to stand out in the cluttered landscape. iTV Network is going through an expansion phase and aims to emerge as the biggest independent news network in the country.

ਇੰਡਿਆ ਨਿਊਜ਼  ਪੰਜਾਬ ਚੈਨਲ  ਮੰਨੀਏ ਸੀ ਐਮ ਕੈਪਟਨ ਅਮਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ  ਦੁਆਰਾ ਲਾਂਚ

ਚੰਡੀਗੜ :  ਇੰਡਿਆ ਨਿਊਜ਼  ਪੰਜਾਬ ਚੈਨਲ ਨੂੰ ਅੱਜ ਚੰਡੀਗੜ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬ  ਦੇ ਮਾਣਯੋਗ ਮੁੱਖਮੰਤਰੀ ਕੈਪਟਨ ਅਮਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ  ਦੁਆਰਾ ਲਾਂਚ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ।  ਇੰਡਿਆ ਨਿਊਜ਼ ਪੰਜਾਬੀ  ਭਾਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਆਈਟੀਵੀ ਨੈੱਟਵਰਕ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਸਮਾਚਾਰ ਚੈਨਲ ਹੈ ।  ਚੈਨਲ ਪੰਜਾਬੀ ਭਾਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਸਾਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਇੰਡਿਆ ਨਿਊਜ਼  ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ ਵਰਤਮਾਨ ਘਟਨਾਵਾਂ ,  ਸਮਾਚਾਰ  ,  ਖੇਲ ,  ਕਲਾ ,  ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ,  ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਵਿਰਾਸਤ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮਾਂ  ਦਾ ਨੁਮਾਇਸ਼ ਕਰਣਗੇ।

ਆਈਟੀਵੀ ਨੈੱਟਵਰਕ  ਦੇ ਸੰਸਥਾਪਕ ਅਤੇ ਪ੍ਰਮੋਟਰ ,  ਕਾਰਤੀਕੇਏ ਸ਼ਰਮਾ  ਨੇ ਲਾਂਚ  ਦੇ ਮੌਕੇ ਉੱਤੇ  ਕਿਹਾ ,  ਇਹ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਸਾਡੀ ਪਹਿਲੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਹੈ , ਪੰਜਾਬੀ ਖਬਰਾਂ ਦਾ  ਬਾਜ਼ਾਰ ਸੁਲਝਾਇਆ ਨਹੀਂ   ਹੈ ,  ਅਸੀ ਪੰਜਾਬ  ਦੇ  ਖੇਤਰੀ ਖਬਰਾਂ ਨੂੰ ਵਿਵਸਥਿਤ ਕਰਕੇ ਪੰਜਾਬੀ ਨਿਊਜ਼ ਜਗਤ ਵਿੱਚ ਕ੍ਰਾਂਤੀ ਲਵਾਂਗੇ ।  ਅਸੀ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਪਰਸੰਗ ਦਾ ਅਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵਪੂਰਣ ਖੇਤਰੀ ਸਾਮਗਰੀ ਨੂੰ ਪ੍ਰਸਾਰਿਤ ਕਰਣ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਬਧ ਹਾਂ ,  ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਸਾਨੂੰ ਪੂਰੇ ਸੰਸਾਰ ਵਿੱਚ ਬਸੇ ਪੰਜਾਬੀ ਡਾਇਸਪੋਰਾ ਤੱਕ  ਪੁੱਜਣ  ਦੀ   ਪਹਿਲ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ  ।  ਚੈਨਲ ਆਪਣੇ ਕਈ ਸਾਰੇ ਖੇਤਰਾਂ  ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬੀਅਤ  ਦੀ ਸੱਚੀ ਭਾਵਨਾ  ਦਾ ਨੁਮਾਇਸ਼ ਕਰੇਗਾ। 

ਆਈਟੀਵੀ ਨੈੱਟਵਰਕ ਭਾਰਤ ਦੀ ਸਭਤੋਂ ਤੇਜੀ ਵਲੋਂ ਵੱਧ ਰਹੇ  ਖਬਰਾਂ ਦਾ  ਨੈੱਟਵਰਕ ਹੈ ਤਿੰਨ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸਮਾਚਾਰ ਚੈਨਲਾਂ ,  ਚਾਰ ਖੇਤਰੀ ਸਮਾਚਾਰ ਚੈਨਲਾਂ ,  ਦੋ ਅਖਬਾਰਾਂ ਅਤੇ ਵੱਖਰਾ ਡਿਜਿਟਲ ਪਲੇਟਫਾਰੰਸ   ਦੇ ਨਾਲ ਆਪਣੀ ਮਜਬੂਤ ਹਾਜਰੀ ਦਰਜ ਕਰਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।  ਇੰਡਿਆ ਨਿਊਜ਼  ਨੈੱਟਵਰਕ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਹਿੰਦੀ ਸਮਾਚਾਰ ਚੈਨਲ ਸਭਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਪ੍ਰਤੀਸਪਰਧੀ ਸ਼ੈਲੀ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਲੀਡਰ   ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਉੱਭਰਿਆ ਹੈ ,  ਜੋ ਕਿ ਹਿੰਦੀ ਸਮਾਚਾਰ ਦਰਸ਼ਕਾਂ ਦਾ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਜਿੱਤਣ ਵਿੱਚ ਲਗਾ  ਹੈ ।  ਨਿਊਜਏਕਸ ,  ਨੇਸ਼ਨਲ ਇੰਗਲਿਸ਼ ਨਿਊਜ ਚੈਨਲ ਦਾ ਨੈੱਟਵਰਕ ,  ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਸਮਾਚਾਰ ਸ਼ੈਲੀ ਵਿੱਚ ਆਪਣੇ ਕੁਰਕੁਰਾ ਪ੍ਰਾਰੂਪ ,  ਪ੍ਰਤੱਖ ਰਿਪੋਰਟ ,  ਚੁਣੇ  ਗਏ ਬਹਿਸ ਦੇ  ਵਿਸ਼ਿਆਂ  ,  ਫੈਸ਼ਨੇਬਲ ਹੈਸ਼ ਟੈਗ ਅਤੇ ਕਹਾਣੀਆਂ  ਦੇ ਆਕਰਸ਼ਕ ਮਿਸ਼ਰਣ   ਦੇ ਨਾਲ ਇੱਕ ਟ੍ਰੇਂਡ  ਸੇਟਰ ਰਿਹਾ ਹੈ ।  ਨਿਊਜਏਕਸ ਏਚਡੀ ਭਾਰਤ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਏਚਡੀ ਸਮਾਚਾਰ ਚੈਨਲ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਵਾਣਿਜਿਕ  ਸਮਾਚਾਰ ਚੈਨਲ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਭਾਰਤ  ਦੇ ਮਲਟੀਟਾਸਕਿੰਗ ਹਾਈ ਪ੍ਰੋਫਾਇਲ ਸ਼ਹਿਰੀ ਦਰਸ਼ਕਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਸਕਰੀਨ ਉੱਤੇ ਇੱਕ ਮਲਟੀਸਕਰੀਨ ਅਨੁਭਵ ਦੇਣ ਲਈ ਬਣਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ।

ਨਿਊਜਏਕਸ ਉੱਤੇ ਏਚਡੀ ਦਰਸ਼ਕਾਂ ਨੂੰ ਨਾਨ ਸਟਾਪ  ਗੈਰ ਵਾਣਿਜਿਕ –  ਨਿਊਜ ਸਾਮਗਰੀ ਦੇਖਣ ਲਈ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ,  ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਟਵਿਟਰ ,  ਫੇਸਬੁਕ ,  ਯੂਟਿਊਬ ,  ਪਿੰਟਰੇਸਟ  ,  ਇੰਸਟਾਗਰਾਮ  ਜਿਵੇਂ ਸੋਸ਼ਲ ਮੀਡਿਆ ਉੱਤੇ ਕੀ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ,  ਜਦੋਂ ਕਿ ਮੌਸਮ ,  ਸਟਾਕ ਇੰਡੇਕਸ ਆਦਿ ਵਰਗੀ ਇਲਾਵਾ ਫੀਡਸ ਉੱਤੇ ਸੀਮਲੇਸ ਅਨੁਭਵ ਇੱਕ ਸਕਰੀਨ ਸਮਾਂ ਦੀ ਥੋੜ੍ਹੀ ਸੀ ਮਿਆਦ ਵਿੱਚ ,  ਇੰਡਿਆ ਨਿਊਜ਼   ਯੂਪੀ ਅਤੇ ਉਤਰਾਖੰਡ ,  ਇੰਡਿਆ ਨਿਊਜ਼  ਰਾਜਸਥਾਨ ,  ਇੰਡਿਆ ਨਿਊਜ਼  ਮੱਧ  ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਅਤੇ ਛੱਤੀਸਗੜ ਅਤੇ ਇੰਡਿਆ ਨਿਊਜ਼  ਹਰਿਆਣਾ ਨੇ ਇਸ ਹਿੰਦੀ ਭਾਸ਼ੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਚੈਨਲ  ਦੇ ਪ੍ਰਭੁਤਵ ਨੂੰ ਅਤੇ ਮਜਬੂਤ ਕੀਤਾ ਹੈ ।

ਦ ਸੰਡੇ ਗਾਰਡਿਅਨ  ,  ਨੈੱਟਵਰਕ ਦੁਆਰਾ  ਐਤਵਾਰ ਅਖ਼ਬਾਰ ਹੈ ਜੋ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਸੂਝਵਾਨ ਪਾਠਕਾਂ ਦੁਆਰਾ ਆਪਣੀ ਆਕਰਸ਼ਕ ਸਾਮਗਰੀ ਅਤੇ ਅਭਿਨਵ ਪ੍ਰਾਰੂਪ ਪੇਸ਼  ਕਰਦਾ ਹੈ। ਆਜ ਸਮਾਜ ਗਰੁੱਪ ਦਾ ਦਿੱਲੀ ਕੈਪੀਟਲ ਰੀਜਨ ਅਤੇ ਹਰਿਆਣਾ ਵਿਚ ਤੁਹਾਨੂੰ ਖ਼ਬਰਾਂ ਨਾਲ ਰੂਬਰੂ ਰੱਖਦਾ ਹੈ।

प्रेस रिलीज

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ऐ India न्यूज़ वालों! reality test करना है तो ज़रा सैदपुर से जखनिया तक जाओ न…

Ajit Singh : घनघोर चूतियापा दिखाया जा रहा है India News पे। आगरा लखनऊ express way पे पहले water test दिखाया गया अब सब्जी टेस्ट दिखाया जा रहा है। बता रहे हैं कि नाश्ता दिल्ली में और लंच लखनऊ में। इतनी चिकनी सड़क है कि dashboard पे रखी प्याज तक नहीं हिलती। 5 साल मायावती और 5 साल अखिलेश यादव….. और उपलब्धि के नाम पे UP में दो express way?

ऐ India न्यूज़ वालों…. reality test करना है तो ज़रा मेरे जिले गाजीपुर में स्थित सैदपुर तहसील से जखनिया ब्लाक तक जाओ न। बमुश्किल 30 km की दूरी है। अपनी गाड़ी से 2 घंटे में जा के दिखा दो… या किसी भी state highway पे 100-120 छोडो तुम 40 KMPH पे गाड़ी चला के दिखा दो।

मुझे 2014 से पहले का बनारस गाजीपुर NH भी याद है। रूह कांप जाती थी उस सड़क पे चलने में। वो तो भला हो मोदी जी का और गाजीपुर के सांसद मनोज सिन्हा जी का जो उन्होंने सबसे पहले ठीक करवाया और अब गडकरी जी उसे 4 lane बनवा रहे हैं। reality test करना है तो मेरे गाँव में आ के बिजली का करो न… देखो कितने घंटे आती है… 4 घंटे या 6 घंटे। voltage भी check करो। ये भी देखो कि जो 6 घंटे आई उसमे कितनी बार कटी।

reality test करना है तो लखनऊ में 138 करोड़ रु से बने cycle track का करो न… उसको दिखाओ न TV पे.. लखनऊ तो अखिलेश यादव की राजधानी है… उसकी साफ़ सफाई दिखाओ न? वहाँ बलरामपुर अस्पताल और दीवानी कचहरी के ठीक सामने कूड़ेदान दिखाओ न? सरकारी स्कूल की बेवस्था दिखाओ… UP के सरकारी अस्पताल दिखाइये। 10 बरस में 500 Km का एक express way? यही है विकास की तस्वीर?

लेखक अजित सिंह यूपी के गाजीपुर जिले के निवासी हैं और पंजाब में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं.

अजित सिंह का लिखा ये भी पढ़ सकते हैं :

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इंडिया न्यूज़ के एडिटर इन चीफ (निवर्तमान!) दीपक चौरसिया के ‘न्यूज़सेंस’ को देश को जानना चाहिए

जेएनयू की ख़बर के साथ इंडिया न्‍यूज़ में शीर्ष स्‍तर पर क्या और कैसे खिलवाड़ किया गया… 17 फरवरी की रात इंडिया न्यूज में क्‍या हुआ था… इसके बारे में खुलकर विस्तार से इंडिया न्‍यूज़ में वरिष्‍ठ पद पर काम कर चुके प्रतिभाशाली पत्रकार अमित कुमार ने अपने फेसबुक वॉल पर लिख कर बताया है जो इस प्रकार है…

Amit Kumar

इंडिया न्यूज़ के एडिटर इन चीफ (निवर्तमान!) दीपक चौरसिया के ‘न्यूज़सेंस’ को देश को जानना चाहिए, क्योंकि उनके करोड़ों प्रशंसक और लाखों आलोचक हैं, इसलिए ये आंखोंदेखी उन सबके लिए है जिनके लिए आज भी दीपक चौरसिया की बड़ी अहमियत हैं, 500 और 1000 के पुराने नोट की तरह जो अभी आउटडेटेड नहीं हुए हैं। परदे के पीछे के सच की पहली कड़ी आपके सामने है…

तारीख – 17 फरवरी 2016…रात करीब 8 बजकर 22 मिनट।

इंडिया न्यूज़ पर जेएनयू और कन्हैया विवाद पर टुनाइट विद दीपक चौरसिया में बहस हो रही थी। पहला ब्रेक लेने का वक्त हो चला था तभी दीपक चौरसिया ने सबको चौंका दिया। उन्होंने ब्रेक से लौटने पर एक ऐसा वीडियो दिखाने की बात कही, जिसमें कन्हैया देशविरोधी नारेबाजी करता नजर आ रहा है।

एडिटर इन चीफ के इस एलान पर आउटपुट डेस्क पर मौजूद लोग हैरान रह गए। दरअसल तब तक ऐसा कोई वीडियो डेस्क के किसी सदस्य की जानकारी में नहीं था जिसमें कन्हैया खुद देशविरोधी नारेबाजी लगाता दिख रहा हो। इसलिए चौंकना लाजिमी था।

अगर वाकई ऐसा वीडियो होता तो ये बहुत बड़ी खबर थी। न्यूज़रूम में मौजूद लोगों ने एक-दूसरे की आंखों में देखा… एक दूसरे से पूछा – ऐसा कुछ है क्या?

मैंने टुनाइट विद दीपक चौरसिया का इंट्रो पैकेज लिखने वाले अपने मित्र प्रोड्यूसर से पूछा- आखिर ऐसा कौन सा वीडियो आया है? उन्होंने कहा- मुझे कुछ नहीं पता दीपकजी ने ये बात क्यों कही? ये वही जानें।

अब फिर चौंकने की बारी थी।

उस वक्त आउटपुट और शिफ्ट की कमान संभाल रहे अजय आज़ाद भौचक्के थे। उन्होंने असाइनमेंट से पूछा- क्या आपकी तरफ से ऐसा कोई वीडियो जारी किया गया है जिसमें कन्हैया खुद देशविरोधी नारेबाजी कर रहा है? जवाब ना में था।

अब सवाल ये था कि ब्रेक के बाद जिस वीडियो को दिखाने की बात दीपकजी कह गए, वो है कहां? किसने दिया, दीपकजी ने उसे कहां देखा? उनसे ये किसने कहा कि इसमें कन्हैया देशविरोधी नारेबाजी करता नजर आ रहा है? वक्त कम था और उलझन बढ़ती जा रही थी। इसी बीच अजय आज़ाद तेजी से पीसीआर पहुंचे।

उन्होंने वहां मौजूद टुनाइट विद दीपक के मुख्य प्रोड्यूसर गिरिजेश मिश्रा से पूछा कि ऐसा कोई वीडियो है क्या? गिरिजेश मिश्रा का जवाब था कि सर ने खुद अनाउंस किया है… जो वीडियो अभी विजुअल के रूप में चल रहा है उसे ही चलाने को कहा है। इसी में वो कंटेट है, इसी पर बहस को आगे बढ़ाना है।

अजयजी ने पूछा- क्या उसमें कन्हैया देशविरोधी नारेबाजी लगाता दिख रहा है? गिरिजेश मिश्रा ने कहा- सर ने खुद ही तय किया है तो सोच समझकर ही किया होगा। अजय आज़ाद निरूत्तर थे। फैसला एडिटर इन चीफ ने खुद किया है तो कोई क्या बोले? लेकिन आशंका कायम थी… वे वहां से मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत के केबिन में पहुंचे। पता नहीं वहां क्या बात हुई… अजय आज़ाद न्यूज़रूम में वापस अपनी सीट पर आ गए।

कुछ मिनट के लिए शांति छा गई। सभी भ्रम में थे कि आखिर दीपक चौरसिया ने इतनी बड़ी बात किस आधार पर कह दी? वो लौटकर ऐसा क्या दिखाने वाले हैं जो उनके सिवाय किसी और को नहीं पता?

तभी टुनाइट विद दीपक चौरसिया का ब्रेक खत्म हुआ। दीपक लौटे… इस बार उनके तेवर पहले से जुदा थे। आवाज़ ऊंची थी, तल्खी बढ़़ी हुई थी, ऐसा लग रहा था जैसे देश के सबसे बड़े गद्दार को उन्होंने रंगे हाथों पकड़ लिया है और अब उसका पर्दाफाश किए बिना दम नहीं लेंगे। पूरे डेस्क की नज़र टीवी स्क्रीन पर थी… एडिटर इन चीफ के कद को देखते हुए भरोसा था कि दीपक चौरसिया के ‘क्रांतिकारी न्यूज़सेंस’ ने कुछ ऐसी खबर पकड़ी है जैसा देश में कोई नहीं कर पाया।

लेकिन ये क्या… यहां तो खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली हालत हो गई।

दरअसल ब्रेक से पहले की बहस के दौरान जो वीडियो डिस्कशन के दौरान विजुअल के रूप में चल रहा था… और जिसका इस्तेमाल इंट्रो पैकेज में भी हुआ था, उसे ही दीपक चौरसिया ने पूरे एंबिएंस के साथ सुनाने को कहा था।

इसमें कन्हैया नारेबाजी करता दिख रहा था, लेकिन आवाज बस इतनी सुनाई दे रही थी कि – ‘हमें चाहिए आज़ादी, हम लेके रहेंगे आज़ादी’। लेकिन दीपक चौरसिया ने दावा किया कि देश में पहली बार हम वो वीडियो दिखा रहे हैं जिसमें कन्हैया देशविरोधी नारेबाजी करता दिख रहा है और उसके साथ उमर खालिद भी खड़ा है।

तस्वीरों में वाकई कन्हैया और उमर खालिद नारेबाजी करते दिख रहे थे लेकिन इसमें कहीं भी देशविरोधी नारेबाजी नहीं थी। उस वीडियो में ऐसा कुछ नहीं था, लेकिन दीपक चौरसिया ने जैसे तय कर लिया था कि आज कन्हैया को गद्दार ठहराकर ही दम लेना है।

कहते हैं एक झूठ को सौ बार दोहराया जाए तो वो सच लगने लगता है। शायद दीपक चौरसिया के दिमाग में यही फॉर्मूला रहा हो। अगर ऐसा नहीं होता तो एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल के एडिटर इन चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहा ये शख्स ऐसी हरकत कतई नहीं करता।

दीपक तथ्य से सत्य की तरफ जाते लेकिन उनका इससे कोई वास्ता नहीं दिख रहा था।

तभी एक खास बात हुई। दीपक जी के साथ डिस्कशन में चैनल के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत भी शामिल हो गए। दीपक चौरसिया अपने अंदाज में चीख-चीखकर कन्हैया और उमर खालिद को देशद्रोही नारेबाजी का आरोपी साबित करने में जुटे थे। वीडियो को इसका पक्का सबूत बता रहे थे।

राणा यशवंत के शब्दों में थोड़ा सा अंतर था। दृष्टिकोण कुछ अलग था। उन्होंने बीच का रास्ता अख्तियार करते हुए कहा कि दोनों का एक साथ मिलकर आजादी के नारे लगाने का मतलब देश का विरोध ही लगता है। इसका संदर्भ इसी तरफ इशारा करता है।

दोनों की सोच में फर्क बहुत महीन था और इस शोरगुल में दर्शकों के लिए इसे समझना नामुमकिन था।

अब तक 8 बजकर 50 मिनट का वक्त हो चला था। अमूमन इसके आसपास टुनाइट विद दीपक चौरसिया को खत्म करने का वक्त होता है, लेकिन दीपक ने डिस्कशन को आगे बढ़ाने का एलान किया।

मैंने इस बीच अजय आज़ाद से कई बार कहा कि बॉस गलत रास्ते पर हैं। उन्हें रोकिए। ये सही नहीं। आखिर किसी पर भी देशविरोध से बड़ा इल्ज़ाम क्या हो सकता है? और ये आरोप बिना सबूत के लगाए जा रहे हैं, वो भी एक जिम्मेदार चैनल ऐसा कर रहा है, राष्ट्रीय चैनल ऐसा कर रहा है, खुद एडिटर इन चीफ फ्लोर पर मौजूद हैं और उनके जरिए ये आधारहीन बात दर्शकों तक पहुंच रही है।

मैंने बार-बार कहा कि जिस वीडियो के आधार पर ये कहा जा रहा है उसमें ऐसा कुछ सुनाई नहीं दे रहा। रोकिए प्लीज। अजय आज़ाद ने इसके बाद कुछ एसएमएस किया… ह्वाट्स एप किया। शायद अपनी बात दीपकजी तक पहुंचाई।

अब सामने जो कुछ हो रहा था उसे रोकने में हम जैसे लोग लाचार हो चुके थे। किसी चैनल का एडिटर इन चीफ ही जब अपुष्ट तथ्यों के आधार पर ऐसी बातें कर रहा हो तो क्या किया जा सकता था?

अब रात दस बजने में कुछ ही वक्त बचा था… मन बेहद क्षुब्ध था… बावजूद इसके मैंने अपने शो ‘अंदर की बात’ की तैयारी पूरी कर ली थी। मैने अजयजी से पूछा – क्या दीपकजी ‘अंदर की बात’ को एंकर करेंगे? उन्होंने थोड़ी देर में बताया- नहीं, यही शो आगे बढ़ेगा। दीपकजी का फैसला है।

इशारा साफ था कि एडिटर इन चीफ ने ये तय कर लिया था कि मैं जो कर रहा हूं… सही कर रहा हूं।

ये शो रात करीब 10 बजकर 20 मिनट तक चला और इस दौरान दीपक चौरसिया बार-बार दोहराते रहे कि हमने देश को आज वो सच दिखाया है जो अब तक किसी ने नहीं दिखाया था। इस बीच दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी का फोनो भी लिया गया जिसमें उसने कहा कि अगर वाकई इस वीडियो में कन्हैया और उमर खालिद खुलकर देशविरोधी नारे लगा रहे हैं तो ये वीडियो हमें दीजिए।

लेकिन सच तो कुछ और था। दीपक चौरसिया का देश के लाखों दर्शकों के सामने किया गया दावा, दावा नहीं छलावा था।

सच तो ये था कि इंडिया न्यू़ज़ 14 फरवरी 2013 को अपनी लॉंचिंग के बाद के 3 सालों में तब तक ऐसी आधारहीन, तथ्यहीन और चरित्रहीन पत्रकारिता पर कभी नहीं उतरा था जैसी पत्रकारिता उसने 17 फरवरी 2016 की रात 8-30 से 10-20 के बीच की। और दुर्भाग्य की बात ये कि ऐसा किसी और ने नहीं, चैनल के एडिटर इन चीफ ने किया।

डेस्क पर मौजूद इंटर्न और ट्रेनी पत्रकार तक कह रहे थे कि ये सही नहीं है… दीपकजी जो कह रहे हैं वैसा वीडियो में कुछ दिख नहीं रहा, सुनाई नहीं दे रहा। 20 से 25 साल के इन बच्चों को भी समझ में आ रहा था कि ये पत्रकारिता नहीं है। लेकिन पतवार थामने वाला मांझी ही जब नाव को मझधार में ले जाने पर आमादा हो, तो कोई कहकर भी क्या कर लेगा?

शो खत्म हो चुका था। जैसे ही दीपक चौरसिया न्यूजरूम में पहुंचे, कुछ सहयोगियों ने उनकी तारीफों के पुल बांध दिए। इसी बीच मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत मुझे सामने दिखे। मेरे उनसे स्नेह और अधिकार के संबंध रहे हैं, इसलिए मैंने आते ही कहा- सर प्लीज जरा यहां बैठिए। उन्होंने कहा- बोलो बेटा! मैंने कहा- ये क्या चला सर…?

राणा यशवंत ने कहा- ‘बताओ ऐसा क्या हुआ’ ?

मैंने कहा- सर, हमने जो वीडियो दिखाया और उसे आधार बनाकर दो घंटे की बहस के दौरान जो भी बातें कही गईंं, क्या उसका कोई मेल है? क्या कन्हैया कहीं भी देशविरोधी नारे लगाता दिख रहा है?

राणाजी ने कहा- नहीं, इसका संदर्भ समझो। देखो, कन्हैया पहली बार इस वीडियो में उमर खालिद के साथ नारेबाजी करता दिख रहा है, वही उमर खालिद जिसने खुलकर कश्मीर की आजादी के नारे लगाए थे। तो इसका मतलब और क्या हो सकता है?

इसी बीच दीपक चौरसिया हम दोनों के पास पहुंचे। राणाजी से पूछा- क्या बात हो रही है? राणाजी ने कहा- अमित कह रहा है कि जो हमने दिखाया वो पूरी तरह सही नहीं था।

दीपकजी थोड़े हैरान लेकिन संयत अंदाज में मेरी तरफ मुड़े, उन्होंने कहा- बताओ गलत क्या था? मैंने कहा कि वीडियो में कन्हैया कहीं भी देशविरोधी नारे लगाता नहीं दिख रहा। दीपकजी ने कहा- स्थितियों को देखो… वो उमर खालिद के साथ खड़ा होकर आजादी के नारे लगा रहा है… आखिर वो कौन सी आज़ादी की बात कर रहा था? अब इस पर और चर्चा की गुंजाइश नहीं थी।

लेकिन दीपकजी के इस सवाल का थोड़ी ही देर में जबर्दस्त जवाब मिलने वाला था जिसका तब तक किसी को अंदाजा नहीं था।

तभी न्यूज़रूम के दूसरे हिस्से से आवाज़ आई- सर-सर, एबीपी न्यूज़ देखिए।

दीपक चौरसिया वहां से चंद कदम की दूरी पर थे। वे टीवी के पास पहुंचे और एबीपी न्यूज़ देखने लगे। एबीपी न्यूज़ कन्हैया कुमार और उमर खालिद की नारेबाजी का वही वीडियो दिखा रहा था जिस पर दीपक चौरसिया ने थोड़ी देर पहले देश का सबसे बड़ा खुलासा करने का दावा किया था लेकिन एबीपी का वीडियो बिल्कुल अलग सच बयान कर रहा था। ये आधा-अधूरा, बिना किसी तैयारी और बिना किसी सोच-विचार के दर्शकों के सामने रखा गया वीडियो नहीं था।

इस एक वीडियो ने दीपक चौरसिया की पोल खोल दी। पत्रकारिता के लिए जरूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के उनके दावे की बखिया उधेड़ दी।

दीपक चौरसिया ने ‘हमें चाहिए आज़ादी, हम लेके रहेंगे आज़ादी’ की नारेबाजी वाला हिस्सा दिखाकर दावा किया था कि ये देशविरोधी नारेबाजी है लेकिन एबीपी न्यूज़ कन्हैया की पूरी नारेबाजी को दिखा रहा था जिसमें वो ‘हमें चाहिए आज़ादी, जातिवाद से आज़ादी, सामंतवाद से आज़ादी, पूंजीवाद से आज़ादी’ जैसे नारे लगा रहा था।

तब रात 10 बजकर 35 मिनट हो रहे थे। अब दीपक चौरसिया के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं। काटो तो खून नहीं। नेशनल न्यूज़ चैनल का ये एडिटर इन चीफ जैसे रोने को था… गला भर्राया हुआ था, आंखों में आंसू थे। इसलिए नहीं कि गलती पर पछतावा था, इसलिए क्योंकि साहब रंगेहाथ पकड़े गए थे। एबीपी न्यूज़ अपने इस पूर्व पत्रकार की कलई खोलने पर उतारू था… तीन साल में 100 से भी ज्यादा लोगों की टीम ने दिन रात की मेहनत और ईमानदारी से जो साख बनाई थी, खुद एडिटर इऩ चीफ ने एक झटके में उसकी मिट्टी पलीद कर दी थी।

एबीपी न्यूज़ दीपक चौरसिया का बिना नाम लिए उनके हर शब्द को झूठा साबित कर रहा था, तस्वीरें दिखा रहा था, समझा रहा था कि एक नेशनल न्यूज़ चैनल आपको गलत खबर दिखा रहा है, झूठी बातें बता रहा है। गुमराह कर रहा है, सच देखना है तो यहां देखिए। इंडिया न्यूज़ के लिए ये चीरहरण से कम शर्मनाक बात नहीं थी। बेचैन दीपक कभी इधर जाते, कभी उधर, तभी उन्होंने बड़ा आदेश दिया- आदेश था कि ‘टुनाइट विद दीपक’ की आज की बहस को यूट्यूब से हटा दिया जाए।

कहते हैं सांच को आंच नहीं होती। अगर वाकई दीपकजी ने सही किया था तो सवाल ये है कि यूट्यूब पर डाले गए पूरे शो को हटा क्यों लिया गया? आखिर किस बात का डर था? जिस आधे-अधूरे वीडियो के दम पर दीपक ने दो घंटे तक बहस की, अब उन्होंने अपने करीबियों को उस शख्स की तलाश करने को कहा जिसने इस वीडियो को टुनाइट विद दीपक चौरसिया के इंट्रो पैकेज में इस्तेमाल किया था और जिसे देखकर उन्हें इतनी बड़ी बहस करने का महान आइडिया आया था।

इसी बीच चैनल के मालिक कार्तिकेय शर्मा का मैसेज आया। संदेश शायद सवाल की शक्ल में था- ‘ये क्या हो रहा है?

अगली कड़ी में आपको बताऊंगा कि कार्तिकेय शर्मा के सवाल का जवाब देने में दीपक चौरसिया के पसीने क्यों छूटने लगे। अपने गिरेबान बचाने के लिए उन्होंने बलि के बकरे की तलाश में क्या-क्या किया और इसमें आखिरकार कैसे नाकाम रहे?

उसी दिन रात 11 बजे ‘गर्दन बचानेवाले वीडियो का सच’ नाम से एक शो किया गया। इसका मकसद एबीपी न्यूज की तरफ से लगाए गए आरोपों पर सफाई देना था, लेकिन इस शो की दीपक ने खुद एंकरिंग क्यों नहीं की?

अगली कड़ी का इंतज़ार करें…

पत्रकार अमित कुमार की एफबी वॉल से.

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‘इंडिया न्यूज’ चैनल में दीपक चौरसिया के अधिकारों पर कई तरह की पाबंदी

एक बड़ी सूचना ‘इंडिया न्यूज’ चैनल से आ रही है. सूत्रों का कहना है कि एडिटर इन चीफ दीपक चौरसिया के अधिकारों पर प्रबंधन ने भरपूर कैंची चला दी है. बताया जा रहा है कि दीपक चौरसिया अब न किसी को भर्ती कर सकेंगे और न ही किसी को चैनल से निकाल सकेंगे. इस बाबत प्रबंधन की तरफ से कुछ मेल जारी कर दिए गए हैं. सूत्रों का कहना है कि पहले अपने मित्र संजय सूद, फिर निधि कौशिक को चैनल से निकाले जाने के बाद दीपक चौरसिया कोप भवन में चले गए हैं.

दीपक कई दिनों से आफिस नहीं जा रहे हैं. उनकी गैर मौजूदगी के बावजूद चैनल काफी अच्छा परफार्म कर रहा है और टीआरपी में लगातार आगे बढ़ रहा है. ऐसे में प्रबंधन की तरफ से अंदर ही अंदर कुछ बड़े निर्णय लिए जाने की चर्चा है जिसके तहत सबसे पहले दीपक चौरसिया के अधिकारों में कटौती कर दी गई है. बताया जा रहा है कि इंडिया न्यूज के मालिक कार्तिक शर्मा इन दिनों दीपक चौरसिया का फोन भी नहीं उठा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में इंडिया न्यूज में कई उठापटक देखने को मिल सकते हैं.

इन्हें भी पढ़ सकते हैं…

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निधि कौशिक ने इंडिया न्यूज की एचआर हेड शिखा को क्या लिखा पत्र में, आप भी पढ़ें

Dear Shikha ji,

Greetings of Vijayadashmi

I would like to draw your attention to our meeting last evening
that has left me completely shocked. I am still unable to understand
the reason behind the harsh action against me. I am shocked that this
action was taken without even taking my version of the facts.

I would like to put on record a few things not so much as an
explaination but simply to put my stand on record to questions that
were raised or rather hinted at

1) It was alleged I deliberately confused two new incumbent in the
network—- I was only asked by the Editor in chief to contact Rohit
Sardana …. otherwise I donot know the gentleman…..in fact when I
called him mr sardana had said he wanted to talk to the Boss directly.
Also I donot know RItul Joshi personally and have not had any such
interaction that can be considered inapproriate for the organisation

I would be grateful if there is any evidence to substantiate your
allegation that has put a question mark on my integrity.

2) I am shocked by your statement last evening where you questioned
my work especially since just a year ago while giving me the raise
papers you have hugged me in front of Ranaji and Deepakji and had
said that that I was a valuable asset, was that just posturing !!

3) You raised a point that i dont complete my work hours–I think
there is some confusion regarding this as this is the first time i
have heard such an allegation for me, I was always considered someone
who is always available whenever there is work. I even carry the work
home infact — It was your team member Nandan who just few days back
acknowledged  my late working hours (Evidence can be sought from
CCTV).

I am forced to believe these allegations are being brought
up (manufactured) against me as I have in the last few months bought to
light  issues of women (Reporter/Lady Anchor’s) being harassed in the
network . Shikhaji being a lady you should respect the honor & dignity
of a women ….and not make false allegations against me.

I am pained that my integrity is being doubted with no evidence nor
any paper to support.

and still if you need more clarifications please feel free to call
me I am a professional and would be grateful if things are handled
professionally without any bias.

Regards

Nidhi Kaushik


मूल खबर :

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दीपक चौरसिया की राइट हैंड निधि कौशिक हुईं टर्मिनेट!

एक खबर चर्चा में है कि इंडिया न्यूज के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया की राइट हैंड निधि कौशिक को टरमिनेट कर दिया गया है.. यह भी कहा जा रहा है कि निधि कौशिक को टरमिनेट कर मैनेजमेंट ने दीपक चौरसिया को संदेश दे दिया कि वो जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं….. सूत्रों के मुताबिक निधि कौशिक के जिम्मे कोई काम नहीं था…. आफिस तभी आती थीं जब दीपक चौरसिया आते थे….

सूत्रों का कहना है कि उनके काम न करने को लेकर एचआर हेड शिखा रस्तोगी ने सवाल उठाए तो निधि कौशिक बदतमीजी पर उतर आई…. इस पर एचआर हेड ने उनसे इस्तीफा मांग लिया…. तब निधि ने इस्तीफा देने से मना कर दिया…. इसके बाद एचआर हेड ने निधि को टरमिनेट कर 5 मिनट में फ्लोर छोड़ देने को कहा…. इसके बाद एडमिन ने भी निधि को फ्लोर खाली करने को कह दिया…. निधि चली गईं….

आगे की कहानी….

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टॉप तीन चैनलों में शुमार इंडिया न्यूज़ ने RedInk अवॉर्ड के तीन categories पर भी क़ब्ज़ा जमाया

Rana Yashwant : तीन साल के फ़ासले में इंडिया न्यूज़ ने देश के टॉप तीन चैनल में ना सिर्फ़ अपनी मज़बूत जगह बनायी है बल्कि पत्रकारिता के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान RedInk अवॉर्ड पर तीन categories में क़ब्ज़ा कर ये भी जता दिया है देश में इंडिया न्यूज़ ने पत्रकारिता का मान बहुत बढ़ाया है. बुंदेलखंड के किसानों पर अर्धसत्य के एपिसोड को मानवाधिकार के लिए बेहतरीन शो का पुरस्कार मिला.

देश में पीने के ज़हरीले पानी के लिए इंडिया न्यूज़ के कार्क्रम ऑपरेशन कालापानी को health and hygiene category में बेस्ट शो का पुरस्कार मिला. दीपिका पादुकोण के लव स्कैंडल पर बेस्ट entertainment शो का अवॉर्ड भी इंडिया न्यूज़ के हिस्से गया. 9 category में से तीन पर इंडिया न्यूज़ का क़ब्ज़ा. इंडिया न्यूज़ टीम को बहुत बहुत बधाई.

इंडिया न्यूज के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत के फेसबुक वॉल से.


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जेएनयू को बदनाम करने वाले ‘इंडिया न्यूज’ और ‘जी न्यूज’ का गेस्ट बनने से शीबा असलम फ़हमी का इनकार

Sheeba : आज सुबह से इंडिया न्यूज़ और ज़ी न्यूज़ की तरफ से फ़ोन आते रहे पैनल में बैठने के लिए. दोनों किसी मुस्लिम-महिला केंद्रित घटना पर बहस में आमंत्रित कर रहे थे. मैंने विरोध जताते हुए मना कर दिया की जेएनयू को आपने जिस तरह षड्यंत्र कर के बदनाम किया उसके बाद हम आपके चैनल की टीआरपी की ग़ुलामी में सहयोग देने नहीं आएँगे.

ये जेएनयू है जिसने हमें ग़लत के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करना सिखाया, महिला-दलित-कमज़ोर की आज़ादी की क़ीमत बताई, हर बुराई-कूपमंडूकता को रिजेक्ट करने के तर्क दिए. हम जैसों को बनाने में इसी जेएनयू का सीधा योगदान है जिसे घटिया चैनलों ने घेर कर मारने की कोशिश की.

पिछली 4 मार्च को इंडिया न्यूज़ ‘टुनाइट विद दीपक चौरसिया’ में बुला रहा था, ज़ी मीडिया के सहयोगी चॅनेल 24X7 से 5 मार्च को बुलाया गया, लेकिन मैंने गेस्ट कोऑर्डिनेटर को अपना विरोध जता के बोल दिया कि निजी तौर पर आपका बॉयकॉट कर रहे हैं, नहीं आएँगे. जेएनयू के ख़िलाफ़ इस षड्यंत्र से आहात समाज हर स्तर पर विरोध ज़ाहिर करे ये आवश्यक भी है और अपेक्षित भी.

ऐसा कैसे हो सकता है की जेएनयू से सीखकर, जेएनयू-हन्ता की स्वार्थसिद्धि में काम आऊं? जब तक सही को सही ग़लत को ग़लत कहने का नैतिक सहस नहीं दिखाते ये अपराधी चैनेल मेरा ये अदना सा विरोध जारी रहेगा, हालाँकि चैनेल को इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता, लेकिन मुझे तो पड़ता है. हम आपराधिक प्रवृत्ति वाले चैनल्स जी न्यूज, इंडिया न्यूज और टाइम्स नाऊ का दर्शक होने से इनकार करते हैं.

लेखिका शीबा असलम फ़हमी चर्चित नारीवादी और जेएनयू की रिसर्च स्कालर हैं.

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इंडिया न्यूज के फर्जीवाड़े का एबीपी न्यूज ने किया खुलासा

इंडिया न्यूज़ ने बुधवार की रात प्राइम टाइम में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार का एक वीडियो दिखाया जिसमें बताया गया कि वो कश्मीर की आज़ादी का नारा लगा रहा है. इस वीडियो को नया बताते हुए पेश किया गया. थोड़ी देर बाद एबीपी न्यूज़ ने इंडिया न्यूज के फर्जीवाड़े का खंडन करते हुए वही वीडियो साफ़ ऑडियो के साथ प्रसारित किया. एबीपी न्यूज ने बताया कि कुछ चैनल इस वीडियो को गलत ढंग से पेश कर गलत सूचना प्रसारित कर रहे हैं. चैनल ने वीडियो में लगाये गए नारों का ट्रांसक्रिप्शन किया और दिखाया कि कन्हैया कुमार ‘भुखमरी’, ‘मोदी’, ‘संघवाद’ आदि से आज़ादी का नारा लगा रहा है.

इंडिया न्यूज़ ने रात नौ से साढ़े दस के बीच यह वीडियो चलाया तो उसने फोन लाइन पर दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी को लिया. चैनल के इस दावे के बाद कि उसके पास कन्हैया के खिलाफ एक वीडियो है, दिल्ली पुलिस इसे सबूत के रूप में पेश करने के लिए सक्रिय हो गई. थोड़ी ही देर में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का दल इंडिया न्यूज चैनल के दफ्तर पहुंच गया. जब एबीपी न्यूज़ ने इस वीडियो को फर्जी करार दिया तो इंडिया न्यूज के पदाधिकारियों की हालत शर्मसार वाली हो चुकी थी.

दिल्ली पुलिस सबूत जुटाने की जल्दबाजी में इंडिया न्यूज़ पहुंच चुकी थी. पोल खुल जाने के बाद इंडिया न्यूज़ के पास पुलिस को देने के लिए कुछ नहीं था. इंडिया न्यूज का सफ़ेद झूठ पुलिस के सामने ही पकड़ा गया. बाद में चैनल में ऊपर से आदेश जारी हुआ कि अब कन्हैया से जुड़ा कोई भी वीडियो न दिखाया जाए क्योंकि मार्केट में ढेर सारे एडिटेड वीडियो फैलाए जा रहे हैं.

एबीपी न्यूज की वीडियो की वास्तविकता संबंधी खबर देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें :

ABP News Video Reality Story

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‘इंडिया न्यूज राजस्थान’ चैनल बंद, न्यू इयर पर सैकड़ों कर्मियों के लिए बैड न्यूज

विनोद शर्मा और उनके बेटे कार्तिक शर्मा को अपने मीडियाकर्मियों को दुख देने और प्रताड़ित करने में आनंद आता है. शायद कारण वही हो कि मीडिया वालों ने मीडिया ट्रायल के जरिए मनु शर्मा को जेसिका लाल मर्डर केस में सजा दिलवाने में सफलता पाई इसलिए बदला लेने के लिए बाप बेटे ने न्यूज चैनल से लेकर अखबार मैग्जीन सब खोल डाला और हर साल इस मीडिया हाउस से सैकड़ों लोगों को निकालते रखते रहते हैं. ताजी सूचना है कि इंडिया न्यूज राजस्थान चैनल को प्रबंधन ने बंद कर दिया है.

जब सारी दुनिया हैप्पी न्यू इयर बोल रही है, उस वक्त इंडिया न्यूज के मालिकों ने अपने सैकड़ों कर्मियों के लिए न्यू इयर को अनहैप्पी बना डाला. इन सैकड़ों कर्मियों को न तो तीन महीने का एडवांस वेतन दिया गया और न ही उन्हें पहले से सूचित किया गया ताकि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें. आज साल के आखिरी दिन सभी को अचानक सूचित कर दिया गया कि चैनल बंद हो चुका है, आप लोग अपना अपना रास्ता देखें.

भड़ास के पास आए दर्जनों फोन काल्स में सबने रुआंसी आवाज में पीड़ा बताई…. कहीं ऐसा होता है क्या, अचानक चैनल बंद कर दो… पहले बता दिया होता तो कोई व्यवस्था कर लेते हम लोग… न तो एडवांस वेतन दिया और न पहले सूचित किया… ऐसे में नए साल के पहले ही जनवरी महीने में घर चलाना मुश्किल हो जाएगा… ‘नो वन किल्ड जेसिका’ फिल्म की तरह मीडिया वालों के दुख दर्द पर एक फिल्म बननी चाहिए, ‘नो वन फायर्ड जर्नलिस्ट्स’… इस लोकतांत्रिक देश में मीडिया वालों के हक और इज्जत के लिए कोई सिस्टम नहीं है, कोई सुनने वाला नहीं है, कोई आगे आना वाला नहीं है…

मीडिया के मालिक खुद जब नेताओं के गोद में जा बैठे हों तो नेता भला मीडिया मालिकों से क्यों पंगा लेगा, उसे भी अपनी राजनीति की दुकानदरी चलानी है… पतन की इस चरम परिघटना में सबसे ज्यादा नुकसान सरोकारी पत्रकारिता और आम पत्रकारों का हुआ है… यही कारण है कि नेता लोग और अफसर लोग प्रिंट मीडिया वालों के लिए न तो मजीठिया वेज बोर्ड लागू कर करा पा रहे और न इलेक्ट्रानिक वालों के फायर हायर को लेकर सामान्य श्रम कानून के तहत कोई कार्रवाई कर आदेश निर्देश दे पा रहे….

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टीआरपी चौथा हफ्ता : इंडिया न्यूज ने आखिरकार न्यूज नेशन को परास्त कर दिया

चौथे हफ्ते की टीआरपी में एक बड़ा उलटफेर पांचवें और छठें पायदान पर देखने को मिल रहा है. इंडिया न्यूज ने छलांग लगाते हुए न्यूज नेशन चैनल को लुढ़का दिया है और खुद नंबर पांच की पोजीशन पर पहुंच गया है. एनडीटीवी को इस हफ्ते लाभ हुआ है लेकिन आईबीएन7 का पतन जारी है. नंबर एक और नंबर दो पर तैनात न्यूज चैनलों आजतक व इंडिया टीवी के बीच फासला काफी कम रह गया है. यह आजतक के लिए खतरे की घंटी है. टीआरपी के आंकड़े इस प्रकार हैं….

Wk 4, 0600Hrs to 2359Hrs,

TG: CS15+, HSM:

Aaj Tak 16.6 dn 0.2
India TV 16.2 up 0.4
ABP News 15.6 up 1.1
Z News 10.1 up 0.4
India News 9.0 up 0.7
NEWS NATION 8.8 dn 1.5
News 24 7.0 dn 0.6
NDTV India 5.3 up 0.6
IBN 7 5 dn 0.6
TEZ 4 dn 0.7
DD News 1.7 up 0.3
Samay 0.8 same

TG: CS Males 25+ ABC

Aaj Tak 17.5 dn 0.5
India TV 15.4 dn 0.2
ABP News 15.2 up 0.3
Z News 10.7 up 0.5
NEWS NATION 9.2 dn 1.2
India News 8.3 up 0.8
News 24 6.7 same
NDTV India 5.8 up 1.2
IBN 7 5.1 dn 0.1
TEZ 3.5 dn 0.9
DD News 1.6 up 0.2
Samay 0.8 same

इसके पहले वाले हफ्ते की टीआरपी देखें….

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‘इंडिया न्यूज’ और ‘न्यूज एक्स’ के ग्रुप सीईओ आरके अरोड़ा ने इस्तीफा दिया

इंडिया न्यूज और न्यूज एक्स जैसे न्यूज चैनलों को संचालित करने वाली कंपनी आईटीवी (इनफारमेशन टेलीविजन) नेटवर्क के ग्रुप सीईओ आरके अरोड़ा ने अपनी टीम के साथ इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है कि कंपनी के मालिक कार्तिक शर्मा ने आरके अरोड़ा के अधिकारों में कटौती करके उनके कामकाज का जिम्मा नए लाए गए वरिष्ठ लोगों को सौंप दिया. इसी के कारण आरके अरोड़ा ने अपनी दो वर्ष पुरानी पारी खत्म करने का फैसला कर लिया और अपना इस्तीफा प्रबंधन को सौंप दिया.

असल में पिछले दिनों कार्तिक शर्मा ने दिलीप वेंकटरमनी और इनकी पत्नी सैवी वेंकटरमनी को नेटवर्क18 ग्रुप से तोड़कर लाए. इसी ग्रुप से संजय दुआ को ले आए और इन्हें न्यूज एक्स चैनल का सीईओ बना दिया. संजय और दिलीप के आने से आरके अरोड़ा का वर्चस्व खत्म हो गया. आईटीवी में अरोड़ा मूलतः डिस्ट्रीब्यूशन का काम देखते थे. आरके की टीम ने मजबूरी में छोड़ा. चर्चा है कि आरके अरोड़ा अपनी टीम के साथ या तो नेटवर्क18 में जा रहे हैं या फिर जी न्यूज में जाएंगे. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अच्छी टीआरपी आने के बावजूद आरके अरोड़ा की टीम न्यूज चैनलों के लिए अच्छा बिजनेस नहीं ला पा रही थी. कार्तिक शर्मा का पूरा जोर अब ज्यादा से ज्यादा बिजनेस लाने वाली टीम को लाने व आगे बढ़ाने की है ताकि चैनल संचालन में हो रहे घाटे को खत्म किया जा सके और न्यूज दिखाने का धंधा फायदे का सौदा बन सके.

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इंडिया न्यूज, न्यूज नेशन यूपी यूटी, न्यूज24, सहारा समय समेत छह चैनल डीडी डीटीएच के फ्री डिश से डिलीट

एक बड़ी खबर दूरदर्शन की मुफ्त डीटीएच (डायरेक्ट टू होम) फ्री डिश से है. यहां से छह चैनलों को डिलीट कर दिया गया है जिनमें कई न्यूज चैनल भी शामिल हैं. हटाए गए न्यूज चैनलों के नाम न्यूज24, इंडिया न्यूज, सहारा समय, न्यूज नेशन यूपी यूटी हैं. इनके अलावा 9एक्स, जी स्माइल, ज्ञानदर्शन एक और ज्ञानदर्शन दो को भी हटा दिया गया है. इन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि इन्होंने अपना एनुअल कांट्रैक्ट रीन्यू नहीं कराया.

इन छह चैनलों की जगह छह नए चैनलों ने कांट्रैक्ट किया है जिसके बाद इन छह को फ्री डिश में शामिल किया गया है. इनमें कई न्यूज चैनल भी हैं. अब दूरदर्शन के फ्री डिश पर एबीपी न्यूज, इंडिया टीवी और फोकस न्यूज जैसे न्यूज चैनल भी दिखा करेंगे.  साथ ही सिनेमा टीवी, 9एक्सएम और महामूवीज को भी शामिल किया गया है. इन छह स्पेस के लिए नीलामी 28 अक्टूबर को कराई गई थी और नया बदलाव एक नवंबर से लागू हो गया है. अन्य उपलब्ध स्पेस को भरने के लिए अगली नीलामी 12 नवंबर को है. इसके लिए रिजर्व प्राइस 3.70 करोड़ रुपए है और नीलामी में शामिल होने की राशि डेढ़ करोड़ रुपए है.

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विनोद शर्मा मय परिवार चुनाव हार चुके हैं, इसलिए दीपक तले अंधेरा छा रहा है…

Abhishek Srivastava : दिवाली पर अखबारों और चैनलों में पत्रकारों को मिलने वाली बख्‍शीश को लेकर कई दिलचस्‍प किस्‍से बनते हैं। मसलन, इस बार इंडिया न्‍यूज़ में जबरदस्‍त आक्रोश देखा जा रहा है। विनोद शर्मा मय परिवार चुनाव हार चुके हैं, लिहाजा 2 नवंबर बीतने के बाद भी यहां अब तक किसी को वेतन नहीं मिला है। दीपक तले अंधेरा छा रहा है और विनोद शर्मा का चुनाव चिन्ह ‘सिलेंडर’ ब्‍लास्‍ट करने वाला है क्‍योंकि दिवाली पर जो कथित इलेक्ट्रिक केतली सबको बख्‍शीश में दी गई है, उसमें पानी के अलावा कुछ नहीं बनाया जा सकता।

दरअसल, इंडिया न्‍यूज़ की केतली पर स्‍पष्‍ट दिशानिर्देश लिखे हैं कि इसमें चाय समेत कोई भी खाद्य या पेय पदार्थ तैयार नहीं किया जा सकता। सुनने में आ रहा है कि छोटे कद के कुछ प्रशिक्षु पत्रकार सवेरे दफ्तर जाने से पहले जल्‍दी में इससे गीज़र का काम ले रहे हैं और केतली भर-भर के नहा रहे हैं।

युवा पत्रकार और एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

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आसाराम मामले में हाई कोर्ट ने दीपक चौरसिया की ज़मानत अर्जी खारिज की

index

एक आपराधिक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंडिया न्यूज टीवी चैनल के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी है। चौरसिया व अन्य पर आसाराम बापू के विषय में आपत्तिजनक कार्यक्रम प्रसारित करने का आरोप है।

इस संबंध में चौरसिया तथा अन्य के विरुद्ध आईपीसी की धारा 469, 471, 120B, आईटी एक्ट की धारा 67B और पाक्सो एक्ट की धारा 13C के अंतर्गत मुक़दमा दर्ज किया गया था। चौरसिया पर आरोप है कि उन्होने आसाराम बापू से संबंधित कुछ दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की और उन्हे अपने चैनल के शो ‘सलाखें’ में दिखाया।

चौरसिया तथा अन्य पर आसाराम से संबंधित कुछ आपत्तिजनक क्लिपिंग भी दिखाने का आरोप है जो कि आईपीसी के साथ ही आईटी एक्ट और पाक्सो के अंतर्गत अपराध है।

हाई कोर्ट ने ज़मानत अर्जी खारिज करते हुए पुलिस को मामले की जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। पुलिस चौरसिया को इस मामले में गिरफ्तार भी कर सकती है।

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