बनारस के फोटोग्राफर विजय सिंह की हालत खराब, दैनिक जागरण भी भूल गया

वाराणसी : दैनिक जागरण के लिए गोली खाने वाले प्रेस फोटोग्राफर विजय सिंह इन दिनों दो जून की रोटी और दवा के लिए तड़प रहे हैं… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में विगत तीन दशकों तक विजय सिंह को “सफेद बाल वाले फोटोग्राफर” के नाम से जाना जाता था… वे दैनिक जागरण, वाराणसी के प्रेस फोटोग्राफर रहे. Continue reading

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ग्रामीणों द्वारा स्टिंग किए जाने के मामले में फोटोग्राफर जीतू सागर का पक्ष सुनिए-जानिए

गजरौला में दैनिक जागरण के फोटोग्राफर जीतू सागर के संबंध में एक खबर भड़ास पर छपी जिसमें एक वीडियो में उन्हें ग्रामीणों से पैसे लेते हुए देखा गया. खबर में उल्लेख है कि ये वीडियो चुपचाप ग्रामीणों द्वारा बनाया गया. Continue reading

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दैनिक जागरण के फोटोग्राफर का पैसा लेते हो गया स्टिंग, देखें वीडियो

सबकी तस्वीरें खींचने वाले और स्टिंग करने वाले फोटोग्राफर का ही स्टिंग हो गया है. ये फोटोग्राफर दैनिक जागरण में कार्यरत है. नाम है जीतू सागर. दैनिक जागरण, गजरौला का छायाकार जीतू सागर बिजली बिल ठीक कराने के नाम पर रिश्वत लेते हुआ वीडियो में कैद. आरोप है कि बिजली बिल का भुगतान कराने के नाम पर 24000 रुपये की नगदी वसूली गई. Continue reading

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लाल झंडे वाले कबीराना फोटो जर्नलिस्ट सुनील कुमार दत्ता से एक मुलाकात, देखें वीडियो

कबीर के नाम से चर्चित एसके दत्ता उर्फ सुनील कुमार दत्ता आजमगढ़ की एक जानी-मानी शख्सियत हैं. साइकिल से करियर शुरू करने वाले दत्ता साहब दैनिक जागरण, टाइम्स आफ इंडिया, राष्ट्रीय सहारा से लेकर अमर उजाला तक में काम करते हुए कुछ बरस से मोपेड से चलने लगे हैं. जाहिर है, उनके जीवन में, उनकी नैतिकता में, उनके संस्कार में पैसे महत्वपूर्ण नहीं थे, न हैं. वे जीवन को संपूर्णता के साथ जीते-देखते हैं. Continue reading

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प्रभात खबर, देवघर के छायाकार के साथ दुर्व्यवहार

25 जनवरी की दोपहर को प्रभात खबर देवघर संस्करण के छायाकार सुभाष दास के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की। मारपीट की यह घटना देवघर सदर अस्पताल के पुराने परिसर में घटी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, फोटोग्राफर सुभाष जब पुराने अस्पताल परिसर में कुछ तस्वीर खींच रहे थे, तभी कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद पीड़ित फोटोग्राफर कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ उस मामले की तहरीर लिखाने देवघर नगर थाना पहुंचे।

बताया जा रहा है कि जिस जगह सुभाष के साथ दुर्व्यवहार की घटना घटी, उससे ठीक सौ मीटर की दूरी पर प्रभात खबर के स्थानीय संपादक संजय मिश्रा पुस्तक मेला के एक इवेंट में थे। सुभाष के थाना पहुंचने के समय भी संपादक उसी इवेंट में बने रहे। प्रभात खबर ने अपने फोटोग्राफर के साथ हुई इस घटना की खबर अपने अखबार तक में नहीं छापी। इससे लोगों में तरह-तरह की चर्चा व्याप्त है।

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परिश्रमिक मांगने पर मिली तलवार, दो ‘हिंदुस्तानियों’ के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

मैं हर्ष कुमार उर्फ विक्की, फोटोग्राफर, हाजीपुर वैशाली ऑफिस हिंदुस्तान। मैं पिछले 13 महीने से काम कर रहा हूं। मैं अपने परिश्रमिक काी जब भी मांग करता था तो हाजीपुर ऑफिस हिंदुस्तान के प्रभारी श्री विनायमणि तिवारी बोलते थे कि पैसा लेकर काम करना है तो दूसरे पेपर में चले जाओ, यहाँ फ्री में ही काम करना पड़ेगा। इसके बारे में कई बार पटना ऑफिस में भी हम जाकर वरीय अधिकारी से मिले लेकिन कुछ नहीं हुआ।

इतना ही नहीं, हद तो तब हो गई जब हाजीपुर हिंदुस्तान के प्रभारी श्री विनायमणि तिवारी और सुपर स्ट्रिंगर गोपाल तिवारी दोनों ने मिलकर हमें टॉर्चर करना शुरू कर दिया। विनायमणि ने तो हमें कहा कि प्रतिदिन मेरे लिए खाना होटल से लाओ। कभी तम्बाकू तो कभी दारू हमसे डेली मांगने लगा और खाना भी बनवाने लगा। हम उनकी मांगों की पूर्ति नहीं कर सके।

एक दिन मेरी माँ की तबियत खराब हो गई। डॉक्टर से दिखाने के लिए एक घंटे की छुट्टी मांगने पर मेरे साथ गाली-गलौज किया गया। मुझे हिंदुस्तान से निकाल दिया गया। अपनी गलती पूछने पर मेरे साथ हाजीपुर ऑफिस में ही तलवार से विनयमणि और गोपाल तिवारी ने हमला कर दिया। इससे मैं बुरी तरह से जख्मी हो गया। सदर हॉस्पिटल में इलाज़ के बाद पीएमसीएच रेफर कर दिया गया। इस मामले की एफआईआर टाउन थाने में 267/17 के तहत दर्ज किया गया है। मेरे साथ अगर न्याय नहीं हुआ और मेरा पारिश्रमिक नहीं मिला तो हम सबके सामने आत्महत्या करने पर बाध्य होंगे।

Harsh Kumar
newsharsh2@gmail.com
मोबाइल- 709155455, 9430619964

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पुलिस अधीक्षक खाकी के दागियों को हटाने में लगा, भास्कर का फोटो रिपोर्टर बचाने में जुटा

राजस्थान के सरहदी व संवेदनशील जिले बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक डॉ. गगनदीप सिंगला आमजन में पुलिस की छवि को सुधारने के लिए खाकी पर सवाल उठते ही उस पर कड़ी कार्रवाही कर रहे हैं, लेकिन दैनिक भास्कर का फोटो पत्रकार उनको बचाने के जुगाड़ में लग जाता है. हाल के वाकिये के अनुसार १६ जनवरी को बाड़मेर के एक बड़े व्यापारी के यहाँ शादी में आये मेहमानों के जुआ खेलने की सूचना पर बाड़मेर कोतवाली हेड कांस्टेबल ने अपने साथियों के साथ दबिश देकर ३०-३५ जुआरियों को पकड़ लिया. लेकिन मुक़दमा दर्ज करने की जगह जुआरियों के साथ जब्त राशी जो कि २ लाख से ज्यादा थी, को हड़प लिया और प्रति जुआरी ३ हजार रूपये लेकर छोड़ दिया.

प्रत्यक्षदर्शियों ने इसकी सूचना मीडिया को दी. लेकिन किसी मुख्यधारा के अखबार ने इस खबर को नहीं छापा. सोशल मीडिया में जब यह घटना वायरल हुई व स्थानीय नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक से मिल कर घटना की जानकारी दी तो पुलिस अधीक्षक ने इसकी जाँच आरम्भ कर दी और २ हेड कांस्टेबल व ७ कांस्टेबल को निलम्बित कर दिया.

दैनिक भास्कर के फोटो पत्रकार नरपत रामावत को जब पता चला कि स्थानीय नागरिकों ने इस सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है तो इस मामले को दबाने के लिए फोन करने लगा. स्थानीय नागरिकों ने इस सम्बन्ध में संस्करण के संपादक पवन जोशी को कॉल रिकॉर्ड सौंप कर दलाल फोटो पत्रकार के विरुद्ध कार्यवाही करने का निवेदन किया, लेकिन स्थानीय संपादक ने इसको ठन्डे बस्ते में डाल दिया. साथ ही २ हेड कांस्टेबल व ७ कांस्टेबल के निलंबन की इस बड़ी खबर का फॉलोअप तक नहीं छापा.

दैनिक भास्कर के फोटो पत्रकार नरपत रामावत का आडियो सुनने के लिए नीचे दिए वीडियो पर क्लिक करें >>

पत्रकार सबलसिंह भाटी की रिपोर्ट. संपर्क : 98289669901

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न कोई गिफ्ट लिया और न ही खबर छापने का वादा किया था : नवीन शर्मा

Reply to the complaint of Mr. Ashok Chaudhary,

Dear Sir,

I got an Email from Ashok Chaudhary, who also informed you to take action against me. I didn’t meet with Mr. Ashok Ji even I don’t think that I know him. In the Morning at about 10.30 a. m. Mr. Neelash (I know him) called me for a press conference, he requested me to come for a press conference but I refused as it was not assigned and my camera is not functioning. then he told me AJAO AAJ MIL LETE HAI, BAHUT DIN HO GAY, in good faith I went there at about 1 Pm. I met him outside the room, after 5 min I left, even I didn’t enter in the press conference room.

After 2-3 min. when I was waiting for the lift I called him,  just want to know about the press conference for the knowledge only, he brief me about the conference.  He told me about the press kit with a pen drive and offer lunch, but I didn’t accept, buz I was not covering the event. He told me he will send me the photographs & press release of the event. I told him HAMARE YAHA NAHI JATA, HUMKO UPER JAWAB DENA HOTA HAI. He approached me for publishing this. (How can I assure him that it will publish in our Newspaper, when I know our work is only to cover the event. How can I demand for any fancy gift, Even I also know I was not covering this and I also know I have not any authority to publish any news). PR also know, How can I kill their story?

He is trying to damage my Company and my image.  I never promise to Mr. Neelash for published any release in our newspaper and I never demanded and receive any gift in the past years.

Thanks
Naveen Sharma
Photographer
Millennium Post
naveenmillenniumpost@gmail.com

मूल पोस्ट….

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प्रेस कांफ्रेंस में अच्छे गिफ्ट के लिए धमकाने वाले दो फोटो जर्नलिस्टों नवीन शर्मा और नईम के खिलाफ लिखित शिकायत

Subject : Request for action against Mr.Naveen Sharma, Photographer, Millennium post

Dear Durbar Sir,

Hope you are doing well!

This is regarding a complaint against your Photographer Mr.Naveen Sharma. On Monday, 16th January, there was a press conference of my client at Hotel Le Meridien, New Delhi. I had invited all print media, electronic media and photographer for the same. Photojournalist Mr. Naveen Sharma, Millennium Post newspaper was also present to cover the press conference, press conference was going on and people were coming and going for the press conference. Naveen sharma told me that today my camera isn’t working so can you share few high resolution images of the press conference because  I had to leave early.i said yes I will. I gave a press docket to him and requested him to please stay till lunch but he left the Conference hall. Finally he moved on and said bye to me.

After five minute he called me and asked me to come to Hotel lobby. I went there and asked him , what happened? He replied that aren’t you guys giving any media gift ? I said yes we are giving a Flash Drive of 8GB to each journalist and this is media gift which has been given to us to give to media. He again explained me that Flash Drive is cheap media gift and we photojournalist don’t accept it. If you give me fancy gift I can assure you that your press will be published in Millennium post. Because  HUMKO UPER JAWAB DENA HOTA. Untill unless I shall kill your news. I requested that try to understand the situation, since our client is only giving flash drive to each hence I am not able to give you another gift. Finally, he left for the day and next day ie 17th January there is no news of my client in Millennium Post News paper. is this the tradition in your office? 

Thanks
Ashok Choudhary
choudharyashok2005@gmail.com

xxx

Subject : Request for action against Mr.Naeem , Photographer, Rastriya Sahara

Dear Rajnikant Sir,

Hope you are doing well! This is regarding a complaint against your Photographer Mr.Naeem. On Monday,16th January, there was a press conference of my client at Hotel Le Meridien, New Delhi. I had invited all print media, electronic media and photographer for the same. Photojournalist Mr. Naeem , Rastriya Sahara newspaper was also present to cover the press conference, press conference was going on and people were coming and going for the press conference. Naeem told me that i have to leave earlyto shoot another assignment. I gave a press docket to him and requested him to please stay till lunch but he left the Conference hall. Finally he moved on and said bye to me.

After five minute he called me and asked me to come to Hotel lobby. I went there and asked him , what happened? He replied that aren’t you guys giving any media gift ? I said yes we are giving a Flash Drive of 8GB to each journalist and this is media gift which has been given to us to give to media. He again explained me that Flash Drive is cheap media gift and we photojournalist don’t accept it. If you give me fancy gift I can assure you that your press will be published in Rastriya Sahara. Because HUMKO UPER JAWAB DENA HOTA. Untill unless I shall kill your news. I requested that try to understand the situation, since our client is only giving flash drive to each hence I am not able to give you another gift. Finally, he left for the day. is this the tradition in your office? 

Thanks
Ashok Choudhary
choudharyashok2005@gmail.com

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समुद्रतट पर औंधे पड़े मृत बच्चे की तस्वीर खींचते वक्त मैं चेतनाशून्य हो गई थी : फोटो जर्नलिस्ट नीलूफर डेमिर

बीजिंग: तुर्की के समुद्रतट पर औंधे पड़े मृत अयलान कुर्दी की हृदय विदारक तस्वीर खींचने वाली फोटो पत्रकार ने फोटो लेते वक्त अपनी मनोदशा पर कहा है कि अयलान की तस्वीर खींचते वक्त वह जैसे चेतनाशून्य सी हो गई थीं। तुर्की के समाचार पत्र ‘हुर्रियत’ को दिए साक्षात्कार में तुर्की की समाचार एजेंसी ‘डोगन न्यूज एजेंसी’ (डीएचए) की फोटो पत्रकार नीलूफर डेमिर ने दुनिया को हिला कर रख देने वाली इस तस्वीर को लेते वक्त अपनी मनोदशा के बारे में बताया।

 

डेमिर की खींची इस तस्वीर ने यूरोप में शरण के लिए प्रतिदिन आ रहे शरणार्थियों की समस्या पर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। डेमिर ने कहा, “तीन वर्षीय अयलान समुद्र तट पर आ-जा रही लहरों के बीच लाल टी शर्ट और गहरी नीली निक्कर पहने औंधे मुंह निष्प्राण पड़ा हुआ था और उसकी कमर हल्की सी मुड़ी हुई थी। मैं सिर्फ तस्वीर के सहारे उसका करुण क्रंदन दुनिया को सुना सकती थी।”

डेमिर ने बताया कि उन्होंने अन्य शरणार्थियों की ही तरह बिना लाइफ जैकेट पहने वहां एक और बच्चे का शव पड़ा देखा था। बाद में पता चला कि वह अयलान कुर्दी के भाई गालिप का शव था। डेमिर ने कहा, “गालिप का शव अयलान से 100 मीटर की दूरी पर पड़ा था। इस बार मैं उसके पास गई। मैंने देखा कि उन्होंने लाइफ जैकेट नहीं पहन रखी थी और न ही तैरने के लिए सहारा देने वाला कोई अन्य उपकरण। नजारा बता रहा था कि दुर्घटना कितनी दर्दनाक रही होगी।”

डेमिर ने बताया कि ग्रीस में घुसने की कोशिश करते पाकिस्तानी शरणार्थियों की तस्वीरें लेते वक्त उन्होंने और उनके साथियों ने अचानक वहां बच्चों के शव पड़े देखे। उन्होंने बताया, “हमने वहां बच्चों के शव पड़े देखे। हम स्तब्ध रह गए, हमें उनके मरने का दुख हुआ, लेकिन हम सिर्फ यही कर सकते थे कि उनकी त्रासदी को दुनिया के सामने लाएं।”

डेमिर ने बताया कि वह 2003 से दूसरे देशों में शरण लेने की घटनाओं की तस्वीरें लेती रही हैं, जिसने उन्हें काफी दुखी किया। उन्होंने कहा कि शरणार्थियों की समस्या अब तुर्की की सीमा से बाहर निकलकर एक अंतर्राष्ट्रीय समस्या का रूप ले चुका है। डेमिर ने कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि आज से ही स्थितियां बदलेंगी।”

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दैनिक जागरण के फोटो जर्नलिस्ट मदन मौर्य की ये तस्वीरें बहुत बड़ी खबर बन सकती थी लेकिन आफिस वाले मैनेज हो गए!

मेरठ में एक फोटोग्राफर हैं मदन मौर्या. सीनियर फोटो जर्नलिस्ट हैं. जमाने से दैनिक जागरण की ही सेवा में है. बेहद मुंहफट और बेबाक. चोर के मुंह पर चोर कह देना उनका रोज का नियम है. चोर चाहे सीनियर पत्रकार हो या सीनियर पुलिस / प्रशासनिक अधिकारी. मदन मौर्य की इमानदारी और मुंहफटई के कारण सब चुपचाप उनकी सुनते, उन्हें झेलते रहते हैं. दैनिक जागरण, मेरठ के मालिकान बहुत अच्छे से मदन के इमानदार स्वभाव को जानते हैं, इसलिए वो मदन के खिलाफ ढेर सारी प्रायोजित शिकायतों को डस्टबिन में डालते रहते हैं, मदन के आफिस के लोगों के बारे में कड़वे बोल को सुन कर अनसुना करते हुए भी उस पर चुपचाप अमल करते जाते हैं. मदन का काफी समय से सबसे बड़ा दुख ये कि जिनके कंधों पर सिटी की रिपोर्टिंग का जिम्मा है, उन्होंने निजी स्वार्थवश पूरे पत्रकारिता के तेवर को धंधेबाजी में तब्दील कर रखा है. मदन अपने कैमरे के जरिए जिस सरोकारी व तेवरदार पत्रकारिता को अंजाम देते हैं, उसे उनके आफिस वाले कुछ लोग बेच खाने को तत्पर हो जाते हैं. ये सारी बातें और भूमिका मदन के स्वभाव-संस्कार के बारे में बताने के लिए थीं. अब आते हैं असली खबर पर.

दैनिक जागरण मेरठ के सीनियर फोटो जर्नलिस्ट मदन मौर्य

((पहली बार किसी फोटो जर्नलिस्ट ने विधानसभा टिकट खरीदने के लिए नोटों का कार्टन ले जाते नेता की तस्वीर खींची लेकिन यह खबर नेशनल न्यूज इसलिए नहीं बन पाई क्योंकि अखबार के स्थानीय सीनियर जर्नलिस्टों ने नेताओं से सौदा कर लिया.))

पिछले दिनों मदन मौर्य ने अपने कैमरे से एक ऐसा काला सच पकड़ा जिसे बड़े बड़े पत्रकार और फोटो जर्नलिस्ट नहीं पकड़ पाए. सियासी गणित के वास्ते नोटों के लेन-देन की नंगी तस्वीर और इससे संबंधित फोटो की पूरी सीरिज मदन मौर्य ने दुस्साहसिक तरीके से अपने कैमरे में कैद किया. यह सब कुछ मेरठ सर्किट हाउस के इर्द-गिर्द हुआ. असल में मेरठ सर्किट हाउस के एक कमरे में बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी रुके हुए थे. दूसरे अलग कमरे में सपा सरकार के कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर थे. उसी दौरान पीछे के गेट से काले रंग की एक जेलो कार आती है. उसमें से कुछ लोग उतरते हैं. ये लोग नोटों से भरा एक कार्टन हाथ में लिए थे. इनमें से एक था मेरठ कैंट का भावी बसपा प्रत्याशी शैलेंद्र चौधरी. कार्टन से नोट साफ नजर आते हैं. मदन मौर्य तुरंत एलर्ट होकर कैमरा चलाने लगते हैं. कैमरे की फ्लैश देख नोट लाने वालों के बीच भगदड़ मच जाती है. ये लोग कार्टन को गाड़ी में रखते हैं और गायब हो जाते हैं. नसीमुद्दीन सिद्दीकी तुरंत कह देते हैं कि ये लोग बसपा से जुड़े नहीं हैं और पैसे से उनका कोई लेना देना नहीं है. शाहिद मंजूर भी कहते हैं कि वे नहीं जानते कौन लोग हैं और उनसे मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं था.

मदन मौर्य के पास पूरी स्टोरी मय फोटो थी. करोड़ों रुपये देकर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा कोटे का टिकट खरीदने का कार्यक्रम चल रहा था जो कैमरे में क्लिक हो जाने के कारण खटाई में पड़ गया. मदन ने सब कुछ अपने आफिस के हवाले कर दिया लेकिन आफिस के कुछ गणमान्य लोगों ने खेल कर दिया. सेलेक्टेड तरीके से तस्वीरें छापी. किसी को बचाया, किसी को छुपाया. मतलब ये कि मदन ने जो स्टोरी जान पर खेलकर की, उसको उनके आफिस वालों ने ही बेच खाया. कायदे से ये स्टोरी आल एडिशन फर्स्ट पेज की लीड थी. पहली बार टिकट खरीद की तस्वीर और पूरी स्टोरी पब्लिक डोमेन में आई थी, एक साहसी फोटो जर्नलिस्ट की कोशिशों के कारण. लेकिन आरोप है कि सिटी इंचार्ज से आरोपी नेता ने मिलकर मामला सेट कर लिया और पूरी खबर की हत्या हो गई. खबर को जिस रूप में डेवलप करके उछाल कर छापना था, वह नहीं हुआ. सब कुछ लीपापोती सा करके निपटा दिया गया. 

लोगों ने तो इस गेम में लाखों कमा लिए लेकिन मदन मौर्य को बदले में मिल रही है धमकियां. जिन सज्जन को मेरठ कैंट से बसपा का टिकट मिलना था और जो पैसे लेकर जा रहे थे, उनने धमकाना शुरू कर दिया है कि अगर उन्हें टिकट न मिला तो मदन मौर्य का हिसाब किया जाएगा. मदन को ऐसी जाने कितनी धमकियां मिलती है लेकिन मदन अकेले ही अपनी बाइक पर रोज काम के लिए निकलते हैं और देर रात घर वापस लौटते हैं.

सूत्र बताते हैं कि दैनिक जागरण ने पहले दिन प्रत्याशी की फोटो नहीं छापी. सिर्फ नोट भरे कार्टन का ही फोटो छापा. नेता को बचा लिया जाता है, लाखों लेकर, ऐसा आरोप लगता है. प्रबंधन के पास जब शिकायत जाती है तो प्रबंधन की फटकार के बाद सिटी इंचार्ज अगले रोज से छापना शुरू करते हैं लेकिन सबको पता है कि अगर मंशा ओबलाइज करने और धंधा करने की हो तो किस तरह व कितना छाप पाएंगे. आफर मदन मौर्य को भी मिला था, लाखों का, लेकिन उन्होंने पत्रकारिता और सरोकार को सर्वोच्च रखा, संस्थान के प्रति निष्ठा व ईमानदारी को सर्वोच्च रखा. लेकिन मदन मौर्य का ठुकराया आफर उनके आफिस के उनके कुछ सीनियर्स ने लपक लिया. बस, खेल हो गया. इस घटनाक्रम से संबंधित मदन मौर्य द्वारा खींची गई नोटों की गड्डी वाले कार्टन की तस्वीर सबसे उपर है, और अन्य तस्वीरें यहां नीचे पेश हैं. और हां, आपको मदन मौर्या को बधाई देना बनता है, उनके मोबाइल नंबर 09837099512 को डायल करके. कोई अच्छा काम कर रहा है तो उसे सराहने में क्या कंजूसी करना.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com


मदन मौर्या के साहस की एक पुरानी कहानी इस शीर्षक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं:

शाबास मदन मौर्या, जुग-जुग जियो

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ब्रेन हैमरेज के बाद मेरठ के फोटोग्राफर राजन को नौकरी से निकाल दिया ‘हिंदुस्तान’ ने

दैनिक हिंदुस्तान मेरठ से खबर है कि यहां कार्यरत एक फोटोग्राफर को प्रबंधन ने इसलिए नौकरी से निकाल दिया क्योंकि उसे ब्रेन हैमरेज हो गया था. कारपोरेट मीडिया प्रबंधन अपने कर्मियों के प्रति कितना संवेदनहीन है, इसकी बानगी यह घटनाक्रम है. राजेंद्र सक्सेना उर्फ राजन दैनिक हिंदुस्तान, मेरठ में दस वर्षों से कार्यरत थे. फील्ड में घूम घूम कर वह फोटोग्राफी समेत अखबार के समस्त कार्य करते थे. सारे निर्देशों आदेशों का यस सर यस सर करते हुए पालन करते थे. एक दिन अचानक उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया. लंबा इलाज चला. जब वो ठीक होकर काम पर लौटे तो उन्हें एक लेटर थमा दिया गया कि आपकी नौकरी खत्म.

लेटर में एक महीने का नोटिस प्रबंधन की तरफ से दिया गया था कि आपकी सेवा खत्म की जाती है. पहले तो राजन ने कई तरह से मिन्नतें की, 31 जुलाई तक इंतजार किया क्योंकि नोटिस के मुताबिक 31 जुलाई के बाद सेवा खत्म. जब कोई संपादक मैनेजर नहीं पसीजा तो राजन ने सारी उम्मीद छोड़ दी. हिंदुस्तान मेरठ में दो दो संपादक बैठते हैं. छोटे संपादक यानि रेजीडेंट एडिटर सूर्यकांत द्विवेदी और बड़े संपादक यानि वेस्ट यूपी हेड अनिल भास्कर. राजन ने सबसे हाथ जोड़कर अनुरोध किया, लेकिन किसी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा. 48 साल की उम्र में राजन बेरोजगार हो गया है. उसके पास तीन बिटिया हैं. एक बेटा है. बड़ी बिटिया दस साल की है. राजन का कहना है कि उसकी सारी उम्र अखबार लाइन में निकल गई, अब वह इस उम्र में नया काम कौन सा करे. जिस वक्त राजन को पैसों, संस्थान की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उसी वक्त संस्थान ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया.

किसी के ज्वाइन करने, इस्तीफा देने, तबादला होने, पुरस्कृत किए जाने की सूचना भड़ास तक bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.

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फुलवारीशरीफ में प्रेस फोटो ग्राफर के सिर में गोली मारी, हालत गंभीर

पटना : फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र में महावीर कैंसर अस्पताल के पास बदमाशों ने स्वतंत्र प्रेस फोटोग्राफर पवन सिंह को गोली मार दी। स्थानीय लोगों ने पवन को अस्पताल पहुंचाया। हालत चिंताजनक बताई गई है। घटनास्थल से पुलिस को जिंदा कारतूस बरामद हुआ है। नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स, बिहार, ने इस घटना की कठोर शब्दों में निंदा की है। 

फुलवारीशरीफ के आदर्श कॉलोनी में रहने वाले स्वतंत्र फोटोग्राफर पवन सिंह शनिवार रात करीब नौ बजे घर लौट रहे थे। तभी चार लोगों ने उन्हें महावीर कैंसर अस्पताल के पास रोक लिया। वह उनसे बात करने लगे। इतने में बाइक सवार दो लोगों ने पहुंचकर नजदीक से पवन के सिर में गोली मार दी और फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। लुटेरों की तलाश में शहर की नाकाबंदी कर दी गई। संभावित ठिकानों पर छापेमारी चली लेकिन पुलिस के हाथ अपराधी नहीं लगे। 

घायल फोटोग्राफर को गंभीर हालत में पटना के पीसीएमएम में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स, बिहार, कठोर शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि यह घटना सूबे में यह कानून व्यवस्था की खस्ताहाली को दर्शाती है। 

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शेर की तस्वीर ले रहे प्रेस फोटोग्राफर योगेश भोजानी पर शेर ने किया हमला

गुजरात में राजकोट जिले के गोंडल तालुका के बिलड़ी गांव में कल एक शेर ने उसकी तस्वीर उतार रहे एक स्थानीय प्रेस फोटोग्राफर तथा उनके पत्रकार मित्र पर हमला कर दिया। पुलिस ने बताया कि स्थानीय प्रेस फोटोग्राफर योगेश भोजानी (40) तथा उनके पत्रकार मित्र चंद्रेश पंडया एक शेर द्वारा एक स्थानीय किसान के बैल को शिकार बनाए जाने की सूचना पर वहां पहुंचे थे।

भोजानी ने जब बैल को खा रहे शेर की तस्वीर उतारने की कोशिश की तो इसके फ्लैश की चमक से बौखलाए शेर ने उन पर तथा चंद्रेश पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंच कर शोर मचाया तो शेर वहां से भाग गया। भोजानी को कंधे तथा पेट पर चोट के बाद गोंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है जबकि चंद्रेश को हाथ में मामूली खरोंच आईं हैं। ज्ञातव्य है कि घटना स्थल से लगभग 40-50 किमी दूर पड़ोसी जिले जूनागढ़ के गिर वन के विसावदर क्षेत्र से अक्सर शेर और तेंदुए इस इलाके मे आ जाते हैं तथा कई बार पालतू पशुओं को भी शिकार बना लेते हैं।

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