सरवाइकल के भयंकर दर्द की चपेट में यशवंत, देखें लोग क्या-क्या दे रहे सलाह!

Yashwant Singh : सरवाइकल का दर्द क्या होता है, कोई मुझसे पूछे। दाहिने हिस्से के सिर से लेकर गर्दन पीठ कंधा हाथ तक में दर्द की लहरें उठ रहीं हैं। लैपटॉप, मोबाइल पर झुक कर देर तक काम और ढेर सारे तकिए लगाकर सोने की बुरी आदत ने फाइनली सीवियर सर्वाइकल पेन को निमंत्रित कर ही दिया। Continue reading

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आज का दिन यशवंत के लिए क्यों रहा बेहद उदास करने वाला, पढ़ें

Yashwant Singh

भड़ास पर किसी किसी दिन खबरें लगाते, संपादित करते, रीराइट करते, हेडिंग सोचते, कंटेंट में डूबते हुए अक्सर कुछ क्षण के लिए लगता है जैसे मेरा अस्तित्व खत्म हो गया है. खुद को खुद के होने का एहसास ही नहीं रहता. आज का दिन ऐसा ही रहा. दिल दुखी कर देने वाली खबरों में गोता लगाए रहा. Continue reading

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फिल्म ‘संजू’ : मीडिया इस दौर का सबसे बड़ा, सबसे संगठित और सबसे खतरनाक माफिया है!

Yashwant Singh

मीडिया में एक से बढ़ कर एक नमूने हैं. अभी संजू फिल्म आई है जिसमें मीडिया भी एक मुद्दा है. एक बालक ने मुझे इस फिल्म को इंटरनेट से डाउनलोड करके दे दिया तो मुफ्त में ही पूरा देखने का मौका मिल गया. आखिरी सीन पर आइए. जेल से निकल रहे हैं संजय दत्त. मीडिया वाले चिल्ला रहे हैं- बाबा, बाबा, एक बार इधर देख लो… Continue reading

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बुढ़ापे में पैसे के लिए पगलाया अरुण पुरी अब ‘पत्रकारीय वेश्यावृत्ति’ पर उतर आया है…

Yashwant Singh : फेसबुक पर लिखने वालों, ब्लाग लिखने वालों, भड़ास जैसा पोर्टल चलाने वालों को अक्सर पत्रकारिता और तमीज की दुहाई देने वाले बड़े-बड़े लेकिन परम चिरकुट पत्रकार इस मुद्दे पर पक्का कुछ न बोलेंगे क्योंकि मामला कथित बड़े मीडिया समूह इंडिया टुडे से जुड़ा है. बुढ़ापे में पैसे के लिए पगलाए अरुण पुरी क्या यह बता सकेगा कि वह इस फर्जी सर्वे के लिए बीजेपी या किसी अन्य दल या कार्पोरेट से कितने रुपये हासिल किए हैं… इंडिया टुडे वाले तो सर्वे कराने वाली साइट के पेजेज को खुलेआम अपने एफबी और ट्विटर पेजों पर शेयर कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि मामला सच है और इंडिया टुडे वालों ने केजरीवाल को हराने के लिए किसी बड़े धनपशु से अच्छे खासे पैसे हासिल किए हैं.

बिकाउ मीडिया और कार्पोरेट-करप्ट मीडिया से वैसे तो मुझे कई वर्षों से कोई उम्मीद नहीं रही लेकिन अब भी ढेर सारे लोग हैं जो मीडिया हाउसों के चैनलों, अखबारों पर चलाई जा रही खबरों, सर्वे आदि को सच मानते हैं. आप भड़ास की इस खबर https://bhadas4media.com/print/2557-india-today-kejri-tweet को एक बार पढ़ लें और इस खबर में दिए गए वीडियो लिंक को क्लिक करके देख लें तो पक्का आप सनक जाएंगे और गरियाएंगे कि साला ऐसा भी कहीं होता है क्या…

ये बड़े बड़े मीडिया मालिक और बड़े बड़े पत्रकार अगर कभी आपको या हमको पत्रकारिता की तमीज सिखाते मिल जाएं तो तड़ाक से इनके मुंह पर अपना जूता या चप्पल निकाल कर मार दीजिए, बिना कोई जवाब या सफाई दिए…

छोटे मोटे मैग्जीन प्रकाशकों, लघु अखबार संचालकों, ब्लागरों, पोर्टल संचालकों आदि को ब्लैकमेलर बताकर खुद को चरित्रवान बताने वाले बड़े मीडिया हाउसों के मालिक दरअसल सबसे खूंखार और सबसे बड़े ब्लैकमेलर हैं जो पैसे लेकर सुपारी पत्रकारिता करते हैं. ऐसे सुपारी पत्रकारिता करने वाले बड़े मीडिया हाउसों के बड़े व्यभिचारी मालिकों और बड़े मीडिया हाउसों के बड़े दलाल संपादकों-पत्रकारों ने पूरी पत्रकारिता की साख गिरा कर खत्म कर दी है. यही कारण है कि अब मीडिया की बात आते ही हर कोई कहने लगा है कि इनकी तरफ पैसे फेंकिए, ये तत्काल मैनेज हो जाएंगे. पुलिस और नेताओं की तरह महाभ्रष्ट कैटगरी में आ चुका है मीडिया. अरुण पुरी की इस करतूत ने इंडिया टुडे ग्रुप की रही सही साख खत्म कर दी है और इसे भी चोरों ब्लैकमेलरों सुपारी पत्रकारों सुधीर चौधरियों, दीपक चौरसियाओं की कैटगरी वाला पत्रकारिता करने वाला मीडिया हाउस बना दिया है. शेम शेम इंडिया टुडे. शेम शेम अरुण पुरी.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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