प्रियंका के आने से राहुल फ्लॉप हो जाएंगे!

हस्बे मामूल, राहुल गांधी ने फिर गलती कर दी। उनको प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ लखनऊ नहीं जाना चाहिए था। वहां भीड़ प्रियंका के नाम पर जुट रही है, वे ही आकर्षण का केंद्र रहेंगी। राहुल गांधी अपने को हाशिये पर पायेंगे। इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि अगर ऐसा …

राम मंदिर अब कांग्रेस वाले बनवाएंगे! देखें वीडियो

राम मंदिर कांग्रेस वाले बनवाएंगे! सुनिए ऐलान… नीचे देखिए वीडियो… ये हैं जनाब राजब्बर. अभिनेता रहे हैं. अब कांग्रेस के नेता हैं. मीडिया से देर तक बतियाते हैं. उन्होंने ऐलान कर दिया है कि अगर लोकसभा चुनाव जीत कर सत्ता में आए तो राम मंदिर कांग्रेस बनवाएगी. यानि जिस राम मंदिर बनवाने को लेकर मोदी …

टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय कहिन- आखिर कांग्रेस ने अपना चेहरा दिखा ही दिया!

Abhishek Upadhyay : आखिर कांग्रेस ने अपना चेहरा दिखा ही दिया। वोटबैंक के सफेद पाउडर के पीछे से झांकता अवसरवाद की कालिख से रंगा पुता काला चेहरा। यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन से घबराई कांग्रेस ने तीन तलाक जैसी बर्बर प्रथा को खत्म करने वाला कानून ही खत्म करने का ऐलान कर दिया। यही कांग्रेस …

अटलजी के बाद जो बीजेपी शेष है, वह संजय गांधी की ‘गुंडा’ कांग्रेस पार्टी-सी है…

Girijesh Vashistha : अटल जी के निधन के बाद बीजेपी ने जो चाल चरित्र और चेहरा दिखाया है वो शायद नयी बीजेपी की पहचान है. एक के बाद एक कई तरह की चीज़ें सामने आईं जिनसे वो लोग कतई आहत नहीं होंगे और प्रभावित भी नहीं होंगे जो यूथ कांग्रेस के भगवा संस्करण की तरह …

नेहरू की पहल पर कांग्रेस में आईं थीं राजमाता सिंधिया

डॉ राकेश पाठक

आज पं जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिन है। आइये नेहरू के ग्वालियर से सरोकार की पड़ताल करते हैं। दरअसल रियासतों के विलय के बाद जब “मध्य भारत” राज्य बना तो तत्कालीन सिंधिया शासक जीवाजी राव सिंधिया नेहरू जी की ही सम्मति से “राज प्रमुख”(वर्तमान राज्यपाल समान पद) बनाये गए। आज़ादी के बाद के शुरुआती वर्षों में ग्वालियर हिन्दू महासभा का गढ़ था। सबसे पहले सांसद भी हिमस के ही थे। दूसरे आम चुनाव से पहले पं नेहरू के आग्रह पर तत्कालीन महारानी विजयाराजे सिंधिया कांग्रेस में शामिल हुईं और 1957 का लोकसभा चुनाव गुना सीट से लड़ा। सिंधिया राजघराने की लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह पहली आमद थी।उन्होंने हिन्दू महासभा के दिग्गज विष्णुपंत घनश्याम देशपाण्डे को करारी शिकस्त दी।

क्या 2019 में कांग्रेस दे पाएगी भाजपा को टक्कर?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की जो खबरें अमेरिका से आ रही है, वे ऐसी हैं, जैसे किसी रेगिस्तान में झमाझम बारिश हो। भारत में जिसे लोग नेता मानने को तैयार नहीं हों, जिसे अखबारों में कभी-कभी अंदर के कोनों में कुछ जगह मिल जाती हो और जिसे लोगों ने तरह-तरह के मज़ाकिया नाम दे रखे हों, वह युवा नेता अमेरिका के बर्कले और प्रिंसटन जैसे विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और छात्रों को सीधे संबोधित कर रहा हो, यह असाधारण घटनाक्रम है। खास बात यह है कि राहुल की ये खबरें भारतीय अखबारों के मुखपृष्ठों पर चमक रही हैं। जाहिर है कांग्रेस के हताश-निराश कार्यकर्ताओं में इन खबरों ने उत्साह का संचार कर दिया है। राहुल के जिन सहयोगियों ने इस अमेरिका-दौरे की योजना बनाई है, वे बधाई के पात्र हैं। राहुल के भाषणों और उन पर हुई चर्चाओं की जैसी रिपोर्टें छप रही हैं, उनसे जाहिर है कि इस बार कांग्रेस का खबर-प्रबंध सफल रहा है।

जब केजरी पार्टी ‘पीटी’ जा रही थी तो कांग्रेसी उपदेश देते थे, अब कांग्रेसी ‘मारे’ जा रहे तो आपिये आइना दिखाने लगे!

Sheetal P Singh : अनुभवी लोग… अहमद पटेल पर बन आई तो अब बहुतों को लोकतंत्र याद आ रहा है ………आना चाहिये पर शर्म भी आनी चाहिये कि जब बीते ढाई साल यह बुलडोज़र अकेले केजरीवाल पर चला तब अजय माकन के नेतृत्व में कांग्रेसी राज्यपाल के अधिकारों के व्याख्याकारों की भूमिका में क्यों थे? जब एक बेहतरीन अफ़सर राजेन्द्र कुमार को सीबीआई ने बेहूदगी करके सिर्फ इसलिये फँसा दिया कि वह केजरीवाल का प्रिंसिपल सेक्रेटरी था तब भी लोकतंत्र की हत्या हुई थी कि नहीं? जब दिल्ली के हर दूसरे आप विधायक को गिरफ़्तार कर करके पुलिस और मीडिया परेड कराई गई तब भी यमुना दिल्ली में ही बह रही थी! तब कांग्रेसी बीजेपी के साथ टीवी चैनलों में बैठकर केजरीवाल को अनुभवहीन साबित कर रहे थे! अब अनुभव काम आया?

कांग्रेस के मनसबदार

अनेहस शाश्वत, लखनऊ

कांग्रेस का फिलहाल का पराभव देख दिमाग में अनायास मुगलों की मनसबदारी प्रथा की याद कौंध गयी। यह मनसबदार ही थे जिन्होंने मुगलों को दुनिया की अतुलनीय और चकाचौंध वाली ताकत बनाया और मनसबदारों के ही चलते आखिरी मुगल बादशाहों की ताकत लाल किले के भीतर तक ही सीमित होकर रह गयी। आज के माहौल में भी मनसबदार हालांकि एक जाना-माना और चलता हुआ शब्द है लेकिन मनसबदार और मनसबदारी दरअसल होती क्या थी, यह बहुत कम लोग जानते हैं। इसके विश्लेषण से शायद कांग्रेस के पराभव पर भी कुछ रोशनी पड़ सके इसलिए इसे जानना अप्रासंगिक नहीं होगा।

यूपी में पीके ने सीएम पद के लिए राहुल, प्रियंका और शीला दीक्षित का नाम सुझाया

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश कांग्रेस में हमेशा से काबिल नेताओं की लम्बी-चौड़ी फौज रही है। कई नेताओं के नाम गिनाये जा सकते हैं जिन्होंने अपने दम से प्रदेश ही नहीं पूरे देश में अपना नाम रोशन किया। फिर भी यूपी में कांग्रेस मरणासन स्थिति में हो तो आश्चर्य होता है। 27 वर्षो से वह सत्ता से बाहर है। इन 27 वर्षो में सत्ता में वापसी के लिये कांग्रेस लगातार प्रयासरत् रही है। जब भी चुनावी बिगुल बजता है कांग्रेसी ‘सपनों की उड़ान’ भरने लगते हैं, लेकिन अंत में निराशा ही हाथ लगती है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों अपराधी पार्टियां : जस्टिस काटजू

Markandey Katju : Criminal Organizations… I regard the Congress and the BJP as criminal organizations. In 1984 that criminal gangster Indira Gandhi, who imposed a fake ‘ Emergency’ in 1975 in India in order to hold on to power after she had been declared guilty of corrupt election practices by the Allahabad High Court, an ‘ Emergency in which even the right to life was suspended, and lacs of Indians were falsely imprisoned, was assassinated.

कानपुर में कांग्रेस नेता ने सम्पादक को दी जूतों से मारने की धमकी

कानपुर : स्वतंत्रता दिवस पर शहर में कांग्रेसी नेता अम्बुज शुक्ला द्वारा लगवाई गई त्रुटि पूर्ण होर्डिंग्स के बारे में खबर प्रकाशित करने पर ‘जन सामना’ के सम्पादक श्याम सिंह पंवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। शुक्ला ने कहा है कि ‘जन सामना’ समाचार पत्र का लाइसेन्स जब्त करवा दूंगा। पत्रकार को अपने घर बुलाकर जूते से मारने की दी धमकी। 

राहुल गांधी के एक्शन से संघ परिवार के मीडिया नियंत्रण और सरकार नियंत्रण की चूलें हिलीं

राहुल गांधी की नई इमेज परिवर्तनकामी है, खुली है, यह कांग्रेस के मूल स्वभाव से भिन्न है। कांग्रेस का मूल स्वभाव सत्ता अनुगामी और छिपाने वाला रहा है, जबकि राहुल गांधी सत्ता से मुठभेड़ कर रहे हैं, पार्टी को खेल रहे हैं। वे इस क्रम में दो काम कर रहे हैं, पहला यह कि वे कांग्रेस की नीतियों में परिवर्तन कर रहे हैं, पुरानी नीतियों से अपने को अलगा रहे हैं, उन पर क्रिटिकली बोल रहे हैं। इससे नई राजनीतिक अनुभूति  अभिव्यंजित हो रही है।

अपना न्यूज चैनल शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही कांग्रेस

दिल्ली : पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी ने संकेत दिया है कि कांग्रेस पार्टी जनता तक सीधी पहुंच बनाने के लिए एक राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

एक तरफ ‘मेक इन इंडिया’ का नारा, दूसरी तरफ छंटनी से लेकर मंदी तक की परिघटनाएं

कांग्रेस की श्रम विरोधी व कारपोरेट परस्त नीतियों से त्रस्त जनता को मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया‘ और ‘कौशल विकास‘ के नारे से बहुत उम्मीद जगी थी। परन्तु आशा की यह किरण धुंधली पड़ने लगी है। उद्योगों  के निराशाजनक व्यवहार को साबित करते हुये देश की दूसरे नम्बर की ट्रैक्टर बनाने वाली कम्पनी ने अपने संयत्रों से 5 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। गनीमत यह रही कि एक प्रतिष्ठित दक्षिण भारतीय महिला की छत्रछाया में चलने वाले इस औद्योगिक समूह से निकाले जाने वाले कर्मियों के प्रति संवेदना दिखाते हुये प्रबन्धन ने उन्हें पहले से ही सूचना देने के साथ साथ न केवल तीन माह का ग्रोस वेतन दिया। बल्कि छंटनी ग्रस्त कर्मियों के लिये एक सुप्रसिद्व जॉब कन्सलटेंट की सेवायें दिलवाकर उन्हें दूसरी कम्पनियों में नौकरी दिलवाने की भी कोशिश की। 

कांग्रेस के पास रॉबर्ट वाड्रा, भाजपा के पास दुष्यंत, अब खेल बराबरी का

मेरे पास माँ है… यह फिल्मी डायलॉग तो पुराना हो गया है। अब तो राजनीति में नया डायलॉग चल रहा है कि तुम्हारे पास (कांग्रेस) अगर रॉबर्ट वाड्रा है तो हमारे पास (भाजपा) भी दुष्यंत सिंह है। भला हो ललित मोदी का, जिसने कम से कम कांग्रेस की कुछ तो लाज रख ली और दामादजी वाले मामले पर पीट रही भद के बीच अब वसुंधरा के लाड़ले का मामला उजागर हो गया। 

कृपलानी ने सिद्धांतों की खातिर 57वें कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया था

हमारे देश में राज्य श्रेष्ठ मान लिया जाता है, समाज दोयम। शायद यही कारण है कि राजपुरुष प्रधान हो जाते हैं और समाज का पहरुआ गौण। जी हाँ, इस देश में अगर ‘राज्य-समाज समभाव’ दृष्टिकोण अपनाया गया होता तो आज आचार्य जीवतराम भगवानदास कृपलानी उतने ही लोकप्रिय और प्रासंगिक होते जितने कि सत्ता शीर्ष पर बैठे लोग। वह व्यक्ति खरा था, जिसने गांधीजी के ‘मनसा-वाचा-कर्मणा’ के सिद्धांत को जीवन पद्धति मानकर उसे अंगीकार कर लिया। उक्त विचार मशहूर स्वतंत्रता सेनानी आचार्य जे बी कृपलानी की 126वीं जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए गए।

चिदंबरम ने किया 2जी घोटाला : हंसराज भारद्वाज

लोकसभा चुनाव और हरियाणा व महाराष्ट्र में करारी हार के बाद कांग्रेस में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। हार के बाद कई नेताओं ने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की क्षमता पर सवाल खड़े किए थे। अब इस कड़ी में संप्रग शासन में केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के राज्यपाल रहे हंसराज भारद्वाज का भी नाम जुड़ गया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी की डूबती नैया को प्रियंका गांधी वाड्रा ही किनारे लगा सकती है।

न्यूज चैनलों के लिए ‘वाड्रा मीडिया दुर्व्यवहार प्रकरण’ सत्ता के प्रति निष्ठा जताने का मौका

हरियाणा में भूमि घोटाला पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा से पूछे गए सवाल पर तिलमिलाये वाड्रा ने पत्रकारों से जो बदसलूकी की उसकी गर्मी 24 घंटे तक कायम है और शायद आगे भी कायम रहेगी। प्रायः हर चैनल एएनआई का माईक झटकने का सीन हजार बार दिखा चुका है। एक पत्रकार के रूप में हम वाड्रा के कृत्य की कड़े से कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं। पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहने की आजादी की पुरजोर मांग करते हैं। शनिवार के प्रकरण में घटना से बड़ी राजनीति है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता।

चाहे जो कहो… सड़ी हुई कांग्रेसी सरकारों से ज्यादा सक्रिय है भाजपा की मोदी सरकार…

Yashwant Singh : चाहे जो कहो… सड़ी हुई कांग्रेसी सरकारों से ज्यादा सक्रिय है भाजपा की मोदी सरकार… कांग्रेसी सरकारों में वामपंथियों और सोशलिस्टों को अच्छी खासी नौकरी, लाटरी, मदद, अनुदान, पद, प्रतिष्ठा टाइप की चीजें मिल जाया करती थी… अब नहीं मिल रही है तो साले ये हल्ला कर रहे हैं … पर तुलनात्मक रूप से निष्पक्ष होकर देखो तो भाजपा की मोदी सरकार जनादेश के दबाव में है और बेहतर करने की कोशिश करती हुई दिख रही है… हां, अगर जनता ने भाजपा को जिताया है तो भाजपा अपने एजेंडे को लागू करेगी ही.. वो एजेंडा हमको आपको पसंद आता हो या न आता हो, ये अलग बात है… पर सक्रियता और जनपक्षधरता को लेकर कांग्रेस व भाजपा में से किसी एक की बात करनी हो तो कहना पड़ेगा कि भाजपा सरकार ज्यादा सक्रिय और ज्यादा सकारात्मक है.