पत्रकार ज़ैग़म इमाम की फिल्म ‘दोज़ख़ इन सर्च ऑफ़ हेवेन’ 20 मार्च को रिलीज होगी, पेश है सिनॉप्सिस और ट्रेलर

पत्रकार ज़ैग़म इमाम की फिल्म दोज़ख़ इन सर्च ऑफ़ हेवेन 20 मार्च को रिलीज होगी। दोज़ख़ पीवीरं के बैनर तले प्रदर्शित की जा रही है।  ‘दोज़ख – इन सर्च ऑफ हैवेन’ कहानी है वाराणसी स्थित एक छोटे से गांव में बसे एक कट्टरपंथी मुस्लिम नमाज़ी तथा उसके बारह वर्षीय बेटे जानु के साथ उसके रिश्ते की. फिल्म की शुरूआत होती है रोज़मर्रा होनेवाली सुबह की नमाज़ और पुजारी की प्रार्थना से उपजे विवाद से. पडोस में रहनेवाला मुस्लिम नमाज़ी अपने पडोसी हिंदू पुजारी से काफी दुखी है लेकिन उससे भी ज़्यादा दुखी है अपने बारह वर्षीय बेटे के व्यवहार से जिसकी पुजारी के बेटे से घनिष्ट मित्रता है.

मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : पत्रिका और भास्कर ने उत्पीड़न तेज किया, बर्खास्तगी और इस्तीफे का दौर

हिंदी पट्टी के दो बड़े अखबारों राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर से खबर है कि यहां मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी मांगने वालों का प्रबंधन ने उत्पीड़न तेज कर दिया है. भास्कर प्रबंधन तो बौखलाहट में ऐसे ऐसे कदम उठा रहा है जिसे देख सुनकर सभी लोग दांतो तले उंगलियां दबा रहे हैं. पत्रिका प्रबंधन ने मजीठिया मांगने वाले एक मीडियाकर्मी को बर्खास्त कर दिया है. उन्हें जो पत्र भेजा गया है उसमें लिखा गया है कि– ”आपको कंपनी के क्लाज 3 के अनुसार तीन महीने का एडवांस नोटिस व एडवांस वेतन देकर सेवा से मुक्त किया जाता है. आपकी सेवाओं की अब कंपनी को जरूरत नहीं है. आप 27 फरवरी से खुद को सेवा से मुक्त समझें.”

मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : अवमानना के दस मामलों की सुप्रीम कोर्ट में इकट्ठे सुनवाई 10 मार्च को

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा ने जानकारी दी कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले को लेकर मीडिया मालिकों के खिलाफ जितनी भी अवमानना याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लगी हैं, उनकी सुनवाई 10 मार्च को होगी. अब तक दर्ज कुल दस मामले हैं. यह सुनवाई न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एनवी रमण की खंडपीठ करेगी. अदालत संख्या 8 में इस मामले का आइटम नंबर एक है. जो भी साथी इस मामले की सुनवाई देखना सुनना चाहते हैं वह पहले से पास बनवाकर सुप्रीम कोर्ट के कक्ष संख्या आठ में जा सकते हैं.

एचटी समिट के लिए एक करोड़ के प्रायोजक जुगाड़ने की जिम्मेदारी मुझे दी जाती थी : अनुपमा

Mukesh Kumar : एस्सार मामले में केवल शांतनु सैकिया का ही नहीं सात पत्रकारों के नाम लिए जा रहे हैं। इनमें से एक अनुपमा हिंदुस्तान टाइम्स की एनर्जी एडिटर हैं जिन्हें अख़बार ने निलंबित कर दिया है। लेकिन अनुपमा ने उलटवार करते हुए कहा है कि उनका अख़बार और संपादक उन्हें लगातार इस्तेमाल करता रहा है और एचटी सम्मिट के लिए एक करोड़ के प्रायोजक जुगाड़ने की जो ज़िम्मेदारी उसे दी जाती थी, वह उसे निभाती भी थी। इसी तरह दैनिक भास्कर के भी एक पत्रकार के इसमें शामिल होने का शक़ है। बाक़ी पत्रकारों के नाम अभी मिले नहीं हैं मगर पूरा मामला खुले तो राडिया कांड-2 जैसा होगा।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.

विधु शेखर का मानसिक दिवालियापन : सेलरी के लिए प्रदर्शन करने गए अपने कर्मचारियों पर लगाया डकैती का आरोप

पी7 न्यूज़ में कुछ रोज पहले सुबह के वक्त कर्मचारियों का एक जत्था फरीदाबाद स्थित एचआर हेड विधु शेखर के घर पहुंचने लगा था। पी7 के दफ़्तर पर भी कर्मचारी इकट्ठा हुए और फिर फरीदाबाद सेक्टर 37 पहुंच गये। वहां पहुंचने पर पता चला कि विधु शेखर की सोसायटी का गेट बंद कर दिया गया था और वहां 8-10 लठैतों को तैनात किया गया था। कर्मचारियों ने तय किया कि वो कोई ज़ोर जबरदस्ती नहीं करेंगे और शांति पूर्वक प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन शुरू ही हुआ था कि वहां फरीदाबाद पुलिस पहुंच गई और कर्मचारियों में से कुछ को उठाकर थाने लेकर गई।

यादव सिंह पीआईएल : हलफनामे से सीबीसीआईडी जांच की सच्चाई खुली

यादव सिंह मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर की पीआईएल में देबाशीष पांडा, प्रमुख सचिव, गृह द्वारा दायर हलफनामे से श्री यादव के खिलाफ सीबीसीआईडी जांच की सच्चाई सामने आ जाती है. नॉएडा प्राधिकरण के आर पी सिंह ने सेक्टर-39, नॉएडा में दायर एफआईआर में श्री सिंह और श्री रामेन्द्र पर 8 दिनों में 954.38 करोड़ के बांड हस्ताक्षित करने के साथ तिरुपति कंस्ट्रक्शन और जेएसपी कंस्ट्रक्शन द्वारा 08 दिसंबर 2011 को भूमिगत 33/11 केवी केबल का 92.06 करोड़ का काम ठेका मिलने के पहले ही 60 फीसदी काम पूरा कर लेने में मिलीभगत का आरोपी बताया था.

Yadav Singh PIL : Affidavit exposes CBCID enquiry truth

The affidavit filed by Principal Secretary Home Debashish Panda before Lucknow bench of Allahabad High Court in the PIL filed by social activist Dr Nutan Thakur in Yadav Singh scam, exposes the truth about CBCID enquiry against Sri Yadav. R P Singh of Noida Authority registered an FIR in Sector 39, Noida against Sri Singh and Sri Ramendra for executing bonds worth Rs. 954.38 crores in merely 8 days and for colluding with Tirupati Construction and JSP Construction, who completed 60 percent of Rs. 92.06 crore underground 33/11 KV cable work before actual execution of contract on 08 December 2011.

एस्सार के ‘रिश्तेदार’ तीन पत्रकारों की नौकरी गई, लेकिन ‘बड़े वाले रिश्तेदार’ नितिन गडकरी का मंत्री पद बरकरार

Deepak Sharma : एस्सार ग्रुप की टैक्सी इस्तेमाल करने वाले तीन बड़े पत्रकारों को नौकरी छोडनी पड़ी है. लेकिन एस्सार ग्रुप का हेलीकाप्टर और याट इस्तेमाल करने वाले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी कुर्सी पर विराजमान हैं. एस्सार का फायदा लेने वाले दिग्विजय सिंह और श्री प्रकाश जायसवाल भी मजे में हैं. सवाल कॉर्पोरेट की टैक्सी और हेलीकाप्टर में बैठने का नहीं है. सवाल ये है कि जिन मीडिया समूह या राजनीतिक पार्टियों ने अपने फायदे के लिए कॉर्पोरेट का खुला इस्तेमाल किया है, वो क्या दूध के धुले हैं? क्या उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं लिखा जा सकता? क्या कॉर्पोरेट, मीडिया और राजनीति की ये तिकड़ी हर जगह लूटपाट नहीं कर रही है?

तीन कार्पोरेट परस्त पत्रकारों के नाम का खुलासा, ये हैं- संदीप बामजई, अनुपमा ऐरी और मीतू जैन

जब बड़े मीडिया घराने खुद कार्पोरेट के पैसे पर पल चल रहे हों तो यहां काम करने वाले पत्रकार धीरे धीरे कार्पोरेट परस्त व कार्पोरेट पोषित हो ही जाएंगे. जिनके नाम खुल जा रहे हैं, वो ऐलानिया चोर साबित हो जा रहे हैं. कभी बरखा दत्त, वीर सांघवी जैसे दर्जनों पत्रकारों का नाम लाबिस्ट के रूप में सामने आया, महादलाल नीरा राडिया के आडियो टेप के जरिए. अब फिर तीन पत्रकारों का नाम आया है, कार्पोरेट परस्ती को लेकर. ये हैं- संदीप बामजई, अनुपमा ऐरी और मीतू जैन.

सुधर भी जाओ हिंदी के संपादकों….

Dhiraj Kulshreshtha : घटिया तो हमेशा बाजार से अपने आप बाहर होते आए हैं… पत्रकार सब बनना चाहते हैं,कुछ ने तो पैसे लेकर पत्रकार बनाने की दुकानें भी खोल लीं हैं….पैसे देकर आईडी ले जाओ…मौहल्ले में रोब गांठो…घर के बाहर बोर्ड लगा लो। अच्छी रिपोर्ट सबको चाहिए…पर पैसे कोई नहीं खर्च करना चाहता….स्वनामधन्य बड़े प्रकाशनों का भी हाल बेहाल है…पिछले बीस साल में अखबार एक रुपए से बढ़कर तीन रुपए का हो गया…विज्ञापन की रेट दस गुनी बढ़ गई….

प्रधानमंत्री मोदी भूमि अधिग्रहण मामले में रणनीतिक चूक के शिकार हुए

भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आते ही जिस तरह भूमि अधिग्रहण को लेकर एक अध्यादेश प्रस्तुत कर स्वयं को विवादों में डाल दिया है, वह बात चौंकाने वाली है। यहां तक कि भाजपा और संघ परिवार के तमाम संगठन भी इस बात को समझ पाने में असफल हैं कि जिस कानून को लम्बी चर्चा और विवादों के बाद सबकी सहमति से 2013 में पास किया गया, उस पर बिना किसी संवाद के एक नया अध्यादेश और फिर कानून लाने की जरूरत क्या थी? इस पूरे प्रसंग में साफ दिखता है कि केन्द्र सरकार के अलावा कोई भी पक्ष इस विधेयक के साथ नहीं है।