मजीठिया वेज बोर्ड मुद्दे पर सीनियर एडवोकेट मदन तिवारी का जोरदार इंटरव्यू, देखें वीडियो

बिहार के गया जिले के सीनियर एडवोकेट मदन तिवारी मजीठिया वेज बोर्ड मुद्दे पर गया के ही दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार पंकज जी का फ्री में मुकदमा लड़ रहे हैं और जागरण प्रबंधन के हर दांव को न्यायालय में फेल करते हुए विजयश्री दिलाने की ओर अग्रसर हैं. पत्रकार पंकज ने मजीठिया वेज बोर्ड के मुद्दे पर मदन तिवारी से विस्तार से बातचीत की ताकि देश भर के मजीठिया क्रांतिकारी इस मामले के विभिन्न बिंदुओं को बारीकी से समझ कर अपने संघर्ष के हथियार को पैना कर सकें.

देखें वीडियो इंटरव्यू….

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सुरक्षा गार्ड लेकर डीएलसी आफिस पहुंचे एचआर मैनेजर

बरेली से खबर आ रही है कि मजीठिया क्रांतिकारियों के गुस्से व आक्रोश से हिन्दुस्तान प्रबंधन अनहोनी को लेकर डरा-सहमा है। यही वजह है कि मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर वेतन-भत्तों व एरियर के केस की सुनवाई के दौरान हिन्दुस्तान बरेली की सहायक प्रबंधक (एचआर) सत्येंद्र अवस्थी कंपनी के दो निजी सुरक्षा गार्ड लेकर उपश्रमायुक्त कार्यालय पहुंचे।

दरअसल केसों की सुनवाई की पिछली तारीख पर हिन्दुस्तान बरेली के सहायक प्रबंधक (एचआर) को उपश्रमायुक्त कार्यालय के कैम्पस में मजीठिया क्रांतिकारियों ने घेर लिया था, सहायक प्रबंधक (एचआर) को पिटाई से बचने के लिए डीएलसी के कक्ष में छिपना पड़ा था। मजीठिया क्रांतिकारियों ने पीटने के लिए हाथ में जूता निकाल लिया था। मौके पर तमाम भीड़ इकट्ठा हो गई थी, उस समय सहायक प्रबंधक (एचआर) की काफी फजीहत हुई। बताते हैं कि सुनवाई के दौरान सहायक प्रबंधक (एचआर) के आँखे तरेरने से मजीठिया क्रांतिकारी भड़क गए थे और बाहर निकलते ही हिन्दुस्तान की ओर से पैरवी में आये सहायक प्रबंधक (एचआर) को पकड़ लिया।

सूत्र बताते हैं कि सहायक प्रबंधक (एचआर) ने यूनिट हेड को सारी स्थिति बताई और मजीठिया केसों की पैरवी में लेबर आफिस जाने से मना कर दिया। तब हिन्दुस्तान प्रबंधन ने सहायक प्रबंधक (एचआर) को कंपनी की ओर से सुरक्षा मुहैया कराने का निर्णय लिया। इसी के तहत हिन्दुस्तान के सहायक प्रबंधक (एचआर) जब मजीठिया केसों की सुनवाई में पैरवी को डीएलसी ऑफिस पहुंचे तो उनके साथ सुरक्षा में दो गार्ड भी थे।

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मजीठिया वेज बोर्ड मामले में ‘श्री अंबिका प्रिंटर्स’ को साढ़े सैंतीस लाख चुकाने का आदेश

एक खबर महाराष्ट्र के कोल्हापुर से आ रही है… मुंबई सहित महाराष्ट्र राज्य के कई स्थानों से प्रकाशित होने वाले मराठी अखबार ‘पुण्यनगरी’ की प्रबंधन कंपनी ‘श्री अंबिका प्रिंटर्स’ के विरुद्ध भूपेश देवप्पा कुंभार नामक जिस कर्मचारी ने साढ़े सैंतीस लाख रुपए पाने का क्लेम लगाया था, स्थानीय सहायक कामगार आयुक्त अनिल द. गुरव ने उसे सही पाने के बाद उक्त कंपनी को नोटिस भेजकर श्री कुंभार को 37,53,417 रुपए अविलंब देने का आदेश जारी कर दिया है.

आपको बता दें कि ‘श्री अंबिका प्रिंटर्स’ न केवल मराठी अखबारों का प्रकाशन करती है, अपितु हिंदी और कर्नाटक भाषा के भी अखबार प्रकाशित कर रही है। इसके ‘पुण्यनगरी’ अखबार में बतौर उप-संपादक कार्यरत भूपेश कुंभार (50 वर्ष) का कंपनी ने एक दिन अचानक कोल्हापुर से बेलगांव ट्रांसफर कर दिया। हालांकि ट्रांसफर की इस केस की सुनवाई अभी कोल्हापुर स्थित इंडस्ट्रियल कोर्ट में चल रही है, मगर इसी बीच कुंभार ने कंपनी से मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक अपने वेतन व बकाए की मांग की तो इस बात से गुस्साए प्रबंधन ने पहले तो इनका वेतन रोक लिया, फिर दफ्तर के अंदर इनके प्रवेश पर रोक भी लगा दी.

जाहिर है कि कुंभार के सामने आजीविका का घोर संकट आ खड़ा हुआ… बच्चों की पढ़ाई के लिए इन्हें अपना घर तो बेचना ही पड़ा, रोजाना के खर्चे की समस्या से निपटने की खातिर मिट्‌टी के दीये तक बेचने पड़े। भूपेश कुंभार कहते हैं- ‘मैं खुशनसीब हूं कि मुझे मंजुला (47 वर्ष) जैसी पत्नी मिली… उसने मेरा हर कदम पर भरपूर साथ दिया, साथ ही दोनों बेटों की अच्छी पढ़ाई को देखते मैंने अपना मनोबल हमेशा कायम रखा!’ यहां बताना उचित होगा कि कुंभार दंपत्ति ने बड़े बेटे दिवाकर को एमएससी के साथ बीएड् करवा दिया है, साथ ही दूसरा बेटा श्रीमय भी इस समय बीए (द्वितीय वर्ष) का छात्र है… सच तो यह है कि संघर्ष के समक्ष घुटने टेक देने वालों के लिए भूपेश कुंभार एक उदाहरण बनकर उभरे हैं!

बहरहाल, भूपेश कुंभार ने सम्मान बरकरार रखने की खातिर अपना संघर्ष जारी रखा है। भूपेश के उत्साह को देखते हुए अगर मुंबई के तमाम मजीठिया क्रांतिकारियों ने उनका साथ दिया… विशेषकर एनयूजे (महाराष्ट्र) की महासचिव शीतल करदेकर ने मुखर तरीके से भूपेश कुंभार का साथ दिया तो सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा ने मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ मार्गदर्शन करने में भी उनकी बहुत मदद की। इसका परिणाम यह हुआ कि सहायक कामगार आयुक्त श्री गुरव ने कुंभार के दावे पर मोहर लगाते हुए जहां ‘श्री अंबिका प्रिंटर्स’ प्रबंधन को आदेश जारी कर दिया है कि वह अपने कर्मचारी कुंभार के बकाए का शीघ्र भुगतान करे, वहीं कुंभार ने प्रबंधन की भावी चालों को ध्यान में रखते हुए आज मुंबई पहुंच कर यहां के माननीय हाई कोर्ट में एडवोकेट एस. पी. पांडे के जरिए कैविएट भी लगवा दी है!

-मुंबई से सुनील कुकरेती की रिपोर्ट

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फिरोजपुर से भास्कर कर्मी राजेन्द्र मल्होत्रा के पक्ष में जारी हुयी साढ़े बाईस लाख की आरसी

पंजाब के फिरोजपुर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां दैनिक भास्कर में कार्यरत ब्यूरो चीफ राजेन्द्र मल्होत्रा के आवेदन को सही मानते हुये फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त सुनील कुमार भोरीवाल ने दैनिक भास्कर प्रबंधन के खिलाफ २२ लाख ५२ हजार ९४५ रुपये की वसूली के लिये रिकवरी सार्टिफिकेट जारी की है। राजेन्द्र मल्होत्रा ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अपने बकाये की रकम के लिये सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा की देख-रेख में फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त के समक्ष १७ (१) का क्लेम लगाया था।

इसके बाद कंपनी को नोटिस मिली तो दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डीबी कार्प ने राजेन्द्र मल्होत्रा का ट्रांसफर बिहार के दरभंगा में कर दिया। उसके बाद राजेन्द्र मल्होत्रा ने एडवोकेट उमेश शर्मा के बताये रास्ते पर चलते हुये फिरोजपुर के इंडस्ट्रीयल कोर्ट में केस लगाया और ट्रांसफर पर स्टे की मांग की। इंडस्ट्रीयल कोर्ट के स्थानीय एडवोकेट ने राजेन्द्र मल्होत्रा का मजबूती से पक्ष रखा और इंडस्ट्रीयल कोर्ट ने राजेन्द्र के ट्रांसफर पर रोक लगा दी।

इसके बाद राजेन्द्र कंपनी में ज्वाईन करने गये तो उन्हे कंपनी ने ज्वाईन नहीं कराया। इसके बाद भी राजेन्द्र मल्होत्रा ने हिम्मत नहीं हारी तथा डीबी कार्प के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल, स्टेट हेड बलदेव शर्मा, कार्मिक विभाग के हेड मनोज धवन, एडिटर नरेन्द्र शर्मा और रोहित चौधरी सहित पांच लोगों के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस फाईल किया। इसकी सुनवाई चल रही है।

उधर राजेन्द्र मल्होत्रा के मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार मांगे गये दावे को सही मानते हुये फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त सुनील कुमार भोरीवाल ने दैनिक प्रबंधन के खिलाफ २२ लाख ५२ हजार ९४५ रुपये की वसूली के लिये रिकवरी सार्टिफिकेट जारी कर दी है। राजेन्द्र मल्होत्रा दैनिक भास्कर में पहले स्ट्रिंगर थे। बाद में उन्हें रिपोर्टर बनाया गया। उसके बाद उन्हें चीफ रिपोर्टर बनाया गया। चीफ रिपोर्टर बनने के बाद उन्हें ब्यूरो चीफ बना दिया गया। मगर जैसे ही उन्होंने प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड की मांग की, उनका ट्रांसफर बिहार के दरभंगा में कर दिया गया। मगर अब कंपनी के पास बकाया देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

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श्रमायुक्त ने लिखित रूप से माना- सुप्रीम कोर्ट को ठेंगा दिखा रहे ८४ अखबार

न्यायालय के आदेश के बावजूद अब तक नहीं लागू किया है जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश.. आरटीआई से हुआ खुलासा… 

मुंबई : माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बावजूद महाराष्ट्र के ८४ अखबार मालिकों ने अब तक जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश अपने यहां लागू नहीं किया है। यह खुलासा हुआ है आरटीआई के जरिये। महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त यशवंत केरुरे द्वारा डिप्टी डायरेक्टर जनरल, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार को १६ दिसंबर २०१७ को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

इन ८४ अखबारों में ६१ अखबार मालिक ऐसे हैं जिन्होने अपने यहां जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश पूरी तरह लागू नहीं किया है जबकि २३ अखबार मालिक ऐसे हैं जिन्होंने आंशिक रूप से अपने यहां मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू किया है। यह रिपोर्ट जुलाई २०१७ से सितंबर २०१७ के बीच की मजीठिया वेज बोर्ड की क्रियान्यवयन रिपोर्ट पर आधारित है।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जुलाई २०१७ से सितंबर २०१७ के बीच महाराष्ट्र में टोटल २७३० समाचार पत्रों का प्रकाशन किया गया है जिसमें २६०१ समाचार पत्र ऐसे हैं जिसमें एक या दो लोग काम करते हैं जबकि १२९ समाचार पत्र ऐसे हैं जिसमें दो से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। इन १२९ समाचार पत्रों में ४५ समाचार पत्र ऐसे हैं जिन्होंने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश पूरी तरह लागू कर दी है जबकि २३ समाचार पत्रों ने सिफारिश आंशिक रूप से लागू किया है।

६१ समाचार पत्र मालिकों ने माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद भी मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश अपने यहां लागू नहीं किया। इस जानकारी में बताया गया है कि इन समाचार पत्रों के १४८ कर्मचारियों ने केस उनके कार्यालय में फाइल किया था जिनमें से ९१ मामलों का निस्तारण कर दिया गया है जबकि ५७ शिकायतों पर कार्रवाई प्रगति पर है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

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मजीठिया वेज बोर्ड मामले में दैनिक भास्कर के खिलाफ एक और आरसी जारी

मुंबई से खबर आ रही है कि यहां दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लिमिटेड में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे का रिकवरी सर्टीफिकेट (आरसी) जारी किया गया है। इस आरसी को मुंबई (उपनगर) के कलेक्टर को भेज कर आदेश दिया गया है कि वह आवेदक के पक्ष में कंपनी से भू-राजस्व की भांति वसूली करें और आवेदक अस्बर्ट गोंजाल्विस को यह धनराशि प्रदान कराएं। आपको बता दें कि इस मामले में अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अपने एडवोकेट एस. पी. पांडे के जरिए मुंबई उच्च न्यायालय में कैविएट भी लगवा दी है।

डी. बी. कॉर्प लि. के मुंबई स्थित बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स वाले कार्यालय में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस का कंपनी ने अन्यत्र ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अदालत की शरण ली और उधर जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपने बकाये की रकम और वेतन-वृद्धि के लिए उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा के दिशा-निर्देश पर चलते हुए मुंबई के कामगार विभाग में क्लेम भी लगा दिया था।

करीब एक साल तक चली सुनवाई के बाद लेबर विभाग ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष को सही पाया तथा कंपनी को नोटिस जारी कर साफ कहा कि वह आवेदक को उसका बकाया 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे जमा कराए, परंतु दुनिया के चौथे सबसे बड़े अखबार होने के घमंड में चूर दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लि. ने जब यह पैसा नहीं जमा किया तो सहायक कामगार आयुक्त वी. आर. जाधव ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में आरसी जारी कर दी और कलेक्टर को आदेश दिया कि वह डी. बी. कॉर्प लि. से भू-राजस्व नियम के तहत उक्त राशि की वसूली करके अस्बर्ट गोंजाल्विस को दिलाएं।

गौरतलब है कि इसके पहले डी. बी. कॉर्प लि. के समाचार-पत्र दैनिक भास्कर के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के साथ रिसेप्शनिस्ट लतिका चव्हाण और आलिया शेख के पक्ष में भी कामगार विभाग ने आरसी जारी की थी… यह संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में जारी हुई पहली आरसी थी, मगर आरसी का विरोध करने के लिए संबंधित कंपनी जब मुंबई उच्च न्यायालय गई तो माननीय उच्च न्यायालय ने डी. बी. कॉर्प लि. को निर्देश दिया कि वह तीनों आवेदकों के बकाये रकम में से सर्वप्रथम 50 प्रतिशत रकम कोर्ट में जमा करे।

मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद डी. बी. कॉर्प लि. सर्वोच्च न्यायालय चली गई, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कह दिया कि मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश पर उसे दखल देने की आवश्यकता नहीं है, अत: डी. बी. कॉर्प लि. के अनुरोध को खारिज किया जाता है। ऐसे में इस कंपनी के पास और कोई विकल्प नहीं बचा था, लिहाजा डी. बी. कॉर्प लि. पुन: मुंबई उच्च न्यायालय आई और धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, लतिका चव्हाण और आलिया शेख के बकाये में से 50 फीसदी की राशि वहां जमा करा दिया। सो, माना जा रहा है कि अस्बर्ट गोंजाल्विस के मामले में भी अब डी. बी. कॉर्प लि. को जल्दी ही उनके बकाये की 50 प्रतिशत रकम मुंबई उच्च न्यायालय में जमा करानी होगी।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

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मीडिया का नंगा सच राज्यसभा में सरेआम सुना दिया गया, सबको देखना-सुनना चाहिए ये वीडियो

वैसे तो नरेश अग्रवाल भी खुद दूध के धुले नहीं हैं लेकिन वो राज्यसभा में कई बार अक्सर तीखी और सच्ची बातें कह जाते हैं, जिसके चलते ढेर सारे लोग उन्हें तमाम दबावों के बावजूद अक्सर सच बोल जाने वाला नेता करार देते हैं. राज्यसभा के हालिया सेशन में नरेश ने आजकल की मीडिया का नंगा सच सार्वजनिक कर दिया. इसे हर मीडियाकर्मी को तो देखना-सुनना चाहिए ही, देश के सारे नागरिकों तक भी पहुंचाना चाहिए ताकि आधुनिक पत्रकारिता और आजकल के पत्रकारों को सही-सही वर्णन सब तक पहुंच सके. वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

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कर्मचारियों के द्वेषपूर्ण तबादला मामले में कोर्ट ने दैनिक भास्कर प्रबंधन को फटकारा

ट्रांसफर पर यथास्थिति आदेश के बावजूद कंपनी ने अप्रैल से बैठा दिया था घर… कोर्ट ने कहा- जब तक केस का फैसला नहीं हो जाता, कर्मचारियों को होशंगाबाद में ही पूर्ववत करने दें काम, अप्रैल से अब तक का पूरा वेतन भी दें तत्काल… मजीठिया रिकवरी केस की सुनवाई के दौरान द्वेषपूर्ण तरीके से रायपुर स्थानांतरित किए गए तीन कर्मचारियों के मामले में लेबर कोर्ट ने दैनिक भास्कर को कड़ी फटकार लगाई है। कर्मचारियों को मई से अब तक का पूरा वेतन देने और फैसला होने तक होशंगाबाद में ही कार्य करवाए जाने का आदेश कोर्ट ने दिया है। मामले में कर्मचारियों ने बिना विलंब किए जबलपुर हाईकोर्ट में कैवियट भी फाइल कर दी है। अब यदि भास्कर ने लेबर कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील भी की तो कर्मचारियों का पक्ष सुने बिना भास्कर को कोर्ट से किसी प्रकार की अंतरिम राहत नहीं मिलेगी।

होशंगाबाद से एक बार फिर दैनिक भास्कर प्रबंधन के होश उड़ा देने वाली खबर आई है। मजीठिया वेजबोर्ड की रिकवरी केस लगाने पर यहां के तीन कर्मचारियों प्रणय मालवीय, नरेंद्र कुमार और वीरेंद्र सिंह को भास्कर प्रबंधन ने द्वेषपूर्वक रायपुर स्थानांतरित कर दिया था जिस पर लेबर कोर्ट ने रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। चूंकि इन कर्मचारियों ने कोर्ट में शिकायत की हुई थी इसलिए रायपुर जाइन नहीं किया, वहीं भास्कर प्रबंधन ने एकतरफा रिलीव कर दिया और कोर्ट आदेश के बावजूद होशंगाबाद में जाइन नहीं करने दिया।

इसके बाद प्रबंधन ने कर्मचारियों को आर्थिक रुप से प्रताड़ित करने के लिए काम नहीं तो वेतन नहीं सिद्धांत की आड़ लेकर मई से वेतन रोक लिया जिसे कर्मचारियों के अधिवक्ता श्री महेश शर्मा द्वारा कोर्ट के समक्ष दमदारी से उठाया गया। इसपर कोर्ट ने भास्कर प्रबंधन द्वारा कोर्ट आदेश की मनमानी व्याख्या पर प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए आदेश दिया कि जब तक केस का फैसला नहीं हो जाता कर्मचारियों से होशंगाबाद में ही कार्य करवाया जाए। साथ ही तीनों कर्मचारियों को मई से रोके गए पूरे वेतन का भुगतान करने का भी आदेश दिया। मामले में जल्द फैसला हो इसके लिए कोर्ट ने अगली सुनवाई 15 दिसंबर को ही तय की है।

उधर, इस आदेश से भास्कर प्रबंधन उबर भी नहीं पाया था और कर्मचारियों ने स्टे और वेतन के मामले में ताबड़तोड़ तैयारी कर सोमवार को ही जबलपुर हाईकोर्ट में कैवियट भी फाइल कर दी ताकि भास्कर मैनेजमेंट इस मामले में कोई एकतरफा अंतरिम राहत न ले ले। इतनी जल्दी दो-दो बड़े झटके से दैनिक भास्कर प्रबंधन सकते में है। मामले में भास्कर की गलती स्पष्ट उजागर हो रही है इसलिए इस बात की संभावना कम ही है कि उसे हाई कोर्ट से कोई स्टे मिले; यदि ऐसा हुआ तो अगली सुनवाई से पहले भास्कर को इन तीनों कर्मचारियों को बकाया सैलरी देने के साथ ही होशंगाबाद में ही पूर्ववत कार्य पर रखना होगा अन्यथा प्रबंधन पर लेबर कोर्ट की अवमानना का भी मामला बन जाएगा।

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मजीठिया मामले में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने डीबी कार्प के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए

भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (वेतनमंडल अनुभाग)  नयी दिल्ली ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी मीडियाकर्मी सुधीर जगदाले की शिकायत पर महाराष्ट्र के श्रम विभाग के मुख्य सचिव  को २० नवंबर २०१७ को एक पत्र लिखकर मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप सेलरी और बकाया वेतन न देने के प्रकरण पर कारवाई करने का आदेश दिया है। मामला मीडियाकर्मियों के वेतन से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड से संबद्ध है।

सुधीर जगदाले ने आरोप लगाया है कि दैनिक भास्कर समेत कई अखबार छापने वाली कंपनी डीबी कार्प ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को लागू नहीं किया है। इस शिकायत के बाद भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अवर सचिव नविल कपूर ने महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव (श्रम) को एक पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि सुधीर जगदाले औैरंगाबाद, महाराष्ट्र द्वारा प्राप्त पत्र २३ अगस्त २०१७ की प्रति प्रेषित की जाती है। इस संबंध में आपके द्वारा की गयी कार्रवाई हेतु अग्रेसित किया गया था। इस संबंध में आप द्वारा की गयी कार्रवाई  की सूचना अब तक इस मंत्रालय को प्राप्त नहीं हुयी है। आपसे पुन: अनुरोध है कि उक्त शिकायत के संबंध में उचित कारवाई किया जाये।  आप भी पढ़िये श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पत्र…

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

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मजीठिया वेज बोर्ड : SC के आदेश का असर, लेबर कोर्ट ने दी छोटी डेट

सुप्रीम कोर्ट के 13 और 27 अक्टूबर के आदेश का असर अब लेबर कोर्ट में चल रहे मजीठिया वेज बोर्ड के केसों में दिखना शुरू हो गया है। लेबर कोर्ट प्रबंधन की लंबी डेट की मांग को अनसुना कर अब छोटी डेट दे रहे हैं। इससे रिकवरी, ट्रांसफर, टर्मिनेशन आदि के केस लड़ने वाले कर्मचारियों के अंदर उत्साह का संचार दौड़ पड़ा है।

30 अक्‍टूबर को होशांगाबाद लेबर कोर्ट में दैनिक भास्‍कर के 5 कर्मियों के ट्रांसफर और टर्मिनेशन में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की 13 और 27 अक्‍टूबर के आदेश की प्रतियां लगाई गईं। इसके बाद माननीय जज साहब ने 13 नवंबर की तारीख दी। भास्‍कर के वकील ने अपनी तरफ से लंबी डेट मांगने का पूरा प्रयास किया। परंतु माननीय जज साहब ने बोला कि 13 दिन का समय बहुत होता है। इसके बाद भास्‍कर का वकील कुछ नहीं बोल सका और उसके चेहरे का रंग उड़ गया। वहीं कर्मियों के चेहरे पर मुस्‍कान खिल गई। सुनवाई के दौरान 5 में से 4 कर्मियों ने अपनी गवाही पूरी की।

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