Know How a Senior Editor is being FORCED to Leave RSTV

Rajya Sabha TV- Deceit, Deception, Dishonesty, Anything but Parliamentary

Rajya Sabha: How to SET Editor-in-Chief selection

The story of war for control at Rajya Sabha TV (RSTV) could make the most intriguing episode of Game of Thrones a run for TRPs. The channel has been in controversy for years now. There have been incessant allegations of misuse of public money, nepotism, corrupt practices in RSTV. There have been reports of CAG objections. Leading media organizations like DNA, Tehelka wrote articles alleging splurging of Rs 1700 crores. It another matter that both the organizations tendered apology for factually incorrect reporting to the Privileges Committee of Rajya Sabha, when nearly all political parties in the House, except BJP, collectively moved privilege motion against wrong reporting.

‘प्रतिनिधि’ न्यूज चैनल में सेलरी के लिए बवाल, एडिटर इन चीफ घिरे, पुलिस आई (देखें वीडियो)

‘प्रतिनिधि’ न्यूज चैनल वैसे तो दिन भर उपदेश देता रहता है, नैतिकता पिलाता रहता है, सिस्टम ठीक करने के लिए कमर कसे दिखता रहता है लेकिन बात जब खुद के चैनल के भीतर शोषण की आती है तो यहां भी हाल बाकियों जैसा ही दिखता है. खबर है कि इस चैनल के इंप्लाई कई महीने से बिना सेलरी काम कर रहे हैं. एक रोज उनका धैर्य जवाब दे गया. कहा जा रहा है कि चैनल के एडिटर इन चीफ जब बिना सैलरी दिए सामान लेकर जा रहे थे तो कर्मचारियों ने उन्हें रोक लिया और खुद के बकाया पैसे की बात की.

इंडिया न्यूज़ के एडिटर इन चीफ (निवर्तमान!) दीपक चौरसिया के ‘न्यूज़सेंस’ को देश को जानना चाहिए

जेएनयू की ख़बर के साथ इंडिया न्‍यूज़ में शीर्ष स्‍तर पर क्या और कैसे खिलवाड़ किया गया… 17 फरवरी की रात इंडिया न्यूज में क्‍या हुआ था… इसके बारे में खुलकर विस्तार से इंडिया न्‍यूज़ में वरिष्‍ठ पद पर काम कर चुके प्रतिभाशाली पत्रकार अमित कुमार ने अपने फेसबुक वॉल पर लिख कर बताया है जो इस प्रकार है…

Amit Kumar

तो क्या लोकसभा चैनल के संपादक का पद फिक्स था?

एक बात सच है कि सफेदपोश पॉवर के सामने मौजूदा समय में अनुभव, हुनर व ज्ञान की कीमत बहुत कम आंकी जा रही है। लोकसभा सभा चैनल के संपादक का पद पिछले कुछ माह से रिक्त है उसको भरने के लिए सरकार द्वारा आवेदन मांगे गए। मीडिया के कई धुरंधरों ने इसके लिए आवेदन भी किया। लेकिन उसके बाद अंदरखाने जो खेल खेला गया, वह किसी तमाशे से कम नहीं था।