मौकापरस्त शायर मुनव्वर राणा मिल आए प्रधानमंत्री मोदी से!

Nadeem : तो हारो न खुद को तुम… आज एक नामचीन शायर ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की। प्रधानमंत्री से मुलाक़ात में कोई बुराई नहीं, बस उनकी मुलाकात इस लिये थोड़ा खटकी कि बिहार चुनाव के मौके पर उन्हें सबने टीवी के पर्दे पर देश में बढ़ती अहिष्णुता पर फूट फूट कर रोते देखा था। वह जेब में अपना पुरस्कार और पुरस्कार की राशि लेकर आये थे और उसे टीवी चैनल के जरिये वापस कर गए थे। सुना आज जब वो मोदी जी से मिले तो उनके कंधे पर सर रख कर खूब फफक फफक के रोये गोया बचपन के बिछड़े भाई मिले हों।

किसानों की वायरल हुई ये दो तस्वीरें ‘मोदी गान’ में रत टीवी और अखबार वालों को न दिखेंगी न छपेंगी

Mahendra Mishra : ये तमिलनाडु के किसान हैं। दक्षिण भारत से दिल्ली पीएम मोदी के सामने अपनी फरियाद लेकर आये हैं। इनमें ज्यादातर के हाथों में ख़ुदकुशी कर चुके किसानों की खोपड़ियां हैं। बाकी ने हाथ में भीख का कटोरा ले रखा है। पुरुष नंगे बदन हैं और महिलाओं ने केवल पेटीकोट पहना हुआ है। इसके जरिये ये अपनी माली हालत बयान करना चाहते हैं। इन किसानों के इलाकों में 140 वर्षों बाद सबसे बड़ा सूखा पड़ा है।

सारे न्यूज़ चैनल भाजपा के जरखरीद गुलाम बन गए हैं!

Dayanand Pandey : कि पेड न्यूज़ भी शरमा जाए…. आज का दिन न्यूज़ चैनलों के लिए जैसे काला दिन है, कलंक का दिन है। होली के बहाने जिस तरह हर चैनल पर मनोज तिवारी और रवि किशन की गायकी और अभिनय के बहाने मोदियाना माहौल बना रखा है, वह बहुत ही शर्मनाक है। राजू श्रीवास्तव, सुनील पाल आदि की घटिया कामेडी, कुमार विश्वास की स्तरहीन कविताओं के मार्फ़त जिस तरह कांग्रेस आदि पार्टियों पर तंज इतना घटिया रहा कि अब क्या कहें।

सच ये है कि मोदी अब एक ब्रैंड में बदल गए हैं : राणा यशवंत

उत्तर प्रदेश से जो जनादेश है उसका चाहे जितना पोस्टमार्टम कर लें, खुद बीजेपी के लिये भी ये समझ पाना मुश्किल है कि ऐसा हुआ कैसे! लेकिन सुनामी आई और इसने कई जकड़बंदियों, राजनीतिक रिवाजों, फरेब के हवाईकिलों और बेहूदगियों-बदज़ुबानियों को ध्वस्त कर दिया. सामाजिक न्याय के नाम पर जातियों को अपनी जागीर बनानेवाले नेताओं के लिये ये जनादेश एक सबक है. कानून-व्यवस्था और सड़क-बिजली जैसी बुनियादी जरुरतों की जगह एक्सप्रेस-वे और स्मार्ट फोन देने की राजनीति के लिये ये जनादेश एक सबक है.

राहुल गांधी की ‘पप्पू’ छवि बनाने वाली भाषण कला के माहिर खिलाड़ी हैं मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में कभी मजाकिया लहजे में तो कभी आक्रामक अंदाज में राहुल गांधी को हमेशा निशाने पर रखते हैं। दरअसल, राहुल गांधी के मामले में अपने भाषणों में मोदी इन दिनों बहुत आक्रामक दिख रहे हैं। मतलब साफ है कि माफ करना उनकी फितरत में नहीं है। और बात जब कांग्रेस और राहुल गांधी की हो, तो वे कुछ ज्यादा ही सख्त हो जाते हैं।

राजनीतिक दलों के खाते में पड़े काले धन का क्या कर रहे हैं प्रधानमंत्री जी!

यह देश का दुर्भाग्य ही है कि काले धन के लिए सड़क से लेकर संसद तक बवाल काटने वाले राजनीतिक दलों के खाते में पड़े काले धन का कुछ बिगड़ता नहीं दिख रहा है। सरकार हर जगह बिना हिसाब-किताब वाले धन पर जुर्माना लगाने की बात कर रही है पर राजनीतिक दलों के खाते में 500 और 1, 000 रुपये के पुराने नोटों में जमा राशि पर आयकर नहीं लगाएगी।  इसका मतलब है कि आप किसी भी नाम से राजनीतिक दल का रजिस्ट्रेसन करा लीजिये और फिर इसके खाते में चाहे कितना काला धन दाल दीजिए। कोई पूछने वाला नहीं है। देश में हजारों राजनीतिक दल हैं। कितने दल चुनाव लड़ते हैं, बस नाम मात्र के।  अधिकतर दल तो काले धन का सफेद करने तक सीमित हैं। ऐसा नहीं कि चुनाव लड़ने वाले दलों के खाते में काला धन नहीं हैं। आज की तारीख में तो राजनीतिक दलों के खाते में अधिकतर धन तो काला ही है। चाहे किसी कारपोरेट घराने ने दिया हो या फिर किसी प्रॉपर्टी डीलर ने या फिर किसी अधिकारी ने। यही हाल देश में कुकुरमुत्तों की तरह खुले पड़े एनजीओ का है।

मोदी जी, आप 8 नवम्बर को सही थे या अब 29 नवम्बर को?

कालेधन के रद्दी कागज को नोटों के रूप में फिर जिंदा क्यों किया… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आपने कालेधन के खिलाफ जो सर्जिकल स्ट्राइक की उसे देश की अधिकांश जनता ने तमाम दिक्कतों के बावजूद सराहा। 8 नवम्बर को रात 8 बजे आपने देश के नाम अपने संदेश में नोटबंदी की घोषणा करते हुए कहा कि आज आधी रात यानि 12 बजे के बाद 1000 और 500 रुपए के चल रहे नोट अवैध हो जाएंगे। इससे ईमानदार जनता, कारोबारी, करदाता, गृहणियां कतई न घबराए और वे अपने पुराने नोट दो दिन बाद से 30 दिसम्बर तक बैंकों और डाक घरों में जाकर जमा कर दें और बदले में 500 और 2000 के नए नोट पा लें।

प्रचार-प्रशंसा के भूखे मोदी ने ढाई साल में 1100 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर फूंक डाला

केंद्र सरकार ने पिछले ढाई साल के कार्यकाल में पीएम मोदी पर केंद्रित विज्ञापनों पर 1100 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं. आरटीआई कार्यकर्ता रामवीर सिंह के सवालों पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. यह खर्च एक जून 2014 से 31 अगस्त 2016 के बीच किया गया. हिसाब लगाया जाए तो इसका मतलब है कि सिर्फ विज्ञापनों पर सरकार ने 1.4 करोड़ रूपए रोज़ाना खर्च किए हैं. देखा जाए तो यह भारत के मंगल अभियान मंगल यान के खर्च से दोगुना है. इसे दुनिया का सबसे कम खर्चीला अंतरग्रहीय अभियान माना जाता है, जिसकी कीमत सिर्फ 450 करोड़ रुपए है.

सहारा-बिड़ला से मोदी द्वारा घूस लेने के मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार

नई दिल्ली : सहारा और बिड़ला से नरेन्द्र मोदी द्वारा घूस लिए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. इस मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को है. सहारा और बिड़ला ग्रुप की ओर से राजनेताओं को फंड देने के आरोप की याचिका सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट का तैयार हो जाना एक बड़ा घटनाक्रम है. दरअसल इन दो बड़ी कंपनियों पर पड़े छापों में बरामद दस्तावेजों की जांच के लिए गैर-सरकारी संगठन कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

पीएम मोदी ने सीएम रहते सहारा समूह और बिड़ला ग्रुप से रिश्वत लिया! (देखें दस्तावेज)

सहारा और बिड़ला द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को 55 करोड़ रिश्वत देने की संपूर्ण कथा

प्रधानमंत्री मोदी जब 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की देश को सूचना दे रहे थे, उससे बहुत पहले सु्प्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण देश की प्रमुख आधा दर्जन से अधिक सरकारी जांच एजेंसियों को लिखकर बता चुके थे कि न सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ने ​बल्कि देश के अन्य तीन और मुख्यमंत्रियों ने करोड़ों का कैश उद्योगपतियों से वसूला है… प्रशांत भूषण ने जिन एजेंसियों को डाक्यूमेंट्स भेजे हैं, उनमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा कालेधन को लेकर बनाई गई दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम, निदेशक सीबीआई, निदेशक ईडी, निदेशक सीबीडीटी और निदेशक सीवीसी शामिल हैं…

मोदी के ‘जय श्री राम’ कहने का रवीश वैसे ही मज़ाक उड़ाएंगे जैसे वरुण गांधी का मज़ाक बनाया था?

Abhishek Srivastava : हां जी, तो दशहरा बीत गया। एक झंझट खत्‍म हुआ। आइए अब मुहर्रम मनाते हैं, कि दुनिया के सबसे बड़े संसदीय लोकतंत्र के सबसे ऊंचे संवैधानिक पद पर बैठे शख्‍स ने त्‍योहार के बहाने पांच बार ”जय श्रीराम” का नारा लगाया और यह कह कर कि आवाज़ दूर तक पहुंचनी चाहिए, जनता को भी ललकार दिया। ‘अपने’ रवीश कुमार कहां हैं भाई? जब प्रधानजी नारा लगा रहे थे, तब मैं सोच रहा था कि क्‍या रवीश कुमार अपने प्राइम टाइम में वैसे ही उनका मज़ाक उड़ाएंगे जैसे 2009 में पीलीभीत में वरुण गांधी द्वारा चुनावी रैली में यह नारा लगाने पर उन्‍होंने उनका मज़ाक बनाया था?

मोदी को मैदान में उतार बीजेपी ने जो रामबाण चलाया वह कितना कारगर साबित होगा

पिछले कुछ हफ़्तों में केंद्र सरकार की कई मोर्चों पर किरकिरी हुई है. पहला मामला बीजेपी की आतंरिक कलह से जुड़ा है. सुब्रमण्यम स्वामी ने अरुण जेटली पर अप्रत्यक्ष रूप से हमले किये हैं. रघुराम राजन से लेकर वित्त मंत्रालय से जुड़े अन्य अधिकारियों तक उनके लगातार हमले बीजेपी को परेशान किये हुए हैं. मीडिया में इस मामले को जोरशोर से उछाला गया है. बीजेपी बैकफुट पर है.  दूसरा मामला है भारत की अंतर्राष्ट्रीय नीति से संबंधित. भारत को NSG की सदस्यता की कितनी आवश्यकता थी, थी भी कि नहीं, ये शायद हम अच्छे से नहीं जानते, पर ये अवश्य जानते हैं कि चीन ने हमारा खेल बिगाड़ दिया. यहाँ भी भारत सरकार की किरकिरी हुई. नरेन्द्र मोदी की एग्रेसिव अंतर्राष्ट्रीय छवि को धक्का पहुंचा है.

पूंजीपतियों पर रहम, मध्यवर्ग पर सितम, ए मोदिया ये जुल्म न कर…

Yashwant Singh : आज गुस्सा आ रहा है। टैक्स टैक्स टैक्स। रेल टिकट ऑनलाइन बुक करने पर। बैंक में अकाउंट रखने पर। अकाउंट में पैसा कम रखने पर। रेस्टोरेंट में खाने पर। गूगल से पैसा कमाने पर। सर्वर की सेवा लेने पर। तीर्थ यात्रा के लिए जाने पर। UFFFFFFFF…..

मोदी सरकार पहली ऐसी सरकार है जो विपक्ष के विरोध की दशा-दिशा तय कर देती है!

Ajay Prakash : भाजपा सरकार के दो साल पूरे होने पर खूब आकलन हो रहा है। होना भी चाहिए। पर लोकतंत्र में बिना विपक्ष के क्या आकलन। इसलिए देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की भी इन दो वर्षों में बनी भूमिका का विश्लेषण होना चाहिए। मैं पहले भी कहता रहा हूं और फिर कह रहा हूं कि संसद में भारी बहुमत वाली मोदी सरकार देश की पहली सरकार है जो विपक्ष के विरोध को तय करती है। लगभग डिक्टेट करती है। विपक्षी क्या विरोध करेंगे, कैसा विरोध करेंगे और कितना करेंगे, इसकी दिशा संघ और सरकार तय करती है। समझने के लिए लव जेहाद से लेकर देशद्रोह तक के मसले को आप याद कर सकते हैं।

मोदी जी के पास डिग्री है तो सत्यमेव जयते के साथ ट्वीट क्यों नहीं कर दे रहे?

Sanjaya Kumar Singh : मोदी जी के पास डिग्री है तो सत्यमेव जयते के साथ ट्वीट क्यों नहीं कर दे रहे हैं। और नहीं कर रहे हैं तो भक्तों ने जैसे कन्हैया को नेता बनाया वैसे ही अरविन्द केजरीवाल की पार्टी को पंजाब चुनाव जीतने का मौका क्यों दे रहे हैं। भक्तों के उछलकूद का लाभ अरविन्द केजरीवाल को मिल रहा है। अलमारी में रखी डिग्री अंडा-बच्चा तो देती नहीं। ना बीमार होकर अस्पताल जाती है। आमलोगों की डिग्री तो पत्नी कहीं रख देगी, चूल्हा जला चुकी होगी या बच्चों के टिफिन पैक करके दे देगी। मोदी जी के साथ तो ये सब लफड़ा भी नहीं है। फिर इतनी देर?

देश भक्त मोदी के कारिंदो का काला चिट्ठा आरटीआई के जरिए हुआ उजागर

Vishwanath Chaturvedi : देश भक्त मोदी के कारिंदो का काला चिट्ठा जानिये…. पूँजीपतियों की किस किस कम्पनी ने लगाया चूना, देश और देशभक्ति के नाम पर : आर टी आई से हुआ खुलासा… आप एक विजय माल्या की बात करते हैं.. मैं आपको बता दूँ अभी हाल में एक आरटीआई आवेदन के ज़रिये इस बात का खुलासा हुआ कि 2013 से 2015 के बीच देश के सरकारी बैंकों ने एक लाख 14 हज़ार करोड़ रुपये के कर्जे माफ़ कर दिये। इनमें से 95 प्रतिशत कर्जे बड़े और मझोले उद्योगों के करोड़पति मालिकों को दिये गये थे। यह रकम कितनी बड़ी है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर ये सारे कर्ज़दार अपना कर्ज़ा लौटा देते तो 2015 में देश में रक्षा, शिक्षा, हाईवे और स्वास्थ्य पर खर्च हुई पूरी राशि का खर्च इसी से निकल आती।

चीन के दबाव में झुकी 56 इंच के सीने वाली सरकार!

Priyabhanshu Ranjan : तो क्या वाकई चीन के दबाव में झुक गई 56 इंच के सीने वाली मोदी सरकार? पिछले दिनों खबर आई कि UN में आतंकवादी मसूद अजहर पर पाबंदी लगाने के भारत के प्रस्ताव पर चीन की ओर से अड़ंगा (Veto) लगाए जाने के जवाब में मोदी सरकार ने चीन के विद्रोही उइगुर नेता Dolkun Isa को भारत आने का वीजा दिया है ताकि वो यहां चीन के विद्रोही नेताओं (Dissident Leaders) की बैठक में शिरकत कर सके।

आईसीयू में भर्ती सियाचिन के शेर हनुमनथप्पा को देखने पीएम और कैमरामैन को जाने देना निश्चित रूप से राजनीति है

Sadhvi Meenu Jain : प्रचार की इतनी भूख कि आईसीयू (ICU) के नियम-कायदों को ताक़ पर रखकर ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रहे सियाचिन के जांबाज का हालचाल पूछने पहुंच गए. बिना मास्क लगाए आपको और सेना के इन अफसरों को भीतर जाने किसने दिया? सेना के जवान की फ़िक्र कम, फोटो खिंचवाने की फ़िक्र ज्यादा है आपको. वाकई देश के प्रधानमंत्री का सुशिक्षित होना निहायत ज़रूरी है. यह फ़ोटो प्रेस इन्फार्मेशन ब्यूरो Press Information Bureau ने जारी किया है.

मोदी की झुंझलाहट का असली कारण कांग्रेस नहीं खुद मोदी ही हैं

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया है कि ‘एक परिवार’ उनके काम में बाधा डाल रहा है। वह अपनी पराजय का बदला ले रहा है। वह राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित नहीं होने दे रहा है। यदि वे विधेयक कानून बन जाते तो लाखों मजदूरों को बोनस मिलने लगता, सारे देश में एक रूप सेवा कर प्रणाली लागू हो जाती, जल यातायात कानून बनने पर दर्जनों नदियां सड़कों की तरह उपयोगी बन जातीं, किसानों के हितों की रक्षा होती।

मोदी का जादू चुक गया, चैनल अब नहीं दिखा रहे लाइव कवरेज

मोदी के भाषण अब चुक गए हैं. उनका जादू खत्म हो चुका है. इसलिए उनकी अब टीवी चैनलों को जरूरत नहीं. एक दौर था जब मोदी के भाषण को घंटों दिखाने के कारण टीवी चैनलों की टीआरपी आसमान पर थी. तब मोदी खुद को नंबर वन होने का दावा कर रहे थे. लोकसभा चुनाव के दौरान तो प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेने की प्रतिस्पर्धा चल पड़ी थी. मोदी भी अपने अनुसार चैनलों को चुनकर उनको खूब टीआरपी दिलवा रहे थे. शायद इसी का असर रहा कि कुछ टीवी चैनलों को इसका खूब लाभ मिला. मोदी अपने भाषणों से चैनलों को टीआरपी देते चले गए और मोदी चैनलों के मुनाफे के धंधे में तब्दील हो गए.

व्यापारी संगठन के इन सवालों के क्रमवार जवाब कोई भाजपाई या मोदी भक्त दे तो अच्छा रहेगा

Yashwant Singh : भड़ास के पास ALL DELHI COMPUTER TRADERS ASSOCIATION (ADCTA) की तरफ से एक ईपत्र आया है, adcta.nehruplace@gmail.com मेल आईडी और Modi Ji, Vyapari ke Man ki Baat bhi suniye शीर्षक से. इसमें जो कुछ कहा गया है, उसका बिंदुवार जवाब कोई भाजपाई या मोदी भक्त दे तो अच्छा रहेगा… पढ़िए व्यापारी संगठन की मेल में कहा क्या गया है.

बादशाह का शाह उर्फ पंचिंग बैग : इस ताजपोशी पर पुराने अध्यक्षों ने कसीदे क्यों काढ़े?

अमित शाह को दुबारा भाजपा अध्यक्ष बना दिया गया। यह क्या है? यह नरेंद्र मोदी की बादशाहत है। मोदी के बाद शाह और शाह के बाद मोदी याने मोदी की बादशाहत! अब सरकार और पार्टी, दोनों पर मोदी का एकाधिकार है। पार्टी-अध्यक्ष का चुनाव था, यह! कैसा चुनाव था, यह? सर्वसम्मत! याने कोई एक भी प्रतिद्वंद्वी नही। जब कोई प्रतिद्वंद्वी  ही नहीं तो वोट क्यों पड़ते? यह बिना वोट का चुनाव है। देश की सारी पार्टियों को भाजपा से सबक लेना चाहिए। याने कांग्रेस-जैसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों को भी! अभी तो अमित शाह अधूरे अध्यक्ष थे। देर से बने थे। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बने थे। उस समय के अध्यक्ष थे, राजनाथसिंह, जिनके नेतृत्व में मोदी जीते और प्रधानमंत्री बने।

जब नीतीश कुमार के कंधे पर हाथ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार की कलाई को सेक्युरिटी वाले ने जमकर मरोड़ दिया था…

Gunjan Sinha : मोदी जी को बहुत धन्यवाद, उन्होंने धीरुभाई अम्बानी, जिनकी जीवन-गाथा और चालाकियों पर ‘गुरु’ जैसी फिल्म बनी, अभिषेक बच्चन की, जिसके बाद शायद अरविन्द अदिगे को बलराम हलवाई को भी भारत का हीरो बनाने में कोई नैतिक दिक्कत नहीं हुई, उन धीरुभाई को भी मरणोपरांत पद्म विभूषण देकर अपना कर्ज एक पुश्त ऊपर तक उतार दिया है. अब भले बेवकूफ कहते रहें कि रतन टाटा को क्यों नही? बीडी शर्मा साहब को क्यों नही? उस भले अनजान बूढ़े को क्यों नही जो तीस वर्षों अपनी पूरी तनखाह गरीब बच्चों की स्कूल फी के लिए देता रहा? उस सब्जी बेचनेवाली को क्यों नहीं जिसने कोलकता में अस्पताल बना दिया? गधो बकते रहो.

अगले लोकसभा चुनाव तक मोदी की मार खा खा के केजरी देशव्यापी हैसियत हासिल कर लेंगे : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : इस देश के जन-मानस में पीड़ित या प्रताड़ित के प्रति सिंपैथी रखने की प्रवृत्ति बहुत भयंकर है. इमोशनल देश जो ठहरा. एक जमाने में मोदी जी इसी टाइप सिंपैथी गेन कर कर के इतने मजबूत हुए कि अब पीएम हैं. पीएम पद ने मोदी का दिमाग घुमा दिया है. या यूं कहिए …

वाशिंगटन पोस्ट की महिला पत्रकार का खुलासा- मोदी सरकार ने विदेशी मीडिया को पटाने के लिए पीआर कंपनियों को पीछे लगाया

वाशिंगटन पोस्ट की इंडिया ब्यूरो चीफ Annie Gowen ने एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने ट्वीट करके जानकारी दी कि पिछले कुछ सप्ताह में दो बार उनसे प्राइवेट पीआर कंपनियों ने सरकारी अफसरों के प्रतिनिधि के बतौर संपर्क करने की कोशिश की. जनता के धन का क्या खूब इस्तेमाल हो रहा है. इस ट्वीट में उन्होंने पीएमओ इंडिया को टैग भी किया है. ((Annie Gowen- “We have been contacted twice in recent weeks by private PR companies representing Indian govt. officials. Good use of govt funds? @PMOIndia))

इंग्लैंड में मोदी : भारतीय मीडिया कुछ तो छुपा रहा है…

वैसे तो मोदी जी की विदेश यात्रायें आपका सुख चैन खबर बाखबर सब नियंत्रित कर लेती हैं, आप चाह कर भी मोदीमय होने से बच ही नहीं सकते। सारे चैनल उनका ही मुखड़ा दिखाते मिलते हैं और सारे अख़बार उन्हीं पर न्योछावर। सोशल मीडिया पर भी वही छाये रहते हैं पक्ष हो या विपक्ष! पर इस बार यह सब होते हुए भी कुछ और भी है जिसकी परदेदारी तो है पर वह परदे में समा नहीं रहा! इस बार लंदन में मोदी का भारी विरोध हुआ और अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया में और सोशल मीडिया में उसने खासी हलचल पैदा की।

पुण्य प्रूसन बाजपेयी का विश्लेषण : बीजेपी के भीतर नरेंद्र मोदी और अमित शाह को मुश्किल होने वाली है…

बीजेपी का यह भ्रम भी टूट गया कि कि बिना उसे नीतीश कुमार जीत नहीं सकते हैं। और नीतिश कुमार की यह विचारधारा भी जीत गई कि नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े होने पर उनकी सियासत ही धीरे धीरे खत्म हो जाती। तो क्या बिहार के वोटरों ने पहली बार चुनावी राजनीति में उस मिथ को तोड़ दिया है, जहां विचारधारा पर टिकी राजनीति खत्म हो रही है।

सीएनएन-आईबीएन ने बिहार पर अपना सर्वे अपने आकाओं अंबानी व मोदी की नाराजगी की आशंका के चलते नहीं दिखाया?

गुरुवार की शाम से देश के सभी न्यूज चैनल बिहार चुनाव में एक्जिट पोल दिखाने में जुटे हुए थे, लेकिन देश का एक नामी अंग्रेजी चैनल सीएनएन-आईबीएन दूसरों के सर्वे चला-दिखा कर काम चला रहा था। ऐसा नहीं था कि चैनल ने सर्वे नहीं कराया था। अंदर की खबर ये है कि सीएनएन-आईबीएन ने सर्वे एजेंसी एक्सिस से बिहार चुनाव में एक्जिट पोल का सर्वे करवाया था।

Modi and his diplomacy

By Prasoon Shukla (CEO & Editor-in-Chief, News Express)

The diplomacy of Prime Minister Narendra Modi is paying dividends. Increasingly ostracized leader, Russian President Vladimir Putin met Modi at Hyderabad House, Thursday, marking the beginning of Annual India-Russia Summit. United States President Barrack Obama is arriving New Delhi on the occasion of Republic Day. In fact, both Moscow and the United States are looking to revitalize relations and foster economic ties with India. This is the Modi’s diplomatic success and such enthusiasm has probably never been witnessed earlier.

भाजपाई कब तक मुसलमानों और दलितों के लिए कुत्ता और कुत्ते के बच्चे जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते रहेंगे?

(मोहम्मद अनस)

Mohammad Anas : हरियाणा में दो दलित बच्चों को जिंदा जलाए जाने पर रक्षा राज्य मंत्री वीके सिंह ने कहा, ‘कोई कुत्ते को पत्थर मार दे तो सरकार ज़िम्मेदार नहीं होती।’ मंत्री जी कुत्ते के मारने पर किसी ने सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया, हम सब तो इंसानियत की हिफाजत करने में जानबूझ कर पीछे रहने वाली सरकार से सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब खत्म होगा हिंसा का सिलसिला। आखिर कब तक मुसलमानों और दलितों के लिए कुत्ता और कुत्ते के बच्चे का शब्द इस्तेमाल करते रहेंगे भाजपाई?