मीडिया पर कोबरापोस्ट की डाक्यूमेंट्री रिलीज, इसमें भड़ास वाले यशवंत भी! देखें वीडियो

Journalist Speak: Cobrapost documentary in solidarity with The UN #truthneverdies campaign! जाने-माने खोजी पत्रकार अनिरुद्ध बहल के नेतृत्व में संचालित मीडिया कंपनी ‘कोबरापोस्ट’ ने इन दिनों दुनिया भर में मीडिया और मीडिया वालों की खराब स्थिति सुधारने को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा चलाई जा रही मुहिम ‘सच कभी मरता नहीं’ का हिस्सा बनते हुए …

कोई मीडिया वाला अगर पत्रकारिता न कर रहा हो और गाड़ी पर प्रेस लिखवाए हो तो क्या वो भी जेल जाएगा?

Dinesh Choudhary : इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला गौरतलब है। आप प्रेसवाले नहीं हैं और प्रेस लिखते हैं तो चारसौबीसी के मामले में जेल जा सकते हैं। पर आप प्रेस वाले हैं और पत्रकारिता न कर कुछ और करते हैं, तब कौन-सा मामला बनता है? थिएटर एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट दिनेश चौधरी की एफबी वॉल से. …

पत्रकारिता में शौक से आये हो या इसे अपना करियर बनाना चाहते हो?

‘भ्रष्ट इंडिया कंपनी’ से मुक्ति का मार्ग ‘आजादी का दूसरा संघर्ष’ है…  छब्बीस जनवरी बीते एक माह गुजर गया है और पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव का अंतिम दौर चल रहा है। इस एक महीने के अंतराल में भारतीय लोकतंत्र के मौजूदा स्वरूप को लेकर अनेक तरह के विचार हवा में तैरते रहे। यह पहला मौका है जब चुनाव में न तो राष्ट्रीय फलक पर और न क्षेत्रीय या स्थानीय स्तर पर ही कोई मुद्दा चर्चा में है। इसके बरअक्स निचले स्तर के सामान्य चुनावी प्रचारकों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के बडे़ नेताओं, यहाँ तक कि प्रधानमंत्री की भी, भाषा-शैली के घटते स्तर को लेकर हर जागरूक व्यक्ति चिंतित और शर्मसार नजर आ रहा है।

पत्रकारों को मिलता नहीं, तो रेलवे का प्रेस कोटा आखिर जाता कहां है?

रेलवे रिजर्वेशन में पत्रकारों को कोटा देती है, लेकिन ये कोटा कुछ ही पत्रकारों को मिल पाता है. जिस तरह अखबार मालिक और उनके चट्टे-बट्टे मैनेजर खुद को ‘संपादक’ या ‘रिपोर्टर’ बताकर ‘एक्रेडिटेशन कार्ड’ हथियाकर ‘सरकारी मान्यताप्राप्त पत्रकार’ बन जाते हैं और फिर सरकार की ओर से पत्रकारों को मिलने वाली मामूली से मामूली सुविधाएं भी हड़प लेते हैं, उसी तरह ये ‘तथाकथित पत्रकार’ रेलवे का रिजर्वेशन कोटा भी कब्जा लेते हैं. इसके अलावा कुछ ऐसे पत्रकार भी हैं, जो अपने लगे-सगे लोगों के लिए कोटा सुविधा का दुरुपयोग करते हैं. ऐसे में जो असली पत्रकार हैं और रेलवे कोटे जैसी सुविधाओं के असली हकदार हैं, वे बेचारे मुंह ताकते रह जाते हैं.

यह अखबार मालिक रोज सड़क पर बैठ कर प्रेस कार्ड की दुकान चलाता है

बनारस में एक सज्जन हैं जो ‘दहकता सूरज’ नामक अखबार के मालिक हैं. बुढ़ापे में जीवन चलाने के लिए ये अब रोज सुबह सड़क पर बैठ जाते हैं और दिन भर अपने अखबार का प्रेस कार्ड बेचते रहते हैं. रेट है पांच सौ रुपये से लेकर हजार रुपये तक. ये महोदय खुद को पत्रकार संघ का पदाधिकारी भी बताते हैं. कई लोगों को इनके इस कुकृत्य पर आपत्ति है और इसे पत्रकारिता का अपमान बता रहे हैं लेकिन क्या जब बड़े मीडिया मालिक बड़े स्तर की लायजनिंग कर पत्रकारिता को बेचते हुए अपना टर्नओवर बढ़ा रहे हैं तो यह बुढ़ऊ मीडिया मालिक अपना व अपने परिवार का जीवन चलाने के लिए अपने अखबार का कार्ड खुलेआम बेच रहा है तो क्या गलत है?

PRESS से हो, तो क्या नियम-कानून तोड़ने का हक़ मिल गया तुम्हें?

Dinesh Dard : पलासिया से इंडस्ट्री हाऊस की ओर वाले पैदल पथ (फुटपाथ) पर यूँ तो अक्सर दुपहिया-चार पहिया वाहनों का दौड़ना चलता रहता है, जो नियम के ख़िलाफ़ है। मगर मान लो फुटपाथ खाली हो और आपका कहीं पहुँचना बहुत ही ज़रूरी हो, तो मजबूरी में उस पर से गुज़रना समझ में आता है। लेकिन उसमें भी एक अपराध बोध ज़रूर होना चाहिए कि उन्होंने पैदल यात्रियों का अधिकार छीना। मगर इनमें अपराध बोध तो दूर, इन्हें तो ये एहसास तक नहीं होता कि ये ग़लत कर रहे हैं।

रस्साकसी मैच में पत्रकारों पर भारी पड़े प्रशासनिक अधिकारी

मऊ : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकारों के बीच रस्साकसी प्रतियोगिता का आयोजन स्टेडियम में किया गया। 

कानपुर प्रेस क्लब पोलखोल : महामंत्री के बयान में सच को छिपाने की कोशिश

कानपुर प्रेस क्लब के वर्तमान स्वयंभू महामंत्री अवनीश दीक्षित ने अपने और अपने साथियों के अपराध को छिपाने के लिए कुछ ऐसे बयान दे दिए, जिन्होंने प्रेस क्लब की विश्वसनीयता पर ही प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिए।  

कारपोरेट मीडिया घरानों के दबाव में तीसरे प्रेस आयोग के गठन पर सरकार चुप

एक बार फिर तीसरे प्रेस आयोग के गठन की मांग उठी है। कहा जा रहा है कि मीडिया के बदलते चरित्र को देखते हुए तीसरे प्रेस आयोग का गठन किया जाए। इससे पहले भी कई मौकों पर तीसरे प्रेस आयोग के गठन की मांग की जा चुकी है, पर सरकार ने कभी उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सरकार की इस चुप्पी पर सवाल उठने स्वाभाविक हैं। कहा जा रहा है कि क्या मीडिया घरानों के दबाव ने सरकार को चुप रहने के लिए विवश किया।

मारे जा रहे पत्रकारों की हृदयविदारक खबरों के बीच मीडिया और सत्ता के अश्लील लेन-देन

जब-जब इस देश में चुनाव का मौसम आता है निजी कंपनियों के दफ्तरों से बजबजाते नोएडा में तमाम नए समाचार चैनल कुकरमुत्ते की तरह पनपने लगते हैं. इन चैनलों का एकमात्र उद्देश्य चुनाव के समय पैसा बटोर कर बंद हो जाना होता है।

पत्रकारों के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में जाने पर पाबंदी

नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से पत्रकारों को रक्षा, गृह, विदेश, वित्त मंत्रालय के बाद अब संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक्स निकेतन में भी जाने पर मौखिक आदेश के जरिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। पत्र सूचना कार्यालय भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी इन मंत्रालयों में जाने पर सुरक्षाकर्मी तभी अंदर जाने देते हैं जब अधिकारी चाहें।

…. क्योंकि उसका प्रेस, सरकार, पैसा, ज़मीन, कारख़ाने और कोर्ट पर क़ब्ज़ा

देखो भई तुम उसे फाँसी देना चाहते थे, ३० को ही सुबह सुबह देना चाहते थे तुमने दे दी । जो रोकना चाहते थे वे हार गये तुम जीत गये ।

अमौसी एयरपोर्ट के सीसीटीवी फुटेज में दिखने के बाद कहां गायब हो गया जाकिर

लखनऊ : रिहाई मंच ने आजमगढ़ के ग्राम मोमारिजपुर निवासी मोहम्मद जाकिर के पिछले 13 जून से अमौसी एयरपोर्ट लखनऊ से गायब होने पर अब तक पुलिस द्वारा उन्हें ढूढंने में नाकाम होने को सूबे में ध्वस्त कानून व्यवस्था का नजीर बताया है। 

सरकार के इशारे पर पत्रकार की लाश पर दूकानें खोल दीं बड़े पत्रकारों ने

पत्रकारों की लड़ाई नहीं, पत्रकारिता को कलंकित करने में जुटे हैं बड़े नेता। इन नेता जी की जिम्‍मेदारी मानी जाती है कि वे कम से कम अपनी बिरादरी के लोगों के प्रति थोड़ी संवेदनशीलता और संवेदना रखेंगे और पत्रकारों पर होने वाले अन्‍याय-अत्‍याचार पर अपनी आवाज निकालेंगे। लेकिन खुद को बड़ा पत्रकार मानने-कहलाने वाले यह पत्रकार-अगुआ लोग न सिर्फ इस मसले पर चुप्‍पी साधे हुए हैं, बल्कि जागेन्‍द्र की लाश को खरीदने-बेचने की गुपचुप कवायद में भी जुटे हैं। जागेन्‍द्र सिंह के जिन्‍दा-दाहकाण्‍ड वाले हौलनाक हादसे के बाद इन इस पत्रकार-शिरोमणि ने ठीक वही स्‍टैण्‍ड लिया, जो सरकार के इशारे पर यूपी पुलिस कर रही है। बजाय इसके कि जिन्‍दा जागेन्‍द्र को मौत की नींद सुलाने वाले अपराधियों पर यह पत्रकार-नेता आंदोलन करते और हुंकारें भरते, इन लोगों ने पूरे मामले की आग पर ही पानी फेर दिया। पत्रकारिता को कलंकित करते इन पत्रकारों ने इस मामले में जो करतूत की है, उससे बड़े से बड़ा दलाल भी शरमा जाएगा।

बरेली आई नेक्‍स्‍ट के कार्यालय में ही दो सीनियर मीडियाकर्मियों में पटका-पटकी

दैनिक जागरण के बच्चा अखबार आई नेक्‍स्‍ट बरेली में स्थितियां कंट्रोल के बाहर हो रही हैं। कम सैलरी और काम के बोझ के तले यहां का स्‍टाफ कुंठित हो गया है। गत दिनो यहां के दो वरिष्ठ मीडियाकर्मी ऑफिस में ही भिड़ गए। 

इंदौर प्रेस क्लब : मिशन से क्रिमीलाइजेशन तक पहुंच गई है आज की पत्रकारिता

इंदौर (म.प्र.) : राज्यसभा टेलीविजन के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने कहा कि इस समय पत्रकारिता अंधी सुरंग से गुजर रही है। अस्सी का दशक प्रिंट मीडिया और नब्बे का दशक इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए स्वर्णिम रहा था। वैसे उम्मीद की किरण अभी भी बाकी है। ‘पत्रकारिता : कल, आज और कल’ विषय पर परिसंवाद में वक्ताओं ने कहा कि आज पत्रकारिता मिशन से सेंसेशनल, कमीशन और क्रिमीलाइजेशन तक पहुंच गई है। इंदौर प्रेस क्लब के 54वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर हाल ही में जनसंपर्क विभाग द्वारा सम्मानित पत्रकारों का अभिनंदन भी किया गया।

इंदौर प्रेस क्लब के स्थापना दिवस समारोह में सम्मान की एक झलक

मजीठिया वेज बोर्ड के नाम पर मीडिया मालिकानों के मुनाफे की हंसी और घाटे के घड़ियाली आंसू

मजीठिया वेज अर्थात कम से कम 40 हजार वेतन, इतनी बड़ी राशि सुनने के बाद अधिकांश लोगों की जुबान से यही बात निकलती है कि इतना वेतन कोई नहीं दे पाएगा, प्रेस बंद हो जाएंगे। जो पूरी तरह मिथ्या है। मुनाफे की हंसी के साथ घाटे के घड़ियाली आंसू दिखाना मीडिया मालिकों का घातक स्वांग है।

चंडीगढ़ प्रेस क्लब के चुनाव में बलविंदर-नलिन ग्रुप की फतह

चंडीगढ़ : प्रेस क्लब चुनाव में गत दिनो कुल 396 वोट पड़े । प्रधान पद के लिए बलविंदर सिंह जम्मू ,जनरल सेकेट्री नलिन आचार्य ,संजीव महाजन सैकेट्री, वाइस प्रेसिडेंट मंजीत सिद्दू , ज्वाइंट सैकेट्री जोगिन्दर सिंह ने प्रतिद्वंदियों को पराजित कर दिया। इस तरह चुनाव में बलविंदर सिंह जम्मू- नलिन आचार्य ग्रुप को रिकार्ड जीत …

Journalists & Press Workers Call for Unified Action

New Delhi : A Joint Extended meeting of the Executive Committee of the Press Unity Centre and the Delhi Union of Journalists has resolved through a reorganized structure to move jointly in matters pertaining to the serious situation effecting hundreds of journalists and press workers in Delhi in particular with the widest possible national alliance based on agreed principles and a minimum programme. This it felt was necessary taking into account various management schemes all over the country, which included schemes of getting rid of 50 per cent of the staff and carrot and stick contracts in circulation.

नदीम अहमद काजमी ने बिल्डर से कांट्रैक्ट साइन करने की इच्छा के कारण प्रेस क्लब इलेक्शन टलवाया?

: Raise a voice against delay in elections and demand immediate elections : New Delhi : On March 23, 2015, the office bearers and managing committee of the PRESS CLUB OF INDIA (PCI) held a meeting in which it was decided to postpone the Club’s elections, which were originally scheduled to take place in March. 

फ़्री प्रेस सोसाइटी ने पैगंबर का कार्टून बनाने वाले विल्क्स को किया सम्मानित

डेनिश फ़्री प्रेस सोसाइटी ने पैग़ंबर मोहम्मद का कार्टून बनाने वाले स्वीडिश कार्टूनिस्ट लार्स विल्क्स को ‘सैफ़ो’ पुरस्कार से सम्मानित किया है. 

डीएम की कांफ्रेंस में सूचना अधिकारी ने पत्रकारों को बुलाया ही नहीं

देवरिया : जिलाधिकारी शरद कुमार सिंह की प्रेस वार्ता में उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब कुछ पत्रकारों से उन्हें पता चला कि सूचना अधिकारी ने कांफ्रेंस के संबंध में सूचित ही नहीं किया था। जिलाधिकारी ने सूचना अधिकारी की हरकत पर नाराजगी जताते हुए पत्रकारों से खेद व्यक्त किया। 

शिक्षामित्र, पुलिसमित्र…. और अब प्रेसमित्र !

आज आप को तीन मित्रों की कहानी बताता हूं. दो मित्र तो पहले से हैं लेकिन तीसरे मित्र की एंट्री मैं कराऊंगा. एंट्री कराना लाजमी भी है क्योंकि तीसरे मित्र की विशेषता भी पहले दो मित्रों की ही तरह है. वह दो मित्र हैं शिक्षामित्र और पुलिसमित्र। जिस मित्र की एंट्री हो रही है, वह है प्रेसमित्र. शुरुआत करते हैं शिक्षामित्र से.

अजयमेरु प्रेस क्लब में पत्रकारों का रंगोत्सव

अजमेर। रंग-पर्व पर अजयमेरु प्रेस क्लब में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और वेब मिडिया पत्रकारों ने जमकर होली मनाई।

अजमेरु प्रेस क्लब में पत्रकारों का होली मिलन समारोह

बिजनौर प्रेस क्लब में गंगा-जमुनी होली

बिजनौर : गंगा-जमुनी तहजीब कायम रखते हुए बिजनौर प्रेस क्लब की ओर से ऐजाज अली हाल की लाइब्रेरी में अध्यक्ष ज्योति लाल शर्मा की अध्यक्षता व मरग़ूब रहमानी के संचालन में होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया।

बिजनौर प्रेस क्लब में गंगा-जमुनी होली-मिलन कार्यक्रम की एक झलक ।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर उपजा ने मनाया समारोह, पत्रकारिता की जीवंतता पर छिड़ी बहस

लखनऊ। राज्य विधानसभा के अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने मीडिया जगत, खासकर अखबारों में काम करने वाले पत्रकारों का आह्वान किया है कि वे अच्छी खबरें लिखकर समाज में सकारात्मक सोच पैदा करें। माता प्रसाद पाण्डेय ने मीडिया काउंसिल की पुरजोर वकालत की। पाण्डेय रविवार को राजधानी में राष्ट्रीय प्रेस दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इसका आयोजन उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) और इसकी स्थानीय इकाई ‘लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन’ ने संयुक्त रूप से किया था।

Report of the Press Council on threats to media in Telangana

The Report of three-member Committee consisting of Shri Rajeev Ranjan Nag as Convenor and S/Shri Krishna Prasad and K. Amarnath as Members constituted on 12.9.2014 by the Chairman, Press Council of India to probe threats to the media in Telangana following remarks reported to have been made by the Chief Minister of the State, Shri K. Chandrasekhar Rao, in Warangal City on 9th September, 2014 was adopted by the Council in its meeting held on 27.10.2014 at New Delhi. 

उत्तराखंड का हाल : क्राइम रिपोर्टर बन कर रहा था ड्रग्स का धंधा, प्रेस ल‌िखी कार में ले जा रहा था चरस

कपकोट (बागेश्वर) :  बागेश्वर पुलिस ने मंगलवार देर रात कर्मी मार्ग के बेलंग पुल के पास एक कार से चार किलो अवैध चरस के साथ कथित पत्रकार और उसके एक अन्य साथी को गिरफ्तार किया है। जिस कार से चरस के साथ गिरफ्तार किया गया उस पर प्रेस लिखा हुआ था। पुलिस के अनुसार पकड़ी गई चरस की कीमत चार लाख रुपए है। कार को सीज कर दिया गया है। दोनों को सीजेएम चंद्रमणि राय की अदालत में पेश करने के बाद अदालत के आदेश पर उन्हें अल्मोड़ा भेज दिया गया।