‘PACL’ की असलियत : परिपक्वता अवधि पूर्ण होने के बाद भी एजेंट का लाखों रुपये दाबे बैठी है कंपनी

लगता है पीएसीएल कंपनी भी धराशाई होने की कगार पर है. यही कारण है कि यह कंपनी अपने निवेशकों का धन उन्हें परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद लौटा नहीं रही है. भड़ास4मीडिया को भेजे एक मेल में पीएसीएल के एक निवेशक सुरेंद्र कुमार पुनिया ने बताया है कि उनका इस कंपनी में एजेंट कोड Agent Code 1950022771 है. इनके कुल आठ एकाउंट हैं जिसमें कुल चार लाख रुपये यानि 4,00,000/- जमा हैं. इनकी परिपक्वता अवधि दिसंबर 2013 और जनवरी-फरवरी 2014 थी. पर कंपनी पैसे लौटाने में आनाकानी कर रही है. सुरेंद्र ने PACL Amount Refund मामले में भड़ास से दखल देने की गुजारिश की है.

ज्ञात हो कि ऐसे मामलों को सेबी देखती है और सेबी ही वो प्लेटफार्म है जहां निवेशक / एजेंट सीधे मेल कर रिफंड की फरियाद लगा सकते हैं. Surendra Punia की मेल आईडी surendrak.punia@gmail.com है.  सुरेंद्र पुनिया तो मात्र एक उदाहरण हैं. ये मेल लिख भेज लेते हैं इसलिए इनकी बात सुनी भी जा रही है, प्रकाशित भी हो रही है. लेकिन ऐसे हजारों एजेंट हैं जो अपढ़ हैं और मेल वगैरह का इस्तेमाल नहीं करते. वे लोग अपनी शिकायत बात कहां रख पाते होंगे. पीएसीएल के कई एजेंटों का कहना है कि उन्हें परिपक्वता अवधि पर पैसा लौटाने की जगह कंपनी किन्हीं दूसरी योजनाओं में पैसा लगवा दे रही है, वह भी बिना सहमति लिए. ऐसी गुंडागर्दी देखकर आज ये निवेशक / एजेंट उस क्षण को कोस रहे हैं जब उन्होंने अपना पैसा पीएसीएल में लगाने का फैसला किया.

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काले से गोरा बना देने का हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड का कारोबार यानि सबसे बड़ी ठगी

ज्योतिष के नाम पर ठगी का कारोबार काफी छोटा है. हम हमेशा अपनी आय का एक काफी-काफी छोटा अंश इस नाम पर खर्चते हैं. मसलन कोई दस हज़ार की नौकरी करने वाला होगा तो वो पंडित को 11 रुपया दक्षिणा देगा, कोई करोड़पति होगा तो एक-दो नीलम-पुखराज पहन लेगा. लेकिन इस ठगी के बरक्स ज़रा बड़े ठगों पर ध्यान दीजिये. आज हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड (दुनिया भर में उस देश का नाम और आगे लीवर लिमिटेड जोड़ दीजिये) का काले से गोरा बना देने का कारोबार किस हद तक ठगी का नायब नमूना है, उसे देखिये. ज़रा उसका टर्न ओवर देख लीजिये. कई देशों के जीडीपी से ज्यादा इनकी अकेले आमदनी है.

किसी जान्शन एंड जान्शन या प्रोक्टर एंड गेम्बल द्वारा ऐसे ही की जा रही ठगी और अवैज्ञानिक अंधविश्वास पर नज़र डालिए. विश्व सुन्दरी हमेशा उस देश से बनाए जाने के कारोबार को देखिये जहां बाज़ार की संभावना दिखे. एक विज्ञापन का अंधविश्वास देख लीजिये जिसमें घोषणा की जाती है कि मेरी कंपनी का डियो इस्तेमाल करोगे तो लड़कियां पास आयेंगी.. दूसरे का करोगे तो बस छींक आयेगी. जेनरिक दवाओं के बदले ब्रांडेड का कारोबार देख लीजिये. दो रुपये कीमत वाले रसायन का 2 हज़ार दाम वसूलते दवा कारोबारी को देखिये.

बीज और खाद के नाम पर फैले अन्धविश्वास और ठगी को देख लीजिये. एक रुपया किलो में आलू खरीद 200 रुपया किलो का चिप्स बेचने वाले ठगों को देखिये. सारदा जैसे सैकड़ों कंपनियों द्वारा फैलाये अंधविश्वास को देखिये कि सारा खून-पसीना किसी ममता बनर्जी के पास बंधक रख दीजिये, किरपा आयेगी. मज़हब के नाम पर ‘मानव बम’ बन जाने वाले अंधविश्वास को देखिये. एक-एक नाकाबिल और अन्धविश्वासी व्यक्ति द्वारा चार-चार लड़कियों की जिन्दगी बर्बाद कर देने वाले कानूनी ठगी को देखिये. 72 हूरों के मिलने का अंधविश्वास और उसे पाने के लिए बहाई जाती खून की नदियों को देखिये. किसी पॉल दिनाकरण को देखिये. इसाई संत बनाने के कारोबार को देखिये. नक्सलवाद के नाम पर हर साल ठगे जा रहे हज़ारों करोड़ को देखिये. फसल की उचित कीमत नहीं मिलने पर किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या और उसी फसल को दस गुना ज्यादा कीमत पर आपको बेचने की ठगी पर नज़र डालिए. मौसम विभाग द्वारा हमेशा गलत अनुमान प्रस्तुत कर देश से हजारों करोड़ झटक लेने की ठगी को देख लीजिये.

तय मानिये… इसकी तुलना में किसी गरीब ज्योतिषी का कारोबार आपको भूसे के ढेर में सूई की मानिंद ही लगेगा. लेकिन भूसे के बदले हमेशा ‘सूई’ को खोजते रहने की मिडिया की मजबूरी ये है कि जिस दिन ‘भूसे’ को दमदारी से प्रसारित करना शुरू किया, उसी दिन से उसका बाल-बच्चा पालना मुश्किल हो जाएगा. वो इसलिए क्यूंकि तमाम टीआरपी का अंधविश्वास और विज्ञापन की ठगी का जरिया वही ऊपर वाली चीज़ें हैं. सो… अपनी अकल लगाइए और सोशल मीडिया के ज़माने में अपना एजेंडा खुद सेट कीजिये. किसी सनी लियोनी या चैनल के सितारों को बस मनोरंजन के लिए इस्तेमाल कीजिये. जैसे कभी-कभार वयस्कों वाली फिल्म देखते हैं न, वैसे ही समाचार चैनल भी देखिये. पोर्न स्टार जितना ही ‘सम्मान’ इस कथित चौथे खम्भे को दीजिये. खुद को फेसबुक पर व्यक्त कीजिये. यहीं से अपना ओपिनियन बनाइये…बस.

और आखिर में तीन किस्से…

पत्रकारिता के एक कनिष्ठ मित्र अपने संपर्क में थे. लगातार फोन आदि करते रहते थे. एक दिन मित्र ने जानकारी दी कि अंतत उनकी नौकरी लग गयी एक बड़े अखबार में. बधाई देने के बाद पूछा कि अभी क्या कर रहे हो वहां? तो बोले कि अभी तो सीख ही रहा हूं. हां.. संपादक के नाम पत्र वाला कॉलम आजकल मैं ही देखता हूं. सारे पत्र मैं ही लिखता हूं. अब ऐसे ही बड़े अखबार दैनिक राशिफल भी खुद ही लिख लेते हैं तो इसमें ज्योतिष का क्या कसूर?

दूसरा किस्सा भारत के प्रधानमंत्री रहे स्व. चन्द्रशेखर के बारे में. यह किसी से सुना था या कहीं कभी पढ़ा था एक बार. ज़ाहिर है उनका कद ऐसा तो था ही कि वो चाहते तो हमेशा मंत्री बने रह सकते थे, वो भी बड़े से बड़ा पोर्टफोलियो लेकर. अपन सब जानते हैं कि उस ‘भोंडसी के संत’ की ज्योतिष आदि पर भी अगाध आस्था थी. उनके ज्योतिषी ने चन्द्रशेखर से कहा था कि उन्हें राजयोग है तो ज़रूर लेकिन क्षीण योग है. और वो भी बस एक बार ही किसी राजकीय पद तक पहुचा सकता है. कहते हैं कि तभी चन्द्रशेखर जी ने यह तय कर लिया था कि अगर एक बार ही बनना है तो प्रधानमंत्री ही बनेंगे, दूसरा कोई पद नही लेंगे. अब इस बात का कोई आधिकारिक प्रमाण तो हो नही सकता लेकिन अनुभवी लोग शायद इस बात पर कोई प्रकाश डाल पायें.

तीसरा किस्सा मेरे यहां के एक ज्योतिषी कामेश्वर झा जी का. आंखों-देखी झा जी के फलादेश की कहानियां इतनी है मेरे पास कि क्या कहूं? खैर..वो कहानी फिर कभी. अभी बस ये याद आया कि वो पतरा (पंचांग) भी बनाते थे. चन्द्र या सूर्य ग्रहण कब लगेगा, ये जानने उन्हें किसी इसरो या नासा के वैज्ञानिकों के पास नहीं जाना पड़ता था. कॉपी-कलम उठाते थे. कुछ गुणा-भाग किया और बता देते थे कि फलाने दिन चन्द्र ग्रहण तो ठिमकाने दिन सूर्य ग्रहण लगेगा. मजाल है राहू के बाप का कि एक दिन भी वो कामेश्वर जी द्वारा बताये समय पर नहीं हाज़िर हुआ हो, अपने ‘शिकार’ के पास. बिलकुल चाक-चौबंद और पाबंद रहता था राहु. अपना मूंह फाड़े बिलकुल तैयार. आप अगर चाहते तो अपनी घड़ी सही कर सकते थे राहु की उस सवारी के अनुसार.

भाजपा से जुड़े युवा पत्रकार और एक्टिविस्ट पंकज कुमार झा के फेसबुक वॉल से.

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घोटालेबाज प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी करने की तैयारी

ऐसी खबर है कि देश की प्रमुख समाचार एजेंसी यूएनआई के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर एनबी प्लांटेशन के नाम से करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप है. चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी एनबी प्लांटेशन के डायरेक्टर रह चुके हैं. सेबी वही सरकारी एजेंसी है जो सहारा और शारदा चिट फण्ड के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है.

चारों तरफ से घिर चुके प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ अब ह्यूमन राइट कमीशन, मायनॉरिटी कमीशन और नेशनल विमन कमीशन की कार्यवाही के अलावा अब दिल्ली विजिलेंस के लोग भी सक्रिय हो गये हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर यूएनआई के अध्यक्ष पर रहते हुए आर्थिक घपले-घोटोलों के तमाम आरोप हैं. उन पर ये सारे आरोप ”सेव यूएनआई मूवमेंट” ने लगाए हैं. कहा जाता है कि घपले-घोटाले करना प्रफुल्ल माहेश्वरी की फितरत में शामिल है. प्रफुल्ल माहेश्वरी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से प्रकाशित एक हिंदी अखबार को चलाने वाली कंपनी के प्रमुख निदेशक मालिक-संपादक भी हैं.

प्रफुल्ल माहेश्वरी की यह कंपनी बैंक ऑफ महाराष्ट्रा की ब्लैक लिस्ट ‘विल फुल डिफॉल्टर’ में दर्ज है. प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा से 1541 लाख रुपये का कर्जा लिया था. आदत से मजबूर प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा का पैसा वापस नहीं किया. बैंक के अधिकारियों ने कर्जा वापसी की लाख कोशिशें की. हर बार नाकाम रहने के बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्रा ने प्रफुल्ल माहेश्वरी की कंपनी को उन देनदारों की सूची में डाल दिया जो जानबूझ कर कर्ज वापस नहीं करना चाहते हैं.

बैंक ऑफ महाराष्ट्रा  के देनदारों की काली सूची में नाम दर्ज होने से भी कोई फर्क नहीं है. सेव यूएनआई के वर्कर्स का कहना है कि प्रफुल्ल माहेश्वरी यूएनआई को भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शक्ल में चालाना चाहते हैं. इसी हठधर्मिता की वजह से उन्होंने यूएनआई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एक गैर मीडिया पर्सन की एंट्री करवा दी है. आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन कहा जाता है  कि रिएल इस्टेट कंपनी चलाने वाले गैर मीडिया पर्सन को प्रफुल्ल माहेश्वरी ने यूएनआई की जमीन पर कब्जा दिलाने के सब्ज बाग दिखाए थे. सेव यूएनआई मूवमेंट ने भी प्रफुल्ल माहेश्वरी के कच्चे चिटठे खोले हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी की एक अन्य कंपनी एनबी प्लांटेशन भी आर्थिक अनियमितताओं के चलते सेबी के रडार पर काफी पहले से है. ऐसे भी कयास हैं कि एनबी प्लांटेशन के नाम पर अवैध वसूली के आरोप में सेबी प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकती है.

उपरोक्त प्रकरण के बारे में जब प्रफुल्ल माहेश्वरी से संपर्क किया और आरोपों पर उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका रिवर्ट मैसेज था, ‘Sorry to read all this junk. Pl get in touch with the person who has given this false information and verify yourself…’ ”….I am not the chairman of UNI and can only speak for myself.”

हालांकि, प्रफुल्ल माहेश्वरी को फिर से कुछ सवाल भेजे गये हैं. अगर वो अपना पक्ष रखते हैं तो अगली किश्त में उनको भी प्रकाशित किया जाएगा. इन सब के अतिरिक्त एमपीएसआईडीसी के जमीन घोटाले में भी प्रफुल्ल माहेश्वरी का नाम शामिल है. उसकी जानकारी भी अगली किश्त में विस्तार से दी जाएगी.

भड़ास के एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) राजीव शर्मा की रिपोर्ट. संपर्क: 09968329365

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हिंदी संस्थान ने लखकों को झूठा-फ्रॉड साबित कर अपनी फोरेंसिक लैबोरोट्री भी खोल ली है…

Dayanand Pandey : उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में इस बार पुरस्कार वितरण में धांधली भी खूब हुई है। इस धांधलेबाजी खातिर पहली बार उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने एक फर्जी फोरेंसिक लैब्रोटरी भी खोल ली है। तुर्रा यह कि बीते साल किसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में किसी ने याचिका दायर कर दी थी सो इस याचिका कर्ता के भय में लेब्रोटरी में खुद जांच लिया कि कौन सी किताब किस प्रेस से कैसे छपी है और इस बिना पर कई सारी किताबों को समीक्षा खातिर ही नहीं भेजा समीक्षकों को। और इस तरह उन्हें पुरस्कार दौड़ से बाहर कर दिया। क्या तो वर्ष 2014 की छपाई है कि पहले की है कि बाद की है। खुद जांच लिया, खुद तय कर लिया। ज़िक्र ज़रूरी है कि इस बाबत लेखक की घोषणा भी हिंदी संस्थान लेता ही है हर बार।

पर इस बार लखकों को झूठा और फ्रॉड साबित कर अपनी फोरेंसिक लैबोरोट्री भी खोल ली है हिंदी संस्थान ने। किताब पर छपे वर्ष और लेखक कि घोषणा पर यकीन नहीं किया। अंधेरगर्दी कि यह हद है। कि इस बिना पर जिस को चाहो पुरस्कार दो, जिस को चाहो पुरस्कार न दो। जनता के टैक्स का पैसा अपनी चेले चपाटों और चाटुकारों को बांट देने कि तरकीब है यह तो। निश्चित ही हिंदी संस्थान के इस पुरस्कार वितरण में धांधलेबाजी की सी बी आई जांच भी ज़रूर होनी चाहिए क्योंकि हिंदी संस्थान भ्रष्टाचार का बड़ा गढ़ बन गया है। और इस के कारिंदे अंधेर नगरी, चौपट राजा की व्यवस्था के पोषक! तो फिर ऐसे में कैसे कैसे लेखकों को हिंदी संस्थान ने इस बार पुरस्कार दिए हैं यह बहुत तफ़सील का विषय है।

लेकिन एक नमूना बलिया के कवि रामजी तिवारी ने अपनी फेसबुक वाल पर लिख कर परोस दिया है। आप भी इसे पढ़िए और गौर कीजिए और कि जानिए कि अपना उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान पुस्कार किन कूड़ा लेखकों को किस आधार पर दे रहा है। कहते हैं न कि हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फारसी क्या ! तो राम जी तिवारी का लिखा यहां गौर करें :

इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने जिन साहित्यकारों को सम्मानित किया है, उनमें हमारे शहर के एक मूर्धन्य साहित्यकार भी शामिल हैं । प्रस्तुत है उनकी प्रांजल भाषा और समुन्नत सोच की एक बानगी ……।

“एक गणमान्य नैष्ठिक व्यक्तित्व के धनी मान्यवदान्य गुरुदेव संत श्री ………. ऎसी ही विभूतियों में से एक हैं । सनातन धर्म से समन्वित रोम-रोम में भारतीय संस्कृति के सौष्ठव रूप को समाविष्ट कर अद्यावधि कीर्ति-कौमुदी से प्रद्योदित है । आपका जीवन मानवीय संवेदनाओं से संपृक्त विनीत वर्चस्वी कायस्थ कुलावन्तश्भूत प्रोज्ज्वल है । समस्त नैतिक गुणों का सामंजस्य आपके सहज स्वभाव और चरित्र के असीमित और अतुलित आयाम में सन्निविष्ट है।”

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार दयानंद पांडेय के फेसबुक वॉल से.

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सावधान रहें इस फर्जी कंपनी से… किराये के तीन कमरे में चल रही कंपनी में 1555 लोगों को रोजगार देने की कवायद

इंदिरानगर, लखनऊ में तीन कमरे किराये पर ले कर 1555  व्यक्तियों को रोजगार देने का दावा करने वाली एक कंपनी का मामला सामने आया है. प्रा कृषि विपणन विकास लिमिटेड नाम की इस कंपनी ने जिला विपणन अधिकारी, खंड विपणन अधिकारी, केंद्र प्रभारी, कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे पदनाम बना कर 4800 से 20900 रुपये वेतन के कुल 1555 पदों की भर्ती का विज्ञापन दिया है. विज्ञापन को यथासंभव सरकारी स्वरुप दिया गया है जिसमें पिछड़ी जाति, एससी/एसटी के लिए आरक्षण, आयु में छूट आदि की बात है.

नौकरी के लिए आवेदन शुल्क 550 और एससी, एसटी के लिए 400 रुपये रखा गया है. इस बारे में कुछ लोगों द्वारा शंका व्यक्त किये जाने पर आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने अपने स्तर से जांच की तो पाया कि कंपनी 22 अगस्त 2014 को ही अस्तित्व में आई. इस कंपनी का पेड-अप और औथोराइज़ड कैपिटल मात्र पांच लाख रुपये है. कंपनी के वेबसाइट पर ना तो कंपनी के निदेशकों का उल्लेख है और ना ही अन्य बुनियादी तथ्यों की जानकारी. कंपनी कार्यालय किराये के मकान में है जिसमें मात्र चार-पांच कर्मचारी हैं. कार्यालय भी मात्र नाममात्र का है.   इन बातों को अत्यंत संदिग्ध मानते हुए श्री ठाकुर ने डीएम और एसएसपी लखनऊ से इस कंपनी के आतंरिक तथ्यों की पूरी जानकारी करने और इस पर कड़ी निगाह रखे जाने हेतु पत्र लिखा है ताकि भविष्य में युवा बेरोजगारों से आवेदन शुल्क के पैसे ले कर भागे जाने का मामला एक बार फिर सामने नहीं आये. कम्पनी का नंबर 0522-4006599 है और इसके पीआरओ रामानुज मौर्या, का फोन नंबर 073982-07935 है.

सेवा में,
जिलाधिकारी,
जनपद लखनऊ

विषय- प्रा कृषि विपणन विकास लिमिटेड की अत्यंत संदिग्ध गतिविधियों पर सतर्क दृष्टि रखे जाने विषयक

महोदय,

मैं आपके समक्ष एक प्रा कृषि विपणन विकास लिमिटेड, प्रधान/रजिस्टर्ड कार्यालय बी 1165,  इंदिरा नगर, लखनऊ- 226010 दूरभाष 0522-4006599 वेबसाइट www.kvvl.org नामक एक प्राइवेट कंपनी से जुड़ा प्रकरण प्रस्तुत कर रहा हूँ जो कतिपय सूत्रों द्वारा मेरे संज्ञान में लाया गया कि यह कंपनी हज़ारों लोगों को अच्छी-खासी नौकरी दे रही है जो प्रथमद्रष्टया अत्यंत रहस्यमय लग रहा है.

मैंने इस कंपनी के विषय में अपने स्तर से अनुसन्धान किया तो पाया कि इस कंपनी ने दिनांक 26/09/2014 को अपना एक आतंरिक आदेश निर्गत किया था जिसमे जिला विपणन अधिकारी वेतन 15600-20900 के 80 पद, खंड विपणन अधिकारी वेतन 11500-15840 के 350 पद, सहायक खंड विपणन अधिकारी वेतन 5800-844 के 750 पद, केंद्र प्रभारी वेतन 4800-7200 के 350 पद तथा कंप्यूटर ऑपरेटर वेतन 4800-7200 के 25 पद अर्थात अच्छी-खासी सैलरी के कुल 1555 पदों के लिए विज्ञापन दिया है. इनमे से न्यूनतम वेतन रुपये 4800 तथा अधिकतम रुपये 15600 का बताया गया है. इस आतंरिक आदेश के अनुसार सामान्य और पिछड़ी जाति के लिए आवेदन शुल्क रुपये 550 और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आवेदन शुल्क 400 रुपये बताया गया है. यह आवेदन शुल्क PRA KRISHI VIPNAN VIKASH LIMITED, Lucknow को देय है. पुनः दिनांक 28/09/2014 को इस संवंध में समाचार पत्र में विज्ञापन निकाला गया जिसमे आवेदन की अंतिम तिथि 10/11/2014 को 05.00  बजे राखी गयी है.

इस कंपनी के वेबसाइट के About Us  और Services में बहुत बड़ी-बड़ी बातें लिखी हुई हैं. कैरियर पेज पर तमाम आतंरिक नियम बताये गए हैं जिसमे पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण से ले कर जाति प्रमाणपत्र के तरीके, प्रोबेशन, पोस्टिंग का समय, यावु में छूट, न्यूनतम अर्हता, परीक्षा का तरीका, परीक्षा केंद्र, परीक्षा में गलत तरीके अख्तियार करने पर दंड आदि शामिल हैं.

लेकिन इस पूरे वेबसाइट पर ना तो कंपनी के निदेशकों का उल्लेख है और ना ही कंपनी के अन्य बुनियादी तथ्यों के बारे में जानकारी. यानी कुल मिला कर केवल गैर-जरुरी बातें ही इसमें दिखती हैं, कंपनी से जुडी कोई भी बुनियादी बात पूरे वेबसाइट से गायब हैं. जब मैंने वेबसाइट की यह स्थिति देखी तो मैं स्वयं इंदिरा नगर स्थित इस कंपनी के कार्यालय में गया. यह कार्यालय उपरोक्त पते पर श्री एस पी आर्या के मकान की दूसरी मंजिल पर है. वहां मैंने कई सारे युवकों को नौकरी की तलाश में इंतज़ार करते देखा. मैंने कई सारे लोगों द्वारा भेजे गए आवेदन पत्र भी देखे. यानी कुल मिला कर बड़ी अच्छी संख्या में लोग कूरियर द्वारा अथवा स्वयं आ कर आवेदन करते हुए दिखे.

मैं अपना नाम बदल कर वहां कुछ लोगों से मिला जिसमे मुख्य रूप से श्री रामानुज मौर्या, पीआरओ (फोन 073982-07935) और श्री प्रणव विश्वकर्मा (094156-09413) थे. इन लोगों को देख कर इनकी बात सुन कर मुझे साफ़ लग रहा था कि इन्हें ना तो कंपनी या उसके प्रस्तावित काम की ख़ास जानकारी है और ना ही ये किसी प्रकार के जिम्मेदार आदमी लग रहे थे. ये बिलकुल सामान्य किस्म के नए बेरोजगार नवयुवक लग रहे थे जिन्हें किसी ने नयी-नयी नौकरी दे दी हो. इस पते पर, जो कंपनी का प्रधान कार्यालय कहा जा रहा है, किसी भी प्रकार की ऐसी स्थिति नहीं दिख रही थी जिसमे कोई कंपनी 1555 लोगों को अच्छी सैलरी पर नौकरी देने वाली हो. मात्र दो से तीन कमरों को किराए पर ले कर चल रही इस कंपनी में बाहर रिसेप्शन पर एक नयी लड़की और उसके बगल में स्टूल पर बैठा एक आदमी और दुसरे कमरे में बैठे श्री मौर्या और श्री विश्वकर्मा के अलावा और कोई नहीं दिखे. ना तो कोई कागज़ दिखे, ना कोई फाइल, ना कोई रजिस्टर, ना कोई आलमारी.

मैंने जब इन दोनों से कंपनी के बारे में पूछा तो ये कत्तई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके. इन्होंने यह भी नहीं बताया कि इस कंपनी के निदेशक कौन हैं. कहा कि वे निदेशक का नाम नहीं जानते हैं जबकि बाद में अपने प्रयासों से मुझे ज्ञात हुआ कि इनमे श्री प्रणव कंपनी के सिग्नेटरी हैं और श्री रामानुज भी इसके निदेशक हैं, जबकि मुझे इन लोगों ने कह दिया वे नहीं जानते कि कंपनी के निदेशक कौन हैं. ये निदेशक के नाम सहित हर प्रश्न का कुछ गोल-मोल उत्तर देते रहे. मुझे कहा कि ये एमआरपी रेट पर धान की खरीद करेंगे और उसे चावल में बदल कर बड़ी-बड़ी मंडियों में बेचेंगे. वे चावल, सरसों, गेहूं कलेक्ट पर उसे सप्प्लाई करेंगे. उन्होंने बताया कि उनका काम बलरामपुर के गैंडास बुजुर्ग (कृष्णा देव 099184-60248), बस्ती के रामनगर (सत्यनारायण 096707-89983), सोनभद्र के घोरावल (कमलेश 091989-21145), चंदौली के कियामताबाद  (अतीक अहमद 089240-50571) गोंडा के बभनजोत (संतोष 099189-70438) में शुरू भी हो गया है.

मैंने इस कंपनी का प्रोफाइल कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के वेबसाइट पर ज्ञात किया तो इसका CIN नंबर U01403UP2014PLC065627, कंपनी नाम- PRA KRISHI VIPRAN VIKASH LIMITED रजिस्ट्रेशन नंबर 065627 है. इस कंपनी का Authorised Capital(in Rs.) तथा Paid up capital(in Rs.) मात्र पांच लाख रुपये हैं. इस कंपनी के सिग्नटरी निम्नवत हैं- 

SNo
   

Director Name
   

DIN
   

Address
   

Designation
   

Date Of Appointment
   

Whether Accused
   
   
1
   

MAHENDRA KUMAR KAUSHAL
   

06427658
   

RATHAINA, BHAWANIGANJ, SIDDHARTHNAGAR, 272195, Uttar Pradesh, INDIA
   

Director
   

22/08/2014
   
   
2
   

MANISH KUMAR PANDEY
   

06946469
   

863 Ka,SHREEPALPUR, VALTARAGANJ, BASTI, 272182, Uttar Pradesh, INDIA
   

Director
   

22/08/2014
   
   
3
   

PRANAV VISHWAKARMA KUMAR
   

06946504
   

391, AANTA (AN0), COLONELGANJ, GONDA, 271504, Uttar Pradesh, INDIA
   

Director
   

22/08/2014
   
कंपनी दिनांक 22/08/2014 को अस्तित्व में आई है. उपरोक्त तथ्यों से लगभग स्पष्ट है कि एक इतनी नयी कंपनी जिसके पास अपना कोई भी एसेट नहीं हो, जिसका कोई अपना स्वयं का भवन नहीं हो, जिसके पास कोई वेयरहाउस नहीं हो, जिसके पास कोई ढंग का कार्यालय नहीं हो, जिसके पास मात्र चार-पांच कर्मचारी हों, जिसका Authorised Capital(in Rs.) तथा Paid up capital(in Rs.) मात्र पांच लाख रुपये हो, जो दो माह पुरानी हो, वह कैसे और किस प्रकार डेढ़ हजार से अधिक लोगों को अच्छा-ख़ासा रोजगार दे सकती है? जाहिर है कि ये स्थितियां किसी भी व्यक्ति के मन में बहुत गहरी आशंका देने को पर्याप्त हैं.

यह सही है कि अभी तक कानूनी रूप से इस कंपनी ने संभवतः कोई अपराध नहीं किया है क्योंकि इन्होंने मात्र सरकारी कंपनी से मिलता-जुलता नाम रखना, कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय का नाम इस प्रकार प्रयोग करना जिससे भ्रम हो जाए, बार-बार जातिगत आरक्षण की बात करना, अलग-अलग केन्द्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकार और उसके प्राधिकारियों का उल्लेख करना, अपने स्वरुप को यथासंभव किसी सरकारी विज्ञापन की तरह दिखाने का प्रयास करना, अपने सभी पदों और उनके वेतनमान आदि को पूरी तरह से सरकारी ढंग का दिखाना, अपने विज्ञापित पदों को भी सरकारी नाम की तरह प्रस्तुत करने के अलावा संभवतः अभी तक कोई वास्तविक अपराध नहीं किया है. पर इसके विपरीत यह भी सभी है कि जिस प्रकार की बेरोजगारी हमारे देश में है, जिस प्रकार के रोजगार देने के नाम पर अलग-अलग किस्म के धंधे हमारे यहाँ आये-दिन देखने और सुनने को मिलते हैं, जिस प्रकार के नए-नए ठगी के तरीके हमारे यहाँ लोग खोजते रहते हैं और इसमें तमाम लोग फंसते रहते हैं उससे इस कथित कंपनी के वर्तमान स्वरुप, उसकी वर्तमान हैसियत और उसके कथित डेढ़ हज़ार वैकेंसी के लिए आवेदन और उसके लिए पांच सौ के आस-पास शुल्क लिया जाना मुझे व्यक्तिगत रूप से यह प्रबल आशंका देता है कि प्रकरण में संदेह की पूरी गुंजाइश है. मुझे इस बात की प्रबल आशंका हो रही है कि आज नहीं तो कल इसमें भी शुल्क ले कर गायब हो जाने जैसी कोई बात हो सकती है.

मैंने अपने सूत्रों से इस कंपनी के तीन निदेशकों के निवास स्थान से जानकारी हासिल की तो श्री महेंद्र कौशल पुत्र श्री गंगाराम कौशल (मोबाइल 098395-63966) का फोन नंबर 094552-80858 ज्ञात हुआ. श्री मनीष पाण्डेय का पता वाल्टरगंज के अपने बताये स्थान पर नहीं मिला. इसी प्रकार श्री प्रणव का पता भी उनके बताये स्थान ग्राम आटा, थाना परसपुर में ज्ञात नहीं हो सका.

चूँकि ऐसे मामलों में ज्यादातर गरीब और बेरोजगार लोग ही फंसते हैं, अतः व्यापक जनहित में उपरोक्त सभी तथ्य आपके संज्ञान में लाते हुए मैं आपसे यह निवेदन करता हूँ कि पूर्व में इस प्रकार के तमाम हुए हादसों और ठगी की घटनाओं के दृष्टिगत लखनऊ प्रशासन के समस्त सम्बंधित अधिकारियों को इस कंपनी की आतंरिक स्थिति, आतंरिक व्यवस्था और सत्यपरक तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने और इस कंपनी पर अत्यंत सतर्क दृष्टि रखने के आदेश देने की कृपा करें ताकि भविष्य में किसी प्रकार की ठगी की घटना की पुनरावृत्ति ना हो जाये.

अमिताभ ठाकुर
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
94155-34526

पत्र संख्या- AT/Complaint/13/14
भवदीय,
दिनांक-29/10/2014

प्रतिलिपि- एसएसपी लखनऊ को कृपया आवश्यक कार्यवाही हेतु

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ऋतिक रोशन को पहचानने के लिए तीन लाख रुपए खर्च कर दिए!

Mohammad Anas : बैंग बैंग फिल्म में किसने निभाया है हीरो का किरदार. जल्दी से मैसेज करके बताइए और जीतिए एक टाटा सूमो कार. यह विज्ञापन एक चैनल पर आ रहा था. इलाहाबाद के एक लड़के ने खुद को महा ज्ञानी और सबसे झकास किस्मत का धनी समझ कर मैसेज किया- ऋतिक रोशन. कंपनी ने वापस फोन किया और कहा, मुबारक हो आप जीत गए टाटा सूमो. लेकिन उससे पहले आपको कागज़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक लाख रुपए हमारे बताये बैंक अकाउंट में भेजना होगा.

लड़के ने एक लाख भेजा. फिर विज्ञापन कंपनी ने काल किया की अभी कागज़ बन चुका है. डिलेवरी से पहले दो लाख और देने होंगे. लड़के ने दो लाख और अकाउंट में भेज दिए. दो दिन तक कुछ नहीं आने पर उसने फोन लगाना शुरू किया तो नंबर बंद मिला. अब सारा मामला पुलिस के पास गया है. क्या पता पैसे वापस होंगे भी या नहीं. अखबार का फ्रॉड क्या कम था जो टीवी पर खुलेआम लूटा जा रहा है. फिलहाल उसने ऋतिक रोशन को पहचानने के लिए तीन लाख रुपए खर्च कर दिए हैं. हमें ऐसे बेहतरीन और खुशकिस्मत इंसानों से सीखना चाहिए.

युवा पत्रकार मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.

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दैनिक भास्कर के धर्मेंद्र अत्री गिरफ्तार, गलत दस्तावेजों से पासपोर्ट बनाने का आरोप

दैनिक भास्कर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत धर्मेंद्र अत्री के बारे में खबर मिल रही है कि उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. अत्री पर पासपोर्ट को लेकर गलतबयानी करने का आरोप है. उनके खिलाफ पासपोर्ट एक्ट के सेक्शन 12 के तहत जालंधर के बारादरी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज है. इसके पहले छह अक्टूबर को जालंधर सेशन कोर्ट ने उनकी जमानत की याचिका खारिज कर दी थी.

धर्मेंद्र अत्री के खिलाफ एफआईआर मजिस्ट्रेट के आदेश पर इसी साल 15 मई को दर्ज हुआ था. इस मामले में राजेश कपिल उस वक्त कोर्ट गए थे जब पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया था. धर्मेंद्र अत्री ने जालंधर से गलत दस्तावेजों के सहारे अपना पासपोर्ट बनवाया था. राजेश कपिल की कंप्लेन के बाद जालंधर पुलिस ने अत्री के पासपोर्ट को जब्त कर लिया. प्रकरण के विवेचक वीर सिंह हैं.

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टीवी24 में एक और फ्राड : विज्ञापन चलाने के नाम पर तीस हजार रुपये आकाश सिंह चंदेल ने हड़प लिया!

सेवा में, 

श्रीमान डायरेक्टर
टीवी24 न्यूज चैनल
चंडीगढ पंजाब,

विषय-आकाश सिंह चंदेन्ल मंडल प्रमुख इलाहाबाद द्वारा चैनल पर विज्ञापन चलाने के नाम पर तीस हजार रुपयों की ठगी करने के संम्बन्ध में… 

महोदय, श्रीमानजी को अवगत कराना है की प्रार्थी कृष्णभान सिह आपके चैनल में विगत तीन वर्षों से प्रतापगढ से संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं चैनल को प्रदान कर रहा है. प्रार्थी ने 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान चैनल पर विज्ञापन चलाने के नाम पर राजेश सर्वश्रेष्ठ दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश सर्वश्रेष्ठ से पचास हजार रुपये लिए.

जब मैंने विज्ञापन चलवाने के लिये चैनल से सम्पर्क किया तो पेमेन्ट विवाद को लेकर विज्ञापन नहीं चल पाया. उसके एक हफ्ते बाद कौशांबी से आकाश सिह चंदेल नामक व्यक्ति का मेरे पास फोन आया. उसने खुद को टीवी24 का इलाहाबाद मण्डल ब्यूरो प्रमुख बताया और कहा कि आपका जो विज्ञापन पचास हजार का है उसे मैं तीस हजार रुपये में ही चैनल पर चलवा दूंगा. लगभग दस दिनों तक मुझसे आकाश सिंह चंदेल ऐसी ही बातें करता रहा. इलाहाबाद मण्डल के अलग-अलग जिलों से अपने नाम से चैनल पर खबरें चलवाकर प्रार्थी को फोन करके कहता था कि देखो, हर जिले की खबर मेरे नाम से चल रही है. इससे प्रार्थी को विश्वास हो गया कि ये टीवी24 का इलाहाबाद का मण्डल प्रमुख है.

उसके बाद आकाश सिह चंदेल ने पार्थी को इलाहाबाद बुलाया. उसके द्वारा बताए गए लोकेशन अलोपी बाग स्थित जूस की दुकान पर पहुंच गया. मेरे साथ गांव का एक लड़का भी था. चंदेल ने कहा कि एक हफ्ते पहले जो विज्ञापन की बात हुई थी उसका पेमेंट करा दो, हमारी डाइरेक्टर साहिबा से बात हो गयी है. उन्होंने मुझे चंण्डीगढ बुलाया है. पार्थी को विश्वास नहीं हुआ तो उसने कहा कि अच्छा पहले आधा पेमेण्ट दे दो, आधा पेमेण्ट ऐड चलने के बाद दे देना. पार्थी ने उस पर विश्वास करके जूस की दुकान के पास जो एटीएम था उससे पंन्द्रह हजार रुपये नगद निकाल कर आकाश सिंह चंदेल को दे दिया. इसका गवाह मेरे साथ गया लड़का भी है.

उसके बाद मैं प्रतापगढ लौट आया. आकाश प्रार्थी से लगातार पन्द्रह से बीस दिनों तक बात करता रहा कि आज जा रहा हूं, कल चंण्डीगढ जा रहा हूं, मैम से बात हो गयी है, आज एैड चलेगा, कल चलेगा. अप्रैल नवरात्र के बीच आकाश का मेरे पास फोन आया कि मै चंण्डीगढ में डाइरेक्टर साहिबा के साथ हूं. उनका कहना है कि आप ऐड का पूरा पेमेण्ट करा दें, तभी मैं एैड चलाउंगी, वो मेरे बिहाफ पर पचास हजार का एैड तीस हजार में चलाने के लिये तैयार हैं, इसलिए अभी के अभी मेरे पर्सनल खाते मे पैसा डाल दो.

आकाश ने अपना भारतीय स्टेट बैंक कौसांबी का एक खाता नम्बर मैसेज कर दिया. प्रार्थी ने जब डाइरेक्टर साहिबा से बात करने की इच्छा जताई तो आकाश सिंह चन्देल ने बड़े अभद्र पूर्ण ढंग से बात करते हुये कहा कि डाइरेक्टर साहिबा तुम जैसे छोटे-छोटे रिपोर्टरों से बात नहीं करती हैं. जब विश्वास नहीं था तो मेरा समय क्यों बर्बाद करा दिया. मैं केवल तुम्हारे लिये चंण्डीगढ आया हूं और अब चलवा लेना अपना एैड. ये कह कर फोन काट दिया. प्रार्थी ने घबरा कर आनन फानन में आकाश के बताये हुये एकाउन्ट नम्बर में पन्द्रह हजार रुपये लगा दिये.

उसके बाद आकास का फोन आया कि पैसे मिल गये हैं, मैंने चैनल पर जमा करा दिये हैं. कल से तुम्हारा एैड चलने लगेगा. दो तीन महीने गुजर गये. जब विज्ञापन नहीं चला तो प्रार्थी ने आकाश से बात की तो आकाश ने कहा कि एैड किसी कारण से नहीं चल पाया और मैम आजकल व्यस्त चल रही हैं, मैं जल्द ही तुम्हारा पैसा चैनल से लेकर तुमको दे दूंगा. यदि चैनल ने पैसा नहीं दिया तो मैं तुमको पैसा अपनी जेब से दे दूंगा लेकिन आकाश सिंह चंदेल ने पार्थी को न तो आज तक पैसा वापस किया और न ही एैड चलवाया. बात करने पर ठीक से बात नहीं करता है ओर कहता है कि चैनल पैसा वापस नही कर रहा है तो मैं क्या करुं. 

श्रीमान जी मैं कृष्णभान सिह, संवाददाता टीवी24,  बहुत दुखी हो गया हूं. आकाश चंदेल ने जो हरकत मेरे साथ की है, उससे मुझे बहुत पीड़ा हो रही है. इतनी बड़ी रकम फंस जाने पर क्या होता है एक पत्रकार के लिये, मैं बखूबी जानता हूं. ये दर्द मुझसे सहा नहीं जा रहा है. हमरे पास एक सम्मान को छोड़ कर कुछ भी नहीं बचा है. अब वो भी जा रहा है. साथ ही चैनल की छवि पर भी असर पड़ रहा है.  मैं चाहता हूं कि जो पैसा आकाश सिंह चंदेल ने एैड के लिये लिया है. उसे या तो वे वापस कर दें या तीस हजार रुपये का पार्टी का विज्ञापन चैनल पर चलवा दें कि जिससे मेरी और चैनल दोनों की छवि बनी रहे.

पार्थी
कृष्णभान सिंह
प्रतापगढ
यूपी
जिला संवाददाता टीवी 24
09628536386

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‘पुष्पांजलि’ ग्रुप और ‘पुष्प सवेरा’ अखबार के फ्राड मालिकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा

मथुरा : उत्तर प्रदेश में मथुरा के हाइवे थाने में पुष्पांजलि ग्रुप और ‘पुष्प सवेरा’ अखबार के मालिक बीडी अग्रवाल उनके बेटे मयंक और पुनीत अग्रवाल समेत चार लोगों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है. इन फ्राड टाइप के बाप-बेटों ने किसी के नाम का प्लाट किसी दूसरे को बेच दिया. पुलिस के अनुसार पुष्पांजलि उपवन स्थित कालोनी राधा नगर निवासी महेंद्र खत्री की पत्नी सुषमा ने १२ सितंबर २००६ को २०० वर्ग गज के एक भूखण्ड का खरीदने के लिए अनुबंध कराया था.

इसके लिए सुषमा ने तीन लाख रुपये दिये थे. श्री खत्री का आरोप है कि आगरा निवासी बीडी अग्रवाल और उनके पुत्र मयंक अग्रवाल, पुनीत अग्रवाल और पुनीत के रिश्तेदार गौरव अग्रवाल ने यह प्लाट किसी दूसरे को बेच दिया. इस मामले में महेंद्र खत्री ने इन लोगों के खिलाफ हाईवे थाने में भारतीय दण्ड विधान की धारा ४२० और ४०६ के तहत मामला दर्ज कराया गया है.  पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है.

महेंद्र खत्री ने बताया कि थाना हाईवे पुलिस को धोखाधड़ी किए जाने की तहरीर सबूतों के साथ दी थी, लेकिन हाईवे पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने में असमर्थता जाहिर कर दी. बाद में एसएसपी के आदेश पर पुष्पांजलि समूह के बीडी अग्रवाल, उनके बेटे पुनीत और मयंक अग्रवाल तथा मथुरा की मंडी रामदास निवासी गौरव अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है. एसएसआई सुरेंद्र यादव का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है.

उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिनों पहले रीयल एस्टेट और चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े पुष्पांजलि ग्रुप पर आयकर विभाग की जांच शाखा ने सर्च की कार्रवाई की थी. ग्रुप के प्रबंध निदेशक बीडी अग्रवाल के जयपुर हाउस स्थित आवास, मथुरा और नोएडा स्थित साइट सहित कई ठिकानों पर जांच शुरू हुई. ग्रुप से संबंध रखने वाले प्रखर गर्ग के आरजीपीजी ग्रुप और प्रवीन अग्रवाल के पायल साड़ी प्रतिष्ठान और आवास पर रिकॉर्ड खंगाले गए. ग्रुप से व्यावसायिक लेनदेन करने वालों की सूची तैयार की जा रही है.  18 ठिकानों पर सौ अधिकारी और कर्मचारियों की टीम पुलिस फोर्स के साथ दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल के रिकॉर्ड खंगालने में जुटी रही.  सर्च की कार्रवाई के दौरान दोपहर में पुष्पांजलि ग्रुप के एमडी बीडी अग्रवाल की तबीयत बिगड़ गई. ब्लड प्रेशर बढ़ने पर आयकर विभाग की टीम ने उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती होने की अनुमति दे दी. वे ग्रुप के पुष्पांजलि हॉस्पिटल में करीब सात घंटे भर्ती रहे.

आयकर विभाग को रीयल एस्टेट और चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े पुष्पांजलि ग्रुप पर कार्रवाई में अब तक की सबसे बड़ी सफलता हाथ लगी. आयकर विभाग की 36 घंटे लंबी चली सर्च में ग्रुप ने 40 करोड़ का सरेंडर (अघोषित आय स्वीकार करना) किए हैं. वहीं, घर और लॉकर से 50 लाख रुपये कैश और दो करोड़ का सोना (सोने के बिस्कुट और ज्वैलरी) जब्त किया है. ग्रुप में निवेश के दस्तावेज, लॉकर और लैपटॉप सीज कर दिए हैं. संयुक्त निदेशक आयकर (जांच) मुंशीराम ने बताया कि आयकर की अभी तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में है. पुष्पांजलि ग्रुप ने इस दौरान 40 करोड़ रुपये की अघोषित आय स्वीकार कर ली. ग्रुप की 50 कंपनियों में करोड़ों के निवेश के दस्तावेज हाथ लगे हैं. ईमेल, मोबाइल मैसेज और लैपटॉप जब्त किए गए हैं, इनका विभाग अभी पूरा अध्ययन करेगा. इसके अलावा पुष्पांजलि ग्रुप से संबंध रखने वाली प्रखर गर्ग के आरजीपीजी ग्रुप के यहां कार्रवाई में करीब 22 प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले हैं. सूत्रों के अनुसार आरजीपीजी ग्रुप के लॉकर भी कार्रवाई में सील किए गए हैं. प्रवीन अग्रवाल की पायल साड़ी से ग्रुप में निवेश के दस्तावेज हासिल हुए हैं. वहां से आयकर विभाग ने करीब 15 लाख कैश जब्त किया है. कई सालों के रिटर्न खंगालने और छह महीने की निगरानी के बाद आयकर विभाग की जांच शाखा ने पुष्पांजलि ग्रुप पर सर्च शुरू की थी.

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galgotia के पाप का घड़ा फूटा, धोखाधड़ी में ध्रुव गलगोटिया और पद्मिनी गलगोटिया गिरफ्तार

कई वर्षों से और कई तरह के फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी और बेईमानी करने करने वाले ‘गलगोटियाज’ के पाप का घड़ा भर गया दिखता है. खबर है कि तगड़ा विज्ञापन देकर मीडिया का मुंह बंद रखने वाले गलगोटिया पर 122 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में कार्रवाई हुई और galgotia universityके निदेशक ध्रुव गलगोटिया और पद्मिनी गलगोटिया को गिरफ्तार कर लिया गया. गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चेयरमैन का पुत्र है ध्रुव गलगोटिया और पत्नी हैं पद्यमिनी गलगोटिया. गिरफ्तारी की कार्रवाई आगरा पुलिस ने की. आगरा के थाना हरीपर्वत की पुलिस ने गलगोटिया विश्वविद्यालय के दोनों निदेशकों मां-बेटे पद्मिनी और ध्रुव को गुड़गांव से गिरफ्तार किया.  शंकुतला एजूकेशनल सोसाइटी के चेयरमैन सुनील गलगोटिया की पत्नी हैं पद्मिनी. उनके खिलाफ आगरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था.

आगरा के संजय प्लेस स्थित एसई इन्वेस्टमेंट कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर गिर्राज किशोर शर्मा ने एक महीने पहले थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज कराया था. शर्मा की शिकायत थी कि नोएडा की शकुंतला एजूकेशनल एवं वेलफेयर सोसाइटी ने कंपनी से सन 2010 से 2012 के बीच में 80 लाख रुपये के 10 लोन स्वीकृत कराए. इनमें संस्था से जुड़े गलगोटिया विश्वविद्यालय के नाम से भी लोन शामिल था.

स्वीकृत लोन का पैसा संस्था को 24 किस्तों में ब्याज के साथ अदा करना था, लेकिन कुछ किस्तों के भुगतान के बाद अदायगी बंद कर दी गई। इसके बाद इन्वेस्टमेंट कंपनी ने संस्था को नोटिस जारी ‌किया. कंपनी को ब्याज समेत करीब 122 करोड़ रुपये का बकाया अदा करना है. मुकदमे में एजूकेशनल सोसाइटी के चेयरमैन सुनील गलगोटिया, डायरेक्टर पद्मिनी गलगोटिया, ध्रुव गलगोटिया और श्रीमती जुगनू गलगोटिया को नामजद किया गया. ऋण अदायगी बंद करने के बाद शकुंतला एजूकेशन सोसाइटी ने दिल्ली हाईकोर्ट में आरविटेशन दाखिल किया, जिसमें सोसाइटी को भारी घाटे में‌ दिखाया गया. साथ ही गलगोटिया विश्वविद्यालय को अलग संस्थान बताया गया.

जांच कर रही थाना हरीपर्वत पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर सीजेएम खलीकुज्जमा की अदालत में गैर जमानती वारंट जारी करने का प्रार्थना पत्र दिया गया था. अदालत ने चारों आरोपियों को वारंट जारी किए थे. इसके बाद सुनील गलगोटिया ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्थगनादेश ले लिया था, बाकी लोगों को स्थगनादेश नहीं मिल सका था. सोमवार को थाना हरीपर्वत पुलिस की टीम ने डायरेक्टर ध्रुव गलगोटिया और उनकी मां पद्मिनी गलगोटिया को गुडग़ांव से गिरफ्तार कर लिया. टीम दोपहर तक दोनों को आगरा लेकर आएगी.

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एलआईसी पालिसी और बोनस के नाम पर ठगने वालों के जाल में फंसते फंसते बच गए पत्रकार विकास मिश्र

Vikas Mishra : हफ्ते भर पहले किसी राज सिन्हा का फोन आया था। उन्होंने खुद को एलआईसी का सीनियर एक्जीक्यूटिव बताया। बोले-मुंबई से अभी ट्रांसफर होकर दिल्ली आया हूं। आपकी पॉलिसी का स्टेटस देखा, तो पता चला कि आपको सालाना बोनस अभी एक भी साल का नहीं मिला है। क्या आपको एजेंट ने बताया नहीं था कि हर साल साढ़े सात हजार रुपये बोनस मिलेगा..? मैंने कहा नहीं ये तो नहीं पता था। तब वे बोले कि ऐसा है कि आप दिसंबर की बजाय अक्टूबर के पहले हफ्ते प्रीमियम जमा करवा दें, हम आपका बोनस जो अब तक करीब 32 हजार हो चुका है, उसे आपको दिलवा देंगे। प्रीमियम भी आपको 36 हजार की जगह सिर्फ 34 हजार 610 रुपये देना होगा।

मैंने भरोसा कर लिया। दो बार और बात हुई थी, जिसके मुताबिक आज दशहरे के दिन मुझे वो किस्त कैश में देनी थी। कल ही एटीम से निकाले थे पैसे। आज सुबह उनकी कथित एक्जीक्यूटिव का फोन आया कि सर कब आ जाऊं पैसे लेने। मैंने पूछा कि क्या रसीद ले आएंगी..? बोली-नहीं वो तो मुंबई से आएगी। मैंने पूछा-फिर मेरे पास क्या प्रमाण होगा कि हमने प्रीमियम दे दिया है। वो बोली-सादे कागज पर लिखवा लीजिएगा। मैंने उसका नाम पूछा तो बोली-अनू। मैंने अनू क्या.. आगे पीछे भी तो कुछ होगा। उसने कहा नहीं सिर्फ अनू..। मुझे शक हुआ। एलआईसी की एक एजेंट से मेरा परिचय था, उसे फोन किया। वो बोली-सर ये बड़े स्तर पर फ्रॉड चल रहा है। बोनस के बहाने ये लोग कैश या ड्राफ्ट ले लेते हैं। जिनसे ड्रॉफ्ट लेते हैं, उस ड्रॉफ्ट से पॉलिसी खरीद लेेते हैं, फिर उसे सरेंडर करके पैसा लेकर चंपत हो जाते हैं। उसने उस कथित राज सिन्हा से बात की-थोड़ी ही देर में वो फंस गया और फोन काट दिया।

ये पोस्ट मैंने सभी दोस्तों को जागरूक करने के लिए लिखा है। अगर आपके पास भी किसी धोखेबाज का ऐसा फोन आए तो सावधान हो जाइए। एलआईसी आपका बोनस आपके एकाउंट में डालती है। न कि कोई आपको फोन करके बताएगा उसके बारे में। एक बात ये भी पता चली कि एलआईसी दफ्तर से जब भी कोई फोन आएगा तो वो लैंड लाइन से आएगा, मोबाइल से नहीं। इन ठगों का दुस्साहस देखिए, ये पता होने के बाद भी कि मैं आजतक चैनल में काम करता हूं, वो मुझे ठगने दफ्तर तक आ रहे थे। एक बार तो दिमाग में आया कि उन्हें दफ्तर में बुलाकर गिरफ्तार करवा दूं, लेकिन मौका चूक गया। बहरहाल आप सतर्क हो जाइए, ऐसे धोखेबाजों से बचकर रहिए। मित्रहित में जारी ।

आजतक चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार विकास मिश्रा के फेसबुक वॉल से.

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पंजाब केसरी के संपादक अश्विनी कुमार ने अनुवाद कर परिवार का पेट पाल रहे पत्रकार के साथ की धोखाधड़ी (पार्ट एक)

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आदरणीय यशवंत जी

संपादक

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम। 

यशवंत जी मेरे साथ हुई धोखाधड़ी के एक मामले की जानकारी आपको देना चाह रहा हूं, इस निवेदन के साथ कि आप इसे अपनी प्रतिष्ठित साइट पर प्रकाशित करें, ताकि मेरे साथ न्याय हो सके।  मैं दिल्ली में ट्रांसलेशन एजेंसी चलाता हूं। मैने पंजाब केसरी के संपादक अश्विनी कुमार द्वारा लिखित पुस्तक ‘क्या हिंदुस्तान में हिंदू होना गुनाह है’ का भारत की नौ विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करवाया है। लेकिन मुझे करीब एक साल बाद भी पूरा भुगतान नहीं मिला है। ट्रांसलेशन के संबंध में मुझसे हिंदू साहित्य सभा के पदाधिकारी महेश समीर ने संपर्क किया था, जो कि पुस्तक का संपादक भी है। उस समय समीर ने यही कहा कि धन की कोई कमी नहीं है और पूरा भुगतान सही समय पर होगा। इसी कारण मैंने कुछ एडवांस भी नहीं लिया।

मुझसे कहा गया था कि पुस्तकें लोकसभा चुनाव के पहले चाहिए (मुझे नहीं पता कि इसके पीछे क्या एजेंडा था) लेकिन सभी पुस्तकें लोककभा चुनाव के पहले सौंप दी गईं थीं। हालात तब बदले, जब अचानक अश्विनी कुमार को बीजेपी ने करनाल से लोकसभा का टिकट दे दिया। शायद इसके बाद इन पुस्तकों की आवश्यकता महसूस नहीं हुई और तभी से बकाया दिए जाने में आनाकानी की जा रही है।  इस संबंध में मैंने अश्विनी कुमार की पीए से भी चर्चा की और उनका कहना है कि हमने पूरा पैसा महेश समीर को भुगतान कर दिया है। समीर का कहना है कि अश्विनी कुमार ने पैसे देने से ही इंकार कर दिया है। और इस चक्कर में मेरा पैसा अटका हुआ है।

मेरे पास इस संबंध में सभी मेल, टेलीफोन पर हुई चर्चा रिकार्ड कर रखी हुई हैं, जो कि  मैं आपको प्रस्तुत कर रहा हूं।  पुस्तक में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से भी अश्विनी कुमार की सपत्निक की गई मुलाकात का जिक्र है और चित्र भी। जानकारी राष्ट्रपति भवन भी भेजी जाएगी।  मैं इस मामले को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सरसंघचालक मोहन भागवत के स्तर पर ले जाउंगा, जिससे उन्हें भी जानकारी मिले, कि उनके नाम पर कैसा-कैसा धोखा दिया जा रहा है। भागवत के अश्विनी कुमार से काफी अच्छे संबंध हैं और मैं दोनों का चित्र भी आपको प्रेषित कर रहा हूं।

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इसके अलावा प्रधानमंत्री, जो कि बीजेपी सांसदों से बेहतर आचरण की उम्मीद करते हैं, के दफ्तर सहित राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी सहित कई मंचों पर मामला उठाउंगा। आवश्यकता पड़ी तो कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।  मेरे पास इस पूरे प्रकरण को लेकर कई किश्तों की सामग्री है, जिसे सिलसिलेवार प्रकाशित किया जा सकता है मसलन इस पुस्तक के पीछे का राजनीतिक उद्देश्य, पुस्तक के नाम पर किया गया खेल, राज्यसभा की थी कोशिश, लेकिन लोकसभा का टिकट मिलना, हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने का सपना. केंद्रीय मंत्री बनने की कोशिश, समीर द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल के खिलाफ किए षडयंत्र आदि कई मुद्दों पर विस्तार से लिखा जा सका है।   मैं आपको मेरे द्वारा अश्विनी कुमार को प्रेषित दो मेल भी भेज रहा हूं। कुछ चित्र भी संलग्न हैं।

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…. जारी ….

धन्यवाद सहित

योगेश जोशी

yogesh_joshi_mp@yahoo.com

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