…और स्वतंत्र मिश्रा की गेंद पहुंची संतोषी माता के कोर्ट में

स्वतंत्र मिश्रा को मैं नहीं जानता। बिल्कुल  भी नहीं। भड़ास पर क्रेडिट  कार्ड की चोरी और उसपर लाखों की खरीदारी के मामले में यह नाम आने से पहले मैंने उनका नाम भी नहीं सुना था। क्रेडिट / डेबिट कार्ड खो जाने पर किसी भी व्यक्ति द्वारा उसपर खरीदारी कर लिया जाना बिल्कुल गलत है और मेरा मानना है कि यह सरकार के प्रश्रय से चल रहा है। वर्षों पहले क्रेडिट कार्ड पर कार्डधारक की फोटो लगाने की तकनीक या सुविधा देश में आ गई थी और अगर सभी क्रेडिट / डेबिट कार्ड पर धारक की फोटो लगाना जरूरी कर दिया जाए तो इसके दुरुपयोग की संभावना बहुत कम हो जाएगी। Continue reading

नईदुनिया पहुंचे सुधीर, अमर उजाला से संदीप का इस्‍तीफा

दैनिक भास्‍कर, दिल्‍ली से खबर है कि सुधीर गोरे ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी नईदुनिया, इंदौर के साथ शुरू करने जा रहे हैं. सुधीर भास्‍कर रसरंग टीम को अपनी सेवाएं दे रहे थे. नईदुनिया में भी उन्‍हें इसी तरह की जिम्‍मेदारी दिए जाने की संभावना है.

अमर उजाला, कानपुर से खबर है कि संदीप त्रिपाठी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे सेल्‍स प्रमोशन एवं मार्केटिंग विभाग में कार्यरत थे. संदीप ने यहां व्‍याप्‍त अंधेरगर्दी की वजह से इस्‍तीफा दिया है. उन्‍होंने सर्कुलेशन विभाग में चल रहे गोरखधंधे की शिकायत डाइरेक्‍टर से लेकर जीएम भवानी शर्मा तक से की थी, परन्‍तु कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. मजबूरन संदीप ने प्रबंधन को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया. वे पिछले एक साल से अमर उजाला को अपनी सेवाएं दे रहे थे.

एसएसपी के आवास पर पत्रकारों को शराब और भांग की दावत

इटावा के एसएसपी राजेश मोदक ने जनपद के पत्रकारों को शराब, भांग और बीयर की दावत परोसी। मौका था होली मिलन का और स्थान था एसएसपी का आवास, जहाँ Blenders pride (शराब) की बोतलों और भांग की बर्फी संग पत्रकारों और एसएसपी का होली मिलन समारोह संपन्न हुआ। क्या पुलिस की नज़र में पत्रकार नशेड़ी होते हैं या पत्रकारों की औकात शराब की बोतल और भांग की बर्फी हैl कुछ भी हो ऐसा होली मिलन इटावा के इतिहास में पहली बार हुआ जब एसएसपी ने शराब और भांग के साथ पत्रकारों का अपने आवास पर स्वागत कियाl

पुलिस विभाग लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने के लिये बजट के अभाव बताते हुए मृतकों के शव को नदियों में बहा देता है। और रोना रोते है बजट के न मिलने का, लेकिन पत्रकारों के लिये Blenders pride (शराब) की बोतलें और भांग की बर्फी का इंतजाम कहाँ से हुआ चलिए हम बताते हैं कि पुलिस विभाग पत्रकारों की सेवा कहाँ से करता है। इनके पास अलग से कोई बजट तो है नहीं और एसएसपी अपनी सेलरी से तो पत्रकारों की इस दावत का इंतजाम करेंगे नहीं, तो निश्चित ही इसकी जिम्मेदारी किसी सीओ को सौंपी गयी होगी और सीओ ने किसी थानेदार को और थानेदार ने किसी सिपाही को, तो सिपाही ने अपनी सैलरी से तो किया नहीं होगा इंतजाम। इसलिए जायज सी बात है कि जनता का खून चूसकर इस इंतजाम को किया गया होगा।

चलिए इंतजाम से हटकर अब होली मिलन पर आते हैं। शराब और बियर की बोतलों व भांग की बर्फी को देखकर दिन दहाड़े एसएसपी आवास में कुछ निर्लज्ज टूट पड़े। ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा कप्तान के आवास में पीने का। खुल गयी बोतलें और जम कर छलके जाम। कुछ वरिष्ठ अपनी वरिष्ठता का ख्याल रखते हुए शराब और भांग की बर्फी से दूर रहे, उन्‍होंने कप्तान से होली मिलकर कोल्ड ड्रिंक से काम चलाया। इटावा के इतिहास में ऐसा आयोजन पहली बार हुआ तो नशेड़ियों का दिल बाग़ बाग हो गयाl जबकि कोई आम आदमी या पत्रकार किसी होटल में शराब पी रहा हो तो पुलिस क्या हश्र करती है, ये सभी जानते हैंl

इटावा के पत्रकार विकास मिश्रा की रिपोर्ट.

मुश्किल में वीएन राय, घोटाले-गड़बडि़यों की जांच करेगा विजिलेंस

: 12 सप्‍ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय का खेल के कई राज जल्‍द ही खुलने वाले हैं. सीएजी को किए गए एक शिकायत के बाद उनके खिलाफ लगभग चालीस करोड़ रुपये के निर्माण कार्य में अनियमिता, डिस्‍टेंस मोड से एमबीए, बीबीए, बिना विजिटर की अनुमति से मारिशस विजिट, एप्‍वाइंटमेंट में गड़बड़ी समेत अधिका‍रों के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर जांच के आदेश दिए गए हैं.

इसकी जांच सेंट्रल विजिलेंस कमीशन करेगा. कमीशन के डिप्‍टी सेक्रेटरी लीला चंद्रन द्वारा जारी किए गए पत्र में 12 सप्‍ताह के भीतर सभी मामले की जांच करके रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. समझा जा रहा है कि पिछले लंबे समय तक अनियमिताओं को लेकर आरोपों का सामना कर रहे वीएन राय की मुश्किलें जल्‍द ही बढ़ने वाली हैं. अगर जांच में उन्‍हें किसी मामले में दोषी पाया गया तो उन्‍हें हटाने जाने से लेकर कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है. नीचे जांच से जुड़े पत्र.

सतना से लांच हुआ पत्रिका का 31वां एडिशन

भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्‍वालियर, उज्‍जैन और रतलाम के बाद शनिवार को पत्रिका की लांचिंग सतना में भी कर दिया गया. सतना के साथ ही पत्रिका मध्‍य प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख जिलों तक पहुंच गया है. सतना पत्रिका समूह का 31वां संस्‍करण है. सतना से मध्‍य प्रदेश के अलावा यूपी के सटे जिलों को भी कवर करेगा. प्रबंधन ने इसके लिए पूरी तैयारी पहले से ही कर रखी थी.

मध्‍य प्रदेश में प्रकाशित होने वाला पत्रिका, राजस्‍थान में राजस्‍थान पत्रिका के नाम से प्रकाशित होता है. इसके अलावा यह समूह छत्‍तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से भी अखबार का प्रकाशन कर रहा है. संभावना जताई जा रही है कि सतना में बढि़या रिस्‍पांस मिलने के बाद पत्रिका प्रबंधन यूपी की तरफ भी कदम बढ़ा सकता है.

हरियाणा न्‍यूज के मालिक कांडा के खिलाफ सुसाइड ठोस साक्ष्‍य : पुलिस

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने यहां की एक अदालत से कहा कि पूर्व विमान परिचारिका गीतिका शर्मा और उसकी मां के सुसाइड नोट को हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा तथा उनकी सहयोगी अरुणा चड्ढा के खिलाफ ठोस साक्ष्य माना जाना चाहिए। कांडा और अरुणा पर गीतिका को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।

जिला न्यायाधीश एसके सरवारिया के समक्ष अपनी दलील में अभियोजन पक्ष ने कहा कि गीतिका के सुसाइड नोट आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं। अतिरिक्त सरकारी वकील राजीव मोहन ने कहा कि गीतिका की मां का सुसाइड नोट भी कांडा और अरुणा के दोषी होने की ओर इशारा करता है। गीतिका की मां ने 15 फरवरी को आत्महत्या कर ली थी। हालांकि, कांडा के वकील ने इन दलीलों का विरोध किया।

बहरहाल, अदालत ने आगे की सुनवाई के लिए दो अप्रैल की तारीख मुकर्रर की है। गीतिका पिछले साल पांच अगस्त को अशोक विहार स्थित अपने आवास में मृत हालत में मिली थी। गीतिका ने अपने सुसाइड नोट में कहा था कि वह कांडा और अरुणा की ‘प्रताड़ना’ के चलते अपनी जीवन लीला समाप्त कर रही है।

इसके बाद, गीतिका की मां अनुराधा शर्मा ने भी आत्महत्या कर ली और उन्होंने अपने सुसाइड नोट में आरोप लगाया कि इन दोनों लोगों के चलते उसकी बेटी ने आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाया था। दिल्ली पुलिस ने अपने मुख्य और पूरक आरोप पत्र में कहा है कि गीतिका के प्रति कांडा आसक्त था और वह उसका यौन शोषण करने के लिए उसे अपनी कंपनी में वापस लाना चाहता था। (एजेंसी)

पंचोली ने होली से पहले ऑफ रद्द किया और पैसे भी काटे

अमर उजाला के लखनऊ संस्करण के संपादक इन्दुशेखर पंचोली की तानाशाही लगातार बढ़ती जा रही है। पंचोली का व्यवहार पुराने दौर के उस जमींदार जैसा रहा है, जिसके यहां काम करने वाले लोग किसी बंधुआ मजदूर से अधिक नहीं होते। आप फील्ड में हुआ करें बहुत बड़े पत्रकार, देश-दुनिया के अधिकारों की बात किया करें, राजनेताओं, अफसरों को कुछ न समझते हों, लेकिन पंचोली के कार्यालय में आपकी बिसात दिहाड़ी मजदूर से ज्यादा कुछ भी नहीं।

अमर उजाला के इस संस्करण में पत्रकारों से किये जाने वाले व्यवहार की खबरें पहले भी आ चुकी हैं और कई तो मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं। कुछ दिनों पहले डेस्क पर काम करने वाले एक साथी का तो पीजीआई में इलाज चल रहा है और उसने कार्यालय न जाने का निर्णय कर लिया है। पंचोली की तानाशाही का ताजा नमूना डेस्क पर काम करने वाले साथियों के एक बड़े समूह का साप्ताहिक अवकाश रद्द किया जाना है। होली के पहले करीब एक माह से इन साथियों का साप्ताहिक अवकाश तो रद्द है और इस पर भी अगर किसी साथी ने भूले-भटके या अपने किसी अत्यन्त आवश्यक कार्य के कारण कभी इसे लेने की जुर्रत की है तो उन्हें दो-तीन दिनों का वेतन काट लेने की कड़ी सजा दी गयी है। साप्ताहिक अवकाश रद्द, बढ़ती महंगाई और त्योहारों के समय वेतन काट लिये जाने का यह तुगलकी फरमान बीते दौर के गुलामों पर किये जाने वाले कठोर शासन की याद दिलाता है।

बताया जाता है कि साप्ताहिक अवकाश रद्द करने का फरमान पंचोली ने एक माह पहले तब जारी किया था, जब एक दिन पेज थोड़ा देर से छूटा था। पेज में देरी की वजह खबरों की आमद, सम्पादन, पेज को पढ़े जाने में लगने वाला समय, सिस्टम की गति, पेजों की अचानक संख्या बढ़ जाने, विज्ञापन लगने में देरी सहित तमाम कारणों से जुड़ी होती हैं, लेकिन पंचोली ने बिना इस पर विचार किये साप्ताहिक अवकाश रद्द कर दिया। वैसे साप्ताहिक अवकाश रद्द कर देना पंचोली की आदत में शुमार है। विधानसभा चुनाव, नगर निगम चुनाव सहित पिछले वर्ष कई अवसर आए हैं जब अमर उजाला के सम्पादकीय कर्मियों ने कई कई महीनों तक बिना साप्ताहिक अवकाश के काम किया है। लम्बे समय तक साप्ताहिक अवकाश के बिना काम करने पर उन अवकाशों को समायोजित करने की गुंजाइश भी नहीं रह जाती, क्योंकि उन्हें एक माह के भीतर ही समायोजित किये जाने का नियम भी बनाया जा चुका है। जहां कुछ दूसरे समाचार पत्रों में सम्पादकीय कर्मियों पर सप्ताह में दो साप्ताहिक अवकाश दिये जाने पर विचार हो रहा है और कुछ जगहों पर यह व्यवस्था लागू भी है, अमर उजाला लखनऊ में यह व्यवस्था बताती है कि यहां न जाने की किस दौर में काम किया जा रहा है?

साथियों का यह भी कहना है कि पंचोली के अनुसार, किसी चीज को बेहतर ढंग से कवर करने का मतलब है कि उसको अधिक से अधिक छापा जाय। ऐसे में महीने में चार-छह अवसर हमेशा आ जाते हैं, जब दो से चार पेज बढ़ा दिये जाते हैं। इनके लिए आदमी नहीं बढ़ाये जाते हैं, बस काम बढ़ा दिया जाता है। ऐसे में पेज में थोड़ी बहुत देरी के लिए साथियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन अमर उजाला का उच्च प्रशासन भी पंचोली के इस कार्यप्रणाली से आँख मूंदे पड़ा है। ऐसे ही हालातों में पिछले दिनों डीएनई धर्मेन्द्र सिंह को अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ा था और अन्ततः उन्होंने संस्थान छोड़ देना ही बेहतर समझा था। साथियों का विश्वास है कि घड़ा कभी न कभी भरकर फूटेगा, देखना है यह इन्तजार कितना लम्बा होता है…। (कानाफूसी)

स्‍वतंत्र मिश्रा जी, आपके माता पिता इस हालत में देखकर जरा भी खुश न होते

पिछले दो दिन से सहारा मीडिया के एक बड़े पदाधिकारी के क्रेडिट कार्ड की चोरी की खबरे पढ़ कर मजे ले रहा था. आज उसी कड़ी में एक खबर छपी कि भड़ास के संपादक यशवंत को सहारा मीडिया के बड़े पदाधिकारी ने वीडियो प्रकाशन के लिए धमकी दी, खबर देखा तो पढ़ने लगा, तब तक नीचे लिंक भी था ऑडियो का, जिसमें स्वतंत्र मिश्र और यशवंत सिंह के बीच वार्तालाप थी. जिसमें वार्तालाप कम स्वतंत्र जी का प्रलाप ज्यादा सुनाई दिया.

शुरू-शुरू में तो सुनने में मजा आ रहा था, पर जैसे जैसे बात आगे बढ़ती गयी तो बड़ा दुःख हुआ. स्वतंत्र मिश्र के बारे में जो जानकारी है, उस हिसाब से, वे एक बड़े आदमी अर्थात बड़े पद पर हैं और आज जो जितना ज्यादा पैसा बनाता है, उतना ही बड़ा होता है. उन्हें एक परिपक्व व्यक्ति की तरह व्यवहार करना चाहिए था. परिपक्व अर्थात बड़े आदमी का व्यवहार खुद ही परिपक्व होता है. मुझे याद आ रहा है कृश्नचंदर द्वारा लिखित 'एक गधे की आत्मकथा' का एक अंश, जिसमें एक बोलने वाला गधा जो समाचार पत्र पढ़कर बहुत समझदार हो गया होता है, अपने एक काम से नेहरु जी के पास पहुँच जाता है और उन्हें प्रणाम करता है, उसके बाद अपने अनुभव को बताता है कि "उस दिन मुझे लगा कि बड़े लोगों में कुछ बात होती जरूर है वरना वो बड़े न हो, नेहरु जी एक गधे को बोलता देखकर चौंके तो लेकिन ये बात उन्होंने अपने चेहरे पर ज़ाहिर नहीं होने दी. उन्होंने बड़ी शांति से मेरे अभिवादन का उत्तर दिया."

यहाँ इस प्रसंग का इतना आशय था कि स्वतंत्र मिश्र और यशवंत सिंह का वार्तालाप जब मैं भड़ास पर सुन रहा था तो स्वतंत्र मिश्र बिलकुल अनियंत्रित, बदहवास और असंयमित और टूटे हुए से लगे जो कि इतने बड़े मीडिया समूह के प्रबंधन स्तर का दयित्व सभाल रहे व्यक्ति के लिए कही सही नहीं था, जो लोग इतने ज़िम्मेदार पदों पर बठे हुए हैं. उनका इस तरह से धैर्य खोना कहीं न कहीं उनके स्वयं के लिए तो हानिकारक है ही, उन सभी के लिए भी नुकसान पहुंचाने वाला है जो उनके पेशे से जुड़े सस्थान में कार्यरत होते हैं. चाहे वह कर्मचारी हो या उपभोक्ता. उन्हें कोई दिक्कत थी तो वो बात कर सकते थे और अपनी बात रख सकते थे. एक गंभीर पत्रकार की तरह ना सही कम से कम एक गंभीर इंसान की तरह तो वो खुद भी मीडिया संस्थान से जुड़े हुए हैं. इस तरह से दूसरों से खबरें या फुटेज लेते ही रहते होंगे तो उन्हें अपनी पेशेगत ज़िम्मेवारियों को पूरा करते वक़्त ये सब तो करना ही पड़ा होगा.

एक बात और वो जिस तरह बार-बार धमकियाँ दे रहे थे, वहां तक तो मैं समझ रहा था कि चलो वो एक साधारण व्यक्ति की तरह व्यवहार कर रहे हैं, परन्तु जब वो यशवंत सिंह को तबाह करवाने के लिए लिए श्राप देने लगे तो हंसी आई. अकेले कमरे में जोर-जोर से हंसा फिर सोचा कि क्यों ना न्यूज़ चैनल जादू टोना दिखाएं, जब हेड साहब खुद ही सुबह शाम ईश्वर से दुश्मनों को ख़त्म करने के लिए अनुष्ठान करते हों. बीच में यशवंत ने एक बार उन्हें समझाने कि कोशिश की थी कि आप अभी भी मध्यकालीन युग में जी रहे हैं, किन्तु यशवंत जी की आवाज़ स्वतंत्र जी की आकाशवाणी के नीचे दब गयी.

वो बड़े मीडिया संस्थान के हैं, उनके खिलाफ खबरों की सीरीज नहीं चलेगी ये जानता हूँ. वो भी जानते हैं और उन्हें ये भी पता था कि यशवंत जी उनके और अपनी बातचीत नहीं डालेंगे. हालांकि वो चिल्ला तो वो पहले ही रहे थे, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि ये बातचीत भी डाल दी जाएगी वो बिलकुल पागलों जैसा व्यवहार करने लगे. जिस तरह वो अपने बारे में

विवेक
विवेक
बार-बार चिल्ला कर बता रहे थे कि वो अपने माता पिता के दिए संस्कारों और ईश्वर की आस्था के बल पर ही हमेशा निकल जाते हैं, तो मैं बस इतना कहूँगा कि आप भड़ास पर अपनी ऑडियो क्लिप खुद सुनें और समझें कि आपके माता पिता इस हालत में आपको देखकर जरा भी खुश न होते, क्यूंकि अब आप विक्षिप्त हो चुके हैं.

लेखक विवेक इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातक हैं और इलाहाबाद में ही रहकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. सोशल मीडिया और न्यू मीडिया पर इनकी खासी सक्रियता रहती है.  विवेक से मुलाकात vicky.saerro@gmail.com के जरिए की जा सकती है.


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अमेरिकी सांसदों ने कहा- अखबार ने प्रकाशित की गलत खबर

मोदी की अमेरिकी प्रतिनिधियों से मुलाकात का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस इसे ब्रांड वैल्यू बढ़ाने की तकनीक बता रही है। वहीं अमेरिकी सांसद और बीजेपी सारे आरोपों को झूठा बता रहे हैं। मोदी की अमेरिकी प्रतिनिधियों से मुलाकात पर कांग्रेस कई तरह के सवाल उठा रही है। कांग्रेस इस मुलाकात के पीछे का मकसद जानना चाहती है कि आखिर क्यों मोदी के लिए यह मुलाकात जरूरी थी।

वहीं बीजेपी कांग्रेस के किसी सवाल का जवाब नहीं देना चाहती और अखबार में छपि खबर को झूठ का पुलिंदा बता रही है। इन सब आरोपों के बीच गुजरात आए अमेरिकी सांसदों ने इस आरोप का खंडन किया है। मोदी कांग्रेस के लिए दुश्मन नंबर 1 हैं। ऐसे में मुलाकात पर सवाल उठना लाजमी है। हालांकि अभी मोदी की ओर से जवाब आना बाकी है। (भाषा)

कमलेश सिंह बनेंगे इंडिया टुडे डिजिटल ग्रुप के हेड

पिछले दिनों दैनिक भास्‍कर के नेशनल हेड के पद से इस्‍तीफा देने वाले एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर कमलेश सिंह जल्‍द ही इंडिया टुडे से जुड़ने जा रहे हैं. उन्‍हें इंडिया टुडे समूह में डिजिटल ग्रुप का हेड बनाया जा रहा है. कमलेश सिंह 1 मई को इंडिया टुडे समूह ज्‍वाइन करेंगे. समूह डिजिटल में कई नए सेगमेंट की शुरुआत करने जा रहे है. यह जिम्‍मेदारी कमलेश सिंह को दी जाएगी. संभावना है कि इसके बाद इंडिया टुडे समूह अपने बहुप्रतीक्षित अखबार को भी लांच करने में जुटा है.

इस लिए ही इंडिया टुडे कमलेश सिंह जैसे मजबूत कंधे को अपने साथ जोड़ रहा है. कमलेश सिंह की इंडिया टुडे समूह के साथ यह दूसरी पारी होगी. वे इसके पहले भी इसके साथ जुड़े रहे हैं. वे पिछले पांच सालों से दैनिक भास्‍कर को पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा चंडीगढ़ की जिम्‍मेदारी संभाल रहे थे. कुछ समय पहले ही उनका तबादला भोपाल किया गया था. वे मेट्रो नाउ से इस्‍तीफा देकर भास्‍कर पहुंचे थे.

कमलेश सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 1996 में एशियन एज के साथ की थी. इसके बाद उन्‍होंने इस अखबार के अहमदाबाद संस्‍करण को लांच करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई. 2001 में वे इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद वे 2005 में सीएनएन-आईबीएन पहुंचे. यहां से फिर मेट्रो नाउ के हिस्‍सा बन गए. संभावना जताई जा रही है कि कमलेश सिंह के इंडिया टुडे से जुड़ने के बाद कई और बड़े नाम डिजिटल डिविजन को ज्‍वाइन कर सकते हैं.

राजा भैया के और करीब पहुंची सीबीआई टीम

प्रतापगढ़। बलीपुर के तिहरे हत्याकांड में अब सीबीआई की जांच की जद में राजा भैया और उनके अति करीबी आ गए हैं। अब सीबीआई राजा भैया की चौखट से मात्र कुछ कदम दूर है। शनिवार को एमएलसी गोपालजी समेत कई लोगों से सीबीआई कैंप कार्यालय में पूछताछ हुई। लगभग ढाई घंटे बाद बाहर निकले गोपालजी ने कहा कि न्याय के लिए राजा भैया परिवार नार्को टेस्ट भी कराने को तैयार है ताकि सच्‍चाई सबके सामने आ सके।

पिछले तीन सप्‍ताह की जांच के दौरान सीबीआई के निशाने पर प्रधान व उसके हत्यारोपी के परिजन, घटनास्थल पर मौजूद रहे लोग और भगोड़े पुलिस वाले ही थे। राजा भैया और उनके साथ सीओ की हत्या में नामजद किसी से भी सीबीआई ने पूछताछ नहीं की थी। शुक्रवार को प्रधान के भाई पवन की ओर से राजा भैया, बाबागंज विधायक और उनके करीबियों पर धमकाने वाली तहरीर मिलने के बाद शनिवार को सीबीआई की जांच राजा भैया के करीबियों की ओर घूम गई। सीबीआई ने शनिवार को राजा भैया के अति करीबी एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपालजी को तलब कर लिया। इसके बाद से ही सीबीआई के राजा भैया के चौखट पर पहुंचने के कयास लगने लगे।

अपराह्न साढ़े तीन बजे गोपालजी सीबीआई के कैंप कार्यालय में दाखिल हुए। उनसे लगभग ढाई घंटे तक पूछताछ चली। सूत्रों का कहना है कि गोपालजी से घटनाक्रम के बाबत पूछताछ की गई क्योंकि घटना की जानकारी मिलने पर देर रात वह बलीपुर गांव पहुंचे थे। गोपालजी से पूछताछ के बाद यह कहा जा रहा है कि किसी भी दिन राजा भैया को सीबीआई तलब कर सकती है। हालांकि गोपाल जी ने सीबीआई को क्‍या जानकारी दी इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है।

कैंप कार्यालय से बाहर निकलने के बाद गोपालजी ने पत्रकारों से कहा कि राजा भैया परिवार इस मामले में न्याय चाहता है। इधर, गोपालजी से पहले सीबीआई टीम ने बलीपुर गांव के गुल्ले सरोज, नन्हू सरोज, राममूरत पटेल, भोला पटेल, रामा, मुन्ना, लगडू सिंह से घंटों पूछताछ किया। सुबह प्रधान के घर पहुंची सीबीआई टीम ने परिजनों से घंटों पूछताछ कर सीओ की हत्या का राज उगलवाने का प्रयास किया था। हालांकि सीबीआई अभी कुछ खुलासा नहीं कर रही है, लेकिन बताया जा रहा है सीबीआई खुलासे के बिल्‍कुल करीब पहुंच चुकी है।

बिहार में पति के सामने महिला से गैंगरेप, गुप्‍तांग में पत्‍थर डाला, मौत

मुजफ्फरपुर/सहरसा। बिहार में कानून व्यवस्था में सुधार के बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के तमाम दावे बेमानी साबित हो रहे हैं। खासकर महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध के मामले में। पिछले साल 16 दिसंबर को दिल्ली में चलती बस में हुए गैंग रेप की तरह एक अमानवीय घटना बिहार में भी सामने आई है। मुजफ्फरपुर जिले की इस घटना में दरिंदों ने पहले पति के सामने ही महिला के साथ गैंग रेप किया, फिर इतनी यातना दी कि उसकी मौत हो गई। सहरसा जिले में भी एक नर्स के साथ गैंग रेप की घटना सामने आई है। इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

दरिंदों की इस हैवानियत के बारे में जानकर आपकी रूह कांप उठेगी। मुजफ्फरपुर जिले के मंडई खुर्द की एक महिला बुधवार को अपने पति के साथ पास ही के सकरा फरीदपुर गांव से लौट रही थी। रास्ते में कुछ दरिंदों ने उसे पकड़ लिया। दरिंदों ने पहले उसके पति को बांध दिया। पति से सामने ही महिला के साथ गैंग रेप किया। महिला ने विरोध करने की कोशिश की तो उसके पूरे शरीर को दांत से काटा।

इसके बाद दरिंदों ने हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दीं। उन्होंने महिला के गुप्तांग में कपड़े के साथ पत्थर और मिट्टी भर दिए और उसे तड़पता छोड़कर भाग गए। बाद में आसपास के ग्रामीणों को जानकारी मिली तो वह महिला को सकरा रेफरल अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने महिला की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे समस्तीपुर अस्पताल ले जाने को कहा। परिवारवाले इलाज के लिए विक्टिम को समस्तीपुर ले जा रहे थे कि रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।

हताश परिवारवाले शव लेकर लौटे और उसे दफना दिया। इस बीच महिला की ननद ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया। अभी तक इस मामले में कोई पहल नहीं हुई है। गौरतलब है कि पिछले साल 16 दिसंबर को दिल्ली के वसंत विहार इलाके में हुए गैंग रेप के बाद दरिंदों ने मेडिकल की स्टूडेंट के प्राइवेट पार्ट में रॉड डाल दी थी जिसके बाद उस लड़की की इलाज के दौरान सिंगापुर में मौत हो गई थी। इस गैंग रेप ने पूरे देश को आंदोलित कर दिया था।

सहरसा में नर्स के साथ गैंग रेप : सहरसा जिले में नगर थाना इलाके के हटियागाछी मुहल्ले में एक प्राइवेट नर्सिंग होम की नर्स को सुनसान स्थान पर ले जाकर 3 लोगों ने गैंग रेप किया। एसपी अजीत कुमार सत्यार्थी ने बताया कि तीनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार रेपिस्टों की पहचान हटियागाछी निवासी मो. लाल बाबू, मो. मोजिम और मो. सजिम के रूप में की गई है। (एनबीटी)

‘टाइम’ सूची में अरविंद केजरीवाल अकेले भारतीय

जानी मानी पत्रिका 'टाइम' की दुनिया भर में वर्ष के प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में इस बार भारत से अरविंद केज़रीवाल का नाम भी है. इस सूची में दुनिया भर से 153 लोगों के नाम है जिन पर ऑनलाइन मतदान किया जा रहा है. मतदान के आधार पर और 'टाइम' पत्रिका के संपादक 100 लोगों की एक सूची तैयार करेंगे जिसे आगामी 18 अप्रैल को जारी किया जाएगा. इस समय 153 लोगों की सूची में भारत से सिर्फ अरविंद केज़रीवाल का नाम है.

उल्लेखनीय है कि इस समय चल रहे मतदान में अरविंद केज़रीवाल तीसरे नंबर पर हैं. मतदान 12 अप्रैल तक चलेगा. उधर अरविंद केजरीवाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्हें इस सूची के बारे में पता ही नहीं है. उन्होंने कहा, "मुझे इसकी जानकारी नहीं है. किसी भी सूची में आना मेरा मकसद नहीं है. मेरा मकसद है कि मैं लोगों के काम आ सकूं." 153 लोगों की इस सूची में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद, अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, उनकी पत्नी मिशेल ओबामा और पाकिस्तान की मलाला युसुफज़ई के नाम भी हैं.

वैसे आश्चर्यजनक रुप से भारत की किसी और शख्सियत का नाम इस सूची में नहीं है. 'टाइम' पिछले कुछ वर्षों से प्रभावशाली लोगों की सूची प्रकाशित करता रहा है. वर्ष 2010 में ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा को प्रभावशाली व्यक्ति की सूची में सबसे ऊपर रखा गया था जबकि वर्ष 2011 में वईल गोहिम को शीर्ष स्थान मिला था. वईल गोहिम को मिस्र में हुई क्रांति का प्रवक्ता माना गया था.

वर्ष 2012 में बॉस्केट बॉल खिलाड़ी जेरेमी लिन को सबसे प्रभावशाली माना गया था. अरविंद केज़रीवाल मूल रुप से जनलोकपाल विधेयक की मांग को लेकर चर्चा में आए थे और इससे पहले आरटीआई में उनके काम को काफी पसंद किया गया था. रैमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित अरविंद केज़रीवाल इन दिनों दिल्ली में बिजली और पानी के बढ़े हुए बिलों के विरोध में अनशन पर बैठे हैं. (बीबीसी)

भ्रष्‍ट पत्रकारिता (22) : प्रेस क्लब में खुला है अवैध रेस्‍टोरेंट, किराया चौकड़ी की झोली में!

प्रेस क्लब को एक पदाधिकारी ने अवैध रेस्टारेंट खुलवाने में अहम भूमिका निभाई। दलाली मोहल्ले का कोई दलाल अगर गलत कार्यों पर उतर आए तो भले ही खुद अनाधिकृत कब्जेदार हो, लेकिन उसने अपने ऐशोआराम के लिए यूपी प्रेस क्लब को ही किराए पर चलाना शुरू कर दिया। दलाली मोहल्ले के इसी दलाल और यूपी वर्किग जर्नलिस्ट यूनियन की चौकड़ी ने मिलकर प्रेस क्लब में लंबी-चौड़ी राशि पर लोगों को किराए पर रेस्टोरेंट दे रखा है।

क्लब के जरिए अपने साथ-साथ साथी बाराती को ऐश करने वाला कोई और नहीं बल्कि यही दलाली मोहल्ले वाले एक दलाल है। जिसकी कहानी ही प्रूफ रीडर से शुरू होकर रिपोर्टर आने पर समाप्त हो सकती है। अपनी बात को यह भले कई टुकड़ों में कहे लेकिन जब बात लेने की आ जाए तो जनाब सब कुछ एक ही हिचकी में डकारने का माद्दा रखते है। बरसों से प्रेस क्लब को दीमक की तरह चाटे हुए है। इतने दिन में शायद लकड़ी भी खत्म हो जाती है। लेकिन प्रेस क्लब की इतनी आमदनी है कि एक दलाल तो क्या कई दलाल लग जाए फिर भी क्लब की सेहत पर असर पडऩे वाला नहीं।

त्रिनाथ के शर्मा की रिपोर्ट. यह रिपोर्ट दिव्‍य संदेश में भी प्रकाशित हो चुकी है.

भ्रष्‍ट पत्रकारिता (21) : खामियों की खान है प्रेस क्लब, टायर्ड-रिटायर्ड लोगों की भरमार

: नए पत्रकारों के लिए बंद है प्रेस क्‍लब के दरवाजे : 9 नवंबर 1989 को प्रदेश सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई मार्ग स्थित चाइना बाजार स्थित इस भवन को तीस वर्षों के लिए 8 लाख 78 हजार 460 के नजराने पर दिया था और सालाना 21961.30 पैसे सालाना लीज पर दिया था। 1968 में इस भवन का पट्टा यूपी वर्किग जर्नलिस्ट यूनियन के नाम पर दस वर्ष के लिए हुआ था। 1978 में यह पट्टा समाप्त हो गया। तीस साल बीत गए लेकिन इसका पट्टा बढ़वाने की कार्रवाई नहीं की गई। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने भी चुप्पी साध रखी है।

जानकार बताते है कि इस मामले में प्रीमियम के नाम पर जो 8 लाख 78 हजार 460 रुपए तय हुआ इस राशि का भुगतान सूचना विभाग से कर लिया गया, लेकिन इसे एलडीए में नहीं जमा किया। और इस राशि को लेकर बंदरबांट हुई। आज की स्थिति में खुद अनाधिकृत कब्जेदार होने के बावजूद प्रेस क्लब ने ओपेन एयर रेस्टोरेंट दे रखा है। यह सब एलडीए की देखरेख में हो रहा है। उसने स्वयं कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। आज की तारीख में प्रेस क्लब का रजिस्ट्रेशन नहीं है। और वह पट्टेदारी नियमों का उल्लंघन कर रही हे। एलडीए ने अपने रिकार्ड में प्रेस क्लब के भवन को ऐतिहासिक धरोहर घोषित कर रखा है, और ऐतिहासिक इमारत में भी दुकानें किराए पर चल रही है।

सूची में टायर्ड और रिटायर्ड लोगों की भरमार : यूपी प्रेस क्लब में मेम्बरशिप को लेकर बड़ा घालमेल है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भले हर साल पुनरीक्षण होता हो लेकिन यहां की वोटर लिस्ट जो दशकों पहली बनी थी उसी के अनुसार चुनाव होता है और उन्हीं लोगों मताधिकार दिया जाता है। वोटर लिस्ट में काफी संख्या में ऐसे लोगों की भरमार है जो पत्रकारिता छोड़  चुके है, या फिर पूरी तरह से निष्क्रिय है। सूची में बड़ी टायर्ड और रिटायर्ड लोगो की जमात है।

नए सदस्यों को बनाए जाने के मुद्दे पर नियमावली को ऐसा जटिल किया गया है कि कोई लिखने पढऩे वाला पत्रकार प्रेस क्लब का मेम्बर हो ही नहीं सकता। यदि 200 सदस्यों की सूची का अवलोकन कर लिया जाए तो तस्वीर खुद ब खुद साफ हो जाएगी। मेम्बरशिप के नाम पर ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिनके पास पढऩे लिखने के अलावा हर काम है। लेकिन क्लब में जो भी पदाधिकारी बैठे हैं वे नहीं चाहते कि किसी नए पत्रकार को मेम्बर बनाया जाए। जो भी नए मेम्बर बनाए गए है उनमे से अधिकांश जेनुइन पत्रकार होने के बजाए झोला छाप डाक्टरों की तरह डायरी छाप पत्रकार है।

त्रिनाथ के शर्मा की रिपोर्ट. यह रिपोर्ट दिव्‍य संदेश में भी प्रकाशित हो चुकी है.

भ्रष्‍ट पत्रकारिता (20) : कुछ पत्रकारों की निजी जागीर बना यूपी प्रेस क्‍लब!

लखनऊ। बीते 57 सालों में यूपी की आबादी बढ़कर लगभग 22 करोड़ के करीब पहुंच गई है। भले ही केन्द्र और प्रदेश सरकारों के तमाम प्रयासों के बावजूद जनसंख्या नियंत्रण करने में असफल हो गए हों, लेकिन 57 साल पहले स्थापित यूपी प्रेस क्लब के सदस्यों की संख्या 200 से अधिक पार नहीं कर पाई है। यह अजब कारनामा यूपी प्रेस क्लब ने किया है।

केन्द्र और प्रदेश सरकारों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए यूपी प्रेस क्लब से प्रेरणा लेनी चाहिए। यूपी प्रेस क्लब को निजी जागीर बनाने के कारनामों पर आईएफडब्ल्यूजे और वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र वाजपेयी ने पत्र लिखकर सवाल खड़े किए थे। इसके बावजूद अभी तक प्रेस क्लब की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया है।

उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब की स्थापना 18 नवम्बर 1956 को उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव रहे उपेन्द्र वाजपेयी और पायोनियर के पूर्व प्रधान सम्पादक एस.एन. घोष के प्रयासों से हुआ था। पत्रकारिता जगत के हस्ताक्षर माने जाने वाले तमाम पत्रकार यूपी प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद पर सुशोभित हो चुके हैं। बीते एक दशक में यूपी प्रेस क्लब अपनी गरिमा खो चुका है।

यूपी प्रेस क्लब के सदस्यों की सूची पर नजर डालने से हैरत में पड़ जाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रेस क्लब सदस्यों की सूची में अभी भी ऐसे नाम शुमार हैं, जो दिवंगत हो गए हैं और जिन्होंने पत्रकारिता को अलविदा कह दिया है। काफी संख्या में अन्य राज्यों में शिफ्ट हो गए हैं। कई महिला पत्रकार अब हाउस वाइफ की जिम्मेदारियों में रस-बस गई हैं। इन खामियों को कई वरिष्ठ और नवागत पत्रकारों ने उठाया है, लेकिन 57 साल से यूपी प्रेस क्लब के सदस्यों की सूची में कोई खास बदलाव नहीं आया है। नए पत्रकारों को प्रेस क्लब की सदस्यता किसी भी सूरत में नहीं मिलती है। इसको लेकर पत्रकारों में काफी रोष है।

आईएफडब्ल्यूजे के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार के. विक्रम राव ने प्रेस क्लब की कार्यप्रणाली पर 15 सितम्बर 2011 को प्रेस क्लब के अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार सिंह और महामंत्री जोखू प्रसाद तिवारी को सम्बोधित एक पत्र लिखा था। जिसमें प्रेस क्लब के पदाधिकारियों द्वारा की जा रही तमाम वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। पत्र में कहा गया था कि कुछ स्वार्थी पत्रकार प्रेस क्लब को निजी जागीर बना लिया है।

यही वजह है कि प्रेस क्लब में नए सदस्यों का प्रवेश पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इससे पूर्व यूपी प्रेस क्लब के महासचिव रहे वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकार उपेन्द्र वाजपेयी ने 8 सितम्बर 2006 को तत्कालीन अध्यक्ष रामदत्त त्रिपाठी को पत्र लिखकर मांग की थी कि यूपी प्रेस क्लब सभी पत्रकारों के लिए खोला जाना चाहिए। उसकी अर्हता सिर्फ पत्रकार होना हो। इसके साथ ही प्रेस क्लब को बुराइयों से बचाने के लिए तमाम सुझाव दिए थे। जिनका प्रेस क्लब ने आज तक पालन नहीं किया।

त्रिनाथ के शर्मा की रिपोर्ट. यह रिपोर्ट दिव्‍य संदेश में भी प्रकाशित हो चुकी है.

वाह रे यूपी पुलिस : रेप के आरोपी का शांतिभंग में कर दिया चालान

इलाहाबाद। यूपी सरकार की छीछालेदर कराने में पुलिस का सबसे बड़ा योगदान है। अखिलेश सरकार जो कुछ अच्छा भी करना चाहती है, उन अच्छाइयों पर पुलिसिया करतूत भारी पड़ जाती है। कभी दुराचार पीड़िता महिला से एसपी रैंक सरीखे अफसर का यह कहना कि इतनी पुरानी औरत से कौन दुष्‍कर्म करेगा भला, कभी इलाहाबाद के सिविल लाइंस में सीओ पर नशेड़ियों का हमला, उस पर हमराहियों समेत अन्य पुलिस अफसरों का तमाशबीन बने रहना। तमाम उदाहरण हैं-हरि अनंत, हरि कथा अनंता जैसा मामला है।

पुलिस करतूत का ताजा मामला उसी प्रतापगढ़ जनपद का है जहां दो महीने पहले कुंडा में हमराहियों के लचर रवैये से डिप्टी एसपी जियाउल हक जैसे ईमानदार पुलिस अफसर को जान से हाथ धोना पड़ा था। जियाउल हक के परिजनों से मिलने देवरिया गए सीएम अखिलेश को तगड़े जनाक्रोश का सामना करना पड़ा था। सीएम को पिछले रास्ते से ले जाना पड़ा और प्रदेश के पुलिस मुखिया को वहां की जनता ने चूड़िया भेंट कर उसे पहन लेने की सलाह दी थी। इतना ही नहीं, विरोध में नारे गूंजे थे-डीजीपी आराम करो, चूड़िया पहनो डांस करो। इन सब घटनाओं से प्रदेश सरकार ने कोई नसीहत नहीं लिया। जनता का गुस्सा भले ही सीएम अखिलेश को न दिखता हो पर उनके पिताश्री व राजनीति के मंझे खिलाड़ी मुलायम सिंह को इसका अहसास हो गया है। वे नाहक ही नहीं बार-बार अखिलेश को सुधार की चेतावनी दे रहे हैं।

खैर, अब आते हैं पुलिस के नई करतूत पर। कन्धई थाना क्षेत्र के पूरे चिरंजू महेशपुर गांव में 23 मार्च की शाम घर से शौच के लिए गई दस वर्षीय एक बालिका को एक वहशी ने दबोच लिया। चीख पुकार करने पर ग्रामीण जुटने लगे। ग्रामीणों को आता देख वहशी मौके से फरार हो गया। जाते-जाते बालिका को मुंह बंद न रखने पर जान से मार डालने की धमकी भी दे गया। डरी सहमी बालिका ने परिजनों को घटना के बारे में जानकारी दी। बालिका के पिता ने कंधई थाने पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने आरोपी के घर दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया। थाने में बालिका के परिजनों पर समझौते का दबाव डाला जाने लगा। बात न बनने पर पुलिस ने दुराचार के आरोपी को शांतिभंग के आरोप में चालान कर दिया।

उधर, एसओ परमेंद्र सिंह के बयान पर गौर करिए। उनका कहना है कि दोनों पक्षों को थाने बुलाकर झगड़ा न करने की हिदायत दी गई है। सूबे में कानून व्यवस्था चलाने वाली ‘खाकी’ की कार्यप्रणाली से बदरंग हो रही तस्वीर का यह एक हिस्सा भर है, जो किसी को भी विचलित कर सकता है। पता नहीं शासन-प्रशासन की ओहदेदार कुर्सी पर बैठे लोगों को यह क्यों नहीं दिख रहा है।

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.

स्वतंत्र मिश्रा को गुस्सा कब और क्यों आता है? (सुनें टेप)

स्वतंत्र मिश्रा पटाने और धमकाने के खेल के पुराने खिलाड़ी हैं. झूठ बोलना उनका पुनीत और परम कर्तव्य है. सुब्रत राय ने मिश्रा की तमाम कमियों के बावजूद उन पर हमेशा आंख मूंद कर भरोसा किया और सहारा के संकट के दिनों में उन्हें संकटमोचक के रूप में पेश किया. मिश्रा संकटमोचक साबित हुए भी. पर अपनी कुछ जन्मजात कमियों के कारण वे हर बार कुछ ऐसा कर गुजरते हैं जिससे सु्ब्रत राय को न चाहते हुए भी स्वतंत्र मिश्रा को मेनस्ट्रीम से निकाल कोने-अंतरे में फेंकना पड़ता है. Continue reading

डाक्‍टर को ब्‍लैकमेल करने के लिए झूठा स्टिंग करने वाले दो पत्रकारों समेत पांच पर मुकदमा

वाराणसी के कैण्ट थानान्तर्गत टैगोर टाउन अर्दली बाजार में क्लीनिक चलाने वाले चिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश सिंह के यहां पहुंच लिंग परीक्षण का झूठा स्टिंग आपरेशन कर पांच लाख रुपयों की मांग करने वाले न्यूज चैनल के फर्जी पत्रकारों संग पांच लोगों के खिलाफ शुक्रवार को मुकदमा कायम किया गया। पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बाद उनकी तलाश में जुट गयी है। जानकारी के अनुसार चिकित्सक के यहां कुछ दिनों पहले एक महिला पहुंची और लिंग परीक्षण करने के लिए चिकित्सक पर दबाव बनाया।

बताया जाता है कि डॉ. ओम प्रकाश ने परीक्षण से इनकार कर दिया। इस पर महिला ने कहा कि दरअसल उसने गर्भपात के लिए दवा का सेवन कर लिया है। यदि जांच कर उसका गर्भपात नहीं कराया गया तो उसकी जान भी जा सकती है। महिला के द्वारा दी गयी जानकारी पर डॉ. सिंह परीक्षण के लिए तैयार हो गये कि कहीं सही में उसकी जान न चली जाये। मगर जब जांच की गयी तो पता चला कि वह गर्भवती ही नहीं है।

तभी प्रवीण व अनुज नामक दो लोग पहुंचे और अपने को न्यूज चैनल का पत्रकार बताते हुए कहा कि आप लिंग परीक्षण करते हैं। यह अपराध है। हमने परीक्षण करते आपकी फुटेज बना ली है और आप बचना चाहते हैं तो तत्काल पांच लाख रुपये दे दें। यदि रुपये नहीं दिये तो शिकायत कर देंगे। मगर वे उनकी धमकी में नहीं आये और इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की। पुलिस ने क्षेत्राधिकारी को जांच सौंपी। जांच में मामला फर्जी पाये जाने पर शुक्रवार को उन दोनों फर्जी पत्रकारों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम कर उनकी तलाश शुरू कर दी गयी। न्यूज चैनल के फर्जी पत्रकारों सहित पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

केके की रिपोर्ट.

दैनिक भास्‍कर से संबंधित खबर पर तीन साल बाद हिंदुस्‍तान का स्‍पष्‍टीकरण

अपने प्रतिद्वंद्वी अखबार दैनिक भास्‍कर के प्रकाशन रोकने संबंधी एक दो साल पुराने खबर में हिंदुस्‍तान को स्‍पष्‍टीकरण छापनी पड़ी है. 22 मई 2010 को प्रकाशित एक खबर में हिंदुस्‍तान ने संजय अग्रवाल को डीबी कार्प का कोऑनर लिख दिया था. इसको लेकर काफी विवाद हुआ था. खबर है कि इस मामले के कोर्ट में जाने के बाद हिंदुस्‍तान ने लगभग तीन साल बाद इस मामले में स्‍पष्‍टीकरण प्रकाशित किया है.

हिंदुस्‍तान, पटना के पहले पेज पर प्रकाशि‍त स्‍पष्‍टीकरण शीर्षक में लिखा गया है कि 22 मई 2010 को प्रकाशित खबर में भूलवश संजय अग्रवाल को डीपी कार्प का को-ओनर लिखा गया है जबकि वे दैनिक भास्‍कर टाइटिल के को-ओनर हैं. नीचे हिंदुस्‍तान में प्रकाशित स्‍पष्‍टीकरण…. 

भारत में प्रेस सिर्फ कुछ लोगों की मुट्ठी में है

प्रेस को लेकर पक्ष विपक्ष में तमाम बयान आते रहते हैं. पीसीआई अध्‍यक्ष जस्टिस काटजू भी पत्रकारों के हित को लेकर भले ही चिंतित न हों लेकिन पत्रकारों की न्‍यूनतम योग्‍यता को लेकर वे गंभीर हैं. कुछ बड़े मीडिया घरानों के प्रेस पर एकाधिकार को लेकर जस्टिस काटजू को कोई फर्क नहीं पड़ता हो परन्‍तु सूचना प्रसारण मंत्री बी गोपाल रेड्डी प्रेस की समस्‍याओं से चिंतित हैं. उन्‍होंने इस मसले को लोकसभा में उठाया है.

उन्‍होंने कहा है कि प्रेस को स्‍वतंत्र बनाने के लिए इसके एकाधिकार को खतम करना जरूरी है. नीचे हिंदू में प्रकाशित कुछ अंश…. 

"A Bill to set up the Press Council will be introduced in the next session of Parliament, said B. Gopala Reddi, Minister for Information and Broadcasting, in the Lok Sabha. Considering the various problems facing the Press, he was convinced that there was no use in delaying the constitution of the Press Council.''

"In his reply to the demands for grants for his Ministry, Gopala Reddi said that as soon as legislation for setting up the Press Council was passed, steps would be taken to constitute it. It would go into the various aspects of the Press like, monopoly tendencies, status of the editor, and other matters as envisaged in the report of the Press Commission.''

"He pointed out that it had been agreed generally by the members of the Congress Party, the opposition members, and the Government that the powers of the Press should not be in the hands of a few persons. But the questions connected with the functioning of the Press in the country were of a legal and constitutional nature and should be dealt with by the Press Council."

उपभोक्ता अदालतें भी करती हैं भेदभाव!

उपभोक्ता अदालतों के फैसलों पर यदि गौर करें तो पायेंगे कि समाज के विभेदकारी ढॉचे की भॉंति उपभोक्ता अदालतों द्वारा भी न्याय करते समय खुलकर लोगों के साथ भेदभाव किया जाता है। जिसके बारे में ऐसी कोई नियंत्रक कानूनी या संवैधानिक व्यवस्था नहीं है, जो निष्पक्षतापूर्वक स्वत: ही गौर करके या विभेदकारी निर्णयों का परीक्षण करके या शिकायत प्राप्त होने पर गलत या मनमाने निर्णय करने वाले न्यायाधीशों के खिलाफ दण्डात्मक एवं सुधारात्मक कार्रवाई कर सके।

पिछले दिनों दिल्ली की एक उपभोक्ता अदालत ने एक यात्री के सफर के दौरान सामान गुम हो जाने से ब्रिटिश एयरवेज को उसे एक लाख रुपया अदा करने का निर्देश दिया है। गुम होने वाला सामान भी मात्र एक थैला था, जिसमें कुछ जरूरी कागजात थे। जिसको उपभोक्ता अदालत ने इतनी गम्भीरता से लिया कि शिकायतकर्ता को एक लाख रुपये अदा करने का आदेश जारी कर दिया। जबकि इसके ठीक विपरीत भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा समय पर मुआवजा राशि अदा नहीं करने के कारण गुर्दा रोग पीड़ित पालिसी धारक की मृत्यु हो गयी। इस मामले में अररिया के जिला उपभोक्ता फोरम ने अपना फैसला सुनाते हुए मृतक की पत्नी को मात्र बावन हजार रुपया भुगतान करने का आदेश दिया है।

कुछ समय पूर्व एक निर्णय पढ़ने को मिला जिसमें एक उच्च स्तरीय होटल में खाना परोसने में आधा घण्टा विलम्ब हो गया, जिसके कारण उपभोक्ता को जिस प्लेन से जाना था, वह उससे नहीं जा सका और उसे दूसरी प्लेन से जाना पड़ा जिसमें उसे कुछ अधिक राशि किराये के रूप में अदा करनी पड़ी और वह अपने गन्तव्य पर तीन घण्टे विलम्ब से पहुँच पाया। इस मालले उपभोक्ता अदालत ने उपभोक्ता को हुई परेशानी और विलम्ब के लिये होटल प्रबन्धन पर 70 हजार रुपये का हर्जाना लगाया और उपभोक्ता की ओर से प्लेन में भुगतान किया गया अतिरिक्त किराया अदा करने का आदेश भी दिया गया।

उपभोक्ता अदालतों के उपरोक्त फैसलों पर गौर करें तो हम पायेंगे कि पहले और तीसरे केस में उपभोक्ता की हैसियत इतनी है कि वह हवाई जहाज में यात्रा करने में सक्षम है, जबकि दूसरे मामले में उपभोक्ता की हालत ये है कि जीवन बीमा निगम की ओर से समय पर मुआवजा नहीं मिलने के कारण वह अपने उपचार के लिये अन्य वैकल्पिक साधनों से रुपयों की व्यवस्था नहीं कर सका और वह असमय मौत का शिकार हो गया। ऐसे में एक साधारण व्यक्ति की मौत की कीमत मात्र बावन हजार रुपये है, जबकि ब्रिटिश एयरवेज में यात्रा करने में सक्षम व्यक्ति का थैला गुम हो जाने के कारण थैला धारक हो हुई परेशानी की कीमत एक लाख है। विलम्ब से खाना परोसने और तीन घण्टे विलम्ब से गन्तव्य पर पहुँचने की कीमत 70 हजार रुपये। इससे ये बात स्वत: ही प्रमाणित होती है कि उपभोक्ता अदालतें, उपभोक्ता कानून के अनुसार नहीं, बल्कि उपभोक्ता अदालत के समक्ष न्याय प्राप्ति हेतु उपस्थित होने वाले पीड़ित व्यक्ति की हैसियत देखकर फैसला सुनाती हैं।

ऐसे विभेदकारी निर्णयों से आम लोगों को निजात दिलाने के लिये हमारी लोकतांत्रिक सरकारें कुछ भी नहीं कर रही हैं। जनप्रतिनिधियों को जनता के साथ होने वाले इस भेदभाव की कोई परवाह नहीं है। यहॉं तक कि इस प्रकार के मनमाने निर्णयों के बारे में पूरा-पूरा कानूनी ज्ञान रखने वाले अधिवक्ताओं को भी अपने मुवक्किलों के साथ हो रहे इस प्रकार के खुले विभेदकारी अन्याय की कोई परवाह नहीं है। उपभोक्ता अधिकारों के लिये सेवारत संगठनों की ओर से भी इस बारे में कोई आन्दोलन या इस प्रकार का कार्यक्रम नहीं चलाया जाता है, जिससे लोगों को अपने साथ होने वाले विभेद और उपभोक्ता अदालतों की मनमानी का ज्ञान हो सके और इससे बचने का कोई रास्ता मिल सके। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 14 में मूल अधिकार के रूप में इस बात का उल्लेख होना कि ‘‘कानून के समक्ष सभी को समान समझा जायेगा और सभी को कानून का समान संरक्षण प्राप्त होगा।’’ कोई मायने नहीं रखता।

लेखक डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' होम्योपैथ चिकित्सक तथा मानव व्यवहारशास्त्री, विविध विषयों के लेखक, टिप्पणीकार, कवि, शायर, चिन्तक, शोधार्थी, तनाव मुक्त जीवन, सकारात्मक जीवन पद्धति आदि विषय के व्याख्याता तथा समाज एवं प्रशासन में व्याप्त नाइंसाफी, भेदभाव, शोषण, भ्रष्टाचार, अत्याचार और गैर-बराबरी आदि के विरुद्ध 1993 में स्थापित एवं पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के मुख्य संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। मो. 098285-02666।

एसपी ने की ‘जन सरोकार’ के संपादक आरके सेठी से बदतमीजी, प्रदर्शन

: थाने पर सारी रात धरना, डीसी और सांसद को दी एसपी के खिलाफ शिकायत : फतेहाबाद। सोमवार देर रात को डीएसपी रोड पर एक दुकान में बिक रही स्मैक की शिकायत लेकर एसपी के पास फरियाद लेकर गए डीएसपी रोड के सैंकड़ों लोगों व शहर के चार पार्षदों से एसपी उलझ गए। यही नहीं एसपी ने वहां पर कवरेज कर रहे वरिष्ठ पत्रकार आरके सेठी का कैमरा छीन लिया व उनसे बदसलूकी की। एसपी के इस रवैये से पार्षदों व वहां मौजूद लोगों में रोष फैल गया और एसपी के सामने ही वह एसपी मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए वहां से निकलकर सिटी थाने में पहुंच गए।

यहां पर वरिष्ठ पत्रकार आरके सेठी ने एसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एक शिकायत शहर थाने में दी, लेकिन उसे लेने के लिए कोई भी पुलिसकर्मी तैयार नहीं हुआ। इस बात से गुस्साए लोगों ने सिटी थाने के बाहर सुबह साढ़े चार बजे तक धरना दिया और पांच बजे शहर के मुख्य बाजारों में एसपी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। सुबह शहर के सभी पत्रकारों ने एसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सांसद अशोक तंवर व डीसी डा. साकेत कुमार को ज्ञापन सौंपा।

मामले के अनुसार डीएसपी रोड पर एक दुकान में स्मैक बेचने का मामला प्रकाश में आया था। सोमवार रात को जब मोहल्ले के लोगों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने दुकान संचालक का विरोध करना शुरू कर दिया। लोगों ने वार्ड के पार्षद रमेश गिल्होत्रा को मौके पर बुला लिया। देखते ही देखते वहां पर डीएसपी रोड के सैंकड़ों लोग एकत्रित हो गए और यहां पर अन्य वार्डों के पार्षद दर्शन नागपाल, सुरेन्द्र मिढ़ा व पार्षद प्रतिनिधि सौरभ मेहता भी यहां पर पहुंच गए। इस दौरान लोगों ने कवरेज के लिए सांध्य दैनिक जन सरोकार के संपादक आरके सेठी को भी सूचना दी। इसके बाद सभी लोग पार्षदों के नेतृत्व में एसपी कैंप कार्यालय में पहुंच गए और स्मैक विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। आरोप है कि एसपी ने लोगों की बात सुनने की बजाए उनको घुड़की देनी शुरू कर दी। यही नहीं जब पार्षद प्रतिनिधि एसपी विकास धनखड़ से बातचीत कर रहे थे तो पत्रकार आरके सेठी ने उनकी बातचीत करते का फोटो करना चाहा। इस पर एसपी बिदक गए और उन्होंने मर्यादाओं को लांघते हुए आरके सेठी से उनका कैमरा छीन लिया।

इस पर वहां मौजूद लोगों ने एसपी का बहिष्कार कर दिया और एसपी मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए वहां से निकल आए। सभी लोग सिटी थाने में पहुंच गए और पत्रकार आरके सेठी ने एसपी के इस दुर्व्‍यवहार के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिकायत पत्र शहर थाने में दिया। लेकिन शहर थाने में इस शिकायत पत्र को लेने के लिए कोई राजी नहीं हुआ। इस दौरान एसडीएम बलजीत सिंह भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित दुकान को अलग से ताला लगा दिया जाएगा और सुबह इसकी जांच की जाएगी। लेकिन वार्डवासी एसपी के दुर्व्‍यवहार के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। सिटी थाने में जब कोई शिकायत पत्र नहीं ले रहा था तो लोगों ने शहर थाने के बाहर धरना दे दिया और एसपी व पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद सुबह पांच बजे लोगों ने शहर के मुख्य बाजारों में एसपी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। आज सुबह इस संबंध में शहर के सभी पत्रकारों की एक मीटिंग जन सरोकार कार्यालय में हुई, जिसमें एसपी के इस व्यवहार की घोर निंदा की गई। मीटिंग में निर्णय लिया गया कि एसपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए सांसद अशोक तंवर व डीसी साकेत कुमार को ज्ञापन सौंपा जाए। इसके बाद पत्रकारों का प्रतिनिधिमण्डल डीसी व सांसद से मिला व उनको ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने डीसी को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है, अगर इस दौरान एसपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो मीडियाकर्मी प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से मिलेंगे और कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

पत्रकारों की इस मीटिंग में सांध्य दैनिक जनादेश के संपादक सुनील सचदेवा, हरियाणा की गूंज के संपादक मदन बंसल, हरिभूमि के ब्यूरो चीफ रामकुमार भारती, दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ सुधीर आर्य, पंजाब केसरी के ब्यूरो चीफ सुखराज सिंह ढिल्लो, दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ संजय आहुजा, एएमपीएम के संपादक अजय मेहता, पंजाब केसरी के वरिष्‍ठ पत्रकार मदन गर्ग, आज समाज के ब्यूरो चीफ अशोक शर्मा, राष्ट्रीय सहारा व जनता टीवी के ब्यूरो चीफ जितेन्द्र मोंगा, टोटल टीवी के ब्यूरो चीफ रमेश भट्ट, पंजाब केसरी के पत्रकार अमित रूखाया, टोटल टीवी के पत्रकार रमेश भट्ट, आज समाज के डीएमएम होशियार काजला, पंजाब केसरी के बिजनैस मैनेजर मुकेश बंसल, आज समाज के पत्रकार बजरंग मीणा, राजेश भादू, टोहाना मेल के पत्रकार अशोक अरोड़ा, सुरेन्द्र जटिया, जिंदगी संस्था के अध्यक्ष हरदीप सिंह सहित अनेक पत्रकार मौजूद थे।

”राजेश कौशिक मेरे लिए सिर्फ बॉस नहीं बल्कि उससे कहीं ज्‍यादा थे”

राजेश कौशिक ना सिर्फ मेरे बॉस थे बल्कि मेरे लिए मेरे संरक्षक की तरह थे.. मुझे आज भी वो दिन याद है जब मैं पहली बार राजेश कौशिक जी से मिलने स्टार न्यूज़ के दफ्तर गया था। ये उस वक्त की बात है जब राजेश कौशिक जी स्टार छोड़कर सहारा से जुड़ने वाले थे। मुझे किसी ने बताया था कि कोई गाज़ियाबाद के राजेश कौशिक जी हैं जो सहारा यूपी चैनल में बतौर हेड ज्वाइन कर रहे हैं…. वैसे भी उन दिनों मैं राव वीरेंद्र सिंह और उनके चम्‍मचों की फौज, जिसके हेड हुआ करते थे कविंद्र सचान, इन सब लोगों से दुखी था। खासतौर से इसलिए क्योंकि इन लोगों ने मेरे क्राइम शो की तरक्की और टीआरपी से जलकर उसे बंद करा दिया था।

मैं पहली बार राजेश कौशिक जी से मिलने गया था, लेकिन मुझे उनसे मिलकर ऐसा लगा ही नहीं कि ये मेरी उनकी पहली मुलाकात है… बड़े ही दिलफेक किस्म के व्यक्ति थे। पहली मुलाकात में ही उन्होंने मुझसे कहा कि सहारा यूपी का आउटपुट तुम्हें संभालना है, स्टाफ की शिफ्ट अब तुम तय करोगे… मैंने उनसे कहा कि नहीं सर मेरे बस का ये सब काम नहीं है आप तो बस मेरा बंद किया हुआ क्राइम शो हैलो कंट्रोल रूम दोबारा शुरू करा दीजिएगा मैं तो उसी में खुश हूं और मन लगाकर काम भी कर पाऊंगा। ईश्वर साक्षी है मुझे कभी संस्थान की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं रही लेकिन फिर भी कमोबेश इसने कभी मेरा पीछा भी नहीं छोड़ा, हमेशा मुझे शिकार बनाया… मेरी ड्यूटी मेरे तत्कालीन बॉस ने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगा दी। तत्कालीन बॉस के नाम का ज़िक्र ऊपर कर चुका हूं दोबारा नाम लिखने की शायद ज़रुरत नहीं है।

8 अक्टूबर 2010 को राजेश कौशिक जी ने सहारा यूपी चैनल ज्वाइन करना था, लेकिन मेरी ड्यूटी 24 सितंबर 2010 से ही कॉमनवेल्थ गेम्स में लगा दी गई, ये ड्यूटी 18 अक्टूबर तक चली… 8 अक्टूबर को बॉस ने, माफ कीजिएगा मैं उन्हें हमेशा बॉस ही कहकर बुलाया करता था…, चैनल ज्वाइन कर लिया और मेरी कॉमनवेल्थ गेम्स की ड्यूटी जारी थी… मेरे पीछे कई लोगों ने बॉस के केबिन में बैठकर चाय पीनी शुरू की जिनमें से कुछ बॉस के खास तो कुछ बहुत खास बनने में कामयाब हो गये… और मैं फिर एक बार राजनीति का शिकार बना लिया गया, क्योंकि मेरे खिलाफ कुछ बहुत खास लोगों ने बॉस को कायदे से भड़का दिया था।

बहरहाल 18 फरवरी को मेरी कॉमनवेल्थ गेम्स की ड्यूटी खत्म हुई उसके बाद दो दिन की छुट्टी संस्थान ने दी फिर दिवाली आ गई, उसके बाद मां को चिकनगुनिया हो गया औऱ फिर 23 नवंबर को मेरी शादी थी और शादी के बाद मेरे चाचा जी का देहावसान हो गया। इन सब में पूरे दो महीने गुज़र गये और मैं करीब दो महीने छुट्टी पर रहा (लीव विदआउट पे पर)। 1 जनवरी को मैं छुट्टियों से वापस लौटा तो हैरान था। बॉस का मेरे प्रति व्यवहार एक दम हैरान कर देने वाला था मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे बॉस मुझे नाकारा, निकम्मा और हरामखोर समझ रहे हैं। हर बात पर मुझे न्यूज़ रुम में सरेआम बेइज्ज़त करना, ये सिलसिला करीब 15-20 दिन तक चलता रहा… लेकिन आते ही बॉस ने एक काम बहुत बढ़िया किया था कि मेरा शो वापस शुरु करा दिया था।

उन दिनों मेरे शो को याकूब गौरी बनाया करते थे और मेरे पीठ पीछे बॉस के खास छर्रे बने हुए थे। बात बात पर उनके केबिन में जाना… उनसे सलाह मशविरा करने के बहाने केबिन में बैठकर उनके साथ चाय पीना, ये सब कई खास छर्रों का रोज़ का काम था… मुझे केबिन में बुलाना तो दूर मुझसे तो बॉस ठीक से बात भी नहीं करते थे… मैं ये सब देखकर सोचकर काफी डिप्रेशन में रहता था… लेकिन फिर मैंने एक दिन गंभीरता से सोचा कि आखिर माजरा क्या हो सकता है? आखिर मैंने ऐसा क्या किया है जो मुझसे बॉस इतने खफ़ा रहते हैं, शायद मेरे काम में कोई कमी हो लेकिन काम तो ठीक ही करता हूं, जो क्राइम की स्टोरी आती हैं उन्हें शो के लिए बना देता हूं… तो फिर मुझे मेरी आत्मा ने जवाब दिया जवाब ये था कि बेटा अब तक काम सिर्फ आधे घंटे का स्लॉट भरने के लिए कर रहे हो, अब काम अपनी आत्म संतुष्टि के लिए करो। वाकई तब तक मैं क्राइम का शो बना तो रहा था लेकिन मुझे आत्म संतुष्टि नहीं मिल पा रही थी। रोज़ ऐसा लगता था कि शायद कोई कमी रह गई है, लेकिन उस दिन मैंने कसम खाई कि नहीं आज के बाद आधे घंटे का स्लॉट भरना बंद अब काम होगा खुद के लिए…।

बस फिर क्या था मैंने एक के बाद एक कई शो लगातार बनाने शुरू कर दिये… यहां तक कि रात को घर पर इंटरनेट से विज़ुअल डाउनलोड करता था रात को ही स्क्रीप्ट लिखता था। सुबह दफ्तर पहुंचकर विज़ुअल इंजस्ट कराता था और वॉयस ओवर करके पैकेज कराकर प्रोग्राम ऑन एयर कर देता था। ये सिलसिला भी करीब 2 महीने तक लगातार जारी था… इस बीच बॉस से बस शो के नाम और कॉन्सेप्ट को लेकर चर्चा होती थी, कोई फालतू बात नहीं…। मैं कार्यक्रम बनाता गया और शो की टीआरपी लगातार बढ़ती रही बॉस भी थोड़े-थोड़े खुश होने लगे। कई बार मेरी डेस्क पर आकर मुझसे पूछ लिया करते थे हां भई फ़र्ज़ी आज क्या बना रहा है तो मैं हंसकर उन्हें कार्यक्रम का नाम और कॉन्सेप्ट बता दिया करता था… इसी बीच एक दिन बॉस ने मुझे अपने केबिन में बुलाया वो भी डेस्क पर लगे इंटरकोम पर फोन करके…।

तत्कालीन आउटपुट हेड कृष्ण रजित ने मुझे अवाज़ लगाई अरे शगुन तुम्हें बुला रहे हैं। मैंने कहा कौन तो उन्होंने बॉस के केबिन की तरफ इशारा किया। मैं सोच में पड़ गया मैंने मन ही मन कहा कि कोई भसूड़ी तो नहीं हो गई पता चला आज पेल दिया जाऊं… मैं यही सवाल मन में लिए बॉस के केबिन में गया। बॉस ने कहा बैठो, मैंने कहा जी सर। उन्होंने मेरी तरफ इंडिया टुडे मैग्ज़ीन फेंकी और कहा कि इसमें दाऊद की सल्तनत के नाम से कवर स्टोरी छपी है, उसी पर मुझे कल का शो चाहिए। मैंने कहा ठीक है सर बन जाएगा… हांलाकि दाऊद मेरे लिए एक नया विषय था। मैंने दाउद के बारे में क्राइम के शो उस दिन तक सिर्फ आज तक पर ही देखे थे, कभी कुछ लिखा नहीं था… खैर ज़िंदगी में पहली बार कभी ना कभी तो होता ही है और इस बार मेरे लिए दाउद पहली बार था…।

उन्हीं दिनों वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई फिल्म रिलीज़ हुई थी। मैंने वो फिल्म भी दो बार देखी थी और उस फिल्म का आखिरी डायलॉग अभिनेता रनदीप हुड्डा की आवाज़ में आज भी मुझे याद है कुछ इस तरह से था “आज 18 साल बाद हज़ारों मील दूर बंबई में ना रहकर भी वो बंबई पर राज करता है”। बस इसी डायलॉग पर मैंने दाउद की सल्तनत शो का प्रोमो एडिट कराया और बॉस को दिखाया…. बॉस प्रोमो देखकर इतने खुश हुए मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता। उन्होंने डेस्क पर बैठे अपने सभी खास छर्रों को बुलाया और वो प्रोमो दिखाया। सभी छर्रों ने मेरी तारीफ की, सबने कहा क्या दिमाग लगाया है शगुन, कहां का डायलॉग कहां इस्तेमाल किया है। इस पर बॉस बोले और क्या तुम्हारी तरह थोड़ी है ये, मुझे चूतिया बनाते रहते हो 10-10 दिन की छुट्टियां मांगते हो और काम के नाम पर हरामखोरी करते हो…। ये शब्द बॉस ने उस बहुत खास के लिए कहे जिसने मेरे पीछे मेरे खिलाफ बॉस के कान भरे थे और शिफ्ट इंचार्ज बनकर बैठ गया था…।

बस उस दिन से बॉस को समझ आ गया मैंने लंगड़े घोड़ों पर दॉव लगा रखा है, काम का आदमी शगुन है बाकि सब अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं। बॉस के खास बनकर गलत फायदा उठा रहे हैं… बस उसके कुछ दिनों बाद ही बॉस ने मुझे डिप्टी आउटपुट हेड बना दिया। शिफ्ट इंचार्ज की ज़िम्मेदारी दे दी। उस दिन मुझे वो कहावत फिर से याद आई “ऐवरी डॉग हैज़ ऐ डे ”…. बॉस की एक खासियत थी, बॉस जिसपर विश्वास करते थे उस पर आंख मूंदकर करते थे…। मैं जब तक सहारा में था बॉस का सबसे खास था। बॉस के और मेरे बीच संस्थान से लेकर घर परिवार की भी कोई बात राज़ नहीं रहती थी…। इतना ही नहीं अक्सर बॉस मुझे अपने साथ शॉपिंग पर ले जाते, अक्सर मुझे और बॉस को किसी बात पर चर्चा करनी होती थी तो हम लोग साथ में फिल्म देखने चले जाते थे, लेकिन मुझे हमेशा एक ही बात कहते थे कि देख मेरा खास होने का गलत फायदा मत उठाना, अपना काम हमेशा पूरा रखना और यही वजह थी कि मैं डिप्टी आउट पुट हेड होने के बावजूद एक शो रोज बनाया करता था और उसकी टीआरपी भी आती थी…।

बॉस दिल के साफ व्यक्ति थे और दिमाग के दबंग थे, जिसके लिए जो दिल में था वही ज़ुबान पर भी था। अगर किसी के लिए दिल में गाली देने का ख्याल होता था तो उसे मुंह पर गाली दिया करते थे… किसी को फर्जी तेल लगाने की उनकी आदत नहीं थी… किसी को कोई भी परेशानी हो बॉस उसका चुटकी बजाकर समाधान कर दिया करते थे… प्यार से हम लोग बॉस को चुलबुल पांडे भी कहकर बुलाते थे… मेरे बॉस के परिवारिक रिश्ते थे… मेरे लिए बॉस के घर के दरवाज़े किसी भी वक्त खुले रहते थे… मैं सहारा में अब नहीं था लेकिन फिर भी मुझे ऐसा लगता था कि हां कोई ऐसी शख्सियत है जिसके घर का दरवाज़ा अगर मैं आधी रात भी खटखटाऊंगा तो मेरे लिए उस घर के दरवाज़े खुल जाएंगे… मेरी सहारा में वापसी हो जाए इसके लिए भी बॉस ने भरसक प्रयास किये… लेकिन मेरी किस्मत में शायद वापसी नहीं थी…. आखिरी बार बॉस से 14 मार्च को बात हुई थी। मेरे पहचान के कुछ लोगों का गाज़ियाबाद में एक पुलिस मैटर हो गया था, उसके लिए मैंने बॉस को फोन किया था लेकिन बॉस उस दिन बात करते हुए मुझे कुछ परेशान लगे, पता नहीं क्यों उन्होंने मुझसे ठीक से बात नहीं की थी। हालांकि मैटर निपटा दिया था लेकिन मुझे उनका व्यवहार कुछ बदला बदला सा लगा…।

15 मार्च को मैं लखनऊ चला गया और 21 मार्च को मैं लखनऊ में ही था कि उस्मान का मुझे फोन आया और फोन सुनकर मैं हैरान रह गया। पहले तो मुझे लगा कि शायद हल्का फुल्का ऐक्सीडेंट होगा लेकिन जैसे ही उस्मान ने मुझे बताया कि नहीं भैय्या बॉस वेंटिलेटर पर हैं तो मेरे पांव तले ज़मीन खिसक गई। मेरे मन में उसी वक्त गलत ख्याल आ गया था लेकिन मैंने मन को तसल्ली दी लेकिन 28 मार्च की सुबह ऐसी मनहूस सुबह साबित होगी इस बात की कल्पना भी मैंने नहीं की थी। करीब 10.30 बजे जैसे ही मैंने अपना मोबाइल ऑन किया मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। उसमें उस्मान का मैसेज था और मैसेज में लिखा था कि सहारा एनसीआर चैनल हैड राजेश कौशिक इज़ नो मोर। अंतिम संस्कार 10 बजे हिंडन पर… इस मैसेज को पढ़ते ही मैं बदहवास अपनी गाड़ी की ओर दौड़ा और निकल पड़ा लेकिन घड़ी में वक्त देखा तो 10 बजकर 38 मिनट हो रहे थे। मैंने तुरंत उस्मान को फोन लगाया तो उसने मुझे बताया कि भैय्या अंतिम संस्कार तो हो चुका अब आप घर ही आ जाना… मैंने कहा ठीक है दिल्ली से गाज़ियाबाद शास्त्री नगर तक के सफर भर बॉस का चेहरा मेरी आंखों के सामने था। एक पल के लिए भी उनके अलावा कोई दूसरा ख्याल दिमाग में नहीं आया… बॉस के घर पहुंचा तो मेरी घर की चौखट पार कर भीतर जाने की हिम्मत नहीं हुई। अपनी मां समान भाभी से मिलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और दोपहर बाद घर वापस आ गया….।

मलाल सिर्फ इस बात का है कि आखिरी बार बॉस को देख नहीं पाया…. बीच में एक दिन यशोदा अस्पताल बॉस को देखने गया था लेकिन कमबख्त डॉक्टरों ने आईसीयू में जाने नहीं दिया था। उस दिन ये सोचकर वापस आ गया था कि चल दो चार दिन में वेंटिलेटर हट जाएगा तो फिर आऊंगा, लेकिन मुझे क्या मालूम था कि दो चार दिन में तो बॉस हमेशा हमेशा के लिए चले जाएंगे… बास के जाने के बाद मेरे मन को बस यहीं सवाल कचोट रहा है कि बॉस के परिवार पर जो विपत्ति आई वो उससे बाहर कैसे निकल पाएंगे…. ईश्वर से यही प्रार्थना है कि बॉस के परिवार को इस विपत्ति का सामना करने की शक्ति दें… और बॉस की आत्मा को शांति प्रदान करें… सार्वजनिक मंच से ये शगुन त्यागी का वायदा बॉस और उनके परिवार से है कि आधी रात को भी बॉस का ये छोटा भाई उनकी गैरमौजूदगी में खड़ा मिलेगा… बस बॉस अपना आशीर्वाद बनाये रखना।

लेखक शगुन त्यागी सहारा, चैनल वन, नॉर्थ ईस्ट बिज़नेस रिपोर्टर समेत कई संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. मायावती की मूर्ति तोड़कर चर्चा में आने वाले शगुन 'राजद्रोह' नाम से एक किताब भी लिख रहे हैं. इन दिनों वे सपा से जुड़े हुए हैं. शगुन से संपर्क उनके मोबाईल नंबर 07838246333 पर किया जा सकता है.

पत्रकार बनकर युवती से बलात्कार का प्रयास, मामला दर्ज

जामुड़िया : जामुड़िया नगरपालिका अंतर्गत वार्ड नंबर 17 के न्यू सातग्राम में रहनेवाले 40 वर्षीय समीर बनर्जी पर 20 वर्षीय युवती का यौन शोषण के प्रयास करने का आरोप लगाया गया है. इस संबंध में युवती ने जामुड़िया थाना में लिखित शिकायत दर्ज करायी है. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी समीर बनर्जी अपने एक अखबार का संवाददाता बताते हुए युवती को अपना सहकर्मी बनाया था. युवती दो महीना से उसके पास काम कर रही थी.

बीते दिन बांकुड़ा के एक लॉज में ले जाकर समीर बनर्जी ने उसका यौन शोषण करने का प्रयास किया. युवती ने इसकी जानकारी एसीपी अजय प्रसाद को दी एवं एसीपी के आदेशानुसार युवती का मामला दर्ज किया गया. एसीपी अजय प्रसाद ने बताया कि उक्त युवक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा लगातार छापामारी की जा रही है.

IRS 2012 Q4 : प्रभात खबर के औसत पाठक 31 फीसदी बढ़े

: धनराज में मजबूती से पहले नंबर पर बरकरार : मुंबई : इंडियन रीडरशिप सर्वे (आइआरएस) की ताजा रिपोर्ट में देश के शीर्ष 10 हिंदी अखबारों में प्रभात खबर ने 2012 की चौथी तिमाही में सबसे ज्यादा औसत पाठक संख्या वृद्धि दर दर्ज की है.

पिछले एक साल की अवधि को देखा जाये, तो 2011 की चौथी तिमाही के मुकाबले 2012 की चौथी तिमाही में प्रभात खबर की औसत पाठक संख्या में 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि हिंदुस्तान ने मात्र दो फीसदी वृद्धि दर्ज की और दैनिक भास्कर के औसत पाठकों व कुल पाठकों में एक-एक फीसदी की कमी आयी. इसी तरह प्रप्रभात खबर की कुल पाठक संख्या भी 20 फीसदी बढ़ी, जबकि हिंदुस्तान ने मात्र दो फीसदी, दैनिक जागरण ने मात्र एक फीसदी की वृद्धि ही दर्ज की.

इंडियन रीडरशिप सर्वे 2012 की चौथी तिमाही की रिपोर्ट के मुताबिक शीर्ष 10 हिंदी अखबारों में से दैनिक जागरण व दैनिक भास्कर समेत छह अखबारों की औसत पाठक संख्या में कमी आयी है, हिंदुस्तान समेत तीन अखबारों ने नाममात्र की वृद्धि दर्ज की है, जबकि प्रभात खबर ने इस अवधि में 98,000 नये पाठक जोड़. कर 3.55 फीसदी की वृद्धि दर्ज की. देश के शीर्ष 10 हिंदी अखबारों में प्रभात खबर मजबूती से सातवें स्थान पर बना हुआ है और तेजी से छठे स्थान की ओर बढ. रहा है. प्रभात खबर के इस सूची में नवभारत टाइम्स आठवें स्थान पर है और उसकी औसत पाठक संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है. झारखंड के तीन प्रमुख शहरों धनबाद, रांची व जमशेदपुर (धनराज) में कुल मिला कर प्रभात खबर औसत पाठक संख्या में मजबूती के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है. पिछले एक साल के दौरान इन शहरों में कुल मिला कर प्रभात खबर की औसत पाठक संख्या बढ़ी है.

बिहार में तीसरी तिमाही के मुकाबले 2012 की चौथी तिमाही में प्रभात खबर की औसत पाठक संख्या वृद्धि दर सबसे ज्यादा 6.47 फीसदी रही, जबकि हिंदुस्तान मात्र 0.17 फीसदी की अति मामूली वृद्धि ही दर्ज कर पाया. दैनिक जागरण की औसत पाठक संख्या में तो 1.39 फीसदी की गिरावट आयी. इसके अलावा, बिहार के चारों क्षेत्रों, पटना, मिथिला, भोजपुर व मगध में सिर्फ प्रभात खबर ने ही अपनी औसत पाठक संख्या में वृद्धि दर्ज की. भोजपुर में प्रभात खबर की वृद्धि दर 34.68 फीसदी रही जबकि हिंदुस्तान की वृद्धि दर इसके आधे से भी काफी कम रही और जागरण की वृद्धि दर मात्र 2.97 फीसदी ही रही. मगध में तो हिंदुस्तान के 11.23 फीसदी और जागरण के 2.81 फीसदी औसत पाठक कम हुए जबकि प्रभात खबर की औसत पाठक संख्या बढ़ी. 2011 की चौथी तिमाही से तुलना में 2012 की चौथी तिमाही में बिहार में प्रभात खबर की औसत पाठक संख्या 95 फीसदी बढ़ी है, जबकि हिंदुस्तान में कोई वृद्धि नहीं हुई और जागरण की औसत पाठक संख्या एक फीसदी कम हो गयी.

इस अवधि में मिथिला में प्रभात खबर ने 111 फीसदी, भोजपुर में 59 फीसदी, मगध में 97 फीसदी और पटना में 14 फीसदी नये पाठक जोडे.. मिथिला में हिंदुस्तान की औसत पाठक संख्या में आठ फीसदी और जागरण की औसत पाठक संख्या में 11 फीसदी की कमी आयी. अगर कुल पाठक संख्या को लें तो इस अवधि के दौरान बिहार में प्रभात खबर ने 53 फीसदी की वृद्धि दर्ज की. भोजपुर में यह वृद्धि 75 फीसदी, मिथिला में 65 फीसदी, मगध में 29 फीसदी और पटना में 23 फीसदी रही. हिंदुस्तान सिर्फ भोजपुर में ही कुल पाठक संख्या में वृद्धि दर्ज कर पाया और वह भी सिर्फ नौ फीसदी. इसके अलावा, कोलकाता में भी एक साल के दौरान प्रभात खबर की कुल पाठक संख्या छह फीसदी बढ़ी. (प्रभात खबर)

संजय दत्‍त व जेबुन्निसा ही क्‍यों 35 से कम और 50 से ज्‍यादा के अपराधियों को भी माफ किया जाए

नई दिल्ली। पूर्व चीफ जस्टिस काटजू, जया प्रदा समेत कई लोग भले ही संजय दत्त की सजा माफ करवाना चाहते हों, पर पूर्व सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर संजय दत्त को माफी नहीं देने की अपील की है।

गांधी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में काटजू की दलीलों पर भी ऐतराज जताते हुए कहा कि 35 से कम और 50 से ज्यादा उम्र के अपराधी जो आतंकी नहीं है माफी दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि काटजू ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आर्म्स एक्ट के दोषी संजय दत्त और जेबुन्निसा की सजा माफ करने की अपील की है। संजय दत्त ने गुरुवार को ही एक प्रेस कॉन्फ्रेस में कहा था कि वे माफी की अपील नहीं करेंगे और अदालत के आदेशानुसार समय पर आत्मसमर्पण कर देंगे। (एजेंसी)

जनसंदेश टाइम्‍स से फिर जुड़ेंगे हरे प्रकाश उपाध्‍याय

जनसंदेश टाइम्‍स से खबर है कि हरे प्रकाश उपाध्‍याय फिर से जुड़ रहे हैं. यह उनकी जनसंदेश टाइम्‍स के साथ दूसरी पारी होगी. हालांकि उनको किस पद पर लाया जा रहा है यह अभी तय नहीं किया गया है. संभावना है कि उन्‍हें उनके पुराने पद फीचर संपादक की जिम्‍मेदारी सौंपी जाएगी. हरे प्रकाश पत्रकार होने के साथ साथ एक संवेदनशील कवि भी हैं. इसके पहले वे हिंदुस्‍तान के साथ लंबे समय तक काम कर चुके हैं. जनसंदेश से इस्‍तीफा देने के बाद हरे प्रकाश डा. सुभाष राय के साथ डीएनए भी गए थे, लेकिन यहां भी दोनों लोग लंबे समय तक नहीं रह पाए.

डा. सुभाष राय के दुबारा जनसंदेश टाइम्‍स का संपादक बनने के बाद से कयास लगाया जा रहा था कि देर सबेर हरे प्रकाश की भी वापसी होगी. हरे प्रकाश एक अप्रैल से अपनी जिम्‍मेदारी संभालेंगे. हालांकि प्रबंधन ने पिछली बार इस्‍तीफा देते समय उनके एक महीने की सैलरी भी मार ली थी, जो अब तक नहीं दी गई है.

टाटा संस ने जीत ली वेबसाइट की लड़ाई

टाटा संस लिमिटेड तथा उसकी सहायक शाखा टाटा इंफोटेक लिमिटेड ने 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट टाटा इंफोटेक डॉट इन' नामक वेबसाइट के लिए जारी कानूनी लड़ाई दिल्ली हाईकोर्ट में जीत ली है। हाईकोर्ट ने अर्नो पालमैन को इस वेबसाइट का उपयोग करने से रोक दिया है।

जस्टिस एम. एल. मेहता ने अपने फैसले में कहा कि अर्नो पालमैन, उनके नौकरों, एजेंट व उनसे संबंधित सभी पक्षों को डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट टाटा इंफोटेक डॉट इन नाम की वेबसाइट के जरिए किसी भी तरह का कारोबार करने या कारोबारी गतिविधियों में शामिल होने से रोका जाता है। फैसले के मुताबिक अर्नो पालमैन द्वारा इससे मिलते-जुलते या भ्रामक नामों या सेवाओं का उपयोग भी नहीं किया जा सकेगा।

इसके साथ ही कोर्ट ने की-सिस्टम्स जीएमबीएच (इंटरनेट वेबसाइट एड्रेस के लिए एक अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रार) से भी कहा है कि अर्नो पालमैन से उनको दिया गया डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट टाटा इंफोटेक डॉट इन वेबसाइट एड्रेस वापस ले लिया जाए। (भास्‍कर)

कौशांबी में नाव पलटी, एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत

इलाहाबाद। कौशांबी जिले में यमुना नदी में नाव पलट जाने से उस पर सवार डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग गहरे पानी में समा गए। इसमें आठ लोगों की मौत हो गई। जबकि आठ लोगों को मल्लाहों ने सुरक्षित निकाल लिया है। कई लोगों का पता नहीं चल सका है। गोताखोर यमुना में डूबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। यह सभी लोग पिकनिक मनाने यमुना के उस पार जा रहे थे। मरने वाले आठों लोग एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं।

सराय आकिल क्षेत्र के यूसुफपुर गांव के मुस्लिम बिरादरी के लोगों ने दोपहर को पिकनिक मनाने का मन बनाया। इसके बाद एबादुर्रहमान अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ नंदा का पूरा घाट से एक नाव किराये पर लेकर यमुनापार के लिए निकले। नाव पर डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग सवार थे। बताया जा रहा है कि नाव यमुना नदी के बीच धारा में पहुंची तभी तेज हवा चलने लगी। इससे नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। चीख पुकार सुनकर घाट पर मौजूद मल्लाहों ने लोगों को बचाने की कोशिश शुरू कर दी। नदी में डूब रहे आठ लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। इसके अलावा आठ लोगों की लाशें बाहर निकाली गईं।

मरने वालों में एबादुर्रहमान (35), मोहम्मद याकूब (35), अजमाल (22), मोहम्मद रेहान (22), सद्दाम (15), कबीर उर्फ डिप्टी (30) समेत दो और शामिल हैं। उधर, घटना की सूचना पाकर डीएम सत्येंद्र सिंह यादव, एसपी शिवशंकर सिंह भी मौके पर पहुंच गए। कौशांबी के सांसद शैलेंद्र कुमार ने मौके पर पहुंचकर दैवीय आपदा राहत कोष से मृतक के परिजनों को बीस-बीस हजार रुपए सहायता राशि देने की घोषणा की है।

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.

वीडियो प्रकाशन से नाराज स्‍वतंत्र मिश्रा ने दी यशवंत सिंह को बरबाद करने की धमकी

सहारा समय में यूपी-उत्‍तराखंड के हेड स्‍वतंत्र मिश्रा ने भड़ास के संपादक यशवंत सिंह को बरबाद करने की धमकी दी है. स्‍वतंत्र मिश्रा भड़ास4मीडिया पर एक सीसीटीवी फुटेज का वीडियो अपलोड किए जाने से नाराज हैं. पहले तो उन्‍होंने भगवान का नाम लेकर यशवंत सिंह को जमकर श्राप दिया. इसके बाद धमकाने वाले अंदाज में कहा कि यह वीडियो तुम्‍हारा कर्ज रहा, अगर असल मां-बाप की औलाद होउंगा तो इस वीडियो के कर्ज को जरूर वापस उतारूंगा.

हालांकि यशवंत सिंह उनको लगातार समझाने का प्रयास करते रहे कि इसमें आपका नाम कहीं मेंशन नहीं है इसके बावजूद वे लगातार धमकी देते रहे. अंत में जब यशवंत ने कहा कि आप जिस तरह से धमका रहे हैं इसे भी मैं भड़ास पर अपलोड करूंगा तो उन्‍होंने तत्‍काल बातचीत के लहजे को बदलते हुए यशवंत पर ही ब्‍लैकमेलिंग करने का तोहमत लगाने लगे. उन्‍हें ब्‍लैकमेलर बताने लगे. स्‍वतंत्र मिश्र ने इसके बाद कई आरोप धड़ाधड़ यशवंत पर जड़ दिए.

धमकी दिए जाने को गंभीरता से लेते हुए यशवंत सिंह ने इस पूरे मामले की शिकायत सहारा श्री सुब्रत रॉय से की है. इसके अलावा उन्‍होंने पूरे प्रकरण के बारे में पुलिस को भी जानकारी दी है. जिस तरह से स्‍वतंत्र मिश्रा ने धमकी दी है उससे साफ जाहिर है कि वे किसी भी हद तक जा सकते हैं. इसलिए यशवंत ने पूरे मामले से उनके वरिष्‍ठों को अवगत कराने के बाद पुलिस के पास भी इस तथ्‍य को सबूत के साथ भेजा है. ये भी संभव है कि वीडियो के प्रकाशन से नाराज स्‍वतंत्र मिश्रा यशवंत के साथ कोई अप्रिय वारदात करा सकते हैं. भड़ास के यशवंत ने बातचीत में कहा कि हमारा जो उखाड़ना हो उखाड़ लें क्‍यों कि हम खुद उखड़े हुए लोग हैं. 

नीचे देखें सीसीटीवी फुटेज का वीडियो

http://www.bhadas4media.com/video/viewvideo/698/media-world/sahara-media-head-credit-card-theft-issue-cctv-footage.html


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पत्रकार लक्ष्‍मीकांत दुबे सड़क हादसे में घायल

पत्रकार लक्ष्मीकान्त दुबे गुरुवार की रात सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए. वह लखनऊ से एक निजी कार से गोरखपुर जा रहे थे. कार वह स्वयं चला रहे थे. बाराबंकी फैजाबाद के बीच में उनकी कार सड़क के किनारे खड़ी ट्रक से टकरा गयी. उनके सर और हाथ में गंभीर चोट लगी है. दुर्घटना के बाद उन्हें फैजाबाद के सरकारी अस्पताल ले जाया गया. उनके परिजनों के आने के बाद उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया गया है.

लक्ष्मीकान्त दुबे दैनिक भास्कर, मोगा-फरीदकोट के प्रभारी थे और अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने इस्तीफे की नोटिस दिया है. वह नोटिस देने के बाद अवकाश लेकर घर लौट रहे थे. लक्ष्‍मीकांत इसके पहले दैनिक जागरण और प्रभात खबर से भी जुड़े रहे हैं.

सहारा समूह की दूसरी कंपनियां भी झुलस सकती हैं सेबी की आंच में

मुंबई। सेबी और सहारा ग्रुप के बीच लड़ाई का असर ग्रुप की दूसरी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। सेबी ने सहारा ग्रुप की दो कंपनियों को इनवेस्टर्स के 24,000 करोड़ रुपए लौटाने को कहा है। सहारा ग्रुप का दावा है कि उसने इनवेस्टर्स के पैसे लौटा दिए हैं, लेकिन सेबी उसके दावे को मानने को तैयार नहीं है। सहारा ग्रुप का बिजनेस इंश्योरेंस से लेकर मीडिया तक फैला है। सहारा अगर अपने कई बिजनेस की सुरक्षा के लिए ट्रस्ट बनाने जैसा कदम नहीं उठाता है, तो उसे अपनी कुछ कंपनियों के कंट्रोल से हाथ धोना पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अगर 'सहारा' पैसा लौटाने में नाकाम रहता है तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर पैसे की रिकवरी के लिए प्रॉपर्टी के अटैचमेंट और सेल और बैंक एकाउंट की फ्रीजिंग जैसे सभी कानूनी तरीकों का इस्तेमाल कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में 'सहारा' का मतलब उसकी दो कंपनियों से था। इस आदेश के बाद सेबी ने दोनों कंपनियों और उसके तीन डायरेक्टर्स और सुब्रत राय के एसेट्स अटैच करने के लिए कदम उठाए हैं। सहारा ने इसके खिलाफ सिक्योरिटीज अपेलेट ट्राइब्यूनल का दरवाजा खटखटाया है। उसने रॉय के एसेट्स फ्रीज करने के सेबी के फैसले को चैलेंज किया है।

ग्रुप का कहना है कि रॉय उन कंपनियों में डायरेक्टर नहीं हैं, जिन्हें इनवेस्टर्स का पैसा वापस करने के लिए कहा गया है। रॉय और ग्रुप के दूसरे मेंबर्स को सेबी के उनके बैंक एकाउंट्स में रखे पैसे को जब्त करने या उनके विशाल घर का पजेशन लेने को लेकर ज्यादा फिक्र नहीं है। इसके बजाय उन्हें रेगुलेटर के ग्रुप कंपनियों में रॉय के मालिकाना हक वाले शेयरों के अटैच होने की चिंता है। अब तक अदालती लड़ाई में इन शेयरों पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है।

सहारा की मौजूदगी कई बिजनेस में हैं। इसमें एसेट मैनेजमेंट, लाइफ इंश्योरेंस, हॉस्पिटैलिटी, एंटरटेनमेंट चैनल शामिल हैं। इनके अलावा एम्बी वैली जैसी टाउनशिप पर उसका अधिकार है। विदेश में भी ग्रुप के होटल और प्रॉपर्टी हैं। अगर ग्र्रुप की कंपनियों के ज्यादा शेयरों पर रॉय का मालिकाना है तो इन शेयरों के अटैचमेंट से ग्र्र्रुप की दूसरी कंपनियों में उनके ओनरशिप इंटरेस्ट पर असर पड़ सकता है। इन कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी में कमी आ सकती है। सैट का फैसला चाहे जो भी आए, सेबी या सहारा के सुप्रीम कोर्ट जाना तय है। तब पर्सनल लायबिलिटी और मनी फ्लो का पता लगाने जैसे मसले खड़े होंगे। इस तरह सहारा ग्रुप का काफी कुछ दांव पर लगा दिखता है। यह मसला सिर्फ 24,000 करोड़ रुपए का नहीं है, जो सहारा की दो कंपनियों को इनवेस्टर्स को लौटाने हैं। (ईटी)

अमिताभ-हसन लिखित पुस्‍तक ‘साइबर क्राइम’ को विधि मंत्रालय का तृतीय पुरस्‍कार

उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को अधिवक्ता मोहम्मद हसन जैदी के साथ मिल कर लिखे “साइबर क्राइम” शीर्षक हिंदी पुस्तक के लिए विधायी विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विगत दिनों वर्ष 2011 के लिए हिंदी में लिखित अथवा प्रकाशित पुस्तकों में तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है. पुरस्कार की धनराशि रुपये 20,000 हैं जो दोनों लेखकों को समान रूप से मिलेगी. यह पुस्तक साइबर क्राइम पर हिंदी की पहली पुस्तक है.

IRS 2012 Q4 : ऑल लैंग्‍वेज में हिंदी अखबारों का जलवा, टॉप टेन में टीओआई अकेला अंग्रेजी दैनिक

आईआरएस 2012 की चौथी तिमाही में सभी भाषा के अखबारों में हिंदी अखबारों ने अपना जलवा बरकरार रखा है. टॉप थ्री पर रहने अलावा टॉप टेन में पांच अखबारों ने कब्‍जा किया है. ऑल लैंग्‍वेज कटेगरी में दैनिक जागरण, दैनिक भास्‍कर, टीओआई, अमर उजाला, लोकमत, डेली थांती और मातृभूमि के पाठक संख्‍या में कमी आई है, जबकि हिंदुस्‍तान, मलयाला मनोरमा और राजस्‍थान पत्रिका के पाठक बढ़े हैं. 

इस श्रेणी में पहले स्‍थान पर मौजूद जागरण के एक लाख से ज्‍यादा पाठकों का नुकसान उठाना पड़ा है. दूसरे नम्‍बर पर मौजूद दैनिक भास्‍कर को भी 75,000 पाठकों को खोना पड़ा है. इस श्रेणी में तीसरे नम्‍बर पर मौजूद है. इसने अपने साथ 4,000 पाठकों को जोड़ने में सफलता पाई है. यानी टॉप थ्री में हिंदी अखबारों का ही बोल बाला है.

चौथे नम्‍बर पर मलयालम भाषा का अखबार मलयाला मनोरमा का कब्‍जा है. रीजनल अखबार की श्रेणी में पहला स्‍थान पाने वाला मलयाला मनोरमा अपने साथ, 8000 नए पाठकों को जोड़ते हुए यह संख्‍या 97,60,000 तक पहुंचा दी है, जो पिछले तिमाही में 97,52,000 थी. पांचवें नम्‍बर पर हिंदी का अखबार अमर उजाला मौजूद है. इसे भी लगभग एक लाख पाठकों का घाटा उठाना पड़ा है.

टॉप टेन में अंग्रेजी का अखबार टाइम्‍स ऑफ इंडिया छठे स्‍थान पर है. यह अंग्रेजी का पहला और आखिरी अखबार है जो आल लैंग्‍वेज श्रेणी में स्‍थान बनाने में कामयाब रहा है. टीओआई को इस तिमाही में 38,000 पाठकों का नुकसान हुआ है. सातवें नम्‍बर पर मौजूद तमिल दैनिक डेली थांती के भी पाठकों में कमी आई है. 83,000 पाठक इस अखबार से दूर गए हैं.

आठवें स्‍थान पर मराठी दैनिक लोकमत ने कब्‍जा जमाया है. हालांकि चौथे तिमाही में लोकमत को 96,000 पाठकों का नुसान उठाना पड़ा है. नौवें स्‍थान पर हिंदी अखबार राजस्‍था पत्रिका मौजूद है, जिसने इस तिमाही में अपने साथ 17,000 नए पाठक जोड़े हैं. दसवें और आखिरी स्‍थान पर भी मलयालम अखबार मातृभूमि का कब्‍जा है. मातृभूमि को भी 81,000 पाठकों का भारी नुकसान हुआ है.

डा. नूतन ठाकुर को चैनलों ने नहीं दिया उत्‍तर, शिकायत एनबीए को

सामाजिक कार्यकत्री डा. नूतन ठाकुर ने एनडीटीवी (हिंदी), एनडीटीवी 24×7 (अंग्रेजी), आइबीएन-7, सीएनएन-आइबीएन, आज तक, हेडलाइंस टुडे, ईटीवी उत्तर प्रदेश, इंडिया टीवी, एबीपी न्यूज़, न्यूज़ 24 चैनलों को स्वर्गीय डिप्टी एसपी जिया उल हक हत्याकांड के बाद एक शिकायत/सुझाव पत्र अलग-अलग भेजा था, जिनके सम्बन्ध में मात्र इंडिया टीवी द्वारा उत्तर प्राप्त हुआ. अन्य किसी चैनल से कोई भी उत्तर नहीं मिला है. डा. ठाकुर ने इसके मद्देनज़र नेशनल ब्रॉडकास्टर एसोसियेशन को एक शिकायती पत्र आज प्रेषित किया है जो निम्नवत है-

ब्रॉडकास्टर के नाम-   एनडीटीवी (हिंदी), एनडीटीवी 24×7 (अंग्रेजी), आइबीएन-7, सीएनएन-आइबीएन, आज तक, हेडलाइंस टुडे, ईटीवी उत्तर प्रदेश, इंडिया टीवी, एबीपी न्यूज़, न्यूज़ 24
(नोट- इस प्रकरण में कई ब्रॉडकास्टर के विरुद्ध एक ही प्रकार की लगभग समान शिकायतें हैं अतः उन्हें अलग-अलग प्रेषित किये जाने के स्थान पर एक साथ प्रस्तुत करना ज्यादा उचित समझ रही हूँ)

प्रोग्राम  टाइटल-   दिनांक 04/03/2013 प्रातः से रात्रि लगभग 10 बजे तथा पुनः दिनांक 05/03/2013 को स्वर्गीय जिया उल हक, डिप्टी एसपी, प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) से सम्बंधित लगभग सभी न्यूज़ प्रोग्राम तथा अन्य स्पेशल प्रोग्राम
प्रोग्राम तिथि- दिनांक 04/03/2013 प्रातः से रात्रि लगभग 10 बजे तथा पुनः दिनांक 05/03/2013
समय – इन दोनों दिनों में पूरे दिन भर

शिकायतकर्ता
उपनाम  – ठाकुर
नाम – डॉ (श्रीमती) नूतन
पता  – 5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ- 226010 (उत्तर प्रदेश)
फोन नंबर.: 094155-34525
ईमेल— nutanthakurlko@gmail.com, nutanthakurlkw@gmail.com
फैक्स– कोई नहीं

क्या  पूर्व में ब्रॉडकास्टर को शिकायत की गयी- जी हाँ (Yes)

शिकायत के तथ्य:

मैं डॉ नूतन ठाकुर लखनऊ स्थित एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ जो विशेषकर प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में कार्य करती हूँ. मैंने अपने पत्र संख्या- NT/ZUH/NBA/01 दिनांक-05/03/2013 के माध्यम से ईमेल authority@nbanewdelhi.com पर एक युवा और उत्साही डिप्टी एसपी श्री जिया उल हक की दिनांक 02/03/2013 (शनिवार) को कुंडा क्षेत्र, जनपद प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश में हुई हत्या हो और उसके बाद शहीद डिप्टी एसपी की पत्नी सुश्री परवीन आज़ाद द्वारा धारा 302  आईपीसी सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज एफआईआर, जिसमें अन्य लोगों के अलावा उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री श्री राजा भैया भी 120बी आईपीसी में षडयंत्र करने के दोषी बताए गए थे, के सम्बन्ध में दिनांक 04/03/2013 प्रातः से रात्रि लगभग 10 बजे तथा पुनः दिनांक 05/03/2013 को विभिन्न न्यूज़ चैनल एनडीटीवी (हिंदी), एनडीटीवी 24×7 (अंग्रेजी), आइबीएन-7, सीएनएन-आइबीएन, आज तक, हेडलाइंस टुडे, ईटीवी उत्तर प्रदेश, समाचार प्लस, इंडिया न्यूज़, इंडिया टीवी, एबीपी न्यूज़, न्यूज़ 24 आदि पर प्रस्तुत खबरों के विषय में सीधे नेशनल ब्रॉडकास्टर एसोसियेशन को शिकायत भेजा था.

मैंने कहा था कि जिस प्रकार से उपरोक्त वर्णित सभी न्यूज़ चैनलों ने इस सामाचार में श्री राजा भैया के सम्बन्ध में खबरें प्रस्तुत की हैं वे निष्पक्ष समाचार नहीं दिख कर एकपक्षीय समाचार जान पड़ते हैं. यह मीडिया ट्रायल का महत्वपूर्ण उदाहरण बन कर सामने आता है. इन न्यूज़ चैनलों को देख कर ऐसा लगता है मानो इनकी कोई नैतिक, विधिक और सामाजिक जिम्मेदारी हो कि श्री राजा भैया तत्काल दण्डित कर दिये जाएँ.  

मैंने दिनांक 05/03/2013 को प्रातः नौ बजे से दस बजे के बीच विभिन्न न्यूज़ चैनल पर आ रहे न्यूज़ हाईलाईट/ब्रेकिंग न्यूज़ के नमूने प्रस्तुत किये थे-

आईबीएन 7- “राजा भईया की गिरफ़्तारी कब , आरोपी राजा भईया अब तक गिरफ्तार नहीं , आरोपी राजा भईया से अब तक पूछताछ नहीं”

आज तक- “राजा भईया की होगी गिरफ़्तारी?”

तेज – क्या राजा भईया की होगी गिरफ़्तारी?”. इसके अतिरिक्त जुर्म का भईया, एक राजा का गुनाह, गुंडे को डर किससे लगता है जैसे हाईलाईट भी लगातार दिखाए गए.

इडिया न्यूज़- “राजा की राजनीति का रक्त चरित्र” नामक एक समाचार दिखाया गया जो पिछली तारीख को भी दिखाया गया था  

इंडिया न्यूज़- “राजा भैया आज गिरफ्तार होंगे?” “परसों एफआईआर, कल इस्तीफा, आज गिरफ्तार” “कौन बचा रहा है राजा भैया को?”

CNN-IBN- “Akhilesh Promises Slain DSP’s Kin Of Arrest “, Will Akhilesh Keep Promise” “Will Raja Bhaiya Be Arrested?”

Headlines Today-“Will Raja Bhaiya be arrested?”
 
न्यूज़ 24- “सलाखों के पीछे जायेंगे राजा भईया”

NDTV 24×7- “Will Raja Bhaiya be arrested?”

उपरोक्त सभी न्यूज़ हाईलाईट के आधार पर मैंने कहा था कि इससे साफ़ दिखता है कि ये समाचार नहीं हो कर पूर्वानुमान हैं और अपने मंतव्य हैं. इन खबरों से ऐसा माहौल बनता है कि चूँकि श्री राजा भैया समाज के लिए हर प्रकार से अवांछनीय हैं, बहुत गलत आदमी हैं और अपराधी हैं, अतः उन्होंने निश्चित रूप से यह अपराध भी किया होगा. अतः इन खबरों में श्री राजा भैया को साफ़ तौर पर इस हत्याभियोग का अभियुक्त और दोषी बता दिया जा रहा है. एक प्रकार से यह तय कर दिया जा रहा है कि चूँकि श्री राजा भैया का बहुत पुराना आपराधिक इतिहास है, अतः वे इस मामले में भी निश्चित रूप से ही अभियुक्त और दोषी होंगे. यदि अभियुक्त और दोषी हैं तो उनकी तत्काल गिरफ़्तारी होनी चाहिए. इसके विपरीत विधिक स्थिति मात्र यह है कि अभी इस मामले में एफआईआर दर्ज किया गया है. एफआईआर करने वाली शहीद डिप्टी एसपी की पत्नी ने श्री राजा भैया को षडयंत्र का दोषी बताया है. वे इस मामले में श्री राजा भैया को ही पूरी तरह दोषी और जिम्मेदार मान रही हैं. चूँकि शहीद की पत्नी ऐसे गंभीर आरोप लगा रही हैं, अतः इसे बहुत ही गम्भिता और तत्परता से लिया जाना चाहिए. पर इसका यह अर्थ कदापि नहीं लगा लेना चाहिए कि मामले में सभी बातें पूरी तरह साफ़ हो गयी हैं. मीडिया, विशेषकर इलेक्ट्रौनिक मीडिया जिसमे उपरोक्त वर्णित न्यूज़ चैनल भी शामिल हैं, को यह चाहिए कि मामले की निष्पक्ष विवेचना की प्रतीक्षा करें, ना कि अपनी तरफ से ही विवेचना कर के किसी व्यक्ति को कातिल और अभियुक्त घोषित कर दें.

मैंने कहा था कि बहुत संभव है कि कल को विवेचना में श्री राजा भैया दोषी पाए जाएँ और उनकी गिरफ़्तारी भी हो पर इलेक्ट्रौनिक मीडिया द्वारा निष्पक्ष प्रस्तुति को त्याग कर अपने स्तर से जज और निर्णायक की भूमिका में आ जाना और श्री राजा भैया के विरुद्ध एक प्रकार का कैम्पेन प्रारम्भ कर देना निष्पक्ष और तटस्थ पत्रकारिता के मापदंडों के प्रतिकूल दिखता है. इन समाचारों से यह स्पष्ट आभास होता है कि मीडिया (उपरोक्त न्यूज़ चैनल सहित) चाहती है कि श्री राजा भैया दोषी हों और उनकी यथाशीघ्र गिरफ़्तारी हो.

मेरा निवेदन था कि यह स्थिति मात्र इसीलिए खतरनाक है क्योंकि यदि बाद में खुदा-ना-खास्ता विवेचना के बाद यह बात सामने आती है कि श्री राजा भैया इस मामले में दोषी नहीं थे, तो यह उनके साथ तो अन्याय होगा ही, निष्पक्ष पत्रकारिता पर भी एक प्रश्नचिन्ह बन कर खड़ा हो जाएगा. अतः संभवतः उचित यह होता कि न्यूज़ चैनल सभी तथ्य उन व्यक्तियो की बानगी प्रस्तुत करते जो ऐसी बातें कह रहे हैं और उसके साथ ही दूसरे पक्ष को भी अपनी बात कहने का पूरा अवसर देते और उनकी बात भी उसी प्रमुखता से प्रस्तुत करते ताकि दर्शकों के सामने सारी बातें तथ्यात्मक रूप से सामने आ पाती और मीडिया के जज बन जाने की स्थिति नहीं दिखती.

सीएम चव्हाण के गृहजिले में पीटा गया न्‍यूज24 का पत्रकार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण जिस जिले से हैं, उस सतारा में आज और एक पत्रकार बुरी तरहसे पीटा गया. रोहित बुधकर नाम का पत्रकार न्यूज-24 चैनल के लिए काम करता है. पिछले पंद्रह दिन में0 सतारा में पत्रकार को पीटे जाने की यह तीसरी वारदात है. सतारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रमुख सुजित अंबेडकर और महाराष्ट्र पत्रकार हमला विरोधी एक्‍शन कमिटी के प्रमुख एसएम देशमुख ने इस हमले की कड़ी शब्दों में निंदा की है.

महाराष्ट्र में राज्य परिवहन की बस के लिए हर गांव में बस स्‍टाप होते हुए भी बहुत सारे चालक हाई वे पर बडे़ होटल के पास गाड़ी खड़ी करते हैं, यह कानून के खिलाफ है. इसी पर स्टोरी करने हेतु रोहित अतीत गांव के पास इंद्रायणी होटल पहुंचे और वहां रूकी महामंडल की बहुत सारी बसों का विजुअल बनाने लगे. इसे देखकर होटल मालिक आौर दो वेटर भागते आये और रोहित को बुरी तरह से पीटा. इस घटना की रिपोर्ट बोरगांव पुलिस में दर्ज की गयी है. इस वारदात की जानकारी गृहमंत्री आरआर पाटील को भी दी गयी है. पूर्णा के ऍसिड हमले के साथ पिछले 23 दिन में महाराष्ट्र में 11 पत्रकार पर हमले हुए हैं. पूर्णा कांड का मुख्य अभियुक्त अली हसन अभी तक पकड़ा नहीं गया है.

सड़क हादसे में पत्रकार सीएस दुआ की मौत

मंडी गोबिंदगढ़ के सरहिंद साइड जीटी रोड पर बुधवार की रात हुए एक सड़क हादसे में पत्रकार सीएस दुआ की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब श्री दुआ श्री महावर वैश्य सेवा संघ की ओर से युवराज पैलेस में आयोजित होली मिलन महोत्सव की कवरेज करने के बाद अपने स्कूटर से वापस आफिस लौट रहे थे। पीछे से आ रही तेज रफ्तार इनोवा गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी, जिसके चलते वह गंभीर रूप में घायल हो गए।

श्री दुआ को इलाज के लिए सिविल अस्पताल मंडी गोबिंदगढ़ लाया गया, जहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना मिलते ही डीएसपी अमलोह दविंदर सिंह बराड़ पुलिस टीम के साथ घटना स्थल पर पहुंचे और मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। दुआ की मौत पर पत्रकार भाइचारे, राजसी, धार्मिक व समाज सेवी संस्थाओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उनका अंतिम संस्कार 30 मार्च को खन्ना में किया जाएगा।

दुआ की मौत पर शिरोमणि अकाली दल के जिला प्रधान जगदीप सिंह चीमा, सीनियर उपाध्यक्ष जस्सा सिंह आहलूवालिया, जतिंदर सिंह धालीवाल, यूथ विकास बोर्ड के पूर्व चेयरमैन गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना, नगर कौंसिल प्रधान हरपाल सिंह नसराली, नगर कौंसिल पूर्व प्रधान सुखविंदर सिंह भांबरी, पंजाब कांग्रेस कमेटी के जिला प्रधान हरिंदर सिंह भांबरी, पंजाब सचिव संदीप सिंह बल, निष्काम कीर्तन सेवा सोसायटी प्रधान कर्मजीत सिंह बिट्टू आदि ने दुख व्‍यक्‍त किया है।

क्रेडिट कार्ड चोरी प्रकरण में सहारा प्रबंधन कार्रवाई के मूड में

चर्चा है कि सहारा मीडिया के हेड संदीप वाधवा का क्रेडिट कार्ड चोरी कर डेढ़ लाख रुपये के करीब की खरीदारी करने के मामले में सहारा प्रबंधन अपने आरोपी पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का मूड बना रहा है. सूत्रों के मुताबिक संदीप वाधवा ने सहारा श्री सुब्रत राय सहारा को अपनी संस्तुति भेज दी है. उन्होंने क्रेडिट कार्ड चोरी प्रकरण के सभी प्रमाण, सीसीटीवी फुटेज आदि को सुब्रत राय के पास भेजा दिया है.

चर्चा है कि वाधवा ने आरोपी पदाधिकारी को टर्मिनेट करने की सिफारिश की है. (सीसीटीवी फुटेज देखने के लिए यहां क्लिक करें- sahara media head credit card theft issue – cctv footage)

उधर, आरोपी पदाधिकारी ने अपनी तरफ से सफाई और बचाव के लिए प्रयास तेज कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने इस मामले में एक बिलकुल नया रणनीतिक स्टैंड लिया है. उन्होंने सुब्रत राय के सामने अपना नया पक्ष स्पष्ट कर दिया है. इस नए पक्ष में सहारा मीडिया से जुड़े तीसरे बड़े पदाधिकारी को लपेटा जा रहा है.

बताया जाता है कि इस  प्रकरण में सहारा श्री सुब्रत राय सहारा इस माह की आखिरी तारीख को अपना फैसला सुनायेंगे. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि छोटे मोटे यानि सौ – दौ सौ रुपये की चोरी या गलत बयानी पकड़े जाने पर कई लोगों को सहारा से निकाला जा चुका है. क्या इस बड़े व गंभीर प्रकरण में आरोपी पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी?

उल्लेखनीय है कि आरोपी पदाधिकारी का सहारा में इंटरनल कैडर जनरल मैनेजर का है. उन्हें समय-समय पर कई बड़ी जिम्मेदारियां दी गईं जिनमें सहारा मीडिया के हेड का पद भी शामिल रहा है. वे करीब दो दशकों से ज्यादा समय से सहारा के साथ जुड़े हुए हैं और कभी लखनऊ में तो कभी नोएडा मुख्यालय में रहकर सहारा प्रबंधन द्वारा दी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हैं. उन पर समय-समय पर कई गंभीर आरोप लगे पर सहारा प्रबंधन का उन पर इतना अनुराग रहा कि हर बार उन्हें कुछ दिनों तक साइडलाइन करने के बाद फिर से मेनस्ट्रीम में लाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं.

उधर, सहारा के कई शीर्षस्थ लोगों ने पदाधिकारी पर क्रेडिट चोरी व खरीदारी किए जाने के आरोपों की पुष्टि की है. मजेदार यह है कि इतने बड़े प्रकरण में मीडिया घराने बिलकुल चुप्पी साधे हैं. कल्पना करिए, अगर ऐसा ही आरोप किसी गैर मीडिया वाले व्यक्ति पर होता तो पुलिस जाने कब तक उसे दबोच कर और उसके साथ फोटो खिंचवा कर पूरे मीडिया में सनसनी फैला देती और अपनी जमकर पीठ थपथपाती व वाहवाही लूटती. परंतु मीडिया के एक बड़े पद पर आसीन व्यक्ति पर चोरी का आरोप लगने और इसका प्रमाण मिल जाने के बाद पुलिस और मीडिया, दोनों ने ही चुप्पी साध ली. देखना है कि इस गंभीर प्रकरण पर सुब्रत राय सहारा क्या फैसला सुनाते हैं. सूत्रों का कहना है कि कार्ड चोरी के आरोपी सहारा मीडिया पदाधिकारी के पास सहारा से जुड़े सैकड़ों राज हैं, इसलिए उन्हें सहारा से तो बाहर नहीं किया जाएगा, संभव है, उनके अधिकार सीमित कर उन्हें यूं ही किसी कोने में डाल दिया जाए, जैसा कि पहले भी उनके साथ हो चुका है.


इस प्रकरण से संबंधित अन्य खबरें यूं हैं…

सहारा क्रेडिट कार्ड चोरी प्रकरण : सीसीटीवी फुटेज से पड़ताल (देखें वीडियो)

सहारा मीडिया के बड़े पदाधिकारी का क्रेडिट कार्ड चोरी, शक के घेरे में अपना ही

सहारा क्रेडिट कार्ड चोरी प्रकरण : सीसीटीवी फुटेज भड़ास के पास (देखें वीडियो)

सहारा मीडिया के हेड संदीप वाधवा का क्रेडिट कार्ड चोरी किए जाने के प्रकरण में सीसीटीवी फुटेज से कई जानकारियां सामने आई हैं. सहारा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चोरी किए गए क्रेडिट कार्ड से कब और किस शाप पर खरीदारी की गई, उस जानकारी के आधार पर उस शाप के सीसीटीवी फुटेज को मंगाया गया और इसे खंगाला गया. इसमें सहारा मीडिया से ही जुड़े एक बड़े पदाधिकारी दिखाई दे गए. सीसीटीवी फुटेज भड़ास के भी पास है, जिसे जारी किया जा रहा है. नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप भी सीसीटीवी फुटेज देख सकते हैं…

http://www.bhadas4media.com/video/viewvideo/698/media-world/sahara-media-head-credit-card-theft-issue-cctv-footage.html

: ''सीसीटीवी फुटेज में मेरा दिखना महज संयोग, कार्ड चोरी का आरोप निराधार'' : सहारा मीडिया के हेड संदीव वाधवा का क्रेडिट कार्ड चुराने और उससे डेढ़ लाख रुपये की खरीदारी किए जाने के आरोपों से घिरे सहारा मीडिया के एक बड़े पदाधिकारी, जो एक रीजनल न्यूज चैनल के चैनल हेड और राष्ट्रीय सहारा अखबार के कई संस्करणों के संपादक हैं, से जब भड़ास4मीडिया ने इन आरोपों के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि सीसीटीवी फुटेज में वे पैसे गिनते दिख रहे हैं, यानि बिल पेमेंट के लिए वे कैश पेमेंट कर रहे हैं, ऐसे में कैसे उन पर क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने का आरोप लग सकता है.

उन्होंने कहा कि यह महज संयोग है कि उसी के आसपास वाधवा जी के चोरी गए क्रेडिट कार्ड से किसी ने खरीदारी की होगी. आरोपी पदाधिकारी ने खुद पर लगे आरोपों को अपने विरोधियों की साजिश करार दिया और कहा कि उन्होंने आज तक सहारा में एक पैसे का भी इधर उधर नहीं किया है, यह तो वैसे भी बड़ा मामला है. उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद इस प्रकरण के बारे में संदीप वाधवा जी से बात की और वाधवा जी ने मेरे पर इस तरह के आरोपों से इनकार किया है. क्रेडिट कार्ड चोरी व इससे खरीदारी के आरोपी सहारा मीडिया के इस पदाधिकारी ने इस प्रकरण में नाम न घसीटे जाने का अनुरोध भड़ास4मीडिया से किया.

तानाशाही : पत्रकार हित में लड़ रहे मिथिलेश को जागरण ने बाहर किया

पत्रकार भले ही जगह-जगह लात घूंसे खाते रहे। पुलिस की लाठियां सहते रहें पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान बन चुके समाचार पत्र को कोई फर्क नहीं पड़ता। समाचार पत्रों के मालिकान अपने सहयोगियों की कोई मदद नहीं करते हैं। यदि कोई पत्रकार अपने साथियों की मदद भी करना चाहता है तो उसी के ऊपर कार्रवाई हो जाती है। ऐसा ही एक वाकया हुआ भदोही में जहां अपने साथी पत्रकार कि पिटाई के विरोध में हुए आन्दोलन में शामिल हुए दैनिक जागरण के चीफ रिपोर्टर को बहार का रास्ता दिखा दिया गया। वैसे माने तो वे जागरण के भदोही ब्यूरो कार्यालय में चल गुटबंदी के शिकार बन गए हैं।

बता दे की मिथिलेश द्विवेदी भदोही के उन पत्रकारों में हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी का लोहा कई बार मनवाया है। जेल में हुयी कैदी की पिटाई का मामला हो चाहे मुंबई की डिंपल मिश्र का मामला। उन्होंने अपनी लेखनी का जादू दिखाकर दोनों मामलो को राष्ट्रीय स्तर तक का काम किया है। श्री द्विवेदी उन पत्रकारों में जाने जाते हैं जिन्होंने कभी भी अन्याय के सामने कभी घुटने नहीं टेके। करीब ७ साल तक अपनी सेवा अमर उजाला को देने के बाद पिछले सात सालों से जागरण को सेवा देते आ रहे हैं।

गुरुवार को दैनिक जागरण के जिला विज्ञापन प्रभारी होरीलाल यादव की भदोही के अज़ीमुल्ला चौराहे पर भदोही कोतवाल संजय नाथ तिवारी ने उनकी सिर्फ इसलिए बेरहमी से पिटाई कर दी थी, क्योंकि वे कोतवाल के सामने कुर्सी पर बैठने की जुर्रत कर दी थी। इसी मामले को लेकर जनपद के पत्रकारों में प्रशासन के प्रति गुस्सा व्याप्त था, लिहाजा जनपद के पत्रकार इकट्ठा हुए और दुर्गागंज त्रिमुहानी पर जाम लगाकर आन्दोलन शुरू कर दिया। इसी बीच मिथिलेश द्विवेदी के खिलाफ राजनीति शुरू हो गयी। वाराणसी कार्यालय से उनके पास फ़ोन आया कि आन्दोलन समाप्त कर दो।

मिथिलेश ने कहा कि यहाँ पर जनपद के सभी पत्रकार इकट्ठे हैं। मैं अकेले कोई निर्णय नहीं ले सकता। यह बात विरोधी गुट को रास नहीं आई। जब इस बातचीत के बाद वे कार्यालय पहुंचे तो उन्हें घर जाने को कह दिया गया। हालाँकि धरना प्रदर्शन में जागरण के रविन्द्र पाण्डे, कैसर परवेज़, सलीम खान भी मौजूद थे, पर मिथिलेश को क्यों हटाया गया। इस बात को लेकर बस यही चर्चा है कि वे कभी अपने सीनियर की मांग ईमानदारी के चलते पूरी नहीं कर पाते थे। इसी वजह से उनके पीछे कार्यालय के लोग पड़े थे और विरोधियो को मौका मिल ही गया। हालाँकि मिथिलेश द्विवेदी ने कहा है कि वे सम्मान और स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं करेंगे और पत्रकार हित के लिए सदैव संघर्षरत रहेंगे।

उत्‍पीड़न के खिलाफ सड़क पर उतरे भदोही के पत्रकार

भदोही जनपद में हो रहे पुलिस उत्पीड़न और दैनिक जागरण के जिला विज्ञापन प्रभारी होरीलाल यादव की कोतवाल संजय नाथ तिवारी द्वारा की गयी बेवजह पिटाई से आक्रोशित पत्रकारों ने गुरुवार को सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। जनपद के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा दो दिन बाद जाँच के बाद कार्यवाही के आश्वासन पर आन्दोलन समाप्त हुआ।

पूर्व सूचना के अनुसार भदोही जनपद के करीब ८० की संख्या में पत्रकार पूर्वांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष हरीश सिंह की अध्यक्षता में ज्ञानपुर के हरिहरनाथ मंदिर पर जमा हुए। पत्रकार के साथ हुयी घटना को लेकर लोंगो में काफी आक्रोश था, लिहाजा बैठक के बाद पत्रकार नगर के दुर्गागंज तिराहे पर पहुँच कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिए। थोड़ी देर बाद अपर जिलाधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और पत्रकारों को समझाना शुरू किया, किन्तु पत्रकार जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से बात करना चाहते थे।

पत्रकारों की मांग थी कि दोषी कोतवाल को निलंबित कर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाय। साथ ही पत्रकार सुरेश गाँधी सहित सभी पत्रकारों पर लादे गए फर्जी मुकदमे वापस लिए जाय। करीब पांच घंटे तक चले धरना प्रदर्शन के बाद इस आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ कि कार्रवाई के लिए दो दिन का समय प्रशासन को दिया जाय। इसके बाद पत्रकार माने, पत्रकारों ने तय किया है कि यदि आरोपी कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तो पत्रकार आगे की रणनीति बनायेंगे। पत्रकार के साथ हुयी घटना को लेकर जनपद के पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश है।

चंडीगढ़ प्रेस क्‍लब में अध्‍यक्ष पद के लिए सुखबीर सिंह एवं देविंदर कौर आमने सामने

: नौ पदों के लिए बीस प्रत्‍याशी मैदान में : चंडीगढ़ प्रेस क्‍लब के चुनाव में गुरुवार को नाम वापसी के बाद प्रत्‍याशियों लिस्‍ट फाइनल हो गई है. अध्‍यक्ष पद के लिए सुखबीर सिंह बाजवा एवं दावी देविंदर कौर, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के लिए अवतार सिंह एवं प्रमोद वशिष्‍ठ, वाइस प्रेसिडेंट (1) के लिए निशा शर्मा एवं राजेश शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट (2) के लिए हरिशचन्‍दर एवं अनिल भारद्वाज, महासचिव पद के लिए रंजू एर्रे, जसवंत सिंह राना एवं सौरभ दुग्‍गल ने पर्चा भरा है.

सचिव पद के लिए मंजीत सिंह सिद्धू एवं नरिंदर जग्‍गा, ज्‍वाइंट सेक्रेटरी (1) के लिए कौशल लाली, रमेश हांडा एवं दिनेश गोयल, ज्‍वाइंट सेक्रेटरी (2) के लिए राकेश गुप्‍ता एवं राम कुमार भार्गव, कोषाध्‍यक्ष के लिए विक्रांत परमार एवं जगतार सिंह भुल्‍लर का नामांकन सही पाया गया है. चुनाव 31 मार्च को होंगे. चुनाव अधिकारी शाम सिंह को बनाया गया है. चुनाव परिणाम उसी दिन सायंकाल को घोषित कर दिया जाएगा. 

मीडिया पर हमले के खिलाफ महाराष्‍ट्र में पत्रकारों ने किया प्रदर्शन

महाराष्ट्र में पत्रकारों के उपर बढ़ते हमले और हाल ही में मराठी चैनलों के दो एडिटर के विरोध मे विधान मंडल में पेश किया गया विशेषाधिकार हनन (हक भंग) प्रस्ताव के विरोध में महाराष्ट्र के सभी जिला और तहसील में पत्रकार आंदोलन कर रहे हैं. महाराष्ट्र में पिछले 20 दिन में 10 पत्रकार पीटे गये हैं. पूर्णा मे एक पत्रकार के सारे परिवार के उपर ऍसिड डाल के उन्हें जलाने की कोशिश की गई. इस कांड के मास्टर माइंड आौर शहर कांग्रेस का मुखिया सैय्यद अली सय्यद हसन को वारदात के 15 दिन बाद भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है.

गंगाखेड के पत्रकार गंगाधर कांबले के उपर हमला कर के उसी के उपर फर्जी केस किया गया है. इस कांड के अभियुक्त अभी भी खुले आम घुम रहे हैं. गेवराई में एक पत्रकार पीटा गया. नई मुंबई में आसाराम बापू के भक्तों ने पत्रकार पर पत्‍थरबाजी की, उस में दो पत्रकार गंभीर रूप से जख्मी हुये. इधर मुंबई में संपादक निखिल वागले आौर राजीव खांडेकर के उपर हक भंग प्रस्ताव लाया गया. इस के विरोध में महाराष्ट्र के पत्रकार जगत में काफी गुस्‍सा है.

महाराष्‍ट्र के पत्रकार वागले और खांडेकर के उपर दर्ज किया गया हक भंग प्रस्ताव खारिज करने की मांग कर रहे हैं. इसके विरोध में महाराष्ट्र के 35 जिले में से 28 जिलों में पत्रकारों ने महाराष्ट्र पत्रकार हमला विरोधी ऍक्शन कमिटी के आवाहन पर आंदोलन किया. रायगढ़, नई मुंबई, औरंगाबाद, अहमदनगर, धुलिया, जलगांव, बुलढाणा आदि जगहों पर आंदोलन को अच्छा रिस्पांस मिला. महाराष्ट्र में पत्रकारों के विरोध मे चल रही मुहिम का पूरे ताकत से मुकाबला करने का संकल्प पत्रकार हमला विरोधी ऍक्शन कमिटी के अध्यक्ष एसएम देशमुखने लिया है.

बीबीसी ने श्रीलंका में अपना प्रसारण रोका

लंदन : बीबीसी ने आज कहा कि वह तमिल कार्यक्रम के प्रसारण में लगातार व्यवधान और हस्तक्षेप के कारण श्रीलंका में विश्व एफएम रेडियो प्रसारण सेवा को स्थगित कर रही है. ब्रिटिश प्रसारणकर्ता ने कहा कि श्रीलंका ब्राडकास्ट कारपोरेशन के जरिये अंग्रेजी भाषा और तमिल सेवाओं का प्रसारण तत्काल प्रभाव से रोका जा रहा है.

विश्व सेवा के निदेशक पीटर होरोक्स ने कहा, ‘‘ हम श्रीलंका में अपने प्रतिबद्ध श्रोताओं के लिए सेवा में व्यवधान पर अफसोस व्यक्त करते हैं. लेकिन इस तरह से कार्यक्रम में लगातार हस्तक्षेप गंभीर विश्वास भंग करने का मामला है जिसकी अनुमति बीबीसी नहीं दे सकता है.’’

IRS 2012 Q4 : राजस्‍थान-एमपी में सर्वाधिक बढ़त वाला अखबार बना राजस्‍थान पत्रिका

मुम्बई। अपनी विश्वसनीय खबरों व निर्भीकता के कारण देश भर में पहचान रखने वाला पत्रिका वर्ष 2012 की चौथी तिमाही में 36 हजार औसत पाठक जोड़कर देश के 10 शीर्ष अखबारों में सर्वाधिक बढ़त वाला समाचार पत्र बना है। भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आईआरएस) की मुम्बई में जारी ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक पत्रिका समूह की कुल पाठक संख्या 1 करोड़ 97 लाख 25 हजार है।

राजस्थान पत्रिका को इस रिपोर्ट में फिर राजस्थान का सिरमौर घोषित किया गया है। वहीं मध्यप्रदेश में अन्य प्रमुख अखबारों की पाठक संख्या में इस अवधि आई गिरावट के बीच पत्रिका ने करीब 3 हजार औसत पाठक जोड़े।

पत्रिका समूह ने जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा व बीकानेर समेत शहरी क्षेत्रों में 58.83 लाख कुल पाठकों के साथ अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पत्रिका ने पहले से ही बढ़त ले रखी है। ऑडिट ब्यूरो आफ सर्कुलेशन की रिपोर्ट (जनवरी- जून 2012) के हिसाब से जयपुर शहर में राजस्थान पत्रिका नम्बर 1 अखबार है। प्रदेश के कुल हिन्दी पाठकों में से लगभग 81 प्रतिशत पत्रिका समूह के अखबार पढ़ते हैं। जोधपुर संस्करण में तो प्रतिस्पर्धी से पत्रिका 3.48 लाख तथा कोटा संस्करण में 1.62 लाख कुल पाठक संख्या ज्यादा है। इस रिपोर्ट के अनुसार पत्रिका का रेडियो स्टेशन 95 एफएम तड़का जयपुर और कोटा शहरों में नम्बर 1 रेडियो स्टेशन घोषित किया गया है।

मध्यप्रदेश में तेज रफ्तार : अल्प समय में ही मध्यप्रदेश में धाक जमाने वाली पत्रिका ने 2012 की चौथी तिमाही में प्रदेश में करीब 3 हजार नए औसत पाठक जोड़े हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में 6.28 लाख कुल पाठकों के रूप में धमाकेदार उपस्थिति दी है। इस सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ के प्रमुख समाचार पत्रों में पत्रिका ही ऎसा है जिसकी औसत पाठक संख्या इस तिमाही में 14 हजार बढ़ी है। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में पाठक संख्या के ये आंशिक आंकड़े ही हैं।

मध्यप्रदेश- छत्तीसगढ़ में अल्प समय में ही पत्रिका को पाठकों का जो स्नेह मिला है वह पाठकों का पत्रिका की निर्भीक लेखनी पर भरोसा दर्शाता है। वहां पत्रिका ने हर मुद्दे पर जनता की आवाज उठाई तथा पीडितों को राहत दिलाने का काम किया। मध्यप्रदेश में पत्रिका के प्रति पाठकों के रूझान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसी तिमाही में वहां दैनिक जागरण के 1 हजार, नई दुनिया के 75 हजार, नवभारत के 9 हजार, दैनिक भास्कर के 10 हजार, राज एक्सप्रेस के 22 हजार, नव दुनिया के 23 हजार और हरिभूमि के 22 हजार औसत पाठक संख्या में गिरावट आई है। इस प्रकार 1 लाख 62 हजार औसत पाठकों ने इन अखबारों से मुंह मोड़ा है। उल्लेखनीय है कि ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (जनवरी- जून 2012) के आंकड़ों के अनुसार पत्रिका समूह देश के दूसरे सबसे बड़े हिन्दी दैनिक अखबार समूह के रूप में उभर कर आया है।

एकाधिकार ध्वस्त : आईआरएस के इस सर्वे की विशेष बात यह है कि पत्रिका ने मध्यप्रदेश में अभी तक छाए एकाधिकार को जबर्दस्त तरीके से ध्वस्त कर दिया। उल्लेखनीय है कि ऑडिट ब्यूरो आफ सर्कुलेशन की रिपोर्ट (जनवरी- जून- 2012) के अनुसार पत्रिका भोपाल व इन्दौर जैसे प्रमुख शहरों में नम्बर वन है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कितनी तेजी से मध्यप्रदेश के पाठक पुराने अखबार से नाता तोड़ कर पत्रिका से जुड़ रहे हैं। पाठकों के स्नेह और विश्वास के दम पर अर्जित यह सफलता हम अपने पाठकों को ही समर्पित करते हैं। (पत्रिका)

IRS 2012 Q4 : दैनिक भास्‍कर बना देश का सबसे बड़ा अखबार समूह

मुंबई.  इंडियन रीडरशिप सर्वे 2012 की चौथी तिमाही के मुंबई में जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक पांच लाख पाठकों की बढ़त और कुल 1.97 करोड़ पाठक संख्या के साथ दैनिक भास्कर समूह देश का सबसे बड़ा अखबार समूह बना हुआ है।

चार भाषाओं में 65 संस्करणों के साथ समूह की 13 राज्यों में मौजूदगी है। चार शीर्ष अखबार समूहों में दैनिक भास्कर समूह ने आईआरएस 2012 की तीसरी तिमाही की तुलना में इस तिमाही में एसईसी-एबी सेगमेंट में दो लाख पाठक जोड़े हैं।

पंजाब में दैनिक भास्कर अमृतसर, जालंधर और लुधियाना में संयुक्त रूप से 4.24 लाख पाठकों के साथ अग्रणी है। हरियाणा में यह 12.82 लाख पाठकों के साथ अग्रणी है। यह दूसरे क्रम के अखबार से 27 प्रतिशत बढ़त लिए हुए है। चंडीगढ़ में 1.70 लाख पाठकों के साथ इसके निकटतम पाठक संख्या वाले अखबार की तुलना में 67 प्रतिशत अधिक पाठक हैं।

दैनिक भास्कर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी बाजारों में अपना वर्चस्व बनाए हुए है। कुल 45.97 लाख पाठकों के साथ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाजार में वह दूसरे प्रमुख अखबारों की पाठक संख्या के जोड़ से खासी बढ़त लिए हुए है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रायपुर और दुर्ग भिलाई के बाजार में इसका प्रभुत्व बना हुआ है।

दैनिक भास्कर 10.33 लाख पाठकों के साथ जयपुर में भी प्रभुत्व कायम किए हुए है। जो कि दूसरे प्रमुख अखबार से 30 प्रतिशत अधिक है। यह राजस्थान में सबसे अधिक पाठक संख्या वाला शहरी अखबार बना हुआ है।

अहमदाबाद की पहली पसंद दिव्य भास्कर है जिसके पाठकों की संख्या दूसरे क्रम के अखबार से 29 प्रतिशत अधिक है। वास्तव में यह एकमात्र गुजराती अखबार है जिसके एक शहर में दस लाख से अधिक पाठक हैं। दैनिक भास्कर समूह के मराठी संस्करण दिव्य मराठी ने महाराष्ट्र के मराठी दैनिकों में फिर से सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज कराई है। यह 11 फीसदी की दर से बढ़ा है। (भास्‍कर)

बंगाल से प्रकाशित प्रभात वार्ता होगा बंद, प्रदर्शन करेंगे पत्रकार

लगभग एक साल पहले बड़े जोर शोर से कोलकता और सिलिगुडी से शुरू हुए शारदा ग्रुप ऑफ कंपनीज के हिंदी अखबार 'प्रभात वार्ता' को लेकर बुरी खबर आ रही है. लगातार हो रहे घाटे को देखते हुए इसके मालिक ने एक अप्रैल से अखबार के बंद करने की घोषणा कर दी है. इस संबंध में सभी स्टाफ को भी बता दिया गया है. उन्‍हें 31 मार्च तक का नोटिस भी दे दिया गया है. अखबार के बंद होने की घोषणा के बाद से संपादक रविशंकर का मोबाइल स्विच ऑफ हो गया है.

रवि शंकर पिछले वर्ष भागलपुर हिन्दुस्तान छोड़ कर बतौर संपादक इस अखबार लांच कराने कोलकता पहुंचे थे. तब उनके साथ हिन्दुस्तान के साथ ही प्रभात खबर भागलपुर के कुछ लोग भी जुड़े थे. सिलीगुड़ी से लांचिंग के समय कुछ लोग जागरण से निकलकर भी इस अखबार से जुड़े थे. खबर है कि इस समूह के उर्दू अखबार 'आजाद हिंद' और अंग्रेजी अखबार 'बंगाल पोस्‍ट' को भी बंद किए जाने की सूचना आ रही है. प्रबंधन के इस फैसले से कर्मचारियों में गहरी निराशा है.

नोटिस मिलने के बाद हतप्रभ लगभग दो सौ कर्मचारी आंदोलन करने के मूड में हैं. कर्मचारियों की मांग है कि प्रबंधन उन लोगों को तीन महीने की सैलरी दे, परन्‍तु प्रबंधन ने अभी तक कुछ भी स्‍पष्‍ट नहीं किया है. कर्मचारियों का आरोप है कि उन लोगों के पीएफ के नाम पर पैसे काटे गए परन्‍तु न तो पीएफ जमा किया गया और ना ही पैसे जमा किए गए. खबर है कि कर्मचारी कोलकाता में आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहे हैं. वे शुक्रवार से ही हड़ताल करने वाले हैं.

कर्मचारियों का कहना है कि वे न केवल हड़ताल करेंगे बल्कि शारदा ग्रुप ऑफ कंपनीज के अन्‍य प्रतिष्‍ठानों को ठप कराने का प्रयास करेंगे. उनका कहना है कि जब तक हमलोगों को तीन महीने की सैलरी और पीएफ का पैसा नहीं मिल जाता हम आंदोलनरत रहेंगे. बताया जा रहा है कि कंपनी के अचानक लिए गए फैसले से कम से कम दो सौ लोग प्रभावित हुए हैं. इनमें से ज्‍यादातर हिंदी प्रदेशों के अखबार से इस्‍तीफा देकर कोलकाता और सिलीगुड़ी पहुंचे थे.

IRS 2012 Q4 : हिंदुस्‍तान हुआ मजबूत, बढ़त बरकरार

इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस क्यू4 2012) के मुताबिक 3.91 करोड़ की कुल पाठक संख्या के आधार पर हिन्दुस्तान ने अपना दूसरा स्थान और मजबूत किया है। अखबार की औसत अंक पाठक संख्या अब 1.22 करोड़ हो गई है जो पिछले दौर से 4 हजार ज्यादा है। हालांकि इसी अवधि में हिन्दुस्तान के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और अमर उजाला की पाठक संख्या में कमी दर्ज की गई है।

हिन्दुस्तान ने पिछले तीन साल के दौरान पाठक संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की है। आईआरएस के पिछले 17 दौर में हिन्दुस्तान की पाठक संख्या बढ़ती आ रही है और यह देश का सबसे तेजी से बढ़ता अखबार बना हुआ है। पाठक संख्या में यह व्यापक वृद्धि पिछले तीन साल के दौरान अखबार के विस्तार अभियान का नतीजा है। अब यूपी और उत्तराखंड में हिन्दुस्तान की 46.2 लाख औसत अंक पाठक संख्या है जो पिछले दौर से एक लाख से ज्यादा है। हिन्दुस्तान यूपी और उत्तराखंड राज्यों में पिछले एक साल में बढ़ने वाला इकलौता दैनिक है और यहां इसकी 23% से ज्यादा की पाठक हिस्सेदारी है। (हिंदुस्‍तान)

IRS 2012 Q4 : पाठक घटने के बावजूद जागरण नम्‍बर वन

नई दिल्ली। दैनिक जागरण ने 5.65 करोड़ सुधी पाठकों के साथ लगातार 25वीं बार देश के नंबर वन समाचार पत्र का दर्जा प्राप्त कर नया कीर्तिमान बनाया है। भारतीय मीडिया के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।

इंडियन रीडरशिप सर्वे की चौथी तिमाही के नतीजों के मुताबिक दैनिक जागरण के पाठकों की संख्या अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी समाचार पत्र के मुकाबले कहीं अधिक बढ़कर 1.74 करोड़ हो गई है। देश के तीन शीर्ष अखबारों में दैनिक जागरण की पाठक संख्या हर तरह से सबसे ज्यादा बढ़ी है। पाठकों की संख्या प्रतिशत के लिहाज से भी बढ़ी है और संख्या के लिहाज से भी पहली तिमाही के मुकाबले अधिक रही है। पूरे देश में पाठकों ने इस तिमाही में दैनिक जागरण को हाथों हाथ लिया।

दैनिक जागरण को कंज्यूमर सुपरब्रांड और बिजनेस सुपरब्रांड का दर्जा मिल चुका है। बीबीसी-रायटर के स्वतंत्र सर्वे में इसे प्रिंट मीडिया में खबरों का सबसे विश्वसनीय स्रोत माना गया है। जागरण समूह के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के पाठकों को मिला देने पर इनकी संख्या 6.8 करोड़ पहुंच जाती है, जो भारत में सर्वाधिक है। (जागरण)

पीसीआई वाले काटजू ने अपराधी संजय दत्‍त की माफी के लिए पत्र लिखा

नई दिल्ली : एक तरफ जहां बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने 1993 बम ब्लास्ट के एक मामले में मिली सजा पर माफी के लिए कोई अपील नहीं करने की बात कही है वहीं भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने गुरुवार शाम को संजय दत्त को माफी देने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को चिट्ठी लिखी। उन्होंने गृहमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल से भी संजय दत्त को माफी देने की अपील की है।

मालूम हो कि संजय दत्त की ओर से दया के लिए आवदेन नहीं करने के ऐलान के बावजूद काटजू ने गुरुवार सुबह कहा था कि वह आगे बढ़ेंगे और दत्त तथा 1993 मुंबई बम विस्फोटों के मामले में दोषी करार दी गई जैबुन्निसा के लिए माफी की अपील करेंगे।

संजय दत्त की ओर से दया के लिए आवेदन नहीं करने के फैसले के बारे में पूछे जाने पर काटजू ने कहा कि इससे मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। मैं राष्ट्रपति और महाराष्ट्र के राज्यपाल के पास माफी के लिए आवेदन करने जा रहा हूं। मेरा मानना है कि दत्त और जैबुन्निसा दोनों माफी के हकदार हैं।

यह पूछे जाने पर कि किस बुनियाद पर दोनों के लिए वह माफी की मांग कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि जनहित इनमें से एक है । इसके लिए कई और पहलु हो सकते हैं जिनके आधार पर माफी दी जा सकती है। काटजू ने कहा कि उन्होंने संजय दत्त से बात किए बिना उन्हें माफ किए जाने की अपील जारी की है।

उन्होंने कहा कि अगर आप संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 का अध्ययन करते हैं तो इनमें यह नहीं कहा है कि कौन अपील का सकता है। अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति और अनुच्छेद 161 राज्यपाल को माफ करने का अधिकार देता है।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि ‘परंतु ये दोनों अनुच्छेद इसका उल्लेख नहीं करते हैं कि कौन अपील कर सकता है। यह भी नहीं लिखा है कि किन बुनियादों पर माफी दी जा सकती है। बीते 21 मार्च को 53 वर्षीय दत्त को उच्चतम न्यायालय ने पांच साल की सजा का आदेश दिया था। दूसरी ओर 70 साल की जैबुन्निसा अनवर काजी को भी पांच साल की सजा दी गई है। (एजेंसी)

वरिष्‍ठ पत्रकार एवं ट्रेड यूनियन नेता त्रिवेदी अम्‍बरीश का निधन

वरिष्‍ठ पत्रकार और ट्रेड यूनियन सीएफटीयूआई के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष त्रिवेदी अम्‍बरीश का नई दिल्‍ली में हार्ट अटैक से 26 मार्च को निधन हो गया. वे 65 वर्ष के थे. त्रिवेदी अम्‍बरीश प्रसिद्ध ट्रेड यूनियन नेता और स्‍वतंत्रता सेनानी टी परमानंद के पुत्र थे. अम्‍बरीश ने अपने करियर की शुरुआत पटना में बिहार के प्रमुख अखबार आर्यावर्त से की थी. इसे लंबे समय तक राष्‍ट्रीय सहारा के पटना तथा चंडीगढ़ ब्‍यूरो के प्रमुख भी रहे. वे अपने पीछे पत्‍नी, दो पुत्री तथा एक पुत्र का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं. 

त्रिवेदी अम्‍बरीश के निधन की से पत्रकार जगत में शोक है. तमाम जगहों पर बैठक करके उनके आत्‍मा की शांति के लिए प्रार्थना की जा रही है.

IRS 2012 Q4 : जागरण समूह को बड़ा झटका, प्रभात खबर को सर्वाधिक फायदा

इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) 2012 की चौथी तिमाही के टाप टेन हिंदी अखबारों के नतीजे आ गए हैं. आईआरएस की चौथी तिमाही हिंदी अखबारों के लिए उत्‍साहजनक नहीं हैं. टॉप टेन अखबारों में छह अखबारों ने अपने पाठक खोए हैं. हालांकि इसके चलते उनके स्‍थानों में कोई परिवर्तन नहीं आया है.

दैनिक जागरण और इसी समूह के अखबार नईदुनिया ने सबसे ज्‍यादा पाठक खोए हैं. दैनिक जागरण को जहां एक लाख से ज्‍यादा पाठक का नुकसान हुआ है वहीं नईदुनिया ने लगभग दो लाख पाठकों को खोया है. यानी चौथी तिमाही में जागरण समूह को बड़ा झटका लगा है.

दैनिक जागरण ने चौथी तिमाही में अपने 1,04,000 पाठक खोए हैं. इस तिमाही में उसके पाठकों की संख्‍या 1,63,70,000 पर पहुंच गई है, जो पिछली तिमाही में 1,64,74,000 थी. हालांकि इतने पाठकों को खोने के बाद भी जागरण पहले नम्‍बर पर बना हुआ है.

दूसरे नम्‍बर पर मौजूद दैनिक भास्‍कर को भी 75,000 पाठकों का नुकसान उठाना पड़ा है. चौथी तिमाही में दैनिक भास्‍कर के पाठकों की संख्‍या 1,44,16,000 हो गई है. जबकि इसके पिछले तिमाही में दैनिक भास्‍कर के पाठकों की संख्‍या 1,44,91,000 थी.

हिंदुस्‍तान तीसरे नम्‍बर पर मौजूद हैं. हिंदुस्‍तान ने चौथी तिमाही में 4,000 पाठकों को जोड़ने में सफलता पाई है. चौथी तिमाही में हिंदुस्‍तान के पाठकों की संख्‍या 1,22,46,000 पहुंच गई है, जबकि पिछली तिमाही में इसके पाठकों की संख्‍या 1,22,42,000 के आंकड़े पर थी.

चौथे स्‍थान पर अमर उजाला मौजूद हैं. अमर उजाला को भी इस बार 102,000 पाठकों का नुकसान उठाना पड़ा है. तीसरी तिमाही में अमर उजाला के पाठकों की संख्‍या 85,36,000 थी, जो इस बार घटकर 84,34,000 पर पहुंच गई है. अमर उजाला पिछले चारों तिमाही में पाठकों का नुकसान उठाया है. 

राजस्‍थान पत्रिका पांचवें नम्‍बर पर मौजूद है. पत्रिका ने इस तिमाही में भी 19,000 नए पाठक अपने साथ जोड़े हैं. राजस्‍थान पत्रिका को पिछली तिमाही में भी पाठकों का फायदा हुआ था. चौथी तिमाही में राजस्‍थान पत्रिका के पाठकों की संख्‍या 68,37,000 पहुंच गई है, जो पिछले तिमाही में 68,18,000 थी.

41,000 पाठकों के नुकसान के साथ पंजाब केसरी छठवें स्‍थान पर मौजूद है. पंजाब केसरी के पाठकों की संख्‍या चौथी तिमाही में घटकर 33,23,000 पर पहुंच गई है. जबकि पिछले तिमाही में पंजाब केसरी के पाठकों की संख्‍या 33,64,000 थी. पिछली तिमाही में पंजाब केसरी को फायदा हुआ था.

प्रभात खबर सातवें स्‍थान पर मौजूद है. प्रभात खबर ने इस तिमाही में सबसे ज्‍यादा 98,000 पाठक अपने साथ जोड़े हैं. प्रभात खबर के पाठकों की सख्‍या चौथी तिमाही में 28,59,000 पर पहुंच गई है. पिछली तिमाही में प्रभात खबर के पाठकों की संख्‍या 27,61,000 थी. प्रभात खबर ने इस साल के चारों तिमाही में अपने साथ नए पाठक जोड़ने में सफलता प्राप्‍त की. 

आठवें नम्‍बर पर मौजूद नवभारत टाइम्‍स को इस तिमाही में 6,000 पाठकों का नुकसान हुआ है. एनबीटी के पाठकों की संख्‍या चौथी तिमाही में घटकर 26,33,000 पर पहुंच गई है, जो पिछली तिमाही में 26,39,000 थी. एनबीटी को पिछली तिमाही में भी पाठकों का नुसान उठाना पड़ा था.

पत्रिका 17,000 नए पाठकों जोड़ते हुए नौवें स्‍थान पर अपना कब्‍जा बरकरार रखा है. चौथी तिमाही में पत्रिका के पाठकों की संख्‍या बढ़कर 20,68,000 तक पहुंच गई है. जबकि पिछली तिमाही में इसके पाठकों की संख्‍या 20,51,000 थी. पिछली तिमाही में पत्रिका को नुकसान हुआ था.

दसवें नम्‍बर पर मौजूद है जागरण के स्‍वामित्‍व वाला नई दुनिया. हालांकि इस अखबार ने सबसे ज्‍यादा 1,95,000 पाठक खोए हैं. जागरण द्वारा खरीदे जाने के बाद इस अखबार को खासा पाठकों का नुकसान हुआ है. चौथी तिमाही में नईदुनिया के पाठकों की संख्‍या 13,58,000 पर पहुंच गई है. जबकि पिछले तिमाही में इसके पाठकों की संख्‍या 15,53,000 थी.

दीपक को लेकर एयर एंबुलेंस दिल्‍ली के लिए रवाना

 इंदौर से ताजा सूचना आ रही है कि इंदौर से एयर एंबुलेंस दीपक को लेकर दिल्‍ली के लिए रवाना हो चुका है. कुछ ही देर  में एयर एंबुलेंस दिल्‍ली पहुंच जाएगा. उनके साथ उनका परिवार भी एयर एंबुलेंस में मौजूद है. दिल्‍ली स्थित एम्‍स में उनका ऑपरेशन किया जाएगा. दीपक के तमाम शुभचिंतक उनकी हालत को लेकर चिंतित हैं. 

दीपक चौरसिया के घायल होने की सूचना मिलने पर मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री गुलाम नबी आजाद एवं दिल्‍ली की मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित ने फोन करके हालचाल लिया. शिवराज सिंह चौहान ने सारी सुविधाएं उपलब्‍ध कराने का आदेश अपने मशीनरी को दे दिया है. दीपक चौरसिया को आज इंदौर से आठ बजे एक कार्यक्रम लाइव करना था. साथ ही उन्‍हें इंदौर प्रेस क्‍लब द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भी भाग लेना था.

दीपक चौरसिया को एयर एंबुलेंस से दिल्‍ली लाया जा रहा है. यहीं पर उनका इलाज कराया जाएगा. इंडिया न्‍यूज के ग्रुप मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत ने बताया कि बहुत घबराने जैसी बात नहीं है. दीपक को चोटें आईं हैं, परन्‍तु जिस तरह की  अफवाहें उड़ रही हैं, वैसी कोई बात नहीं है. दीपक दिल्‍ली के लिए एयर एंबुलेंस से निकल चुके हैं. कुछ देर में दिल्‍ली पहुंच जाएंगे.

इंदौर एयरपोर्ट पर गिरकर घायल हुए दीपक चौरसिया, कूल्‍हे की हड्डी टूटी

: अपडेट : इंडिया न्‍यूज के एडिटर इन चीफ एवं वरिष्‍ठ टेलीविजन पत्रकार दीपक चौरसिया इंदौर एयरपोर्ट गिरकर घायल हो गए हैं. उनके दाएं कूल्‍हे की हड्डी टूट गई है. बताया जा रहा है कि दीपक चौरसिया गुरुवार दोपहर की फ्लाइट से इंदौर पहुंचे थे. उनके साथ उनकी पत्‍नी तथा बच्‍ची भी थी. वे प्‍लेन से उतरकर लॉबी की तरफ जा रहे थे. उन्‍होंने अपनी बिटिया को गोदी में उठा रखा था. इसी बीच रास्‍ते में एक महिला सूटकेस समेत आ गई. सूटकेस, महिला तथा अपनी बिटिया को बचाने के चक्‍कर में गिर गए.

हालांकि उन्‍होंने दोनों लोगों को चोट नहीं आने दी. गिरने के बाद ही उन्‍हें तेज दर्द होने लगा. इसके बाद उन्‍हें इलाज के लिए एक वाहन से इंदौर के बांबे हास्‍पीटल ले जाया गया. इस दौरान वह दर्द से बुरी तरह परेशान रहे. वहां जांच में पता चला कि उनकी कूल्‍हे की एक हड्डी टूट कर दूसरे पर चढ़ गई है. डाक्‍टरों ने वहां प्राथमिक उपचार किया. हड्डी को अपनी जगह लाने के लिए आपरेशन करने की बात आई. इसके बाद दीपक के परिजनों की तरफ से दिल्‍ली में ऑपरेशन करने की बात कहीं गई.

दैनिक भास्‍कर टाइटिल मामले में कोर्ट ने सुनाया फैसला, डीबी कॉर्प ने लिया स्‍टे

दैनिक भास्‍कर टाइटिल पर मालिकाना हक को लेकर रमेश अग्रवाल बनाम महेश प्रसाद अग्रवाल के बीच चल रहे मामले में खबर है कि ग्वालियर की एक अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि झगड़े के निपटारा होने तक दैनिक भास्कर टाइटिल पर मालिकाना हक द्वारिका प्रसाद एंड ब्रदर्स का ही माना जाए, इस पर रमेश अग्रवाल का एकाधिकार नहीं हो सकता है.

ग्वालियर कोर्ट के इस फैसले बाद रमेश अग्रवाल के नेतृत्‍व वाली कंपनी डीबी कार्प ने हाईकोर्ट से स्‍टे ले लिया है. महेश प्रसाद अग्रवाल के पुत्र और दैनिक भास्कर, झांसी के संपादक-मालिक संजय अग्रवाल ने रमेश अग्रवाल द्वारा हासिल किए गए स्‍टे को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है. संजय अग्रवाल ने रमेश अग्रवाल पर अपने को स्‍वयंभू तरीके से चेयरमैन घोषित करने पर कोर्ट में मामला दर्ज कराया है. भास्कर टाइटिल को लेकर कई अदालतों में मुकदमा चल रहा है.

उल्‍लेखनीय है कि संजय अग्रवाल के पास दैनिक भास्कर टाइटिल का यूपी के लिए मालिकाना हक है. बिना उनकी मंजरी के झारखंड में रमेश अग्रवाल ने दैनिक भास्‍कर लांच कराने का फैसला कर लिया था. इस लांचिंग के समय संजय अग्रवाल ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी. उस मामले में भी कार्रवाई कोर्ट में जारी है. भास्कर झारखंड विस्तार प्रकरण में भी रमेश चंद्र अग्रवाल और उनके पुत्रों ने स्‍टे ले रखा है. डीबी कॉर्प के एक और फर्जीवाड़े का मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है.

एफबी के इस स्टेटस को लाइक या कमेंट के लिए आपको हो सकती है जेल!

Himanshu Kumar : सूर्यनेल्ली में सत्रह साल की एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर के उसे पैंतीस दिन तक एक गेस्ट हाउस में बंद कर के उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था . बलात्कारियों में वर्तमान कांग्रेसी नेता और राज्यसभा का उपाध्यक्ष पी जे कुरियन भी शामिल था . दो हफ्ते पहले पीजे कुरियन के इस कांड में शामिल होने के बारे में कुछ युवाओं ने फेसबुक पर लिखा था ,कुछ युवाओं ने उसे लाइक किया तो पुलिस ने इन सब के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज़ कर ली . फेसबुक पर लिखने के कारण कुल एक सौ ग्यारह लोगों के खिलाफ मुकदमा बना दिया गया है .

लेकिन अब अब पीड़ित लड़की ने खुद कोर्ट से कहा है कि पीजे कुरियन को भी आरोपी बनाया जाए . कल कोर्ट ने पीजे कुरियन को नोटिस दिया है . फेसबुक पर इस बलात्कारी के बारे में लिखने वालों के खिलाफ मुकदमा बनाने वाले पुलिस अधिकारियों को जेल में डाल देना चाहिये . ये पुलिस वाले ताकतवर बलात्कारियों की रक्षा करते हैं और न्याय के लिये आवाज़ उठाने वालों को फर्जी केसों में फंसाते हैं . इस मुल्क की पुलिस जनरल डायर की नौकर कब तक बनी रहेगी ? इनका ज़मीर कब जागेगा ?

गैंगरेप प्रकरण में पुलिस ने उपसभापति को नोटिस जारी किया

हिमांशु कुमार के फेसबुक वॉल से.

….जिससे सफल पत्रकार (अमीर पत्रकार) बनने की ट्रेनिंग पूरी हो!!!

एक 'प्र'तिष्ठित चैनल के मीडिया संस्थान ने अपने छात्रों की आश्चर्यजनक प्रतिभा को देखते हुए, उनके ही हाथों में मैनेजमेंट सौंपने का फैसला किया है… हर बात पर विचार करने और करते रहने की हैरअंगेज़ प्रतिभा को देखते हुए Ankit Muttrija को संस्थान का कुलपति नियुक्त किया गया है…छात्रों की हर समस्या और शिकायत पर वो 'मैं सोच रहा हूं' ऐसा कह देंगे…और फिर सोचते रहेंगे…उनके सोचते सोचते छात्रों की पढ़ाई खत्म हो जाएगी…और फिर समस्या भी…

Nadeem Anwar को संस्थान में कल्चरल ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, संस्थान में साल भर चल्चरल ईवेंट चलते रहें, जिससे पढ़ाई करवाने की ज़हमत न उठानी पड़ें, इसका ज़िम्मा नदीम पर होगा…वो गाना गाने और ढोलक बजाने के अपने शौक से इस पद पर सफल होंगे, ऐसा किसी का भी नहीं मानना है… उधर Raunak Singh को कांग्रेस का झंडा लगाकर और सीपीएम की लाइन लेकर नरेंद्र मोदी का समर्थन करने की वजह से संस्थान में राजनीतिक रिपोर्टिंग पढ़ाने का काम दिया गया है…अपनी आंखों को नियंत्रण में रखने के लिए उनको विशेष ट्रेनिंग लेने के लिए अमर सिंह और नारायण दत्त तिवारी के घर भेजा जाएगा…

Nitin Thakur को छात्रों को ये सिखाने का काम दिया गया है कि कैसे रिपोर्टिंग के दौरान बजरंग दल, सिमी और एसएफआई से एक जैसे सम्बंध रखे जाएं…इससे वो समझ पाएंगे कि ज़िंदगी में कमीनों और शरीफ़ों, दलालों और ईमानदारों सबके साथ कैसे निभे…और न्यूज़रूम कोई भी आपके बारे में बुरा न कहे…सोचे भले ही… Nandan Tripathi के लिए विशेष पद सृजित किया गया है…ये पद जैक ऑफ ऑल कहलाएगा….इसे हिंदी में बकलोलकला के नाम से जाना जाएगा…नंदन छात्रों को राजनैतिक रिपोर्टिंग, सामाजिक रिपोर्टिंग, अपराध पत्रकारिता, पर्यावरण पत्रकारिता, खेल पत्रकारिता, फिल्म पत्रकारिता, ग्रामीण पत्रकारिता, धार्मिक पत्रकारिता से लेकर स्वास्थ्य और नगर निगम की बीट, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी, अरबी, पंजाबी, भोजपुरी, इतिहास, भूगोल, प्राणि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, रसायन शास्त्र, भौतिकी, दर्शनशास्त्र, विवेचना, समाजशास्त्र, होमसाइंस और धर्म समेत करीब ढाई हज़ार विषयों पर रोज़ लेक्चर देंगे, हालांकि उसे प्रवचन कहते हैं…'हालांकि नंदन कहते हैं कि ऐसा नहीं है…'

इसके अलावा Pranjal Sumani Puja Biswal और Fatima Khan को ड्रेसिंग सेंस की विशेष क्लास के लिए नियुक्त किया जाएगा….चूंकि आज के समाचार चैनलों में ख़बर से ज़्यादा अहम एंकर और रिपोर्टर के कपड़े हैं…छात्रों को सिखाया जाएगा, कि ख़बर से खेलना एंकर और रिपोर्टर के लिए उतना ही ज़रूरी है, जितना धर्म के ठेकेदारों के लिए समाज से और नेताओं के लिए देश से खेलना है…एचएफके यानी कि हिना फातिमा खान को एचएफके यानी कि हाय फैशन करलो का एचओडी बनाया गया है…

इसके अलावा गेस्ट फैकल्टी के तौर पर Sharad Yadav को भी विशेष नियुक्ति दी गई है…चूंकि रिपोर्टर के तैर पर फील्ड में, कैमरामैन के तौर पर दूसरे चैनल के कैमरामैन को माइक आईडी हटाने के लिए कहते वक्त…रनडाउन प्रोड्यूसर के तौर पर लगभग हर आदमी…एडीटर के तौर पर प्रोड्यूसर और अगर आप सम्पादक बन गए तो मालिक के अलावा दफ्तर के हर आदमी को गाली दे देने की जो चैनलों की अहम आवश्यक्ता है, उसके लिए सुप्रसिद्ध गाली गुरु शरद यादव छात्रों को विशेष ट्रेनिंग देंगे…इस ट्रेनिंग को इस संस्थान की यूएसपी माना जा रहा है…

इसके अलावा माना जा रहा है कि अंकित मुटरेजा नीरा राडिया समेत तमाम लोगों को समय समय पर बुलाएंगे, जिससे सफल पत्रकार (अमीर पत्रकार) बनने की ट्रेनिंग पूरी हो… हाल ही में करतब कोस्वामी छात्रों को ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने की कला सिखा गए हैं…उम्मीद है वो आगे भी आते रहेंगे… फिलहाल संस्थान में बदलाव की तैयारी ज़ोरों पर है…हमारी शुभकामना है कि इस संस्थान से निकलने वाले छात्र देश और पत्रकारिता दोनों का कल्याण करेंगे…

युवा पत्रकार मयंक सक्‍सेना के एफबी वॉल से साभार.

प्रसार भारती ने 1600 पदों के मांगा आवेदन, आखिरी तारीख 19 अप्रैल

प्रसार भारती एक बार फिर भर्तियों के लिए विज्ञापन निकाला है. पिछले लंबे समय से प्रसार मंत्रालय संसद में प्रसार भारती में कर्मचारियों के कमी का रोना रोता रहा है. खबर है कि दूरदर्शन और आकाशवाणी के कार्यक्रमों कंटेंट और गुणवत्‍ता में सुधार लाने के लिए प्रसार भारती जल्‍द ही 1600 पदों के लिए रिक्तियां निकालने वाला है. पिछले डेढ़ दशक में प्रसार भारती द्वारा उठाया गया यह एक बहुत बड़ा कदम होगा.

प्रसार भारती के पद वित्‍त मंत्री पी चिदंबरम के अध्‍यक्षता वाले मंत्री समूह द्वारा 2011 में अनुमोदित किए गए 3452 आवश्‍यक पदों का हिस्‍सा है. इनमें से ज्‍यादातर पद बी और सी ग्रेड के हैं. इन सभी पदों के लिए चयन कर्मचारी चयन आयोग करेगा. जबकि कुछ पदों पर भर्तियां प्रसार भारती बोर्ड करेगा. कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रसार भारती में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव और ट्रांसमिशन एग्जीक्यूटिव पदों की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया है. योग्‍यता पूरी करने वाले उम्मीदवार इस पद के लिए ऑनलाइन आवेदन 19 अप्रैल 2013 तक कर सकते हैं. अभ्‍यर्थियों को सारी जानकारी एसएससी के वेबसाइट पर मिल सकती है.

इं‍टरनेट पर इतिहास का सबसे बड़ा हमला, खलबली

इंटरनेट के जानकारों के अनुसार इंटरनेट पर 'अब तक का सबसे बड़ा हमला' हुआ है और इस कारण दुनिया भर में इंटरनेट की रफ़्तार काफ़ी धीमी हो गई है. बताया जा रहा है कि स्पैम से लड़नेवाली एक संस्था का एक वेबसाइट चलानेवाली कंपनी के साथ मतभेद हो गया जिसकी प्रतिक्रिया में इंटरनेट की मूलभूत सुविधाओं पर हमले होने लगे. सरल शब्दों में कहा जाए तो जानकारों को चिंता है कि अगर इस हमले पर क़ाबू नहीं पाया गया तो बैंकिंग और ईमेल सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है.

अभी से इसका असर ‘नेटफ्लिक्स’ पर देखा जा रहा है. पांच देशों की साइबर पुलिस इन हमलों की तहक़ीक़ात में जुट गई है. हमलावरों ने जिस तकनीक का इस्तेमाल किया है उसे ‘डिस्ट्रिब्यूटिड डिनायल ऑफ सर्विस’ कहते हैं. इसमें ‘टार्गेट’ को बहुत तादाद में ट्रैफ़िक भेजा जाता है ताकि वो पहुंच के बाहर हो जाए. इस हमले में लंदन और जेनेवा में स्थित एक ग़ैर-सरकारी संगठन ‘स्पैमहौस’ के ‘डोमेन नेम सिस्टम सर्वर’ को निशाना बनाया गया.

ये सर्वर वो होते हैं जो डोमेन नामों, जैसे बीबीसी.को.यूके, को वेबसाइट के इंटरनेट प्रोटोकॉल ऐड्रेस से जोड़ता है. स्पैमहौस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीव लिनफोर्ड ने बीबीसी को बताया कि ये हमला अप्रत्याशित स्तर पर हुआ है. उन्होंने कहा कि, “इसका निशाना अगर ब्रितानी सरकार हो तो इसमें इतनी ताक़त है कि उनका सारा काम ठप्प हो जाए और वो इंटरनेट से बिल्कुल कट जाएं.”

लिनफर्ड ने कहा कि जब बैंकों पर ऐसे साइबर हमले होते हैं तो उनकी तीव्रता 50 गिगाबिट्स प्रति सेकेंड होती है लेकिन ये हमले 300 गिगाबिट्स प्रति सेकेंड पर हो रहे हैं. सर्रे विश्वविद्यालय में साइबर-सिक्यूरिटी के विशेषज्ञ, प्रोफेसर ऐलन वुडवर्ड के मुताबिक़ इस हमले का असर पूरी दुनिया में इंटरनेट की सेवाओं पर पड़ रहा है. प्रोफेसर वुडवर्ड ने बीबीसी को बताया, “अगर आप एक सड़क को सोचें, तो ये हमले उसपर इतना ट्रैफि़क डाल रहे हैं, कि ना सिर्फ़ सड़क जाम हो गई है, बल्कि उसके आसपास चलने की भी जगह नहीं बची है.” (बीबीसी)

सूर्यनेल्ली गैंगरेप : अदालत ने उपसभापति पीजी कुरियन को नोटिस जारी किया

इडुक्की : राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब केरल की एक अदालत ने बुधवार को सूर्यनेल्ली बलात्कार पीड़िता द्वारा दायर की गई आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया। तोडुपुझा सत्र अदालत के न्यायाधीश अब्राहम मैथ्यू ने याचिका स्वीकार कर ली और मामले में मुख्य आरोपी धर्मराजन और दो अन्य आरोपियों जमाल और उन्नीकृष्णन तथा राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

याचिका पर सुनवाई अब 29 मई को होगी। अदालत ने कहा कि तिरुअनंतपुरम की पूजापुरा जेल में बंद धर्मराजन को 29 मई को अदालत में पेश किया जाना चाहिए। पीड़िता ने यह याचिका दाखिल कर पीरमेदू न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा इससे पहले खारिज की गई अपनी शिकायत को चुनौती दी थी। पीड़िता ने अपनी याचिका में अनुरोध किया था कि इस मामले में कुरियन के ‘शामिल’ होने की और जांच कराई जाए।

पीड़िता के वकीलों ने अदालत के समक्ष धर्मराजन द्वारा एक टीवी चैनल पर किए गए ‘खुलासे’ का सबूत भी पेश किया। इसमें बताया गया कि 19 फरवरी, 1996 को वह कुरियन के साथ एक अतिथि गृह में गया था, जहां लड़की का कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया गया था। धर्मराजन के खुलासे के आधार पर पीड़िता ने पीरमेदू की अदालत में इस वर्ष 1 मार्च को कुरियन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। (एजेंसी)

संजय माफी की अपील करें न करें, मैं तो करूंगा : काटजू

नई दिल्ली। प्रेस कॉउंसिल के अध्यक्ष मारकंडेय काटजू ने कहा है कि वो संजय दत्त और जैब्बुनिसा की माफी के लिए महाराष्ट्र के गवर्नर से अपील करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि संजय दत्त ने माफी की अपील करने से इंकार कर दिया है तो काटजू ने कहा कि वो फिर भी उनकी सजा माफी की अपील गवर्नर से करेंगे। वो गवर्नर को पत्र लिखेंगे।

काटजू ने कहा कि संजय दत्त और जैब्बुनिसा को कई आधारों पर माफी मिलनी चाहिए। मानवीय आधार पर दोनों को माफी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वो राष्ट्रपति और गवर्नर को पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि संजय माफी की अपील नहीं करें न करें लेकिन मैं अपनी तरफ से अपील करूंगा। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। वो इसके हकदार हैं।

गौरतलब है कि संजय दत्त जब सरेंडर करेंगे तो उनको यरवडा जेल में रखा जा सकता है। जहां उन्होंने पहली बार 18 महीने काटे थे। पिछली बार संजय दत्त जब जेल गए थे तो उनकी हिम्मत नहीं टूटी थी। लेकिन इस बार वो जेल के नाम से पूरी तरह से टूटे हुए दिखे।

मालूम हो कि वकील और सामाजिक कार्यकर्ता आभा सिंह ने कहा है कि संजय ने सरेंडर करने का फैसला करके सही किया है। आभा सिंह संजय को माफी देने की विरोधी रही हैं। वहीं कांग्रेस के नेता राशिद अल्वी का कहना है कि वो कानून की प्रक्रिया में दखल नहीं देना चाहते। हालांकि अभी तक कांग्रेस नेता संजय दत्त को माफी के पक्ष में दिख रहे थे, लेकिन अब कुछ कहने से बच रहे हैं। (आईबीएन)

आजतक फिर नम्‍बर वन, लगातार पांचवें सप्‍ताह इंडिया न्‍यूज को फायदा

बारहवें हफ्ते की टीआरपी आई गई है. इस सप्‍ताह भी कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ है. आजतक इंडिया टीवी से पांच अंकों से ज्‍यादा बढ़त के साथ नम्‍बर वन पर कायम है. वहीं इंडिया टीवी को लगातार तीसरे सप्‍ताह भी अुंकों का नुकसान उठाना पड़ा है. इस चैनल से लोगों का मोहभंग होता दिख रहा है. वहीं एबीपी न्‍यूज अंकों के नुकसान के बावजूद इंडिया टीवी के पास पहुंचता दिख रहा है. चौथे नम्‍बर पर जी न्‍यूज है, पांचवें नम्‍बर पर न्‍यूज24, छठवें नम्‍बर पर आईबीएन7 तथा सातवें नम्‍बर पर एनडीटीवी है. पर इनमें न्‍यूज24 एवं एनडीटीवी को मामूली अंकों का फायदा हुआ है जबकि अन्‍य चैनलों को नुकसान पहुंचा है.

बारहवें सप्‍ताह में भी इंडिया न्‍यूज को अंकों का फायदा हुआ है. इंडिया न्‍यूज लगातार पांचवें सप्‍ताह अंकों के साथ आगे बढ़ने में सफल रहा है. अन्‍य चैनल जहां इन सप्‍ताहों में अप-डाउन से जूझते रहे वहीं इंडिया न्‍यूज लगातार अप मोड में रहा. यह चैनल अब 4.8 अंकों तक पहुंच गया है. दीपक चौरसिया और राणा यशवंत की जुगलबंदी इस चैनल पर साफ दिख रही है. माना जा रहा है‍ कि डिस्‍ट्रीब्‍यूशन के ठीक हो जाने के बाद ये चैनल और तेजी के साथ उपर चढ़ेगा. इंडिया न्‍यूज के बाद तेज और समय हैं. बारहवें सप्‍ताह का डाटा इस प्रकार है….

WK 12 2013

Tg CS 15+, HSM:

Aaj Tak – 21.3 dn .7

India TV – 16.0 dn .1

ABP News – 13.9 dn .5

Zee News – 11.0 dn .8

News 24 – 8.6 up .3

IBN7 – 7.2 dn .1

NDTV – 6.2 up .1

India News – 4.8 up .3

Tez- 4.5 up .8

Samay 2.9 up .5

DD- 2.4 up .3

Live India- 1.2 same

आई नेक्‍स्‍ट, गोरखपुर से जुड़े अश्‍वनी पांडेय एवं राजेश राय

आई नेक्‍स्‍ट, गोरखपुर से खबर है कि सिद्धार्थ के जाने के बाद खाली पड़े चीफ सब एडिटर के पद पर अश्‍वनी पांडेय ने ज्‍वाइन किया है. अश्‍वनी डीबी स्‍टार, भोपाल से इस्‍तीफा देकर आई नेक्‍स्‍ट से जुड़े हैं. अश्‍वनी लंबे समय से भास्‍कर के साथ जुड़े हुए थे. वे इसके अलावा भी कई संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उल्‍लेखनीय है कि विकास वर्मा के इस्‍तीफा देने के बाद सिद्धार्थ ही आई नेक्‍स्‍ट की जिम्‍मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन पिछले दिनों वह भी इस्‍तीफा देकर हिंदुस्‍तान चले गए थे, जिसके बाद यह पद खाली चल रहा था.

आई नेक्‍स्‍ट, गोरखपुर से ही दूसरी खबर है कि राजेश राय ने यहां फोटोग्राफर के पद पर ज्‍वाइन किया है. वे डीएलए नोएडा से इस्‍तीफा देकर आए हैं. वे इसके पहले भी कई संस्‍थानों को फोटो जर्नलिस्‍ट के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

आई नेक्‍स्‍ट से इस्‍तीफा देकर पत्रिका पहुंचे विनीत और अनुराग

आई नेक्‍स्‍ट की हालत लगातार खराब होती जा रही है. खबर इलाहाबाद से है. पिछले कुछ दिनों में आई नेक्‍स्‍ट में कार्यरत दो रिपोर्टर इस्‍तीफा देकर मध्‍य प्रदेश में पत्रिका के साथ जुड़ गए हैं. काफी समय से आई नेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे विनीत तिवारी पत्रिका के साथ उज्‍जैन में अपनी नई पारी शुरू की है. वे इसके पहले भी कुछ संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्‍हें पत्रिका में रिपोर्टर बनाया गया है.

विनीत से पहले अनुराग शुक्‍ला भी आई नेक्‍स्‍ट से इस्‍तीफा देकर सतना में पत्रिका ज्‍वाइन कर चुके हैं. वे भी आई नेक्‍स्‍ट को लंबे समय से अपनी सेवा दे रहे थे. उन्‍हें भी पत्रिका में रिपोर्टर बनाया गया है. 

पत्रकार ने महिला के हक में आवाज उठाई तो सुना दी गई फांसी की सजा

कराची : मुस्‍लि‍म देशों में महि‍लाओं की हालत बद से बदतर होती जा रही है। ट्यूनीशि‍या में अमीना ने टॉपलेस होकर  मुस्‍लि‍म कट्टरपंथि‍यों का वि‍रोध कि‍या तो उसे पागलखाने में डाल दि‍या गया। वहीं पाकि‍स्‍तान के सिंध प्रांत में एक महि‍ला ने अपने पति के अवैध संबंधों का वि‍रोध करते हुए परि‍वार में इज्‍जत की मांग की, तो उसकी भी गोली मारकर हत्‍या कर दी गई। इतना ही नहीं, उस महि‍ला के लि‍ए आवाज उठाने वाले पाकि‍स्‍तान के पत्रकार व जाने माने मानवाधि‍कार कार्यकर्ता सि‍कंदर अली भुट्टो को भी मौत की सजा सुना दी गई। सिंध प्रांत की एक पंचायत ने सिकंदर को भूखे कुत्‍तों के सामने फेंकने की सजा सुनाई है।

एक महि‍ला को उसके पति से बचाने की कोशि‍श करने वाले पाकि‍स्‍तानी पत्रकार व मानवाधि‍कार कार्यकर्ता सिकंदर अली भुट्टो को सिंध प्रांत की एक पंचायत ने मौत की सजा सुनाई है। पंचायत ने सजा में कहा है कि सिकंदर को भूखे कुत्‍तों के सामने उनका पेट भरने के लि‍ए फेंक दि‍या जाए। सिकंदर अली ने उस औरत का पक्ष लि‍या था, जि‍से उसके पति ने निर्ममता से पीटकर मार डाला था। 15 मार्च को सिंध प्रांत की पंचायत ने उन्‍हें यह सजा सुनाई है। ताजा मि‍ली जानकारी के मुताबि‍क सिकंदर अभी जिंदा हैं और उन्‍होंने कराची में अपने कि‍सी दोस्‍त के यहां शरण ली हुई है।

सिकंदर अली भुट्टो पाकि‍स्‍तान के दहरकी और घोतकी (सिंध प्रांत) के जाने माने पत्रकार और मानवाधि‍कार कार्यकर्ता  हैं। इसके अलावा वह दहरकी प्रेस क्‍लब के उपाध्‍यक्ष हैं जो पाकि‍स्‍तान प्रेस क्‍लब से संबद्ध है। वह वन टीवी नाम के एक चैनल के संवाददाता भी हैं।
 
इस मामले की शुरुआत पि‍छले वर्ष के 7 दि‍संबर को हुई। दहरकी के मौला अलकुतुब कस्‍बे में शहनाज भुट्टो नाम की एक महि‍ला को उसके पति‍ राना भुट्टो और उसके भाइयों ने पीट-पीटकर मार डाला था। वह महि‍ला अपने पति के अवैध संबंधों और घर में लगातार हो रही उसकी बेइज्‍जती का वि‍रोध कर रही थी। वहीं उक्‍त महि‍ला के पति‍ का आरोप है कि उसके सिकंदर अली भुट्टो से अवैध संबंध थे जि‍सकी वजह से सिकंदर अली उसकी मदद कर रहे थे।
 
शहनाज की हत्‍या करने के  लि‍ए मौला अलकुतुब में दस हथि‍यारबंद लोग गए थ। बताते हैं कि यह सभी पाकिस्‍तान की सत्‍ताधारी पाकि‍स्‍तान पीपुल्‍स पार्टी के सदस्‍य थे। इनका यह भी आरोप है कि सिकंदर अली शहनाज की मदद से उनकी प्रॉपर्टी भी कब्‍जाने की कोशि‍श कर रहे थे। इस हत्‍याकांड में अभी तक राना भुट्टो, राना की दूसरी मां का बेटा अब्‍दुल मजीद गि‍रफ्तार कि‍ए गए हैं।
 
शहनाज भुट्टो कई वर्षों से घरेलू हिंसा का शि‍कार हो रही थीं। इसकी शि‍कायत उन्‍होंने पाकि‍स्‍तान के प्रधानमंत्री, मुख्‍य न्‍यायाधीश, सिंध प्रांत पुलि‍स के आईजी, वहां के हाईकोर्ट सहि‍त दर्जनों जगहों पर की हुई थी। उन्‍होंने शि‍कायत में कहा था कि न सिर्फ उनका पति उन्‍हें पीटता था, बल्‍कि उसके देवर भी गाहे बगाहे उसकी पि‍टाई कि‍या करते थे। हालांकि वर्ष 2009 में वहां की पंचायत ने फैसला दि‍या था कि शहनाज का पति राना भुट्टो उसकी पि‍टाई नहीं करेगा। इसके बावजूद शहनाज की संपत्‍ति‍ पर कब्‍जा करने के लि‍ए उसने उसकी पि‍टाई चालू रखी।
 
पत्रकार व मानवाधि‍कार कार्यकर्ता सिकंदर अली भुट्टो ने यह मामला वहां की अदालत से लेकर सरकारी अधि‍कारि‍यों के सामने उठाया। इसके अलावा उन्‍होंने शहनाज की मुकदमा फाइल करने में भी मदद की। बाद में जब हत्‍यारों ने शहनाज की हत्‍या कर दी, तो उन्‍होंने हत्‍या को जायज ठहराने के लि‍ए शहनाज व सिकंदर में नाजायज संबंधों का आरोप लगाया। इसके बाद वहां के हाईकोर्ट ने सिकंदर को सुरक्षा दि‍ए जाने के आदेश दि‍ए। तब से सिकंदर छुपे हुए हैं और उनके परि‍वार को जान से मारने की धमकि‍यां मि‍ल रही हैं। सिकंदर का कहना है कि उनकी हत्‍या करने वाले लोग उनसे दो लाख रुपये के बदले उनकी जान बख्‍शने की डील कर रहे हैं।
 
पूरे मामले में लोकल पुलि‍स का रोल भी संदि‍ग्‍ध है। अदालती आदेश के बावजूद पुलि‍स ने सिकंदर को सुरक्षा नहीं मुहैया कराई है। इसके अलावा जि‍स पंचायत ने सिकंदर को भूखे कुत्‍तों के सामने फेंकने का हुक्‍म सुनाया, उसके खि‍लाफ भी कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है। (भास्‍कर)

जेसी राइडर पर हमला, हालत गंभीर, आईसीयू में भर्ती

नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के क्रिकेट खिलाड़ी जेसी राइडर पर हमला हुआ है। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। राइडर कोमा में हैं और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। चश्मदीदों के मुताबिक हमला क्राइस्टचर्च के एक बार में हुआ। करीब 4 हमलावरों ने उन पर हमला किया। बार के सामने जेसी को जमीन पर गिराकर उन्‍हें पैरों से जमकर चारों ने मारा।

अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक उनके सिर पर गंभीर चोटें हैं। राइडर हालांकि न्यूजीलैंड की टीम से पिछले कई महीनों से बाहर हैं। वो एक बेहतरीन बल्लेबाज हैं। उन्होंने न्यूजीलैंड को कई मैच अपने दम पर जिताए हैं। जैसी राइडर IPL में दिल्ली डेयरडेविल्स से खेलते हैं। दिल्ली की टीम ने इसी साल उन्हें करीब एक करोड़ 60 लाख रुपए में खरीदा था। राइडर आईपीएल की तैयारी के लिए शुक्रवार को भारत आने वाले थे। जेसी राइडर के साथ हुई घटना से लोग हतप्रभ हैं। 

दैनिक भास्‍कर ने चुराई बीबीसी की खबर

दैनिक भास्‍कर से बड़े पत्रकारों के जाने का असर साफ दिखने लगा है. दैनिक भास्‍कर डॉट कॉम पर अब चुराकर खबरें प्रकाशित की जा रही हैं. बेशर्मी की हद यह की चोरी की खबर को हूबहू प्रकाशित किया जा रहा है. यहां काम करने वाले एक शब्‍द भी बदलने की जरूरत नहीं समझ रहे हैं. 26 मार्च को बीबीसी ने एक बजकर आठ मिनट पर ''कहां से आती है मिस इंडिया की पलटन'' शीर्षक से एक खबर पोस्‍ट की. इसमें लारा दत्‍ता, सुष्मिता सेन, गुल पनाग, सेलिना जेटली, नेहा धूपिया के बारे में बताया गया है कि वे सैनिक परिवार वाले बैकग्राउंड से आती हैं.

इसी खबर को दैनिक भास्‍कर डॉट काम ने हूबहू हेडिंग, फोटो और कैप्‍शन के साथ 26 मार्च को ही तीन बजकर बीस मिनट पर पब्लिश किया. पहली फोटो छोड़कर सारी फोटो बीबीसी से चोरी करके पब्लिश कर दी गई. यानी पूरी सीनाजोरी के साथ भास्‍कर ने चोरी की है. आप भी देखें खबर.. और दोनों समाचारों का लिंक..

http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130326_picgallery_missindia_armybackgroundfamily_ks.shtml (बीबीसी)

http://gallery.bhaskar.com/album/GAL-album-15106-miss-india-2013.html?seq=1 (भास्‍कर)

बीबीसी
दैनिक भास्‍कर

जी न्‍यूज (पांच) : ”किसी मीडिया मठाधीश को रत्‍ती भर फर्क नहीं पड़ेगा कितने अमरीश मर रहे हैं”

मीडिया में काम कर रहे खुशनसीब/बदनसीब दोस्तों, जो कदम मजबूरी, हताशा या किसी भी कारणवश जी न्‍यूज के कैमरामैन अमरीश ने उठाया, उस तरह का कदम उठाने के बारे में कभी सोचना भी मत, चाहे हालात कितने भी बदतर ही क्यों ना हो जाए. किसी मीडिया मठाधीश या विभिन्न मीडिया कल्याण संस्थाओं के पदाधिकारियों को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ेगा कि कितने अमरीश मर रहे हैं, जी रहे हैं. उनके परिवार किस हालत में हैं? फर्क पड़ेगा तो हमारे परिवारों को जिन्हें हमारी नौकरी से कहीं ज्यादा हमारी, हमारी सांसों की जरूरत है.

बड़े-बड़े संपादकों या मालिकों के हाथों के इन प्यादों को कोसने, ऐसे हालात पैदा ना होने देने के अभियान चलाने के साथ-साथ जरूरत है. व्यक्तिगत स्तर पर मानसिक तौर पर मजबूत होने की ताकि हमारे हताशा भरे कदम या हमारी मजबूरियां अथवा अपना हक पाने के लिए दबाव बनाने के लिए उठाए गए कोई भी कदम उठाएं, लेकिन आत्महत्या कतई नहीं. क्योंकि जब हम ही नहीं होंगे तो आवाज उठाने के लिए, लडऩे के लिए अमरीशों की कमी पड़ जाएगी.

हमें किसी प्रदर्शन में आने के लिए आधे दिन की छुट्टी मिले न मिले, घर-परिवार के बीच रविवार को समय निकले, न निकले. ये आग मत बुझने देना, शब्दों के सहारे, सॉशल मीडिया के सहारे लगातार फैलती रहनी चाहिए. भड़ास, मयंक सक्सेना जैसे सचेत मंचों के माध्यम के साथ लगकर किसी न किसी रूप में अपना योगदान जारी रखें. जिसके पास यथा शक्ति, साधन हो संघर्ष करें-अदालत में पी.आई.एल.करें, प्रेस परिषद में मजबूती से पक्ष रखें, नहीं तो लिख कर लगातार प्रयास जारी रखें.

धीरज टागरा

दिल्‍ली 

सहारा एनसीआर के चैनल हेड राजेश कौशिक का निधन

सहारा समूह से बहुत बुरी खबर है. सहारा के एनसीआर चैनल के हेड राजेश कौशिश का निधन हो गया है. वे 20 मार्च की रात एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. वे दिल्‍ली में आयोजित सहारा श्री सुब्रत रॉय के पार्टी से वापस लौट रहे थे कि उनकी कार को एक डंपर और उसके बाद एक ट्रेलर ने धक्‍का मार दिया था, जिसके बाद उनकी कार डिवाइडर से टकरा गई थी. इस हादसे में राजेश गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उनकी सीने की हड्डियां टूट गई थीं तथा फेफड़ा और लीवर भी डैमेज हो गया था.

उन्‍हें इलाज के लिए गाजियाबाद के यशोदा हास्‍पीटल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका ऑपरेशन भी किया गया, परन्‍तु उनकी हालत कोमा सी बनी रही. आखिरकार अथक प्रयास के बाद भी डाक्‍टर राजेश कौशिक को बचा नहीं सके. बुधवार की देर रात उनका निधन हो गया. इस खबर के बाद से सहारा मीडिया समेत तमाम पत्रकार दुखी और स्‍तब्‍ध हैं. उनका अंतिम संस्‍कार गुरुवार को होगा.

इस बारे में पत्रकार सरफराज सैफी ने अपने फेसबुक वॉल पर टिप्‍पणी पोस्‍ट की है….

"Shara tv NCR & UP k head our mere karibi dost Rajesh Kaushik ki death ho gai hai, accident k baad sai wo hospital mai addmit they…. abhi ek dost ka shara tv sai phone aaya uss nai bataya sunkar dukh hua… I am cmg delhi"

मुश्किल बढ़ी : हाई कोर्ट ने सहारा को निवेशकों से पैसे लेने से रोका

शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सहारा समूह की कंपनियों को निवेशकों से पैसे जमा कराने पर प्रतिबंध लगाते हुए प्रवर्तन निदेशालय को कंपनी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश आरबी मिश्र और न्यायमूर्ति वीके शर्मा की खंडपीठ ने अर्जियों पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय और उनकी कंपनियों के विरुद्ध मामला बनता है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तारीख तय की है।

खंडपीठ ने कहा कि न्याय के हित को ध्यान में रखते हुए अंतरिम उपाय के रूप में सहारा पर भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से अनुमति लिए बगैर किसी बैंक खाते से लेनदेन करने पर रोक लागाई जाती है। खंडपीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को सहारा के खिलाफ आर्थिक गड़बड़ी करने संबंधी आरोपों पर जवाब/स्थिति बताने का निर्देश दिया। सहारा समूह को अपनी किसी भी योजना के नाम पर आम लोगों, खास तौर से राज्य के लोगों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पैसे जमा कराने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

खंडपीठ ने आगे कहा कि यह जानकारी मिली है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सहारा समूह की दो कंपनियों, सहारा इंडिया रीयल इस्टेट कार्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड को सेबी के माध्यम से निवेशकों को 24000 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश दिया है। बाजार नियामक सेबी ने 15 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दे कर राय और उनके समूह के दो अन्य निदेशकों की गिरफ्तारी और दंड की मांग की। सेबी ने कहा है कि उसके माध्यम से निवेशकों को 24000 करोड़ रुपये लौटाने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को सहारा पूरा नहीं कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई होली के बाद होगी। (आईबीएन)

दैनिक भास्‍कर के कार्यालय में जमकर मनी होली

दैनिक भास्‍कर के नोएडा कार्यालय में पत्रकारों ने धूमधाम से होली मनाई. एक दूसरे को गुलाल मलने के साथ जमकर हंसी ठिठोली भी हुई. इस दौरान पत्रकारों ने रस्‍साकस्‍सी जैसे खेल का भी आनंद उठाया. समूचा कार्यालय होलीमय नजर आया. पत्रकार एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली की बधाई दी. होली मनाने में जूनियर सीनियर की दीवारें टूटी नजर आईं. सभी ने रंगोत्‍सव का जमकर आनंद उठाया. खाने-पीने का दौर भी चला.

काम के साथ ही होली मनाए जाने के चलते पत्रकारों ने कुछ समय के लिए ही सारा तनाव कहीं दूर छोड़ दिया. खुशी सभी के चेहरों पर साफ देखी और पढ़ी जा रही थी. नीचे होली की दास्‍तान कहतीं कुछ तस्‍वीरें….

 

अगर अन्‍य अखबारों या चैनलों के कार्यालय में पत्रकारों ने होली मनाया तो वे अपना फोटो भड़ास के पास bhadas4media@gmail के माध्‍यम से भेज सकते हैं. उन्‍हें भी प्रकाशित किया जाएगा. 

वरिष्‍ठ पत्रकार नजम सेठी बने पंजाब प्रांत के कार्यवाहक सीएम

लाहौर : वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का कार्यवाहक मुख्यमंत्री चुना गया। सेठी को पाकिस्तान के सबसे अधिक आबादी वाले और राजनीतिक दृष्टि अति महत्वपूर्ण प्रांत का मुख्यमंत्री चुना गया है जहां 11 मई को चुनाव होने हैं। पंजाब में मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और उसके सहयोगियों ने सेठी को इस पर के लिए मनोनित किया।

पंजाब में हाल तक शासन करने वाली पीएमएल.एन ने आज रात कहा कि उसे सेठी की उम्मीदवार पर कोई एतराज नहीं है। पीएमएल-एन के वरिष्ठ नेता राणा सनाउल्ला ने संवाददाताओं के समक्ष पार्टी के निर्णय की घोषणा की। हालांकि, इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ विपक्ष की पसंद से सहमत नहीं थे। इसके बाद इस मामले को समिति के समक्ष भेजा बया और तीन दिनों तक चर्चा के बाद आमसहमति बनी। (एजेंसी)

सुप्रिय प्रसाद बने टीवी टुडे के सभी हिंदी चैनलों के हेड

टीवी टुडे समूह से खबर है कि आजतक के चैनल हेड सुप्रिय प्रसाद को प्रमोट करके समूह के सभी हिंदी चैनलों का हेड बना दिया गया है. नकवी जी के जाने के बाद सुप्रिय को आजतक का हेड बनाया गया था. अब वे तेज और दिल्‍ली आजतक की जिम्‍मेदारी भी संभालेंगे. टीआरपी के मास्‍टर माने जाने वाले सुप्रिय को उनके काम का इनाम मिला है. शैलेश के समय में इंडिया टीवी से अक्‍सर पिछड़ जाने वाला आजतक सुप्रिय के आने के बाद लगातार इंडिया टीवी को पटखनी दिए हुए है.

अब तक टीवी टुडे चारों चैनल के हेड अलग अलग बनाए गए थे, परन्‍तु अब नई व्‍यवस्‍था के तहत दिल्‍ली आजतक के हेड अमिताभ तथा तेज की हेड पूनम शर्मा सुप्रिय को रिपोर्ट करेंगी. जबकि हेडलाइंस टुडे के हेड राहुल कंवल की जिम्‍मेदारी पहले की तरह ही रहेगी. आजतक के शुरुआती एससी सिंह की टीम में शामिल रहे सुप्रिय प्रसाद को सुलझा हुआ पत्रकार माना जाता है. आजतक से इस्तीफा देने के बाद सुप्रिय न्‍यूज24 चले गए थे. फिर लगातार पिछड़ रहे आजतक प्रबंधन ने सुप्रिय की वापसी आजतक में आउटपुट हेड के रूप में कराई थी.

भास्‍कर छोड़कर दैनिक सवेरा से जुड़ेंगे नव्‍येश नवराही!

दैनिक भास्‍कर में चर्चा है कि पंजाब के मैगजीन हेड नव्‍येश नवराही भी यहां से इस्‍तीफा दे सकते हैं। वे बतौर मैगजीन संपादक दैनिक सवेरा जॉइन कर सकते हैं। लेकिन इस बात की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। उल्‍लेखनीय है कि नव्‍येश नवराही शीतल विज के करीबी रहे हैं और इससे पहले वह शीतल विज के साथ उनके अखबार दिव्‍य टाइमस में काम कर चुके हैं। दैनिक सवेरा शुरू होने पर भी सबसे पहले उन्‍हें ही मैगजीन संपादक बनाना तय किया गया था, लेकिन तब उन्‍होंने मना कर दिया था। पर दैनिक भास्‍कर के अंदर चल रही चर्चाओं में नव्‍येश के दैनिक सवेरा जाने की बात की जा रही है।

दैनिक भास्‍कर प्रबंधन से परेशान क्‍यों हैं पत्रकार?

दैनिक भास्‍कर से प्रतिभाओं के पलायन का सिलसिला लगातार जारी है। पंजाब के स्‍टेट एडिटर रहे कमलेश सिंह के बाद एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर (पंजाब) अभिजित मिश्रा ने भी प्रबंधन को इस्‍तीफे की पेशकर कर दी है। याद रहे इससे पहले इक्‍नोमिक्‍स टाइम्‍स से दैनिक भास्‍कर में बतौर एडिटर मैगजीन आए रोहित सरण भी कुछ ही देर दैनिक भास्‍कर में रह पाए। वह दैनिक भास्‍कर की अंदरूनी  राजनीति से इतनी जल्‍दी तंग आ गए कि भास्‍कर को छोड़ना ही अच्‍छा समझा।

उनके बारे में चर्चा यह थी कि प्रबंधन ने उन्‍हें मैगजींस की जिम्‍मेदारी सौंपी थी, लेकिन कुछ ही देर बाद भास्‍कर ग्रुप के चेयरमैन का ईलाज कर रहे डॉक्‍टर भरत अग्रवाल को उनके ऊपर यह कहकर बिठा दिया गया कि मैगजीन वह देखेंगे। प्रबंधन की ऐसी ओछी नीतियां संवेदनशील पत्रकारों को रास नहीं आती और वह यहां से किनारा करना ही अच्‍छा समझते हैं। दैनिक भास्‍कर के बारे में पहले से ही यह कहा जाता रहा है कि वहां अच्‍छे पत्रकार के लिए काम का माहौल नहीं है। जो चापलूसी कर लेता है, वह आगे ही आगे जाता रहता है और जो सिर्फ अपने काम  पर भरोसा करता है, उसे संस्‍थान पूछता भी नहीं है।

कई बड़े नाम भास्‍कर के इस रवैये से तंग आकर लगातार भास्‍कर छोड़ते रहे हैं। जो नहीं जा पाते वह अपने जीवन के कीमती साल कंपनी को देने के बाद भी किसी कोने में पड़े रहते हैं। हद तो तब होती है, जब प्रबंधन को ग्रुप में काम कर रहे तजुर्बेकार लोग दिखाई नहीं देते और वह बाहर से मोटी तनखाहों पर कम तजुर्बेकार लोगों को लाकर अच्‍छे लोगों के ऊपर बिठा देता है। फिर वह वहीं से सबकुछ सीखकर वहां पहले से काम कर रहे लोगों को काम के बारे में समझाने लगता है। ऐसी हास्‍यास्‍पद स्थिति शायद ही किसी और मीडिया हाउस में हो।

गौर हो कि दैनिक भास्‍कर लुधियाना में हाल ही में नए संपादक शमशेर चंदेल ने बतौर संपादक जॉइन किया है। बताया जा रहा है कि उनका पत्रकारिता के क्षेत्र में केवल 16 साल का तजुर्बा है, वो भी अंग्रेजी मीडिया में। जबकि कंपनी में उनके ज्‍यादा तजुर्बा रखने वाले कई लोग अपनी अनदेखी के कारण दुखी हैं। सूत्रों के अनुसार उन्‍हें अच्‍छी तरह हिन्‍दी भी नहीं आती। याद रहे, इससे पहले यशवंत व्‍यास, फिर रोहित सरण, राजीव सिंह, हरिश्‍चंद्र सिंह, कमलेश सिंह, सुधीर मिश्रा, अभिजीत मिश्रा जैसे बड़े दिग्‍गज पत्रकार भी प्रबंधन की ऐसी नीतियों के कारण ही भास्‍कर छोड़ चुके हैं। चर्चा है कि दैनिक भास्‍कर में काम कर रहे और कई संवेदनशील और अच्‍छे पत्रकार प्रबंधन की ऐसी नीतियों को देखकर इस्‍तीफा देने की तैयारी में हैं। उन्‍हें यह चिंता सताने लगी है कि अगर प्रबंधन इतने बड़े पद पर बैठे लोगों के बारे में इतना असंवेदनशील है, तो उनके बारे में भला क्‍या सोचेगा।

हॉकरों के बहिष्‍कार से बौखलाया Daily Excelsior प्रबंधन

जम्मू, यहाँ के प्रमुख अंग्रेजी अख़बार Daily Excelsior का कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर जम्मू के हाकरों द्वारा इसके बहिष्कार का पम्पलेट शहर में बंटने से Daily Excelsior का प्रबंधतंत्र बौखला गया है. Daily Excelsior ने अपने एजेंट की तरफ से तीन हाकरों के खिलाफ मारपीट व पैसे छीनने की फर्जी तहरीर पुलिस थाना में करा दी थी. इसकी जानकारी जब वेंडर्स एसोसिएशन को हुई तो उन लोगों ने स्वयं पुलिस अधिकारियों के समक्ष पेश होकर उन्हें वास्तविकता से अवगत कराया.

पुलिस अधिकारियों ने बड़ी ही सूझ-बूझ का परिचय देते हुए दोनों पक्षों को उनकी गलतियों का अहसास करते हुए राजीनामा करा दिया. जम्मू प्रोविंस न्यूजपेपर वेंडर एशोसिएशन के अध्यक्ष आनंद शर्मा (काका) का कहना है कि Daily Excelsior का प्रबंधतंत्र न्याय करने के बजाय पुलिस प्रशासन का खौफ दिखा कर हम लोगों क़ी आवाज दबाना चाहता है, परन्तु हाकरों की एकता व पुलिस अधिकारियों की दूरदर्शिता से ऐसा संभव नहीं हो पाया. जम्मू शहर के Daily Excelsior के  पाठकों व विज्ञापनदाताओं को जारी एक अपील में जम्मू प्रोविंस न्यूजपेपर वेंडर एशोसिएशन ने Daily Excelsior  के बहिष्कार का समर्थन करने का आग्रह किया है.

भास्‍कर ने लिखा होलिका का इतिहास – ‘आग ठंडी पड़ गई और होलिका बच गई’

भास्कर, बठिंडा ने इस साल होली पर होलिका का इतिहास ही बदल डाला. बठिंडा में बैठे अधकचरे ज्ञान वालों ने जो नया इतिहास पंजाब के लोगों को बताया है उसके मुताबिक़ पुजारी पंडित रवि कुमार ने बताया कि हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की परीक्षा लेने के लिए उसे आग में बैठा दिया था, मगर आग ठंडी पड़ गयी और होलिका बच गयी थी. इसीलिए इस दिन लोगों द्वारा होली कुंड को सांयकाल अग्नि को समर्पित कर दिया जाता है.

यह नया इतिहास बठिंडा से छपने वाले मोगा फरीदकोट भास्कर के प्रथम पेज पर छापा गया है. कई लोगों ने इसे चेक किया होगा पर किसी की भी नज़र इतिहास से हो रहे इतने बड़े मज़ाक पर क्यों नहीं पड़ी यह मोगा समेत बठिंडा में चर्चा का विषय बना हुआ है. वैसे इतिहास के मुताबिक़ हिरणकश्‍यप की बहन होलिका, जिसे आग से नहीं जलने का आशीर्वाद था, अपने भतीजे प्रहलाद को लेकर अग्निकुंड में बैठी थी.  परन्‍तु आग में होलिका जल गयी थी, जबकि  प्रहलाद बच गए थे. इसलिए बुराई को प्रतीक स्वरुप जलाने के लिए होलिका जलाई जाती है. मगर धन्‍य हैं भास्‍कर वाले. आम लोगों की जानकारियां भी खराब हो रही है.

पत्रकार को फर्जी फंसाए जाने के विरोध में मीडियाकर्मी सड़क पर उतरे

फतेहगढ़ साहिब में पुलिस की ओर से एक पत्रकार पर झूठा मामला दर्ज करने के खिलाफ मंगलवार को रोष प्रदर्शन किया गया। पत्रकारों ने पुलिस पर बदसलूकी करने का आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतर नारेबाजी की। नाराज पत्रकारों ने एक रोष रैली निकाली। इस दौरान पुलिस प्रशासन का पुतला फूंका और एसपीडी गुरप्रीत सिंह को बदले जाने की मांग की। पत्रकारों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उन्हें न्‍याय नहीं मिलता तब तक पुलिस का विरोध जारी रहेगा।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पत्रकारों ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए तथा कहा कि आज पत्रकार भी फतेहगढ़ साहिब जिले में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। पुलिया रवैये की ताजा मिसाल देते हुए बताया कि मंडी गोबिंदगढ़ पुलिस ने पक्षपात का रवैया अपनाते हुए एक पत्रकार पर झूठा मामला दर्ज कर उसे फंसाने की साजिश रची है। सरहिंद के पत्रकार मनप्रीत सिंह के स्वर्गीय भाई जुगनू के कत्ल के अढ़ाई वर्ष बाद भी पुलिस कातिलों को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। वहीं कवरेज के लिए गए पत्रकार भिंदर मान के साथ सहायक थानेदार की ओर से की गई बदसलूकी पर भी पत्रकार भाईचारा के सदस्‍यों ने रोष जाहिर किया।

पत्रकारों के पद्रर्शन में शामिल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य करनैल सिंह पंजोली ने कहा कि लोगों की मुश्किलों को सरकार तक पहुंचाने तथा इंसाफ दिलाने में पत्रकार की भूमिका अहम होती है। अगर पत्रकार को भी रोष प्रदर्शन करना पड़े तो वह सरकार तथा प्रशासन के लिए निदंनीय है। उन्होंने पत्रकारों की मांग तथा पुलिस विभाग की ओर से पेश आ रही परेशानियों को सरकार के ध्यान में लाकर उसे हल करवाने का विश्वास दिलाया।

इस मौके एक मांग पत्र भी पंजाब सरकार तथा प्रशासनिक अधिकारियों के नाम तहसीलदार सुभाष भारद्वाज को सौंपा। इस अवसर पर रामशरण सूद, गुरबचन सिंह रुपाल, रणजोध सिंह ओजला, रणवीर कुमार जज्जी, भूषण सूद, हरप्रीत सिंह प्रिंस, एचएस गौतम, राजेश भाटिया, इकबाल दीप संधू, राजीव सूद, अरुण शर्मा, संजीव मुकार, रविन्द्र मोदगिल, बलविन्द्र मावी, राजकमल शर्मा के अलावा जिले के तमाम पत्रकार मौजूद रहे।

सार्क देशों की भाषाई पत्रकारिता महोत्‍सव का आयो‍जन 28, 29 एवं 30 मार्च को

: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी करेंगे महोत्सव का उद्घाटन : इंदौर। इंदौर प्रेस क्लब द्वारा २८, २९ एवं ३० मार्च को सार्क देशों का भाषाई पत्रकारिता महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। २९ मार्च २०१३ को प्रात: ११ बजे महोत्सव का उद्घाटन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी करेंगे। ३० मार्च २०१३ को सायं ०४ बजे समापन सत्र एवं मीडिया अवार्ड समारोह के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान होंगे।

इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल एवं महासचिव अरविंद तिवारी ने बताया कि महोत्सव में देश-विदेश से आने वाले अतिथि वक्ता विभिन्न सत्रों में ‘जन आंदोलनों में मीडिया की भूमिका’, ‘युवा, सोशल मीडिया और देश निर्माण’, ‘असहमति में क्यों हैं आक्रामकता’, ‘खबरों पर सवार बाजारवाद’, ‘देश की प्रगति में बाधक बारम्बार चुनाव’ आदि विषयों पर न केवल विचार-विमर्श करेंगे अपितु महत्वपूर्ण निर्णय लेकर भविष्य के लिए मीडिया की दिशा, दृष्टिकोण और भूमिका भी तय करने का प्रयास करेंगे।

मीडिया अवार्ड : समापन सत्र के अंतर्गत मीडिया अवार्ड समारोह में मध्यप्रदेश के १५ पत्रकारों को मीडिया अवार्ड एवं पांच वरिष्ठ पत्रकारों को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर सर्वश्री अनिल शर्मा, राजेश बादल, निर्मल पाठक, अनिल जैन, अशोक वानखेड़े, शकील अख्तर, आलोक श्रीवास्तव, किरण मोघे, विकास भदौरिया, आकाश सोनी, प्रखर श्रीवास्तव, भुवनेश सेंगर, प्रणय उपाध्याय, निमिष कुमार दुबे एवं संजय शर्मा को मीडिया अवार्ड प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार सर्वश्री बनवारी बजाज, उमेश त्रिवेदी, कमल दीक्षित, कीर्ति राणा एवं मांगीलाल चौहान को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।

पुस्तक मेला : कार्यक्रम स्थल ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर पर पुस्तक मेले का आयोजन भी किया जा रहा है। पुस्तक मेले में युवा संवाद, भारत ज्ञान विज्ञान समिति, समयांतर, दानिश बुक्स, नई दिल्ली, एकलव्य भोपाल एवं रूपांकन इंदौर के प्रकाशन उपलब्ध रहेंगे। इस अवसर पर संस्था रूपांकन द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी : उम्मीदों की पक्षधरता विषय पर पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

न्‍यूज एक्‍सप्रेस से आउटपुट हेड विभाष अवस्‍थी का इस्‍तीफा

न्‍यूज एक्‍सप्रेस चैनल से खबर है कि विभाष अवस्थी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर आउटपुट हेड की भूमिका निभा रहे थे. विभाष के इस्‍तीफा देने के कारणों के पुष्‍ट कारणों का पता नहीं चल पाया है, परन्‍तु माना जा रहा है कि प्रबंधन उनके काम से खुश नहीं था, इसलिए उनसे इस्‍तीफा मांग लिया गया. विभाष अपनी नई पारी कहां से शुरू करेंगे इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. विभाष इसके पहले कई संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

भदोही में कोतवाल की गुंडई, पत्रकार को चौराहे पर सरेआम पीटा

प्रदेश के संत रविदास नगर भदोही जनपद में मंगलवार की शाम एक पत्रकार के लिए अमंगल हो गयी। कोतवाली भदोही के दबंग कोतवाल संजय नाथ तिवारी ने दैनिक जागरण के जिला विज्ञापन प्रभारी होरी लाल यादव की बेरहमी से पिटाई कर दी।

होली के एक दिन पूर्व पुलिस के कहर का शिकार बने श्री यादव ने बताया कि उप जिलाधिकारी के पास विज्ञापन का पैसा लेने के लिए फ़ोन किया। लिहाजा एसडीएम ने उन्हें अजीमुल्ला चौराहे बुलाया। वहां पर रखी कुर्सी पर बैठ कर होरीलाल यादव बात कर रहे थे, तभी भदोही कोतवाल वह पहुँच गए। पत्रकार का कुर्सी पर बैठ कर बात करना उन्हें रास नहीं आया और गाली देते हुए उस पर टूट पड़े।

पत्रकार को सड़क पर गिराकर कोतवाल ने बुरी तरह मारा-पीटा। घटना के बाद जिले के पत्रकारों ने इस मामले में एसपी से बात की। जनपद के विभिन्न पत्रकार संगठनों ने आपसी बातचीत के बाद तय किया कि बुधवार को होली होने के कारण हम शांत है किन्तु गुरुवार को जनपद के सारे पत्रकार ज्ञानपुर के हरिहर नाथ मंदिर पर इकठ्ठा होंगे। जहां से आगे की रणनीति बनायी जाएगी। इस मनबढ़ कोतवाल के बारे में कई बार पत्रकारों ने अपमान करने की शिकायत संगठन से की है, किन्तु यह अति संवेदनशील मामला है। बता दें कि भदोही जनपद के पत्रकार इन दिनों राजनीति से अधिक अधिकारियों के शोषन के शिकार हो रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के काफी दिनों से चल रहे विवाद के चलते सपा सरकार की छवि मीडिया कर्मियों में काफी गिर चुकी है।

सेबी ने सुब्रत रॉय से 8 अप्रैल तक सम्‍पत्ति का कच्‍चा-चिट्ठा मांगा

मुंबई : तमाम अखबारों में फोटो छपवाकर दबाव बनाने की सहाराश्री की रणनीति काम नहीं आ रही है। सहारा समूह पर शिकंजा कसते हुए बाजार नियामक सेबी ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय और अन्य तीन शीर्ष कार्यकारियों को 8 अप्रैल तक अपनी परिसंपत्तियों, बैंक खातों और कर रिटर्न का ब्यौरा जमा कराने और 10 अप्रैल को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने को कहा। यह ब्यौरा सहारा समूह की दो कंपनियों और उनके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कुर्की के आदेश पर आगे की कार्रवाई के संबंध में मांगा है ताकि इनकी संपत्तियों को बेचकर इन कंपनियों के बांडों में निवेश करने वाले निवेशकों का पैसा लौटाया जा सके।

सेबी ने जारी अपने आदेश में कहा कि अगर सुब्रत राय, अशोक रायचौधरी, रवि शंकर दूबे और वंदना भार्गव उसके सामने हाजिर न हुए तो वह उन्हें सुने बिना ही एक तरफा बिक्री की कार्रवाई की शर्तें निर्धारित कर देगा। सेबी ने सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कारपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कारपोरेशन की संपत्तियों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय सूचना की जानकारी तलब की है।

13 फरवरी को सेबी ने समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के अलावा चार लोगों सुब्रत रॉय सहारा, वंदना भार्गव, रवि शंकर दुबे और अशोक राय चौधरी की संपत्ति जब्त करने का आदेश जारी किया था। मंगलवार को जारी आदेश में सेबी ने इन लोगों को अपनी संपत्ति व बैंक खाते के मूल कागजात पेश करने को कहा है, साथ ही उन्हें साल 2007-08 से फाइल आयकर रिटर्न और संपत्ति कर रिटर्न भी देने को कहा गया है।

सर, चालू टीवी पर प्रोग्राम में कई हिस्से होंगे, जैसे – किलिंग किस, कातिल सिसकी, बचना ए हसीनों आदि

होली पर चालू टीवी चैनल ने सोचा कि कुछ खास, एकदम खास प्रोग्राम होना मंगता। स्पेशल डिस्कशन के लिए प्राइम टाइम के उस भूत को बुलाया गया, जिसकी बाइट्स चैनल के प्राइम टाइम पर चलती थीं। एक देवता भी बुलाया गया। देवता मतलब वह इंसान ही था, पर खुद को देवता मानता था। उसके एक दामाद की समोसों की दुकान थी और दूसरे का कारोबार टमाटर के सॉस का था।

वह देवता हर बीमारी का इलाज ये ही बताता था कि इन वाले समोसों को उस वाले टमाटर सॉस के साथ खाया जाये, तो हर प्राबलम साल्व। किरपा बरसेगी। नहीं बरसी, तो हमारी गलती ना है। किरपा की गलती है। फिर खाओ समोसा और सॉस, किरपा अब बरसेगी। फिर भी ना किरपा ना बरसे, तो हम पे ना बरसो, कहीं और जाकर अपनी समस्या रखो।

तो शो में प्राइम टाइम का भूत था, देवता थे और एक भूतपूर्व डाकू था, जो अब टीवी शो का लेखक बनने की इच्छा रखता था। खैर जी शो में एक इंसान को भी रख लिया। मसला-ए-डिबेट ये रहा कि टीवी चैनल किसकी वजह से चल रहे हैं। टीवी चैनलों की सफलता में किसका रोल बहुत खास है। इंसान ने कहा, 'हमारी स्टोरियों से टीवी चैनल चल रहे हैं- सस्ती कार की स्टोरी, बेकार की स्टोरी, महंगाई की स्टोरी, मजदूरों की पिटाई की स्टोरी, नेताओं की बदमाशी की हाइट की स्टोरी, महंगे पेट्रोल पर आम आदमी की बाइट की स्टोरी, करीब एक करोड़ लोग देखते हैं हमें। आम इंसान के बूते ही चल रहे हैं ये चैनल।'

देवता ने कहा, 'शटअप, पूजा चैनल, तुझ बिना ना दूजा चैनल, देव चैनल, त्रिदेव चैनल, योग चैनल, प्रयोग चैनल, प्रवचन चैनल सिर्फ हमारे बूते चल रहे हैं। किरपा बरसा दें हम, जिसे चाहें उसे तरसा दें हम। हमारे चैनल पर तरह-तरह की मां हैं, तरह, तरह के बाप हैं, हुजूर इन्हे देखने वाले आप हैं। देवता-बाबा लोग ही चैनल चला रहे हैं। हमें देखने वाले ज्यादा हैं, पाँच करोड़।' भूत बोला, 'चोप्प, खून चैनल, मून चैनल, कटारी चैनल, मारामारी चैनल, कब्रिस्तान चैनल; सिर्फ हमारे बूते चल रहे हैं। और इन्हें देखने वाले हैं पचास करोड़। खतरनाक चुड़ैल की बगावत, अमेरिकन भूतनी का बंगलादेशी भूत से लव अफेयर उसमें इंडियन भूत का लव ट्रेंगल, इन स्टोरियों को देखने वाले करोड़ों में है।'

टीवी के दर्शकों के आंकड़े देखे गये। देवता, और इंसान चुप हो गये। इंसान को समझ आ गया कि उसका रोल तो सिर्फ देखने का है, देखते ही रहने का है। डिस्कशन से अचानक भूतपूर्व डाकू और अभूतपूर्व लेखक गायब मिला, वह उस चैनल के चीफ से बातचीत करता हुआ पाया गया। चैनल चीफ और उसके बीच का संवाद इस प्रकार है-

चैनल चीफ ने कहा, 'न्यूज चैनलों के टॉप टेन कार्यक्रमों में से आठ क्राइम के हैं, सो ऐसा क्राइम शो लिखना मांगता, जिसमें क्राइम हो, सेक्स हो, हॉरर हो, टेरर हो, जिसमें बिच्छू बवाली से लेकर लच्छू डकैत तक को और चक्रू चोर से लेकर चालू जेबकट को शो किया जा सका।'

'सर, क्राइम शो कभी लिखा नही है, पर मुझे लगता है कि मैं लिख सकता हूं क्योंकि बेसिरपैर के ख्याल मुझे अकसर आते हैं। इजाजत हो, तो पेश करुं', भूतपूर्व डाकू ने बताया।

चैनल चीफ ने हाथ से रिवाल्वर चलाने का इशारा किया-यानी इजाजत मिल गयी थी।

डाकू शुरु हुआ, 'सर मैं आगरा का रहने वाला हूं। आगरा के पास बाह है। बाह के पास चंबल है। चंबल के पास ग्वालियर है। इन सब इलाकों के आसपास कुछ भूतपूर्व डकैत हैं। इनमें से एक को मैं पकड़ लाऊँगा। उसका प्रचार हम इस तरह से करेंगे-नाहरसिंह का क्राइम शो। पांच हजार लूट और दस हजार अपहरण करने के बाद आत्मसमर्पण करने वाले प्रख्यात सेंसेशनल डाकू नाहरसिंह पेश करेंगे क्राइम शो, सिर्फ और सिर्फ इसी चैनल पर-नाहरसिंह का क्राइम शो।'

वंडरफुल-चैनल चीफ ने कहा।

सर, नाहरसिंह की भारी लंबी-चौड़ी मूंछें होंगी। डरावना होगा हमारा एंकर, जिस दिन कोई डरावनी क्राइम स्टोरी नहीं होगी, वह खुद दहाड़कर पब्लिक को डरा देगा। सर, प्रोग्राम में कई हिस्से होंगे-जैसे किलिंग किस, कातिल सिसकी, बचना ए हसीनों, तेरा माल तड़ीपार, भूतों का कहर। सर क्या शो बनेगा सर, और डर भी रहा है कि कहीं चैनल चीफ उसे भगा न दे।

पर ये क्या, चैनल चीफ कह रहा है, 'तुस्सी तो ग्रेट थिंकर हो जी, कहां छिपे बैठे हो। छोड़ो सब कुछ क्राइम शो बनाओ।'

पर ये क्या? डाकू कह रहा है कि बस एक दिक्कत है-कि शो बनाने में लगता हूं, तो मेरी आत्मा मुझे डांटती है-अबे तू अभी भी डाकू ही है।

चैनल चीफ समझा रहा है डाकू को, 'प्यारे चिंता मत करे, क्राइम शो में इतनी रकम मिलेगी कि उस रकम के नीचे तेरी टुन्नी सी आत्मा दब जायेगी।

डाकू सहमत हो गया है। नाहरसिंह का क्राइम शो जल्दी ही किसी टीवी चैनल पर आयेगा। इस बार होली पर सबसे ज्यादा टीआरपी नाहर सिंह के क्राइम शो की ही होगी। भूतों के शो से भी बहुत ज्यादा, करीब सौ करोड़ लोग देखेंगे इस शो को।

और इंसान का रोल क्या रहेगा, लो जी आप फिर वो ही सवाल पूछ रहे हैं, इंसान का रोल तो सिर्फ देखने का है ना। देखिये, देखिये और क्या जी!

जानेमाने व्‍यंग्‍यकार आलोक पुराणिक के ब्‍लॉग से साभार.

काश, फगुआ का वो दौर फिर से लौट आता!

"नीक लागे धोती, नीक लागे कुरता, नीक लागे गउवां जवरिया हो, नीक लागे मरद भोजपुरिया सखी, नीक लागे मरद भोजपुरिया..!" इस लोकप्रिय भोजपुरी गीत में खांटी देहाती अंदाज में होली की ठिठोली रची-बसी है. बसंती बयार से आई फागुन की धमक, हर साल कुछ नयेपन का एहसास लेकर आती है. फिर क्या बच्चे, क्या जवान व क्या बूढ़े. सभी के उपर इसका भरपूर असर पड़ता है. भले ही संवेदना व्यक्त करने की खातिर कोई अपनी भावनाओं को शब्दों का रूप नहीं दे पाए. लेकिन इतना तो तय है कि सबके मन में अजब सी मस्ती छाई व दिल में गुदगुदी होती रहती है. बिना कुछ किए ही मिजाज हर पल अलसाये व बौराए रहता है, कभी-कभी रोमांटिक भी हो जाता है. वहीँ माह के अंत में होली के बहाने कहीं ना कहीं प्रकृति भी हमें सीख देती है, कि आपने भादो की बरसात झेली है तो बसंत का भी लुत्फ़ उठाइए. . ठीक वैसे ही जैसे जीवन में दुःख है तो सुख भी आता है.

खासकर भोजपुरी के गढ़ माने जाने वाले आरा, मोतिहारी, छपरा, सिवान, बेतिया, बक्सर, गाजीपुर, बलिया, देवरिया, कुशीनगर आदि क्षेत्रों में फागुन की सतरंगी छंटा की तो बात ही निराली है. पूर्वी चंपारण के एक छोटे से गाँव कनछेदवा में बिताई बचपन की होली को याद कर नास्टैलजिक हो जाता हूँ. खट्टी-मीठी यादों के बीच वो खुशनुमा पल आज भी जेहन में कैद हैं. होली के कुछ दिन पहले से ही दोस्तों के संग मिलकर, दूसरों को रंगने की कवायद शुरू हो जाती थी. लेकिन क्लास में तो अकेले ही सबको तंग किए रहता. तब सातवीं में पढ़ता था. दोस्तों को बिना बताए रंग लगाने के लिए नयी-नयी तरकीबें निकालते रहता. उस समय दस पैसे में रंग की पुड़िया आती थी. मैं रोजाना लाल या हरे रंग की आठ-दस पुड़िया लेकर बेंच पर बैठता. एक बेंच पर तक़रीबन पांच लड़के बैठते थे. मैं चुपके से पुड़िया फाड़ बारी-बारी से सबके सिर के पीछे से हाथ ले जाकर उनके बालों पर इसे झाड़ देता था. कल होके जब वे स्नान करते तो उनका पूरा बदन ही रंगीन हो जाता. और देखने वाला हँसे बिना नहीं रह पाता कि सामने वाले को किसी ने मामू बना दिया है. पकड़ में नहीं आए इसलिए हर दिन बेंच बदल अपनी कारामात चालू रखता. शरारतों के दौरान कभी-कभी भेद खुलने पर बात पीटने-पिटाने तक पहुँच जाती थी. पर अगले ही दिन सभी लड़के गिले-शिकवे भूला एक हो जाते, जैसे कुछ हुआ ही ना हो.

होली के रोज शाम में गाँव के बड़े-बूढ़े व युवाओं की टोली ढोल-मंजीरे लेके फगुआ गीत गाते सभी के दरवाजे पर पहुँचती. “पनिया लाले लाल ये गऊरा तोहरो के रंगेब” की तान हो या फिर ”वृन्दावन कृष्ण खेले होली वृन्दावन” की आलाप, हुड़दंग के साथ बसंती कोरस में सुरों की महफ़िल सज जाती. सबके माथे पर लगे अबीर-गुलाल से चढ़ी खुमारी कुछ यूँ मदहोश करती कि बदहवास ताली बजाते हुए हर कोई झूमने को मजबूर हो जाता. इसी दौरान गृह स्वामी प्लेट में बादाम, नारियल, किशमिश व छुहारा सत्कार के तौर पर लाकर देता. जिसे हम पॉकेट में रख लेते. फिर घर पर मौजूद बराबर या छोटी उम्र वालों के माथे व बड़ों के पाँव पर अबीर स्पर्श कराते थे. और “सदा आनंद रहे ये द्वारे” गाते हुए दूसरे दरवाजे की ओर रूख करते.

खैर, ये तो रही गुजरे जमाने की बात. अभी की बात करें तो आज भी गाँव वैसे ही है, थोड़े-बहुत बदलाव के साथ. पर भौतिकतावाद की आंधी ने देहात में एक नयी सभ्यता को जन्म दिया है. जहाँ भाईचारे, भोलेपन, आपसी सौहार्द, व रहन-सहन की मौलिकता पर इर्ष्या, स्वार्थीपन, मक्कारी व बनावटीपन का बदनुमा धब्बा लग चुका है. रोजी-रोटी व बेहतर जीवन के लिए गाँव से शहरों की तरफ बेहिसाब पलायन, पंचायत चुनाव की गंदी राजनीति व आधुनिक बनने की होड़ ने ग्रामीणों से बहुत कुछ छीन भी लिया है. उनके लिए होली महज खाओ-पियो व ऐश करो वाला त्यौहार रह गया है. सड़क पर दारू के नशे में बहक गाली-गलौज करती युवकों की टोली कुछ अलग ही नजारा प्रस्तुत करती है. वहीँ भले मानस इस दिन घर में ही दुबकना पसंद करते है. रही बात फगुआ गीत की तो इसे गाने वाली पुरानी पीढ़ी या तो गुजर गई या उसकी राह पर है. मोबाइल से भोजपुरी के अश्लील गाने सुनने वाले नवही को गली-गली घूमकर फगुआ गाने में शर्म लगती है. उनकी नज़रों में यह परम्परा आउटडेटेड हो चली है. अब अबीर व रंग लगाने का सरोकारी दौर भी नहीं रहा. वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को भी निजी हित साधने के तौर पर ढोया जा रहा है. क्योंकि यह संस्कार नहीं दिखावा बन गया है.

श्रीकांत सौरभ (पत्रकार व लेखक), मॉडरेटर- मेघवाणी ब्लॉग, मोतिहारी, संपर्क- 9473361087.

कविवर नज़ीर अकबराबादी

 जब फ़ागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की.
और दफ़ के शोर खड़कतें हों तब देख बहारें होली की.
परियों के रंग दमकतें हो तब देख बहारें होली की.
ख़म शीशाए जाम छलकतें हों तब देख बहारें होली की.
                          महबूब नशे में छकते हों तब देख बहारें होली की.

हो नांच रंगीली परियों का बैठे हों गुलरु रंग भरे.
कुछ भीगी तानें होली की कुछ नाज़ो अदा के ढंग भरे.
दिल भूले देख बहारों को और कानों में आहंग भरे.
कुछ तबले खड़के रंग भरे कुछ ऐश के दम मुहचंग भरे.
                          कुछ घुंगरू ताल झनकते हों तब देख बहारें होली की.
 
सामान जहाँ तक होता है इस इश्रत के मतलूबों का.
वह सब सामान मुहैया हो और बाग़ खिला हो खूबों का.
हर आन शराबें ढलतीं हो और ठठ हो रंग के डूबों का.
इस ऐश मज़े के आलम में एक गोल खड़ा महबूबों का.
                          कपड़ों पर रंग छिड़कतें हों तब देख बहारें होली की.
 
गुलज़ार खिलें हो परियों के और मजलिस की तैयारी हो.
कपड़ों पर रंग के छीटों से खुश रंग अजब गुलकारी हो.
मुह लाल, गुलाबी आँखें हो और हाथों में पिचकारी हो.
उस रंग भरी पिचकारी को अंगिया पर तक मारी हो.
                           सीनों से रंग ढलकते हों तब देख बहारें होली की.
 
उस रंग-रंगीली मजलिस में वह रंडी नाचने वाली हो.
मुह जिसका चाँद का टुकड़ा हो और आँख भी मै की प्याली हो.
बदमस्त, बड़ी मतवाली हो, हर आन बजाती ताली हो.
मै नोशी हो बेहोशी हो भड़ुए की मुह में गाली हो.
                          भड़ुए भी भड़वा बकते हों तब देख बहारें होली की.
 
और एक तरफ दिल लेने को महबूब भवैयों के लड़के.
हर आन घड़ी गत भरते हो कुछ घट-घट के कुछ बढ़-बढ़ के.
कुछ नाज़ जतावें लड़-लड़ के कुछ होली गावें अड़-अड़ के.
कुछ लचके शोख़ कमर पतली कुछ हाथ चले कुछ तन फड़के.
                          कुछ काफिर नैन मटकते हों तब देख बहारें होली की.
 
यह धूम मची हो होली की और ऐश मज़े का छक्कड़ हो.
उस खींचा खींच घसीटी पर भड़ुए रंडी का फक्कड़ हो.
माजून शराबें नांच मज़ा और टिकिया सुल्फ़ा कक्कड़ हो.
लड़ भिड़के 'नज़ीर' फिर निकला हो कीचड़ में लत्थड़ पत्थड़ हो.
                          जब ऐसे ऐश झमकते हों तब देख बहारें होली की.

प्रस्तुति- कुशल प्रताप सिंह

सहारा मीडिया के बड़े पदाधिकारी का क्रेडिट कार्ड चोरी, शक के घेरे में इसी ग्रुप का दूसरा बड़ा पदाधिकारी

सहारा मीडिया में आज की सबसे बड़ी गासिप क्रेडिट कार्ड चोरी प्रकरण है. यहां के एक बड़े पदाधिकारी का क्रेडिट कार्ड चोरी हो गया था. इस मीडिया हाउस के ढेर सारे रिपोर्टर चोर को पकड़ने में जुट गए. बताया जाता है कि तहरीर भी दी गई. पुलिस ने चोर को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया. चोर ने क्रेडिट कार्ड का यूज कर के तकरीब एक लाख पैंतीस हजार रुपये तक की खरीदारी की थी. जिस माल से खरीदारी की गई वहां के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. सामने जो चोर निकला, उसे देखकर मीडिया हाउस के रिपोर्टरों के साथ-साथ पुलिस वाले भी भौचक हो गए.

यह चोर कोई और नहीं, सहारा मीडिया में ही कार्यरत एक बड़े और पुराने पदाधिकारी हैं. सूत्र सहारा मीडिया में यह प्रकरण घटित होने की भरपूर पुष्टि कर रहे हैं लेकिन किसी के पास कोई भी प्रमाण नहीं है क्योंकि एफआईआर दर्ज नहीं हुई है और न ही किसी के पास सीसीटीवी फुटेज है. चोर की असलियत सामने आने के बाद सहारा मीडिया के बड़े पदाधिकारी, जिनका कार्ड चोरी हुआ था, ने समझदारी दिखाते हुए इसे तूल देने की बजाय अपने स्तर से खत्म करना उचित समझा.

यही कारण है कि जब कथित चोर से भड़ास ने पूछा कि क्या वाकई आपने चोरी की है, तो उनका जवाब था कि जिनका कार्ड चोरी हुआ है, उनको मैंने खुद फोन करके पूछा तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है. कथित चोर ने कहा कि सहारा मीडिया में उनके ढेर सारे दुश्मन हैं, तमाम तरह की अफवाहें और उल्टी बातें उनके बारे में उड़ाई जाती है. यह काम भी उनके विरोधी लाबी की है. उन्होंने दावा किया कि सहारा में उन पर एक रुपये की भी चोरी का आरोप आजतक नहीं लगा. (कानाफूसी)

कानाफूसी कैटगरी की खबरें सुनी सुनाई बातों पर आधारित होती है, इसलिए इस पर भरोसा करने से पहले अपने लेवल पर तथ्यों की पुष्टि कर लें.

‘मिसाइल भंजक’ पाणिनी आनंद और ‘स्तन उघारू’ अमीना से क्या लें सबक?

Yashwant Singh : भारत के पत्रकार पाणिनी आनंद ने प्रेस क्लब आफ इंडिया में रखी ब्रह्मोस मिसाइल की प्रतिकृति को यह कहते हुए गिराकर ध्वस्त कर दिया कि यह जनता का नाश करने वाली मिसाइल है… उधर, ट्यूनिशिया में अमीना ने महिलाओं की आजादी के लिए खुद को टापलेस कर शरीर पर उर्दू अंग्रेजी में क्रांतिकारी स्लोगन लिखा और इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया..

पाणिनी आनंद मिसाइल तोड़कर घर जाते वक्त बाइक एक्सीडेंट में अपना हाथ-पैर तुड़ा बैठे. अस्पताल में भर्ती हैं. उनके खिलाफ भगत सेना वाले दक्षिणपंथी संगठन ने मिसाइल की प्रतिकृति तोड़ने की रिपोर्ट दर्ज करा दी है. अमीना को पागलखाने भेज दिया गया है और उसके पक्ष व विपक्ष में जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं…

दोनों ही मामले में दोनों लोग एक्स्ट्रीम यानि अति पर गए और चर्चा के केंद्र में आए… दोनों ही मामलों के मजबूत पक्ष व विपक्ष हैं… मैं सरोकार और चिंतन के हिसाब से तो दोनों साथियों पाणिनी और अमीना के पक्ष में हूं.. लेकिन तरीके के बारे में लगता है कि इससे चर्चा-कुचर्चा तुरंत व ढेर सारी पाई जा सकती है लेकिन जो मकसद है, वह नहीं पाया जा सकता… कई बार धीमी गति की आंच व आग ज्यादा गंभीर व देर तक असर करती है और कई बार तुरंत लगा दी गई आग अचानक भभक कर बुझ जाती है… सत्ता और पुरातन समाज ऐसे ही मौकों की तलाश में होता है जब आप छोटी सी गल्ती करें और आपकी गल्ती को यूं पेश किया जाए कि सारे क्रांतिकारी या वामपंथी या तरक्कीपसंद ऐसे ही होते हैं..

तोपों और मिसाइलों की प्रतिकृति नष्ट कर के जन को नहीं बचाया जा सकता साथी… ये करतब किसी एक शाम दारू के नशे में एक्सट्रीम एडवेंचर का तो फील दे सकता है लेकिन इससे आप उस उद्देश्य की तरफ कदम नहीं बढ़ा सकते जिस तरफ जाना आपका मकसद है. वीरेन डंगवाल ने इलाहाबाद के कंपनी बाग में तैनात तोप को नष्ट नहीं किया बल्कि उस पर एक कविता लिख दिया और उस कविता ने जाने कितने दिलों में तोपों व युद्धों के प्रति नफरत का भाव पैदा किया, साथ ही जन के प्रति आस्था और समर्पण का संदेश दिया. खुद नंगी होकर क्रांति का संदेश देने की जगह तस्लीमा नसरीन ने वैचारिक तरीके से लड़कर पूरी दुनिया के कठमुल्लों व सामंती सोच वाले पुरुषों को चुनौती दी है. वह दुनिया में महिला संघर्ष व महिला क्रांति की सशक्त प्रतीक हैं.. तो भाइयों और बहनों, अपने गुस्से और क्रांति को मुकाम दो, बुरा नाम मत दो… जय हो..

Vivek Singh : bilkul sahi bhaiya.. गुस्से और क्रांति को मुकाम दो, बुरा नाम मत दो..

Ankit Muttrija : आप की बात से पूरी तरह सहमत हूं सर.

आदेश शुक्ला : ब्रह्मोस मिसाइल देश की रक्षा के लिए है और अगर पाणिनि देश को नहीं मानते तो बिना पासपोर्ट चीन जाकर दिखाएँ ।यथार्थ भी कोई चीज है वह भी भारत जैसे देश के लिए जो इतने साल गुलाम रहा और खतरे में भी है पडोसी मुल्कों के

Madan Tiwary : दोनो ने सही किया । प्रेस क्लब मे मिसाईल की प्रतिकर्‍ति रखवाई किस जमूरे ने थी ? क्या वह हथियारो का म्यूजियम है ? अमीना ने जो किया वह एकदम सही है। धिरे धिरे बदलाव वाले तरीके का असर हमने देखा है , आजादी की जगह पे सता का परिवर्तन हुआ। अमीना ने आग हीं जलाई है , अब किसी को इसकी आंच ज्यादा लग जाये तो उसे दुर रहने मे हीं भलाई है।

Shravan Kumar Shukla : अगर आप पाणिनि के पक्ष में हैं तो मैं विल्कुल विपक्ष में! उन्हें कहिए की हे कामरेड. पहले रूस और चीन के घातक हथियारों नष्ट करो..! यहाँ अपना मुंह न मारें! मैं उनकी आलोचना शब्दों की हद तक करता हूँ..! थू है ऐसी कायराना हरकत पर.! दम है तो कुश वास्तविक करो. देश की प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ का लाइसेंस किसने दिया है उन्हें? अपनी मैडम के साथ जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भी उनकी वही राय होगी? अरुंधती के इस साथी को मेरी तरफ से प्रतीतात्मक जूते और घूंसे.. जय हिन्द.. कामरेड नहीं!

Madan Tiwary : @Shravan kumar shukla आपने भी इसके साथ कुछ गलत किया है क्या ? आपको क्यों मिर्ची लगी भाई ?

Yashwant Singh : Madan Tiwary जी के इस प्वाइंट से सहमत हूं कि मिसाइल की प्रतिकृति वार म्यूजियम में रखो, प्रेस क्लब में काहें. प्रेस क्लब में तो दुनिया की सबसे बड़ी कलम की स्थापना करा देनी चाहिए, मीडिया के प्रतीक के तौर पर. और, हम लोगों के लिए मिसाइल तोप से कम नहीं है कलम, बस इस्तेमाल करना आना चाहिए … फिर भी, मैं इस पक्ष में नहीं हूं कि रात में दारू के नशे में लात मार कर तोड़ दो… इसे तोड़ने के लिए बाकायदा घोषित तौर पर अभियान चलाना चाहिए और इसके लिए जन समर्थन व जन भागीदारी का रास्ता अपनाना चाहिए… छुटपुट अराजक प्रयोगों से क्रांतियां को तात्कालिक लाभ भले मिल जाए, पर दूरगामी परिणाम नुकसानदायक होता है…

आदेश शुक्ला : दारु के नशे में तोडा यह तो एक और खुलासा कर दिया आपने

Madan Tiwary : Yashwant Singh आपकी बात सही है कि नशे मे आकर के न तोडे , उसको तोडने को संघर्ष से जोडे , यह मैसेज जाना चाहिये कि आखिर क्यो तोडा जाये इस तरह की प्रतिकर्‍तियो को । लेकिन अमीना ने कोई क्रांति की बात तो की नही है मात्र अपना विरोध दर्ज कराया है , उसके तरीके पर आपति करने वाले हम कौन होते है ? उसने अपने वाल पे पोस्ट किया था कोई सडक पर तो घुम नही रही थी । अगर सडक पर भी घुमती तो गलत नही था, आस्था की नग्नता परेशान नही करती लेकिन विरोध की नग्नता को बर्दाश्त नही कर पाते लोग वाह क्या सोच है ।

Shravan Kumar Shukla : मैंने अमीना से नहीं बल्कि पाणिनि से अपना विरोध दर्ज कराया है.. अगर किसी को व्यक्तिगत हमले करने ही है तो मैं तैयार हूँ! बेहतर होगा, कोई किसी पर व्यक्तिगत हमले न करे !

Yashwant Singh : आदेश शुक्ला जी, प्रेस क्लब लोग रात में पूजा-अर्चना के लिए नहीं जाते, दारू पीने ही जाते हैं… यह सिंपल सी बात है. और, मजेदार यह है कि दारू के अड्डे पर मिसाइल गड़ी पड़ी है… क्या कंट्रास्ट है…

आदेश शुक्ला : अब पाणिनि को चाहिए जब ब्रह्मोस का परीक्षन हो तो उसे पकड़ ले । ….हा हा यह तो बात सही है की दारु पीने जाते हैं लेकिन उसके बाद ऐसे क़दम उठाएंगे ? वैसे आप भी सहमत नहीं हैं उनके इस क़दम से

Madan Tiwary : Yashwant Singh सर जी गनीमत है कि सचमुच की तोप नही थी , वरना क्या होता ??? हाहाहाहा । वैसे भी दारु पीकर थोडा बहुत बहका न जाये तो लगता है साला दारु नकली है।

Satish Vikram Singh : Yashwant Singh sir, bahut accha likha apne.

Uttam Pandey : कई बार धीमी गति की आंच व आग ज्यादा गंभीर व देर तक असर करती है और कई बार तुरंत लगा दी गई आग अचानक भभक कर बुझ जाती है.isme koi do rai nhi..nice…we should follow veeren nd tasleema if we want to change 4 a long time

Praveen Raj Singh : Jo insan pacha na sakay usay peeni nahin chahiye. Khas taur say chunavi mahaul mein muft mein milnay wali.

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


इस प्रकरण से जुड़ी मूल खबरें-

प्रेस क्लब में ब्रह्मोस मिसाइल की डमी दूसरी बार जमींदोज

कट्टरपंथियों को अमीना की 'टॉपलेस' चुनौती, भेजी गई पागलखाने

खेलें मसाने में होरी… पीटें प्रेत थपोरी… (सुनें)

खेलें मसाने में होरी, दिगम्बर खेलें मसाने में होरी
भूत पिशाच बटोरी, दिगम्बर खेलें मसाने में होरी। 

लखि सुन्दर फागुनी छटा के
मन से रंग गुलाल हटा के
चिता भस्म भर झोरी, दिगम्बर खेलें मसाने में होरी।

गोप न गोपी श्याम न राधा
ना कोई रोक ना कवनो बाधा
अरे ना साजन ना गोरी, दिगम्बर खेलें मसाने में होरी 

नाचत गावत डमरूधारी
छोड़े सर्प गरल पिचकारी
पीटें प्रेत थपोरी, दिगम्बर खेलें मसाने में होरी।

भूतनाथ की मंगल होरी
देखि सिहायें बिरज की छोरी
धन धन नाथ अघोरी, दिगम्बर खेलें मसाने में होरी।


पंडित छन्नूलाल मिश्रा की आवाज में उपरोक्त लाइनों को सुनने के लिए नीचे दिए गए आडियो प्लेयर को प्ले कर दें…

khele masaane mei hori digambar…

पंडित छन्नूलाल

(सुनें)

सहारा-सेबी मामले की सुनवाई 13 अप्रैल तक टली

प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय की याचिका पर सुनवाई 13 अप्रैल तक टाल दी है। याचिका में राय ने अपने तथा समूह की दो कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के बैंक खातों तथा संपत्तियों की कुर्की के भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के आदेश को चुनौती दी है। सेबी के पिछले महीने के आदेश के खिलाफ इस अपील पर न्यायाधिकरण ने 23 मार्च को पिछली सुनवाई के दौरान अंतिम सुनवाई के लिए आज की तारीख तय की थी। अब 13 अप्रैल को सैट संबंधित अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगा।

यह मामला उच्चतम न्यायालय द्वारा सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्प तथा सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्प को निवेशकों से जुटाए गए 24,000 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाने के आदेश से संबंधित है। समूह की कंपनियों ने यह राशि बॉन्ड जारी कर जुटाई है। सेबी को निवेशकों का पैसा लौटाने के आदेश को लागू कराना है। न्यायालय के आदेश के तहत निर्धारित समय में पूरा धन न जामा कराने के मामले में सेबी ने फरवरी में संबंधित कंपनियों और सुब्रत राय सहित उनके कुछ आला अफसरों के खिलाफ कुर्की के आदेश जारी किए।

सहारा ने सेबी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही सेबी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश लेने की प्रक्रिया को पूरी की है। वहीं सहारा के दावे को खारिज करते हुए सेबी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का इस मामले में आदेश स्पष्ट है और उसी के अनुसार वह कार्रवाई कर रहा है। इस बीच, सेबी ने उच्चतम न्यायालय में सुब्रत राय को हिरासत में लेने की याचिका भी दायर की है। इस याचिका पर सुनवाई अप्रैल के पहले सप्ताह में होगी। (बीएस)

नन्‍हें-मुन्‍ने चलाएंगे ABP समूह का अपकमिंग पंजाबी न्‍यूज चैनल?

चंडीगढ़- खबर है कि ABP समूह का पंजाबी न्यूज़ चैनल कुछ महीने में आने वाला है, जिसके लिए चंडीगढ़ में ट्रेनी स्टाफ की ट्रेनिंग का दौर शुरू कर दिया गया है। यह ट्रेनिंग पिछले करीब एक महीने से चल रहा है, ट्रेनिंग लेने वाले सभी 30 के करीब लोग वो हैं जो अपने कालेज से सीधा ही ABP न्यूज़ के स्टाफ मेम्बर बने हैं। इन सभी का चयन खुद एडिटर इन चीफ शाजी ने किया है और चयन में  पंजाब के ब्यूरो चीफ जगविंदर पटियाल की भी अहम भूमिका रही है। 

ABP न्यूज़ ने अब तक किसी भी सीनियर एव तजुर्बेकार पत्रकार को अपने इस पंजाबी चैनल में जोड़ने की कोशिश तक नहीं की है। यहाँ तक कि अब तक एक भी ऐसा नाम टीम में शामिल नहीं किया गया, जिसके पास कोई एक दो महीने का ही तजुर्बा ही हो। बस कुछ कैमरामैन जरूर हैं जो पहले से मीडिया में काम कर रहे थे। आज कल पंजाब का पूरा मीडिया इसी बात को लेकर चर्चा कर रहा है कि क्या ABP वाले इन्हीं बच्चों की टीम से अपना नया चैनल चलाने की तैयारी में है, जिन्हें फील्ड की ABC तक नहीं पता। शायद चैनल प्रबंधन सस्ते टीम के चक्कर में ही यह दांव खेल रहा है, लेकिन इस दांव का हश्र क्‍या होगा इसका अंदाजा लगान मुश्किल नहीं है।

पता नहीं आज कल ABP समूह किस पालिसी पर काम कर रहा है क्‍योंकि जूनियर टीम का हश्र ABP न्यूज़ (हिंदी) पर सभी देख रहे हैं। स्टार ग्रुप से अलग होने और दीपक चौरसिया के जाने के बाद लगातार सीनियर पत्रकार इस ग्रुप को छोड़ते जा रहे हैं, लेकिन चैनल ने किसी भी सीनियर पत्रकार को अपने साथ जोड़ने की कोशिश नहीं की, जबकि आजतक, इंडिया न्‍यूज के साथ लगातार बड़े नाम जुड़ते जा रहे हैं और इसका सीधा असर चैनल की TRP पर नज़र आ रहा है। हर रोज होने वाली बड़ी बहस के वक़्त भी चैनल पर किसी बड़े नाम की कमी खलती रहती है क्‍योंकि अब चैनल के पास किशोर अजवाणी के इलावा कोई और सीनियर एंकर भी नहीं बचा है।

जब इस चैनल के पास स्टार न्यूज़ नाम का ब्रैंड और दीपक चौरसिया जैसे नामी पत्रकार थे, तो इसकी अलग पहचान थी। अगर मैं सभी का नाम लिखने लगा जो लोग चैनल छोड़ कर गए हैं तो शायद पूरी खबर की जगह नाम ही पूरे आयेंगे, जिन्हें लोग भरोसे के तौर पर देखते थे तो हर कोई इस चैनल को आज तक के मुकाबले में देखता था। लेकिन अब के हालात देख कर लगता है कि शायद आने वाले दिनों में आज तक की मुश्किलें और आसान होने वाली हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर उपरोक्त बातों में कोई कमी-बेसी नजर आए तो नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए या फिर भड़ास को मेल bhadas4media@gmail.com करके अपनी बात रख सकते हैं.

औरंगाबाद के एसपी ने मीडिया से मांगी माफी, पत्रकारों ने बहिष्‍कार का फैसला वापस लिया

औरंगाबाद। जिलाधिकारी अभय कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक दलजीत सिंह व मीडिया के प्रतिनिधियों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में रविवार की शाम समाहरणालय के सभाकक्ष में हुई त्रिपक्षीय वार्ता के बाद पत्रकारों ने एसपी की खबरों का बहिष्कार करने के निर्णय को वापस ले लिया। बैठक के दौरान एसपी ने मीडिया के साथ संबंधों को बेहतर बनाने, घायल पत्रकार के प्रति पूरी सहानुभूति रखने व मीडिया को समाचार कवरेज में हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। हमारी कभी भी मीडिया के प्रति अलगाव की मंशा नहीं रही है। पुलिस प्रशासन मीडिया को हर तरह का सहयोग करने के लिए तैयार है। उन्होंने औरंगाबाद की मीडिया के सामाजिक सरोकारों के प्रति दायित्व का अच्छी तरह से पालन करने के लिए सराहना भी की। एसपी ने कहा कि औरंगाबाद की मीडिया अन्य जिलों से बेहतर है। हमारी गतिविधियों से मीडिया के भावनाओं को यदि ठेस पहुंची हो, तो हम इसके प्रति हम खेद व्यक्त करते हैं। पत्रकार उपेंद्र चैरसिया के साथ हुई वारदात के बाद पुलिस को उनके दुख में शामिल होना चाहिए था। लेकिन, कुछ परिस्थितियां ऐसी थीं कि हम ऐसा नहीं कर सके। इससे पत्रकार बंधुओं को आघात पहुंचा। इसके लिए मैं एक बार फिर खेद व्यक्त करता हूं और उनसे माफ़ी मांगता हूँ… आगे पूरी कोशिश होगी कि ऐसी स्थिति उत्पन्‍न न हो। शीघ्र ही मैं अस्पताल में जाकर इलाजरत उपेंद्र चैरसिया से मिलूंगा। अगर नहीं जा सका तो मेरे प्रतिनिधि जरूर जायेंगे।

एसपी के द्वारा इस तरह उद्गार व्यक्त करने के बाद पत्रकारों ने नाराजगी समाप्त करने का घोषणा की। बैठक में डीएम व एसपी के अलावा तमाम पत्रकार शामिल थे। पत्रकारों में नव बिहार टाइम्स के संपादक कमल किशोर, वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र कुमार रवि, भुपेंद्र सिंह, दैनिक जागरण ब्यूरो सनोज पांडेय, ई टीवी से संजय सिन्हा, आज अख़बार से जितेंद्र सिंह, प्रभात खबर ब्यूरो गोपाल प्रसाद सिंह, राष्‍ट्रीय सहारा ब्यूरो गणेश कुमार, इंडिया टीवी से किशोर प्रियदर्शी, सहारा समय से संतोष कुमार, आज तक से अभिनेष कुमार सिंह, इंडिया न्यूज़ से धीरज पांडेय, साधना न्यूज़ से वेद प्रकाश राय, केशव कुमार, आईबीएन7 से विपुल कुमार, महुआ न्यूज़ से आकाश कुमार व नक्षत्र न्यूज़ मनोज कुमार सिंह उपस्थित थे।

बिहार जाकर हर्षा गए थानवी दम्पती

Om Thanvi : बिहार जाकर हर्षा गए थानवी दम्पती। बिहार की मिट्टी की महक अलग है, जैसे हर जगह की होती है। लेकिन इस बार हम दोनों ने इस बात पर गौर किया कि बिहार के लोगों में आत्मीयता का रूप जुदा और गहरा है। वह चेहरे पर यों नुमायाँ नहीं होता कि धोखा होने का खतरा पैदा हो जाय। लेकिन जैसे ही बात शुरू हो, अनजान व्यक्ति के चेहरे पर कभी ईमानदारी, कभी जिम्मेवारी, कभी सहकार, यहाँ तक कि खातिरदारी के भाव भी आप दम-दम पर पढ़ सकते हैं।

प्रेमाजी को कतरनी (चिवड़ा) चाहिए थी, जो भागलपुर से एक मित्र ले आए थे। फिर चाहिएसत्तू। फ़्रेजर रोड पर खादी भंडार में पूछा। उनके पास नहीं था, पर एक दुकान का पता हमें यों बताया गया जैसे हमसे बरसों की रिश्तेदारी हो। उस ठिकाने को 'श्रेष्ठ दुकान' कहा तो आवाज से ही लगता था कि यह सिफारिश नहीं, जिम्मेवार सूचना की अदायगी भर है। स्टेशन जाइए, हनुमान मंदिर को मुड़िये, पश्चिम को बढ़िए, पहली सड़क पर स्टेशन की तरफ हो लीजिए, बाईं तरफ बनारसी भूंजा वाले को पाइएगा … आवाज के आवेगपूर्ण उतार-चढ़ाव और भागिमाओं का ब्योरा नहीं दे रहा हूँ। उन्हें जैसे लगा कि हमें ठेठ दुकान तक छोड़ आए हैं, तभी तसल्ली हुई।

बेल का शरबत पिया, सड़क किनारे। लगा हमें ग्राहक नहीं, मेहमान समझ कर खातिर कर रहे हों। भरोसा न हो तो अपूर्वानन्द जी से बुझा लीजिए, वे तो वहीँ के न हैं! यह जानकर कि हमें बेल की समझ है, एक केसर-सा नया तोड़कर कच्चा खाने की मनुहार भी ठेले पर हुई। जब तक खाया, हमारे चेहरे को निहारा गया कि बेल जैसा कहा वैसा निकला कि नहीं। रिक्शे वाला। कोई जल्दी नहीं, जितनी देर बात कीजिए, जाइए-न जाइए, वाजिब भाड़े पर बतिया लीजिए, मगर स्वर में कोई तल्खी नहीं, न चिड़चिड़ापन। इत्मीनान। खैनी खैने का मतलब बैठिए। चलेंगे। हिंदी के मूर्धन्य आलोचक डॉ नंदकिशोर नवल से मिलना हुआ, उनके घर। इतनी साफगोई और बेबाकी कि दूसरी मिसाल फ़ौरन याद नहीं आती। ढेर अनुभव हैं। ज्यादा नहीं बोलूँगा, आप कहीं यह न समझने लगें कि क्या पर्यटक की तरह देखा हूँ बिहार को!!

फिर बिहार साहित्य समारोह था, जिसमें हम गए थे। गौर से देखा कि कैसे एक साहित्य-कलाप्रेमी परिवार पूरे समारोह को खड़ा और सफलतापूर्वक संचालित कर सकता है, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वरदहस्त के बगैर। और अंत में नीतीश कुमार। समारोह का उद्घाटन उन्हीं ने किया। उन्होंने प्रदेश में काम किया है, अच्छी छवि है। पर डॉ अजीत-अन्विता और आराधना प्रधान के इस परिश्रम में सरकार की भांजी क्यों! कुछ सहयोग भर से! तो मैं साहित्य मण्डली में एक राजनेता की शिरकत के नाम से बिदक कर इधर-उधर हो गया। मगर प्रेमा जी और अन्य का बयान था कि नीतीश कुमार का स्वतःस्फूर्त भाषण जो था सो था, वे एक कवि पर बोले भी। उन वयोवृद्ध शायर — कलीम आजिज़ साहब — के कलाम पर भरपूर दाद दी और एक शेर पर मुकर्रर इरशाद भी फरमाया। सो मैं बिहार के नाम पर उनकी भी तारीफ करता हूँ, अब आप जो समझें सो समझें।

पर वह शेर क्या था, जो दुबारा सुना गया? प्रभात रंजन बताते हैं, यह वह शेर था जिसे कभी लाल किले के मुशायरे में आजिज़ साहब के मुंह से सुनकर इंदिरा गांधी बिदक गई थीं! शेर यों है:

दामन पर कोई छींट न ख़ंजर पर कोई दाग़
तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो!

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.

मुलायम की प्राब्लम उम्र है या सीबीआई?

Mukesh Kumar : कोई बताए कि मुलायम सिंह को क्या हो गया है। उम्र उन पर हावी हो गई है, उनकी इंद्रियाँ शिथिल पड़ गई हैं या सरकार द्वारा लगाई गई सीबीआई से वे परेशान हैं। अखिलेश सरकार की नाकामी से निराश हैं या फिर प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा के चलते उनका मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है। एक दिन सरकार गिराने की बात करते हैं और अगले दिन चलाने की। उनको सत्यवादी बता देते हैं जिनका पूरा कारोबार ही असत्य पर टिका हुआ है।

बेटा अलग परेशान है। पिताश्री ने पुत्र को स्वयं सत्ता में बैठाया और अब उसे ही नकारा साबित करने पर आमादा हैं। सब जानते हैं कि अखिलेश मुलायम की खड़ाऊँ रखकर शासन चला रहे हैं और चला क्या रहे हैं उनसे चलावाया जा रहा है। उनके सत्ता-रथ के कई-कई सारथी हैं। सब अपनी-अपनी दिशा में ले जाना चाहते हैं। नतीजा ये हुआ है कि रथ वहीं खड़ा हो गया है। मीडिया के लिए तो वरदान हैं मसाजवादी मुलायम। मध्यावधि चुनाव का खेल खेलने के लिए अवसर जुटाते रहते हैं।

मुलायम का मतलब चाहे जो हो, चैनलों की चटपटी चर्चा सरकार के पतन से तीसरे मोर्चे के गठन तक हिलोरें मारने लगती है। ऐसे में अमर सिंह की कमी खलती है। वे होते तो जाने कितनी बातें होतीं, कितनी परोक्ष और सीधी चेतावनियाँ होतीं। फिल्मी डायलॉग होते और जाने कितनी भेंट-मुलाकात वे अब तक कर चुके होते। वे होते मसाजवाद के नए नए रूप देखने को मिलते। लेकिन क्या करें भारतीय राजनीति का दुर्भाग्य और मनमोहन सिंह का सौभाग्य। वे 2014 तक देश के सिर पर सवार रहेंगे।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.

जहां जाता है सुधीर चौधरी, वहां के कर्मियों की होली-दिवाली का नाश करता है

Mayank Saxena : जब लाइव इंडिया के कर्मचारी बिना सैलरी के अंधेरी दीवाली का मर्सिया पढ़ रहे थे…ये वही शख्स था, जो ट्विटर पर अपने परिवार की दमकती दीवाली की बात कह रहा था…शर्मनाक तरीके से तस्वीरें शेयर कर रहा था…आज ये वही आदमी होने वाला है, जो कल रंगों में डूब कर होली मनाएगा…जबकि एक साथी ज़िंदगी से जंग लड़ रहा है…

आप इसे पत्रकार और सम्पादक मानते हैं, मुझे ऐसे आदमी के इंसान तक होने पर शक है…चौधरी साहब हम शर्मिंदा हैं कि हम भी पत्रकार हैं और आप भी…हम शर्मिंदा हैं कि हम वहीं काम करते हैं, जहां आप…हम शर्मिंदा हैं कि हम ने आपका नाम भी सुना…हम शर्मिंदा हैं कि हमें ये लिखना पड़ रहा है… चौधरी साहब आपको होली बहुत बहुत मुबारक हो…

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Mayank Saxena : हमारे जानदार साथी अमरीश आखिरकार संघर्ष कर के ज़िंदगी की जंग में जीत रहे हैं…उनकी हालत पहले से बेहतर है…और अब वो ख़तरे से बाहर हैं…लेकिन हम सबके लिए असली लड़ाई दरअसल अब शुरू होगी…

युवा व तेजतर्रार पत्रकार मयंक सक्सेना के फेसुबक वॉल से.

एनटी अवार्ड में आजतक की झोली भर गई

न्‍यूज टेलीविजन यानी (एनटी) अवार्ड का ऐलान हुआ है. एक बार फिर आजतक की झोली में कई अवार्ड आए हैं. पूछता है आजतक, को मिला हिन्दी के बेस्ट पब्लिक डिबेट का सम्मान. आजतक को ऑटो एक्सपर्ट का अवार्ड मिला है. यही नहीं बेस्ट स्पोर्ट्स फीचर का अवार्ड में भी  आजतक ने ही बाजी मारी. इंडिया मांगे गोल्ड को बेस्ट स्पोर्ट्स फीचर का सम्मान मिला है. आजतक की एंकर स्वाति रैना को बेस्ट इंटरटेनमेंट न्यूज एंकर का अवॉर्ड मिला है.

आजतक के सहयोगी चैनल हेडलाइन्स टुडे को इन्वेस्टिगेटिव फीचर के लिए सम्मान मिला है. तय है दर्शकों की पसंद ने हमेशा की तरह आजतक को सबसे आगे खड़ा कर दिया है.

बेस्‍ट टीवी न्‍यूज एंकर हिंदी: श्‍वेता सिंह

बेस्‍ट टीवी न्‍यूज प्रेजेंटर: सुमीत अवस्‍थी

बेस्‍ट हिंदी प्राइम टाइम: 10तक

बेस्‍ट एंटरटेंमेंट न्‍यूज एंकर: स्‍वाती रैना

बेस्‍ट एंटरटेंमेंट न्‍यूज शो: हेडलाइंस टुडे

बेस्‍ट ग्राफिक प्रोमो हिंदी: आज तक

बेस्‍ट प्रोमो अंग्रेजी: Right To Be Heard, हेडलाइंस टुडे

बेस्‍ट प्रोमो अंग्रेजी: बर्फी सैल्‍यूट

बेस्‍ट प्रोमो कैंपेन: आज और हेडलांइस टुडे

बेस्‍ट क्राइम शो हिंदी: वारदात

बेस्‍ट पैकेजिंग: हेडलाइंस टुडे

बेस्‍ट ऑटो एक्‍सपो अवार्ड: आज तक

बेस्‍ट करेंट अफेयर फीचर: अयोध्‍या कुछ कहता है

बेस्‍ट डॉक्‍यूमेंट्री: क्‍योंकि हम बोलते नहीं (भोपाल गैस कांड, तेज) (आजतक)

एनडीटीवी को मिला बेस्‍ट इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्ट का एनटी अवार्ड

नई दिल्ली : दिल्ली में सोमवार को एनटी अवॉर्ड्स का ऐलान किया गया। इस मौके पर एनडीटीवी को कई कैटेगरी में अवॉर्ड मिले हैं। इनमें बेस्ट इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट का अवॉर्ड सुनील सिंह की रिपोर्ट 'बांग्लादेश कनेक्शन’ को मिला है। अफ़शां अंजुम को बेस्ट न्यूज़ स्पोर्ट्स प्रेजेंटर और शरद शर्मा को बेस्ट रिपोर्टर का अवॉर्ड मिला।

एनडीटीवी ग्रुप एडिटर बरखा दत्त को बेस्ट टीवी न्यूज़ ऐंकर का अवॉर्ड दिया गया। बेस्ट इंग्लिश स्पोर्ट्स प्रेजेंटर निखिल नाज़ और सोनल मेहरोत्रा को बेस्ट युवा टीवी पत्रकार का अवॉर्ड मिला। इनके अलावा बेस्ट एंटरटेनमेंट फीचर के लिए 'जय जवान' को चुना गया। साथ ही 'वतन के रखवाले' को बेस्ट शो पैकेजिंग का अवॉर्ड मिला है।

600 करोड़ के मालिक बसपा नेता दीपक भारद्वाज की गोली मारकर हत्‍या

नई दिल्ली। साउथ दिल्ली के रजोकरी इलाके में एक बड़े प्रॉपर्टी कारोबारी और 2009 में बीएसपी के टिकट पर दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ चुके दीपक भारद्वाज की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। काली कार में आए 3 हमलावर उनके फार्महाउस में घुसे और गोली मारकर फरार हो गए। मामला आपसी रंजिश का बताया जा रहा है। पुलिस इलाके की घेराबंदी कर हत्यारों की खोज कर रही है।

हमलावरों ने गेट पर गार्ड से शादी के लिए फार्महाउस बुक कराने की बात कही। फिर गार्ड से दीपक भारद्वाज के बारे में पूछताछ की। जैसे ही पता चला कि दीपक भारद्वाज वहीं मौजूद हैं, उन लोगों ने उन्हें गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल दीपक को तुरंत पास के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स पहुंच गई है। पूरे इलाके में बैरिकेड्स लगाकर सघन छानबीन की जा रही है। हत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसके पीछे प्रॉपर्टी विवाद को कारण बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि 2009 में लोकसभा चुनाव दीपक भारद्वाज ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लड़ा था और सबसे रईस उम्मीदवार के रूप में इन्हें प्रसिद्धी मिली थी। उन्होंने चुनाव आयोग को दिए शपथ पत्र में अपनी संपत्ति 600 करोड़ रुपये बताई थी।

स्टोनोग्राफर से अरबपति बनने की कहानी : एक मामूली स्टेनोग्राफर के रूप में करियर की शुरुआत करने वाले दीपक भारद्वाज की गिनती देश के सबसे अमीर नेताओं में होती थी। करीब 30 साल के अंदर उन्होंने 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जुटा ली। इस मुकाम तक पहुंचाने में मेहनत के साथ-साथ उनकी जमीन ने भी बेहद अहम रोल अदा किया है। एक बार एनबीटी के साथ बातचीत के दौरान खुद दीपक भारद्वाज ने कहा था कि करीब 30 साल पहले मैंने तीस हजारी में बतौर स्टेनोग्राफर काम शुरू किया था। भारद्वाज के मुताबिक उनके अधिकतर स्कूल के साथी आईएएस और आईपीएस बन गए थे, लिहाजा उन्हें अंदर ही अंदर जलन होती रहती थी। कुछ समय बाद उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और प्रॉपर्टी कारोबार में कूद गए।

इस बीच उनके पिता की जमीन और ससुर की जमीन का अधिग्रहण पालम एयरपोर्ट के लिए हो गया। इसके अलावा द्वारका, अंबरहाई, पोहचनपुर, भरथल और शाहबाद जैसे गांवों में उनकी जमीन थी। कुछ जमीन एनएच-8 के पास थी। इन जमीनों का अधिग्रहण आवासीय कॉलोनी और हाईवे के लिए कर लिया गया, जिससे उन्हें काफी मुआवजा मिला। इन पैसों को उन्होंने होटल और प्रॉपर्टी कारोबार में लगाना शुरू कर दिया। जमीन के इसी कारोबार की बदौलत दीपक भारद्वाज भी खासे अमीर हो गए। अभी हरिद्वार, दिल्ली, गुड़गांव रोड, मसूरी में उनका होटल का बिजनेस है। तमाम तरह की आवासीय और कामर्शियल योजनाएं भी चल रही हैं। (एनबीटी)

विधायक के दबाव में पत्रकार सुरेश गांधी को अपराधी बनाने में जुटी पुलिस

सपा सरकार में पत्रकारों पर जुल्‍म बढ़े हैं. पूरे राज्‍य में पत्रकारों पर हमले तथा पुलिसिया कहर लगातार जारी है. लोग अब यूपी सरकार की तुलना अनियंत्रित तथा अराजक सरकारों से करने लगे हैं. भदोही से खबर है कि पुलिस जनसंदेश टाइम्‍स के पत्रकार सुरेश गांधी के खिलाफ गुंडा एक्‍ट का मामला दर्ज करके उनकी तलाश कर रही है. पत्रकार का आरोप है कि पुलिस यह सब कुछ सपा के बाहुबली विधायक विजय मिश्र के इशारे पर कर रही है.

सुरेश ने अपने अखबार में पुलिस तथा विजय मिश्र के खिलाफ कुछ खबरें प्रकाशित की थी, जिससे ये लोग काफी कुपित थे. इसी का परिणाम था कि सुरेश गांधी के खिलाफ जौनपुर में व्‍यक्तिगत रंजिश में दर्ज कराए गए मुकदमे को आधार बनाते हुए पुलिस ने उनके विरुद्ध गुंडा एक्‍ट का मामला दर्ज कर लिया. आरोप है कि यह सब पुलिस ने स्‍थानीय सपा विधायक के दबाव में किया. इसके बाद से ही उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. 

सुरेश गांधी के घर पर भी गुंडा एक्‍ट की नोटिस चस्‍पा कर दी गई है. सूत्रों का कहना है कि नेताओं की रखैल बन चुकी . पुलिस सुरेश गांधी को जिलाबदर करने की भी तैयारी कर रही है पत्रकार को हिंदुस्‍तान जैसे तमाम अखबार रंगदार और अपराधी साबित करने में जुटे हुए हैं. इसका कारण है कि सुरेश गांधी इसके पहले हिंदुस्‍तान को ही अपनी सेवाएं दे रहे थे. बाद में जनसंदेश टाइम्‍स से जुड़ गए. इससे नाराज हिंदुस्‍तान जमकर बड़ी-बड़ी खबरें सुरेश गांधी के खिलाफ प्रकाशित कर रहा है.

पूर्वांचल में दल्‍लागिरी बन चुकी पत्रकारिता के चलते अन्‍य अखबार भी पत्रकार के साथ खड़ा होने की बजाय सिस्‍टम के साथ कदम ताल कर रहे हैं. जिस तरीके से एक साल के अंदर पुलिस ने पत्रकारों को प्रताडि़त किया है तथा फर्जी मामलों में फंसाया है उसकी कीमत सपा सरकार को चुकानी पड़ेगी. इस तरह की निरंकुश प्रशासन ने बसपा के हाथ से बागडोर छीनी थी, ऐसा ही हाल सपा का भी होता दिख रहा है. अगर अखिलेश यादव ने अनियंत्रित हो चुकी पुलिस पर लगाम नहीं कसी तो इसकी कीमत लोकसभा चुनावों में ही चुकानी होगी. 

पत्रकार भावेश हत्‍याकांड में थानाध्‍यक्ष और पांच सिपाही निलंबित

वाराणसी। मवैया निवासी पत्रकार भावेश पांडेय हत्याकांड में पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर एसएसपी ने थानाध्यक्ष समेत छह सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सोमवार को आईजी जीएल मीणा ने घटनास्थल का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने भी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही।

आईजी के निर्देश पर पत्रकार हत्याकांड में पुलिस की भूमिका की खुद एसएसपी ने जांच शुरू की। उन्हें पता चला कि भावेश के पिता तारकनाथ पांडेय की 20 साल पहले मौत हो गई थी। सावित्री के दो बेटे कोलकाता में ढाबा चलाते हैं। छोटा भावेश मां के साथ रहता था। विवाद की शुरुआत 28 दिंसबर 2012 को पत्रकार की चहारदीवारी सेंट्रल जेल के सिपाही परिवार द्वारा गिराने पर हुई। इस मामले में तहरीर देने पर जैनेंद्र पांडेय, आनंद पांडेय, दुर्गेश दूबे और कृष्ण कुमार उपाध्याय के विरुद्ध एनसीआर दर्ज हुआ था। एसडीएम सदर ने पैमाइश के बाद बताया था कि जमीन सावित्री की है। उन्होंने सारनाथ थानाध्यक्ष को विपक्षियों का कब्जा रोकने का निर्देश दिया था पर थानाध्यक्ष ने कब्जा रोकने की जगह जमीन को विवादित करार देते हुए धारा 145 के तहत कार्रवाई करने की रिपोर्ट भेज दी।

आईजी ने इस मामले में थानाध्यक्ष को सवालों के घेरे में खड़ा किया, जबकि एसएसपी ने थानाध्यक्ष तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। चर्चा थी कि इस मामले में सिपाहियों ने विपक्षियों से पैसे का लेनदेन किया था। इसी आधार पर बीट के पांच सिपाही नेपाल सिंह, आफताब आलम, लालजी यादव, संतोष कुमार मिश्रा और लक्ष्मण प्रसाद को भी निलंबित कर दिया गया। दूसरे पक्ष के कृष्णावतार उपाध्याय ने बताया कि इसी जमीन को 1995 में उसके मामा ने वसीयत की थी। इसी आधार उसने जमीन पांच लाख रुपये में जैनेंद्र को रजिस्ट्री कर दी थी। जांच से पता चला कि रजिस्ट्री बगैर पैसे के की गई थी। जमीन छुड़ाकर उसका आपस में बंटवारा करने के लिए यह नाटक किया गया था। सिविल न्यायालय ने रजिस्ट्री को पिछले वर्ष ही अवैध घोषित कर दिया था। (अमर उजाला)

सेबी के झटके से टूट चुके सहारा ने अमर उजाला में भी छपवाया पार्टी का विज्ञापन

दैनिक जागरण के बाद अब अमर उजाला ने भी सहारा श्री सुब्रत राय की सुपौत्री रोशना के अन्‍नप्रासन की एक रिपोर्ट छपी है. फोटो समेत छपी यह रिपोर्ट पूर्ण रूप से विज्ञापन और पेड न्‍यूज है. कल दैनिक जागरण ने पेड न्‍यूज छापी थी, आज अमर उजाला ने पेड न्‍यूज प्रकाशित की है. लेकिन इस की खास बात यह है कि इसमें कहीं भी विज्ञापन या पेड न्‍यूज नहीं लिखा गया है. इसमें भी पार्टी में आने वाली हस्तियों की फोटो कैप्‍शन के साथ प्रकाशित की गई है.

इस पार्टी में तमाम नेताओं-अभिनेताओं-खिलाडि़यों के साथ पीसीआई के अध्‍यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू भी पहुंचे हैं, जिनकी तस्‍वीर भी छापी गई है. यही काटजू हैं जो पेड न्‍यूज की खिलाफत मौका देखकर करते रहते हैं, पर क्‍या काटजू इस तरह की पेड न्‍यूज के खिलाफ भी कुछ बोलेंगे? सहारा समूह अन्‍नप्रासन के बहाने अपने ब्रांडिंग में जुटा हुआ है, जो सेबी से झटका खाने के बाद खतम हो चुकी है. संजय दत्‍त की माफी की वकालत करने वाले पीसीआई अध्‍यक्ष जस्टिस काटजू क्‍या पत्रकारिता को भ्रष्‍ट बनाने वाले इन समूहों के खिलाफ भी कुछ बोलेंगे?

वैसे संभावना कम ही है कि सहारा के इस पेड न्‍यूज के बारे में जस्टिस काटजू कुछ बालेंगे. एलिट वर्ग के पोषक माने जाने वाले काटजू पत्रकारों के लिए न्‍यूनतम डिग्री तय करने के तो हिमायती हैं, परन्‍तु अखबार मालिकों और पेड न्‍यूज करने वालों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने में उन्‍हें हिचक होती है. सवाल यही है कि अगर सहारा समूह के विज्ञापन या पेड न्‍यूज इन अखबारों में प्रकाशित हो रहे हैं तो फिर कहीं पर इम्‍पैक्‍ट या विज्ञापन लिखने में क्‍या बुराई थी. जाहिर है कि ऐसे मामलों में आने वाले पैसे बिना लिखा-पढ़ी के कमाया जा सकता है.

अगर संजय तब नादान थे तो 35 साल हो बालिग होने की उम्र!

फिल्मी पर्दे से असल जीवन में तक खलनायक साबित हुए संजय दत्त की सजा माफ करने के लिए एक मुहिम छिड़ी है। मुहिम का झंडा मायानगरी से लेकर नेतानगरी तक बुलंद है। हर किसी को संजय दत्त निर्दोष नजर आ रहे हैं। मुहिम को देखकर ऐसा लगता है कि मानो ये मुहिम किसी अपराधी की सजा माफ करने के लिए न होकर किसी देशभक्त को न्याय दिलाने के लिए चल रही हो। बड़बोलेपन के लिए मशहूर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को तो संजय दत्त निर्दोष होने के साथ ही नासमझ भी नजर आते हैं।

दिग्गी बाबू कहते हैं कि जिस वक्त संजय दत्त के घर से पुलिस ने हथियार बरमद किए थे उस वक्त संजय दत्त नासमझ थे और नासमझी में संजय दत्त ने ये गलती कर दी। दिग्विजय सिंह को संजय दत्त के इस अपराध के पीछे उनकी नादान उम्र का दोष नजर आता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि दिग्विजय जिस नादान उम्र की बात कर रहे हैं वो उस वक्त 33 साल थी और बकौल दिग्विजय सिंह इस उम्र में संजय दत्त नासमझ थे।

अगर दिग्विजय सिंह की बात मान लें कि 33 साल की उम्र में कोई व्यक्ति नासमझ या नादान होता है तो फिर तो दिग्विजय सिंह को एक कदम और आगे बढ़ाकर केन्द्र सरकार से बालिग होने की उम्र 35 साल करने की अपील करनी चाहिए क्योंकि अभी तो हमारे देश में बालिग होने की उम्र 18 साल है। जब 33 साल के व्यक्ति को इतनी समझ नहीं है कि अंडरवर्ल्ड के संपर्क में रहना, फोन पर अपराधियों से बात करना और अपने घर में अवैध हथियार रखना गैरकानूनी है तो फिर 18 साल से 33 साल के बीच के युवा को कितनी समझ होगी..!

फिर तो दिग्विजय सिंह को सरकार से ये भी मांग करनी चाहिए कि 33 साल से कम उम्र के उन सभी अपराधियों को माफ कर दिया जाए जिन्हें अदालत सजा सुना चुकी है लेकिन दिग्विजय सिंह ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि 33 साल तक की उम्र के सभी अपराधी कांग्रेसी रहे सुनील दत्त की औलाद जो नहीं हैं..!

कांग्रेस ने भले ही दिग्विजय सिंह के इस बयान से पल्ला झाड़ लिया हो लेकिन कांग्रेस में दिग्विजय सिंह वही बोलते हैं जो आलाकमान चाहता है..! भले ही बाद में दिग्विजय के बयान से कांग्रेस पीछा छुड़ाने का प्रयास करती दिखाई देती है लेकिन विवादित मुद्दों पर दिग्विजय का बयान तब तक मीडिया की सुर्खियां बटोर चुका होता है। मुझे तो ऐसा एक भी मौका याद नहीं आता जब दिग्विजय सिंह के बड़बोलेपन पर कांग्रेस आलाकमान ने सख्ती दिखाते हुए दिग्विजय सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई की हो।

जाहिर है ये दिग्विजय के बड़बोलेपन को कांग्रेस आलाकमान का मौन समर्थन नहीं तो और क्या है..? खैर सरकार के फैसलों पर विपक्ष की घेराबंदी पर तो दिग्विजय की बोली समझ में आती है लेकिन एक अपराधी के लिए माफी की अपील क्या दर्शाती है..? वो भी तब जब देश का सर्वोच्च न्यायालय अपराध साबित होने पर संजय दत्त को 5 साल कारावास की सजा सुना चुका है वो भी इस टिप्पणी के साथ कि संजय दत्त के अपराध की प्रकृति काफी गंभीर थी जो माफी लायक नहीं है।

बहरहाल संजय दत्त की सजा  माफी को लेकर मुहिम जारी है…कोई राष्ट्रपति को चिट्ठी लिख रहा है तो कोई राज्यपाल से मुलाकात कर रहा है लेकिन विभिन्न अपराधों में जेल में बंद लाखों अपराधी जिन्हें अदालत सजा सुना चुकी है उन तक अगर ये खबर पहुंच रही होगी तो एक सवाल उनके जेहन में भी जरूर उठ रहा होगा कि काश मैं भी एक फिल्म स्टार होता तो मेरे लिए भी कोई आवाज उठाता… मेरे अपराध को भी कोई नादानी कहता और एक दिन मेरे भी सारे गुनाह माफ होते और अपने परिवार के साथ मैं भी खुली हवा में सांस ले पाता..!

दीपक तिवारी

deepaktiwari555@gmail.com

देखें, दैनिक जागरण विज्ञापन फर्जीवाड़े से जुड़े परिवाद पत्र की मूल प्रतियां

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी माननीय सुरेन्द्र प्रताप सिंह के न्यायालय में दायर परिवाद- पत्र, जिसकी परिवाद संख्या-2638/2012 है, में संज्ञान के बिन्दु पर अदालती फैसले की तारीख आगामी 03 अप्रैल, 13 निर्धारित कर दी गई है।

इस बीच, पूरे विश्व के हिन्दी ई-पाठकों की मांग पर परिवाद-पत्र की मूल-प्रति इस समाचार के साथ प्रकाशित की जी रही है। दूरभाष पर लगातार मांग हो रही थी कि दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा के मुकदमे के स्वरूप को प्रकाशित किया जाए, जिससे बिहार के साथ-साथ झारखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य प्रदेशों में  बर्खास्त क्रांतिकारी मजदूर अपने-अपने जिलों में दोषियों के विरूद्ध अदालती कानूनी कार्रवाई कर सकें।

और तो और, देश के अनेक केन्द्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने भी परिवाद-पत्र की मूल प्रतियों को इन्टरनेट पर जारी करने की मांग की है। वे समझना चाहते हैं कि देश के शक्तिशाली कारपोरेट प्रिंट मीडिया हाउस के आर्थिक अपराध की बारीकियां आखिर क्या है? आर्थिक अपराध की बारीकियों को कानून के दायरे में किस प्रकार पिरोया गया है, वे लोग जानने को बेताब हैं। परिवाद-पत्र में वर्णित कानूनी पक्ष को समझने में यदि किसी पाठक को दिक्कत महसूस हो, तो वे बेहिचक कानूनविद् काशी प्रसाद और श्रीकृष्ण प्रसाद से दूरभाष नं0  09470400813 पर शाम 07 से शाम 9 बजे के बीच सम्पर्क कर सकते हैं। परिवाद-पत्र की मूल प्रतियां यहां स्कैन कर प्रस्तुत की जा रही हैं।

एसके प्रसाद की रिपोर्ट.

डा. जोशी के कार्यक्रम में साफ झलकी बनारसी पत्रकारिता की गुटबाजी

गिलट बाजार स्थित पत्रकारपुरम के लोकार्पण समारोह के आयोजन को लेकर पत्रकारों के दो गुटों में चल रही रार का असर समारोह के दौरान भी देखने को मिला। गत 24 मार्च को पत्रकारपुरम में आयोजित समारोह में खाली कुर्सियां तो इस बात की गवाही दे ही रही थीं, समारोह के मुख्य अतिथि सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने भी अपने भाषण के दौरान इस विवाद की ओर इशारा किया। उन्होंने बड़े ही शालीन तरीके से कह डाला कि लगाता है इन लोगों को भी वो रोग हो गया है। ये बोलने के साथ ही उन्होंने कहा कि समझदार के लिए इशारा ही काफी है।

विदित है कि इस विवाद का मुख्य कारण लोकार्पण समारोह के आयोजकों द्वारा पत्रकारपुरम के प्लॉट आवंटियों और वहां रहने वाले सभी पत्रकारों को विश्वास में न लिया जाना था। इसके पीछे अपना वर्चस्व बनाये रखने या यूं कहिये कि अपनी दुकानदारी चलाने की सोच रही होगी लेकिन इसने पत्रकारों को बांट कर रख दिया। इसका एहसास समारोह के दौरान साफ हो रहा था। बहुत सारे पत्रकार समारोह में आये ही नहीं थे। दरअसल पत्रकारपुरम के प्लॉट आवंटियों और वहां रहने वाले पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था पत्रकारपुरम विकास समिति है। इस रजिस्टर्ड संस्था के संयोजक श्री राकेश चतुर्वेदी और अध्यक्ष चेतन स्वरूप हैं। इन लोगों को दरकिनार कर काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष कृष्णदेव नारायण राय, महामंत्री राजेंद्र रंगप्पा, संघ के पूर्व अध्यक्ष योगेश गुप्त और उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष विनोद सिंह बागी ने लोकार्पण समारोह कराने की योजना बनाई ताकि पत्रकारपुरम के विकास का श्रेय खुद लिया जा सके।

जब इस बात की खबर विकास समिति के लोगों को हुई तो उनका खफा होना स्वाभाविक था। यही वजह थी कि लोकार्पण समारोह से एक दिन पहले पत्रकारपुरम में वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र सिंह के आवास पर हुई विकास समिति की बैठक में शामिल पत्रकारों में काफी हैरानी और गुस्सा नजर आया। उनको इस बात पर जबरदस्त आपत्ति थी कि लोकार्पण समारोह के निमंत्रण कार्ड पर एक निवेदक के निवेदक के रूप में योगेश कुमार गुप्त का नाम छपवाया गया है और उनको पत्रकारपुम विकास समिति से मिलते जुलते नाम पत्रकारपुरम समिति का संयोजक दर्शाया गया है। इस बात की खबर समारोह के मुख्य अतिथि सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी तक भी उनके प्रतिनिधि तथा अन्य स्थानीय भाजपा नेताओं व पत्रकारपुरम विकास समिति के जरिये पहुंच गयी थी। इससे डॉ. जोशी काफी कशमकश में थे लेकिन चूंकि निवेदकों में से एक पुराने भाजपाई श्री विनोद सिंह बागी (उपजा की वाराणसी इकाई के अध्यक्ष) थे इसलिए उन्हें लोकार्पण समारोह में आना ही पड़ा।

इस बात का जिक्र डॉ. जोशी ने समारोह में अपने भाषण के दौरान भी किया। उन्होंने मजाकिया लहजे में यहां तक कह दिया कि श्री विनोद सिंह बागी के बागी तेवर को देखते हुए ही मुझे यहां आना ही पड़ा। समारोह में आने के लिए उनका मेरे ऊपर काफी दबाव था। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारों की गुटबाजी की ओर इशारा भी किया। यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि डॉ. जोशी के मुख्य आतिथ्य में लोकार्पण समारोह होने का असली श्रेय श्री बागी को ही जाता है, ये बात अलग है कि यह श्रेय लूटने में काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष कृष्णदेव नारायण राय, महामंत्री राजेंद्र रंगप्पा पीछे नहीं रहे। योगेश गुप्त ने तो मंच से स्वागत भाषण करते हुए पत्रकारपुरम के विकास की गाथा कुछ इस प्रकार बतायी कि उससे लगने लगा कि उनके ही प्रयासों से यहां पत्रकारों को प्लॉट मिल पाये। उनके पूर्व काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष रहे विकास पाठक ने पत्रकारपुरम के विकास के लिए जो अथक प्रयास किये उसका जिक्र उन्होंने बहुत ही मामूली ढंग से किया। जबकि सच्चाई यह है कि विकास पाठक और उनके पूर्ववर्ती काशी पत्रकार संघ अध्यक्ष प्रदीप कुमार और संजय अस्थाना ने पत्रकारपुरम की स्थापना तथा वहां पत्रकारों को प्लॉट आवंटित कराने के लिए जबरदस्त काम किया था।  

यहां ये बात गौर करने लायक है कि पत्रकारों के इस कार्यक्रम में गिनती के ही पत्रकार मौजूद थे। कोई भी ऐसा चेहरा नहीं था जिसका पत्रकारपुरम को वजूद में लाने में अहम योगदान रहा हो। जहां पत्रकार के सदस्यों की संख्या ढाई सौ से ज्यादा है वहीं कुछ गिने-चुने पत्रकार ही कार्यक्रम का कवरेज करने आये थे। इनमें अमर उजाला से बृजेश सिंह, राष्ट्रीय सहारा से सौरभ अग्रवाल, आज से विनोद सिंह आदि मौजूद थे। दैनिक जागरण और आई नेक्स्ट से तो कोई नहीं आया था। कार्यक्रम में पत्रकारों की तुलना में भाजपाई ज्यादा थे। इन भाजपाइयों में प्रमुख रूप से मेयर रामगोपाल मोहले, विधायक श्यामदेव राय चौधरी, ज्योत्सना श्रीवास्तव, आद्या पांडेय, वीणा पांडेय, भाजपा के महानगर अध्यक्ष टीएस जोशी, भाजपा काशी प्रांत के अध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य, पे्रम कपूर, रामप्रकाश दुबे, देवेंद्र सिंह, सुधीर मिश्र, नवरतन राठी, नागेंद्र रघुवंशी आदि शामिल थे। लोकार्पण समारोह के दौरान योगेश एंड कंपनी का रूरल इंजीनियरिंग सर्विस (आरईएस) के अधिकारियों की खुशामद करना किसी के गले नहीं उतर रहा था।

(इनपुट क्‍लाउन टाइम्‍स)

”भास्‍कर पढ़कर खराब हो रही है हमारी हिंदी, देखें गलतियां ”

सर, हम दैनिक भास्कर के पाठक हैं, मगर अखबार में जिस तरह गलतियां हो रही हैं इससे लगता है कि अखबार पढ़ने से न केवल हम लोग बल्कि हमारे बच्चों की हिंदी भी खराब होगी और उन्हें गलत जानकारी मिलेगी. अभी २४ फ़रवरी को अखबार में भाई बहन की फोटो लगा कर उन्हें दंपति बना दिया गया था. अगले दिन भूल सुधार छापा गया. सर कुछ और गलतियों की तरफ आपका ध्यान दिलाना चाह रहा हूँ. दोनों गलतियों से संबंधित अखबार का पन्ना भी अटैच कर रहा हूँ. हालांकि इस तरह की गलतियां लगातार हो रही हैं.

पहली गलती २२ मार्च को छपी खबर की हेडिंग में है, हेडिंग में लिखा गया है- 'प्रधान सचिव को निर्देश लिखे जेनरिक दवाएं', जबकि खबर के अनुसार यहां 'प्रधान सचिव का निर्देश, लिखें जेनरिक दवाएं' होना चाहिए था. यह निर्देश खुद प्रधान सचिव ने दिया था..खबर में भी यही है. ऐसे ही २४ मार्च को मोगा भास्कर के पेज चार पर लगी खबर में हुआ मज़ाक भी देख लें. हेडिंग में ट्राईसिकल जबकि खबर में ट्राईसाइकिल लिखा गया है. सबसे बड़ा मज़ाक संस्था के नाम को लेकर किया गया है. संस्था का नाम है 'एंटी क्राइम एंड करप्शन इंडिया' मगर हेडिंग में लिखा गया है 'क्राइम एंड करप्शन इंडिया'. अब आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि भास्‍कर कैसे लोगों के हाथ में है.

स्‍वर्ण कुमार

swarnkumar5@gmail.com

सहारा इंडिया, सुब्रत राय को सेबी विज्ञापन मामले में नोटिस तामील

सहारा इंडिया द्वारा दिनांक 17 मार्च 2013 को प्रमुख समाचारपत्रों में प्रकाशित पूरे पृष्ठ के विज्ञापन को विधि-विरुद्ध बताती जनहित याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच द्वारा जारी नोटिस आज सहारा इंडिया तथा सुब्रत राय सहारा को उनके कपूरथला कार्यालय पर अधिवक्ता रोहित त्रिपाठी ने तामिल कराया. जस्टिस उमा नाथ सिंह और जस्टिस डॉ सतीश चंद्रा की बेंच ने आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर की याचिका पर यह नोटिस जारी दिया था. मामले की अगली सुनवाई 02 अप्रैल को होगी.

याचिका में एक निजी व्यक्ति और एक निजी संस्था द्वारा विधि द्वारा स्थापित संस्था सेबी के विरूद्ध विज्ञापन के माध्यम से कही आपत्तिजनक बातों को प्रथमद्रष्टया धारा 186 तथा 189 आईपीसी के अंतर्गत आपराधिक कृत्य और कंपनी क़ानून का उल्लंघन बताते हुए नियमानुसार कार्यवाही कराये जाने की मांग की गयी है.

इंदौर में सम्‍मानित होंगे मध्‍य प्रदेश के 15 चुनिंदा पत्रकार

इंदौर प्रेस क्लब, देश भर में सक्रिय मध्यप्रदेश के 15 चुनिंदा पत्रकारों को मीडिया अवॉर्ड-2013 से सम्मानित करेगा। 28 से 30 मार्च के बीच इंदौर में आयोजित होने वाले सार्क देशों के विशाल पत्रकार सम्मेलन में यह सम्मान प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों दिए जाएंगे। इस मौक़े पर प्रदेश के 5 वरिष्ठ पत्रकारों को लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाज़ा जाएगा।

सम्मान पाने वालों में आजतक के आलोक श्रीवास्तव और भुवनेश सेंगर, ज़ी न्यूज़ के प्रखर श्रीवास्तव और आकाश सोनी

आलोक श्रीवास्‍तव
के साथ राजेश बादल (राज्यसभा टीवी), अनिल जैन (नईदुनिया), प्रणय उपाध्याय (दैनिक जागरण), अनिल शर्मा (फ़्री प्रेस), निर्मल पाठक (हिंदुस्तान), अशोक वानखेडे (स्वतंत्र पत्रकार), शकील अख़्तर (इंडिया टीवी), किरण मोघे (लोकमत), विकास भदौरिया (एबीपी न्यूज़), निमिष कुमार दुबे (नेटवर्क-18) और संजय शर्मा (इंडिया न्यूज़) के नाम शामिल हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार बनवारी लाल बजाज, उमेश त्रिवेदी, कमल दीक्षित, कीर्ति राणा और मांगीलाल चौहान को पत्रकारिता में उऩके उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाज़ा जाएगा।

तीन दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्याटन केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी करेंगे। सार्क देशों के इस विशाल पत्रकार सम्मेलन में सौ से अधिक संपादकों और पत्रकारों के अलावा देश कई दिग्गज नेता भी शिरकत करेंगे।

बिहार पुलिस में बड़ा फेरबदल, कई जिलों के एसपी बदले गए

बिहार में पुलिस विभाग में जबर्दस्‍त फेरबदल किए गए हैं। कम से कम 100 से अधिक आईपीएस-पीसीएस अफसरों को इधर से उधर किया गया है। इस फेरबदल में सख्‍त इमेज वाले मनु महाराज पटना के एसएसपी बनाये गये हैं। मनु वर्तमान में रोहतास के एसपी थे। प्रोन्‍नति के बाद पटना के एसएसपी अमृतराज को मुजफ्फरपुर का डीआईजी बनाया गया है। सुनील मान सिंह खोपड़े पटना के नये आईजी होंगे। गणेश कुमार गया के एसएसपी होंगे। पंकज दाराद मुजफ्फरपुर के आईजी की कमान संभालेंगे। विनय कुमार मोतिहारी के नये पुलिस कप्तान बने हैं। राजीव मिश्रा लखीसराय की कमान संभालेंगे।

हरप्रीत कौर बेगूसराय की एसपी होंगी। एमआर नायक बेतिया के डीआईजी बने हैं। गुप्तेश्‍वर पांडेय बिहार राज्य खेल विकास प्राधिकार के एडीजी, आर मल्लार विजी आईजी (प्रोविजन) व केएस अनुपम डीआईजी (रेल) के पद पर पदस्थापित। हरि प्रसाद पटना के ग्रामीण एसपी, धुरत सायली जहानाबाद एसपी, चंदन कुमार कुशवाहा बीएमपी-16 कमांडेट, हिमांशु शंकर त्रिवेणी शिवहर एसपी व दीपक वर्णवाल जमुई एसपी के पद पर तैनात। किम को पूर्णिया, सुरेश प्रसाद चौधरी को वैशाली, शेखर कुमार को नवगछिया, आनंद कुमार सिंह को अरवल, सौरव कुमार को एसएसपी मुजफ्फरपुर, राजेश कुमार को एसएसपी भागलपुर, शिव कुमार झा को खगडि़या, विवेक कुमार को सिवान, विकास वर्मन को रोहतास, सत्यशवीर सिंह को भोजपुर व पुष्कझर आनंद को बांका एसपी का जिम्‍मा मिला। उपेन्द्र कुमार शर्मा दरभंगा के एसपी बने। गरिमा मल्लिक बीएमपी-2 की कमांडेंट बनीं।

पंकज कुमार राज बीएमपी-10 का कमांडेंट बनाया गया। अमित लोढ़ा डीआईजी सीआईडी व अनवर हुसैन डीआईजी दरभंगा बने। उमाशंकर सुधाशु को डीआईजी, एसटीएफ बनाया गया। उपेन्द्र कुमार सिन्हा पटना रेल एसपी बने। असगर इमाम कटिहार एसपी होंगे। रत्‍न मणि संजीव भभुआ एसपी की कमान संभालेंगे। निताशा गुडि़या अश्वसरोही दल की कमांडेंट होंगी। प्रदीप कुमार श्रीवास्तवव डीआईजी, विजिलेंस बने हैं। छत्रनील सिंह बीएमपी-14 को संभालेंगे। राजीव रंजन स्पेशल ब्रांच के एसपी होंगे। अवधेश कुमार बीएमपी के डीआईजी बने हैं। विनोद कुमार मुजफ्फरपुर के रेल एसपी होंगे। अनुपमा निलेकर आईजी मुख्यालय बनीं हैं। जितेन्द्र मिश्र कटिहार के रेल एसपी होंगे। भृगु श्रीनिवासन को आईजी, ट्रेनिंग बनाया गया। रामनारायण सिंह होमगार्ड के डीआईजी बने। सुकन पासवान विशेष शाखा में एसपी बने। सुनील कुमार बगहा एसपी होंगे। नवीन चंद्र झा मुंगेर एसपी की कमान संभालेंगे। सुधीर कुमार पोरिका सुपौल व पुष्कर आनंद बांका के एसपी बने। विनोद कुमार चौधरी गोपालगंज के एसपी बने। मिट्ठू प्रसाद सीआईडी भेजे गये। एस प्रेमलता बीएमपी-1 के कमांडेंट पद पर पदस्‍थापित।

पटना से वरिष्‍ठ पत्रकार ज्ञानेश्‍वर की रिपोर्ट.

कट्टरपंथियों को अमीना की ‘टॉपलेस’ चुनौती, भेजी गई पागलखाने

ट्यूनिश। कट्टरपंथियों के खिलाफ बेहद बोल्ड तरीके से आवाज उठाने वाली एक 19 साल की युवती ने ट्यूनिशिया में हलचल मचा दी है। कट्टरपंथियों को सबक सिखाने के लिए अमीना नाम की इस युवती ने कुछ दिन पहले फेसबुक पर अपनी टॉपलेस तस्वीर डाली थी। तस्वीर में उसने अपने चेस्ट और पेट पर कट्टपंथियों को सीधी चुनौती देते हुए लिखा था "F**k your morals' (भाड़ में गई तुम्हारी नैतिकता) और इसे फेसबुक पर पोस्‍ट कर दिया। कट्टरपंथियों के भारी दबाव के बाद अमीना को पागलखाने में डाल दिया गया है।

उधर, अमीना के समर्थन में अफ्रीका से लेकर यूरोप तक की महिलाएं उठ खड़ी हुई हैं। यूक्रेन में 2008 में बने फीमेन ग्रुप से जुड़ी महिलाएं अमीना के समर्थन में टॉपलेस होकर प्रदर्शन कर रही हैं। संडे को यूरोप और अरब देशों में भी महि‍लाओं ने अपने अपने तरीके से अमीना के समर्थन में अभियान चलाया। उधर, करीब 16 हजार लोगों ने हस्ताक्षर कैंपेन चलाकर अमीना को धमकी देने वाले कट्टरपंथियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अमीना के इस बेहद बोल्ड प्रदर्शन ने ट्यूनिशिया के कट्टरपंथियों को आगबबूला कर दिया है। तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट करने के दो दिन बाद ही अमीना के खिलाफ फतवा जारी कर दिया। उसे कोड़े और पत्थर से मारने की धमकी दी गई। ट्यूनिशिया के अखबार मुताबिक वहां के वहाबी सलाफी के मौलवी अल्मी अदेल ने बयान दिया कि अमीना को शरिया के मुताबिक सजा दी जानी चाहिए। उसे 80 से 100 कोड़े मारे जाने चाहिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे पत्थर मार-मार कर खत्म कर देना चाहिए।

जी न्‍यूज (चार) : बहुत हो गया सर…नौकरी से निकाल दीजिए लेकिन आप भी बचेंगे नहीं

जेट एयरवेज़ की छंटनी आपको याद है…और किंगफिशर के कर्मचारी की आत्महत्या की कोशिश…सारे चैनल अचानक से जनवादी हो गए थे…सबकी ओबी तैनात हो गई थीं और छतरियां तन गई थीं…लेकिन अब अपने ही बीच का एक साथी ज़िंदगी और मौत के बीच है…वो भी इसलिए कि बेवक्त और बेवजह उसकी छंटनी की गई…तो देखिए सम्पादकों को सांप सूंघ गया है…हां, गुनहगार भी तो साथी ही है न…सीनियर साथी, जब जूनियर साथी की ज़िंदगी से खेलता है…तो फिर मामला बिरादरी का नहीं, पद और कद का होता है…सीनियर-सीनियर एक साथ हो जाते हैं…याद रखें शोषक सत्ता का चरित्र एक सा ही होता है.

टीवी पर महान जनवादी हो जाने वाले सम्पादकों का असली चेहरा ज़्यादातर ऐसा ही है…केवल एक सम्पादक ज़िम्मेदार नहीं है, याद रखिएगा बाकी सम्पादक और उनकी चुप्पी भी ज़िम्मेदार है…आप शायद समझ नहीं पाएंगे लेकिन आने वाले दिनों में ये सारे मामले आपकी चूलें हिला देंगे….बहुत हो गया सर…नौकरी से निकाल दीजिए लेकिन आप भी बचेंगे नहीं…नहीं बचेंगे…सब कुछ बच गया तो रातों की नींद नहीं बचेगी…डर लगेगा जब बच्चे स्कूल जाएंगे…जब रात को अकेले घर लौटना होगा…जब सपनों में चेहरे आएंगे…हाथ जोड़ते चेहरे…नौकरी बचाने की गुहार करते चेहरे…स्कूल चोड़ते बच्चों के चेहरे…फटी साड़ी पहने औरतों के चेहरे…और हां फिर खून से रंगे अपने चेहरे…न जाने कौन कौन से चेहरे.

युवा पत्रकार मयंक सक्‍सेना के फेसबुक वॉल से साभार. 

जी न्‍यूज (तीन) : साख गिरने से आमदनी हुई कम, छंटनी से बैलेंस बनाने की हो रही कोशिश

जी न्‍यूज से खबर आ रही है कि यहां काम कर रहे कई विभाग के कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक रही है. कभी कम सैलरी के बावजूद अपने कर्मचारियों के लिए सबसे ज्‍यादा मुफीद जगह माने जाने वाला जी न्‍यूज समूह अब अपनी विश्‍वसनीयता खोता जा रहा है. इस चैनल को सबसे ज्‍यादा नुकसान जिंदल समूह के साथ विवाद होने के बाद पड़ा है. मार्केट में इस चैनल की साख बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके चलते चैनल की आमदनी पर भी बुरा असर पड़ा है.

बताया जा रहा है कि सुधीर चौधरी के संपादक बनकर आने तथा जिंदल को ब्‍लैकमेल करने वाले मामले में फंसने के बाद जी न्‍यूज की साख मार्केट में कम हुई है. इसका सीधा असर चैनल के रिवेन्‍यू पर पड़ा है. विश्‍वसनीयता खोने के चलते अब ज्‍यादातर ब्रांड जी न्‍यूज समूह से कन्‍नी काटने लगे हैं. इन परिस्थितियों में चैनल के खर्चे ज्‍यों के त्‍यों हैं पर आमदनी कम होती जा रही है. इसी का परिणाम है कि चैनल में छंटनी का दौर चलाया जा रहा है. पुराने लोगों की लिस्‍ट बनाकर उन्‍हें बाहर का रास्‍ता दिखाया जा रहा है.

सूत्रों का कहना है कि खर्च में कटौती करने के नाम पर पुराने लोगों को शिकार बनाया जा रहा है. प्रबंधन की नजर में ये ज्‍यादा सैलरी पाने वाले लोग हैं. ऐसे लोगों को बाहर का रास्‍ता दिखाकर खर्च में कमी की जा रही है, क्‍योंकि आमदनी बढ़ाने के रास्‍ते लगातार संकरे होते जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि अभी तो सिर्फ कैमरामैन में कार्यरत पुराने लोगों को बाहर किया गया है, जल्‍द ही पीसीआर, एडिटोरियल, स्‍टूडियो, एमसीआर तथा टेक्निकल विभाग से भी बड़े सैलरी पाने वालों को बाहर निकाले जाने की तैयारी है. ड्राइवरों तक को नहीं बख्‍शा जाने वाला है.

इसके पहले तमाम वरिष्‍ठ पदों पर कार्यरत लोग इस्‍तीफा देकर दूसरे चैनलों में चले गए. कई और पहले ही जाने को तैयार बैठे हैं. अंदर का माहौल बुरी तरह खराब हो चुका है. सुधीर चौधरी के आने के बाद से स्थितियां बनने से ज्‍यादा बिगड़ी हैं. चैनल के साख से लेकर कर्मचारियों के हित तक प्रभावित हुए हैं. बताया जा रहा है कि अमरीश के जहर खाने के बाद से जी न्‍यूज के कैमरामैनों में प्रबंधन के विरुद्ध जबर्दस्‍त गुस्‍सा है. अभी तक अन्‍य विभागों में कार्यरत लोगों को इसकी सूचना नहीं मिली है, पर आशंका है कि छंटनी के चलते अमरीश के जहर खाने की बात सामने आने के बाद जी न्‍यूज चैनल में तनाव और बढ़ सकता है. 

जी न्‍यूज (दो) : यह रही छंटनी के शिकार होने वाले कैमरामैनों की लिस्‍ट

सुधीर चौधरी के संपादक बनकर आने के बाद से जी न्‍यूज लगातार मुश्किलों से घिरता जा रहा है. हर दिन एक नई परेशानी जी न्‍यूज को घेर रही है. अभी जिंदल विवाद से ठीक से छुटकारा भी नहीं मिला था कि अब एक कैमरामैन के जहर खा लेने के बाद जी न्‍यूज नई परेशानियों से घिरता दिख रहा है. खबर है कि छंटनी का शिकार होने के बाद अमरीश ने यह कदम उठाया है. वे कई वर्षों से जी न्‍यूज को अपनी सेवाएं दे रहे थे.

जी न्‍यूज प्रबंधन ने पिछले कुछ दिनों के अंदर जिन कैमरामैनों से इस्‍तीफा मांगा है उसमें नितिन भटनागर, अली अरमान, राजेंद्र सिंह, चंदर भंडारी, अविनाश निगम, राजू कुमार, सोनी कुमार, हिमांशु पांडेय, अवनीश पवार तथा एक अन्‍य कैमरामैन शामिल है, जिसका नाम पता नहीं चल पाया है. खबर है कि इन सभी से प्रबंधन की तरफ से कैमरा हेड पीजे मैथ्‍यू ने इस्‍तीफा मांगा. किसी को भी निकाले जाने का कारण नहीं बताया गया. इन सभी कैमरामैनों को धमकी दी गई कि अगर ये अपना इस्‍तीफा नहीं सौंपे तो इन्‍हें निकाल दिया जाएगा.

बताया जा रहा है कि कई कैमरामैनों ने प्रबंधन को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया है तथा वो नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं. छंटनी की लिस्‍ट में शामिल कैमरामैनों में कई तो पिछले सत्रह सालों से जी न्‍यूज को अपनी सेवाएं दे रहे थे. यानी अधिकांश लोग जी न्‍यूज की लांचिंग के समय से ही जुड़े हुए थे. सूत्रों का कहना है कि इनमें से निकाले जाने का कारण किसी को नहीं बताया गया. किसी कैमरामैन ने पूछा भी तो उनको जवाब देने की बजाय बस इस्‍तीफा देने को कहा गया. खबर है कि इस छंटनी से जी न्‍यूज में आतंरिक तौर पर जबर्दस्‍त आक्रोश है.

सूत्रों का कहना है कि जहर खाने वाले अमरीश पवार भी लंबे समय से जी न्‍यूज के साथ जुड़े हुए थे. सूत्रों का कहना है कि जी न्‍यूज-जिंदल विवाद प्रकरण में छत्‍तीसगढ़ के कई खदानों का कवरेज अमरीश ने अपने जान पर खेल कर किया था. सूत्रों का कहना है कि अमरीश को एक स्टिंग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई थी, जिसमें उन्‍हें सफलता नहीं मिली इसके बाद से ही उनके ऊपर प्रबंधन की तलवार लटक रही थी. बताया जा रहा है कि कैमरामैनों को निकाले जाने के बाद अन्‍य विभागों में भी छंटनी की तैयारी की जा रही है.

जी न्‍यूज (एक) : छंटनी से क्षुब्‍ध कैमरामैन अमरीश पवार ने खाया जहर, हालत गंभीर

जी न्‍यूज से बड़ी खबर आ रही है. चैनल के एक कैमरामैन अमरीश पवार ने जहर खा लिया है. उनकी हालत क्रिटिकल बनी हुई है. उन्‍हें गाजियाबाद के यशोदा हास्‍पीटल में भर्ती कराया गया है. जहां डाक्‍टर उनको बचाने में लगे हुए हैं. खबर है कि जी न्‍यूज प्रबंधन ने अमरीश समेत लगभग दस कैमरामैनों से जबरिया इस्‍तीफा मांगा था. सूत्रों का कहना है कि आज अमरीश से भी जबरदस्‍ती इस्‍तीफा देने को कहा गया. उन्‍हें धमकी दी गई कि अगर उन्‍होंने इस्‍तीफा नहीं दिया तो निकाल दिया जाएगा.

इस घटना के बाद अमरीश ऑफिस से निकल गए तथा कहीं जाकर जहर खा लिया. अचानक उनकी हालत बिगड़ने के बाद परिवार वालों ने उन्‍हें एक निजी चिकित्‍सक के यहां दिखाने ले गए. वहां जहर खाने की सूचना मिलने पर चिकित्‍सक ने गाजियाबाद के यशोदा हास्‍पीटल के लिए रेफर कर दिया. अमरीश की हालत गंभीर बनी हुई है. उन्‍हें गहन चिकित्‍सा कक्ष में रखा गया है. अमरीश जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं. सूचना मिलते ही अमरीश को जानने वाले तमाम लोग यशोदा हास्‍पीटल पहुंच रहे हैं.

बताया जा रहा है कि अमरीश लंबे समय से जी न्‍यूज को अपनी सेवाएं दे रहे थे. जी-जिंदल प्रकरण के दौरान कोल ब्‍लाक आबंटन का कवरेज छत्‍तीसगढ़ जाकर अमरीश ने ही किया था. सूत्रों का कहना है कि अचानक इस्‍तीफा मांगे जाने के बाद अमरीश डिप्रेशन में आ गए थे. इसके बाद वे ऑफिस से निकल गए तथा जहर खा लिया. अमरीश के जहर खाने की सूचना के बाद जी न्‍यूज प्रबंधन के हाथ-पांव भी फूले हुए हैं. अभी जिंदल प्रकरण में फंसा समूह एक और मुसीबत के मुहाने पर खड़ा दिखाई पड़ रहा है. 

शहीद दिवस पर पत्रकारों ने मुंबई में निकाली रैली

नवी मुंबई : शहीद दिवस पर सैकड़ों लोगों ने वाशी रेल्वे स्टेशन से शिवाजी चौक तक कैंडल मार्च जुलूस निकालकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विशेष कर नवी मुंबई के पत्रकारों के नेतृत्व में निकली गयी इस रैली में सैकड़ों नागरिकों ने भाग लिया। २३ मार्च शहीद दिवस के रूप में देश भर में बनाया जाता है शनिवार को शहीद दिवस के अवसर पर शहीद नमन व् जनजागृति समिति के माध्यम से वाशी स्टेशन से शिवाजी चौक तक कैंडल मार्च की रैली निकालकर भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी गई।

इस दौरान प्रो. केशर सिंह के अलावा कंचन टोडी इस रैली के आयोजक शहीद नमन समिति के समन्वयक नागमणि पाण्डेय साया समाजिक संस्था के अध्यक्ष जसपाल सिंह, पत्रकार दिनेश पाटिल, रमाकांत पाण्डेय, नितिन पड़वल, राकेश श्रीवास्तव, विशाल मल्होत्रा, समाजसेविका प्रियंका धवन, संतोष पाण्डेय सहित सैकड़ों देश भक्त रैली में उपस्थित थे। इस दौरान इस रैली के आयोजक शहीद नमन व जनजागृति समिति के समन्यवक नागमणि पाण्डेय और जसपाल सिंह ने बताया कि देश में युवाओ संख्या अधिक होने के बावजूद युवा देश के लिए आगे आने में हिचकिचा रहे हैं। देश के लिए शहीद हुए देश भक्तों के प्रति उनमें जन जागरण नहीं है। इस लिए आज के समय में देश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के प्रति युवा को आगे आने के लिए उन में जनजागृति करने के लिए इस रैली का आयोजन किया गया है।

नागमणि ने बताया कि इस रैली के माध्यम से शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव के संदेश युवाओं तक पहुंचने के लिए पिछले ७ वर्षों से इस रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस बीच कुछ लोगों ने शहीद भगत सिंह सुखदेव सिंह के बारे में अपनी अपनी राय व्‍यक्त की। वहीँ शाम को शिवाजी चौक पर रैली पहुँचने पर लोगों ने स्वागत किया और सांस्कृतिक कार्यक्रम व भजन पेश किया गया। 

मीडिया को प्रतिकूल प्रभाव फैलाने वाली खबरों से बचना चाहिए : शंकराचार्य

भोपाल। कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जगदगुरू स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने कहा है कि मीडिया को समाचारों की कवरेज करते समय प्रतिकूल प्रभाव फैलाने वाली खबरों से बचना चाहिए। यदि मीडिया की कवरेज में गड़बड़ होगी तो समाज में भी वैसी ही गड़बड़ व्याप्त हो जाएगी। अतः मीडियाकर्मियों का धर्म है कि वे समाचारों के प्रत्येक पक्ष की जांच पड़ताल करके ही उनका प्रसार करे।

शंकराचार्य आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय  पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में 'पत्रकारिता का धर्म' विषय पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे। शंकराचार्य के शब्दों में सोच-समझकर और जनहित को सामने रखकर ही समाचार लिखे जाने चाहिए और समाचार ऐसे हों जिनसे देश और समाज का हित हो। सनसनी और हिंसा को बढ़ावा देने वाले समाचारों के प्रसार से यथासंभव बचना चाहिए।  विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्रद्धेय शंकराचार्य जी ने कहा कि देश में शांति बनाए रखने की बहुत आवश्यकता है। मीडिया देश में अहिंसा और शांति का वातावरण बना सकता है। वर्तमान संदर्भ में धर्म की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म वह है जो हमारी वैदिक सनातन संस्कृति ने हमें प्रदान किया है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि श्रद्धेय शंकराचार्य जी ने सूत्र रूप में हमें वे बातें बताईं हैं जो मीडिया और पत्रकारिता कर्म को और बेहतर कर सकती है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी की बातें आज टेलीविजन मीडिया पर विशेष तौर पर लागू होती हैं।

इस उदबोधन के उपरांत विश्वविद्यालय  में होली मिलन समारोह का आयोजन  किया गया। इस पर चंदन का टीका लगाकर सभी ने एक दूसरे  को होली की बधाइयां दी।  इस अवसर पर विश्वविद्यालय  के कुलपति प्रो. बृज किशोर  कुठियाला के अतिरिक्त, रेक्टर प्रो. रामदेव भारद्वाज, कुलसचिव  डॉ. चंदर सोनाने, विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. श्रीकांत सिंह, पी.पी. सिंह, डॉ. पवित्र श्रीवास्तव, संजय द्विवेदी, पी. शशिकला, सुरेन्द्र पॉल, लाल बहादुर ओझा, के साथ सहायक कुलसचिव डॉ. अविनाश वाजपेयी, वित्ताधिकारी रिंकी जैन के अलावा कर्मचारी एवं विद्यार्थी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन संदीप भट्ट और डॉ. मोनिका वर्मा ने किया।

विधायकों की गुंडागर्दी (सात) : वाह रे न्‍याय, मार खाने वाले एपीआई सचिन को सस्‍पेंड किया गया

 मुंबई। महाऱाष्ट्र विधानसभा में जिस पुलिसवाले की पिटाई विधायकों द्वारा की गई थी उसे सस्पेंड कर दिया गया है। सचिन सूर्यवंशी नाम के इस एपीआई को शुरुआती जांच पूरी होने तक सूर्यवंशी को निलंबित किया गया है। पुलिस अधिकारी से हुई मारपीट की घटना की जांच के लिए एक कमेटी का भी गठन किया गया है। विधानसभा सदस्यों की एक कमेटी गठित की गई है। बांद्रा-वर्ली सी-लिंक पर हुई घटना से लेकर विधानसभा में हुई घटना तक सभी घटनाओं की ये कमेटी जांच करेगी।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा में एपीआई सूर्यवंशी से मारपीट करने वाले विधायक राम कदम और क्षितिज ठाकुर को जमानत मिल गई है। उधर, विधायकों के निलंबन के मामले मे सभी दलों के विधायकों का लगातार चौथे दिन भी हंगामा जारी रहा। संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन पाटील ने निलंबन के मामले में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, सभी पार्टियों के दल प्रमुख और नेता विपक्ष के साथ जल्द ही बैठक लेने का आश्वासन दिया। अब जब विधायकों की जांच कमेटी गठित की गई है तो सचिन को कितना न्‍याय मिलेगा इसकी कल्‍पना करना मुश्किल नहीं है।

दरअसल, एक विधायक की गाड़ी का चालान काटने की वजह से पुलिस अफसर की पिटाई की गई थी। पिछले गुरुवार को ये मुद्दा विधानसभा में भी गूंजा। मांग की गई कि अगर विधायकों को निलंबित किया गया है तो फिर पुलिस अफसर सचिन सूर्यवंशी को क्यों निलंबित नहीं किया गया। कुल 5 विधायकों के खिलाफ पुलिस अफसर से मारपीट का आरोप लगा था। इसके बाद आरोपी सभी 5 विधायकों को साल भर के लिए विधानसभा से सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन एफआईआर में लिखा गया है कि राम कदम और क्षितिज ठाकुर के अलावा 15-16 लोगों ने पिटाई की।

औरंगाबाद में नक्‍सलियों की गोलियों से बाल बाल बचे इंडिया न्‍यूज के धीरज पांडेय

औरंगाबाद से खबर है कि इंडिया न्‍यूज के पत्रकार धीरज पांडेय नक्‍सलियों की गोली से बाल बाल बच गए. गोलियों के बीच भी उन्‍होंने किसी तरह अपने काम को निपटाया अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वहन किया. जानकारी के अनुसार औरंगाबाद के देव थाने महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित चांदपुर मोड़ के समीप नक्‍सलियों ने शाम को आठ बजे जमकर उत्‍पात मचाया. नक्‍सलियों ने पर मौजूद पांच बाइक और एक सवारी गाड़ी को जला दिया.

इसकी सूचना धीरज पांडेय को भी मिली. वे तत्‍काल कवरेज के लिए निकल पड़े. वे अभी कवरेज कर ही रहे थे कि नक्‍सलियों ने उनको लक्ष्‍य करके कई राउंड फायरिंग शुरू कर दी. किसी तरह एक दीवार की आड़ लेकर धीरज गोलियों का शिकार होने से बच गए. हालांकि बाद में हिम्‍मत दिखाते हुए धीरज ने जलती गाडि़यों का लाइव कवरेज किया.

जम्‍मू से प्रकाशित Daily Excelsior का बहिष्‍कार करेंगे हॉकर

जम्मू, कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर जम्मू के हाकरों ने यहाँ के प्रमुख अंग्रेजी अख़बार Daily Excelsior के बहिष्कार का निर्णय लिया है. पाठकों व विज्ञापनदाताओं को इसकी जानकारी देने के लिए एसोसिएशन ने आज Daily Excelsior में एक पम्पलेट भरकर ग्राहकों को वितरित किया है.

जम्मू प्रोविंस न्यूजपेपर वेंडर एशोसिएशन के अध्यक्ष आनंद शर्मा (काका) व महामंत्री पवन कुमार गुप्ता ने "न्याय मांगना अगर बगावत है, तो समझो हम भी बागी हैं" शीर्षक से प्रकाशित अपने पत्र में  आम पाठकों को अपनी परेशानियों को उजागर करते हुए अपील की है कि वे उनके इस बहिष्कार का समर्थन अवश्य करें.

हिंदुस्‍थान समाचार को पत्रकारों की जरूरत, अंतिम तिथि 28 मार्च

देश के भीतर कार्यरत न्यूज एजेंसियों में अभी तक चौथे पायदान रही हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजें​सी ने पिछले एक वर्ष में सर्वाधिक छोटे न्यूज पेपरों को सब्सक्राइबर बनाकर दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। बढ़ते काम ने इस न्‍यूज एजेंसी पर दबाव बना दिया है, जिसके बाद प्रबंधन ने कई पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी ने नयी नियुक्तियों के लिए विज्ञापन दिया है। इसके लिए आवेदन की आखिरी तारीख 28 मार्च रखी गई है।

हिंदुस्‍थान समाचार को संपादक, समन्‍वय संपादक, विशेष संवाददाता, उपसंपादक और संवादाताओं की जरूरत है। आज भी भारत में पीटीआई सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी के रूप में स्थापित है और जिसके बाद यूएनआई का स्थान बनता है और फिर तमाम अन्य न्यूज एजेंसियां है, जिसमें कुछ विजअल समाचार भी प्रेषित करती है। पीटीआई अपने खबरों को अंग्रेजी में देती है और उसी की भाषा हिन्दी में समाचार देती है। इसी प्रकार यूएनआई की वार्ता सेवा हिन्दी में खबर देती है। लेकिन ​अभी तक चौथे पायदान पर रही हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी ग्यारह भाषाओं में खबरें देती है ​और जिसके कारण उसके अखबारों की संख्या क्षेत्रीय भाषायी अखबारों में बढ़ गयी है। अब यह एजेंसी दूसरे पायदान पर जा पहुंची हैं।

”बेनी प्रसाद वर्मा का बेटा राकेश वर्मा तस्‍कर है और तस्‍करी में लिप्‍त रहा है”

लखनऊ। कांग्रेस की चापलूसी करके और मुलायम सिंह को गाली देकर करोड़ों रुपये स्टील मंत्रालय से डकारने वाले केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का पूरा परिवार तस्करी करता था। उसका बड़ा बेटा राकेश वर्मा खुद बाराबंकीकी में एक बार तस्करी करते हुये पकड़ा गया था। मुलायम सिंह को गुंडा और लुटेरा बताने वाले यह केन्द्रीय मंत्री यह भूल गये कि उन्हीं के रहमो-करम पर वह राजनीति के पायदान से शिखर तक पहुंचे हैं। मुलायम के पैर धो कर भी अगर यह मंत्री रोज सुबह से शाम तक पिये तो भी कम होगा।

मेरा साफ कहना है कि जिस व्‍यक्ति ने इसको राजनीति में लाल बत्ती देने का काम किया हो उसी को गरियाना कहां का न्याय है। बेनी से गाली दिलवाई गई है ऐसा मेरा मानना है। बेनी ने जिस तरह से राजधानी लखनऊ के झूलेलाल पार्क में समाजवादियों के कार्यकर्ताओं को कमीशन खाने वाला ब्यान दिया है उससे यह दर्शाता है कि बेनी को कांग्रेस के हाईकमान से कोई डांट नहीं पड़ी है। भले ही मुलायम सिंह ने सोनिया गांधी द्वारा हाथ जोड़कर मामले में माफी मांगने की बात की हो लेकिन मेरा मानना है कि लोकसभा चुनाव के पहले कई बार कांग्रेसी के बड़े नेता बेनी से मुलायम सिंह पर हमले बुलवाते रहेगें। बेनी को जवाब अब नेता जी मुलायम सिंह को नहीं देना चाहिये। इससे बेनी की हैसियत और बड़ी दिखाई देने लगती है। बेनी को पागलपन का दौरा भी चढ़ता है।

बेनी के लिये जिस तरह से सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बयान दिया है वह इसी के लायक हैं। सपा के बड़े नेताओं को बेनी के पागलपन वाले ब्यानों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिये। बेनी बाबू पागल के साथ-साथ लगता है कि सठिया भी गये हैं। लगता है कि बेनी भूल गये कि पहली बार उन्हें प्रदेश में कैबिनेट मंत्री पीडब्लूडी किसने बनाया। इन्हीं मुलायम सिंह ने बेनी को जमीन से उठाकर आसमान में नम्बर दो का मंत्री अपनी सरकार में बनाया। उसके बाद केन्द्र में संचार मंत्री भी बेनी को मुलायम सिंह ने बनवाया। आज वही मुलायम सिंह अब गुंडे व लुटेरे हो गये हैं। बेनी ने जिस तरह से मुलायम सिंह को आतंकी का संरक्षक बताया यह बात काफी उस दिवालिये पन का उदाहरण है, जब कोई पूरी तरह से अपना मानसिक संतुलन खो देता है।

बेनी ने जिस तरह से स्टील मंत्रालय में भ्रष्टाचार करके उसका पूरा खजाना बारावंकी तथा गोण्डा के विकास के नाम पर अपने परिवार के नाम कर दिया है, अगर इसकी जांच सही तरह से करवा ली जाये तो अरबों रुपये की संपत्ति बेनी के परिवार के नाम मिल जायेगी। मेरा साफ मानना है कि बेनी ने जिस तरह से स्टील मंत्रालय में अरबों रुपये का भ्रष्टाचार किया है उसकी सीबीआई जांच होनी चाहिये। लेकिन कांग्रेस उनकी जांच न करा कर मुलायम पर राजनैतिक दवाब लोकसभा चुनाव के पूर्व बनाने का काम करेगी। मुलायम को बेनी की किसी भी बातो का जवाब स्वंय नहीं देना चाहिये। इससे बेनी का राजनेतिक कद बढ़ जाता है। मेरे पास जो बेनी की जानकारी है उसके मुताबिक बेनी का पूरा परिवार तस्करी के काम में लिप्त है। बेनी के लड़के से लेकर खुद बेनी पहले बाराबंकी से तस्करी करके अपना जीवन यापन करते थे। कई बार लालबत्ती की गाड़ी में तस्करी का सामना ले जाकर उसकी डिलेवरी दिल्ली व कानपुर में दी गई है।

बेनी ने जिस तरह से मुलायम पर राजनैतिक हमला न बोलकर व्‍यक्तिगत हमला बोला है वह काफी निदंनीय है। मुलायम को अब किसी भी सूरत में बेनी को माफ नहीं करना चाहिये। इसके साथ ही कांग्रेस के उन इरादों को भी भांप कर चलना चाहिये जो कांग्रेस बेनी से उन्हें गालियां दिलवा कर अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती है। मुलायम सिंह को बेनी के मामले पर कांग्रेस को दो टूक जवाब देकर सरकार से समर्थन वापस ले लेना चाहिये। इसके साथ ही जब तक कांग्रेस बेनी को पद से न हटा दे तब तक सपाइयों को मुलायम के खिलाफ दी गई टिप्पणी पर अपना आंदोलन सड़कों पर जारी रखना चाहिये। मेरा साफ मानना है कि मुलायम एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष है। न कि कोई छोटे-मोटे नेता। बेनी की हैसियत मुलायम के सामने कुछ भी नहीं है। इस लिये मुलायम को कांग्रेस की अंदरूनी उस मानसिक स्थित को भांपना चाहिये जो उनसे केन्द्र की सरकार के लिये समर्थन भी लिये रहना चाहती है और अपने नेताओं से उन्हें गालियां भी दिलवाती रहती है। मेरा साफ मानना है कि अगर इस मुद्दे पर सपा पीछे हट गई तो आने वाले समय में बेनी मुलायम पर और बड़ा हमला करके गाली गलौज की स्थिति को मंच के माध्यम से फिर जन्म देते रहेंगे। बेनी पागल हो गये है इसकी भी जांच सपा के नेताओं को डाक्टरों से करवानी होगी। इसके साथ ही अखिलेश सरकार से मेरी मांग है कि बेनी के लड़के राकेश वर्मा को मंत्री रहते जब तस्करी के आरोप में लिप्त पाया गया था और मंत्री पद से हटाया गया था उसकी पूरी जांच फिर से होनी चाहिये, तब पूरे देश को पता चल जायेगा कि मुलायम लुटेरा और गुंडा है कि बेनी वर्मा व उसका लड़का तस्कर है।

मैं जिस घटना का जिक्र कर रहा हूं उस घटना की जांच कराई जाये जिससे सच सामने आ जाये। मेरा साफ मानना है कि अगर यह परिवार वाकई में तस्करी में लिप्त रहा है तो इसकी जांच कराकर उस पर आगे की कार्रवाई भी करनी चाहिये। बेनी को उनके इरादों में कामयाब न होने देने के लिये जरूरी है कि समाजवादी पार्टी उन पर कोई न कोई कठोर कदम अवश्य उठाये, जिससे मुलायम सिंह के सम्मान को सही मायनों में बनाये रखने में कामयाबी मिलेगी। अगर इस नेता पर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में कोई नया विवादास्पद व गंभीर बयान फिर बेनी की जुबान से प्रदेश व देश की राजनीति में सुनने को मिल जायेगा। मैं जो आरोप बेनी के परिवार व बेटे पर तस्करी का लगा रहा हूं वह पूरी तरह से ठोस आरोप है। इस पर मुझे जो सूत्रों से जानकारी मिली है उसे मैं खबरों के माध्यम से भी पाठकों तक पहुंचाने का काम अवश्य करूंगा।

समाजवाद का उदय के संपादक प्रभात त्रिपाठी की रिपोर्ट. यह खबर उनके अखबार में प्रकाशित हो चुकी है.

खबर चलाने वाले तह तक जाए मीडिया और पत्रकार : अखिलेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विपक्ष और मीडिया पर सरकार को कानून-व्यवस्था के नाम पर बदनाम करने का आरोप लगाया. अखिलेश ने प्रेस को किसी भी मामले पर खबर चलाने से पहले उसकी तह में जाने की सलाह दी. मुख्यमंत्री ने एक निजी स्कूल के उद्घाटन समारोह में कहा ‘बड़ा शोर मच रहा है कि उत्तरप्रदेश की कानून-व्यवस्था खराब है. लेकिन आप बताएं कानून-व्यवस्था कहां खराब है. बस एक घटना हो जाए तो टीवी चैनलों और अखबारों को खबर मिल जाती है.’

उन्होंने कहा ‘अब अखबार को बेचना है तो हेडिंग बनानी है. चैनल वालों को ब्रेकिंग न्यूज चाहिये.विपक्ष के नेताओं को भी मौका चाहिये.इसमें सच्चाई कम और प्रचार ज्यादा है.सच्चाई यह है कि आपकी सरकार के पास जो उपलब्धियां हैं उनका कोई मुकाबला नहीं कर सकता.’ अखिलेश ने कहा कि सरकार किसी की भी हो, वह सभी विपक्षी पार्टियों और मीडिया के सामने अकेली निशाने पर रहती है. विपक्ष छोटी सी बात को भी मुद्दा बनाने की कोशिश करता है और उसके नेताओं के किसी भी तरह के बयान को मीडिया ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बना देता है.

उन्होंने मीडिया को सलाह दी कि वह किसी भी खबर को प्रकाशित-प्रसारित करने से पहले मामले की तह में जाए. अखिलेश ने कहा कि प्रदेश के पुलिस विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की खासी कमी के कारण ही कानून-व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है. सरकार इस कमी को पूरा करेगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश तब तक प्रगति नहीं करेगा जब तक राज्य में स्वास्थ्य तथा शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं होगी. इसलिये राज्य सरकार स्वास्थ्य तथा शिक्षा पर खासा ध्यान दे रही है. मुख्यमंत्री ने डाक्टरों की कमी को प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में व्याप्त खामियों की बड़ी वजह करार दिया और कहा कि सरकार जल्द ही चिकित्सकों की भर्ती करके स्थितियां ठीक करेगी. (सहारा)

डीएम साहब पहले समलैंगिक संबंध बनाते धरे गए, अब महिला का यौन शोषण किया!

भोपाल। इनसे मिलिए यह हैं श्योपुर के कलेक्टर साहब ज्ञानेश्वर पाटिल। इनका और विवादों का चोली-दामन-सा साथ रहा है। हां, इनसे जुड़े विवाद कुछ अलग तरह के होते हैं। वर्ष 2009 में ज्ञानेश्वर पाटिल जब पंचायत विभाग में थे, तब एक पंचायत सचिव के साथ समलैंगिक संबंध बनाते रंगे हाथों धरे गए थे। अब उन पर श्योपुर के जिला शिक्षा केंद्र के राजीव गांधी मिशन के तहत डाटा एंट्री का काम करने वाली महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। यह मामला इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में है। महिला ने इस मामले की शिकायत मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग में की है।

वर्ष 2009 में पंचायत सचिव के साथ समलैंगिक संबंध बनाने के आरोप में फंसने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। उसके बाद से वे लूप लाइन में थे। दरअसल, आईएएस एसोसिएशन इनकी बहाली चाह रही थी, जबकि पंचायत सचिव संगठन आईएएस को बर्खास्त करने की मांग पर अड़ा था। हालांकि, उस समय तक यही माना जाता रहा था कि पाटिल पर पंचायत सचिव द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं, लेकिन श्योपुर की घटना के बाद अब कोई भी उनके पक्ष में मुंह खोलने को तैयार नहीं है।

श्योपुर के जिला शिक्षा केंद्र के राजीव गांधी मिशन के तहत डाटा एंट्री का काम करने वाली एक महिला ने कलेक्टर ज्ञानेश्वर पाटिल पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। इस मामले का संज्ञान लेते हुए आयोग ने चंबल संभाग के कमिश्नर से जांच रिपोर्ट मांगी थी। चंबल कमिश्नर ने स्वयं जांच न करते हुए कलेक्टर से ही पूछ लिया। इस पर नाराज होते हुए आयोग ने चंबल संभाग के कमिश्नर को फटकार लगाई। आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 15 दिन के अंदर इस मामले की रिपोर्ट मांगी है। इधर त्वरित न्याय न मिलने के कारण महिला ने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका लगाई। इस मामले में हाईकोर्ट ने पांच लोगों को नोटिस जारी किया है।

मानवाधिकार आयोग के संयुक्त संचालक जनसंपर्क रोहित मेहता ने बताया कि श्योपुर के जिला शिक्षा केंद्र के राजीव गांधी मिशन के तहत डाटा एंट्री का काम करने वाली महिला ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी कि श्योपुर कलेक्टर ज्ञानेश्वर बी पाटिल उसके साथ अश्लील हरकत करते हैं। वो उस पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। कलेक्टर की मांग पूरी न करने के कारण कलेक्टर के कहने पर राज्य शिक्षा केंद्र ने उन्हें पांच माह से वेतन नहीं दिया और उसकी सीआर खराब कर दी।

मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कमिश्नर चंबल से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी थी। कमिश्नर चंबल ने दोनों पक्षों को न बुलाकर, केवल कलेक्टर ज्ञानेश्वर बी पाटिल को आयोग का पत्र भेजकर मामले की जानकारी मांगी। ज्ञानेश्वर बी पाटिल ने खुद को बेगुनाह बताते हुए महिला के चरित्र पर कई तरह के आरोप लगाए। कलेक्टर द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को कमिश्नर ने आयोग को भेज दिया। अधूरी जांच और एक पक्ष द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से नाराज आयोग ने कमिश्नर को फटकार लगाते हुए लिखा है कि अधूरी जांच रिपोर्ट से स्पष्ट हो रहा है कि कलेक्टर ज्ञानेश्वर बी पाटिल को बचाने की कोशिश की जा रही है। आयोग ने इस मामले में मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है।

हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस : महिला को मानवाधिकार आयोग से त्वरित न्याय नहीं मिला। इस मामले में महिला ने 9 नवंबर 2012 को शिकायत की थी। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका लगाई थी। इस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने पांच लोगों को नोटिस भेजा है।

शबनम के साथ रात बिताने आतुर थे : ज्ञानेश्वर पाटिल श्योपुर जिले के पूर्व कलेक्टर की पहली पत्नी के साथ रात बिताने के लिए ज्यादा ही आतुर थे। इस संबंध में शबनम ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को कुछ वीडियो क्लिप्स भेजे हैं। ये वीडियो क्लिप्स दैनिक भास्कर डॉट कॉम के पास भी उपलब्ध हैं। जिला शिक्षा केंद्र में पदस्थ शबनम खान पर पाटिल इस कदर मोहित थे कि उनके साथ गेस्टहाउस में रात बिताने के लिए उन्होंने जिला परियोजना समन्वयक केसी गोयल और अपने कार्यालय के जमादार भोलाराम आदिवासी को शबनम के पीछे लगा दिया था। यही नहीं, पिछले दस साल से बेहतर सीआर पाने वाली शबनम की सीआर बिगाड़ी गई और उनका वेतन भी रोका गया। मजबूरी में शबनम ने कलेक्टर के दूत के रूप में काम करने वाले भोलाराम आदिवासी से बातचीत की और छुपे हुए कैमरे से वीडियो बना लिया।

अर्धनग्न हालत में पकड़े जा चुके हैं : ज्ञानेश्वर पाटिल वर्ष, 2009 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के दफ्तर में अर्धनग्न हालत में पकड़े गए थे। घटना के वक्त मीडिया के लोग वहां मौजूद थे। दरअसल,  एक पंचायती कर्मी ने आरोप लगाया था कि ज्ञानेश्वर पाटिल धमकी देकर उसका यौन शोषण करते हैं।

पाटिल इसलिए बनाए गए थे कलेक्टर : कलेक्टर बनने से पहले मध्यप्रदेश कॉडर में वर्ष 2003 बैच के आईएएस ज्ञानेश्वर पाटिल ऐसे अधिकारी रहे हैं, जिनके जूनियर कलेक्टर बने, लेकिन उनको मौका नहीं दिया गया। बाद में आईएएस एसोसिएशन के दबाव में लॉबिंग के चलते उन्हें श्योपुर का कलेक्टर बना दिया गया। (भास्‍कर)

”कई संपादक मित्रों ने नौकरी के आफर दिए पर मैंने ठुकरा दिया”

शुरू-शुरू में तो मुझे बड़ा अजीब लगा था। अमर उजाला से अवकाश ग्रहण करने के बाद न कोई फोन करता न आने-जाने वालों की लाइन लगती। प्रबंधन के तमाम जीएम टाइप के लोग जिनकी जबान सर-सर करते नहीं थकती थी, ने फोन तक उठाना बंद कर दिया था। उनके कई निजी काम भी मैंने करवाए थे अचानक मुझे भूल गए। पूरे कैरियर में पहली बार ऐसा देखा। लेकिन अब मजा आने लगा है।

अब तो अच्छा लगता है कि बहुत कम उम्र में सेवानिवृत्ति ले ली। मजे से घर पर आए सारे अखबार पढ़ता हूं, टीवी देखता हूं और रात समय पर सो भी जाता हूं। कभी-कभी सिंगल माल्ट व्हिस्की के एक-दो पैग ले लेता हूं। लोगों को खाने पर बुलाने का पूरा समय रहता है। सुबह एक पार्क में जाकर वाक करता हूं और नहीं गया तो घर पर ही ट्रेड मिल पर आधा घंटा चल लिया। डायबिटीज, बीपी सब समाप्त हो गया है। कोई टेंशन नहीं। जब मन आया तो कानपुर चला गया और अब तो वहां से अपने गांव भी चला जाता हूं। घर पर कोई जिम्मेदारी नहीं इसलिए जो नौकरी के आफर आए मैंने स्वयं ही ठुकरा दिए। अपने कई मित्र अब बड़े-बड़ पत्रों के संपादक हैं उन्होंने कहा भी लेकिन मैंने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया।

मुझे लगता है कि ५५ के बाद आदमी को अपनी जिंदगी स्वयं जीनी चाहिए। नौकरी करते रहने का अर्थ है कि आप गुलामी से पिंड नहीं छुड़ा पा रहे हैं। आपको भले लगता हो कि आप बहुत बड़ा काम कर रहे हैं, पत्रकारिता में नए मानदंड तय कर रहे हैं लेकिन कोई नहीं मानता कि आपने बड़े काम किए। मार्कण्डेय काटजू कभी भी आपके मुंह पर जूता मार सकते हैं कि जाओ और पढ़कर आओ, पत्रकार पढ़े लिखे होते नहीं बिल्कुल माटी के लोंदे की तरह। यह भी हो सकता है कि आपको लगता हो कि परिवार को आप सहारा दे रहे हैं। लेकिन यह भी आपके मन का भ्रम है। कोई भी आपसे उम्मीद नहीं करता। इसलिए मित्रों मुझे लगता है कि जितनी जल्दी नौकरी की टेंशन से मुक्त हो जाओ उतना अच्छा।

वरिष्‍ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्‍ल की एफबी वॉल से साभार.

खुलने लगे दैनिक जागरण के पत्रकार के ईनामी बदमाश से संबंधों के राज

बीते 14 मार्च को छतरपुर पुलिस की पकड में आये ईनामी बदमाश महिपाल सिंह और जागरण ग्वालियर-झांसी के छतरपुर ब्यूरो चीफ राजू सरदार के संबधों के राज खुलने शुरू हो चुके हैं। बदमाश ने फरारी के दौरान कई मोबाइल नंबर बदले। ये सारे नंबर पुलिस के हाथ लग चुके हैं। सूत्रों से हासिल जानकारी के अनुसार राजू सरदार से ईनामी बदमाश ने मोबाइल नंबर 08103802704, 8827109592, 078798810402, 7879038207, 08224083547, 08462850246, 08458925409, 07879579448, 09752531739 के जरिए एक वर्ष की फरारी के दौरान कई बार बात की।

पुलिस इस सुराग के आधार पर राजू सरदार पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। पुलिस सूत्रों के अनुसार पुलिस अधीक्षक गंभीरता से इस मामले को लेकर सक्रिय हैं लेकिन आला अधिकारी मामले को निपटाना चाहते हैं। चूंकि राजू सरदार भाजपा की जिला कार्यसमिति के भी सदस्य हैं इस कारण भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष पुरजोर अजमाईश में जुटे हैं कि राजू सरदार को बदमाश से रुपया खाने के मामले से बचाया जा सके। वैसे मोबाइल नंबरों के काल डिटेल के आधार पर आने वाले दिनों में राजू सरदार पर शिकंजा कस सकता है। हालांकि पूर्व में हुए बातचीत में राजू सरदार ने इस मामले में खुद को फंसाए जाने की बात कही थी। हालांकि अब यह मामला पूरी तरह पुलिस के पाले में है।

सहारा ग्रुप के संकट पर ये दैनिक जागरण का मरहम है या भविष्‍य की तैयारी?

खुद को दुनिया का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार बताने वाले दैनिक जागरण में सहारा सुब्रत राय की सुपौत्री रोशना के एक कार्यक्रम के एक सैकड़ा तस्वीर आज यानी 25 मार्च को जागरण अखबार में  पृष्ट 17 छपी हैं। उक्त पेज पर न तो यह प्रदर्शित किया गया है कि उक्त पेज खबर है या विज्ञापन है या फिर मीडिया घरानों की अंदर की सांठ गांठ, जिससे स्पष्ट होता है कि उक्त अखबार से पाठकों, विज्ञापनदाताओं को जागरण परिवार द्वारा मूर्ख बनाया जा रहा है।

उक्त पेज सहारा परिवार के सदस्यों की तस्वीरों के संग देश-विदेश के कई चर्चित हस्तियों की हैं। इस हाई प्रोफाइल पार्टी में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पीसीआई के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू, कांग्रेस और बीजेपी के दर्जनों नेता, व्यापारी, बालीवुड के अभिनेता, भारतीय हाकी, क्रिकेट टीम के सदस्य, एथलीट सहित कई क्षेत्र के खिलाड़ी। उत्तर प्रदेश सरकार के कई मंत्री और नेता आदि। पेज पर छपी एक कालम रिपोर्ट पेड न्यूज की बदबू देती प्रतीत होती है। अखबार के शब्दों पर गौर करे तो उक्त घटना क्रम बीते दो दिन पहले की है फिर अखबार को क्या पड़ी थी ऐसे तबज्जों देने की।

अब पूरी पिक्चर समझें तो असल मुद्दा पेड न्यूज का नहीं है बल्कि सेबी द्वारा की गई कड़ाई और सहारा ग्रुप की हजारों करोड़ की बकायेदारी इसके केन्द्र में है। कुछ दिन पूर्व एमडी को हिरासत में लेने की खबरें भी छपी जिससे ग्राहकों में खासी परेशानी थी। लोग जिनके गाढ़ी कमाई का धन सहारा में फंसा हुआ है वो जैसे तैसे निकासी करवाना चाह रहा है। ग्राहकों की माने तो सहारा किसी भी समय ठप ही सकती है। अंदर की बात क्या है यह सहारा ग्रुप सामने नहीं आने दे रहा है पब्लिक रिलेशन के कर्मचारी पूरी ताकत झोंक कर आम जनता को मनाने के प्रयास में लगे हैं, लेकिन इनकी बैंकों में ग्राहकों की बेचैनी कम नहीं हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर यह पूरा ढोंग रचा गया है।

जागरण में छपी तस्वीरों के खिंचावाया तो एक निजी कार्यक्रम में गया है, लेकिन उसका मतलब सीधे जनता को यह मैसेज देना है कि सहारा ग्रुप के संग देश ही नहीं विदेश की कई नामचीन हस्तियां संबंध रखती हैं। इस लिये धोखा खा रहे या खा चुके ग्राहक चुप रहें। वहीं व्यापारी व्यापारी का दर्द समझता है और गुलशन के गिद्ध व्यापार से ही मतलब रखते हैं चाहे सहारा ग्रुप हो या जागरण। अब देखना यह होगा कि देश के लाखों लोग जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहारा से जुडे़ हैं उन्हें नामचीन हस्तियों संग फोटो का लालीपॉप या धोखा कितना समझा पाएगा।

अब जनता को फैसला करना है कि कौन कितना हिमायती है। जागरण के पाठक भी इस तरह की पेड न्यूज का भारत सरकार के नुमाइदों को भी ऐसी पेड न्यूज पर ध्यान देने की आवश्यकता है। वहीं सहारा जैसे कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों को ऐसे ग्रुपों से सावधान रहना चाहिये। जो उनका पैसा समय पर  लौटाने पर आनाकानी करते हैं। मुझे लगता है सदा से ही सरकारे बड़े बड़े उद्योगपतियों के साथ रही है और सहारा के मालिक को कुछ होगा ऐसा कुछ लगता नहीं। सुब्रत राय सहारा को सपा का संरक्षण भी प्राप्त है। दिखावा ही सही उनके कई नामचीन लोगों से आकर्षक संबंध दिखते हैं। और वो कई तरह के सामाजिक कार्यों को भी सहयोग करते है। इस संबंध में सहारा और जागरण परिवार के किसी सदस्य ने कुछ बोला नहीं है। दो बड़े घराने खामोश हैं।

साथ ही एक बात और गौर करने वाली है कि दैनिक जागरण समूह भी आने वाले समय में फर्जीवाड़ा के बड़ी मुश्किल में फंसता दिख रहा है। मुजफ्फरपुर समेत कई जगहों पर इसके खिलाफ गलत आख्‍या देकर अखबार प्रकाशन करने का मामला चल रहा है। इसके अलावा हल्‍द्वानी में भी गलत आरएनआई के आधार पर विज्ञापन लेने की शिकायत की जा चुकी है। इसलिए संभव है कि जागरण परिवार भी आने वाले समय में मुश्किल में पड़ने वाला है, लिहाजा माना जा रहा है कि पेड न्‍यूज के साथ यह अपने तथा सहारा समूह के संबंध सुधारने की कवायद भी है, जिसका मीडिया में भी दखल है।

राहुल त्रिपाठी की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नम्‍बर 9305029350 के जरिए किया जा सकता है.

बिना इंजन सत्रह किलोमीटर दौड़ी ट्रेन, सैकड़ों यात्रियों की जान सांसत में

बाड़मेर। रेलवे प्रशासन की लापरवाही के चलते बाड़मेर-गोवाहाटी एक्सप्रेस रविवार को बिना इंजन करीब सत्रह किलोमीटर तक दौड़ गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह ट्रेन न केवल एक घंटे तक बिना इंजन दौड़ती रही, बल्कि उत्तरलाई स्टेशन पर पाइंट नहीं बदला गया होता तो यह कालका एक्सप्रेस से भी टकरा जाती। इसमें सैकड़ों यात्री सवार थे। बाद में एक घंटे बाद इंजन भेजकर ट्रेन को वापस बाड़मेर लाया गया। घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही रेलवे महकमे में अफरा तफरी मच गई। रविवार शाम को ही जोधपुर रेल मण्डल के आलाअफसर बाड़मेर के लिए रवाना हो गए।

यूं दौड़ी बिना इंजन ट्रेन : सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाड़मेर यार्ड के कैरेज स्टाफ ने मालानी एक्सप्रेस के निकलने के बाद शाम 8:45 बजे यार्ड में खड़ी गोवाहाटी एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 15631) को बिना इंजन लगाए रिलीज कर दिया। ऐसे में ऊंचाई पर स्थित यार्ड से ट्रेन बिना इंजन 40/50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ गई।

जैसे ही ट्रेन बिना इंजन दौड़ी स्टाफ को इसकी जानकारी मिली। ऐसे में बाड़मेर स्टेशन से उत्तरलाई स्टेशन पर हाथोंहाथ इसकी सूचना दी। उधर उत्तरलाई पर पहुंची हरिद्वार-बाड़मेर कालका को मुख्य लाइन पर रोककर पॉइंट बदला। कुछ ही मिनट के फासले पर गोवाहाटी ट्रेन वहां से गुजर गई और कवास स्टेशन की ओर बढ़ गई। अगर उत्तरलाई स्टेशन पर समय रहते कालका ट्रेन को रोककर पॉइंट नहीं बदला जाता तो सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ जाती। बाद में इंजन भेजकर गोवाहाटी एक्सप्रेस को वापस बाड़मेर स्टेशन लाया गया।

सैकड़ों यात्रियों की जान डाल दी खतरे में : जानकारी के अनुसार बाड़मेर यार्ड में लम्बे समय से शंटर कर्मचारी की कमी खल रही है। करीब एक साल पहले तक बाड़मेर यार्ड में तीन शंटर थे, लेकिन पिछले वर्ष एक शंटर ने वीआरएस ले लिया। ऐसे में दो शंटर बचे। इनमें से एक शंटर तो करीब 14 घंटे से लगातार डयूटी दे रहा था।

बाड़मेर से चंदन भाटी की रिपोर्ट.

जागरण ने छापी गलत खबर, भड़के छात्रों ने की आगजनी

समस्तीपुर में दैनिक जागरण का प्रणाम कॉलम छात्रों की परेशानी का सबब उस वक़्त बन गयी जब प्रणाम कॉलम में १०+२ की परीक्षा के समय के बारे में गलत जानकारी प्रकाशित की गयी. इससे नाराज स्टूडेंट सड़क पर उतर गए तथा आगजनी की. इसके बाद छात्रों ने सड़क भी जाम कर दिया. सभी मीडिया ने इस खबर को प्रमुखता से पेश किया. कारण भी यह था कि जो स्टूडेंट अन्य जगहों से आये थे, उन्हें सुबह से ही केंद्र पर जाने के लिये तैयारी शरू कर दी, लेकिन जब केंद्र पर आये तो पता चला कि परीक्षा का टाइम १:४५ बजे है.

यह गलती जानकारी के अभाव और काम करने और जल्दीबाज़ी के कारण हुई. हम अपनी जिन्दगी में जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियाँ कर देते हैं जो हमारे पूरे जीवन क्रम को प्रभावित करती हैं. यह गलतियाँ भी कुछ इसी तरह की थी. इस खबर पर दैनिक जागरण ने सार्वजनिक विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचने पर खेद प्रकट किया है. दैनिक जागरण समस्तीपुर के प्रभारी आर. कौशलेन्द्र व स्थानीय रिपोर्टर केशव कुमार पर करवाई तय थी लेकिन स्थानीय संपादक और दैनिक जागरण बिहार-झारखण्ड के संपादक शैलेन्द्र दीक्षित की नजरे-इनायत आर. कौशलेन्द्र पर थी, सो वह बच गए और केशव कुमार को सजा के तौर पर तबादला कर दिया गया.

केशव ने इस सजा को स्‍वीकार करने की बजाय अपना इस्तीफा सौंपना ही मुनासिब समझा. हालांकि जब स्थानीय संपादक समस्तीपुर आये तो उन्हें गलत सूचना दी गयी की स्टूडेंट ने जो हंगामा किया है उसमें गुरुकुल का हाथ है. गुरुकुल कोचिंग व दैनिक जागरण, समस्तीपुर में विज्ञापन प्रभारी आरके झा के कारण नहीं बनती है. गुरुकुल कोचिंग मीडिया को सालाना १२-२० लाख का विज्ञापन देता है. आज कल दैनिक जागरण, समस्तीपुर प्रभारी आर. कौशलेन्द्र के चलते अपनी पुरानी साख खोता जा रहा है. गिरते साख को बचने के लिए मुजफ्फरपुर से सुजीत व मोतिहारी से राजेश को समस्तीपुर का कामान सौप गया है. इधर यह भी खबर मिली है कि शैलेन्द्र दीक्षित की एक पार्टी में जाकर आर. कौशलेन्द्र ने फिर एक जीवनदान प्राप्त कर लिया है.

समस्‍तीपुर से प्रकाश कुमार की रिपोर्ट.

जनसंदेश टाइम्‍स के पत्रकार को खोज रही है पुलिस

जनसंदेश टाइम्‍स, भदोही के पत्रकार सुरेश गांधी पर अब रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज करते हुए पुलिस ने तलाश तेज कर दी है। तीन दिन पहले ही सुरेश गांधी के खिलाफ गुंडा एक्ट में कार्रवाई की गई थी। मजेदार बात तो यह है कि सुरेश गांधी को इलाकाई लोग पत्रकार कम दलाल ज्यादा कहते हैं। यही कारण है कि गुंडा एक्ट में कार्रवाई के बाद अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान तीनों अखबारों के पत्रकारों ने एसपी से मिलकर सुरेश गांधी को गिरफ्तार करने की मांग की थी। तीनों ही अखबारों में लगातार सुरेश गांधी पर हो रही कार्रवाई की खबरें भी छप रही हैं।

बताया जाता है कि फिलहाल सुरेश गांधी फरार है। जनसंदेश टाइम्स के दफ्तर में भी नहीं आ रहे हैं। आज हिन्दुस्तान में छपी खबर को देखकर उनकी करतूत के बारे में जाना जा सकता है। ऎसे लोग ही पत्रकारिता को बदनाम कर रहे हैं।

विधायकों की गुंडागर्दी (छह) : विस में एपीआई को पीटने वाले दोनों विधायकों को जमानत

मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा में एपीआई सूर्यवंशी से मारपीट करने वाले विधायक राम कदम और क्षितिज ठाकुर को जमानत मिल गई है। दोनों को 15 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत मिली है। दोनों विधायकों को हर बुधवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच क्राइम ब्रांच ऑफिस में हाजिरी देनी होगी। विधायकों के निलंबन के मामले में सभी दलों के विधायकों का लगातार चौथे दिन भी हंगामा मचा। संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन पाटील ने निलंबन के मामले में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, सभी पार्टियों के दल प्रमुख और नेता विपक्ष के साथ जल्द ही बैठक लेने का आश्वासन दिया। लेकिन विधायक इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं थे। इसके चलते सदन का कामकाज 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

एमएनएस के राम कदम और बहुजन विकास अघाड़ी के क्षितिज ठाकुर ने सरेंडर किया था। विधायक क्षितिज ठाकुर की गाड़ी का चालान काटने की वजह से पुलिस अफसर की पिटाई की गई थी। दोनों को पिछले बुधवार को ही गिरफ्तार किया जाने वाला था, लेकिन उन्होंने आत्मसमर्पण के लिए वक्त मांगा था। इसी के मुताबिक दोनों ने गुरुवार सुबह क्राइम ब्रांच के सामने सरेंडर किया। पुलिस ने इस घटना को लेकर राम कदम और क्षितिज ठाकुर के अलावा करीब 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

पिछले गुरुवार को ये मुद्दा विधानसभा में भी गूंजा। मांग की गई कि अगर विधायकों को निलंबित किया गया है तो फिर पुलिस अफसर सचिन सूर्यवंशी को क्यों निलंबित नहीं किया गया। हंगामे की वजह से सदन का कामकाज कुछ देर के लिए स्थगित करना पड़ा। वैसे, कुल 5 विधायकों के खिलाफ पुलिस अफसर से मारपीट का आरोप लगा था। इसके बाद आरोपी सभी 5 विधायकों को साल भर के लिए विधानसभा से सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन एफआईआर में लिखा गया है कि राम कदम और क्षितिज ठाकुर के अलावा 15-16 लोगों ने पिटाई की। इसलिए कार्रवाई नामजद विधायकों के खिलाफ ही हुई।

बड़े प्रोजेक्‍ट से जुड़ने के लिए कमलेश सिंह ने दिया है इस्‍तीफा

दैनिक भास्‍कर को इस्‍तीफे की नोटिस देने वाले नेशनल एडिटर कमलेश सिंह के बारे में खबर है कि वे किसी बड़े प्रोजेक्‍ट के साथ जुड़ने जा रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि वे भास्‍कर की आंतरिक राजनीति या किसी तनाव के चलते नहीं बल्कि बड़े प्रोजेक्‍ट से जुड़ने के चलते इस्‍तीफा दिया है. संभावना है कि वे अगले महीने अपनी नई जिम्‍मेदारी संभाल लें. हालांकि अभी इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है कि वे कहां जा रहे हैं या किस संस्‍थान से जुड़ रहे हैं, लेकिन उनके नजदीकी लोगों का कहना है कि ये प्रोजक्‍ट उनके लिए कई मायनों में मुफीद है.

सूत्रों का कहना है कि कमलेश सिंह अपने पारिवारिक कारणों के चलते दिल्‍ली से दूर भोपाल में नहीं रहना चाहते थे. इसका कारण उनकी पत्‍नी की नौकरी को बताया जा रहा है. कमलेश सिंह बेहतर मौके की तलाश में थे. बताया जा रहा है कि बढिया अवसर मिलते ही उन्‍होंने भास्‍कर प्रबंधन को इस्‍तीफे की नोटिस दे दिया. कुछ लोग इसे आंतरिक राजनीतिक कह कर प्रचारित-प्रसारित कर रहे हैं, परन्‍तु कमलेश सिंह के कुछ नजदीकी सूत्रों का कहना है कि उन्‍होंने आंतरिक राजनीति या किसी से क्षुब्‍ध होकर नहीं बल्कि अपनी व्‍यक्तिगत जरूरतों और बेहतर अवसर की वजह से भास्‍कर से इस्‍तीफा दिया है.

दूसरी तरफ अभिजीत मिश्रा के बारे में खबर आ रही है कि वे अभी कहीं ज्‍वाइन करने की बजाय छुट्टी मनाने के मूड में हैं. वैसे संभावना जताई जा रही है कि वे नोटिस पीरियड खतम होने के बाद मई महीने में दुबारा अमर उजाला में वापसी कर सकते हैं. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, पर अभिजीत लंबे समय तक अमर उजाला से जुड़े रहे हैं इसलिए कयास और चर्चाओं में उनके अमर उजाला में वापस होने की बातें सामने आ रही हैं.

पर्यावरण जागरूकता के लिए बिजली बंद कर निकाला कैंडिल मार्च

वर्धा : धरती और प्रकृति की खातिर महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में 23 मार्च (शनिवार) को रात्रि 8.30 से 9.30 बजे तक एक घंटे के लिए बिजली बंद कर ‘अर्थ आवर’ मनाया गया। आम जनों में ऊर्जा के इस्‍तेमाल व पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्‍य से विश्‍वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. के.जी.खामरे, वित्‍ताधिकारी संजय भास्‍कर गवई, पर्यावरण क्‍लब के प्रभारी अनिर्वाण घोष की उपस्थिति में अधिकारियों, कर्मियों व विद्यार्थियों द्वारा कैंडिल मार्च निकाला गया।

कैंडिल मार्च विश्‍वविद्यालय परिसर के केदारनाथ संकुल से शुरू हुआ। यह कैंडिल मार्च सावित्री बाई फुले महिला छात्रावास से होते हुए शमशेर संकुल, हॉस्‍पीटल, फिल्‍म एवं नाट्य अध्‍ययन विभाग, अज्ञेय संकुल, नागार्जुन सराय होते हुए नजीर हाट पर समाप्‍त हुआ। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए डॉ. के.जी.खामरे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संरक्षण के लिए लोगों में दिलचस्‍पी को देखकर मैं बहुत उत्‍साहित हूँ। हम सभी को पूरे वर्ष अर्थ आवर के उद्देश्‍यों को आत्‍मसात करने की जरूरत है।

इस दौरान पर्यावरण क्‍लब के प्रभारी अनिर्बाण घोष ने कहा कि वर्ल्‍ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूएफ) द्वारा शुरू किए गए अर्थ आवर अभियान के तहत वर्ष 2007 में आस्‍ट्रेलिया के सिडनी शहर से इसकी शुरूआत हुई और अब दुनिया भर के 131 देशों के 4,000 से ज्‍यादा शहर इस आयोजन में हिस्‍सेदारी कर रहे हैं। हमारा विश्‍वविद्यालय पर्यावरण के प्रति अतिसंवेदनशील है। अगले वर्ष से वृहद् पैमाने पर अर्थ आवर मनाने का संकल्‍प लेते हुए उन्‍होंने कहा कि पर्यावरण संकट से जूझ रही दुनिया को बचाने की मुहिम में आप अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दें, जिससे दुनिया बची रह सके।

उन्‍होंने कुलपति विभूति नारायण राय, प्रतिकुलपति प्रो.ए.अरविंदाक्षन, विशेष कर्तव्‍याधिकारी नरेन्‍द्र सिंह, राष्‍ट्रीय सेवा योजना के प्रभारी डॉ.सतीश पावडे के प्रति आभार जताते हुए कहा कि हमें ये  पर्यावरण जागरूकता के लिए निरंतर प्रोत्‍साहित करते रहते हैं। अर्थ आवर मनाने के लिए भी इन्‍होंने हमें भरपूर सहयोग दिया। कैंडिल मार्च में विश्‍वविद्यालय के राष्‍ट्रीय सेवा योजना के सदस्‍यों ने खासी दिलचस्‍पी ली। कार्यक्रम के दौरान प्रो.शंभू गुप्‍त, डॉ.अनिल कुमार पांडेय, बी.एस.मिरगे, शैलेश मरजी कदम, शंभू जोशी, अमित विश्‍वास, डॉ.मिथिलेश, सत्‍यम सिंह, विनय भूषण, कमला थोकचोम देवी, चित्रलेखा अंशु, विनीत कुमार, राज राजेश्‍वर, भारती देवी, अनुपमा पांडेय सहित सैकड़ों कर्मी, शोधार्थी व विद्यार्थी शामिल रहे।

आप पत्रकार हैं तो क्‍या पाते हैं ये तीस सुविधाएं?

आप पत्रकार हैं. आप को जो सुविधाएं मिल रही हैं उससे आप भली प्रकार से वाकिफ हैं. जमीनी हकीकत एक पत्रकार से बेहतर कोई नहीं जान सकता. अगर कुछ प्रतिशत पत्रकारों को छोड़ दिया जाए तो ज्‍यादातर संघर्षमय जीवन ही जी रहे हैं. उन्‍हें सरकार से एक भी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, लेकिन आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि प्रेस परिषद की एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर के पत्रकारों को तमाम राज्‍य सरकारें तीस प्रकार की सुविधाएं उपलब्‍ध करा रही हैं.

अब आप आसानी से समझ सकते हैं कि किस तरह की मानसिकता के साथ पत्रकारों के हित में काम कर रहा है प्रेस परिषद.

1. आवास सरकारी आवास / फ्लैट / भूमि
2. कंपनियों के शेयरों का आबंटन.
3. बस / यात्रा / रेल यात्रा परिवहन
4. विदेश यात्रा
5. फ्री एयर टिकट
6. मुख्य मंत्रियों के विवेकाधीन कोष से नकद संवितरण
7. वित्तीय सहायता
8. मीडिया सेंटर के लिए फंड और इस तरह
9. पत्रकारों संघों को अनुदान
10. उनके ग्राहकों के प्रेस नोट के प्रकाशन के लिए विज्ञापन एजेंसियों द्वारा उपहार चेक.
11. अन्य उपहार
12. नि: शुल्क पार्किंग
13. अतिथि आतिथ्य
14. शुल्क मुक्त कैमरों और कंप्यूटर का आयात
15. बीमा प्रीमियम
16. रिश्तेदारों को नौकरियां
17. ऋण
18. समितियों पर नामांकन
19. पीसीओ / फैक्स / फोन
20. पेंशन लाभ
21. धन का दान करने के लिए प्रेस क्लब
22. पुरस्कार
23. दुकानें
24. मान्यता
25. सरकार और लोक प्राधिकरण के विज्ञापनों
26. चुनाव सुविधाओं
27. ‘पत्रकारों के सम्मेलनों, सेमिनार, आदि के लिए खर्च बैठक
28. निमंत्रित किया जा रहा प्रेस पार्टियों
29. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रकाशन सामग्री (जारी किए गए)
30. प्रशिक्षण (AINEF द्वारा एक परिपत्र के आधार पर)

योगेश शर्मा की रिपोर्ट.

पौने तीन हजार पाकिस्तानी नागरिक कहाँ हो गए गायब?

बाड़मेर के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी नागरिकों के गायब हो जाने के मुद्दे पर चिंता बढ़ती जा रही हैं। जब से थार एक्सप्रेस के रूप में बाड़मेर से होकर पकिस्तान जाने वाली ट्रेन की शुरुआत हुई है तभी से पाकिस्तानी नागरिक यहाँ आते हैं और सीमावर्ती इलाको में आकर गायब हो जाते हैं। इन्हें जमीन निगल गई यह आसमान खा गया कोई भी नहीं जानता। ना तो गुप्तचर एजेंसियों को इसकी कोई पुख्ता जानकारी हैं और ना ही गुप्चार एजेंसियां इस गम्भीर मामले पर अच्छी तरह से नज़र रख रही हैं। बाड़मेर के सीमा मामलों के पत्रकार दुर्गसिंह राजपुरोहित ने इस थार एक्सप्रेस के जरिये भारत आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के गायब हो जाने की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले पहलू सामने आये – एक ख़ास रिपोर्ट।

: थार एक्सप्रेस से भारत आने के बाद तय सीमा पूरी हो जाने पर भी पाकिस्तान नहीं लौटे, अब उन्हें तलाशना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बनी टेढ़ी खीर : बाड़मेर। थार एक्सप्रेस। भारत और पाकिस्तान के मध्य राजस्थान के बाड़मेर जिले से संचालित होने वाली अंतर्राष्ट्रीय रेल सेवा। करीब सात साल पहले 18 फरवरी 2006 को यह रेल सेवा शुरू हुई तो यह उम्मीद की जा रही थी कि भारत और पकिस्तान के लोगों के लिए यह रेल सेवा वरदान साबित होगी। लेकिन वरदान से ज्यादा यह रेल सेवा मुल्क की सुरक्षा के लिहाज से अभिशाप साबित हो रही है। नकली नोट, नकली पासपोर्ट और वीजा से यात्रा करने वाले पाकिस्तानी नागरिक और सबसे गम्भीर मुद्दा यहाँ आने के बाद वापस नहीं जाने वाले पाकिस्तानी।

दरअसल पाकिस्तान से भारत आने और यहां से वापस नहीं जाने की मंशा रखने वालों के लिए थार एक्सप्रेस वरदान बन गई है। पिछले वर्ष थार एक्सप्रेस से भारत आए 20 हजार 122 पाकिस्तानी नागरिकों में से 2828 जने वापस गए ही नहीं। ये कहाँ गये कोई जानता भी नहीं। ना तो सुरक्षा का दम भरने वाली गुप्तचर एजेंसिया और ना ही स्थानीय पुलिस। ये पाकिस्तानी नागरिक भारत में बसने की मंशा से यहीं सवा अरब की आबादी में खो गए हैं, जिन्हें ढूंढना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन-सा है। पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के चलते कई हिंदू परिवार पलायन कर थार एक्सप्रेस के जरिए पाकिस्तान से भारत आ रहे हैं। बीते वर्ष हिंदू परिवारों के आगमन में वृद्धि हुई है, लेकिन वापसी कम हुई है। जब तक थार एक्सप्रेस शुरू नहीं हुई थी, तब तक एक आम पाकिस्तानी परिवार के लिए पाक से भारत आकर बसना काफी चुनौतीपूर्ण हुआ करता था, लेकिन थार एक्सप्रेस ने राह आसान कर दी है। यही वजह है कि 2828 जने पाकिस्तान से यहां आकर जम गए हैं। इनमें से ज्यादा हिंदू ही हैं। भारत-पाक के बीच थार एक्सप्रेस शुरू होने के बाद दूरियां खत्म हो गई। अपनों से बिछोह का दर्द मिट गया तो आने जाने का सिलसिला शुरू हो गया। थार एक्सप्रेस दोनों मुल्कों के लिए वरदान साबित हो रही है। बीते एक साल के आंकड़ों पर गौर करें तो थार से 17924 यात्री पाक गए। जबकि 20122 यात्री भारत आए।

रिश्तों की खातिर छोड़ा पाक : पाक में रहने वाले हिंदू बढ़ते अत्याचारों से खुद को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं। साथ ही रिश्तेदार यहां होने की वजह से रिश्ते करने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते ये परिवार हिंदुस्तान में रहने के इच्छुक है। पाक से आए खेतसिंह (बदला हुआ नाम) बताते हैं हमारे रिश्तेदार हिंदुस्तान में रहते हैं। बेटों के रिश्ते तो पाक में हो जाते हैं, मगर बेटियों का रिश्ता करने के लिए हिंदुस्तान आना पड़ता है। बेटियों की शादियां करने के बाद कई सालों तक मिलन नहीं हो पाता है। इस स्थिति में यहां आकर बसना ही मुनासिब है।


 
गुप्तचर एजेंसियों का काम क्या हैं? : क्या सिर्फ धरने प्रदर्शन और ज्ञापन एकत्रित करना या विपक्षी पार्टियों की गतिविधयों की खबरें अपने उच्चाधिकारियों तक पहुंचाना ही बाड़मेर की विभिन्न गुप्तचर एजेंसियों का कर्तव्य हैं? ये बड़ा सवाल बाड़मेर में कार्यरत सीआईडी और पुलिस की गुप्तचर शाखा कही जाने वाली डीएसबी के लिए है। दरअसल यहाँ स्थित सीआईडी कार्यालय में काफी पद लम्बे समय से रिक्त हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समेत कई अन्य महत्वपूर्ण कार्मिकों का पद खाली हैं। सीमा चौकियां जिन पर मुल्क की सरहदों की सुरक्षा का जिम्मा था वो कम नफरी के चलते बंद कर दी गई, जबकि सीमावर्ती बाड़मेर में अब इस एजेंसी का काम बढ़ता ही जा रहा हैं। यहाँ सीआईडी कार्यालय के खाली पड़े पदों पर पिछले कई सालो से कोई भी अधिकारी नियुक्त नहीं हुआ हैं जो सरकार और राज्य के गृह मंत्रालय पर भी लापरवाही का ठप्पा लगाने को पर्याप्त हैं।
 
दूसरी ओर बाड़मेर में पुलिस की विशेष शाखा यानी डीएसबी की भी स्थिति इससे कम दुखद नहीं हैं। यहाँ नियुक्त पुलिस कर्मी सिर्फ धरने प्रदर्शन और ज्ञापन तक ही सीमित हैं। डीएसबी के कार्मिको को इस बात की कोई खबर नहीं हैं कि कितने पाकिस्तानी और विदेशी लोग सरहदी इलाको में छुपे हुए हैं। जबकि एक पाकिस्तानी नागरिक के शहर में स्थित निजी चिकित्सालय में नियुक्त होने की खबर पुलिस अधिकारीयों को पूर्व में दिए जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस पाकिस्तानी नागरिक के पास भारत की नागरिकता नहीं हैं और ना ही उसके पास बाड़मेर आने की अनुमति हैं। सवाल इतने गम्भीर हैं लेकिन जवाबदेही किसी के जेहन में नहीं हैं। देश की सुरक्षा का बंटाधार ऐसे हालतों से होना तय ही माना जाएगा वरना सरकार के साथ साथ बाड़मेर पुलिस को भी आमूलचूल परिवर्तन वर्तमान में चल रही व्यवस्थाओं में करने ही पड़ेंगे।

घिसे-पिटे जवाबों से कैसे चलेगा काम? : थार एक्सप्रेस से पाक से भारत आए यात्रियों के पुन: नहीं लौटने के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। रिकार्ड देखकर बता पाऊंगा। वीजा खत्म होने के बाद भी पाक नहीं जाने वाले यात्रियों की सूची तैयार की जा रही है। धीमाराम विश्नोई कार्यवाहक एएसपी सीआईडी (बीआई) बाड़मेर

फैक्ट फिगर्स

माह                                 पाक गए             भारत आए
जनवरी                             792                    979
फरवरी                              976                   1120
मार्च                                  1320                  1563
अप्रेल                                1373                  1542
मई                                   1876                  1916
जून                                  2603                  3604
जुलाई                               2067                 1969
अगस्त                             967                   1083
सितम्बर                          1328                  1884
अक्टूबर                           1032                  1185
नवंबर                             1205                   1625
दिसंबर                           1705                    1642
कुल                               17294                    20122

‘मुन्‍ना भाई’ नहीं अब ‘राजा भैय्या’ को देखेंगे दर्शक!

‘मुन्ना भाई’ एक बार फिर ‘अंदर’ हो गए और इस तरह काफी दिनों से लटकी मुन्ना भाई सीरीज की अगली फिल्म ‘मुन्ना भाई चले दिल्ली’ और लटक गई। इस खबर ने मुन्ना भाइयों की मदद से पास होने का ख्वाब पाले छात्र-छात्राओं को भी काफी दुखी किया। बोर्ड परीक्षा के बाद गर्मी की छुट्टियों में मुन्ना भाई उन्हें इंटरटेन करने वाले थे लेकिन किस्मत का फैसला कौन बदल सकता है। अब मुन्ना भाई कैदियों को इंटरटेन करेंगे। निर्देशक सुभाष कपूर ने तो बिल्कुल साफ कह दिया है कि संजू बाबा के बिना मुन्ना भाई फिल्म की कल्पना भी मुश्किल है।

वही ही नहीं, काटजू, कांग्रेस सहित ‘देश के दर्शक’ आदि भी (बस बीजेपी को छोड़कर) मुन्ना भाई को जेल की सलाखों के पीछे नहीं, अपनी आंखों के आगे देखना चाहते हैं। खैर, सुभाष जी के लिए मेरे पास एक आइडिया है। यह मुन्ना भाई का विकल्प भी है और संजू से कम क्रेज भी नहीं है उसका। बस उन्हें करना ये है कि मुन्ना नाम की जगह ‘राजा’ कर दें और भाई की जगह ‘भैय्या’ कर दें। ‘माननीय’ फिलहाल वे हैं ही। मंत्रीपद से इस्तीफा दे चुके हैं, खाली हैं, दिमाग के घोड़े दौड़ा रहे हैं, बस सुभाष जी को उनकी लगाम थामनी है। आखिर कौन नहीं देखना चाहेगा इस माननीय की ‘पिक्चर’। उम्मीद है कि इन दिनों माननीय मना भी नहीं करेंगे। बजट-वजट का चक्कर भी नहीं रहेगा चाहे जितनी महंगी फिल्म बनाओ। सारा पैसा आम बजट से ही निकाल लिया जाएगा। फिल्म का वितरण भी हाथों-हाथ होगा (क्योंकि मना करने की हिम्मत किसी थियेटर-मल्टीप्लेक्स मालिकों के पास होगी नहीं) और टिकटें कितनी बिकेंगी, ये तो पूछो ही मत। (वरना उसका टिकट कट जाएगा)। अरे छोड़ो, टिकटें ब्लैक में न बिकीं तो कहना। अब रही स्क्रिप्ट की बात तो वह हमारे पास तैयार है। लो जी, वह भी सुन लो।

‘सब कुछ’ कर चुकने के बाद एक दिन अचानक मुन्ना भाई के मन में ये विचार आता है कि अब बहुत हो चुका, वे सचमुच का माननीय बनेंगे। एक शानदार होटल में दो-चार पैग मारकर कबाब तोड़ते हुए उन्होंने यह बात सर्किट को बताई। सर्किट का दिमाग सरपट दौड़ा- भाई, आप बस बोलो, सब काम हो जाएगा। माननीय माने और सर्किट शुरू। मुनादी हो गई- अब भैय्या दरबार नहीं लगाएंगे, बल्कि जनता दरबार लगाएगी। भैय्या जनता के दरबार में हाजिर होंगे और फैसला भैय्या नहीं जनता सुनाएगी। भैय्या सुनेंगे और वह करेंगे जो जनता कहेगी। अब भैय्या बदल गए और जनता की नजरों में ‘सचमुच के राजा’ बन बैठे। जनता ने अपने हितार्थ फैसले ले-लेकर पैसों का मोल कौड़ियों के भाव करवा दिया। खाझा और सब्जी आदि सब टके सेर हो गए। अब रंक दरबार लगाती थी और राजा को फैसला सुनाती थी। ऐसे ही एक फैसले ने राजा की जिंदगी बदल दी। क्षेत्र में एक प्रेमी की हत्या हो जाती है। दरबार सजता है। रंकों के पंच और राजा जी बैठे। प्रेमिका जार-जार रो-रो रही है- अब उसकी जिंदगी का क्या होगा? राजा जब रंकों का सुन सकते हैं तो प्रेमिका क्या चीज है? मांगो प्रेमिका, वर मांगो। मुंहमागा वरदान मिले तो किसके मुंह में पानी नहीं आ जाएगा! प्रेमिका ने राजा को वर के रूप में मांग लिया। राजा मजबूर हैं, असली माननीय हैं, मना कर नहीं कर सकते, चिंतित हैं… भइया! अब पूरी कहानी यहीं सुन लोगे तो फिर पिक्चर क्या खाक देखोगे। सुभाष कपूर ने चाहा तो आगे क्या हुआ, यह सब मुन्ना भाई सीरीज की अगली फिल्म में देखिएगा।

लेखक रवि प्रकाश मौर्य तेजतर्रार पत्रकार हैं. इन दिनों जनसंदेश टाइम्‍स से जुड़े हुए हैं. यह व्‍यंग्‍य जनसंदेश टाइम्‍स में प्रकाशित हो चुका है.

काशी में पत्रकार की गोली मारकर हत्‍या

वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र अंतर्गत पुराने आरटीओ के पास रविवार की रात बदमाशों ने 38 वर्षीय युवक भावेश पाण्डेय की गोली मारकर हत्या कर दी। भावेश के सिर व पीठ में तीन गोली लगी थी। परिवारजन व पुलिस कर्मी भावेश को लेकर मंडलीय अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर सुनते ही अस्पताल में भावेश के परिवारजनों और जानने वालों की भीड़ उमड़ने लगी और देखते ही देखते हंगामा शुरू हो गया। इनका आरोप था कि भावेश पर खतरा था, इसकी सूचना एसओ सारनाथ को दे दी गई थी, बावजूद इसके उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। दूसरी ओर पुलिस के मुताबिक भावेश जमीन का धंधा करने के साथ दिल्ली की एक पत्रिका के लिए भी काम करते थे। भावेश का सेंट्रल जेल के सिपाही जैनेन्द्र पाण्डेय से सात बिस्वा जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। पिछले दिनों जमीन पर बनाई गई चहारदीवारी गिरा दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक यह जमीन भावेश की मां ने पिछले दिनों किसी को बेच दी थी लेकिन बैनामा नहीं हुआ था। इसी बीच जैनेंद्र ने उक्त जमीन खरीद ली लेकिन भावेश ने इससे कब्जा नहीं छोड़ा जिससे दोनों के बीच विवाद गहरा गया था। पुलिस ने घटना स्थल से नाइन एमएम के दो खोखा कारतूस बरामद किए हैं। पत्रकार भावेश आशापुर के लोहियानगर स्थित अपने ननिहाल में रहते थे। परिजनों के मुताबिक भावेश रविवार की शाम कीनाराम स्थल से दर्शन कर लौट रहे थे। आशापुर चौराहे पर पहुंचने के बाद भावेश के मोबाइल फोन पर एक कॉल आई और वह चंद्रा चौराहे से पहड़िया मार्ग पर वापस लौट रहे थे। उसी दौरान पुराने संभागीय परिवहन कार्यालय के पास पहले से ही घात लगाये बाइक सवार तीन बदमाशों ने पीछे से भावेश पर एक गोली दागी। गोली लगते ही भावेश बाइक से सड़क पर गिर पड़े और उठकर गली में भागे लेकिन बदमाशों ने पीछाकर भावेश को दो गोली और मारी जिससे लहूलुहान होकर वह वहीं गिर पड़े। इसके बाद बदमाश बाइक से भाग निकले।

दैनिक जागरण ने छापा सहारा समूह का पेड न्‍यूज!

दैनिक जागरण अखबार में सहारा श्री सुब्रत राय की सुपौत्री रोशना के अन्‍नप्रासन की एक रिपोर्ट छपी है. फोटो समेत छपी यह रिपोर्ट पूर्ण रूप से विज्ञापन और पेड न्‍यूज की शक्‍ल में है. इसकी भाषा भी बिल्‍कुल पेड न्‍यूज वाली है. फिर भी अखबार के कहीं भी पेड न्‍यूज या विज्ञापन का जिक्र नहीं किया है. पार्टी में आने वाली तमाम बड़ी हस्तियों की फोटो कैप्‍शन के साथ प्रकाशित की गई है. सवाल यह है कि अगर यह पेड न्‍यूज नहीं है तो फिर दैनिक जागरण ने 20 मार्च की खबर को 25 मार्च को किस मजबूरी में प्रकाशित की.

इस पार्टी में पीसीआई के अध्‍यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू भी पहुंचे जिन पर पेड न्‍यूज रोकने की जिम्‍मेदारी है. अब समझना मुश्किल नहीं है कि पेड न्‍यूज करने वाले अखबारों पर कौन सी कार्रवाई होगी. एलिट वर्ग के पोषक माने जाने वाले काटजू पत्रकारों के लिए न्‍यूनतम डिग्री तय करने के तो हिमायती हैं, परन्‍तु अखबार मालिकों और पेड न्‍यूज करने वालों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने में उन्‍हें डर लगता है. संभावना कम ही है कि दैनिक जागरण में प्रकाशित इस पेड न्‍यूज पर कोई कार्रवाई हो. पर दैनिक जागरण समूह समूची पत्रकारिता को भ्रष्‍ट बनाते हुए अपनी झोली भर रहा है, लेकिन जब अपने कर्मचारी हितों की बात आती है तो जागरण प्रबंधन को सांप सूंघ जाता है.

सवाल यह भी है कि आखिर दैनिक जागरण ने जब इस पेड न्‍यूज को प्रकाशित किया है तो फिर उसे नीचे लिखने में क्‍या बुराई नजर आ रही थी. सवाल इसलिए भी है कि इसकी रिपोर्ट में जो भाषा लिखी गई है उसमें साफ बताने का प्रयास किया गया है कि इस पार्टी में बड़े-बड़े लोग पहुंचे.