अरुण पुरी को ‘एडिटर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड, पुण्य प्रसून बाजपेयी को बेस्ट न्यूज एंकर का सम्मान

आईएए (लीडरशिप अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस) ने इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर इन चीफ अरुण पुरी को ‘एडिटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ घोषित किया है। आज तक के ही एंकर पुण्य प्रसून वाजपेयी को बेस्ट न्यूज एंकर का अवॉर्ड मिला है.

अरुण पुरी को इससे पहले भी देश-विदेश में कई सम्मान मिल चुके हैं. वर्ष 2001 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. अरुण पुरी को आईएए ने एडिटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड दिया, तो आज तक के वरिष्ठ एंकर पुण्य प्रसून वाजपेयी को सर्वश्रेष्ठ एंकर का खिताब मिला. न्यूज चैनलों के लोकप्रिय बुलेटिन ’10 तक’ के एंकर पुण्य प्रसून वाजपेयी ने खबरों को संवेदनशील और सहज तरीके से पेश कर अपनी अलग पहचान बनाई है. ये अवॉर्ड उसी पहचान का सम्मान माना जा रहा है.

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डा. शशिभूषण को लाइफ टाइम मीडिया अचीवमैंट अवार्ड

शिमला (हिमाचल प्रदेश) : बेहतर मीडिया तालमेल के लिए ईटीवी के हिमाचल के सम्पादक डॉ.शशिभूषण को लाइफ टाइम मीडिया अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें गत दिनो नई दिल्ली में मीडिया फैडरेशन ऑफ इंडिया ने अपने नौवें मीडिया एक्सीलैंस अवार्ड समारोह में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक डा. एमपी सूद के हाथों यह सम्मान प्रदान किया।

वीरभद्र सिंह और उद्योग मंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने डा. शशिभूषण शर्मा को सम्मानित होने पर बधाई दी है। मीडिया फैडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि फैडरेशन हर वर्ष ग्रामीण से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित कर रहा है। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार डा. राजीव पत्थरिया एवं उनके भाई राकेश पत्थरिया के कहानी संग्रह मरब्बा तथा अन्य कहानियों का विमोचन भी किया गया।

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इंदौर प्रेस क्लब के स्थापना दिवस पर पत्रकारों का सम्मान

इंदौर। अस्सी का दशक प्रिंट मीडिया और नब्बे का दशक इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए स्वर्णिम काल रहा। अब पत्रकारिता अंधी सुरंग से गुजर रही है, लेकिन उम्मीद की किरण अभी भी बाकी हैं। यह उदगार राज्यसभा टेलीविजन के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने व्यक्त किए। श्री बादल इंदौर प्रेस क्लब के 54वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक समय में इंदौर पत्रकारिता का गढ़ रहा। इंदौर से राहुल बारपुते, प्रभाष जोशी और राजेंद्र माथुर जैसे मूर्धन्य संपादकों ने पत्रकारिता की एक ऐसी पीढ़ी तैयार की जिसने देशभर में इंदौर घराने का नाम रोशन किया।

वरिष्ठ पत्रकार उमेश त्रिवेदी ने कहा कि आज सूचनाओं का तूफानी दौर चल रहा है। ऐसे में खबरों को विश्वसनीयता के साथ प्रकाशित और प्रसारित करना पत्रकारों के लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने नई पीढ़ी का आह्वान करते हुए कहा कि पत्रकारों में कुछ अलग करने का जज्बा हो और वह पैशन रखें तथा अपने काम के प्रति ईमानदार रहें।

इस अवसर पर ‘पत्रकारिता : कल, आज और कल’ विषय पर परिसंवाद का आयोजन भी किया गया। परिसंवाद को वरिष्ठ पत्रकार सर्वश्री शशीन्द्र जलधारी, कीर्ति राणा, नवनीत शुक्ला, दिनेश सोलंकी एवं छाया चित्रकार अखिल हार्डिया ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता मिशन से सेंसेशनल, कमीशन और क्रिमीलाइजेशन तक पहुंच गई है। आज के दौर में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की बहुतायत हो गई है, लेकिन पत्रकारिता की विश्वसनीयता कम होती जा रही है। संपादक नाम की संस्था का समाप्त होना भी एक अहम कारण है। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी के पत्रकार अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाएं और पढऩे की आदत डालें। परिसंवाद का संचालन प्रो. प्रतीक श्रीवास्तव ने किया।

प्रारंभ में इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन महासचिव अरविंद तिवारी ने किया। अतिथियों का स्वागत सुनील जोशी, तपेन्द्र सुगंधी, सतीश जोशी, कमल कस्तूरी, अतुल लागू ने किया। इस अवसर पर हाल ही में जनसंपर्क विभाग द्वारा सम्मानित पत्रकारों का अभिनंदन भी किया गया। आभार संजय लाहोटी ने माना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित थे।

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लखनऊ के डा. सुरेश को मुंबई में चौथा अनुष्का सम्मान देकर सम्मानित किया गया

मुंबई : ”जिस देश में हर बच्चे का मां से लोरी सुनना शाश्वत सत्य है, वहां कविता कितनी भी प्रगतिशील हो जाय, गीत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. छंद का पताका फहरानेवाली अनुष्का जैसी पत्रिकायें अपने आपमें एक आंदोलन हैं जिनमें भाग लेकर हमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिये.” उक्त बातें नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने हिन्दी के वरिष्ठ गीतकार डॉ.सुरेश (लखनऊ) को चौथा अनुष्का सम्मान प्रदान करते हुये कही.

 

दोपहर का सामना के संपादक प्रेम शुक्ल ने कहा कि विभिन्न धर्मों ने अपनी भाषा की सर्वोत्तम कृतियों को अपने धर्मग्रंथों के रूप में चुना जो छंदबद्ध हैं. हमारे युगों की धरोहर छंदों में ही सन्निहित है. अनुष्का द्वारा दिया जा रहा यह सम्मान उसी परंपरा का सम्मान है. आधुनिक कविता तो मुंबई के यातायात व्यवस्था की तरह जटिल होती जा रही है. अनुष्का के संपादक रासबिहारी पाण्डेय ने गीत को अप्रासंगिक बताये जानेवाले वक्तव्यों पर तंज करते हुये कहा कि जिन कविताओं को लिखने वाले स्वयं याद नहीं रख पाते उन्हें समाज कैसे याद रख पायेगा.

तकनीक के विकास के साथ साथ गीत का दायरा और भी व्यापक होता जा रहा है. हिंदी सिनेमा में सौ वर्षों बाद भी गीत की जगह कोई अन्य विधा नहीं ले पायी है. इस अवसर पर डॉ. सुरेश ने लगभग एक घंटे तक अपने गीतों के मधुर पाठ से उपस्थित जन समुदाय को भाव विभोर कर दिया. समारोह में पं.किरण मिश्र, अभिजीत राणे, ओमप्रकाश तिवारी, उमाकांत वाजपेयी, राजेश विक्रांत, आफतब आलम समेत मुंबई महानगर में कला, साहित्य एवं संस्कृति जगत से जुड़ी अनेक शख्सियतों की महत्वपूर्ण सहभागिता रही. समारोह का संचालन आलोक भट्टाचार्य ने किया.     

प्रेस विज्ञप्ति

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हम नसीब वाले हैं कि रजत शर्मा जैसा महान साहित्यकार और शिक्षाविद हमारे समय में पैदा हुआ!

Abhishek Srivastava :  मैं रजत शर्मा को ‘शिक्षा और साहित्‍य’ के लिए मिले पद्म पुरस्‍कार का तहे दिल से स्‍वागत करता हूं। प्रधानजी से मेरा अनुरोध है कि अगले पद्म पुरस्‍कारों में सामाजिक परिवर्तन के लिए ज़ी न्‍यूज़ के सुधीर चौधरी, साहित्‍य के लिए डॉ. नरेश त्रेहान, चिकित्‍सा के लिए कुमार विश्‍वास, अमन-चैन के लिए श्री प्रवीण तोगडि़या, विज्ञान के लिए साक्षी महाराज आौर पत्रकारिता के लिए सुश्री स्‍मृति ईरानी के नामों पर विचार किया जाए। इसके अलावा हिंदी भाषा में साहित्‍य अकादमी का पुरस्‍कार चेतन भगत और अमीश त्रिपाठी को संयुक्‍त रूप से दिया जाए तथा अंग्रेज़ी में साहित्‍य अकादमी का पुरस्‍कार श्री सुधीश पचौरी को दिया जाए। अगर संभव हो तो मैग्‍सेसे पुरस्‍कार के लिए भारत की ओर से राष्‍ट्रीय गोरक्षा समिति को नामित किया जाए तथा शांति के नोबेल पुरस्‍कार के लिए भारत सरकार की ओर से श्री अजित डोभाल का नाम प्रस्‍तावित किया जाए। दरअसल, मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि दुनिया के तमाम पुरस्‍कारों पर से तमाम लोगों का भरोसा धीरे-धीरे उठ जाए।

Krishna Kant : हम नसीब वाले हैं कि ऐसा महान साहित्यकार और शिक्षाविद हमारे समय में पैदा हुआ. मैं इनके सभी डेढ़ दर्जन उपन्यास, पच्चीस कहानी संग्रह पढ़ चुका हूं. इनके जिस उपन्यास पर नोबेल मिला है, वह मेरे तकिए के नीचे रहता है. जिस किताब पर साहित्य अकादमी मिला, वह भी पूरी दुनिया में 30 भाषाओं में अनूदित हुई. यह विराट हिंदू साहित्य के क्षेत्र में भारतीय दोस्तोवस्की है. विज्ञान और शिक्षा पर इनकी किताब भी अब तक पांच करोड़ लोग प्रतिदिन पढ़ते हैं जिसमें नाग—नागिन सहवास, भूतनी का प्याज मांगना, शिव की लीला का साक्षात होना, रावण की कब्र का पता आदि विराट हिंदू ज्ञान उल्लिखित है. इनके रचे साहित्य पढ़कर भारत जरूर विश्वगुरु बनेगा. मोदी जी को भी दंडवत जिन्होंने इस महान विभूति की प्रतिभा को पहचान लिया.

Md Zafar Imam : रजत शर्मा (इंडिया टीवी )को पदमभूषण पदक से सम्मानित किया गया है प्लीज कोई किसी पार्टी की दलाली में मिला इनाम मत कहना ..

Jyotika Patteson :  शिक्षा के लिए रजत शर्मा जी ने क्या कार्य किया है जो इस पुरस्कार से नवाजे गये….. मुझे तो जानकारी नही है यदि आप लोगों को मालूम हो तो जरूर अवगत कराये… ज्ञान का विस्तार होगा….

नवीन रमण : रजत शर्मा जैसों का शुक्र गुजार हूँ कि इन जैसों ने न्यूज चैनल देखने बन्द करवा दिए। कितना टाइम बच जाता है फेसबुक के लिए और किताबें पढ़ने के लिए। सरकार जी इन्हें कोई भी भूषण दे दो रहेंगे ये बिना आभूषण के ही।

Dilip C Mandal : BREAKING NEWS यह है कि रजत शर्मा एक्जाम में कॉपी खाली छोड़कर गुस्से में घर लौट गए क्योंकि सवाल पूछा गया था कि साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में रजत शर्मा के योगदान पर 3 लाइन की टिप्पणी लिखें. ऐसे मुश्किल सवाल के जवाब में 3 लाइनें लिखना कोई आसान काम है क्या?

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एक्जाम में इस सवाल के जवाब में 0/10 नंबर पाने वाले बच्चे की कॉपी से. सवाल – शिक्षा और साहित्य के क्षेेत्र में रजत “पद्मभूषण” शर्मा के योगदान पर टिप्पणी लिखें. (10 नंबर). उत्तर- रजत शर्मा ने…धत्त! क्या लिखूं? (क्या आप इस सवाल का जवाब लिखने में बच्चे की मदद कर सकते हैं? वह अपना टिफिन आपके साथ शेयर करने के लिए तैयार है. बच्चा अभी तक कनफ्यूज है कि अगले साल यही सवाल आ गया, तो क्य़ा लिखेगा. क्लास के मास्टर यह सवाल पूछने पर पीटते हैं.)

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हंसना मना है. सख्त मना है. BLOCK कर दूंगा. पद्मभूषण शर्मा पर हंसना बिल्कुल मना है. “सीछा और सहीत्य” के लिए मिला है, इस बात पर हंसना और भी मना है. चाहें तो रो लीजिए. यह भारतीय गणराज्य का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है. आप लोग भी उनसे “सिछा” लीजिए. गूगल पर सर्च करने से ये “सिछा” मिल रही है.

Dayanand Pandey : इंडिया टीवी पर भूत प्रेत समेत दुनिया भर के अंध विश्वास परोसने वाले, टीवी जैसे सशक्त माध्यम से देश के लोगों की मानसिकता को प्रदूषित करने वाले, भाजपा का नित-नया गुणगान करने वाले, कभी विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता रहे और वित्त मंत्री अरुण जेटली के चिंटू, पत्रकारिता में दल्लागिरी के बादशाह और जाने क्या-क्या श्रीमान रजत शर्मा को कल मोदी सरकार ने पद्म भूषण से नवाजा। लेकिन उनके धत कर्म सो काल्ड पत्रकारिता के लिए नहीं बल्कि साहित्य और शिक्षा के लिए। अब साहित्य और शिक्षा में रजत शर्मा का क्या योगदान है, कोई मुझे बता सके तो मैं उसको खूब बड़ा-सा सैल्यूट करना चाहूंगा! दिलचस्प यह कि जनाब अपने पद्म भूषण की खबर को कल रात नौ बजे के प्राइम टाइम बुलेटिन में पहली और मुख्य खबर बना कर आत्म प्रशंसा की तमाम क्लिपिंग दिखा कर अपनी दुम ऊंची करते रहे। इतनी कि भारत रत्न मदन मोहन मालवीय की खबर दूसरे नंबर पर आई और कश्मीर में बाढ़ की मुख्य खबर तीसरे नंबर पर चली गई।

Mukesh Yadav : पद्म भूषण रजत शर्मा!! : रजत शर्मा को ‘भाड़े का रत्न’ पुरस्कार मिलना चाहिए था! अपने सम्मान की खातिर ‘शिक्षा’ और ‘साहित्य’ को भी डूब मरना चाहिए!

पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव, कृष्ण कांत, मोहम्मद जफर इमाम, ज्योतिका पैटरसन, नवीन रमण, दिलीप मंडल, दयानंद पांडेय, मुकेश यादव के फेसबुक वॉल से.

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‘उमेश डोभाल पत्रकारिता पुरस्कार’ चयन का नहीं रहा कोई मापदंड!

उत्तराखंड में हर वर्ष 25 मार्च को प्रिंट और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के एक-एक युवा पत्रकार को उमेश डोभाल पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसे पत्रकारों को पुरस्कार से नवाजा जा रहा है, जिनका उत्तराखंड की पत्रकारिता में कोई खास योगदान ही नहीं है। हैरानी इस बात है कि कई पत्रकारों को मात्र दो या फिर तीन साल की पत्रकारिता करने पर ये पुरस्कार दिया जा चुका है, जबकि आयोजक इसे राज्य का सबसे बड़ा पुरस्कार करार देते हैं। प्रिंट के मुकाबले इलैक्ट्रानिक में ज्यादा बुरी स्थिति है। इलैक्ट्रानिक मीडिया में साल 2009 से ये पुरस्कार देने की परम्परा शुरू हुई थी।

शुरू के दो-तीन पुरस्कारों को छोड़ दें तो अब तक के सभी पुरस्कार ऐसे लोगों को दिए गये हैं, जिनको राज्य में शायद ही कोई जानता हो। ऐसा नही है कि राज्य में जनपक्षीय और ईमानदार पत्रकारों का टोटा पड़ा है लेकिन न जाने क्यों चयन समिति हर बार ऐसे फैसले ले रही है कि लोगों का उस पर से भरोसा साल दर साल  उठता जा रहा है। सम्मानित किए जाने वाले पत्रकारों के चयन के लिए पहले हर जिले से कुछ लोगों की सुझाव लिए जाते थे लेकिन वहां भी यही गल्तियां हुईं। इस साल दो अनजान चेहरों को इस पुरस्कार के लिए चुना गया, जिससे नाराज हो कर कई वरिष्ठ पत्रकारों ने उमेश डोभाल स्मृति समारोह में न जाने का मन बना लिया।

(एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित)

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विभिन्न पुरस्कारों के लिए पत्रकार महेश चांडक, मनीष, किशन, लक्ष्मीनारायण, संजय, सुधीर, प्रेमशंकर, दिनेश का चयन

छिन्दवाड़ा : राज्य शासन द्वारा गठित जूरी ने राज्य स्तरीय एवं आंचलिक ग्रामीण पत्रकारिता पुरस्कारों के लिये पत्रकारों का चयन कर लिया है। इन पुरस्कारों का चयन वर्ष 2008 से वर्ष 2014 तक के लिये किया गया है। राज्य स्तरीय पुरस्कार के रूप में प्रत्येक को एक लाख रुपये एवं आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार में 51 हजार रुपये और स्मृति चिन्ह भेट किया जायेगा। चयनित पत्रकारों को राज्य स्तरीय समारोह में पुरस्कृत किया जायेगा।

वर्ष 2010 के जीवनलाल वर्मा विद्रोही (जबलपुर) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार के लिये छिन्दवाड़ा के वरिष्ठ पत्रकार महेश चांडक का चयन किया गया है। उल्लेखनीय है कि महेश चाडंक न्यूज एजेंसी और विभिन्न इलेक्ट्रानिक चैनलों से सम्बद्ध रहकर पत्रकारिता कर रहे हैं। राज्य शासन के जनसपंर्क विभाग द्वारा श्री चाडंक को जिला एवं राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्रदान की गई है। जनसपंर्क विभाग द्वारा वर्तमान में श्री चाडंक को जबलपुर संभाग स्तरीय अधिमान्यता समिति में सदस्य के रूप में दो वर्षों के लिये शामिल किया गया है तथा वर्ष 2015 में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्रदान की गई है।

राज्य शासन द्वारा जीवनलाल वर्मा विद्रोही (जबलपुर) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार के अंतर्गत वर्ष 2008 के लिये डॉ. किशन कछवाह जबलपुर, वर्ष 2009 के लिये श्री मनीष गुप्ता जबलपुर, वर्ष 2011 के लिये लक्ष्मीनारायण अवधिया डिंडौरी, वर्ष 2012 के लिये संजय जैन कटनी, वर्ष 2013 के लिये सुधीर उपाध्याय मंडला और वर्ष 2014 के लिये प्रेम शंकर तिवारी जबलपुर का चयन किया गया है। वर्ष 2013 के लिए राहुल बारपुते पत्रकारिता पुरस्कार खंडवा के पत्रकार दिनेश बावनिया को मिलेगा। इसी प्रकार सत्यनारायण श्रीवास्तव राज्य स्तरीय पत्रकारिता पुरस्कार, शरद जोशी (भोपाल) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार, बनारसी दास चतुर्वेदी (रीवा) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार, रतनलाल जोशी (ग्वालियर) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार, मास्टर बलदेव प्रसाद (सागर) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार और कन्हैयालाल वैद्य (उज्जैन) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार के लिये भी पत्रकारों का चयन किया गया है।

 

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13 गुजराती पत्रकारों को मोदी ने किया पुरस्कृत, शेखर गुप्ता व रजत शर्मा को राष्ट्रीय पुरस्कार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 13 गुजराती पत्रकारों को बतुकभाई दीक्षित पुरस्कार से सम्मानित किया। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 13 गुजराती पत्रकारों को सूरत शहर पत्रकार कल्याण निधि का सालाना बतुकभाई दीक्षित पुरस्कार प्रदान किया। इस पुरस्कार जीतने वाले सभी विजेताओं को मोदी ने बधाई दी। इस मौके पर सी.आर.पाटिल सहित कुछ संसद सदस्य भी उपस्थित थे।

उधर, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कारों के लिए पत्रकारों का चयन कर लिया गया है। चयनित पत्रकारों में रजत शर्मा और शेखर गुप्ता भी शामिल हैं। राज्य शासन द्वारा गठित जूरी द्वारा वर्ष 2011 से वर्ष 2014 तक के लिए पुरस्कारों का चयन किया गया है। चयनित पत्रकारों को राज्य-स्तरीय समारोह में पुरस्कृत किया जाएगा। पुरस्कार में प्रत्येक पत्रकार को दो लाख की सम्मान राशि और स्मृति-चिन्ह भेंट किया जाएगा। आधिकारिक तौर पर जारी जानकारी के अनुसार गणेश शंकर विद्यार्थी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार वर्ष 2011 के लिए कैलाश चन्द्र पंत भोपाल, वर्ष 2012 महेश श्रीवास्तव भोपाल, वर्ष 2013 शंकर शरण दिल्ली और वर्ष 2014 के लिए रजत शर्मा दिल्ली का चयन किया गया है।

इसी तरह विद्यानिवास मिश्र राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार वर्ष 2011 के लिए राजनाथ सूर्य, लखनऊ, वर्ष 2012 असीम कुमार मित्र कोलकाता, वर्ष 2013 धीरेन्द्र नाथ चक्रवर्ती असम और वर्ष 2014 के लिए शेखर गुप्ता दिल्ली का चयन किया गया है। माणिकचन्द्र बाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार वर्ष 2011 के लिए श्याम खोसला दिल्ली, वर्ष 2012 बबन प्रसाद मिश्रा रायपुर, वर्ष 2013 राजेन्द्र शर्मा भोपाल और वर्ष 2014 के लिए बल्देव भाई दिल्ली का चयन किया गया है।

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जेटली देंगे फोटोग्राफी पुरस्कार

नयी दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली प्रख्यात फोटोग्राफरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके उल्लेखनीय योगदान के लिये राष्ट्रीय फोटोग्राफी पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज एक विज्ञप्ति में बताया कि चौथा राष्ट्रीय फोटोग्राफी पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिया जायेगा। ‘बेस्ट फोटोग्राफर आफ द ईयर’, पेशेवर एवं गैर पेशेवर श्रेणी दोनों में ‘स्पेशल मेंशन पुरस्कार’ तथा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार’। ये पुरस्कार फोटो डिवीजन द्वारा आयोजित एक समारोह में 20 मार्च को दिये जायेंगे।

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आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार के लिए गोविन्द बड़ोने का चयन

राजगढ़ (म.प्र.) : राज्य शासन द्वारा गठित जूरी द्वारा आंचलिक ग्रामीण पत्रकारिता पुरस्कार के लिए जिला प्रेस क्लब के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार गोविन्द बड़ोने का चयन किया गया है. पुरस्कार का चयन वर्ष 2009 के लिए किया गया है. आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार में 51 हजार रुपए और स्मृति-चिन्ह भेंट किया जायगा. चयनित पत्रकार गोविन्द बड़ोने को राज्य–स्तरीय समारोह में पुरस्कृत किया जायगा.

आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार के लिए गोविन्द बड़ोने के चयन पर वरिष्ठ पत्रकार प्रेम वर्मा, सत्येन्द्र भारिल्ल, भानू ठाकुर, मोहम्मद अली, नरेन्द्र जैन, तनवीर वारसी, राजीव शेखर शर्मा, संभागीय अधिमान्यता समिति के सदस्य ओम व्यास, संतोष पुष्पद, रमेश मालवीय, पुरषोत्तम वैष्णव, शैलेन्द्र शर्मा, कमल चौरसिया, बी.के.तिवारी, आनंद त्रिपाठी, मुर्तुजाभाई, जितेन्द्र सेन और नितिन डांगरा आदि पत्रकारों ने बधाईयां दी है.

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‘अमर उजाला’ के आशुतोष मिश्र और टीम को केसी कुलिश अवार्ड

‘अमर उजाला’ कानपुर के सीनियर रिपोर्टर आशुतोष मिश्र और उनकी टीम को केसी कुलिश इंटरनेशनल मेरिट अवॉर्ड देने की घोषणा की गई है। मेरिट अवार्ड के लिए ‘अमर उजाला’ की ओर से भेजी गई दोनों एंट्रीज को चुन लिया गया है। टीम को यह अवार्ड 14 मार्च को जयपुर राजस्थान में होने वाले कार्यक्रम में दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय पुल्तिजर पुरस्कार जैसे ख्यातिलब्ध केसी कुलिश इंटरनेशनल अवार्ड का प्रथम पुरस्कार 11 हजार यूएसए डॉलर है। इसके अलावा दस मेरिट अवॉर्ड भी दिए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार जगत में उल्लेखनीय पत्रकारिता के लिए यह पुरस्कार राजस्थान पत्रिका समूह की ओर से दिया जाता है।

 खोजी पत्रकारिता की श्रेणी में दिए जाने वाले केसी कुलिश अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन प्रिंट जर्नलिज्म की जूरी ने आशुतोष मिश्र और उनकी टीम को दो एंट्रीज में अवार्ड दिया है। पहला अवार्ड पाकिस्तानी नागरिक इदरीस की पोल खोलने और उसे जेल तक पहुंचाने के लिए मिला है। दूसरा पुरस्कार कानपुर के राजा हिंदू के किले पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों का खुलासा कर किले को फिर से पब्लिक लैंड घोषित कराने पर दिया गया है। ‘अमर उजाला’ की इस टीम में सीनियर रिपोर्टर आशुतोष मिश्र के साथ सीनियर सब एडिटर अभिषेक सिंह, सीनियर फोटो जर्नलिस्ट संजय लोचन पांडेय और फोटो जर्नलिस्ट धीरेंद्र जायसवाल शामिल थे। आशुतोष मिश्र को केसीके पदक, प्रमाण पत्र और टीम के सदस्यों को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे।

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गोइन्का साहित्यिक पुरस्कार 2015 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

कमला गोइन्का फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्री श्यामसुन्दर गोइन्का ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके वर्ष 2015 के लिए “बाबूलाल गोइन्का हिन्दी साहित्य पुरस्कार” एवं हिन्दीतर भाषी हिन्दी युवा लेखकों के लिए “प्रो. एन. नागप्पा युवा साहित्यकार पुरस्कार” (वय सीमा 35 वर्ष) तथा “रामनाथ गोइन्का पत्रकारिता शिरोमणि पुरस्कार” के साथ-साथ हिन्दी से तमिल व तमिल से हिन्दी एवं मलयालम से हिनदी व हिन्दी से मलयालम अनुवाद के लिए सद्य घोषित “बालकृष्ण गोइऩ्का अनूदित साहित्य पुरस्कार” के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की हैं।

श्री गोइन्का जी ने जानकारी दी है कि अहिन्दी भाषी साहित्यकार यानी जिनकी मातृभाषा दक्षिण भारतीय भाषाओं में जैसें कन्नड़, मलयालम, तेलुगु, तमिल, तुलु, उड़िया अथवा कोंकणी में जो हिन्दी में मूल रूप से लिख रहे हैं, इन प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं। जो हिन्दी भाषी साहित्यकार अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में 10 वर्षों या अधिक से हिन्दी साहित्य की सेवा कर रहे हैं, वे भी इन पुरस्कारों के हकदार होंगे। ऐसे हिन्दी किंवा अहिन्दी भाषी दोनों इन पुरस्कारों के लिए अपनी प्रविष्टि भेज सकते हैं। प्रविष्टियां मिलने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2015 है। नियमावली एवं पु्रस्ताव-पत्र के लिए हमारी वेब साइट www.kgfmumbai.com का अवलेकन करें। अधिक जानकारी के लिए बैंगलोर दूरभाष: 080-32005502 (कमलेश) इ-डाक : kgf@gogoindia.com या साधारण पत्र द्वारा संपर्क किया जा सकता है।

कमलेश यादव
(कार्यकारी सचिव, कमला गोइन्का फाउण्डेशन)
मो. 9620207976.

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सफलता के मुहावरे गढ़ते हैं आईआईएमसीएन… कभी इश्क़ की बात कभी खबरों से मुलाक़ात…

Amarendra A Kishore : बात की शुरुआत करने के पहले राजकमल प्रकाशन परिवार को बधाई– आज उसकी प्रकाशन यात्रा के ६६ वर्ष पूरे करने पर। जब भी किसी बड़े पुरस्कार या सम्मान की घोषणा होती है तो अमूमन भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) का नाम उभर कर सामने आता है– चाहे गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार की बात हो या रामनाथ गोयनका सम्मान की– आईआईएमसी एक अनिवार्यता बन जाता है।

यह सुखद संयोग है कि हाल ही में जब रामनाथ गोयनका सम्मान की घोषणा हुई तो उसमें पांच नाम ऐसे थे जिन्होंने पत्रकारिता की शिक्षा भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में पूरी की थी। आज एक ख़ास अवसर है। इस साल का राजकमल प्रकाशन सृजनात्मक गद्य सम्मान रवीश कुमार की गुलाबी कृति ‘इश्क़ में शहर होना’ को देने की घोषणा हुई है। रवीश भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के छात्र रह चुके हैं। आज से ३ साल पहले इसी मंच पर मुझे भी सम्मानित होने का अवसर मिला था, मेरी कृति “बादलों के रंग हवाओं के संग” के लिए। इसलिए आज एक बार फिर से आईआईएमसी सम्मानित हो रहा है। आईआईएमसी में सहपाठी होने के नाते मेरी ओर से रवीश को बहुत सारी बधाई। राजकमल प्रकाशन पुरस्कार निर्णायक समिति को साधुवाद– जिन्होंने एक आईआईएमसीएन की कृति को सम्मान के योग्य एक बार फिर से समझा। रविश लगातार इश्क़ की दास्ताँ लिखते रहें, मेरी शुभ कामनाएं। बाकी बातें रवीश तुमसे मिलकर।

अमरेंद्र किशोर के फेसबुक वॉल से.

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मुंबई प्रेस क्लब ने पत्रकारिता में पुरस्कार के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की

मुंबई प्रेस क्लब ने पत्रकारिता के क्षेत्र प्रतिष्ठित रेडइंक अवार्ड के लिए 10 श्रेणियों में बेहतरीन 10 खबरों के लिए देश भर से पत्रकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की है. यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि पुरस्कार के लिए 28 फरवरी से प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया से प्रविष्टियां आमंत्रित की गयी है और इसके लिए कुल 20 लाख रुपया पुरस्कार दिया जाएगा. 

अपने पांच साल के इतिहास में पहली बार, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के साथ-साथ टेलीविजन और दृश्य खबरों को भी इस पुरस्कार में शामिल किया गया है. खोजी पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने के क्रम में और अलग तरह की खबरों के लिए मानवाधिकारों और पर्यावरण पर बेहतरीन लेखन और टीवी खबरों की श्रेणियों के लिए भी अलग से पुरस्कार दिये जाएंगे. विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रेस क्लब इस साल एक विशेष ‘जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार भी देगी. व्यापार, राजनीति, अपराध, खेल, लाइफस्टाइल और मनोरंजन, ‘बिग पिक्चर’ ऑफ द ईयर, विज्ञान और तकनीक और स्वास्थ्य अन्य श्रेणियों में शामिल है. यह पुरस्कार 25 अप्रैल को मुंबई में एनसीपीए के जमशेद भाभा थियेटर में दिया जाएगा.

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मालचन्द तिवाड़ी व रवीश कुमार को सृजनात्मक गद्य के लिए पुरस्कार

विश्व पुस्तक मेले के आठवें दिन राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा राजकमल प्रकाशन सृजनात्मक गद्य सम्मान (वर्ष 2014-15) के लिए चयनित कृतियों के नामों की घोषणा की गयी। इस साल 28 फरवरी को राजकमल प्रकाशन के 66वें स्थापना दिवस के अवसर पर यह पुरस्कार संयुक्त रूप से मालचन्द तिवाड़ी की कथेतर कृति ‘बोरूंदा डायरीः अप्रतिम बिज्जी का विदा-गीत’ व रवीश कुमार के नैनो फिक्शन के सचित्र चयन ‘इश्क़ में शहर होना’ को दिया जाएगा।

एक तरफ ‘बोरूंदा डायरी’ ने अप्रतिम कथाकार विजयदान देथा के जीवन के अंतिम 11 महीनों का मर्मपूर्ण, जीवंत और प्रामाणिक चित्र उकेरा है और उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने के अचूक सूत्र दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ इसके सरस, काव्यात्मक व आत्मीय गद्य ने अपने पाठकों व आलोचकों का मन मोहा है। ‘इश्क़ में शहर होना’ सोशल मीडिया से उपजा साहित्य है जिसने प्रिंट माध्यम में नए कलेवर में आने के बाद हिंदी साहित्य के पारंपरिक पाठक समाज के दायरे का अतिक्रमण करते हुए नए पाठक समूह को आकर्षित किया है और अल्प समय में अपना व्यापक प्रभाव छोड़ा है। इसके पीछे इसकी आंतरिक शक्ति इसके गद्य के आस्वाद में है। जो जितना अपने समय को समेटे हुए है उतना ही शब्दों के बर्ताव में मितव्ययी है। काव्यात्मक लहजे में छोटे-छोटे वाक्य अर्थ-प्रभाव में गहरे हैं।साधारणता का यह सौंदर्य ही पाठकों को भरोसे में ले पाने में इसको सक्षम बनाता है।

यह पुरस्कार अब तक किसी एक कृति को ही दिया जाता रहा है लेकिन इस बार डॉ. नामवर सिंह की अध्यक्षता में गठित निर्णायक मंडल ने दो कृतियों को इस पुरस्कार के लिए चयन किया। निर्णायक मंडल के सम्मानित सदस्य थे- वरिष्ठ कथाकार विश्वनाथ त्रिपाठी एवं मैत्रेयी पुष्पा।  इससे पहले यह पुरस्कार क्रमशः ‘चूड़ी बाजार में लड़की’ (कृष्ण कुमार), ‘ गांधीः एक असंभव संभावना’ (सुधीर चन्द्र),  ’व्योमकेश दरवेश’ (विश्वनाथ त्रिपाठी)’ को दिया जा चुका है।  पुरस्कारस्वरूप पुरस्कृत लेखक को श्रीमती शांति कुमारी वाजपेयी की स्मृति में उनके परिवार द्वारा 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और राजकमल प्रकाशन द्वारा सम्मान पत्र भेंट किया जाता है।

आज मेले में सायं साढे चार बजे राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर पाठकों की ठसाठस भरी भीड़ के बीच विख्यात आलोचक नामवर सिंह, पाठकप्रिय कथाकार मैत्रेयी पुष्पा और मशहूर शायर-गीतकार जावेद अख्तर की उपस्थिति में इस पुरस्कार से पुरस्कृत कृतियों व लेखकों के नामों की घोषणा की गयी। स्टॉल में उपस्थित पाठक समुदाय ने तालियों की गड़गड़ाहट से इस घोषणा का स्वागत किया। उस समय स्टॉल में ‘इश्क़ में शहर होना’ के लेखक रवीश कुमार भी उपस्थित थे। उनको बधाई देते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि मैं आपकी किताब की बहुत अधिक तारीफ व चर्चा उन लोगों से सुन चुका हूं जिन लोगों ने इसे पढ़ा है। मैं इस किताब को अब पढ़ रहा हूं आप तैयार रहिए आपको किसी भी दिन मेरी तरफ से फोन आ सकता है कि आपकी इन कहानियों पर मैं फिल्म बनाने जा रहा हूं।

प्रेस विज्ञप्ति

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‘हिंदुस्तान एक्सप्रेस’ के एएन शिब्ली को एयू आज़मी अवार्ड

नयी दिल्ली।  नयी दिल्ली में आयोजित एक प्रोग्राम के दौरान पत्रकारिता में उनकी सेवा के लिए हिंदुस्तान एक्सप्रेस से बयूरो चीफ और आज़ादएक्सप्रेस डॉट कॉम के संपादक ए एन शिब्ली को ए यू आज़मी अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिबली के अलावा नवभारत टाइम्स के राहुल आनंद , मुस्लिम मिरर के अब्दुल बारी मसूद, ड्रग टुडे के खाजा रशीदुद्दीन, दैनिंक जागरण के अमित कसना भी सम्मानित किये गए।

आल इंडिया यूनानी  तिब्बी कॉंग्रेस्स के जनरल सेक्रेटरी डाक्टर स्येद अहमद खान ने इस अवसर पर कहा कि  पत्रकारिता एक ज़िम्मेदारी वाला पेश है और हमें चाहिए की हम ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकारों को सम्मान देते रहे ताकि वह देश और समाज को अपनी सेवाएं देते रहें.

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कृष्ण मुरारी किशन के नाम पर ‘फोटो जर्नलिस्ट एवार्ड’ शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री मांझी को पत्र लिखा

सेवा में, श्री जीतन राम मांझी, माननीय मुख्यमंत्री,

बिहार सरकार, पटना

विषय- राज्य सरकार की ओर से पटना निवासी प्रख्यात छायाकार स्व.कृष्ण मुरारी किशन जी के नाम पर प्रति वर्ष ‘के एम किशन पत्रकारिता/छायाकार सम्मान एवार्ड’ देने के आग्रह के संदर्भ में,

मान्यवर,

फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में पूरे देश में कई दशक से बिहार का नाम रौशन करने वाले स्व. कृष्ण मुरारी किशन जी फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में युवाओं के आदर्श तो रहे ही हैं देश-विदेश में इन्होंने अपनी कला की धूम मचायी है। इनकी खींची तस्वीरों के लोकनायक जयप्रकाश नारायण सहित देश व बिहार के राजनेता कायल रहे हैं। स्व. किशन जी एक व्यक्ति नहीं बल्कि खुद में संस्था माने जाते रहे हैं। अपनी बेजोड़ बेजोड़ और अकल्पनीय फोटो पत्रकारिता के माध्यम से स्व.कृष्ण मुरारी किशन जी ने जिस तरह बिहार को लगातार गौरवान्वित किया है सरकार को चाहिए कि वह कृष्ण मुरारी जी के कार्यो को सदा याद रखने के लिए कुछ ऐसा निर्णय ले जिससे युवा और नई पीढ़ी के पत्रकारों में एक नई उर्जा का संचार हो।

मैं आपसे निवेदन करता हूं कि कि राज्य मंत्री परिषद की बैठक कर प्रति वर्ष 16 नवम्बर को मनाए जाने वाले ‘प्रेस दिवस’ के अवसर पर राज्य सरकार पत्रकारो/छायाकारों को स्व. कृष्ण मुरारी किशन जी की याद में ‘के एम किशन पत्रकारिता/छायाकार सम्मान एवार्ड’ देने का निर्णय ले। इसके लिए राज्य के तमाम पत्रकारों की ओर से मैं आपका अनुगृहित रहूंगा।

विश्वासी
विनायक विजेता
पत्रकार
111, शिव-सरस्वती अपार्टमेंट
नियर शिव मंदिर, शिवपुरी, बेऊर, पटना
मो.-9431297057

प्रतिलिपि- श्री विनय बिहारी, माननीय कला-संस्कृति मंत्री, बिहार सरकार
2. श्री नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार सरकार

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स्वप्न दासगुप्ता, रजत शर्मा और रामबहादुर राय को पद्म पत्रकारिता के नाम पर मिलता तो खुशी होती

Shambhunath Shukla : जिन तीन पत्रकारों को पद्म पुरस्कार मिला है उनका योगदान साहित्य व शिक्षा क्षेत्र में बताया गया है। मगर तीनों में से किसी ने भी जवानी से बुढ़ापे तक कोई चार लाइन की कविता तक नहीं लिखी। यहां तक कि नारे भी नहीं। ये तीन पत्रकार हैं स्वप्न दासगुप्ता, रजत शर्मा (दोनों को पद्म भूषण) और रामबहादुर राय को पद्म श्री। पत्रकारों को पद्म पत्रकारिता के नाम पर मिलता तो खुशी होती।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के फेसबुक वॉल से.

Umesh Chaturvedi : जयप्रकाश आंदोलन के अगुआ… शुचिता की पत्रकारिता के पैरोकार… ईमानदार कलम… जयप्रकाश नारायण के शिष्य… गांधी विचार के प्रबल अनुयायी…. चंद्रशेखर, वीपी सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे प्रधानमंत्रियों के नजदीकी होने के बावजूद राजनीति के आंगन में सहज निर्विकार शख्सियत… यथावत पाक्षिक के संपादक… रामबहादुर राय के लिए कई और विशेषण हो सकते हैं. उन्हें पद्मश्री मिलने पर हार्दिक बधाई. यह बात और है कि वे इससे भी कहीं ज्यादा के हकदार हैं.

पत्रकार उमेश चतुर्वेदी के फेसबुक वॉल से.

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सुलतानपुर के पत्रकार राज खन्ना को भारत भारती ने किया सम्मानित

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की जयन्ती के मौके पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाली सुलतानपुर की संस्था भारत भारती ने वरिष्ठ पत्रकार राज खन्ना समेत विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगो को उनके विशिष्ट कार्यों को लिए सम्मानित किया। श्री खन्ना को ‘सुलतानपुर रत्न’ के सम्मान से नवाजा गया। सुलतानपुर की जिलाधिकारी अदिति सिंह को लोकभूषण, एशियाड 2014 में कांस्य पदक विजेता मोहम्मद आजाद को सुलतानपुर रत्न, हवा से चलने वाले इंजन के आविष्कारक बंदायू के देवेन्द्र कुमार को लोकमणि, छह लोगो को लोकरत्न तथा दो लोगो को लोकदीप रत्न से संस्था द्वारा सम्मनित किया गया।

संस्था द्वारा सुलतानपुर के पंडित रामनरेश त्रिपाठी सभागार में आयोजित समारोह में उत्तरप्रदेश के लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन के मल्होत्रा ने पत्रकार श्री खन्ना समेत सभी को संस्था की ओर से अलंकरण,अंगवस्त्र एवं नगद राशि से सम्मानित किया।श्री मल्होत्रा ने इस मौके पर भारत भारती के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि लोकपाल,लोकायुक्त एवं सरकारों द्वारा भ्रष्टाचार को समाप्त नही किया जा सकता,बल्कि भ्रष्टाचार को चरित्र के निर्माण से ही समाप्त किया जा सकता है।

श्री खन्ना ने इस मौके पर संस्था द्वारा प्रदान की गई 21 हजार रूपए की धनराशि को सुलतानपुर में असहाय एवं वंचित लोगो की सेवा में वर्षों से जुटी संस्था शहीद स्मारक सेवा समिति के अध्यक्ष करतार केशव यादव को  संस्था के कार्यों के लिए समर्पित करने की घोषणा की। भारत भारती पिछले 35 वर्षों से कार्य करते हुए अपनी पहचान बनाई है।संस्था देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री स्वं गुलजारीलाल नन्दा, पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी समेत विशिष्ट कार्य करने वाले देश के जाने माने लोगो को सम्मानित कर चुकी है। संस्था आजादी की जंग में शहीद हुए तात्या टोपे के वंशजों तथा शहीद अशफाक उल्ला के वंशजों को भी सम्मनित किया है।संस्था के कार्यक्रमों में पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरागांधी के खिलाफ निर्णय सुनाने वाले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा,वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर,शहीद भगत सिह के साथी जयदेव कपूर समेत कई जाने माने लोग शामिल हो चुके है।              

प्रेषक – अशोककुमार साहू
वरिष्ठ संवाददाता यूनीवार्ता रायपुर (छत्तीसगढ़)
मो. 09425211267

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दैनिक भास्कर के विजय सिंह कौशिक को अभियान पुरस्कार

मुंबई। महानगर की जानीमानी सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था अभियान द्वारा आयोजित 27 वे उत्तरप्रदेश स्थापना दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक और गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने दैनिक भास्कर (मुंबई) के प्रमुख संवाददाता विजय सिंह कौशिक को राजेश मिश्र युवा पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान किया। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष अमरजीत मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार प्रेम शुक्ल, सुप्रसिद्ध गायक व भाजपा सांसद मनोज तिवारी, भाजपा के राष्ट्रिय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी व महाराष्ट्र भाजपा के उपाध्यक्ष जयप्रकाश ठाकुर आदि मौजूद थे। इस मौके पर सुप्रसिद्ध टीवी अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ल को उत्तर कला श्री पुरस्कार प्रदान किया गया। पिछले 27 सालो से मुंबई में यह कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्था अभियान हर साल उत्तरप्रदेश स्थापना दिवस पर विभिन्न क्षेत्रो में उल्लेखनीय उपलब्धी हासिल करने वाले उत्तरप्रदेश मूल की हस्तियों को सम्मानित करती है।

बहुत कम समय में देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई की पत्रकारिता में एक अहम स्थान बनाने वाले विजय सिंह कौशिक  आशावादी, चिंतनशील, ज़िम्मेदार, मिलनसार, सृजनशील, समंजनीय व्यक्तित्व के धनी रहे हैं। मुंबई में उनकी पहचान लीक से हटकर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार की है इसीलिए बहुत अल्प समय में ही उनकी क़लम का लोहा पूरा शहर मानने लगा है। आमतौर पर पत्रकारिता, ख़ासकर हिंदी मीडिया में उन क़लमकारों का वर्चस्व है जिनका जन्म या तो शहर में हुआ या जो पूरी तरह शहरी बैकग्राउंड के रहे हैं। देहाती पृष्ठिभूमि से आकर शहर में अपना स्थान बनाने वालों की गिनती आज भी नाम मात्र की ही है। संयोग से उन चंद लोगों में मुंबई पत्रकारिता के उदीयमान सितारे विजय का नाम शामिल है।

मायानगरी में लंबे समय तक प्रतिष्ठित हिंदी अख़बार “नवभारत” से जुड़े रहने के बाद 2013 में विजय सिंह ने बतौर प्रमुख संवाददाता देश के सबसे बड़े हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर में नई पारी का आग़ाज़ किया। मुंबई के तेजतर्रार पत्रकारों में शुमार विजय सिंह ने तक़रीबन आठ साल तक अपनी अमूल्य सेवाएं नवभारत को दीं। विजय सिंह का अपराध पर आधारित कॉलम “तहकीकात” लगातार 52 सप्ताह तक प्रकाशित हुआ। मंत्रालय समेत अनेक क्षेत्रों की रिपोर्टिंग के साथ साथ विजय पॉलिटिकल गॉसिप “राजरंग” समेत कई कॉलम भी लिखते थे।  उनके हिस्से “मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट 7/11” और “परिवहनः कल आज और कल” जैसी न्यूज़ स्टोरीज़ भी हैं।

जौनपुर में हिंदुस्तान में कई साल तक काम करने के बाद वह अमर उजाला के सुल्तानपुर ब्यूरो से जुड़ गए और 2 साल तक सुल्तानपुर में ही रहे। नई सहस्त्राब्दी में विजय देश की आर्थिक राजधानी मुंबई आ गए। यहां पहुंचते ही वह पंजाब केसरी से बतौर स्टॉफ रिपोर्टर जुड़ गए लेकिन जल्दी ही उनका पदार्पण नवभारत में हो गया। जहां फिल्मों के अलावा रेलवे, इनफ्रास्ट्रक्टर्स, कोर्ट, पॉलिटिक्स आदि विषयों की रिपोर्टिंग करनी शुरू की।

इसके पहले पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विजय सिंह को नेहरू युवा केंद्र की ओर से सम्मानित किया गया। फिल्मों में गहरी अभिरुचि रखने वाले विजय को फरवरी 2012 में सेंसर बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया। वह सितम्बर 2014 तक सेंसर बोर्ड के सदस्य रहे। विजय सिंह कौशिक का बचपन जौनपुर के मड़ियाहूं तहसील में बसुही नहीं के किनारे ठाकुर बाहुल्य अढ़नपुर गांव बीता। इनका पत्रकारिता की तरफ रुझान किशोरावस्था से ही थी। तभी तो 1996 में हिंदुस्तान के जौनपुर ब्यूरो से जुड़ गए थे।

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Award for Tribune scribe

GUWAHATI : Sanjoy Ray, staff reporter of The Assam Tribune has been chosen for the Manideep Boro Memorial Investigative Print Journalism Award, instituted by news channel News Live in the memory of journalist Manideep Boro.

The award would be presented tomorrow during the channel’s 7th anniversary celebration programme to be held at Pragjyoti Cultural Complex, Machkhowa, Guwahati. Dr Jamini Bhagawati, former Indian High Commissioner to United Kingdom would deliver a lecture on ‘Building a success story for Assam.’ Actor Adil Hussain would be conferred the ‘Assamese of the Year’ award in the same function.

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पत्रकारिता के लिए उमेश चतुर्वेदी को सम्मनित किया गया

नई दिल्ली। वरिष्ठ गांघीवादी चिंतक और गांधी स्मारक निधि के मंत्री रामचंद्र राही ने कहा है कि साहित्य का मकसद संवेदना जगाना है। आज जब समाज में संवेदना मर रही है ऐसे समय में साहित्यकारों की अहम् भूमिका है। वे गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा और विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान की ओर से सन्निधि सभागार में काकासाहव कालेलकर सम्मान समारोह की अघ्यक्षता कर रहे थे। यह समारोह काकासाहेव कालेलकर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित किया गया था। समारोह में नए रचनाकारों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के युवा वर्ग में एक वेचैनी एक विचार को लेकर है। वह वैचारिक उ​हापोह की स्थिति में है। नफरत के वोये जा रहे बीज ने सामाजिक वातावरण को कलुषित किया है तो दूसरी ओर उदाकरणीकरण के प्रभाव से विषमता की खाई पटने की जगह बढ़ती जा रही है।

इस मौके पर श्री राही ने दिल्ली की वंदना यादव, बिहार भागलपुर की उषा सिन्हा और हिसार हरियाणा की वीना को काकासाहव कालेलकर समाजसेवा सम्मान और शिक्षा के लिए शामली के मनीष जैन और पत्रकारिता के लिए उमेश चतुर्वेदी को सम्मनित किया। राही ने कहा कि इस सम्मान से दूसरे लोगों को प्रेरणा मिलेगी और समाज की संवेदना भी जगेगी। आरंभ में वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से चल रही इस संगोष्ठी के माध्यम से नए रचनाकारों कोे जोड़ने और उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के मंत्री अतुल प्रभाकर ने कहा कि अब प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विष्णु प्रभाकर सम्मान के साथ काका साहव कालेलकर सम्मान भी आरंभ किया गया है।

समारोह के विशिष्ठ अतिथि पत्रकार अ​निल पांडे ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य दोनों से समाज का हित जुड़ा हुआ है और उसी दिशा में काम होना चाहिए। पुरस्कारों से कोई रचना कालजयी नहीं होती है बल्कि रचनाओं केा आम लोगों की लोकप्रियता उसे कालजयी बनाती है। इस अवसर पर ‘समाज और साहित्य’ पर केन्द्रित संगोष्ठी में काकासाहव कालेलकर की शिष्या सुश्री ​कुसुम शाह, गांधी शांति प्रतिष्ठान के मंत्री सुरेन्द्र कुमार और ए शिवशंकर, डॉ कायनात माजी, प्रभुदयाल, किशोर जायसवाल, ​कुमार कृष्णन आदि ने अपने विचार रखे। विषय प्रवेश शिवानंद द्विवेदी ने कराया। वही गजल और गीत खुशनुमा शाम का संचालन सन्निधि संगोष्ठी की संयोजिका किरण आर्या ने किया। प्रियंका राय, विवेक सहित कई रचनाकारों अपनी रचनाओं का पाठकर भाव वोध को अभिव्यक्ति प्रदान की।

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डॉ संतोष मानव को लाल बलदेव सिंह सम्मान

डॉ संतोष मानव को लाल बलदेव सिंह सम्मान से नवाजा जाएगा। माधव राम सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान की ओर से यह पुरस्कार दिया जा रहा है जो कि बेहतर पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है। संतोष मानव इस समय भोपाल से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि में संपादक हैं।

झारखंड के एक छोटे से अनुमंडल कोडरमा से प्रभात खबर में अपनी पत्रकारिता शुरू करते हुए उन्होंने दैनिक लोकमत के लिए उड़ान भरी। फिर अखबारों से होते हुए दैनिक भास्कर के जमशेदपुर यूनिट की कमान संभाली। यहां से फिर हरिभूमि की कमान संभाली। उन्हें यह सम्मान 17 फरवरी को आयोजित एक कार्यक्रम में दिया जाना है।

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प्रसून शुक्ला के व्यक्तित्व के बारे में क्या कहा वैदिक, यशवंत, रुबी, विकास आदि ने, आप भी सुनिए…

पिछले दिनों न्यूज एक्सप्रेस चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ प्रसून शुक्ला का सम्मान उनके गृह जनपद बस्ती में एक संगठन ‘बस्ती विकास मंच’ द्वारा किया गया. इस मौके पर दिल्ली से गए कई पत्रकारों ने प्रसून शुक्ला के जीवन, करियर और सोच को लेकर अपने अपने विचार व्यक्त किए. डा. वेद प्रताप वैदिक, योगेश मिश्र, यशवंत सिंह, रुबी अरुण, सुधीर सुधाकर, विकास झा, बृजमोहन सिंह आदि ने प्रसून की पर्सनाल्टी के विविध पक्षों को उकेरा.

इस पूरे आयोजन और सबके भाषण को आप इस वीडियो लिंक पर क्लिक करके देख सुन सकते हैं…

https://www.youtube.com/watch?v=IK7_UhVVRME

इस आयोजन के बारे में बस्ती के स्थानीय अखबारों में जो कुछ छपा है, उसकी कतरन उपर नीचे प्रकाशित है जिसे पढ़कर पूरे आयोजन के बारे में विस्तार से जाना जा सकता है….

इसे भी पढ़ सकते हैं…

तो, मैं अब चला अपने गांव, सबको राम राम राम….

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जनसत्ता के वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत को रचनात्मक कार्यों के लिए स्वामी प्रणवानंद शांति पुरस्कार

नई दिल्ली । जनसत्ता के वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत को रचनात्मक कार्यों के लिए स्वामी प्रणवानंद शांति पुरस्कार देने का फैसला किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले इस पुरस्कार से महाराष्ट्र के मोहन हीरा बाई, केरल के टीपी आर नाथ और उत्तराखंड के गोपाल लोधियाल भी नवाजे जाएंगे। यह फैसला गांधी शांति प्रतिष्ठान संचालित स्वामी प्रणवानंद पुरस्कार न्यास ने किया है। अब तक इस पुरस्कार से गुजरात के वरिष्ठ सर्वोदयी नेता चुन्नीलाल वैद्य, उत्तराखंड के बिहारीलाल भाई, तमिलनाडु के डा जयप्रकाशम, एस कुलैंदे सामी, पोलैंड की अनिता सोनी, दिल्ली के एके अरुण और आगरा के कृष्णचंद्र सहाय नवाजे जा चुके हैं।

इन सभी को 10 मार्च, 2015 को नई दिल्ली में गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित एक समारोह में दिया जाएगा। स्वामी प्रणवानंद पुरस्कार न्यास के टीए नेगी के मुताबिक यह पुरस्कार हरेक दो साल में शांति और गांधीवादी साहित्य के लिए किसी दो व्यक्ति, पुस्तक या संस्था को दिया जाता है। इस बार पिछले 2010, 2012 और 2014 के लिए स्वामी प्रणवानंद साहित्य पुरस्कार वाग्देवी प्रकाशन, बीकानेर से प्रकाशित ‘सत्याग्रह की संस्कृति’ को, भारतीय विद्या भवन, मुंबई से प्रकाशित ‘मोहनदास कर्मचंद गांधी’ और उमेश कुमार की पुस्तक ‘देवता के घर बापू’ को देने फैसला किया गया है।

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वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय को मिलेगा जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार

वाराणसी : श्रीमठ, काशी की ओर से प्रतिवर्ष दिया जाने वाला एक लाख रुपये का जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार इस वर्ष देश के जाने-माने पत्रकार औऱ राजनीतिक विश्लेषक रामबहादुर राय को दिया जाएगा। स्वामी रामानंद जयंती के अवसर पर वाराणसी के नागरी नाटक मंडली सभागार में 12 जनवरी को संध्या समय राय साहब को एक लाख रुपये नकद, अंग वस्त्रम्, प्रशस्ति पत्र आदि प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

रामानंद संप्रदाय के प्रधान आचार्य और श्रीमठ पीठाधीश्वर स्वामी रामनरेशाचार्य के जगदगुरु रामानंदाचार्य पद पर प्रतिष्ठित होने के 25 साल पूरे होने पर रजत जयंती वर्ष मनाया जा रहा है, इसी कड़ी में वर्षपर्यन्त आयोजित कार्यक्रमों का समापन समारोह 10 जनवरी से 14 जनवरी तक काशी में आयोजित है। राय साहब के अलावे चार अन्य विभूतियों को भी इस साल एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

इस वर्ष जिन पांच महान विभूतियों को रामानंदाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है उनमें काशी के वेदमूर्ति विनायक मंगलेश्वर, काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष और आधुनिक पाणिनी कहे जाने वाले आचार्य रामयत्न शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार और यथावत पाक्षिक पत्रिका के संपादक रामबहादुर राय, मूर्धन्य साहित्यकार प्रोफेसर कृष्णदत्त पालीवाल (दिल्ली) और संत साहित्य के मर्मज्ञ डॉ. उदय प्रताप सिंह शामिल हैं। सभी को एक-एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और अंग वस्त्रम् से सम्मानित किया जाएगा।

श्रीमठ की ओर से हर साल हिन्दी और संस्कृत साहित्य के एक महामनीषी को एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। इसी कड़ी को आगे बढा़ते हुए रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक साथ पांच मनीषियों को इस बार रामानंदाचार्य पुरस्कार से नवाजा जा रहा है। समारोह में देश के जाने-माने विद्वान, राजनीतिज्ञ, संत-महात्मा और साहित्य-संस्कृति के मूर्धन्य लोग शामिल हो रहे हैं। पूरे कार्यक्रमों का समायोजन श्रीमठ महोत्सव न्यास, काशी ने किया है।

काशी के पंचगंगा घाट पर अवस्थित श्रीमठ ऐतिहासिक मठ है जिसका गौरवशाली इतिहास रहा है। करीब सात सौ साल पहले इसी मठ को स्वामी रामानंद ने अपनी साधना स्थली बनाई थी। यही रहते हुए उन्होंने संत कबीरदास, रविदास, धन्ना जाठ और पीपा नरेश जैसे शिष्यों को दीक्षा दी थी। इस रुप में श्रीमठ को रामानंद संप्रदाय और रामभक्ति परंपरा का मूल आचार्यपीठ होने का गौरव हासिल है। यह एक साथ सगुण और निर्गुण रामभक्ति परंपरा का संवाहक केन्द्र रहा है। मध्यकालिन भक्ति आंदोलन में स्वामी रामानंद का अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने ‘जाति-पांत पूछे ना कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’ का नारा देकर उस समय समाज में व्याप्त जातीय विद्वेष और पाखंड के खिलाफ अलख जगाई थी।

वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय का भड़ास को दिए एक पुराने इंटरव्यू को पढ़ें…

समीर जैन ने जो तनाव दिए उससे राजेंद्र माथुर उबर न सके : रामबहादुर राय

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विवेक गोयनका चाहते थे कि प्रभाष जी भी वैसा ही करें : रामबहादुर राय

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तो, मैं अब चला अपने गांव, सबको राम राम राम….

Yashwant Singh : कल और परसों जिला बस्ती (उत्तर प्रदेश) में रहूंगा. अपने घनिष्ठ मित्र Prasoon Shukla के सम्मान समारोह में. पेड और प्रायोजित पुरस्कारों की भीड़ में जब कोई अपनी ही माटी के लोगों के हाथों अपनी ही जमीन पर सम्मानित किया जाता है तो उसका सुख सबसे अलग और अलहदा होता है. बस्ती के रहने वाले हैं प्रसून शुक्ला. शुरुआती पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ लड़ने भिड़ने जूझने और अंतत: जीत जाने की ट्रेनिंग भी इसी धरती ने दी है.

प्रसून के सम्मान समारोह में शिरकत करने के लिए मुझे भी न्योता मिला. समारोहों-आयोजनों के निमंत्रण तो बहुत मिलते रहते हैं लेकिन अपनी व्यस्तताओं, आलस्य और उदासीन मन:स्थिति के कारण शिरकत नहीं कर पाता. पर बस्ती दो वजहों से जा रहा हूं. एक तो दोस्ती-मित्रता का धर्म कहता है कि मित्र-दोस्त के उत्सव और मुश्किल, दोनों का हिस्सा बनो, बिना शर्त और बिना किंतु परंतु के. दूसरा एक बेहद जमीनी और मौलिक आयोजन को जीना-समझना, जिसे न कोई पीआर कंपनी आयोजित करा रही है और न इसके पीछे कोई इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की सक्रियता है. ये उन लोगों का आयोजन है जो अपने जिले से निकलने और दूर शहरों के आसमान में जाकर चमक बिखेरने वाले सितारों को अपनी जमीन पर बुलाकर उसे दाद, सपोर्ट, समर्थन, सम्मान देकर ‘अच्छे लोगों के बिखरकर खुशबू के यत्र तत्र सर्वत्र फैला देने’ की परंपरा का आत्मिक और ममत्व भरा जयगान करते हैं.

बस्ती तक जा रहा हूं तो गाजीपुर कैसे न जाउंगा. चार घंटे का रास्ता होगा ज्यादा से ज्यादा. जब गाजीपुर जाता हूं तो पाता हूं कि वही माटी, वही रास्ते, वही लोग, वही मौसम है यहां का जबसे सांस लेना शुरू किया और आसपास को अपने अंदर के समग्र में चेतन-अवचेतन हालात में समेटना सहेजना शुरू किया. ऐसा लगता है जैसे ब्लड प्रेशर खुद ब खुद लो हो गया. ऐसा लगता है जैसे उत्साह और उल्लास खुद ब खुद अंदर हिलोरें लेने लगा. प्रोफेशनल दिनचर्याओं में कैद शरीर से कोट टाई उतार कर फेंकते हुए घुड़दौड़ी महानगर को दूर छोड़ना तभी संभव है जब आप अपनी मिट्टी, अपनी धरती, अपने गांव-जवार से बिना शर्त सम्मोहित होते रहते हैं. ये वो जगह है जहां ठठाकर बात-बात में हंसने के पीछ कोई कार्य-कारण सिद्धांत काम नहीं किया करते. ये वो जगह है जहां मौन होकर चलने जीने में भी एक इनविजिबिल पाजिटिव एनर्जी आसपास होने का फील दिया करती है. तो आप बस्ती के हों या गाजीपुर के, आप छपरा के हों या होशंगाबाद के, आप जहां के हों, वहां जरूर जाएं. बिना वजह जाएं. उब जाएं महानगरी घुड़दौड़ से तो बिना वजह भाग के जाएं. और, जाएं तो बिना मकसद मिलें, भटकें, खाएं, जिएं. मन-शरीर का इससे बड़ी इनर-आउटर हीलिंग और किसी तरीके से संभव नहीं. तो, मैं अब चला अपने गांव, सबको राम राम राम. 🙂

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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पत्रिका ग्रुप ने अपने कई पत्रकारों को सम्मानित किया

जयपुर। प्रतिवर्ष होने वाली पंडित झाबरमल्ल स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन रविवार सुबह 10.30 बजे राजस्थान पत्रिका के के सरगढ़ कार्यालय में किया गया। इस अवसर पर पत्रिका की ओर से सृजनात्मक साहित्य व पत्रकारिता पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर पत्रिका समूह के प्रधान संपाधक गुलाब कोठारी ने लोकतंत्र में मीडिया के घटते प्रभाव पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल चुनावों के समय मीडिया को सिर-आंखों पर चढ़ा लेते हैं लेकिन इसके बाद वह उन्हें बोझ लगने लगता है। जनता के लिए बना लोकतंत्र अब सरकार के लिए हो गया है। सरकारें मीडिया को दबंगई दिखाने लगी हैं।

उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को जितना बहुमत मिलता है वह उतना ही अहंकार दिखाती है। मोदीजी ने भी सरकार बनने के बाद अपने साथियों को मीडिया से दूरी बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जनता सरकार का पेट पालती है लेकिन उसे अपना काम कराने के लिए रिश्वत भी देना पड़ता है। हम उनको सत्ता में ला रहे है लेकिन घूस भी दे रहे हैं। ऎसा होने का क्या कारण है। इसका जवाब मीडिया को देना होगा। आज हम जो बोते हैं उसका फल खुद ही खाना चाहते हैं, यह कैसे संभव है। ऎसा होने पर तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा और तानाशाही आ जाएगी। इस अवसर पर पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखते हुए खबरें देने और साहस से सच का साथ देने वाले “कलम के सिपाहियों” को उनको पुरस्कृत किया गया।

सर्वश्रेष्ठ स्पेशल कवरेज – संदीप उपाध्याय
सर्वश्रेष्ठ ओपीनियन – लोकेन्द्र चौहान
सर्वश्रेष्ठ एक्सक्लूजिव न्यूज – विकास जैन
सर्वश्रेष्ठ मानवीय स्टोरी – भरतपुर ब्यूरो
सर्वश्रेष्ठ शाखा अभियान – सूरत
सर्वश्रेष्ठ भागीदारी अवार्ड – जयपुर
सर्वश्रेष्ठ ब्यूरो अभियान – जितेन्द्र सारण
सर्वश्रेष्ठ फोटो -हाबूलाल शर्मा
सर्वश्रेष्ठ कार्टून – सुधाकर सोनी
सर्वश्रेष्ठ ग्राफिक्स – अभिषेक शर्मा

सृजनात्मक साहित्य पुरस्कारों के तहत इस साल कहानी में प्रथम पुरस्कार जयपुर के कथाकार प्रबोध कुमार गोविल, दूसरा पुरस्कार राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मनोज कुमार शर्मा और कविता में प्रथम पुरस्कार उज्जैन के हेमंत देवलेकर तथा दूसरा पुरस्कार विनोद पदरज को दिया गया।

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पंजाब केसरी के पत्रकार संदीप मलिक ‘महाराजा सूरजमल अवार्ड’ से सम्मानित

रोहतक : भारत सरकार के केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बिरेन्द्र सिंह ने महाराजा सूरजमल के 251वें बलिदान दिवस पर उत्कर्ष्ठ पत्रकारिता के लिए पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार संदीप मलिक को महाराजा सूरजमल अवार्ड से सम्मानित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बिरेन्द्र सिंह ने कहा कि  पत्रकार हमारे देश के लिए रीढ़ की हड्डी हैं जो धरातल पर रहकर सर्दी-गर्मी इत्यादि  की प्रवाह किये बगैर हर प्रकार की विकट से विकट स्थिति  का मुकाबला क्र अपनी लेखनी से आम लोगों को सजग क्र देश के लिए प्रहरी की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब केसरी ग्रुप में रहते हुए संदीप मलिक ने पत्रकारिता के शेत्र में काफी उत्कर्ष्ठ, निर्भीक एवं पीत पत्रकारिता की है, जिसके लिए वो ही इस अवारड के पात्र हैं।

उन्होंने कभी अपनी लेखनी से समझौता नहीं किया और पूरी ईमानदारी व् पारदर्शिता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का उचित निर्वहन बखूबी क्र रहे हैं। इसके लिए उन्होंने मलिक की भूरी भूरी प्रशंसा की और उन्हें इस अवार्ड का असली हकदार बताया। कार्यक्रम का मंच संचालन गजेन्द्र फौगाट ने किया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय सिंह, एन.यु.जे. के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय राठी, मिलक खाप के अध्यक्ष दादा बलजीत सिंह मिलक, एच.पी. सिंह परिहार, आकाशवाणी के पूर्व निदेशक धर्मपाल मलिक, शमशेर खरकड़ा, रामकर्ण हुड्डा, संदीप मिलक, भूपेन्द्र चौधरी, डॉ. परमहंस जी महाराज, एडवोकेट चहल, संतोष दहिया, विद्या ढ़ाका, अहलावत खाप के प्रधान जय सिंह, रोहज खाप के प्रधान अनिल रोहज, किन्हा खाप के सचिव धर्मपाल किन्हा, दलाल खाप के प्रवक्ता कैप्टन मान सिंह दलाल, दहिया खाप की महिला प्रधान निर्मला दहिया, पालम 360 के प्रधान ताराचन्द जाखड़, दिल्ली प्रदेश कालीरमण खाप प्रधान विजय कुमार, कालीरावणा खाप की दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा, खाप प्रधान शम्मी अहलावत, गहलावत खाप के प्रधान सुमेर सिंह, कलकल सतगामा प्रधान अनूप सिंह, कैप्टन जगबीर मलिक, जसबीर मलिक, रविन्द्र सिंह जाखड़, कालीरमन खाप के प्रधान सज्जन सिंह, सतरोल खाप के प्रवक्ता बनवारी लाल, सतबीर पहलवान, राजमल काजल,रवि मलिक, जोगेन्द्र दलाल आदि ने भी अपने विचार रखे। वहीं उन्हें इस अवार्ड से नवाजे जाने पर एन.यु.जे. के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रासबिहारी, संजय राठी, अजय भाटिया, सुरेन्द्र दुआ,संजीव चौधरी, राजकुमार गोयल,थानेश्वर शर्मा, विपुल शर्मा,शिवकुमार गौड़ व् संजय राय ने संदीप मालिक को बधाई दी।

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डॉ ज्ञान चतुर्वेदी और मुस्कान को अट्टहास सम्मान

लखनऊ । देश के लब्धप्रतिष्ठित व्यंग्यकार “डॉ.ज्ञान चतुर्वेदी” को इस वर्ष अट्टहास शिखर सम्मान 2014 और युवा व्यंग्य कवि “रमेश मुस्कान” को अट्टहास युवा सम्मान 2014 दिया जायेगा। यह जानकारी आज अट्टहास सम्मान निर्णायक समिति की बैठक के बाद माध्यम के अध्यक्ष कप्तान सिंह और महासचिव अनूप श्रीवास्तव ने दी। निर्णायक समिति की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष श्री गोपाल चतुर्वेदी ने की। अट्टहास सम्मान निर्णायक समिति के सदस्य डा. नरेन्द्र कोहली, हास्य कवि प्रदीप चौबे, गीतकार रामेन्द्र त्रिपाठी, आलोक शुक्ल, नवीन शुक्ल ‘नवीन’ और माध्यम के अध्यक्ष कप्तान सिंह और महासचिव अनूप श्रीवास्तव ने सर्व सम्मति से दोनों व्यंग्यकारों को अट्टहास सम्मान देने का निर्णय लिया।

उल्लेखनीय है कि डॉ0ज्ञान चतुर्वेदी को इससे पूर्व 1992 में अट्टहास युवा सम्मान से नवाजा जा चुका है। इससे पूर्व 1990 से अभी तक जिन्हें अट्टहास सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है वे हैं। अट्टहास शिखर सम्मान – श्री मनोहर श्याम जोशी, शरद जोशी, गोपालप्रसाद व्यास, श्रीयुत् श्रीलाल शुक्ल, नरेन्द्र कोहली, ओम प्रकाश ‘‘आदित्य’’, रवीन्द्रनाथ त्यागी, हुल्लड़ मुरादाबादी, माणिक वर्मा, के.पी. सक्सेना, शैल चतुर्वेदी, लतीफ घोंघी, मुकुट बिहारी सरोज, अशोक चक्रधर, शंकर पुणतांबेकर, पद्मश्री कन्हैया लाल नन्दन, गोपाल चतुर्वेदी, अल्हड़ बीकानेरी, डॉ. गोविन्द व्यास, डॉ. शेर जंग गर्ग, सुरेश उपाध्याय, मधुप पाण्डेय, प्रदीप चौबे , डॉ. उर्मिल थपलियाल। अट्टहास युवा सम्मान: सर्वश्री प्रदीप चौबे, डॉ. प्रेम जनमेजय, डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, सुरेश नीरव, सुरेन्द्र दुबे, डॉ. हरीश नवल, सूर्यकुमार पांडेय, विनोद साव, डॉ. सुरेश अवस्थी, नीरज पुरी, शंभू सिंह मनहर, ईश्वर शर्मा, डॉ. सुरेन्द्र दुबे, गिरीश पंकज, प्रवीण शुक्ल, डॉ. सुनील जोगी, सरदार मनजीत सिंह, तेज नारायण शर्मा ’बेचैन‘, सुभाष चंदर, संजय झाला, आलोक पुराणिक, दीपक गुप्ता, अनुराग बाजपेई, और मुकुल महान।

महामंत्री
अनूप श्रीवास्तव
माध्यम साहित्यिक संस्थान

प्रेस विज्ञप्ति

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