राष्ट्रोत्थान की फेसबुकी टिट्टिभि प्रवृत्ति

-अनेहस शाश्वत-

इस आर्टिकिल की शुरुआत की जाये इससे पहले टिट्टिभि प्रवृत्ति पर चर्चा लाजिमी है। हालांकि यह एक मिथिकीय कथा है। माना जाता है कि टिट्टिभि (टिटिहिरी) नामक बेहद छोटा पक्षी जब सोता है तो पंजे आसमान की तरफ कर लेता है। टिटिहिरी का मानना है कि उसकी निद्रा की दौरान अगर आसमान फट पड़े तो अपने पैरों पर वह उस बोझ को सम्भाल लेगी और धरतीवासियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचने देगी। टिटिहिरी की यह प्रवृत्ति काबिले गौर और काफी हद तक हास्यास्पद है। भले वह गिरते आसमान को रोक पाये या नहीं।

यह टिट्टिभि प्रवृत्ति अनादिकाल से चली आ रही है और फेसबुक एकदम अधुनातन संरचना है। ऐेसे में टिटिहिरी की प्रवृत्ति और फेसबुक के अद्भुत संयोग से एक खास तरह की प्रजाति कम से कम भारत भूमि पर अवतरित हो चुकी है। अकिंचन और अल्पशिक्षित प्राणी हूं, इसलिए फेसबुकी टिट्टिभि प्रजाति के ऐसे अनोखे लोग शेष धरती पर और कहीं पाये जाते हैं या नहीं यह मुझ गरीब को फिलहाल नहीं मालूम। बहरहाल अपने भारत देश की धरा पर वे काफी बहुतायत से पाये जाने लगे हैं। खास तौर से भाजपा की केन्द्र सरकार बनने के बाद। ये फेसबुकी टिटिहिरियां अपने-अपने फेसबुक वाल को युद्ध का मैदान समझकर युद्ध में जुटी हुई हैं और इनका मानना है कि राष्ट्र उन्हीं की वजह से टिका है वर्ना कब का रसातल में चला गया होता।

मानव की तरह टिटिहिरी की भी कई प्रजातियां होती होंगी, ऐसा मैं मान लेता हूं। हर जीव की कई प्रजातियां होती हैं तो टिटिहिरी की भी होती ही होंगी। सो फेसबुक की वाल पर पैर उल्टा कर राष्ट्रोत्थान में जुटी ये टिटिहिरियां अलग-अलग नेताओं और दलों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। अपने-अपने देवताओं के समर्थन में किसी भी हद तक जाकर शीर्षासन करने में उन्हें कोई परहेज नहीं है। सही मायनों में जान जोखिम में डालकर देश के लिए सड़क पर संघर्ष करने वाले लोग जब कुछ सही या गलत कर चुकते हैं तो ये फेसबुकी टिटिहिरियां एक दम से सक्रिय हो जाती हैं। पाठकों आप में से अधिकांश के पास फेसबुक अकाउण्ट होंगें और आप भी इन टिटिहिरियों के शीर्षासनी कुतर्क पढ़कर चमत्कृत होते ही होंगे, इसलिए इस पर बहुत ज्यादा चर्चा जरूरी नहीं है।

मुझे याद है बचपन से लेकर अभी हाल ही तक ड्राइंग रूम में बैठकर राजनीतिक चर्चा करने वालों को बहुत ही हेय दृष्टि से देखा जाता था। ये करें-धरेंगे कुछ नहीं खाली जुबान चलायेंगे। मानो इसी से देश का भला होगा। फिर भी तबका मध्य वर्ग कम से कम चर्चा के बहाने सरोकार तो दिखाता था। उनके तर्कों में दम होता था और ये तर्क तथ्यों पर आधारित होते थे। अब उनका यह स्थान इन फेसबुकी टिटिहिरियों ने ले लिया है। दिल्ली में बैठे और खासे काबिल साथ ही ऐसी फेसबुकी गतिविधियों से वाकिफ मेरे एक मित्र ने मुझे बताया है कि उनमें से बहुत सारी टिटिहिरियां तो बाकायदा पेड हैं। उन्हें ऐसा करने के लिए पैसा मिलता है। इतने बड़े और ज्ञानी आदमी हैं तो सही ही बता रहे होंगे।

हालांकि इन टिटिहिरियों से इतर अपनी-अपनी विचारधारा के पक्ष में लड़ने-जूझने वाले तमाम लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं। जो जान जोखिम में डालकर अपने वर्ग से लेकर देश तक के उत्थान की लड़ाइयां लड़ रहे हैं। वे सही या गलत हो सकते हैं लेकिन उनकी मंशा चरित्र और लड़ाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता काबिल-ए-तारीफ है। वे हार सकते हैं, वे जीत भी सकते हैं, लेकिन वे सचमुच के योद्धा हैं, जो लड़ाई जमीन पर लड़ रहे हैं फेसबुक की वाल पर नहीं। इन्हीं टिटिहिरियों की एक और प्रजाति भी है इन्हें फेसबुकी टिटिहिरियां तो नहीं कह सकते लेकिन काम वे ऐसा ही करते हैं। इस प्रजाति में खास तौर से हिन्दी पत्रिकाओं, अखबारों के सम्पादक, मालिकान आते हैं।

सारे धतकरम करने के बाद जब यह सम्पादकीय लिखते हैं तो लगता है कि महराज हरिश्चन्द्र के बाद अब जम्बूद्वीप की धरा पर यही अवतरित हुये हैं। उन लेखों से यह ध्वनि भी निकलती है अगर इन लेखों को पढ़ा नहीं गया तो निश्चित रूप से कम से कम भारत वर्ष में प्रलय आ ही जाएगी। खैर यह सब संसार है, सब चलता है। लेकिन यह टिटिहिरियां जो कर रही हैं, उससे जल्दी ही हिन्दी भाषी पढ़े-लिखे मध्य वर्ग की जो बची-खुची साख है वह भी मिट्टी में मिल जाएगी। यह सब तो होगा ही साथ ही यह टिटिहिरियां जो यह सोच रही हैं कि देश उनके उल्टे पैरों पर ही टिकेगा, तो उनकी इस खामख्याली को क्या कहा जाये ? मूर्खता का कोई तोड़ नहीं है। जम्बू द्वीप का जो अच्छा या बुरा होगा, जमीन पर लड़ रहे लोगों द्वारा ही होगा, इन फेसबुकी टिटिहिरियों से तो कतई नहीं।

लेखक अनेहस शाश्वत उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क 9453633502 के जरिए किया जा सकता है.

इन्हें भी पढ़ें :

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मुलायम कुनबे में झगड़े से जो बड़े खुलासे हुए, उसे आपको जरूर जानना चाहिए….

Nikhil Kumar Dubey : घर के झगड़े में जो बड़े ख़ुलासे हुए…

1: यादव सिंह घोटाले में रामगोपाल और अक्षय फँसे हैं, बक़ौल शिवपाल. 

2: अमर सिंह ने सेटिंग करके मुलायम को जेल जाने से बचाया था: ख़ुद मुलायम ने बताया.

3: शिवपाल रामगोपाल की लड़ाई में थानों के कुछ तबादले अखिलेश को जानबूझकर करने पड़े थे: ख़ुद अखिलेश ने कहा.

4: राम गोपाल नपुंसक है : अमर सिंह ने कहा.

5: प्रतीक काग़ज़ों में पिता का नाम एम एस यादव लिखते हैं लेकिन मुलायम के किसी हलफ़नामे में उनके दूसरे बेटे का नाम नहीं

6: प्रमुख सचिव बनने की योग्यता मुलायम के पैर पकड़ने से तय होती है : अखिलेश.

Shamshad Elahee Shams: मैं पहलवान मुलायम सिंह का न कभी प्रशंसक रहा न कभी उसके साईकिल छाप समाजवाद का वकील. बहुत दिनों से सैफई में कब्बड्डी का मैच देशभर का मनोरंजन कर रहा है उसे मैं भी देख रहा हूँ. मुलायम सिंह की घटिया राजनीति जिसका इतिहास सिर्फ और सिर्फ अवसरवादिता, धोखेबाजी-टिकियाचोरी का रहा हो आखिर उस पर वक्त क्यों जाया किया जाय? ताश के पत्तो का महल एक न एक दिन ढहना ही है, आज नहीं तो कल. मुलायम सिंह की राजनीति को गौर से देखने वाले सभी जानते है कि उस पर भरोसा करना खुद को धोखा देना है. जिसका मुलायम सिंह दोस्त उसे दुश्मन की जरुरत नहीं. मुलायम सिंह ने चौधरी चरण सिंह, वी. पी. सिंह, काशीराम-मायावती, भाकपा-माकपा, नितीश कुमार, लालू प्रसाद किस किस को धोखा नहीं दिया? प्रदेश की सारी सत्ता का केंद्रीयकरण सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार में ही कर देने वाले के दिमाग की मैपिंग करें तो यही पता चलेगा कि उसे खुद पर और अपने परिवार के लोगों के आलावा किसी दूसरे पर कभी विश्वास नहीं रहा. मुलायम सिंह ने लोहिया छाप समाजवाद के नाम पर सिर्फ अपने परिवार का एकाधिकार जिस तरह स्थापित किया वह राजनीति के किसी भी मापदंड के अनुसार निंदनीय है. आखिर जो जीवन भर बोया, अंत में वही काटेगा. आज तक दूसरो के साथ जो किया वक्त ने दिखा दिया कि उसका जवाब खुद उसका लड़का ही एक दिन उसे देगा. कल्याण सिंह और मुलायम सिंह, दोनों के राजनीतिक चरित्र एक जैसे रहे है दोनों की गति एक ही होनी है, एक की हो चुकी दूसरे की प्रक्रिया चल रही है.

Vishnu Nagar : लखनऊ की राजनीतिक ड्रामेबाज़ी में मुलायम सिंह यादव ने खुद स्वीकार किया है कि उन्होंने कोई ऐसा अपराध किया था, जिसमें उन्हें जेल हो सकती थी लेकिन तिकड़मेश्वर ने उन्हें किसी तरह बचा लिया। वह केस क्या था, क्या यह वही था, जिसमें आय से अधिक संपत्ति का मामला था और सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि प्रमाण के अभाव में वह इस मामले को बंद करना चाहती है मगर उसने अभी तक मामला बंद नहीं किया है और मोदी सरकार बंद होने देगी भी नहीं। कांग्रेस -भाजपा दोनों इसका इस्तेमाल मुलायम सिंह को चंगुल में फँसाये रखने के लिए करती रही हैं और सब जानते हैं कि सीबीआई का रुख़ सरकार के हिसाब से बनता -बिगड़ता है। तो क्या यही मामला है या कोई और मामला, जिसमें तिकड़मेश्वर ने उन्हें बचाया?यह जानना दिलचस्प होगा और तिकड़म से बचाया गया है उन्हें तो कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?

Vivek Dutt Mathuria : तस्वीर साफ है मुलायम अखिलेश को ट्रेंड कर रहे हैं बस ….जो मुलायम के मन में है उसे न शिवपाल जानते और न अमर सिंह. इतिहास गवाह है मुलायम सियासत में खुद के अलावा किसी के नहीं हुए….वीपी सिंह, चन्द्रशेखर, वामपंथी, मायवती, अजित सिंह और न जाने कितने हैं ज़िनके कांधे पर पैर रख कर यहां तक पहुंचे हैं अब भाजपा के नजदीक दिख रहे हैं.

Khushdeep Sehgal : समाजवादी कुनबे की हालत देखकर एक किस्सा याद आ गया. एक बुजुर्ग सेठ को मौत से बड़ा डर लगता था. उसने खूब पूजा-पाठ करने के बाद ईश्वर से मौत से बचने का वरदान ले लिया. वरदान ये था कि यमदूत जब भी उसे लेने आएगा तो वो उसे दिख जाएगा, ऐसे में वो अपने पैर तत्काल यमदूत की ओर कर दे, जिससे यमदूत उसे ले नहीं जा पाएगा. साथ ही सेठ को ये ताकीद भी किया गया कि वो इस वरदान का किसी और से भूल कर भी ज़िक्र नहीं करेगा. एक बार सेठ बीमार होने के बाद बिस्तर पर पड़ गया. फिर वो घड़ी भी आ गई जब यमदूत उसे ले जाने के लिए आ पहुंचा. लेकिन सेठ के पास तो वरदान था, झट अपने पैर उसने यमदूत की ओर कर दिए. यमदूत फिर उसके सिर की ओर पहुंचा. सेठ ने फुर्ती से फिर अपने पैर यमदूत की ओर कर दिए. अब यही चक्कर काफी देर तक चलता रहा. यमदूत जिधर जाए, सेठ उधर ही अपने पैर कर दे. सेठ इस तरह जान बचाता रहा. यमदूत थक कर सेठ को छोड़कर जाने ही लगा था. लेकिन सेठ को पैर इधर-उधर करते देख घरवालों ने समझा कि उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है. घरवालों ने रस्सियों से सेठ के पैर बांध दिए. यमदूत का काम हो गया. अब जैसे ही वो सेठ के सिर की तरफ आया तो सेठ के मुंह से निकला…”साला जब भी मरवाया, घरवालों ने ही मरवाया”…

सौजन्य : फेसबुक

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केरल में सिर्फ ईसाई शराब पी सकता है, बेच सकता है, हिन्दू नहीं!

Shameer Aameen Sheikh : यदि आपको लगता है कि भारत में सिर्फ एक ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ है तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। आइये जानते हैं भारत के कुछ अन्य पर्सनल लॉ के बारे में। इनको पढ़कर आप समझ जायेंगे कि भारत जैसे ‘अनेकता में एकता’ वाले देश में ‘कॉमन सिविल कोड’ अगले ढाई साल तो क्या ढाई सौ साल तक लागू नहीं हो सकता, यह सिर्फ राजनीतिक उछल-कूद है और कुछ भी नहीं –

1) गोवा के हिन्दू महिला को अगर 25 वर्ष की उम्र तक बच्चा नहीं हुआ या 30 वर्ष की उम्र तक बेटा नहीं हुआ तो उसका पति दूसरा विवाह कर सकता है (ये बेटा-बेटी में कानूनन भेद किया गया है)। लेकिन गोवा का मुस्लिम दूसरी शादी नहीं कर सकता।

2) कर्नाटक के ब्राह्मणों में सगे मामा-भांजी शादी कर सकते हैं, अन्य ब्राह्मण नहीं कर सकते।

3) बैंक में कोई हाथ में शेविंग ब्लेड भी ले जाये तो गिरफ्तार किया जा सकता है, लेकिन सिक्ख सरदार तलवार भी ले जा सकते है।

4) सिक्ख महिला बगैर हेल्मेट के बाईक चला सकती है, क्योंकी सिक्ख धर्म में महिलाओं को टोपी पहनना अवैध है।

5) जैन पुरूष, निकोबारी हिन्दू पुरूष व महिलायें और हिन्दू नागा साधू पुरूष नग्न रह सकते हैं, लेकिन कोई दूसरे धर्म के लोग नग्न रहें तो पुलिस गिरफ्तार करती है। जैन महिलाओं को नग्न रहने का अधिकार नहीं है।

6) गोवा के चर्च में हुवे किसी कैथलिक के विवाह के बाद वो अदालत की मर्जी के बगैर तलाक दे सकता है, मुस्लिम नहीं।

7) सिक्ख फौजी दाढ़ी रख सकता है, मुस्लिम नहीं।

8) सिक्ख पायलट पगड़ी पहन सकता है, हिन्दू नहीं।

9) आसाम के ऐसे चार जिले हैं, जहाँ आदिवासी जगह खरीद सकता है, अन्य कोई नहीं।

10) काश्मीर कि तरह नागालैंड और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों को भी विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है।

11) केवल हिन्दू आदिवासी भाला, चाकू और दूसरे कुछ हथियार रख सकते है, दूसरे नहीं।

12) अज्ञारी (पारसी धर्मस्थल) में केवल पारसी जा सकते हैं, दूसरे नहीं।

13) सोमनाथ व पशुपतिनाथ मंदिर में केवल हिन्दू जा सकते हैं, दूसरे नहीं।

14) केरल में सिर्फ ईसाई शराब पी सकता है, बेच सकता है, हिन्दू नहीं।

ये ‘पर्सनल लॉ’ यहाँ सिर्फ उदाहरण के तौर पर बताये गये हैं, और भी बहुत हैं। तो ‘कॉमन सिविल कोड’ का गाना गाने वालों के न तो पुरखों की औकात थी, न इनकी है, न इनकी आगे आनेवाली पीढ़ियों की होगी, कि ‘कॉमन सिविल कोड’ लागू कर सकें, इसलिये बेकार में परेशान न हों।

शमीर आमीन शेख की एफबी वॉल से.

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जानो कानून : : सुप्रीम कोर्ट का फैसला- फेसबुक पर किसी की आलोचना करना अपराध नहीं, एफआईआर रद्द करो

Facebook postings against police… criticising police on police’s official facebook page…. F.I.R lodged by police….

HELD – Facebook is a public forum – it facilitates expression of public opinion- posting of one’s grievance against government machinery even on government Facebook page does not by itself amount to criminal offence – F. I.R. Quashed.

(Supreme Court)
Manik Taneja & another – Vs- State of Karnataka & another
2015 (7) SCC 423

पूरी खबर…..

Comments on Facebook : Supreme Court quashes FIRs against couple

In a fillip for free speech on social media, the Supreme Court quashed FIRs registered by the Bengaluru Traffic Police for criminal intimidation against a couple for posting adverse comments on its Facebook page. A bench of Justices V. Gopala Gowda and R. Banumathi quashed the criminal prosecution against the couple in their judgment, observing that they were well within their rights to air their grievances in a public forum like Facebook.

“The page created by the traffic police on the Facebook was a forum for the public to put forth their grievances. In our considered view, the appellants might have posted the comment online under the bona fide belief that it was within the permissible limits,” the 10-page judgment observed.

‘End to harassment’

“The police sought to suppress free speech by intimidating us with serious charges…this judgment will have a larger impact. We had the resources to get our charges squashed, but many will find it hard to counter police harassment. I hope this will be an example to stop intimidation by the police,” said Manik Taneja, the petitioner.

On June 14, 2013, Manik Taneja and his wife Sakshi Jawa, were booked by the police under charges of using ‘assault or criminal force to deter a public servant from discharging his duty’ (Section 353 of the Indian Penal Code) and criminal intimidation (IPC 506).

The previous day, the couple were driving in their car, when they collided with an autorickshaw, resulting in a passenger being injured.

Though they had paid due compensation to the injured, Ms. Jawa – who had driven the car – was summoned to Pulakeshi Nagar Traffic police station where the police had allegedly misbehaved with her.

The couple then vent their anger on the police’s Facebook page, and even sent an email complaining about the alleged harassment to the police.

The police reacted by lodging a criminal complaint against the couple.

The Karnataka High Court had refused to intervene when the couple approached it for relief, following which they had moved the Supreme Court.

This judgment comes even as another bench of the Supreme Court is hearing the legality of Section 66A of the Information Technology Act, 2000, which prescribes arrest and three years imprisonment for social media comments considered to be of a “menacing character” by the authorities.

‘We had the resources to get our charges squashed, but many will find it hard to counter police harassment’

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पत्रकार रमेश ठाकुर ने ‘कालगर्ल’ होने का आरोप लगाया तो लड़की बोली- ‘अश्लील चैट करता था’

पत्रकार रमेश ठाकुर पर एक लड़की ने बदनाम करने का आरोप लगाया है. उसने वो चैट सार्वजनिक कर दिया है जिसमें रमेश ठाकुर लड़की से अश्लील बातें कर रहे हैं. इससे पहले लड़की पर रमेश ठाकुर ने मदद मांगने के नाम पर पुलिस व पत्रकार को भ्रमित करने, पैसे मांगने, चीटिंग करने समेत कई किस्म के गंभीर आरोप लगाए थे. बाद में जब ये आरोप लड़की तक पहुंचे तो उसने पत्रकार पर अश्लील बातें करने का आरोप लगाया और पूरे चैट को सार्वजनिक कर दिया.

पत्रकार रमेश ठाकुर का कहना है कि लड़की खुद को दिल्ली निवासी और देहरादून में बीबीए की पढ़ाई करने वाली बता रही थी. उसने फेसबुक पर संपर्क कर खुद को छेड़छाड़ की पीड़ित बताया और मदद मांगी. रमेश के मुताबिक उनने देहरादून के पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर मामले के बारे में जानकारी दी. रमेश का कहना है कि एसएसपी ने लड़की से संपर्क किया और उसके बताए जगह पर पुलिस पहुंची लेकिन वहां लड़की नहीं मिली.

रमेश के मुताबिक इसके कुछ देर बाद फिर लड़की का फोन आया. उसने बताया कि वह वहां से जान बचाकर भाग गई है. उसने खुद के फोन को दिल्ली से 497 रुपये से रिचार्ज कराने की मदद मांगी ताकि वह पैरेंट्स से संपर्क कर सके. रमेश ने बताया कि उन्होंने लड़की का फोन रिचार्ज करा दिया. उसके बाद उसने कोई संपर्क नहीं किया. पुलिस काफी समय तक परेशान रही. रमेश आगे बताते हैं कि 24 जनवरी को रात चार बजे फिर लड़की ने फोन किया. लड़की ने बताया कि उसका फोन टूट गया है और 6500 सौ रुपए किसी तरह भिजवा दो.

रमेश के मुताबिक वह समझ गए कि लड़की चीट कर रही है. उन्होंने दिल्ली साइबर सेल में संपर्क कर पूरी कहानी बताई. साइबर सेल ने लड़की के फोन नंबर को ट्रैक किया तो पता चला उसकी लोकेशन दिल्ली की है. रमेश यहीं आगे नहीं रुकते. वह आरोप लगाते हैं कि लड़की के नंबर की डिटेल निकाली तो पता चला कि यह किसी स्कार्ट यानी कालगर्ल का नंबर है.

उधर, लड़की ने भड़ास से संपर्क कर आरोप लगाया कि उसके साथ पत्रकार रमेश ठाकुर गंदी बातें करता था. वह जब उसकी गंदी बातों के जाल में नहीं आई तो उसने बदनाम करने के वास्ते एक गंदी कहानी गढ़ी और ह्वाट्सएप समेत कई जगहों पर भेज दिया. लड़की ने रमेश ठाकुर के चैट के कुछ अंश सार्वजनिक किए हैं जिससे पता चलता है कि पत्रकार रमेश ठाकुर वाकई अश्लील बातें कर रहे हैं. लड़की ने जो मैसेज भड़ास को भेजा है, वह नीचे दिया जा रहा है: 

bhaiya mjhe esne bdnam kar dia plz help me.

kal raat ko isne mjhse bat k. me mana nahi kar rahi k maine help mangi, bt isne mjhe kaha kbhi apni nangi pic do or dost k naam par mjhe bolta mere sath rat guzaro, malamal kar dunga.

agar mjhe aisa karna hota na me ye msg nh karti but isne mjhe ye sab karne par majbur kia sir.

meri koi galti nh h.

wait.

mere iski kch chat h. me send karti hu.

ye dekho chat.

isko kya kahoge jo isne mjhse kaha.

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अपने यूजर्स का शोषण करने वाले फेसबुक को छोड़िए, TSU.CO पर आइए और जमकर कमाइए…

फेसबुक जैसी सोशल मीडिया साइट पर यदि आप कोई कंटेंट डालते हैं तो संतोष सिर्फ लाइक या कमेंट से ही होना पड़ता है. कैसा हो कि यदि इस कंटेंट की लोकप्रियता के आधार पर पैसा भी मिल जाए. जब ऐसा फॉर्मूला लेकर आई एक कंपनी TSU.CO तो फेसबुक ने त्‍योरियां चढ़ा लीं. इंस्टाग्राम और व्हाट्सअप जैसे पॉपुलर प्लैटफार्म की मालिक सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक 300 बिलियन डॉलर (दो लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा की हो गई है. कमाई का फंडा यही है कि आप जो भी कंटेंट इन प्लेहटफॉर्म पर शेयर करते हैं, उसके आसपास ये एड लगाती हैं. जितना ज्या दा कंटेंट देखा जाएगा, फेसबुक का उतना फायदा. लेकिन, अब एक और सोशल मीडिया प्लेंटफार्म आया है, जिसने फेसबुक की नींद उड़ा दी है. क्यों कि उसे अपनी कमाई खतरे में पड़ती दिख रही है. जानिए क्याे है पूरा मामला…

पिछले कुछ महीनों से फेसबुक अपने प्लैटफॉर्म से वेबसाइट TSU.CO से सबंधित सभी पोस्ट ब्लॉक कर रही है. फेसबुक ने लगभग 10 लाख ऐसे पोस्ट (फोटो, विडियो और आर्टिकल) डिलीट कर दिए हैं जिसमें TSU.CO लिखा था. फेसबुक का दावा है कि यह एक स्पैम है. हालांकि अमेरिका के एक प्रमुख मीडिया हाउस द्वारा छपी खबर के मुताबिक TSU.CO ने फेसबुक के रेवेन्यू मॉडल पर बड़ा हमला किया है. इस वेबसाइट के मुताबिक, अब आप अपने कंटेन्ट (फोटो, विडियो और आर्टिकल) को फेसबुक पर फ्री में अपलोड करने की जगह उससे मोटी कमाई भी कर सकते हैं. इस कमाई के साथ अपने यार-दोस्तों से इस कंटेंट की शेयरिंग सुविधा मुफ्त ही रहेगी.

अमेरिका में रजिस्टर्ड इस कंपनी में फिलहाल 50 कर्मचारी है. TSU.CO के प्रमुख सेबैस्टियन सोब्याक का दावा है कि जहां फेसबुक अपनी वेजसाइट पर एडवर्टाइजिंग से हो रही पूरी कमाई खुद रख रहा है, वहीं वे इस रेवेन्यू से महज 10 फीसदी कमाई करेंगे और बाकी 90 फीसदी अपने यूजरों को दे देंगे. उदाहरण के लिए यदि किसी कंटेंट पर सौ रुपए का एड पब्लिश होता है. तो दस रुपए कंपनी रखेगी, 45 रुपए उस कंटेंट के पब्लिशर यानी उस अकाउंट वाले को मिलेगा और बाकी 45 उस अकाउंट के सदस्यों में बांट दिया जाएगा. सोशल मीडिया का यह बिजनेस मॉडल रेवेन्यू शेयरिंग और चेन मार्केटिंग पर आधारित है.

अब यदि TSU.CO ने ये ऑफर दिया है तो इससे फेसबुक को क्‍या आपत्ति होनी थी? दरअसल, इस वेबसाइट पर अकाउंट खोलने वाले यूजर अपनी कम्‍युनिटी को बड़ा करने के लिए फेसबुक का सहारा ले रहे हैं. वे फेसबुक पर अपने मित्रों को TSU.CO ज्‍वाइन करने के लिए न्‍यौता देते हैं. ये इनवाइट इतने ज्‍यादा हो गए हैं कि फेसबुक को स्‍पैम लगने लगे हैं. फेसबुक का कहना है कि लोग पैसा कमाने के लिए स्‍पैम इनवाट भेज रहे हैं. हालांकि, इस कारोबार को समझने वाले कहते हैं कि पूरा मामला कमाई से जुड़ा है. TSU.CO हूबहू फेसबुक जैसा ही है, बस फर्क यह है कि वहां उसे पैसा भी मिल रहा है. ऐसे में फेसबुक को डर है कि TSU.CO ज्‍वाइन करने के लिए भेजा गया हर इनवाइट फेसबुक यूजर की संख्‍या घटाएगा.

फिलहाल तो सोशल मीडिया की दुनिया में फेसबुक ही दबंग है. लेकिन, उससे सवाल तो किया जा रहा है कि उसका TSU.CO को इस तरह ब्‍लॉक करना क्‍या सही है?

आईचौक डाट इन पर प्रकाशित राहुल मिश्र की रिपोर्ट.

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मुलायम को फेसबुक पर बुड्ढा लिख दिया तो कानपुर में दर्ज हो गई एफआईआर!

इमरोज़ खान युवा पत्रकार हैं. जनता की आवाज़ नामक ऑनलाइन पोर्टल चलाते हैं. उन्होंने फेसबुक पर अपने पोर्टल की एक स्टोरी शेयर करते हुए मुलायम की फोटो के साथ लिख दिया कि ”बुड्ढे का पागलपन बढ़ता हुआ”. बस, इसी पर उनके खिलाफ कानपुर में एफआईआर दर्ज हो चुकी है. इस बारे में इमरोज ने भड़ास को एक मेल भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी है, जिसे नीचे प्रकाशित किया जा रहा है.

ये यूपी है, यहां बुड्ढा कहने पर हो जाती है एफआईआर

सपा सरकार द्वारा जिस तरह मेरे ऊपर कार्यवाही की गयी है, ये बताता है कि यू.पी. में कानून का नहीं, जंगलराज है. 17 सितम्बर को मैंने अपने पोर्टल “जनता की आवाज़ jantakiawaz.in की एक खबर को फेसबुक पे बुड्ढा का पागलपन बताते हुए कमेंट के साथ क्या शेयर किया कि सपा कार्यकर्ताओं ने इनबॉक्स से लेकर फ़ोन तक पर धमकाना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, फेसबुक पर सपा कार्यकर्ताओं ने स्टेटस अपडेट करके खुलेआम धमकियां दी. साथ में तरह तरह के आरोप भी लगाये गये. प्रतिक्रिया स्वरुप मैंने भी सपा के कार्यकर्त्ता राव विकास यादव को ज़वाब देते हुए उनके कारनामो का पर्दाफाश किया.

२१ सितम्बर को सपा के कुछ मित्रों के कमेंट डीलिट करने के निवेदन को स्वीकार करते हुए “बुड्ढे का पागलपन बड़ता हुआ” कमेंट भी डिलीट कर दिया. मगर जब मैं ईद की तैयारी कर रहा था तो उसके एक दिन पहले यानि २४ सितम्बर को मेरी उसी पोस्ट को, जो डिलीट हो चुकी थी, को आधार बना के कानपुर के एसएसपी से मिलकर सपा कार्यकर्त्ता राव विकास यादव ने मेरे खिलाफ शिकायत कर दी. कानपुर के एसएसपी ने बिना विलम्ब किये गोविंदनगर थाने के सीओ को जाँच के आदेश दे दिए. हैरानी की बात है कि पुलिस ने अभी तक मुझसे संपर्क नहीं किया है. जो भी जानकारी मिली  है वो समाचार पत्रों में प्रसारित खबरों द्वारा मिली है. खबर पढ़कर ही आभास होता है कि खबर छपी नहीं है बल्कि छपवायी जा रही है. प्रदेश की जनता को आगाह किया जा रहा है. संदेश दिया जा रहा है कि अगर हमारे खिलाफ लिखा जायेगा तो मुक़दमा. सरकार का विरोध करने वालों का कोई भी नहीं सुनेगा. भले ही पत्रकार क्यूँ न हो. सरकार ने कथित मुख्यधारा की मीडिया को ऐसा मैनेज कर रखा है कि वो जो चाहेगी, वही लिखा जायेगा.

मैं याद दिला देना चाहता हूं कि ये वही सपा कार्यकर्त्ता हैं जिनकी हर पोस्ट और कमेंट में देश के पीएम और दूसरे नेताओं को गाली दी जाती है मगर इन बहरूपियों का दूसरा चेहरा भी है. ये अपने नेता के लिए संकेतों में लिखे गए किसी कमेंट पर इतना उत्तेजित हो जाते हैं कि मरने और मारने तक पहुंच जाते हैं. वही यू.पी. की पुलिस किसी गंभीर मामले पर कार्यवाही करने में अपने को असमर्थ पाती है लेकिन सत्ताधारी पार्टी के नेता के लिए सांकेतिक शब्दों से लिखे गए किसी कमेंट से झुझला के तुरंत जाँच करने बैठ जाती है.

अखिलेश सरकार ये तुम्हारा कैसा निजाम है.
जितना उत्पीड़न करना है कर लो.
२०१७ में अब ज्यादा समय नहीं है.

इमरोज़ खान
संपादक
जनता की आवाज़
ऑनलाइन पोर्टल
jantakiawaz.in
कानपुर
contact.jantakiawaz@gmail.com

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पैसे वाली पत्रकार हैं बरखा दत्त, फेसबुक लाइक तक खरीद लेती हैं!

Yashwant Singh : बरखा दत्त इन दिनों फेसबुक पर खूब सक्रिय हो गई हैं. उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर इस बाबत लिखा भी है. साथ ही कई कहानियां किस्से विचार शेयर करना शुरू कर दिया है. बरखा समेत ज्यादातर अंग्रेजी पत्रकारों की प्रिय जगह ट्विटर है. लेकिन सेलेब्रिटी या बड़ा आदमी होने का जो नशा होता है, वह फेसबुक पर भी ले आता है, यह जताने दिखाने बताने के लिए यहां भी मेरे कम प्रशंसक, फैन, फालोअर, लाइकर नहीं हैं. सो, इसी क्रम में अब ताजा ताजा बरखा दत्त फेसबुक पर अवतरित हुई हैं और अपने पेज पर लाइक बढ़ाने के लिए फेसबुक को बाकायदा पैसा दिया है. यही कारण है कि आजकल फेसबुक यूज करने वाले भारतीयों को बरखा दत्त का पेज बिना लाइक किए दिख रहा है. पेज पर Barkha Dutt नाम के ठीक नीचे Sponsored लिखा है.

इस Sponsored लिखे होने का मतलब हमको आपको सबको पता है. फेसबुक को पैसा देकर उसके जरिए जबरन पेज लाइक कराया जाना. सो, लगभग एक लाख लाइक के करीब पहुंचने वाला है बरखा का पेज. 84 हजार से ज्यादा लाइक तो उपरोक्त स्क्रीनशाट में दिख रहा है. अब जब आप ये पढ़ रहे होंगे, हो सकता है लाइक का आंकड़ा काफी आगे निकल गया होगा. अब ये नहीं पता मुझे कि उन्होंने पांच लाख लाइक खरीदने के लिए फेसबुक को पैसा दिया है या सिर्फ दो चार लाख. जो भी हो. हम हिंदी वाले तो इतने पैसे में कई दिन सुकून से खा पी सकते थे, घूमघाम सकते थे, घर परिवार को घुमा सकते थे. छुट्टी लेकर अपने ओरीजनल घर-गांव-देहात जा सकते थे क्योंकि हम हिंदी वाले थोड़ा कम कमाते हैं, इसलिए थोड़ा कम खर्च कर पाते हैं. कम ही हिंदी वाले होंगे जो फेसबुक पेज पर लाइक खरीदते होंगे, हां- दलालों, मालिकों, लायजनरों आदि इत्यादि की आधुनिक कैटगरी को छोड़कर.

फेसबुक पर कुछ रोज पहले अपनी सक्रियता बढ़ाने के दौरान बरखा की लिखी गई वो शुरुआती पोस्ट जिसे फेसबुक को पैसा देकर Sponsored करवाने के बाद लाइक हासिल करने हेतु एफबी के जन-जन तक घुमवाया, ये है: ”प्रभा दत्त (बरखा दत्त की मां) के युद्ध मोर्चे पर रिपोर्टिंग हेतु जाने के अनुरोध को एचटी प्रबंधन ने ठुकरा दिया था”

फिलहाल अभी तक मैंने बरखा दत्त का फेसबुक पेज लाइक नहीं किया है जबकि पिछले कई रोज से फेसबुक बार बार मेरे आगे इस प्रायोजित विज्ञापन को मौलिक तरीके से पेश कर लाइक करने के लिए लपलपाते हुए ललचा रहा है. अगर ये पेज स्पांसर्ड न होता तो शायद मैं लाइक कर लेता, लेकिन खरीदे हुए या बिके हुए, जो कह लीजिए, पेज को लाइक देने का मतलब होता है कि आप फेसबुक की दुकान को पैसा देकर भारतीय मुद्रा को विदेश तो भेज ही रहे हैं, फर्जी तरीके से खुद को नामवर बताने जताने दिखाने के ट्रेंड को भी बढ़ावा दे रहे हैं.

वैसे बहुत सारे हिंदी पट्टी वाले कह सकते हैं कि पैसा बरखा दत्त ने इमानदारी से कमाया है, उसे चाहे वो लाइक खरीदने में खर्च करें या घर में रखकर माचिस मारकर जला दें, आपको जलन कुढ़न खुजन क्यों है? तो भइया, मेरा जवाब भी सुनते जाइए. बरखा दत्त अगर कोई कंपनी होतीं, किसी कंपनी की मालिकन होतीं, कोई कारपोरेट होतीं, कोई पीआर एजेंसी होतीं, कोई प्रोडक्ट होतीं तो उनके प्रचार प्रसार पर मुझे कोई आपत्ति न होती. फेसबुक पर साड़ियों से लेकर योगासन तक के खूब स्पांसर्ड पेज टहलते रहते हैं और हम आप सब जाने-अनजाने उसे लाइक मारकर फेसबुक वाले से लेकर उसके क्लाइंट तक को खुश किया करते हैं.

पर जब कोई पत्रकार ऐसा करता है तो उससे यह अपेक्षा नहीं की जाती. कल को कोई जज साहब लाइक खरीदने लगें तो फिर हो गया काम. जिन चार स्तंभों की हम बात करते हैं, उसमें से प्रत्येक की गरिमा होती है. विशेषकर मीडिया तो ज्यादा जिम्मेदारी वाला या यूं कहिए ज्यादा जनता के करीब खंभा होता है. पर अगर इसी खंभे के लोग कारपोरेट सरीखा व्यवहार करने लगे तो रिलायंस के कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव और हमारे पत्रकारों के बीच फर्क क्या बचेगा. अंतत: जब दोनों का मकसद अपना हित साधन है, अपने कंपनियों का हित साधन है, तो काहे को एक खुद को चौथा खंभा माने और दूसरा देश का कारपोरेट घराना. सोचिए सोचिए. वइसे, पइसा प्रधान इस दौर में सोचने विचारने लिखने का काम भी आजकल पैसे ले देकर ही होते हैं, ऐसे में अगर आप नहीं सोचते हैं तो हम बुरा बिलकुल नहीं मानेंगे. 🙂   

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com


उपरोक्त पोस्ट पर बरखा दत्त ने अपनी तरफ से ट्वीटर पर सफाई दी / जवाब दिया. इस प्रकरण से संबंधित उनके सारे ट्वीट और उनकी सफाई का भड़ास4मीडिया पर प्रमुखता से प्रकाशन किया गया है जिसे आप नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं:

फेसबुक अपनी तरफ से कर रहा मेरा प्रचार, मैंने एक पैसा खर्च नहीं किया : बरखा दत्त

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दिग्विजय सिंह और अमृता राय की शादी ने समाज को नया रास्ता दिखाया है

Sadhvi Meenu Jain : खबर है कि दिग्विजय सिंह ने अमृता राय से विवाह कर लिया है. खबर सुनकर चुस्की लेने या सिंह की नैतिकता / अनैतिकता से इतर मैं इस बहाने एक दूसरे विषय पर बात करना चाहती हूँ. हमारा समाज विधवा / विधुर / तलाकशुदा वरिष्ठ नागरिकों को दोबारा से एक नया जीवनसाथी चुनने की इजाजत क्यों नहीं देता और जो समाज की धारणा के विपरीत जाकर ऐसा कर भी लेते हैं उनका मखौल उड़ाया जाता है. उन पर ‘चढ़ी जवानी बुढ्ढे नूं’ ‘बुड्ढा जवान हो गया’ ‘तीर कमान हो गया’ ‘बुड्ढी घोड़ी, लाल लगाम’ जैसी फब्तियां कसी जाती हैं.

क्यों भई. ऐसा क्या गुनाह कर दिया उन्होंने? न्यूक्लियर परिवारों के इस युग में जब बेटे-बेटियां अपनी अपनी गृहस्थी, परिवार व समाज की जिम्मेदारियों में व्यस्त हो जाते हैं और जीवन की आपाधापी के चलते माता-पिता से बात करने तक की फुरसत उन्हें नहीं मिलती तब ऐसे में इन बुजुर्गों का एकाकीपन इन्हें काटने को दौड़ता है.

पति या पत्नी में से एक की मृत्यु हो जाए तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं. कहां जाएं. किसके साथ बांटें ये अपने एकाकीपन की व्यथा? यूं ही घुट-घुट कर मर जाएं? पहले ज़माना था जब परिवार संयुक्त होते थे. बुजुर्गों का मन लगा रहता था. लेकिन आज के घोर आत्मकेंद्रित परिवारों में बुजुर्गों के लिए जगह ही कहां बची है? ऐसे में अगर वे अपना अकेलापन बांटने के लिए विवाह कर लेते हैं तो इसमें बुराई क्या है? जीवन के इस पड़ाव पर स्त्री हो या पुरुष, दैहिक सुख की अपेक्षा साहचर्य सुख खोजता है.

बुजुर्गों के कल्याण के लिए काम करने वाली मुम्बई की एक स्वयंसेवी संस्था के साथ वर्षों से जुड़े होने के कारण एकाकीपन भोगते बुजुर्गों की पीड़ा को बहुत नज़दीक से महसूस किया है. कई ऐसे बच्चों को मैं व्यक्तिगत रूप से जानती हूं जिन्होंने पीछे अकेले रह गए माता या पिता के लिए स्वयं जीवनसाथी की तलाश कर उनका विवाह करवाया है. कई ऐसी स्वयंसेवी संस्थाएं हैं जो अकेले बुजुर्गों के लिए सहचर तलाशने का काम कर रही हैं.

तो मित्रों, बचपना छोड़िए और कल्पना कीजिए उस स्थिति की जब आपकी संतानें अपने-अपने परिवारों के साथ या तो विदेश चली गईं है या आपको अपने साथ नहीं रखना चाहती हैं और आपकी पत्नी या पति का देहांत हो चुका है और अकेले जीवन बिताना आपके बस की बात नहीं है. तब ऐसी स्थिति में क्या करेंगे आप? Please try to put yourself in their shoes. If you are able to sympathize and empathize with them, you will not ridicule them.

साध्वी मीनू जैन के फेसबुक वॉल से.


मूल खबर :

अमृता-दिग्विजय ने कर ली शादी, फेसबुक पर शेयर की दिल की बात

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अपना फेसबुक अकाउंट बंद होने की मार्क से फरियाद कर सकते हैं दिलीप मंडल

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल का फेसबुक अकाउंट अगर शिकायतों के आधार पर मार्क जकरबर्ग की टीम ने ब्लॉक कर दिया है, तो वे इसकी शिकायत फेसबुक से कर सकते हैं. साथ ही नई मेल आईडी बनाकर अपना एक दूसरा फेसबुक अकाउंट भी बना सकते हैं. जहां तक मेरी जानकारी है, इसके पहले (इंडिया टुडे ग्रुप जॉइन करते वक्त) एक बार वे खुद ही अपना अकाउंट डिलीट कर चुके हैं. तब उन्होंने फेसबुक पर अपना नया अकाउंट बनाया था या पुराने अकाउंट को ही restore किया था, पक्के तौर पर मुझे पता नहीं.

लेकिन दिलीप मंडल का फेसबुक अकाउंट बंद होने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को कोसना किसी भी सूरत में उचित नहीं है. मोदी सरकार के कार्यों-आचार-विचार पर वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी समेत कई लोग टिप्पणी करते रहते हैं, जो जरूरी नहीं है कि हर वक्त मोदी सरकार के फेवर में ही हो. उन सबका अकाउंट तो बंद नहीं हुआ?

सो अगर कुछ -भक्तों- की शिकायत पर दिलीप मंडल का एफबी अकाउंट बंद हुआ है, तो उचित मंच पर शिकायत के बाद यह दोबारा एक्टिवेट भी हो जाएगा. मुझे नहीं लगता कि इस मसले का केंद्र सरकार से कोई लेनादेना है.

नाहक तिल का ताड़ ना बनाइए. एक-दो बार मेरा एकाउंट भी बंद हो चुका है जो बाद में खोल दिया गया था.

अभी-अभी फेसबुक पर दिलीप जी का पक्ष किसी की वॉल पे देखा. फेसवैल्यू पे ये मान रहा हूं कि ये लिखा दिलीप मंडल का ही है, सो उसे यहां कॉपी पेस्ट कर रहा हूं. इसमें दिलीप जी ने कहा है कि वे नया अकाउंट खोलकर चोर दरवाजे से नहीं आना चाहते.

बेशक ना आएं, पर मैं मानता हूं कि मुहब्बत और जंग में सब जायज है. अगर आपको अपनी बात कहनी है, किसी भी मंच पर, तो आपको कोई चाहकर भी कोई नहीं रोक सकता. कितना रोक लेगा कोई!!! इसके लिए आपको सारे जतन करने चाहिए.

बहरहाल, दिलीप जी का पक्ष किसी मित्र की वॉल से कॉपी कर यहां पेस्ट कर रहा हूं.

” उनसे कोई शिकायत नहीं है, जो मेरे नाम की नक़ली प्रोफ़ाइल बनाकर उस पर कुछ कुछ लिख रहे हैं। यह सब शरीर से बड़े हो चुके कुछ बच्चों का खेल है। डायपर पहनकर जो विरोध और विमर्श का तमाशा कर रहे हैं, उन बेचारों पर तो नाराज़ हो पाना भी मुश्किल है। उनकी भाषा उनका परिचय है, उनके हिसाब से उनका “संस्कार” है। प्लीज़, उन्हें माफ़ कर दीजिए।

जो लोग मेरे बारे में संदेह में हैं, उनसे सिर्फ यह कहना है कि अगर आपको अब भी नहीं मालूम कि मैं क्या लिख सकता हूँ और क्या नहीं, तो यह आपकी समस्या है। मैं आपकी मदद करने के मूड में नहीं हूँ।

लेकिन फेसबुक, तुम्हें क्या हो गया है? हो सकता है कि तुम्हें हजारों की संख्या में शिकायतें मिली होंगी कि मेरा एकाउंट फ़र्ज़ी है। चला होगा कोई कैंपेन। लेकिन तुम्हारे पास मेरी आईडी है, फ़ोन नंबर है। एक बार पूछ लेते। कोई सरकारी पहचान माँग लेते। वेरिफाई कर लेते। लेकिन तुमने बिना कुछ पूछे, एकाउंट डिसेबल कर दिया। क्यों? सरकार का दबाव था? या RSS की शिकायत थी? या आपके दफ़्तर के किसी जातिवादी स्टाफ़ की निजी खुन्दक है? किसी की भावना आहत हो गई है क्या? चलो बता भी दो। शर्माने की क्या बात है?

अगर मेरे लिखे से किसी को शिकायत है, किसी की मानहानि हुई है, शांति व्ववस्था को ख़तरा है, सौहार्द नष्ट हो रहा है, IPC की किसी धारा का उल्लंघन हुआ है, तो कानूनी व्वस्थाओं के तहत कार्रवाई का रास्ता सबके लिए खुला है। लेकिन फेसबुक चलाने वाले, खासकर उसके इंडिया ऑफ़िस में बैठे लोग, बताएँ कि ऐसी किसी शिकायत के बग़ैर, आपने एक एकाउंट को डिसेबल करने का फैसला क्यों किया?

कोई तो वजह होगी?

बताओ फेसबुक, क्यों बंद किया एकाउंट? वैसे तो रास्ता यह है कि मैं एक और एकाउंट खोल लूँ। लेकिन चोर दरवाज़े से मैं क्यों आऊँ? चोर दरवाज़े से, छिपकर एकाउंट बंद करने का काम तो तुमने किया है फेसबुक। शर्म आनी चाहिए। अब आपका यह क्लेम तो खंडित है कि आप विचारों और आइडिया के लिए एक सर्वसुलभ डेमोक्रेटिक मीडियम हैं।

फेसबुक,

क्या आपको पता है कि भारतीय संविधान में विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विधान है। आप रॉंग साइड में चल रहे हो फेसबुक महोदय। मैंने आपका चालान काट दिया है।.—-“

नदीम अख्तर के एफबी वाल से

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फेसबुक पर आतंकी बनने की इच्छा जताने वाला पत्रकार गिरफ्तार

सोशल साइट फेसबुक पर याकूब मेमन को शहीद बताने वाले पत्रकार जुबैर अहमद खान को वसंत बिहार (दिल्ली) की पुलिस ने मुंबई में गिरफ्तार कर लिया है। जुबेर अहमद खान ने अपनी पोस्ट में इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की मंशा भी व्यक्त की थी। 

जुबैर नवी मुंबई के निवासी हैं। मुंबई पुलिस भी जुबैर की फेसबुक पोस्ट की छानबीन कर रही है। जुबेर ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि मुंबई छोड़ कर आतंकी संगठन आईएस में शामिल होने के लिए वह अपना पासपोर्ट जमा कर देगा। वह आईएस का प्रवक्ता बनना चाह रहा है। वह दिल्ली स्थित इराकी दूतावास जा रहा है। 

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बड़ी बात : फेसबुक फ्रेंड्स के स्टेटस पर मिल जाएगा कर्ज!

सोशल नेटवर्किंग के बादशाह फेसबुक ने एक नया पेटेंट हासिल किया है, जिसमें फेसबुक फ्रेंड्स के स्टेटस के आधार पर ऋण मिल जाया करेगा। 

ऋणदाता अनुमोदन तय करने के लिए कर्ज लेने वाले की सामाजिक स्थिति व गतिविधियों को आधार बनाएगा। अगर किसी ने ऋण के लिए आवेदन किया है तो ऋणदाता आपके फेसबुक मित्रों की क्रेडिट रेटिंग की जांच करेगा।

सवाल लाजिमी होगा कि क्या सभी को अपने फेसबुक पेज से उन लोगों को हटाना होगा जो कर्ज में हैं या जो अपना ईएमआई समय पर नहीं भर पा रहे हैं? एक सवाल यह भी उठता है कि कोई किस तरह से अपने दोस्तों की क्रेडिट हिस्ट्री पता कर सकता है? 

जानकार बताते हैं कि अभी तक फेसबुक प्रबंधन ने इस बात को स्पष्ट नहीं किया है, किस तरह से इस पेटेंट का इस्तेमाल होगा। इसके अलावा वर्तमान में कानून है कि बैंक अपनी शर्तों के अनुसार कर्ज लेने वाले की ऋण-पात्रता की जांच करता है।

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फेसबुक पर ‘ट्रोजन’ पोर्न वायरस का अटैक, शर्मिंदा हो रहे लोग

फेसबुक यूजर्स के लिये चेतावनी है। पिछले कुछ दिनों से फेसबुक ‘पोर्न वायरस’ के हमले से जूझ रहा है । इन्टरनेट के जरिये तेजी से फैलता यह वायरस फेसबुक जैसी लोकप्रिय सोशल मंच के एकाउन्ट यूजर्स के वाल पर अश्लील वीडियो के लिंक भेज रहा है । इस लिंक को क्लिक करते ही यह यूजर्स के 20 से 25 फेसबुक मित्रों को टैग कर देता है और इसके साथ ही कई हजार फैसबुक एकाउन्टस पर अश्लील वीडियो के दृश्य दिखायी देने लगते हैं । 

इससे ना केवल फेसबुक यूजर्स को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है बल्कि लोगों के बारे में एक दूसरे के प्रति गलत धारणा बन जाती है । इस वायरस के चक्कर में कई लोग अपने दोस्तों को अनफ्रेण्ड कर चुके हैं । कुछ ही दिनों में 1 लाख से ज्यादा फेसबुक एकाउन्ट इसकी चपेट में आ चुके हैं । अंग्रेजी पोर्न फिल्मों के चित्र का अटैक होते ही इसमें किसी मित्र द्वारा एक साथ 20 से अधिक लोगों को टैग दिखाया जा रहा था । कई यूजर्स ने एक दूसरे को मैसेज करके एवं फोन करके अपनी नाराजगी जाहिर की तो कई यूजर्स यह सोचकर परेशान होते रहे कि उनके एकाउन्ट से पोर्न फिल्में किसने टैग कर दीं । कोई माफी मांगता नजर आया तो कोई डांट पिला रहा था । 

शाम होते-होते पता चला कि फेसबुक पर ‘ट्रोजन’ नामक पोर्न वायरस का ‘अटैक’ हुआ है । गौरतलब है कि फेसबुक जैसे शोसल प्लेटफार्म पर किशोरवय से लेकर उम्रदराज लोगों के साथ बच्चे तक सक्रीय रहते हैं । उक्त वायरस से ना केवल एक दूसरे के सामने शर्मीन्दा हो रहे हैं बल्कि ना चाहते हुये भी अश्लीलता के शिकार हो रहे हैं । 

कैसे फैलता है ‘पोर्न वायरस’- फेसबुक की वाल पर किसी फ्रैण्ड द्वारा पोर्न वीडियो का लिंक दिखायी देता है । जैसे ही यूजर्स उस लिंक पर क्लिक करता है दूसरे विंडों में वह वीडियो चलने लगता है । कुछ देर चलने के बाद वीडियो रूक जाता है और नया फ्लैश प्लैयर इन्सटाल करने के लिये सन्देश आता है । जैसे ही यूजर इसे इन्स्टाल करने के लिये क्लिक करता है, ‘ट्रोजन’ नामक वायरस कम्पयूटर पर अटैक कर देता है । असल में यह नकली फ्लैश प्लेयर इन्सटाल का लिंक वायरस को आपके कम्पयूटर पर नियंत्रण की सुविधा देता है। 

कैसे करता है कार्य- सबसे पहले यह वायरस पोर्न वीडियो को आपके किन्हीं भी 20 से ज्यादा फ्रैण्डों को टैग करके पोस्ट कर देता है । वहां से यह उन फ्रैण्डों के अन्य मित्रों को दिखायी देने लगता है । जिससे यह बहुत तैजी से फैलता जाता है । इसके साथ ही यह की बोर्ड-माउस खराब कर सकता है । हैकर इस वायरस की सहायता से कम्पयूटर की किसी ड्राईव से डाटा तक शेयर कर सकते हैं । कम्पयूटर के साथ यह मोबायल सैट्स पर भी प्रभाव डालता है । 

कैसे करें बचाव- किसी अच्छे एन्टीवायरस के उपयोग से ऐसे वायरस से बचा जा सकता है । पोर्न साईट्स के लिंक दिखायी देने पर उन्हें क्लिक ना करें बल्कि इसके लिये फेसबुक पर रिर्पाट कर दें । इसके लिये फेसबुक पर ऑप्शन दिये गये हैं ।

लेखक जगदीश वर्मा ‘समन्दर’ से संपर्क : metromedia123@gmail.com 

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सोशल मीडिया का राजा फेसबुक, 380 करोड़ लोग हुए इसके दीवाने

फेसबुक सोशल मीडिया का नया राजा बन गया है. वर्चुअल वर्ल्ड में फेसबुक की लोकप्रियता ने दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की की है. ऐसी कामयाबी सोशल मीडिया में दुनिया में किसी को अब तक हासिल नहीं हुई. फेसबुक स्मार्टफोन पर अपने सभी प्रतिद्वंद्वी ऐप्स में बढ़ते यूज़र्स के कारण अव्वल दर्जे का हीरो बन गया है. फेसबुक के यूज़र्स की संख्या 3.8 बिलियन यानी 380 करोड़ तक पहुंच गई है, जो कि दुनिया की जनसंख्या का 50 फीसदी है.

इतिहास के राजा और रजवाड़े अपनी नीतियों और मानसिकता से इतने लोगों और इस हद तक नहीं पहुंच पाए होंगे, जो ख्याती फेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकेरबर्ग ने हासिल कर ली. लोगों के दिलों दिमाग तक बढ़े पैमाने तक पहुंचना, फेसबुक एप के दिनों दिन उपभोक्ता बढ़ना मामूली बात नहीं है. ये आंकड़े इतिहास दर्ज कर चुके हैं. चलिए एक तुलना करते हैं फेसबुक यूज़र्स और दूसरे स्मार्टफोन यूज़र्स के बीच, हैरानी होगी आपको जानकर कि फेसबुक के यूज़र्स करिश्माई तौर पर इस एप्लीकेशन पर दीवानगी जताते हैं.

हाल ही में 21 अप्रैल 2015 को सबसे यंग एंटरप्रेन्योर मार्ग ज़ुकेरबर्ग ने अपनी स्पीच में कहा था कि कितने लोग फेसबुक और फेसबुक आधारित एप का इस्तेमाल करते हैं. मार्च 2015 तक फेसबुक ने फोन के ज़रिए हर महीने 140 करोड़ यूज़र्स जोड़े हैं.

केवल इतना ही नहीं वॉट्स एप जो फेसबुक से जुड़ी सब्सिडियरी एप है उसका इस्तेमाल 80 करोड़ लोगों तक फैला है. फेसबुक ग्रुप का दायरा 70 करोड़ लोगों तक फैला है.

फेसबुक मेसेंजर का इस्तेमाल 60 करोड़ लोगों तक फैला हुआ है. इसके अलावा इंस्टेग्राम जो फेसबुक का ही एक अलग हिस्सा है उसका दायरा 30 करोड़ लोगों तक फैला है. इतने सालों में फेसबुक ने अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए क्या नहीं किया. अलग अलग फीचर्स लाकर लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया.

फेसबुक मदद के लिए भी हर स्तर हाथ आगे बढ़ाता है, नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए फेसबुक ने सेफ्टी फीचर निकाला, लोगों की जागरुकता से लेकर सुरक्षा तक फेसबुक लोगों के दिमाग को पढ़ रहा है. अब तो फेसबुक अपने यूजर्स के अकाउंट्स को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए एक नया फीचर ‘Security Check-up’  भी लाने वाला है जो जल्द ही न्यूज फीड में दिखाई देगा.

राहत कार्यों के लिए फेसबुक डोनेशन भी बहुत देता है लेकिन बिज़नेस औऱ मार्केट कैपिटल के मुताबिक फेसबुक सबसे तेज़ तरक्की करने वाली कंपनी बन गई. मार्केट कैपिटल अभी 212 बिलियन डॉलर है और 80 डॉलर का उसका नेसडेक पर स्टॉक.

पंखों को कितने आगे तक ले जाना है ये कोई फेसबुक से सीखें और इन्ही पंखों के सहारे ही फेसबुक हर परवाज़ के साथ तरक्की का व्यापार कर रहा है. लोगों को दिलों तक पहुंच रहा है, लोगों को दीवाना बना रहा है.

कल्पना कीजिए कि आज से करीब 5-10 साल पहले आप फेसबुक नाम से वाकिफ भी नहीं होंगे, लेकिन समय गुज़रने के साथ सोशल मीडिया का दायरा बढ़ा, हम ज़्यादा एडवांस हुए, तकनीक से रूबरू हुए, छोटी छोटी बांतों को लोगों के साथ बांटने की आदत बढ़ी और सबसे अहम सोशल मीडिया की तरफ दीवानगी बढ़ी.

पता ही नहीं चला कि साल 2015 में हम विकास के ऐसे मुहाने पर खड़े होंगे जब हमारी निर्भरता दिन प्रतिदिन अपनी प्रतिक्रियाएं लोगों के साथ virtual वर्ल्ड में बांटने में बढ़ जाएगी.

एबीपी न्यूज़ से साभार एंकर निधि वासंदानी की रिपोर्ट

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फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल, कई बेतुके और फूहड़ मित्र

दरियादिली जागी और अनब्लॉक करने लगा, तब पूछा गया कि ब्लॉक करते ही क्यों हैं। इसका एक जवाब तो यह कि गरिमाहीनता या फूहड़ता को किसी सीमा तक ही बरदाश्त किया जा सकता है। दूसरे, मित्रों की तादाद फेसबुक ने खुद पांच हजार पर लॉक कर रखी है। तो ईमानदार संवाद के ख्वाहिशमंद मित्रों को क्यों न जोड़ा जाय।

कई बेतुके और फूहड़ “मित्रों” की पोल जब-तब खुल जाती है। प्रोफाइल पड़ताल करने पर उनके नाम-पते-छवि सब फरजी निकलते हैं। नाम अक्षय कुमार, तसवीर अमिताभ बच्चन की, कवर पर भूतनाथ, सवाल कादर खान जैसे। ऊपर से तकादे – जवाब दो, जवाब दो। ऐसों को कब तक झेलें?

एक बड़ा सवाल यह भी है कि जब सिम कार्ड तक बिना समुचित परिचय (पत्र) के नहीं मिलता, अपनी दुकानदारी के लिए सोशल मीडिया पर बेनामी भीड़ कैसे खड़ी की जा सकती है? यह भीड़ झूठी अफवाहें, प्रोपगैंडा, राग-द्वेष ही नहीं, हिंसा और साम्प्रदायिकता तक फैला सकती है – फैलाती है। बदनामी के षड्यंत्र भरे अभियान छेड़ चुनाव तक जितवा-हरवा सकती है, दूसरे शब्दों में सरकारों के बनने-गिरने में कंधा दे सकती है।

ऐसे नकाबपोश षड्यंत्रकारियों के प्रति सरकारें दयालु क्यों बनी रहती हैं? कम से कम खातेदार पर आइडी और सही नाम के प्रयोग की बंदिश तय नहीं की जा सकती क्या?

ओम थानवी के एफबी वॉल से

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भूमिका ने फेसबुक मित्रों से पूछा, ऐसे पति को आप क्या कहेंगे..?

किसी भी पति के द्वारा अपनी धर्मपत्नी को पीटना एक जघन्य अपराध है. ये अपराध यदि कोई चोर-उचक्का, गुंडा-मवाली या फिर डाकू-हत्यारा करता है, तो एक बार माफ किया जा सकता है, लेकिन यदि अपने आप को “कवि”, “साहित्यकार” या फिर बार बार ख़ुद को “सर्जक” कहने वाला करता है तो ये अपराध कहीं ज़्यादा संगीन और वीभत्स बन जाता है.

कोई भी धर्मपत्नी अपने पति की ज़्यादतियों, दुर्व्यवहारों, अशोभनीय कृत्यों को पराकाष्ठा तक छुपाने का हमेशा प्रयास करती है, और खून के घूँट पीकर भी घर के मसले, अपनी देहरी के बाहर नहीं ले जाती. क्योंकि ये ना केवल उस स्त्री के अपने परिवार और व्यक्तिगत सम्मान से जुड़ा मामला होता है, बल्कि पूरे ससुराल, समाज और परिवेश की मर्यादाएं भी संभालने का दायित्व वो अकेली अपने नाज़ुक काँधों लेकिन बेहद मजबूत हृदय के साथ निर्वहन कर रही होती है. 

अपने इन्हीं सद्गुणों के कारण और इन्हीं वज़ूहात के चलते वो विवाह नाम के बंधन में बँधती है, वरना लिव-इन उसके लिए भी खुला विकल्प था. लेकिन किसी विवाहिता का मान मर्यादा, व्यवहार-विचारों की शुद्धता, परिवेश-समाज की गरिमा बनाये रखने वाली सशक्त शख्सियत का पर्याय है. तिस पर भी वो स्त्री अपने भीषण शराबी पति, तथाकथित साहित्यकार, जो वय में उस स्त्री के पितामह समान हो, पहले तो घर के सारे क़ीमती सामान, ज़ेवर-नकदी-एटीएम कार्ड्स सहित बैंक के सारे काग़ज़, रसोई-गैस तक के पेपर, कम्प्यूटर-लैपटॉप वगैरह किसी गोपनीय जगह पर ले जाकर छुपा दे, फिर पन्द्रह दिन लापता होने के बाद एक दिन घर की कार जबरन हथियाने के लिए वापस घर में घुसे, और उसी चुपचाप बर्दाश्त कर रही स्त्री को अमानवीय तरीके से पीटे, और उसके बाद पूरी दुनिया में घूम घूमकर हज़ार बेबुनियाद और पूरी तरह से झूठी तोहमतें भी लगायें तो बताईए, मेरे आत्मीय और वरिष्ठ शुभचिंतक मित्रों उस पति को आप क्या कहेंगे….

भूमिका द्विवेदी के एफबी वॉल से

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फेसबुक का बीबीसी और न्यूयार्क टाइम्स समेत नौ मीडिया कंपनियों से करार

बेंगलुरु : फेसबुक इंक ने नौ प्रकाशकों के साथ करार किया है जिसके तहत उन प्रकाशनों के  ‘त्वरित लेख’ छापे जाएंगे. ये लेख सीधे सोशल मीडिया के फीड के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध होंगे. इस तरह के त्वरित लेख साधारण मोबाइल के नेटवर्क से 10 गुना तेज गति से काम पहुंचेंगे. फेसबुक के इस करार में न्यूयार्क टाइम्स, बज फीड और नेशनल ज्योग्राफिक जैसे प्रकाशक शामिल हैं.

फेसबुक के चीफ  प्रोडक्ट ऑफिसर  क्रिस फॉक्स  के अनुसार अब लेख काफी तेजी से डेलीवर होगा, साथ ही पाठक इससे इंटरेक्ट कर पाएंगे. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि बिजनेस मॉडल के हिसाब से कंपनी कंटेंट को  नियंत्रण भी रखेगी. न्यूज प्रकाशक इसके तहत अपना विज्ञापन भी छाप सकते हैं या फिर इम्बेडड एडवर्टिजमेंट लगाकर उससे प्राप्त आमदनी को अपने पास रख सकते हैं. 

इसके अलावा वो फेसबुक को विज्ञापन जुटाने के लिए कह सकते हैं. इंटरनेट सोशल नेटवर्क कंपनी, न्यूज कंपनियों  को डाटा ट्रैक और ट्रैफिक के अध्ययन की एनालिटकल टूल के माध्म से छूट दे सकते हैं. दूसरे पार्टनरों में एनबीसी, द अटलांटिक, द गार्जियन, बीबीसी न्यूज जैसे मीडिया कंपनियां शामिल हैं.

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हर सात में से एक तलाक फेसबुक की वजह से

लंदन : किसी समय में फेसबुक का उद्देश्य लोगों के बीच मित्र-संबंधों को विकसित करना था। साथ ही मित्र परिवार के अनुभवों और जानकारियों को एक दूसरे से साझा करना था लेकिन अब सोशल नेटवर्किंग तलाक की सबसे बड़ी वजह बनता जा रहा है। ब्रिटेन के आंकड़े के अनुसार तलाक लेने वाले हर सातवें सदस्य व्यक्ति की तलाक की वजह सोशल नेटवर्किंग साइट बन रही है। 

ब्रिटेन के एक कंपनी सलाहकार एवं कानूनविद के मुताबिक अपने साथी के सोशल नेटवर्किंग साइट पर अत्यधिक समय बिताने से ऊबकर तलाक लेने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। ‘स्लेटर एंड गॉर्डन लॉयर्स’ द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक दुनिया का टॉप सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक वैवाहिक संबंधों को बिगाड़ने में सबसे ऊपर है। स्लेटर एंड गॉर्डन के परिवार कानून के अध्यक्ष एंड्र न्यूबरी ने ऑनलाइन एक बयान जारी करके कहा कि पांच वर्ष पहले विवाह संबंध खत्म होने के मामलों में फेसबुक का जिक्र शायद ही कभी होता था, लेकिन अब लोग सोशल मीडिया को या सोशल मीडिया पर पाई गई किसी सामग्री को विवाह संबंध खत्म करने की प्रमुख वजहों में अक्सर इस्तेमाल करते पाए जाने लगे हैं।

अध्ययन से पता चला है कि सोशल मीडिया विवाह संबंधों के लिए नया खतरा बन चुका है। अध्ययन के मुताबिक आधे लोग अपने साथी की फेसबुक गतिविधियों की गुप्त रूप से पड़ताल करते पाए गए, जबकि हर पांच में से एक व्यक्ति फेसबुक से जुड़ी किसी बात को लेकर अपने साथी के साथ मनमुटाव की स्थिति में है। 25 फीसदी लोगों के बीच सोशल मीडिया को लेकर हर हफ्ते लड़ाई होती है वेबसाइट ‘गीकवायर डॉट कॉम’ के मुताबिक अध्ययन में करीब 25 फीसदी लोगों ने कहा कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सप्ताह में कम से कम एक बार उनके बीच झगड़ा हो जाता है। 

करीब 17 फीसदी लोगों ने बताया कि अपने साथी के बारे में सोशल मीडिया पर मिली किसी न किसी चीज को लेकर उनके बीच हर रोज झगड़ा होता है। 58 फीसदी साथियों को अपने साथी का पासवर्ड पता होता है अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि 58 फीसदी लोगों को अपने साथी के फेसबुक लॉगइन एवं पासवर्ड की जानकारी होती है। फेसबुक पर साथी की जासूसी की अहम वजह यह है कि लोगों का आपस में विश्वास कम हो रहा है। साथी यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि किन-किन लोगों के साथ उनका साथी संपर्क में रहता या रहती है। यही नहीं क्या वह अपने साथी से अपने संबंधों के बारे में सच बोलता है या नहीं। हालात अब यहां तक आ गये हैं कि तलाक से जुड़े मामलों में लगभग हर रोज फेसबुक के पोस्ट और तस्वीरें अदालत के सामने पेश की जाने लगी हैं।

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धमकी या धौंस की जरूरत नहीं, सामने आइए

फेसबुक ब्लॉक करवा देने से सचाई की आत्मा नहीं मरती। फेसबुक पर अपनी उपस्थिति क्या कुछेक नीम पागलों की मर्जी से रहेगी ? लगातार धमकियां मिल रहीं हैं, सीधे और किसी के मार्फ़त- भड़ास वाले अपने यशवंत भाई की मेहरबानी से मामला संज्ञान में आया और कुछ संपादकों की मेहरबानी से आपके सामने फिर से उपस्थित हूँ– खुलकर बोलें ये नीम पागल कि उन्हें मेरे किस बात पर ऐतराज है ? हाँ इतना जान लें कि ज़िंदगी में खुरहुरी रास्तों को चुना है, अपना समाज बनाया तो रोटी और बेटी की कीमत पर नहीं। न किसी का खाया न किसी को खिलाया– यदि परदेस में किसी ने दो रोटियां और सालन मेरे लिए – परोसा भी तो इनकी कीमत नहीं होती। पीपल जड़ में समर्पित जल की कीमत मत मांगिये। अंडे लेकर जा रही चींटियों केलिए बिखेरे गए चीनी के दाने की कीमत मत मांगिये। आपकी श्रद्धा थी तो रोटी-पानी और शक्कर दिया या परोसा। कहीं तो सुसभ्य नागरिक और साहित्यकार वाला संस्कार दिखाईये। 

मैं संबंधों का लाभ नहीं उठाता– तमाम विरोधों के बावजूद मान्यवर मोदी इसी से प्यारे और सम्मानीय लगते हैं कि उनका ‘आगे नाथ न पीछे पगहा’ वाली बात है। इस वजह से वह साहसी भी हैं और कर्मठ भी। उनके मन में लोभ नहीं है। मैं उसी भाव में जीता हूँ। खेद की बात है कि कुछेक दोगली मानसिकता वाले लोगों ने मुगालते में आकर मुझसे ‘अपना ये काम वो काम’ करवाने की भीष्म प्रतिज्ञा कर ली और खुद को घोषित किया कि उनके अंदर परीक्षित वाला वैराग्य भाव है। टीवी चैनल में मेरी कोई जान पहचान नहीं है कि किसी के शहजादे और शहजादियों को कहीं रखवा सकूँ– बावजूद इसके कि इन चैनलों के हेड्स या बेहद ख़ास या तो संस्थान में मेरे सीनियर रह चुके हैं या संस्थान के संगी हैं या मेरे बाद संस्थान में आये। इन सबसे मेरा सम्मानित दूरत्व है। क्योंकि मैं तो यही मानता हूँ कि महज इत्तेफाक था कि कुछेक महीनों केलिए संगी हो गया, अन्यथा वो कहाँ और मैं कहाँ।

मुझे मेरी कृतियों से लोग जानते हैं– चुटकी भर या मुट्ठी भर। मैं किसी की किताब की समीक्षा नहीं छपवा सकता। क्योंकि नितांत व्यक्तिगत सम्बन्ध होने के बावजूद मैं खुद को उनके सामने किसी का एजेंट होने का ठप्पा नहीं लगवा सकता। अपनी कृतियों पर सबसे चर्चा होती है लेकिन उनसे मेरा आग्रह नहीं होता कि मेरी किताब की समीक्षा छाप दीजिये। तभी इनका मेरे लिए थोड़ा प्यार है और कुछ ज्यादा सम्मान है। 

मैं गल्प नहीं लिखता। कल्पनाओं में नहीं जीता। इसलिए जो लिखता हूँ– सच लिखता हूँ। इन्ही सचाइयों के साथ जीता हूँ और आगे भी जिंदगी ऐसे ही कटेगी। मेरा लेखन बनावटी नहीं। इसलिए जो भी है सौदा खरा खरा है। यही मेरी जमा पूंजी है। न कोई खेमेबाजी है न गिरोहबंदी है। सबको करीब से जानता हूँ– कौन किस बात पर मरता है। किसे कितना बड़ा पुरस्कार चाहिए। हाँ उनका लेखन सर्वोपरि है और मेरे लिए सम्मानीय भी। बाकि कृतियों का फैसला तो पाठक ही करता है। किताब का कलेवर और आयोजित चर्चाएं नहीं। 

यदि कोई ऐसा मुगालता पाल ले कि सोशल मीडिया पर लिखा गया मेरा हर पोस्ट किसी को टारगेट करके लिखा जा रहा है तो वाजिव सी बात है कि यह उसकी सोच है। मेरे लिए कोई टारगेट नहीं है। मेरा टारगेट गरीबों की वह क्रोनिक गरीबी है जिसपर ये साहित्यकार शाब्दिक जुगाली करते हैं। यदि किसी भाई बंधू को इसमें मेरा कोई काम्प्लेक्स नजर आता है तो यह उसकी पीड़ा है। आज भारत सरकार के एक महत्वपूर्ण मिशन से जुड़ चुका हूँ– जहां ऐसी सोच-चिंतन केलिए कोई जगह नहीं है। 

और हाँ, कोई अपने पद और रूतबा का धौंस न ही दिखाए तो बेहतर है– बात निकलेगी तो बहुत ऊपर तक जाएगी।केंद्र की बात छोड़िये। राज्य में दो ही पद होता है– सीएम या डीएम।

अमरेंद्र ए किशोर के एफबी वॉल से

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Facebook opens up Internet.org platform amid net neutrality debate in India

Mumbai: Facebook is launching an open platform for online content and application developers to join its Internet.org service, in a move the social media giant said would boost efforts to get people online in low-income and rural areas in emerging markets.

The platform, unveiled on Monday, will be open to all developers who meet certain guidelines, including content being built for browsing on both feature and smartphones and in limited bandwidth scenarios, the company said in a statement.

The move comes amid growing debate in India, home to the world’s third-largest population of Internet users, over free access and net neutrality in the country.

Facebook partnered with Reliance Communications to launch Internet.org in India in February. But a number of e-commerce firms and content developers pulled out of the service subsequently as activists claimed it violated principles of net neutrality – the concept that all websites on the internet are treated equally.

“We’ve heard the debate about net neutrality in India and have been tracking it,” Chris Daniels, vice president of product for Internet.org, told Reuters.

“The principles of neutrality must co-exist with programs that also encourage bringing people online,” Daniels said, highlighting that Internet.org was open to mobile operators and involved no payments, either to or from the developers.

Facebook has launched the service in nine countries, including in India, bringing over 8 million people online, said Daniels, who was in India to speak with partners and operators.

The Internet.org application offers free access to basic internet services on mobile phones, as well as access to Facebook’s own social network and messaging services.

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फ़ेसबुक पर अब दिखेंगी बेहतर सूचनाएं, शेयर, टिप्पणी गैरजरूरी

फेसबुक ने कहा कि वह अपने ‘न्यूज फीड’ को नया स्वरूप दे रही है ताकि लोगों को अपने दोस्तों के बारे में ज्यादा बेहतर सूचना मिल सके। विश्व की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्क साइट ने नया बदलाव पेश किया और समाचार लेख और अन्य सामग्री शेयर करने पर निर्भरता कम की।

फेसबुक के मैक्स यूलेंस्टीन एंड लॉरेन सीजर्स ने ब्लॉग पर कहा ‘‘न्यूज फीड का लक्ष्य है ऐसी सामग्री दिखाना जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।’’

ब्लॉग में कहा गया कि इस बदलाव का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यूज फीड में अपने दोस्तों के लिए फोटो, वीडियो, स्टेटस अपडेट या लिंक को ज्यादा प्रमुखता मिलेगी ताकि उन्हें हर जानकारी मिले।

फेसबुक जगह बनाने के लिए किसी समाचार पर टिप्पणी या किसी अन्य व्यक्ति के पोस्ट को अलग हटाएगी। फेसबुक ने कहा ‘‘कई लोगों ने हमें कहा कि उन्हें अपने दोस्तों द्वारा किसी पोस्ट को पसंद किए जाने या टिप्पणी करने के बारे में जानना पसंद नहीं है।’’

कंपनी ने कहा ‘‘इस उन्नयन से ऐसी रपटें न्यूज फीड में नीच दिखेंगी या बिल्कुल नहीं दिखेंगी, इसलिए आप अपने दोस्तों और अपनी पसंद के पेज से जुड़ी सामग्री सीधे तौर पर देख सकेंगे।’’

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फेसबुकिया मित्रों को किया आगाह, कदम जरा फूंक-फूंक के

फ़ेसबुक पर ऐसे मित्रता-अनुरोध स्वीकार न करें तो बेहतर- मित्रता अनुरोध आने पर पहले संबंधित व्यक्ति के फ़ेसबुक प्रोफाइल पर जाकर एक नज़र ज़रूर डालें। ऐसे व्यक्तियों के मित्रता अनुरोध स्वीकार करने से बचें-

1. जो आपके परिचित न रहे हों और इतना ही नहीं, आपके किसी परिचित के भी परिचित न हों। यानी किसी भी मित्र के मित्र न हों।

2. जिन्होंने अपना प्रोफ़ाइल चित्र न लगाया हो, यानी जो अपनी पहचान छिपाना चाहते हों। जो प्रोफाइल चित्र के स्थान पर किसी सेलिब्रिटी का, फूल या किसी वस्तु का, ढंके हुए चेहरे का, या पीछे से लिए गए चित्र आदि का प्रयोग करते हों।

3. जिनके मित्रों की संख्या बहुत ही कम हो (5-7) या न हो।

4. जिन्होंने अभी-अभी फ़ेसबुक प्रोफाइल बनाया हो।

5. जिनके फेसबुक पेज पर कोई टिप्पणी न हो। (क्योंकि उनका उद्देश्य टिप्पणी करना है ही नहीं)।

6. जिनकी फोटो गैलरी में कोई फोटो न हो, संभवतः पहचान छिपाने के लिए। कुछ लोग कैमरा न होने के कारण भी चित्र नहीं लगा पाते। यहाँ अपने विवेक का प्रयोग करें।

7. जिनके फ़ेसबुक पेज पर दी गई टिप्पणियाँ आपत्तिजनक हों। गाली-गलौच की भाषा इस्तेमाल करते हों या अश्लील टिप्पणियाँ/सामग्री प्रयोग करते हों।

8. धार्मिक कट्टरपंथी हों और फेसबुक का प्रयोग इसीलिए करते हों।

9. जिनके साथ आपकी मित्रता का कोई आधार न हो।

10. जो विदेशी हों और आप समझ न पाएँ कि उन्हें आपसे मित्रता करने में क्या दिलचस्पी हो सकती है।

मित्र बनाने के बाद भी यदि कोई शख्स आपके या आपके मित्रों के साथ, या आपकी सामग्री के साथ गलत हरकत करता है तो उसे Unfriend करने में जरा भी संकोच न करें।

ज़रूरत समझें तो गलत व्यक्तियों के बारे में Facebook को सूचित करें ताकि वे किसी अन्य को अपना निशाना न बनाएँ।

बालेंदु दाधीच के एफबी वॉल से

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फेसबुक की आड़ में छह लड़कियों से शादी रचाने का खेल कर साउद दुबई भागा

भोपाल : फेसबुक को माध्यम बनाकर मोहम्मद साउद ने छह लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर दी है। वह सभी लड़कियों को उनसे शादी रचाने का झांसा दे चुका है। लड़कियों पर प्रभाव डालने के लिए वह खुद को फिल्म डायरेक्टर बताता है। पुलिस जांच में पता चला है कि वह दुबई भाग गया। वह सिर्फ अमीर लड़कियों को अपना निशाना बनाता था। अभी तक आरोपी पेशे से टीचर रही युवती, अमेरिकन कंपनी की एक एचआर हेड, मुंबई की मेकअप आर्टिस्ट और दिल्ली में पढ़ने वाली छात्रा से शादी कर चुका है।

पुलिस आरोपी का फेसबुक वॉल खंगाल रही है। अभी और कई बड़े मामलों का खुलासा होने की संभावना है। साउद की करतूत उस समय उजागर हुई, जब शाहजहांनाबाद में रहने वाली युवती ने तलैया थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। आरोपी के झांसे में फंसी युवती ने जब फेसबुक पर आरोपी के साथ अपना फोटो अपलोड किया, तो आरोपी की पोल खुल गई।

फोटो देखने के बाद पीड़िता से संपर्क कर छह अन्य लड़कियों ने धोखेबाज साउद को अपना पति बताया। पीड़िता आरोपी के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही थी। पीड़िता का एक बेटा भी है। शादी की बात पर आरोपी साउद फरार हो गया। पीड़िता का कहना है कि आगे से आरोपी किसी दूसरी लड़की की जिंदगी बर्बाद न करे, इसलिए उसने रिपोर्ट दर्ज कराई है।

पीड़िता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ बलात्कार, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। साउद ने फेसबुक के जरिए अलग-अलग नामों का सहारा लेकर लड़कियों को अपने जाल में फंसाया। आरोपी सिर्फ अमीर लड़कियों को अपना निशाना बनाता था।  फिलहाल, पुलिस आरोपी के भारत आने का इंतजार कर रही है।

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फेसबुक पर पोस्ट इसी कार्टून पर गिरफ्तार हुए थे असीम त्रिवेदी

अन्ना आंदोलन से जुड़े असीम त्रिवेदी को फेसबुक पर यूपीए सरकार के घोटालों को लेकर एक कार्टून पोस्ट करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। ‘भ्रष्टमेव जयते’ शीर्षक वाले इस कार्टून में संसद और राष्ट्रीय प्रतीक का मजाक उड़ाया गया था। असीम के खिलाफ पुलिस ने देशद्रोह का मामला भी दर्ज किया था। इस धारा के तहत गिरफ्तारी पर सबसे पहले विवाद 2012 में हुआ था, जब महाराष्ट्र के पालघर की रहने वाली शाहीन नाम की एक फेसबुक यूजर्स ने बाला साहेब ठाकरे की अंतिम यात्रा पर कमेंट किया था और उसे उसकी सहेली रीनू ने इसे लाइक किया था। दोनों को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में दोनों को जमानत मिल गई।

असीम त्रिवेदी का विवादित कार्टून

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एक कार्टून बनाने पर पुलिस ने अंबिकेश महापात्रा नाम के एक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया था। जाधवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने यह कार्टून उस वक्त फेसबुक पर पोस्ट किया था, जब रेलमंत्री और अपनी पार्टी के सांसद दिनेश त्रिवेदी को ममता बनर्जी ने पद से हटा दिया था।

उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खान पर के खिलाफ विवादास्पद कमेंट करने पर पिछले दिनों बरेली में 11वीं के एक छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया था। न्यायिक हिरासत के बाद कोर्ट ने आरोपी छात्र विक्की खान को जमानत दे दी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस से छात्र की गिरफ्तारी को लेकर जवाब मांगा है। आईटी एक्ट की धारा 66ए खत्म होने के बाद विक्की ने कहा,” इस धारा के खत्म होने से इंटरनेट पर अपनी बात कहने की आजादी मिलेगी। इस धारा के खत्म होने से मैं खुश हूं।”

यूपीए सरकार में मंत्री रहे पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ साल 2012 में ट्वीट करने पर पुडुचेरी के बिजनेसमैन रवि श्रीनिवासन की गिरफ्तारी हुई थी। कार्ति चिदंबरम द्वारा पुलिस से शिकायत किए जाने के बाद श्रीनिवासन को उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ भी धारा 66ए के तहत मामला चलाया गया था। बाद में वह जमानत पर रिहा हुए थे। इधर, धारा खत्म किए जाने पर कार्ति चिदंबरम ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कोई धारा खत्म होने का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि आपको सड़क पर किसी को गाली देने का हक मिल गया है। उन्होंने कहा, ”मैं फ्री स्पीच का समर्थन करता हूं लेकिन इसकी कोई सीमा होनी चाहिए। ”

कवि और लेखक कंवल भारती को साल 2013 में फेसबुक पर एक मेसेज डालने पर अरेस्ट कर लिया था। कंवल ने रेत माफिया पर नकेल कसने वाली आईएएस दुर्गाशक्ति नागपाल को सस्पेंड करने के लिए यूपी में सपा सरकार की आलोचना की थी।

(भास्कर से साभार)

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भारत के कथित स्‍वतंत्र मीडिया के लिए दो शब्‍द

माफ करेंगे । लोकशाही ,जनसत्‍ता और जनसरोकारों के कथित पहरुवे चौथा खंभा शायद अब लोकतंत्र को बचाने के लिए जरूरी अपने को पांचवां खंभा भी घोषित करने वाले मीडिया और मीडिया वाले राज्‍य सभा टीवी में मजठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों और माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बहस चलाने के बाद आप भी जागोगे कि अभी भी मालिकों के डंडे से डरते ही रहोगे। 

सरकारी और पब्लिक ब्रोडकास्‍टरों को सरकार का भोंपू करार देने वाले निजी चैनलों और अखबारों के कथित पहरुवों मालिकों और कारपारेट के भांड़ गान से आगे भी दुनिया है। 
माफी सहित हम सभी एेसे सरोकारी मीडियाकर्मियों जिनमें रवीश भाई,उर्मिलेश, राजदीप सारादेसाई ,सागरिका घोष,अर्णब गोस्‍वामी जैसे बड़े लोगों को यह भार उठाने की विनती करते हैं कि कुछ समय अगर हो तो समाचार पत्र के पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मियों के इस ज्‍वलंत और जरूरी मुद्दे को भी अपने चैनलों या अपने पत्रकारीय लेखनों या चर्चाओं मे जगह दें। बाकी के बड़े स्‍वध्‍ान्‍यमान्‍य स्‍वतंत्र पहरुवों से ऐसी अपेक्षा करना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है सो इसके लिए उनसे भी माफी।

मजीठिया मंच के फेसबुक वॉल से

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फेसबुक पर हुआ मनचलों को सबक सिखाने का इंतजाम

तिरुअनंतपुरम : फेसबुक पर महिलाओं को अभद्र ट्रॉल और आपत्तिजनक प्राइवेट मेसेज भेजने वाले अब सावधान हो जाएं। इस तरह का कारनामा आप पर उल्टा पड़ सकता है। केरल का एक फेसबुक पेज ‘सेक्सुअली फ्रस्ट्रेटेड मल्लू’ या SFM अभद्रता का शिकार हुई महिलाओं को एक मौका दे रहा है, ऐसे लोगों को लाइन पर लाने का। 

यह पेज सीधे-सादे तरीके से काम करता है और ऐसे लोगों को शर्मिंदा करता है। अगर आपको लेकर अभद्र ट्रॉल किेये जाएं या कोई अभद्र प्राइवेट मेसेज भेजा जाए, तो उसका स्क्रीनशॉट लीजिए, उसे SFM पर पोस्ट कीजिए। और फिर इन्तजार कीजिए ऐसे लोगों के शर्मसार होने का। यह पेज नवंबर 2014 में शुरू हुआ था और अब इसे 7500 लाइक्स मिल चुके हैं। 

इस पेज को 20 वर्ष की उम्र में 5 दोस्तों ने शुरू किया था। उनमें से एक ने बताया, ‘हमारे पेज को काफी रेस्पॉन्स मिला है। कुछ लोगों ने हमें धमकियां दीं और इस तरह के गलत काम जारी रखे, लेकिन दूसरों ने हमसे माफी मांगी, हमारे आगे गिड़गिड़ाए कि हम पेज से उनकी घटिया पोस्ट्स हटा दें।’ 

ये पांचों यह भी सुनिश्चित करते हैं कि इनकी अपनी पहचान गुप्त रहे। उनका कहना है, ‘गुमनाम रहना हमारा सबसे बड़ा सेल्फ-डिफेंस है। अगर हमने अपनी पहचान बता दी, तो हमारे सोशल मीडिया अकाउंट्स को लोग नहीं छोड़ेंगे।’ 

इस पेज को ऐसे कई लोगों का सपोर्ट मिला है जिनके साथ आए दिन इस तरह के साइबर क्राइम होते रहते हैं। जैसे मलयाली ऐक्ट्रेस रंजिनी हरिदास, जिनकी प्राइवेट लाइफ पर न जाने कितने भद्दे ट्रॉल्स तैयार किये जाते हैं। रंजिनी कहती हैं, ‘मैं कई ऐसी चीज़ें करती हूं जो लोगों को पसंद नहीं हैं। जैसे मैं अंग्रेजी बोलती हूं, विदेशी कपड़े पहनती हूं, स्टेज पर लड़कों या लड़कियों को हग करती हूं, टांगें खोलकर बैठती हूं… लेकिन मेरे खिलाफ खासकर सोशल मीडिया में इतनी ज्यादा सेक्सुअल डबल मीनिंग बातें की गई हैं कि मुझे सोचकर दुख होता है।’ 

ऐक्टिविस्ट और लेखक संध्या SN उन लोगों में से हैं जो इस तरह के मेसेज या वॉल पोस्ट्स को उठाकर सीधा वॉल पर डाल देती हैं। उनका कहना है कि, ‘इस तरह की अब्यूज़िव सोच हमेशा रही है। बस अब टेक्नॉलजी बढ़ने के साथ प्लैटफॉर्म बदल गया है और इस तरह की चीजें लोगों के लिए आसान हो गई हैं। ये अधिकतर कॉमेंट्स पर्सनल लाइफ या बॉडी के बारे में ही होते हैं।’ 

केरल के सायबर पुलिस वालों ने माना है कि सायबर स्पेस में महिलाओं के प्रति हिंसक गतिविधियों को रोकना काफी मुश्किल है। तिरुअनंतपुरम पुलिस कमिश्नर एच वेंकटेश ने कहा, ‘औसतन मेरे सामने महिलाओं के ऐसे 10 केस रोज़ आते हैं। इनमें स अधिकतर फेसबुक और ऑनलाइन अब्यूज़िंग से संबंधित ही होते हैं। 

उन्होंने कहा, ‘इससे निपटने के लिए हमारे पास लीगल प्रावधान हैं जिनमें फेसबुक के लीगल सेल को नोटिस देना भी शामिल है। इसमें वक्त लगता है और हम सिर्फ उन्हीं केसेज में ऐक्शन ले सकते हैं जो हमारे पास रिपोर्ट किये जाते हैं। हर चीज़ को मॉनिटर और रेग्युलेट करना संभव नहीं है। शिकायतें इतनी बढ़ गई हैं कि अब हम सायबर सेल के विस्तार पर सोच रहे हैं।’

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रवीश कुमार, ओम थानवी और वीरेंद्र यादव ने फेसबुक को अलविदा कहा!

Shambhunath Shukla : नया साल सोशल मीडिया के सबसे बड़े मंच फेस बुक के लिए लगता है अच्छा नहीं रहेगा। कई हस्तियां यहाँ से विदा ले रही हैं। दक्षिणपंथी उदारवादी पत्रकारों-लेखकों से लेकर वाम मार्गी बौद्धिकों तक। यह दुखद है। सत्ता पर जब कट्टर दक्षिणपंथी ताकतों की दखल बढ़ रही हो तब उदारवादी दक्षिणपंथियों और वामपंथियों का मिलकर सत्ता की कट्टर नीतियों से लड़ना जरूरी होता है। अगर ऐसे दिग्गज अपनी निजी व्यस्तताओं के चलते फेस बुक जैसे सहज उपलब्ध सामाजिक मंच से दूरी बनाने लगें तो मानना चाहिए कि या तो ये अपने सामाजिक सरोकारों से दूर हो रहे हैं अथवा कट्टरपंथियों से लड़ने की अपनी धार ये खो चुके हैं। इस सन्दर्भ में नए साल का आगाज़ अच्छा नहीं रहा। खैर 2015 में हमें फेस बुक में खूब सक्रिय साथियों- रवीश कुमार, ओम थानवी और वीरेंद्र यादव की कमी खलेगी।

Om Thanvi : नमस्कार। आदाब। दोस्तो, एक और साल जीवन से जाता है। नया आता है। आप सबको नया साल बहुत खुशगवार गुजरे; आपके घर, परिवार, मित्रों (और कहूँगा जो मित्र नहीं हैं उनके यहाँ भी) खुशियां आएं। आपके सपने पूरे हों; नए सपने बुनें, देखें। वे भी पूरे हों। नए साल की देहरी पर यह मेरी हार्दिक शुभकामना है। यह संदेश मेरी ओर से फिलहाल आखिरी संदेश है। साल विदा होता है और मैं भी। मुझे अभी फेसबुक से अवकाश चाहिए। बेमियादी। आखिरी यों कि नए जमाने का माध्यम है। अपने आप को आजमाना इतना ही था कि जमाने के साथ हैं या पिछड़ गए। प्रतिक्रिया और प्रेम का जो सैलाब उमड़ा वह यह बताने को काफी था कि फेसबुक कोई अजनबी दुनिया अपने लिए नहीं है। पर इसमें अब काफी वक्त हो चला। और फिलहाल यों कि इसमें लिखने-पढ़ने के काम अटके रहते हैं। उनके लिए समय चाहिए। फेसबुक को अपना समय चाहिए। जितने मित्र और पढ़ने वाले बढ़ते हैं, मेरी बेचैनी भी बढ़ती जाती है। इसलिए अंततः अवकाश लेता हूँ। कितना, कब तक – कुछ पता नहीं। फिर मिलेंगे गर खुदा लाया। नमस्कार। आदाब। साभिवादन, ओम थानवी।

Virendra Yadav : कुछ मित्रों का कहना है कि मुझे विवादों में नही पड़ना चाहिए . दरअसल मेरे लिए ये विवाद थे भी नही हस्तक्षेप ही रहे हैं . फिर भी सच तो यह है कि चाहे ‘रायपुर प्रसंग’ हो, सी आई ए-कमलेश का मुद्दा हो ,’छिनाल -प्रसंग’ हो या निराला-प्रेमचंद का भगवा अधिग्रहण हो या डॉ.धर्मवीर की प्रेमचंद को ‘सामंत का मुंशी’ की मुहिम या अन्य कई और प्रसंग हों ,हर मसले या मुद्दे पर मैंने अपनी सोच-समझ के अनुसार हस्तक्षेप किया है . यह करते हुए मैंने अपने कई अच्छे मित्रों को नाराज़ किया है और खोया भी है , वैसे इन मुद्दों पर साथ देने वाले साथी भी कम नही रहे हैं.लेकिन मुझे लगता है कि आम प्रवृत्ति व्यावहारिक चुप्पी की होती जा रही है .संगठन भी ‘कांख भी ढकी रहे और मुठ्ठी भी तनी रहे’ की व्यावहारिक भूमिका में ही ढलते जा रहे हैं. ऐसे में बेहतर यही है कि ‘काजी जी दुबले क्यों ,शहर के अंदेशे से’ मसल अपने ऊपर ही क्यों लागू करवाई जाय..इसलिए जरूरी है कि अपने लिखने-पढने पर अधिक केन्द्रित हुआ जाय और इस मुगालते से मुक्त हुआ जाय कि कुछ कहने -सुनने या सिद्धांत ,सरोकार या पक्षधरता आदि से कुछ बनना या बिगड़ना है .’ होईहै वही जो राम रचि राखा’ पर भरोसा न करने के बावजूद हो तो वही रहा है जो ‘राम’ रच रहे हैं. इसलिए मन है कि फिलहाल कुछ विराम लिया जाय अपने इस ‘विवादी’ स्वर से और फेसबुक से भी . अतः कह नही सकता कि यहाँ कब ,कितनी उपस्थिति हो पायेगी. वैसे भी असली मुद्दों का समर स्थल आभासी दुनिया न होकर वास्तविक दुनिया है. अतः फिलहाल जरूरत वहां ज्यादा है .अभी के लिए फेसबुक से लम्बा अवकाश .धन्यवाद मित्रों. आप सब को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल, ओम थानवी और साहित्यकार वीरेंद्र यादव के फेसबुक वॉल से.

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अपने निजी फेसबुक और ट्विटर एकाउंट का विज्ञापन करने में जनता का पैसा लुटा रहे हैं अखिलेश यादव

सेवा में, श्री अखिलेश यादव,

मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ

विषय- सरकारी विज्ञापनों में आपके व्यक्तिगत फेसबुक और ट्विटर एकाउंट के प्रचार विषयक

महोदय,

कृपया दिनांक 04/11/2014 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न समाचारपत्रों में प्रकाशित तीन विज्ञापनों का सन्दर्भ ग्रहण करें जो दिनांक 04/11/2014 को 100 पुलिस भवन तथा 2 उपरिगामी सेतुओं तथा दिनांक 05/11/2014 को समाजवादी पेंशन योजना के उद्घाटन से सम्बंधित हैं.  इन सभी विज्ञापनों में अन्य तथ्यों के अलावा एक ट्विटर एकाउंट twitter.com/yadavakhilesh, एक फेसबुक एकाउंट facebook.com/yadavakhilesh तथा एक यू-ट्यूब एकाउंट youtube.com/user/upgovtofficial भी अंकित है. ये फेसबुक और ट्विटर एकाउंट आपके अर्थात श्री अखिलेश यादव के व्यक्तिगत एकाउंट हैं जिसके भारी संख्या में फौलोवर हैं. इन दोनों एकाउंट में आपका वेबसाइट samajwadiparty.in  अंकित है जो समाजवादी पार्टी का आधिकारिक वेबसाइट है.

चूंकि आप समाजवादी पार्टी के नेता हैं और उसी पार्टी के नेता के रूप में आपने मुख्यमंत्री पद प्राप्त किया, अतः अपने निजी फेसबुक और ट्विटर एकाउंट पर उस राजनैतिक पार्टी का वेबसाइट रखना स्वाभाविक है. आप वर्तमान में समाजवादी पार्टी के नेता के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं और इस रूप में आप द्वारा ये दोनों एकाउंट अपनी इच्छानुसार कभी सपा नेता और कभी प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रयोग किया जाता है जिसमे आप अपनी पार्टी के लोगों और प्रदेश की जनता से अपनी बात कहते हैं और उनसे इस माध्यम से संवाद करते हैं. लोग आपकी बात सुनते हैं और उसके जरिये आपसे जुड़े हैं और यह आपका पूर्ण अधिकार है.

इस पूरी प्रक्रिया में समस्या तब आ रही है जब उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक विज्ञापनों में आपके इन व्यक्तिगत फेसबुक और ट्विटर एकाउंट का उल्लेख किया जा रहा है और सरकारी तौर पर बताया जा रहा है कि आपका ट्विटर एकाउंट twitter.com/yadavakhilesh और फेसबुक एकाउंट facebook.com/yadavakhilesh है. इस तरह सराकर के खर्च पर आपके व्यक्तिगत फेसबुक और ट्विटर का विज्ञापन हो रहा है.

यह अपने आप में अनुचित और नियमविरुद्ध है क्योंकि सरकारी खर्च पर किसी व्यक्ति विशेष के फेसबुक आदि का और उनके व्यक्तिगत कार्यों, व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रचार नहीं किया जा सकता. इससे भी अनुचित और विधिविरुद्ध यह तथ्य है कि आपके फेसबुक और ट्विटर एकाउंट में तमाम राजनैतिक बातें भी लिखी गयी हैं. इसमें समाजवादी पार्टी का प्रचार, समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम, सपा को वोट देने के लिए आमंत्रित करना, श्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने से रोकने जैसी तमाम बातें लिखी हुई हैं. जाहिर है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस तरह की बातें आधिकारिक रूप से प्रचारित नहीं कर सकती. सरकार किसी पार्टी विशेष के कार्यक्रम, उसकी उपलब्धियां, किसी पार्टी को वोट देने, किसी अन्य पार्टी को वोट नहीं देने जैसी बातें आधिकारिक रूप से नहीं कर सकती.

इसके बावजूद ऐसा इसीलिए हो रहा है क्योंकि सरकार में बैठे कुछ अफसर नियमों को ताक पर रख कर इस प्रकार के विधिविरुद्ध कार्य कर रहे हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि ये चापलूस अफसर आपको खुश करने के लिए नियमों को ताक पर रख ऐसे नियमविरुद्ध कार्य कर रहे हैं जिससे आप व्यक्तिगत रूप से आरोपित हो रहे हैं और यह विधिविरुद्ध कार्य सीधे आपके नाम और आपके व्यक्तित्व से जुड़ा हुआ है. इसी प्रकार यूट्यूब पर सरकार के कथित आधिकारिक चैनेल पर आपके समाजवादी पार्टी पर झंडा फहराने जैसे पूर्णतया राजनैतिक कार्यक्रमों को भी प्रचारित किया जा रहा है.

मैं ऐसे तमाम राजनैतिक टिप्पणी यहाँ तारीख सहित प्रस्तुत कर रही हूँ जिसमे आपने राजनैतिक बातें कही हैं जो आप सपा नेता के रूप में कह सकते हैं पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में नहीं लेकिन इन चापलूस अफसरों के चक्कर में आपकी ये राजनैतिक बातें भी आपके फेसबुक और ट्विटर के प्रचार से सरकारी अभिलेख और सरकारी प्रचार का हिस्सा बन जा रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है. मैं जानती हूँ कि जब ये बातें आपके संज्ञान में आएँगी तो आप यह स्थिति तत्काल रुकवाने के आदेश देंगे क्योंकि आप कभी भी अपने नाम पर इस प्रकार के गैरकानूनी काम नहीं होने या करने देंगे जिसमे आगे चल कर आपको अपयश मिले और आप सरकारी धन के व्यक्तिगत हित में उपयोग करने के दोषी करार दिए जाएँ.

अतः मैं उपरोक्त समस्त तःयों के दृष्टिगत आपसे निम्न दो निवेदन करती हूँ-

1.  कृपया तत्काल यह स्थिति रोकने के आदेश देने की कृपा करें ताकि आपके व्यक्तिगत फेसबुक और ट्विटर एकाउंट आधिकारिक प्रचारों में सम्मिलित नहीं हों और आप सरकारी धन से अपना प्रचार करने के दोषी नहीं कहे जाएँ

2.  इस प्रकार का अनुचित और अवैध कार्य करने और इसके जरिये आपकी स्थिति खराब करने वाले सभी चापलूस अफसरों के खिलाफ कठोरतम कार्यवाही करने की कृपा करें ताकि भविष्य में कोई आपको ऐसी असहज स्थिति में ना लाने की हिमाकत करे

पत्र संख्या- NT/Complaint/13/14
दिनांक-06/11/2014

भवदीय
(डॉ नूतन ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34525
nutanthakurlko@gmail.com

वर्ष 2014 में अब तक फेसबुक पर लिखी तमाम राजनैतिक टिप्पणियाँ (तारीख सहित)

23/02/2014 Today, I flagged off our Cycle Rally from Jantar Mantar, Delhi.

07/03/2014 http://www.ndtv.com/video/player/candidates-2014/the-whole-country-knows-bjp-s-character-says-akhilesh-yadav/312172?hp

15/03/2014 Today, I have completed two years in office. During this time, one of my most important objective was to empower the women of Uttar Pradesh. We have launched many schemes to achieve this goal.  Today, I am proud to present our first commercial for the Lok Saba election, honoring the women of India. (samajwadi party)

25/03/2014 Metro Rail Projects, IT Cities, Expressways, Parks, Hospitals, Medical Colleges, Stadiums
Samajwadi Party-रोज़ नया कदम

02/04/2014 Today we released our party’s manifesto for the upcoming Lok Sabha elections

17/04/2014, 24/04/2014, 12/05/2014- समाजवादी पार्टी को वोट देने का आह्वान

09/05/2014 Last few hours of campaigning.

20/05/2014 Hindi, Urdu and all National languages are a part of our cultural heritage. Samajwadi Party believes in all the National languages.

27/07/2014 www.samajwadiparty.in

13/09/2014 Vote for Cycle. Vote for Samajwadi Party.

07/10/2014 Socialism = Prosperity + Equality- The start of the Samajwadi Party Convention 2014 will be marked by the inauguration of the Janeshwar Mishra statue.

08/10/2014 Day One of Samajwadi Party’s 9th Conclave.

09/10/2014 Day Two of Samajwadi Party’s 9th Conclave.

10/10/2014 Final Day of Samajwadi Party’s 9th Conclave.

19/10/2014 Congratulations to the Samajwadi Party workers for their win in Kairana.

उपरोक्त टिप्पणी ट्विटर पर भी हैं. इसके अतिरिक्त ट्विटर पर वर्ष 2014 में कुछ अन्य अतिरिक्त राजनैतिक टिप्पणियाँ (तारीख सहित)

21/03/2014 Samajwadi Party initiates, India’s largest Social Security movement with Samajwadi Pension Scheme.

07/04/2014 ‘We will do better than 2009 elections’ – Akhilesh Yadav, Hindustan Times

23/04/2014 Happy to see the Samajwadi Party flag flying high all the way in Seattle, USA. Thank you for sharing.

01/05/2014 Samajwadi Party would stop Modi’s model in UP. His model of dividing India.

यू-ट्यूब पर कथित UP Government Official Channel पर प्रस्तुत आपके द्वारा सपा कार्यालय पर झंडारोहण का वीडियो है जिसमें लिखा गया है कि- ”मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा स0पा0 कार्यालय में झण्डा रोहण करते हुए। दिनांक 15 08 2014”

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