लोकसभा टीवी के एक्जाम में कौन-कौन मीडियाकर्मी हुए पास, देखें पूरी लिस्ट

पिछले साल दिसंबर महीने में लोकसभा टीवी चैनल में रिक्त विभिन्न पदों के लिए हुए एक्जाम का रिजल्ट आ गया है. नीचे वो लिस्ट है जिसमें आधिकारिक रूप से उत्तीर्ण हुए मीडियाकर्मियों की जानकारी दी गई है. इंग्लिश के एंकर कम प्रोड्यूसर समेत तीन पदों के लायक कोई प्रत्याशी नहीं पाया गया, इसकी भी जानकारी दी गई है. 

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धन्य है यह ‘गभिलाश झांडेकर’ जो तीन सवाल पूछ कर 100 नंबर के साथ न्याय कर देता है!

Sarjana Sharama : मौका परस्तों की दसों उंगलियां घी में सिर कड़ाही में… ना लेफ्ट ना राईट, ना कांग्रेस ना बीजेपी, बस ‘तेलपूत’ बन जाइए यानि जिसका राज उसको तेल लगा के हो गए उसके पूत। फिर देखो, मज़े ही मज़े हैं। मध्यप्रदेश के राजे रजवाड़े कांग्रेसी नेताओं का मीडिया रिलेशन और पब्लिक रिलेशन देखने वाले मध्यप्रदेश के औसत दर्जे के एक पत्रकार हैं, मान लीजिए उनका नाम है- गभिलाश झांडेकर।

इस शख्स ने 2014 के चुनाव में जिन्होंने नरेंद्र मोदी और बीजेपी के विरूद्ध जम कर प्रचार किया और अपने राजाओं के लिए वोट मांगे। अब वही बीजेपी नेताओं के सगे बने हुए हैं। सगे ही नहीं, विशेष टीम के सदस्य हैं। बीजेपी नेताओं ने उन्हें काम दिया है कुछ पदों के लिए ‘योग्य पत्रकारों’ का चयन क्योंकि उन्हें 100 नंबर का इंटरव्यू 5 से 7 मिनट में निपटा लेने में महारत हासिल है। और, वो अँधा बांटे रेवड़ी कहावत को पूरी तरह अमल में लाते हैं।

अब आप ही बताएं तीन मामूली से सवाल पूछ कर 100 नंबरों के साथ न्याय कैसे हो सकता है क्योंकि उन्हें ये पता रहता है कि उन्हें किस उम्मीदवार को सबसे ज्य़ादा नंबर देने हैं, बाकी के साथ वो टाईम पास करते हैं. इंटरव्यू बोर्ड के बाकी सदस्यों की वो एक नहीं चलने देते. तीन सवाल पूछ कर उम्मीदवार को खुद ही थैंक्यू बोल देते हैं, बाकी सदस्यों से ये पूछने का कष्ट भी नहीं करते कि आपको भी कोई सवाल तो नहीं पूछना। वाह मिस्टर झांडेकर, आप धन्य हैं। आप ही धन्य नहीं हैं, वो भी धन्य हैं जिनको आप झोली भर भर कर नंबर बांटते हैं। जय मौका परस्त, जय ‘तेलपूत’।

वरिष्ठ पत्रकार सर्जना शर्मा की एफबी वॉल से.

पूरे मामले को समझने के लिए इस खबर को भी पढ़ें…

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आशीष जोशी लोकसभा टीवी के नए सीईओ / एडिटर , देखें किस पत्रकार को कितना नंबर मिला

लोकसभा टीवी के एडिटर इन चीफ और सीईओ पद के लिए हुए इंटरव्यू का नतीजा आ गया. आशीष जोशी टापर साबित हुए. उन्हें नया सीईओ / एडिटर इन चीफ घोषित कर दिया गया है. आशीष को सीमा गुप्ता की जगह लेना है जिनका कार्यकाल 23 नवंबर 2016 को खत्म हो गया. आशीष जोशी का मीडिया करियर कुल 17 साल का है. वे आजतक,  जी न्यूज, डीडी न्यूज, आईबीएन7 आदि में रहे हैं.

आशीष जोशी

फिलहाल वो भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जर्नलिज्म में डायरेक्टर प्रोडक्शन के पद पर कार्यरत थे. आशीष मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के रहने वाले हैं. वे आईआईएमसी 1999 बैच के छात्र रहे हैं. लोकसभा टीवी के सीईओ / एडिटर इन चीफ के इंटरव्यू में अपर्णा वैश, आकाश सोनी और जीके सुरेश बाबू गैर-हाजिर रहे. शेष लोगों को कुल सौ नंबर में से कितना नंबर मिला, देखिए…

आशीष जोशी 77.33

राहुल महाजन 68.67

राजीव मिश्रा 68.33

दीप चंद्रा 65.33

पुनीत कुमार 64.67

विभाकर 61.67

कुमार राजेश 61.33

अनुरंजन झा 57.33

रवि पाराशर 57

अनंत विजय 55

कुमार संजॉय सिंह 53

कुमार राकेश 53

सीमा गुप्ता 50.33

ओमकारेश्वर पांडेय 48

अर्चना दत्त मुखोपाध्याय 45.67

सर्जना शर्मा 41.67

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लोकसभा टीवी पर अब आरएसएस को महान बताने का कार्यक्रम चलता रहता है…

Dilip Khan : लोकसभा टीवी मुझे साल भर पहले तक अच्छा लगता था। मैं दूसरों को सजेस्ट करता था कि देखा करो। लेकिन इन दिनों ये चैनल बीजेपी भी नहीं बल्कि संघ का मुखपत्र बन गया है। जब-तब RSS को इस पर महान बताने का कार्यक्रम चलता रहता है।

अभी देखिए चैनल समझा रहा है कि संघ देश के लिए कितना ज़रूरी है!

राज्यसभा टीवी में कार्यरत दिलीप खान की एफबी वॉल से.

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लोकसभा टीवी को एडिटर इन चीफ और सीईओ की जरूरत, 28 नवंबर तक कर सकते हैं अप्लाई

सीमा गुप्ता लोकसभा टीवी की एडिटर इन चीफ और सीईओ हुआ करती थीं. उनका कांट्रैक्ट खत्म हो रहा है. दो साल के लिए कोई नया सीईओ और एडिटर इन चीफ लोकसभा टीवी को चाहिए. इसके लिए विज्ञापन निकाला गया है. आखिरी डेट 28 नवंबर 2016 है. राहुल देव, अभिलाष खांडेकर समेत कई बड़े नाम इन दिनों चर्चा में हैं जो नए एडिटर इन चीफ और सीईओ पद के लिए दावेदार हैं. पिछली बार सीमा गुप्ता ने कई वरिष्ठों को दरकिनार कर सीईओ / एडिटर इन चीफ का पद हथियाया था. तब भड़ास ने पहले ही बता दिया था कि जबरदस्त सिफारिश के कारण सीमा गुप्ता ही सेलेक्ट की जाएंगी.

नीचे वो विज्ञापन है जिसमें सीईओ / एडिटर इन चीफ पद के आवेदकों के लिए जरूरी बातें लिखी गई हैं…

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लोकसभा टीवी में संपादक पद पर चयनित श्याम किशोर के बारे में जानिए

लोकसभा टीवी के एडिटर पद के लिए चयनित श्याम किशोर सहाय भले ही टीवी पत्रकारिता का चर्चित चेहरा न रहे हों लेकिन पत्रकारिता में लगभग 18 वर्ष का अनुभव रखने वाले संजीदा, सौम्य और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े सृजनशील पत्रकार रहे हैं. स्वभाव से वो लो प्रोफाइल रहना पसंद करते हैं. उन्होंने 1993-96 में दिल्ली विवि से इतिहास में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. पढाई के दौरान जॉकिर हुसैन कॉलेज की हिन्दी पत्रिका के संपादक रहे और साहित्य अकादमी, दिल्ली ने पत्रिका को सम्मानित भी किया.

अपने दौर में दिल्ली विवि के बेस्ट डिबेटर रहे. उनके नाम डिबेट, डिक्लामेशन औऱ एक्सटेंपोर प्रतियोगिताओं के तीन दर्जन से अधिक पुरस्कार हैं. दिल्ली विवि से ही उन्होंने अनुवाद में पीजी डिप्लोमा किया और विवि की एनवॉयरनमेंटल स्टडीज के भी सदस्य रहे. उन्होंने 1996-98 में दिल्ली विवि के दक्षिणी परिसर से पत्रकारिता में पीजी डिल्पोमा प्राप्त किया. मृणाल पांडे और आलोक मेहता के समय हिन्दुस्तान अखबार दिल्ली से इटर्नशिप की औऱ व्यवहारिक पत्रिकारिता से पहला परिचय प्राप्त किया.

दिल्ली के बाद उनका कैरियर कई शहरों से होकर गुजरा. पटना में दैनिक जागरण से अखबार की शुरूआत के समय जुड़े. संपादक शैलेन्द्र दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार सुकांत नागार्जुन, सुभाष पांडे, रजनीश उपाध्याय आदि के साथ काम करने का अवसर मिला. पटना से उन्होंने लखनऊ का रुख किया और हिन्दुस्तान अखबार की रिलांचिंग के समय जुड़े. लखनऊ में संपादक सुनील दुबे, वरिष्ठ पत्रकार उदय कुमार, हेमंत शर्मा, नवीन जोशी, नागेन्द्र कुमार के साथ काम करने का अवसर मिला. ईटीवी के हिन्दी चैनलों की लांचिंग के समय वो हैदराबाद चले गए. ईटीवी बिहार-झारखंड चैनल के आउटपुट की जिम्मेदारी निभाने के बाद ईटीवी नेटवर्क के करंट अफेयर्स डेस्क (सुर्खियों से आगे) के कॉर्डिनेटर रहे. ईटीवी के दौरान वरिष्ठ पत्रकार गुंजन सिन्हा, एन के सिंह, संजय सिंह, राजेश रैना, हिमांशु शेखऱ, अभिजित दास जैसे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला.

ईटीवी के बाद उन्होंने सहारा टीवी का रूख किया. सहारा समय उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड, सहारा समय बिहार-झारखंड, औऱ सहारा समय चैनल में इनपुट और आउटपुट में अलग-अलग जिम्मेदारियों पर रहे. एसआईटीवी के सेंट्रलाइज्ड असाइनमेंट डेस्क के कार्डिनेटर के रूप में काम करने का अवसर भी मिला. इस दौरान बीबीसी से आए संजीव श्रीवास्तव, स्पोर्टस जर्नलिज्म के प्रतिष्ठित नाम संजय बनर्जी, संजय बरागटा, प्रबुद्धराज, राव विरेंद्र सिंह, उदयन शंकर, मनोज मलयानिल के साथ काम करने का मौका मिला. बिहार में आयी भयानक बाढ की त्रासदी के समय उन्होंने लोगों की सहायता के लिए कई कार्यक्रम बनाए जिसकी बड़ी सराहना हुई. छठ पर्व को राष्ट्रीय टीवी पर पहली बार लाने का श्रेय़ भी उन्हें जाता है. 

सामाजिक सांस्कृतिक रूप से सक्रिय श्याम किशोर कई गतिविधियों से जुड़े हैं. आर्ट ऑफ लिविंग और गायत्री शक्ति पीठ जैसी संस्थाओं से उनका गहरा जुड़ाव हैं. राष्ट्रकवि दिनकर की जन्मस्थली बिहार के सिमरिया से शुरू हुए द्वादश कुंभ पुनर्जागरण अभियान में स्वामी चिदात्मन जी महाराज के साथ सक्रिय हैं. वेदों के ऊपर शोध करने वाली संस्था वेद विज्ञान अनुसंधान संस्थान, सिमरिया के संरक्षक हैं. पोएट्री फिल्म फेस्टिवल से चर्चा में आयी साहित्यिक संस्था साधो से जुड़े हैं. साहित्यिक क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाली संस्था राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति न्यास के सदस्य है.

विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्याल से जुड़े हैं और योग-ध्यान के प्रशिक्षक भी हैं. संस्कृत पर उनकी अच्छी पकड़ है और संस्कृत के लिए काम करने वाली संस्था संस्कृत भारती से भी जुड़े हैं. ज्योतिष विज्ञान में उनकी खास रूचि है और इंडियन काऊंसिल ऑफ एस्ट्रॉलाजिकल साइंसेज, नोएडा के आजीवन सदस्य भी है. राजस्थान में मुस्लिम युवाओं के रोजगार, उनमें उद्यमिता विकास, व्यक्तित्व विकास और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काम करने वाली संस्था सूफी मुस्लिम यूथ असोसिएशन (एसयूएमवाईए) में सलाहकार की भूमिका में है. संस्था के अध्यक्ष श्रीमान् अनीक़ अहमद उस्मानी का मीडिया से संबंधित विषयों में सतत सहयोग करते हैं. दुनिया के अलग-अलग देशों में प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान पर हो रहे कार्य पर शोध-अध्ययन में लगे हैं.

वर्तमान में आईबीएन7 न्यूज चैनल में सह प्रबंध संपादक सुमित अवस्थी, वरिष्ठ टीवी पत्रकार मृत्युंजय के झा, अमिताभ सिन्हा, प्रतीक त्रिवेदी, आकाश सोनी और हरीश बर्णवाल आदि के साथ अस्टिटेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं.

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भाई-भतीजावाद की भेंट चढ़ रहा लोकसभा टीवी

कहने को तो लोकसभा टीवी एक संसदीय चैनल है। लेकिन सच्चाई यही है इसकी शुरुआत से आज तक इस संसदीय चैनल में भाई भतीजावाद का ही बोल-बाला रहा है। जिसके चलते अपनी स्थापना के दस साल के बाद भी भारी भरकम बजट वाला ये चैनल अपनी पहचान को तरस रहा है। इस चैनल की कहीं कोई चर्चा नहीं है, कार्यक्रमों के लिए ये नहीं जाना जाता। जबकि महज़ चार साल पहले जन्मा राज्यसभा टीवी थोड़े समय में ही अपनी एक अलग पहचान बना चुका है।

जिन उद्देश्यों के लिए ये चैनल अस्तित्व में आया था उनकी कहीं से भी पूर्ति करता नहीं दिख रहा। केबल टीवी की तर्ज़ पर चल रहे इस संसदीय चैनल के कार्यक्रम बेहद नीरस और स्तरीय ना होने की वजह से दर्शकों में लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाए हैं। पत्रकारिता में क्या नहीं करना चाहिए? छात्रों को इसकी जानकारी इस चैनल को देखने से हासिल हो सकती है।

महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर समझ की कमी और संपादकीय मंडल में योग्य पत्रकारों का अभाव इसके कार्यक्रमों में स्पष्ट दिखाई देता है। अक्सर बॉलीवुड की फ़िल्में दिखाने वाला ये संसदीय चैनल देश के ज्वलंत मुद्दों पर कोई भी लोकप्रिय कार्यक्रम नहीं बना पाया है। शायद यही कारण है कि संसदीय कार्यवाही को छोड़ दें तो ये चैनल टीआरपी के दसवें पायदान को भी कभी नहीं छू पाया है।

इसकी एक बड़ी वजह लोकसभा टीवी की भर्ती प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार भी रहा है। सूत्रों की मानें तो यहां जो भी बड़ा अधिकारी बनकर आया है उसने सबसे पहले पिछले, दरवाज़े से अपने लोगों की भर्ती की है। पिछले साल जुलाई माह में हुए वाक इन इंटरव्यू पर भी सवाल उठे थे। जहाँ सैकड़ों योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर अयोग्य उम्मीदवारों को चुन लिया गया था।

इंटरव्यू पैनल में शामिल कुछ सदस्यों की योग्यता, अनुभव और निष्पक्षता पर भी सवाल उठे थे।इस चयन में नियमों को दरकिनार कर भाई-भतीजावाद के आधार पर भर्ती की बात सामने आई थी। कुछ पत्रकारों ने आरटीआई भी दाखिल की थी। आरोप लगा था कि वाक इन इंटरव्यू के नाम पर भर्ती का ड्रामा किया गया था। इंटरव्यू फिक्स होने और भर्ती की लिस्ट पहले ही तैयार किये जाने की भी शिकायतें सामने आई थीं। मामला लोकसभा अध्यक्ष तक भी पहुंचा था, जिसे बाद में दबा दिया गया।

अंदरुनी सूत्रों की मानें तो भर्ती प्रक्रिया के पारदर्शी ना होने की वजह से बड़ी संख्या में ऊंची पहुँच वाले अयोग्य लोगों की भर्तियाँ हो गयी हैं। बड़े पद और भारी भरकम तनख़्वाह वाले मंत्रियों और अफसरों के ये रिश्तेदार टीवी में काम की साधारण समझ भी ना होने की वजह से स्तरीय कार्यक्रम नहीं दे पा रहे हैं। इसलिए लोकसभा टीवी पर पैनल डिस्कशन के कार्यक्रमों की भरमार रहती है।

सूत्रों की मानें तो लोकसभा टीवी के लगातार गिरते स्तर के कारण लोकसभा अध्यक्ष भी इससे खुश नहीं हैं। संसदीय मामलों की समझ ना होने की वजह से यहाँ संसदीय कार्यवाही पर कार्यक्रम बनाने का जोखिम कोई लेना नहीं चाहता। यही कारण है कि अमूमन संसदीय कार्यवाही पर भी बहस के कार्यक्रम ही प्रसारित होते हैं। संसद के समक्ष महत्वपूर्ण मुद्दे यहाँ तक कि इस साल बजट पर भी कोई स्तरीय कार्यक्रम लोकसभा टीवी नहीं दे पाया। रिपोर्टिंग, डॉक्यूमेंट्री, न्यूज़ और प्रोग्रामिंग की कमज़ोर समझ के चलते ज़िम्मेदार अधिकारी यहाँ सिर्फ डिबेट और नीरस इंटरव्यू को ही कार्यक्रम मानते हैं। जो अब अयोग्यता को छिपाने का एक आसान समाधान बन गया है।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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लोकसभा टीवी में वैकेंसी, करें अप्लाई

लोकसभा टीवी में कंसल्टेंट, चीफ प्रोड्यूसर पद के लिए वैकेंसी निकली है. चैनल को योग्य चीफ प्रोड्यूसर यानि कंट्रोलर आफ प्रोग्राम्स की तलाश है. मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन / इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्नातक की डिग्री या डिप्लोमा रखने वाले वो लोग अप्लाई करें जिन्हें 15 सालों का टीवी या फिल्म इंडस्ट्री का अनुभव हो. साथ ही कम से कम 5 साल का अनुभव प्रोग्राम प्रोडक्शन या डॉक्यूमेंट्री प्रोडक्शन में हो या फिर स्टूडियो ऑपरेशन व लाइव कवरेज के संचालक रहे हों.

चयनित आवेदक को तीन साल के लिए कॉन्ट्रेक्ट पर रखा जाएगा. परफॉरमेंस पर कॉन्ट्रेक्ट बढ़ाया या खत्म किया जा सकता है. आवेदक की उम्र 56 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए. बायोडाटा के साथ पासपोर्ट साइज फोटो और अन्य डिटेल भी भेजें. सभी सर्टिफिकेट की कॉपीज गैजेटड ऑफिसर से अटेस्टेड कराकर ही भेजें. आवेदन की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2015 है यानि बस कुछ दिन ही बचे हैं. बायोडाटा भेजने का पता ये है :

THE JOINT RECRUITMENT CELL,
ROOM NO. 521, PARLIAMENT HOUSE ANNEXE,
NEW DELHI- 110001

ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें>

http://164.100.47.132/JRCell/Module/Notice/5-2015.pdf

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लोकसभा टीवी में फिक्स थीं सारी नियुक्तियां! RTI से खुलासा, हड़कंप

हमेशा विवादों में रहने वाली लोक सभा tv ने एक बार फिर नया कारनामा कर दिखाया है। ताजा मामला लोकसभा tv मेँ नियुक्तियों को लेकर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों का है। इस मामले मेँ लोकसभा tv की सीईओ सीमा गुप्ता और वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव का नाम भी सामने आ रहा है। आरोप है कि एक अनाधिकृत इंटरव्यू पैनल बनाकर लोकसभा टीवी में भर्ती में भ्रष्टाचार का ये खेल रचा गया। जिस इंटरव्यू के आधार पर सीमा गुप्ता ने लोगों को नियुक्त किया है, वो इंटरव्यू ही नियमों के खिलाफ था। बताया जा रहा है कि एंकर, प्रोड्यूसर, मार्केटिंग और तकनीकी विभागों में मोटी तनख्वाह पर जिन लोगों को नियुक्त किया गया है, उनकी नियुक्ति पहले से फिक्स थी। इसके लिए सारी तैयारियां पहले ही कर ली गयी थीं।

चयनित होने वाले उम्मीदवार पहले से ही अपने आकाओं के संपर्क में थे। लगातार फोन पर उनकी बातें हो रही थीं, जिसके कॉल रिकॉर्ड्स भी मौजूद हैं। नियुक्त होने वाले उम्मीदवार राहुल देव और सीमा गुप्ता को पहले से जानते थे। इसलिए उन्हें नियुक्त करने के लिए ही विज्ञापन जारी करने, निरस्त करने, साक्षात्कार की तिथियों में बदलाव से लेकर इंटरव्यू करवाने तक का पूरा खेल इस तरह रचा गया, जिससे अन्य उम्मीदवारों को ज़्यादा से ज़्यादा परेशानी हो और भयानक गर्मी में थक हार कर अधिकांश उम्मीदवार घर लौट जाएं। पूरा ड्रामा कुछ इसतरह रचा गया… सबसे पहले वॉक इन के लिए विज्ञापन जारी किया गया, फिर उम्मीदवारों के पहुँचने पर उसे निरस्त कर दिया गया। कुछ दिन बाद फिर वाक् इन इंटरव्यू का विज्ञापन जारी किया गया और रातों रात अचानक इंटरव्यू के एक दिन पहले साक्षात्कार की तिथि में बदलाव कर दिया गया।

इसके बाद दूसरे दिन से उम्मीदवारों को घंटों डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन के नाम पर प्रताड़ित और बेइज़्ज़त किया गया, जबकि फिक्सिंग के ज़रिये आए उम्मीदवारों को इस प्रक्रिया से पूरी छूट मिलना, एक ही दिन में सैकड़ों उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेना, किसी तरह की परीक्षा का आयोजन ना किया जाना, इंटरव्यू को ही चयन का आधार बना लेना, नियमों को ताक पर रखकर सीमा गुप्ता और राहुल देव (जो लोकसभा टीवी से सम्बद्ध नहीं हैं) का इंटरव्यू पैनल में खुद ही बैठ जाना, ये सारी बातें साफ़ करती हैं कि लोकसभा टीवी ने बीते दिनों साक्षात्कार के नाम पर ड्रामा रचा और बड़ी सफाई के साथ उन लोगों को नियुक्तिपत्र दे दिए जिनका चयन पहले से ही फिक्स था।

आरटीआई से मिली जानकारी से ये साफ़ है कि बीते दिनों लोकसभा टीवी मेँ हुई नियुक्तियों मेँ भारी भ्रष्टाचार किया गया था। आरोप है कि भर्ती के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया। जिसके बाद से लोकसभा टीवी के दफ्तर में आरटीआई आने का सिलसिला जारी है। आरटीआई में जो जानकारियां माँगी जा रही हैं, उनसे लोकसभा टीवी के आला अधिकारी सकते में हैं। ज़्यादातर आरटीआई को टालने और बहाना बनाने की कोशिश हो रही है। सीईओ सीमा ग्रुप की नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि खुद सीमा गुप्ता ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाई है। अपने अनुभव और योग्यता को प्रमाणित करने वाले कोई दस्तावेज़ उन्होंने जमा नहीं कराए हैं। गौरतलब है कि लोकसभा टीवी की सीईओ बनने से पहले सीमा गुप्ता का नाम भारतीय मीडिया में अनजान था। ना ही कोई उल्लेखनीय उपलब्धि, पुस्तक लेखन, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार उनके नाम दर्ज हुआ था। इसके पहले भारतीय टीवी पत्रकारिता में किसी योगदान या कार्यक्रम में भी सीमा गुप्ता का ज़िक्र नहीं सुना गया। बावजूद इसके किस जुगाड़ तकनीक के सहारे वो लोकसभा टीवी की सीईओ बनी, ये सवाल भी पूछा जा रहा है।

लोकसभा टीवी में इस ताज़ा भर्ती घोटाले के बाद पत्रकारों में भारी आक्रोश है। पत्रकार ये सवाल कर रहे हैं कि जब सब कुछ पहले से ही फिक्स था तो साक्षात्कार आयोजित करने का ड्रामा क्यों किया गया? उम्मीदवारों ने इस मामले पर rti के ज़रिए जो जानकारी हासिल की है उससे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैँ। बताया जाता है कि जिन लोगों को एंकरिंग के लिए चुना गया है उनमें से अधिकांश के पास किसी भी राष्ट्रीय स्तर के समाचार चैनल मेँ न्यूज़ या समसामयिक विषयों पर एंकरिंग का कोई अनुभव तक नहीँ है। जबकि तमाम बड़े राष्ट्रीय चैनलों के योग्य और अनुभवी पत्रकारों को सीमा गुप्ता और राहुल देव के इस इंटरव्यू पैनल ने सिरे से खारिज कर दिया। चयनित लोगों के पास ना तो अपने अनुभव के दावे को प्रमाणित करने के दस्तावेज़ हैं, ना ही सैलरी का कोई सर्टिफिकेट, फिर भी इन्हें मुंह माँगी तनख्वाह पर नियुक्त कर लिया गया है। इतना ही नौकरी के लिए जारी विज्ञापन में भी ना तो पदों का उललेख किया गया ना ही वेतन के बारे में कोई जानकारी दी गयी। पूरी तरह नियमों के खिलाफ ये विज्ञापन इस तरह जारी किया गया कि पहले से फिक्स अपने लोगों को मोटी तनख्वाह दिलाने में किसी तरह की कोई दिक्कत सामने ना आए।

इसी तरह जिन लोगों को प्रोड्यूसर के रूप मेँ चयनित किया गया है उनके बारे में भी आरटीआई में चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं… उनमें से अधिकाँश बी या सी ग्रेड चैनलों से निकाले गए बेरोज़गार लोग हैं। फिक्सिंग के ज़रिये चयनित उम्मीदवारों की योग्यता और अनुभव के प्रमाणपत्र भी लोकसभा टीवी ने लेना उचित नहीं समझा, जबकि अधिकाँश लोग आरटीआई लगने के बाद फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने की जुगाड़ में लगे हैं।  इतना ही नहीं मार्केटिंग और तकनीकी विभाग के लिए चुने गए उम्मीदवारों के मामले मेँ भी कुछ ऐसा ही घोटाला किया गया है। अनुभवी और योग्य उम्मीदवार को दरकिनार करते हुए तमाम ऐसे नाकाबिल उम्मीदवार को अपॉइंटमेंट लेटर दे दिए गए हैँ जिनकी लिस्ट पहले ही बन चुकी थी। लेकिन आक्रोशित पत्रकार इस बार इस मामले को भूलने के मूड में नहीं हैं। क्योंकि  दूरदर्शन, राज्यसभा टीवी और अब लोकसभा टीवी.. मीडिया में लगातार सामने आ रहे भर्ती घोटाले कईं होनहार पत्रकारों के भविष्य को बर्बाद कर रहे हैं। जहां एक तरफ योग्य पत्रकार नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, वहीं जुगाड़ तकनीक के सहारे फिक्सिंग कर फर्जी लोग उनका हक़ छीन रहे हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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लोकसभा टीवी में फिर चला जुगाड़ का जादू

: राज्यसभा टीवी और लोकसभा टीवी यानि चोर चोर मौसेरे भाई : 18 जुलाई 2015 की सुबह महादेव रोड स्थित लोकसभा टीवी कार्यालय पर ठीक आठ बजे से भीड़ जुटने लगी थी… हालांकि वो ईद का दिन था.. लेकिन देखते ही देखते तक़रीबन 150 लोग वहां इंटरव्यू देने आ पहुंचे… गार्ड ने बताया कि एंकर पद के इंटरव्यू एक दिन पहले यानी 17 जुलाई को लिये जा चुके हैं…. मौजूद कैंडिडेट्स को सांप सूंघ गया.. लोकसभा टीवी की वेबसाईट के अनुसार एंकर और कापी एडिटर पद के लिये इंटरव्यू 18 तारीख को मुक़र्रर किया गया था… देखें लिंक: https://goo.gl/y4eFDL

लेकिन पता नहीं कैसे और क्यों इन्ही पदों के लिये साक्षात्कार आनन फानन में 17 तारीख को ही निपटा दिया गया….. इसी असमंजस की स्थिति में सभी लोग भड़क उठे… आख़िरकार लोकसभा टीवी के एक्सीक्यूटिव डायरेक्टर सुमित सिंह (जिनकी ख़ुद की की नियुक्ति पर TOI सवाल उठा चुका है खबर देखें http://goo.gl/6xufbc ) को फोन लगाया गया… काफी देर तक सिंह साहब और केंडिडेट्स के बीच कहा सुनी हुई… कैंडिडेट्स के आक्रोश और मीडिया में ख़बर छपने के डर से उन्होंने इंटरव्यू 22 जुलाई को मुक़र्रर किया… राज्यसभा टीवी में हुई नियुक्तियों से भी बुरा हाल यहां था…वहां कम से कम इंटरव्यू देने तो बुलाया था…यहां तो एक दिन पहले ही चहेतों के वारे न्यारे किये जा चुके थे….

बहरहाल 22 जुलाई को बचे हुए 80 से 90 कैडिडेट्स वहां पहुंचे और शुरू हुआ मूर्ख बनाने का खेल… बेचारे कैंडिडेट्स का सरकारी बाबुओं के समक्ष डाक्यूमेंट्स वेरीफाई करवाते करवाते ही दम निकल गया…. फिर दिन भर की सिर फुटव्वल के बाद जाकर इंटरव्यू प्रक्रिया समाप्त हुई…. सितंबर के आखिरी सप्ताह में लोकसभा टीवी के साक्षात्कारों का परिणाम घोषित किया और 29 लोगों को चुना गया जिनमें 4 एंकर्स का भी चयन हुआ….और यही सबसे ज्यादा चौंकाने वाला परिणाम भी था…कुछ एक बड़े नामों के अलावा बाकियों का नाम भी किसी ने नहीं सुना था…… इन चारों में एक महानुभाव ताई के ही लोकसभा क्षेत्र के हैं और लोकल केबल टीवी चैनल में रिपोर्टर पद पर कार्यरत हैं….

बताया जाता है कि इन महाशय को पत्रकारिता में आए ही जुम्मा जुम्मा दो साल हुए हैं जबकि लोकसभा टीवी में पांच साल की योग्यता अनिवार्य थी…. ये बात और है कि इऩ्हें शहर में केवल गरबा कवर करने लायक समझा जाता था…. लेकिन संघ के बैकग्राउंड के कारण इन्हें तरजीह दी गई है… ये भी कहा जाता है कि ये श्रीमान लगातार ताई को साधने में लगे रहे…. चुनावी जीत से लेकर लोकसभा अध्यक्ष बनने तक ये मान्यवर ताई के पीछे लगे रहे…. और पर्दे के पीछे ऐसा खेल खेला कि बड़े बड़ों की बोलती बंद हो गई…

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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लोकसभा टीवी : सबसे कम सेलरी प्रोडक्शन स्टाफ की, सबसे ज्यादा काम इन्हीं से करवाया जाता है..

सरकारी चैनल यूँ भी अपने काम के रवैये को लेकर बदनाम है और उनमे होने वाली भर्तियां कैसे होती हैं यह आप सभी जानते हैं.. लोकसभा टीवी को लगभग 10 साल हो गए है लेकिन सीमित संसाधनों में लोगों ने अच्छा काम किया है.. मगर भर्ती प्रक्रिया हमेशा सवालों के घेरे में रही है और कार्य प्रणाली भगवन भरोसे.. बहुत से लोग हैं जो वहां पिछले 9-10 साल से प्रोडक्शन असिस्टेंट या असिस्टेंट प्रोड्यूसर का काम कर रहे हैं.. तजुर्बा अच्छा खासा है लेकिन नियमों के अभाव में शोषण के शिकार हैं..

तनख्वाह नाम मात्र 30-35 हज़ार रुपए और कोई सुविधा भी नहीं.. इसी वर्ष एक महिला साउंड रिकार्डिस्ट की बीमारी से मौत हुई और उसके इलाज़ या उसके बाद उसकी इकलौती 7 साल की बेटी के निर्वहन तक के लिए एक पाई नहीं दी गई..  हालाँकि सहकर्मियों ने दो लाख की नाम मात्र राशि इकट्ठा की.. खुदा न खास्ता ये कर्मचारी या इनके परिवार का कोई किसी भी गम्भीर बीमारी से त्रस्त हो जाये तो उसका भगवान ही मालिक है..

पिछले सीईओ के कार्यकाल में इन्हीं मांगों के लिए कर्मचारियों ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष के घर तक पैदल मार्च भी किया.. सोचिये प्रतिवर्ष इनका कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया जाता है.. ऐसे में ये क्या प्लानिंग करेंगे अपने परिवार के भविष्य की.. ये ऐसा चैनल है जहां कैमरामैन भी 50 हज़ार ले रहा है… टेक्निकल भी इसके आसपास… मगर काम करने वाले कुछ काबिल एंकर 45 हज़ार में हैं जबकि 2-4 यहाँ भी 80 हज़ार पा रहे है.. सबसे कम सैलरी प्रोडक्शन स्टाफ की है पूरे चैनल में.. जबकि सबसे ज्यादा काम उन्हीं से करवाया जाता है..

आपको अचरज होगा पिचले 7 साल में दो बार वैकेंसी निकली है मगर भीतरी स्टाफ को कोई प्रमोशान नहीं मिला… खासकर प्रोडक्शन अस्सिटेंट को.. लोकसभा टीवी प्राइवेट चैनल के तर्ज़ पर काम करने की कोशिश कर रहा है मगर वहां के hr पालिसी पर चुप्पी साधे हुए है.. खबर है कि पिछले बार वैकेंसी में भी नेताओ की सिफारिशों का ध्यान रखा गया और एक आध तो दोस्त का बेटे या स्टाफ की बेटी जैसे नियुक्त किये गए..

इस बार भी प्रोड्यूसर में 8 में से 4 मिश्रा चयनित हुए हैं और दो तीन मध्य प्रदेश से… ये लोग RTI के ज़माने में भी भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं.. इन नियुक्तिओं पर rti के द्वारा सूक्ष्म पड़ताल करने की जरूरत है ताकि जुगाड़ू लालों पर लगाम लग सके क्योंकि साक्षात्कार सिर्फ दिखावा है क्योंकि इसमें पारदर्शिता नहीं है.. दूरदर्शन में भी पुराने लोगों को नोटिस दिया जा रहा है या कॉन्ट्रैक्ट कम बढ़ रहा है, आखिर क्यों? ये सरकारी संस्थान संघ या सरकार की रेवड़ियां नहीं हैं जो चहेतों और नाकाबिल लोगों को बाँट दी जाए..

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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देखिए सुमित्रा महाजन जी क्या हो रहा है लोकसभा टीवी में…

अगर मैं आपसे ये कहूं कि सुमित्रा महाजन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के सामने सदन में मंत्री जी से सवाल पूछ रही हैं तो शायद आप मुझे पागल या दिवालिया बता दें…. लेकिन ये मैं नहीं कह रहा हूं बल्कि ऐसा दिख रहा है लोक सभा टीवी की आधिकारिक वेबसाईट पर.. वेबसाईट पर डाले गए ‘हाउस हाइलाइट’ के कार्यक्रम में साफ-साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से सुमित्रा महाजन लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार के सामने तबके मंत्री अजित सिंह से जवाब मांग रहीं है. यह लिंक जरुर देखे…

http://loksabhatv.nic.in/House.aspx?catid=12

अंधेर नगरी चौपट राजा… टका सेर भाजी टका सेर खाजा, जैसी कहावत लोकसभा टीवी के अधिकारियो पर बिल्कुल सटीक बैठती है… यूपीए कार्यकाल को खत्म हुए साल भर से अधिक का समय हो गया है लेकिन खुलेआम वेबसाइट पर ऐसी चीजें बनी रहना अंधेरगर्दी को बखूबी दर्शाता है…. मजेदार बात है कि वही सुमित्रा महाजन आज लोकसभा अध्यक्ष हैं लेकिन उनका ही चैनल उन्हें अध्यक्ष मानने को तैयार नहीं….. इतना ही नहीं जो एंकर आज लोकसभा टीवी का हिस्सा नहीं हैं उन्हीं के कार्यक्रम आज वेबसाइट पर मौजूद हैं…

लोकसभा टीवी के पुराने एंकर चारु को चैनल छोड़े महीनो हो गए हैं लेकिन उनका ही कार्यक्रम मौजूद है वो भी इतना पुराना के देख के शर्म आ जाए और आप देख कर सोचने को मजबूर हो जाए के ये सब सिर्फ यहीं हो सकता है और कहीं नहीं…. और तो और आंचल में आकाश जैसे कार्यक्रम बंद हो चुके है लेकिन वेबसाइट पर झमाझम चल रहे हैं… इसके अलावा दो ऐसी डाक्यूमेंट्री जो रेलवे और बाबू जगजीवन राम पर आधारित हैं वो लगता है उसे देख ऐसा लगता है जैसे रेलवे को चमकाने और जगजीवन राम जी को याद करने की जिम्मेदारी लोकसभा टीवी ने ले ली है… इन डाक्यूमेंट्रीज़ को देखकर लगता है कि ये भी सालो पुरानी होगी….

पता नहीं ये सब सुमित्रा महाजन की जानकारी में है कि नहीं अगर नही तो प्लीज़ कोई उन्हें बताएं…और दिखाए के कैसे कैसे कामचोरों और खबरों की समझ नहीं रखने वालों को उन्होंने पनाह दी है.. जो अन्धो की तरह अपनी नौकरी कर रहे हैं… आधुनिकता के इस जमाने में लोकसभा टीवी और उनके अधिकारी खुद को आइने में देखे और अगर हो सके तो चुल्लू भर पानी में…….. अरे कुछ तो शर्म करके इसे अपडेट कर अपनी नौकरी के साथ न्याय कर लें मेहरबानी होगी..

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Lok Sabha TV को किसने बना दिया ‘जोक सभा’ टीवी?

लोकसभा टीवी अब पूरी तरह से ‘जोकसभा’ टीवी का रूप ले चुका है। ये चैनल अब काम के लिए कम और विवादों के लिए ज्यादा जाना जाता है। चाहे लोकसभा टीवी के पत्रकारों का शिकायती पत्र लोकसभा के महासचिव तक पहुँचने का मामला हो, या फिर पूर्व राष्ट्रपति कलाम के असामयिक निधन पर लोकसभा टीवी के सोये रहने का मामला हो। इन दिनों सोशल मीडिया और वेब मीडिया पर आलोचकों की टीआरपी में ये चैनल नंबर वन बना हुआ है।

लोकसभा टीवी को सोशल मीडिया ने ‘जोक सभा’ टीवी का दिलचस्प नाम दिया है। लोगों की हैरानी इस बात पर है कि देश के ज्वलंत मुद्दों पर क्यों लोकसभा टीवी कभी कोई कार्यक्रम नहीं बनाता है? चैनल पर पूरे वक्त सिर्फ पैनल डिस्कशन ही चलता है। इतना पैनल डिस्कशन किसी चैनल पर नहीं देखा जाता है। सामान्य तौर पर रात 8 और 9 बजे, चैनलों पर पैनल डिस्कशन के प्रोग्राम होते हैं, लेकिन लोकसभा टीवी पर आप दिन में कभी भी इस तरह के  बेमतलब बहस के कार्यक्रम देख सकते हैं।

जबकि, गम्भीर मुद्दे जैसे किसानों की आत्महत्या,  सीमा पार से आतंकवाद, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, ग्रामीण पिछड़ापन जैसे अनगिनत विषयों पर बिरले ही कोई स्तरीय कार्यक्रम, रिपोर्ट या डॉक्यूमेंट्री प्रसारित होती है। सवाल ये है कि क्या सिर्फ दिन भर स्टूडियो डिबेट और पैनल डिस्कशन दिखाने के लिए ही लोकसभा टीवी को लॉन्च किया गया था?

लोकसभा टीवी के टिकर पर सिर्फ एक लाईन पूरे दिन चलती है, टिकर पर संसदीय मुद्दे, संसद में क्या हुआ, देश की बड़ी ख़बरें, संसद में पेश किये जाने वाले विधेयक इत्यादि की जानकारी चलाना भी लोकसभा टीवी के पत्रकारों को गंवारा नहीं। उन्हें तो बस मेकअप करके दिन भर स्टूडियो में अपना चेहरा चमकाने में ही आनंद आता है। शायद यही कारण है कि अपना चेहरा चमकाकर यहाँ के पत्रकारों ने कईं पुरस्कार तो जीत लिए, लेकिन अपनी लॉन्चिंग के 9 साल बाद भी लोकसभा टीवी कंटेंट के मामले में कोई उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल नहीं कर पाया है। तो क्या लोकसभा टीवी पुरस्कार हासिल करने और महज़ निजी हित साधने का जरिया बन चुका है?

गौर करने वाली बात ये है कि लोकसभा टीवी कोई फ़िल्मी चैनल ना होकर एक संसदीय चैनल है, बावजूद इसके आप इसपर बॉलीवुड की कईं मसाला फिल्मों का भी आनंद ले सकते हैं। लेकिन संसदीय मुद्दों पर डॉक्यूमेंट्री और स्तरीय प्रोग्रामों का यहाँ टोटा ही रहता है।

इस संसदीय चैनल पर सरकारी ख़ज़ाने से हर महीने करोड़ों रूपये खर्च होते हैं, लेकिन उनकी सार्थकता सवालों के घेरे में है। संसदीय चैनल होने के नाते इस चैनल से देश को काफी उम्मीदें थीं। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि ये चैनल देश की आम जनता की आवाज़ बनेगा और सरकार और जनता के बीच पुल का काम करेगा। लेकिन  ये चैनल फिलहाल तो कुछ ज्ञानी पत्रकारों के पीआर का जरिया बन गया है, जहाँ वो सांसदों और मेहमानों को बैठाकर घंटों ‘मंथन’ करते हैं। जिस तरह के कार्यक्रम इस चैनल पर प्रसारित होते हैं, उसे देखकर तो जनता की उम्मीदों और गाढ़ी कमाई पर पानी फिरता नज़र आता है।

एक टीवी पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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लोकसभा टीवी में काम करने वाली महिला पत्रकार ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पत्र लिखा तो बर्खास्त कर दी गई

नीचे वो पत्र दिया जा रहा है जिसे लोकसभा के सेक्रेट्री जनरल को लिखने के कारण लोकसभा टीवी की प्रस्तोता यानि एंकर अर्चना शर्मा चैनल से बर्खास्त कर दी गई. बर्खास्त किया चैनल की सीईओ सीमा गुप्ता ने जो पहले से ही अर्चना को टारगेट की हुईं थी. सीईओ की दबंगई और अनैतिकता की हर कोई निंदा कर रहा है. सीईओ सीमा गुप्ता आए दिन न्यूज रूम में मीडियाकर्मियों को धमकाती रहती हैं. पढ़िए वो पत्र जिसे लिखने के कारण एंकर अर्चना को नौकरी से हाथ धोना पड़ा. ज्ञात हो कि लोकसभा टीवी में सीईओ के उपर सेक्रेट्री जनरल होता है और उसके उपर लोकसभा अध्यक्ष. अर्चना ने ये पत्र सीईओ से निराश होने के बाद सेक्रेट्री जनरल को लिखा था.

विषय- लोकसभा टीवी की महिला कर्मचारियों के रात में काम करने के दौरान सुरक्षा के सन्दर्भ में

दिनाँक- 30 /6 /15

महोदय,

लोकसभा टीवी में वर्तमान में लगभग 80 कर्मचारी हैं जिसमें लगभग 26 महिला कर्मचारी हैं. चैनल में कामकाज का समय सुबह 7 बजे से लेकर रात 10:00 बजे तक हैं. ऐसे में देर रात में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा है. मौजूदा समय में हालात ये है कि कई बार महिला कर्मचारियों को रात में 10:00 बजे की ड्रॉपिंग में अकेले घर जाना पड़ता है. कई बार ऐसी स्थति भी आई है जिसमें ड्रापिंग के दौरान पुरुष सहयोगी रात में होते हैं लेकिन कई बार ऐसा हुआ है कि किसी कारणवश उन्हें जल्दी निकलना हो तो वो ड्रॉपिंग का इंतज़ार नहीं करते जिसकी वजह से कई बार महिला कर्मचारी को रात में अकेले घर जाना पड़ता है. सामान्य तौर पर चैनल में काम-काज प्रातः 7 :00 बजे से लेक रात 9 :00 बजे तक है लेकिन संसद सत्र के वक़्त ये देर रात 10 :00 बजे तक हो जाता है. यानि हमारा लास्ट लाइव शो 9 से 10:00 तक चलता है. ऐसे में वो 10:30 बजे तक ही रात में ड्रॉपिंग लेते हैं.
 
सोचिये अगर कोई भी महिलाकर्मी रात को 10:30 बजे के बाद दफ्तर से निकलती हैं तो लगभग 11:00 बजे से पहले वो अपने घर नही पहुंचेगी. अगर किसी का घर संसद भवन से थोड़ा भी दूर हो जैसे रोहणी तो क्या हालात होंगे.  ये चैनल देश की सबसे सुरक्षित इमारत के अंदर है और उसके बाद भी चैनल की महिला कर्मी खुद को बेहद असुरक्षित महसूस करती हैं. दिल्ली के माहौल से हम सभी अवगत हैं. हमें डर लगता है कि कहीं किसी रोज़ हमारे साथ कोई हादसा न हो जाए. इस असहजता की जानकारी कई बार चैनल प्रमुख को दी गई है लेकिन अभी तक कोई भी सार्थक कदम संस्थान की तरफ से नहीं उठाया गया है. 

हाल ही में चैनल की तरफ से महिलाओं की एक कमेटी बनाई गई जिसकी एक बार ही सभा हुई. उसके बाद भी महिला कर्मियों की ड्यूटी अभी भी रात की पाली में लगाईं जा रही है और हम सभी अपनी नौकरी खोने के डर से रात की पाली में काम कर रहे हैं. फिलहाल लोकसभा टीवी में काम करने वाली महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कोई लिखित नीति नहीं है. इसके साथ ही संस्थान  (लोक सभा टेलीविज़न) भी महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं ले रहा है. तो क्या हम सभी नियम बनाने के लिए किसी हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं, तब कोई नियम बनाया जाए क्योंकि वर्तमान समय में तो महिलाकर्मी की ड्यूटी रात्रि पाली में बिना किसी सुरक्षा इंतज़ाम के सिर्फ भगवान भरोसे लगाई जा रही है. आपसे अनुरोध है कि जल्द से जल्द कोई नियम बनाएं जिससे हम सभी सुरक्षा भरे माहौल में निडर होकर काम कर सकें.  

इसके साथ ही मुझे डर है कि अपनी परेशानी आपके सम्मुख रखने की कीमत मुझे अपनी नौकरी खोकर चुकानी पड़ सकती है क्योंकि एक लम्बे समय से चैनल प्रमुख का व्यवहार मेरे प्रति बेहद नकारात्मक हैं क्योकि वो नहीं चाहती हैं कि मैं अपना ये संवाद आपके सम्मुख रखूं. मैं आपके संज्ञान में लाना चाहती हूँ कि मैं पिछले 9 सालों से इस चैनल में बतौर एंकर कार्यरत हूँ. मुझे कई बार मेरे कार्य के लिए पत्रकारिता के प्रतिष्ठित अवार्ड दिए गए हैं. मुझे 2012 में रामनाथ गोयनका मिला है. इसके साथ ही 4 बार लाडली मीडिया अवार्ड. लेकिन उसके उपरान्त भी इस बार मेरा कार्यकाल सिर्फ 4 महीनों के लिए बढ़ाया गया. मेरे पूछने के बाद भी मुझे नहीं बताया गया कि मेरा कार्यकाल 4 महीने क्यों बढ़ाया गया. फिलहाल मेरा कार्यकाल सिर्फ 27 जुलाई 2015 तक ही है. साथ ही ही 29 जून 2015 को मेरा 10% सेलरी इनक्रीमेंट होना है. मुझे नहीं पता है उस सूची में मेरा नाम होगा या नहीं. फिलहाल मैं बेहद मानसिक पीड़ा में हूँ. कृपया मेरी मदद कीजिये.

अर्चना शर्मा
प्रस्तोता
लोकसभा टेलीविज़न
011- 23035286 संसद भवन 

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लोकसभा टीवी के इंप्लाइज को ही नहीं पता कि आज कोई टेस्ट है

लोकसभा टीवी के लिए आज ओपन स्किल टेस्ट था. लेकिन खुद लोकसभा के इंप्लाइज को ही नहीं मालूम था कि आज कोई टेस्ट है. यह टेस्ट अब कैंसल कर दिया गया है. बोला गया है कि अगले वीक यह टेस्ट होगा. वहीं कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि लोकसभा टीवी से जुड़े लोगों का कहना है कि स्किल टेस्ट और भर्ती से संबंधित विज्ञापन गलती से साइट पर आ गया था जिसे अब हटा लिया गया है. नई भर्ती के लिए जल्द ही विज्ञापन दिया जाएगा.

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राज्यसभा टीवी में नौकरी की ख्वाहिश रखने वाले बहुत लोगों को मायूस होना पड़ा…

नौकरी पाने की ख्वाहिश थी. राज्यसभा टीवी में काम करने की सपना था. इन्टरव्यू में खुद को साबित करने की चुनौती थी. हिन्दी और अंग्रेजी के लिए कुल जमा 4 पोस्ट थी. इंटरव्यू देने पहुंचा. कॉफी की चुस्कियों के बीच कुछ पुराने दोस्तों का भरत-मिलाप हुआ और इसके साथ मीडिया का वर्ग विभेद भी मिटता दिख रहा था. किसी चैनल के इनपुट एडिटर भी प्रोड्यूसर बनने के लिए सूट पहनकर आए थे. ऐसे में सीनियर प्रोड्यूसर के प्रोड्यूसर बनने पर सवाल उठाना गलत होगा.

कुल मिलाकर बात ये थी कि सबको मौका मिला था और सब एक बार किस्मत को आजमाना चाह रहे थे. कुछ ऐसे भी थे जो सीनियर प्रोड्यूसर और प्रोड्यूसर दोनों के वाक इन में शामिल हुए थे. शायद इस उम्मीद में कि कुछ भला हो जाए. वॉक इन की ये पूरी कवायद सवालों के घेरे में है. प्रोड्यूसर और सीनियर प्रोड्यूसर जैसी पोस्ट पर सिर्फ साक्षात्कार से नौकरी दिए जाने का ड्रामा किया गया. सवाल ये है कि क्यों इस चयन प्रक्रिया में कॉपी लिखवाने की जहमत नहीं उठाई गई. क्या राज्यसभा टीवी का पैनल सिर्फ साक्षात्कार के आधार पर ही कॉपी लिखने की क्षमता का भी पता कर सकता था.

दूसरा सवाल ये है कि जब पचास या साठ लोगों के ही इन्टरव्यू का इंतजाम था, तो क्यों लोगों को बुलाया, और जब बुला लिया गया तो उनका इन्टरव्यू क्यों नहीं लिया गया. हैरत की बात ये भी रही कि इन्टरव्यू देने आए मीडिया कर्मियों ने भी इस बात को लेकर कोई एतराज नहीं जताया. मीडिया कर्मियों के कवच में छिपा मजदूर शायद ये करने का साहस नहीं कर पाया होगा. वाक इन के नियत जगह के ठीक सामने डॉ. भीवराव आंबेडकर का प्रेरणा स्थल था. संविधान निर्माता का प्रेरणा स्थल. मीडिया के बेरोजगारों को देखकर कई भावनाएं आ जा रही थी. संविधान के जरिए सिस्टम बनाने वाले डॉ.भीवराव आंबेडकर की प्रेरणा भी काम नहीं आई.

वाक इन के दौरान अगर कुछ नहीं था, तो बस सिस्टम नहीं था. ये बात खुद सिद्ध हो गई कि सरकारी टीवी भी सरकारी होता है और सरकारी काम भी सरकारी काम की तरह होता रहेगा. शाम करीब पांच बजे लोगों की पहले टूट रही उम्मीदों को आखिरी झटका मिलता है. दिन भर से इंतजार कर रहे लोगों को बताया जाता है कि बाकी सभी लोगों को अब रुकने की जरुरत नहीं है. फार्म जमा करिए और निकल जाइये. कहा गया कि आने वाले वक्त में उनके आवेदन पर विचार होगा. बहुत नाइंसाफी हुई… राज्यसभा में नौकरी की ख्वाहिश रखने वाले बहुत सारे लोगों को मायूस होना पड़ा…. क्या आप भी उनमें से एक थे….

सुमीत ठाकुर
sumeetashok@gmail.com

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राज्यसभा टीवी में नौकरी की ख्वाहिश रखने वाले बहुत लोगों को मायूस होना पड़ा…

नौकरी पाने की ख्वाहिश थी. राज्यसभा टीवी में काम करने की सपना था. इन्टरव्यू में खुद को साबित करने की चुनौती थी. हिन्दी और अंग्रेजी के लिए कुल जमा 4 पोस्ट थी. इंटरव्यू देने पहुंचा. कॉफी की चुस्कियों के बीच कुछ पुराने दोस्तों का भरत-मिलाप हुआ और इसके साथ मीडिया का वर्ग विभेद भी मिटता दिख रहा था. किसी चैनल के इनपुट एडिटर भी प्रोड्यूसर बनने के लिए सूट पहनकर आए थे. ऐसे में सीनियर प्रोड्यूसर के प्रोड्यूसर बनने पर सवाल उठाना गलत होगा.

कुल मिलाकर बात ये थी कि सबको मौका मिला था और सब एक बार किस्मत को आजमाना चाह रहे थे. कुछ ऐसे भी थे जो सीनियर प्रोड्यूसर और प्रोड्यूसर दोनों के वाक इन में शामिल हुए थे. शायद इस उम्मीद में कि कुछ भला हो जाए. वॉक इन की ये पूरी कवायद सवालों के घेरे में है. प्रोड्यूसर और सीनियर प्रोड्यूसर जैसी पोस्ट पर सिर्फ साक्षात्कार से नौकरी दिए जाने का ड्रामा किया गया. सवाल ये है कि क्यों इस चयन प्रक्रिया में कॉपी लिखवाने की जहमत नहीं उठाई गई. क्या राज्यसभा टीवी का पैनल सिर्फ साक्षात्कार के आधार पर ही कॉपी लिखने की क्षमता का भी पता कर सकता था.

दूसरा सवाल ये है कि जब पचास या साठ लोगों के ही इन्टरव्यू का इंतजाम था, तो क्यों लोगों को बुलाया, और जब बुला लिया गया तो उनका इन्टरव्यू क्यों नहीं लिया गया. हैरत की बात ये भी रही कि इन्टरव्यू देने आए मीडिया कर्मियों ने भी इस बात को लेकर कोई एतराज नहीं जताया. मीडिया कर्मियों के कवच में छिपा मजदूर शायद ये करने का साहस नहीं कर पाया होगा. वाक इन के नियत जगह के ठीक सामने डॉ. भीवराव आंबेडकर का प्रेरणा स्थल था. संविधान निर्माता का प्रेरणा स्थल. मीडिया के बेरोजगारों को देखकर कई भावनाएं आ जा रही थी. संविधान के जरिए सिस्टम बनाने वाले डॉ.भीवराव आंबेडकर की प्रेरणा भी काम नहीं आई.

वाक इन के दौरान अगर कुछ नहीं था, तो बस सिस्टम नहीं था. ये बात खुद सिद्ध हो गई कि सरकारी टीवी भी सरकारी होता है और सरकारी काम भी सरकारी काम की तरह होता रहेगा. शाम करीब पांच बजे लोगों की पहले टूट रही उम्मीदों को आखिरी झटका मिलता है. दिन भर से इंतजार कर रहे लोगों को बताया जाता है कि बाकी सभी लोगों को अब रुकने की जरुरत नहीं है. फार्म जमा करिए और निकल जाइये. कहा गया कि आने वाले वक्त में उनके आवेदन पर विचार होगा. बहुत नाइंसाफी हुई… राज्यसभा में नौकरी की ख्वाहिश रखने वाले बहुत सारे लोगों को मायूस होना पड़ा…. क्या आप भी उनमें से एक थे….

सुमीत ठाकुर
sumeetashok@gmail.com

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इंटरव्यू सिर्फ बहाना था, लोकसभा में पहले से काम कर रहे धीरज सिंह की नियुक्ति तय थी

अमर उजाला और स्टार न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके व कई वर्षों से मुंबई में रहकर अर्थकाम डाट काम का संचालन कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह 10 से 13 अक्टूबर तक दिल्ली में थे. वे लोकसभा टीवी के लिए निकली वैकेंसी के लिए इंटरव्यू देने आए थे. इस पद के लिए कई जेनुइन जर्नलिस्टों ने इंटरव्यू दिया लेकिन यह पद पहले से फिक्स था. अनिल सिंह ने इंटरव्यू के अनुभव और सवाल जवाब को अपने फेसबुक वॉल पर डाला है. वे लिखते हैं-

मेरा इंटरव्यू लोकसभा सचिवालय में कार्यरत अतिरिक्त सचिव के. विजयकृष्णन ने लिया. इन्होंने पक्की हिंदी में बात की. उनके साथ में दो चंगू-मंगू भी थे जो इंटरव्यू के दौरान बस मुंडी हिलाते रहे. मुझे पता तो था कि इसमें लोकसभा में पहले से काम कर रहे धीरज सिंह को ही लिया जाना है. लेकिन जिस तरह मोदी की नीतियों के विरोधी अरविंद सुब्रह्मणियन को सरकार का प्रधान आर्थिक सलाहकार बनाया गया, उससे मुझे लगा कि शायद अपनी भी लह जाए. दो बातों का खास अफसोस है. एक यह कि मुझे इस इंटरव्यू में 100 में से मात्र 38 अंक दिए गए. दूसरे दिल्ली आने-जाने में मेरे करीब 5500 रुपए स्वाहा हो गए. इसने मन को थोड़े समय के लिए तोड़ा और ऊपर से कंगाली में परमामेंट आटा गीला कर दिया. जनधन से चलनेवाली सरकार हमारे ही धन से चलनेवाले संस्थान में अपने मर्जी के लोगों को ठेलने के ऐसा छल हम जैसे मासूम/मूर्ख लोगों के साथ करती है जिनको भ्रम होता है कि वे कुछ नायाब कर सकते हैं. लेकिन क्या कीजिएगा, कुछ करने की मासूम सदिच्छाएं ऐसी ही क्रूरता का शिकार होने के लिए अभिशप्त हैं तब तक, जब तक देश में सचमुच का लोकतंत्र नहीं आता. अपने साथ हुए छल का बयान कभी अलग से करूंगा… और हां, मैं गलती से पत्रकार बन गया. अंदर से अच्छी चीजों के लिए लड़नेवाला सामाजिक सिपाही पहले भी था और आज भी हूं. पत्रकारों को तब भी गाली देता था, अब भी देता हूं क्योंकि उनमें से 99% अंदर से दल्ले होते हैं.

अनिल सिंह ने इंटरव्यू में हुए सवाल-जवाब को फेसबुक वॉल पर डालकर अपने एफबी फ्रेंड्स से पूछा है कि उन्हें इसके लिए कितने नंबर मिलने चाहिए थे. अनिल ने वॉल पर जो लिखा है, उसे नीचे दे रहे हैं….

इस इंटरव्यू को कितने नंबर!

Anil Singh : मित्रों! आप सभी से जानना चाहता हूं कि नीचे दिए गए सवाल-जवाब के आधार पर आप इंटरव्यू देनेवाले को, यानी मुझे 100 में से कितने नंबर देंगे? कृपया एकदम निष्पक्षता से अंक दें क्योंकि इसके आधार पर मुझे अपना मूल्यांकन करना है। धन्यवाद..

लोकसभा टीवी में आप क्यों आना चाहते हैं?
– हमारी संसद नीचे तक नहीं पहुंची है। लोकतंत्र के बहुत सारे initiatives निचले स्तर पर हो रहे हैं राज्यों से लेकर शहरों-कस्बों और गांवों तक। गुजरात, महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश और केरल तक। बहुत सारी चिनगारियां जगह-जगह बिखरी हैं। लोकसभा टीवी में रहकर उन्हें शोकेस किया जा सकता है, तमाम प्रोग्राम बनाए जा सकते हैं…

लेकिन लोकसभा टीवी क्यों, किसी दूसरे चैनल में क्यों नहीं?
– दूसरे चैनलों के बिजनेस मॉडल में basic inherent fault है। ये चैनल पूरी तरह advertisement based हैं। जब तक ये चैनल subscription based नहीं होंगे, तब तक कंटेंट पर एक खास किस्म का दबाव बना रहेगा। वहीं tax payers money पर चलनेवाले चैनल (लोकसभा टीवी) पर ऐसा कोई दबाव नहीं होता…

लेकिन टाइम जैसी मैगज़ीन भी विज्ञापन पर चलती है…
– आपकी बात एकदम सही है। लेकिन मेरा कहना है कि subscription + advertisement revenue का एक बैलेंस, एक मिक्स होगा तभी कंटेंट पर दबाव हल्का हो सकता है।

स्टार न्यूज़ के बाद आप कहां थे?
– भास्कर समूह के बिजनेस अखबार का मुंबई ब्यरो चीफ था।

उसके बाद आपने अपना वेंचर अर्थकाम शुरू किया। कितने लोगों की टीम है उसमें?
– पहले काफी लोग जुड़ने लगे थे। आईआईएम अहमदाबाद व इकनॉमिक टाइम्स की तरफ से पावर ऑफ आइडियाज़ में चुने जाने के बाद कुछ निवेशकों ने संपर्क किया था। लेकिन उनका निवेश finally नहीं मिला तो बाहर से लिखनेवालों को कुछ दे नहीं सका तो वे निष्क्रिय हो गए। अभी तो बस तीन लोग हैं। मैं, मेरी पत्नी जो mainly technical aspect देखती हैं। और केयर रेटिंग्स के एक executive हैं जिनसे हम research input लेते हैं।

केयर रेटिंग्स क्या states की भी रेटिंग करती है?
– नहीं वो मुख्यतया कंपनियों की ही रेटिंग करती है, खासकर लिस्टेड कंपनियों की। हां, small scale sector पर भी उसका खास फोकस है।

क्या आपको लगता है कि आप लोकसभा टीवी में काम संभाल पाएंगे?
– क्यों नहीं, अमर उजाला कारोबार में मैंने 40-50 लोगों की टीम को lead किया था…

नहीं, मैं वो नहीं कह रहा। आपका परिवार मुंबई में है तो आप यहां दिल्ली आकर कैसे काम करेंगे?
– इसमें कोई दिक्कत नहीं है। अब सभी independent स्थिति में हैं। पत्नी design पर अपनी वेबसाइट चलाती हैं। बड़ी बेटी का इंजीनियरिंग final year है, छोटी लॉ के five years course के third year में है। फिर (थोड़ा हंसते हुए) कुछ समय के लिए, दो-तीन साल के लिए दूरी बढ़ती है तो आपसी जुड़ाव renew और पहले से ज्यादा strong हो जाता है।

ठीक है। हम आपको बताते हैं… Thank you!
– Thanks, thanks a lot!

(सारे सवाल हिंदी में पूछे गए तो जवाब भी हिंदी में ही दिए गए)


उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ प्रमुख कमेंट इस प्रकार हैं…

Pankaj Gandhi Jaiswal : 95 aur 5 isliye kata ki aapne chingari word use kiya tha Jise sarkari channel nahi pasand karegi

Sudarshan Juyal : मैं ज़रा पुरानी शिक्षा प्रणाली से गुजरा हुआ हूं, जहां ७५% मतलब कमाल… इसलिऐ ७६% दे रहा हूं…

Vimal Verma : इस साक्षात्कार में आपकी ईमानदारी पूरी तरह से झलकती है पर आपने अपने जर्मनी वाले काम पर ज़ोर नहीं दिया, उसके मैं २० नंबर काट रहा हूँ. !! इसलिए ८० नंबर दे रहा हूँ !

Pramod Singh : नंबर टंबर गया चूल्‍हे में, असल चक्‍कर है काम होता है या नहीं..

Sanjay Tiwari : आपने यह क्यों नहीं कहा कि टाइम मैगजीन डेढ़ सौ रूपये की मिलती है. इसीलिए उन्हें आपका मॉडल समझ में नहीं आया.

Jyotin Kumar : विमल जी की बात सही है.… आपको अपने जर्मनी असाइनमेंट का जिक्र करना चाहिए था. वैसे सभी सवालों के जवाब बहुत अच्छे दिए हैं विशेषकर अर्थकाम पर और आखिर मैं फैमिली बॉन्डिंग पर. मेरे हिसाब से कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। वैसे इंटरव्यू लिया किसने था?

Amar Pandey : आपको आपकी बेवक़ूफ़ी के लिए १० अंक मिलेंगे क्योंकि आप मुंबई से इंटरव्यू देने आ गए. आप कैसे बुद्धू पतरकार हैं? क्या आपको पता नहीं था कि यहाँ इंटरव्यू पर कोई भर्ती नहीं होनी थी? हद है, इस ज़माने में आप जैसे अहमक पत्रकार हैं!

Jagat Mishra : Sir..number dene waala mai to kuch nahi hu aapke saamne..vo add agency waala idea aaj bhi surakshit hai apna.. Aapke sikhaaye logo ki fauj khadi hai aaj.. Bas aap haami bhariye.. Thakathito ko dher karne ke liye hum hi bahut hai sir..

Vivek Rastogi : हम तो सुने हैं कि इस टीवी में केवल भा.प्र.से. वालों की पत्नियों को ही लिया जाता है, वैसे अगर मुझे लेना होता तो मैं 80 नंबर देकर ले लेता, आप बहुत सीध सपाट बोलते हैं, 20 नंबर उसके काट दिये

SK Mukherjee : अपने शुभचिंतकों का धन्यवाद करिये. जिन्होंने अखबार में छोटी सी लाइन के ज़रिये, अपनी वेबसाइट के ज़रिये, अर्थकाम का प्रचार कर तमाम लोगों को अर्थकाम के बारे में बताया. नंबर का तो पता नहीं,लेकिन आने वाले 5-10 साल अर्थकाम के पास सिर्फ काम ही काम होगा. मेरी तरफ से आपके शुभचिंतकों को प्रणाम. ऐसे शुभचिंतक कम लोगों को ही नसिब होते है. अखबार में छ्पी उस छोटी सी लाइन के ज़रिये ही, मै भी अर्थकाम के बारे में पहली बार जान सका था.

Harshvardhan Tripathi : मैं आपका मूल्यांकन नहीं कर सकता क्योंकि, मैं आपके मामले में निष्पक्ष नहीं हो सकता। इससे बेहतर बात किसी ने की हो तो मुझे पता नहीं। सचमुच समझ में नहीं आ रहा कि इस देश में हिंदी के किसी प्रकल्प को क्यों निवेशक नहीं मिलते। वरना आप मुझे और मुझ जैसे ढेर सारे लोगों को नौकरी दे सकते थे। बस और क्या कहूं…

Badrinath Tarate : मेरे नंबर आपके व्यक्तित्व लिये है बाकि जो नंबर काटे है क्यू की आप लोगो पर ज्यादा विश्वास रखते है। आप को ज्यादा विश्वास नहीं रखना चाहिए क्यू की राज्यसभा चॅनेल ने अभी कुछ दिनों पहले ऐसी महिला पत्रकार को एंकर बनाया है जिसको एक निजी न्यूज़ चॅनेल ने निकाल बाहर किया जिसने ६५ साल के आदमी (शायद वो कोई राज्य का मुखमंत्रीभी था ) से अफेयर किया और २ बच्चों को छोड़कर उसके साथ उड़नछू हो गयी और हैरानी की बात ये है ! की वो अभी राष्ट्रीय चॅनेल पैर नैतिकता के पाठ पड़ा रही है। और कुछ बावले लोग उस से खुश खबरी की उमीद लगा बैठे है।

Raghuveer Richaariya : Sir, interview dena band kariye, interview lena shuru kariye. Fir karenge LSTV mai aapka interview lene wale ka mulyankan

Anil Kumar Singh अच्छा लगा आप ने भी इन्टरब्यू दिया जब कि पत्रकार केवल इन्टरब्यू लेते है.जॅहा तक नम्बर देने की बात है आप स्वय अपने आप को नम्बर दे अपना आकल कर के, उसमे दस नम्बर मेरा जोड़ दे.

Kamal Sharma आपका इंटरव्‍यू तो अच्‍छा है। जवाब भी अच्‍छे हैं। लेकिन वहां अंधा बांटे रेवडी, फिर फिर अपने को ही देय वाले हालात हैं। बस आपका चयन हो जाए इसकी शुभकामना।


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लोकसभा टीवी का हाल : 100 नंबर का इंटरव्यू पांच मिनट में, केवल तीन सवाल पूछे

लोकसभा टीवी के लिए डॉयरेक्टर प्रोग्रामिंग की पोस्ट के लिए मैंने आवेदन दिया था। अक्तूबर महीने में 11 तारीख को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। मेरा रोल नंबर 8 था लेकिन 8 तक के रोल नंबर में से केवल चार लोग ही आए थे। इंटरव्यू बोर्ड में तीन लोग थे जिनमें से दो सरकारी अफसर और एक पत्रकार थे जिन्हें मैंने नहीं देखा कभी और उनका नाम भी पता नहीं है। पत्रकारिता जगत में कोई जाना-पहचाना नाम भी नहीं है उनका। तीन में से दो सरकारी अफसर चुप रहे। एक व्यक्ति ने ही तीन सवाल पूछे….

पहला सवाल- आप जी न्यूज़ में क्या करती थीं, ज़ी न्यूज़ क्यों छोड़ दिया?

दूसरा सवाल-  आप कहां रहती हैं?

तीसरा सवाल- आपको लोकसभा टीवी कैसा लगता है?

अच्छा थैंक्यू ……

मात्र इतना सा संवाद। किस आधार पर नंबर दिए, कैसे दिए, समझ नहीं आता। जिन लोगों को सबसे ज्यादा नंबर दिए गए वो तो पहले से ही लोक सभा टीवी में हैं। जिनकी इस पद पर नियुक्ति हुई वो भी पहले से ही लोक सभा टीवी में हैं। फिर इतना झमेला क्यों। जब लोकसभा टीवी में पहले से ही इतने निपुण, बुद्धिमान और क्रिएटिव लोग मौजूद  थे फिर विज्ञापन देने की क्या ज़रूरत थी।

सर्जना शर्मा

पत्रकार

दिल्ली

सर्जना शर्मा का प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया मे लंबा अनुभव है. टाइम्स ग्रुप, संडे मेल, बीबीसी, जी न्यूज समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुकी हैं. जी न्यूज में करीब पंद्रह साल तक इन्होंने काम किया.

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तो क्या लोकसभा चैनल के संपादक का पद फिक्स था?

एक बात सच है कि सफेदपोश पॉवर के सामने मौजूदा समय में अनुभव, हुनर व ज्ञान की कीमत बहुत कम आंकी जा रही है। लोकसभा सभा चैनल के संपादक का पद पिछले कुछ माह से रिक्त है उसको भरने के लिए सरकार द्वारा आवेदन मांगे गए। मीडिया के कई धुरंधरों ने इसके लिए आवेदन भी किया। लेकिन उसके बाद अंदरखाने जो खेल खेला गया, वह किसी तमाशे से कम नहीं था।

इंटरव्यू लेने वाले तीन सदस्यों का पैनल गठित किया जिसमें तीनों को मीडिया की एबीसीडी का ठीक से ज्ञान नहीं था। पैनम में फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना, आईबी के एक नौकरशाह और लोकसभा अध्यक्षा का एक करीबी सख्स मौजूद थे। सूत्रों की माने तो लोकसभा संपादक का पद पहले से ही फिक्स था। इंटरव्यू लेना सिर्फ कागजी कार्रवाई करना भर था। इंटरव्यू देने गए 40 मीडिया के धुरंधरों में से कई वरिष्ठों को मैं करीब से जानता हुूुं। ज्ञानेंद्र नाथ बरतरिया जी व मुकेश जी के साथ मुझे काम करने का स्वभाग भी प्राप्त हुआ है इसलिए मैं उनकी उर्जा को हमेशा महसूस करता हूं।

बरतरिया जो को 100 में से 39 व मुकेश जी को 35 नंबर दिए गए। जिसे नियुक्त किया गया है उनका नाम सीमा गुप्ता है। सीमा गुप्ता के पिता संघी हैं जिनका उन्हें फायदा मिला है। सीमा जी को सबसे ज्यादा 66 मिले हैं। उपरोक्त वरिष्ठों से सीमा जी का अनुभव काफी कम बताया जाता है। कुमार संजॉय सिंह भी गए थे साक्षात्कार देने उनके हिस्से में 33 नंबर आए। चर्चा यह भी थी कि अगर सीमा गुप्ता को संपादक नहीं बनाया जाता तो नवीन कुमार उर्फ नवीन गुप्ता को बनाया जाता। नवीन जी भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं और कई चैनलों में काम कर चुके हैं। जब रिजल्ट आया तो सभी आवेदकों का यही मानना था कि पद पहले से ही फिक्स था तो यह नाटक क्यों किया गया।

रमेश ठाकुर

विश्लेषक एवं युवा पत्रकार

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भड़ास की खबर सच हुई, सीमा गुप्ता बन गईं लोकसभा टीवी की सीईओ और एडिटर इन चीफ (देखें किस पत्रकार को कितना नंबर मिला)

भड़ास ने बहुत पहले बता दिया था कि पीएमओ की तरफ से अघोषित आदेश सीमा गुप्ता को लोकसभा टीवी का सीईओ और एडिटर इन चीफ बनाने का है. वही हुआ भी. इसके लिए इंटरव्यू बोर्ड में ऐसे लोगों को रखा गया जिनका टीवी का कोई अनुभव नहीं था. खासकर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने अपने खासमखास अभिलाष खांडेकर को चयन बोर्ड का काम निपटाने के लिए तैयार कर रखा था. ढेर सारे वरिष्ठ लोगों में अनजाने से नाम सीमा गुप्ता को सीईओ और एडिटर इन चीफ चुना गया. पारदर्शिता के नाम पर जीत कर आई मोदी सरकार की इस करनी से लोगों को कांग्रेस के दिनों की याद आ गई.

लोग कहने लगे हैं कि सब कुछ तो पहले ही जैसा है. वही भेदभाव, वही परिचय-जुगाड़, वही भ्रष्टाचार. बताया जाता है कि सीमा गुप्ता के पिता संघ से काफी गहरे जुड़े हुए हैं. इसी कारण सीमा गुप्ता की दावेदारी को ओके किया गया. कुछ लोगों का कहना है कि सीमा गुप्ता ने एक जमाने में जी न्यूज में काम किया था. लोकसभा टीवी के लिए हुए इंटरव्यू के फाइनल रिजल्ट को आज घोषित कर दिया गया है और इसमें सीमा गुप्ता के नंबर वन पर रहने की बात बताई गई है. सीमा गुप्ता के आने के बाद लोकसभा टीवी में संघ और भाजपा से जुड़े पत्रकारों की भर्ती का काम तेज होने की संभावना है. फिलहाल आप भी देखिए कि सीमा गुप्ता को कितने नंबर मिले और बाकी पत्रकारों को कितने कितने नंबर मिले…

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लोकसभा चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ पद के लिए इंटरव्यू लेने वाले पैनल में किसी का बैकग्राउंड टीवी का नहीं!

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लोकसभा चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ पद के लिए इंटरव्यू लेने वाले पैनल में किसी का बैकग्राउंड टीवी का नहीं!

अजीब समय है. जो लोग इंटरव्यू लेने के लिए बैठे मिले, उनके पास टीवी का कोई ज्ञान नहीं है. पर वे एक टीवी चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ की तलाश में दर्जनों लोगों का इंटरव्यू लेते रहे. जी हां. पिछले दिनों लोकसभा टीवी के नए सीईओ और एडिटर इन चीफ पद के लिए जो इंटरव्यू बोर्ड बैठा उसमें प्रिंट मीडिया में लंबे समय से कार्यरत अभिलाष खांडेकर (जो इंदौर की सांसद और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के काफी करीबी माने जाते हैं) और भाजपा सांसद व फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना भी शामिल थे. जो तीसरा शख्स था वह नौकरशाह था और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़ा हुआ था.

विनोद खन्ना ने फिल्मों में बतौर एक्टर अभिनय किया है और उसके बाद राजनीति की पारी शुरू की. पर इन तीन लोगों ने मीडिया से जुड़े दर्जनों वरिष्ठ पत्रकारों का इंटरव्यू ले डाला. सूत्रों ने बताया का इन तीनों का टीवी का बैकग्राउंड न होने के कारण ये लोग इंटरव्यू में सिर्फ कामचलाऊ सवाल ही पूछते रहे, जैसे कि आपने कहां कहां काम किया है, इस समय आप क्या कर रहे हैं आदि-इत्यादि. इंटरव्यू देने वाले ज्यादातर लोग निराश थे क्योंकि उन्हें इंटरव्यू बोर्ड देखकर ही लग गया है कि ये सब खानापूर्ति के लिए किया जा रहा है. नियुक्ति तो उसे ही मिलेगी जिसे सत्ता के आलाकमान ओके करेंगे. चर्चा है कि जी न्यूज में काम कर चुके नवीन कुमार उर्फ नवीन जिंदल इन दिनों आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी से सोर्स लगाकर लोकसभा टीवी का सीईओ बनने के लिए प्रयासरत हैं. बताया जा रहा है कि नवीन कुमार या सीमा गुप्ता में से किसी एक के नाम पर मुहर लग सकती है.

लोकसभा चैनल के एडिटर इन चीफ कम सीईओ पद के लिए किस-किस ने किया है अप्लाई, पढ़ें पूरी लिस्ट

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लोकसभा चैनल के एडिटर इन चीफ कम सीईओ पद के लिए किस-किस ने किया है अप्लाई, पढ़ें पूरी लिस्ट

लोकसभा चैनल के एडिटर इन चीफ कम सीईओ के लिए इन दिनों भर्ती प्रक्रिया चल रही है. कुल 44 पत्रकारों ने अप्लाई किया है. इन सभी का इंटरव्यू 30 सितंबर को होना है. सूत्रों का कहना है कि भले ही सब कुछ ट्रांसपैरेंट दिखाने की कोशिश की जा रही हो लेकिन एडिटर इन चीफ बनेगा वही जिसके नाम पर ‘उपर’ से यानि पीएमओ की तरफ से अघोषित इशारा कर दिया जाए. और, इशारा उसी किसी एक नाम की तरफ होगा जिसका टीवी में ठीकठाक बैकग्राउंड हो और फेमिली बैकग्राउंड संघ से जुड़ा रहा हो. चर्चा है कि सीमा गुप्ता के नाम पर लगभग सहमति बनती दिख रही है.

बताते चलें कि सीमा गुप्ता जी न्यूज में कार्यरत रही हैं. सीमा गुप्ता का नाम अभी तक गासिप के लेवल पर है, क्योंकि जो कुछ फाइनल होगा, वह 30 के बाद ही पता चल सकेगा. पर इतना तो तय है कि दर्जनों छोटे बड़े पत्रकार इस वक्त अपने अपने पोलिटिकल सोर्सेज के जरिए एडिटर इन चीफ बनने के लिए जोरदार लाबिंग कर रहे हैं. देखना है किसका सितारा चमकता है. फिलहाल पढ़िए उन नामों की पूरी लिस्ट, जिन-जिन ने लोकसभा टीवी के एडिटर इन चीफ पद के लिए अप्लाई किया है. बिलकुल नीचे वो पीडीएफ फाइल है जिसमें इन सभी के नाम, डेथ आफ बर्थ और दस्तावेज-अनुभव का स्टेटस दर्ज है. कई लोगों के नाम के आगे लिख दिया गया है कि उनके आवेदन खारिज करने योग्य है क्योंकि उन लोगों ने वो सब दस्तावेज नहीं दिया है जो एडिटर इन चीफ कम सीईओ बनने के लिए जरूरी है. तो, नीचे बिलकुल लास्ट में पीडीएफ फाइल पर क्लिक करना न भूलें.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


लोकसभा टीवी के एडिटर इन चीफ कम सीईओ पद के लिए आवेदन करने वाले पत्रकारों के नाम की सूची

  1. बलदेव भाई शर्मा
  2. मनोज दुबे
  3. राजेश कुमार
  4. शिवाजी सरकार
  5. सिद्धार्थ जराबी
  6. ज्ञानेंद्र नाथ बरतरिया
  7. विजय कुमार गुप्ता
  8. किशोर कुमार मालवीय
  9. प्रदीप शर्मा
  10. मुकेश शर्मा
  11. श्याम किशोर सहाय
  12. अनन्या बैनर्जी
  13. नवीन कुमार
  14. पंकज सक्सेना
  15. डा. अलका नंदा दास
  16. प्रदीप पंडित
  17. अमिताभ श्रीवास्तव
  18. हर्षद ठाकर
  19. मुकेश कुमार सिंह
  20. ज्योति सरुप
  21. दीपक जोशी
  22. सुनीत टंडन
  23. राकेश त्रिपाठी
  24. राहुल महाजन
  25. श्रीमती अर्चना दत्ता
  26. एलके भाग्यलक्ष्मी
  27. अलका सक्सेना
  28. आर श्रीवास्तव
  29. विनीता पांडेय
  30. विभाकर
  31. सीमा गुप्ता
  32. ओंकारेश्वर पांडेय
  33. विनीत कुमार दीक्षित
  34. कौशिक कपूर
  35. संजय द्विवेदी
  36. कुमार राकेश
  37. सुहास बोरकर
  38. पी. राजकुमार
  39. मयंक कुमार अग्रवाल
  40. रमेश खजांची
  41. विकास खन्ना
  42. अमित कुमार
  43. कुमार संजॉय सिंह
  44. मिस डेल्फी जेके दुनाई.

ओरीजनल पीडीएफ फाइल देखने के लिए क्लिक करें : LS TV Editor in Chief cum Chief Executive

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निजी न्यूज चैनल पैसे देकर ही दिखा सकेंगे लोकसभा टीवी का कंटेंट, पढ़िए पत्र और रेट लिस्ट

निजी न्यूज चैनलों पर अक्सर लोकसभा टीवी के फुटेज दिखाए जाते हैं. खासकर तब जब लोकसभा से जुड़ी कोई खबर हो. अब तक निजी न्यूज चैनल लोकसभा टीवी का नाम लोगो देकर कंटेंट फ्री में अपने यहां दिखा देते थे. लेकिन अब इसका पैसा लगेगा.

लोकसभा टेलीविजन की तरफ से एक नोटिस सभी न्यूज चैनलों को भेजकर कहा गया है कि अगर वे लोकसभा चैनल का कोई भी कंटेंट दिखाना चाहते हैं तो उन्हें पैसे देने होंगे. ये पैसा एक लाख रुपये से लेकर तीन लाख रुपये तक हो सकता है. पत्र की एक कापी भड़ास के पास भी है जिसे उपर प्रकाशित किया गया है. पत्र के साथ कार्यक्रम वाइज रेट लिस्ट भी निजी न्यूज चैनलों को भेजा गया है, जो इस प्रकार है…

आपको भी कुछ कहना-बताना है? हां… तो bhadas4media@gmail.com पर मेल करें.

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