सोशल नेटवर्किंग जिताएगी ‘मजीठिया’ की जंग

जुटाना होगा जनाधार : हम देख ही रहे हैं कि मजीठिया के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट, लेबर कमिश्नर ऑफिस, लेबर कोर्ट और सरकार का रवैया क्या है। कितने अफ़सोस की बात है कि जिन लोगों ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़कर रिकवरी चालान इश्यू कराने तक की जीत हासिल की,उनमें से भी अधिकतर लोगों के खाते में पैसा नहीं पहुंचा है। बीयूजे सहित देश की कई संस्थाएं- संगठन हर स्तर पर संघर्षरत हैं ही, पर हमें मीडिया हाउसेस के खिलाफ़ अपनी जंग जीतने के लिए एक नई रणनीति भी अपनानी होगी। इस रणनीति के जनक यशवंत सिंह हैं, जिन्होंने ‘भड़ास 4 मीडिया’ लांच कर पत्रकारों को पूरे पत्रकारिता-जगत से जोड़ा।

नवभारत कर्मियों ने दशहरा पर लिया प्रबंधन रूपी रावण के दहन का संकल्प (देखें वीडियो)

नवभारत कर्मचारियों ने महाराष्ट्र मीडिया इंप्लाइज यूनियन के बैनर तले शनिवार को विजयादशमी के अवसर पर सानपाड़ा पूर्व स्थित कार्यालय के सामने गेट मीटिंग की. मीटिंग में यूनियन से जुड़े करीब 70 कर्मचारियों के अलावा मिड-डे और डीएनए के कर्मचारी भी शामिल हुए. मीटिंग में नवभारत इकाई के अध्यक्ष केशव सिंह बिष्ट और सचिव अरुण गुप्ता ने अपनी बात रखी. मीटिंग के दौरान मजीठिया मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया. इस दौरान सभी कर्मचारियों ने नवभारत प्रबंधन को देने के लिए एक रिमाइंडर लेटर पर भी सिग्नेचर किया.

मजीठिया मामला : बीमार जागरणकर्मी के जम्मू तबादला के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 13 अक्टूबर को सुनवाई

पंकज कुमार वर्सेज यूनियन आफ इंडिया रिट याचिका की सुनवाई जस्टिस रंजन गोगई व जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच करेगी… बिहार के गया जिले से जम्मू तबादला किये गए दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज कुमार के रिट याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर की टेनटेटिव तिथि निर्धारित की है. जस्टिस रंजन गोगई व जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच सुनवाई करेगी. बिहार के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नागेन्द्र राय सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता पंकज कुमार की ओर से अदालत में पक्ष रखेंगे.

‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ अखबार ने अपने कर्मचारियों में मजीठिया वेज बोर्ड का का बकाया एरियर वितरित किया

देश के प्रमुख बिजनेस समाचार पत्र ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ से खबर आ रही है कि इस अखबार ने अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाया लाखों रुपये का एरियर दे दिया है। कर्मचारियों को पांच से आठ लाख रुपये तक उनका बकाया एरियर देकर वेतन वृद्धि का भी काम प्रबंधन ने किया है। हालांकि ये लाखों रुपये का एरियर सिर्फ उन्हीं मीडिया कर्मियों को दिया गया है जिनका वेतन कम था।

दूसरी बार भी मजीठिया सुनवाई में नहीं आया एचटी मैनेजमेंट

पटना : मजीठिया मामले में एक बार फिर हिन्दुस्तान टाइम्स मैनेजमेंट भाग खड़ा हुआ। कल 25 सितम्बर को श्रम विभाग के उप सचिव अमरेंद्र मिश्र के यहां सुनवाई आरंभ हुई। एचटी मैनेजमेंट की ओर से कोई नहीं आया। एक एडवोकेट आए मगर न तो उसके पास कंपनी की तरफ से दिया हुआ कोई वकालतनामा था और न ही कोई मांगी गई सूचना का कंपलायन्स। दूसरी बार लगातार प्रबंधन की अनुपस्थिति को उप सचिव अमरेंद्र मिश्र ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यहां कानून से बढ़कर कोई नहीं है।

मजीठिया मामला : प्रभात खबर के खिलाफ मिथलेश कुमार के रिव्यू पिटीशन पर सुप्रीमकोर्ट में 5 को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी खबर आ रही है। जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार बनाम प्रभात खबर मामले में दायर रिव्यू पिटीशन पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। यह सुनवाई विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश नवीन सिन्हा द्वारा की जाएगी।

मजीठिया मामला : प्रभात खबर प्रबंधन के झूठ की होगी जांच

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर प्रबंधन के खिलाफ माननीय सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार बनाम प्रभात खबर मामले में सुनवाई के दौरान माननीय उप-श्रमायुक्त पटना के न्यायालय में प्रभात खबर प्रबंधन के प्रतिनिधि के रूप में शामिल महाप्रबंधक (फाइनेंस) कौशल कुमार अग्रवाल ने कहा कि प्रभात खबर द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड द्वारा निर्धारित वेतनमान सहित सारी सुविधाएं अपने शत प्रतिशत कर्मचारियों को दिया जा रहा है। अखबार प्रबंधन के इस तर्क का प्रभात खबर के आरा ब्यूरोचीफ मिथलेश कुमार ने कड़ा विरोध किया और कहा कि प्रबंधन झूठ बोल रहा है। इस अखबार के एक भी कर्मी को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ नहीं मिला है। इस पर उप-श्रमायुक्त वीरेंद्र कुमार ने कहा कि कर्मचारियों के पेमेंट से संबंधित बैंक स्टेटमेंट अगली तिथि को लेकर उप श्रमायुक्त कार्यालय में जमा करें।

जांच करने पहुंचे श्रम अधीक्षक को दैनिक जागरण के मैनेजर ने गेट के अंदर ही नहीं घुसने दिया

कानून और नियम को ठेंगे पर रखता है दैनिक जागरण प्रबन्धक… गया के श्रम अधीक्षक के साथ दैनिक जागरण प्रबंधक ने की गुंडागर्दी… नहीं करने दिया प्रेस की जांच… पंकज कुमार दैनिक जागरण गया के वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं. इन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड मांगा तो प्रबंधन ने इन्हें परेशान करना शुरू कर दिया… पंकज ने बिहार के श्रम आयुक्त गोपाल मीणा के यहां एक आवेदन दिनांक 26.07.2017 को दिया था.. इसमें पंकज कुमार ने आरोप लगाया था कि गया सहित दैनिक जागरण बिहार के सभी चार प्रकाशन केंद्र में श्रम कानून के तहत मीडियाकर्मियों और गैर मीडियाकर्मियों को लाभ नहीं दिया जा रहा है. 90 प्रतिशत से अधिक पत्रकारों एवं गैर-पत्रकारों का प्राविडेंट फंड, स्वास्थ्य बीमा, सर्विस बुक समेत कई सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. साथ ही माननीय सर्वोच्च्य न्यायालय द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के तहत ग्रेड की घोषणा भी नहीं की गई है.

मजीठिया मामला : मुंबई हाईकोर्ट ने दिया डीबी कॉर्प लि. को कर्मचारियों का बकाया जमा करने का निर्देश

देश की आर्थिक राजधानी से एक बड़ी खबर आ रही है। मुंबई हाई कोर्ट ने ‘दैनिक भास्कर’ की प्रबंधन कंपनी “डी. बी. कॉर्प लि.” को निर्देश दिया है कि मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार, प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया इम्तियाज शेख की जो बकाया व एरियर्स की राशि बनी है, जिसके आधार पर श्रम विभाग ने वसूली प्रमाण-पत्र जारी किया है, उसका हिस्सा वह कोर्ट में जमा करे। इसी के साथ कोर्ट ने इस मामले में किसी भी तरह की सुनवाई पर दो सप्ताह की रोक लगा दी है।

मजीठिया की जंग : दस दिन में भेजें नेशनल यूनियन की सदस्यता सूची

मजीठिया वेजबोर्ड को पूरी तरह लागू करवाने की जंग को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बनाई जा रही नेशनल यूनियन के गठन के लिए सभी राज्यों के मजीठिया क्रांतिकारियों से निवेदन है कि वे अपने क्षेत्र या राज्य में मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई  लड़ रहे या इसमें शामिल होने के इच्छुक साथियों की सूची नीचे दिए जा रहे फारमेट के अनुसार तैयार करके ए-4 कागज पर प्रिंट करने के बाद सदस्यों के हस्ताक्षर करवाकर दस दिनों के भीतर भिजवाने की व्यवस्था करवाने का कष्ट करें। इसके अलावा इसी फारमेट के अनुसार बनाई गई सूची की साफ्ट कापी में सदस्य के संस्थान और उसके पद की अतिरिक्त जानकारी भी भर कर मेल करने का भी कष्ट कीजिएगा। नीचे दिया गए फारमेट को ही प्रिंट करने के बजाय इसी तरह की डॉक्युमेंट फाइल बनवा कर टाइम या एरियल फांट में १० या १२ साइज में यह जानकारी टाइप करवाएं।

मजीठिया मामले मे चल रही सुनवाई से भाग खड़ा हुआ एचटी मैनेजमेंट

एचटी ग्रुप मामले को लटकाने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा

पटना : हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप में मजीठिया वेज बोर्ड लागू नहीं किए जाने तथा ग्रेच्युटी के कैलकुलेशन मे भारी गड़बड़ी की शिकायत को लेकर पटना डीएलसी के यहां अलग-अलग दो चरणों मे सुनवाई हुई। 9 सितम्बर को सबसे पहले 11 बजे दिन से ग्रेच्यूटी को लेकर पहली सुनवाई थी मगर मैनेजमेंट भाग खड़ा हुआ। उसके अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने लिखित सूचना दी कि प्रबंधन ने इस मामले को लेकर पटना उच्च न्यायालय में एक रिट दायर की है, इसलिए इस पर सुनवाई रोकी जाय।

मजीठिया वेजबोर्ड के लिए राष्ट्रीय यूनियन की तैयारी शुरू

साथियों, मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने के लिए काफी दिनों से एक राष्ट्रीय स्तर की यूनियन बनाने को लेकर आवाज उठ रही थी। इसे देखते हुए दिल्ली/नोएडा के साथियों के सहयोग से इस सोच को अमलीजामा पहनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। पहले इस बात को लेकर मंथन हुआ कि क्या यूनियन के गठन के लिए पहले सभी साथियों की बैठक बुलाई जाए और फिर पंजीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाए। फिर काफी सोच विचार के बाद तय किया गया है कि त्योहारी सीजन होने के कारण सभी का एकत्रित हो पाना संभव नहीं है। लिहाजा दिल्ली के नजदीक के साथियों की मदद से पहले यूनियन का गठन कर लिया जाए और फिर किसी दिन सभी की सुविधा अनुसार एक महासभा बुलाकर शक्ति प्रदर्शन किया जाए।

मजीठिया मामला : डीबी कॉर्प के 5 मीडियाकर्मियों के पक्ष में आरसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू

दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डीबी कॉर्प के मराठी अखबार दैनिक दिव्य मराठी के महाराष्ट्र के अकोला एडिशन से खबर आ रही है कि यहां 5 मीडियाकर्मियों के पक्ष में आरसी जारी करने के लिए  अंतिम प्रक्रिया शुरू करने का सहायक कामगार आयुक्त अकोला श्री विजयकांत पानबुड़े ने अपने विभाग को निर्देश दिया है। ये मीडियाकर्मी हैं इस मराठी अखबार के पेज मेकर दीपक वसंतराव मोहिते (रिकवरी राशि 13 लाख 35 हजार 252 रुपये), पेजमेकर राजू रमेश बोरकुटे (रिकवरी राशि 12 लाख 66 हजार 275), डिजाइनर मनोज रामदास वाकोडे (११ लाख 75 हजार 654 रुपये), पेजमेकर संतोष मलनन्ना पुटलागार (११ लाख 98 हजार 565 रुपये) और डिटीपी इंचार्ज रोशन अम्बादास पवार (6 लाख 17 हजार 308 रुपये)।

एचटी ग्रुप का एचआर डायरेक्टर मजीठिया वेज बोर्ड मामले में डीएलसी के सामने ये क्या बोल गया!

दिनांक 21 अगस्त को मजीठिया वेज लागू करने के सवाल पर बिहार में दो जगहों सुनवाई हुई। फार्म सी के साथ दिए गए क्लेम पर सुनवाई राज्य सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी अमरेन्द्र मिश्र ने की। फरवरी में दिए गए आवेदन पर सुनवाई की शुरुआत करने में 5 महीने लग गये। सुप्रीम कोर्ट की मोनेटरिन्ग होने के बाद भी गति नौ दिन चले ढाई कोस की तरह धीमी रही। दूसरा मजीठिया मामलों मे कंप्लेन केस, गलत बयानी और दमनात्मक कार्रवाई पर डीएलसी पटना के यहां सुनवाई थी। दोनों जगहों पर एचटी के एचआर डायरेक्टर राकेश गौतम खुद उपस्थित हुए और बेहूदगी व मूर्खता की सारी सीमा लांघ दी।

मजीठिया मुद्दे पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए राज्यपाल को दिया ज्ञापन

वाराणसी । काशी पत्रकार संघ और समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार 22 अगस्त, 2017 को अपराह्न लखनऊ स्थित राजभवन में प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक से मिलकर उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों के तहत पत्रकारों व गैर पत्रकार कर्मचारियों के लम्बित वादों के निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के लिए राज्य सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया।

श्रम न्यायालय ने दैनिक जागरण से जुर्माना वसूला!

मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़े दिलीप कुमार द्विवेदी बनाम जागरण प्रकाशन लिमिटेड के मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा श्रम न्यायालय ने दैनिक जागरण से दो हजार रुपये जूर्माना वसूलकर वर्करों को दिलवाया और जागरण से अपना जवाब देने के लिए कहा। दिल्ली की कड़कड़डूमा श्रम न्यायालय में दैनिक जागरण के उन 15 लोगों, जिन्होंने जस्टिस मजीठिया बेज बोर्ड की मांग को लेकर जागरण प्रबंधन के खिलाफ केस लगाया था, के मामले की कल सुनवाई थी। इन सभी वर्कर को जागरण ने बिना किसी जाँच के झूठे आरोप लगाकर टर्मिनेट कर दिया था।

कानपुर श्रम विभाग व एचटी प्रबंधन की मिलीभगत से मजीठिया क्लेम खारिज करने की साजिश!

कानपुर श्रम विभाग द्वारा हिंदुस्तान अखबार के कर्मचारियों का क्लेम पार्थना पत्र अखबार प्रबंधन की मिलीभगत से खारिज किया जा रहा है। बताया जाता है कि हिंदुस्तान के 7 लोगों ने कानपुर उप श्रमायुक्त कार्यालय में विगत 8 माह पहले क्लेम लगाया लेकिन कार्यालय के बाबू व प्राधिकारी की मिलीभगत से सुनवाई के दिन गये लोगों के हस्ताक्षर न कराकर कार्रवाई बाद में लिखने को कह दिया जाता है. साथ ही उन्हें अनुपस्थिति दिखा दिया जाता है. पंकज कुमार की आरटीआई से मिली सूचना देखने पर पता चलता है कि प्राधिकारी आरपी तिवारी द्वारा 28/03/3017 को पक्ष को उपस्थित दिखाया गया और 3/4/2017, 15/5/2017 सहित कई डेट पर स्वतः अनुपस्थित दिखाकर वाद को ख़ारिज किया जा रहा है.

राजस्थान पत्रिका प्रबंधन से श्रम विभाग ने पूछा- क्यों नहीं दिया मजीठिया, कारण बताओ

राजस्थान पत्रिका के एमडी को श्रम विभाग ने नोटिस भेजकर उपस्थित होने को कहा

जयपुर। सर्वोच्च न्यायालय के मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में 19 जून को दिए गए फैसले के बाद पत्रकारों की उम्मीदों को झटका जरूर लगा था, लेकिन इस फैसले के बाद पत्रकारों की उम्मीदों को नए पंख भी मिल गए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर के श्रम कार्यालयों में मजीठिया वेज बोर्ड को हल्के में नहीं ले रहे हैं। लेबर विभाग को लेकर आम धारणा है कि यहां सालों साल मामले ​खिंचते चले जाते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद श्रम विभाग को लेकर मजबूरी में ही सही सक्रिय होना पड़ रहा है।

अमर उजाला में प्रबंधन गुपचुप रूप से कागज पर दस्तखत करा रहा

खबर है कि अमर उजाला प्रबंधन अपने इंप्लाइज से गुपचुप रूप से एक कागज पर साइन करा रहा है. एरियर देने के नाम पर कराए जा रहे दस्तखत के दौरान इंप्लाइज को यह भी नहीं दिखाया जा रहा कि उनका जहां हस्ताक्षर लिया जा रहा है, वह किस तरह का कागज है.

हिंदुस्तान अखबार के फ्रॉड के सुबूत दिखाने पर एचआर हेड की बोलती बंद हो गई!

मजीठिया आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन के मामले में यूपी सरकार की मंशा साफ़ है : मंत्री 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा है कि मजीठिया आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन के मामले में सरकार की मंशा साफ़ है।  सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अक्षरशः अनुपालन हो। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मालिकान अगर अपने स्तर से सुनिश्चित कराते हैं तो यह उनकी महानता होगी। उन्होंने कहा कि इरादे नेक हों तो हर समस्या का हल किया जा सकता है। 

पटना एचटी के एचआर हेड पर गिरी गाज, सुनवाई में नहीं आया संस्थान

हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप में मजीठिया वेज बोर्ड को लागू करने के सवाल पर पटना डिप्टी लेबर कमिश्नर के यहां सुनवाई के दौरान नया मोड़ आया। बार-बार झूठ और भ्रष्ट हरकतों को अपनाने वाली प्रबंधन ने नई चाल चली और 4 अगस्त को उसने वेज बोर्ड लागू करने के संदर्भ में मांगी गई सारी सूचनाओं का अभिलेख लेकर आने के लिए जिस प्रबंधन ने खुद समय लिया था, अचानक भाग खड़ा हुआ। सुनवाई का समय दो बजे दिन तय था और ढाई बजे तक प्रबंधन की तरफ से कोई नहीं पहुंचा। उसके तत्काल बाद एक फोन आया- ”मैं एचटी ग्रुप का नया एचआर हेड अभिषेक सिंह बोल रहा हूं। पुराने एचआर हेड रविशंकर सिंह का ट्रांसफर कर दिया गया है। मैं नया हूं इसलिए कुछ समय चाहिए। मैं इसकी लिखित सूचना और आवेदन भेज रहा हूं।” मगर दो घंटे बाद तक भी लिखित सूचना और आवेदन नहीं आया। अब सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

पटना के एक अखबार के प्रबंधन ने डीएलसी को वाशिंग मशीन और आरओ गिफ्ट किया!

पटना के एक अखबार के एक मीडिया कर्मी ने जानकारी दी है कि यहां जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड न देना पड़े इसके लिए एक भ्रष्ट डिप्टी लेबर कमिश्नर महोदय चांदी काट रहे हैं। इस मीडियाकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी दी कि पटना के महाधूर्त डिप्टी लेबर कमिश्नर को अखबार प्रबंधन ने अपने एक खास मातहत के जरिये वाशिंग मशीन और पानी को शुद्ध करने वाला आरओ गिफ्ट किया है। इसके अलावा अन्य उपहार भी समय समय पर दिए जा रहे हैं। इस बारे में सूत्रों का कहना है कि अखबार प्रबंधन ने डीएलसी को ये खास गिफ्ट इसलिए भेंट दिया है ताकि मजीठिया मामले में ये अखबार प्रबंधन की मदद करें।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में यूपी के मीडियाकर्मी यहां करें शिकायत

यूपी सरकार की मजीठिया निगरानी समिति की बैठक 8 अगस्त को होने जा रही है। मजीठिया मांगने पर यदि आपके खिलाफ अन्याय हो हुआ है या हो रहा है तो आप अपनी संक्षिप्त रिपोर्ट (नाम, पता, मोबाइल नंबर, अखबार का नाम औऱ 5 लाइन में घटनाक्रम) इन मेल आईडीज पर भेज दें…

मजीठिया के लिए कानूनी सहायता कैंप : दर्जनों मीडियाकर्मियों ने क्लेम के लिए बढ़ाया कदम

वाराणसी। मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों को लागू कराने की लड़ाई की अगुवाई कर रहे समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन व काशी पत्रकार संघ के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को पराड़कर स्मृति मवन में “कानूनी सहायता शिविर लगाया गया। शिविर में काफी संख्या में पत्रकारों, समाचार पत्र कर्मियों ने मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों को कैसे हासिल किया जाय, इसकी कानूनी जानकारी ली। समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी ने कैम्प में आये पत्रकारों समाचार पत्र कर्मचारियो कों मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियो के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उसे कानूनी रूप से कैसे लिया जा सकता है उससे अवगत कराया। 

बनारस में मजीठिया मामले में मीडियाकर्मियों के मुकदमों की फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह होगी सुनवाई

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर को लेकर पत्रकारों व गैर पत्रकारों की लड़ाईं लड़ रहे समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन व काशी पत्रकार संघ की पहल पर अब डीएलसी स्तर तक के सभी तरह के मुकदमों की सुनवाई निर्धारित समय के भीतर पूरी होगी। इस आशय का आदेश जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने शनिवार को समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन व काशी पत्रकार संघ के संयुक्त प्रतिनिधिमण्डल की बातों को सुनने के बाद दी।

अखबार मालिकों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू करना ही होगा : कामगार आयुक्त

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश महाराष्ट्र में लागू कराने के लिये बनायी गयी त्रिपक्षीय समिति की बैठक में महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त यशवंत केरुरे ने अखबार मालिकों के प्रतिनिधियों को स्पष्ट तौर पर कह दिया कि 19 जून 2017 को माननीय सुप्रीमकोर्ट के आये फैसले के बाद अखबार मालिकों को बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है। अखबार मालिकों को हर हाल में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू करनी ही पड़ेगी। श्री केरुरे ने कहा कि माननीय सुप्रीमकोर्ट ने जो आदेश जारी किया है उसको लागू कराना हमारी जिम्मेदारी है और अखबार मालिकों को इसको लागू करना ही पड़ेगा। इस बैठक की अध्यक्षता करते हुये कामगार आयुक्त ने कहा कि अवमानना क्रमांक ४११/२०१४ की सुनवाई के बाद माननीय सुप्रीमकोर्ट ने 19 जून 2017 को आदेश जारी किया है जिसमें चार मुख्य मुद्दे सामने आये हैं। इसमें वर्किंग जर्नलिस्ट की उपधारा २०(जे), ठेका कर्मचारी, वेरियेबल पे, हैवी कैश लॉश की संकल्पना मुख्य थी।

हिमाचल प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्‍टस यूनियन गठित, मजीठिया को लेकर निर्णायक जंग की तैयारी

मजीठिया वेजबोर्ड अवार्ड को लागू करवाने और प्रबंधन के उत्‍पीड़न के खिलाफ पिछले दिन वर्षों से लड़ाई लड़ रहे वरिष्‍ठ पत्रकार रविंद्र अग्रवाल के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश में पहली बार पत्रकार एवं गैर-पत्रकार अखबार कर्मियों की यूनियन का गठन कर लिया गया है। हिमाचल के कई पत्रकार और गैरपत्रकार साथी इस यूनियन के सदस्‍य बन चुके हैं और अभी भी सदस्‍यता अभियान जारी है। एक जून को इस हिमाचल प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्‍टस यूनियन(एचपीडब्‍ल्‍यूजेयू) के नाम से गठित इस कर्मचारी यूनियन में पत्रकार और गैरपत्रकार दोनों ही श्रेणियों के अखबार कर्मियों को शामिल किया जाएगा। नियमित और संविदा/अनुबंध कर्मी भी यूनियन के सदस्‍य बन सकते हैं, वशर्ते इनका पेशा सिर्फ अखबार के कार्य से ही जुड़ा होना चाहिए।

क्या नोएडा के डीएलसी रहे बीके राय दैनिक जागरण के आदेशपाल की तरह काम करते थे?

माननीय सुप्रीम कोर्ट से मजीठिया को लेकर जो फैसला आया, उसको मालिकानों ने अपने काम कर रहे वर्कर के बीच गलत तरह से पेश किया। उदाहरण के तौर पर दैनिक जागरण को लेते हैं। सभी जानते हैं कि दैनिक जागरण का रसूख केंद्रीय सरकार से लेकर राज्य सरकारों तक में है। इनके प्यादे अक्सर इस बात की धौंस मजीठिया का केस करने वाले वर्करों को देते रहते हैं कि रविशंकर प्रसाद, जेटली जी और पी एम मोदी जागरण की बात सुनते हैं। देश में ऐसा कौन है जो जागरण की बात नहीं मानेगा? इन नेताओं की आय दिन तस्वीरें जागरण के मालिकानों के साथ अख़बारों में छपती रहती हैं। देखें तो, प्यादों की बात सही भी है, क्योंकि यह सब जागरण के वर्करों ने देखा भी है। तभी तो जागरण के मालिकान और मैनेजमेंट बेख़ौफ़ होकर किसी भी दफ्तर में गलत तर्क या गलत शपथ पत्र देते नहीं हिचकते हैं।

सेवानिवृत्त मीडियाकर्मी भी अपना हक लेने के लिए मीडिया मालिकों के खिलाफ मैदान में कूदे

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर अवमानना के केस में माननीय सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है, उसके बाद अख़बार कार्यालयों से अपनी सेवा से निवृत हो चुके वर्कर भी अब इस लड़ाई में कूद पड़े हैं। जाहिर है, मालिकान ने अभी तक जो पैसा दिया है, वह मजीठिया के अनुसार नहीं दिया है। पिछले दिनों पटना के कुछ रिटायर वर्करों ने अखबार मालिकानों पर अपना दावा लिखित रूप से ठोंका। सूत्र बताते हैं कि इनकी संख्या बारह के करीब है। इस कड़ी में आगे कुछ और लोगों के जुड़ने की उम्मीद है और आशा की जानी चाहिए कि यह आग धीरे धीरे पूरे देश में लगेगी।

मजीठिया : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद श्रम अधिकारियों का रवैया बदला है

सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को लेकर जो फैसला दिया है, उसके बाद हर जिले के डीएलसी आफिस यानी सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय के हर कर्मचारियों का रवैया बदला है। इन कर्मचारियों का रुख इसलिए बदला है कि 19 जून 2017 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के आये फैसले में यह स्पष्ट लिखा है कि मजीठिया वेतन आयोग के मामले में सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के क्या दायित्व होंगे। यही वजह है कि मजीठिया का मामला 19 जून के बाद जहां भी शुरू हुआ है, मालिकान की तरफदारी करने वाले सभी सरकारी अधिकारी का रवैया बदला है।