अमित शाह का पीछा करती फ़र्ज़ी एनकाउंटर की ख़बरें और ख़बरों से भागता मीडिया

अमित शाह का पीछा करती फ़र्ज़ी एनकाउंटर की ख़बरें और ख़बरों से भागता मीडिया… नहीं छपने से ख़बर मर नहीं जाती है। छप जाने से अमर भी नहीं हो जाती है। मरी हुई ख़बरें ज़िंदा हो जाती हैं। क्योंकि ख़बरें मैनेज होती हैं, मरती नहीं हैं। बस ऐसी ख़बरों को ज़िंदा होने के इंतज़ार में …

भास्कर ग्रुप ने रवीश कुमार से प्रायोजित सवाल पूछे!

Girish Malviya कल देश के तथाकथित सबसे बड़े अखबार दैनिक भास्कर में पत्रकार रवीश कुमार से जो प्रायोजित 10 से 12 सवाल पूछे गए, उनमें से चार सवाल देखिए… कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

रवीश कुमार ने पूछा- सीबीआई की ‘पार्वती’ और ‘पारो’ में से किसे चुनेंगे देवदास हुज़ूर!

आपने फ़िल्म देवदास में पारो और पार्वती के किरदार को देखा होगा। नहीं देख सके तो कोई बात नहीं। सीबीआई में देख लीजिए। सरकार के हाथ की कठपुतली दो अफ़सर उसके इशारे पर नाचते नाचते आपस में टकराने लगे हैं। इन दोनों को इशारे पर नचाने वाले देवदास सत्ता के मद में चूर हैं। नौकरशाही …

रवीश कुमार ने पूछा- ‘प्रधानमंत्रीजी जवाब दीजिए, एमजे अकबर अभी तक क्यों आपके साथ है?’

Ravish Kumar मेरा अकबर महान ! कारनामा ऐसा कि कायनात शर्मा जाए… सवाल अकबर के इस्तीफ़े का नहीं है। इस्तीफ़ा लेकर कोई महान नहीं बन जाएगा। वो तो होगा ही। मगर जवाब देना पडेगा कि इस अकबर में क्या ख़ूबी थी कि राज्य सभा का सदस्य बनाया, बीजेपी का सदस्य बनाया और मंत्री बनाया। इसके …

‘मिरर नाऊ’ की पत्रकार सांतिया ने लिखा- ‘मुंबई का वो ब्यूरो चीफ लगातार मेरे स्तन घूरे जा रहा था!’

Ravish Kumar : सांतिया ‘मिरर नाऊ’ की पत्रकार हैं। कई चैनलों में काम कर चुकी हैं। उनका पोस्ट पढ़िए और ख़ुद में झांकिए। ख़ासकर वो लोग जो नौकरी देने के ओहदे में रहे हैं। बैंकों पर सीरीज़ के दौरान वहाँ काम करने वाली औरतों ने इस तरह के और इससे भी भयानक अनुभव बताए थे। …

अखिलेश यादव के साथ सेल्फी लेकर रवीश कुमार भी आ गए ‘सेल्फीबाज चिरकुट पत्रकार’ की कैटगरी में!

Vivek Kumar : रवीश कुमार बहुत बड़े वाले हिप्पोक्रेट हैं. जब सुधीर चौधरी और अन्य पत्रकारों ने पीएम नरेंद्र मोदी संग सेल्फी लेकर फेसबुक पर पोस्ट किया तो उन्हें कोसा गया. रवीश ने भी ऐसे सेल्फीबाज पत्रकारों को बुरा-भला कहा. लेकिन उन्होंने अखिलेश यादव के साथ सेल्फी लेकर खुद को ‘सेल्फीबाज चिरकुट पत्रकार’ की कैटगरी …

रवीश कुमार ने जेटली का बचाव करने वाले पत्रकारों को ‘चंपू’ कह दिया!

Ravish Kumar मैं नहीं चाहता कि जेटली इस्तीफ़ा दें। मैं इसलिए ये चाहता हूं कि मुझे चांस ही नहीं मिला उनका बचाव करने के लिए। बहुत से पत्रकारों को जब जेटली का बचाव करते देखा तो उस दिन पहली बार लगा कि लाइफ में पीछे रह गया। मगर फिर लगा कि जब जेटली को भी …

रवीश कुमार को बदनाम करने वाले BJP आईटी सेल के हेड अमित मालवीय की ‘बदमाशी’ पकड़ी गई

Sanjaya Kumar Singh : भाजपा आईटी सेल के प्रमुख की कारगुजारी देखिए। पकौड़े बेचने की तरह करियर यहां भी है। ना गटर गैस की जरूरत और ना गटर के पास खड़े रहने की जरूरत। एयर कंडीशन की नौकरी है, अगर आपको पसंद आए। किसी को बदनाम कैसे किया जाता है, इनसे सीखिए। झूठ के उस्ताद …

क्या आपको आपके हिन्दी के अख़बार ने ये सब बताया?

Ravish Kumar क्या आपको आपके हिन्दी के अख़बार ने ये सब बताया? नोटबंदी ने लघु व मध्यम उद्योगों की कमर तोड़ दी है। हिन्दू मुस्लिम ज़हर के असर में और सरकार के डर से आवाज़ नहीं उठ रही है लेकिन आंकड़े रोज़ पर्दा उठा रहे हैं कि भीतर मरीज़ की हालत ख़राब है। भारतीय रिज़र्व …

रवीश कुमार ने पूछा- क्या चौकीदार जी ने अंबानी के लिए चौकीदारी की है?

Ravish Kumar  क्या चौकीदार जी ने अंबानी के लिए चौकीदारी की है? उपरोक्त संदर्भ में चौकीदार कौन है, नाम लेने की ज़रूरत नहीं है। वर्ना छापे पड़ जाएंगे और ट्विटर पर ट्रोल कहने लगेंगे कि कानून में विश्वास है तो केस जीत कर दिखाइये। जैसे भारत में फर्ज़ी केस ही नहीं बनता है और इंसाफ़ …

अभूतपूर्व : अमेरिका में एक ही दिन 300 अखबारों ने प्रेस की स्वतंत्रता पर संपादकीय लिखा

Ravish Kumar : प्रेस की आज़ादी पर 300 अमरीकी अख़बारों के संपादकीय… अमरीकी प्रेस के इतिहास में एक शानदार घटना हुई है। 146 पुराने अख़बार दी बोस्टन ग्लोब के नेतृत्व में 300 से अखबारों ने एक ही दिन अपने अखबार में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर संपादकीय छापे हैं। आप बोस्टल ग्लोब की साइट पर …

बाउंसर्स के साए में चलने लगे रवीश कुमार! देखें वीडियो

क्या रवीश कुमार ने अपनी जान पर मंडराते खतरे को देखते हुए बाउंसर रख लिया है? पिछले दिनों उऩ्हें बाउंसर्स के साये में चलते देखा गया. रविन्द्र भवन में आयोजित एक कार्यक्रम से रवीश जब निकले तो कुछ लोगों ने उनसे बातचीत की कोशिश की. पर रविश के बाउंसर ने रोक दिया. कृपया हमें अनुसरण …

रवीश कुमार के एफबी पेज की रेटिंग जीरो करने में जुटे हैं ‘मोदी भक्त’!

ख़र्चा मोदी जी के समर्थकों का और चर्चा रवीश कुमार का! ध्यातव्य और ज्ञातव्य हो कि….. आई टी सेल मेरे फ़ेसबुक पेज Ravish Kumar की रेटिंग ज़ीरो करने में लगा है। उन्हें लगता है रेटिंग ज़ीरो होने से फ़ेसबुक मुझे फ्री 1.5 जीबी का दैनिक भत्ता बंद कर देगा।  इसलिए मेरी रेटिंग ज़ीरों करने में …

रवीश की ‘नौकरी सीरीज’ का इंपैक्ट- हजारों युवाओं को इनकम टैक्स इंस्पेक्टर का नियुक्ति पत्र मिला

Ravish Kumar : एनडीटीवी के प्राइम टाइम के लिए जब उस नौजवान ने वीडियो मेसेज भेजा था, तब उसमें उदासी थी। नियुक्ति पत्र न मिलने की कम होती आस थी। जैसे ही वित्त मंत्रालय की शीर्ष संस्था सीबीडीटी ने 505 इनकम टैक्स इंस्पेक्टर के नाम वेबसाइट पर डाले, उसका चेहरा खिल उठा। चहक उठा। ये …

पेट्रोल की कीमत रिकार्ड स्तर पर होने के बावजूद गोदी मीडिया में संपूर्ण खामोशी : रवीश कुमार

Ravish Kumar : 2013-14 के साल जितना अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल की कीमत अभी उछली भी नहीं है लेकिन उस दौरान बीजेपी ने देश को पोस्टरों से भर दिया था बहुत हुई जनता पर डीज़ल पेट्रोल की मार, अबकी बार बीजेपी सरकार। तब जनता भी आक्रोशित थी। कारण वही थे जो आज केंद्रीय मंत्री …

ये एंकर अब जन विरोधी गुंडे हैं : रवीश कुमार

…पुण्य प्रसून वाजपेयी ने हाल ही में कहा है कि ख़बरों को चलाने और गिराने के लिए पीएमओ से फोन आते हैं। कोबरा पोस्ट के स्टिंग में आपने देखा ही कैसे पैसे लेकर हिन्दू मुस्लिम किए जाते हैं। इस सिस्टम के मुकाबले आप दर्शकों ने जाने अनजाने में ही एक न्यूज़ रूम विकसित कर दिया है जिसे मैं पब्लिक न्यूज़ रूम कहता हूं। बस इसे ट्रोल और ट्रेंड की मानसिकता से बचाए रखिएगा ताकि खबरों को जगह मिले न कि एक ही ख़बर भीड़ बन जाए…

मेरे आदर्श संपादक प्रभाष जोशी का मानना था- सत्ता और व्यवस्था विरोध हर पत्रकार का एजेंडा होना चाहिए

Devpriya Awasthi : अपने देश और समाज को समझना है तो एनडीटीवी पर रवीश कुमार और फेसबुक पर हिमांशु कुमार को फालो कीजिए. आपको रवीश के बारे में अपनी राय बनाने और रखने का पूरा अधिकार है लेकिन, सत्ता और व्यवस्था प्रतिष्ठान के विरोध में उनका नजरिया मुझे और मुझ सरीखे बहुत से लोगों को पसंद आता है. मेरे आदर्श संपादक प्रभाष जोशी का मानना था कि सत्ता और व्यवस्था विरोध हर पत्रकार का एजेंडा होना चाहिए.

पीएम मोदी का पीएनबी घोटाले के एक आरोपी मेहुल भाई से कनेक्शन! देखें वीडियो

Ravish Kumar : प्रधानमंत्री के हमारे मेहुल भाई और रविशंकर प्रसाद की जेंटलमैन चौकसी… ये शब्द प्रधानमंत्री के हैं- ”कितना ही बड़ा शो रूम होगा, हमारे मेहुल भाई यहां बैठे हैं लेकिन वो जाएगा अपने सुनार के पास ज़रा चेक करो।” ये वाक्य यूट्यूब पर हैं। यूट्यूब पर ”PM Narendra Modi at the launch of Indian Gold Coin and Gold Related Schemes” नाम से टाइप कीजिए, प्रधानमंत्री का भाषण निकलेगा। इस वीडियो के 27वें मिनट से सुनना शुरू कीजिए। प्रधानमंत्री हमारे मेहुल भाई का ज़िक्र कर रहे हैं। ये वही मेहुल भाई हैं जिन पर नीरव बैंक के साथ पंजाब नेशनल बैंक को 11 हज़ार करोड़ का चूना लगाने का आरोप लगा है। उनके पार्टनर हैं।

अपनी शामों को मीडिया के खंडहर से निकाल लाइये : रवीश कुमार

Ravish Kumar : अपनी शामों को मीडिया के खंडहर से निकाल लाइये…. 21 नवंबर को कैरवान (carvan) पत्रिका ने जज बीएच लोया की मौत पर सवाल उठाने वाली रिपोर्ट छापी थी। उसके बाद से 14 जनवरी तक इस पत्रिका ने कुल दस रिपोर्ट छापे हैं। हर रिपोर्ट में संदर्भ है, दस्तावेज़ हैं और बयान हैं। जब पहली बार जज लोया की करीबी बहन ने सवाल उठाया था और वीडियो बयान जारी किया था तब सरकार की तरफ से बहादुर बनने वाले गोदी मीडिया चुप रह गया।

तीन सौ मुकदमों में गवाह है यह एक शख्स!

Ravish Kumar : 300 मामले में गवाह बना सोमेश आपके हर भरोसे पर सवाल है…. क्या ऐसा संभव है कि कोई एक बंदा 250-300 केस में चश्मदीद गवाह हो? उसके 300 केस में फर्ज़ी गवाह होने के क्या मायने हैं? क्या इतना आसान है कि किसी के ख़िलाफ़ फर्ज़ी मामले बनाकर, फ़र्ज़ी गवाब जुटा कर अदालतों के चक्कर लगवा देना और कई मामलों में सज़ा भी दिलवा देना? आसान नहीं होता तो छत्तीसगढ़ का सोमेश पाणिग्रही 250-300 मामलों में गवाह कैसे बन जाता?

Artificial intelligence के कारण मध्यम और निम्न दर्जे की ढेर सारी नौकरियां विलुप्त हो जाएंगी

Ravish Kumar : नौकरियों के घटते और बदलते अवसरों पर चर्चा कीजिए…  FICCI और NASSCOM ने 2022 में नौकरियों के भविष्य और स्वरूर पर एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसके बारे में बिजनेस स्टैंडर्ड में छपा है। लिखा है कि इस साल आई टी और कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने जा रहे छात्र जब चार साल बाद निकलेंगे तो दुनिया बदल चुकी होगी। उनके सामने 20 प्रतिशत ऐसी नौकरियां होंगी जो आज मौजूद ही नहीं हैं और जो आज मौजूद हैं उनमें से 65 प्रतिशत का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका होगा। ज़रूरी है कि आप अपनी दैनिक समझ की सामग्री में BIG DATA, ARTIFICIAL INTELLEGENCE, ROBOTIC को शामिल करें। इनके कारण पुरानी नौकरियां जाएंगी और नई नौकरियां आएंगी। क्या होंगी और किस स्तर की होंगी, इसकी समझ बनानी बहुत ज़रूरी है।

रवीश कुमार ने पूछा- मीडिया क्यों सरकार से दलाली खा रहा है?

Ravish Kumar : नागरिक निहत्था होता जा रहा है…. राजस्थान के डॉक्टरों की हड़ताल की ख़बर पर देर से नज़र पड़ी। सरकार ने वादा पूरा नहीं किया है।हमने प्रयास भी किया कि किसी तरह से प्राइम टाइम का हिस्सा बना सकें। मगर हम सब ख़ुद ही अपने साथियों से बिछड़ने की उदासी से घिरे हुए थे। हर दूसरे दिन संसाधन कम होते जा रहे हैं। हम कम तो हुए ही हैं, ख़ाली भी हो गए हैं। साथियों को जाते देखना आसान नहीं था। वर्ना डॉक्टरों को इनबाक्स और व्हाट्स अप में इतने संदेश भेजने की ज़रूरत नहीं होती। आगरा से आलू किसान और दुग्ध उत्पादक भी इसी तरह परेशान हैं। दूध का दाम गिर गया है और आलू का मूल्य शून्य हो गया है। इन ख़बरों को न कर पाना गहरे अफसोस से भर देता है। कोई इंदौर से लगातार फोन कर रहा है।

भारत के न्यूज़ एंकर रोबोट के पत्रकार बनने से पहले ही सरकार के रोबोट बन गए हैं : रवीश कुमार

Ravish Kumar : भले मत जागिए मगर जानते रहिए… अमरीका में एक अद्भुत गिनती हुई है। नए राष्ट्रपति ट्रंप ने दस महीने के कार्यकाल में झूठ बोलने के मामले में शतक बना लिया है। ओबामा ने आठ साल के कार्यकाल में कुल 18 झूठ बोले थे। न्यूयार्क टाइम्स ने भारत के प्रधानमंत्री का झूठ नहीं गिना है। यहाँ भी गिना जाना चाहिए। नेताओं के झूठ की गिनती हो रही है।

टीएम कृष्णा यानि एक ऐसा शास्त्रीय संगीतकार जो सत्ता और कारपोरेट को चुनौती देता है

Ravish Kumar : टी एम कृष्णा हिन्दी जगत के लिए अनजान ही होंगे। मैं ख़ुद कृष्णा के बारे में तीन चार साल से जान रहा हूं, संगीत कम सुना मगर संगीत पर उनके लेख ज़रूर पढ़े हैं। टी एम कृष्णा कर्नाटिक संगीत के लोकप्रिय हस्ती हैं और वे इस संगीत की दुनिया का सामाजिक विस्तार करने में लगे हैं। उनकी किताब A SOUTHERN MUSIC-THE KARNATIK STORY हम जैसे हिन्दी भाषी पाठकों के लिए दक्षिण भारत के संगीत की दुुनिया खोल देती है। संगीत से लेकर मौजूदा राजनीति के बारे में उन्होंने काफी लिखा है जो इस वक्त TMKRISHNA.COM पर मौजूद भी है। कृष्णा कर्नाटिक संगीत सभा पर ऊंची जाति के वर्चस्व को लेकर काफी मुखर रहे हैं और कोशिश करते रहे हैं कि संगीत की इस दुनिया में दलित प्रतिभाएं भी स्थान और मुकाम पाएं। जिसके लिए उन्हें कर्नाटिक संगीत के पांरपरिक उस्तादों की काफी नाराज़गी भी झेलनी पड़ती है।

आरके सिन्हा का अख़बारों ने भावनात्मक दोहन किया है : रवीश कुमार

Ravish Kumar : क्यों छपी बीजेपी सांसद सिन्हा की सफाई विज्ञापन की शक्ल में… पैराडाइस पेपर्स में भाजपा के राज्य सभा सांसद आर के सिन्हा का भी नाम आया था। इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने उनकी सफाई के साथ ख़बर छापी थी। पैराडाइस पैराडाइस पेपर्स की रिपोर्ट के साथ यह भी सब जगह छपा है कि इसे कैसे पढ़ें और समझें। साफ साफ लिखा है कि ऑफशोर कंपनी कानून के तहत ही बनाए जाते हैं और ज़रूरी नहीं कि सभी लेन-देन संदिग्ध ही हो मगर इसकी आड़ में जो खेल खेला जाता है उसे भी समझने की ज़रूरत है। सरकार को भी भारी भरकम जांच टीम बनानी पड़ी है। ख़ैर इस पर लिखना मेरा मकसद नहीं है।

हिन्दी के पाठकों को आज का अंग्रेज़ी वाला इंडियन एक्सप्रेस ख़रीद कर रख लेना चाहिए

Ravish Kumar : इंडियन एक्सप्रेस में छपे पैराडाइस पेपर्स और द वायर की रिपोर्ट pando.com के बिना अधूरा है… हिन्दी के पाठकों को आज का अंग्रेज़ी वाला इंडियन एक्सप्रेस ख़रीद कर रख लेना चाहिए। एक पाठक के रूप में आप बेहतर होंगे। हिन्दी में तो यह सब मिलेगा नहीं क्योंकि ज्यादातर हिन्दी अख़बार के संपादक अपने दौर की सरकार के किरानी होते हैं। कारपोरेट के दस्तावेज़ों को समझना और उसमें कमियां पकड़ना ये बहुत ही कौशल का काम है। इसके भीतर के राज़ को समझने की योग्यता हर किसी में नहीं होती है। मैं तो कई बार इस कारण से भी हाथ खड़े कर देता हूं। न्यूज़ रूम में ऐसी दक्षता के लोग भी नहीं होते हैं जिनसे आप पूछकर आगे बढ़ सकें वर्ना कोई आसानी से आपको मैनुपुलेट कर सकता है।

रवीश जी, अगर Yashwant Singh से कुछ पर्सनल खुन्नस है तो कम से कम उनके काम की तो तारीफ कर दीजिये!

Divakar Singh : रवीश जी, आपने सही लिखा हमारी मीडिया रीढविहीन है. साथ ही नेता भी चाहते हैं मीडिया उनकी चाटुकारिता करती रहे. आप बधाई के पात्र हैं यह मुद्दे उठाने के लिए. पर क्या बस इतना बोलने से डबल स्टैंडर्ड्स को स्वीकार कर लिया जाए? आप कहते हैं कि ED या CBI की जांच नहीं हुई तो कोई मानहानि नहीं हुई. आप स्वयं जानते होंगे कितनी हलकी बात कह दी है आपने. दूसरा लॉजिक ये कि अमित शाह स्वयं क्यों नहीं आये बोलने. अगर वो आते तो आप कहते वो पिता हैं मुजरिम के, इसलिए उनकी बात का कोई महत्त्व नहीं. तीसरी बात आप इतने उत्तेजित रोबर्ट वाड्रा वगैरह के मामले में नहीं हुए. यहाँ आप तुरंत अत्यधिक सक्रिय हो गए और अतार्किक बातें करने लगे. ठीक है नेता भ्रष्ट होते हैं, मानते हैं, पर कम से कम तार्किक तो रहिये, अगर निष्पक्ष नहीं रह सकते.

‘भक्तों’ से जान का खतरा बताते हुए पीएम को लिखा गया रवीश कुमार का पत्र फेसबुक पर हुआ वायरल, आप भी पढ़ें

Ravish Kumar : भारत के प्रधानमंत्री को मेरा पत्र…

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी,

आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि आप सकुशल होंगे। मैं हमेशा आपके स्वास्थ्य की मंगल कामना करता हूं। आप असीम ऊर्जा के धनी बने रहें, इसकी दुआ करता हूं। पत्र का प्रयोजन सीमित है। विदित है कि सोशल मीडिया के मंचों पर भाषाई शालीनता कुचली जा रही है। इसमें आपके नेतृत्व में चलने वाले संगठन के सदस्यों, समर्थकों के अलावा विरोधियों के संगठन और सदस्य भी शामिल हैं। इस विचलन और पतन में शामिल लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।

बिकने के बाद भी एनडीटीवी में काम करेंगे रवीश कुमार?

Ashwini Kumar Srivastava :  ”अब तेरा क्या होगा रवीश कुमार…” एनडीटीवी पर भी कब्जा कर चुके मोदी-अमित शाह और उनके समर्थक शायद ऐसा ही कुछ डॉयलाग बोलने की तैयारी में होंगे। जाहिर है, रवीश हों या एनडी टीवी के वे सभी पत्रकार, उनके लिए यह ऐसा मंच था, जहां वे बिना किसी भय के सरकार की आलोचना या खामियों की डुगडुगी पीट लेते थे। उनकी इसी डुगडुगी को अपने लिये खतरा मानकर संघ और भाजपा के समर्थकों की नजर में ये पत्रकार और एनडीटीवी सबसे बड़े शत्रु बने हुए थे।

‘पेट्रो लूट’ का पैसा चुनावों में आसमान से बरसेगा और ज़मीन पर शराब बनकर वोट ख़रीदेगा : रवीश कुमार

Ravish Kumar : सजन रे झूठ मत बोलो, पेट्रोल पंप पर जाना है… पेट्रोल के दाम 80 रुपये के पार गए तो सरकार ने कारण बताए।  लोककल्याणकारी कार्यों, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ख़र्च करने के लिए सरकार को पैसे चाहिए। व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी और सरकार की भाषा एक हो चुकी है। दोनों को पता है कि कोई फैक्ट तो चेक करेगा नहीं। नेताओं को पता है कि राजनीति में फैसला बेरोज़गारी, स्वास्थ्य और शिक्षा के बजट या प्रदर्शन से नहीं होता है। भावुक मुद्दों की अभी इतनी कमी नहीं हुई है, भारत में।