यूपी के नए डीजीपी सुलखान सिंह पर लिखी गई यह पोस्ट एफबी पर हुई वायरल

Dhirendra Pundir : सुलखान सिंह नए डीजीपी। लगता नहीं था कि कोई इतने ईमानदार अफसर को कभी कमान देगा। लईया-चना हमेशा याद रहेगा। लखनऊ में खबर करने गया था। सोचा चलो एक दो अफसर से तो मिलता चलू। फिर याद आया कि चलो एडीजी जेल से मिलते है। फोन किया और उधर से वही अपनेपन से भरी हुई आवाज शहर में आएँ हो क्या। चलो आएँ हो तो आ जाओं। मिलने पहुंच गए खाने का समय हो चुका था तो पूछा कि आपने लंच तो नहीं लिया होगा तो हमारे साथ लोंगे।

अमर उजाला पर विज्ञापन न मिलने से डीजीपी के खिलाफ खबर छापने का आरोप

अमर उजाला को विज्ञापन न देने पर डीजीपी के खिलाफ 31 जनवरी और 1 फरवरी को प्रकाशित खबरों के मामले ने तूल पकड लिया है। पुलिस अधिकारियों ने अमर उजाला न पढ़ने की चेतावनी जारी कर दी है। साथ ही अमर उजाला के विज्ञापन कर्मी के खिलाफ नगर कोतवाली देहरादून में मुकदमा दर्ज कर लिया है। सूत्रों की मानें तो अब अमर उजाला के पदाधिकारी मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलकर मामले में समझौता कराने के प्रयास में लगे हैं।

जगमोहन को डीजीपी बनाना साम्प्रदायिक साजिश का हिस्सा – रिहाई मंच

लखनऊ : रिहाई मंच ने फैजाबाद सांप्रदायिक हिंसा के दौरान अपनी जिम्मेदारी न निभाने के चलते पद से हटा दिए गए आईपीएस अधिकारी जगमोहन यादव को डीजीपी बनाए जाने को सूबे में सांप्रदायिक व जातीय हिंसा को बढ़ावा देने और आगामी पंचायत चुनावों में सपा के लंपट तत्वों की जीत सुनिश्चित करने की योजना का हिस्सा बताया है।

जगेंद्र हत्याकांड पर डीजीपी के खिलाफ कोर्ट जाएंगे कुमार सौवीर

वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है – ”यूपी के डीजीपी अरविन्‍द जैन की पुलिस का कमाल यहां शाहजहांपुर में देखें तो आप दांतों तले उंगलियां कुचल डालेंगे, जहां मंत्री का इशारा था, अपराधी मोहरा बना था और अपराधी बना डाला गया हत्‍या का जरिया। सिर्फ दो दिन तक पुलिस ने एक सीधी-सच्‍ची एफआईआर को टाल दिया और उसकी जगह में एक नयी रिपोर्ट दर्ज लिख डालीा ताना-बाना इतना जबर्दस्‍त बुना गया कि उसके बल पर मंत्री-अपराधी-पत्रकार और पुलिस की साजिशों से जगेन्‍द्र सिंह के खिलाफ डेथ-वारण्‍ट तामील करा दिया। अब मैं इस प्रकरण पर सीधे अदालत में ही पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने जा रहा हूं, जिसमें डीजीपी अरविन्‍द जैन भी शामिल होंगे, जिन्‍होंने जान-बूझ कर भी एक असल मामले की तहरीर को मनचाहे तरीके से बदलवा दिया।

डीजीपी ए एल बनर्जी और ए सी शर्मा ने मांगे एसएमएस से घूस : आईपीएस अमिताभ ठाकुर

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने दावा किया है कि आगरा के जालसाज सपा नेता शैलेंद्र अग्रवाल का जिन दो पूर्व डीजीपी के साथ पैसे के लेन देन के संपर्क का खुलासा हुआ है वे ए एल बनर्जी और ए सी शर्मा हैं. 

पुलिस विभाग में “लीडरशिप” को कुत्सित प्रयास बताने पर आईपीएस का विरोध

लखनऊ पुलिस लाइन्स के मुख्य आरक्षी बिशन स्वरुप शर्मा ने अपने सेवा-सम्बन्धी मामले में एक शासनादेश की प्रति लगा कर अनुरोध किया कि उन्हें इस बात का अपार दुःख और कष्ट है कि शासनादेश जारी होने के 33 साल बाद भी इसका पूर्ण लाभ पुलिस कर्मचारियों को नहीं दिया गया. पुलिस विभाग के सीनियर अफसरों को श्री शर्मा की यह बात बहुत नागवार लगी कि “उसने विभाग के पुलिस कर्मचारियों की सहानुभूति प्राप्त करने का एक प्रयास किया है” और पुलिस विभाग के कर्मचारियों को लाभ दिलाने की सामूहिक बात लिखित रूप से प्रकट की है.

शासनादेश पर अमल की मांग : मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम, एसएसपी से सुरक्षा वापस लो

लखनऊ : आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने प्रमुख सचिव गृह से प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी सहित तमाम वरिष्ठ अफसरों के साथ कमिश्नर, आईजी ज़ोन, डीआईजी रेंज, जिलों के डीएम, एसएसपी आदि अफसरों के सुरक्षाकर्मियों को वापस लेने की मांग की है. साथ ही अन्य लोगों को बिना आकलन सुरक्षा दिए जाने के बारे में जांच कराने की मांग की है.

संलग्न- सुरक्षा सम्बन्धी शासनादेश दिनांक 09 मई 2014

रीता बहुगुणा जोशी के घर आगजनी मामले में डीजीपी एके जैन को भी बनाएं मुलजिम : नूतन ठाकुर

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने मुख्य सचिव आलोक रंजन से रीता बहुगुणा जोशी के घर पर आगजनी मामले में डीजीपी ए के जैन को भी मुलजिम बनाने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि सीबी-सीआईडी द्वारा 28 जुलाई 2014 को गृह विभाग को भेजे पत्र और 361 पृष्ठ के अंतिम प्रगति आख्या  से श्री जैन की आपराधिक संलिप्तता स्पष्ट हो जाती है. उन्होंने कहा कि जब श्री जैन रात 12.30 बजे किरायेदारी के मामले में ठाकुरगंज जा सकते हैं तो उनके जैसे तेजतर्रार अधिकारी के लिए यह संभव नहीं था कि यह घटना उनके संज्ञान में न आई हो. अतः अधीनस्थ पुलिस अफसरों पर कार्यवाही और मुख्य अभियुक्त को बचाने को गलत मानते हुए उन्होंने श्री जैन को अभियुक्त बनाते हुए तत्काल डीजीपी पद से हटाने की मांग की है.

आईपीएस अमिताभ ठाकुर बलात्कारी!

यूपी के भ्रष्ट नेताओं, भ्रष्ट मंत्रियों, भ्रष्ट अफसरों की आंख के किरकिरी बने जनपक्षधर आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को फंसाने की साजिशें जाने कब से चल रही हैं लेकिन अब इन साजिशों की गुणवत्ता थोड़ी उच्च होने लगी है. इनके मकान में चोरी कराने से लेकर इनकी पोस्टिंग रोकने, ट्रांसफर करते रहने, छुट्टी के आवेदन पर विचार न करने से लेकर हर कदम पर इनके लिए मुश्किलें व चुनौतियां खड़ी करने वाला उत्तर प्रदेश का भ्रष्ट सत्ता-सिस्टम अब इन्हें रेप के आरोपों में फंसाकर डिमोरलाइज करना चाहता है, नष्ट करना चाहता है. यह सब उन दिनों किया जा रहा है कि जिन दिनों अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर ने यूपी सरकार के एक भ्रष्ट मंत्री जो खनन का काम देखता है के अवैध खनन के कारनामों का लंबा चौड़ा कच्चा चिट्ठा मय प्रमाण लोकायुक्त को सौंप रखा है और पूरे प्रदेश में इसे लेकर हलचल मची हुई है.

उत्तराखंड डीजीपी की गड़बड़ियों की जांच यूपी के आईपीएस ने कैसे की?

उत्तराखंड के डीजीपी बीएस सिधू द्वारा देहरादून में खरीदे गए एक विवादित वन भूमि की यूपी के आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा अपनी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर के साथ वहां जा कर अपनी निजी हैसियत में जांच करना एक आदमी को इतना नागवार लगा कि उन्होंने इसकी वैधानिकता के सम्बन्ध में आरटीआई में कई सूचनाएँ मांग लीं.

नूतन ठाकुर के धरने की सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्यवाही शुरू की

हमारे घर हुई चोरी में भारी पुलिस निष्क्रियता के विरुद्ध मेरे द्वारा डीजीपी कार्यालय के धरने की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग यकायक तेजी में आ गया. 15 अक्टूबर की रात हुई इस चोरी के बाद किसी पुलिस वाले ने मामले की सुध नहीं ली थी. घटना के दिन से ही मामले के विवेचक छुट्टी पर चले गए थे. पांच लाख से ऊपर की चोरी होने के बावजूद मामले में एसआर केस दर्ज नहीं किया गया था और एसएसपी लखनऊ सहित किसी भी वरिष्ठ पुलिस अफसर ने नियमानुसार घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया था.

अपने पीआरओ पर इतना क्यों मेहरबान हैं डीजीपी सिद्धू

उत्तराखंड के भूमाफिया डीजीपी बीएस सिद्धू का एक और कारनामा सामने आया है। डीजीपी साहब के एक पीआरओ हैं उनको साल भर में पुलिस विभाग ने दो बार विशिष्ट सेवा सम्मान दे दिया। 26 जनवरी 2014 को पहली बार सराहनीय सेवा सम्मान चिन्ह दिया गया था, 15 अगस्त 2014 को उत्कृष्ट सेवा सम्मान भी दे दिया गया। नियम यह है कि एक बार पुरस्कार मिलने के बाद 6 साल बाद ही अगला पुरस्कार दिया जा सकता है। और उस पर तुर्रा यह कि सम्मान देने वाली कमेटी के अध्यक्ष डीजीपी खुद ही हैं। लेकिन डीजीपी कहते हैं कि सब कमेटी करती है मुझे तो याद ही नहीं कि किसको कितनी बार पुरस्कार मिला है।

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भ्रष्टाचारी के यार हजार, सदाचारी अकेले खाए मार… (संदर्भ- डीजीपी सिद्धू, आईपीएस अमिताभ और देहरादून पत्रकार प्रकरण)

Yashwant Singh : पत्रकार अगर भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की पैरवी न करें तो भला कैसे जूठन पाएंगे… मार्केट इकानामी ने मोरल वैल्यूज को धो-पोंछ-चाट कर रुपय्या को ही बप्पा मय्या बना डाला तो हर कोई नीति-नियम-नैतिकता छोड़कर दोनों हाथ से इसे उलीचने में जुटा है.. नेता, अफसर, कर्मचारी से लेकर अब तो जज तक रुपये की बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं.. पैसे ले देकर पोस्टिंग होती है, पैसे ले देकर गलत सही काम किए कराए जाते हैं और पैसे ले देकर मुकदमें और फैसले लिखे किए जाते हैं, पैसे ले देकर गड़बड़झाले-घोटाले दबा दिए जाते हैं… इस ‘अखिल भारतीय पैसा परिघटना’ से पत्रकार दूर कैसे रह सकता है.. और, जब मीडिया मालिक लगभग सारी मलाई चाट जा रहे हों तो बेचारे पत्रकार तो जूठन पर ही जीवन चलाएंगे न…

भ्रष्ट डीजीपी बीएस सिद्धू का साथ दे रही है उत्तराखंड सरकार

उत्तराखंड में एक जांबाज दरोगा ने डीजीपी के भ्रष्टाचार को न सिर्फ उजागर किया बल्कि डीजीपी बीएस सिद्धू के उत्पीड़न को झेलते हुए अनवरत आवाज उठा रहा है. इस जांबाज दरोगा का नाम निर्विकार सिंह है. इस दरोगा ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड सरकार भ्रष्ट डीजीपी का साथ दे रही है और भ्रष्टाचार उजागर करने वाले का उत्पीड़न करा रही है. पूरी खबर अमर उजाला में प्रकाशित हुई है.

उत्तराखंड में डीजीपी के पद पर एक भूमाफिया बैठा है!

उत्तराखंड में पुलिस विभाग इन दिनों एक बड़े संकट से गुजर रहा है. भ्रष्ट सत्ताधारियों की शह पर पुलिस विभाग में डीजीपी पद पर एक भूमाफिया को बिठा दिया गया है. बीएस सिद्धू नामक इस शख्स पर पुलिस विभाग के लोगों ने ही खुलकर आरोप लगाना शुरू कर दिया है. दरोगा निर्विकार सिंह ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि उनकी लड़ाई किसी डीजीपी से नहीं बल्कि इस पद पर बैठे एक भूमाफिया से है. डीजीपी पद की आड़ में यह बीएस सिद्धू नामक प्राणी खुलकर कानून विरोधी काम कर रहा है.