मालदार, असरदार और सरकार का वफादार रेवाड़ी का मीडिया

मीडिया वही, घोटाले वही। कुछ नहीं बदला। बदला तो सिर्फ हरियाणा के रेवाड़ी जिले का मीडिया है, जिसे अचानक कथित घोटाले उजागर करने का जैसे ठेका ले लिया है। ये कथित घोटाले हैं सरकारी जमीन और रेवाड़ी नगर परिषद से जुड़े हुए। मीडिया इन्हें खुद उजागर नहीं कर रहा है। भाजपा के जिला अध्यक्ष सतीश खोला बधाई के पात्र हैं, जो इस काम में लीड कर रहे हैं। इसके पीछे मकसद क्या है यह तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा, लेकिन यह साफ नजर आ रहा है कि मीडिया उनकी ‘नेकनियती’ में खुलकर साथ दे रहा है। 

प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिस्ट एसोसिएशन से 10 और इस्तीफे

अंबाला : पत्रकारों की यूनियन प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक जर्नलिस्ट एसोसिएशन की हरियाणा इकाई में अंतर कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। विगत 14 मार्च को यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप मसीह की तानाशाही से परेशान होकर यूनियन से 21 पत्रकारों ने इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद अब 2 मई को यूनियन से 10 और पत्रकारों ने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरीश चंद्र कुशवाहा, प्रदेशाध्यक्ष जसदीप सिंह बेदी व डीआईपीआरओ अंबाला को भेज दिया।

मजीठिया मुद्दे पर आरपार की लड़ाई शुरू, नोएडा में जुटे पत्रकार

नोएडा (उ.प्र.) : सेक्‍टर 22 स्थित बारातघर में गत दिनो इंडियन एक्‍सप्रेस, दैनिक भास्‍कर, दैनिक जागरण, राजस्‍थान पत्रिका, टाइम्‍स ऑफ इंडिया, दैनिक हिंदुस्‍तान आदि कई अखबारों की दिल्‍ली-एनसीआर यूनिटों के पत्रकार और कर्मचारी एकत्र हुए और मजीठिया वेतनमान के लिए आरपार की लड़ाई लड़ने का संकल्‍प लिया। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अवमानना के 51 मामलों के प्रतिनिधियों, कई यूनियनों के नेताओं और अधिवक्‍ताओं के एकमंच पर आने से जहां मजीठिया के लिए पत्रकारों और गैरपत्रकार कर्मचारियों की लड़ाई को बल मिला, वहीं लोगों का जुनून देखते ही बन रहा था। बारातघर परिसर में पत्रकारों के वाहन देखकर लोग यही कह रहे थे कि इतने वाहन इस परिसर में आज तक नहीं आए। 

नोएडा (उ.प्र.) के सेक्‍टर 22 में मजीठिया वेतनमान के लिए नए सिरे रणनीति बनाने में जुटे मीडिया योद्धा

यूपी में सपा को बाहर से कम, पार्टी के अंदर से ज्यादा चुनौती

उत्तर प्रदेश का सियासी पारा धीरे-धीरे चढ़ता जा रहा है। 2017 फतह करने के लिये तमाम सियासतदां एयरकंडिशन ड्राइंग रूम से निकल कर सड़क पर पसीना बहा रहे हैं। डिजिटल इंडिया और नये दौर की राजनीति में भले ही धरने-प्रदर्शनों का रंग फीका पड़ चुका हो, लेकिन आज भी इसकी बानगी दिख जाती है। पुराने, जिन्हें घाघ नेता की संज्ञा दी जाती है, आज भी अपनी सियासत चमकाने के लिये धरना-प्रदर्शन को अपना अचूक हथियार मानते हैं। 

मजीठिया मामले पर सवालिया अफवाह : क्या परमानंद पाण्डेय मालिकों के हाथ बिक गए!

मजीठिया वेज बोर्ड: अफवाहों से बचें, विशेष जांच टीम से हकीकत बयान करें : मेरे एक मित्र और वरिष्ठ पत्रकार उस दिन तो फोन कनेक्ट होते ही बिफर पड़े। अत्यंत विचलित और अधीर लहजे में बोल- ‘मैंने अपनी रिट पिटीशन के लिए वकील साहब को पे स्लिप और दूसरे जरूरी कागजात तो दे दिए थे। सुप्रीम कोर्ट में उसे जज साहब को दिखाया क्यों नहीं? दूसरे साथियों ने भी पे स्लिप समेत सारे कागजात-डाक्यूमेंट केस के साथ संलग्न करने के लिए दिए थे। उन्हें कोर्ट के समक्ष वकील साहब ने रखा क्यों नहीं? नहीं, नहीं वकील साहब मालिकों के हाथों बिक गए हैं। इसीलिए उन्होंने सारे डाक्यूमेंट्स कोर्ट में पेश नहीं किए। अगर उन्होंने ऐसा किया होता तो मालिकों के वकीलों की हिम्मत नहीं पड़ती यह कहने की कि हमारे अखबारों ने अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड दे दिया है। 28 अप्रैल दोपहर बाद से ही मुझे जितने भी फोन आए सबने यही ताना मारा है कि आपके वकील पांडेय साहब बिक गए हैं। मैं इतना परेशान, बेचैन हूं कि पूरी रात सो नहीं पाया। सवेरा होते ही मैंने आप को फोन मिला दिया ताकि आपसे पूछूं, आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मैंने आप पर भरोसा करके ही पांडेय साहब को अपना वकील करने को राजी हुआ था।’ 

India Tv Blunder : Rajat Sharma put very light questions to Baba Ramdev

New Delhi : The discussion between Baba Ramdev & Rajya Sabha MP K C Tyagi on 1st of May was remarkable. That was the top discussion issue in the media of the day in spite of the fact that the Parliament is in session. All the channels covered the issue on its Erie & given full chance to both opposing personalities to explain their views. Aajtak, Zee News, IBN7, ABP & other leading channels covered this event of debating that issue with the them on equal basis & giving equal weight age to both. 

Freedom of Media and Privileges of Parliament

New Delhi : A privilege motion has been moved by 60 MPs of 14 major parties in Rajya Sabha in a matter related to RSTV. This extraordinary step is bound to raise a debate on freedom of media and privileges of Parliament. We, in RSTV, have practiced the highest ethical and professional standards of unbiased journalism and find ourselves morally suited to address the debate. I thank you for patronizing the channel and being our partner in the endeavour.

वाराणसी में जनसंदेश की खबरें चुरा रहे जागरण और आईनेक्स्ट, शर्म उनको मगर नहीं आती

वाराणसी : जागरण और आईनेक्स्ट के मालिक एक हैं। बनारस में ये दोनों ही अखबार जनसंदेश टाइम्स में छपी खबरों की धड़ल्ले से चोरी कर रहे हैं। ये अखबार न सिर्फ खबरों की एंगिल चुरा रहे हैं, बल्कि तथ्य भी चोरी कर रहे हैं। 

दरोगा बोला, गैंग बना कर काम करते हैं आरटीआई एक्टिविस्ट, मुख्य सूचना आयुक्त से शिकायत

लखनऊ : आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने ओम प्रकाश तिवारी, चौकी इंचार्ज जवाहर भवन, थाना हजरतगंज द्वारा आरटीआई एक्टिविस्ट को पेशेवर और गिरोह बना कर आयोग पर दवाब बनाने के मनमाने आरोप लगाने के सम्बन्ध में मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी से शिकायत की है.

फर्रुखाबाद में पिटे दरोगा का केस एक नज़ीर बने- अमिताभ ठाकुर

लखनऊ : आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने एसपी फर्रुखाबाद और डीआईजी कानपुर को पत्र लिख कर पुलिस लाइन में पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सपा नेताओं द्वारा थानाध्यक्ष जहानगंज शैलेंद्र कुमार मिश्रा और पुलिसवालों को मारने-पीटने की घटना में एफआईआर दर्ज कराने पर धन्यवाद ज्ञापित किया है. साथ ही मांग की है कि चूँकि यह केस बनाम अज्ञात दर्ज हुआ है अतः उसे किसी भी दवाब में हल्का नहीं कर दिया जाए और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर सभी अभियुक्तों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्यवाही कराई जाए. 

कोलकाता में वयोवृद्ध पत्रकार अमिताभ चौधरी का निधन

कोलकाता : वयोवृद्ध पत्रकार अमिताभ चौधरी का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चौधरी के निधन पर शोक जताया। चौधरी बीमारियों से पीड़ित थे। 

अखंड प्रताप सिंह को अमर उजाला कानपुर का भी प्रभार

अमर उजाला प्रबंधन ने अपने वाराणसी यूनिट के हेड महाप्रबन्धक अखंड प्रताप सिंह को कानपुर का भी प्रभार दे दिया है। श्री सिंह अभी अमर उजाला वाराणसी और गोरखपुर यूनिट के हेड हैं। वह अब 16 मई से कानपुर बैठेंगे और वहीं से इन तीनों यूनिटों का कार्यभार संभालेंगे।

मीडिया पर हमले के खिलाफ लखनऊ में पत्रकारों का प्रदर्शन, एसएसपी हटाए गए

उत्तर प्रदेश के खननं मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति द्वारा लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ  मीडिया पर हमला किये जाने की घटना को लेकर आज लखनऊ के सैकड़ो पत्रकारों ने हजरत गंज स्थित गांधी प्रतिमा पर एकत्र होकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। पत्रकारों ने साधना न्यूज़ चैनल के रिपोर्टरों और छायाकारों से मारपीट, उनका कैमरा तोड़े जाने के विरोध में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम अपना ज्ञापन  सिटी मजिस्ट्रेट को सौपते हुए प्रजापति की  बरखास्तगी की मांग की। इस बीच पता चला है कि हमलावरों पर तुरंत एफआईआर दर्ज न करने पर लखनऊ के एसएसपी को हटा दिया गया है।  
 
लखनऊ में मीडिया पर हमले के खिलाफ प्रदर्शन करते पत्रकार

जल्द ही श्री न्यूज़ का शटरडाउन, आईटी हेड ने दिया इस्तीफा

पहले 4रियल न्यूज़, फिर जिया न्यूज़, उसके बाद भास्कर न्यूज़ और अब श्री न्यूज का शटरडाउन होने की कगार पर है. अल्वीना क़ासिम द्वारा संचालित इस चैनल की स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि यहां के मुलाज़िमों को पिछले चार महीने से बग़ैर सैलरी के गुज़ारा करना पड़ रहा है.

सहारा का काला धन सफेद कर रहा था एचसीबीएल, मनी लांड्रिंग में शामिल होने से बैंक पर पाबंदी

लखनऊ : तमाम लोगों के मन में पिछले दस दिनों से यह सवाल घूम रहा था कि आखिर हिन्दुस्तान को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने पाबंदी लगाई क्यों? इस सवाल का स्पष्ट जवाब न तो एचसीबीएल दे रहा है, न रिजर्व बैंक ने ही कोई खुलासा किया। लेकिन अब जवाब मिल गया है। कैनविज टाइम्स के हाथ लगे कुछ दस्तावेजों के मुताबिक एचसीबीएल पर सहारा समूह के साथ मिलकर उसके लिए काला धन सफेद करने के कारण पाबंदिया लगाई गई हैं। यही नहीं, रिजर्व बैंक ने बकाएदा नोटिस देकर एचसीबीएल का बैंकिंग लाइसेंस रद किए जाने की कार्यवाही भी शुरू कर दी है। 

अगले तीन माह : मीडियाकर्मियों से पेपर्स पर साइन कराया जाएगा, श्रम विभाग में पक्ष में रिपोर्ट देने को धमकाया जाएगा!

जिस मजीठिया वेतन आयोग के 28 अप्रैल की सुनवाई के बाद लागू हो जाने का सपना देश के हजारों प्रिंट मीडिया के साथी देख रहे थे, वह उन सात सौ साथियों की वजह से अगले तीन महीने के लिए लटक गया है, जिन्होंने लिखकर दे दिया है कि हमें मजीठिया का लाभ नहीं चाहिये, हम अपनी कंपनी द्वारा दिये जा रहे वेतन सुविधाओं से संतुष्ट हैं. अब तीन महीने के दौरान राज्य के श्रम आयोग में एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति होनी है और उसे इस बात की जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को पेश करनी है, कि अखबारों ने अपने यहां मजीठिया आयोग की सिफारिशें लागू की हैं या नहीं.

दूरदर्शन के किसान चैनल में एडवाइजर (प्रोग्राम एंड प्रोडक्शन) बने आलोक रंजन

वरिष्ठ पत्रकार और पत्रकारिता जगत में 25 साल के अनुभव को देखते हुए आलोक रंजन को दूरदर्शन के किसान चैनल में एडवाइजर (प्रोग्राम एंड प्रोडक्शन) के तौर पर नियुक्त किया गया है। एक मई यानी शुक्रवार से उन्होंने अपना कार्यभार भी संभाल लिया है। 90 के दशक में आलोक रंजन ने लोकमत में सब एडिटर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। उसके बाद दूरदर्शन (फर्स्ट एडिशन, मेट्रो न्यूज) से जुड़े रहे, अलग-अलग कार्यकर्मों के जरिए।

नसीबलाल, पेट्रोल मूल्यवृद्धि, विकसवा, काशी, संघ, शक्ति प्रदर्शन और जॉम (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : पिछले दिनों मैं बनारस गया हुआ था तो दिल्ली वापसी के वास्ते ट्रेन पकड़ने के लिए एक मित्र की बाइक पर सवार होकर स्टेशन की तरफ जा रहा था. भेलूपुर और रथयात्रा चौराहे के बीच पहुंचा तो देखा कि अचानक सड़क पर जाम लगने लगा है. थोड़ा आगे बढ़ने पर पता चला कि तंग गलियों-पतली सड़कों के लिए कुख्यात बनारस की इस मुख्य सड़क के दाहिने हिस्से पर संघियों का कब्जा हो चुका था. यूं लंबा रेला था. लाठी कंधे पर रखे संघी कार्यकर्ता पथ संचलन या पद संचलन, जो भी होता हो, कर रहे थे. लंबी लाइन और यूं सड़क कब्जा कर शक्ति प्रदर्शन करते देखकर अचानक मेरे मुंह से निकल गया- वाह… क्या बात है, ग़ज़ब. अगर दिल्ली या किसी शहर में किसान मजूर अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन करने आते हैं और सड़क जाम हो जाता है तो यही संघी कहते फिरते हैं कि ऐसे जनजीवन ठप कर देना ठीक नहीं होता, कितनी परेशानी होती है सबको, कोई बीमार व्यक्ति जाम में फंस जाएगा तो क्या करेगा.. ब्ला ब्ला ब्ला.

यशवंत सिंह

दृष्टिबाधित नन्हा श्रीरामानुजन टीवी पर हर हफ्ते पेश करेगा स्पेशल न्यूज बुलेटिन

मात्र 11 साल के नन्हे श्रीरामानुजन को तमिल न्यूज चैनल लोटस न्यूज टुडे ने न्यूज रीडर बनने का मौका दिया है।

 

जी मीडिया के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने दी केजरीवाल को नसीहत

जी मीडिया के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है, ‘सीएम अरविंद केजरीवाल को लगता है कि मीडिया किसी को भी बनाऔर बर्बाद कर सकता है पर ये गलत है, मैं उनसे ये रिक्वेस्ट करता हूं कि वह न सिर्फ जी बल्कि किसी भी मीडिया से अपने दुश्मन जैसा बर्ताव नहीं करें.’

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पत्रकार कल्याण आयोग के गठन की मांग उठी

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संगठन के पदाधिकारियों ने एक मई मजदूर दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय पत्रकार कल्याण आयोग का मुद्दा उठाया है। शुक्रवार को इस संगठन की ओर से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर के प्रतिनिधि, एसडीएम अशोक कम्ठान को सौंपा गया। इसमें आयोग के अलावा कुछ अन्य मांगें भी रखी गईं। 

आईआईएमसी के लिए आखिरी डेट 8 मई

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन ने जर्नलिज्म की पढ़ाई के लिए हाल ही में आवेदन मंगवाए हैं। आईआईएमसी के विभिन्न पीजी डिप्लोमा कोर्सेज में आवेदन की अंतिम तिथि 8 मई 2015 निर्धारित की गई है। प्रिंट, टीवी, रेडियो समेत विभिन्न संचार माध्यमों से जुड़कर जर्नलिज्म करने या एड एजेंसीज, कॉरपोरेट कंपनियों व एनजीओज  से  जुड़कर एडवर्टाइजमेंट या पब्लिक रिलेशन के फील्ड में कॅरियर बनाने के इच्छुक लोगों अब इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन से पढ़ाई कर सकते हैं। 

न्यूज चैनल के संवाद-सूत्र ने हड़पी आदिवासी बुजुर्ग की जमीन

छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद भी धरमजयगढ़ राजस्व विभाग व जिला प्रशासन का सुस्त रवैया आदिवासी परिवार के लिए परेशानी कारण बना हुआ है। बताया गया है कि ईटीवी न्यूज के इनफार्मर ने एक आदिवासी परिवार की जमीन हड़प ली है और पीड़ित दर ब दर न्याय की गुहार लगाता डोल रहा है। 

लालची-लापरवाह चिकित्सा माफिया ने काट डाला युवक का पैर

वाराणसी : ओंकार नाथ तिवारी, उम्र 16 साल, सपना था सेना में जाकर देशसेवा का, पर अब शायद कभी उसका ये सपना पूरा नहीं होगा। कारण चिकित्सा के नाम पर धन उगाही का केन्द्र बने नर्सिंग होम और इस काम में उनके सहयोगी बने लोभी और लापरवाह चिकित्सकों के चलते वो अपना दहीना पैर खो चुका है। पैर ही क्यों, चिकित्सकीय लापरवाही के चलते उसकी किडनी और लीवर भी संक्रमित हो चले हैं। चिकित्सकीय लापरवाही का ये नमूना ही है कि 16 साल के घायल इस नौजवान को इलाज के नाम पर नर्सिंग होम के अन्दर 12 घंटे ऐसे ही रख कर छोड़ दिया गया। इस दौरान बड़ा भाई चक्कर काटता रहा लेकिन किसी ने न तो कुछ सुना और न कुछ किया। अब हाल ये है कि ओंकार बनारस में कटे पैर और पस्त हाल के साथ जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। मां के बहते आंसू और बड़े भाई का प्रयास ही जिदंगी की इस जंग में उसके साथ है।

मजीठिया : राजस्थान में भी बजा बिगुल, राज्यपाल-मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन

पहली मई मज़दूर दिवस पर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू कराने के लिए राजस्थान ने बिगुल बजा दिया है। शुक्रवार को जयपुर में नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट (इंडिया ) और जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ़ राजस्थान (जार ) ने राज्यपाल कल्याण सिंह और मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे को ज्ञापन दिया।

ओछी हरकतों पर उतरा जयपुर भास्कर प्रबंधन

श्रम विभाग में सुनवाई के दौरान शुक्रवार को जयपुर भास्कर प्रबंधन के कर्मचारी ओछी हरकतों पर उत्तर आए। भास्कर के पत्रकारों ने सीटू के सचिव जयपुर भास्कर के सीओओ संजय शर्मा ओर एच आर मैनेजर वंदना सिन्हा के खिलाफ प्रताड़ना और दुर्भावना से कार्रवाई करने पर केस कर रखा है। इस केस में श्रम विभाग ने सीओओ संजय शर्मा ओर एच आर मैनेजर वंदना सिन्हा को नोटिस जारी कर रखे है जिसकी शुक्रवार को तारीख थी। 

डराओ मत, उसे गुस्सा आ रहा है, वह बिगड़ा तो सब बिगड़ जाएगा

मजीठिया वेतनमान लागू करने के मसले पर कारपोरेट मीडिया ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक की अवमानना करते हुए जिस तरह पत्रकारों के पेट पर लात मारा है, उससे लावा अंदर ही अंदर खदक रहा है। मीडिया कर्मियों की खामोशी तूफान से पहले के सन्नाटे जैसी है। यह पढ़ा-लिखा वर्ग है। सब समझ रहा है। जान रहा है कि मजीठिया मामले की पैरोकारी कर रहे अपने उन मददगारों से उसकी भेंट-मुलाकात तो दूर, उनसे बातचीत भी उसके जुर्म में शुमार हो सकती है, जो उसके हितों की हिफाजत के लिए देश की सर्वोच्च न्याय व्यवस्था की शरण में हैं। 

बसपा काल के भ्रष्टाचार पर सपा राज में चुप्पी

सपा-बसपा नेता भले ही जनता के बीच अपने आप को एक-दूसरे का कट्टर दुश्मन दिखाते रहते हों लेकिन लगता तो यही है कि अंदर खाने दोनों मिले हुए हैं,जिस तरह से बसपा शासनकाल के तमाम भ्रष्ट मंत्रियों और अधिकारियों के प्रति अखिलेश सरकार लचीला रवैया अख्तियार किये हुए है।वह संदेह पैदा करता है।सपा कोे  सत्ता हासिल किये तीन वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन उसने अभी तक पूर्ववर्ती बसपा सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ जांच की इजाजत लोकायुक्त को नहीं दी है। आधा दर्जन से ज्यादा पूर्व मंत्रियों और लगभग दो दर्जन लोकसेवकों के खिलाफ लोकायुक्त की विशेष जांच रिपोर्टों पर कार्रवाई न होने से सीएम अखिलेश पर उंगली उठने लगी हैं।

गैस एजेन्सी के मालिक ने किया पत्रकार पर हमला, जान-माल की धमकी

देवरिया : एक समाचार के प्रकाशन से नाराज होकर देवरिया गैस एजेन्सी के मालिक बालकृष्ण सिंह उर्फ रामू सिंह ने अपने तथाकथित रिश्तेदार रीतेश मोहन श्रीवास्तव तथा अन्य गुण्डों से पत्रकार ओपी श्रीवास्तव पर कचहरी चैराहे के पास हमला करा दिया। जान माल की धमकी दी गई। पीड़िता पत्रकार ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों से कर दी है।

खंडवा में पत्रिका के खिलाफ एकजुट पत्रकारों के संघर्ष का बिगुल बजा, सीएम के नाम एसडीएम को ज्ञापन

खंडवा में मई दिवस पर एसडीएम को मजीठिया वेतनमान से संबंधित ज्ञापन देते पत्रकार

खंडवा : पत्रिका अखबार के जो कर्ता-धर्ता अपने आप को जनता का तथाकथित हितैषी बताकर नई-नई मुहिम चलवाते हैं और मुद्दे उठवाते हैं उसकी सच्चाई आप भी जान लीजिए। पत्रकारों के हक में लागू मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक प्रमुख समाचारपत्रों को एक निर्धारित राशि से वेतनमान देने के आदेश दिए गए हैं। इसके खिलाफ पत्रिका सहित कुछ अखबार वाले कोर्ट गए। बाद में कोर्ट ने पत्रकारों के हक में फैसला दे दिया। फिर क्या था। पत्रिका अखबार ने अपनी मनमानी शुरू कर दी। पत्रकारों से एक फॉर्मेट पर साइन करवाए गए कि हमें मजीठिया के मुताबिक सैलरी नहीं चाहिए। जिन पत्रकारों ने फॉर्मेट पर हस्ताक्षर कर दिए, उन्हें तो बख्श दिया बाकी को एन-केन-प्रकारेण प्रताड़ित कर बाहर करने की साजिशें रची गईं। यहां-वहां ट्रांसफर किए गए।

राजीव कटारा को ‘गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार’

केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा ने ‘कादम्बिनी’ के एसोशिएट एडिटर राजीव कटारा को ‘गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। 

इस तरह से होंगे लेबर विभाग में शिकायत के फॉरमेट और आरटीआई के फॉरमेट

मजीठिया वेज बोर्ड पाने की जंग अब कायदे से शुरू हो चुकी है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सभी प्रदेशों के श्रम विभागों से तीन माह में जो स्टेट्स रिपोर्ट तलब की हैं, उसे अपने पक्ष में करने के लिए गेंद अब कर्मचारियों के पाले में है। लिहाजा अब अपने-अपने राज्य के श्रम विभाग को हरकत में लाने का समय आ गया है। इसके लिए सबसे पहले तो संबंधित यूनिटों के कर्मचारियों को अपने श्रम निरीक्षक या श्रम अधिकारी को अपने संस्था में मजीठिया वेज बोर्ड न दिए जाने व माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सात फरवरी 2014 को आए निर्णय को लागू न किए जाने को लेकर शिकायत पत्र देना होगा। इसी के आधार पर श्रम निरीक्षक संबंधित संस्थान के संबंध में जांच पड़ताल शुरू कर पाएगा। इसके अलावा आरटीआई को भी हथियार बनाना पड़ेगा। इसके जरिये राज्य श्रम विभाग के निदेशालय से यह जानकारी मांगी जा सकती है कि विभाग ने अपने राज्य में प्रकाशित हो रहे समाचार पत्रों व यहां चल रही न्यूज एजेंसियों में मजीठिया वेज बोर्ड लागू करवाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। साथ ही विभाग के रिकार्ड के अनुसार कौन-कौन सा समाचारपत्र या न्यूज एजेंसी वेज बोर्ड के तहत एरियर व वेतन का भूगतान कर चुकी है। कुछ साथियों ने इसके लिए आवेदन के फारमेट पर असमंजस है। लिहाजा मैं इस संबंध में अपने अनुभव के आधार पर निम्म जानकारियां पहले एकत्रित करने की सलाह दूंगा। 

प्रिंट मीडिया की मजबूती के लिए नुकसानदेह है प्रकाशकों का रवैया

प्रकाशक अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी क्यों मार रहे हैं? इस वर्ष के आरंभ में जब इंडियन रीडरशिप सर्वे अथवा आईआरएस 2014 के आंकड़े जारी किए गए तब से प्रकाशक एक ऐसे अभियान पर हैं जो सालाना रस्म की शक्ल अख्तियार कर चुका है। टाइम्स ऑफ इंडिया तथा अन्य अखबारों ने बड़े-बड़े नोटिस प्रकाशित करके आईआरएस का मखौल उड़ाया। आईआरएस सर्वेक्षण को मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल अथवा एमआरयूसी, जारी करती है जो प्रकाशकों, विज्ञापनदाताओं एवं एजेंसियों की संस्था है। द हिंदू एवं दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों ने इस कवायद से बाहर रहने का फैसला किया। अन्य ने अपना उपभोक्ता शुल्क चुकाने से ही इनकार कर दिया।

तीन महीने में जांच कर बताएं, मजीठिया लागू हुआ या नहीं !

वो बेदर्दी से सर काटें औऱ मैं कहूं उनसे, हुजूर आहिस्ता-आहिस्ता : यह खबर प्रिंट मीडिया से जुड़े तमाम पत्रकारों के लिए है जो पांच सौ, हजार, पांच हजार औऱ दस हजार की सैलरी में अपने जीवन के महत्वपूर्ण साल उन अखबारों के लिए खर्च कर रहे हैं, जिन्हें उनकी एक रत्ती परवाह नहीं. हम ऐसे पत्रकार हैं जो अपनी किस्मत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे की रिपोर्ट तक अपने अखबार में छाप नहीं सकते. न ही इलेक्ट्रानिक मीडिया के हमारे साथी हमारी इन खबरों को सामने लाने की हैसियत में हैं. इसके अलावा यह खबर उन तमाम लोगों के लिए भी है, जो समझते हैं कि हर मीडियाकर्मी लाखों में खेल रहा है और इतना पावरफुल है कि दुनिया बदल सकता है… उन साथियों के लिए तो है ही, जिनका बयान है… वो बेदर्दी से सर काटें औऱ मैं कहूं उनसे हुजूर आहिस्ता-आहिस्ता जनाब आहिस्ता। यह खबर 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया आयोग के प्रस्तावों को लागू नहीं किये जाने के विरोध में हम पत्रकारों द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई की है। इसे यह जानने के लिए भी पढ़ा जा सकता है कि एक ओऱ जहां राहुल गांधी किसानों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, उनकी पार्टी के कपिल सिब्बल, सलमान खुरशीद, अभिषेक मनु सिंघवी जैसे बड़े-बड़े नेता अखबार कर्मियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अखबार मालिकों की पैरवी कर रहे हैं। यह खबर आइएफडब्लूजे के सचिव राम यादव ने लिखी है औऱ मैंने उसका हिंदी अनुवाद किया है। 

अनूप बाजपेयी बने अमर उजाला हल्द्वानी के संपादक, देहरादून से दो का तबादला

उत्तराखंड से खबर है कि अमर उजाला की हल्द्वानी यूनिट की कमान अनूप बाजपेयी के हाथों में सौंप दी गई है। इसके पहले अनूप बाजपेयी अमर उजाला की देहरादून यूनिट में बतौर स्टेट ब्यूरो हेड कार्यरत थे।

वरिष्ठ पत्रकार हरीश खरे बने द ट्रिब्यून के एडिटर-इन-चीफ

वरिष्ठ पत्रकार हरीश खरे द ट्रिब्यून के नए एडिटर-इन-चीफ होंगे। वह अखबार के निवर्तमान एडिटर-इन-चीफ राज चेंगप्पा का स्थान लेंगे। चेंगप्पा इंडिया टुडे समूह के ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर का पदभार संभालने वाले हैं। 

अपनी लगातार खराब होती टीआरपी से परेशान इंडिया टीवी ने स्ट्रिंगरों को तंग करना शुरू किया

इंडिया टीवी की टीआरपी पिछले लगभग एक वर्ष से गिरती ही जा रही है. तमाम कोशिशों के बावजूद भी चैनल है की चढ़ाई चढ़ ही नहीं पा रहा है. ख़बरों के मामले में भी चैनल के पास लगातार सूखा ही पड़ता जा रहा है, जिसकी वजह से चैनल ने अपनी झुंझलाहट निकालते हुए स्ट्रिंगरों का पैसा मारना शुरू कर दिया है. लगातार स्ट्रिंगरों के बिल काटे जा रहे हैं. मेहनताने के नाम पर उन्हें सिर्फ अठन्नी चवन्नी थमाई जा रही है. अब इस चैनल के बुरे दिन आये हैं या कुछ और मामला है, मगर इंडिया टीवी में सब ठीक नहीं चल रहा है, यह तय है.

इंडिया टीवी को पांच नंबर का चैनल बताने पर भड़क गए अजीत अंजुम, निकाली जमकर भड़ास

Ajit Anjum : टीवी रेटिंग को लेकर भ्रम फैलाने वालों के लिए जरुरी सूचना… पहले डाटा देखें… समझें… फिर विश्लेषण करें…. BARC (नया रेटिंग सिस्टम) का डाटा पहली बार आ गया है और तकनीकी खराबी की वजह से पहले तीन दिन और कुछ घंटों के लिए चौथे दिन भी इंडिया टीवी की रेटिंग दर्ज नहीं हो सकी. नतीजा ये हुआ कि तीन दिन तक रेटिंग में इंडिया टीवी जीरो दिख रहा है और चौथे दिन 6.7 फीसदी, जबकि बाकी तीन दिन की रेटिंग में दो दिन इंडिया टीवी नंबर वन भी है, यानी आजतक और एबीपी न्यूज से आगे. कुछ चैनल दावा कर सकते हैं कि इंडिया टीवी पांचवें नंबर पर पहुंच गया है, जो कि गलत और भ्रम फैलाने वाला है. मैं यहां सात दिन के चैनल शेयर का डाटा पोस्ट कर रहा हूं ताकि सनद रहे. शनिवार से शुक्रवार तक का डेली डाटा देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं… बाकी तो जो है सो है ही है…

INDIA TV DATA IS FOR FOUR DAYS (DUE TO SOME WATER MARKING PROBLEM) OTHER CHANNELS DATA FOR ALL 7 DAYS

Wednesday, April 29, 2015 7:51 PM

Source: BARC, Wk 16, 4+, Daywise, Time Band: 0600Hrs to 2359Hrs

न्यूज24 से अरुण पांडेय ने इस्तीफा दिया, दो अन्य के भी इंडिया टीवी जाने के चर्चे

खबर है कि अजीत अंजुम News24 चैनल से अपने खास लोगों को इंडिया टीवी ले जा रहे हैं. इंडिया टीवी की लगातार गिरती टीआरपी के बाद चैनल प्रबंधन दूसरे चैनलों के योग्य लोगों को लाने के लिए अजीत अंजुम को इशारा कर चुका है. इसी क्रम में स्टाफ तोड़ने के लिए आजतक समेत न्यूज24 तक पर अजीत अंजुम धावा बोल रहे हैं. आजतक से समीप राजगुरु को तोड़ने के बाद अंजुम ने New24 चैनल के Assignment Head अरूण पांडे को भी तोड़ लिया है.

लखनऊ में साधना न्यूज के लाइव शो पर हमले के बाद की कुछ तस्वीरें

लखनऊ में साधना न्यूज के लाइव शो पर हमले के बाद की कुछ तस्वीरें यहां पेश हैं. मंत्री गायत्री प्रजापति के गुर्गों ने इस लाइव प्रसारण के दौरान हमला किया और पत्रकारों को पीटने के साथ साथ कैमरा ओवी वैन आदि तोड़ डाले. पूरे मामले में सरकार चुप्पी साधे हुए है. यूपी में मीडियावालों पर जगह जगह लगातार हमले हो रहे हैं. ये हमले ज्यादातर सत्ताधारी नेताओं मंत्रियों अफसरों के संरक्षण में हो रहे हैं इसलिए इनके खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हो रही है.

लाइव शो पर हमला : साधना न्यूज के इन मीडियाकर्मियों की हुई लखनऊ में पिटाई

भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे गायत्री प्रसाद प्रजापति की लोकायुक्त जांच चल रही है. इसी सिलसिले में दोपहर करीब साढ़े तीन बजे साधना न्यूज चैनल की टीम लाइव कवरेज करने उनके आवास पर गई थी. टीम में दिल्ली से आये पत्रकार अमित सिंह के साथ ही राजधानी के अमरेंद्र, अकील सिद्दीकी, कैमरामैन रोहित श्रीवास्तव और तकनीशियन धनंजय शामिल थे. मंत्री के गेट के सामने कैमरा लगाकर टीम लाइव कवरेज कर रही थी तभी मंत्री का करीबी विकास वर्मा बाहर आ गया. नजारा देखकर वह भीतर चला गया. कुछ देर बाद वह फिर बाहर आया और कैमरे हटाने को कहा.

लखनऊ में करप्शन पर लाइव दिखा रहे साधना न्यूज चैनल के पत्रकारों और ओवी वैन पर करप्ट मंत्री के गुर्गों ने किया हमला

उत्तर प्रदेश में जंगल राज तो लंबे समय से कायम है लेकिन अब जंगल राज कायम करने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि राजधानी लखनऊ में पत्रकारों पर हमले किए जा रहे हैं, वह भी तब जब लाइव शो चल रहा हो. यूपी सरकार में भ्रष्टाचार के आरोपी कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के गुर्गों ने गुरुवार को कवरेज के दौरान साधना न्यूज चैनल के पत्रकारों पर जानलेवा हमला कर दिया और कैमरे समेत ओवी वैन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया.

भागलपुर लांचिंग : भास्कर प्रबंधन की नज़र प्रभात खबर देवघर और भागलपुर यूनिटों पर!

भास्कर प्रबंधन बिहार के भागलपुर में दैनिक भास्कर अखबार की लॉन्चिंग के साथ-साथ बड़ा गेम खेलने के लिए तैयार है. भागलपुर के साथ-साथ प्रभात खबर की देवघर यूनिट के पुराने लोगो को तोड़ने के लिए भास्कर रांची में संपादक रहे एक व्यक्ति को कुछ दिनों पहले देवघर भेजा गया था.

अपने गिरेबान में झांकने की बजाय सुभाष चंद्रा ने केजरीवाल के खिलाफ निकाली भड़ास

सुपारी पत्रकारिता को संगठित तरीके से अंजाम देने वाले सुभाष चंद्रा बजाय अपनी गिरेबान में झांकने के, दूसरों को ही समझाने पर उतारू हो जाते हैं. अबकी उनके निशाने पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल हैं. जी मीडिया पर बार-बार आम आदमी पार्टी को बदनाम करने का आरोप लगाने वाले दिल्ली के सीएम केजरीवाल के खिलाफ भड़ास निकालते हुए जी मीडिया के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ट्विट कर लिखा है, ‘सीएम केजरीवाल को लगता है कि मीडिया किसी को भी बना और बर्बाद कर सकता है पर ये गलत है, मैं उनसे ये रिक्वेस्ट करता हूं कि वह न सिर्फ जी बल्कि किसी भी मीडिया से अपने दुश्मन जैसा बर्ताव नहीं करें.

पत्रकारिता को ताक पर रखने वाले ‘नंबर वन’ अखबार का दहन

तस्वीरों में जो प्रतियां फूंकी जा रही हैं ये देश के एक बड़े अखबार की हैं। उस अखबार की, जो नैतिकता के मापदंडों पर खुद को सबसे खरा और श्रेष्ठ होने की बात करता है, लेकिन प्रतियां फूंकने की वजह अखबार में बढ़ती रिश्वतखोरी और उगाही की प्रवृत्ति है। 

उनको इस तरह नहीं जाना चाहिए था, जीवनभर याद रहेंगे

मरकर आदमी कहां चला जाता है…पवन बाबू। यह कहते-कहते सुनील साह की आंखें जैसे शून्य से ही किसी जवाब के आने का इंतजार करती लग रही थीं। मैं बहुत दिनों बाद उनसे मिल पाया था। हल्द्वानी जज फार्म उनके घर पर। उनके बिस्तर पर तिब्बत, लामा और बौद्ध दर्शन की कुछ किताबें बिखरी पड़ीं थीं और समाने ढेरों अखबार। अखबार में एक खबर चमक रही थी- खुशवंत सिंह नहीं रहे। 

अपनी गलती छिपाने के लिए बीएचयू प्रशासन ने पत्रकारों से की बदतमीजी, स्टिंग करने वाले डॉक्टर को किया नजरबन्द

वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. ओमशंकर ने स्टिंग सीडी मीडिया को देने के लिए गुरूवार की दोपहर 12 बजे अपने आवास पर प्रेसवार्ता बुलाई लेकिन अपनी गलती छिपाने के लिए बीएचयू प्रशासन ने मीडिया से मिलने नहीं दिया। प्रेसवार्ता की सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन को मिलते ही हंगामा मच गया। सच्चाई छिपाने के लिए विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों सहित आलाधिकारियों ने उनके आवास पर पहुंचकर डॉ. ओमशंकर को घर में अंदर ही नजरबन्द कर दिया। जब पत्रकार उनके आवास पर अंदर जाने लगे तो बीएचयू सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों ने उनसे धक्कामुक्की की। 

पत्रिकाएं भी नाटकों की तरह रेंत का घरौदाः लखनऊ से शुरू हुई ‘कला स्रोत’

लखनऊ : किसी भी नगर में एेसे अवसर कम ही होते हैं जब विभिन्न कला अभिव्यक्तियों के प्रसिद्ध व्यक्तित्व किसी एक समारोह में शरीक हों। यही कारण था कि लखनऊ से पत्रकार और कला समीक्षक आलोक पराड़कर के सम्पादन में संगीत, रंगमंच और कला पर आधारित त्रैमासिक पत्रिका ‘कला स्रोत’ के लोकार्पण के समारोह में जब कला, संगीत, रंगमंच और साहित्य की प्रतिभाएं एक सभागार में जुटीं तो एक-दूसरे से बातचीत में उन्हें यह कहते भी सुना गया कि आपका नाम और काम तो काफी सुना है लेकिन भेंट आज पहली बार हो रही है। यही कारण भी था कि पूरे समारोह में कलाओं के बीच संवाद और अन्तरसम्बन्ध की चर्चा होती रही और यह शिकायत भी खूब हुई कि कलाकार दूसरी कलाओं में रुचि नहीं लेते।